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रौंगटे खड़े कर देने वाला मामला आया सामने- लव मैरिज की जिद पर शिवानी की हत्या, रातोंरात पिता ने जला दी लाश

बागपत  समाज में ‘इज़्ज़त’ के नाम पर हो रहे अपराधों की काली सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। लव मैरिज की ज़िद कर रही शिवानी नाम की युवती को उसके अपने ही पिता ने मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद परिवार ने रातोंरात शव को जला डाला और अस्थियां यमुना नदी में प्रवाहित कर दीं, ताकि कोई सुराग न बचे। रौंगटे खड़े कर देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले का है। जहां 21 वर्षीय शिवानी, जो अपने पड़ोसी अंकित से प्रेम करती थी और उससे शादी की ज़िद पर अड़ी थी, अपने ही परिवार की क्रूरता का शिकार हो गई। प्यार को ‘इज़्ज़त’ पर खतरा मान बैठे उसके अपनों ने मिलकर वो किया जिसे सुनकर दिल कांप उठे। गला दबाकर हत्या की, शव के पास घंटों बैठे रहे, फिर रातों-रात लाश को यमुना किनारे जलाकर अस्थियों को बहा दिया—ताकि दुनिया को खबर तक न हो। घटना की पूरी कहानी: शिवानी और अंकित पिछले डेढ़ साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे। लेकिन जब यह बात परिवार को पता चली, तो उन्होंने शिवानी को घर में बंद कर दिया। अंकित के अनुसार, लड़की के घरवालों ने उसे समझाने की जगह मारपीट शुरू कर दी, लेकिन शिवानी अपने फैसले पर अडिग रही। प्रेमी की सतर्कता से खुला राज बुधवार सुबह जब अंकित ने शिवानी का फोन बंद पाया और उसे अनहोनी की आशंका हुई, तो उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जैसे ही जांच शुरू हुई, परत-दर-परत परिवार का काला सच सामने आता गया। पुलिस ने शिवानी के माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि भाई और फुफेरी बहन फरार हैं। पुलिस का बयान: पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यह मामला ऑनर किलिंग का है। फरार आरोपी रवि और बहन की तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं। शव और अस्थियों को नष्ट करने का उद्देश्य सबूत मिटाना था।

उत्तर प्रदेश में अब लोमड़ी और सियार के हमले में मौत पर मिलेगा ₹4 लाख रुपए का मुआवजा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने लोमड़ी और सियार के हमले से होने वाली मृत्यु को राज्य आपदा घोषित कर दिया है। इसके बाद पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। हालांकि मधुमक्खियों के हमले और इमारत गिरने से होने वाली जनहानि को अभी इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। यह निर्णय मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित राज्य कार्यकारी समिति की संस्तुति के बाद लिया गया है। अब राज्य आपदा की श्रेणी में कुल 11 वन्यजीव शामिल हो गए हैं। पोस्टमार्टम में हमले से मृत्यु की पुष्टि होने पर ही मुआवजा दिया जाएगा। राज्य सरकार ने लोमड़ी और सियार के हमले से होने वाली मृत्यु को राज्य आपदा घोषित कर दिया है। अब इनके काटने से होने वाली मृत्यु पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। मधुमक्खियों व इमारत गिरने से होने वाली जनहानि को फिलहाल राज्य आपदा की श्रेणी में नहीं रखा गया है। शासन ने सुझाव दिया है कि पहले वन विभाग से यह जान लिया जाए कि मधुमक्खियां वन्य जीव में आती हैं या नहीं। अगर वन्य जीव में आती हैं को उनके हमलों को भी राज्य आपदा घोषित किए जाने पर विचार किया जाएगा। राज्‍य आपदा में कुल 11 वन्‍यजीवों के हमले शामिल मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित राज्य कार्यकारी समिति ने पिछले माह लोमड़ी, सियार और मधुमक्खी के हमले से होने वाली मौत को राज्य आपदा में शामिल करने की संस्तुति की थी। शासन ने लोमड़ी और सियार के हमले को राज्य आपदा के रूप में अधिसूचित कर दिया है। इसके साथ ही अब राज्य आपदा की इस श्रेणी में कुल 11 वन्यजीव शामिल कर लिए गए हैं। मधुमक्खी हमले का प्रस्ताव सरकार ने मधुमक्खी के हमले से होने वाली मौतों को भी राज्य आपदा में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है. यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो मधुमक्खी हमले से मरने वाले परिवारों को भी मुआवजा का लाभ मिल सकेगा. यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते वन्यजीव और कीटों के हमलों से निपटने की दिशा में उठाया गया है. उद्देश्य और प्रभाव इस फैसले का उद्देश्य वन्यजीवों के हमले से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना और राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रही है. उन्होंने अधिकारियों को मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के निर्देश दिए हैं. इन जानवरों के हमले में मरने पर मिलता है मुआवजा अभी तक यूपी में मगरमच्छ, हाथी, गैंडा, बाघ, शेर, तेंदुआ, भेड़िया, लकड़बग्घा और जंगली सुअर के हमले से जान जाने पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। इन सभी जानवरों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की श्रेणी-1 में रखा गया है। वहीं, श्रेणी-2 में लोमड़ी और सियार को रखा गया है।

