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महतारी वंदन से बदल रही तस्वीर: किस्त दर किस्त मजबूत हो रही महिलाओं की आर्थिक स्थिति

रायपुर  छोटे-छोटे सहयोग से बड़े बदलाव की तस्वीर आज शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक देखने को मिल रही है।  कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड के ग्राम रमपुरा, सेक्टर गोछिया में रहने वाली मती भारती वैष्णव के जीवन में महतारी वंदन योजना ने नई उम्मीद और आत्मविश्वास लाया है। महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें अब तक 25 किस्तों के माध्यम से कुल 25 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। यह राशि उनके लिए किसी सहारे से कम नहीं रही। पहले जहां घर के छोटे-छोटे खर्चों को संभालना चुनौतीपूर्ण था, वहीं अब योजना से मिली नियमित सहायता ने उनकी आर्थिक स्थिति को काफी हद तक स्थिर किया है। भारती वैष्णव बताती हैं कि इस राशि का सबसे बड़ा लाभ उनके बच्चों की पढ़ाई में मिल रहा है। अब वे बच्चों के लिए समय पर किताबें, कॉपी और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करा पा रही हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी हुई है और उनका भविष्य बेहतर दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही यह राशि घर के दैनिक खर्चों जैसे राशन, दवाई और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में भी मददगार साबित हो रही है। अब उन्हें छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। भारती वैष्णव ने शासन की इस योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करती है। यदि महिलाओं को समय पर सहयोग और अवसर मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

आफ्टर पार्टी में प्रियंका चोपड़ा का ग्लैम लुक वायरल, Wonder Woman से तुलना पर छिड़ी बहस

लॉस एंजिल्स 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स समारोह में देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा का जलवा खूब रहा। यहां वो अपनी किसी फिल्म के लिए नहीं बल्कि अवॉर्ड देने पहुंची थीं। प्रियंका वो पहली भारतीय एक्ट्रेस बन चुकी हैं जिन्हें ऑस्कर जैसे ग्लोबल अवॉर्ड फंक्शन में अवॉर्ड प्रेजेंट करने का मौका मिला। उन्होंने जेवियर बार्डेम के साथ मिलकर बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म का अवॉर्ड ‘सेंटिमेंटल वैल्यू’ को दिया। प्रियंका ने ऑस्कर्स के बाद की पार्टी की कुछ झलकियां भी शेयर की हैं जिनमें पियानो बजाते निक के पीछे उनके कंधे पर हाथ रखी दिख रही हैं। बता दें कि लॉस एंजिल्स के हॉलीवुड स्थित डॉल्बी थिएटर में 98वें ऑस्कर समारोह का आयोजन हुआ। इस साल ऑस्कर समारोह की मेजबानी लेट-नाइट होस्ट कॉनन ओ’ब्रायन ने की, जिन्होंने 2025 के शो को भी होस्ट किया था। इस अवॉर्ड समारोह को होस्ट करने से पहले की भी कई झलकियां प्रियंका चोपड़ा ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर की थी। इस रात की कई झलकियों में प्रियंका और निक समारोह के रेड कार्पेट पर बेहद खूबसूरत दिख रहे थे। प्रियंका ने दिखाई अवॉर्ड शो से पहले की तैयारी प्रियंका ने इस ऑस्कर्स अवॉर्ड शो के लिए अपनी तैयारियों के कुछ खूबसूरत पल की झलकियां शेयर की हैं जिनमें वो सफेद गाउन में दिख रही हैं। उनके चारों तरफ मेकअप आर्टिस्ट और डिजाइनर उन्हें तैयार करते दिख रहे हैं। वहीं उनसके इर्द-गिर्द काफी सारे कैमरामैन भी दिख रहे हैं। निक जोनस पियानो बजाती दिख रहे हैं और पीछे दिख रहीं प्रियंका इसी के साथ प्रियंका ने कुछ और खूबसूरत झलकियां दिखाई हैं जो आफ्टर पार्टी की हैं। प्रियंका इन तस्वीरों में पति के साथ दिख रही हैं। एक तस्वीर में निक जोनस पियानो बजाते दिख रहे हैं और प्रियंका उनके कंधे पर हाथ रखी दिख रही हैं। इन तस्वीरों पर लोगों ने प्रियंका की जमकर तारीफ की है। जेवियर बार्डेम के साथ स्टेज पर पहुंची थीं प्रियंका चोपड़ा वहीं ऑस्कर्स के अवॉर्ड शो में ही प्रियंका स्टेज पर पहुंचीं और वैसी ही जेवियर बार्डेम ने माइक पर गरजते हुए कहा, ‘युद्ध नहीं, फिलिस्तीन को आजाद करो।’ प्रियंका ने भी सिर हिलाकर उनके बयान पर सहमति जताई। लॉस एंजिल्स के हॉलीवुड स्थित डॉल्बी थिएटर में 98वें ऑस्कर पुरस्कार समारोह का आयोजन हुआ। इस साल ऑस्कर समारोह की मेजबानी लेट-नाइट होस्ट कॉनन ओ’ब्रायन ने की, जिन्होंने 2025 के शो की भी मेजबानी की थी। लोगों ने कहा- ये Daal Gadot काफी सारे यूजर उनकी तुलना वंडर वुमन से करते हुए उनके लिए दाल गदोत लिख रहे हैं। एक ने लिखा, ‘देखो, ये Daal Gadot की तरह दिख रही हैं! मुझे खेद है कि जेवियर ने आपको इतना असहज महसूस कराया। मुझे उम्मीद है कि वो फिर से ऐसा ही करेगा।’ एक और ने कहा- वो Gal Gadot हैं आप Daal Gadot लग रहीं।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना: 44 हजार जोड़ों को लाभ, तिथियों का हुआ निर्धारण

मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना की तिथियों का निर्धारण,  44 हजार जोड़े हो सकेंगे लाभान्वित भोपाल  गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आयोजित किए जाने वाले मुख्यमंत्री कन्या विवाह/ निकाह योजना के लिए तिथियों का निर्धारण किया गया है। इनमें अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, देवउठनी ग्यारस (तुलसी विवाह) 20 नवंबर 2026, बसंत पंचमी 11 फरवरी 2027 तथा एक अन्य तिथि स्थानीय मांग और कलेक्टर के निर्णय अनुसार निर्धारित की जा सकती है। वर्ष 2026-27 में पक्ष 44 हजार से अधिक विवाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पर राज्य सरकार 242 करोड़ से अधिक राशि व्यय करेगी। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाय योजना के प्रभावी व्यवस्थि और गरिमापूर्ण ढंग से आयोजन के लिए विभाग द्वारा सामूहिक विवाह समारोह में भाग लेने वाले जोड़ों की न्यूनतम संख्या 11 और अधिकतम संख्या 200 निर्धारित की गई है। प्रदेश के 55 जिलों में इन अवसरों पर 800 जोड़े यानिकी 44 हजार जोड़ों का विवाह संभव हो सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 51 हजार 899 मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना तथा 28 हजार 362 मुख्यमंत्री निकाह कराए गए हैं। इन हितग्राहियों से 321 करोड़ 41 लाख 58 हजार की सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में भाग लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन कराया जा सकता है। योजना में 49 हजार रूपये की राशि कन्या के बैंक खाते में तथा 6 हजार रूपये की राशि आयोजन समिति को कुल 55 हजार रूपये प्रति विवाह खर्च किया जाता है।  

Exam Evaluation Rules Changed: कॉपी चेकिंग के दौरान मोबाइल बैन, बोर्ड ने कसी लगाम

जगदलपुर. बोर्ड परीक्षा के बाद अब कॉपियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता पर जोर है। जगदलपुर के बस्तर हाईस्कूल में मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। शुरुआत से पहले शिक्षकों को नियमों और सावधानियों की विस्तृत ब्रीफिंग दी गई। अब मूल्यांकन के दौरान मोबाइल और स्मार्ट गैजेट्स पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। शिक्षकों को रोजाना कम से कम 40 उत्तर पुस्तिकाएं जांचना अनिवार्य किया गया है। दो पालियों में मूल्यांकन होगा, बीच में आधे घंटे का ब्रेक मिलेगा। पहले दिन शिक्षकों को 5-5 कॉपियों से प्रक्रिया की शुरुआत कराई गई। करीब 1.25 लाख कॉपियों का मूल्यांकन 9 अप्रैल तक पूरा करना लक्ष्य है। पहली खेप में 65 हजार कॉपियां स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखी गई हैं। बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी सख्ती से रोक लगाई गई है। इस बार शिक्षकों की ड्यूटी रद्द करने का अधिकार स्थानीय स्तर पर नहीं है। प्रशासन का फोकस—समयबद्ध और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। टैलेंट हंट आयोजित जगदलपुर. बस्तर की प्रतिभाएं अब स्थानीय मंच तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान की ओर कदम बढ़ा रही हैं। इसी सोच के साथ शिक्षा प्रकाश पुंज संस्थान ने टैलेंट हंट आयोजित किया। गायन, नृत्य, मॉडलिंग और अभिनय में युवाओं ने दमदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रतिभाओं का आकलन किया। आत्मविश्वास और प्रस्तुति के आधार पर 40 से ज्यादा युवाओं का चयन हुआ। इन चयनित प्रतिभाओं को अब मुंबई में खुद को साबित करने का मौका मिलेगा। संस्थान ने सिर्फ मंच ही नहीं, बल्कि आगे की मार्गदर्शन व्यवस्था भी की है। संस्थान प्रमुख ने कहा—बस्तर में प्रतिभा की कमी नहीं, मंच की जरूरत है। कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षणिक और कला क्षेत्र के 80 लोगों को सम्मानित किया गया। इस आयोजन ने युवाओं में नई उम्मीद और दिशा दोनों जगाई है। विजेताओं में मिस बस्तर, मिस्टर जगदलपुर सहित कई प्रतिभाएं शामिल रहीं। बस्तर के युवाओं का यह आत्मविश्वास अब बड़े मंच पर नजर आएगा।

गर्मियों में कूल नींद का फॉर्मूला! एक्सपर्ट ने बताए सुकून भरी नींद के असरदार उपाय

मौसम में बदलाव का असर नींद पर पड़ता है। ऐसा देखा गया है कि गर्मी में लोग सर्दी के मुकाबले कम सोते हैं और इसका सीधा असर उनकी दिनचर्या पर होता है। आखिर क्यों गर्मी में नींद कम होती है और कैसे पाएं सुकून की नींद, बता रहे हैं एक्सपर्ट… गर्मी में स्लीप साइकल में परिवर्तन और तापमान बढ़ने के कारण नींद कम आती है। लंबे समय तक रोशनी रहने से नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन में बाधा आती है, जिससे सोने और उठने का शरीर का प्राकृतिक चक्र प्रभावित होता है। स्वास्थ्य के लिए सात से आठ घंटे की नींद जरूरी है। ऐसे में नींद पूरी न होने पर कई लोगों को मानसिक तनाव, थकान व चिड़चिड़ेपन की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गर्मी में होती है कम नींद गर्मी में नींद कम होना किसी बीमारी का संकेत नहीं है। दरअसल, गर्मी में दिन लंबे और रात छोटी होती हैं और अंधेरा होने के बाद ही मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन शुरू होता है। चूंकि अंधेरा देर से होता है, इसलिए रात हार्मोन कम बनने से नींद कम हो जाती है। सेहत के लिए आपकी कुंडली क्या कहती है — जानें बिल्कुल मुफ्त क्या कहती है स्टडी? बर्लिन में सेंट हेडविग हास्पिटल में नींद पर हुई स्टडी बताती है कि नींद का पैटर्न सकैंडियन रिदम (जैविक घड़ी) के हिसाब से बदलता है। जो शरीर में 24 घंटे सूरज के हिसाब से चलती है। कैसे पाएं गुणवत्ता वाली नींद?     प्राकृतिक धूप लें और शारीरिक गतिविधियां करें।     सही समय पर सोने-जागने का अभ्यास करें।     सोते समय कमरा ठंडा और शांत हो। कमरे में अंधेरा हो।     सोने जाने से पहले चाय- कॉफी न पिएं।     बिस्तर पर जाने से एक घंटे पहले मोबाइल से दूरी बना लें।     सोने से पहले नहा लें और आराम के लिए सूती कपड़े पहनें।     जब सोने का वक्त हो तभी बिस्तर पर जाएं, उससे पहले नहीं।     रात में ज्यादा भारी खाना खाकर सोने से परहेज करें। बदलता मौसम बिगाड़ रहा है आपकी ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ यह सच है कि मौसम में बदलाव और सूर्योदय सूर्यास्त के समय में परिवर्तन नींद पर असर जरूर डालते हैं, क्योंकि मानव शरीर की जैविक घड़ी सूरज के हिसाब से थोड़ा आगे-पीछे हो सकती है। इसलिए गर्मी में लोग देर से सोने के बावजूद जल्दी उठ जाते हैं और नींद पूरी नहीं हो पाती है। इसलिए बहुत जरूरी है कि रात की अच्छी नींद के लिए दिन मैं अपनी गतिविधियों पर ध्यान रखें। अगर आपकी दिनचर्या सही रहेगी तो रात की नींद भी पर्याप्त होगी। दरअसल, मानसिक स्वास्थ्य के बहुत जरूरी है। लाइफस्टाइल बनी नींद की दुश्मन आजकल लोगों की बदलती लाइफस्टाइल भी नींद की दुश्मन बन गई है। कई लोग ऐसे हैं, जो देर रात तक आफिस का काम करते हैं, लेकिन सुबह उन्हें जल्दी उठना पड़ता है। ऐसे में नींद पूरी नहीं होती और पूरे दिन थकान लगती है। कई लोग ऐसे हैं, जो देर रात तक मोबाइल देखते हैं, लेकिन सुबह काम की वजह से जल्दी उठना होता है। ऐसे लोगों की नींद भी पूरी नहीं होती और फिर मानसिक तनाव बढ़ने लगता है।  

