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मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे ‘आनंद के आयाम – राष्ट्रीय संगोष्ठी’ का शुभारंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्य आनंद संस्थान, आनंद विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस के अवसर पर आयोजित ‘आनंद के आयाम – राष्ट्रीय संगोष्ठी’ का शुभारंभ करेंगे। संगोष्ठी स्वर्ण जयंती सभागार, आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंध अकादमी, भोपाल में 20 मार्च को सुबह 10 बजे से प्रारंभ होगी। इसमें हार्टफुलनेस संस्थान, हैदराबाद के  कमलेश डी. पटेल (दाजी) मुख्य संबोधन देंगे। संगोष्ठी में आनंद और प्रसन्नता के विविध आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। संगोष्ठी में ‘आनंद’ के विषय-विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि और समाजसेवी शामिल होंगे। राज्य आनंद संस्थान की स्थापना वर्ष 2016 में मध्यप्रदेश शासन द्वारा नागरिकों के बीच आंतरिक कल्याण, भावनात्मक दृढ़ता और मूल्य-आधारित जीवन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। मध्यप्रदेश देश का पहला और एकमात्र राज्य है, जहां ‘आनंद विभाग’ कार्यरत है। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य नागरिकों में आनंद, आंतरिक कल्याण की भावना और मूल्य-आधारित जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन सुशासन और जनभागीदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  

उत्तम नगर मामला: हाईकोर्ट बोला—ईद ही नहीं, रामनवमी तक रखें पुख्ता इंतजाम

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने ईद के मौके पर शहर के उत्तम नगर इलाके में हिंसा की आशंका को देखते हुए पुलिस को वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने पुलिस को वहां रामनवमी के त्योहार तक इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी कहा है। हाई कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को एक नोटिस जारी करते हुए उससे जवाब तलब भी किया है।। हाई कोर्ट ने यह निर्देश उत्तम नगर में रहने वाले मुस्लिमों को ईद के त्योहार पर दी जा रही ‘खून की होली’ खेलने की धमकियों के बीच दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 6 अप्रैल को होगी। ‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने अधिकारियों से कहा, ‘पुलिस की व्यवस्था से सभी में सुरक्षा की भावना पैदा होनी चाहिए। इस बात को सुनिश्चित करें कि कोई भी किसी तरह की गलत हरकत ना कर सके।’ साथ ही उत्तम नगर इलाके में किसी भी अप्रिय या अवांछित स्थिति को रोकने के लिए अदालत ने अधिकारियों से सभी आवश्यक कदम उठाने को भी कहा। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की एक डिवीजन बेंच ने दिल्ली पुलिस द्वारा इलाके में की गई सुरक्षा व्यवस्थाओं का संज्ञान लिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईद बिना किसी अप्रिय घटना के शांतिपूर्वक संपन्न हो जाए। इस दौरान कोर्ट ने इलाके की पुलिस और स्थानीय प्रशासन को निर्देश देते हुए उन सभी जरूरी कदमों को उठाने के लिए कहा, जिनसे इलाके में ईद के दिन सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो सके, साथ ही इलाके में कोई अप्रिय स्थिति ना बने। बता दें कि दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन हुए विवाद में हिंदू युवक तरुण की मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही इलाके का सांप्रदायिक माहौल ठीक नहीं चल रहा है। वहीं अब ईद का त्योहार करीब आने पर कुछ लोगों ने माहौल खराब करने की कोशिश करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों को ‘खून की होली खेलने’ जैसी धमकियां दी हैं। जिसके बाद उत्तम नगर में रहने वाले मुस्लिम परिवारों में खौफ का माहौल है और वो अपने घर छोड़-छोड़कर भाग रहे हैं। दरअसल उत्तम नगर के हस्तसाल गांव में रहने वाले कई मुस्लिम परिवार ईद से पहले इस खून की होली वाली धमकी मिलने के बाद और स्थिति समान्य होने तक यहां से चले जाने की सोच रहे हैं। बातचीत में ऐसे कई परिवारों ने अपनी मंशा जाहिर की है। इनका कहना है कि होली पर 26 साल के युवक की हत्या के बाद अलग-अलग समुदायों से जुड़े धार्मिक समूहों ने जिस तरह धमकियां दीं उससे माहौल बहुत डरावना हो गया है। इस बीच दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वे स्थानीय लोगों के साथ बैठकें कर रहे हैं और किसी ने उन्हें इस तरह की योजना के बारे में नहीं बताया है।

MP Agniveer Bharti: रिकॉर्ड तोड़ आवेदन, अब तक 27 हजार पार पहुंची संख्या

ग्वालियर भारतीय सेना में अग्निवीर बनने का जुनून ग्वालियर और चंबल सहित प्रदेश के 10 जिलों के युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि इस साल अग्निवीर भर्ती के लिए होने वाले ऑनलाइन आवेदनों की संख्या ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अब तक ऑनलाइन आवेदन की संख्या 27 हजार 356 तक पहुंच गई है। एक अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन होंगे यानी अब भी 13 दिन शेष हैं। सेना भर्ती कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि इस बार ग्वालियर और चंबल अंचल के युवाओं में सेना की वर्दी के प्रति दीवानगी और बढ़ रही है। रिक्तियों की संख्या अधिक, सेना के अधिकारी भी उत्साहित अग्निवीर के प्रति बढ़ते रुझान से सेना के अधिकारी भी उत्साहित हैं। इस साल सेना में अधिक संख्या में सैनिक सेवानिवृत्त हुए, इससे सेना की हर यूनिट में रिक्तियाँ अधिक हैं। आकलन के मुताबिक अकेले ग्वालियर सेना भर्ती कार्यालय को ही करीब दो हजार अग्निवीरों की रिक्तियों पर भर्ती करनी है। सेना के अधिकारियों के मुताबिक, जब अभ्यर्थी अधिक होंगे तो मैदान से लेकर लिखित परीक्षा तक में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। इससे कट-ऑफ ऊपर जाएगा और कुशल व ऊर्जावान अग्निवीर सेना को मिलेंगे, जो तकनीकी रूप से भी मजबूत होंगे। जिलावार आवेदनों का विवरण जिला – आवेदन संख्या     मुरैना – 8983     भिंड – 5520     शिवपुरी – 3303     ग्वालियर – 2970     सागर – 1826     टीकमगढ़ – 1612     दतिया – 1052     छतरपुर – 887     निवाड़ी – 854     श्योपुर – 349     कुल – 27356 तकनीक और ऑफिस असिस्टेंट पदों के लिए बढ़ा रुझान अग्निवीर तकनीक और ऑफिस असिस्टेंट पदों के लिए इस बार आवेदन बढ़े हैं। पहले 200 से 300 ही आवेदन 10 जिलों से आते थे, लेकिन इस बार संख्या अधिक है। अग्निवीर तकनीक के लिए 1892 अभ्यर्थी और अग्निवीर ऑफिस असिस्टेंट के लिए 891 अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं। अभ्यर्थी बढ़ने की तीन बड़ी वजहें अधिकतम उम्र 22 वर्ष: पिछले साल तक अग्निवीर भर्ती के लिए अभ्यर्थी की अधिकतम आयु 21 वर्ष निर्धारित थी। इसे एक वर्ष बढ़ाकर 22 वर्ष कर दिया गया है। केंद्रीय बलों में आरक्षण: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीआईएसएफ (CISF), बीएसएफ (BSF) सहित अन्य सीएपीएफ (CAPF) में 50 प्रतिशत तक कोटा अग्निवीरों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। इससे अब अग्निवीर का कार्यकाल पूरा होने के बाद इनके अभ्यर्थियों के सामने भविष्य का संकट नहीं है। सीएपीएफ में ये आसानी से जा सकेंगे। ऑपरेशन सिंदूर में मिली सराहना: ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों ने बेहतर प्रदर्शन कर दुश्मन को धूल चटाने में किया। ड्रोन अटैक में भी अग्निवीरों का बेहतर प्रदर्शन रहा, जिसे देशभर में सराहना मिली। इसलिए अब युवा सेना में जाने के लिए बेताब हैं। अग्निवीर भर्ती के लिए एक अप्रैल तक आवेदन होंगे। अभी 27 हजार 356 अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं। यह संख्या अभी और बढ़ेगी। इससे कुशल और ऊर्जावान अग्निवीर सेना को मिलेंगे। जो युवक सेना में जाना चाहते हैं, वे अभी भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। – कर्नल पंकज कुमार, सेना भर्ती कार्यालय, ग्वालियर