सीएम योगी ने दिया आदेश- अब कोई भी ट्रांसफर अग्रिम आदेश तक प्रभावी नहीं होगा

लखनऊ  यूपी में तबादलों को लेकर विवादों के बाद सीएम योगी ऐक्शन में आ गए हैं। बेसिक और स्वास्थ्य विभाग में तबादला सत्र शून्य किए जाने के बाद अब स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में स्थानांतरणों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सीएम योगी ने आदेश दिया है कि अब कोई भी ट्रांसफर अग्रिम आदेश तक प्रभावी नहीं होगा। योगी के निर्देश पर स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के प्रमुख सचिव ने तत्काल आदेश जारी करते हुए सभी तबादलों को स्थगित करने की सूचना दी है। इससे निबंधक और उप निबंधक पदों पर हो रहे तबादलों पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही पूरे मामले में जांच के निर्देश दिए गए हैं। उधर, मंत्री स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन रविन्द्र जयसवाल ने कहा कि तबादलो में अधिकारियों ने लापरवाही बरती। मेरिट का पालन नहीं हुआ। जब हमारे पास लिस्ट आई तो हमें गड़बड़ी मिली। हमने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात कर उनके सामने पूरी बात रखी तो उन्होंने यह तबाद्ले निरस्त कर दिए। अब इसकी जांच होगी और दोषियों पर कड़ी कार वाई होगी। आयुक्त स्तर पर भी लापरवाही हुई है। आपको बता दें कि यूपी में तबादले को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विवाद के बाद बेसिक और स्वास्थ्य विभाग में तबादला सत्र शून्य होने के बाद स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में भी शिकायत की मिली। मामला सीएम योगी तक पहुंचा तो वह तुरंत ऐक्शन में आ गए। तत्काल संज्ञान लेते हुए स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में हुए तबादलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। इसके साथ ट्रांसफर मामले की जांच बैठा दी। दरअसल, महानिरीक्षक निबंधन ने 13 जून को तीन अलग-अलग पत्रों के माध्यम से 58 उपनिबंधकों, एक अन्य उपनिबंधक तथा 29 नव-प्रोन्नत उपनिबंधकों के तबादले व तैनाती आदेश दिया था। इसके अलावा एक दिन बाद 14 जून को जारी एक अन्य आदेश के तहत 114 कनिष्ठ सहायक (लिपिक) का भी तबादला किया गया। इन तबादलों में अनियमितता की बात कही गई। अब सभी तबादला आदेशों को अग्रिम आदेशों तक के लिए स्थगित कर दिए गए। इससे पहले बेसिक शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में भी तबादलों को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद दोनों विभाग में तबादला सत्र को शून्य कर दिया गया है।  

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे कल से होगा शुरू, 91 KM लंबे लिंक रोड से पूर्वांचल को मिलेगी रफ्तार

 गोरखपुर  पूर्वांचल को रफ्तार की सौगात मिलने जा रही है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे खुलने को तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल 20 जून को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद चालू हो जाएगा। प्रवेश नियंत्रित मार्ग होने के कारण गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की कुल 91.35 किमी की दूरी एक घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकती है। यही नहीं, इस लिंक एक्सप्रेसवे से होकर, आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होते हुए लोगों को गोरखपुर से लखनऊ पहुंचने में महज साढ़े तीन घंटे का समय लगेगा। इसके साथ लखनऊ के बाद भी आगरा, यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए पूर्वांचल से दिल्ली तक सफर आसान होगा। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने के साथ ही रफ्तारपूर्ण यातायात सुगमता, उद्योग और इसके जरिये रोजगार को लेकर सरकार ने जो पूर्वानुमान लगाए थे, वे साकार भी होने लगे हैं। लिंक एक्सप्रेसवे की बेहतरीन कनेक्टिविटी से पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास का नक्शा और सुनहरा होना तय माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के अनुसार, गोरखपुर, संतकबीरनगर, अंबेडकरनगर और आजमगढ़ जिले में पड़ने वाले एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 7283 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत आई है। इसमें भूमि अधिग्रहण की लागत भी शामिल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से एक गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे गोरखपुर बाईपास एनएच- 27 ग्राम जैतपुर के पास से प्रारंभ होकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आजमगढ़ के सालारपुर में समाप्त हो रहा है। इस एक्सप्रेसवे से गोरखपुर क्षेत्र, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से लखनऊ, आगरा एवं दिल्ली तक त्वरित एवं सुगम यातायात कॉरिडोर से जुड़ रहा है। राज्य सरकार का रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ करने पर सतत जोर है। गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख केंद्र है और चारों तरफ फोरलेन सड़कों की कनेक्टिविटी से यह विकास के नए मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है। विकास की इस प्रक्रिया में नवनिर्मित गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 91 किमी से अधिक लंबाई वाला यह एक्सप्रेसवे आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़कर राजधानी लखनऊ और फिर वहां से अन्य प्रमुख महानगरों की राह सुगम करेगा। यातायात सुगमता का सकारात्मक असर व्यापार और उद्योग पर भी पड़ेगा। खुल गया गोरखपुर एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश को सड़क मार्ग के जरिए रफ्तार देने की दिशा में एक कदम और बढ़ चुका है। जी हां, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की राइडिंग क्वालिटी और राइडिंग कंफर्ट का टेस्ट होते ही वाहनों के लिए 20 जून को खोल दिया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ा सकेंगे। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPIEDA) ने गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में वाइब्रेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ईटीएच यूनिवर्सिटी ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड और इसी यूनिवर्सिटी की स्वतंत्र कंपनी (स्पिन ऑफ कंपनी) आरटीडीटी लैबोरेटरी एजी की तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया है। इस तकनीकि का किया गया इस्तेमाल इसके अंतर्गत वाइब्रेशन टेक्नोलॉजी एंड एक्सीलरोमीटर बेस्ड 7 सेंसर (4 राइडिंग क्वालिटी और 3 राइडिंग मोशन के लिए), एस मोशन सेंसर, मिजरमेंट और डाटा कलेक्शन के आवश्यक उपकरण इनोवा वाहन में स्थापित किए गए। यूपीडा ने इस तकनीक से प्रदेश के सभी एक्सप्रेसवे के प्रत्येक लेन की राइडिंग क्वालिटी और राइडिंग कंफर्ट सुनिश्चित करने के लिए संपूर्ण जांच तथा सुधारात्मक उपाय करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद फोर लेन की जांच पूर्ण की जा चुकी है और प्राप्त मूल्यांकित आंकड़ों और परिणाम के आधार पर राइडिंग क्वालिटी एवं राइडिंग कंफर्ट में सुधार कर इसे विश्व स्तरीय बना लिया गया है। एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस एक्सप्रेसवे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (Advanced Traffic Management System एटीएमएस) से लैस किया गया है। इससे पहले, यूपीडा द्वारा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (Bundelkhnad Expressway) को भी आईटीएमएस युक्त करने की प्रक्रिया को लेकर भी कार्य शुरू किया गया था जो कि निरंतर प्रगति पर है। गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण से आर्थिक विकास के साथ कृषि क्षेत्र, व्यापार, पर्यटन और उद्योग धंधों, होटल रेस्टोरेंट में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलेगा। साथ रियल स्टेट क्षेत्र को बूस्ट मिलेगा। लखनऊ पहुंचने में नहीं लगेगी देर पूर्वी यूपी यानी गोरखपुर से लखनऊ को जोड़ने के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे अहम भूमिका निभाएगा। 91 किलोमीटर लंबा तक फैला यह 4 लेन एक्सप्रेसवे गोरखपुर और आजमगढ़ को सीधे जोड़ेगा। इसके अलावा यह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा, जिससे लखनऊ और गोरखपुर के बीच अधिक सुविधाजनक मार्ग और कम समय में यात्रा पूरी हो सकेगी। इस हाईटक मार्ग से गोरखपुर, अम्बेडकरनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़ सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की खासियत गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को आईटीएमएस इनेबल्ड बनाने की कार्ययोजना के तहत ट्रैफिक मैनेजमेंट कमांड सेंटर की स्थापना की गई। इसके जरिए ट्रैफिक मॉनिटरिंग व मैनेजमेंट प्रक्रिया को बल मिलेगा। ट्रैफिक मैनेजमेंट कंट्रोल (Traffic Management Control) यूनिट को रिकॉर्डिंग सर्वर स्टोरेज व बैकअप रिकॉर्डिंग्स सर्वर युक्त किया जाएगा। टीएमसी यूनिट को फैसिलिटी मॉनिटरिंग सिस्टम कंट्रोलर, ग्राफिक डिस्पले, इंटरनेट व एसएमएस सर्वर तथा फाइबर चैनल होस्ट से युक्त किया जाएगा। इमर्जेंसी टेलिफोन हेल्पलाइन कंसोल, स्टाफ के लिए आधार इनेबल्ड बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर मशीन समेत विभिन्न प्रकार की सुविधाओं से टीएमसी यूनिट को युक्त किया जाएगा। कैमरा रखेगा निगरानी मोशन डिटेक्शन सर्विलांस कैमरा व व्हीकल स्पीड डिटेक्शन सिस्टम को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ इंस्टॉल किया गया है। इससे, ओवरस्पीडिंग (Overspeeding) करने वाली गाड़ियों के विषय में अलर्ट जारी हो सकेगा और कंट्रोल रूम द्वारा इसे तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा। वहीं, वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन एनफोर्स्ड सिस्टम (वीआईडीएस) तथा इंसिडेंट डिटेक्शन एनफोर्स्ड सिस्टम (आईडीएस) को भी आईटीएमएस प्रक्रिया के अंतर्गत लागू किया जाएगा। चयनित एजेंसी को इन सभी इक्विप्मेंट्स की प्रोक्योरमेंट, इस्टॉलेशन, ऑपरेशन व मेंटिनेंस से संबंधित कार्यों को पूर्ण करना होगा। इसके अतिरिक्त यूपीडा स्टाफ को इसके संचालन के लिए ट्रेनिंग भी उपलब्ध करायी जाएगी। इस क्रम में, टेक्निकल स्टाफ व कंट्रोल रूम ऑपरेशन स्टाफ की नियुक्ति का कार्य भी एजेंसी द्वारा पूर्ण किया जाएगा। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे : एक नजर में -प्रारंभ बिंदु : जैतपुर (गोरखपुर) -अंतिम बिंदु : सालारपुर (आजमगढ़) -पूर्णतः प्रवेश नियंत्रित फोरलेन (सिक्सलेन में विस्तारणीय) -2 टोल प्लाजा 3 रैम्प प्लाजा -7 फ्लाईओवर -16 वेहिकुलर अंडरपास -50 लाइट वेहिकुलर अंडरपास … Read more

