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हाईकोर्ट ने पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलपति की नियुक्ति को ठहराया अवैध

बिलासपुर हाईकोर्ट ने रायपुर स्थित पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलपति की नियुक्ति अवैध ठहरा दिया है. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें लिखा है कि शैलेन्द्र पटेल प्रभारी कुलसचिव पद के लिए निर्धारित योग्यता को पूरा नहीं करते हैं, और इस पद पर उनकी नियुक्ति अवैध है. इस फैसले के साथ ही हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रभारी कुलसचिव शैलेन्द्र पटेल की याचिका को खारिज कर दिया. वर्ष 2022 में जब शैलेन्द्र पटेल की प्रभारी कुलसचिव पद पर नियुक्ति को लेकर राहुल गिरी गोस्वामी ने आपत्ति दर्ज कराई थी, तब से यह मामला चल रहा था. शिकायतकर्ता ने पटेल की योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए थे. शिकायत के आधार पर एक FIR दर्ज की गई थी, जिसका उल्लेख हाईकोर्ट के आदेश में किया गया है. मामले की अंतिम सुनवाई 6 मार्च 2025 को हाई कोर्ट में हुई. सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिसे जारी किया गया है. राहुल गिरी गोस्वामी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि शैलेन्द्र पटेल की नियुक्ति नियमों के खिलाफ गैर-कानूनी ढंग से की गई. शिकायत के बाद दर्ज FIR दर्ज की गई थी. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि याचिकाकर्ता प्रभारी कुलसचिव शैलेन्द्र पटेल कुलसचिव पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक योग्यता को पूरा नहीं करते. इसलिए उन्हें कुलसचिव पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता.

नक्सल क्षेत्र में एक्सिस बैंक की शाखा खुलने पर वित्त मंत्री बोले – हां कभी बंदूकें बोलती थीं, अब वहां खुलेंगे भरोसे के खाते

रायपुर छत्तीसगढ़ के कोर नक्सल प्रभावित इलाकों में अब विकास की झलक दिखने लगी है. नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन के चलते अब नक्सलवाद अंतिम सांसे ले रहा है. हाल ही में उत्तर बस्तर कांकेर के सुदूर क्षेत्र पानीडोबीर में एक्सिस बैंक ने अपनी एक नई शाखा की शुरुआत की है. इसे लेकर प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा- “जिस धरती पर कभी बंदूकें बोलती थीं, अब वहाँ भरोसे के खाते खुलेंगे”. वित्त मंत्री चौधरी ने आगे लिखा कि पानीडोबीर (पखांजूर, उत्तर बस्तर कांकेर) में एक्सिस बैंक की नई शाखा का उद्घाटन सिर्फ एक बैंक का खुलना नहीं ,यह उस विश्वास की जीत है जो हिंसा पर विकास को चुनता है. जब निजी बैंक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शाखाएं खोलने लगें, तो समझिए कि बदलाव ने जड़ें पकड़ ली हैं. यह शाखा नहीं, आत्मनिर्भरता की अलख है.

छत्तीसगढ़ में नगरी-सिहावा के आंदोलन का एक चक्र हुआ पूरा, नक्सलवाद से घिरे क्षेत्र में अहिंसा की मिसाल

