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महाराष्ट्र और झारखंड चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे छत्‍तीसगढ़ के भाजपा नेता

रायपुर छत्‍तीसगढ़ भाजपा के नेता महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव प्रचार करने के लिए जाएंगे। महाराष्ट्र और झारखंड के लिए अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। इसमें मंत्री और विधायक शामिल हैं। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के मतदान के बाद भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट गई है। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर 2024 को समाप्त हो रहा है, जबकि झारखंड का पांच जनवरी 2025 तक है। दोनों राज्यों में चुनाव नवंबर-दिसंबर में एक साथ कराए जाने की संभावना है। चुनाव प्रचार करने ये जाएंगे महाराष्ट्र संभाजीनगर शहर: प्रदेश महामंत्री रामजी भारती धाराशिव: पूर्व विधायक नवीन मार्कण्डेय लातूर ग्रामीण: संतोष उपाध्याय, नंदकुमार राणा, गोपाल विष्ठ बीड: पूर्व सांसद चंदूलाल साहू, श्रवण मरकाम संभाजीनगर दक्षिण: पूर्व विधायक विनोद खांडेकर संभाजी नगर उत्तर: निरंजन सिंहा जालना ग्रामीण: कोमल जंघेल परभणी ग्रामीण: पूर्व विधायक नंदे साहू हिंगोली: वीरेंद्र साहू नांदेड़ शहर: पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, आशु चंद्रवंशी नांदेड़ उत्तर: विक्रांत सिंह झारखंड चुनाव के लिए यह प्रभारी रामगढ़ और हजारीबाग: मंत्री ओपी चौधरी गिरिडीह: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सरायकेला, खरसांवा, चाईबासा: सांसद विजय बघेल चार सीटें: केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू जमशेदपुर की चार सीटें: पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल बहरागोड़ा, घाटशिला, पोटका, जुगसलाई, जमशेदपुर पूर्व और पश्चिम: पूर्व विधायक भावना बोहरा

राजिम में शाम को बिगड़ा मौसम, हुई झमाझम बारिश

नवापारा राजिम मानसून की विदाई के बाद अक्टूबर महीने के इस मौसम में दिनभर आसमान साफ रहने के बाद शाम को अचानक काली घटा उमड़ी और झमाझम बारिश शुरू हो गई अचानक हुए इस बारिश से लोग जहां थे वहीं ठहर कर रहे गए अब इस मौसम में हो रही बारिश को देखकर किसान चिंतित हो गए हैं खरीफ सीजन के धान की कटाई का क्रम इक्का दुक्का शुरू हो चुका है तो कहीं सप्ताह भर के भीतर यानी दशहरा की समाप्ति के बाद शुरू हो जाएगा। अब ऐसे समय में बिन मौसम बरसात होने से फसलों में किट प्रकोप के अलावा अन्य नुकसान होने की संभावना बढ़ गई है किसान अब अर्ली वैरायटी के फसल को किस तरह बचाए इसी उधेड़ बुन लगे हुए हैं क्योंकि ऊपर से एक तो खेत गीला है और आसमानी बारिश से दो तरफा प्रहार के समान है वैसे भी खेतों में इन दिनों तरह-तरह के बीमारी लग ही रहा है। जो फसल कटाई के लायक हो चुके हैं उसके लिए यह बारिश आफत से कम नहीं है।