मुख्यमंत्री ने जल के अपव्यय रोकने और एक-एक बूंद संग्रहण के लिए दिलाई शपथ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान हमारी सनातन संस्कृति की सबसे पवित्र धारा का अभियान है। जल की महत्ता ऐसी है कि इसके बिना कोई जीवित नहीं रह सकता है। शरीर 5 तत्वों से मिलकर बना है। ये सभी तत्व कभी अकेले नहीं रह सकते हैं। पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुड़ी पड़वा, विक्रम संवत्, चेटीचंड, चैत्र नवरात्रि की बधाई देते हुए प्रदेश में तीसरे चरण के जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, जहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं। मां नर्मदा के पवित्र जल से मध्यप्रदेश के साथ गुजरात में भी आनंद की धारा बह रही है। हमारी नदी जोड़ो परियोजनाओं का लाभ पड़ौसी राज्य राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जल संचय के अभियान में देशभर के जल स्त्रोतों के विकास कार्य करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के तीसरे जल गंगा संवर्धन अभियान में 3 महीने तक लगातार जल संचय की गतिविधियां संचालित होंगी, जिसमें 2500 करोड़ की राशि से सभी विधानसभा, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचय के कार्य किए जाएंगे। हमारी सरकार ने पहले वर्ष में 30 दिन, दूसरे वर्ष में 120 दिन चलाया और मौजूदा तीसरे वर्ष में गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक 139 दिनों तक प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को इंदौर के इस्कॉन मंदिर में आयोजित तीसरे राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में अमृत 2.0 परियोजना में सिंगल क्लिक से 12.72 करोड़ लागत से बिलावली तालाब, 4.89 करोड़ लागत से लिम्बोदी तालाब, 3.82 करोड़ लागत से छोटा सिरपुर तालाब के जीर्णोद्धार कार्यों के भूमि-पूजन सहित 22 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में जल के अपव्यय को रोकने और एक-एक बूंद संग्रहण के लिए शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि ‘जल ही जीवन है, जल है तो कल है’ के मूल मंत्र के साथ जागरूकता फैलाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार्मिक और पर्यावरणीय संदेशों से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों में भी शामिल हुए। उन्होंने इस्कॉन मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन किया और गौ माता की पूजा कर उन्हें गौ-ग्रास खिलाया। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण बन रहा है राष्ट्रीय अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान इसी का हिस्सा है। पिछले वर्षों में प्रदेश में लाखों जल संरचनाओं पर कार्य किया गया है। इंदौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान के पहले वर्ष में इंदौर नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में पुरानी बावड़ियों और तालाबों के गहरीकरण और पुनरुद्धार का कार्य किया गया। साथ ही सैकड़ों कुओं का भी जीर्णोद्धार किया गया है। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि यह अभियान केवल सरकारी नहीं, बल्कि जन-जन का आंदोलन होना चाहिए। हमारी नदियां शरीर की रक्त धमनियों की तरह मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर के जानापाव से निकली चंबल आगे बढ़कर यमुना में मिलकर गंगा जी की धारा को समृद्ध करती है। हमारी नदियां शरीर की रक्त धमनियों की तरह है, जो पृथ्वी माता को जीवन देती हैं। ब्रह्मांड में जल के महत्व से हम सभी परिचित हैं। उन्होंने कहा कि अगर जीवन को सफल करना है तो प्राचीन समय के उन कुएं, नदियां, तालाब, बावड़ी का जीर्णोद्धार करना होगा, जिनका सम्राट विक्रमादित्य, लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर, महाराज सिंधिया ने निर्माण कराया था। उन्होंने बताया कि इंदौर में 21 बावड़ियों का जीर्णोद्धार कराया गया है। जल है तो कल है वाक्य की गंभीरता को हर व्यक्ति को स्वीकार करना होगा। भारतीय संस्कृति पराक्रम, पुरुषार्थ, आनंद और उत्सव की संस्कृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हो रहा है। आज का दिन सम्राट विक्रमादित्य का स्मरण करने का दिन है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी वीरता, गंभीरता, दानवीरता और लोकप्रियता के बल पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी। भारतीय संस्कृति, पराक्रम, पुरुषार्थ, आनंद और उत्सव की संस्कृति है। प्रकृति में ऋतुओं का राजा बसंत है और भारतीय नववर्ष के मौके पर चारों ओर बसंत की आकर्षक छटा दिखाई देती है। सनातन संस्कृति में मौसम, ऋतुओं और मंगल तिथियों के आधार पर पर्व-त्यौहार मनाए जाते हैं। इन तिथियों पर मंगल कार्य संपन्न किए जाते हैं। इसलिए ऐसे त्योहारों की मंगलकामनाएं होनी चाहिए। जबकि शुभकामनाएं जन्मदिवस, यात्रा आरंभ, साक्षात्कार, परीक्षा जैसे अवसरों पर देनी चाहिए। नवरात्रि, रामनवमी, दशहरा जैसी मंगल तिथियां हैं, इसलिए मंगलकामनाओं का आदान-प्रदान ही उचित है। इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग में बरतें विशेष सावधानी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में आधुनिक संसाधन जीवन को सुखद और आनंदमय बनाने के लिए हैं। बिजली से ए.सी. चलाते समय खिड़की-दरवाजे बंद रहने से संकट की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए घरों में बिजली के सर्किट, कॉमर्शियल लाइनें और उपभोक्ताओं की लाइनों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। इलेक्ट्रिक व्हीकल की चार्जिंग के दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। रात में अपनी और परिवार की सुरक्षा की चिंता स्वयं करनी चाहिए। ऐसे सभी प्रयासों में सरकार हमेशा साथ खड़ी है। बुधवार को इंदौर में हुई अत्यंत दु:खद घटना में नागरिकों की असामयिक मृत्यु हुई है। राज्य सरकार विशेषज्ञों से चर्चा कर समस्या का सामाधान निकालने पर कार्य करेगी। जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा कि राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की नगरी के इस्कॉन मंदिर से हो रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तीसरी बार पानी की एक-एक बूंद सहेजने का निर्णय लिया है। इस अभियान में प्रदेश में नदियों, तालाब और नहरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। वर्षा जल का अधिक से अधिक संचय करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संकल्प लिया है। कृषक कल्याण वर्ष में अनेक जन हितैषी निर्णय लिए गए हैं। राज्य में पिछले 2 वर्षों में सिंचाई का रकबा लगभग 8 लाख हैक्टेयर … Read more