लौह पुरुष पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की याद में अयोध्या में बनायाजाएगा स्मृति द्वार

अयोध्या योगी सरकार के नेतृत्व में अयोध्या धार्मिक, सांस्कृतिक और बुनियादी ढांचे के विकास में नए आयाम स्थापित कर रहा है। अब यहां लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में ‘स्मृति द्वार’ का निर्माण कराया जाएगा। शासन ने इसकी स्वीकृति देते हुए निर्माण के लिए पहली किस्त भी जारी कर दी है। इस परियोजना से अयोध्या की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक गरिमा और बढ़ेगी। अंबेडकर नगर मार्ग में बाकरगंज बाजार में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति द्वार और अयोध्या-गोंडा मार्ग पर पेट्रोल पंप के पास अटल बिहारी वाजपेयी द्वार का निर्माण कराया जाएगा। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति द्वार की लागत 16.57 लाख रुपए आएगी, जिसके तहत 9.42 लाख रुपए की प्रथम किस्त अवमुक्त की जा चुकी है। अटल बिहारी वाजपेयी द्वार की लागत 17.17 लाख आएगी, जिसकी प्रथम किस्त के रूप में 10.302 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। अयोध्या धाम में फटिक शिला पार्किंग का निर्माण व पर्यटन सुविधाओं का विकास का कार्य, रामपथ व धर्मपथ पर मिस्टिंग फैन का कार्य, राम की पैड़ी पर आरती घर व पर्यटन विकास का कार्य, लता चौक के दाहिनी तरफ राम की पैड़ी कैनाल रोड पर धर्मपथ के समानांतर राष्ट्र की संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले थीम वाल का सौंदर्यीकरण प्रस्तावित है। इसके साथ नगर निगम क्षेत्र में 17 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। रीडगंज चौराहे से गुलाबबाड़ी तक मार्ग का चौड़ीकरण 9.50 करोड़, लगभग 33 करोड़ की लागत से रामपथ से ग‌द्दोपुर होते हुए रायबरेली रोड तक चौड़ीकरण, 40 करोड़ की लागत से देवकाली से जेल रोड का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण, लगभग 113 करोड़ की लागत से नियावां चौराहे से पाटेश्वरी देवी मंदिर होते हुए रामपथ तक फोरलेन का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। रामकथा पार्क में नवीन पर्यटक आवास गृह का निर्माण कार्य, गुलाबबाड़ी पार्क का सौंदर्यीकरण, गुप्तारघाट में यात्रियों की सुविधा के लिए बेंच व प्रकाश व्यवस्था, राजघाट के निकट एम्पिथिएटर एवं फूड कोर्ट का कार्य किया जाएगा। योगी सरकार ने स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया है। इसके तहत 351 करोड़ रुपए की लागत से 27 हजार घरों को सीवर लाइन से जोड़ा जाएगा, जिससे शहर की स्वच्छता और जनस्वास्थ्य में सुधार होगा। साथ ही नियावां से पाटेश्वरी मंदिर होते हुए रामपथ तक फोरलेन सड़क का निर्माण होगा, जो यातायात को सुगम बनाएगा और तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा। इसके अतिरिक्त, नगर निगम क्षेत्र में अन्य सड़कों के निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी प्रस्तावित है, जो अयोध्या को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप प्रदान करेगा। विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार में भयमुक्त परिवेश के कारण आज उत्तर प्रदेश निवेशकों की पसंद बन गया है। अमृत-2 के तहत 351.4 करोड़ की लागत से नगर निगम की सीवरेज योजना पार्ट-2 के तहत 27 हजार घरों को जोड़ा जाएगा। इस परियोजना की लागत 351 करोड़ रुपए है, जिसमें चार पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इसमें टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। रामनगरी के विकास में संत-महंतों के साथ आम जनता की सरकार से अपेक्षा व सुझाव को समाहित करना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसमें पूरे विश्व से आने वाले पर्यटकों व तीर्थयात्रियों की आवश्यकताएं भी शामिल हैं। इसके लिए लगातार तीर्थयात्रियों व आम जनता से संवाद स्थापित करते हुए उनकी अपेक्षा व सुझावों को सरकार तक पहुंचाने का कार्य किया गया है। जिससे विकास की इस पटकथा में जनता आज खुद को जोड़कर देख रही है।

संभल में ह‍िंसा भड़काने का है आरोप- सपा सांसद बर्क और जामा मस्जिद के सदर सहित 22 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

संभल जामा मस्जिद के सर्वे के विरोध में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 22 आरोपितों के खिलाफ बुधवार को चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। जबकि, विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल को क्लीन चिट दे दी गई है। करीब 1100 पेज की चार्जशीट में सांसद को हिंसा के लिए लोगों को भड़काने और जफर अली को भड़काने के साथ पुलिस के समत्क्ष गलत साक्ष्य प्रस्तुत करने का आरोपित बनाया गया है। हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी। 30 अधिकारी व पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हिंसा में सात प्राथमिकी पुलिस की ओर से दर्ज कराई गईं। चार मृतकों के स्वजन और एक प्राथमिकी घायल के स्वजन ने दर्ज कराई थी। सभी 12 मुकदमों में 10 में पहले चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। पुलिस की ओर से दर्ज एक मुकदमे में सांसद और विधायक के बेटे को नामजद और 700-800 अज्ञात लोगों को शामिल किया गया था। मस्जिद कमेटी के सदर को जांच के दौरान नाम सामने आने पर गिरफ्तार किया गया था। सांसद गिरफ्तारी को लेकर हाई कोर्ट के स्टे पर हैं। उनसे पुलिस ने आठ अप्रैल को चार घंटे पूछताछ की थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि एक अन्य मुकदमे में भी जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी। 19 नवंबर, 2024 को सिविल जज(सीनियर डिवीजन) की कोर्ट ने मस्जिद के हरि हर मंदिर होने का वाद दायर किया गया था। कोर्ट ने उसी दिन अधिवक्ता रमेश राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था। एडवोकेट कमिश्नर ने उसी दिन सर्वे किया। भीड़ होने के कारण उन्हें लौटना पड़ा। इसके बाद 24 नवंबर को फिर सर्व करने पर हिंसा भड़क गई थी। दो जनवरी को कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट पेश की जा चुकी है, जिसमें मस्जिद में मंदिर होने के साक्ष्य मिलने की जानकारी दी गई है। पुलिस की ओर से दर्ज एक मुकदमे में सांसद और विधायक के बेटे को नामजद और 700-800 अज्ञात लोगों को शामिल किया गया था। मस्जिद कमेटी के सदर को जांच के दौरान नाम सामने आने पर गिरफ्तार किया गया था। सांसद गिरफ्तारी को लेकर हाई कोर्ट के स्टे पर हैं। उनसे पुलिस ने आठ अप्रैल को चार घंटे पूछताछ की थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि एक अन्य मुकदमे में भी जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी। 19 नवंबर, 2024 को सिविल जज(सीनियर डिवीजन) की कोर्ट ने मस्जिद के हरि हर मंदिर होने का वाद दायर किया गया था। कोर्ट ने उसी दिन अधिवक्ता रमेश राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था। एडवोकेट कमिश्नर ने उसी दिन सर्वे किया। भीड़ होने के कारण उन्हें लौटना पड़ा। इसके बाद 24 नवंबर को फिर सर्व करने पर हिंसा भड़क गई थी। दो जनवरी को कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट पेश की जा चुकी है, जिसमें मस्जिद में मंदिर होने के साक्ष्य मिलने की जानकारी दी गई है।

तबादले के बाद भी थानों में डटे रहे यूपी के ये 13 सिपाही, फरमान में अगले दस दिन के भीतर नवीन कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश था

