Devi Lok: Grand on paper, ‘zero’ on the ground! Land mafia seizes Nalkheda project
संवाददाता: चंदा कुशवाह
नलखेड़ा। माँ बगलामुखी की नगरी में “देवी लोक” बनाने का सपना कुछ ऐसा है, जैसे चाय का ऑर्डर दे दिया जाए… और केतली अभी तक चूल्हे पर ही न चढ़ी हो। प्रस्ताव पास हुए, डिज़ाइन बनकर तैयार हो गया, लेकिन ज़मीन पर काम? वो अभी भी “आने वाला है” की स्थायी स्थिति में अटका हुआ है।
कागज़ों में देवी लोक इतना सुंदर बताया जा रहा है कि मानो इंद्रलोक भी थोड़ा असहज हो जाए, लेकिन नलखेड़ा की ज़मीन पर फिलहाल सिर्फ़ खालीपन, झाड़ियाँ और… भूमाफियाओं की हलचल दिखाई दे रही है।
- भूमि पर ‘देवी लोक’ नहीं, ‘कब्ज़ा लोक’ बन रहा है
जहां एक ओर श्रद्धालु देवी लोक का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भूमाफिया बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के “काम” शुरू कर चुके हैं। मंदिर की आरक्षित भूमि पर रोज़ थोड़ा-थोड़ा कब्ज़ा बढ़ रहा है। कहीं बाड़ लग रही है, कहीं ईंटें जम रही हैं… और प्रशासन शायद यह सब देखने के लिए किसी विशेष “मुहूर्त” का इंतजार कर रहा है।
स्थानीय लोग कहते हैं कि अगर यही रफ्तार रही, तो देवी लोक बनने से पहले ही पूरी जमीन “लोकल” हो जाएगी।
- बारिश आने वाली है, फाइलें अभी भी सूखी हैं
अब मानसून आने में करीब दो महीने बचे हैं। यानी अगर अभी काम शुरू नहीं हुआ, तो बारिश के बाद फिर वही पुराना राग बजेगा — “मौसम अनुकूल नहीं है”। सवाल ये है कि आखिर काम शुरू करने के लिए कौन सा मौसम चाहिए? या फिर ये प्रोजेक्ट किसी ऐसे ग्रह पर बनेगा जहां बारिश होती ही नहीं?
देरी का असली कारण: फाइलें भारी या जेबें?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर देरी हो क्यों रही है। क्या फाइलें इतनी भारी हो गई हैं कि उठ नहीं पा रहीं? या फिर मामला कहीं “ऊपर” तक अटका हुआ है, जहां बिना किसी विशेष “ग्रीसिंग” के पहिए घूमते नहीं?
स्थानीय चर्चाओं में यह भी सुनने को मिल रहा है कि जब तक कुछ “सेटिंग” नहीं होगी, तब तक देवी लोक भी शायद “ध्यान” की मुद्रा में ही रहेगा।
- जनता का सवाल: देवी लोक बनेगा या सिर्फ़ बोलेगा?
नलखेड़ा की जनता अब सीधा सवाल पूछ रही है — क्या देवी लोक सिर्फ़ घोषणाओं का शोपीस बनकर रह जाएगा? क्या भूमाफियाओं पर कार्रवाई होगी या वे ही इस प्रोजेक्ट के असली “डेवलपर” बन जाएंगे?
अगर जल्द ही प्रशासन ने नींद नहीं खोली, तो आने वाले समय में यह परियोजना “देवी लोक” कम और “देरी लोक” ज्यादा बन जाएगी।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर अगली बार भी जनता को सिर्फ़ नई तारीख और नई उम्मीद ही दी जाएगी।