नवरात्र फास्टिंग के दौरान बढ़ सकता है BP-शुगर! जानिए कैसे रखें इसे संतुलित

नवरात्र केवल आस्था और आध्यात्मिक साधना का पर्व नहीं है, बल्कि यह शरीर को हल्का और शुद्ध करने का भी अवसर होता है। बहुत से लोग पूरे नवरात्र व्रत रखते हैं, लेकिन अक्सर व्रत के दौरान तली-भुनी चीजें या मिठाई वाली या फिर अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट ले लेते हैं। इससे हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अगर व्रत के दौरान हमारा आहार संतुलित रहे तो यह बहुत लाभकारी होता है। व्रत में पोषण का महत्व मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली में सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट व चीफ डायबिटीज एजुकेटर में डॉ. शुभदा भनोत बताती हैं कि उपवास के दौरान शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन, फाइबर, विटामिंस और खनिजों की आवश्यकता बनी रहती है। व्रत के दौरान अगर आप केवल आलू, साबूदाना या तली हुई चीजों पर निर्भर रहेंगे, तो ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) तेजी से बढ़ और घट सकता है, जिससे कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए व्रत के आहार में संतुलन रखना जरूरी है। व्रत में क्या खाएं प्रोटीन युक्त आहार शामिल करें व्रत के दौरान अक्सर प्रोटीन की कमी हो जाती है। इसकी पूर्ति के लिए पनीर, दही, दूध, मूंगफली, कुट्टू, राजगीरा और मखाने अच्छे विकल्प हैं। ये लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं और ऊर्जा का स्तर भी बनाए रखते हैं। सेहत के लिए आपकी कुंडली क्या कहती है — जानें बिल्कुल मुफ्त फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाएं मौसमी फलों और सब्जियों के साथ ही सेब, पपीता, अमरूद, नारियल पानी, खीरा और टमाटर आदि शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और आवश्यक विटामिंस और मिनरल्स प्रदान करते हैं। स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट चुनें साबूदाना या आलू के अलावा कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और राजगीरा बेहतर विकल्प हैं। इनमें फाइबर अधिक होता है। इनसे शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा मिलती रहती है। स्वस्थ वसा का सेवन भीगे हुए बादाम, अखरोट, कद्दू और सूरजमुखी के बीज ऊर्जा और अच्छे फैट प्रदान करते हैं। ये हार्मोन संतुलन और हृदय के लिए भी लाभकारी हैं। पर्याप्त पानी पिएं व्रत के दौरान पानी, छाछ, दही और नींबू पानी का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखता है साथ ही थकान से भी बचाता है। व्रत में किन चीजों से बचें      अत्यधिक तले हुए पकवान जैसे साबूदाना वड़ा, व्रत वाली पकौड़ी आदि     अधिक मिठाई या मीठे पेय     सेंधा नमक का अधिक सेवन     लंबे समय तक भूखे रहना और फिर बहुत अधिक खाना डायबिटीज वाले बरतें सावधानी जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें व्रत रखते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। व्रत रखने से पहले अपने डाक्टर की सलाह से इंसुलिन/टैबलेट के डोज के बारे में बदलाव की जानकारी लें। लंबे समय तक एकदम खाली पेट न रहें। हर दो-तीन घंटे में थोड़ी मात्रा में फल, मखाना, भुने हुए नट्स, दही, छाछ या समा के चावल/राजगिरा जैसी हल्की चीजें लेते रहें। बहुत मीठे फल (अधिक पके केले, चीकू, अंगूर आदि) और अधिक शक्कर, गुड़ या तले हुए साबूदाने से बचें। इनकी जगह पपीता, सेब, अमरूद, नारियल पानी जैसे विकल्प लें। खाने की प्लेट में हमेशा फाइबर और प्रोटीन का संयोजन रखें, जैसे समा के चावल की थोड़ी मात्रा में रायता, सलाद लें, ताकि ब्लड शुगर बढ़े नहीं। दिन में तीन-चार बार ब्लड शुगर मानिटर करें। खासकर चक्कर आना, अधिक पसीना, घबराहट, धड़कन तेज होना या अधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत कुछ खा लें और शीघ्र ही डाक्टर से संपर्क करें। अगर ब्लड प्रेशर हाइ रहता है अगर आपका ब्लड प्रेशर हाइ रहता है तो सेंधा नमक का सीमित मात्रा में सेवन करें। व्रत में अनजाने में ही शरीर में नमक अधिक मात्रा में पहुंच जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। नमक की मात्रा का ध्यान रखते हुए तले हुए खाद्य पदार्थ भी कम लें। व्रत करने से पहले ब्लड प्रेशर की नियमित दवाएं कैसे लेनी हैं, यह अपने चिकित्सक से स्पष्ट कर लें, दवा बिना पूछे न छोड़ें। बहुत तला हुआ, ज्यादा घी-तेल वाला और पैकेज्ड नमकीन (उपवास चिप्स, फराली मिक्स आदि) कम से कम खाएं, उबली, ग्रिल्ड या हल्की तली हुई चीजें बेहतर हैं। पानी, नारियल पानी, छाछ, नींबू-पानी (कम नमक/शक्कर के साथ) जैसे तरल पर्याप्त मात्रा में लें ताकि डिहाइड्रेशन के कारण बीपी अचानक न गिरे या बढ़े। दिन में कम से कम दो बार बीपी जांचें, सिरदर्द, चक्कर, सांस फूलना, सीने में दर्द, टांगों में सूजन या बहुत थकान हो तो तुरंत आराम करें और मेडिकल मदद लें। देर रात भारी भोजन न करें; रात में हल्का, प्रोटीन और फाइबर युक्त खाना लें ताकि नींद अच्छी रहे और शुगर-बीपी संतुलित रहे। हल्की वाक, प्राणायाम, ध्यान जैसे शारीरिक गतिविधियां बहुत फायदेमंद होती हैं। भारी कसरत या धूप में अधिक देर तक खाली पेट न रहें।  

