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बंगाल की सियासत गरमाई: ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने, सीट का ऐलान

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा चुनावी मुकाबला तय हो गया है। भाजपा ने सोमवार को बंगाल में 144 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी। इसमें शुभेंदु अधिकारी का भी नाम था। उन्हें नंदीग्राम सीट से उतारा गया है, जहां से उन्होंने पिछली बार ममता बनर्जी को हराया था। इसके अलावा भबानीपुर से भी वह मुकाबले में उतरे हैं, जहां से फिलहाल ममता बनर्जी विधायक हैं। अब ममता बनर्जी ने भी ऐलान कर दिया है कि वह खुद भबानीपुर से ही उतरेंगी। इस तरह साफ हो गया है कि पिछली बार नंदीग्राम वाली स्थिति भबानीपुर में दोहराएगी। नंदीग्राम से ममता बनर्जी के शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले हार जाने की काफी चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि इस बार भबानीपुर में हाईवोल्टेज मुकाबला देखने को मिल सकता है। ममता बनर्जी ने मंगलवार को यह भी कहा कि हम राज्य में 226 सीटें जीतकर लगातार चौथी बार सत्ता हासिल करेंगे। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी तीखा हमला बोला है। दीदी ने कहा कि ईद से ठीक पहले बड़े-बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर चुनाव आयोग कर रहा है। ऐसा लगता है कि बंगाल चुनाव से पहले राज्य में दंगे कराने की तैयारी है। ऐसा कुछ भी हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार चुनाव आयोग ही रहेगा। ममता ने कहा कि भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है। यदि राज्य में कोई भी अप्रिय घटना हुई तो उसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग और भाजपा की ही रहेगी। उन्होंने कहा कि पूरा खेल चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर कर रहा है। अच्छा तो यही होगा कि वह सीधे तौर पर भाजपा के लिए चुनाव प्रचार भी करे। इस तरह ममता बनर्जी ने संकेत दे दिए हैं कि वह चुनाव आयोग पर भी सीधे निशाना साधेंगी। पहले ही वह SIR को लेकर इलेक्शन कमिशन को टारगेट करती रही हैं। बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी के बीच हाईवोल्टेज मुकाबला हुआ था। 2021 में हाईवोल्टेज चुनाव में 77 सीटें जीती थी भाजपा यहां तक कयास लगने लगे थे कि भाजपा कहीं पहली बार सत्ता ही हासिल ना कर ले। हालांकि नतीजे आए तो भाजपा को 77 सीटें ही मिलीं। वहीं वामपंथी दलों और कांग्रेस का तो सूपड़ा ही साफ हो गया। फिर भी भाजपा के लिए यह बड़ी सफलता थी क्योंकि 2016 में उसे तीन सीटें ही मिली थीं। इस तरह 5 साल के अंदर तीन सीटों वाली पार्टी यदि 77 पर आ गई तो वह बड़ी चुनावी सफलता था। इस बार भी भाजपा टफ फाइट के मूड में नजर आ रही है और इसी क्रम में उसने करीब आधी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान पहले ही कर दिया है।

सरकार ने दो वर्षों में 11 हजार 107 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाएं की स्वीकृत: 25 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का किया गया सृजन

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विभागों से संबंधित 10 हजार 617 करोड़ 73 लाख 49 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के लिए 612 करोड़ 29 लाख 20 हजार रूपए, सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय 30 करोड़ 92 लाख रूपए, जल संसाधन विभाग के लिए 3 हजार 105  करोड़ 11 लाख 80 हजार रूपए, खनिज साधन विभाग से संबंधित व्यय 1145 करोड़ 89 लाख 99 हजार रूपए, विमानन विभाग से संबंधित व्यय 314 करोड़ 99 लाख 90 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग 416 करोड़ 99 लाख 99 हजार रूपए, सुशासन एवं अभिसरण विभाग से संबंधित व्यय 77 करोड़ रूपए, जनसम्पर्क विभाग से संबंधित व्यय 469 करोड़ 99 लाख रूपए, ऊर्जा विभाग से संबंधित व्यय 4236 करोड़ 01 लाख 61 हजार रूपए, जिला परियोजनाओं से संबंधित व्यय 208 करोड़ 50 लाख रूपए शामिल हैं।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि पिछले दो वर्षों से राज्य सरकार संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी है और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने में बजट प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।  मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले दो बजटों की थीम ‘ज्ञान’ और ‘गति’ थी, जबकि इस बार बजट की थीम ‘संकल्प’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और डिजिटल गवर्नेंस की नीति अपनाकर व्यवस्थागत लिकेज समाप्त किए हैं, जिसके कारण आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याण में खर्च हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में आबकारी विभाग का राजस्व 5 हजार 110 करोड़ रुपए था, जो वर्तमान सरकार में बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए अनुमानित है। यह अंतर फर्जीवाड़े पर रोक लगने के कारण आया है। मुख्यमंत्री  साय ने नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे अभियान को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने माओवादी आतंकवाद के अंत का लक्ष्य तय कर उसी दिशा में प्रभावी कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास जताया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए उत्सव का क्षण बताया और कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन, जवानों की वीरता और प्रदेशवासियों के विश्वास से राज्य माओवादी हिंसा के अंधकार से बाहर निकल रहा है। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र को मजबूत कर शांति, पुनर्निर्माण और समग्र विकास के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में खनिज राजस्व की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 12 हजार 305 करोड़ रुपए रहा वहीं वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ रुपए हो गया है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 11 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 17 हजार करोड़ रुपए राजस्व प्राप्ति का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग किसानों, माताओं-बहनों और आम नागरिकों के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ को पुनः पारदर्शी बनाते हुए दो वर्षों में 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई और 19 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए। डीएमएफ कार्यों का सोशल ऑडिट भी कराया जा रहा है तथा शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है। खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को भी गति दी गई है और अब तक 62 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ, क्रिटिकल और स्ट्रैटजिक खनिजों के अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से एमओयू किए गए हैं, जिससे क्लीन एनर्जी और नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य के कुल वन क्षेत्र के मात्र 0.96 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज रियायतें स्वीकृत हैं और केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन कार्य की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि खनन कार्यों के एवज में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।  भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि खनिज विभाग में पारदर्शिता के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल तथा डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किया गया है। आम जनता को रियायती दरों पर रेत उपलब्ध कराने और माफिया पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम 2025 लागू किए गए हैं तथा रेत की ई-नीलामी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रदेश एक प्रमुख ऊर्जा प्रदाता के रूप में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पावर प्लांट्स की कुल विद्युत क्षमता 30 हजार मेगावाट है, जिसमें ताप विद्युत संयंत्रों की क्षमता 24 हजार मेगावाट है। राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता और प्लांट लोड फैक्टर देश के अग्रणी राज्यों में है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। एनर्जी समिट के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 32 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं से एमओयू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों का काम प्रगति पर है तथा 8300 मेगावाट क्षमता की पम्प स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं के लिए 6 स्थलों का चिन्हांकन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर बिजली की सतत आपूर्ति सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक निःशुल्क बिजली देने हेतु 354 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत … Read more