रायपुर तिहत्तर साल बीत गए, पांच पीढ़ियां खप गईं, तब जाकर छत्तीसगढ़ में नगरी-सिहावा के आंदोलन का एक चक्र पूरा हुआ। दुष्यंत कुमार की पंक्तियां याद आती हैं – “पिछले सफर की न पूछो, टूटा हुआ एक रथ है, जो रुक गया था कहीं पर फिर साथ चलने लगा है।” नक्सलवाद के लाल गलियारे के बीच नगरी-सिहावा अहिंसा का एक टापू है। 1952 से अब तक यहां के आदिवासियों ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपने भूमि अधिकारों के लिए निरंतर अहिंसक संघर्ष किया। जब नया छत्तीसगढ़ राज्य बन रहा था, तब लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहकर हजारों आदिवासी ने राजधानी रायपुर में डेरा डाले थे और देश की आज़ादी के बाद से चल रहे इस आंदोलन को गति दे रहे थे। डॉ. राममनोहर लोहिया सन् 1952 में छत्तीसगढ़ अंचल में धमतरी जिले के उमरादेहान गांव में आए थे। यहीं से उन्होंने जंगलों में बसे आदिवासियों के भूमि-अधिकार का मुद्दा उठाया था। आज भारत में आदिवासियों को आजीविका के लिए ज़मीन मिली है, वनग्रामों को राजस्व ग्राम जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। इन सबके मूल में नगरी-सिहावा का ही आंदोलन है। इसी उमरादेहान गांव में आगामी 24 मई को डॉ. राममनोहर लोहिया की अर्ध-प्रतिमा का अनावरण होने जा रहा है। आदिवासियों ने एक-एक मुठ्ठी अनाज हर घर से लेकर प्रतिमा तैयार कराई है। लोहिया जी जब तक रहे, यानी 1967 तक, इस आंदोलन का नेतृत्व किया। 1977 के बाद इसकी बागडोर देश के सुप्रसिद्ध समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने संभाली। उनका समूचा जीवन संघर्ष और आंदोलनों में बीता। आपातकाल में उन्नीस महीने जेल में रहे। अनेक संघर्षों के बाद सन् 1990 आते-आते नगरी-सिहावा के अठारह में से तेरह गांवों के आदिवासियों को ज़मीन का पट्टा मिल गया, पर पांच गांव फिर भी छूट गए। इससे पांच साल पहले प्रधानमंत्री राजीव गांधी यहां दुगली में आए थे, आदिवासियों की झोपड़ी के सामने चारपाई पर बैठे थे, पर आदिवासियों को उनके हक बिना पदयात्रा, प्रदर्शन व अनशन के नहीं मिले। रघु ठाकुर ने जाकर आदिवासियों के इस आंदोलन को तेज किया। उसी दुगली से रायपुर तक 120 किमी की पदयात्रा की जिसमें हजारों आदिवासी – आदमी, औरतें और बच्चे पैदल चले थे। इन आंदोलनों में पत्रकार मधुकर खेर, गोविंदलाल वोरा, सत्यनारायण शर्मा, नारवानी जी व रमेश वल्यानी का बड़ा सहयोग मिला। सरकार के मंत्रियों ने आकर आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित कराया, पर वादा पूरा नहीं किया। रघु जी को फिर रायपुर आकर अंबेडकर चौक पर अनशन शुरू करना पड़ा। सांसद जॉर्ज फर्नांडीस और शरद यादव ने आकर गिरफ्तारियां दीं, मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा ने हस्तक्षेप किया, तब जाकर दोनों पक्ष में समझौते के कागज़ तैयार हुए। इसके तहत तय हुआ कि अठारह गांवों के कब्जे की ज़मीन की जांच कराई जाएगी और निर्धारित नियम के तहत पट्टे दिए जाएंगे। जिन पांच गांवों को उजाड़ा गया है, उन गांवों के लोगों की भी झोपड़ियों को दुरुस्त कराकर बसाया जाएगा, ज़मीन दी जाएगी। तेरह गांवों को तो पट्टा मिल गया, लेकिन यही पांच गांव को पट्टा मिलने में पच्चीस साल और लग गए। देश की जनता के सामने जब भी इस आंदोलन का इतिहास आएगा, सुखराम नागे, जुगलाल नागे, बिसाहूलाल साहू, रामू, बिसाहिन बाई, समरीनबाई, रामप्रसाद नेताम, गौड़ा राय, वंशी श्रीमाली, जालिम सिंह जैसे अनेक लोगों का संघर्ष सभी को प्रेरणा देगा। इस आंदोलन के संदर्भ में यह बताना भी जरूरी है कि कुछ लोग सत्ता में रहते हुए भी समय पर कुछ नहीं कर पाए, कुछ ने समय का लाभ उठाकर अपने वैचारिक समर्थकों को उपकृत किया, तो कुछ आदिवासियों को समाजवादी धारा से हटाकर अपनी-अपनी राजनीतिक ज़मीन पुख्ता करने का प्रयास किया। नगरी-सिहावा का तिहत्तर साल चला आंदोलन अभी थमा नहीं है। यह चिकित्सा और शिक्षा के मूल अधिकार की लड़ाई को आगे ले जाएगा। इस आंदोलन का कई कारणों से ऐतिहासिक महत्व है। नक्सली हिंसा से घिरे वनांचल में यह अहिंसा का टापू है। भारत का पहला वनग्राम सम्मेलन यहीं से शुरू हुआ। और, वन अधिकार कानून का जन्मदाता यही क्षेत्र है। यहां की महिलाओं की मुक्त भावना और संघर्ष के जज़्बे से शेष भारत प्रेरणा ले सकता है।