Big Naxal Lead: ACM मंगेश के अड्डे से मिला पत्र, ‘सरेंडर का आदेश क्या है?’ पूछता कैडर

मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी. जिले के औंधी थाना क्षेत्र में महाराष्ट्र और बस्तर की सीमा से लगे ग्राम कोहकाटोला के जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया। जवानों के पहुंचने की भनक लगते ही नक्सली घने जंगल का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। हालांकि सर्चिंग के दौरान पुलिस को नक्सल ठिकाने से हथियार, गोला-बारूद और नक्सली मंगेश द्वारा अपने शीर्ष नेता को लिखा गया एक पत्र भी बरामद किया गया है। जानकारी के मुताबिक, घटना बीते रविवार शाम की बताई जा रही है। ऑपरेशन के बाद सोमवार को पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह ने प्रेस वार्ता में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीआरजी, सीएएफ और औंधी थाना पुलिस की संयुक्त टीम नक्सल ठिकाने पर दबिश देने निकली थी, जबकि बस्तर के कांकेर जिले से भी बैकअप लगाया गया था। इलाके में संदिग्ध गतिविधियां देखकर जब जवानों ने घेराबंदी की, तो सिविल ड्रेस में मौजूद नक्सली भागने लगे। जवानों ने पीछा किया, लेकिन घने जंगल का फायदा उठाकर वे बच निकले। मंगेश के ठिकाने से मिला हथियार और पत्र सर्चिंग के दौरान पुलिस ने नक्सल ठिकाने से एक इंसास राइफल, 15 जिंदा कारतूस और अन्य नक्सली सामग्री बरामद की। जानकारी के अनुसार, यह राइफल वर्ष 2010 में कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल थाना क्षेत्र के भुस्की गांव से पुलिस से लूटी गई थी, जिसे महिला नक्सली हिड़मे के पास रखा गया था। पुलिस के मुताबिक मौके पर एसीएम स्तर के तीन नक्सली मंगेश, उसकी पत्नी हिड़मे और एक अन्य महिला नक्सली राजे मौजूद थे। उनकी तस्वीरें पुलिस के पास उपलब्ध है और जवानों ने भागते समय उनकी पहचान भी की है। सबसे अहम बरामदगी मंगेश द्वारा अपने शीर्ष नक्सली नेतृत्व को लिखा गया एक पत्र है। इस पत्र में उसने आत्मसमर्पण को लेकर दिशा-निर्देश मांगे हैं। पत्र में लिखा गया है कि “सभी साथी आत्मसमर्पण कर रहे हैं, हमारे लिए क्या आदेश है?” इससे नक्सली संगठन के भीतर बढ़ते दबाव और असमंजस के संकेत मिल रहे हैं। इलाके में गिने-चुने नक्सली बचे पुलिस अधीक्षक के अनुसार, मोहला-मानपुर क्षेत्र में अब केवल 6 सक्रिय नक्सली ही शेष बचे हैं। उन्होंने शेष नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने की अपील की है। पूर्व में मारे जा चुके स्पेशल जोनल कमेटी के नक्सली विजय रेड्डी के बाद आरकेबी डिवीजन लगभग कमजोर पड़ चुका है, लेकिन हिड़मे, राजे और अन्य कुछ नक्सलियों की मौजूदगी की सूचनाएं समय-समय पर मिलती रही हैं। नक्सल मुक्त होने पर सवाल गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय डेडलाइन में अब करीब एक पखवाड़ा ही बचा है। इसके बावजूद मोहला-मानपुर क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई हैं। पुलिस लगातार अभियान चला रही है, लेकिन न तो सभी नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं और न ही गिरफ्तार हो पा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या तय समय सीमा में यह इलाका पूरी तरह नक्सल मुक्त हो पाएगा।

सलमान आगा के रन आउट पर गरमाया माहौल, एबी डिविलियर्स और डेल स्टेन ने बांग्लादेश को सुनाई खरी-खोटी

