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हिनौती गौधाम में अव्यवस्थित निर्माण पर रोक, मास्टर प्लान के मुताबिक काम कराने के निर्देश: उपमुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के हिनौती गौधाम में आयोजित बैठक में कहा कि मास्टर प्लान के अनुसार ही सभी निर्माण कार्य कराये जांय। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि गौधाम में प्रस्तावित गौशेड, भूसा शेड सहित अन्य कार्य व्यवस्थित ढंग से लेआउट देकर प्रारंभ करायें। उन्होंने गौधाम के निर्माणाधीन गौशेड एवं गेस्ट हाउस का कार्य 30 मार्च तक पूर्ण कराकर लोकार्पण कराने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने विधायक मनगवां द्वारा प्रदत्त की गयी 3 करोड़ 60 लाख रूपये की राशि से गोपाल, सुरभि एवं नंदिनी गौशेड निर्माण कार्य की प्रगति जानकारी ली। उन्होंने सभी कार्य 30 मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिये। कामधेनु गौशेड के साथ भूसा शेड का कार्य भी नियत समय तक पूर्ण किये जाने का निर्देश दिया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने उनके स्वयं की विधायक निधि से स्वीकृत 3 करोड़ 60 लाख रूपये की राशि से मास्टर प्लान के अनुसार व्यवस्थित ढंग से निर्माण कार्य कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गौधाम से लगी किसानों की निजी भूमि में गौवंश न जाएँ यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गौशाला संचालन समिति में क्रियाशील सदस्यों को शामिल करने के भी निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि गौधाम से लगे नाले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गयी घोषणा के अनुसार शीघ्र कार्य प्रारंभ करायें। उन्होंने गौधाम में जल निगम एवं पीएचई द्वारा निर्मित की गयी जन भागीदारी से टंकी व नेटवर्क पाइप लाइन कार्य के लिए विभागीय अधिकारियों की प्रशंसा की। इस अवसर पर बताया गया कि सभी गौशेड में पानी का कनेक्शन कर दिया गया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौधाम के लिए शासकीय भूमि का शेष सीमांकन कराने के निर्देश बैठक में अधिकारियों को दिये। उन्होंने गौधाम के लिए सड़क निर्माण व अन्य प्रयोजन के लिए निजी भूमि दाताओं का द्वारा प्रदत्त भूमिदान के लिये सम्मान किया। उन्होंने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्यमार्ग से गौधाम तक प्रस्तावित सड़क निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ करायें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौपूजन कर गाय को गुड खिलाया। विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष मती नीता कोल, पूर्व विधायक  श्यामलाल द्विवेदी सहित विभागीय अधिकारी एवं स्थानीय जन उपस्थित रहे।    

सुरक्षाबलों का दबाव बढ़ा: मोहला-मानपुर में मुठभेड़ के बाद जंगल की ओर भागे नक्सली, हथियार बरामद

मोहला-मानपुर  जिले के सरहदी इलाके में रविवार को पुलिस और माओवादी के बीच मुठभेड़ हुई। औंधी थाना क्षेत्र के कोहकाटोला और आमपायली गांव के आसपास स्थित जंगल में सुरक्षा बलों ने माओवादी के ठिकाने को घेर लिया। सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान माओवादी जान बचाकर जंगल की ओर भाग निकले। बस्तर-महाराष्ट्र सीमा पर घेराबंदी पुलिस के अनुसार यह मुठभेड़ बस्तर और महाराष्ट्र की सीमा से लगे घने जंगलों में हुई। घटनास्थल पखांजूर क्षेत्र से भी लगा हुआ है। सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बाद माओवादी मौके से फरार हो गए। मुठभेड़ के बाद जवानों ने इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया है। इंसास रायफल और माओवादी सामग्री बरामद घटनास्थल से एक इंसास रायफल सहित माओवादी की उपयोगी सामग्री बरामद की गई है। राहत की बात यह है कि इस मुठभेड़ में कोई जवान हताहत नहीं हुआ और सभी सुरक्षित हैं। एसपी ने की सर्चिंग अभियान की पुष्टि मोहला-मानपुर पुलिस अधीक्षक वायपी सिंह ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि क्षेत्र में अभी भी सर्चिंग अभियान जारी है और आसपास के जंगलों में तलाशी ली जा रही है।  

