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पावर प्लांट में पाइपलाइन की वेल्डिंग करते समय मिट्टी धंसने से एक मजदूर की हुई मौत

कोरबा कोरबा के पताढ़ी गांव में स्थित पावर प्लांट में हादसा हुआ है। यहां पाइपलाइन की वेल्डिंग करते समय एक एक मजदूर सतीश शांडिल्य (30) की मौत हो गई। मजदूर की मौत के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। सुरक्षा और प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि प्लांट में सुरक्षा की कमी है और मजदूरों को बिना सेफ्टी गियर और प्रशिक्षण के काम पर लगाया जाता है। मजदूरों का आरोप है कि प्लांट में सुरक्षा की कमी है बिना सेफ्टी गियर और प्रशिक्षण के काम कराया जा रहा है। मुनाफे की होड़ में मजदूरों की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। पुलिस ने मृतक के परिजनों और साथी मजदूरों के बयान दर्ज किए हैं।   मृतक सतीश कुमार के बड़े भाई पूनी राम ने बताया कि वह मूलतः कापन के रहने वाले हैं। वह पिछले 6 माह से काम करते आ रहा था। उसे फोन पर उसके दोस्तों ने बताया कि सतीश दब गया उसे अस्पताल लेकर जा रहे हैं। जहा आकर देखा तो उसकी मौत हो चुकी थी। सतीश वेल्डिंग का काम करता था और प्लांट में पाइपलाइन की वेल्डिंग कर रहा था। इस दौरान मिट्टी घसने से वो दब गया। और उसकी मौत हो गई।

कैसे बस्तर बना संस्कृति, सहभागिता और विकास का मॉडल : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर राजधानी दिल्ली स्थित अशोक होटल में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन मॉडल, नवाचारों और जनभागीदारी आधारित योजनाओं ने विशेष पहचान बनाई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा प्रस्तुत बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों का ध्यान आकर्षित किया। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने अपने प्रस्तुतीकरण की शुरुआत राज्य में सुशासन की संस्थागत पहल से की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन कर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। ‘अटल मॉनिटरिंग पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से योजनाओं की निगरानी की जा रही है, जिससे शिकायतों का समाधान निर्धारित समय में संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर ईमानदारी व संवेदनशीलता से लागू करना है। बैठक में केंद्र की फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को छत्तीसगढ़ में ग्रामसभा, जनसंवाद और तकनीक के माध्यम से आमजन तक पहुँचाया गया है। बैठक का सबसे प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम पर विशेष प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘खेलोगे इंडिया, जीतोगे इंडिया’ मंत्र को उद्धृत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने इसे धरातल पर साकार किया है। बस्तर ओलंपिक अब सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति बन चुका है — जिसने युवाओं के हाथों से बंदूकें छीनकर गेंद, भाला और तीर थमा दिए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों से 1.65 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया। तीन चरणों — विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित यह प्रतियोगिता 11 पारंपरिक खेलों जैसे तीरंदाजी, खो-खो, कबड्डी, दौड़, रस्साकसी आदि पर केंद्रित थी। चार श्रेणियों — जूनियर, सीनियर, महिला और दिव्यांग — में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। मुख्यमंत्री साय ने दोरनापाल के पुनेन सन्ना का उदाहरण साझा किया, जो कभी नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र से थे, पर आज व्हीलचेयर दौड़ में पदक जीतकर पूरे समाज के लिए प्रेरणास्तंभ बन गए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा करते हुए कहा था कि यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा का उत्सव है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम उत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने न केवल आदिवासी संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं को संरक्षित किया, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय मंच भी प्रदान किया। इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों की 1,885 ग्राम पंचायतों के 1,743 सांस्कृतिक दलों और 47,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लोकनृत्य, गीत-संगीत, हाट-बाजार, पकवान प्रतियोगिताएं जैसे विविध रंगों से सजा यह उत्सव बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक को जोड़ते हुए बस्तर की एकता, पहचान और विकास का प्रतीक बन गया। सरकार द्वारा 2.4 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस आयोजन ने उत्सव और खेल के माध्यम से सकारात्मक भविष्य की नई चेतना जगाई है। बैठक में जिन राज्यों को अपनी योजनाओं के प्रस्तुतीकरण का अवसर मिला, उनमें छत्तीसगढ़ का ‘बस्तर मॉडल’ बेहद प्रभावशाली रहा।जनभागीदारी, संस्कृति और विकास के इस अनोखे मेल ने सभी को प्रभावित किया। बैठक में सुझाव दिया गया कि जनभागीदारी व सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित ऐसे मॉडल्स को अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इन पहलों को अनुकरणीय बताते हुए सुझाव दिया कि ऐसे नवाचार, जो समाज की जड़ों से जुड़ते हों और विकास की दिशा तय करते हों, उन्हें  विस्तार दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के ‘बस्तर मॉडल’ को जिस तरह सराहा गया, उसने यह स्पष्ट किया कि जनसहभागिता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के समन्वय से किस तरह दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की उपलब्धियों का प्रधानमंत्री ने मन की बात में किया जिक्र

रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी  ने  ‘मन  की  बात’ की  122 वीं  कड़ी में आज फिर  दंतेवाड़ा जिले  की  उपलब्धियों  का  जिक्र  किया। प्रधानमंत्री मोदी  ने  कहा  कि  मन  की  बात  में  हम  बस्तर  ओलंपिक  और  माओवाद प्रभावित  क्षेत्रों  में साइंस  लैब  की  चर्चा  कर  चुके  हैं। यहां के बच्चों में साइंस का पेशन है।    स्पोर्ट्स में भी कमाल कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों से पता चलता है कि इन इलाकों में रहने वाले लोग कितने साहसी  होते हैं। इन्होंने तमाम चुनौतियों के बीच अपने  जीवन को बेहतर बनाने की  राह  चुनी है। मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा में दंतेवाड़ा जिले के नतीजे बहुत शानदार रहे। करीब 95 प्रतिशत के साथ यह जिला दसवीं के नतीजों में टॉप पर रहा। वहीं  12वीं की परीक्षा में छत्तीसगढ़ में छठा स्थान हासिल किया। सोचिए जिस दंतेवाड़ा जिले में  कभी  माओवाद चरम पर था, वहां आज  शिक्षा का परचम लहरा रहा है। ऐसे  बदलाव हम सभी को गर्व से भर देते हैं।

गरियाबंद में 7 नकाबपोशों ने व्यापारी के घर घुसकर चाकू की नोक पर की लूट

गरियाबंद जिले के छुरा थाना के चरौदा गांव में बीती रात 7 नकाबपोशों ने व्यापारी के घर घुसकर चाकू की नोक पर लूट को अंजाम दिया. लुटेरे घर में रखे तीन से चार लाख रुपया नगद के साथ लगभग 400 ग्राम सोने के जेवर लूटकर ले भागे. घटना के बाद पुलिस पड़ताल में जुटी है. लुटेरों ने चरौदा गांव में निवासरत सूर्यकांत अग्रवाल के घर लूट को अंजाम दिया. नकाबपोश लुटेरों ने घर के पीछे से अंदर प्रवेश किया. इसके बाद घर के सदस्यों से मोबाइल लूटकर एक कमरे में बंद कर लूट को अंजाम दिया. जाते-जाते लुटेरों ने पुलिस को खबर नहीं करने की हिदायत तक दे डाली. व्यापारी ने लुटेरों के जाने के बाद पुलिस को घटना की जानकारी दी. सुबह होते ही मौके पर पहुंची पुलिस जांच टीम वारदात को अंजाम देने के तरीकों के साथ लुटरों के बारे में पूछताछ में जुटी है. पुलिस के आला अफसरों ने जल्द की अपराधियों तक पहुंचने की बात कही है.

पैसा डबल करने का लालच देकर 10 लाख 50 हजार रुपए की ठगी, भाजपा नेता और उसका साथी गिरफ्तार

सूरजपुर जिले में पैसा डबल करने का लालच देकर 10 लाख 50 हजार रुपए की ठगी का मामला सामने आया है. पुलिस ने प्रकरण में भाजपा नेता के साथ उसके साथी को गिरफ्तार किया है. दरअसल, दो प्रार्थियों ने भटगांव पुलिस से शिकायत की थी कि भाजपा नेता इरफान अंसारी अपने साथी विकेन्द्र जगने के साथ मिलकर पैसा डबल करने का लालच देकर उनसे 10 लाख 50 हजार की ठगी को अंजाम दिया है. पुलिस ने मामले की जांच में पाया कि इरफान अंसारी ने विकेन्द्र जगने के साथ मिलकर 2024 में ग्राम मलगा निवासी शिकायतकर्ताओं से 10 लाख 50 हजार रुपए की ठगी के अलावा अन्य व्यक्तियों से भी धोखाधड़ी कर रकम हासिल की है. मामले में पुलिस ने दबिश देकर आरोपी भाजपा नेता इरफान इंसारी और विकेन्द्र जगने को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने पूछताछ में रकम डबल करने के नाम पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाना स्वीकार किया है. आरोपियों के निशानदेही पर लेपटॉप व मोबाइल जप्त किया गया है. मामले में मिले सबूतों की पुलिस जांच कर रही है.