आपदा राहत और विकास पर जोर, हिमाचल का 40 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट मंजूर

शिमला  हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने गुरुवार को वर्ष 2025-26 के लिए 40,461 करोड़ 95 लाख रुपए का अनुपूरक बजट पारित कर दिया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में यह बजट पेश किया, जिसे ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 भी पारित हो गया। इस अनुपूरक बजट में राज्य के विकास कार्यों, आपदा राहत और विभिन्न सामाजिक योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। कुल बजट में से 36,374 करोड़ 61 लाख रुपए राज्य योजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि 4,087 करोड़ रुपए केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के लिए रखे गए हैं। राज्य योजनाओं के तहत सबसे बड़ा हिस्सा, 26,194 करोड़ 95 लाख रुपए, वेतन, पेंशन और अन्य वित्तीय देनदारियों को पूरा करने के लिए तय किया गया है। इसके अलावा बिजली क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए 4,150 करोड़ 14 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग विद्युत उत्पादन बढ़ाने, ट्रांसफार्मरों की मरम्मत और बिजली बोर्ड से जुड़े वित्तीय सुधारों के लिए किया जाएगा। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए 818 करोड़ 20 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं, जबकि जलापूर्ति और सीवरेज योजनाओं के लिए 785 करोड़ 22 लाख रुपए रखे गए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत 657 करोड़ 22 लाख रुपए हिमकेयर, सहारा योजना, मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी और आधुनिक जांच सुविधाओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे। इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 555 करोड़ 89 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि से शिमला में सब्जी मंडी, हमीरपुर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, नए बस अड्डे, खलीनी फ्लाईओवर और छोटा शिमला से विली पार्क तक अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट जैसे कार्य किए जाएंगे। सड़क, पुल और ग्रामीण संपर्क मार्गों के लिए 453 करोड़ 63 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं। वहीं, हिमाचल पथ परिवहन निगम को यात्रियों को दी जा रही रियायतों के बदले 443 करोड़ 33 लाख रुपए का उपदान दिया जाएगा। शिक्षा और खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए 244 करोड़ 31 लाख रुपए और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय व सामाजिक योजनाओं के लिए 221 करोड़ 53 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय योजनाओं के तहत आपदा प्रबंधन के लिए 2,453 करोड़ 97 लाख रुपए, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए 688 करोड़ 40 लाख रुपए और रेणुकाजी बांध विस्थापितों के मुआवजे के लिए 352 करोड़ 18 लाख रुपए रखे गए हैं। सरकार का कहना है कि यह अनुपूरक बजट राज्य में विकास कार्यों को गति देने, आपदा प्रबंधन को मजबूत करने और आम लोगों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी तरीके से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

200 पदों के लिए फाइनल रिजल्ट घोषित, देखें चयन सूची

रायपुर आबकारी विभाग के अंतर्गत आबकारी आरक्षक के रिक्त 200 पदों की पूर्ति हेतु सीधी भर्ती के माध्यम से छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मण्डल रायपुर (व्यापम) द्वारा 27 जुलाई 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। उक्त भर्ती परीक्षा का अंतिम उत्तर तथा परीक्षा परिणाम व्यापम की वेबसाइट पर 19 सितम्बर 2025 को प्रदर्शित किया गया। आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग को उपलब्ध कराये गये परीक्षा परिणाम की प्राप्तांक सूची एवं परीक्षा से संबंधित अन्य अभिलेखों के आधार पर विज्ञापन में उल्लेखित वर्गवार, प्रवर्गवार रिक्तियों की संख्या के लगभग तीन गुना अभ्यर्थियों को मेरिट क्रम में चिन्हांकित किया गया। उनके मूल प्रमाण पत्रों (दस्तावेजों) का सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड की जॉच के लिए बुलाया गया, किन्तु पर्याप्त अवसर दिये जाने के बाद भी सत्यापन में अनुपस्थित एवं शारीरिक मापदण्ड में अपात्र पाये गये कुल 128 अभ्यर्थियों के नामों पर चयन प्रक्रिया में विचार नहीं करने संबंधी 12 मार्च 2026 को पत्र  जारी किया गया। शेष पात्र अभ्यर्थियों में से व्यापम द्वारा जारी मेरिट क्रम के आधार पर वर्गवार, प्रवर्गवार आबकारी आरक्षक पद के कुल 200 पदों के विरूद्ध 200 पदों पर अभ्यर्थियों की उपलब्धता अनुसार चयन सूची तथा 43 अनुपूरक (प्रतीक्षा) सूची जारी गई है।  अधिकारियों ने बताया कि आबकारी आरक्षक पद हेतु छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में व्यापम द्वारा जारी मेरिट सूची के आधार पर विभाग में दस्तावेज सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड में पात्र पाये गये अभ्यर्थियों में से चयन हेतु उपयुक्त पाये गये अभ्यर्थियों की सूची मंडल की वेबसाईट  https://vyapamcg.cgstate.gov.in/ पर अपलोड कर दी गई है। 