टेकाम बोले- जनजातियों का ज्ञान और परंपराएं दूसरे समाजों के लिए भी अनुकरणीय

रायपुर जनजातियों के गौरवशाली इतिहास, सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और जनजातीय महानायकों के बलिदान को आमजनों को बताने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभाग्रह में संपन्न हुई। इस कार्यशाला में पूर्व आईएएस अधिकारी और वर्तमान केशकाल विधायक श्री नीलकंठ टेकाम ने जनजातियों के ज्ञान और परंपराओं को दूसरे समाजों के लिए भी अनुकरणीय बताया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जनतीय समाज में सहभागिता, प्रकृति प्रेम के साथ आत्म स्वाभिमान से जीने की कला को दूसरे समाज के लोंगो को भी सीखना चाहिए। श्री टेकाम ने इस दौरान जनजातीय समाज को भारत के संविधान को मिली सहूलियतों और संरक्षण के साथ विकास के लिए किए गए प्रावधानों को भी लोंगो को बताया। इस दौरान वीरांगना रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती भी मनाई गई और रानी दुर्गावती के अपने गोंडवाना प्रदेश की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए बलिदान हो जाने के वृत्तांत पर भी प्रकाश डाला गया है। कार्यशाला में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के दो सौ से अधिक छात्र-छात्राओं एवं नागरिक शामिल हुए। कार्यशाला में जनजातीय समाज के महानायकों के बलिदान को भी इंगित किया गया। वक्ता श्री वैभव सुरंगे ने भारत में जनजातीय समाज और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर विस्तृत जानकारी दी। भारत के प्रथम शहीद तिलका मांझी, वीर नारायण सिंह,गेंदसिंह, गुण्डाधुर आदि से लेकर विभिन्न क्षेत्रों के जनजातीय समाजों द्वारा ब्रिटिश शासन के विरूद्ध हुए संघर्ष को विस्तार से बताया है। कार्यशाला में पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्री सच्चिदानंद शुक्ला ने जनजातीय समाज की परंपराओं, उनके रीतिरिवाजों और संस्कृति पर अपने नजरिए से रिसर्च किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने जनजातीय समाज पर होने वाले शोधों से आधुनिक विकास के क्रम का ज्ञान होने की भी बात कही। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जनजातीय अस्मिता और गौरवशाली अतीत को वैश्विक पहचान देने के लिए 15 नवंबर को भगवान बिरसामुंंडा की 150वीं जयंती पर सभी जिलों में जनजातीय गौरव दिवस मनाने की घोषणा की है। इसी तारतम्य में विश्वविद्यालय के संबद्ध सभी महाविद्यालयों में जनजातीय सभ्यता, संस्कृति, इतिहास, अस्मिता और जनजातीय महानायकों से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यशाला में वनवासी विकास समिति के प्रांत अध्यक्ष श्री उमेश कच्छप, कुलसचिव डॉ शैलेन्द्र कुमार पटेल, और समन्वयक डॉ बंसो नुरूटी भी मौजूद रहे।

18 वर्ष से कम आयु के बच्चों का किया जाएगा चिन्हांकन

रायपुर एकीकृत बाल संरक्षण योजना, मिशन वात्सल्य महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत प्रवर्तकता कार्यक्रम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के देख-रेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को चिकित्सकीय, पोषण, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु परिवारों को अनुपूरक सहायता के रूप में धन राशि प्रदान किया जाना है, जिससे बच्चे के जीवन स्तर की गुणवत्ता में सुधार हो सके और बालक का सर्वोत्तम हित सुनिश्चित किया जा सके। महिला एवं बाल विकास विभाग से मिली हुई जानकारी के अनुसार किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 यथा संशोधित 2021 का एक प्रमुख मार्गदर्शी सिद्धांत यह है कि किसी बच्चे को अंतिम उपाय के रूप में संस्थागत देखरेख में रखा जावे। परिवार तथा पारिवारिक वातावरण बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सर्वाधिक अनुकूल होता है। अत: बच्चों के पुनर्वास और समाज में एकीकरण के लिए परिवार एवं समुदाय आधारित विकल्प में प्रवर्तकता (स्पॉसरशिप) का प्रावधान रखा गया है। जिसके तहत प्रवर्तकता हेतु पात्र बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 4 हजार रुपए प्रतिमाह की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। प्रवर्तकता की निवारक और पुनर्वास 02 श्रेणियां है। निवारक श्रेणी में जैविक परिवार में निवासरत बालकों को परिवार में बने रहने, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 4 हजार रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि वे बेघर, बालश्रम, बाल विवाह, पलायन इत्यादि के लिए मजबूर न हो। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा ऐसे परिवारों या बच्चों का चिन्हांकन सामाजिक कार्यकर्ता, आऊटरीच वर्कर, स्वयं सेवकों, वार्ड समिति या ग्राम पंचायत की मदद से किया जाता है।पुनर्वास श्रेणी अंतर्गत ऐसे बच्चों को 4 हजार रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो परिवार के आर्थिक अभाव के कारण मिशन वात्सल्य के तहत संचालित बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत है, उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान कर परिवार में पुनर्वासित किया जाता है।

कांग्रेस पार्टी से रायगढ़ के पूर्व महापौर मनहर ने दिया इस्तीफा

रायगढ़ रायगढ़ के पूर्व महापौर जेठूराम मनहर ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को भेजे पत्र में उन्होंने लिखा है कि कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से अपनी व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं। सूत्र बता रहे हैं कि जेठूराम पार्टी में लगातार हो रही उपेक्षा से परेशान थे। बता दें कि 2005 से 2010 तक रायगढ़ नगर निगम में बड़ी जीत हासिल कर वे महापौर बने थे, लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी के भीतर उनकी अनदेखी से नाराज चल रहे थे। जिसके चलते आज उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि इसके बाद उनके कदम का खुलासा नहीं हुआ है। समझा जा रहा है कि वे भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं।

श्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ स्टेट बेवरेजेस कार्पोरेशन के संचालक मंडल की बैठक