रायपुर का मामला: बाल श्रमिक के नाम पर उगाही में लगे है अधिकारी…

  रायपुर  बालश्रम आज के समय में एक अत्यंत ही चिंता जनक विषय है। जिसपर रोक लगाना बेहद ही जरुरी है। लेकिन जब बालश्रम रोकने वाले ही अधिकारी कर्मचारी ही अपने कर्तव्यों का निवर्हन पूरी ईमानदारी से नहीं करेंगे तब तक इस बाल मजदूरी पर रोक लगाना मुश्किल ही नहीं असंभव भी नजर आ रहा है। मिली जानकारी के अनुसार राजधानी रायपुर से लगे ग्राम कुथरेल में जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग के संजय निराला एवं श्रम विभाग तथा बचपन बचाओ आंदोलन समिति के संयुक्त टीम द्वारा चलाये गए एक अभियान के तहत धरसीवां स्थित संभव स्टील प्लांट से तथाकथित 4 बालश्रम में संलग्न बालकों का रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति (cwc) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के आदेश अनुसार बालकों को शासकीय बालगृह रायपुर में सुरक्षा संरक्षण और आश्रय में उपलब्ध कराया गया। इस मामले में प्लांट प्रबंधन के खिलाफ बाल श्रम अधिनियम में निहित प्रावधान, किशोर न्याय अधिनियम बालकों की देखरेख संरक्षण अधिनियम 2015, भारतीय न्याय संहिता में दिए गए प्रावधान के अनुसार कार्यवाही करने के साथ-साथ एट्रोसिटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई किए जाने हेतु थाना धरसीवा में प्लांट प्रबंधन और ठेकेदार के के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने आवेदन प्रस्तुत किया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यह उठता है कि जब 4 मई को जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग के संजय निराला एवं श्रम विभाग तथा बचपन बचाओ आंदोलन समिति के द्वारा इन बच्चो को रेस्क्यू कर लिया गया था तो इसकी सुचना सम्बंधित थाने में क्यों नहीं दी गई थी और जब मीडिया द्वारा इस मामले को लेकर सम्बंधित अधिकारी संजय निराला से संपर्क किया तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए थाना प्रभारी कि अनुपस्तिथि के कारण इस मामले कि सुचना नहीं दिए जाने का हवाला दिया गया है। इसके साथ ही अन्य छोड़े गए 8 बच्चो को जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग के संजय निराला एवं श्रम विभाग तथा बचपन बचाओ आंदोलन समिति के द्वारा किस आधार पर उन्हें छोड़ा गया है यह भी एक सोचनीय विषय है। झारखंड से आये दो बच्चो के परिजनों ने मिडिया के समक्ष बतलाया कि हमारे पास जो भी प्रमाण पात्र है उसके आधार पर मेरा पुत्र 18 वर्ष से अधिक का है लेकिन सम्बंधित दस्तावेजों को फर्जी बतलाकर हमारे बच्चो को रिहा करने से मना किया जा रहा है। उनका कहना है कि जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग के संजय निराला एवं श्रम विभाग तथा बचपन बचाओ आंदोलन समिति सदस्यों द्वारा अवैध रूप से हमारे बच्चो को अपने कब्जे में पिछले 20 दिनों से रखे हुए है जबकि CWC के प्रथमन्ययाधीश महोदय से मीडिया कर्मियों ने मुलाकात कर इस मामले कि जानकारी ली तो उन्होंने बतलाया कि ये प्रक्रिया मात्र दो दिन कि होती है संजय निराला द्वारा किस आधार पर इन बच्चो को अभी तक अपने पास रखे हुए है ये समझ से परे है। इसके साथ ही जब बच्चो को चार मई को रेस्क्यू करके लाया गया था तो संजय निराला द्वारा किसका इंतज़ार किया जा रहा था कि उन्होंने इसका अपराध 20 मई को सिलतरा चौकी (धरसींवा थाना) में दर्ज कराई गई। क्या संजय निराला के द्वारा किसी का इन्तजार किया जा रहा था। संजय निराला के कार्यालय में कार्यरत कुछ हमारे सूत्रों ने स्वयं हमारे संवादाता से संपर्क करके एक चौकाने वाले मामले कि जानकारी दी है कि संजय निराला के द्वारा कुछ दिन पूर्व ही एक पास्को एक्ट के मामले में आरोपी से लम्बा लेनदेन करके उसको (आरोपी) रिहा कर दिया गया था। अब देखने वाली बात तो यह होगी कि इस तरह के अधिकारी को विभाग के द्वारा कब तक बचाया जाता रहेगा या फिर इस तरह बाल संरक्षण का आड़ लेकर यह अवैध उगाही का खेल जारी रहेगा।