बलिया पुलिस विभाग से जीआरपी में तबादला होने के बावजूद जनपद के 13 सिपाही थाने में ही डटे हुए हैं। राजकीय रेलवे पुलिस लखनऊ में रिक्तियों को भरने के लिए पुलिस महानिदेशक कार्यालय से पुलिस उप महानिरीक्षक कार्मिक राहुल मिश्रा ने 28 मई को पत्र भेजकर बलिया के 29 पुलिस कर्मियों का तबादला लखनऊ जीआरपी मुख्यालय के लिए कर दिया था। फरमान में अगले दस दिन के भीतर नवीन कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश था। निर्देश के अनुपालन में एसपी ओमवीर सिंह ने कोतवाली में तैनात दो सिपाही समेत विभिन्न थानों और विभागों में तैनात 13 का स्थानांतरण जीआरपी मुख्यालय लखनऊ के लिए कर दिया। एसपी ने 31 मई तक सभी को नवीन तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने का भी पत्र जारी किया, लेकिन अब तक कई पुलिस कर्मी थानों और कोतवाली में जमे हुए है।  संवाद सहयोगी, बलिया। पुलिस विभाग से जीआरपी में तबादला होने के बावजूद जनपद के 13 सिपाही थाने में ही डटे हुए हैं। राजकीय रेलवे पुलिस लखनऊ में रिक्तियों को भरने के लिए पुलिस महानिदेशक कार्यालय से पुलिस उप महानिरीक्षक कार्मिक राहुल मिश्रा ने 28 मई को पत्र भेजकर बलिया के 29 पुलिस कर्मियों का तबादला लखनऊ जीआरपी मुख्यालय के लिए कर दिया था। फरमान में अगले दस दिन के भीतर नवीन कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश था। निर्देश के अनुपालन में एसपी ओमवीर सिंह ने कोतवाली में तैनात दो सिपाही समेत विभिन्न थानों और विभागों में तैनात 13 का स्थानांतरण जीआरपी मुख्यालय लखनऊ के लिए कर दिया। एसपी ने 31 मई तक सभी को नवीन तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने का भी पत्र जारी किया, लेकिन अब तक कई पुलिस कर्मी थानों और कोतवाली में जमे हुए है।

श्रीराम पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले यासिर को हिंदू संगठन वाले मंदिर में ले गए, माथे पर तिलक लगाया और माफी मंगवाई

फतेहपुर  फतेहपुर जिले में एक मुस्लिम युवक को सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना महंगा पड़ गया. अभद्र टिप्पणी से आक्रोशित बजरंग दल कार्यकर्ता आरोपी यासिन के घर पहुंच गए. हिंदूवादी संगठन के लोग यासिन को पकड़कर स्थानीय मंदिर ले गए, जहां उसके माथे पर तिलक लगवाकर उससे माफी मंगवाई गई. आखिर में उसे छोड़ दिया गया.  आपको बता दें कि जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र के अहमदगंज का रहने वाला यासिन घर में अपनी पत्नी नगमा के साथ रहता है. बीते दिनों उसके द्वारा सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की गई थी. जिसे देखने के बाद बजरंग दल कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए. वे यासिन की जानकारी जुटाने में लग गए.  जैसे ही उन्हें यासिन के घर का पता चला दर्जनों लोग उसके दरवाजे पहुंच गए. बजरंग दल वाले और वीएचपी के लोग यासिन को मंदिर ले जाकर भगवान की मूर्ति के सामने माफी मंगवाने की मांग करने लगे. लेकिन वह साथ चलने को तैयार नहीं हुआ. इस बीच वीएचपी कार्यकर्ताओं और यासिन के बीच मारपीट भी हुई. हालांकि, बाद में यासिन की पत्नी नगमा के कहने पर वह मंदिर जाने के लिए राजी हो गया.  मंदिर में यासिन ने भगवान की मूर्ति के सामने दोबारा इस तरह की गलती न करने की बात की, साथ ही सबसे माफी भी मांगी. इस दौरान उसकी पत्नी भी साथ रही. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.  बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षित के मुताबिक, यासिन नाम के युवक ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भगवान श्रीराम के ऊपर अभद्र टिप्पणी की थी, जिसके बाद हमलोग उसके घर गए और मंदिर चलकर भगवान के सामने माफी मांगने की बात कही. लेकिन वह नहीं माना. उसके पास एक चाकू था.  जिससे उसने मेरी जांघ पर हमला किया. इस दौरान हल्की मारपीट भी हुई. लेकिन पत्नी के कहने पर यासिन ने हमारे साथ वर्मा चौराहा स्थित मंदिर जाकर माफी मांगी, जिसपर उसे छोड़ दिया गया. 

CM योगी आज दिल्ली दौरे पर अध्यक्ष नड्डा समेत तमाम नेताओं से मुलाकात कर करेंगे

लखनऊ उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों में दो महत्वपूर्ण चुनाव होने जा रहे हैं। अगले साल होने जा रहा पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इसको लेकर सत्ताधारी बीजेपी की तैयारियां और बैठकों का दौर जारी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली दौरे पर है। दिल्ली दौरे पर पहुंचे सीएम योगी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। इस मुलाकात को कई मायनों में अहम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों की माने तो बैठक के दौरान यूपी बीजेपी अध्यक्ष की नियुक्ति से लेकर कैबिनेट विस्तार पर भी चर्चा कर सकते हैं। दरअसल बीजेपी में संगठन चुनाव की प्रक्रिया के चलते प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है। यूपी में बीजेपी जिलाध्यक्ष की लिस्ट जारी होने के बाद से माना जा रहा था कि जल्द ही बीजेपी यूपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद यूपी कैबिनेट विस्तार होने की चर्चा भी जोरो पर है। हालांकि अभी तक ना ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो पाई है और ना ही योगी मंत्रिमंडल विस्तार पर ही कोई राय बन पाई है। इसी बीच सीएम योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। सीएम योगी इस दौरे के दौरान बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह समेत अन्य बड़े नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। जबकि राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से सीएम योगी मुलाकात कर चुके हैं। वहीं पार्टी सूत्रों की माने तो यूपी में जल्द ही यूपी सरकार का मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार में 6 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं। जिसमें बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को मंत्री बनाये जाने की चर्चा हैं। पूर्व मंत्री व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाने के साथ ही बड़े विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके साथ ही कई अन्य नेताओं को योगी कैबिबेट का हिस्सा बनाया जा सकता है। इसके साथ ही कई मौजूदा मंत्रियों का विभाग भी बदला जा सकता है। सीएम योगी दिल्ली में बीजेपी नेताओं के साथ बैठक में नए मंत्रियों के नामों पर चर्चा कर सकते हैं। साथ ही कैबिबेट विस्तार कब तक होगा, इस पर भी चर्चा हो सकती है। साथ ही नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी बैठक में चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

