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उत्तर प्रदेश में आठ डाटा सेंटर पार्क से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मिलेगी नई दिशा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में आठ डाटा सेंटर पार्क उत्तर प्रदेश को बढ़ाएंगे आगे नोएडा से वाराणसी तक आठ शहरों में विकसित होंगे डेटा सेंटर पार्क लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव, कई बड़ी कंपनियां दिखा रहीं रुचि 900 मेगावाट बिजली आपूर्ति और नई नीति से डेटा सेंटर उद्योग को मिलेगा बल लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश को देश का प्रमुख डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसी रणनीति के अंतर्गत प्रदेश में 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाने की योजना तैयार की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोद्योगिकी विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा सेंटर पार्कों के विकास से उत्तर प्रदेश देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही आने वाले समय में एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के लिए यह एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार की योजना के अनुसार इन डेटा सेंटर पार्कों को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और आगरा जैसे प्रमुख शहरों में विकसित किया जाएगा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में जमीन की पहचान और आवंटन की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। कुछ कंपनियों को जमीन आवंटित भी की जा चुकी है, जबकि अन्य स्थानों पर भूमि चिन्हांकन और मास्टर प्लान तैयार करने का काम जारी है। डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने रुचि दिखाई है। एचसीएल, अडानी ग्रुप, एनटीटी डेटा, योट्टा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टर्लाइट टेक्नोलॉजीज और सिफी टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां प्रदेश में निवेश की दिशा में आगे आईं हैं। इन कंपनियों की ओर से कुल मिलाकर करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें से कई परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं और कुछ परियोजनाएं निर्माण की दिशा में अग्रसर हो रहीं हैं। डेटा सेंटर के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर बिजली की आवश्यकता होती है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने लगभग 900 मेगावाट बिजली की मांग को पूरा करने की योजना बनाई है। इसके लिए नए सब स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा और डेटा सेंटर पार्कों को समर्पित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि डेटा सेंटर संचालन को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए डेटा सेंटर नीति के अंतर्गत कई प्रोत्साहन भी तय किए हैं। इसमें पूंजीगत सब्सिडी, बिजली शुल्क में रियायत, स्टांप ड्यूटी में छूट और बुनियादी ढांचे के विकास में सरकारी सहयोग शामिल है। इसके अलावा निवेशकों को तेज और पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम भी लागू किया गया है। इन 8 डेटा सेंटर पार्कों के विकसित होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे। लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष रोजगार और बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। अनुमान है कि परियोजनाओं के अधिकांश चरण अगले 3 से 5 वर्षों के भीतर पूरे हो जाएंगे।

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2023: विभिन्न विधाओं के कलाकारों को मिलेगा सम्मान

संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कारों की घोषणा, विभिन्न विधाओं के कलाकार होंगे सम्मानित वर्ष 2021 से लेकर वर्ष 2024 तक के अकादमी पुरस्कारों के लिए कलाकारों के नामों की घोषणा अकादमी पुरस्कार के साथ सफदर हाशमी एवं बी.एम.शाह पुरस्कारों के लिए कलाकारों के नामों का हुआ चयन  लखनऊ  राज्य में संगीत, नृत्य, नाटक एवं लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए समर्पित संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश की ओर से अकादमी पुरस्कारों की घोषणा की गई। इस अवसर पर अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत ने बताया कि संगीत नाटक अकादमी उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने एवं उसके संवर्धन में योगदान देने वाले कलाकारों को अकादमी पुरस्कारों से सम्मानित करती है। इसी क्रम में अकादमी की ओर से वर्ष 2021 से लेकर वर्ष 2024 तक के चार वर्षों के अकादमी पुरस्कार के साथ नाटक एवं रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलाकारों को बी.एम. शाह पुरस्कार और सफदर हाशमी पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है।    संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश की ओर से वर्ष 2021 के अकादमी पुरस्कार के लिए शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में पं. दीनानाथ मिश्रा,  लोक गायन के लिए श्रीकांत वैश्य, नक्कारा वादन के लिए कानपुर के प्रभु दयाल और शहनाई वादन के लिए वाराणसी के जवाहर लाल के नामों की घोषणा की गई। इस क्रम में रंगमंच निर्देशन के लिए भूमिकेश्वर सिंह, रंगमंच तकनीकी-प्रकाशन के लिए जगमोहन रावत, नौटंकी निर्देशन के लिए राजकुमार श्रीवास्तव एवं नाट्य लेखन के लिए विजय पंडित को सम्मानित किया जाएगा।  कला उन्नयन के लिए मथुरा के मोहन स्वरूप भाटिया और वाराणसी की माला होम्बल के नामों का चयन किया गया है। जबकि नृत्य विधा में मथुरा,वृदांवन की भरतनाट्यम नृत्यांगना प्रतिभा शर्मा को पुरस्कार दिया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2021 के सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए रीवा के मनोज कुमार मिश्रा एवं बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए दिल्ली के सतीश आनन्द पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है। इसी क्रम में वर्ष 2022 के अकादमी पुरस्कार के लिए शास्त्रीय गायन एवं लोक गायन के लिए मथुरा के आनन्द कुमार मलिक व माधुरी शर्मा, जबकि कथक नृत्य के लिए लखनऊ के पं. अनुज मिश्रा, पखावज वादन के लिए शशिकांत पाठक और तबला वादन के लिए प्रयागराज के पंकज कुमार श्रीवास्तव के नामों की घोषणा की गई है। वहीं गिटार वादन के लिए सुनील पावगी, बांसुरी वादन के लिए मोहन लाल कुंवर, रंगमंच अभिनय के लिए मंजू कौशल तथा रंगमंच तकनीक-कठपुतली के लिए मेराज आलम को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।  नाट्य लेखन,संगीत, नृत्य एवं रंगमंच के लिए वाराणसी के विजय शंकर मिश्रा एवं कला समीक्षा के लिए सीतापुर के पद्मकांत शर्मा को सम्मानित करने की घोषणा की गई है। जबकि वर्ष 2022 के सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए नई दिल्ली के राजेश सिंह एवं बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए भोपाल के कमल जैन के नामों का चयन किया गया है।  संगीत नाटक अकादमी की ओर से वर्ष 2023 के लिए शास्त्रीय गायन की श्रेणी में डॉ. रामशंकर, सुगम गायन के लिए मनोज गुप्ता एवं लोक गायन के लिए राकेश श्रीवास्तव को सम्मानित करने की घोषणा की गई। जबकि कथक नृत्य के लिए लखनऊ की डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव, तबला वादन के लिए अनूप बनर्जी और बांसुरी वादन के लिए चेतन कुमार जोशी के नामों का चयन किया गया है। वहीं नाटक एवं रंगमंच के क्षेत्र में निर्देशन के लिए राजकुमार उपाध्याय, अभिनय के लिए संजय देगलुरकर, लेखन-संगीत एवं नृत्य के लिए उमा त्रिगुणायत, कला उन्नयन के लिए डॉ. ओमेन्द्र कुमार एवं कला समीक्षा के लिए अर्जुनदास केसरी को पुरस्कृत किया जाएगा। वहीं सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए गाजियाबाद के अजय कुमार और बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए गोरखपुर के रविशंकर खरे के नाम का चयन किया गया है।  इसी क्रम में वर्ष 2024 के अकादमी पुरस्कार में शास्त्रीय गायन के लिए रीतेश-रजनीश मिश्रा, सुगम गायन के लिए मुक्ता चटर्जी और लोकगायन (आल्हा) के लिए रामस्थ पाण्डेय को सम्मानित करने की घोषणा की गई है। वहीं लोक नृत्य के लिए सुगम सिंह शेखावत, दुक्कड़ वादन के लिए मंगल प्रसाद, वायलिन वादन के लिए सुखदेव मिश्रा एवं सितार वादन के लिए वाराणसी के राजेश शाह को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। जबकि रंगमंच के क्षेत्र में निर्देशन के लिए सुषमा शर्मा, अभिनय क्षेत्र में रविकांत शुक्ला ‘शिब्बू’, कला उन्नयन के लिए राजेश पंडित एवं कला समीक्षा के लिए शशिप्रभा तिवारी को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2024 के लिए सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए लखनऊ के शुभदीप राहा और बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए भोपाल के संजय मेहता के नामों का चयन किया गया है। अध्यक्ष प्रो. जयंत ने बताया कि अकादमी की ओर से जल्द ही विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर इन सभी कलाकारों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

