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सीएम हेल्पलाइन में सौ दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतें तीन लाख 39 हजार 727 हो गई, अधिकारी गंभीर नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायतों के निराकरण को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। विभागों एवं जिलों की सौ दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतें तीन लाख 39 हजार 727 हो गई हैं। अब मुख्यमंत्री 28 अक्टूबर को समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में शिकायतकर्ताओं से बात कर शिकायतों का निराकरण करेंगे। लोक सेवा प्रबंधन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने सभी विभाग प्रमुखों एवं जिला कलेक्टरों को इस संबंध में पत्र जारी किया है। सबसे अधिक शिकायत महिला एवं बाल विकास विभाग की है। विभाग के अंतर्गत पीएम मातृ वंदना योजना की 64 हजार 600, स्वास्थ्य विभाग की जननी सुरक्षा, श्रमिक प्रसूति सहायता योजना में राशि प्राप्त न होने की 60 हजार 406 शिकायतें हैं।  इन विभागों की शिकायतें भी लंबित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में पीएम ग्रामीण आवास योजना में राशि प्रदाय न करने की 15 हजार 870 शिकायतें। गृह विभाग में विवेचना में विलंब व लापरवाही करना, समय से प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत नहीं करना, किसी पक्ष से मिलकर दबाव में सही कार्रवाई न करने की 13 हजार 345 शिकायतें। श्रम विभाग में असंगठित शहरी, ग्रामीण कर्मकार मंडल की संबल योजना में लाभ न मिलने की 12 हजार 626 शिकायतें। राजस्व विभाग की नामांतरण एवं बंटवारा संबंधी मामले निराकृत न होने संबंधी 12 हजार 43 शिकायतें। ऊर्जा विभाग में बिजली न आने, वोल्टेज की समस्या से संबंधित 10 हजार 976 शिकायतें। अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति न प्राप्त होने, छात्रावासों में आवास, भोजन, सफाई आदि की सुविधा न होने, प्रवेश न मिलने, अतिक्रमण संबंधी आठ हजार 471 शिकायतें। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पोस्ट मैट्रिक, प्रावीण्य, विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति न मिलने संबंधी सात हजार 175 शिकायतें। खाद्य विभाग में नवीन राशन कार्ड एवं पात्रता पर्ची जारी न होने संबंधी पांच हजार 312 शिकायतें। स्कूल शिक्षा विभाग में समेकित छात्रवृत्ति योजना अंतर्गत कक्षा एक से 12 तक छात्रवृत्ति न मिलने की चार हजार 435 शिकायतें। जनजातीय कार्य विभाग में आवास सहायता योजना की राशि प्राप्त न होने संबंधी 543 शिकायतें लंबित हैं।  

ग्वालियर से मुरैना आ रही बस में ऐसा झटका लगा कि शीशे फोड़कर कई लोग बाहर सड़क पर गिरे, कंडक्टर की मौत

मुरैना ग्वालियर से मुरैना आ रही बस हाईवे पर डिवाइडर से टकराई और इसके बाद बस के पिछले चार पहिए निकल गए। इससे बस में ऐसा झटका लगा कि शीशे फोड़कर कई लोग बाहर सड़क पर गिरे। हादसे में बस कंडक्टर की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं पांच से अधिक यात्री घायल हो गए, जिनमें से एक ही हालत नाजुक है। ब्रेक मारते ही निकले पहिए नेशनल हाईवे 44 पर छौंदा टोल प्लाजा के पास बुधवार की सुबह यह हादसा हुआ। ग्वालियर से मुरैना आ रही जयभारत ट्रैवल्स बस जैसे ही छौंदा टोल से 300 मीटर आगे बढ़ी, तभी सामने जा रही मिनी लोडिंग से साइड लेने के फेर में बस के पिछले पहिए हाईवे के डिवाइडर से टकरा गए। बस को काबू करने के लिए ड्राइवर ने जोर से ब्रेक लगाए तो बस के पिछले पहिए कमानी सहित निकल गए। इससे बस में तेज झटका लगा और 20-25 मीटर दूर तक घिसटती गई। झटके से गिरे कई यात्री, कंडक्टर की मौत झटके से गेट पर खड़ा कंडक्टर 45 वर्षीय सीताराम सड़क पर मुंह के बल गिरा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बस में इतना तेज झटका लगा कि ड्राइवर के पास वाली सीट पर बैठे यात्री ग्वालियर बस के आगे के शीशे को तोड़ते हुए नीचे सड़क पर गिरे, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। ड्राइवर व तीन अन्य सवारियों को भी चोटें आई हैं, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। घर के बाहर खेल रहे डेढ़ साल के बच्चे की ट्रैक्टर से कुचलकर मौत स्टेशन रोड थाना क्षेत्र के विसंगपुर गांव में मंगलवार को घर के बाहर खेल रहे डेढ़ साल के बच्चे पर ट्रैक्टर चढ़ गया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। विसंगपुर निवासी गिर्राज कुशवाह का डेढ़ साल का बच्चा दिव्यांश घर के बाहर खेल रहा था, तभी एक ट्रैक्टर गुजरा तो वह बच्चे को देख नहीं सका, जिस पर ट्रैक्टर बच्चे के ऊपर से निकल गया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