62 जिलों में अब संचालित होंगे कुल 109 विद्यालय- यूपी सरकार 37 हजार गरीब बच्चों के भविष्य बना रही स्मार्ट

लखनऊ योगी सरकार संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक समावेशिता और समता का एक सफल मॉडल बनकर उभरे हैं। गरीब, वंचित और ग्रामीण परिवेश के मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख और पूरी तरह निःशुल्क आवासीय शिक्षा देने वाली इस योजना के तहत लाभान्वित बच्चों की संख्या में वर्ष दर वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2018-19 में जहां मात्र 32,429 बच्चे इस योजना के तहत पढ़ाई कर रहे थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर करीब 37,000 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में योगी सरकार की दूरदर्शी सोच और संकल्प की सफलता की कहानी है। बीते सात वर्षों में करीब 4,571 छात्रों की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि सरकार गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। जहां वर्ष 2018-19 तक प्रदेश के 58 जिलों में 100 सर्वोदय विद्यालय संचालित थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 109 विद्यालयों तक पहुंच गई है, जो अब 62 जिलों में कार्यरत हैं। समाज कल्याण विभाग के निदेशक कुमार प्रशांत ने बताया कि इस वर्ष मथुरा, बलिया, पीलीभीत, गोंडा, कानपुर देहात, अमरोहा, महाराजगंज, अंबेडकरनगर और मैनपुरी जिलों में 9 नए सर्वोदय विद्यालय खोले गए हैं, जिससे लगभग 2,000 नए छात्रों को निःशुल्क शिक्षा और आवासीय सुविधा का लाभ मिलेगा। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशालाएं, टैबलेट, एयरोमॉडलिंग, एआई कार्यशालाएं, सीसीटीवी निगरानी और अन्य नवीनतम तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। भोजन, यूनिफॉर्म, पाठ्य सामग्री से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं (एनईईटी, जेईई, सीयूईटी) की निःशुल्क कोचिंग तक की संपूर्ण व्यवस्था छात्रों को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक है। इन विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया भी सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर बनाई गई है। 60% सीटें अनुसूचित जाति/जनजाति, 25% पिछड़े वर्ग और 15% सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जिससे हर तबके को समान अवसर मिल सके। साथ ही, 85% छात्र ग्रामीण क्षेत्रों से चयनित किए जाते हैं, जिससे गांवों के होनहारों को भी आगे बढ़ने का मंच मिलता है। सात वर्षों में लाभार्थी संख्या में हुई बढ़ोत्तरी केवल शैक्षिक आंकड़ों की बात नहीं है, यह उन हजारों परिवारों की आशा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही यह पहल संदेश देती है कि सरकार शिक्षा को सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का साधन मानती है। सर्वोदय विद्यालयों के जरिए उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार सामाजिक न्याय, शैक्षिक समानता और नवाचार के माध्यम से एक ऐसा भविष्य रच रही है, जहां हर बच्चा, चाहे वह किसी भी वर्ग या क्षेत्र से हो, एक समान अवसर और उज्ज्वल भविष्य का हकदार है। विद्यालयों की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी हाल ही में आए नीट (यूजी) के परिणाम में मीरजापुर के मड़िहान स्थित सर्वोदय विद्यालय की 25 में से 12 छात्राओं ने सफलता हासिल की है, ये सभी छात्राएं पिछड़े व अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग से हैं।  

यूपी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम बताया, मंत्री पीयूष गोयल ने सीएम योगी को लिखा पत्र

लखनऊ केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के जरिए खरीद में राज्य के योगदान की प्रशंसा की है। उन्होंने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) को अपनाने के लिए यूपी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस एक राष्ट्रीय ऑनलाइन खरीद पोर्टल है, जो केंद्र और राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त संस्थानों और स्थानीय निकायों को वस्तुओं और सेवाओं की खरीद में मदद करता है। यह पोर्टल पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता को बढ़ावा देता है। गोयल ने पत्र में बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के जरिए 72 लाख से अधिक ऑर्डर के साथ 5.43 लाख करोड़ रुपए की खरीद हुई। शुरू से अब तक 2.9 करोड़ ऑर्डर के माध्यम से 14 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की खरीद हो चुकी है। इसमें उत्तर प्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में यूपी सरकार की खरीद के विवरण को भी साझा किया, जो गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पर राज्य के भरोसे को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री ने यूपी सरकार के उस आदेश की भी सराहना की, जो 26 नवंबर 2024 को जारी किया गया। इस आदेश ने राज्य के खरीद नियमों को सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर) 2017 और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस की शर्तों के साथ जोड़ा है। इससे खरीद प्रक्रिया आसान हुई और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस को पूरी तरह अपनाने का रास्ता खुला। गोयल ने कहा कि यह आदेश विभिन्न खरीद नियमों को एकीकृत कर एक सुगम ढांचा प्रदान करता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस को ‘वन-स्टॉप मार्केटप्लेस’ बनाने के दृष्टिकोण को मजबूत करता है। उन्होंने लिखा कि यूपी का यह कदम डिजिटल इंडिया की संकल्पना को साकार करता है। तकनीक और समावेशिता के साथ मिलकर काम करने से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी आई है। यूपी की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की सक्रियता ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही के बेहतरीन समन्वय का प्रतीक बन गई है। पोर्टल के माध्यम से न केवल खरीद प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और तकनीक-सक्षम बनाया गया है, बल्कि पूर्वाग्रह और भेदभाव से मुक्त समान अवसरों की भी प्रभावी स्थापना हुई है। इससे प्रदेश में सुशासन को नई गति मिली है और सरकारी कार्यप्रणाली में जनता के प्रति उत्तरदायित्व का भाव और अधिक सशक्त हुआ है। यही कारण है कि केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश को अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय मॉडल के रूप में सराहा जा रहा है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पर वर्तमान में 11,000 से अधिक उत्पाद श्रेणियां और 330 से ज्यादा सेवा श्रेणियां उपलब्ध हैं।  