अभी खरीद लें FASTag पास! 1 अप्रैल से बढ़ने वाली है कीमत, जेब पर पड़ेगा असर

मुंबई नेशनल हाईवे के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने FASTag एनुअल पास शुरू किया था। इसे 6 महीने के अंदर 50 लाख से ज्यादा यूजर्स ने एक्टिव कराया हैं। इस दौरान 26.55 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए गए हैं। NHAI ने बताया था कि नेशनल हाईवे (NH) नेटवर्क पर होने वाले कुल कार ट्रांजैक्शन में से लगभग 28% अब FASTag एनुअल पास के जरिए किए जा रहे हैं, जो नेशनल हाईवे यूजर्स के बीच FASTag एनुअल पास की बढ़ती पसंद को दिखाता है। हालांकि, लोगों की यही पसंद आप उनकी जेब पर थोड़ी सी भारी पड़ेगी। दरअसल, NHAI ने 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए इस पास की कीमत बढ़ाकर 3,075 रुपए करने का फैसला किया है। यह बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। अभी इस पास की कीमत 3,000 रुपए है।   यह नई कीमत ‘राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008’ में बताए गए टोल रिवीजन मैकेनिज्म के अनुसार तय की गई है। यही नियम राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल शुल्क को नियंत्रित करता है। FASTag एनुअल पास नॉन-कमर्शियल व्हीकलके लिए है और इसका इस्तेमाल भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के नेटवर्क पर मौजूद लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर किया जा सकता है। व्हीकल में एक वैलिड FASTag लगा होना जरूरी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 56 लाख से ज्यादा वाहन चालक पहले ही इस एनुअल पास प्रोग्राम में अपना रजिस्ट्रेशनकरवा चुके हैं। FASTag एनुअल पास क्या है? सबसे पहले समझते हैं कि FASTag एनुअल पास क्या है? तो ये सालाना टोल पास एक तरह की प्रीपेड टोल स्कीम है, जिसे खास तौर से कार, जीप और वैन जैसे नॉन-कमर्शियल प्राइवेट व्हीकल के लिए तैयार किया गया है। नए पास की घोषणा करते समय नितिन गडकरी ने कहा था कि इसका उद्देश्य 60 किलोमीटर के दायरे में स्थित टोल प्लाजा से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करना और सिंगल, अफॉर्जेबल लेनदेन के माध्यम से टोल भुगतान को सरल बनाना है। टोल प्लाजा पर वेटिंग टाइम को कम करके, भीड़भाड़ को कम करके और विवादों को कम करके, वार्षिक पास का उद्देश्य लाखों प्राइवेट व्हीकल ओनर्स के लिए एक फास्ट और आसान यात्रा का अनुभव देना है। खास बात ये है कि इसके लिए लोगों को नया टैग खरीदने के की जरूरत नहीं है, बल्कि ये आपके मौजूदा FASTag से जुड़ जाएगा। इसकी कंडीशन ये है कि आपका मौदूजा FASTag एक्टिव होना चाहिए और आपके व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़ा हो। यह योजना केवल NHAI और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लागू होगा। इसके लिए बार-बार ऑनलाइन रिचार्ज करने की आवश्यकता नहीं है, जिससे यह डेली पैसेंजर्स के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। यह पास नॉन-ट्रांसफरेबल है। इसे सिर्फ रजिस्टर्ड व्हीक के साथ ही इस्तेमला कर पाएंगे। FASTag एनुअल पास कहां काम करेगा? FASTag एनुअल पास केवल NHAI द्वारा ऑपरेटेड राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) पर स्थित टोल प्लाजा पर ही काम करता है। जैसे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, मुंबई-नासिक, मुंबई-सूरत और मुंबई-रत्नागिरी मार्ग आदि। राज्य राजमार्गों या नगरपालिका टोल सड़कों पर आपका FASTag सामान्य रूप से काम करेगा और टोल सामान्य रूप से वसूला जाएगा। जैसे, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे (समृद्धि महामार्ग), अटल सेतु, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे और अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे। ये सभी राज्य प्राधिकरणों द्वारा संचालित होते हैं। ऐसे एक्टिवेट करें फास्टैग एनुअल पास FASTag एनुअल पास एक्टिवेट करने को लेकर इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) की तरफ एक नोटिफिकेशस जारी किया गया है। IHMCL ने नोटिफिकेशन में इस एनुअल पास से जुड़े सभी सवालों के जवाब दिए गए हैं। साथ ही, फास्टैग के एनुअल पास को एक्टिवेट करने का तरीका भी बताया है। IHMCL के मुताबिक, FASTag एनुअल पास को सिर्फ Rajmargyatra (राज मार्ग यात्रा) मोबाइल ऐप और NHAI पोर्टल पर जाकर ही एक्टिवेट किया जा सकेगा। इस पास को एक्टिवेट करने के लिए कार चालक को पहले अपने व्हीकल और उसके ऊपर लगे FASTag की एलिजिबिलिटी को वेरिफाई करना होगा। एक बार वेरिफिकेशन्स कंप्लीट होने के बाद 3000 रुपए का पमेंट करना होगा। यूजर द्वारा किया गया 3000 रुपए की पेमेंट कंफर्मेशन होने के बाद 2 घंटे के अंदर FASTag एनुअल पास एक्टिवेट हो जाएगा। यह एक्टिवेशन आपके मौजूदा फास्टैग पर ही होगा। FASTag एनुअल पास के लिए आपको न्यू फास्टैग खरीदने की जरूरत नहीं है। फास्टैग एनुअल पास पर पेमेंट करने से अगले 1 साल तक या फिर 200 टोल पाल करने तक की वैलिडिटी मिलेगी। 7000 रुपए की बचत होगी इस पास की कीमत 3000 रुपए रखी गई है, जिसमें 200 यात्राएं शामिल हैं। एक यात्रा का मतलब एक बार टोल प्लाजा पार करना है। यानी प्रति टोल खर्च सिर्फ 15 रुपए ही खर्च होंगे। अभी 200 बार टोल पार करने पर करीब 10,000 रुपए खर्च होते हैं, लेकिन नई स्कीम में यह काम सिर्फ 3000 रुपए ही लगेंगे। इसका मतलब है कि पैसेंजर व्हीकल चलाने वालों की करीब 7000 रुपए की सीधी बचत होगी।

कुलपति डॉ. चंदेल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने उज्बेकिस्तान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी

रायपुर उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे उज्बेकिस्तान के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी आगामी शैक्षणिक वर्ष से कृषि के क्षेत्र में उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान हेतु छत्तीसगढ़ आएंगे और छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु उज्बेकिस्तान जाएंगे। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर तथा उज्बेकिस्तान के पांच विश्वविद्यालयों के मध्य कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग हेतु समझौते किये गए हैं। उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व वाले प्रतिनिधि मंडल के विगत दिनों उज्बेकिस्तान प्रवास के दौरान ताशकंद स्टेट एग्रेरियन यूनिवर्सिटी, बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी, समरकंद स्टेट वेटेरिनरी, तेरमेज़ इंस्टीट्यूट तथा देनोव इंस्टीट्यूट के बीच शिक्षा, अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी एवं उद्यमिता विकास आदि क्षेत्रों में सहयोग हेतु अनेक समझौते हस्ताक्षरित किए गए। इन समझौतों से छात्र और संकाय विनिमय कार्यक्रमों संयुक्त अनुसंधान पहलों, शैक्षणिक गतिशीलता और अंतर्राष्ट्रीय इंटर्नशिप को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिससे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की वैश्विक भागीदारी बढ़ेगी।  कुलपति डॉ. चंदेल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने उज्बेकिस्तान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जिनमें चांवल अनुसंधान, औषधीय फसलों की खेती, जैव प्रौद्योगिकी और कृषि उद्यमिता प्रमुख हैं। प्रतिनिधिमंडल ने उज्बेकिस्तान में कृषि आधारित उद्योगों के विकास में भारतीय किसान उत्पादक संगठनों की भागीदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उज्बेकिस्तान के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु काफी रूचि दिखाई। डॉ. चंदेल ने आशा व्यक्त की कि जिस प्रकार बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल शिक्षा के लिए उज्बेकिस्तान जाते हैं उसी प्रकार भविष्य में उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा प्राप्त करने लिए छत्तीसगढ़ आएंगे। उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के विस्तार के परिप्रेक्ष्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर का एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व में 28 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक उज्बेकिस्तान के दौरे पर गया था। यह भ्रमण भारतीय एवं उज्बेक संस्थानों के बीच शैक्षणिक संबंधों को सुदृढ़ करने तथा कृषि विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, संरक्षित खेती, कृषि उद्यमिता एवं प्रमुख फसलों की मूल्य श्रृंखला विकास में सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण करने हेतु किया गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं शासकीय प्रतिनिधियों से भेंट कर संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों, अनुसंधान सहयोग एवं संस्थागत साझेदारी के अवसरों की पहचान की। प्रतिनिधि मंडल में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. हुलास पाठक भी शामिल थे। इस यात्रा का उद्देश्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था साथ ही भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी का निर्माण करना था। यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उजबेकिस्तान के प्रमुख विश्वविद्यालयों अनुसंधान संस्थानों और नीति संगठनों के साथ जुड़कर कृषि विज्ञान जैव प्रौद्योगिकी कृषि उद्यमिता संरक्षित खेती और मूल्य श्रृंखला विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों का पता लगाया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पाँच प्रमुख सस्थानो, तेरमेज़ पेडागोजिकल इंस्टीट्यूट, डेनोव इंस्टीट्यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एक पेडागोजी, ताशकंद स्टेट एग्रेरियन यूनिवर्सिटी, बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी और समरकंद स्टेट वेटरनरी यूनिवर्सिटी के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद में प्रत्यायन और रेटिंग अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी के साथ भी एक विस्तृत बैठक की। इस यात्रा ने उज्बेकिस्तान की तेजी से विस्तार कर रही उच्च शिक्षा प्रणाली के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की और कौशल विकास, संकाय प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण समाधानों में सहयोग के नए रास्ते खोले। तेरमेज पेडागोजिकल इंस्टीट्यूट में एक एमओयू को औपचारिक रूप दिया गया और शैक्षणिक सहयोग तथा पाठयक्रम विकास पर चर्चा हुई। डेनोव इंस्टीट््यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एंड पेडागोजी में प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ उच्च्य स्तरीय बातचीत में भाग लिया जिसमें उद्यमिता शिक्षा जैव प्रौद्योगिकी और कृषि मूल्य श्रृंखलाओं में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया गया। उच्च शिक्षा में उनके शैक्षणिक योगदान और नेतृत्व के सम्मान में डॉ गिरीश चंदेल और प्रो हुलास पाठक को उनकी यात्रा के दौरान विजिटिंग प्रोफेसरशिप सम्मान से सम्मानित किया गया। ताशकंद स्टेट एथेरियन यूनिवर्सिटी में कृषि जैव प्रौद्योगिकी खारा प्रौद्योगिकी और उद्यमिता विकास में सहयोग पर बर्चा हुई, जिसके बाद एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी के दौरे से उन्नत स्मार्ट प्रयोगशाला सुविधाओं और किसान-समूह-आधारित मूल्य श्रृंखला मॉडलों विशेष रूप से कपास और डेयरी क्षेत्रों में देखने का अवसर मिला।  प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के इन अभिनव दृष्टिकोणों की सराहना की। समरकंद स्टेट वेटरनरी यूनिवर्सिटी में प्रतिनिधिमंडल ने चांवल अनुसंधान औषधीय पौधों और कृषि उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में सहयोग के साथ साथ संयुक्त अनुसंधान और शैक्षणिक आदान प्रदान के अवसरों पर चर्चा की। इस दौरे में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया जिसमें इनक्यूबेशन के अवसर कृषि आधारित उद्योगों का विकास और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देना शामिल है।  हल्दी, अदरक, लहसुन, लेवेंडर और औषधीय पौधों जैसी फसलों के लिए मूल्य श्रृंखला विकास पर विशेष चर्चा हुई साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त ब्रांडिंग पहलों की संभावनाओं पर भी बात हुई। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद में भारतीय दूतावास के साथ भी बातचीत की जहाँ राजदूत सु स्मिता पंत के साथ की गई चर्चा कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी। प्रतिनिधि मंडल ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में केसर लैवेंडर, हींग, बेरी और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों की पहचान की। इस दौरे ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दीर्घकालिक शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग के लिए एक मजबूत नींव रखी है, जो सतत कृषि, नवाचार और वैश्विक ज्ञान के आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।  

दिल्ली हाई कोर्ट में गौतम गंभीर की याचिका, बदनाम करने वाले कंटेंट को हटाने की उठाई मांग