ओरछा की समृद्ध विरासत व धरोहर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी पहचान- प्रमुख सचिव श्री शुक्ला

भोपाल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में ओरछा के ऐतिहासिक समूह को नामांकित कराने के लिये म.प्र. टूरिज्म बोर्ड द्वारा तैयार कराये गए डोजियर (संकलित दस्तावेज) को केंद्र सरकार ने यूनेस्को की विश्व धरोहर कमेटी को सौंप दिया है। वर्ष 2027-28 के लिये केंद्र द्वारा ओरछा के ऐतिहासिक समूह को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने हेतु अनुशंसा की है। पेरिस स्थित यूनेस्को कार्यालय में भारतीय राजदूत श्री विशाल वी शर्मा ने यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र के निदेशक श्री लाज़ारे एलौंडौ असोमो को ओरछा का डोजियर सौंपा है। यूनेस्को की आधिकारिक घोषणा के बाद ओरछा देश की ऐसी एकमात्र विश्व धरोहर स्थली होगी, जो राज्य संरक्षित है। प्रमुख सचिव पर्य़टन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक म.प्र. टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने और पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के सतत प्रयास किये जा रहे है। प्रमुख सचिव श्री शुक्ला ने यूनेस्को द्वारा डोजियर को स्वीकार किए जाने पर हर्ष जताते हुए कहा कि, यह प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। ओरछा अपनी अद्वितीय स्थापत्य शैली और समृद्ध ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। विश्व धरोहर सूची में नामांकित होने से ओरछा की ऐतिहासिक धरोहरों की वैश्विक पहचान को और मजबूती मिलेगी। साथ ही ओरछा अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण केंद्र बनेगा। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष केंद्र सरकार देश की एक धरोहर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में नामांकित कराने के लिए यूनेस्को (यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन) को अनुशंसा करती हैं। यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में प्रदेश के 14 स्थल शामिल है। खजुराहों के मंदिर समूह, भीमबेटका की गुफाएं एवं सांची स्तूप यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल स्थायी सूची में शामिल है। यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, मंडला स्थित रामनगर के गोंड स्मारक, धमनार का ऐतिहासिक समूह, मांडू में स्मारकों का समूह, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, नर्मदा घाटी में भेड़ाघाट-लमेटाघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और चंदेरी शामिल है। पिछले 5 वर्षों के सतत प्रयासों से मिली सफलता म.प्र. टूरिज्म बोर्ड द्वारा ओरछा और भेड़ाघाट को यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल कराने के लिए क्रमशः वर्ष 2019 एवं 2021 में प्रस्ताव तैयार कराया गया था। जिसको भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए.एस.आई.) द्वारा योग्य मानते हुए यूनेस्को के विश्व धरोहर अनुभाग को अग्रेषित किया और फिर टेंटेटिव लिस्ट में सम्मिलित करने की घोषणा की गई थी। घोषणा के बाद टूरिज्म बोर्ड द्वारा विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से ओरछा, मांडू, भेड़ाघाट के डोजियर तैयार कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजा गया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने प्रारंभिक निरीक्षण कर ओरछा का डोजियर अनुशंसा कर यूनेस्को के विश्व धरोहर अनुभाग को सौंपा गया। मानवता की साझा विरासत में योगदान भारतीय राजदूत श्री विशाल वी शर्मा ने यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र के निदेशक श्री लाज़ारे एलौंडौ असोमो को डोजियर सौंपते हुए कहा कि, विश्व धरोहर समिति की वर्ष 2027-2028 की बैठक में विचार के लिये मध्यप्रदेश में ओरछा के ऐतिहासिक समूह के नामांकन डोजियर प्रस्तुत करना बहुत सम्मान की बात है। उन्होंने सांस्कृतिक मंत्रालय, भारत सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश राज्य सरकार और उनके अधिकारियों को उनके उत्कृष्ट समन्वय और इस नामांकन डोजियर को समय पर प्रस्तुतिकरण के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ओरछा का ऐतिहासिक समूह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक ओर स्थापत्य विरासत को प्रदर्शित करता है। ओरछा के नामांकन डोजियर को प्रस्तुत करके हम मानवता की साझा विरासत में योगदान करने और इसके अद्वितीय सांस्कृतिक महत्व की वैश्विक मान्यता को बढ़ावा देने की आशा करते है। उन्होंने यूनेस्को की सराहना करते हुए विश्व धरोहर समिति से ओरछा के डोजियर पर सकारात्मक विचार करने की आशा की है। ओरछा को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में नामांकित होने पर होने वाले प्रमुख फायदे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से ओरछा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल के रूप में मान्यता मिलेगी। नामांकन के बाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। पर्यटन के विकास से स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनने पर ओरछा को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थाओं से संरक्षण और विकास के लिए सहयोग मिल सकेगा। स्थानीय शिल्प, हस्तकला और अन्य सांस्कृतिक उत्पादों का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और  अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनने से ओरछा पर शिक्षा, शोध और अध्ययन के नए अवसर खुलेंगे, जिससे इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित होगा। यूनेस्को की मान्यता से ओरछा में स्थायी और पर्यावरण संवेदनशील पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लंबे समय तक पर्यटन की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी।  