इस्लामाबाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच खेले गए दूसरे वनडे मुकाबले के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने क्रिकेट जगत में खेल भावना पर एक नई बहस छेड़ दी है। दरअसल, पाकिस्तान की पारी के 38वें ओवर में सलमान आगा का एक ऐसा रन आउट देखने को मिला, जब वे गेंदबाज के सहयोग के लिए गेंद दे रहे थे, लेकिन गेंदबाज ने इसका फायदा उठाते हुए उन्हें रन आउट कर दिया। अब इस पर दक्षिण अफ्रीका के दो दिग्गज क्रिकेटरों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। दक्षिण अफ्रीका के महान बैटर एबी डिविलियर्स और दिग्गज गेंदबाज डेल स्टेन ने सलमान अली आगा के रनआउट वाली घटना को हास्यास्यद, निराशाजनक और खेल भावना के विपरीत बताया है। एबी डिविलियर्स ने बताया यह गलत है एबी डिविलियर्स ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए इसे बुनियादी खेल भावना के विपरीत बताया है। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा, “यह बुनियादी खेल भावना है। वह बल्लेबाज रन नहीं ले रहा था, वह केवल गेंद उठाकर गेंदबाज को देना चाहता था और सॉरी कहना चाह रहा था, लेकिन गेंदबाज ने उसे आउट कर दिया। यह गलत है।” स्टेन ने कहा यह निराशाजनक है डेल स्टेन ने भी इस घटना पर कड़ा रुख अख्तियार किया है और बांग्लादेशी खिलाड़ियों की जमकर आलोचना की है। उ्होंने इसे निराशानजक बताया है और साथ ही साथ हास्यास्पद भी कहा है। स्टेन ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि नियमों के अनुसार बल्लेबाज को अपना बल्ला क्रीज में रखना चाहिए, लेकिन यहां बल्लेबाज की मंशा साफ थी। स्टेन ने कहा, “यह बहुत निराशाजनक है। जब एक बल्लेबाज रन लेने की कोशिश नहीं कर रहा है और सिर्फ आपकी मदद करने के लिए गेंद उठा रहा है, तब आप उसे आउट कर देते हैं? यह हास्यास्पद है, ऐसा करना बंद करें।” स्टेन का कहना है कि इस तरह की घटनाएं नियमों की आड़ में खेल भावना की हत्या करने जैसी हैं। डिविलियर्स ने दिया उदाहरण पूर्व दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज एबी डिविलियर्स ने इस घटना की तुलना करते हुए उदाहरण दिया कि क्या कोई गेंदबाज किसी बल्लेबाज को धक्का देकर या गिराकर उसे आउट करने का प्रयास करेगा। मेरी समझ में बिल्कुल नहीं। डिविलियर्स ने कहा कि सलमान आगा केवल मदद कर रहे थे और गेंदबाज मेहदी हसन मिराज ने इसका फायदा उठा लिया जो सरासर गलत है। उन्होंने इसे बुनियादी खेल भावना का उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने माना है कि गेंदबाज का इसका फायदा नहीं उठाना चाहिए था। 13 मार्च को दूसरे वनडे में हुई थी यह घटना बता दें कि यह घटना पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच तीन मैचों की वनडे शृंखला के दूसरे मैच में ढाका के शेरे बांग्ला स्टेडियम में पाकिस्तान की पारी के 38वें ओवर की चौथी गेंद के बाद हुई जब मेहदी हसन मिराज ने सलमान अली आगा को रन आउट कर दिया। यह मैच 13 मार्च को खेला गया था और इसे पाकिस्तान ने 128 रनों के बड़े अंतर से डीएलएस मैथड से जीत लिया था।

क्या है मैहर माता मंदिर का चमत्कार? जहां रात में खुद-ब-खुद बजती हैं घंटियां

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर माता मंदिर (मां शारदा धाम) आस्था, चमत्कार और रहस्यों का अनोखा संगम माना जाता है. विंध्य पर्वतमाला की त्रिकूट पहाड़ी पर बसे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 1063 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. नवरात्रि के दौरान यहां लाखों भक्त मां शारदा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस मंदिर की सबसे खास बात है रात में अपने आप बजने वाली घंटियां. जिसका रहस्य आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है. आइए चैत्र नवरात्रि के खास मौके पर जानते हैं इस प्राचीन मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में. रात में अपने आप बजती हैं घंटियां, क्या है रहस्य? स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी रात में घंटियों के बजने की आवाज सुनाई देती है. कहा जाता है कि इस समय कोई भी इंसान मंदिर के अंदर मौजूद नहीं होता, फिर भी घंटियां बजती रहती हैं. भक्तों का मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि दैवीय संकेत है. माना जाता है कि रात के समय मां शारदा स्वयं मंदिर में विराजमान रहती हैं और उनकी पूजा होती है, जिसकी वजह से घंटियां बजती हैं. आल्हा-ऊदल से जुड़ी है मान्यता मैहर माता मंदिर का संबंध वीर योद्धा आल्हा-ऊदल से भी जोड़ा जाता है. लोककथाओं के अनुसार, आल्हा आज भी अमर हैं और वे रोज़ ब्रह्म मुहूर्त में सबसे पहले मंदिर पहुंचकर मां शारदा की पूजा करते हैं. कहा जाता है कि जब सुबह मंदिर के पुजारी दरवाजे खोलते हैं, तो वहां ताजे फूल और पूजा के निशान मिलते हैं, जिससे इस रहस्य को और भी गहराई मिलती है. त्रिकूट पर्वत पर बसा पवित्र धाम यह मंदिर त्रिकूट पर्वत की ऊंचाई पर स्थित है, जहां से पूरे मैहर शहर का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है. भक्त पैदल सीढ़ियों से या रोपवे के जरिए भी मंदिर तक पहुंच सकते हैं. यहां विराजमान मां शारदा को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का स्वरूप माना जाता है, इसलिए छात्र-छात्राएं विशेष रूप से यहां दर्शन के लिए आते हैं. नवरात्रि में उमड़ता है आस्था का सैलाब चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मैहर माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्त मां से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं और मान्यता है कि सच्चे मन से मां को पुकारने पर हर इच्छा पूरी होती है. इसलिए मैहर माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्यमयी घटनाओं का केंद्र भी है. रात में बजती घंटियां, आल्हा-ऊदल की कहानी और दैवीय उपस्थिति की मान्यताएं इस मंदिर को और भी खास बनाती हैं.