ऑटो-बाइक हादसे में बाइक चालक घायल, पैर की दो उंगलियों के टूटने का खतरा

ऑटो और बाइक की भिंडत, बाइक चालक को आया गंभीर चोटें पैर की दो उंगली टूटने की आशंका  राजेंद्रग्राम छबिलाल थाना क्षेत्र राजेंद्रग्राम अंतर्गत आने वाली ग्राम बरगी सांधा जो राजेंद्रग्राम बसनिहा से बेनीबारी को जोड़ती है वही बरगी साधा में ऑटो और बाइक की जोरदार भिंडत होने से बाइक चालक प्रवीण कुमार मराबी 23 वर्ष पिता जान सिंह मरावी ग्राम दमगढ़ का रहने वाला बताया जा रहा है।जो अपने निजी काम से बेनीबारी की ओर गए हुए थे और घर लौटते समय राजेंद्रग्राम की ओर से स्कूली बच्चों को लेकर जा रही ऑटो आमने सामने भिड़ने से ऑटो में सवार एक विद्यार्थी बच्चे को भी चोट लगने की जानकारी बताई जा रही है।और घायल व्यक्ति प्रवीण कुमार मरावी को भी गंभीर चोट लगने की आसंका जताई जा रही है,और प्रवीण मरावी को उनके परिजनों के द्वारा अपने निजी वाहन से अस्पताल लाया गया,लेकिन देख भाल करने वाले डॉक्टरों का कोई अता पता नहीं है,जिससे घायल व्यक्ति को सही तरीके से इलाज किया जा सके।वही ड्रेसिंग करने वालों के द्वारा घायल व्यक्ति के पैर में टांका लगाकर,घाव को साफ कर, मलहम पट्टी लगाकर, जिला अस्पताल अनूपपुर ले जाने की सलाह दी गई,और परिजनों का कहना है की हमारे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ डॉक्टरों के द्वारा ना किया जाए जिससे होने वाले बीमारी या एक्सीडेंट से डॉक्टरों के द्वारा छुटकारा दिलाया जा सकता है,अगर वो समय से अस्पताल को निगरानि मे रखकर काम करेंगे तो ,नही फिजूल में मरीज अपने मौत को गले लगाने से किसी को बचाया नहीं जा सकता है।

इंदौर में मेट्रो ट्रेन का अंतिम स्पीड ट्रायल, टीम ने मेट्रो में सवार होकर किया सर्वे

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट के 17 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो के संचालन की राह आसान होती नजर आ रही है। सोमवार को कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (CMRS)की टीम ने मेट्रो ट्रेन में सवार होकर कोच की सुरक्षा, स्टेशनों की स्थिति देखी।  ट्रेन को अलग-अलग स्पीड पर चलाकर भी देखा गया। इस दौरान ट्रेक के जिस हिस्से में मोड़ है या ढलान है, वहां पर बारिकी से जांच की गई, ताकि 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन के संचालन के दौरान कोई परेशानी न हो। टीम ने रविवार से फाइनल निरीक्षण शुरू किया है और ट्रैक, स्टेशनों और मेट्रो सिस्टम की बारीकी से जांच की गई। रविवार को टीम ट्राली पर दौरा कर रही थी। सोमवार को मेट्रो ट्रेन में सवार होकर सर्वे किया। निरीक्षण के पहले दिन ट्रॉली रन किया गया। निरीक्षण 18 मार्च तक चलेगा। मंगलवार और बुधवार को मेट्रो ट्रेन को 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर ट्रैक की क्षमता और सुरक्षा का परीक्षण किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि तेज रफ्तार में ट्रेन और ट्रैक का प्रदर्शन कैसा रहता है। इसके बाद ही मेट्रो ट्रेन के संचालन की अनुमति मिलेगी। टीम के सर्वे के कारण गांधी नगर से बागड़दा तक छह किलोमीटर के हिस्से में मेट्रो का संचालन बंद कर दिया गया है। 80 रुपये तक होगा किराया मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिलने के बाद मेट्रो रेल कार्पोरेशन किराए का निर्धारण करेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक अधिकतम किराया 80 रुपये तक तक हो सकता है। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक की दूरी 17 किलोमीटर है। अगले माह से मेट्रो का कमर्शियल संचालन हो सकता है। सरकार इसके लिए बड़ा लोकार्पण कार्यक्रम भी रख सकती है। फिलहाल मेट्रो साढ़े छह किलोमीटर हिस्से में संचालित हो रही है, लेकिन उस हिस्से में मेट्रो के लिए यात्री नहीं मिल रहे है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित खेल स्थलों का निर्माण जरूरी – यशवंत कुमार

