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ग्रीन एनर्जी, एआई, डिफेंस व शिक्षा में सहयोग की संभावनाएं, कनाडाई पक्ष ने दिखाई गहरी रुचि

मुख्यमंत्री योगी से कनाडा के उच्चायुक्त की मुलाकात, यूपी में निवेश व टेक्नोलॉजी सहयोग पर जोर भारत-कनाडा साझेदारी को नई गति, उच्चायुक्त ने यूपी को बताया निवेश व इनोवेशन का उभरता केंद्र ग्रीन एनर्जी, एआई, डिफेंस व शिक्षा में सहयोग की संभावनाएं, कनाडाई पक्ष ने दिखाई गहरी रुचि लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने बुधवार को भेंट कर उत्तर प्रदेश में निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और कौशल विकास के क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने भारत-कनाडा के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की व्यापक संभावनाओं पर जोर देते हुए उत्तर प्रदेश को एक उभरते निवेश और नवाचार केंद्र के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में हुए व्यापक परिवर्तन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने बीते वर्षों में आधारभूत संरचना, नीतिगत सुधार और सुशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे यह वैश्विक निवेशकों के लिए एक विश्वसनीय और आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है।  भेंट के दौरान उच्चायुक्त ने ग्रीन एनर्जी, एलएनजी/एलपीजी, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि व्यक्त की। उन्होंने शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में साझेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कनाडा के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों और उत्तर प्रदेश के बीच सहयोग से कौशल विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिभा विनिमय को नई गति मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारभूत संरचना, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश-अनुकूल नीतियां इसे वैश्विक कंपनियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाती हैं। उच्चायुक्त ने यह भी कहा कि कनाडाई कंपनियां उत्तर प्रदेश में दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी साझेदारी के लिए सक्रिय रूप से अवसरों का आकलन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सतत ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्रों में कनाडा की विशेषज्ञता, उत्तर प्रदेश की विकास आकांक्षाओं के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाती है, जिससे दोनों पक्षों के बीच एक मजबूत साझेदारी विकसित की जा सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में उपलब्ध निवेश-अनुकूल वातावरण, औद्योगिक विकास और नीतिगत सुधारों का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए कनाडा की कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और ब्रह्मोस परियोजना का उल्लेख करते हुए राज्य की बढ़ती औद्योगिक क्षमता को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों के लिए पारदर्शी, स्थिर और उद्योग-अनुकूल नीति वातावरण सुनिश्चित कर रही है तथा कनाडा के साथ तकनीक, कौशल और नवाचार आधारित सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए हर संभव संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने निवेश, तकनीकी सहयोग और कौशल विकास के क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

योगी सरकार का 9 दिवसीय भव्य आयोजन, नव निर्माण के नौ साल में हर जनपद में दिखेगा विकास

नव निर्माण के नौ वर्ष पर योगी सरकार कर रही प्रदेशभर में 9 दिवसीय भव्य आयोजन, हर जनपद में दिखेगी विकास की झलक 26 मार्च तक मेलों, प्रदर्शनी, संवाद, रोजगार और सम्मान कार्यक्रमों की व्यापक श्रृंखला का होगा आयोजन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समितियों का गठन, नोडल अधिकारी करेंगे समन्वय जनभागीदारी, योजनाओं के लाभ और भविष्य की विकास रणनीति पर रहेगा विशेष फोकस मुख्य सचिव की ओर से समस्त जिलाधिकारियों को किया गया निर्देशित लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के ‘नव निर्माण के नौ वर्ष’ पूर्ण होने के अवसर पर प्रदेश मुख्यालय सहित सभी जनपदों में 26 मार्च 2026 तक भव्य कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विगत नौ वर्षों की अभूतपूर्व उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों से आमजन को अवगत कराया जाएगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से समस्त जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देशित किया गया है।  जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में नौ दिवसीय मेले का उद्घाटन निर्देशों के अनुसार, कार्यक्रमों के सफल संचालन हेतु प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक परामर्शदाता समिति गठित की जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक संगठन, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित पक्ष शामिल होंगे।जनपद मुख्यालयों पर प्रभारी मंत्री द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में नौ दिवसीय मेले का उद्घाटन किया जाएगा। साथ ही सरकार की उपलब्धियों को विस्तार से साझा किया जाएगा। इस अवसर पर ‘नव निर्माण के नौ वर्ष’ पर आधारित विशेष लघु फिल्म का प्रदर्शन एवं विकास पुस्तिका का विमोचन भी कराया जाएगा। जनपद स्तर पर लगेगी प्रदर्शनी सभी विभागों द्वारा जनपद स्तर पर प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें केंद्र सरकार के 11 वर्षों एवं राज्य सरकार के 9 वर्षों की उपलब्धियों, योजनाओं एवं विकास कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही जनपद में लोकार्पित एवं शिलान्यास की गई परियोजनाओं के शिलापट्टों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। नौ दिवसीय मेले के दौरान प्रत्येक दिन अलग-अलग थीम (युवा, महिला, किसान, श्रमिक आदि) पर आधारित विचार गोष्ठियों एवं संवाद सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। सत्रों के मध्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही, किसान सम्मेलनों में पशुपालन एवं गोसेवा के आर्थिक मॉडल के प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिसमें नस्ल सुधार के माध्यम से कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने पर चर्चा होगी। वहीं पर्यटन एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु जनपदों की पौराणिक, सांस्कृतिक विरासत एवं परंपराओं को दर्शाती प्रदर्शनियों का आयोजन भी किया जाएगा। विशिष्ट व्यक्तियों को किया जाएगा सम्मानित नौ दिवसीय मेले में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विशिष्ट व्यक्तियों को आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा तथा उनकी सफलता की कहानियों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित किया जाएगा। कार्यक्रमों के दौरान विभिन्न लाभार्थीपरक योजनाओं (मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना, दिव्यांगजन ट्राई साइकिल वितरण योजना, प्रधानमंत्री स्टार्ट-अप योजना, मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप योजना आदि) से वंचित पात्र लाभार्थियों को जोड़कर लाभान्वित किया जाएगा। आमजन से लिए जाएंगे सुझाव प्रदेश में दीर्घकालिक एवं सुनियोजित विकास को गति देने के लिए आमजन से सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे, ताकि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप राज्य की विकास रणनीति को और सुदृढ़ किया जा सके। जनपदीय बैंकर समिति के समन्वय से ऋण मेलों का आयोजन तथा रोजगार एवं सेवायोजन विभाग के सहयोग से रोजगार मेलों का आयोजन कर युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। विगत नौ वर्षों में जनपदों में प्राप्त निजी निवेश एवं धरातल पर उतारी गई अथवा प्रक्रियाधीन परियोजनाओं को भी प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। मेले में ‘एक जनपद एक व्यंजन’ (ओडीओसी) के तहत फूड कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, जहां पारंपरिक व्यंजनों के विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। लघु उद्यमियों के लिए भी विशेष कार्यक्रम नगरीय क्षेत्रों में ‘मिशन व्यापारी कल्याण’ के अंतर्गत नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत स्तर पर व्यापारियों एवं लघु उद्यमियों के लिए विभिन्न योजनाओं (प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप योजना, एक जनपद एक उत्पाद योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना आदि) के लाभार्थी सम्मेलनों, टूलकिट वितरण, ऋण वितरण एवं सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अधिकाधिक जनभागीदारी पर विशेष जोर कार्यक्रमों में प्रभारी मंत्री की अनुपस्थिति में सांसद, विधायक अथवा विभिन्न बोर्डों के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजन सुनिश्चित किए जाएंगे तथा अधिकाधिक जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया जाएगा। सभी विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं का आयोजन कर विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास कराया जाएगा। कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन हेतु जिलाधिकारी द्वारा जनपद मुख्यालय, विधानसभा एवं विकासखंड स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी स्तर के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा, जो विभागों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यक्रमों को सफल बनाएंगे। साथ ही नामित वरिष्ठ नोडल अधिकारी जनपदों का भ्रमण कर कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा करेंगे, ताकि सभी आयोजन सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हो सकें।