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी   छत्तीसगढ़ स्टेट बेवरेजेस कार्पोरेशन के संचालक मंडल की बैठक आज रायपुर के आबकारी भवन में आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने की। संचालक मंडल की इस बैठक में बेवरेज कारपोरेशन के विभिन्न एजेंडों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सर्वप्रथम 21 अगस्त को आयोजित बैठक में लिए गए निर्णयों का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। बैठक में वित्तीय वर्ष 2023-24 के वित्तीय विवरणों का अनुमोदन भी किया गया। बैठक में बेवरेज कार्पोरेशन द्वारा दुर्ग एवं बिलासपुर के गोदामों में हाउस कीपिंग कार्य के लिए निविदा जारी करने कार्य का अनुमोदन किया गया, साथ ही अरसनारा-दुर्ग गोदाम के लिए एक नग जेनरेटर क्रय करने की भी स्वीकृति प्रदान की गयी। अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सरगुजा संभाग में वाइन की उपलब्धता सुनिश्चित करने एवं आस पास के जिलों में स्टाक उपलब्धता के लिए मनेंद्रगढ़ में बेवरेज डिपो या गोदाम के संचालन का प्रस्ताव रखा जिस पर संचालक मंडल ने अपनी सहमति प्रदान की । मनेन्द्रगढ़ में बेवरेज गोदाम खुलने से गौरेला पेंड्रा मरवाही, मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर, कोरिया और सूरजपुर जिलों की वाइन दुकानों के लिए स्टाक का स्टोरेज किया जाएगा। बैठक में सचिव वाणिज्य कर आबकारी श्रीमती आर शंगीता, प्रबंध संचालक स्टेट बेवरेज कार्पोरेशन श्री श्याम धावड़े, सचिव वित्त विभाग श्रीमती शारदा वर्मा समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

बलौदाबाजार हिंसा मामला : पुलिस ने देवेंद्र यादव के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में 550 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल

रायपुर बलौदाबाजार हिंसा मामले में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के खिलाफ पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में 550 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल की है। यादव को डेढ़ दर्जन से अधिक गंभीर धाराओं के तहत आरोपित किया गया है। बता दें कि वे 17 अगस्त से जेल में बंद हैं, और इस मामले में अब तक कुल 185 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें 13 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। चार दिन पहले अदालत ने यादव की न्यायिक रिमांड दो दिन के लिए और बढ़ा दी थी, क्योंकि पुलिस ने समय रहते चालान पेश नहीं किया था। देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया था कि पुलिस जानबूझकर चालान में देरी कर रही है ताकि उनके खिलाफ नए आरोप गढ़े जा सकें। इसी बीच, देवेंद्र यादव के वकील ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, हालांकि इससे पहले उनकी जमानत याचिका 10 और 17 सितंबर को खारिज हो चुकी है।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात, राज्य की विकास योजनाओं और नक्सल उन्मूलन पर की चर्चा

नई दिल्ली छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से उनके निवास पर मुलाकात की।  इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में पिछले नौ महीनों के दौरान हुए विकास कार्यों की जानकारी दी, जिसमें कृषि, कौशल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में की गई प्रमुख पहलों को रेखांकित किया गया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में हाल ही हुए सफल नक्सल ऑपरेशन की जानकारी प्रधानमंत्री से साझा की। प्रधानमत्री ने इस ऑपरेशन की सफलता पर सुरक्षा बलों के साहस की सराहना की। मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आठ लाख आवास स्वीकृत किये जाने पर श्री नरेंद्र मोदी का आभार भी जताया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को माओवाद के खिलाफ राज्य में चल रहे ऑपरेशन और विकास कार्यों की प्रगति पर विस्तृत जानकारी दी।  उन्होंने नारायणपुर-दंतेवाड़ा जिले के हालिया ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि सुरक्षा बलों ने 31 नक्सलियों को मार गिराया है, जो राज्य में अब तक का सबसे बड़ा नक्सल ऑपरेशन है। मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ में चल रहे विकास कार्यों का ब्योरा भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया राज्य सरकार सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोग मुख्यधारा से जुड़ सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफलता की प्रशंसा की और कहा कि इससे न केवल राज्य में शांति बहाल हो रही है, बल्कि विकास की राह भी आसान हो रही है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बस्तर और आदिवासी अंचलों में युवाओं के कौशल उन्नयन के लिए सरकार विशेष योजनाएँ चला रही है। इन योजनाओं के तहत युवाओं को विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, जिससे वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। यह पहल राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कृषि के क्षेत्र में, मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक और उन्नत कृषि विधियों का व्यापक प्रयोग हो रहा है। इससे किसानों की उत्पादकता और उनकी आय में वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये प्रयास प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य के साथ मेल खाते हैं, और छत्तीसगढ़ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने बड़े बदलाव किए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि आदिवासी अंचलों में बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे बच्चों की शैक्षणिक प्रगति में सुधार हो रहा है। साथ ही, तकनीकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि राज्य के बच्चे आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित हो सकें और भविष्य के लिए तैयार हो सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ सरकार के इन प्रयासों की सराहना की और कहा कि राज्य की विकास यात्रा अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने मुख्यमंत्री साय को राज्य की प्रगति के लिए और भी अधिक समर्थन और सहयोग का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बड़ी संख्या में आवास की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाखों परिवारों को अपने घर का सपना साकार हुआ है, जिससे उनके जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का भाव उत्पन्न होगा।

नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक आज फिर चढ़ा हंगामे की भेंट

रायपुर नगर निगम की 4 अक्टूबर को स्थगित सामान्य सभा की बैठक सोमवार को पुन बुलाई गई जिसमें जमकर हंगामा हो गया। अवैध दुकानों को लेकर इसकी शुरूआत हुई तो और भी मुद्दे आने पर पार्षद सभापति के डायस तक पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। सामान्य सभा में निगम कार्यालय के बगल में बनी 3 दुकानों को लेकर भाजपा पार्षद दल ने सत्ता पक्ष को घेरा। निगम पर व्यवस्थापन के नाम पर अवैध रूप से दुकानें बनाने का आरोप भी लगाया। कुछ मुद्दों पर सत्ता पक्ष के पार्षद भी विरोध में दिखे जिसमें नरैया तालाब का सौंदर्यीकरण प्रमुख था। नरैया तालाब सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव आते ही कांग्रेस के पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि निगम के अफसरों ने उनसे बिना राय लिए प्रस्ताव बना लिया है। तालाब में चौपाटी का भी विरोध किया। उनका कहना था कि इससे यातायात बिगड़ जायेगा। सभा में एमआईसी सदस्य समेत अन्य कांग्रेसी पार्षदों ने लीज माफी के एक प्रस्ताव को गिरा दिया। यह निर्णय हुआ कि नए सिरे से लीज की गणना जाएगी। पार्षदों का कहना था कि लीजधारी को फायदा पहुंचाने निगम के बड़े पदाधिकारी, अफसरों के जरिए गड़बड़ी करवा रहे हैं।

मंत्री जायसवाल की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ स्टेट बेवरेजेस कापोर्रेशन के संचालक मंडल की बैठक

रायपुर छत्तीसगढ़ स्टेट बेवरेजेस कापोर्रेशन के संचालक मंडल की बैठक आज रायपुर के आबकारी भवन में आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने की। संचालक मंडल की इस बैठक में बेवरेज कारपोरेशन के विभिन्न एजेंडों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सर्वप्रथम 21 अगस्त को आयोजित बैठक में लिए गए निर्णयों का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। बैठक में वित्तीय वर्ष 2023-24 के वित्तीय विवरणों का अनुमोदन भी किया गया। बैठक में बेवरेज कापोर्रेशन द्वारा दुर्ग एवं बिलासपुर के गोदामों में हाउस कीपिंग कार्य के लिए निविदा जारी करने कार्य का अनुमोदन किया गया, साथ ही अरसनारा-दुर्ग गोदाम के लिए एक नग जेनरेटर क्रय करने की भी स्वीकृति प्रदान की गयी। अध्यक्ष श्याम बिहारी जायसवाल ने सरगुजा संभाग में वाइन की उपलब्धता सुनिश्चित करने एवं आस पास के जिलों में स्टाक उपलब्धता के लिए मनेंद्रगढ़ में बेवरेज डिपो या गोदाम के संचालन का प्रस्ताव रखा जिस पर संचालक मंडल ने अपनी सहमति प्रदान की । मनेन्द्रगढ़ में बेवरेज गोदाम खुलने से गौरेला पेंड्रा मरवाही, मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर, कोरिया और सूरजपुर जिलों की वाइन दुकानों के लिए स्टाक का स्टोरेज किया जाएगा। बैठक में सचिव वाणिज्य कर आबकारी श्रीमती आर शंगीता, प्रबंध संचालक स्टेट बेवरेज कापोर्रेशन श्री श्याम धावड़े, सचिव वित्त विभाग श्रीमती शारदा वर्मा समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

राज्यपाल डेका बोले- सशस्त्र सैन्य प्रदर्शनी युवाओं के लिए प्रेरणा का अद्वितीय स्रोत