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस और कामधेनु योजना का लाभ बढ़ाने पर जोर, हितग्राहियों तक पहुंचाने के निर्देश

भोपाल  पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्‍यमंत्री स्‍वतंत्र प्रभार  लखन पटेल ने मंगलवार को मंत्रालय में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। राज्यमंत्री  पटेल ने 1 अप्रैल को मंडला जिले के ग्राम कान्‍हारी कला में राज्‍यपाल  मंगुभाई पटेल की ग‍र‍िमामयी उपस्‍थ‍िति‍में होने वाले मुख्‍यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के अंतर्गत पशु वितरण के प्रस्‍तावित कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्‍यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख स‍च‍िव  उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पी.एस. पटेल सहित अन्‍य अधिकारी उपस्‍थ‍ित रहे। बैठक में राज्‍यमंत्री  पटेल ने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, कामधेनु योजना की समीक्षा एवं योजनान्तर्गत हितग्राही चयन, पशु वितरण, लक्ष्य पूर्ति, व्यापक प्रचार-प्रसार एवं सतत मॉनिटरि‍ग करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस अंतर्गत गाय का भी प्रावधान करने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही स्वावलंबी गोशाला के लिए LOA जारी कर कार्य शुरू करने के लिये विभाग को प्रक्रिया को तीव्र करने, पशु प्रदायकर्ताओं की संख्या बढ़ाने एवं मापदंण्ड अनुसार पशुओं की अधिकतम राशि का उल्लेख कर सूची ऑनलाइन करके हितग्राहियों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने एवं पशु मेला के माध्यम से पशु चयन करने पर भी चर्चा की गई। बैठक में सड़कों पर विचरण कर रहे निराश्रित पशुओं को स्वावलंबी गोशालाओं में रखने और राजमार्गों को निराश्रित पशु मुक्त बनाने के संबंध में भी चर्चा की गई।  

डिजिटल दौर में बदली तस्वीर: फैंसी स्टोर से प्रीति यादव बनीं नई पीढ़ी की आत्मनिर्भर उद्यमी

रायपुर आज के आधुनिक और तेजी से बदलते दौर में जहां डिजिटल तकनीक और आत्मनिर्भरता सफलता की नई परिभाषा बन चुके हैं, वहीं विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत तिलौली की  प्रीति यादव ने अपने हौसले और समझदारी से इस बदलाव को अवसर में बदल दिया है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि सोच आधुनिक हो और इरादे मजबूत हों, तो गांव में रहकर भी सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है। एक साधारण परिवार से आने वाली प्रीति यादव के सामने भी आर्थिक चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय खुद को बदलते समय के साथ ढालने का फैसला किया। उन्होंने “दुर्गा महिला स्व सहायता समूह” से जुड़कर न केवल आर्थिक सहयोग प्राप्त किया, बल्कि आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की नई दिशा भी हासिल की। समूह से मिले 60 हजार रुपये के ऋण का उपयोग करते हुए प्रीति ने अपने गांव में चूड़ी, कॉस्मेटिक्स और फैंसी आइटम का स्टोर शुरू किया। लेकिन उनकी सोच केवल पारंपरिक दुकान तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ग्राहकों की पसंद को समझते हुए आधुनिक ट्रेंड के अनुसार उत्पाद उपलब्ध कराना शुरू किया, जिससे उनकी दुकान जल्दी ही युवाओं और महिलाओं के बीच लोकप्रिय हो गई। प्रीति ने अपने व्यवसाय में छोटे-छोटे आधुनिक प्रयोग भी किए-जैसे ग्राहकों से बेहतर संवाद, मांग के अनुसार नए प्रोडक्ट लाना, और त्योहारों व विशेष अवसरों पर आकर्षक कलेक्शन उपलब्ध कराना। यही कारण है कि उनकी दुकान अब सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि गांव में एक “ट्रेंडिंग शॉप” के रूप में पहचान बना चुकी है। आज प्रीति यादव अपने इस व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग 80 से 85 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। यह आय न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का नया एहसास भी दे रही है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, घर के खर्च और भविष्य की योजनाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रही हैं। आधुनिक युग में सफलता केवल कमाई तक सीमित नहीं होती, बल्कि सोच, आत्मविश्वास और पहचान में बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। प्रीति यादव इस बदलाव की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। आज वे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी यह सिखा रही हैं कि बदलते समय के साथ खुद को ढालना ही सफलता की कुंजी है। उनकी प्रेरक यात्रा से प्रभावित होकर अब कई महिलाएं स्व सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। प्रीति यादव की यह कहानी बताती है कि आधुनिक सोच, सही अवसर और मेहनत के साथ गांव की महिलाएं भी नए भारत की मजबूत उद्यमी बन सकती हैं।