होर्मुज में जहाजों की तैनाती पर अमेरिका की पहल, साउथ कोरिया ने दिया यह जवाब

सोल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहयोगी देशों पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए संयुक्त प्रयास का दबाव बना रहे हैं। जिन देशों का ट्रंप ने ट्रुथ पोस्ट में नाम लिया, उनमें से चीन और यूके साफतौर पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। इस बीच दक्षिण कोरिया की भी प्रतिक्रिया आई है जिसने समीक्षा की बात कह डाली है। रविवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा, “हम इस मामले पर अमेरिका के साथ मिलकर काम करेंगे और पूरी तरह से समीक्षा करने के बाद ही कोई फैसला लेंगे।” होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के व्यापार के सबसे अहम जलमार्गों में से एक है, ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग बंद ही पड़ा है। ऊर्जा की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। हालांकि शनिवार को ही खबर आई कि भारत के दो जहाज शिवालिक और नंदा देवी एलपीजी की बड़ी खेप लेकर स्ट्रेट को पार कर चुके हैं। शनिवार को ही ट्रंप ने सोशल पोस्ट में दुनिया की चिंताओं को ध्यान में रख दावा किया था कि जल्द ही ऊर्जा आपूर्ति को ध्यान में रख कदम उठाए जाएंगे। उम्मीद जताई कि देश (खास तौर पर चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम लेते हुए) “इस इलाके में वॉरशिप भेजेंगे” ताकि यह पक्का हो सके कि जहाज फिर से होर्मुज से गुजर सकें। अमेरिका के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा, “जो देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल हासिल करते हैं, उन्हें ही इस रास्ते की देखभाल करनी चाहिए, और हम उनकी बहुत ज्यादा मदद करेंगे!” लेकिन रविवार को ही इससे पहले, जापान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या टोक्यो होर्मुज में युद्धपोत भेजेगा। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नीति प्रमुख ताकायुकी कोबायाशी ने सार्वजनिक प्रसारक एनएचके पर कहा, “सुरक्षा के मिशन पर सावधानीपूर्वक फैसला लेना होगा।” कोबायाशी ने जापानी कानून का हवाला देते हुए इसे थोड़ा कठिन भी बताया है।

संस्कृति और परंपराओं का उल्लास आने वाली पीढ़ी को समझाएगा उनका महत्व : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को जितना उल्लास के साथ मनायेंगे आने वाली पीढ़ी उसके महत्व को समझेगी और वह भी इस परंपरा को आजीवन काल तक चिर स्थाई बनाकर रख सकेगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल रीवा में माँ कर्मा जयंती महोत्सव में शामिल हुए। राजकपूर आडिटोरियम में साहू युवा संगठन के संयोजकत्व में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने माँ कर्मा की विधि विधान से आरती की। उन्होंने कहा कि माँ कर्मा कृष्ण भक्त थीं और भगवान  कृष्ण उनकों साक्षात दर्शन देते थे और उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति करते थे। माँ कर्मा भक्ति की प्रतीक थी। माँ कर्मा जयंती का आयोजन महान आत्माओं को याद दिलाने का आयोजन है। इस आयोजन के लिए आयोजनकर्ता बधाई के पात्र हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मैं कल भी माँ कर्मा शोभा यात्रा का साक्षी बना था और आज इस आयोजन में भी उपस्थिति हुआ हूं। मैं सौभाग्यशाली हूं कि इन आयोजनों में शामिल हुआ। माँ कर्मा जयंती महोत्सव में विधायक सिंगरौली  रामनिवास शाह, पूर्व मंत्री  रविकरण साहू, करण साहू, नगर परिषद अध्यक्ष रामपुर नैकिन  रामकुमार साहू सहित समाज के अन्य गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर रायपुर छत्तीसगढ़ की भजन गायिका हीना सिंह ने शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में नगर निगम अध्यक्ष  व्यंकटेश पाण्डेय,  वंशीलाल साहू सहित बड़ी संख्या में साहू समाज के पदाधिकारी एवं आयोजक उपस्थित रहे।  

आर्थिक संकट गहराया: कमजोर टैक्स ढांचे के कारण IMF से 1 अरब डॉलर की किस्त पर पाकिस्तान की डील अटकी