पोलमपाड़ दशकों बाद फिर से रौशन, लोगों ने घरों में बल्ब जलाकर दी एक-दूसरे को बधाई

सुकमा जिले के नक्सली प्रभावित पोलमपाड़ दशकों बाद फिर से रौशन हो गया है. पुलिस-प्रशासन और सीआरपीएफ की 223वीं बटालियन के प्रयासों से बिजली आपूर्ति बहाल की गई है. बिजली पहुंचने की खुशी में लोगों ने अपने घरों में बल्ब जलाकर एक-दूसरे को बधाइयाँ दी. गौरतलब है वर्षों से माओवाद का दंश झेल रहे पोलमपाड़ के ग्रामीणों तक बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. शासन के नियद नेला नार योजन के तहत इसी कड़ी में पोलमपाड़ होते हुए रायगुड़म तक सड़क का निर्माण जारी है, जिसके बनने से लोगों को आवागमन में सहूलियत होगी. सुकमा जिला मुख्यालय से करीब 50 किलो मीटर अंदरूनी क्षेत्र में नक्सलियों ने दशकों पहले खंभों को तोड़कर बिजली सेवा बाधित कर दिया था. जिसके बाद से थाना चिंतलनार का पोलमपाड़ वह इलाका रहा है, जहां के लोगों को अपने निजी कार्यों से भी बाहर जाने नक्सलियों की अनुमति की जरूरत होती थी. यदि नक्सली मना कर दें तो लोग गांवों से निकल भी नहीं पाते थे, लेकिन समय के साथ पोलमपाड़ में बदलाव आया है. बताया गया कि कभी इन क्षेत्रों में बिजली हुआ करती थी. लेकिन 2006 की बात है, जब सलवा जुडूम अभियान के प्रारंभ होते ही नक्सलियों पोलमपाड़ इलाके को पुरी तरह विद्युत सेवा से दूर करते हुए बिजली के सारे पोल तोड़ दिया था. नक्सलियों का इतना ख़ौफ़ था की लोग चाह कर भी विकास की माँग सरकार के पास नहीं रख पाते थे, पर कैम्प के खुलने के बाद अब गांव का माहौल पुरी तरह बदल चुका है. लोग गांव में बाकी सुविधाओं की भी माँग सरकार व स्थानीय प्रशासन व पुलिस, सीआरपीएफ से करने लगे हैं. सीआरपीएफ व जिला पुलिस के प्रयासों से कैम्प की स्थापना की गई, जिसके बाद अब लोगों को आने जाने में किसी की अनुमति की जरूरत नहीं पड़ती है. लोग जब दिल चाहे आना-जाना कर सकते हैं.

कवर्धा में तेज रफ्तार यात्री बस पलटी, 20 से अधिक यात्री घायल, ग्रामीणों ने पहुंचाया अस्पताल