चलते ट्रैक्टर से गिरने से बुजुर्ग की मौत

कोरबा कोरबा के उरगा थाना अंतर्गत मड़वारानी फाटक के पार करते समय एक चलते ट्रैक्टर से 56 वर्षीय बुजुर्ग ट्रैक्टर से नीचे गिर गया। हादसे में बुजुर्ग की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया। सभी का रो रोकर बुरा हाल है। बताया जा रहा है कि उरगा थाना अंतर्गत परसाभांठा निवासी 56 वर्षीय बिसाहू राम उर्फ गुडूम राम बिंझवार अपने रिश्तेदारों के साथ ट्रैक्टर में बैठकर खाद लेने गया हुआ था। जहां खाद लेकर घर वापस लौट रहे थे, ट्रैक्टर पर तीन लोग सवार थे। मड़वारानी फाटक पहुचने पर फाटक बंद था। इस दौरान दो व्यक्ति ट्रैक्टर से उतर कर पैदल फाटक पार कर दूसरी तरफ चले गए वहीं बिसाहू राम ट्रैक्टर पर ही बैठा हुआ था। फाटक पार करते समय  वह अचानक ट्रैक्टर से अनियंत्रित होकर नीचे गिर गया और ट्रैक्टर की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। देखते ही देखते राहगीरों की भीड़ एकत्रित हो गई और घायल को निजी वाहन से जिला मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया। गया जहां अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर मृत घोषित कर दिया।

गरियाबंद में रफ़्तार का कहर, कार ने बाइक सवार पति-पत्नी को मारी टक्कर, चालक गंभीर रूप से घायल

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आज सुबह-सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. तौरंगा में एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार दंपत्ति को ठोकर मार दी. इस घटना में बाइक चालक बुरी तरह घायल हो गया. हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस को आने में देर हो गई. स्थानीय लोगों ने प्राइवेट वाहन का सहारा लेकर बुजुर्ग दंपत्ति को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है. जानकारी के अनुसार, बाइक पर सवार बुजुर्ग दंपत्ति देवभोग से मैनपुर जा रहे थे. इसी दौरान सामने से आ रही तेज रफ्तार कार ने उन्हें ठोकर मार दी. हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया. इस हादसे में बाइक चालक के सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं. वहीं उसकी पत्नी को भी मामूली चोटें आई हैं. फिलहाल बाइक चालक की स्थिति गंभीर बनी हुई है. वहीं एंबुलेंस के समय रहते मौके पर न पहुंचने से आपात सेवाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. साथ ही ग्रामीणों में हादसे को लेकर आक्रोश है. फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है.

समाजसेवी गौ सेवक रामजीलाल अग्रवाल का 96 वर्ष की उम्र में निधन

रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के पिता और समाजसेवी गौ सेवक रामजीलाल अग्रवाल का आज निधन हो गया. उन्होंने 96 वर्ष की आयु में अपनी अंतिम सांस ली. उनका अंतिम संस्कार 25 मई को किया जाएगा. उनकी अंतिम यात्रा सुबह 10 बजे रामजी वाटिका, मौलश्री विहार से रायपुर से मारवाड़ी शमशान घाट तक जाएगी. बता दें, रामजीलाल अग्रवाल, अग्रवाल समाज के राष्ट्रीय संरक्षक एवं वरिष्ठ समाजसेवी थे. वे सांसद एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, अग्रवाल सभा रायपुर के अध्यक्ष विजय अग्रवाल, योगेश अग्रवाल, यशवंत अग्रवाल के पिता थे. वे आजीवन सक्रीय राजनीति से दूर रहे लेकिन प्रदेश के लगभग सभी राजनेता उनसे सलाह लेते थे. उनके निधन के बाद परिवार और अग्रवाल समाज समेत उनके सभी करीबी लोग शोक व्यक्त कर रहे हैं.