116 कंपनियों ने दिए रोजगार के अवसर, टाटा, हीरो, स्विगी, फ्लिपकार्ट सहित बड़ी कंपनियों ने किया प्रतिभाग

योगी सरकार के ‘वृहद रोजगार मेला-2026’ में युवाओं को मिला अवसर 2527 युवाओं को मिला जॉब ऑफर, महिलाओं की सशक्त भागीदारी, 473 युवतियों ने विभिन्न सेक्टरों में पाई नौकरी ‘जीरो पावर्टी’ श्रेणी के 56 युवाओं को मिला रोजगार, आईटीआई और कौशल प्रशिक्षण का विस्तार, नई संस्थाओं से बढ़ेंगे अवसर कौशल विकास को डिजिटल बढ़ावा देते हुए ‘कौशल दृष्टि’, ‘कौशल दर्पण’ और ‘कौशल दोस्त’ प्लेटफॉर्म हुए लॉन्च 116 कंपनियों ने दिए रोजगार के अवसर, टाटा, हीरो, स्विगी, फ्लिपकार्ट सहित बड़ी कंपनियों ने किया प्रतिभाग लखनऊ  योगी सरकार द्वारा  इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में ‘वृहद रोजगार मेला-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को कौशल आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया, जिसमें चार मंडलों के हजारों अभ्यर्थियों ने भाग लिया तथा 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस वृहद रोजगार मेले में दिव्यांगजनों, महिलाओं और ‘जीरो पावर्टी’ (अत्यधिक गरीब) श्रेणी के युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। मेले में 116 कम्पनियों के द्वारा रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया संचालित की गई, जिसमें 2527 युवाओं को जॉब ऑफर मिला। इसमें 473 महिलाओं ने भी मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और सर्विस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में अपनी योग्यता से नौकरी पाई। ‘जीरो पावर्टी’ श्रेणी के अंतर्गत आने वाले परिवारों के 56 युवाओं के लिए यह दिन उनके जीवन का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ, उन्हें यहां से एक सम्मानित करियर शुरू करने का मौका मिला। दिग्गज कंपनियों का जमावड़ा और आकर्षक अवसर मेले में टाटा, हीरो,स्विगी, फ्लिपकार्ट समेत लॉजिस्टिक्स व हेल्थकेयर सेक्टर की 116 प्रतिष्ठित कंपनियों ने हिस्सा लिया। इन कंपनियों ने आईटीआई (ITI), पॉलिटेक्निक और कौशल विकास मिशन से ट्रेनिंग ले चुके युवाओं का इंटरव्यू लिया। चयनित अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता के आधार पर 35-40 हजार तक के आकर्षक सैलरी पैकेज ऑफर किए गए। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने आईटीआई एवं कौशल विकास मिशन से प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार एवं स्वरोजगार हासिल कर चुके युवाओं से संवाद किया और उनके अनुभव सुने। उन्होंने कहा कि ऐसे युवा प्रदेश के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मंत्री ने विभिन्न कंपनियों के स्टॉलों का अवलोकन करते हुए युवाओं का उत्साहवर्धन किया तथा कंपनियों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि चयनित अभ्यर्थियों को उसी दिन जॉब लेटर प्रदान किए जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि वेतन, कार्यस्थल, रहने की व्यवस्था एवं अन्य शर्तों की पूरी जानकारी पहले ही पारदर्शी रूप में दी जाए, ताकि युवाओं को किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति न रहे। इस अवसर पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कौशल विकास तंत्र को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में तीन महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म ‘कौशल दृष्टि’, ‘कौशल दर्पण’ और ‘कौशल दोस्त’ का शुभारंभ किया। ‘कौशल दृष्टि’ एक निरीक्षण आधारित मोबाइल एप्लीकेशन है, जिसके माध्यम से प्रदेश के कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों की निगरानी रियल-टाइम में की जा सकेगी। इस ऐप के जरिए प्रशिक्षुओं की उपस्थिति, प्रशिक्षण केंद्रों की आधारभूत संरचना तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता से संबंधित जानकारी तुरंत प्राप्त होगी। वहीं, ‘कौशल दर्पण’ एक उन्नत एआई आधारित डैशबोर्ड है, जो कौशल विकास से संबंधित विभिन्न सूचनाओं को एकीकृत रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें उत्तर प्रदेश का डिजिटल मानचित्र, कुल जनसंख्या, सक्रिय प्रशिक्षण प्रदाताओं की संख्या तथा प्रमुख रोजगारपरक सेक्टरों की झलक उपलब्ध होती है। इसी तरह ‘कौशल दोस्त’ एक चैटबॉट आधारित डिजिटल सुविधा है, जो यूपीएसडीएम पोर्टल पर 24×7 उपलब्ध रहकर उपयोगकर्ताओं को त्वरित सहायता प्रदान करती है। इसके माध्यम से अभ्यर्थी प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं, पंजीकरण प्रक्रिया एवं रोजगार के अवसरों से संबंधित जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।  कार्यक्रम में मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता केवल डिग्री से नहीं, बल्कि कौशल, आत्मविश्वास और प्रभावी संवाद क्षमता से मिलती है। युवा झिझक और आत्मसंकोच को त्यागकर अपनी क्षमता पर विश्वास करें और पूरी ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें। कड़ी मेहनत, अनुशासन और कार्य के प्रति समर्पण ही सफलता की कुंजी है। मंत्री ने युवाओं को सलाह दी कि वे अपने करियर को लेकर धैर्य रखें और बिना बेहतर अवसर के नौकरी छोड़ने से बचें। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल नौकरी प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाला उद्यमी बनाना है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में देश में अग्रणी बन रहा है। राज्य सरकार द्वारा रोबोटिक्स, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 3डी प्रिंटिंग, सोलर एनर्जी एवं इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे युवाओं को उद्योगों की बदलती मांग के अनुरूप तैयार किया जा सके। प्रमुख सचिव डॉ हरिओम ने अपने संबोधन में बताया कि प्रदेश में वर्तमान में लगभग 350 आईटीआई संचालित हैं, जिनमें से अधिकांश सरकारी हैं, जबकि कुछ निजी सहभागिता के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। इस वर्ष 22 नई आईटीआई तैयार हो चुके हैं, जिनमें लगभग 10,000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि आगामी सत्र में 30 और आईटीआई प्रारंभ करने की योजना है। आईटीआई में प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने, आधुनिक तकनीकी कार्यशालाओं की स्थापना और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि रोजगार मेले में डिजिटल पंजीकरण के लिए क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है, जिससे अभ्यर्थियों को लंबी कतारों से राहत मिली है। मेले में लगभग 80 बड़ी कंपनियां और 30-40 स्थानीय कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्रदान कर रही हैं। चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद योग्य अभ्यर्थियों को उसी दिन ऑफर लेटर प्रदान करने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कौशल विकास मिशन के अंतर्गत प्रदेश भर में लगभग 2000 प्रशिक्षण भागीदारों के माध्यम से लाखों युवाओं को अल्पकालिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे उन्हें शीघ्र रोजगार प्राप्त करने में सहायता मिल रही है।