कवर्धा कोरबा से कवर्धा की ओर आ रही तेज रफ्तार यात्री बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खेत में पलट गई। यह हादसा पंडरिया थाना क्षेत्र के सैगोनाडीह और किशुनगढ़ गांव के बीच हुआ है। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में बस सवार 20 से अधिक यात्री घायल हो गए, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय राहगीरों और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को बस से बाहर निकाला और एंबुलेंस की सहायता से पंडरिया अस्पताल पहुंचाया। सूचना मिलते ही पंडरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्रशासन ने घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में अतिरिक्त चिकित्सकों की व्यवस्था की गई है। कोयले से लदा ट्रेलर अनियंत्रित होकर पलटा गौरेला-अनुपपूर मार्ग पर कोयले से लदा ट्रेलर अनियंत्रित होकर पलट गया। पहले बेकाबू ट्रेलर वाहन पेड़ से टकराया, फिर सड़क पर पलट गया। वाहन इतनी तेज रफ्तार में था कि जिस पेड़ से टकराकर ट्रेलर पलटा वो पेड़ ही जमीन से उखड़ गया। हादसा रविवार सुबह गौरेला के फॉरेस्ट बैरियर के पास हुआ है। जानकारी के अनुसार कोयले से लदा ट्रेलर मध्यप्रदेश के रामपुर से चम्पा जांजगीर की ओर जा रहा था। इस हादसे में किसी के भी हताहत होने की जानकारी नही है। वहीं घटना के बाद ड्राइवर मौके से फरार हो गया है। गौरेला पुलिस जांच में जुटी है।

मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के लिए मोबाइल जमा करने की सुविधा प्रदान करेगा निर्वाचन आयोग

एमसीबी मतदाताओं की सुविधा बढ़ाने और मतदान दिवस की व्यवस्थाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने दो और व्यापक निर्देश जारी किए हैं। इनमें मतदान केंद्रों के बाहर मोबाइल जमा सुविधा प्रदान करना और प्रचार नियमों का सरलीकरण शामिल है। ये निर्देश लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के संबंधित प्रावधानों के अनुरूप है।  शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग और मतदाताओं विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को मतदान दिवस पर मोबाइल फोन संभालने में होने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने मतदान केंद्रों के ठीक बाहर मोबाइल जमा सुविधा की अनुमति देने का निर्णय लिया है। मतदान केंद्र से 100 मीटर की परिधि के भीतर केवल बंद (स्विच ऑफ) स्थिति में मोबाइल फोन रखने की अनुमति होगी। मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के पास साधारण पिजनहोल बॉक्स या जूट बैग रखे जाएंगे, जिनमें मतदाताओं को अपने मोबाइल फोन जमा करने होंगे। मोबाइल फोन मतदान केंद्र के अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, कुछ मतदान केंद्रों को स्थानीय प्रतिकूल परिस्थितियों के आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा इस प्रावधान से छूट दी जा सकती है। मतदान केंद्र के भीतर मतदाता की गोपनीयता सुनिश्चित करने वाला निर्वाचन संचालन नियम 49 एम सख्ती से लागू रहेगा। इसके अतिरिक्त, मतदान दिवस पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयोग ने प्रचार की अनुमति सीमा को निर्वाचन कानूनों के अनुरूप मतदान केंद्र से 100 मीटर की दूरी तक सीमित कर दिया है। मतदान दिवस पर मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में चुनाव प्रचार की अनुमति नहीं होगी। अतः मतदान दिवस पर उम्मीदवारों द्वारा मतदान दिवस पर ऐसे बूथ, जिनसे वे आधिकारिक मतदाता सूचना पर्ची (VIS) न होने की स्थिति में अनौपचारिक पहचान पर्ची वितरित करते हैं, अब मतदान केंद्र से 100 मीटर की दूरी के बाहर लगाए जा सकेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्तगण डॉ. सुखबीर सिंह संधू एवं डॉ. विवेक जोशी के नेतृत्व में भारत निर्वाचन आयोग विधिक ढांचे के अनुसार निष्पक्ष निर्वाचन कराने के लिए प्रतिबद्ध है और साथ ही मतदाताओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने हेतु लगातार नवाचार करता रहेगा।