राज्यपाल डेका ने कहा कि यह संस्थान न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह ज्ञान, सेवा और संस्कृति का संगम

 रायपुर विप्र पब्लिक स्कूल, रायपुर के नव-निर्मित भवन का लोकार्पण जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही शिक्षा नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व को संवारने और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने की प्रक्रिया है। अपने उद्बोधन में राज्यपाल डेका ने विप्र शिक्षा समिति और विप्र कॉलेज के 30 वर्षों की शिक्षायात्रा को गौरवपूर्ण बताते हुए सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह ज्ञान, सेवा और संस्कृति का संगम है। राज्यपाल डेका ने कहा कि “आज जब पूरा विश्व डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब ऐसी शिक्षा की जरूरत है जो आधुनिकता के साथ-साथ हमें हमारी जड़ों और भारतीय जीवन मूल्यों से भी जोड़े रखे। राज्यपाल ने डेका कहा कि भवन कैसा है यह न देख हुए वहां कैसी शिक्षा मिल रही है यह देखा जाए। हमे ऐसी शिक्षा देना  है जो स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक समझ के साथ-साथ विज्ञान, गणित और तकनीकी शिक्षा को समन्वित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नव-निर्मित भवन आने वाले वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता का प्रतीक बनेगा। डेका ने कहा कि देश में गुरूकुल परंपरा को स्थापित करने में ब्राह्यण समाज का बहुत बड़ा योगदान है। ब्राह्यण समाज ने सदैव शिक्षा और नैतिकता तथा सामाजिक मार्गदर्शन को अपना कर्त्तव्य माना है। इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने अपना आर्शीवचन दिया।  कार्यक्रम  में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायकगण राजेश मूणत, पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, पूर्व मंत्री रवींद्र चौबे ने भी अपना संबोधन दिया।   इस अवसर पर संतगण सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और विप्र समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

भारत निर्वाचन आयोग ने देश में सुगम और समावेशी निर्वाचन के लिए पिछले तीन महीनों में 18 नए नवाचार प्रारंभ किए

एमसीबी भारत निर्वाचन आयोग ने देश में सुगम और समावेशी निर्वाचन के लिए पिछले तीन महीनों में 18 नए नवाचार प्रारंभ किए हैं। इनमें सुविधाजनक मतदान से लेकर राजनीतिक दलों की सहभागिता बढ़ाने, प्रक्रियागत सुधार से लेकर निर्वाचन कार्यों में लगे अमलों की क्षमता बढ़ाने, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से निर्वाचन की पूरी प्रक्रिया को सुगम एवं पारदर्शी बनाने से लेकर ईसीआई मुख्यालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने जैसे कई प्रभावी और अभिनव कदम शामिल हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने नई पहल करते हुए एक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की सीमा निर्धारित की है। ऊंची इमारतों एवं कालोनियों में अतिरिक्त मतदान केंद्र स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। मतदाता सूची के अद्यतनीकरण हेतु मृत्यु पंजीकरण का डेटा रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) डेटाबेस से सीधे प्राप्त किया जाएगा और सत्यापन के बाद अद्यतनीकरण किया जाएगा। आयोग ने मतदाता सूचना पर्चियों को और अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने का भी निर्णय लिया है। अब इसमें मतदाता का क्रमांक और भाग संख्या अधिक स्पष्टता के साथ प्रदर्शित किए जाएंगे। भारत निर्वाचन आयोग निवार्चन की संपूर्ण प्रक्रिया में हर स्तर पर राजनीतिक दलों की सहभागिता बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसके लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ देशभर में 4719 बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठक में राजनीतिक दलों के 28 हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भागीदारी दी है। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मिलाकर सीईओ स्तर पर 40, डीईओ स्तर पर 800 तथा ईआरओ स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ 3879 बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठक में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के प्रमुख दलों आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी, एनपीपी की मौजूदगी रही है। राजनीतिक दलों के साथ अलग-अलग स्तरों पर बैठकों के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। भारत निर्वाचन आयोग प्रक्रियात्मक सुधारों (Procedural Reforms) की दिशा में भी सक्रियता से काम कर रही है। आयोग द्वारा निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न स्टेकहोल्डर्स की सुविधा के लिए नया एकीकृत डैशबोर्ड ईसीआईनेट (ECINET) शुरू किया गया है। इसमें सभी हितधारकों के लिए एक ही स्थान पर सभी सेवाएं उपलब्ध हैं। ईसीआई के 40 से अधिक एप्स एक ही प्लेटफार्म पर मौजूद हैं। इसके साथ ही डुप्लीकेट इपिक (EPIC) नंबर की समस्या के समाधान के लिए ईसीआई द्वारा अब विशिष्ट इपिक नंबर की नई प्रणाली लागू की गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने और निर्वाचन कराने की पूरी प्रक्रिया में 28 हितधारकों की पहचान की है। इनमें मतदाता, निर्वाचन अधिकारी, राजनीतिक दल, उम्मीदवार एवं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 और निर्वाचन संचालन नियम 1961 और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों पर आधारित अन्य शामिल हैं। इन सभी हितधारकों के लिए अधिनियमों, नियमों और आयोग के निर्देशों के आधार पर प्रशिक्षण प्रस्तुतियाँ तैयार की जा रही हैं। आयोग ने निर्वाचन कार्मिकों (Election Staff) के सशक्तिकरण के लिए भी नए कदम उठाए हैं। बीएलओ को मानक फोटो पहचान पत्र (Standard Photo ID Card) दिए जाने के साथ ही नई दिल्ली स्थित आईआईआईडीईएम (IIIDEM) में लगातार क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसमें अब तक 3000 से अधिक बूथ स्तर पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अगले कुछ वर्षों में एक लाख से अधिक बीएलओ पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालयों के एसएमएनओ (SMNOs) और एमएनओ (MNOs) के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम भी आयोजित किए गए हैं। निर्वाचन में सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण पहलू के मद्देनजर बिहार के पुलिस अधिकारियों को भी आईआईआईडीईएम (IIIDEM) में प्रशिक्षण दिया गया है। नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में भी कार्यों में बेहतरी और कसावट के लिए कई सुधार जारी हैं। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने के साथ ही वहां ई-ऑफिस का कार्यान्वयन शुरू हो चुका है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ बेहतर समन्वय के लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ आयोग नियमित बैठकें भी कर रहा है।

