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यूपी में टीचर, वकील और पत्रकारों के लिए फ्लैट्स, सीएम योगी ने किया बड़ा ऐलान

 लखनऊ सीएम योगी ने प्रदेश में शिक्षकों, वकीलों और पत्रकारों के लिए भी आवासीय योजनाएं विकसित करने की बात कही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ किया है कि जिन लोगों के पास अपनी जमीन नहीं है, उनके लिए बहुमंजिला मकान  तैयार किए जाएंगे. सीएम योगी ने कहा कि माफियाओं ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा था, जिन्हें अब मुक्त कराकर उपयोग में लाया जा रहा है. जहां ऐसी जमीन शेष है, उसे भी खाली कराया जाएगा और मकान बनवाकर शिक्षकों, वकीलों और पत्रकारों को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने  कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बड़ी मात्रा में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे थे. इन जमीनों को अब मुक्त कराया गया है और उनका उपयोग आम लोगों के हित में किया जा रहा है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी ऐसी जमीनें अब भी कब्जे में हैं, उन्हें प्राथमिकता से खाली कराया जाए. इन जमीनों पर हाईराइज मकान विकसित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके. मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर माफिया की जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल भी इसी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। अब सिर्फ गरीब ही नहीं, हर वर्ग पर फोकस अधिकारियों का कहना है कि अब तक आवास योजनाएं मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए केंद्रित थीं, लेकिन इस बार सरकार ने दायरा बढ़ाने की बात कही है. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी 2.0) के तहत 90 हजार लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 900 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई. यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई, जिससे वे अपने घर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकें. सरकार का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके। जो हक छीना, अब वही लौटेगा मुख्यमंत्री ने सख्त शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक गरीबों का हक छीना और जमीनों पर कब्जा किया, अब समय आ गया है कि वही संसाधन समाज के हित में वापस आएं. उनका कहना था कि यह केवल योजना नहीं, बल्कि एक तरह से सामाजिक न्याय की प्रक्रिया है, जिसमें छिने हुए अधिकार वापस दिलाने का प्रयास किया जा रहा है. सरकार के अनुसार, प्रदेश में अब तक करीब 62 लाख परिवारों को विभिन्न योजनाओं के तहत आवास उपलब्ध कराया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना घर हो. यह केवल एक भौतिक जरूरत नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा विषय भी है. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय को दिया। 25 करोड़ जनता ही परिवार  मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले योजनाएं होने के बावजूद उनका लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता था. अब सरकार 25 करोड़ प्रदेशवासी ही परिवार हैं” की सोच के साथ काम कर रही है. इसी कारण बिना भेदभाव हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. उनका कहना था कि जब शासन का नजरिया व्यापक होता है, तभी योजनाओं का असर जमीन पर दिखता है। बीमारू से ग्रोथ इंजन तक का दावा मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बदलती छवि का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ की छवि से निकलकर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उन्होंने इसे विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे में सुधार और जनकल्याणकारी नीतियों का परिणाम बताया. सरकार का कहना है कि अब केवल घर देना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उसके साथ सभी जरूरी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं. लाभार्थियों को शौचालय, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ अन्य योजनाओं का भी लाभ दिया जा रहा है. जैसे कि उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हैं।

बांग्लादेश क्रिकेट में नया विवाद, ICC लगाएगी बैन चेतावनी, सरकार को मिली हिदायत

 नई दिल्ली  बांग्लादेश क्रिकेट में इस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि बोर्ड के मामलों में हस्तक्षेप से इंटरनेशनल लेवल पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दरअसल, खेल मंत्रालय ने पिछले साल हुए BCB चुनाव में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है. इस कमेटी को 11 मार्च से 15 कार्यदिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. जांच में ‘अनियमितता, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग’ जैसे आरोपों की पड़ताल की जाएगी। क्रिकइंफो की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक- BCB ने अपने बयान में साफ किया कि इस मामले को लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल (ICC) के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा हो चुकी है. बोर्ड का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए क्रिकेट बोर्ड में सरकारी दखल ICC के नियमों के खिलाफ माना जाता है, जिससे बांग्लादेश पर बैन का खतरा भी पैदा हो सकता है. इससे पहले जिम्बाब्वे और श्रीलंका जैसे देशों पर इसी वजह से कार्रवाई हो चुकी है. ध्यान रहे ICC ने पहले भी सरकारी दखल के लिए जिम्बाब्वे और श्रीलंका समेत कई क्रिकेट बोर्ड को सस्पेंड किया था। सरकार से सीधे बातचीत की मांग BCB ने कहा कि वह शिकायत करने से पहले नेशनल स्पोर्ट्स काउंसिल से सीधे बात करना चाहता है, ताकि गजट के ‘इरादे और असर’ को समझा जा सके. साथ ही बोर्ड ने जांच कमेटी को पूरी तरह खत्म करने की मांग भी रखी है, ताकि क्रिकेट की स्थिरता बनी रहे। तमीम इकबाल के आरोप से भड़का विवाद पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने BCB अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम पर चुनाव प्रक्रिया में दखल देने का आरोप लगाया. तमीम का दावा था कि चुनाव से पहले अमीनुल ने खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कुछ जिलों के काउंसलर बदलने को कहा. इसके अलावा नामांकन की तारीख दो बार बढ़ाने का भी आरोप लगाया गया. हालांकि, अमीनुल इस्लाम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। चुनाव के बाद भी नहीं थमा बवाल 1 अक्टूबर को तमीम इकबाल ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी. 6 अक्टूबर को चुनाव हुए, लेकिन इसके बाद भी विवाद थमा नहीं. ढाका क्लब अधिकारियों और कई अन्य समूहों ने चुनाव में ‘इंजीनियरिंग’ का आरोप लगाया. नतीजों के कुछ घंटों के भीतर ही खेल मंत्रालय को अपने एक निदेशक उम्मीदवार को वापस लेना पड़ा. उनके राजनीतिक संबंध सोशल मीडिया पर सामने आ गए। ढाका लीग का बहिष्कार BCB चुनाव के बाद हालात और बिगड़ गए. ढाका के कई क्लब (कैटेगरी-2) ने मौजूदा बोर्ड को ‘गैरकानूनी’ करार दिया और 2025-26 सीजन की ढाका लीग का बहिष्कार कर दिया।

उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान: धर्मांतरण विरोधी कानून के समर्थन में, क्या हिंदुत्व ने प्रभावित किया?

मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. जो उद्धव ठाकरे पिछले कुछ सालों से ‘सेकुलर’ राजनीति के पाले में खड़े नजर आ रहे थे, वे अब फिर से अपनी पुरानी राह यानी हिंदुत्व की ओर मुड़ते दिख रहे हैं. इसका सबसे बड़ा संकेत है महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी बिल को उनका समर्थन. इसे राजनीतिक ‘घर-वापसी‘ भी कहा जा रहा है। उद्धव ठाकरे की राजनीति का सफर पिछले पांच सालों में किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रहा है. साल 2019 में जब उन्होंने दशकों पुराना बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस और शरद पवार से हाथ मिलाया, तो इसे भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा ‘यू-टर्न’ कहा गया। गठबंधन बदलने के साथ ही उद्धव पर आरोप लगने लगे कि उन्होंने सत्ता के लिए बाल ठाकरे की विचारधारा को तिलांजलि दे दी है. मुख्यमंत्री रहते हुए जब पालघर में साधुओं की हत्या हुई या सावरकर के मुद्दे पर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया, तब उद्धव की चुप्पी ने उनके कट्टर समर्थक कैडर को बेचैन कर दिया. नतीजा यह हुआ कि उनके हिंदुत्व के एजेंडे पर सवाल उठने लगे. इस दौरान मुस्लिम मतदाताओं के बीच उद्धव की स्वीकार्यता जरूर बढ़ी, लेकिन उनकी अपनी मूल पहचान धुंधली होती गई। वक्फ बिल और शिंदे का प्रहार पार्टी में टूट के बाद जब वक्फ संशोधन कानून की बात आई, तो उद्धव की पार्टी (यूबीटी) ने इसका विरोध किया. इस मौके को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हाथ से जाने नहीं दिया. शिंदे ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उद्धव अब वही भाषा बोल रहे हैं जो ओवैसी बोलते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव अब ‘जनाब’ सेना बन चुके हैं। महाराष्ट्र चुनाव परिणाम और हकीकत का सामना हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों ने उद्धव ठाकरे को आईना दिखा दिया. पार्टी न केवल दो फाड़ हुई, बल्कि चुनावी मैदान में भी धराशायी हो गई. मुस्लिम वोटों के भरोसे वे अपनी पुरानी जमीन नहीं बचा सके. अब जब अस्तित्व पर संकट आया है, तो उद्धव को फिर से उसी हिंदुत्व की याद आई है जिसके दम पर शिवसेना खड़ी हुई थी. धर्मांतरण विरोधी बिल का समर्थन करना इसी ‘घर वापसी’ की कोशिश का हिस्सा है. वे यह संदेश देना चाहते हैं कि भले ही वे विपक्षी गठबंधन में हैं, लेकिन हिंदुत्व के बुनियादी मुद्दों पर समझौता नहीं करेंगे। क्या है महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी बिल और इसकी बारीकियां? महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार जिस धर्मांतरण विरोधी कानून को लाने की तैयारी में है, वह केवल एक कानून नहीं बल्कि देश में एक बड़ी बहस और विवाद भी है. इस बिल के जरिए सरकार राज्य में जबरन या लालच देकर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर लगाम लगाना चाहती है। -बिल में अवैध धर्मांतरण की परिभाषा लंबी-चौड़ी है. जबरदस्ती. लालच. धोखा. भ्रम. प्रलोभन. गलत बयानी. दबाव. या किसी की मजबूरी का फायदा उठाना. नाबालिगों का मामला भी शामिल है। -अगर कोई शादी के जरिए धर्म बदलवाता है तो वह शादी भी रद्द मानी जाएगी. बच्चे का धर्म भी तय करने का प्रावधान है. अगर शादी अवैध तरीके से हुई तो बच्चे का धर्म मां या बाप के मूल धर्म के हिसाब से होगा। -कोई धर्म बदलना चाहे तो 60 दिन पहले जिला अधिकारी को सूचना देनी होगी. पुलिस खुद से भी कार्रवाई कर सकती है. एफआईआर कोई भी रिश्तेदार दे सकता है. मां बाप भाई बहन या खून का रिश्ता रखने वाला। -सबूत का बोझ उल्टा है. आरोपी को साबित करना होगा कि धर्मांतरण वैध था. पीड़ित को नहीं। -सजा भी भारी है. अवैध धर्मांतरण पर सात साल जेल और एक लाख रुपए जुर्माना. सामूहिक धर्मांतरण पर सात साल जेल और पांच लाख जुर्माना. दोबारा अपराध पर दस साल तक जेल हो सकती है। महाराष्ट्र सरकार का टारगेटः देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी इस बिल के जरिए अपने कोर हिंदू वोट बैंक को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि वे उनकी संस्कृति और अधिकारों के रक्षक हैं. साथ ही, इस बिल पर उद्धव ठाकरे का समर्थन हासिल करना बीजेपी की एक बड़ी रणनीतिक जीत है. इससे विपक्ष की एकजुटता में दरार भी दिखती है और उद्धव की मजबूरी भी उजागर होती है। भारत के अन्य राज्यों में क्या है धर्मांतरण विरोधी कानून की स्थिति धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य नहीं है. अब तक भारत के लगभग 10-12 राज्यों में इस तरह के कानून लागू हैं या प्रक्रिया में हैं. इनमें से ज्यादातर बीजेपी शासित राज्य हैं: उत्तर प्रदेश: यहां सबसे पहले और सबसे कड़ा कानून लाया गया. उत्तराखंड: यहां भी सख्त प्रावधान लागू हैं. मध्य प्रदेश और गुजरात: इन राज्यों ने भी अपने पुराने कानूनों को और कड़ा किया है. कर्नाटक (पिछली सरकार में) और हरियाणा: यहां भी कानून पारित किए गए हैं. उद्धव ठाकरे का इस बिल को समर्थन देना सत्ता से दोबारा करीबी बनाने की एक छटपटाहट भी हो सकती है और अपनी खोई हुई साख को बचाने का आखिरी दांव भी. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता इस ‘सुविधाजनक हिंदुत्व’ पर दोबारा भरोसा करेगी? महाराष्ट्र की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहां विचारधारा और सत्ता की भूख के बीच की लकीर बहुत पतली हो गई है. क्या उद्धव फिर से शेर की तरह दहाड़ पाएंगे या यह केवल एक चुनावी पैंतरेबाजी बनकर रह जाएगी?