आईलीग दो की शुरुआत 27 मार्च से

नई दिल्ली आईलीग दो का अगला सत्र 27 मार्च से शुरू होगा जो भारतीय पुरुषों के फुटबॉल का तीसरा टियर है और इसमें नौ क्लब शामिल हैं। यह सत्र एकल राउंड रोबिन प्रारूप में खेला जाएगा जिसमें हर टीम आठ मैच खेलेगी। प्रत्येक टीम चार मैच अपने मैदान पर जबकि चार विरोधी के मैदार पर खेलेगी। पहले दिन कार्बी आंगलोंग मॉर्निंग स्टार एफसी का मुकाबला दीफू के केएएसए स्टेडियम में सुदेवा दिल्ली एफसी से होगा जबकि जीएमएससी की भिड़ंत मुंबई के कूपरेज स्टेडियम में स्पोर्टिंग क्लब बेंगलुरु से होगी। यह सत्र 15 मई को खत्म होगा जिसकी चैंपियन और उप विजेता टीम को इंडियन फुटबॉल लीग 2026–27 में जगह मिलेगी। नौवें स्थान पर रहने वाला क्लब स्पोर्ट्स अकादमी तिरूर को आईलीग तीन में खिसका दिया जाएगा। क्लब ने लीग शुरू होने से पहले ही आईलीग दो 2025-26 से अपना नाम वापस ले लिया था।  

प्रवीण गुप्त: स्व आधारित मानसिकता का मूल है स्वबोध

स्व आधारित मानसिकता का आधार है स्वबोध – प्रवीण गुप्त  नव वर्ष गुड़ी पड़वा के अवसर पर दो दिवसीय डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला      में भारत पुनरुत्थान का आधार स्वबोध विषय पर हुआ व्याख्यान  बड़वानी देश में 1947 को जो घटना घटी उसे समाज याद कर स्वाधीनता दिवस, स्वतंत्रता दिवस के रूप में याद करता है ओर 75 वर्ष होने पर अमृत महोत्सव कह रहे हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान लिखा व कहा कि यह संविधान ने आर्थिक व राजनीतिक स्वतंत्रता दी मगर सामाजिक स्वतंत्रता नहीं मिली। अंग्रेजो से स्वाधीन हुए, स्वतंत्रता नहीं मिली। कृत्रिम विकास अपने राष्ट्र के आधार पर उत्तम नहीं हो सकता, स्व आधारित मानसिकता का आधार स्वबोध है। स्व के आधार पर ध्यान देने से भारत दुनिया के प्रारंभिक देशों में अग्रणी हो सकता है।  उक्त विचार नगर के साखी रिसॉर्ट में नव वर्ष गुड़ी पड़वा के अवसर पर आयोजित स्वामी अमूर्तनंदगिरी सेवा न्यास द्वारा आयोजित डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला के प्रथम दिवस पर वक्ता श्री प्रवीण गुप्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र संपर्क प्रमुख द्वारा भारत पुनरुत्थान का आधार स्वबोध विषय पर अपना उद्बोधन दिया। श्री गुप्त ने रवींद्रनाथ टैगोर जी की पुस्तक स्वराज भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि पाश्चात्य की नकल के बजाय हमें अपने स्व के आधार पर ध्यान देना चाहिए। फ्रांस, इज़राइल व जर्मनी का अपनी मातृभाषा के प्रति विशेष लगाव के कारण आज वह विश्व में अग्रणी देश है। हम भारत देश को भी चार सूत्रीय भाषा को महत्व देते हुए मातृभाषा, जिस प्रांत में रहते है वहां की बोली, संपर्क भाषा हिंदी व व्यापार की भाषा होनी चाहिए। ऐसे ही स्व की अभिव्यक्ति परिवार से प्रारंभ होती है। देश में जो गलत नारेटिव बनाया गया है उसे ठीक करना होगा। कार्यक्रम का प्रारंभ मां भारत माता के चित्र पर श्री गुप्त, अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल पाटीदार व समिति अध्यक्ष डॉ. चक्रेश पहाड़िया ने  दीप प्रज्वलित कर हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, मातृशक्ति उपस्थित रहे। संचालन डॉ. नितिन पाटीदार व आभार सीए गरीमेश निमाड़े ने व्यक्त किया। समापन वंदे मातरम गायन से हुआ।  देशभक्ति प्रतिफल प्रदर्शित होना चाहिए क्षणिक देशभक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि देशभक्ति 15 अगस्त, 26 जनवरी ओर क्रिकेट मैच जीत पर ही झलकती है जबकि देशभक्ति तो प्रतिफल प्रदर्शित होना चाहिए। जन्मभूमि स्वर्ग से महान है  कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राहुल पाटीदार ने प्रभु श्री राम के द्वारा रावण का वध करने के बाद भाई लक्ष्मण के द्वारा स्वर्ण लंका का सुख लेने का उदाहरण देते हुए अपनी जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर बताया। अपनी संस्कृति, परंपरा, धर्म के प्रति स्वबोध को अपनाने का आह्वान किया। वर्तमान में विश्व में वैश्विक युद्ध व पाश्चात्य की अंधी दौड़ के बजाय भारत के सनातन धर्म के सर्वे भवन्तु सुखिन के मार्ग को अपनाने से  विश्व शांति प्राप्त होगी।

