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अवधेश प्रसाद ने कहा- अयोध्या किसी की बपौती नहीं है, ये प्रभु श्री राम की धरती है, हमसे बड़ा राम भक्त तो कोई नहीं हो सकता

अयोध्या फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट के परिणाम आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस सीट से अवधेश प्रसाद ने बीजेपी के दो बार के सांसद लल्लू सिंह को करारी हार दी है। इस पर अवधेश प्रसाद का कहना है कि अयोध्या किसी की बपौती नहीं है, ये प्रभु श्री राम की धरती है। उन्होंने कहा कि हमसे बड़ा राम भक्त तो कोई नहीं हो सकता। मेरे दादा के नाम में राम, मेरे पिता के नाम में राम, मेरे भाई के नाम में राम, मेरे ससुर के नाम में राम, मैं खुद अयोध्या का रहने वाला हूं. मुझसे ज्यादा भगवान राम के करीब और कौन हो सकता है? अवधेश प्रसाद ने कहा कि आप मुझे राम-राम से अभिवादन करें या ‘जय श्री राम’ कहकर अभिवादन करें, मुझे दोनों स्वीकार है। मैं भेदभाव या बांटने वाली राजनीति नहीं करता। ‘अखिलेश हमेशा मुझे अपने बगल में बिठाते हैं’ एक निजी चैनल पर इंटरव्यू में सपा सुप्रीमो को धन्यवाद देते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि अखिलेश जी ने मुझे सामान्य सीट से चुनावी मैदान में उतारा। 6 महीने पहले उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं आपको सम्मान देना चाहता हूं। वह हमेशा मुझे अपने बगल में बिठाते हैं। कोलकाता भी ले गए तो मुझे साथ में ले गए। राष्ट्रीय कमेटी में जब बिठाया तो मुझे बगल में बिठाया। विधानसभा में भी मैं उनके बगल में बैठता हूं। मैंने उनसे कहा कि ‘आप हमेशा मुझको सम्मान देते हैं। ‘जो राम को लाए हैं…’ के नारे पर सपा सांसद ने कसा तंज अवधेश प्रसाद ने दावा किया कि ‘मैं प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ भी अयोध्या से चुनाव लड़ने को तैयार था अगर वह आते। चर्चा भी थी कि प्रधानमंत्री मोदी खुद अयोध्या से उम्मीदवार होंगे। मैं भी खुश था कि पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। ‘जो राम को लाए हैं…’ के नारे पर तंज कसते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि बताइए भला ये लोग भगवान के साथ ऐसा करते हैं। वहीं, बीजेपी की हार पर अयोध्या के लोगों पर कथित तौर पर गलत कमेंट करने वालों पर भी अवधेश प्रसाद ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि जो भी लोग अयोध्या हारने पर कमेंट कर रहे हैं। दरअसल वह लोग अयोध्या को जानते नहीं हैं। आम अयोध्यावासी बहुत परेशान था, लेकिन श्रद्धालु और पर्यटक में अंतर होता है। अयोध्या में लोगों की दुकानें तोड़ी गईं, मुआवजे नहीं दिए गए- सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि अयोध्या किसी की बपौती नहीं है, ये धरती प्रभु श्री राम की है। चौड़ी सड़के, हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन ये सब तो ठीक है, लेकिन अयोध्यावासी क्या एयरपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे। अयोध्या में लोगों को बहुत तकलीफ हुई, लोगों के दुकानें तोड़ी गईं, मुआवजे नहीं दिए गए। बड़े प्रोजेक्ट के नाम पर किसानों की जमीन पर सरकार की तलवार लटक रही है, इन सबका गुस्सा लोगों में था। वहीं, अपने ऊपर खतरे की आशंका को लेकर उन्होंने कहा कि जाको राखे साइयां मार सके ना कोई। हमारे ऊपर भगवान राम और हनुमान जी की कृपा है तो कोई मेरा बाल बांका नहीं कर सकता।

राहुल गांधी ने कहा- बलिदान की परंपरा को परिवारवाद कहने वाले अपने ‘सरकारी परिवार’ को सत्ता की वसीयत बांट रहे

नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली नई मंत्रिपरिषद के कई सदस्यों का हवाला देते हुए मंगलवार को कहा कि पीढ़ियों के संघर्ष, सेवा और बलिदान की परंपरा को परिवारवाद कहने वाले अपने ‘सरकारी परिवार’ को सत्ता की वसीयत बांट रहे हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि कथनी और करनी के इसी फर्क को नरेन्द्र मोदी कहते हैं।   राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर जिन मंत्रियों के नाम साझा किए उनमें इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कई अन्य नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पीढ़ियों के संघर्ष, सेवा और बलिदान की परंपरा को परिवारवाद कहने वाले अपने ‘सरकारी परिवार’ को सत्ता की वसीयत बांट रहे। कथनी और करनी के इसी फर्क को नरेन्द्र मोदी कहते हैं।”

घाटी में 150 से ज्यादा आतंकी एक्टिव, माता वैष्णों देवी के बाद अब अमरनाथ यात्रा को लेकर अलर्ट जारी