छत्तीसगढ़ की बेटी ने कान्स में दिखाई धरती की पीड़ा, अनोखी ड्रेस पहन रेड कार्पेट पर चली

दुर्ग फांस में कान्स फिल्म फेस्टिवल दुनिया भर में ग्लैमर, सिनेमा और सेलिब्रिटीज के जाना जाता है। इस बार छत्तीसगढ़ से दुर्ग को रहने वाली जूही व्यास ने पहली बार पहुंची। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली राष्ट्रीय संस्था ग्रीनपीस इंडिया के साथ जूही व्यास कान्स में पहुंची। जहां जूही व्यास ने संस्था की राष्ट्रीय निदेशक मोहिनी शर्मा के साथ मिलकर वॉइस ऑफ द प्लैनेट अभियान के तहत ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े संदेश के साथ अनोखी ड्रेस पहनी। जूही व्यास की ड्रेस को वियतनाम के प्रसिद्ध डिजाइनर गुयेन टीएन ट्रियन ने डिजाइन किया। इस ड्रेस को तैयार करने में दो महीने से अधिक का समय लगा। इस ड्रेस के माध्यम से धरती की पीड़ा को दर्शाया गया है। जूही को ड्रेस जलती हुई पृथ्वी का प्रतीक थी, जिसमें तापमान में बढ़ोतरी और जलवायु असमानता के परिणामों को दिखाया गया। आग जैसे रंगों और डिजाइन से सजी इस ड्रेस को दुनिया के संकट की ओर इशारा करती है और प्रदूषण फैलाने वालों को भविष्य की पृथ्वी को दर्शाया गया। जूही व्यास दुर्ग के भिलाई की रहने वाली है। जूही दो बच्चों की मां है और सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपनी करियर की शुरुआत की थी। वह एक मेकअप आर्टिस्ट और मॉडल भी हैं। लगभग 12 साल पहले जूही ने लेडिस सैलून एंड स्पा की शुरुआत की थी। जूही व्यास ने वर्ष 2022 में मिसेज इंडिया इंक प्रतियोगिता में पहली रनर अप का खिताब जीता। वर्ष 2023 में कैलिफोर्निया में आयोजित मिसेज ग्लोब प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया और पीपल्स चॉइस का खिताब जीतकर पहली भारतीय बनीं। वर्ष 2024 में जूही ने चीन में आयोजित मिसेज ग्लोब प्रतियोगिता में जूरी पैनल में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