नई दिल्ली इंडियन क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से गुहार लगाई है। उन्होंने अपने नाम और तस्वीरों का अनधिकृत इस्तेमाल कर अपना प्रचार करने वालों के साथ-साथ एआई वीडियो और डीपफेक के जरिए फर्जी सूचनाएं फैलाने वालों से हर्जाने की भी मांग की है। गंभीर ने अदालत से ऐसे ऑनलाइन कंटेंट को हटाने का निर्देश देने की भी गुहार लगाई है। उन्होंने कुल 16 व्यक्तियों या संस्थानों को पार्टी बनाया है। गौतम गंभीर से पहले अनिल कपूर, अमिताभ बच्चन, सुनील गावस्कर जैसी हस्तियां भी पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। इन हस्तियों ने अपनी आवाज, वीडियों या तस्वीर के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत का रुख किया था और पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की थी। दो बार के विश्व कप विजेता गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल वाद दाखिल किया है। उसमें उन्होंने अपने नाम, वीडियो, तस्वीरों का इस्तेमाल कर प्रचार करने वालों या इनका इस्तेमाल कर दुष्प्रचार करने वालों से 2.5 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है। साथ में ये भी गुहार लगाई है कि उनकी उनकी पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाया जाए। वाद में कॉपीराइट ऐक्ट 1957, ट्रेड मार्क्स ऐक्ट 1999 और कमर्शन कोर्ट्स ऐक्ट 2015 के प्रावधानों का जिक्र करते हुए हाई कोर्ट से गुहार की गई है। इसके साथ ही उन्होंने अमिताभ बच्चन बनाम रजत नागी, अनिल कपूर बनाम सिंपली लाइफ इंडिया और सुनील गावस्कर बनाम क्रिकेट तक एवं अन्य मामले में हाई कोर्ट के दिए ऐतिहासिक आदेश का भी हवाला दिया है। एआई जैसी तकनीक से फर्जी वीडियो बना प्रचारित करने का आरोप गौतम गंभीर की लीगल टीम की तरफ से कहा गया है कि इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और फेसबुक पर तमाम ऐसे अकाउंट्स हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेस-स्वैपिंग, वॉइस क्लोनिंग टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करके गौतम गंभीर के असली से दिखने वाले वीडियो बना रहे हैं। उन फर्जी वीडियो में गंभीर के कथित बयानों को दिखाते, सुनाते हैं जो असल में उन्होंने कभी कहा ही नहीं होता है। ऐसे ही एक वीडियो में फर्जी तरीके से उनके कोच पद से इस्तीफा देने के ऐलान की बात रखी गई थी जिसने 29 लाख व्यूज बटोरे। इसके अलावा उन्होंने ईकॉमर्स प्लेफॉर्म्स को भी पक्ष बनाया है। गंभीर का दावा है कि ये ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म उन पोस्टर्स या सामानों को बिकने दे रहे ही हैं जिन पर अनधिकृत रूप से उनका यानी गौतम गंभीर के नाम का इस्तेमाल किया गया है। गौतम गंभीर ने किन लोगों के खिलाफ किया है मुकदमा जानकी फ्रेम्स, भूपेंद्र पैंटोला, लिजेंड्स रिवोलूशन, गुस्ताख एडिट्स, क्रिकेट मीमर 45, जेम्स ऑफ क्रिकेट, क्रिकएथ, सन्नी उपाध्याय, @imRavY_, ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक, एक्स कॉर्प, गूगल/यूट्यूब, मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी और डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशंस। क्या होता है पर्सनैलिटी राइट? पर्सनैलिटी राइट किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व की रक्षा से जुड़े हैं। भारतीय संविधान में अलग से इस तरह के किसी अधिकार की व्यवस्था नहीं है बल्कि यह अनुच्छेद 21 के तहत मिले निजता के अधिकार के तहत ही आता है। पर्सनैलिटी राइट्स में दो तरह के अधिकार शामिल होते हैं- राइट ऑफ पब्लिशिटी और राइट टु प्राइवेसी। राइट ऑफ पब्लिशिटी किसी व्यक्ति को अपनी तस्वीर, आवाज, वीडियो या उससे जुड़ी किसी भी चीज का बिना उसकी इजाजत या करार के बिना व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने से रक्षा का अधिकार है।

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर, ईरानी हमलों से डरे खाड़ी देश पहुंचे UN, बोले- अभी हो बहस

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान युद्ध अब भीषण जंग में तब्दील हो गया है। ईरान अमेरिका से बदला लेने के लिए खाड़ी देशों में मौजूद उसके ठिकानो पर हमले कर रहा है। इसके साथ ही, वह कच्चे तेल की प्लांट को भी निशाना बना रहा है, जिससे दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। इन सबसे घबराए खाड़ी देश आनन-फानन में यूनाइटेड नेशन (UN) पहुंचे हैं और तुरंत ही बहस करने की मांग की है। डॉक्युमेंट्स से पता चलता है कि खाड़ी देशों ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में, मिडिल ईस्ट में नागरिकों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों को लेकर एक तत्काल बहस का अनुरोध किया है। खाड़ी देशों द्वारा भेजा गया एक राजनयिक नोट में बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बताता है, जिसके मानवाधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं। ईरान पर अमेरिकी-इजरायल युद्ध का विस्तार, जो अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, ने खाड़ी देशों में ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के रूप में बड़े पैमाने पर ईरानी जवाबी कार्रवाई को जन्म दिया है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने और पूरे क्षेत्र में ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों ने ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है और विश्व स्तर पर मुद्रास्फीति में वृद्धि के डर को हवा दी है। राजनयिक नोट में कहा गया है कि खाड़ी देशों पर किए गए ये बिना किसी उकसावे के हमले – ईरान को दिए गए उनके इस आश्वासन के बावजूद कि उनके क्षेत्र ईरान-विरोधी हमलों के लिए इस्तेमाल नहीं किए जाएंगे – तत्काल ध्यान दिए जाने की मांग करते हैं। खाड़ी देशों द्वारा प्रस्तावित मसौदा प्रस्ताव इन हमलों की कड़ी निंदा करता है और ईरान से तत्काल नागरिक बुनियादी ढांचे और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकने का आह्वान करता है। साथ ही यह नागरिकों, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग करता है। परिषद को यह अनुरोध प्राप्त हो गया है और वह इस बहस को आयोजित करने के लिए एक तारीख पर विचार कर रही है। ईरान के हमले के बाद तेल, प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल वहीं, ईरान के कतर में एक प्रमुख प्राकृतिक गैस सुविधा और कुवैत की दो तेल रिफाइनरी पर हमले के बाद वैश्विक तेल एवं प्राकृतिक गैस की कीमतों में बृहस्पतिवार को तेज उछाल आया। कतर की यह गैस सुविधा दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की गैस आपूर्ति करती है। इन हमलों से यह आशंका बढ़ गई है कि टैंकर यातायात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न ऊर्जा संकट अपेक्षा से अधिक लंबा एवं व्यापक हो सकता है जिससे तेल एवं गैस उत्पादन को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो युद्ध से पहले 73 डॉलर प्रति बैरल से कम थी।