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करें सभी खेल स्थलों को –  यशवंत कुमार खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव ने नेशनल ट्राइबल गेम्स की तैयारियों की समीक्षा की आयोजन की व्यवस्थाओं में लगे विभागों को दिए आवश्यक निर्देश, समय से पहले कर लें सभी इंतजाम  छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पर्यटन स्थलों से भी रू-ब-रू होंगे देशभर के खिलाड़ी व अधिकारी 30 राज्यों के 2500 खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं अधिकारी होंगे शामिल बिलासपुर खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार ने छत्तीसगढ़ की मेजबानी में देश में पहली बार हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने आज रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर स्थित खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालनालय में आयोजित बैठक में आयोजन की व्यवस्थाओं में लगे विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पर्याप्त समय रहते सभी इंतजाम पुख्ता रूप से सुनिश्चित करने को कहा।   खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार ने बैठक में कहा कि खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स राष्ट्रीय महत्व और छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठा से जुड़ा आयोजन है। इससे संबंधित सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त, पुख्ता एवं चौक-चौबंद होने चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को कार्यों में तेजी लाते हुए पर्याप्त समय रहते सभी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आयोजन के लिए चिन्हांकित सभी खेल स्थलों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने को कहा।  विभागीय सचिव  कुमार ने खेल मैदानों, खिलाड़ियों के ठहरने की जगहों, विमानतल और रेल्वे स्टेशन पर पर्याप्त संख्या में स्टॉफ तैनात करने के निर्देश दिए, ताकि आयोजन में भाग लेने पहुंचने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों को ट्राइबल गेम्स में हिस्सेदारी के लिए विभिन्न राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले प्रतिभागियों को यहां की संस्कृति, पुरातत्व एवं कला की जानकारी देने के साथ ही पर्यटन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने को कहा।   कुमार ने आयोजन में विभिन्न भाषाओं वाले राज्यों की भागीदारी को देखते हुए उन भाषाओं के जानकार अधिकारियों-कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या में ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक मती तनूजा सलाम और उप संचालक मती रश्मि ठाकुर सहित रायपुर जिला प्रशासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, अनुसूचित जनजाति विकास विभाग, परिवहन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन, जनसंपर्क, स्वास्थ्य विभाग, आकाशवाणी और दूरदर्शन के अधिकारी बैठक में मौजूद थे। अंबिकापुर और जगदलपुर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से बैठक में शामिल हुए। रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर में 25 मार्च से 3 अप्रैल तक होंगे नेशनल ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़ की मेजबानी में रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर में 25 मार्च से 3 अप्रैल तक नेशनल ट्राइबल गेम्स की 7 खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इसमें दो अन्य खेलों, कबड्डी और मलखंब को डेमो के रूप में शामिल किया गया है। हॉकी, फुटबॉल, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और तीरंदाजी की स्पर्धाएं रायपुर में होंगी। वहीं जगदलपुर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर में कुश्ती की प्रतियोगिताएं होंगी। डेमो खेलों में कबड्डी का रायपुर में और मलखंब का प्रदर्शन अंबिकापुर में किया जाएगा। देश में पहली बार हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में 30 राज्यों के 2500 खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं अधिकारी शामिल होंगे।

चिरायु टीम की मदद से एक बच्चे को मिला नया जीवन, जन्मजात विकृति से जूझते परिवार की उम्मीद जगी

जब चिरायु टीम बनी एक परिवार की उम्मीद, जन्मजात विकृति से जूझ रहे बच्चे को मिला नया जीवन बिलासपुर छह महीने पहले जन्मे एक नन्हे बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाना उसके माता-पिता के लिए किसी सपने से कम नहीं था। जन्म से ही कटा-फटा होंठ और तालू (क्लैफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या के कारण वह अपनी माँ का दूध भी ठीक से नहीं पी पा रहा था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह चिंता और बेबसी का समय था। ऐसे में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की चिरायु टीम उनके लिए उम्मीद बनकर सामने आई और आज उसी बच्चे के चेहरे पर सामान्य मुस्कान लौट आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैय्या कराई जा रही है।     लगभग छह माह पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीपत में जन्मे इस बच्चे को जन्मजात विकृति के कारण स्तनपान करने में कठिनाई हो रही थी। आरबीएसके टीम ने बच्चे और उसके माता-पिता से लगातार संपर्क बनाए रखा और उन्हें इस बीमारी के उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। करीब छह महीनों तक टीम द्वारा बच्चे का नियमित फॉलो-अप लिया गया। इस दौरान उसके वजन, ऊँचाई और सामान्य स्वास्थ्य की जांच की जाती रही तथा आवश्यक दवाइयाँ भी उपलब्ध कराई गईं। टीम ने परिवार को भरोसा दिलाया कि ऑपरेशन के माध्यम से बच्चे का उपचार संभव है। बाद में आरबीएसके टीम के सहयोग से स्माइल ट्रेन संस्था के माध्यम से बिलासपुर के लाडिगर अस्पताल में बच्चे का ऑपरेशन कराया गया, जो सफल रहा। ऑपरेशन के बाद बच्चा स्वस्थ है और परिवार अपने बच्चे को सामान्य रूप से देखकर बेहद खुश है।     राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आरबीएसके मोबाइल हेल्थ टीम द्वारा स्कूलों, आंगनबाड़ियों, मदरसों और छात्रावासों में जाकर 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। प्रत्येक बच्चे का हेल्थ कार्ड बनाया जाता है, जिसमें उसकी पूरी स्वास्थ्य जानकारी दर्ज रहती है। कार्यक्रम के अंतर्गत सामान्य बीमारियों के लिए दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं, जबकि जटिल बीमारियों वाले बच्चों को उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर कर उपचार कराया जाता है। इसके लिए चिरायु वाहन की सुविधा भी उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2014 से संचालित यह कार्यक्रम “चिरायु” नाम से भी जाना जाता है। यह योजना बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अपने बच्चे को स्वस्थ देखकर परिवार ने राहत की सांस ली है। माता-पिता का कहना है कि यदि समय पर चिरायु टीम का सहयोग नहीं मिलता तो उनके लिए इलाज कराना संभव नहीं था। आज उनके बच्चे के चेहरे पर लौटी मुस्कान ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।  