जम्मू-कश्मीर जम्मू के रियासी इलाके में माता वैष्णों देवी जा रहे तीर्थ यात्रियों से भरी बस पर हुए आतंकी हमले के बाद कश्मीर घाटी में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है।  आतंकवादी अब सुरक्षा बलों की गाड़ियों के बदले आम जनता के वाहनों को निशाना बनाने लगे हैं। बता दें कि29 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर सख्त एलर्ट जारी किया  गया है। विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक रश्मि रंजन स्वैन ने इस बात की पुष्टि की है कि कश्मीर घाटी में इस समय 70-80 विदेशी आतंकियों समेत 150 से ज्यादा आतंकी सक्रिय हैं। उधमपुर रियासी रेंज के डीआईजी रईस मोहम्मद भट ने कहा कि आतंकी हमले के संबंध में हमें जो सुराग मिले हैं, उसके आधार पर हमने तलाशी शुरू कर दी है। हमारी 11 टीमें सक्रिय हैं। सभी सुरक्षा बल संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। हमने कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया है। विश्लेषण और अन्य सुरागों के अनुसार, हमें लगता है कि इस हमले में लश्कर का हाथ है। मौजूदा समय में X पर All Eyes on Reasi ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स ने कहा कि आशा है कि अपराधियों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।

प्याज की कीमतों ने जनता को रूलाया, इतने रूपए हुआ महंगा

नई दिल्ली ईद-अल-अधा (बकरा ईद) से पहले बढ़ती मांग के कारण पिछले दो हफ्तों में प्याज की कीमतें लगभग 30-50% बढ़ गई हैं। व्यापारियों ने इस उम्मीद में स्टॉक रखना शुरू कर दिया है कि केंद्र सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अपने हस्तक्षेप में ढील दे सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नासिक की लासलगांव मंडी में सोमवार को प्याज का औसत थोक मूल्य 26 रुपए प्रति किलोग्राम था, जो 25 मई को 17 रुपए प्रति किलोग्राम था।   इस बीच, शीर्ष गुणवत्ता वाले प्याज की कीमत, जो कुल व्यापार मात्रा का एक छोटा सा हिस्सा है, पूरे महाराष्ट्र के कई थोक बाजारों में 30 रुपए प्रति किलोग्राम से अधिक हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल्य वृद्धि के पीछे प्राथमिक चालक आपूर्ति और मांग के बीच मौजूदा असंतुलन है। जून से बाजारों में आने वाला प्याज किसानों और व्यापारियों द्वारा रखे गए स्टॉक से प्राप्त किया जाता है। 2023-24 के लिए रबी फसल में अनुमानित कमी के कारण कीमतें बढ़ने की उम्मीद से किसान अपने स्टॉक को बेचने के लिए अनिच्छुक हैं। 40% निर्यात शुल्क के कारण निर्यात में सुस्ती के बावजूद, प्याज की घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, खासकर 17 जून को ईद-अल-अधा के करीब आने के साथ। महाराष्ट्र के नासिक के प्याज व्यापारी विकास सिंह ने बताया, ”महाराष्ट्र के प्याज की जोरदार मांग है, खासकर दक्षिणी राज्यों से।” हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत शाह ने बताया कि किसान और स्टॉकिस्ट आशावादी हैं कि सरकार निर्यात शुल्क हटा सकती है। शाह ने कहा, “कीमतें बढ़ने का एक मुख्य कारण यह है कि किसान और स्टॉकिस्ट आशावादी हैं कि केंद्र सरकार निर्यात शुल्क हटा सकती है। इस धारणा के आधार पर, वे कीमतें बढ़ने की उम्मीद में प्याज रखे हुए हैं।”

राजस्थान : संस्कृति व पर्यटन क्षेत्र की उत्तरोत्तर प्रगति के होंगे प्रयास : गजेंद्र सिंह शेखावत