बैडमिंटन कोर्ट से ओलंपिक पोडियम तक, भारतीय महिला खिलाड़ी की प्रेरणादायक कहानी

नई दिल्ली भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज खिलाड़ी साइना नेहवाल आज अपना 36वां जन्मदिन मना रही हैं। अपने शानदार खेल और ऐतिहासिक उपलब्धियों के दम पर उन्होंने बैडमिंटन की दुनिया में भारत का नाम ऊंचा किया है। साइना उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने भारतीय बैडमिंटन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई। साइना नेहवाल का जन्म और शुरुआती सफर साइना नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें खेलों में रुचि थी और उन्होंने कम उम्र में ही बैडमिंटन को अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया था। कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास की बदौलत साइना ने जल्दी ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। धीरे-धीरे वह भारतीय बैडमिंटन की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हो गईं और देश को कई बड़े टूर्नामेंट में यादगार जीत दिलाई। लंदन ओलंपिक में रचा इतिहास साइना नेहवाल ने साल 2012 के लंदन ओलंपिक में इतिहास रचते हुए भारत को बैडमिंटन में पहला ओलंपिक मेडल दिलाया। उन्होंने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पूरे देश को गर्व महसूस कराया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि इससे पहले किसी भी भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने ओलंपिक में पदक नहीं जीता था। साइना की इस जीत ने भारत में बैडमिंटन को नई लोकप्रियता दिलाई और युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर आकर्षित किया। इंडोनेशिया ओपन में ऐतिहासिक जीत साल 2009 में साइना ने एक और बड़ा कारनामा किया था। उन्होंने इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ वह यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। इस जीत ने अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन सर्किट में साइना की पहचान को और मजबूत कर दिया और वह दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों में गिनी जाने लगीं। कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन साइना नेहवाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए कई मेडल जीते हैं। उन्होंने कुल तीन गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं। सिंगल्स इवेंट में उन्होंने 2010 और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा। इसके अलावा 2018 में उन्होंने मिक्स्ड डबल्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। वहीं 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मिक्स्ड टीम इवेंट में सिल्वर और 2006 में मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया। इस तरह साइना कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल पांच मेडल जीत चुकी हैं। साइना पर बनी बॉलीवुड फिल्म साइना नेहवाल की प्रेरणादायक कहानी पर साल 2021 में बॉलीवुड फिल्म भी बनाई गई थी। इस फिल्म का नाम साइना रखा गया था। फिल्म में अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा ने साइना का किरदार निभाया था, जबकि इसका निर्देशन अमोल गुप्ते ने किया था। आज भी साइना नेहवाल खेल जगत में एक प्रेरणा मानी जाती हैं। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं और अपने फैंस के साथ अक्सर तस्वीरें और वीडियो साझा करती रहती हैं।  

आदि पर्व 2026 में चमकी अबूझमाड़ की वनिता नेताम, वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