रायपुर रायपुर में आयोजित भव्य सशस्त्र सैन्य समारोह युवाओं के लिए प्रेरणा का एक अद्वितीय स्रोत है। यह दिखाता है कि भारतीय सेना में शामिल होने का अर्थ केवल एक नौकरी पाना ही नहीं है बल्कि अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए समर्पण की भावना से ओत-प्रोत होना है। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज रायपुर में सशस्त्र सैन्य समारोह के समापन अवसर पर उक्त बातें कहीं। रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में विगत 05 अक्टूबर से आयोजित सशस्त्र सैन्य प्रदर्शनी का आज भव्य समारोह में समापन हुआ। इस कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने युवाओं से आव्हान किया कि भारतीय सेना राष्ट्र सेवा का प्रतीक है, इसमें शामिल होकर राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभाएं। सैन्य प्रदर्शनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ के युवाओं में साहस और समर्पण की भावना उत्पन्न होगी। छत्तीसगढ़ के युवा भी सेना में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे और देश की सुरक्षा में तत्पर रहेंगे। डेका ने कहा कि यह आयोजन हमे दिखाता है कि भारतीय सेना अब अत्याधुनिक तकनीकों और उपकरणों से सुसज्जित है। यह आत्मनिर्भर भारत की ओर हमारा बढ़ता हुए कदम है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस प्रगति की है। भीष्म टी-90 टैंक, स्ट्रेला मिसाइल और अन्य सैन्य उपकरण जो हम यहां देख रहे है, इस बात का प्रमाण है कि अपने संसाधनों और प्रतिभा का उपयोग करके हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ ताकतों में से एक बन रहे है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का शौर्य और वीरता अद्भुत है। हर सैनिक में त्याग, साहस और कर्त्तव्यपरायणता की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। इसमे महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। वे भी सेना के हर मोर्चे पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। हमारे जवानों का अदम्य साहस और कर्त्तव्य निष्ठा हमे यह सिखाता है कि जब देश की बात हो तो हमे सभी कठिनाइयों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। भारतीय सेना न केवल युद्ध क्षेत्र में बल्कि आपदा राहत कार्यों, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और शांति बनाए रखने के प्रयासों और जीवन के साथ हमारी सम्पत्ति की रक्षा करती है। इसलिए हमारे सैनिकों और उनके परिजनों के हित और कल्याण के लिए हमें भी अधिक-अधिक योगदान करना चाहिए। समारोह के पूर्व श्री डेका ने सैन्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सेना के उच्च अधिकारियों ने भीष्म टी-90 टैंक सहित विभिन्न मिसाइल, अत्याधुनिक लड़ाकू हथियारों एवं अन्य सैन्य उपकरणों के बारे में जानकारी दी। राज्यपाल श्री डेका ने शहीद जवानों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। समारोह में स्वागत भाषण रायपुर जिले के कलेक्टर श्री गौरव कुमार सिंह ने किया। समारोह के दौरान एनसीसी के कैडेटों का शानदार घुड़सवारी प्रदर्शन, जाबांज सैनिकों का डेयर डेविल मोटर साइकिल शो, गोरखा रेजिमेंट का खुखरी डांस प्रस्तुतिकरण, हेलीकॉप्टर से सलामी, सैैन्य छापेमारी, मिलिट्री बैंड कॉन्सर्ट एवं अन्य विविध कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव ने छत्तीसगढ़ और ओड़िशा उप क्षेत्र के बिग्रेडियर अमन आंनद को छत्तीसगढ़ शासन की ओर से मानपत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किया। सेना के अधिकारियों ने उपस्थित अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, श्री रामप्रताप सिंह एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड के संचालक श्री विवेक शर्मा, सेना के अधिकारीगण, सैनिक, उनके परिजन, आम जनता, युवा,महिलाएं तथा छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

सरकारी मदद की दिव्यांग ने लगाई गुहार, मांगे पूरी नहीं होने पर इच्छामृत्यु की मांग