जयपुर. केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज सुबह 11 बजे संस्कृति मंत्रालय और दोपहर 12 बजे पर्यटन मंत्रालय में कार्यभार ग्रहण कर लिया। इस मौके पर विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। मोदी 2 सरकार में शेखावत को जलशक्ति मंत्री बनाया गया था। लेकिन इस बार यह विभाग सीआर पाटिल को दिया गया है। केंद्रीय मंत्री बनाए जाने पर गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा- दूरदृष्टा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय की महती जिम्मेदारी प्रदान कर अनुगृहीत किया है। मैं संपूर्ण निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए विकसित भारत निर्माण में संस्कृति व पर्यटन क्षेत्र की उत्तरोत्तर प्रगति के हरसंभव प्रयास करूंगा। मेरे मार्गदर्शक मोदी जी का बारंबार अभिनंदन, आभार। मीडिया से शेखावत ने कहा कि पिछले 10 वर्षों के दौरान मोदी सरकार ने संस्‍कृति और कला के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है, जिसकी वजह से भारत की संस्‍कृति को देखकर पूरा विश्‍व चकित है। विकसित भारत बनाने में संस्‍कृति और पर्यटन की महत्‍वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। उन्होंने कहा कि हमारी टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विजन के अनुसार संस्‍कृति, कला और पर्यटन के क्षेत्र में नए सोपान तय करने के लिए शानदार काम करेगी।शेखावत ने कहा कि देश की जनता विकसित भारत को लेकर पूरी तरह आश्‍वस्‍त है। इसी विश्‍वास की वजह से जनता ने मोदी जी को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का सौभाग्‍यपूर्ण अवसर दिया है। उन्‍होंने कहा कि मोदी के नेतृत्‍व में पिछले 10 वर्षों में देश में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। देश को निराशा के गर्त से निकाल कर उसे आशा से लबरेज किया है। उन्‍होंने कहा कि भारत विकसित हो सकता है, इस संदेश को प्रधानमंत्री ने पूरे विश्‍व तक पहुंचाया है, जिस वजह से दुनिया भी यह जानती है कि भारत को विकसित राष्‍ट्र बनने से कोई रोक नहीं सकता है। शेखावत ने कहा कि यही विश्‍वास देश की जनता को भी है। लिहाजा, इस बार की भी प्रचंड जीत इसी विश्‍वास पर जनता की मुहर है। इससे पहले, पदभार ग्रहण करने के दौरान दोनों मंत्रालयों की टीम ने केंद्रीय मंत्री का आत्‍मीय स्‍वागत किया। शेखावत ने दोनों मंत्रालयों में अधिकारियों संग मीटिंग की। पदभार ग्रहण करने के दौरान केंद्रीय मंत्री शेखावत का परिवार भी साथ रहा।

यात्रियों के हौसले बुलंद, वंदे भारत में भी चढ़ गए बिना टिकट वाले यात्री, ट्रेन की जनरल बोगी भी हो गई फेल

नई दिल्ली ट्रेनों में बिना टिकट वाले यात्रियों के AC कोच में चढ़ जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। मगर, अब तो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन भी इससे अछूती नहीं रही। जी हां, लखनऊ-हरिद्वार वंदे भारत से ऐसा ही मामला सामने आया है। इस ट्रेन में बिना टिकट वाले ढेर सारे यात्री चढ़ गए, जिससे टिकट बुक करवा चुके लोगों को काफी परेशानी हुई। इसका वीडियो सामने आया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंटरनेट यूजर्स इसे देखकर हैरान हैं और सवाल कर रहे हैं कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है। इसे लेकर रेलवे प्रशासन से भी सवाल पूछे जा रहे हैं।   वायरल वीडियो में कई यात्री ट्रेन नंबर 22545 में चढ़ते हुए दिख रहे हैं जो कुछ ही देर बाद सीट के लिए संघर्ष करने लगते हैं। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे कि यह किसी ट्रेन का जनरल कोच हो। ट्रेन के स्लीपर और एससी कोच में बिना टिकट वाले यात्रियों के चढ़ने के मामले कई बार देखे गए हैं। हालांकि, इसे देखकर हैरानी होती है कि अब तो लोग वंदे भारत ट्रेनों में भी बिना टिकट के ही घुस जा रहे हैं। वीडियो को शेयर करते हुए एक एक्स यूजर ने लिखा, ‘यह देखिए कि कैसे बिना टिकट वाले यात्रियों ने वंदे भारत ट्रेन पर ‘कब्जा’ जमा लिया है।’ इसके साथ उसने भारतीय रेलवे, लखनऊ रेलवे और इंडियन रेल मीडिया को टैग भी किया है। लोगों ने कमेंट करके जताया गुस्सा वंदे भारत ट्रेन में बिना टिकट वाले यात्रियों के घुसने के वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसे अब तक 10 हजार से ज्यादा बार देखा जा चुका है। लोगों ने इस पर ढेर सारे कमेंट्स किए हैं और वीडियो खूब शेयर भी किया जा रहा है। एक इंटरनेट यूजर ने कहा, ‘यह बड़ी समस्या है! कुछ दिनों पहले मैं तिरुपति-सिकंदराबाद वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रा कर रहा था। इस दौरान किसी बेटिकट यात्री ने बोगी के टॉयलेट में सिगरेट जला दी जिससे फायर अलार्म बजने लगा।’ एक अन्य यूजर ने लिखा कि आखिर टीटी कहां था। उसने इन लोगों को ट्रेन में चढ़ने की इजाजत कैसे दी। ऐसा लगता है कि रेल मंत्रालय का मजाक उड़ाने के लिए यह जानबूझकर किया गया हो।  