रायपुर अबूझमाड़ की बेटी वनिता नेताम ने ‘आदि पर्व 2026’ में रचा इतिहास नवा रायपुर स्थित आदिवासी संग्रहालय में 13 एवं 14 मार्च 2026 को आयोजित ‘आदि पर्व 2026’ में छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की भव्य झलक देखने को मिली। इस आयोजन में प्रदेश की विभिन्न जनजातियों के प्रतिभागियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य, गीत और सांस्कृतिक परंपराओं की आकर्षक प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम में नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र से शामिल हुई प्रतिभागी वनिता नेताम ने पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में मंच पर अपनी संस्कृति की शानदार प्रस्तुति दी। उनकी पारंपरिक पोशाक और आभूषणों ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया और उपस्थित दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कार्यक्रम के दौरान आयोजित ट्राइबल अटायर शो को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में भाग लेकर वनिता नेताम ने भी अपना नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया, जो नारायणपुर जिले और अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। आदि पर्व 2026 का आयोजन आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत को संरक्षित करने तथा उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया। इस मंच के माध्यम से जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक पहचान मिल रही है।

अब विकास की राह पर बोधघाट: माओवादी हिंसा के अंत के बाद बदल सकता है जंगल का आर्थिक मॉडल

जगदलपुर बस्तर के जंगलों में इन दिनों महुआ की खुशबू फैली हुई है। सुबह होते ही आदिवासी महिलाएं और बच्चे टोकरी लेकर पेड़ों के नीचे गिरे फूल बीनने निकल पड़ते हैं। यही महुआ कई परिवारों के लिए नकदी का बड़ा सहारा है। कुछ महीनों बाद बारिश आएगी और खेतों में धान, कोदो व कोसरा बोया जाएगा। फसल कटते ही खेत फिर खाली हो जाएंगे और ग्रामीणों के हाथ भी। यही कारण है कि प्रकृति से संपन्न होने के बावजूद बस्तर का बड़ा हिस्सा आज भी आर्थिक रूप से कमजोर बना हुआ है। दरअसल यहां की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। बरसात खत्म होते ही खेत सूख जाते हैं और सिंचाई के अभाव में खेती रुक जाती है। ऐसे में ग्रामीणों की आय का बड़ा हिस्सा महुआ, तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज पर टिका रहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की यही कमजोरी लंबे समय तक इस इलाके में माओवादी प्रभाव के फैलने की एक बड़ी वजह बनी। ऐसे में दक्षिण बस्तर की जीवनरेखा कही जाने वाली इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट परियोजना को इस स्थिति को बदलने वाली योजना के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह परियोजना जमीन पर उतरती है तो बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे जिलों में करीब सात लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिल सकती है। इससे खेती की तस्वीर बदलने के साथ-साथ उस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल सकती है, जिसने कभी माओवादी आंदोलन को यहां जमीन दी थी। 60 साल बाद भी अधूरी इंद्रावती की सिंचाई योजनाएं     इंद्रावती नदी पर सिंचाई परियोजनाओं की परिकल्पना वर्ष 1960 में पं. जवाहरलाल नेहरु के दौर में की गई थी।     जनवरी 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने बहुउद्देशीय बोधघाट परियोजना की आधारशिला रखी थी।     इसके लिए केंद्र सरकार ने विश्व बैंक से करीब 300 करोड़ रुपये का ऋण भी लिया था।     करीब तीन वर्ष तक काम चलने के बाद वन एवं पर्यावरण संबंधी आपत्तियों और प्रभावित लोगों के विरोध के चलते 1986 में परियोजना पूरी तरह रोक दी गई।     दरअसल 1974 में बस्तर में 233 किमी बहने वाली इंद्रावती नदी पर बोधघाट सहित नौ सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हुई थीं।     1975 में नदी जल बंटवारे को लेकर ओडिशा से सहमति भी मिल गई थी, लेकिन आज तक एक भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी।     नतीजतन दक्षिण-मध्य बस्तर में केवल लगभग 12 प्रतिशत कृषि भूमि तक ही सिंचाई पहुंच पाई है, जिसके कारण किसान रबी की फसल मुश्किल से ले पाते हैं। बोधघाट पर राजनीति हावी, इसलिए रफ्तार सुस्त राज्य सरकार ने बोधघाट परियोजना को नए स्वरूप में आगे बढ़ाने की पहल की है और केंद्र से भी स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन डूबान क्षेत्र में आने वाले 52 जनजातीय गांवों के पुनर्वास और विस्थापन की चुनौती के कारण परियोजना की रफ्तार सुस्त है। यहीं कारण है कि एक ऐसी परियोजना जो पूरे बस्तर का भविष्य बदल सकती है, राजनीतिक दलों के नेता खुलकर पहल करने से बचते दिख रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यदि विरोध हुआ तो उनकी राजनीतिक जमीन खिसक सकती है। प्रस्ताव के अनुसार बोधघाट को बहुउद्देशीय डैम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सिंचाई के साथ बिजली उत्पादन भी संभव होगा। साथ ही इसे नदी जोड़ो योजना से जोड़कर इंद्रावती के जल से बस्तर के बड़े हिस्से तक सिंचाई पहुंचाने की योजना है। इसके अलावा देउरगांव, मटनार और जगदलपुर की महादेव बैराज परियोजनाओं को भी इस बार राज्य बजट में शामिल किया गया है। यदि ये योजनाएं साकार होती हैं, तो बस्तर के हजारों गांवों की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। बोधघाट बनता तो कमजोर पड़ती माओवाद की जड़ें बस्तर में सिंचाई संकट के समाधान के लिए 1960 के दशक में इंद्रावती नदी की जल क्षमता के उपयोग हेतु बोधघाट परियोजना की अवधारणा बनाई गई थी। यदि यह योजना समय पर पूरी हो जाती, तो दक्षिण बस्तर की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव था। सिंचाई के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ते और गांवों में आर्थिक स्थिरता आती। 1980 के दशक में जब माओवादी संगठन दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय हुए, तब उन्होंने इस परियोजना का विरोध शुरू कर दिया। उन्हें आशंका थी कि बड़े विकास कार्यों से क्षेत्र में उनकी पकड़ कमजोर हो जाएगी। विकास के अभाव और कमजोर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का लाभ उठाकर माओवादियों ने अगले चार दशकों तक इस इलाके में अपनी जड़ें मजबूत कर लीं। इधर पड़ोसियों ने बदली तस्वीर     बस्तर की तुलना यदि पड़ोसी राज्य तेलंगाना और ओडिशा से की जाए तो अंतर साफ दिखाई देता है। बस्तर की सीमा से सटे राज्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा जलप्रबंधन और सिंचाई योजनाओं के मामले में 10 गुना आगे है।     इन राज्यों में बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं, जल प्रबंधन और तालाबों के पुनर्जीवन से खेती की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है।     कई क्षेत्रों में किसान साल में दो से तीन फसल ले रहे हैं।     आंध्रप्रदेश में पोलावरम, तेलंगाना में समक्का सागर परियोजना व गोदावरी-कृष्णा-कावेरी लिंक परियोजना, ओडिशा में खातीगुड़ा, कोलाब व तेलांगिरी डैम जैसी जल प्रबंधन योजनाओं के कारण कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।     इसके विपरीत बस्तर में खेती आज भी मानसून पर निर्भर है। सिचांई परियोजना बदल सकती है जंगल का गणित बस्तर की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां नदियां और वर्षा तो भरपूर हैं, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। दशकों पहले तैयार विकास योजनाओं में बताया गया था कि पूरे बस्तर में केवल एक प्रतिशत क्षेत्र में ही सिंचाई उपलब्ध थी। चार दशक बाद भी यह आंकड़ा मुश्किल से 1.5 से 2 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर देश के करीब 44 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। सिंचाई की कमी के कारण बस्तर के अधिकांश किसान साल में केवल एक ही फसल ले पाते हैं। पानी की नियमित उपलब्धता हो तो किसान दो या तीन फसल उगा सकते हैं, जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है। बस्तर में लगभग छह से सात लाख किसान परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे … Read more