जदयू को झटका: केसी त्यागी का इस्तीफा, नए सियासी सफर के संकेत

नई दिल्ली पिछले कुछ दिनों से अपनी ही पार्टी के खिलाफ बोल कर चर्चा में रहने वाले केसी त्यागी ने जनता दल यूनाइटेड से इस्तीफा दे दिया है। केसी त्यागी ने अपना इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर शेयर कर साफ किया है कि वो जदयू की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं और आगे सदस्यता नहीं लेंगे। JDU को भेजे गए इस्तीफे में केसी त्यागी ने अपने भविष्य का प्लान भी बताया है। केसी त्यागी ने लिखा है कि 22 मार्च को वो अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे। केसी त्यागी ने लिखा, ’30 अक्तूबर, 2003 को जदयू अस्तित्व में आया और समता पार्टी तथा जनता दल का विलय हुआ। उस वक्त जॉर्ज फर्नांडिस ने अध्यक्ष और मैंने महासचिव के तौर पर एक साथ काम किय। मैंने शरद यादव और नीतीश कुमार की अध्यक्षता में भी काम किया। मैं पार्टी का मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार भी रह। अब पार्टी का सदस्यता अभियान खत्म हो गया है और मैंने दोबारा पार्टी की सदस्यता नहीं ली है। नीतीश कुमार के प्रति मेरा सम्मान कभी नहीं बदलेगा।’ केसी त्यागी ने बताया है भविष्य का प्लान केसी त्यागी ने आगे लिखा, ‘मेरे कुछ राजनीतिक साथी, समर्थक और वर्करों ने 22 मार्च को एक बैठक आयोजित की है। इस बैठक में देश के राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी। मैं जल्द ही आगे की रणनीति पर फैसला लूंगा। बता दें कि केसी त्यागी मूल रूप से उत्तर प्रदेश से आते हैं। पश्चिमी यूपी में उनके काफी समर्थक भी हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि केसी त्यागी अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का रूख भी कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि केसी त्यागी की इच्छा अब यूपी की राजनीति करने की है। केसी त्यागी की गिनती जदयू के पुराने और दिग्गज नेताओं के तौर पर होती थी। केसी त्यागी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी भी माने जाते थे। वो जदयू के पक्ष में हर मंच पर मजबूती से अपनी बात भी रखते थे। इसी साल केसी त्यागी ने नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग भी उठाई थी और पीएम मोदी को खत लिखा था। हालांकि, लंबे समय से जदयू ने केसी त्यागी से दूरी बना रखी थी। इस मुद्दे पर भी जदयू ने खुद को उनसे अलग कर लिया था। केसी त्यागी ने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को हटाने के फैसला का विरोध किया था। इसके अलावा फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी वो भारत सरकार के स्टैंड से अलग खड़े नजर आए थे। पिछले काफी समय से पार्टी केसी त्यागी को तवज्जो नहीं दे रही थी जिससे इस बात का इशारा मिल रहा था कि अब वो पार्टी में नहीं है। हालांकि, अब केसी त्यागी ने खुद जदयू से इस्तीफे का ऐलान किया है।  

आई.आई.टी., आई.आई.एम., एन.आई.टी., नार्म जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ दे रहे हैं प्रशिक्षण

रायपुर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षण एवं अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। कृषि महाविद्यालय रायपुर में 16 से 20 मार्च तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की विभिन्न प्रविधियों एवं उपकरणों का प्रभावी उपयोग कर इन क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने के गुर सिखाये जा रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित 17 महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।  प्रशिक्षण कार्यक्रम में आई.आई.टी. भिलाई, आई.आई.आई.टी. नया रायपुर, एन.आई.टी. रायपुर, आई. आई. एम. रायपुर, हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिर्वसिटी नया रायपुर, गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर, आई.सी.ए.आर. – नार्म हैदराबाद तथा आई.सी.ए.आर – एन.आई.बी.एस.एम. बरोण्डा जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को कृषि शिक्षा अनुसंधान में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस की विभिन्न टेकनिक्स एवं टूल्स के प्रभावी उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ इदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने किया।  इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.), भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश तथा आई.सी.ए.आर.-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एन.आई.बी.एस.एम.) बरोण्डा के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिलदेव दीपक सहित कृषि विश्वविद्यालय के निदेशकगण तथा विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठातागण उपस्थित थे।     प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में हमारे जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है और अब यह हमारी सामान्य दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा विशेषकर उच्च शिक्षा अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अहम योगदान दिया है। यह शिक्षण, शोध और अकादमिक कार्यों को अधिक प्रभावी बना रही है। डॉ. चंदेल ने कहा कि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कृषि शिक्षा जैसे पेशेवर क्षेत्रों में ए आई का उपयोग शिक्षण गुणवत्ता, नवाचार और शोध को बेहतर बनाने के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पाठ योजना निर्माण, पाठ्य सामग्री निर्माण, मूल्यांकन आदि शिक्षण संबंधी कार्यों तथा शोध लेखन, साहित्य समीक्षा, संदर्भ प्रबंधन आदि शोध संबंधी कार्यों के संबंध में विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जाएगी।  इस प्रशिक्षण में प्रतिभागी अपनी कक्षाओं, प्रयोगशाला तथा शोध कार्यों में विभिन्न ए आई तकनीक एवं टूल्स का प्रभावी उपयोग करना सीखेंगे जिससे उनकी कार्यक्षमता और नवाचार क्षमता वृद्धि होगी। आई.आई.टी. भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश ने इस अवसर पर कहा कि कोविड काल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ने लगा है। कोविड के दौरान आई.आई.टी. कानपुर ने विभिन्न ए आई टूल्स का उपयोग कर कोविड के केसेस के प्रतिदिन के आकड़ों तथा उसके पीक पीरियड के बारे में सटीक पूर्वानुमान जारी किए थे। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भी ए आई तकनीक का उपयोग कर किसानों के लिए मौसम संबंधी पूर्वानुमान तथा कृषि सलाह उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न ए आई टूल्स के माध्यम से वर्षा जल एवं उपलब्ध भूजल के आंकड़ों का उपयोग कर किसानों के लिए उपयुक्त फसलों का चयन किया जा सकता है। इसके साथ ही विगत वर्षों में घटित कीट-बीमारियों के प्रकोप तथा वर्तमान जलवायविक परिस्थितियों का अध्ययन कर फसलों को कीटों एवं बीमारियों के प्रकोप से बचाया जा सकता है।  इसी प्रकार फसल उत्पादन एवं इनके विक्रय हेतु भी ए आई टूल्स का उपयोग किया सकता है। एन.आई.बी.एस.एम. के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। एन.आई.टी. रायपुर के निदेशक डॉ. एन.वी. रमन्ना ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। गौरतलब है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दो प्रमुख घटकों में आयोजित किया गया है। पहला घटक नव नियुक्त संकाय सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य उन्हें विश्वविद्यालय की दृष्टि, मिशन और शैक्षणिक ढांचे से परिचित कराना है। दूसरा घटक शिक्षण एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर प्रशिक्षण है, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक ए आई टूल्स और तकनीकों से परिचित कराया जाएगा, ताकि वे इनका प्रभावी उपयोग कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, विस्तार गतिविधियों तथा अनुसंधान कार्यों में कर सकें। इन पाँच दिनों के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान, विचार-विमर्श तथा प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आधारित शिक्षण एवं अनुसंधान की नवीनतम प्रवृत्तियों से अवगत कराया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम की संयोजक कृषि महाविद्यालय रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे हैं।