नीति आयोग की बैठक में शामिल होने विकास रोडमैप के साथ पहुंचे मुख्यमंत्री साय

रायपुर नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने से पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चर्चा करते हुए राज्य के विकास रोडमैप, नक्सलवाद के अंत और नई औद्योगिक नीति को लेकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री साय ने बातचीत में कहा कि वह इस महत्वपूर्ण बैठक में छत्तीसगढ़ की भावी विकास योजनाओं और राज्य के दृष्टिकोण को नीति आयोग के समक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के प्रधानमंत्री के लक्ष्य के अनुरूप, हमारा उद्देश्य “विकसित छत्तीसगढ़” की दिशा में ठोस कदम बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर और अन्य क्षेत्रों के समावेशी विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने नक्सलवाद की समस्या पर भी बात की और कहा कि राज्य में अब यह समाप्ति की ओर है, क्योंकि सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ विकास को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय ने बताया कि वह बैठक में राज्य की नई औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन और औद्योगिक अवसरों की संभावनाओं पर भी प्रकाश डालेंगे। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़, प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

बिहान योजना से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी

सफलता की कहानी बिहान योजना से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी सरिता और संतोषी बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल बिलासपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना ने जिले की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाई है। योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं अब न केवल अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। कोटा ब्लॉक के ग्राम चपोरा की सरिता जायसवाल और ग्राम कर्रा की संतोषी ऐसी ही महिलाएं हैं,जिन्होंने बिहान योजना से सहायता लेकर अपने जीवन को एक नई दिशा दी है।     कोटा ब्लॉक के ग्राम चपोरा की  सरिता जायसवाल ने प्रज्ञा समूह से जुड़कर योजना का लाभ उठाया। समूह से आर्थिक सहायता प्राप्त कर उन्होंने बर्तन और फर्नीचर की दुकान शुरू की, जो आज उनके परिवार के लिए स्थायी आय का साधन बन गई है। सरिता बताती हैं, “पहले घर चलाना भी मुश्किल था, लेकिन अब खुद की कमाई से बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हूं।” सरिता ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार जताते हुए कहा कि बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आ रही है       इसी तरह, ग्राम कर्रा की श्रीमती संतोषी ने शारदा समूह से सहायता लेकर ईंट निर्माण इकाई की शुरुआत की। शुरुआत में संसाधनों और तकनीक की कमी से मुश्किलें जरूर आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज संतोषी की ईंट भट्ठा स्थानीय निर्माण कार्यों में प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन चुकी है और इस माध्यम से वह  लखपति दीदी बन चुकी है। संतोषी कहती है कि इस उद्यम के लिए आत्मविश्वास बिहान योजना के कारण आया है जिसके लिए वह मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देती है जिनके कुशल नेतृत्व में योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो रहा है जिससे लोग लाभान्वित हो रहे हैं।        इन  महिलाओं की सफलता ने उनके गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है। बिहान योजना के तहत सैकड़ों महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ चुकी हैं और छोटे-छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर अपने परिवार का सहारा बन रही हैं। सरिता और संतोषी की तरह कई अन्य महिलाएं भी बिहान योजना के जरिए न सिर्फ अपने परिवार का सहारा बनी हैं, बल्कि गांव के विकास में भी अपना योगदान दे रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। रेहाना/

मुख्यमंत्री के सुशासन सड़कों के जाल का हो रहा है विस्तार

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर वासियों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी और सड़कों के विस्तार हेतु सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं जिसका साकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहा है जशपुर में नागरिकों के आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए छः सड़कों के निर्माण कार्य हेतु 18 करोड़ 46  लाख 87 हजार की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। इन मार्गो के निर्माण से लोगों के आवागमन में सुगमता होगी। जिले के लोगों में मिलने वाली सुविधा से खुशी की लहर है।           राज्य शासन से स्वीकृति कार्यो में वर्ष 2024-25 के बजट में शामिल जिला जशपुर के ग्राम चटकपुर से रेंगारबहार पहुंच मार्ग लम्बाई 2.46 किमी. के निर्माण हेतु 02 करोड़ 89 लाख 86 हजार की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसी प्रकार कुनकुरी-औरीजोर-मतलूटोली-पटेलापारा पहुंच मार्ग लंबाई 2.54 किमी. निर्माण कार्य हेतु 03 करोड़ 01 लाख 95 हजार, एन.एच.43 के किमी. 540/4 से मयाली डेम तक मार्ग लंबाई 2.28 किमी. निर्माण हेतु 02 करोड़ 85 लाख 01 हजार, मयाली नेचर कैम्प से मधेश्वर मंदिर तक मार्ग लंबाई 2.20 किमी. निर्माण हेतु 2 करोड़ 71 लाख 89 हजार, रानीबंध चौक से चिडराटांगर होते हुए पंडरीआमा-उपरकछार मार्ग लंबाई 3.44 किमी. निर्माण कार्य हेतु 3 करोड़ 29 लाख 58 हजार और जोकरी से मधेश्वर पहाड़ तक पहुंच मार्ग लंबाई 2.88 किमी. निर्माण कार्य हेतु 3 करोड़ 68 लाख 58 हजार की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है।