केदार कश्यप के विभागों के लिए 3,622 करोड़ रुपए की अनुदान मांगें मंजूर

मंत्री  केदार कश्यप के विभागों के लिए 3 हजार 622 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित पर्यावरण संरक्षण, जैव संवर्धन तथा वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने सरकार प्रतिबद्ध: मंत्री  कश्यप वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को ई-कुबेर योजना हेतु मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार  वन आवरण के मामले में राज्य देश में तीसरे स्थान पर वन्यप्राणी संरक्षण एवं संवर्धन तथा उनके रहवास विकास हेतु 320 करोड़ रूपए का प्रावधान  ग्रामीण बस योजना, ई-मॉनिटरिंग और किसानों को ब्याज मुक्त ऋण  80 मार्गों पर लगभग 560 गांवों को पहली बार सुगम आवागमन की सुविधा  रायपुर  वन एवं जलवायु परिवर्तन, सहकारिता, परिवहन तथा संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप के विभागों से संबंधित 3 हजार 622 करोड़ 86 लाख 35 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग लिए 2 हजार 867 करोड़ 30 लाख रूपए, सहकारिता विभाग के लिए 389 करोड़ 40 लाख 85 हजार रूपए, परिवहन विभाग के लिए 243 करोड़ 50 लाख 50 हजार रूपए और राज्य विधानमंडल के लिए 122 करोड़ 65 लाख रूपए शामिल हैं।  मंत्री  कश्यप ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि हमारी सरकार पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। राज्य में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के लिए आगामी वर्षा ऋतु में लगभग 3.50 करोड़ पौधे रोपने और वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही बिगड़े बांस वनों के पुनरोद्धार के लिए 80 करोड़ रुपये और बिगड़े वनों के सुधार के लिए 310 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 की परिकल्पना की है, जिसका उद्देश्य प्रदेश को पूर्ण विकसित एवं समृद्ध राज्य बनाना है।  इसी तरह नदी तटों पर भू-क्षरण रोकने के लिए 7 करोड़ रुपये तथा भू-जल संरक्षण योजना के लिए 120 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। इसके अलावा राष्ट्रीय और राज्य मार्गों के किनारे वृक्षारोपण के लिए भी 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन में कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसके लिए 320.58 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि बाघ संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ योजना के तहत 23.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंत्री  कश्यप ने बताया कि दूरस्थ अंचलों में निवासरत वनवासियों को बारहमासी आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वन मार्गों में रपटा पुल-पुलिया का निर्माण किया जा रहा है। इस योजनांतर्गत इस वर्ष 5 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही सड़कें तथा मकान निर्माण के लिए 11 करोड़ रूपए का बजट प्रास्तावित है। इसी तरह काष्ठ एवं बांस कूपों के विदोहन के उपरांत प्राकृतिक पुनरोत्पादन को बढ़ावा देने इस योजना के लिए 300 करोड़ रूपए का बजट रखा गया है। वहीं ए.एन.आर. योजनांतर्गत भी 300 करोड़ रूपए का प्रावधान है। इसी तरह वनवासियों को उनके मालिकाना हक की भूमि में ईमारती  लकड़ी के विदोहन के लिए 183 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मंत्री  कश्यप ने बताया कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को ई-कुबेर योजना हेतु मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसी तरह कांगेर वैली नेशनल पार्क को यूनेस्को से विश्व विरासत स्थल के रूप में चिन्हांकन हेतु चयनित किया गया है। वहीं वन विभाग में मानव संसाधन में वृद्धि करने के लिए वनरक्षकों 1484 एवं सहायक ग्रेड-3 के 50 पदों पर भर्ती की जा रही है।   मंत्री  कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में चरणपादुका वितरण योजना को फिर से शुरू किया गया है। इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए राजमोहिनी देवी तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 50 करोड़ रुपये रखे गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 44.25 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है और भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार वन आवरण के मामले में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है।  मंत्री  कश्यप ने बताया कि राज्य में जैव विविधता संरक्षण और वेटलैंड विकास को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर सचिवालय द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य का पहला एवं भारत वर्ष का 96वाँ रामसर स्थल अधिसूचित किया गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से राज्य की जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और जल जीवन के प्रति हमारे सरकार की प्रतिबद्धता मजबूत हुई है। इसी प्रकार छत्तीसगढ अंजोर विजन-2047 के ज्ञमल डपसमेजवदमे ठल 2030 के अनुरूप वर्ष 2030 तक 20 वेटलैण्ड्स को रामसर स्थल के रूप में नामित करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा। इसी परिप्रेक्ष्य में बेमेतरा जिले के गिधवा-परसदा वेटलैण्ड कॉम्पलेक्स को रामसर स्थल अधिसूचित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। परिवहन-सहकारिता-संसदीय कार्य   मंत्री  कश्यप ने सदन में परिवहन, सहाकारिता और संसदीय कार्य विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा में कहा कि ग्रामीण परिवहन व्यवस्था, सहकारिता क्षेत्र और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के लिए हमारी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिसके तहत परिवहन विभाग के लिए 243.50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। सरकार ने दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए “मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना” को विस्तार देने की घोषणा की है। योजना के तहत बस संचालकों को तीन वर्षों तक मासिक कर में पूर्ण छूट और अधिकतम 26 रुपये प्रति किलोमीटर की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। वर्तमान में वनांचल के 80 मार्गों पर 81 बसें संचालित हो रही हैं, जिससे लगभग 560 गांवों को पहली बार सुगम आवागमन की सुविधा मिल रही है। परिवहन मंत्री  कश्यप ने बताया कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत एएनपीआर और रडार कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए आठ नए जिलों में ई-ट्रैक केंद्र स्थापित करने हेतु 15 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने … Read more