गरियाबंद गरियाबंद के वार्ड क्रमांक 15 में रहने वाले दिव्यांग अनिल कुमार यादव ने कलेक्टोरेट परिसर के बाहर अपनी ट्रायसायकल में पोस्टर टांगकर दूसरी बार आमरण अनशन शुरू कर दिया है. अनिल ने अपनी जीविका और उपचार के लिए सरकारी मदद की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उसकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वह इच्छामृत्यु की मांग करेगा. अनिल कुमार यादव इससे पहले भी एक सप्ताह पूर्व इसी तरह से अनशन पर बैठा था, लेकिन अफसरों की समझाइश के बाद उसने अपना अनशन समाप्त कर दिया था. अब दोबारा उसकी सुध न लेने पर उसने फिर से अनशन शुरू कर दिया है. अनिल प्रशासन के समक्ष अपनी दो सूत्रीय मांग को लेकर यह प्रदर्शन कर रहा है. पहला उसे डेली वेजेस नौकरी में वापस रखा जाए और दूसरा उसके दिव्यांग पैर का उपचार कराया जाए. अनिल ने कहा की यह मांग पूरी नहीं हुई तो आगे वह इच्छा मृत्यु की मांग करेगा. दरअसल, अनिल 2008 से 2017 तक वन विभाग में दैनिक वेतन भोगी पर कार्यरत था, अचानक ब्रेन में दिक्कत होने के कारण उसे नौकरी से निकाल दिया गया. पत्नी भी घर छोड़ कर चली गई. पिछले कुछ साल से वह किसी तरह पहचान वालों से मदद लेकर गुजारा कर रहा है. पीड़ित ने बताया कि वह लगातार साशन-प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहा है. मामले में वन मंडला अधिकारी लक्ष्मन सिंह ने कहा है कि आवेदन में अनिल ने खुद कहा है कि वो दिव्यांग है, काम नहीं कर पाने की स्थिति में उसे काम पर कैसे रख सकते हैं. अधिकारी ने कलेक्टर से अनुरोध किया है की पीड़ित को समाज कल्याण विभाग से दिव्यांग जन को मिलने वाली योजना का लाभ दिलाया जाए.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उग्रवाद से प्रभावित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे. बैठक में शाह ने छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, नक्सल मोर्चे पर छत्तीसगढ़ सरकार बेहतर काम कर रही है. नक्सलियों के विरुद्ध अभियान को अभूतपूर्व सफलता मिल रही है. अमित शाह ने कहा, हमारी सरकार ने डिफेंसिव नीति को बदलकर आक्रामक नीति अपनाई है. छत्तीसगढ़ सरकार ने विकास का नया अभियान चलाया है. छत्तीसगढ़ में गांव-गांव तक विकास पहुंचा है. कई गांव में इलेक्शन में पहली बार वोटिंग हुई है. सरकार ने नक्सलियों के वित्तीय पोषण को भी रोका है. मोदी सरकार द्वारा बेहतर केंद्र-राज्य समन्वय से नक्सलवाद को देश से पूरी तरह से समाप्त किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में जनवरी से अब तक 194 नक्सली मारे गए अमित शाह ने कहा कि LWE से लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में है. 2026 मार्च तक ये देश इस दशकों पुरानी समस्या से मुक्ति पा लेगा. LWE का 85 फीसदी कैडर स्ट्रैंथ छत्तीसगढ़ में सिमट कर रह गया है. छत्तीसगढ़ में जनवरी से लेकर अब तक 194 मारे गए , 801 ने हथियार छोड़े और 742 नक्सलियों ने सरेंडर किया. आज फिर नक्सलवाद से जुड़े युवाओं से अपील करता हूं कि हथियार छोड़िए. मुख्यधारा में लौट आएं और देश के विकास में अपना योगदान दीजिए. सालभर पहले शाह ने नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के दिए थे निर्देश बैठक में छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय समेत आंध्र प्रदेश, बिहार,, झारखंड, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल हैं. साथ ही वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने में राज्यों का सहयोग कर रहे केन्द्रीय मंत्रालयों के 5 केन्द्रीय मंत्री और उच्चाधिकारी भी बैठक में उपस्थित हैं. इसके अलावा उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं. इससे पहले केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक अध्यक्षता 6 अक्टूबर 2023 को की थी. इस बैठक में गृह मंत्री ने वामपंथी उग्रवाद को जड़ से खत्म करने के लिए दिशा निर्देश दिए थे. अपनी अंतिम लड़ाई लड़ रहा वामपंथी उग्रवाद गौरतलब है कि मोदी सरकार की रणनीति से वर्ष 2010 के मुक़ाबले 2023 में हिंसा में 72% और मृत्यु में 86% कमी आई है और आज वामपंथी उग्रवाद अपनी अंतिम लड़ाई लड़ रहा है. केन्द्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के दूरदराज़ के इलाकों तक विकास योजनाएं पहुंचाने के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं. इन क्षेत्रों में सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी पर विशेष बल दिया जा रहा है. वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 14,400 किलोमीटर सड़क निर्माण हो चुका है और करीब 6000 मोबाइल टावर लगाए जा चुके हैं.