अमेरिकी आर्मी बेस में रुबियो और रक्षा मंत्री हेगसेथ के पास मंडराया संदिग्ध ड्रोन

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में जंग जारी है. अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान के शहरों, सैन्य ठिकानों और ऑयल फील्ड्स पर बम के रूप में तबाही बरसा रही हैं. वहीं,  ईरान युद्ध के बीच अब एक ऐसी घटना हुई है, जिसे लेकर खाड़ी देशों से बहुत दूर अमेरिका में भी हड़कंप मच गया है. अमेरिकी सेना हाईअलर्ट पर आ गई है। दरअसल, अमेरिका के एक आर्मी बेस पर ड्रोन मंडराता दिखा है. यह ड्रोन जिस आर्मी बेस पर मंडरा रहा था, उस बेस पर तब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दो मजबूत और प्रभावशाली चेहरे मौजूद थे. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ तब उसी बेस पर मौजूद थे। सऊदी का धैर्य समाप्त? ईरान को प्रिंस ने दी सख्त चेतावनी, मिसाइल-ड्रोन हमलों के बाद पश्चिम एशिया में जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों की चिंता बढ़ गई है, और अब सऊदी अरब के सब्र का बांध भी टूटता नजर आ रहा है. सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उनके देश और उसके सहयोगियों की “सहनशक्ति” खत्म हो रही है। रियाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रिंस फैसल ने साफ कहा कि ईरान को तुरंत अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए. उन्होंने इशारों में यह भी जता दिया कि अगर हमले नहीं रुके, तो सऊदी अरब और उसके साझेदार जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। प्रिंस फैसल ने कहा, “हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमारे पास बहुत बड़ी क्षमता और ताकत है. अगर हम चाहें, तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं.” हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कब और किन हालात में सऊदी जवाब देगा, लेकिन उनके बयान से साफ है कि अब स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है। ईरानी गैस फील्ड पर हमले के बाद मिडल ईस्ट में ‘तेल युद्ध’, क़तर और UAE का काउंटर अटैक ईरान पर यूएस-इज़रायल के हमले के बाद बीसवें दिन भी मिडिल ईस्ट में भयानक जंग जारी है. ईरान की टॉप लीडरशिप बड़ा नुक़सान हुआ है लेकिन तेहरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इज़रायल की तरफ़ लगातार मिसाइलें दाग रहा है. इधर से इज़रायल की तरफ़ से भी एयर स्ट्राइक जारी है. मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि बीते 24 घंटों में यह सीधे-सीधे ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है. क्योंकि इस जंग में एनर्जी ठिकानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, जिसका असर दुनिया के कई अन्य इलाकों में भी पड़ा है. ऑयल की ग्लोबल सप्लाई भी बाधित हुई है और तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है.

Gold-Silver ETFs में भारी क्रैश, 2 महीने में 40% रिटर्न घटा; निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

मुंबई  कुछ महीने पहले गोल्‍ड-सिल्‍वर की खूब चर्चा हो रही थी. हर छोटा, बड़ा निवेशक सोना-चांदी खरीदने की बातें कर रहा था. उसमें भी ज्‍यादातर लोग सोना और चांदी को डिजिटल खरीदने की सलाह दे रहे थे, चाहे वह कमोडिटी एक्‍सपर्ट्स हो या ना… जिसका नतीजा ये रहा कि बहुत से निवेशकों ने अपने शेयरों में लगाया पैसा या फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट में लगाया पैसा निकालकर Gold-Silver ईटीएफ खरीदे। अगर जनवरी में खरीदे गए अभी भी इनके पास गोल्‍ड और सिल्‍वर के ईटीएफ हैं, तो अब ये फंस चुके हैं. क्‍योंकि जनवरी से लेकर अभी तक इन ETFs में भारी गिरावट देखने को मिली है. ये ईटीएफ अभी तक 40 फीसदी तक टूट चुके हैं. जबकि निवेशकों को उम्‍मीद थी कि ईरान-अमेरिका के बीच जंग शुरू होने के बाद इनमें तेजी आएगी, लेकिन ठीक इसके उल्‍टा हुआ है और इन मेटल्‍स के ईटीएफ में तेज गिरावट आई है। गोल्‍ड-सिल्‍वर ETFs में इतनी गिरावट क्‍यों आई?  ऐसा माना जाता है कि कोई भी जंग निवेशकों को सेफ असेट की ओर आकर्षित करती है, लेकिन ईरान-अमेरिका के बीच जंग ने सेफ असेट यानी सोना-चांदी के भाव को गिराया है. इसी कारण गोल्‍ड-सिल्‍वर ETFs में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है. एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि सोना और चांदी में गिरावट डॉलर में मजबूती के कारण हुआ है     होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण तेल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है. ब्रेंट क्रूड ऑयल अभी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. इस कारण ग्‍लोबल महंगाई का खतरा पैदा हुआ है. ऐसे में निवेशक सुरक्षित मुद्रा ‘डॉलर’ को मान रहे हैं, जिस कारण डॉलर में तेजी है.      मजबूत डॉलर और महंगाई, जंग के बीच भी सोने-चांदी में तेजी को रोक रहे हैं. वहीं फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से भी रेट कटौती की उम्‍मीद नहीं दिखाई दे रही है, जो सोने-चांदी की कीमतों पर विपरीत असर डालते हैं. ऐसे में सोने-चांदी की चमक फीकी दिख रही है.      तीसरा बड़ा कारण, सोने-चांदी के ईटीएफ में तेजी रुक जाने से और बिकवाली के कारण निवेशक इन असेट को बेचकर बाहर निकल रहे हैं. ऐसे में Gold-Silver ETFs में डिस्‍काउंट्स है.  अब आगे क्‍या अनुमान है?  एक्‍सपर्ट्स की बातों को समराइज करें तो ये पता चलता है कि अगर अमेरिकी इकोनॉमी में मंदी का खतरा पैदा होता है तो सोने-चांदी के दाम में अच्‍छी तेजी आज सकती है, जिससे Gold-Silver ETFs के दाम में भी तेजी आ सकती है, लेकिन अगर अमेरिकी इकोनॉमी मजबूत होती है तो सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आने से ये ईटीएफ के भाव भी गिरेंगे.  कमोडिटी एक्‍सपर्ट्स का यह भी मानना है कि ईरान-इजरायल जंग रुकने के बाद सोने और चांदी के भाव नीचे आ सकते हैं, जो एक बड़ा करेक्‍शन हो सकता है. वहीं कुछ एक्‍सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं कि इस साल सोना-चांदी 15 से 20 फीसदी का रिटर्न दे सकते हैं.  रिकॉर्ड हाई से कितना टूटे गोल्‍ड-सिल्‍वर ईटीएफ?  Nippon India Silver ETF 29 जनवरी को 360 रुपये पर था, जहां से यह करीब 40 फीसदी गिरकर 235 रुपये पर कारोबार कर रहा है. Nippon India Gold ETF 29 जनवरी को अपने रिकॉर्ड हाई 148 रुपये से 15 फीसदी नीचे है और 127 रुपये पर कारोबार कर रहा है. इसी तरह, Tata Silver ETF 32%, ICICI सिल्‍वर ईटीएफ करीब 35 फीसदी, टाटा गोल्‍ड ईटीएफ और ICICI गोल्‍ड ईटीएफ 15% तक गिरे हैं.  रिकॉर्ड हाई से कितने सस्‍ते हुए सोना-चांदी?  MCX पर चांदी का रिकॉर्ड हाई लेवल 4.20 लाख रुपये प्रति किलो है और सोने का भाव 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम है. 18 मार्च को चांदी की कीमत 2.52 लाख रुपये है और सोना 1.55 लाख रुपये है. ऐसे में चांदी 1.68 लाख रुपये और सोना 38 हजार रुपये सस्‍ता है. 