CM ने चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ से चर्चा कर अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं और विभिन्न विषयों पर जानकारी ली

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी रायपुर के सड्डू स्थित आईटीएसए हॉस्पिटल का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने राजधानी वासियों और अस्पताल प्रबंधन को बधाई और शुभकामनाएं दी।         मुख्यमंत्री ने कहा कि 350 बिस्तरों की क्षमता वाले इस मल्टीस्पेशलिटी, पीडियाट्रिक और वेलनेस सेंटर से न केवल राजधानी रायपुर बल्कि पूरे प्रदेश के लोगों को अत्याधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएँ मिलेंगी।उन्होंने बताया कि पिछले सत्रह महीनों में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में तीव्र गति से विकास हो रहा है। सरकार द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में मेडिसिटी परियोजना की शुरुआत की गई है, जो भविष्य में 5 हजार बिस्तरों वाले मेडिकल हब के रूप में विकसित होगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ से चर्चा कर अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं और विभिन्न विषयों पर जानकारी ली।         इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, विधायक राजेश मूणत, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विधायक मोतीलाल साहू और प्रबुद्धजन   उपस्थित रहे।

21 मई को माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में मिली ऐतिहासिक कामयाबी पर मुख्यमंत्री ने जवानों को दी बधाई

रायपुर : जवानों के बुलंद हौसलों से मिटेगा नक्सलवाद का कलंक: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय ने बासिंग स्थित बीएसएफ कैम्प पहुंचकर की जवानों की हौसला अफजाई कहा- फोर्स के अदम्य साहस और शौर्य को नमन 21 मई को माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में मिली ऐतिहासिक कामयाबी पर मुख्यमंत्री ने जवानों को दी बधाई रायपुर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि हमारे जवानों का हौसला दुर्गम पहाड़ों से भी ऊंचा है। नक्सलवाद के विरूद्ध निर्णायक लड़ाई में हमारे जवानों ने अदभुत, साहस, शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया है। जवानों के बुलंद हौसलों से अब वह दिन दूर नहीं जब बस्तर से नक्सलवाद का नामोनिशान मिट जाएगा। मुख्यमंत्री साय आज ओरछा ब्लॉक के ग्राम बासिंग स्थित बीएसएफ कैम्प पहुंचे, जहां पर उन्होंने 21 मई को डीआरजी-बीएसएफ और जिला बल के द्वारा माओवादियों के विरूद्ध नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर की सरहदी पहाड़ियों में चलाए गए नक्सल विरोधी ऑपरेशन में 27 नक्सलियों को मार गिराने वाले जवानों की हौसला-अफजाई की। उन्होंने बासिंग कैम्प में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह माओवाद के विरूद्ध अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है जिसमें सुरक्षा बलों ने हार्डकोर माओवादी बसवा राजू सहित 27 नक्सलियों को मार गिराया है। मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह भी बासिंग पहुंचे। मुख्यमंत्री ने जवानों की हौसला अफ़ज़ाई करते हुए तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया। उन्होंने जवानों से कहा कि बस्तर में अमन और शांति लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बल के जवानों को 50 मोटर बाइक पर हरी झंडी दिखाकर गस्त करने के लिए रवाना किया। मुख्यमंत्री साय ने जवानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने जिस तरह उच्च स्तरीय रणनीति बनाकर ऑपरेशन को अंजाम दिया और कामयाबी हासिल की वह काबिले-तारीफ है। फोर्स के इस अदम्य साहस और शौर्य को नमन है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब बस्तर के माथे से माओवाद का कलंक पूरी तरह से मिट जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश से नक्सल समस्या को समूल समाप्त करने का संकल्प लिया है, वह पूरा होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि वह दिन दूर नहीं जब बस्तर अंचल छत्तीसगढ़ के विकास से पूरी तरह जुड़ जाएगा। उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि बस्तर के अंदरूनी इलाके, जहां कुछ साल पहले तक जाना भी संभव नहीं था, वहां अब शिक्षा, स्वास्थ्य, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में अब गति आएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माओवाद प्रभावित क्षेत्रों को शासन की योजनाओं से जोड़ने नियद नेल्लानार, पीएम जनमन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसका सकारात्मक बदलाव अब बस्तर में दिखने लगा है। माओवाद की समाप्ति के साथ ही बस्तर विकास की ओर तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने ऑपरेशन में शामिल सभी जवानों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए उनकी बहादुरी के लिए बधाई दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इस ऑपरेशन और जवानों की बड़ी और ऐतिहासिक सफलता की सराहना राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन होने जा रहा है जो विकास और प्रगति की राह पर बस्तर को ले जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जवानों को एलईडी सेट और गिफ्ट हैम्पर भेंट किए। इस अवसर पर ऑपरेशन में शामिल जवानों ने की गई तैयारियों और रणनीति की जानकारी मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री को दी। इसके पहले, जवानों ने मुठभेड़ के बाद माओवादियों से रिकवर किए गए हथियारों का प्रदर्शन किया, जिसमें बीजीएल लॉन्चर, 12 बोर बंदूक, .303 बंदूक, 7.62 रायफल, 5.56 एमएम इंसास, एके-47, 9 एमएम कार्बाइन सहित विभिन्न प्रकार के हथियार सम्मिलित थे। इस मौके पर पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, डीआईजी अमित तुकाराम कामले, कलेक्टर नारायणपुर श्रीमती प्रतिष्ठा ममगाईं, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