छत्तीसगढ़ में आईपीएस कैडर की संख्या में 11 पदों की बढ़ोतरी

रायपुर केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को आवंटित आईपीएस कैडर की संख्या में बढ़ोतरी कर दी है. इस निर्णय के बाद अब छत्तीसगढ़ के आईपीएस कैडर में 142 से बढ़कर 153 अधिकारी शामिल होंगे. इसके लिए 21 मई को भारत के राजपत्र में प्रकाशन किया गया है. प्रदेश में नए पद सृजित करने के साथ राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को प्रमोशन का फायदा मिलेगा. अंतिम बार साल 2017 में कैडर रिवीजन के बाद  साइबर क्राइम और राज्य इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) के साथ जीपीएम, मोहला मानपुर, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़, चिरमिरी भरतपुर और खैरागढ़ एसपी के पद सृजित किए गए हैं. जारी सूचना के बाद आरआर 99 से बढ़ाकर 109 और राज्य पुलिस सेवा कैडर 43 से बढ़ाकर 46 कर दिया गया है.   अबतक तीन बार हुआ कैडर रिवीजन बता दें कि छत्तीसगढ़ का गठन होने के बाद तीन बाद आईपीएस कैडर का रिवीजन हुआ और कैडर बढ़ाया गया. 30 जनवरी, 2024 को पहली बार हुए रिवीजन में 81 पदों को मंजूरी दी गई थी. दूसरी बार रिवीजन 30 मार्च 2010 में किया गया था, इस बार कैडर को बढ़ाकर 1-3 कर दिया गया था. तीसरी बार 19 मई, 2017 को रिवीजन किया गया था, इस बार आईपीएस कैडर के लिए  142 को मंजूरी मिली थी. अब चौथी बार रिवीजन किया गया है, 11 पद और बढ़ाकर आईपीएस कैडर में 153 अधिकारियों को शामिल किया जाएगा. नए जिलों के निर्माण के चलते आईपीएस कैडर बढ़ाने की आवश्यकता जरूरी हो गई थी.

अवैध प्लाटिंग पर प्रशासन का शिकंजा, रजिस्ट्री और खरीदी-बिक्री पर लगाई रोक

मुंगेली नगर पंचायत बरेला में अवैध प्लाटिंग और बिना भवन अनुज्ञा के निर्माण के मामले में राजस्व और नगरीय प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं. मामले में 9 लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन अब तक किसी ने भी जवाब नहीं दिया है. इस पर प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अब अंतिम नोटिस के बाद बिना सुनवाई के सीधे एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी. जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा भूमि की अवैध प्लाटिंग कर खरीदी-बिक्री की जा रही थी, साथ ही निर्माण कार्य भी बिना अनुमति के किया जा रहा था. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम मुंगेली ने इन जमीनों की रजिस्ट्री और लेन-देन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. साथ ही, बिना भवन अनुज्ञा के चल रहे निर्माण कार्यों को भी तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए हैं. नाम इस प्रकार हैं (खसरा नंबर सहित) 1. मिंटू अरोरा (317) 2. विद्याभूषण देवांगन (321) 3. सत्येंद्र पिता जगन्नाथ (321) 4. पवन गुप्ता (376) 5. सरिता तिवारी (376) 6. गंगोत्री गुप्ता (376) 7. देवकी बाई धुरी (884) 8. चंद्रकुमार धुरी (884) 9. रामाधार धुरी (884) प्रशासन की चेतावनी, कार्रवाई से नहीं बचेगा कोई भी नायब तहसीलदार प्रकृति ध्रुव ने बताया कि नोटिस जारी होने के बाद भी किसी ने जवाब नहीं दिया है. इसलिए अब एक और अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा. इसके बाद भी जवाब नहीं मिलने पर प्रशासन संबंधितों के खिलाफ नियमों के तहत सीधे कार्रवाई करेगा, जिसमें निर्माण ध्वस्तीकरण, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है. वहीं नगर पंचायत बरेला के सीएमओ सीबी बांधे ने कहा कि नियमों के उल्लंघन पर कोई भी व्यक्ति चाहे वह प्रभावशाली ही क्यों न हो, कार्रवाई से नहीं बचेगा. नियमानुसार जो भी कार्रवाई प्रस्तावित होगी उसे किया जायेगा. बरेला में की जा रही यह कार्रवाई जिलेभर में एक सख्त प्रशासनिक संदेश दे रही है कि अवैध प्लाटिंग और अनधिकृत निर्माण पर अब कोई रियायत नहीं मिलेगी. यह कदम नगर विकास की दिशा में नियम आधारित व्यवस्था को मजबूती देने वाला साबित हो सकता है. लेकिन यह सार्थक तब होगा जब बिना किसी भेदभाव और बिना किसी दबाव के ऐसे मामले पर प्रशासन की कार्रवाई हो. जिला मुख्यालय के नगरीय क्षेत्र में कार्रवाई कब ? मुंगेली जिला मुख्यालय स्थित नगर पालिका मुंगेली और उससे लगे आसपास के गांवों में लोगों के कृषि भूमि को सस्ते दामों पर लेकर प्लाटिंग कर लाखों करोड़ों कमाने का धंधा बदस्तूर जारी है. जिस पर बड़ी और कड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है. शिकायत मिलने या मीडिया में मामला सामने आने पर नोटिस-नोटिस का खेल जरूर होता है, लेकिन कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है. यही वजह है कि ठोस कार्रवाई नहीं होने से यहां भूमाफियाओं के हौसले बुलंद है. जमीन का कारोबार नियमों को ताक पर रखकर रोक सको तो रोक लो की तर्ज पर खूब खेला जा रहा है.