रमजान में हमला, अहमदियों पर जुल्म… UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, दुनिया के सामने रखी सच्चाई

संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र (UN) में ‘इस्लामोफोबिया से निपटने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की पड़ोसी देशों में ‘इस्लामोफोबिया’ की ‘काल्पनिक कहानियां गढ़ने की आदत है। भारतीय दूत ने सवाल उठाया कि इस्लामाबाद के अपने ही देश में अहमदिया समुदाय के क्रूर दमन या रमजान के दौरान अफगानिस्तान पर हवाई बमबारी को कैसे देखा जाए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने महासभा को संबोधित करते हुए भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया। पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और क्रूरता राजदूत हरीश ने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत का पश्चिमी पड़ोसी (पाकिस्तान) अपने पड़ोस में इस्लामोफोबिया की काल्पनिक कहानियां गढ़ने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान में अहमदियों के क्रूर दमन, असहाय अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजने और रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों को आखिर क्या नाम दिया जाएगा? बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को ऐसे समय पर फटकार लगाई है जब पिछली रात ही पाक ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर हवाई हमला कर 400 लोगों की जान ले ली। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के एक अस्पताल पर हवाई हमले का बड़ा आरोप लगाया है, जिसमें कम से कम 400 लोग मारे गए और करीब 250 घायल हुए हैं। यह घटना 16 मार्च की रात करीब 9 बजे हुई, जब पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल में हमला किया। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने X पर पोस्ट करके बताया कि हमला काबुल स्थित ओमिद नामक 2000 बेड वाले ड्रग रिहैबिलिटेशन अस्पताल (नशामुक्ति केंद्र) पर हुआ, जहां नशेड़ी मरीजों का इलाज चल रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल के बड़े हिस्से तबाह हो गए, आग लग गई और बचाव दल अब भी शव निकालने और आग बुझाने में जुटे हैं। अधिकांश मृतक और घायल नशे की लत से मुक्ति पा रहे मरीज थे। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया और कहा कि अस्पताल साफ तौर पर चिह्नित था। उन्होंने पत्रकारों और राजनयिकों को साइट पर आने का न्योता भी दिया। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर नागरिक स्थलों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। भारत पहले भी की मौकों पर पाकिस्तान के खिलाफ यूएन में अफगानिस्तान का साथ देता आया है। OIC का दुरुपयोग भारत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने ‘इस्लामिक सहयोग संगठन’ (OIC) को भारत के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की सुनियोजित कोशिश की है और इस मंच से भारत के खिलाफ बार-बार झूठे और निराधार आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत 20 करोड़ से अधिक मुसलमानों का घर है जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादियों में से एक है। हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत में मुस्लिम समुदाय अपने प्रतिनिधि खुद चुनता है जो उनकी आवाज उठाते हैं। पाकिस्तान की ‘असली फोबिया’ और आतंकी मानसिकता भारतीय राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान का असली ‘फोबिया’ (डर) भारत के उस बहुसांस्कृतिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के खिलाफ है, जिसका आनंद मुस्लिम समुदाय सहित सभी भारतीय उठाते हैं। पाकिस्तान का नैरेटिव उसकी उस सांप्रदायिक और आतंकवादी मानसिकता को दर्शाता है जिसे उसने अपने जन्म से ही पाला-पोसा है। संयुक्त राष्ट्र को नसीहत – ‘रिलीजिओफोबिया’ पर हो बात भारत ने स्पष्ट किया कि धर्म का राजनीतिकरण कभी भी समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि यह ध्रुवीकरण को बढ़ावा देता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह केवल एक धर्म (इस्लाम) पर केंद्रित ढांचों से बचे और सभी प्रकार के ‘रिलीजिओफोबिया’ (धर्म-आधारित घृणा) से निपटने पर ध्यान दे। हरीश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि धर्म का राजनीतिकरण समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि इससे विभाजनकारी सोच को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी संस्था है जो धर्म, संस्कृति और राजनीति से ऊपर है। इसकी विश्वसनीयता इसकी सार्वभौमिकता और निष्पक्षता में है। इसलिए हम ऐसे ढांचों से सावधान रहने की अपील करते हैं जो केवल एक धर्म पर केंद्रित हों।’ भारत ने खुद को हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म की जन्मस्थली बताते हुए कहा कि ‘सर्व धर्म समभाव’ यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान भारत की सभ्यतागत जीवन शैली रही है। भारत ने 1981 के उस घोषणापत्र का भी समर्थन किया जो बिना किसी विशेषाधिकार के सभी धर्मों के अनुयायियों के अधिकारों की रक्षा करता है। अंत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह अपना समय और सीमित संसाधन ध्रुवीकरण करने वाले नैरेटिव्स के बजाय संघर्ष समाधान, गरीबी उन्मूलन और हर धर्म के व्यक्ति के लिए समानता और गरिमा पर आधारित समाज के निर्माण में लगाए।  