भारत का व्यापारिक घाटा फरवरी में घटकर 27.1 अरब डॉलर, दर्ज की गई गिरावट

नई दिल्ली  भारत का वस्तु व्यापारिक घाटा फरवरी में कम होकर 27.1 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पिछले महीने 34.68 अरब डॉलर था। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से  दी गई। बीते महीने देश का वस्तु निर्यात बढ़कर 36.61 अरब डॉलर हो गया है, जो कि जनवरी में 36.56 अरब डॉलर था। वहीं, आयात कम होकर 63.71 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पहले 71.24 अरब डॉलर था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का वस्तु निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-फरवरी अवधि में 402.93 अरब डॉलर रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 395.66 अरब डॉलर था। यह समीक्षा अवधि में सालाना आधार पर 1.84 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। यह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था और जिसके चलते मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित हो गया है। इसी जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात होता है।  जलडमरूमध्य के बंद होने से मध्य पूर्व के देशों को चावल जैसी वस्तुओं के भारत के निर्यात पर भी असर पड़ा है। पहले, भारत के ऊर्जा आयात का लगभग 50 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता था, लेकिन अब इसमें विविधता आ गई है और इसका एक बड़ा हिस्सा रूस से आ रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत के रणनीतिक तेल भंडार और 40 आपूर्तिकर्ता देशों से ऊर्जा आयात में विविधता लाने से वैश्विक ऊर्जा संकटों का सामना करने की देश की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। इस लचीलेपन के कारण ईरान युद्ध से उत्पन्न व्यवधान के बावजूद भारत में कोई ऊर्जा संकट नहीं आया है, क्योंकि सरकार आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन के माध्यम से स्थिति को संभाल रही है। जहाज और बंदरगाह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, भारत ईरान के साथ भी सीधे संपर्क में है ताकि उसके व्यापारिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल सके। भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी रविवार को संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से लगभग 80,800 मीट्रिक टन मुरबान कच्चे तेल के साथ सुरक्षित रूप भारत के लिए रवाना हुआ। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। बयान में आगे कहा गया कि इलाके में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई भी दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज, शिवालिक और नंदा देवी, जिनमें लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है, शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और वर्तमान में भारत की ओर रवाना हैं। इनके सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह और मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचने वाले हैं।

बस्तर की बेटियों को सुरक्षा देने के लिए जगदलपुर में एचपीवी टीकाकरण अभियान का हुआ भव्य आगाज

जगदलपुर : बस्तर की बेटियों के लिए सुरक्षा कवच : जगदलपुर में एचपीवी टीकाकरण अभियान का भव्य आगाज़ ​जगदलपुर बस्तर जिले की बेटियों को भविष्य की गंभीर बीमारियों से सुरक्षित करने की दिशा में सोमवार को एक ऐतिहासिक और आधुनिक अध्याय जुड़ गया। जिला चिकित्सालय महारानी अस्पताल में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। शहर के प्रथम नागरिक और महापौर  संजय पांडेय ने मुख्य अतिथि के रूप में इस अभियान की शुरुआत की, जहाँ कलेक्टर  आकाश छिकारा के कुशल मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम ने इस मिशन को धरातल पर क्रियान्वयन शुरू किया। यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि तकनीकी रूप से भी बेहद उन्नत है, क्योंकि इसमें यू-विन पोर्टल का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। ​इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह और किशोरियों को संबोधित करते हुए महापौर  संजय पांडेय ने कहा कि यह दिन बस्तर की बेटियों के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव का यह टीका बाजार में महंगा है, इसके बावजूद बेटियों के अनमोल स्वास्थ्य की रक्षा हेतु शासन द्वारा इसे पूरी तरह से निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यह टीका हमारी बेटियों के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच है क्योंकि सरकार और प्रशासन का लक्ष्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि बीमारी को जड़ से रोकना है। महापौर ने सभी अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अपनी 14 से 15 वर्ष की बेटियों का टीकाकरण अवश्य कराएं, क्योंकि यह न केवल एक स्वास्थ्य अभियान है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक डिजिटल क्रांति भी है, जहाँ टीकाकरण के तुरंत बाद उन्हें ई-सर्टिफिकेट प्राप्त हो रहा है। उन्होंने शासन के इस महत्वपूर्ण योजना की जानकारी घर-घर तक उपलब्ध कराने पर जोर दिया।          ​शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान किशोरियों का सफलतापूर्वक टीकाकरण किया गया, जिसमें पूरी प्रक्रिया का डिजिटल प्रबंधन यू-विन पोर्टल के माध्यम से किया गया। पंजीकरण से लेकर टीकाकरण के पश्चात डिजिटल ई-सर्टिफिकेट प्रदान करने तक की पारदर्शी व्यवस्था ने इस अभियान को और भी प्रभावी बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने इस मिशन की गंभीरता को और पुख्ता किया। कार्यक्रम में नगर निगम सभापति  खेमसिंह देवांगन, महापौर परिषद के सदस्य  निर्मल पाणीग्राही, पार्षद स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. महेश सांडिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक, सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक सु रीना लक्ष्मी, शहरी स्वास्थ्य मिशन के पीडी बस्तिया मौजूद रहे। साथ ही अन्य समर्पित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं पैरामेडिकल कर्मचारियों की देखरेख में टीकाकरण प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई। प्रशासन का अब यह साझा संकल्प है कि जिले की हर पात्र किशोरी तक इस जीवन रक्षक और बहुमूल्य टीके को पहुँचाकर बस्तर की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर मुक्त बनाया जाए।