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सुश्री समीक्षा द्विवेदी को भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं

उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सुश्री समीक्षा द्विवेदी को दी उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से सुश्री समीक्षा द्विवेदी ने मंत्रालय में अपने माता-पिता के साथ सौजन्य भेंट की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने रीवा की बेटी सुश्री समीक्षा के यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 56वीं रैंक प्राप्त करने की उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि सुश्री समीक्षा द्विवेदी ने इस उल्लेखनीय सफलता से रीवा, विंध्य क्षेत्र और पूरे मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। सुश्री समीक्षा की यह सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। यह उपल‍ब्धि दर्शाती है कि कठिन परिश्रम, समर्पण और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प से किसी भी ऊंचाई को प्राप्त किया जा सकता है।  

Korea District Topper: ई-केवाईसी में नंबर वन, ग्रामीण विकास में दिखा बड़ा बदलाव

कोरिया. ग्रामीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से लागू की गई वीबीजी रामजी योजना के तहत कोरिया जिले ने तकनीकी पारदर्शिता की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले में मनरेगा के अंतर्गत पंजीकृत सभी श्रमिकों का ई-केवाईसी कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। इसके साथ ही कोरिया प्रदेश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसने निर्धारित समय में यह लक्ष्य हासिल किया है। कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन और पंचायत अमले के समन्वित प्रयासों से जिले की सभी ग्राम पंचायतों के पंजीकृत श्रमिक परिवारों के प्रत्येक सदस्य का आधार आधारित ई-केवाईसी कार्य पूरा किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश स्तर पर अभी औसत ई-केवाईसी लगभग 92 प्रतिशत है, जबकि कोरिया जिले ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर नई मिसाल पेश की है। ‘G RAM G’ के विरोध में कांग्रेस शून्यकाल में लाई स्थगन प्रस्ताव रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को मनरेगा को ‘जी राम जी’ किए जाने के विरोध में कांग्रेस ने शून्यकाल में स्थगन प्रस्ताव लाई. आसंदी के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने से नाराज विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए सदन से निकले. विधानसभा शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जी राम जी की तुलना में पहले के मनरेगा को बेहतर बताते हुए स्थगन को ग्राह्य कर चर्चा कराने की मांग की. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सदन विपक्ष की राजनीति का अड्डा नहीं, ये सदन कांग्रेस का राजनीति का मंच नहीं, ये जनता का मंच है. सदन का समय कीमती है. कल ही इन्होंने बता दिया था कि इस मुद्दे पर सदन में नहीं रहेंगे. इसके साथ ही पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई. पक्ष-विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि जनता के मुद्दे पर राजनीति करनी हो तो हम करेंगे. आखिरकार सत्ता पक्ष और विपक्ष के हंगामे के बीच आसंदी ने सदन की कार्यवाही 5 मिनट स्थगित कर दी. 5 मिनट के बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने स्थगन सूचना पर बोलते हुए कहा कि मामला सिर्फ नीति बदलने का नहीं है, नियत का भी है. गरीबों से जुड़ा हुआ मामला है. इस पर स्थगन प्रस्ताव ग्राह्य कर चर्चा होनी चाहिए. कवासी लखमा और विपक्ष के अन्य कई सदस्यों ने कहा कि गरीबों से जुड़ा मामला है, इस पर चर्चा होनी चाहिए. लेकिन आसंदी के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने पर विपक्षी सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए सदन से बहिर्गमन किया.

जीवन में धोखा न खाएं! नित्यानंद चरण दास की सलाह—इन 6 लोगों पर कभी भरोसा न करें

जीवन में सही लोगों की संगति आपको आगे बढ़ाती है, जबकि गलत संगति भीतर से कमजोर कर देती है। नित्यानंद चरण दास बताते हैं कि किन 6 तरह के लोगों से दूरी बनाकर रखना ही आत्मरक्षा है। जीवन हो या अध्यात्म- संगति का प्रभाव सबसे गहरा होता है। जिन लोगों के साथ हम रोज उठते-बैठते हैं, उनकी सोच, आदतें और ऊर्जा धीरे-धीरे हमारी अपनी बन जाती हैं। अगर आपकी संगति आपको प्रेरित करने के बजाय थका रही है, आत्मविश्वास कम कर रही है या मानसिक शांति छीन रही है, तो यह एक बड़ी चेतावनी हो सकती है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता और इस्कॉन साउथ मुंबई के संयोजक Nityanand Charan Das कहते हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ सही रास्ता नहीं, बल्कि सही लोग भी जरूरी होते हैं। उनके अनुसार, कुछ लोगों से दूरी बनाना नकारात्मकता नहीं, बल्कि स्वयं की रक्षा करना है। उनके अनुसार, इन 6 तरह के लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए- जो दूसरों की चुगली करता है जो व्यक्ति आपकी मौजूदगी में किसी तीसरे की बुराई करता है, वह भरोसे के काबिल नहीं होता। चुगली करने वाला इंसान रिश्तों को सच नहीं, मसाले से चलाता है। ऐसे लोग ना तो सच्चे दोस्त होते हैं और ना ही वफादार साथी। आज आप उनके सामने हैं, इसलिए आप सुरक्षित हैं- लेकिन जैसे ही आप पीछे मुड़ेंगे, वही बातें आपके बारे में कही जाएंगी। यह आदत व्यक्ति की सोच और नैतिकता को दर्शाती है। जो जरूरत से ज्यादा मीठा बोलता है अत्यधिक तारीफ, बनावटी अपनापन और हर बात में “आप ही सबसे अच्छे हैं” कहना अक्सर किसी स्वार्थ का संकेत होता है। सच्चे रिश्तों में ईमानदारी होती है, चापलूसी नहीं। ऐसे लोग तब तक मीठे रहते हैं, जब तक उन्हें आपसे कुछ चाहिए। काम निकलते ही उनका व्यवहार बदल जाता है। जो कभी अपनी गलती नहीं मानता जो इंसान हर परिस्थिति में खुद को सही साबित करता है और दोष हमेशा दूसरों पर डालता है, वह रिश्तों में जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। ऐसे लोगों के साथ विवाद कभी सुलझते नहीं, क्योंकि वे आत्ममंथन करना ही नहीं जानते। जहां गलती मानने की क्षमता नहीं, वहां सुधार और भरोसे की भी कोई जगह नहीं। जो ताकतवर लोगों के सामने व्यवहार बदल ले जो व्यक्ति पद, पैसे या पावर देखकर झुक जाता है और आम लोगों को नजरंदाज करता है, वह स्थिर चरित्र वाला नहीं होता। ऐसे लोग रिश्तों को इंसान से नहीं, फायदे से जोड़कर देखते हैं। आज आप उपयोगी हैं, इसलिए आप महत्वपूर्ण हैं- कल कोई और ज्यादा प्रभावशाली मिला, तो आप पीछे छूट जाएंगे। जो किसी के दर्द पर हंसता है जिस इंसान में करुणा और संवेदना नहीं होती, वह कभी सच्चा सहारा नहीं बन सकता। किसी के दुख में मजाक उड़ाना या उसे कमजोरी समझना दर्शाता है कि उस व्यक्ति में समानुभूति (empathy) की कमी है। नित्यानंद चरण दास के अनुसार, जहां एक बार संवेदना नहीं दिखी, वहां आगे भी उम्मीद रखना व्यर्थ है। जो राज नहीं रख सकता जो व्यक्ति दूसरों की निजी बातें, रहस्य या विश्वास को हल्के में लेता है, वह भरोसे के लायक नहीं होता। अगर कोई किसी तीसरे का राज आपके साथ शेयर कर रहा है, तो याद रखें- आपका नंबर भी आएगा। विश्वास एक बार टूटा तो रिश्ते हमेशा के लिए कमजोर हो जाते हैं।  