छत्तीसगढ़-बलौदा बाजार में पेट्रोल-पत्थर-डंडे लेकर पहुंचे थे उपद्रवी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार में  सतनामी समाज के द्वारा किया गया आंदोलन हिंसक रूप ले लिया। आंदोलन करने हजारों की संख्या में पहुंची भीड़ कलेक्ट्रेट कार्यालय के अंदर पहुंचते ही उपद्रवियों में तब्दील हो गई। आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने आए यह लोग कहीं गाड़ी तोड़ रहे थे, तो कोई आगजनी की घटना को अंजाम दे रहा था। हजारों की संख्या में पहुंचे आंदोलनकारी को रोकने वाली पुलिस पर पत्थर और डंडे बरसाए जा रहे थे। वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करने वाले पत्रकारों पर भी उपद्रवियों ने पत्थर फेक और उन्हें पीटने का प्रयास किया। दरअसल यह भीड़ अपने नेताओं के संरक्षण में सतनामी समाज के इस आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए आई हुई थी। सतनामी समाज के लोग जो पहले सिर्फ ज्ञापन सौंपने के लिए पहुंचे थे, वह अचानक हिंसक बलवाइयों में तब्दील हो जाएंगे यह किसी ने नहीं सोचा था।‌ पेट्रोल, पत्थर और डंडे‌ लेकर आंदोलन जैतखाम काटने के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन आग का रूप ले लेगा यह किसी ने नहीं सोचा था। 10 जून को सीबीआई जांच को लेकर ज्ञापन सौंपने का यह आंदोलन आग के गोले में कब तब्दील हो गया किसी को पता ही नहीं चला। समाज के नेता मंच से भाषण दे रहे थे, लेकिन जिस तरह से लोगों की भीड़ आंदोलन का हिस्सा बनती गई जिसे काबू कर पाना मुश्किल हो गया। इसके बाद कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने पहुंची भीड़ पुलिस पर पथराव और डंडे मारते हुए कलेक्ट्रेट परिसर की गाड़ियों को चकनाचूर करने के बाद उनमें आग लगा दी। गाड़ियों की आग इतनी तेज थी कि उसने धीरे-धीरे पूरे कलेक्ट्रेट परिसर को जलाना शुरू कर दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि केवल ज्ञापन देने की बात पर पहुंची यह भीड़ आखिर पेट्रोल, पत्थर और डंडे अपने साथ क्यों लेकर पहुंची हुई थी। आगजनी के बाद‌ कलेक्ट्रेट परिसर में लगाया समाजिक झंडा आंदोलन करने पहुंचे उपद्रवियों ने बैरिकेड तोड़ने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर घुसकर पहले तोड़फोड़ की। उसके बाद परिसर में खड़ी गाड़ियों पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। हजारों की संख्या में कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर घुसे लोगों ने पुलिस कर्मियों पर पत्थर और डंडे फेंकना शुरू कर दिए। इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया में सामने आया जिसमें उपद्रवियों के द्वारा इस आगजनी की घटना को अंजाम देने के बाद सामाजिक झंडा फहराया गया। 100 बाइक, 20 से ज्यादा कार और 2 दमकल के वाहन को किया आग के हवाले आंदोलन करने पहुंचे प्रदर्शनकारियों के द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में तोड़फोड़ की घटना को अंजाम देने के बाद वहां खड़ी 100 बाइक, 20 से ज्यादा कार और दो दमकल वाहन को आग के हवाले कर दिया। जानकारी के मुताबिक इस आंदोलन में करोड़ों रुपए से ज्यादा का शासकीय नुकसान हुआ है। वहीं कई शासकीय महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर भी खाक हो गए हैं। इस घटना में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। जिसमें 12 पुलिसकर्मी गंभीर बताई जा रहे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद देर रात डिप्टी सीएम विजय शर्मा घटनास्थल पहुंच कर मौके का जायजा लिया है। वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपद्रवियों की गिरफ्तारियां के आदेश जारी किए हैं। इस पूरे मामले में मंगलवार सुबह तक 170 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