नई दिल्ली  पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच एक अरब डॉलर की किस्त जारी करने को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर ठप पड़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी वजह मौजूदा बजट की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल और टैक्‍स कलेक्‍शन का कम होना है। कराची के अखबार ‘बिजनेस रिकॉर्डर’ के अनुसार, आईएमएफ ने एक बार फिर पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। आईएमएफ का कहना है क‍ि राजस्व लक्ष्य हासिल होना मुश्किल दिखाई देता है। लेख में कहा गया है, “यह चिंता जायज है। पाकिस्तान की कर व्यवस्था लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन करती रही है। देश का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात 9-10 प्रतिशत के आसपास ही अटका है, जो समान उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। कर दायरा सीमित है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और कर अनुपालन भी कमजोर है।” दशकों से हर आईएमएफ कार्यक्रम में पाकिस्तान से कर प्रशासन सुधारने, कर आधार बढ़ाने और राजस्व लक्ष्य बढ़ाने की मांग की जाती रही है, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद नतीजे सीमित ही रहे हैं। औपचारिक क्षेत्र अभी भी कर का अधिकांश बोझ उठाता है, जबकि संपत्ति के बड़े हिस्से, खासतौर पर खुदरा कारोबार, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर बहुत कम कर लगता है या वे पूरी तरह व्यवस्था से बाहर हैं। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था, जिसे अक्सर जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत माना जाता है, काफी हद तक कर प्रणाली की पकड़ से बाहर है। लेख के मुताबिक, पाकिस्तान की वित्तीय समस्या केवल इतनी नहीं है कि सरकार बहुत कम राजस्व जुटाती है। उतनी ही बड़ी समस्या यह भी है कि सार्वजनिक क्षेत्र में भारी वित्तीय घाटा जारी है और इस पर निर्णायक सुधार नहीं हो पाए हैं। इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण घाटे में चलने वाले सार्वजनिक उपक्रमों से होने वाला लगातार नुकसान है। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) और पाकिस्तान स्टील मिल्स जैसी संस्थाओं ने वर्षों में भारी घाटा जमा किया है। इनकी देनदारियों का बोझ राष्ट्रीय खजाने पर पड़ता है, जिसे सब्सिडी, गारंटी और कर्ज पुनर्गठन के माध्यम से वहन किया जाता है। ये संस्थान मुख्य रूप से इसलिए जीवित हैं क्योंकि सरकारें इनके पुनर्गठन या निजीकरण से जुड़े राजनीतिक जोखिमों का सामना करने से हिचकती हैं। फ‍िर भी इनके वित्तीय नुकसान हर साल सैकड़ों अरब रुपए तक पहुंच जाते हैं, जो चुपचाप सार्वजनिक संसाधनों को खत्म करते रहते हैं। लेख के अनुसार, अजीब बात यह है कि जहां आईएमएफ कार्यक्रम राजस्व लक्ष्यों पर बहुत जोर देते हैं, वहीं सार्वजनिक उपक्रमों में सुधार की तत्काल आवश्यकता उतनी मजबूत नहीं दिखाई देती। निजीकरण की योजनाएं धीमी गति से आगे बढ़ती हैं, पुनर्गठन की समय-सीमा बार-बार टलती है और घाटे में चल रही संस्थाओं को सरकारी वित्तीय सहायता मिलती रहती है। पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ा वित्तीय संकट मौजूद है। देश का सर्कुलर डेब्ट (बिजली व्यवस्था के भीतर बकाया भुगतान की जटिल श्रृंखला) कई लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। आईएमएफ अक्सर इस वित्तीय अंतर को कम करने के लिए बिजली दरें बढ़ाने पर जोर देता रहा है। लेकिन केवल दरें बढ़ाने से उस प्रणाली की समस्या हल नहीं होगी जो अक्षमता और कमजोर प्रशासन से ग्रस्त है। बिजली वितरण कंपनियों के गहरे पुनर्गठन और बेहतर प्रबंधन के बिना यह सर्कुलर डेब्ट फिर से बढ़ जाता है। लेख में यह भी कहा गया कि एक अन्य पहलू जिस पर लगातार पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, वह है गैर-उत्पादक या अत्यधिक सार्वजनिक खर्च। केंद्र और प्रांतीय बजटों में अब भी भारी प्रशासनिक खर्च, गलत तरीके से दी जा रही सब्सिडी और राजनीतिक कारणों से शुरू की गई विकास योजनाएं शामिल हैं, जिनका आर्थिक लाभ सीमित होता है। लेख के अनुसार, वित्तीय अनुशासन केवल अधिक राजस्व जुटाने से हासिल नहीं हो सकता। इसके लिए यह भी जरूरी है कि सार्वजनिक धन कैसे खर्च किया जा रहा है, इसकी गंभीर समीक्षा की जाए।

ग्वालियर अस्पताल में लिफ्ट बंद होने से परेशानी, 20 दिनों से मरीजों को सीढ़ियों के सहारे पहुंचाया जा रहा वार्ड तक

ग्वालियर ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में पिछले करीब 20 दिनों से कई लिफ्ट बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के कई ब्लॉकों में छह से अधिक लिफ्टें बंद हैं, जबकि सी ब्लॉक में मरीजों को केवल एक लिफ्ट के भरोसे रहना पड़ रहा है। ऐसे में दूसरी, तीसरी और छठी मंजिल पर भर्ती मरीजों को जांच के लिए नीचे लाने और फिर ऊपर ले जाने में काफी मुश्किल हो रही है। लिफ्ट बंद होने के कारण गंभीर और ऑपरेशन वाले मरीजों को सीढ़ियों के सहारे या स्ट्रेचर खींचकर ऊपर-नीचे ले जाना पड़ रहा है। इस दौरान मरीजों के परिजन भी काफी परेशान हो रहे हैं। कई बार मरीज दर्द से कराहते हुए सीढ़ियों पर ही रुकने को मजबूर हो जाते हैं। प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप अस्पताल की स्थिति को लेकर गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लिफ्टों की मरम्मत को लेकर डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। करोड़ों का बजट, फिर भी परेशानी अस्पताल के रखरखाव और सुविधाओं के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है, इसके बावजूद बार-बार तकनीकी खराबी और लिफ्ट बंद होने की समस्या सामने आ रही है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों ने जताई नाराजगी अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि लिफ्ट बंद होने के कारण उन्हें काफी दिक्कत हो रही है। पेट दर्द से पीड़ित सविता को परिजन सी ब्लॉक में लिफ्ट तक लेकर पहुंचे, लेकिन वहां लिफ्ट खराब मिली। गार्ड ने दूसरी लिफ्ट की जानकारी दी, जिसके लिए काफी देर इंतजार करना पड़ा। वहीं मरीज जय नारायण को उनके बेटे सीढ़ियों के सहारे नीचे लेकर आए। उनका कहना है कि लिफ्ट बंद होने से अस्पताल में इलाज के साथ-साथ आवागमन भी मुश्किल हो गया है। मरीजों ने प्रशासन से जल्द लिफ्ट ठीक कराने की मांग की है।