दिव्यांग बच्चों के परिवार से जुड़ाव के लिए जागरूकता अभियान की आवश्यकता, मंत्री सुश्री भूरिया का अहम बयान

दिव्यांग बच्चों को परिवार से जोड़ने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान की आवश्यकता: मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया क्षेत्रीय परामर्श बैठक में दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने, राज्यों के समन्वय और विशेष बच्चों के पुनर्वास पर हुआ मंथन भोपाल  दिव्यांग बच्चों को संस्थाओं से निकालकर परिवार का स्नेह और सुरक्षित भविष्य दिलाने के उद्देश्य से आयोजित क्षेत्रीय परामर्श बैठक मंगलवार को रवीन्द्र भवन में हुई। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज की संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच से ही इन बच्चों को परिवार और बेहतर जीवन मिल सकता है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा “दिव्यांग” शब्द देकर समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में गैर-संस्थागत पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है और मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के माध्यम से स्पॉन्सरशिप तथा ऑफ्टर-केयर की व्यवस्था कर बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। भोपाल में आयोजित क्षेत्रीय परामर्श बैठक में सचिव महिला बाल विकास श्रीमती जी वी रश्मि , केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) की उप निदेशक श्रीमति ऋचा ओझा , उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बाल संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए परिवार का स्नेह अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कोई भी संस्था परिवार का स्थान नहीं ले सकती। सुश्री भूरिया ने कहा कि वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार देश में 4,155 बच्चों को गोद लिया गया, जिनमें केवल 7 प्रतिशत विशेष आवश्यकता वाले बच्चे थे और इनमें से भी अधिकांश बच्चों को विदेशी दम्पत्तियों ने अपनाया। यह स्थिति बताती है कि देश में दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से आईवीएफ जैसी तकनीक का प्रचार हो रहा है वैसा ही प्रभावी प्रचार दत्तक ग्रहण के लिये होना चाहिए। इसके लिये फोकस्ड एप्रोच के साथ नि:संतान दम्पतियों को परामर्श देना आवश्यक है। हमारे देश में ऐसे अनेक उदाहरण दिव्यांग बच्चे हैं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्र चाहे वह खेल का मैदान हो, यूपीएससी में सफलता हासिल करना हो। सभी में अपना परचम लहराया है। सुश्री भूरिया ने सुझाव दिया कि सफल दिव्यांग व्यक्तियों को ब्रांड एम्बेसडर बनाकर समाज में सकारात्मक संदेश दिया जा सकता है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को गोद लेने वाले परिवारों के लिए चिकित्सा उपचार, निःशुल्क फिजियोथेरेपी, परामर्श सेवाएं, शिक्षा सहायता और बीमा जैसी सुविधाओं पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों की संख्या कम होने के कारण राज्यवार विशेष योजनाऐं बनाकर उनके समुचित पुनर्वास के लिए बजट का प्रावधान किया जा सकता है। समाज की संवेदनशीलता से ही बदल सकता है दिव्यांग बच्चों का भविष्य – श्रीमती रश्मि महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जी. वी. रश्मि ने कहा कि भारतीय समाज में संस्कारों का अत्यधिक महत्व है, लेकिन जब बात विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने की आती है तो सामाजिक रूढ़ियां अक्सर निर्णय में बाधा बनती हैं। उन्होंने कहा कि समाज की संवेदनशीलता से ही बदल सकता है दिव्यांग बच्चों का भविष्य। सचिव श्रीमती रश्मि ने विश्वास जताया कि यह बैठक सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य और विधि जैसे विभिन्न विभागों के समन्वय से बेहतर समाधान खोजने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने सहभागी राज्यों से अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचार और श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को साझा करने का आग्रह किया। दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार आधारित पुनर्वास पर जोर केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की उप निदेशक श्रीमती ऋचा ओझा ने कहा कि देशभर में क्षेत्रीय स्तर पर ऐसे परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य विशेष बच्चों के दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में दत्तक ग्रहण का प्रतिशत अभी भी कम है, जिसे जागरूकता और नीति सुधारों के माध्यम से बढ़ाने की आवश्यकता है। श्रीमती ओझा ने बताया कि इस बैठक में 4 राज्यों के प्रतिनिधि दत्तक ग्रहण नीति से जुड़े मुद्दों, नवाचारों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं। श्रीमती ओझा ने कहा कि बैठक का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार आधारित पुनर्वास पर जोर देना है । बैठक में राज्यों में दिव्यांग बच्चों के दत्तक गृहण को वर्तमान स्थिति की समीक्षा, चिकित्सीय आंकलन और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श तथा बाल संरक्षण और स्वास्थ्य तंत्र के बीच बेहतर समन्वय के उपायों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में बालिका गृह भोपाल की बालिकाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जवाहर बाल भवन के बच्चों ने नृत्य-नाटिका से संदेश दिया कि दत्तक ग्रहण बच्चों के जीवन को नया भविष्य और नया परिवार दे सकता है।  