बुरहानपुर हत्याकांड: फर्नीचर कारोबारी के भाई ने एकतरफा प्रेम में महिला कर्मचारी की ली जान

बुरहानपुर मंगलवार दोपहर शहर के गणपति थाना क्षेत्र में हत्या की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। एक फर्नीचर शोरूम संचालक ने अपने ही शोरूम में बुलाकर अपनी महिला कर्मचारी को मौत के घाट उतार दिया। मामला एकतरफा प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार गणपति थाने से चंद मीटर दूर स्थित राजकुमार फर्नीचर के संचालक अर्जुन सुगंधी ने अपने यहां काम करने वाली निकिता सुराड़े को बातचीत करने के लिए बुलाया था। जहां उसके साथ पहले अर्जुन के बड़े भाई की पत्नी ने मारपीट की और जब वह भाग कर घर जाने लगी तो अर्जुन ने धारदार हथियार से उसके सीने पर वार कर दिए। इससे वह वहीं ढेर हो गई। निकिता के साथ गई उसकी छोटी बहन स्नेहा सुराड़े ने तुरंत अपनी मां को फोन कर जानकारी दी। कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे स्वजन एम्बुलेंस से निकिता को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जहां मौजूद सर्जन दर्पण टोके ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। गणपति थाना प्रभारी सुरेश महाले ने बताया कि हत्या के आरोपित अर्जुन सुगंधी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि परिवार के अन्य सदस्य घर छोड़ कर फरार हो गए हैं। निकिता बड़ा भाई करता था पसंद मृतका निकिता की छोटी बहन स्नेहा ने बताया कि निकिता बीते दो साल से फर्नीचर शोरूम में काम कर रही थी। इस बीच अर्जुन का बड़ा भाई अजय सुगंधी निकिता को पसंद करने लगा था, लेकिन निकिता ने उसे मना कर दिया था। इसी के चलते एक दिन पहले यानी सोमवार को ही निकिता ने काम छोड़ दिया था। इसकी जानकारी 00 की पत्नी को लगी तो घर में विवाद शुरू हो गया। मंगलवार सुबह से अर्जुन के घर से लगातार फोन आने के कारण वह बातचीत करने के लिए गई थी। जहां उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। दस दिन बाद होने वाला था विवाह शहर के आलमगंज क्षेत्र में रहने वाली निकिता के स्वजन ने बताया कि निकिता का विवाह पुणे में तय हो गया था। दस दिन बाद उसका विवाह होने वाला था। परिवार उसकी तैयारी में लगा हुआ था। निकिता के परिवार में दो छोटी बहनें और मां है। उसके पिता का देहांत काफी पहले हो चुका था। मां मारवाड़ी परिवार में भोजन बना कर परिवार चलाती थी। निकिता और स्नेहा कालेज में पढ़ रही थीं और कॉलेज की फीस आदि के लिए ही वे काम करती थीं। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। सीसीटीवी का डीवीआर किया जब्त पुलिस ने फर्नीचर दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर जब्त किया है। बताया जाता है कि हत्या की यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। पुलिस इसे खंगाल कर सबूत के तौर पर न्यायालय में प्रस्तुत करेगी। अर्जुन के परिवार के शहर में दो से तीन फर्नीचर शोरूम हैं। इस घटना से अर्जुन का परिवार भी आहत है।  