32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 3000 जनजातीय खिलाड़ी करेंगे भागीदा

रायपुर  छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देशभर के जनजातीय खिलाड़ी सात खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। इसमें देश के 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 3000 खिलाड़ी भागीदारी करेंगे। आयोजन के दौरान पुरूष एवं महिला वर्गों में राजधानी रायपुर में पांच खेलों तथा बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर और सरगुजा संभागीय मुख्यालय अंबिकापुर में एक-एक खेल होंगे। इसमें छत्तीसगढ़ के कुल 164 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 86 पुरूष और 78 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। तीनों शहरों में नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए चिन्हांकित खेल स्थलों व मैदानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार करने का काम जोरों पर है। रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय फुटबॉल मैदान और स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम कोटा में फुटबॉल की प्रतियोगिताएं होंगी। रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में हॉकी की स्पर्धाएं होंगी। वहीं रायपुर के अंतरराष्ट्रीय स्वीमिग पूल में तैराकी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग संचालनालय के ओपन मैदान में तीरंदाजी तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ओपन ग्राउंड में वेट-लिफ्टिंग की प्रतियोगिताएं संपन्न होंगी। जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में कुश्ती की प्रतियोगिताएं होंगी। खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देश के दो परंपरागत खेलों कबड्डी और मलखंब को भी डेमो गेम्स के रूप में शामिल किया गया है। कबड्डी की स्पर्धाएं रायपुर के सरदार बलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम और मलखंब का प्रदर्शन अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में होगा।

महंगाई के बीच आम लोगों को राहत: Italy सरकार ने घटाया पेट्रोल-डीजल पर टैक्स

मुंबई ग्लोबल लेवल पर बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच इटली सरकार ने आम नागरिकों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में कटौती की घोषणा की है। यह फैसला मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा लागत के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। फ्यूल महंगा होने पर सरकार का एक्शन इटली के उप प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी ने बताया कि हाल के हफ्तों में ग्लोबल ऑयल प्राइस में आई तेजी का सीधा असर देश के नागरिकों पर पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कर में राहत देने का फैसला किया है, ताकि आम लोगों के खर्च का बोझ कम किया जा सके। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है , जब ऊर्जा कीमतों में उछाल ने पूरे यूरोप में महंगाई को बढ़ा दिया है। कैबिनेट बैठक में राहत पैकेज पर चर्चा प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सैकड़ों करोड़ यूरो के राहत पैकेज पर विचार किया गया। यह पैकेज सीमित समय के लिए लागू किया जाएगा और इसका मकसद परिवारों और उपभोक्ताओं को ऊर्जा लागत के झटके से बचाना है। सरकार का मानना है कि यह कदम घरेलू खर्च को नियंत्रित करने और आर्थिक दबाव को कम करने में मदद करेगा। तेल कंपनियों से कीमतें नियंत्रित रखने की अपील सरकार ने कर कटौती के साथ-साथ तेल कंपनियों से भी सहयोग मांगा है। उप प्रधानमंत्री साल्विनी ने बताया कि सरकार ने डीजल के लिए अधिकतम कीमत करीब 1.90 यूरो (करीब ₹203.28) प्रति लीटर तय करने का सुझाव दिया है, ताकि बाजार में अनियंत्रित बढ़ोतरी को रोका जा सके। इसके जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कर राहत का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे। ईंधन कीमतों में क्यों आया उछाल? मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी आई है। इटली के उद्योग मंत्रालय के अनुसार यहां डीजल की औसत कीमत 2.10 यूरो प्रति लीटर और पेट्रोल 1.87 यूरो प्रति लीटर पर पहुंच गया है। यह स्तर आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। निगरानी और सट्टेबाजी पर नजर सरकार ने फ्यूल सप्लाई चेन पर निगरानी भी तेज कर दी है। एनी एसपीए और तमोइल इटालिया जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के साथ बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि कीमतों में बढ़ोतरी का कारण वास्तविक लागत हो, न कि सट्टेबाजी। इसके साथ ही सरकार कीमतों की नियमित समीक्षा कर रही है, ताकि किसी तरह की अनियमितता को रोका जा सके। अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स की तैयारी सरकार ऊर्जा कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स लगाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। हालांकि, फिलहाल उम्मीद जताई जा रही है कि स्थिति नियंत्रण में रहेगी और इस कदम की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्यों ज्यादा प्रभावित है इटली? इटली यूरोप के उन देशों में शामिल है जहां फ्यूल पर टैक्स पहले से ही ज्यादा है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो इसका असर यहां ज्यादा तेजी से दिखता है। यही वजह है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। कुल मिलाकर, इटली सरकार का यह फैसला बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच आम लोगों को राहत देने की दिशा में अहम कदम है। वैश्विक तनाव और महंगे तेल के दौर में ऐसे उपाय अन्य देशों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह कदम महंगाई को काबू में रखने में सफल होता है या नहीं।