डिजिटल सुशासन को सशक्त बनाने हेतु शासन की नवीन पहल

डिजिटल सुशासन और शासकीय खरीद में पारदर्शिता की ओर सशक्त कदम इलेक्ट्रानिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ डिजिटल सुशासन को सशक्त बनाने हेतु शासन की नवीन पहल रायपुर राजधानी रायपुर के सिविल लाइन्स स्थित न्यू सर्किट हाउस में सूचना विज्ञान केंद्र (एन.आई.सी.) द्वारा विकसित इलेक्ट्रानिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। चिप्स एवं एन.आई.सी. के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में शासकीय खरीद में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए राज्य के समस्त विभागों को नवीन प्रोक्योरमेंट प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जाना है। कार्यशाला के प्रथम दिन लोक कल्याण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन विभाग, गृहनिर्माण विभाग,पर्यटन विभाग सहित 50 विभागों के नोडल अधिकारी शामिल हुए, जिन्हें एन.आई.सी. नई दिल्ली से श्रीमती उषा सक्सेना, उप-महासंचालक के नेतृत्व में आये पांच सदस्यी दल द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।     कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रभात मलिक ने बताया वर्तमान ई-खरीद प्रणाली दस वर्षों से कार्यशील है, वर्तमान प्रोक्योरमेंट प्रणाली से एन.आई.सी. द्वारा विकसित नवीन जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम की ओर माइग्रेशन प्रदेश के लिए एक नई और सशक्त शुरुआत है। श्री मलिक ने इस प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम के माध्यम से डिजिटल सुशासन को सशक्त बनाने हेतु योगदान के लिए प्रोत्साहित किया। राज्य के विभिन्न विभागों के प्रोक्योरममेंट से सम्बन्धित नोडल अधिकारीयों को नवीन प्रणाली का प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली की उप-महासंचालक एवं ई-प्रोक्योरमेंट ग्रुप प्रमुख श्रीमती उषा सक्सेना ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की डिजिटल सुशासन नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि टेंडर में सबसे ज़रूरी तत्व पारदर्शिता, दक्षता और समानता हैं, यानि टेंडर प्रक्रिया में सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध रहना। एन.आई.सी. का जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम इन सभी ज़रूरी मानकों को पूर्ण करता है। श्रीमती उषा सक्सेना ने बताया कि जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम के माध्यम से प्रतिदिन 5-6 हज़ार निविदाएं हैंडल की जा रही हैं। इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के द्वितीय प्रशिक्षण सत्र में ई-खरीद से संबंधित शासकीय नीतियों, बेस्ट प्रैक्टिस, सॉफ्टवेयर फीचर के विषय में विस्तार से बताया जायेगा। अपने स्वागत उद्बोधन में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी श्री टी. एन. सिंह ने कहा कि जेपनिक प्रोक्योरमेंट प्रणाली ई-सुशासन की दिशा में नया कदम है, यह एक कॉम्प्रेहेंसिव ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली है। इस स्केलेबल प्रणाली को राज्य की ज़रूरतों के अनुरूप री-स्ट्रक्चर और कस्टमाइज़ किया गया है। विभिन्न सुरक्षा फीचरों से सुसज्जित यह सिस्टम शासन की हर ज़रूरतों और चुनौतियों को कवर करता है। उल्लेखनीय है कि जेपनिक ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम शासकीय खरीद के लिए विकसित एक केंद्रीय ई-खरीद प्रणाली है जिससे देश के 31 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश जुड़े हुए हैं। इस कार्यशाला में दो दिनों तक नवीन ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली से संबद्ध डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेशन, कॉन्फिगरेबल फंक्शनलिटी, ई-ऑक्शन, टेंडर प्रिपरेशन, प्राइस बिड सहित विभिन्न फीचरों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही इंडियन ऑयल कॉर्पाेरेशन, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस, मेट्रो रेल आदि की केस स्टडी के माध्यम से ई-प्रोक्योरमेंट बेस्ट प्रैक्टिस के बारे में बताया जायेगा। साथ ही जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम पर प्रश्नोत्तरी के दौरान उपस्थिति अधिकारियों की जिज्ञासा का समाधान किया।     कार्यशाला में चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रभात मलिक के साथ-साथ श्री पी. रामाराव, एनआईसी, चिप्स के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुपम आशीष टोप्पो, एस.ई.एम.टी. हेड श्री आशीष जायसवाल सहित लोक कल्याण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन विभाग, गृह निर्माण विभाग, पर्यटन विभाग आदि 50 से अधिक विभागों के 130 से अधिक नोडल अधिकारी शामिल हुए।

क्रिस गेल का 175 रन तोड़ना है…, वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में अपनी महत्वाकांक्षाओं के बारे में किया खुलासा

मुंबई  भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) का वार्षिक नमन अवॉर्ड्स समारोह 15 मार्च (रविवार) को नई दिल्ली में हुआ. इस समारोह में युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी भी शरीक हुए. वैभव को इस दौरान संजू सैमसन, हार्दिक पंड्या और अभिषेक शर्मा के साथ स्टेज पर आमंत्रित किया गया, जहां कमेंटेटर हर्षा भोगले ने इन खिलाड़ियों से खास बातचीत की. बातचीत के दौरान भोगले ने वैभव से एक ऐसा सवाल पूछा, जिसने क्रिकेट फैन्स का ध्यान खींच लिया।  हर्षा भोगले ने वैभव सूर्यवंशी से पूछा कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में कौन सा रिकॉर्ड वो तोड़ना चाहेंगे? बिहार से आने वाले इस युवा बल्लेबाज ने बेहद आत्मविश्वास के साथ अपना बड़ा सपना जाहिर किया और कहा कि वह आईपीएल में क्रिस गेल के 175 रनों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को धराशायी करना चाहते हैं।     बता दें कि कैरेबियाई दिग्गज क्रिस गेल ने आईपीएल 2013 के दौरान रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की ओर खेलते हुए पुणे वॉरियर्स इंडिया के खिलाफ एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में सिर्फ 66 गेंदों पर नाबाद 175 रन बना दिए थे, जो टी20 क्रिकेट के इतिहास का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है।  अंडर-19 विश्व कप में मचाया था धमाल वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत को चौंका दिया है. साल 2026 के आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ 80 गेंदों में 175 रन ठोककर इतिहास रच दिया था. उनकी इस पारी में 15 चौके और 15 छक्के शामिल रहे. सूर्यवंशी की इस धमाकेदार इनिंग्स ने भारत को उस मुकाबले में शानदार जीत दिलाई थी।  वैभव सूर्यवंशी का नाम पहले ही कई रिकॉर्ड्स से जुड़ चुका है. वह आईपीएल में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं. 2025 के आईपीएल सीजन में उन्होंने सिर्फ 35 गेंदों में सेंचुरी जड़कर सबको चौंका दिया था. उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खासियत है निडर अंदाज, आक्रामक शॉट्स और लगातार बाउंड्री लगाने की क्षमता।  इसी वजह से क्रिकेट एक्सपर्ट्स उन्हें भविष्य का बड़ा स्टार मानते हैं. करियर की शुरुआत में ही इतने बड़े लक्ष्य तय करना वैभव सूर्यवंशी के आत्मविश्वास को दिखाता है. अगर उनका बल्ला इसी तरह चलता रहा तो आने वाले समय भारतीय टीम को एक और विस्फोटक मैच-विनर बल्लेबाज मिल सकता है।   