जेपी नड्डा मोदी कैबिनेट में शामिल होने के कारण भाजपा को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद पार्टी को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश करनी है। भाजपा में आमतौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मुताबिक, सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करने की परंपरा रही है। भाजपा के संविधान की धारा-19 के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें राष्ट्रीय और प्रदेश परिषद के सभी सदस्य शामिल होते हैं। इससे पहले पार्टी को जिला से लेकर राज्य स्तर तक चुनाव की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निर्धारित नियमों के अनुसार ही कराया जाता है। पार्टी संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष वही व्यक्ति हो सकेगा जो कम से कम चार अवधियों तक सक्रिय सदस्य और कम से कम 15 वर्ष तक प्राथमिक सदस्य रहा हो। निर्वाचक मंडल में से कोई भी 20 सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की अर्हता रखने वाले व्यक्ति के नाम का संयुक्त रूप से प्रस्ताव कर सकेंगे। यह संयुक्त प्रस्ताव कम से कम ऐसे पांच प्रदेशों से आना जरूरी है, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव संपन्न हो चुके हों। नामांकन पत्र पर उम्मीदवार की स्वीकृति आवश्यक है। इससे पहले आम तौर पर देशभर में पार्टी सदस्यता अभियान भी चलाती है। ऐसे में इस सारी प्रक्रिया को पूरा होने में तीन से चार महीने का वक्त लगता है। यही वजह है कि निर्वाचन प्रक्रिया से गुजर कर राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में लगने वाले समय को देखते हुए पार्टी स्तर पर कई विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो, भाजपा पूर्णकालिक अध्यक्ष चुने जाने तक किसी नेता को उसी तरह से पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है, जैसे 2019 में तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह के कैबिनेट मंत्री बनने पर जेपी नड्डा को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक जेपी नड्डा केंद्रीय मंत्री और पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष दोनों का कामकाज देखते रहेंगे। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के गृह मंत्री बनने पर जुलाई 2019 में नड्डा को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, इसके कुछ महीने बाद ही उन्हें तीन वर्षीय कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने पार्टी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की कमान 20 जनवरी 2020 को संभाली थी। उनका कार्यकाल जनवरी 2023 में ही समाप्त हो गया था। लेकिन, लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जेपी नड्डा के कार्यकाल को जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था। उनका अध्यक्षीय कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है। इसी वर्ष फरवरी 2024 में दिल्ली में हुए भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन की बैठक में पार्टी संविधान में संशोधन करते हुए पार्टी के फैसले लेने वाली सर्वोच्च इकाई संसदीय बोर्ड को आपात स्थिति में पार्टी अध्यक्ष से संबंधित फैसला लेने की शक्ति दी गई। पार्टी का संसदीय बोर्ड परिस्थिति के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल को बढ़ाने या घटाने का फैसला कर सकता है। भाजपा के संविधान की धारा-21 में अध्यक्ष के कार्यकाल का जिक्र है। इसके मुताबिक, कोई व्यक्ति तीन-तीन साल के लगातार दो कार्यकाल तक ही भाजपा का अध्यक्ष रह सकता है।  

ओडिशा में CM के अलावा मुख्यमंत्री आवास की भी चल रही खोज, भाजपा नहीं कर पारही तय

भुवनेश्वर नई दिल्ली ओडिशा विधान सभा चुनाव के नतीजे आए हुए एक हफ्ते हो चुके हैं लेकिन अभी तक भाजपा यह तय नहीं कर सकी है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। हालिया चुनावों में भाजपा को सरकार बनाने का जनादेश मिला है और तब से ही कयासों का दौर जारी है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और भूपेंद्र यादव को पर्यवेक्षक बनाकर भुवनेश्वर भेजा है। आज (मंगलवार) शाम ओडिशा भाजपा विधायक दल की बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि देर शाम तक यह साफ हो जाएगा कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। राज्य में  नए मुख्यमंत्री की खोज के साथ-साथ दूसरी तरफ राज्य के अधिकारी नया मुख्यमंत्री आवास ढूंढ़ने में परेशान हैं क्योंकि पिछले 24 साल से नवीन पटनायक वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे और अपने घर ‘नवीन निवास’ को ही आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री का आवास बना दिया था। बता दें कि साल 2000 में नवीन पटनायक ने ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उसके बाद उन्होंने सरकार द्वारा आवंटित सीएम आवास में शिफ्ट होने की बजाय अपने घर से ही काम करने का विकल्प चुना था। पटनायक के इस फैसले की तब काफी सराहना की गई थी और इसे एक मिसाल के तौर पर लिया गया था। नवीन पटनायक के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने नवीन निवास नाम की भव्य हवेली बनवाई थी। नवीन पटनायक पिछले 24 साल से इसी हवेली से राज्य का बागडोर संभाल रहे थे। वह सबसे लंबी अवधि तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने से एक महीने पहले ही चुनावों में भाजपा से हार गए थे। हालिया चुनावों में 147 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा को 78 सीटों पर जीत के साथ ही बहुमत मिला है।  राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) तथा जम्मू कश्मीर के पूर्व उप राज्यपाल गिरीश मुर्मू का भी नाम सीएम पद की दौड़ में शामिल है। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब मुर्मू उनके प्रधान सचिव रहे थे। कई पार्टी नेताओं ने कहा कि भाजपा नेतृत्व मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह किसी नए नाम को प्रस्तुत कर सभी को चौंका सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 12 जून को शाम पांच बजे आयोजित किया जा सकता है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को अपराह्न ढाई बजे भुवनेश्वर पहुंच सकते हैं और हवाई अड्डे से राजभवन जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार बाद में वह शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए जनता मैदान पहुंचेंगे। शपथ ग्रहण समारोह के लिए प्रस्तावित स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।  