ट्रेंड नहीं, सेहत चुनें—आंखों पर सोच-समझकर पहनें चश्मा

आंखों की रोशनी धूमिल होने या किसी अन्य प्रकार की समस्या होने पर विशेषज्ञ चश्मा या लेंस लगाने की सलाह देते हैं। कई लोगों को तेज धूप की वजह से भी आंखों से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं, ऐसे में अच्छी गुणवत्ता वाले सनग्लासेस लगाने की जरूरत होती है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लोग फैशन में भी यह फिर आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए भी तरह-तरह के लेंसेस या फिर कोई भी सनग्लास आंखों पर लगा लेते हैं। इससे फैशनेबल दिखने का उद्देश्य तो पूरा हो जाता है लेकिन आंखों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। डेकोरेटिव लेंसेस होते हैं खतरनाक… आंखों के कलर को बदलने के लिए कॉस्मैटिक उद्देश्य से लगाए जाने वाले लेंसेस आंखों के लिए नुकसादायक होते हैं। इन्हें नियमित रूप से लगाने से आंखें स्थाई रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इन्फेक्शन: कॉन्टैक्ट लेंस लगाने से सबसे सामान्य प्रकार का इन्फेक्शन कैराटिटिस कहलाता है। लेंसेस को बिना साफ किए लगातार लगाए रहने से भी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। किसी और का कॉन्टैक्ट लेंस लगाने या किसी और को अपना कॉन्टैक्ट लेंस लगाने देने से आई इन्फेक्शन की समस्या को बढ़ावा मिलता है। कॉर्नियल इन्फेक्शन वायरल, बैक्टीरियल या पैरासिटिक हो सकता है। स्वीमिंग करने के दौरान कलर्ड कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से या उसे धोने से भी आंखों का इन्फेक्शन हो सकता है। ये होते हैं लक्षण: आंखों के इन्फेक्शन के प्रमुख लक्षणों में आंखों का लाल होना, लगातार आंसू बहना, धुंधलापन, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता। कैराटिटिस की परेशानी बढ़ने पर इन्फेक्शन की गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके लक्षणों के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। कॉर्नियल अल्सर: यदि कॉर्नियल इन्फेक्शन को बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो अल्सर की समस्या हो सकती है, जो कि कॉर्निया में अत्यधिक सूजन पैदा कर सकता है। खो जाती है आंखों की रोशनी: कलरफुल कॉन्टैक्ट लेंसेस के कारण आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है या अंधापन भी हो सकता है। कॉर्नियल अल्सर के कारण होने वाली क्षति आंखों को स्थाई रूप से खराब कर सकती है। यदि इन्फेक्शन को बढ़ने के लिए छोड़ दिया जाए तो अल्सर के कारण आंखों के कई हिस्सों में छेद जैसे बन जाते हैं। सस्ते चश्मे आंखों के दुश्मन… गर्मी के दिनों में या फिर धूप की तेज किरणों से बचने के लिए सनग्लासेस लगाते हैं लेकिन उसकी क्वालिटी से समझौता कर लेते हैं। सड़क किनारे मिलने वाले या खराब क्वालिटी वाले सनग्लासेस लगाने से आंखों से जुड़े कई सारे इन्फेक्शन और रिफ्रेक्टिव एरर हो जाती है। इस प्रकार के सनग्लासेस लगाने से आंखों में खुजली, पानी निकलना, धुंधलापन, सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक लेंस वाले विभिन्न रिफ्रेक्टिव इंडेक्स वाले, असमान ग्लास कलर वाले सनग्लासेस जो सस्ते कीमतों पर उपलब्ध होते है, इन्हें लगातार पहने रहने से आंखों से जुड़ी कई सारी परेशानियां और मायोपिया की समस्या हो सकती है। इस प्रकार के चश्मे आमतौर पर ग्लास या फाइबर से बने होते हैं, खराब क्वालिटी के सनग्लासेस से रंगों को ना पहचान पाने की परेशानी पैदा हो सकती है।  

डिजिटल दुनिया में ऋतिक रोशन की वापसी: प्राइम वीडियो संग ‘मेस’ का ऐलान

मुंबई,  प्राइम वीडियो आने वाली ऑरिजनल फिल्म ‘मेस’, ऋतिक रोशन और ईशान रोशन द्वारा उनके बैनर ‘एचआरएक्स फिल्म्स’ (फिल्मक्राफ्ट प्रोडक्शंस की एक डिवीजन) के तहत बनाई जा रही है। इस प्रोजेक्ट में राजेश ए. कृष्णन की ‘सोडा फिल्म्स लैब’ भी उनके साथ जुड़ी है।राजेश ए. कृष्णन के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म का प्रोडक्शन जल्द ही शुरू होने वाला है। यह कॉमेडी फिल्म स्ट्रीमिंग सर्विस और एचआरएक्स फिल्म्स (फिल्मक्राफ्ट प्रोडक्शंस की एक डिवीजन) के बीच दूसरा कोलैबोरेशन है, इससे पहले थ्रिलर सीरीज ‘स्टॉर्म’ का एलान हो चुका है। इस फिल्म की ओरिजिनल पटकथा अमेरिकी लेखक पॉल सोटर ने लिखी है, जबकि अडैप्टेड स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स कपिल सावंत ने लिखे हैं। ‘मेस’ की कहानी लुटेरों के एक ऐसे अजीबोगरीब ग्रुप के बारे में है, जो एक ओसीडी से पीड़ित आदमी के घर में घुस जाते हैं। धीरे-धीरे उन्हें एहसास होता है कि खतरा उस परिवार को नहीं, बल्कि खुद उन्हें है और इस रात भर चलने वाली खींचतान में उनका बचना मुश्किल है। निर्माता ऋतिक रोशन ने कहा, “‘स्टॉर्म’ के साथ प्राइम वीडियो के साथ एक खास सफर की शुरुआत हुई थी और ‘मेस’ हमारी कंपनी ‘एचआरएक्स फिल्म्स’ के लिए एक अगला और स्वाभाविक कदम है।” उन्होंने कहा, “प्राइम वीडियो के साथ हमारी साझेदारी ने हमें कुछ अलग और नया कर दिखाने का मौका दिया है, और यह प्रोजेक्ट उसी सोच को पूरी तरह से दर्शाता है। राजेश (राजेश ए. कृष्णन) एक प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर अपनी एक अलग पहचान रखते हैं; उनके पास कॉमेडी को एक बेहतरीन कहानी के साथ जोड़ने का शानदार हुनर है। ‘मेस’ के लिए उनका नजरिया शुरू से ही कमाल का रहा है। जैसे-जैसे फिल्म का काम आगे बढ़ रहा है, मैं और ईशान इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साहित हैं। हमारा मानना है कि यह फिल्म उन दर्शकों को बहुत पसंद आएगी जो लीक से हटकर और नई तरह की कहानियों को देखना पसंद करते हैं।”  

प्रदेश में एलपीजी आपूर्ति सुचारु:कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था लागू