असम में किसकी बनेगी सरकार? चुनाव ऐलान के साथ ओपिनियन पोल ने खोले पत्ते

गुवाहाटी पांच राज्यों में चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही पहला ओपिनियन पोल भी आ चुका है। असम के लिए जो ओपिनियन पोल जारी हुआ है, उसमें भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर आ रहा है। मार्टिज-आईएनएस के ओपिनियन पोल में भाजपा को 96 से 98 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। वहीं, दूसरे नंबर पर कांग्रेस को दिखाया गया है। अनुमान के मुताबिक कांग्रेस को 26 से 28 सीटें मिल सकती हैं। किस पार्टी को कितनी सीटों का अनुमान चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही आए मार्टिज-आईएएनएस के ओपिनियन पोल में भाजपा को 96 से 98, कांग्रेस को 26 से 28, एआईयूडडीएफ को 1 से 5 और अन्य को 1 से 3 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। असम की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में नौ अप्रैल को वोट डाले जायेंगे और मतगणना चार मई को होगी और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिया जायेगा। चुनाव आयोग ने यहां रविवार को संवाददाता सम्मेलन में राज्य के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, अधिसूचना 16 मार्च 2026 को जारी होगी और इसी के साथ नामांकन दाखिल करने का कार्य शुरू हो जाएगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है और 24 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। नाम वापसी के लिए 26 मार्च तक का समय दिया गया है। आदर्श आचार संहिता लागू इसके साथ ही राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। कुल 126 सीटों में से 09 सीटें अनुसूचित जाति के लिए और 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य की वर्तमान विधानसभा का पांच वर्षीय कार्यकाल 21 मई 2021 को प्रारंभ हुआ था, जो आगामी 20 मई 2026 को समाप्त होने जा रहा है। राज्य में कुल 2,35,01,164 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें सामान्य मतदाताओं की संख्या 2,34,40,296 दर्ज की गई है, जबकि सर्विस वोटर्स की संख्या 60,868 है। चुनाव आयोग द्वारा 11 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, मतदान प्रक्रिया में 476 थर्ड जेंडर मतदाता भी अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कितने युवा मतदाता असम में इस बार 3,82,341 युवा मतदाता (18-19 वर्ष) पहली बार लोकतंत्र के इस पर्व में शामिल होकर अपना पहला वोट डालेंगे। इसके अतिरिक्त, राज्य में 1,59,335 दिव्यांग मतदाता और 85 वर्ष से अधिक आयु के 1,20,538 वरिष्ठ नागरिक पंजीकृत हैं। इन सभी वरिष्ठ मतदाताओं के लिए आयोग ने घर से मतदान करने हेतु वैकल्पिक डाक मतपत्र की विशेष सुविधा सुनिश्चित की है। मतदान की सुगमता के लिए बुनियादी ढांचे में विस्तार करते हुए आयोग ने असम में कुल 28,205 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। आयोग ने प्रत्येक केंद्र पर मतदाताओं की औसत संख्या लगभग 831 रखी है, ताकि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुविधाजनक तरीके से संपन्न हो सके।  

डॉक्टर सेवाभाव से मरीज का करें इलाज : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जी मीडिया समूह के कार्यक्रम में रीवा शहर के डॉक्टर्स का किया सम्मान

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि डॉक्टर को संवेदनशीलता के साथ मरीज का इलाज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धरती में डॉक्टर भगवान के सामान हैं डॉक्टर भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सेवाभाव से करें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने पत्रिका समूह द्वारा आयोजित चिकित्सकों के सम्मान समारोह में शहर के डॉक्टर्स का सम्मान किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि किसी मीडिया समूह द्वारा चिकित्सकों का रीवा में पहली बार इस तरह का सम्मान किया गया है। यह आयोजन सिद्ध करता है कि रीवा में डॉक्टर्स बेहतर कार्य कर रहे हैं। रीवा को मेडिकल हब बनाने का सपना सही दिशा में जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब जीवन संकट में आता है तो केवल डॉक्टर के पास ही लोग जाते हैं। मेहनत से किये गये कार्य की जब बड़े सामाजिक स्तर पर सराहना मिलती है तो उत्साह भी बढ़ता है। सांसद  जनार्दन मिश्र ने कहा कि विचारहीन समाज स्थाई नहीं होता किसी भी क्षेत्र में विचार के ऊपर व्यावसायिकता नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रिका समूह द्वारा डॉक्टर्स का किया गया सम्मान प्रशंसनीय है। उन्होंने आयोजन से कहा कि सकारात्मक कार्यो के लिए केवल प्रेरित ही नहीं किया जा रहा बल्कि सामने आकर कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने सम्मानित होने वाले डॉक्टर्स को शुभकामनाएं दी तथा उनके द्वारा कोरोनाकाल सहित अन्य समय में किये गये सेवाभाव की प्रशंसा भी की। नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय सहित चिकित्सक व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

अब जमीन के नीचे चलेगी भोपाल मेट्रो, 15 मीटर गहराई में TBM; पुराने शहर में सुरंग का काम शुरू