छत्तीसगढ़-मनेन्द्रगढ़ में अतिक्रमणकारियों के घरों पर चला बुलडोजर

मनेन्द्रगढ़. जिला एमसीबी के अंतर्गत आने वाले वन मंडल मनेंद्रगढ़ के मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 704 के वन भूमि पर अवैध कब्जाधारियों के घरों को खाली करने के लिए पीओआर के साथ नोटिस भी जारी किया गया था। वन भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान बनाए जाने को लेकर आज वन विभाग बड़ी कार्यवाही करते हुए अवैध कब्जाधारियों के अतिक्रमण कर घर बनाए बना कर रह रहे थे जिन पर वन विभाग अमला बड़ी कार्यवाही करते हुए वन भूमि पर अवैध तरीके से बने मकान पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। 30 से 40 मकान पर बुलडोजर चलते हुए पूरे घर को गिरा दिया गया जिस पर वन विभाग के अधिकारियों का कहना था कि वन भूमि पर गलत तरीके से अवैध कब्जा कर मकान बनाने का काम चल रहा था कई बार समझाइए देने के साथ नोटिस भी दिया गया वन विभाग की उच्च अधिकारियों की दिशा निर्देश पालन करते हुए वन भूमि पर अवैध तरीके से कब्जाधारियों के मकान पर बुलडोजर चलते हुए जमीन को खाली कराया गया इस कार्य में वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस भी मौजूद रही। आपको बता दें कि वन परिक्षेत्र मनेंद्रगढ़ के कक्ष क्रमांक 704 वनभूमि पर लोगों के द्वारा अवैध कब्जा कर मकान बनाया जा रहा था जी को लेकर वन विभाग प्रशासन हरकत में आया और पुलिस विभाग के सहयोग साथ ही बड़ी संख्या में वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौके पर उपस्थित होकर अवैध तरीके से वन भूमि पर कब्जाधारियों के मकान पर बुलडोजर चलते हुए वन भूमि को खाली कराया गया। वहीं दूसरी ओर कब्जाधारियों ने भी मीडिया के सामने अपने दुख तकलीफों को रखते हुए कहा कि हम लोग 2 से 3 सालों से यहां पर रह रहे हैं और आज हम लोग को यहां से हटा दिया जा रहा है साथ ही वन भूमि पर और भी कई लोग सालों से कब्जा करके घर बनाकर रह रहे हैं उनको नहीं हटाया जा रहा है और हम लोग न्याय के लिए कलेक्टर के पास जाएंगे अब देखने वाली बात होगी कि वनभूमि पर अवैध कब्जे को लेकर आगे किस प्रकार से कार्यवाही होती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

सोशल मीडिया पर हो रहा प्रेमानंद का वीडियो, प्रदीप मिश्रा को लिया आड़े हाथ

सीहोर मध्यप्रदेश में सीहोर जिले वाले पंडित यानी प्रदीप मिश्रा का कहना है कि बरसाना राधा जी का मायका नहीं है। राधा रावल गांव की थीं और उनकी शादी छाता में हुई थी। राधा के पिता जी की कचहरी थी। यानी राधा जी के पिता वहां पर कोर्ट लगाते थे। मिश्रा ने यह भी कहा, बरसाने का मतलब है कि बरस यानी साल में एक बार आना। मतबल राधा के पिता साल में एक बार यहां आते थे।   बता दें कि इस बात पर प्रेमानंद महाराज ने प्रदीप मिश्रा को आड़े हाथ ले लिया। उनका कहना है कि प्रदीप मिश्रा को कुछ अता-पता नहीं है। प्रदीप मिश्रा ने राधा को समझा ही नहीं है। प्रेमानंद इस मुद्दे पर वायरल वीडियो में प्रदीप मिश्रा के लिए खड़ी भाषा का उपयोग करते हुए सुने जा सकते हैं।   बता दें कि पंडित प्रदीप मिश्रा एक प्रसिद्ध कथावाचक गायक और आध्यात्मिक गुरु हैं। कथावचक पंडित मिश्रा की कथाओं को देश-दुनिया के लोग सुनते हैं। प्रदीप मिश्रा के ज्यादातर प्रवचन कथा शिव पुराण से संबंधित होती हैं और पंडित मिश्रा ने कथा वाचन भी शिव पुराण से ही शुरू किया था। वहीं, राधारानी के परम भक्त और वृंदावन वाले प्रेमानंद जी महाराज को भला कौन नहीं जानता है। वे आज के समय के प्रसिद्ध संत हैं। यही कारण है कि उनके भजन और सत्संग में दूर-दूर से लोग आते हैं। प्रेमांनद जी महाराज की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है। कहा जाता है कि भोलेनाथ ने स्वयं प्रेमानंद जी महाराज को दर्शन दिए। इसके बाद वे घर का त्याग कर वृंदावन आ गए। प्रेमानंद जी महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। प्रेमानंद जी के बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। इनके पिता का नाम शंभू पांडे और माता का नाम रामा देवी है। सबसे पहले प्रेमानंद जी के दादाजी ने संन्यास ग्रहण किया। साथ ही इनके पिताजी भी भगवान की भक्ति करते थे और इनके बड़े भाई भी प्रतिदिन भगवत का पाठ किया करते थे।

तृणमूल कांग्रेस सरकार ने महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 4% की बढ़ोतरी की गई