मंत्री टेटवाल बोले—विक्रमादित्य की कथा आज भी देती है जीवन जीने की प्रेरणा

भोपाल  गुड़ी पड़वा एवं वर्ष प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 के शुभ अवसर पर प्रदेश में विक्रमोत्सव का आयोजन किया गया। इसी क्रम में कौशल विकास एवं रोजगार तथा उज्जैन के प्रभारी मंत्री  गौतम टेटवाल ने उज्जैन के पावन रामघाट पर विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत सृष्टि आरंभ दिवस के शुभ अवसर पर कोटि सूर्योपासना कार्यक्रम में सहभागिता की। साथ ही माँ शिप्रा का पूजन-अर्चन कर प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि कि कामना की। विक्रम संवत केवल एक काल गणना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण मंत्री  टेटवाल ने कहा कि यह पावन अवसर हमें हमारी महान परंपरा और गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है। चैत्र नववर्ष (विक्रम संवत) का प्रारंभ उज्जैन के महान सम्राट  विक्रमादित्य महाराज द्वारा किया गया था, जो भारतीय संस्कृति, ज्ञान और स्वाभिमान का प्रतीक है। विक्रम संवत केवल एक काल गणना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सभ्यता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण है। उज्जैन नगरी उसी गौरव को आगे बढ़ाते हुए निरंतर विकास की ओर अग्रसर है, जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है। सम्राट विक्रम की गाथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्त्रोत भी है मंत्री  टेटवाल ने कहा कि विक्रम संवत, आज भी हमारे पर्व-त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों का आधार है, यह केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। इसकी स्थापना लगभग 57 ईसा पूर्व महान सम्राट विक्रमादित्य द्वारा की गई थी। सम्राट विक्रमादित्य का नाम आते ही हमारे मन में वीरता, पराक्रम और अद्भुत नेतृत्व की छवि उभरती है। उनका शासनकाल भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग माना जाता है। उनकी गाथा केवल इतिहास नहीं बल्कि हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महाकाल लोक हमारी विरासत और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम मंत्री  टेटवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश की पावन धरती, विशेष रूप से उज्जैन, सम्राट विक्रमादित्य की कर्मभूमि रही है। उज्जैन को उस समय भारत की सांस्कृतिक और खगोलीय राजधानी माना जाता था। आज भी यह नगरी हमारे लिए आस्था, इतिहास और गौरव का केंद्र है। उज्जैन विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है। यहां स्थित  महाकालेश्वर मंदिर और विकसित होता हुआ महाकाल लोक न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारी विरासत और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम भी है। इस अवसर पर सांसद  अनिल फिरोजिया, विधायक  अनिल जैन कालुहेड़ा, महापौर  मुकेश टेटवाल, सभापति मती कलावती यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।  

ईरान स्ट्राइक का असर, यूरोपीय गैस बाजार में 35% उछाल से बढ़ी टेंशन

 मुंबई मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों की ऊर्जा इकाइयों पर ईरान के हमलों के मद्देनजर वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आया। गुरुवार को यूरोपीय गैस के बेंचमार्क फ्यूचर्स में करीब 35% तक की तेजी देखने को मिली, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया। बता दें कि तेल के अंतरराष्ट्रीय मानक ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 60 प्रतिशत बढ़ गई है। क्या है ताजा उछाल की वजह? दरअसल, ईरान ने कतर के रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र सहित पड़ोसी देशों के ऊर्जा केंद्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किये, जिससे वहां की एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस फैसलिटीज को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। यह प्लांट वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का लगभग 20% उत्पादन करता है, इसलिए इसका प्रभावित होना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। इससे पहले भी इसी महीने ड्रोन हमले के बाद इस प्लांट से सप्लाई रोक दी गई थी लेकिन ताजा हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। आपको बता दें कि रास लाफान, कतर का प्रमुख एलएनजी उत्पादन केंद्र है, जहां गैस प्रसंस्करण, शोधन एवं बिजली उत्पादन की प्रमुख फैसलिटीज स्थित हैं। इसका बंदरगाह विश्व के सबसे बड़े औद्योगिक ऊर्जा परिसरों में से एक है और दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात टर्मिनल शामिल है। इसके अलावा, अबुधाबी के हबशान गैस प्लांट भी एक हमले में मलबे के गिरने से क्षतिग्रस्त हो गए और उन्हें बंद करना पड़ा। इससे आपूर्ति पर और दबाव बढ़ गया है। यूरोप के लिए टेंशन विशेषकर यूरोप के लिए, यह तनाव ऐसे समय में आया है जब इसके स्टोरेज टैंक खाली हो चुके हैं। इसका मतलब है कि उसे इन टैंकों को फिर से भरने के लिए इस गर्मी में और अधिक एलएनजी कार्गो खरीदना होगा, जिससे उसे कम उपलब्ध आपूर्ति के लिए एशिया के खरीदारों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी। ग्लोबल रिस्क मैनेजमेंट के मुख्य विश्लेषक अर्ने लोहमान रासमुसेन ने कहा- कतर से एलएनजी की आपूर्ति सैद्धांतिक रूप से महीनों तक और सबसे खराब स्थिति में, वर्षों तक बंद रह सकती है। गैस बाजार के लिए संकट केवल युद्ध समाप्त होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से खत्म नहीं हो जाएगा। ट्रंप की चेतावनी ताजा हमलों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कतर पर दोबारा हमला हुआ तो वे उसका पूरा गैस फील्ड को उड़ा देंगे जो ईरान ने कभी सोचा नहीं होगा। ट्रंप ने कहा-मैं इस पैमाने की हिंसा और विनाश की अनुमति नहीं देना चाहता क्योंकि इसका ईरान के भविष्य पर लॉन्ग टर्म में असर पड़ेगा। इस बीच, खबर है कि ट्रंप प्रशासन तेल आपूर्ति बढ़ाने के उपाय तलाश रहा है। इसी कड़ी में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील देते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी के साथ कारोबार करने की अनुमति होगी।  

गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर पर आयोजित किया गया ‘विक्रमोत्सव’

भोपाल  मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पंवार ने गुरुवार को राजगढ़ में गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर (विक्रम संवत 2083) के पावन अवसर पर आयोजित “विक्रमोत्सव” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। जिला स्तरीय भव्य कोटि सूर्योपासना एवं सम्राट विक्रमादित्य केंद्रित नाट्य मंचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री श्री पंवार ने उपस्थित नागरिकों को हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। राज्यमंत्री श्री पंवार ने अपने संबोधन में कहा कि गुड़ी पड़वा केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध कालगणना, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास का प्रस्थान बिंदु है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का शुभारंभ किया था, इसीलिए यह दिवस संपूर्ण सृष्टि के प्रथम दिन के रूप में भी पूजनीय है। उन्होंने कहा कि इसी कालखंड में महान सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का शुभारंभ किया था। यह संवत हमारे प्राचीन भारतीय ज्ञान, विज्ञान और समय की सटीक गणना की समृद्ध परंपरा का जीवंत प्रतीक है। राज्यमंत्री श्री पंवार ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का शासन न्याय और लोक-कल्याण का आदर्श रहा है, जिससे प्रेरणा लेकर आज हम समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की ओर अग्रसर हैं। राज्यमंत्री श्री पंवार ने कहा कि गुड़ी पड़वा विजय, आशा और नव-आरंभ का संदेश देता है। घरों पर स्थापित किया जाने वाला ‘गुड़ी’ यानी विजय ध्वज हमें सदैव यह प्रेरणा देता है कि सत्य और धर्म की ही अंततः विजय होती है। उन्होंने आह्वान किया कि इस पावन अवसर पर हम सभी अपनी समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाने, समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लें। कार्यक्रम के दौरान सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाट्य का मंचन भी हुआ। राज्यमंत्री श्री पंवार ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली अतीत को समझने का अवसर मिलता है।  

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