बस्तर में साक्षरता का उत्सव, नव-साक्षर 22 मार्च को उल्लास महापरीक्षा में दिखाएंगे अपना हुनर

बस्तर में साक्षरता का महापर्व : 22 मार्च को उल्लास महापरीक्षा में अपना हुनर दिखाएंगे नव-साक्षर जगदलपुर बस्तर जिले में शिक्षा और ज्ञान की अलख जगाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी कर ली है। इसी कड़ी में रविवार 22 मार्च को जिले भर में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत महापरीक्षा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण अवसर को लेकर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने जिले के जन-जन से जुड़ने और इस अभियान को सफल बनाने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा उन बुजुर्गों और युवाओं के लिए स्वावलंबन की एक नई शुरुआत है, जो किसी कारणवश अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाए थे।     कलेक्टर श्री छिकारा ने जिले के सभी विकासखंडों और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय साक्षरता केंद्रों के माध्यम से अधिक से अधिक नव-साक्षरों को इस महापरीक्षा में शामिल करने पर जोर दिया है। उन्होंने मैदानी स्तर पर कार्यरत शिक्षकों, प्रेरकों और स्वयंसेवकों को निर्देशित किया है कि वे घर-घर जाकर परीक्षा के प्रति उत्साह का माहौल बनाएं, ताकि कोई भी नव-साक्षर इस अवसर से वंचित न रह जाए। कलेक्टर का मानना है कि जब जिले का हर नागरिक पढ़ना-लिखना और बुनियादी गणना करना सीख जाएगा, तभी बस्तर विकास की मुख्यधारा में मजबूती से खड़ा हो सकेगा। इस महापरीक्षा की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण इस प्रकार किया गया है कि सुदूर वनांचलों में रहने वाले प्रतिभागियों को भी परीक्षा देने में कोई असुविधा न हो। आगामी 22 मार्च को होने वाले इस मूल्यांकन में प्रतिभागियों की पढ़ने, लिखने और साधारण अंकगणित की क्षमता को परखा जाएगा, जिसके बाद सफल उम्मीदवारों को बुनियादी साक्षरता का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। यह प्रमाण पत्र न केवल उनकी शैक्षणिक योग्यता का प्रतीक होगा, बल्कि उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास भी पैदा करेगा। कलेक्टर ने जिले के प्रबुद्ध नागरिकों से भी आग्रह किया है कि वे अपने आसपास के नव-साक्षरों को प्रोत्साहित कर परीक्षा केंद्र तक लाने में अपनी सहभागिता निभाएं, ताकि बस्तर जिले को पूर्ण साक्षर बनाने का सपना साकार हो सके।

सिंहस्थ-2028 के लिए एम.पी. ट्रांसको के कार्यों की समय सीमा तय, एक साल पहले होंगे पूरे: ऊर्जा मंत्री तोमर

सिंहस्थ-2028 के लिये एम.पी. ट्रांसको के कार्य एक वर्ष पूर्व पूर्ण करने का लक्ष्य, हो रही है नियमित मॉनिटरिंग : ऊर्जा मंत्री  तोमर उज्जैन ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक सिंहस्थ-2028 के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी उज्जैन क्षेत्र में अपनी पारेषण (ट्रांसमिशन) प्रणाली को सुदृढ़ एवं विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना पर तेजी से कार्य कर रही है। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि कंपनी के प्रबंध संचालक  सुनील तिवारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सिंहस्थ-2028 से संबंधित सभी कार्य आयोजन तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व पूर्ण कर लिए जाएं। इससे पारेषण तंत्र की स्थिरता, विश्वसनीयता एवं आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त परीक्षण एवं सुधार का समय मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि इन निर्देशों के परिपालन में प्रबंध संचालक  सुनील तिवारी स्वयं कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें तथा सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करें। चिंतामन सबस्टेशन का निर्माण कार्य प्रारंभ सिंहस्थ अवधि में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रथम चरण में 132 के.व्ही. चिंतामन सबस्टेशन के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।इसके अलावा उज्जैन- चंद्रावती गंज एवं  देपालपुर- चिंतामन 132 के वी ट्रांसमिशन लाइन का “लाइन इन लाइन आउट”कार्य भी प्रगति पर है।  इसके साथ ही त्रिवेणी विहार क्षेत्र से संबंधित विद्युत अवसंरचना कार्य भी तेजी से प्रगति पर हैं, जिससे स्थानीय लोड प्रबंधन में सुधार होगा। शंकरपुर सब स्टेशन में क्षमता वृद्धि उज्जैन क्षेत्र के 220 के.व्ही. शंकरपुर सबस्टेशन में पूर्व में स्थापित 20 एम.व्ही.ए. क्षमता के ट्रांसफार्मर को अपग्रेड कर 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया जा चुका है। इस उन्नयन से क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा संभावित अतिरिक्त मांग को सहजता से पूरा किया जा सकेगा। 400 के.व्ही. ताजपुर सब स्टेशन का विस्तार उज्जैन स्थित 400 के.व्ही. ताजपुर सबस्टेशन में 132 के.व्ही. नेटवर्क के विस्तार की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का एक अतिरिक्त ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा तथा 33 के.व्ही. के चार नए फीडर विकसित किए जाएंगे। इससे सिंहस्थ-2028 के दौरान विद्युत वितरण व्यवस्था अधिक सुदृढ़, संतुलित एवं भरोसेमंद बन सकेगी। मिलेगी निर्बाध बिजली ऊर्जा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सभी परियोजनाओं के समयबद्ध पूर्ण होने से सिंहस्थ-2028 में उज्जैन में निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

यूपी-केरल में गहराया IAS संकट: देशभर में 1300 पद खाली, जानें किस राज्य का क्या हाल

नई दिल्ली देश इस समय भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस की कमी से जूझ रहा है। मजूदा समय में देश में IAS के 1300 पद खाली हैं। आईएएस अधिकारियों की कमी के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा कमी उत्तर प्रदेश में 81 अधिकारियों की कमी है। जबकि दक्षिणी राज्य केरल भी 72 अफसरों की कमी से जूझ रहा है। यह स्थिति केंद्र और राज्यों की प्रशासनिक क्षमता पर असर डाल रही है। राज्यसभा की संसदीय समिति (Parliamentary Committee of Rajya Sabha) ने 25% रिक्त पदों को तुरंत भरने, डेटा आधारित भर्ती प्रक्रिया अपनाने और अफसरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए वेलफेयर प्लान लागू करने की सिफारिश की है। राज्यसभा की संसदीय समिति ने सरकार से कहा है कि IAS कैडर की 25% रिक्तियां तुरंत भरी जाएं। केंद्र शासित प्रदेशों और दिल्ली में प्रशासनिक जिम्मेदारियां ज्यादा हैं। छोटे कैडर वाले राज्यों के लिए अलग भर्ती रणनीति बने। पूर्वोत्तर राज्यों जैसे नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा और सिक्किम में स्थिति और असंतुलित बताई गई है। समिति ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया डेटा आधारित हो. सेवानिवृत्ति और जरूरत को ध्यान में रखा जाए और वार्षिक भर्ती योजना साफ हो। साथ ही चंद्रमोली समिति की सिफारिशों को लागू करने की बात भी कही गई है। आईएएस अफसरों के लिए वेलफेयर प्लान की जरूरत है। रिपोर्ट में अफसरों के काम के दबाव पर भी चिंता जताई गई है। सुझाव दिए गए हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग सिस्टम बने। लंबे समय तक अतिरिक्त जिम्मेदारी पर नजर रखी जाए और बार-बार ट्रांसफर से होने वाले तनाव को कम किया जाए। कुल पद और भर्ती की स्थिति कुल पद: 6,877 भरे हुए पद: 5,577 सीधी भर्ती के पद: 4,059 पदोन्नति के पद: 1,518 राज्यों में IAS पदों की स्थिति (चयनित आंकड़े) AGMUT: 542 पद, कमी 136 (25.09%) बिहार: 359 पद, कमी 56 (15.60%) गुजरात: 313 पद, कमी 58 (18.53%) हरियाणा: 215 पद, कमी 43 (20.00%) झारखंड: 224 पद, कमी 47 (20.98%) केरल: 231 पद, कमी 74 (32.03%) महाराष्ट्र: 435 पद, कमी 76 (17.47%) ओडिशा: 248 पद, कमी 63 (25.40%) राजस्थान: 332 पद, कमी 64 (19.28%) तमिलनाडु: 394 पद, कमी 51 (12.94%) उत्तर प्रदेश: 652 पद, कमी 81 (12.42%) पश्चिम बंगाल: 378 पद, कमी 75 (19.84%) कुल कमी: 1,300 (18.90%) रिपोर्ट में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत तनाव प्रबंधन मॉड्यूल जोड़ने की भी बात रिपोर्ट में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत तनाव प्रबंधन मॉड्यूल जोड़ने की भी बात कही गई है। इसके अलावा, प्रशासन में AI के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षित और जवाबदेह सिस्टम बनाने की जरूरत बताई गई है। कुल मिलाकर, देश में IAS अफसरों की कमी अब एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है।