रायपुर  खाद्य सचिव मती रीना बाबा साहेब कंगाले के दिशानिर्देश पर छत्तीसगढ़ में निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ कमर्शियल गैस कनेक्शन वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के लिए संतुलित और प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था केंद्रीय पेट्रोलियम एवं नैसर्गिक गैस मंत्रालय के अधीन लागू करने का निर्णय लिया गया है। खाद्य सचिव मती रीना कंगाले ने कहा कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रहे और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार एवं ऑयल कंपनियों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कमर्शियल उपभोक्ताओं को विगत माहों की खपत के आधार पर अधिकतम 20 प्रतिशत की सीमा के अंदर एलपीजी प्रदाय करने पर सहमति बनी है। कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों एवं चिकित्सालयों के साथ-साथ सैन्य एवं अर्द्धसैन्य कैंप, जेल, हॉस्टल, समाज कल्याण संस्थान, रेलवे एवं एयरपोर्ट कैंटीन को पूर्ण प्राथमिकता देते हुए 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं शासकीय कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं उनके गेस्ट हाउस और कैंटीन के लिए 50 प्रतिशत, पशु आहार उत्पादक संयंत्र एवं बीज उत्पादक इकाई  तथा रेस्टोरेंट एवं होटल के लिए 20 प्रतिशत आपूर्ति निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल एलपीजी के वितरण की दैनिक समीक्षा ऑयल कंपनियों द्वारा की जाएगी तथा इसकी जानकारी प्रतिदिन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी रहे।  खाद्य सचिव मती रीना बाबासाहेब कंगाले ने कहा कि आम नागरिकों को निर्बाध एलपीजी आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े, साथ ही सभी वर्गों तक संतुलित रूप से गैस की उपलब्धता बनी रहे।  

इस्लामिक दुनिया में दरार: क्यों ईरान को अलग-थलग देखना चाहते हैं उसके पड़ोसी?

वाशिंगटन अमेरिका के हमले के बाद भड़का ईरान अपने ही पड़ोसी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है। इसपर खाड़ी देशों ने अमेरिका से कहा है कि उसका अभियान इतना तेज होना चाहिए कि ईरान कमजोर हो जाए। हालांकि इस युद्ध में सीधे तौर पर कोई भी देश शामिल नहीं होना चाहता। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी देशों को डर है कि ईरान उनके तेल के ठिकानों, पोर्ट्स और समुद्री रास्तों को निशाना बना सकता है। ऐसे में उनके पास अमेरिका की ओर देखने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है।   अमेरिका चाहता है, खाड़ी देश भी युद्ध में कूदें अमेरिका चाहता है कि इस युद्ध में खाड़ी देश भी कूद पड़ें और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का खुलकर विरोध करें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर बाकी देशों का आह्वान किया है। वह चाहते हैं कि ईरान समझ जाए कि उसके ही क्षेत्र में उसके खिलाफ सारे देश खड़े हैं। सऊदी में गल्फ रिसर्टे सेंटर के चेयरमैन अब्दुलअजीज सेगर ने कहा कि सारे खाड़ी देश सोचते हैं कि ईरान ने सारी सीमाएं लांघदी हैं। उन्होंने कहा, शुरू में हमने ईरान का पक्ष लिया और अमेरिका के युद्ध का विरोध किया। हालांकि इसके बाद जब हवाई हमले हम पर भी होने लगे तो ईरान दुश्मन हो गया। ईरान से बढ़े हुए तनाव के बीच भी खाड़ी देश युद्ध में सीधे हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं। ईरान ने यूएई समेत कई देशों के एयरपोर्ट्स को भी निशाना बनाया है। बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और ओमान में एयरपोर्टस पर धमाके हुए हैं। इसके अलावा ईरान के खतरनाक कदमों की वजह से समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। युद्ध को 16 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं। ईरान लगातार खाड़ी देशों में अमेरिका के ठिकानों और आम नागरिको को निशाना बना रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके हमलो की वजह से ईरान की सेना की कमर टूट गई है। वहीं जब होर्मुज के मुद्दे पर अमेरिका के साथ कोई नहीं आया तो वह अपने मित्र देशों पर ही नाराज हो गए। ट्रंप ने कहा, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने जिस गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, उसके प्रति सहयोगियों में “उत्साह” की कमी है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से ही दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के पाँचवें हिस्से की जहाज़ों से जरिये आपूर्ति की जाती है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हफ़्ते किसी समाधान की संभावना कम है। उन्होंने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह ज़रूरी था। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फ़रवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की धमकी दी थी जिसके बाद फ़ारस की खाड़ी से होने वाली जहाज़ों की आवाजाही काफ़ी हद तक कम हो गई है। ट्रंप ने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा ” ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा इस संघर्ष में नाटो को शामिल करने में दिखाई गई हिचकिचाहट से मैं “खुश नहीं हैं” और “बहुत हैरान हूँ। मैं ब्रिटेन के रवैये से खुश नहीं था। मुझे लगता है कि शायद वे इसमें शामिल होंगे, लेकिन उन्हें पूरे उत्साह के साथ शामिल होना चाहिए।”  

पार्टी लाइन तोड़ी तो सजा तय! क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस के तीन विधायक निलंबित, सदस्यता पर तलवार