48 घंटे में नक्सलियों से हुआ सबसे बड़ा एनकाउंटर, छत्तीसगढ़-दंतेवाड़ा में 12 किमी तक नदी-नाले और पहाड़ी चढ़कर पहुंचे जवान

दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले की सीमा में सुरक्षाबलों के लगभग 1500 जवानों ने 48 घंटे तक चले नक्सल विरोधी अभियान में 31 नक्सलियों को मार गिराया। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से यह पहली बार है जब सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों को मार गिराया है। इससे पहले अप्रैल माह में कांकेर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में उच्च पदस्थ कैडर सहित 29 नक्सलियों को मार गिराया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले के बारसूर थाना और नारायणपुर जिले के ओरछा थाना क्षेत्र के अंतर्गत गवाड़ी, थुलथुली, नेंदूर और रेंगावाया गांव के मध्य पहाड़ी पर माओवादियों के कंपनी नंबर छह तथा पूर्वी बस्तर डिवीजन आदि के नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना मिली थी। सूचना के बाद गुरुवार को दोपहर बाद दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिले से डीआरजी और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के लगभग 1500 जवानों को नक्सल विरोधी अभियान में रवाना किया गया था। एक बजे से शुरू हुई मुठभेड़ दंतेवाड़ा जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरके बर्मन ने बताया कि तीन अक्टूबर को शुरू किया गया यह अभियान दो दिनों तक चला और यह राज्य में अब तक का सबसे बड़ा सफल नक्सल विरोधी अभियान साबित हुआ। बर्मन ने बताया कि शुक्रवार दोपहर लगभग एक बजे सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई और देर शाम नेंदूर और थुलथुली गांवों के बीच जंगल में समाप्त हुई। 12 किमी की ऊंची पहाड़ी चढ़ना पड़ा उन्होंने बताया कि शुक्रवार को मुठभेड़ स्थल से 28 नक्सलियों के शव बरामद किए गए थे, जबकि शनिवार को तीन और शव बरामद किए गए। मारे गए कथित नक्सली ‘वर्दी’ में थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने तलाशी अभियान में मदद की और नक्सलियों के शव दंतेवाड़ा लाए जा रहे हैं। बर्मन ने बताया कि मुठभेड़ स्थल तक पहुंचने के लिए खेतों और कच्चे रास्तों से मोटरसाइकिल पर लगभग 10 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है तथा करीब 12 किलोमीटर पहाड़ी रास्तों पर चढ़ना पड़ता है। कुछ स्थानों पर नक्सलियों के पोस्टर भी देखे जा सकते हैं। नदीं को करना पड़ा पार उन्होंने बताया कि इंद्रावती एरिया कमेटी, पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) कंपनी नंबर छह और माओवादियों के प्लाटून 16 का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में प्रवेश करने के लिए छिंदनार गांव में इंद्रावती नदी से होकर गुजरना पड़ता है, जहां एक किलोमीटर से अधिक लंबा पुल बनाया गया है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया, ”नक्सलियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि वे पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) कंपनी नंबर छह, माओवादियों के प्लाटून 16 और माओवादियों के पूर्वी बस्तर डिवीजन के थे।” नक्सलियों की नहीं हुई पुष्टि सुंदरराज ने कहा कि पुलिस को डीकेएसजेडसी (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) के सदस्य कमलेश, नीति, कमांडर नंदू जैसे बड़े नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना मिली थी। वे मारे गए लोगों में शामिल हैं या नहीं, यह उनकी पहचान सुनिश्चित होने के बाद पता चलेगा। अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान माओवादियों द्वारा दागे गए अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर (बीजीएल) के एक गोले में विस्फोट होने से राज्य पुलिस के जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) का एक जवान घायल हो गया। आधुनिक हथियार बरामद किए गए पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि सुरक्षाबलों ने शवों के साथ मुठभेड़ स्थल से एके-47 राइफल, एसएलआर (सेल्फ लोडिंग राइफल), इंसास राइफल, एलएमजी राइफल और .303 राइफल समेत हथियारों का जखीरा भी बरामद किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफल अभियान के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की है और कहा है कि ‘डबल इंजन’ सरकार (राज्य और केंद्र में भाजपा सरकार) नक्सली खतरे को खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्प है। अब तक 188 नक्सली मारे गए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मुठभेड़ के बाद इस वर्ष अब तक दंतेवाड़ा और नारायणपुर समेत सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने 188 माओवादियों को मार गिराया है। इससे पहले 16 अप्रैल को कांकेर जिले में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में 29 नक्सली मारे गए थे, जिनमें कुछ उच्च पदस्थ नक्सली भी शामिल थे।

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने किया परियोजनाओं का बचाव, ‘जंगलों पर किया जा रहा अतिक्रमण’