तेल और आटा की कमी, अब अफगानिस्तान से पाकिस्तान पर क्या होगा युद्ध और तबाही का ट्रिपल अटैक?

  नई दिल्ली अमेरिका और ईरान में युद्ध (US-Iran War) जारी है, जिससे दुनिया में तेल संकट गहराया हुआ है और पाकिस्तान इससे पहले ही बेहाल नजर आ रहा है, दूसरी ओर पड़ोसी देश पर कर्ज (Pakistan Debt) भी लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच अफगानिस्तान के साथ जंग (Pakistan-Afghanistan War) से उसे तगड़ी मार पड़ी है. एक साथ ट्रिपल अटैक ने पाकिस्तान का तेल निकाल दिया है. पहले से ही आर्थिक संकट के चलते भारी भरकम कर्ज के बोझ तले देश का ईरान युद्ध से तेल बंद हुआ, तो अफगानिस्तान से साथ जंग ने देश की महंगाई बढ़ाकर इकोनॉमी पर संकट बढ़ा दिया है। लगातार बढ़ रहा कर्ज का बोझ  पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहा है और इससे उबरने के लिए वो तमाम मित्र देशों के साथ ही आए दिन आईएमएफ और विश्व बैंक के सामने कटोरा लेकर मदद मांगता नजर आता रहा है. हालांकि, भारी भरकम आर्थिक मदद मिलने के बाद भी देश के हालात बदतर ने हुए हैं. पाकिस्तानी मीडिया की एक रिपोर्ट को देखें, तो Pakistan पर जनवरी 2026 तक कुल कर्ज 79,322 अरब पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान द्वारा जारी डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कर्ज में घरेलू उधार में तेज उछाल आया है. केंद्रीय बैंक (SBP)  के आंकड़ों को देखें, देश की संघीय सरकार का घरेलू कर्ज जनवरी 2026 तक 55,978 पाकिस्तानी अरब रुपये तक पहुंच गया था. इसके अलावा  बाहरी कर्ज 23,344 अरब पाकिस्तानी रुपये हो गया. जो जीडीपी का करीब 70% है और पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का बड़ा उदाहरण है। यहां बता दें कि पाकिस्तान आईएमएफ का सबसे बड़ा कर्जदार है और 1958 से अब तक 26 आईएमएफ बेलआउट कार्यक्रमों के जरिए 34 अरब डॉलर के आसपास की मदद ले चुका है. तमाम रिपोर्ट्स में पाकिस्तानी इकोनॉमिस्ट बताते नजर आए हैं, कि IMF के कर्ज के सहारे चल रहा पाकिस्तान पहले से ही दिवालिया स्थिति में है और वर्तमान के बिगड़े ग्लोबल हालात इकोनॉमी को गहरी चोट पहुंचा सकते हैं। मिडिल ईस्ट में युद्ध, PAK में कोहराम पाकिस्तान पर दूसरा अटैक मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से हुआ है. दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग से तेल संकट गहरा गया है और पूरी तरह तेल के आयात पर निर्भर पाकिस्तान में कोहराम मचा है. हालात ये है कि पाकिस्तान में तेल की कमी के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए गए, सरकारी गाड़ियों में 60% कटौती, सांसदों और मंत्रियों की सैलरी कट, सरकारी विभागों के गैर-जरूरी खर्च में 20% की कटौती, मीटिंगों को वर्चुअल और पढ़ाई को ऑनलाइन में शिफ्ट करना समेत अन्य उपाय लागू किए गए हैं, जो कोरोना काल जैसे ही हैं। Middle East War से पाकिस्तान की बदहाल इकोनॉमी को और झटका लग सकता है. डॉन की बीते दिनों आई रिपोर्ट के मुताबिक, खुद पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री पूर्व वित्त मंत्री हाफिज पाशा ने चेतावनी दी है कि अगर ये युद्ध जारी रहा और क्रूड प्राइस 100 डॉलर के पार बने रहे, तो Pakistan GDP पर 1-1.5% का निगेटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है. पेट्रोलियम आयात में बढ़ोतरी के चलते अगले साल पाकिस्तान को 12-14 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने एक और संकट की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के बराबर 120 डॉलर के हाई पर पहुंचती हैं, तो पाकिस्तान में महंगाई कोहराम मचा सकती है और फिर उसी दौर के करीब 30% पर पहुंच सकती है. उस समय लोग आटा, दाल के लिए अपनी जान पर खेलते नजर आए थे, तो वहीं अब फिर से फ्यूल की कमी पाकिस्तान का तेल निकालती नजर आ रही है। पाकिस्तान में मिडिल ईस्ट की जंग के ताजा असर की बात करें, तो पाकिस्तान के ब्‍यूरो ऑफ स्‍टैटिस्टिक्‍स के साप्ताहिक महंगाई के आंकड़े के मुताबिक, बीते 11 मार्च को समाप्त सप्ताह में महंगाई सूचकांक SPI सालाना आधार पर 6.44% बढ़ गया. पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल के दाम बढ़ने के साथ ही खाद्य पदार्थों की महंगाई दर में तेज इजाफा हुआ है. ब्रेड, दूध से लेकर आटा-दाल-चावल तक खाने-पीने की तमाम चीजों के दाम बेतहाशा बढ़े हैं। अफगानिस्तान से युद्ध ने बढ़ाई मुसीबत पहले से ही बदहाल पाकिस्तान के लिए मुसीबत अफगानिस्तान के साथ चल रहे उसके युद्ध ने और भी बढ़ा दी है. हालांकि, ये संघर्ष 2025 के अंत में ही सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद शुरू हो गया था और अब ये भीषण रूप ले चुका है. युद्ध की टेंशन में आयात और निर्यात सुस्त पड़ गया है. सीमा पर तनाव ने जरूरी सामानों की आवाजाही बाधित कर दी है, जिससे पाकिस्तान में तमाम जरूरी चीजों के दाम में तेज इजाफा हुआ है और देश के लोगों पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ रही है। खासतौर पर तोरखम और चमन जैसे बॉर्डर रूट्स बंद होने से ताजे सामान बंद हो गए हैं, तो वहीं पाकिस्तान में कारोबारियों की मुसीबत को अफगान कोयले की कमी ने बढ़ा दिया है. सीमेंट निर्माता कंपनियों की टेंशन भी कोयले की आपूर्ति बंद होने से चरम पर पहुंच गई है।