रिश्वतखोरी पर वार: भोपाल में हाउसिंग बोर्ड का ऑपरेटर 5 हजार लेते रंगे हाथों पकड़ा गया

भोपाल राजधानी के जवाहर चौक स्थित मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) के कार्यालय में मंगलवार को लोकायुक्त की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने संपदा शाखा प्रक्षेत्र-एक में पदस्थ आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटर ज्ञानेंद्र कुमार पटेल को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपित ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से उनके ईडब्ल्यूएस मकान की लीज नवीनीकरण के बदले 10 हजार रुपये की मांग की थी। जानकारी के अनुसार, सुल्तानाबाद निवासी आवेदक दूधनाथ शुक्ला, जो उपभोक्ता संघ से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, ने वर्ष 1993 में कोटरा सुल्तानाबाद स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अपनी पत्नी के नाम से एक ईडब्ल्यूएस मकान लिया था। इस मकान की लीज के नवीनीकरण के लिए आरोपित ज्ञानेंद्र पटेल लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। परेशान होकर आवेदक ने इसकी शिकायत लोकायुक्त कार्यालय में की। पुलिस महानिदेशक,याेगेश देशमुख विशेष पुलिस स्थापना ( लोकायुक्त संगठन) के निर्देश और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में शिकायत का सत्यापन कराया गया। शिकायत सही पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश राठौर के नेतृत्व में ट्रैप टीम का गठन किया गया। मंगलवार को जैसे ही आरोपित ने पहली किश्त के रूप में 5,000 रुपये लिए, लोकायुक्त की टीम ने उसे उसके कार्यालय कक्ष में ही धर दबोचा। आरोपित के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधन) 2018 के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।  

एक बार फिर करुणा पांडे संग स्क्रीन शेयर, मुस्कान बामने ने जताई खुशी

मुंबई, अभिनेत्री मुस्कान बामने का कहना कि करुणा पांडे के साथ एक बार फिर स्क्रीन शेयर करना उनके लिये बेहद खास अनुभव रहा है। सोनी सब के शो पुष्पा इम्पॉसिबल की कहानी के केंद्र में है पुष्पा (करुणा पांडे), जिसकी ताक़त, अपनापन और हिम्मत हर मुश्किल में परिवार को एकजुट रखती है। शो में एक और भावनात्मक परत जोड़ रही हैं मुस्कान बामने, शनाया मेहता का किरदार निभा रही हैं, जो पुष्पा के मूल्यों और विश्वासों को चुनौती देती है। करुणा पांडे के साथ एक बार फिर स्क्रीन शेयर करना मुस्कान के लिए बेहद खास अनुभव रहा है।मुस्कान के लिए करुणा के साथ दोबारा काम करना एक ‘फुल-सर्कल मोमेंट’ जैसा है। दोनों कलाकारों ने पहले भी साथ काम किया था, जब करुणा ने मुस्कान की ऑन-स्क्रीन माँ का किरदार निभाया था। करुणा पांडे के साथ दोबारा काम करने के अनुभव पर मुस्कान बामने ने कहा, “पुष्पा इम्पॉसिबल में करुणा मैम के साथ फिर से काम करना मेरे लिए बेहद खास एहसास है। सालों पहले उन्होंने मेरी ऑन-स्क्रीन माँ का किरदार निभाया था और अब हम एक बिल्कुल अलग डायनामिक में स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। इसे और दिलचस्प बनाता है कि हमारे किरदार लगातार एक-दूसरे से टकराते रहते हैं। शनाया बाग़ी और ज़िद्दी है, जबकि पुष्पा अनुशासन और मूल्यों में गहरा विश्वास रखती है, इसलिए उनकी पर्सनैलिटी नैचुरली क्लैश करती है। लेकिन बतौर कलाकार करुणा मैम बेहद गर्मजोशी से भरी और सपोर्टिव हैं, जिसकी वजह से इन इंटेंस सीन को निभाना और भी मज़ेदार हो जाता है। ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’, सोमवार से शनिवार रात 9:30 बजे सोनी सब पर प्रसारित होता है।  