SC की ऐतिहासिक टिप्पणी: गोद लिए और जन्मे बच्चे समान, 3 महीने का नियम समाप्त

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को एक अहम फैसला सुनाते हुए व्यवस्था दी है कि किसी महिला के गर्भ (कोख) से पैदा हुए बच्चे और गोद लिए गए बच्चे में कोई अंतर नहीं है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि तीन महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को मातृत्व अवकाश से वंचित करना असंवैधानिक है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसी महिलाओं को भी 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि मातृत्व संरक्षण का उद्देश्य इस बात पर निर्भर नहीं करता कि बच्चा परिवार में कैसे आया है। अदालत ने कहा, “जो महिलाएं बड़े बच्चे को गोद लेती हैं, वे भी उसी स्थिति में हैं जैसे कोई महिला तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती हैं।” पीठ ने कहा, “हालांकि, पारंपरिक रूप से रिश्तेदारी को समझने का मुख्य आधार जीव विज्ञान (बायोलॉजी) रहा है, लेकिन गोद लेना भी परिवार बनाने का उतना ही सही तरीका है। परिवार का आधार जीव विज्ञान नहीं, बल्कि आपसी जुड़ाव और साझा भावनाएँ होती हैं। सिर्फ़ जैविक कारक ही परिवार तय नहीं करते। गोद लिया हुआ बच्चा, अपने सगे बच्चे से किसी भी तरह अलग नहीं होता।” कानून की धारा पर सवाल कोर्ट ने माना कि ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020’ की धारा 60(4) के तहत उम्र से जुड़ी ऐसी पाबंदियाँ, संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं। इस धारा में यह प्रावधान था कि महिलाएँ मातृत्व अवकाश की हकदार तभी होंगी, जब वे 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लें। हालांकि, अदालत ने इस धारा को निरस्त नहीं किया, बल्कि इसकी व्याख्या करते हुए महिलाओं के अधिकारों का विस्तार किया। “गोद लेना भी परिवार बनाने का समान अधिकार” अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गोद लेना परिवार बनाने का एक समान और वैध तरीका है। अदालत ने टिप्पणी की, “गोद लिया गया बच्चा तथाकथित ‘जैविक’ बच्चे से अलग नहीं होता। यह मातृत्व और पितृत्व की गहरी स्वीकृति है।” पीठ ने यह भी कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं के चलते तीन महीने से कम उम्र के बच्चों को गोद लेना बहुत कम मामलों में संभव होता है, इसलिए यह शर्त व्यावहारिक रूप से भी अनुचित है। पितृत्व अवकाश पर भी सुझाव मातृत्व अवकाश के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश को भी सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने के लिए कानून बनाने की सिफारिश की। कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला हमसानंदिनी नंदूरी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर आया, जिसमें आयु-आधारित इस भेदभाव को मनमाना और असंवैधानिक बताया गया था। यह निर्णय न केवल गोद लेने वाली माताओं के अधिकारों को मजबूत करता है, बल्कि भारतीय समाज में दत्तक ग्रहण को समान सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

राम नगरी में राष्ट्रपति का पारंपरिक स्वागत, अवधी लोकनृत्य और भजन से गूंजेगा अयोध्या मार्ग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वागत में सजेगी राम नगरी, एयरपोर्ट से राम मंदिर तक 20 सांस्कृतिक मंच सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अयोध्या में भव्य तैयारियां, 250 कलाकार देंगे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां राम नगरी में राष्ट्रपति का पारंपरिक स्वागत, अवधी लोकनृत्य और भजन से गूंजेगा अयोध्या मार्ग -राष्ट्रपति के दौरे को लेकर अयोध्या में सांस्कृतिक उत्सव, रामायण आधारित कार्यक्रमों से होगा अभिनंदन अयोध्या राम नगरी अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 19 मार्च के प्रस्तावित दौरे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के निर्देश पर तैयारियां जोरों पर हैं। प्रशासन, संस्कृति विभाग और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से पूरे शहर को भव्य और सांस्कृतिक स्वरूप में सजाया जा रहा है, ताकि राष्ट्रपति का पारंपरिक और गरिमामय स्वागत किया जा सके। एयरपोर्ट से राम मंदिर तक होगा भव्य स्वागत सीडीओ कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि संस्कृति विभाग के प्रयास से एयरपोर्ट से राम मंदिर गेट तक भव्य स्वागत का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान शहर की सड़कों पर करीब 20 सांस्कृतिक मंच सजाए जाएंगे, जहां लगभग ढाई सौ कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। 250 कलाकार देंगे रामायण आधारित प्रस्तुतियां उन्होंने बताया कि इन मंचों पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कलाकार रामायण आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। कार्यक्रमों में स्वागत गीत, भजन, बधावा, अवधी लोकगायन, लोकनृत्य और राम भक्ति से जुड़े पारंपरिक कार्यक्रम शामिल होंगे। राष्ट्रपति के स्वागत मार्ग पर रोड के दोनों ओर इन मंचों को स्थापित किया जाएगा, जिससे पूरा रास्ता भक्ति और संस्कृति की ध्वनि से गूंज उठेगा। अयोध्या की परंपरागत संस्कृति की झलक अयोध्या की परंपरागत संस्कृति को दर्शाने के लिए रामलीला अंश प्रस्तुति, अवधी लोकनृत्य, झांकी, ढोल-नगाड़ा, शंखनाद, वेदपाठ और भजन संकीर्तन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से अयोध्या की प्राचीन धार्मिक, वैदिक और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक दिखाई जाएगी। शहर के प्रमुख स्थानों पर सजेंगे मंच प्रमुख स्थानों पर मंच लगाए जाएंगे, जिनमें एयरपोर्ट रोड, नाका, देवकाली, चूड़ामणि चौराहा, निषाद राज चौराहा, बृहस्पति कुंड के पास और राम मंदिर गेट के निकट के क्षेत्र शामिल हैं। छोटे मंचों पर लगभग 7 कलाकारों की टीम प्रस्तुति देगी, जबकि बड़े मंचों पर करीब 15 कलाकारों की टीम सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी। अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर को मिलेगा वैश्विक मंच सीडीओ कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि सभी टीमें राम भक्ति, अवधी संस्कृति और वैदिक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी। इस भव्य आयोजन का उद्देश्य राष्ट्रपति का पारंपरिक और हृदयस्पर्शी स्वागत करना है, जिससे अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर को देश और विश्व पटल पर और मजबूती से स्थापित किया जा सके।

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