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 4% की बढ़ोतरी की गई है। इसे लेकर सरकारी अधिसूचना मंगलवार को जारी हुई। इसमें बताया गया कि यह आदेश 1 अप्रैल 2024 से लागू होगा। नोटिफिकेशन में कहा गया, ‘महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की दर में वृद्धि और वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या 1090-एफ(पी2) दिनांक 01/03/2024 के अनुसार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए दैनिक मजदूरी दर 01/05/2024 के स्थान पर 01/04/2024 से लागू होगी। राज्यपाल ने फैसले को मंजूरी दी है। राज्य सरकार और सरकारी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थाओं, सांविधिक निकायों, सरकारी उपक्रमों, पंचायतों (पंचायत कर्मी सहित), नगर निगमों/नगर पालिकाओं, स्थानीय निकायों आदि के कर्मचारियों और पेंशनरों/परिवार पेंशनरों को इसका लाभ मिलेगा।’ दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पंजाब में प्रदर्शनकारी किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी दिए जाने का मुद्दा संसद के आगामी सत्र में उठाएगी। टीएमसी के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से पंजाब के खनौरी सीमा पर किसानों से मुलाकात के बाद यह आश्वासन दिया गया। बनर्जी ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि TMC हमेशा किसानों के न्याय के लिए खड़ी रहेगी। MSP को लेकर टीएमसी का बड़ा बयान प्रतिनिधिमंडल में टीएमसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन, मोहम्मद नदीमुल हक, डोला सेन, सागरिका घोष और साकेत गोखले शामिल थे। ये सभी राज्यसभा सदस्य हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनर्जी ने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल से फोन पर बातचीत की। बनर्जी ने उन्हें बताया कि आगामी संसद सत्र के दौरान उनकी पार्टी के सांसद फसलों के लिए एमएसपी की गारंटी देने वाले कानून का मुद्दा उठाएंगे। सागरिका घोष ने किसानों से मुलाकात के बाद पोस्ट किया, ‘हमारी नेता ममता बनर्जी ने किसान नेताओं से फोन के माध्यम से बात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि हमारी पार्टी हमेशा किसानों के न्याय के लिए खड़ी रहेगी। जय हिंद। जय किसान।’

अस्पताल में एक युवक की उपचार की दौरान मौत, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाए लापरवाही के आरोप

धार शहर के श्री श्याम अस्पताल में एक युवक की उपचार की दौरान मौत हो गई। रात को ही मृतक के स्वजजनों ने डॉक्टर व चिकित्सालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए चिकित्सालय के सामने ही रात्रि में विरोध प्रदर्शन किया घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और मृतक के स्वजनों को समझाइश देने के बाद मामला शांत करवाया। मृतक का शव पीएम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया। यहां पीएम के बाद शव को स्वजन को सुपुर्द कर दिया गया। मामले को लेकर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच प्रारंभ कर दी है। वहीं इस मामले में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ अब जांच होंगी। इतना ही नहीं इस जांच के दायरे में सरकारी डॉक्टर भी आएंगे जो यहां आकर सेवा दे रहे थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक नगर के मांडू नाका स्थित श्री श्याम अस्पताल में धरमपुरी तहसील के ग्राम पंधनिया से अमर सिंह पुत्र अंबाराम अपने स्वजनों के साथ आठ जून को पथरी के इलाज के लिए भर्ती हुआ था। 10 जून को दोपहर में अमर सिंह का ऑपरेशन डॉक्टर संजय राठौड़ ने किया। ऑपरेशन होने के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद डॉक्टर ने कहा था कि उसका उपचार जारी है, किंतु मरीज को रात 9 बजे तक होश नहीं आया। इसके बाद अमर सिंह की सांसे लंबी-लंबी चलने लगी। इस पर स्वजन घबराने लगे और तुरंत ही डॉक्टर को जानकारी दी गई। इसके बाद युवक की मौत हो गई। स्वजनों ने अस्पताल के सामने ही जमकर विरोध प्रदर्शन किया। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर मोदी पुलिस और तहसीलदार पहुंचे। उन्होंने मरीज को देखा तो तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। अस्पताल के डॉ संजय राठौड़ ने कहा कि डॉक्टर गिरिराज भूरा ने ही अमर सिंह को बेहोश किया था। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उपचार के लिए रुपय मृतक के स्वजनों ने कहा कि शासन की योजना के तहत आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पांच लाख रु तक का मुफ्त इलाज होता है। इस पर हमने अस्पताल के कर्मचारियों को आयुष्मान कार्ड भी बताया, किंतु कार्ड मान्य नहीं किया गया। हमसे उपचार के लिए 12 हजार से अधिक राशि ली गई। रु लेने के बावजूद अमर सिंह का जीवन नहीं बचा पाए। मरीज हमारे पास में पथरी का इलाज करवाने के लिए आए थे। मरीज की पूरी मेडिकल फिटनेस के बाद ही हमने दूरबीन के माध्यम से ऑपरेशन किया। ऑपरेशन सफल रहा। इसके बाद शाम को वह लंबी सांस लेने लगा। हम तुरंत ही मरीज को आईसीयू में ले गए। यहां पर वेंटीलेटर पर लिया, किंतु मरीज की मौत हो गई।

कैसे इस नेता की लगी लॉटरी- शपथ समारोह देखने पहुंचे थे और बन गए मोदी सरकार के मंत्री