खैरागढ़ में दर्दनाक सड़क हादसा, नगर पालिका अध्यक्ष की कार अनियंत्रित होकर पलटी, ड्राइवर की मौत

 खैरागढ़ खैरागढ़-दुर्ग मार्ग पर आज सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें खैरागढ़ नगर पालिका अध्यक्ष की कार अनियंत्रित होकर पलट गई. हादसे में कार चालक की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि कार में सवार नगर पालिका अक्ष्यक्ष की जान बाल-बाल बची है. स्थानीय लोगों ने तत्काल नगपुरा पुलिस को सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद शव को वाहन से बाहर निकालकर पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा. पुलिस हादसे की जांच में जुट गई है. जानकारी के अनुसार, नगर पालिका अध्यक्ष गिरजानंद चंद्राकर की भतीजी को रायपुर छोड़ने के लिए उनका निजी चालक सुनील सिंह (उम्र लगभग 32 वर्ष), निवासी ग्राम सहसपुर, गुरुवार 23 मई को महिंद्रा वाहन क्रमांक CG 08 AU 7935 से रायपुर गया था. रायपुर से लौटते समय कुम्हारी के पास भारी ट्रैफिक जाम में फंसने पर सुनील ने अध्यक्ष पति नंद चंद्राकर को फोन कर स्थिति से अवगत कराया. इस पर अध्यक्ष पति ने उसे जल्दबाजी न करने और आवश्यकता पड़ने पर गाड़ी वहीं रोकने की सलाह दी. जाम खुलने के बाद सुनील देर रात रायपुर से वापस खैरागढ़ के लिए रवाना हुआ. शुक्रवार सुबह लगभग 4 बजे, दुर्ग-खैरागढ़ मार्ग पर ग्राम सेवती के पास तेज रफ्तार के चलते वाहन चालक कार पर से नियंत्रण खो बैठा, जिससे कार पलट गई. हादसा इतना भीषण था कि ड्राइवर सुनील सिंह की मौके पर ही मौत हो गई. गौरतलब है कि सुनील सिंह की शादी पिछले वर्ष ही हुई थी. अचानक हुए इस हादसे से उनके परिजनों, खासकर पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है. गांव और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई है.

पीएचई इंजीनियर से बोले सांसद भोजराज, ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं करते कमीशन खाते हो

कांकेर छत्तीसगढ़ के कांकेर लोकसभा से सांसद भोजराज नाग अपने पुराने अंदाज में फिर से नजर आए. दरअसल आम जनता के समस्या के समाधान के लिए विशेष अभियान सुशासन तिहार जारी है. अभियान के तीसरे चरण में कोयलीबेड़ा में गुरुवार को समाधान शिविर लगाया गया, जिसमें सांसद भोजराज नाग शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान जल जीवन मिशन के काम में लापरवाही की शिकायत मिलने पर  उन्होंने अफसर की जमकर क्लास लगा दी. पीएचई इंजीनियर को भरे शिविर पर फटकारते हुए कहा कि ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं करते और कमीशन खाते हो. सुशासन तिहार को मजाक बना के रखे हो. सांसद भोजराज नाग से सामाधान शिविर मे ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन के अधूरे काम की शिकायत की. इसके बाद सांसद ने लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता को मंच पर बुलाकर क्लास लगाई. सांसद भोजराज नाग ने कहा कि सुशासन तिहार को मजाक बना के रखे दिए हो, ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लो. ठेकेदार पर कार्रवही नहीं करते हो और कमीशन खाते हो. उन्होंने कड़े लहजे में अफसर को कहा कि ग्रामीणों की समस्या को जल्द निपटारा होना चाहिए. गौरतलब है की इलाके के तमाम ग्राम पंचायतो मे जल जीवन मिशन का काम जारी है लेकिन ग्रामीणों को इसका फायदा नहीं मिल रहा और विभाग के अफसर ठेकेदारो पर किसी प्रकार की कोई कारवाई भी नहीं करते. जिससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए तरह तरह की परेशानी हो रही है. इस समस्या को लेकर ग्रामीण उक्त समाधान शिविर में पहुंचे थे. सांसद भोजराज नाग का यह रोद्र रूप कोई नई बात नहीं है. सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर अक्सर सांसद भोजराज इस तरीके की क्लास लगाते नजर आते हैं. इसके पहले कांकेर तत्कालीन कलेक्टर रहे शमी आबिदी पर भी एक शिविर के दौरान भड़के थे. इसके बाद कच्चे में एक सड़क ठेकेदार पर और एक थाना प्रभारी पर भी, इसके आलावा दर्जनों मामलें ऐसे हैं जहां पर सांसद भोजराज नाग जमकर फटकार लगाने की स्थिति सामने आई है.