भोपाल राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना अब अपने सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक चरण में प्रवेश कर रही है। भोपाल मेट्रो की आरेंज लाइन के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस ट्विन टनल को बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का पहला पार्ट क्रेन के जरिए करीब 15 मीटर जमीन की गहराई में उतारा जा चुका है। तकनीकी इंस्टालेशन और जांच के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के पहले सप्ताह से जमीन के अंदर सुरंग बनाने के लिए जमीन की खोदाई का काम शुरू हो सकता है। पुल पातरा और सिंधी कालोनी में एक अंडरग्राउंड रैंप बनाया जाएगा, जिसके जरिए मेट्रो ट्रेन भूमिगत स्टेशन तक पहुंचेगी। दिसंबर में बेंगलुरु से आई थी टीबीएम मशीन यह टीबीएम मशीन दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल पहुंची थी। टीबीएम के कुल तीन से चार बड़े हिस्से हैं, जिन्हें एक-एक कर जमीन के नीचे उतारा जाएगा। पूरी तरह असेंबल होने के बाद यह मशीन 19 से 20 मीटर की गहराई पर जाकर सुरंग के लिए जमीन की खोदाई करेगी। यह टनल भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे शहर के सबसे घने और व्यस्त इलाकों के नीचे से गुजरेगी। हालांकि मेट्रो प्रबंधन का दावा है कि टीबीएम से खोदाई के दौरान किसी भी प्रकार का कंपन नहीं होगा और ऊपर रहने वाले लोगों को इसका आभास भी नहीं होगा। पुरानी इमारतों की सुरक्षा और विरासत की चुनौती सुरक्षा के लिहाज से प्रबंधन उन पुरानी इमारतों और होटलों को लेकर सतर्क है जो पुल पातरा से सिंधी कालोनी के बीच स्थित हैं। इनमें से कई इमारतें काफी जर्जर और पुरानी हैं। इस भूमिगत तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शहर के व्यस्ततम रास्तों के नीचे काम चलने के बावजूद ऊपर का ट्रैफिक और ऐतिहासिक विरासतें पूरी तरह अप्रभावित रहेंगी। यह पूरा प्रोजेक्ट पैकेज बीएच-04 के तहत संचालित किया जा रहा है। एक नजर में भूमिगत कॉरिडोर (ऑरेंज लाइन)     क्षेत्र: भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक     टनल की लंबाई: लगभग 3.39 किलोमीटर     संरचना: 02 समानांतर सुरंगें     गहराई: 20 मीटर की गहराई में सुरंग बनाएगी मशीन मशीन की तकनीकी क्षमता     नाम: टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम)     आगमन: दिसंबर 2025 (बेंगलुरु से भोपाल लाई गई)     व्यास: 5.8 मीटर     क्षमता: एक मशीन की प्रतिदिन 15 मीटर खोदाई की क्षमता     स्थिति: 15 मीटर गहराई पर उतारा गया मशीन का पहला पार्ट  

सरफराज अहमद का इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा, बाबर आजम का नाम लेकर कही बड़ी बात

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सरफराज अहमद ने रविवार को इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटारयरमेंट का ऐलान कर दिया। 38 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज सरफराज ने पाकिस्तान की ओर से 200 से ज्यादा इंटरनेशनल मुकाबले खेले। उन्होंने 54 टेस्ट, 117 वनडे और 61 टी20 इंटरनेसनल मैच खेले और तीनों फॉर्मेट में 6164 रन बनाए। उन्होंने छह शतक और 35 अर्धशतक लगाए। उन्होंने विकेट के पीछे 315 कैच पकड़े जबकि 56 स्टंप आउट किए। कराजी में जन्मे सरफराज ने 2010 में डेब्यू किया था और 2023 में पाकिस्तान के लिए आखिरी मैच खेला। ऐसा करने वाले इकलौते पाकिस्तानी सरफराज ने सभी फॉर्मेट (50 वनडे, 37 T20, 13 टेस्ट) में 100 मैचों में पाकिस्तान की कप्तानी की और टीम को टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नंबर-1 रैंकिंग तक पहुंचाया। उनकी कप्तानी के दौरान पाकिस्तान ने लगातार 11 टी20 सीरीज जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। सरफराज के व्यक्तिगत रिकॉर्ड की बात करें तो वह एक टेस्ट मैच में 10 कैच लेने वाले इकलौते पाकिस्तानी हैं। उन्होंने जोहान्सबर्ग 2019 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ऐसा किया। वह लॉर्ड्स में वनडे शतक बनाने वाले पाकिस्तान के एकमात्र विकेटकीपर हैं। उन्होंने 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ यह कारनामा किया था। भारतीय टीम को दिया था एक बड़ा दर्द सरफराज की कप्तानी में पाकिस्तान ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में खिताबी सूखा समाप्त किया था। सरफराज की अगुवाई वाली पाकिस्तान टीम ने साल 2017 में भारत को एक बड़ा दर्द दिया था। पाकिस्तान ने चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारतीय टीम के खिलाफ 180 रनों से विशाल जीत दर्ज की थी। उस वक्त विराट कोहली भारत के कप्तान थे। पाकिस्तान ने द ओवल में खेले गए फाइनल में 4 विकेट के नुकसान पर 338 रन बनाए थे। जवाब में भारत की पारी सिर्फ 158 रनों पर सिमट गई थी। ‘कप्तानी में ऐसा करना गर्व की बात’ सरफराज ने संन्यास के बाद कहा, ”पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। 2006 में अंडर-19 टीम को वर्ल्ड टाइटल जिताने से लेकर 2017 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतने तक हर पल खास रहा। मैं अपने टीममेट्स, कोच, परिवार और फैंस का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने करियर में हमेशा मुझे सपोर्ट किया। सभी फॉर्मेट में पाकिस्तान की कप्तानी करना एक सपने के सच होने जैसा था। मैंने हमेशा बिना डरे क्रिकेट खेलने और एकजुट टीम बनाने की कोशिश की। अपनी कप्तानी के दौरान बाबर आजम, शाहीन अफरीदी, हसन अली और अन्य खिलाड़ियों को मैच-विनर बनते देखना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को इतने सालों तक मुझपर भरोसा करने के लिए शुक्रिया कहना चाहता हूं। पाकिस्तान क्रिकेट हमेशा मेरे दिल के बहुत करीब रहा और मैं हर मुमकिन तरीके से इस खेल को सपोर्ट करता रहूंगा।”