पूरा हुआ मनीषा का सपना, मिला सुरक्षित आशियाना मनीषा

रायपुर एक सुरक्षित और पक्का घर हर परिवार के जीवन में स्थिरता, सम्मान और सुकून लेकर आता है। जब वर्षों का सपना हकीकत बनता है, तो वह केवल एक मकान नहीं बल्कि खुशियों और आत्मविश्वास की नई शुरुआत भी होता है। ऐसा ही सुखद बदलाव कोरबा नगर निगम के बुधवारी बाजार की मती मनीषा शुक्ला के जीवन में आया, जब प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के माध्यम से उनका पक्के घर का सपना साकार हुआ। मती मनीषा शुक्ला एक निजी स्कूल में शिक्षिका है। उनके पति  विपिन कुमार शुक्ला और वे लंबे समय से अपने परिवार के लिए एक पक्का मकान बनवाने का विचार कर रहे थे, लेकिन सीमित आय के कारण एक साथ बड़ी राशि जुटा पाना उनके लिए आसान नहीं था। वे जिस पुराने घर में रहते थे, वह पुराना हो चुका था। बारिश के मौसम में घर में पानी टपकने और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता था। घर की स्थिति खराब होने के कारण समय-समय पर मरम्मत करानी पड़ती थी और जगह कम होने से मेहमानों के आने पर भी असुविधा होती थी। वर्ष 2025-26 में हुए सर्वे के दौरान उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 की सूची में शामिल हुआ। आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनका आवास स्वीकृत हो गया। जल्दी ही योजना की पहली किस्त उनके बैंक खाते में आ गई, जिससे उन्होंने अपने सपनों के घर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया। मनीषा ने योजना से मिली राशि के साथ अपनी वर्षों की जमा पूंजी भी जोड़ी और एक मजबूत तथा सुंदर पक्का मकान बनवाया। अब उनका घर पूरी तरह तैयार हो चुका है। वे अपने परिवार के साथ नए घर में आराम और सुकून के साथ जीवन व्यतीत कर रही हैं। पक्का मकान बनने से मनीषा की न केवल दैनिक जीवन की परेशानियाँ खत्म हुई हैं, बल्कि समाज में उनकी प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में रह रहा है। वह कहती हैं प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके जैसे कई परिवारों को पक्के घर का सपना पूरा करने का अवसर दिया है।

Cancer Prevention Drive: किशोरियों को मिलेगा फ्री HPV टीका, शुरू हुआ जागरूकता अभियान

जगदलपुर. बस्तर में अब स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने एचपीवी टीकाकरण शुरू हुआ। जिला अस्पताल में अभियान की शुरुआत के साथ ही टीके लगाए गए। 14 से 15 वर्ष की करीब 9500 किशोरियों को यह वैक्सीन दी जाएगी। यह वही टीका है जो बाजार में महंगा होता है, लेकिन यहां मुफ्त दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे सभी ब्लॉकों तक पहुंचाने की तैयारी कर ली है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह टीका कैंसर के खतरे को काफी कम करता है। पिछले वर्षों में इस बीमारी से कई महिलाओं की जान जा चुकी है। अधिकारियों ने कहा समय पर टीकाकरण ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। अभियान स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी चलाया जाएगा। लक्ष्य है कि कोई भी किशोरी इस सुरक्षा से वंचित न रहे। यह पहल बस्तर में महिला स्वास्थ्य को लेकर नई उम्मीद बनकर उभरी है। किशोरियों को मिलेगा कैंसर से सुरक्षा एचपीवी वैक्सीन के माध्यम से महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जाती है। यह टीका विशेष रूप से किशोरियों के लिए प्रभावी माना जाता है। टीकाकरण के लिए वही किशोरियां पात्र होंगी जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो, लेकिन 15 वर्ष का जन्मदिन न मनाया हो। आयु प्रमाण के लिए आधार कार्ड या अन्य फोटो पहचान पत्र मान्य होगा। पहचान पत्र उपलब्ध न होने की स्थिति में अभिभावक द्वारा हस्ताक्षरित शपथ पत्र भी मान्य किया जाएगा। टीकाकरण के बाद लाभार्थियों का पंजीकरण यू-विन पोर्टल पर किया जाएगा और उन्हें डिजिटल प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक लाभार्थी को टीकाकरण के बाद 30 मिनट तक निगरानी में रखा जाएगा तथा सभी सत्रों में चिकित्सा अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी

जाट की मिट्टी से जुड़ा किरदार निभाएंगे रणदीप हुड्डा

मुंबई,  बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा अपनी आने वाली फिल्म में हरियाणवी जाट के किरदार में नजर आयेंगे। रणदीप हुड्डा ने हाल ही में श्रद्धा कपूर के साथ अपनी आने वाली फिल्म ईथा की शूटिंग खत्म करने के बाद अपनी अगली फिल्म पर काम शुरू कर दिया है। यह नई फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित एक कंटेंट-ड्रिवन कहानी है, जिसमें रणदीप अपने हमेशा वाले हटके और दमदार अंदाज़ में नजर आने वाले हैं।इस फिल्म का पहला शेड्यूल पूरा हो चुका है और अब वह अगले शेड्यूल की तैयारी में जुट गए हैं। इस बार रणदीप एक हरियाणवी जाट के किरदार में दिखेंगे, जो एक ऐसी कहानी का हिस्सा है जो रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने वाले भ्रामक विज्ञापनों की सच्चाई उजागर करती है। फिल्म की कहानी पूरी तरह सच्ची घटनाओं से प्रेरित है। अंजीत भटनागर निर्देशित इस फिल्म में पांच नेशनल अवॉर्ड विनिंग टीम मेंबर्स शामिल हैं, जो इसकी कहानी और विजन को और भी मजबूत बनाते हैं। साथ ही, फिल्म को साउथ इंडस्ट्री के एक बड़े प्रोड्यूसर का सपोर्ट भी मिला है, जिससे इसका स्केल काफी बड़ा नजर आ रहा है।फिल्म का दूसरा शेड्यूल मार्च के आखिर में हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में शुरू होगा।  

आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों ने सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की उपलब्धि

मातृ वंदन योजना में छत्तीसगढ़ ने ऐसे ही नहीं मारी बाजी शिकायतों का तेज निराकरण और मंजूरी पर फोकस कर हासिल किया देश में पहला स्थान प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को दिया जा रहा बढ़ावाः मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय  आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों ने सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की उपलब्धि रायपुर प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना को लाभार्थियों तक पहुंचाने में छत्तीसगढ़ अव्वल रहा है। इससे एक बार फिर साबित हुआ है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में  डबल इंजन की सरकार न सिर्फ जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से अमल में लाती है, बल्कि प्रशासनिक सक्रियता से उसे हर तबके तक समय पर पहुंचाने के अपने वादे को पूरा करती है।  गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रोत्साहित करने की इस केंद्रीय योजना के तेजी से क्रियान्वयन और शिकायतों का त्वरित निपटान कर छत्तीसगढ़ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह सिर्फ एक सरकारी योजना का राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वयन भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर के अधिकारियों तक के सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की गई उपलब्धि है। जच्चा एवं बच्चा का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इस दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। ऐसे मिली उपलब्धि प्रशासनिक अमले द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लगातार मॉनिटरिंग की गई और लाभार्थियों के पंजीयन पर मुख्य रूप से फोकस किया गया। इस योजना का लाभ लेने के लिए वर्ष 2023-24 में जहां 1,75,797 गर्भवती महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, वहीं वर्ष 2024-25 में 2,19,012 रजिस्ट्रेशन किए गए। इसे ही लक्ष्य मानते हुए वर्ष 2025-26 में  फरवरी तक 2,04,138 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया जो लक्ष्य का 93.3 प्रतिशत है। रजिस्ट्रेशन के बाद इसे तुरंत मंजूरी देने पर फोकस किया गया। तय प्रक्रिया के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा फार्म भरने, पर्यवेक्षक द्वारा इसके सत्यापन और परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर पर मंजूरी देने में तेजी लाई गई। भरे गए  आवेदनों के 83 प्रतिशत का परीक्षण कर इसे भुगतान के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से छत्तीसगढ़ को मिली स्वीकृति की दर भी सबसे ज्यादा 83.87 रही है। इसके बाद तीसरी कैटेगरी शिकायतों के निराकरण के संबंध में आंकड़ों का परीक्षण किया गया। लाभार्थियों की ज्यादातर शिकायतें भुगतान न होने को लेकर थी। इस पर तत्काल ध्यान दिया गया और कोई कमी थी तो उसे दूर किया गया। हालांकि राज्य सरकार ने सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार के आंकड़ों में 30 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों की संख्या 7 प्रतिशत पाई गई है। इसके बावजूद 93 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण कर राज्य पहले स्थान पर रहा।  यदि तीन वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत कुल 5,98,947 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिनमें से 5,40,624 को स्वीकृति दे दी गई।  गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और उससे पूर्व पौष्टिक आहार व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार इस योजना के तहत 5 हजार रुपये और दूसरी बेटी के जन्म पर एकमुश्त 6 हजार रुपये देती है। यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है। गर्भवती महिलाओं के रजिस्ट्रेशन के समय 1,000 रुपये, 6 माह बाद 2,000 रुपये और बच्चे के जन्म, पंजीकरण और टीकाकरण के बाद 2,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसका मकसद संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