राजधानी में मिला कोरोना का पहला मरीज, MMI नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती

रायपुर  देश के कई इलाकों में कोविड-19 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसको लेकर सरकारों ने चिंता जताई है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इसी बीच राजधानी रायपुर में कोरोना संक्रमित मरीज़ चिन्हित किया गया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। कोरोना कंट्रोल एवं डिमांड सेंटर के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. खेमराज सोनवानी ने इस मामले की पुष्टि की है। बता दें कि संक्रमित मरीज़ को MMI नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है, जहाँ उसका इलाज कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है। मरीज को सिंगल वार्ड में रखा गया है और इलाज की अलग से विशेष व्यवस्था की गई है। बताया जा रहा है कि लक्ष्मीनगर, पचपेड़ी नाका निवासी यह व्यक्ति सर्दी-खाँसी के रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल पहुँचा था। लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों को कोरोना की आशंका हुई, जिसके बाद उसका सैंपल लिया गया। रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद तुरंत उसे आइसोलेट कर इलाज शुरू कर दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने भी मरीज के संक्रमित होने की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीज के परिजनों का सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, हाल के दिनों में मरीज़ के संपर्क में आए लोगों की ट्रैकिंग और स्क्रीनिंग की जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि मरीज की किसी अन्य राज्य की यात्रा का कोई इतिहास नहीं है, जिससे यह संदेह गहरा रहा है कि संक्रमण स्थानीय स्तर पर फैला हो सकता है। राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे सावधानी बरतें, भीड़-भाड़ से बचें और यदि कोई लक्षण दिखें तो तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाँच कराएँ।

नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी ने सीएम साय से कहा – छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है

रायपुर   नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान एक आत्मीय क्षण सामने आया, जिसने सबका ध्यान खींचा। लंच ब्रेक के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हाथ थामते हुए मुस्कराकर कहा कि  “छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है।” इस एक वाक्य में प्रधानमंत्री का स्नेह, विश्वास और राज्य के प्रति विशेष रुचि झलक रही थी। उस क्षण, आसपास उपस्थित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम.के. स्टालिन भी मुस्कराते हुए इस संवाद के साक्षी बने। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में हो रहे सकारात्मक बदलाव, औद्योगिक निवेश, और ‘आत्मनिर्भर बस्तर’ की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों की सराहना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि कैसे बस्तर अब संघर्ष नहीं, संभावना का प्रतीक बन रहा है – जहाँ कभी बंदूकें चलती थीं, वहाँ अब मशीनें, लैपटॉप और स्टार्टअप की चर्चा हो रही है। नवा रायपुर में देश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट और एआई डेटा सेंटर की स्थापना से लेकर लिथियम ब्लॉक की नीलामी तक – छत्तीसगढ़ अब संसाधनों से परिपूर्ण राज्य बनने की ओर अग्रसर है और देश के विकास में छत्तीसगढ़ की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है। यह क्षण किसी औपचारिक संवाद का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री श्री साय के प्रयासों की सहज स्वीकृति और सराहना का था। नीति आयोग की बैठक में जहां देशभर के राज्यों ने अपने विकास मॉडल प्रस्तुत किए, वहीं छत्तीसगढ़ की प्रस्तुति ने प्रधानमंत्री की विशेष रुचि और सराहना प्राप्त की। यह स्पष्ट संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब केवल एक उभरता हुआ राज्य नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाला राज्य बन चुका है।

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