विदेशों में निवेश की तलाश: सिंगापुर और लंदन में रोड शो, MP को सौर ऊर्जा हब बनाने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश ने 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत के 50 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति सौर ऊर्जा से करने की कार्य योजना बनाई है। इसके लिए प्रदेश में कई परियोजनाओं पर काम भी चल रहा है। इसे और गति देने के लिए निवेश बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में इस साल दिल्ली, मुंबई, सिंगापुर और लंदन में रोड शो आयोजित कर मुरैना-2 सौर सहित ऊर्जा भंडारण परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। मुरैना-2 परियोजना में छह माह बिजली उत्तर प्रदेश और छह माह मध्य प्रदेश को मिलेगी। वैश्विक स्तर पर निवेशकों को लुभाने की तैयारी रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सौर ऊर्जा से जुड़े उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बैठक कर प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराएंगे। बता दें कि 24 और 25 फरवरी 2025 को भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इससे 1.4 लाख रोजगार सृजन संभावित हैं। मध्य प्रदेश अपनी आवश्यकता की 50 फीसदी विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा से करेगा। वर्ष 2030 तक लगभग 40 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। इसमें से आधी यानी 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार कार्ययोजना बनाकर काम कर रही है। प्रदेश में अभी 26 हजार मेगावाट बिजली की खपत है, जिसमें सात हजार मेगावाट बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा से हो रही है। मुरैना और अन्य जिलों में प्रस्तावित बड़ी परियोजनाएं आठ हजार मेगावाट की दो सौर ऊर्जा की परियोजनाएं मुरैना में स्थापित की जाएंगी। वहीं साढ़े सात हजार मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं छह जिलों (आगर, धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर) में प्रस्तावित की गई हैं। 15 हजार हेक्टेयर भूमि भी चिन्हित कर ली गई है। गांधीनगर में चौथी ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर समिट में अवाडा ग्रुप ने पांच हजार करोड़ और रिन्यू पावर ने छह हजार करोड़ रुपये निवेश करने की रुचि दिखाई। इसके अलावा जल संसाधन विभाग भी 100 मेगावाट की परियोजना पर काम कर रहा है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की विशेष उपलब्धियां सांची मप्र की पहली सोलर-सिटी है। देश के सौर ऊर्जा उत्पादन में मध्य प्रदेश 8.2 प्रतिशत के योगदान के साथ चौथे स्थान पर है। ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट है। रीवा स्थित दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट सोलर प्लांट (750 मेगावाट) दिल्ली मेट्रो को बिजली प्रदान करता है। नीमच जिले में भारत की सबसे बड़ी पंप स्टोरेज परियोजना 7,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को एकीकृत करती है। पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन नर्मदापुरम के मोहासा बाबई में 884 एकड़ में विकसित किया जा रहा है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा ने घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले में घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि नियमित घरेलू गैस सिलेण्डर आपूर्ति की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कराई जाय। बुकिंग के आधार पर गैस लेने वाले उपभोक्ताओं को सुगमता से गैस सिलेण्डर मिले। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने केन्द्रीय व प्रदेश स्तर के अधिकारियों से फोन से रीवा जिले में नियमित गैस सिलेण्डर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि इस बात के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं कि जिले में नियमित गैस सिलेण्डर की आपूर्ति होती रहे और बुकिंग का बैकलाग समाप्त हो जाय और लोगों को बिना किसी परेशानी के गैस सिलेण्डर मिलता रहे। कलेक्टर मती प्रतिभा पाल ने बताया कि सर्वर के ठीक ढंग से कार्य करने से गैस की आनलाइन बुकिंग हो रही है। रीवा शहर में गैस की उपलब्धता के अनुसार वितरण किया जा रहा है। नियमित आपूर्ति के सभी प्रयास जारी हैं, जिससे बैकलाग को पूरा करते हुए लोगों को सुगमता से गैस सिलेण्डर का वितरण हो सके। बैठक में गैस एजेंसी संचालकों ने गैस वितरण में प्रशासन द्वारा दिये गये सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि गैस वितरण की सुगम व्यवस्था के लिए एजेंसियों द्वारा कार्य किया जा रहा है। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, अपर कलेक्टर मती सपना त्रिपाठी, जिला आपूर्ति नियंत्रक  कमलेश ताण्डेकर सहित गैस एजेंसी के संचालक उपस्थित रहे।  