नई दिल्ली भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में किसी भी मुस्लिम नेता को एंट्री नहीं मिली है। पीएम मोदी समेत कुल 72 मंत्रियों में एक भी मुस्लिम नहीं है, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय के 5 मंत्री जरूर हैं। इनमें से एक मंत्री जॉर्ज कुरियन की काफी चर्चा हो रही है, जो लोकसभा या राज्यसभा किसी भी सदन के मेंबर नहीं हैं। इसके बाद भी वह अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री हैं। वह केरल के रहने वाले हैं और ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उन्हें मंत्री पद दिए जाने के पीछे भाजपा की केरल में ईसाइयों को लुभाने की रणनीति बताई जा रही है। केरल में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई तीनों ही समुदायों की अच्छी आबादी है। भाजपा को आमतौर पर हिंदुओं के एक वर्ग का समर्थन मिलता है। वहीं मुस्लिमों के बीच कांग्रेस की अच्छी पैठ है, जबकि ईसाई मत के लोग वामपंथी दलों के पाले में रहे हैं। जॉर्ज कुरियन को जिस तरह से मंत्री पद दिया गया, उस पर ज्यादातर लोगों को हैरानी हो रही है। यही नहीं खुद जॉर्ज कुरियन भी उस वक्त हैरान हो गए थे, जब उन्हें पता चला कि वह आज मंत्री पद की शपथ लेंगे। जॉर्ज कुरियन के मुताबिक वह शनिवार की शाम को मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का गवाह बनने के लिए दिल्ली आए थे। लेकिन रविवार की सुबह वह हैरान रह गए, जब पता चला कि वह भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। इसका उन्हें खुद भी किसी तरह से अंदाजा नहीं था क्योंकि वह न तो लोकसभा के और ना ही राज्यसभा के सांसद हैं। केरल में भाजपा से जुड़ने वाले ईसाई समुदाय के कई नेता रहे हैं। फिर भी कुरियन पर ही भरोसा जताने की वजह यह है कि वह भाजपा के लिए वफादार रहे हैं। आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से वह जुड़े रहे हैं। इसके अलावा दशकों से भाजपा में सक्रिय हैं। इसलिए उन्हें मौका देना एक तरह से वफादारी का इनाम भी है। इसके अलावा ईसाई समुदाय के बीच अपनी विचारधारा में ही पले-बढ़े एक नेता को पार्टी तैयार करना चाहती है। मंत्री बन बोले- अल्पसंख्यक समाज के लिए काम करूंगा साइरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े जॉर्ज कुरियन केरल में काफी सक्रिय रहे हैं। वह राज्य में ईसाई समुदाय के लोगों के बीच भाजपा की पहुंच बढ़ाने के प्रयास करते रहे हैं। अब उनका कहना है कि मुझे अल्पसंख्यक मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है, जिसमें पूरी गंभीरता के साथ काम करूंगा। अपने समुदाय समेत पूरे अल्पसंख्यक समाज के हित के लिए काम करूंगा। उन्हें पशुपालन विभाग में भी राज्य मंत्री का जिम्मा मिला है। 

राजस्थान-मेवाड़ विश्वविद्यालय के डिप्टी कंट्रोलर और सेक्शन ऑफिसर को फर्जी डिग्री मामले में किया गिरफ्तार

जयपुर. राजस्थान लोक सेवा आयोग की हिंदी लेक्चरर भर्ती परीक्षा का फॉर्म फर्जी डिग्री के जरिए भरने के मामले में एसओजी ने एक बार फिर मेवाड़ विश्वविद्यालय गंगरार पर शिकंजा कसा है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने परीक्षा कंट्रोलर और सेक्शन ऑफिसर को गिरफ्तार किया है. इससे पहले इस मामले में विश्वविद्यालय के डीन सहित पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप अजमेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सोनी के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई है। विश्वविद्यालय के डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन सुशील शर्मा को रिमांड पर लिया गया है। आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि इस गिरोह के तार दिल्ली तक जुड़े हैं। मामले में विश्वविद्यालय के और भी कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो सकती है। सोनी ने बताया कि डिप्टी कंट्रोलर शर्मा दिल्ली से ये फर्जी डिग्री तैयार करवाता था और 20 मार्च को गिरफ्तार हुई कैंडिडेट का भाई सेक्शन ऑफिसर राजेश सिंह के संपर्क में था। दोनों ही डिग्री खरीद कर लाए थे. राजेश के जरिए ही सुशील शर्मा और यूनिवर्सिटी के डीन कौशल किशोर चंदरुल तक कांटेक्ट होता था। बाद में सुशील ही दिल्ली से ही फर्जी डिग्री तैयार करवाता था। इस पूरे फर्जीवाड़ में एक बड़ा नेटवर्क है जिसमें जल्द ही अन्य लोगों की गिरफ्तारी होगी। फर्जी डिग्री मामले में विश्वविद्यालय के दो और अधिकारियों की गिरफ्तारी के साथ ही विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारियों में खलबली मची है। बता दें कि इस मामले में 20 मार्च को एसओजी ने दो महिला कैंडिडेट कमल और ब्रह्म कुमारी के बाद मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डीन कौशल किशोर चंदरुल सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

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