एमपी में ट्रांसजेंडर के लिए बड़ा फैसला, पहचान देने से पहले होगी सख्त जांच

भोपाल  मध्यप्रदेश में ट्रांसजेंडर के संबंध में बड़ा फैसला लिया गया है। जेंडर बदलने से पहले अब कलेक्टर को इसकी सूचना देनी होगी। मेडिकल जांच के बाद ही ट्रांसजेंडर को जिला प्रशासन आइडी देगा। स्वयं के शपथ पत्र पर ट्रांसजेंडर व्यक्ति अब पहचान पत्र नहीं ले पाएगा। अभी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए ट्रांसजेंडर अधिकारों का संरक्षण संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया गया है। ये लागू होगा तो पुलिस व प्रशासन को जिले में अलग से ट्रांसजेंडर सेल का गठन करना होगा, जो ट्रांसजेंडर Transgender के साथ होने वाले अपराधों की निगरानी करेगी। अब ट्रांसजेंडर को जिला प्रशासन से अपना पहचान पत्र बनवाना जरूरी होगा। जिलास्तर पर इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं करना होगी। जेंडर बदलने के लिए सर्जरी करवाने के लिए प्रमाण पत्र अब अनिवार्य कर दिया गया है। भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि जिले में ट्रांसजेंडर समेत सभी श्रेणी के व्यक्तियों को लेकर प्रशासन संवेदनशील है। नियमों के अनुसार व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी। हाल में मतदाता सूची के वृहद गहन पुनरीक्षण में जिले में 72 ट्रांसजेंडर मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए गए। जांच के बाद ही आइडी देगी सरकार ट्रांसजेंडर Transgender व्यक्ति खुद के शपथ पत्र पर जिला मजिस्ट्रेट से पहचान पत्र नहीं ले पाएगा। जिले में एक मेडिकल बोर्ड का गठन होगा। सीएमएचओ की अध्यक्षता वाली ये समिति जिला मजिस्ट्रेट को सिफारिश करेगी। इसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी होगा। यदि कोई व्यक्ति जेंडर बदलने के लिए सर्जरी करवाता है, तो उसके लिए संशोधित प्रमाण पत्र प्राप्त करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। ट्रांसजेंडर के लिए सरकार पुलिस भर्ती में अवसर देने की व्यवस्था कर रही मध्यप्रदेश में ट्रांसजेंडर के लिए सरकार पुलिस भर्ती में अवसर देने की व्यवस्था कर रही है। एमपी पुलिस में कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर के पदों पर ऐसे उम्मीदवारों का कलेक्टर द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। राज्य सरकार ने किन्नर बोर्ड का गठन किया है, जो ट्रांसजेंडर समुदाय को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और डेटाबेस रखने का काम करता है। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य बीमा की पहल भी की जा रही है। किन्नर कल्याण बोर्ड के माध्यम से नौकरियों के साथ ही कल्याण योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।

भोपाल में 96 अवैध निर्माणों पर कार्रवाई, केरवा-कलियासोत में स्कूल और रेस्टोरेंट बने थे ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ में

भोपाल  शहर की खूबसूरती और पर्यावरण की जान माने जाने वाले केरवा और कलियासोत जलाशय अब अपने पुराने स्वरूप में लौटेंगे। राज्य सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने स्वीकार किया है कि इन जलाशयों के आसपास के ग्रीन बेल्ट में बड़े पैमाने पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। भोपाल विकास योजना 2005 के प्रावधानों को ताक पर रखकर यहां जो निर्माण हुए थे, अब उन्हें हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। 13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद अब जमीन का सीमांकन शुरू हो गया है। क्या-क्या बना है ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ में? सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, कुल 96 निर्माणों को अवैध पाया गया है। इनमें से 84 सरकारी जमीन पर हैं और 12 निजी जमीन पर, जो ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। FTL के 33 मीटर में बड़ा खतरा जलाशयों के फुल टैंक लेवल (FTL) से 33 मीटर के दायरे को सबसे संवेदनशील माना जाता है। केरवा जलाशय के इस दायरे में 16 पक्के निर्माण पाए गए हैं। इनमें से 2 सरकारी जमीन पर हैं, जिन्हें हटाने के आदेश राजस्व कोर्ट ने दे दिए हैं। बाकी 14 निजी जमीन पर हैं, जिन पर अब राजस्व विभाग नियमों के तहत कार्रवाई करने की तैयारी में है। मंत्रालय में हुई बैठक में साफ कर दिया गया है कि भोपाल विकास योजना 2005 के क्लॉज 2.57 का कड़ाई से पालन होगा। 150 हेक्टेयर की यह जमीन केवल प्रकृति के लिए सुरक्षित रहेगी, यहां किसी भी निजी स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं है। अब बनेगा बॉटनिकल गार्डन सरकार की योजना यहां 150 हेक्टेयर क्षेत्र में एक विशाल बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क बनाने की है। इसके लिए टीएंडसीपी विभाग ने मैप तैयार कर लिया है। खसरा रिकॉर्ड को मास्टर प्लान के मैप पर सुपरइम्पोज कर दिया गया है, जिससे अब एक-एक इंच जमीन का हिसाब साफ हो गया है। कलेक्टर भोपाल को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व विभाग के जरिए इस पूरी जमीन को जल्द से जल्द बाउंड्री बनाकर सुरक्षित करें। अब तक क्या हुआ? 13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में निर्णायक बैठक हुई। इसके बाद 28 फरवरी 2026 को 69 में से 28 अवैध निर्माणों को प्रशासन ने जमींदोज कर दिया। जबकि बाकी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली वारंट जारी हो चुके हैं। क्यों जरूरी है यह कार्रवाई? केरवा और कलियासोत न केवल भोपाल के जल स्तर को बनाए रखते हैं, बल्कि यह क्षेत्र बाघों और अन्य वन्यजीवों का कॉरिडोर भी है। पिछले कुछ वर्षों में यहां होटल, रेस्टोरेंट और फार्म हाउस की बाढ़ आ गई थी, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने लगा था। एनजीटी में दायर एक याचिका के बाद अब यह पूरा मामला कोर्ट की सीधी निगरानी में है।

केदारनाथ और हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए 160KM लंबा रोपवे नेटवर्क, 2026 में शुरू होंगे चार प्रोजेक्ट्स