काशी में इफ्तार के बाद हंगामा, गंगा में हड्डियां फेंकने के आरोप में 14 गिरफ्तार

वाराणसी धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में गंगा की लहरों पर एक बेहद विवादास्पद मामला सामने आया है। पवित्र गंगा नदी के बीचों-बीच नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने और उसमें मांसाहार (चिकन बिरयानी) का सेवन कर उसके अवशेषों (हड्डियों) को गंगा में फेंकने के आरोप में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।   भाजयुमो ने दी तहरीर, वीडियो से हुआ खुलासा इस पूरी घटना का खुलासा तब हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में कुछ लोग गंगा के बीच नाव पर बैठकर इफ्तार करते और मांसाहार का सेवन करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो का संज्ञान लेते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने सोमवार रात कोतवाली थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ लिखित तहरीर दी। तहरीर के साथ साक्ष्य के तौर पर वीडियो भी उपलब्ध कराया गया, जिसके आधार पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू की। इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने (धारा 295A व अन्य) और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। भाजयुमो नेता रजत जायसवाल का कहना है कि मां गंगा सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायियों की आस्था का केंद्र हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां गंगा जल के आचमन और पूजन के लिए आते हैं। ऐसे में गंगा की गोद में मांसाहार परोसना और उसकी हड्डियां पानी में फेंकना न केवल पर्यावरणीय अपराध है, बल्कि यह जानबूझकर हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कुत्सित प्रयास है। नाविक और बजड़ा मालिक पर भी गिरेगी गाज हिंदूवादी संगठनों ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। पुलिस ने न केवल बिरयानी खाने वाले 14 लोगों को दबोचा है, बल्कि उस नाव की भी पहचान कर ली गई है जिस पर यह आयोजन हुआ था। पुलिस अब नाव मालिक और उसके चालक के खिलाफ भी लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। संगठनों की मांग है कि नाविकों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे नावों पर किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि न होने दें जिससे काशी की गरिमा धूमिल हो। एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह के अनुसार भाजयुमो नेता की तरफ से शिकायत मिली थी कि गंगा जी में नाव पर इफ्तार पार्टी हो रही है और चिकन बिरयानी का सेवन किया जा रहा है। इस बारे में इंस्टाग्राम पर वीडियो भी वायरल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुुए तत्काल केस दर्ज किया गया। इसके बाद जगह जगह दबिश दी गई और 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आगे की कार्रवाई भी की जा रही है।

महिलाओं के अधिकार में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश और सरकार को आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि तीन महीने और उससे अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली मांओं को मातृत्व अवकाश मिलेगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि पितृत्व अवकाश के लेकर सरकार फैसला करेगी. पहले के नियम के मुताबिक तीन महीने के बच्चे को गोद लेने पर 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता था. शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020) की धारा 60(4) के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिसमें गोद लेने वाली मां को मातृत्व लाभ केवल तभी देने की बात कही गई थी जब बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रावधान की व्याख्या करते हुए कहा कि जो महिला कानूनी रूप से किसी बच्चे को गोद लेती है या जो कमीशनिंग मदर है, उसे बच्चे को सौंपे जाने की तारीख से 12 सप्ताह तक मातृत्व लाभ का अधिकार होगा. इस फैसले को गोद लेने वाली माताओं के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें समानता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित होगा। जस्टिस जेबी पार्दीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि परिवार की परिभाषा केवल जैविक संबंधों के आधार पर ही तय नहीं की जा सकती. फैसले में जोर दिया गया कि गोद लेना परिवार बढ़ाने का उतना ही वैध तरीका है जितना जैविक तरीका. ऐसे में एक गोद दिए गए बच्चे का अधिकारी भी एक बायोलॉजिकल बच्चे जैसा है. जजों ने आगे कहा कि एक गोल लिए गए बच्चे को पालन पोषण में माता-पिता भावनात्मक रूप से उतना ही जड़े होते हैं जितना एक बॉयोलॉजिकल बच्चे को पालने में होता है. इसमें बच्चे की उम्र से कुछ भी लेना देना नहीं है।

नई दिल्ली में बस्तर की प्रसिद्ध मांदरी नृत्य की प्रस्तुति देंगे कलाकार

रायपुर  राज्य स्तरीय शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति लोक कला महोत्सव में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला कोण्डागांव जिले का लिंगो घोटुल मांदरी नृत्य दल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला का प्रदर्शन करेगा। यह दल नई दिल्ली में आयोजित भारत ट्राइब फेस्ट-2026 में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व करेगा।      उल्लेखनीय है कि जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर अंबिकापुर में आयोजित राज्य स्तरीय शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति लोक कला महोत्सव में इस दल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया था। इस उपलब्धि के लिए देश की राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु के हाथों दल को सम्मानित भी किया गया था।     कलेक्टर कोंडागांव मती पन्ना ने जिले के मांदरी नृत्य दल के कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह कोण्डागांव जिले के लिए गर्व का विषय है कि यहां के लोक कलाकारों का दल राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कलाकार अपनी प्रस्तुति से बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति को देशभर में पहचान दिलाते हुए छत्तीसगढ़ राज्य और कोण्डागांव जिले का नाम रोशन करेंगे।  सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग ने बताया कि भारत ट्राइब फेस्ट का आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज द्वारा 18 मार्च से 21 मार्च 2026 तक सुंदर नर्सरी, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित 7 राज्यों के कलाकार विभिन्न जनजातीय कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कोण्डागांव जिले के ग्राम राहटीपारा, बालेंगा के मांदरी नृत्य दल द्वारा किया जाएगा।  

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