अबूझमाड़ की एक ही दिन में बदल गई तस्वीर, जगह-जगह लाल रंग के नक्सली स्मारक दिखाई देते अब वहा जवानों की है धाक

जगदलपुर अबूझमाड़ इलाके में हाल ही में हुई मुठभेड़ के बाद वहां की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है. माओवादियों की मांद कहे जाने वाले अबूझमाड़ में प्रवेश करते ही जगह-जगह लाल रंग के नक्सली स्मारक दिखाई देते हैं. लेकिन एक ही दिन में यह सारी चीजें बदल गई, अब यहां सुरक्षाबलों के जवानों की धाक है. अबूझमाड़ के पथरीले रास्तों और उफनते नदी-नालों के बीच से होते हुए बोटेर गांव तक पहुंचा जा सकता है. सबसे पहला नक्सली स्मारक आदेड चौक में देखने को मिलता है. इस चौक की हालत भी बयां करती है कि यह इलाका कितना उपेक्षित और असुरक्षित रहा है. सड़क किनारे गिरे हुए बिजली के खंभे, टूटे रास्ते और वीरानी बोटेर गांव तक पहुँचने से पहले तोंदेबेड़ा, डोंडरबेड़ा और कूड़मेल जैसे गांवों को पार करना होता है. ये गांव भी उसी सन्नाटे और भय की चादर में लिपटे हुए हैं. बोटेर पहुँचते ही नज़ारा अलग था बड़ी संख्या में ग्रामीण यहाँ एकत्रित थे. बातचीत में पता चला कि ये लोग कुंडेकोट गांव के निवासी हैं, जो 21 मई से बोटेर में शरण लिए हुए हैं. दरअसल, कुंडेकोट में ही पुलिस और नक्सलियों के बीच ऐतिहासिक मुठभेड़ हुई थी. इस ऑपरेशन में नक्सलियों के जनरल सेक्रेटरी नंबाला केशव को मार गिराया गया, जिस पर डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम था. उसके साथ 26 अन्य नक्सली भी मारे गए. इस बड़ी कार्रवाई के बाद कुंडेकोट के ग्रामीण डर के साए में आ गए और जान बचाने के लिए अपना गांव छोड़कर बोटेर आ पहुंचे. नक्सलियों के इस मांद की सफाई (ऑपरेशन) डीआरजी के जवानों ने पूरी कुशलता के साथ किया. अब न तो नक्सली हैं, और न ही उनकी धमक. अब केवल डीआरजी के जवानों की धमक सुनाई पड़ती है. बसवराजु की मौत से पूरी तस्वीर बदल गई है, अब सुरक्षाबल के जवान इसे वापस नक्सलगढ़ नहीं बनने देने के लिए प्रतिबद्ध नजर आते हैं. अबूझमाड़ की यह जंग सिर्फ हथियारों की नहीं, हौसले, रणनीति और बलिदान की भी गवाही देती है.

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