 देहरादून उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थ यात्रा को आसान बनाने के लिए सरकार ने बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। राज्यभर में 51 रोपवे प्रोजेक्ट्स विकसित किए जाएंगे, जिनकी कुल लंबाई करीब 160.75 किलोमीटर होगी। 2026 से शुरू होंगे मेगा प्रोजेक्ट्स इन परियोजनाओं में से कुछ पर काम तेजी से चल रहा है, जबकि केदारनाथ और हेमकुंड साहिब सहित 4 बड़े रोपवे प्रोजेक्ट्स पर 2026 से निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, कई अन्य प्रोजेक्ट्स अभी DPR और प्री-फिजिबिलिटी स्टडी के चरण में हैं, जिन्हें उत्तराखंड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। दुर्गम इलाकों तक आसान होगी पहुंच उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के इंफ्रास्ट्रक्चर निदेशक दीपक खंडूरी के अनुसार, रोपवे उन क्षेत्रों तक पहुंच का बेहतर विकल्प हैं जहां सड़क बनाना कठिन है। इससे तीर्थ यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। देहरादून-मसूरी रोपवे जल्द होगा शुरू देहरादून से मसूरी तक बनने वाला 5.5 किलोमीटर लंबा रोपवे प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। करीब 285 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट का लगभग 70% काम पूरा हो चुका है। इस रोपवे में 10 यात्रियों की क्षमता वाले 71 केबिन होंगे और सफर करीब 20 मिनट में पूरा होगा। इसे इस साल के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।     5.5 किलोमीटर का देहरादून-मसूरी रोपवे: देहरादून के पुरकुल से मसूरी के लाइब्रेरी चौक तक बनने वाला यह रोपवे राज्य के प्रमुख प्रोजेक्ट्स में शामिल है। करीब 285 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है। परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसमें 10 यात्रियों की क्षमता वाले 71 केबिन लगाए जाएंगे और देहरादून से मसूरी तक का सफर करीब 20 मिनट में पूरा होगा। इसे इस साल के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।     0.93 KM का ठुलीगाड़-पूर्णागिरी मंदिर रोपवे: चंपावत जिले में पूर्णागिरी मंदिर तक पहुंच आसान बनाने के लिए यह रोपवे बनाया जा रहा है। करीब 35 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का निर्माण कार्य जारी है। इसे 30 मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।     4.9 किलोमीटर का तपोवन-कुंजापुरी रोपवे: टिहरी में प्रस्तावित इस रोपवे के लिए मई 2025 में एक स्विस तकनीकी कंपनी को तकनीकी सहयोग के लिए चुना गया है। करीब 4.9 किलोमीटर लंबे इस रोपवे के लिए फिलहाल भूमि सर्वेक्षण और अंतिम मार्ग तय करने का काम चल रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।     3.38 किलोमीटर का जानकीचट्टी-यमुनोत्री मंदिर रोपवे: यमुनोत्री धाम तक पहुंच आसान बनाने के लिए यह रोपवे बनाया जा रहा है। करीब 167 करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना के लिए फरवरी 2023 में निर्माण एजेंसी के साथ समझौता किया गया था। मार्ग के एलाइनमेंट में बदलाव के प्रस्ताव के कारण फिलहाल शासन स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। लक्ष्य है कि निर्माण पूरा कर 1 सितंबर 2027 तक रोपवे शुरू कर दिया जाए।     12.9 किलोमीटर का गौरीकुंड-केदारनाथ रोपवे: रुद्रप्रयाग जिले में बनने वाले इस रोपवे का ठेका अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को दिया गया है। इसके लिए 9 नवंबर 2025 को अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। 4081.28 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना में कंपनी राज्य सरकार को राजस्व का 42 प्रतिशत हिस्सा देगी। इसका निर्माण कार्य मई 2026 में शुरू कर मई 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।     12.4 किलोमीटर का गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे: चमोली जिले में बनने वाले इस रोपवे का जिम्मा विश्व समुद्र इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। 2730.13 करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना में कंपनी सरकार को 45 प्रतिशत राजस्व देगी। इसका निर्माण कार्य मई 2026 में शुरू कर मई 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे रोपवे उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के इंफ्रास्ट्रक्चर निदेशक दीपक खंडूरी ने इन परियोजनाओं के दूरगामी फायदों पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार रोपवे के माध्यम से उन दुर्गम पहाड़ियों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा, जहां सड़क मार्ग बनाना भौगोलिक और पर्यावरणीय दृष्टि से कठिन है। केदारनाथ, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब जैसे कठिन ट्रेक वाले स्थानों पर बुजुर्गों और बीमार यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर मिलेगा। पहाड़ों पर वाहनों के धुएं से प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट्स की झलक केदारनाथ रोपवे गौरीकुंड से केदारनाथ तक 12.9 किमी लंबा रोपवे बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 4081 करोड़ रुपये है और इसका ठेका Adani Enterprises Limited को दिया गया है। निर्माण कार्य मई 2026 से शुरू होकर 2032 तक पूरा होगा। हेमकुंड साहिब रोपवे गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किमी लंबा रोपवे बनेगा। इसकी लागत करीब 2730 करोड़ रुपये है और इसे 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यमुनोत्री रोपवे जानकीचट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक 3.38 किमी लंबा रोपवे प्रस्तावित है। इसे 2027 तक शुरू करने की योजना है। अन्य प्रोजेक्ट्स टिहरी में तपोवन-कुंजापुरी रोपवे और चंपावत में पूर्णागिरी मंदिर रोपवे पर भी काम जारी है। कई परियोजनाएं सर्वे और योजना के चरण में हैं। पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा रोपवे प्रोजेक्ट्स से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, पहाड़ों में वाहनों की संख्या कम होने से प्रदूषण में कमी आएगी। PPP मॉडल पर हो रहा निर्माण ये सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित की जा रही हैं। इसमें निजी कंपनियां निवेश करती हैं और संचालन करती हैं, जबकि सरकार को तय हिस्सा राजस्व के रूप में मिलता है। इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, किसी भी रोपवे प्रोजेक्ट से पहले प्री-फिजिबिलिटी स्टडी और डीपीआर तैयार की जाती है, जिसके बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू होती है। उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर योजना विशेषज्ञों का मानना है कि ये रोपवे प्रोजेक्ट्स उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे। खासतौर पर बुजुर्गों और बीमार यात्रियों के लिए केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे कठिन रास्तों की यात्रा अब आसान और सुरक्षित हो जाएगी।

सुभाषिनी विद्या मंदिर ससुंद्रा,से तीन विद्यार्थियों का नवोदय विद्यालय प्रभात पट्टन में हुआ चयन ।

Three students from Subhashini Vidya Mandir, Susundra were selected in Navodaya Vidyalaya Prabhat Patan. हरिप्रसाद गोहेआमला। ब्लॉक मुख्यालय आमला अंतर्गत आने वाले ससुंद्रा ग्राम में स्थित सुभाषिनी विद्या मंदिर ससुंद्रा,से तीन विद्यार्थियों का इस वर्ष भी नवोदय विद्यालय प्रभात पट्टन में चयन हुआ है । वर्ष 2026 में विद्यालय से नवोदय विद्यालय के लिए चयनित बच्चों में उमंग पिता धर्मराज उघड़े,विधि पिता भोजराज उघड़े, पायल पिता सुनील कुमरे का नाम शामिल है। चयनित तीनों बच्चों का चयन छठवीं प्राचार्य श्री मनीष माथनकर ने बताया कि वर्ष 2014 से लगातार हर वर्ष विद्यालय से नवोदय विद्यालय में बच्चों का चयन होते आ रहा है।सभी बच्चों का चयन कक्षा 6 के लिए हुआ है। अभी तक कुल 27 बच्चों का चयन हो चुका है। उन्होंने बताया कि संस्था के श्री कमलेश माथनकर शिक्षक के कुशल मार्गदर्शन एवं सभी शिक्षकों की कड़ी मेहनत से यह परिणाम प्राप्त हो रहा है। प्राचार्य माथनकर ने चयनित बच्चों को शुभकामनाएं प्रेषित कर उनके उज्वल भविष्य की कामना की है ।

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