प्रदेश में अभिजनक बीज नर्सरी की संख्या लगभग हो गई दोगुनी, 2024-25 में बढ़कर 267 तक पहुंची

लखनऊ उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को मजबूत आधार देने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक नई मिसाल कायम की है। प्रदेश में अभिजनक बीज नर्सरी की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। साल 2016-17 में जहां केवल 150 बीज नर्सरियों का संचालन हो रहा था, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 267 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि प्रदेश की चीनी मिलों के प्रक्षेत्र का प्रभावी उपयोग कर संभव हुई है। इतना ही नहीं, वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 4.4 करोड़ नवीन किस्मों के सिंगल बड का वितरण किया गया है, जो कि देश में किसी भी शोध संस्था द्वारा उत्पादित बीजों की तुलना में सर्वाधिक है। इस वितरण से गन्ना उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। बीज उत्पादन और वितरण में इस प्रगति ने उत्तर प्रदेश को गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बना दिया है। बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए त्रिस्तरीय बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत अभिजनक बीजों (ब्रीडर सीड) का प्रमाणन वैज्ञानिक टीम द्वारा किया जाता है। बीज उत्पादकता के निरीक्षण का विस्तृत शेड्यूल निर्धारित किया गया है। इसके अनुसार, बुवाई के समय, अंकुरण के बाद (45-60 दिन), टिल्लरिंग अवस्था में (100-120 दिन), मिल योग्य गन्ने के निर्माण की अवस्था में (180-200 दिन) और कटाई से 15-20 दिन पूर्व निरीक्षण किया जाता है। इस वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रक्रिया के चलते किसानों को प्रमाणित, गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में निरंतर सुधार हो रहा है।  

बिना वैध मेडिकल योग्यता के एक महिला द्वारा संचालित अवैध नर्सिंग होम और क्लिनिक को सील कर दिया

भदोही भदोही जिले में बिना वैध मेडिकल योग्यता के एक महिला द्वारा संचालित अवैध नर्सिंग होम और क्लिनिक को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि कथित चिकित्सक सरोजिनी जायसवाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है जो निरीक्षण के दौरान कोई वास्तविक चिकित्सा डिग्री या स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाई थी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) संतोष कुमार चक ने बताया कि शिकायत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. आशुतोष कुमार पांडेय ने गोपीगंज क्षेत्र की डॉक्टर कॉलोनी स्थित क्लिनिक एवं नर्सिंग होम की जांच की। चक ने बताया कि शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ दलाल गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल की जगह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ठीक सामने स्थित सरोजिनी जायसवाल के नर्सिंग होम में ले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस गिरोह में सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गोपीगंज थाने के प्रभारी अमित कुमार सिंह ने पुष्टि की कि निरीक्षण के बाद बृहस्पतिवार को मेडिकल सुविधा को सील कर दिया गया और अधीक्षक पांडेय द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर जायसवाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।  

प्रयागराज : प्राचीन श्री मनकामेश्वर मंदिर में ड्रेस कोड लागू, स्कर्ट-टॉप, जींस और पैंट पर पाबंदी

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अति प्राचीन श्री मनकामेश्वर मंदिर में ड्रेस कोड लागू होगा, जिसका कड़ाई से पालन कराने के लिए मंदिर समिति ने कदम उठाए हैं। समिति ने मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान स्कर्ट, टॉप, जींस और पैंट पहनने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई है। सावन के महीने की शुरुआत के साथ ही नियम लागू होंगे। इसके तहत महिलाएं पूजा के समय केवल साड़ी या सलवार-सूट पहनेंगी, जबकि पुरुष धोती पहनकर ही पूजा-अर्चना कर सकेंगे। जींस, पैंट, स्कर्ट जैसे आधुनिक कपड़ों को मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के दौरान पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। मंदिर के पुजारी इस कदम का स्वागत कर रहे हैं और मानते हैं कि इससे धार्मिक और वैदिक परंपराओं का सम्मान और पालन होगा। श्री मनकामेश्वर मंदिर के महंत ब्रह्मचारी श्री धरानंद जी महाराज ने कहा कि लोगों को सावन के महीने में ड्रेस कोड अपनाने के लिए मंदिर समिति ने बोला है। उन्होंने कहा, “जब रुद्राभिषेक होता है तो अक्सर देखा गया है कि लोग पैंट पहनकर और बेल्ट लगाकर बैठते हैं। लोग परंपरागत वस्त्र पहनना लगातार छोड़ते जा रहे हैं। कहीं न कहीं परंपराओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है। मंदिर समिति ने फैसला लिया है कि सावन के महीने में जो भी रुद्राभिषेक होंगे, उसमें पुरुषों को धोती पहनना अनिवार्य होगा। महिलाओं को साड़ी या सूट पहनना होगा। कटे-फटे या जो भद्दे कपड़े हैं, इस तरह के पहनावे को लेकर पहले से रोक है। उसके अच्छे परिणाम भी आए।” मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस पहल का स्वागत कर रहे हैं। एक श्रद्धालु ने कहा, ‘यह बहुत अच्छी पहल है। आजकल देखते हैं कि कुछ भी पहनकर लोग मंदिर चले जाते हैं, लेकिन मंदिर में ड्रेस कोड से बड़ा अच्छा संदेश जाएगा।” एक अन्य शख्स ने कहा, “यहां पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता पहनना अनिवार्य किया गया है, यह सही पहल है। आज के समय में बहुत जरूरी है। हम लोग धर्म स्थल पर आते हैं, यह कोई पिकनिक मनाने की जगह नहीं है।”  

यूपी में पर्यटन की नई उड़ान- योगी सरकार के प्रयासों से आने वाले समय में यूपी में पर्यटन को और पंख लगेंगे