758 करोड़ के बकाया बिजली बिलों से राहत, छत्तीसगढ़ के 29 लाख उपभोक्ता होंगे मुक्त

रायपुर  मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना छत्तीसगढ़ के आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लगभग 29 लाख उपभोक्ताओं को 758 करोड़ रुपये की सीधी छूट दी जाएगी। योजना मुख्य रूप से निम्नदाब घरेलू, बीपीएल और कृषि उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके तहत 31 मार्च 2023 तक की बकाया राशि को आधार माना गया है। सरचार्ज को भी माफ किया जाएगा पात्र उपभोक्ताओं को न केवल मूल राशि में रियायत मिलेगी, बल्कि बकाया पर लगने वाले भारी-भरकम अधिभार (सरचार्ज) को भी माफ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन और प्रोटोकाल के कारण महीनों तक मीटर रीडिंग नहीं हो सकी थी। इसके बाद जब एकमुश्त भारी बिल आए, तो आर्थिक तंगी के चलते लाखों परिवार इन्हें चुकाने में असमर्थ रहे। अब सरकार की इस पहल का उद्देश्य इन्हीं परिवारों को कर्ज के चक्रव्यूह से बाहर निकालना है। ऐसे उठाएं योजना का लाभ उपभोक्ता मोर बिजली एप या नजदीकी बिजली वितरण केंद्र पर जाकर पंजीयन करा सकते हैं। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। गांव-गांव में विशेष शिविर लगाकर अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जाएगा। वितरण केंद्र के अधिकारियों से संपर्क करें बिल भुगतान के पश्चात पात्र उपभोक्ता एम-ऊर्जा योजना का लाभ लेने के लिए भी पात्र हो जाएंगे। बिजली कंपनी ने अपील की है कि किसी भी संशय की स्थिति में वितरण केंद्र के अधिकारियों से तुरंत संपर्क करें। 

गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन में सिर्फ दो महीने का समय, मेरठ से प्रयागराज का सफर होगा सरल, कुछ काम बाकी

प्रयागराज  प्रयागराज-मेरठ के बीच 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। रविवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार ने मेरठ में निरीक्षण के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक्सप्रेसवे को शीघ्र ही जनता के लिए खोल दिया जाएगा।  मेरठ पहुंचे सीईओ ने मंडलायुक्त भानुचंद्र गोस्वामी और डीएम डॉ. वीके सिंह के साथ गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण की प्रगति के साथ ही औद्योगिक गलियारा विस्तार और टोल प्लाजा की तकनीक के बारे में जानकारी ली।  साइड की दीवार का मामूली काम अधूरा उन्होंने खड़खड़ी टोल प्लाजा पर अशोक के पौधे भी लगाए। सीईओ ने बताया कि तीसरे चरण में केवल एक्सप्रेसवे की साइड की दीवार का मामूली काम अधूरा है। यह काम भी एक माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। मेरठ जिले में 22 किमी एक्सप्रेसवे अक्तूबर 2025 में ही पूरा हो गया था।    खड़खड़ी में टोल प्लाजा भी बनकर तैयार बिजौली के निकट खड़खड़ी में टोल प्लाजा भी बनकर तैयार है और इसका परीक्षण भी हो चुका है। छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे का विस्तार कर आठ लेन का किया जा सकेगा। मेरठ से बदायूं तक के प्रथम सेक्टर में 130 किलोमीटर की लंबाई में 129 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। एक्सप्रेसवे पर चार जगह लड़ाकू विमानों के लिए हवाई पट्टियां गंगा एक्सप्रेसवे पर केवल वाहन ही नहीं दौड़ेंगे, बल्कि आपातकाल की स्थिति में लड़ाकू विमानों को भी उतारा जा सकेगा। इस एक्सप्रेसवे पर चार स्थानों पर लड़ाकू विमानों के उतरने के लिए हवाई पट्टियां बनाई जा रही हैं। इनमें से शाहजहांपुर के जलालाबाद में 3.5 किलोमीटर लंबी पट्टी तैयार कर दी गई है।    एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार की सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाएगी। तीसरे चरण के अधूरे काम को तेजी से पूरा किया जा रहा है। सीईओ ने यूपीडा की परियोजना क्रियान्वयन इकाई के परियोजना निदेशक राकेश मोघा और गंगा एक्सप्रेसवे की संचालन एजेंसी आईआरबी के मुख्य प्रबंधक अनूप सिंह से एक्सप्रेसवे की प्रगति की जानकारी जानी। उन्होंने टोल पर बिना बैरियर के वाहनों के प्रवेश को लेकर अपनाई जा रही तकनीक को भी जाना। टोल पर बिना रुके गुजरेंगे वाहन गंगा एक्सप्रेसवे पर बिजौली के निकट खड़खड़ी में बनाए गए टोल प्लाजा पर वाहनों का प्रवेश बिना बैरियर के ही होगी। यह एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसके तहत वाहनों को टोल प्रवेश के लिए रुकना नहीं पड़ेगा। यह जानकारी आईआरबी के मुख्य महाप्रबंधक अनूप सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में निकास के दौरान भी इसी प्रकार टोल कट जाएगा। इस नई व्यवस्था से गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी लाइन नहीं लगेगी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार ने निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी हापुड़ और अन्य अधिकारियों के काफिले के साथ गंगा एक्सप्रेसवे का बदायूं तक निरीक्षण करने के लिए निकल गए। औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा मनोज कुमार ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे शीघ्र ही औद्योगिक गलियारा आकार लेता दिखेगा। इसके लिए काफी भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। विदेशी कंपनियां भी इस औद्योगिक गलियारे में अपनी यूनिट स्थापित करने के लिए आ रही हैं। आने वाले समय में यूपी उद्योग प्रदेश बन जाएगा। पूरा देश गंगा एक्सप्रेसवे किनारे बनने वाले औद्योगिक गलियारे की तरफ देखेगा। यह गलियारा प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।  

यूपी के इस जिले में जनगणना-2027 के लिए फील्ड ट्रेनरों का प्रशिक्षण शुरू, तैयारियां तेज