कुत्ते की तलाश में 8 दिन की छुट्टी! MP में भेल कर्मचारी के अनोखे कदम से अफसर भी हैरान

भोपाल राजधानी के अवधपुरी क्षेत्र की एक कवर्ड कॉलोनी में इन दिनों एक ”आवारा कुत्ते” चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां कालोनी से श्वानों को बाहर निकालने का फैसला ”भेल” के जिम्मेदार कर्मचारियों पर इतना भारी पड़ा कि उन्हें अपनी होली और रंगपंचमी सड़कों पर खाक छानते हुए बितानी पड़ी। मामले में मेनका गांधी की सक्रियता और प्रशासन के कड़े रुख ने कॉलोनी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी। पदाधिकारी जिन सरकारी और निजी संस्थानों में ऊंचे पदों पर कार्यरत थे, वहां भी शिकायतें पहुंचने लगीं। दबाव इतना बढ़ा कि इन जिम्मेदार पदाधिकारियों को अपने दफ्तरों से छुट्टी लेनी पड़ी। मेनका गांधी और पीएमओ तक पहुंची शिकायत दरअसल, भोपाल स्थित नवरत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिक लिमिटेड (भेल) के कर्मचारी आठ दिनों तक एक कुत्ते को खोजते रहे। हुआ यह कि ये कर्मचारी अवधपुरी क्षेत्र की जिस सोसाइटी में रहते हैं, वहां एक कुत्ता प्रेमी महिला एक आवारा कुतिया को रोज खाना खिलाती थी। कालोनी में घूमने वाले आवारा कुत्तों को हटाने के क्रम में रहवासियों ने उसे भी भगा दिया। इससे दुखी होकर उस महिला ने भेल प्रबंधन, पुलिस आयुक्त, नगर आयुक्त, प्रधानमंत्री कार्यालय और पेटा जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तक रहवासी कालोनी की सोसायटी के पदाधिकारियों की शिकायत कर दी। साथ ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी कुत्ते के गायब होने को लेकर पत्र लिख दिया। छुट्टियों में कुत्ते पकड़ने का अनूठा ‘ऑपरेशन’ वहीं, भेल के जो कर्मचारी हैं, वे सोसायटी के पदाधिकारी थे। मामला बढ़ता देख भेल प्रबंधन ने भी कर्मचारियों को कुत्ते को खोजकर देने को कहा। ऐसे में भेल के कर्मचारी सहित सोसायटी के सभी पदाधिकारी अपनी होली और रंगपंचमी सहित आठ दिन तक खेतों में कुत्ते को पकड़ने के लिए उसके पीछे-पीछे घूमते रहे। कुत्ते की तलाश का ”आपरेशन” कुछ यूं चला – पदाधिकारियों ने शहर की गली-गली में कुत्ते को ढूंढा। सातवें दिन वह एक सुदूर इलाके में खेतों में मिली, लेकिन हाथ नहीं आई। कुत्ते को पकड़ने के लिए पदाधिकारी अगले दो दिनों तक बिस्कुट, ब्रेड और मछली-मुर्गे का मांस लेकर उसके पीछे घूमते रहे, ताकि उसे लालच देकर काबू किया जा सके। ‘नॉन-वेज’ डिप्लोमेसी से मिली कामयाबी जहां पूरा शहर होली, भाईदूज और रंगपंचमी के जश्न में डूबा था, वहीं ये पदाधिकारी कुत्ते पकड़ने वालों की भूमिका निभा रहे थे। आखिरकार भारी मशक्कत और ”नान-वेज” डिप्लोमेसी के बाद आठवें दिन कुत्ते को सुरक्षित पकड़कर वापस कालोनी लाया गया। तब जाकर महिला डाक्टर का गुस्सा शांत हुआ और प्रशासन ने अपनी फाइलें बंद कीं। कालोनी के लोग अब दबी जुबान में कह रहे हैं कि श्वानों को कालोनी से बाहर निकालना तो आसान था, लेकिन कानून और रसूख के शिकंजे से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया था।

बहाल होते ही आईएएस अभिषेक प्रकाश की बड़ी वापसी, यूपी सरकार ने इस पद पर किया तैनात