लखनऊ योगी सरकार के प्रयासों से आने वाले समय में यूपी में पर्यटन को और पंख लगेंगे। द वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (डब्ल्यूटीटीसी) ने राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के परिदृश्य के बारे में जो पूर्वानुमान जताया है, उससे इस बात के पुख्ता संकेत मिल रहे हैं। इन संकेतों में छिपी संभावनाओं को सच में तब्दील करने को योगी सरकार पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से प्रतिबद्ध भी है। प्रदेश में विदेशी और घरेलू पर्यटकों की आमद बढ़ने के साथ ही इनके द्वारा यात्रा, रहने, खाने और यादगार के रूप में स्थानीय उत्पादों के खरीदे जाने से अर्थव्यवस्था तो सुधरेगी ही, इससे जुड़े ट्रांसपोर्टेशन, होटल, होम स्टे, गाइड आदि सेक्टर्स में रोजी-रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। डब्ल्यूटीटीसी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 के राष्ट्रीय पर्यटन संबंधी आंकड़े 2019 के सभी मानकों को पीछे छोड़ चुके हैं। संस्था ने 2030 तक के लिए जो पूर्वानुमान जताए हैं, वे बेहद संभावनाओं वाले हैं। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या, राधाकृष्ण की जन्मभूमि और कर्मस्थली ब्रजभूमि उत्तर प्रदेश में ही है। तीर्थराज प्रयाग, विश्व की सबसे पुरातन नगरी एवं तीनों लोकों से न्यारी शिव की काशी, दुनिया को शांति और अहिंसा के संदेश से प्रकाशित करने वाले भगवान बुद्ध से जुड़े सभी प्रमुख स्थल कुशीनगर, सारनाथ, कपिलवस्तु भी उत्तर प्रदेश में हैं। इन सब वजहों से देश में बढ़ते पर्यटन के कारण यूपी में पर्यटन की संभावना भी बढ़ जाती है। यह हो भी रहा है। सरकारी आंकड़े इसकी तस्दीक भी कर रहे हैं। ऐसा हो इसके लिए संभावना वाले टूरिज्म स्पॉट को केंद्र बनाकर योगी सरकार पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए वैश्विक स्तर की बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने को प्रतिबद्ध है। प्राथमिकता बनाकर चरणबद्ध तरीके से यह काम हो भी रहा है। इसमें केंद्र सरकार का भी विभिन्न योजनाओं के जरिए भरपूर सहयोग मिल रहा है। डब्ल्यूटीटीसी के अनुसार देश के लिए पर्यटन के लिहाज से साल 2025 रिकॉर्ड ब्रेकिंग हो सकता है। इसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था में इस सेक्टर का योगदान 22 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इस पूर्वानुमान के अनुसार टूरिज्म सेक्टर से जुड़े सेक्टर्स में रोजगार पाने वालों की संख्या 48 मिलियन से अधिक हो सकती है। संस्था की ओर से साल 2030 के लिए जताए गए पूर्वानुमान के अनुसार पर्यटन से अर्थव्यवस्था को मिलने वाला योगदान 42 लाख करोड़ और रोजगार बढ़कर 64 मिलियन हो जाएगा। इन आंकड़ों में ही उत्तर प्रदेश के टूरिज्म सेक्टर की भी संभावनाएं छिपी हैं। खासकर धार्मिक पर्यटन के लिहाज से। सरकार भी इसे जानती और स्वीकार करती है। ऐसे स्थलों के विकास पर उसका सर्वाधिक फोकस भी है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, “धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के प्रयास न केवल आस्था को आह्लादित करते हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाते हैं। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन, प्रसाद तथा रामायण, कृष्ण, बौद्ध सर्किट जैसी योजनाओं ने पर्यटन विकास को गति दी है। उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने इन क्षेत्रों में सड़क, परिवहन, रुकने की सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। पर्यटन के प्रति बढ़ते रुझान और सरकार की प्रभावशाली नीतियों के चलते प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों में अभूतपूर्व वृद्धि के साथ स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजी-रोजगार के अवसर बढ़े हैं। स्थानीय हस्तशिल्प एवं स्थान विशेष की पहचान बने उत्पादों को खूब लाभ मिला है। इन पर्यटन स्थानों में हुए विकास से युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित एवं पुनरुद्धार कर पर्यटन के नए हब के रूप में अपनी पहचान बनाई है। टूरिज्म सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए ही सरकार 4,560 करोड़ रुपए की लागत से धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले 272 मार्गों का विकास कर रही है। महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों पर आने वाले घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को वैश्विक स्तर की बुनियादी सुविधाएं मिलें, इसे ध्यान में रखते हुए वहां विकास कार्य हो रहे हैं। मसलन लखनऊ, प्रयागराज, कपिलवस्तु में हेलीपोर्ट सेवा शुरू हो चुकी है। कुछ अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों को भी शीघ्र ही इस सेवा का लाभ मिलने लगेगा। अयोध्या शोध संस्थान का उच्चीकरण, अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना भी हो रही है। कुशीनगर में बुद्धा थीम पार्क परियोजना, सीतापुर स्थित नैमिषारण्य तपोस्थली पर वेद विज्ञान अध्ययन केंद्र की स्थापना के साथ नैमिष तीर्थ एवं शुक्र तीर्थ का पुनरुद्धार किया गया है। गोरखपुर में परमहंस योगानंद जी की जन्मस्थली के पुनरुद्धार के साथ गंगा के किनारे जिस श्रृंगवेरपुर में वनगमन के दौरान भगवान श्रीराम और निषादराज का मिलन हुआ था, जहां से वे गंगा पार कर प्रयागराज होते हुए चित्रकूट गए थे, उसे सरकार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। योगी सरकार उत्तर प्रदेश में पड़ने वनगमन मार्ग के उन सभी प्रमुख स्थलों को विकसित कर रही है, जहां राम ने पत्नी सीता एवं भाई लक्ष्मण सहित कुछ समय गुजारे थे। पूरे वनगमन मार्ग पर उसी तरह के पौधरोपण की भी योजना है, जिनका जिक्र तुलसीदास के रामचरित मानस या अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।  

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