बाराबंकी  जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने जिले में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। नामित फील्ड ट्रेनरों को दो चरणों में प्रशिक्षण सागर इंस्टीट्यूट में दिया जाएगा। जनगणना से जुड़ी प्रक्रियाओं, प्रपत्रों के उपयोग और डिजिटल व्यवस्था की जानकारी मिलेगी। 110 फील्ड ट्रेनर नामित हो चुके हैं। ज्यादातर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) हैं। प्रस्तावित जनगणना-2027 को जिला प्रशासन से जारी कार्यक्रम में पहला चरण 16 मार्च से 18 मार्च तक और दूसरा चरण 23 मार्च से 25 मार्च 2026 तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। समय सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक निर्धारित है। नामित पर्यवेक्षकों व अन्य कार्मिकों को घर-घर जाकर सर्वेक्षण की प्रक्रिया, निर्धारित प्रपत्रों को सही तरीके से भरने, जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों के संकलन और रिपोर्टिंग की विधि पर विस्तार से मार्गदर्शन किया जाएगा। अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में नामित सभी कार्मिकों को समय से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित विभागों के किसी भी कर्मचारी की अनुपस्थिति न रहे। 16 मार्च से 18 तक फील्ड ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 19 मार्च से डीआरडीए में समस्त एसडीएम, बीएसए, डीपीआरओ, सूचना अधिकारी शामिल होंगे।  

MP में स्मार्ट मीटर से बिजली बिल में बढ़ोतरी, हर महीने लोड बढ़ने से आएगा तगड़ा झटका

भोपाल   प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही जोर का झटका लगेगा। केंद्र के इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2025 में बिजली बिल का लोड बढ़ाने के लिए स्मार्ट तरीका अपनाया गया है। इसके तहत उपभोक्ता ने यदि स्वीकृत लोड से तीन बार अधिक बिजली खर्च की तो अधिकतम खर्च होने वाली बिजली आधार पर ही लोड स्वतः अपडेट हो जाएगा। इस नए लोड को तय करने के लिए किसी कर्मचारी या आवेदन की जरूरत नहीं होगी। नए लग रहे स्मार्ट मीटर ही यह लोड अपडेट कर देगा। इससे हर माह उपभोक्ताओं की जेबें खाली होंगी। अभी घरेलू उपभोक्ता के टैरिफ में 150 यूनिट तक 129 रुपए का फिक्स्ड चार्ज तय है। इसके बाद प्रति 0.1 किलोवॉट (15 यूनिट) के बाद 28 रुपए तक फिक्स्ड चार्ज बढ़ेगा। संस्थाओं के 10 किलोवॉट स्वीकृत लोड तक अभी 161 रुपए प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज है। नए टैरिफ में इसे 15% तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। यानि बिना किसी सुनवाई, प्रस्ताव उपभोक्ता का बिजली बिल फिक्स्ड चार्ज हर साल चुपके से बढ़ा दिया जाएगा। नए नियम से घरेलू उपभोक्ताओं की जेब कैसे ढीली होंगी, समझें सवाल- मैं घरेलू उपभोक्ता हूं। मेरे घर में 1 किलोवॉट लोड का कनेक्शन है। मुझे कितना फिक्स्ड चार्ज देना होगा? जवाब- यदि आपने 51-150 यूनिट बिजली हर माह खर्च की तो 129 रु. प्रति कनेक्शन देने होंगे। सवाल- यदि मैंने स्वीकृत 1 किलोवॉट लोड कनेक्शन पर 151-300 यूनिट बिजली प्रति माह खर्च कर दी तो क्या होगा ? जवाब- आपको प्रति 0.1 किलोवॉट (15 यूनिट) भार पर 28 रुपए ज्यादा फिक्स्ड चार्ज देने होंगे। यानी, हर 300 यूनिट बिजली खर्च करने पर 280 रुपए देने होंगे। यह 280 रुपए बेस फिक्स्ड चार्ज 129 के अलावा जुड़ेंगे। यूं कहें आपको हर माह 409 रुपए फिक्स्ड चार्ज देना होगा। सवाल- यदि मैंने 1 किलोवॉट लोड का कनेक्शन लिया और गर्मी में मैंने 2 किलोवॉट बिजली खपत कर ली तब ? जवाब– यदि आपने साल में तीन साल में 2 किलोवॉट बिजली खपत की तो आपका स्वीकृत लोड ऑटोमैटिक दो किलोवॉट हो जाएगा। फिर इसी भार पर आपको फिक्स्ड चार्ज देना होगा। चाजे का ऐसा खेल किसी घरेलू बिजली उपभोक्ता का स्वीकृत लोड दो किलोवॉट है। वह यदि एक साल में तीन बार दो की बजाय 5 किलोवॉट लोड इस्तेमाल करता है तो साल के अंत में लोड ऑटोमैटिक रूप से 5 किलोवॉट हो जाएगा। यानी, जो उपभोक्ता दो किलोवॉट लोड पर प्रति 0.1 किलोवॉट 15 यूनिट 28 रुपए की दर से 72 रुपए देता है। 5 किलोवॉट होने पर उसे 280 रुपए देने होंगे। क्या है फिक्स्ड चार्ज फिक्स्ड चार्ज कनेक्शन के स्वीकृत लोड पर आधारित है। इसे बिजली कंपनी हर माह उपभोक्ताओं से वसूलती है। फिर चाहे वह बिजली का उपयोग करे या न करे। यह यदि स्वीकृत लोड 2 किलोवॉट व फिक्स्ड चार्ज 100 रुपए/किलोवॉट है। इसमें एक माह में एक यूनिट भी बिजली जलाई तो ₹200 फिक्स्ड चार्ज देना पड़ेगा। यानी, लोड बढ़ेगा तो फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ेगा। यह भी जाने मैरिज गार्डन, सामाजिक कार्यक्रमों के लिए अस्थायी कनेक्शन पर 1 किलोवॉट स्वीकृत लोड पर अभी 82 रुपए प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज है। बड़े संस्थानों में 10 किलोवॉट तक लोड पर 162 रुपए/किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज लगेगा। यानी, कुल फिक्स्ड चार्ज ₹1620 होगा। लोड 10 से 11 किलोवॉट होने पर 281 रुपए प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज। कुल 1620 के अलावा 281 रुपए/किलोवॉट बढ़ेगा। आयोग इनके अनुसार प्रावधान करेगा- सचिव केंद्रीय नियम तय प्रक्रियाओं से बनाए जाते हैं। पहले सुझाव आपत्ति ली जाती है। यहां नियामक आयोग इनके अनुसार प्रावधान करेगा।- उमाकांत पांडा, सचिव, एमपीइआरसी   

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