लखनऊ रिश्वत मामले में सस्पेंड किए गए आईएएस अभिषेक प्रकाश की प्रशासनिक सेवा में एक बार फिर वापसी हो गई है। एक साल पहले निलंबित किए गए आईएएस अभिषेक को यूपी सरकार ने नई जिम्मेदारी सौंपी है। आईएएस अभिषेक को सचिव सामान्य प्रशासन में तैनाती मिली है। इसको लेकर शासन की ओर से आदेश भी जारी कर दिया है। आईएएस के निलंबन खत्म होने के बाद सेवा में उनकी वापसी एक अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि अभी उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया है। इसको लेकर लोगों की निगाहें टिकी हैं। एक साल पहले मार्च में सस्पेंड किए गए आईएएस अभिषेक प्रकाश के 15 मार्च को यूपी सरकार ने बहाली के आदेश जारी कर दिए हैं। नियुक्ति अनुभाग-5 द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि आईएएस अभिषेक प्रकाश की निलंबन अवधि 14 मार्च तक मानी जाएगी। इसके बाद 15 मार्च से उन्हें सेवा में बहाल करने का निर्णय लिया गया है। शासन ने यह आदेश राज्यपाल की अनुमति से जारी किया था। साथ ही आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बहाली के बावजूद उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई यथावत जारी रहेगी। सस्पेंड होने से पहले सीईओ के पद पर तैनात थे आईएस अभिषेक अभिषेक प्रकाश इससे पहले इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर तैनात थे। उन पर एक सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में प्रदेश सरकार ने 20 मार्च 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि, बाद में मामले की सुनवाई के दौरान पिछली फरवरी में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने साक्ष्यों के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया था। इसके बाद से उनके निलंबन की समीक्षा की जा रही थी। लागत का पांच प्रतिशत घूस मांगने लगा था आरोप इंवेस्ट यूपी के सीईओ रहने के दौरान सोलर एनर्जी प्रदेश में संयंत्र लगाने के एवज में कुल लागत का पांच प्रतिशत घूस मांगने का भी आरोप लगा था। सोलर कंपनी ने इन्वेस्ट यूपी के कार्यालय के साथ ऑनलाइन प्रार्थना पत्र भेजा था। कंपनी के प्रस्ताव को एम्पावर्ड कमेटी और कैबिनेट से तुरंत मंजूर कराने के एवज में घूस देने की मांग की गई थी। कंपनी के लोगों ने मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत की थी। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा जांच के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। अभिषेक प्रकाश को डिफेंस कॉरिडोर भूमि घोटाले के आरोप में पहले ही चार्जशीट मिली थी। घूसखोरी के आरोप पर दी गई चार्जशीट पर लगे आरोपों के आधार पर बिंदुवार स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। बताया जा रहा है कि चार्जशीट पर सोलर एनर्जी कंपनी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का जिक्र किया गया था।  

326 सफाईकर्मी ड्यूटी पर, बावजूद इसके भोपाल के कई बाजारों में साफ-सफाई नदारद

भोपाल स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की तैयारियों को लेकर नगर निगम भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। शहर के कई हिस्सों में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। पुराने शहर के व्यापारिक केंद्रों में सफाई व्यवस्था के हाल बेहाल हैं। जहांगीराबाद चौराहा, जो शहर का एक प्रमुख व्यस्त केंद्र है, वहां देर रात तक सड़कों का कचरा नहीं उठने से सुबह सड़कों के किनारे कचरा पसरा रहता है। यही स्थिति अशोका गार्डन क्षेत्र के परिक्रमा मार्ग की है। रात में यहां सफाई टीम के न पहुंचने के कारण कचरे का अंबार लग जाता है, जिससे यहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कागजों पर तैनात फौज, धरातल पर कर्मचारी गायब इसकी वजह यह है कि निगम के रिकॉर्ड में शहर के 85 वार्डों की सड़कों और बाजारों को चमकाने के लिए 326 सफाईकर्मियों की फौज तैनात है, लेकिन धरातल पर इनमें से बमुश्किल 50 कर्मचारी ही काम करते नजर आते हैं। नतीजा यह है कि सुबह होते ही पुराने शहर के प्रमुख बाजारों और मुख्य सड़कों पर कचरे के ढेर स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाते मिलते हैं। अशोका गार्डन के परिक्रमा मार्ग के आसपास रात 11:57 बजे फल, सब्जी सहित अन्य सामान के हाथ ठेले लग जाते हैं, जो सड़क किनारे ही कचरा फैलाते रहते हैं। ऐसे में सड़क किनारे कचरे का ढेर लग जाता है। वहीं, रात में सफाई के लिए तैनात अमले की अनुपस्थिति के कारण सड़क के दोनों ओर कचरा फैला रहता है। इससे रहवासी क्षेत्रों की सफाई भी प्रभावित हो रही है। जहांगीराबाद चौराहा: मुख्य मार्ग पर कचरे का अंबार पुराने शहर का हृदय कहे जाने वाले जहांगीराबाद चौराहा पर रात 12:38 बजे रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था का बुरा हाल मिला। चौराहे के पास ही मुख्य मार्ग किनारे कचरा फैला हुआ था। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि रात दुकानों का कचरा लेने के लिए गाड़ी तो आती है, लेकिन सड़कों की सफाई के लिए कर्मचारी नहीं आते। आलम यह है कि सुबह व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने से पहले ही मुख्य सड़क और चौराहे के किनारों पर कचरे का अंबार लग जाता है। स्वच्छ सर्वेक्षण के दावों के बीच यह व्यस्ततम इलाका नगर निगम की मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था में शहर की मुख्य सड़कों और बाजार क्षेत्रों की सफाई कराई जाती है। रोजाना करीब 25 से 30 टन कचरा रात में उठाया जाता है और कर्मचारियों की मॉनिटरिंग जीपीएस युक्त फोटो के जरिए की जा रही है। सुपरवाइजर द्वारा निगरानी की जाती है। बाजार क्षेत्र में रात में जहां सफाई नहीं हो पाती है, वहां सुबह जल्दी सफाई करा दी जाती है। – नितेश मिश्रा, एचओ, रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था  

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