ओडिशा ओडिशा में क्रॉस वोटिंग के चलते राज्यसभा चुनाव में हारने वाली कांग्रेस ने अब बागी विधायकों पर ऐक्शन लेना शुरू कर दिया है। पार्टी ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के लिए वोट डालने वाले तीन विधायकों को निलंबित कर दिया है। ये विधायक हैं सनाखेमुंडी रमेश चंद्र जेना, मोहाना के दसरथी गोमांगो और कटक से विधायक सोफिया फिरदौस। इन लोगों ने सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी की हिदायत के बाद भी दिलीप रे के समर्थन में वोट दिया था। इन लोगों के निलंबन की जानकारी देते हुए ओडिशा कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘कांग्रेस को धोखा देने वालों ने देश के साथ विश्वासघात किया है।’ ओडिशा कांग्रेस के मीडिया सेल के प्रभारी अरबिंद दास ने कहा कि यह निर्णय पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने के बाद लिया गया है। इन लोगों ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के हितों के खिलाफ काम किया। वह भी तब जबकि सभी विधायकों को पहले से ही हिदायत दी गई थी। उन्होंने कहा कि अब इन लोगों की विधानसभा की सदस्यता ही खत्म कराई जाएगी। इसके लिए हम स्पीकर को जल्दी ही नोटिस देने वाले हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि इन लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं थी। इन विधायकों ने पार्टी के साथ गद्दारी की है। हम तय करेंगे कि कैसे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत इन लोगों को विधानसभा से बाहर कराया जाए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस ऐक्शन की हाईकमान ने भी सराहना की है। लीडरशिप मानती है कि इन लोगों के खिलाफ ऐक्शन लिया जाना जरूरी था। इन कांग्रेस विधायकों के अलावा मुख्य विपक्षी दल बीजेडी के भी 8 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इसी के चलते विपक्ष के साझा उम्मीदवार दत्तेश्वर होता की हार हो गई। होता को बीजेडी ने उतारा था, लेकिन कांग्रेस ने भी उनके समर्थन का ऐलान किया था। माना जा रहा है कि कांग्रेस ऐसा ही ऐक्शन बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में भी ले सकती है। बिहार में भी विपक्षी कैंडिडेट को हार मिली है, जबकि वह एक उम्मीदवार जिताने की स्थिति में आसानी से था। हरियाणा में किसी तरह जीत पाई कांग्रेस, 9 वोट थे ज्यादा हरियाणा में किसी तरह कांग्रेस के कैंडिडेट कर्मवीर सिंह बौद्ध को जीत मिल गई। फिर भी भाजपा की रणनीति के आगे पार्टी हांफती नजर आई। यहां भी 5 विधायकों ने पार्टी से अलग रुख अपनाया और क्रॉस वोटिंग कर दी। इसके अलावा 4 वोट अवैध करार दिए गए। इस तरह 37 सीटों वाली कांग्रेस के कैंडिडेट को महज 28 वोट ही मिले। ऐसी स्थिति में कांग्रेस यह पड़ताल करने में जुटी है कि आखिर हरियाणा और बिहार में किन नेताओं ने उसके ही कैंडिडेट को वोट नहीं दिया।

LPG यूजर्स के लिए बड़ी खबर: गैस बुकिंग में e-KYC का सच क्या है? जानें मंत्रालय की नई गाइडलाइंस

नई दिल्ली मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और देश के कुछ हिस्सों में गैस संकट की खबरों के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण सभी के लिए हर बार अनिवार्य नहीं है। किसे करानी होगी e-KYC और किसे नहीं? मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, केवाईसी की आवश्यकता केवल विशिष्ट स्थितियों में ही होगी…      सामान्य उपभोक्ता: यदि आप उज्ज्वला योजना के तहत नहीं आते हैं और अपनी केवाईसी प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुके हैं, तो आपको इसे दोबारा कराने की कोई जरूरत नहीं है।      अधूरे दस्तावेज वाले ग्राहक: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण केवल उन ग्राहकों के लिए अनिवार्य है, जिनकी केवाईसी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।      उज्ज्वला योजना (PMUY) लाभार्थी: इस योजना के 10.51 करोड़ लाभार्थियों को अपनी सब्सिडी जारी रखने के लिए साल में एक बार केवाईसी अपडेट कराना होगा। 15 मार्च के आदेश पर स्पष्टीकरण गौरतलब है कि 15 मार्च को मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की बात कही थी, जिससे आम जनता में भ्रम फैल गया था। मंगलवार को मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उस आदेश का उद्देश्य केवल उन उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करना था जिन्होंने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है।  

जितना पूछा जाए, उतना ही बताएं — मंत्री के लंबे जवाब पर ओम बिरला का सख्त रुख

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल में सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से छोटे जवाब देने का अपना आग्रह दोहराते हुए मंगलवार को कहा कि क्या मंत्री ‘संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते।’ प्रश्नकाल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य जीएम हरीश बालयोगी के पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। इस दौरान बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा, ‘आप भाषण क्यों दे रहे हैं। आप तो जवाब दो।’ इसके बाद जब वर्मा दूसरे पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे तो अध्यक्ष ने कहा, ‘आप लोग संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते। मैंने कितनी बार सदन में यह आग्रह किया है। हर बार विस्तृत जवाब देते हो आप। जितना (सदस्य) पूछें आप उतना जवाब दे दो।’ इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होने के दौरान भी बिरला ने सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से उनके संक्षिप्त जवाब देने का अपना आग्रह दोहराया। उन्होंने कहा, ‘मेरा प्रयास है कि प्रश्नकाल में सूचीबद्ध सभी 20 पूरक प्रश्न आ जाएं।’ उन्होंने दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल समाप्त होने से पहले एक सदस्य को आज का अंतिम पूरक प्रश्न पूछने का निर्देश देते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा, ‘समय कम है, मत्रीजी को लंबा जवाब देना है।’ विपक्ष के आठ लोकसभा सदस्यों का निलंबन रद्द लोकसभा ने मंगलवार को उन आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन रद्द कर दिया जिन्हें संसद के बजट सत्र के पहले चरण में सदन की अवमानना के मामले में निलंबित किया गया था। बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी थी। सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने आसन से निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया और विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खेद भी जताया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने निलंबन खत्म करने का प्रस्ताव सदन में रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। क्यों हुआ था निलंबन बजट सत्र के पहले चरण के दौरान तीन फरवरी को आसन की ओर कागज फेंकने के बाद, सदन की अवमानना के मामले में विपक्ष के आठ सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं। निलंबन के बाद से ये सांसद कार्यवाही वाले दिन संसद के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे।  

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