रायपुर: छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने राज्य में कोयला खनन एवं अन्य विकास परियोजनाओं का बचाव करते हुए कहा कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए यह सब आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बाघ अभ्यारण्यों के मुख्य क्षेत्रों से गावों के स्थानांतरण में तेजी लाने के केंद्र सरकार हाल के निर्देशों के अनुरूप कानून का सख्ती से क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी। जैव विविधता से भरपूर हसदेव अरण्य वन में कोयला परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई के खिलाफ विरोध के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ लोगों ने कोयला खनन और अन्य विकास परियोजनाओं का विरोध किया है, लेकिन जोर देकर कहा कि अधिकतर लोगों ने इनका समर्थन किया है। उन्होंने कहा, ‘‘संसाधनों से भरपूर इस क्षेत्र के लोग कब तक गरीब रहेंगे? विकास और ऊर्जा समान रूप से महत्वपूर्ण है। लोगों को रोजगार चाहिए। हां, अगर पेड़ काटे जाते हैं, तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि उस नुकसान की भरपाई की जाए। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रभावित समुदायों के स्वास्थ्य और आजीविका की रक्षा की जाए।’’ कोयले का तीसरा सबसे बड़ा भंडार ऐसी परियोजनाओं के लिए ग्राम सभा की सहमति के मुद्दे पर कश्यप ने कहा, ‘‘कानून ग्राम सभाओं को ‘इनकार’ करने की शक्ति देता है। कुछ मामलों में, उन्होंने इस शक्ति का इस्तेमाल किया है, लेकिन ज़्यादातर मामलों (कोयला खनन और अन्य परियोजनाओं) में समर्थन किया है।’’ छत्तीसगढ़ में 57 अरब टन कोयला भंडार है और यह झारखंड एवं ओडि़शा के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। मध्यप्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के बाद ओडिशा सबसे बड़े वन क्षेत्र वाला तीसरा राज्य है और इसके कुल भौगोलिक क्षेत्र का 44 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वनों से ढका हुआ है। हसदेव क्षेत्र दिल्ली से बड़ा छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में हसदेव अरण्य कोयला क्षेत्र में तीन समीपवर्ती कोयला ब्लॉक स्थित हैं । इसमें परसा, परसा ईस्ट केंटे बसन (पीईकेबी), और केंटे एक्सटेंशन कोल ब्लॉक (केईसीबी)। तीनों कोयला ब्लॉक राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित किए गए हैं। हसदेव अरण्य वन 1,70,000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। यह वन क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से भी बड़ा है। भारतीय खान ब्यूरो के अनुसार, इस वन में 5,179.35 मिलियन टन कोयला भंडार है। जनवरी में, राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने पीईकेबी कोयला खनन परियोजना के दूसरे चरण के लिए पेड़ों की कटाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का स्वत: संज्ञान लिया और राज्य वन विभाग से रिपोर्ट मांगी। विभाग ने अपने जवाब में कहा कि पेड़ों की कटाई ‘‘केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा दी गई मंजूरी और अनुमति का सख्ती से पालन करते हुए’’ की जा रही है। इसमें कहा गया है कि पीईकेबी कोयला ब्लॉक 1,898 हेक्टेयर वन भूमि को कवर करता है। 762 हेक्टेयर में फैले पहले चरण का खनन पूरा हो चुका है, और शेष 1,136 हेक्टेयर में दूसरे चरण का काम चल रहा है। स्थानीय ग्रामीण कर रहे हैं विरोध स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के बीच अगस्त के अंत में दूसरे चरण के लिए पेड़ों की कटाई फिर से शुरू हुई। जुलाई में, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने संसद को सूचित किया कि हसदेव अरण्य वन में कोयला खनन के लिए पहले ही 94,460 पेड़ काटे जा चुके हैं, और आने वाले वर्षों में 2.73 लाख से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘खान पुनर्ग्रहण और स्थानांतरण’’ के लिए मुआवजे के रूप में कुल 53,40,586 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से 40,93,395 पौधे विकसित हो गए हैं। बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों से गांवों के स्थानांतरण के केंद्र के निर्देश को लेकर कश्यप ने कहा, ‘‘हम कानून के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ प्रयास कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि लोग पहले जंगलों में वन्यजीवों के साथ सद्भाव से रहते थे, लेकिन अब यह मनोवृत्ति बदल गई है। उन्होंने कहा, ‘‘बाघ मेरी दादी के घर से कुछ मीटर की दूरी पर घूमते थे। मनुष्य और जानवर अपनी सीमाओं को जानते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति बदल गई है।’’ जंगलों का किया जा रहा है अतिक्रमण उन्होंने कहा, ‘‘यह सच है कि जंगलों पर अतिक्रमण किया जा रहा है, जिससे जंगल में संतुलन बिगड़ रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा मिल रहा है।’’ राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने 19 जून को एक आदेश जारी किया, जिसमें वन अधिकारियों को 54 बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों में स्थित 591 गांवों से 64,801 परिवारों के पुनर्वास में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। छत्तीसगढ़ के अचानकमार और उदंती-सीतानदी सहित कई बाघ अभयारण्यों में आदिवासी समुदायों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत अपने अधिकारों का दावा करते हुए निर्देश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

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