अब बिजली कंपनी के आउटसोर्स कर्मचारी को भी मिलेगा पारितोषिक योजना का लाभ

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि अब बिजली चोरी की रोकथाम के चलाई जा रही पारितोषिक योजना के तहत बिजली के अवैध उपयोग की सूचना देने पर प्रकरण बनाने एवं राशि वसूली करने में विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में आउटसोर्स कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। कंपनी ने कहा है कि वर्तमान में विभागीय कर्मचारियों के दायित्वों का निर्वहन आउटसोर्स के कर्मचारियों द्वारा भी किय जा रहा है। विभिन्न परिसरों की जांच एवं जांच के उपरांत बनाये गये पंचनामा के आधार पर आरोपी के विरूद्ध निकाली गयी राशि की वसूली में, सर्विस प्रावाईडर के माध्यम से नियुक्त आउटसोर्स के कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ जांच एवं वसूली के कार्य में सम्मिलित बाह्य स्त्रोत कर्मचारियों को भी परितोषिक योजनान्तर्गत 2.5 (ढाई) प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में दिये जाने का निर्णय लिया है। इस राशि का भुगतान निश्चित अवधि में अर्धवार्षिक अथवा वार्षिक आधार पर दिया जाना निर्धारित किया गया है। गौरतलब है कि नियमित अथवा संविदा कर्मियों को योजना के शुरू होने के समय से ही 2.5 (ढाई) प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दी जाती रही है। कंपनी द्वारा विद्युत की चोरी के प्रभावी रोकथाम एवं विद्युत के अवैध उपयोग को रोकने के लिए यह योजना चलाई गई है। योजनांतर्गत कोई भी व्यक्ति बिजली के अवैध उपयोग के संबंध में सूचना कंपनी मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालय में मुख्य महाप्रबंधक, संचा.संधा/शहर वृत्त कार्यालय के महाप्रबंधकों को लिखित अथवा मोबाईल पर दे सकता है। हाल ही में कंपनी की वेबसाईट portal.pmcz.in पर ऑनलाईन सूचना देने की व्यवस्था की गई है। सफल सूचनाकर्ता को अथवा उपभोक्ता को विद्युत चोरी की क्षतिपूर्ति की पूर्ण राशि जमा होने पर, बिल की राशि के दस प्रतिशत की राशि को पारितोषिक राशि के रूप में दिये जाने का प्रावधान है। योजना के अंतर्गत सूचनाकर्ता के संबंध में जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखते हुए, कंपनी मुख्यालय से प्रोत्साहन की राशि सीधे संबंधित सूचनाकर्ता के बैंक के खाते में हस्तांतरित की जाती है। इस योजना के अंतर्गत क्षेत्रीय, वृत्त स्तर के अधिकारियों को जो शिकायतें प्राप्त होती है, उन शिकायतों पर तत्परता से कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने हेतु कंपनी मुख्यालय के द्वारा सतत रूप से निगरानी रखी जाती है। फर्म, एजेंसी, संगठन भी सूचनाकर्ता हो सकते है, जिन्हें कंपनी मुख्यालय में पदस्थ नोडल अधिकारी के माध्यम से पंजीकरण कराना आवश्यक है। पोर्टल अथवा उपाय ऐप पर देनी होगी सूचना मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली चोरी की रोकथाम के लिए इनाम योजना सूचनाकर्ता को निर्धारित शर्तों के अधीन पारितोषिक देने का प्रावधान है। सूचना के आधार पर राशि वसूली होने पर सफल सूचनाकर्ता को 10 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जाएगा। इस राशि की अधिकतम सीमा नहीं है। सूचनाकर्ता को प्रोत्साहन राशि कंपनी मुख्यालय द्वारा सीधे सूचनाकर्ता के बैंक खाते में जमा की जाएगी। ढाई प्रतिशत राशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाएगी। वर्तमान में इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से ऑनलाइन किया गया है तथा कंपनी वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाकर informer scheme लिंक पर क्लिक करके, सूचनाकर्ता के द्वारा गुप्त सूचना दर्ज की जा सकती है। इसके अतिरिक्त उपाय एप के माध्यम से भी बिजली चोरी की सूचना दी जा सकती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा भोपाल, ग्वालियर, नर्मदापुरम, चंबल क्षेत्र के समस्त नागरिकों, उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे गुप्त सूचना देकर, पारितोषिक योजना का लाभ उठाकर कंपनी को सहयोग प्रदान अवश्य करें।  

म.प्र. सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम को मजबूत बनाने पर जोर, कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुई कार्यशाला

भोपाल प्रमुख सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी श्री संजय कुमार शुक्ल ने कहा कि म.प्र. सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम को सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया जाये। जिससे बाल केन्द्रित नीतियों को प्रभावी रूप से लागू करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जन्म-मृत्यु पंजीयन प्रणाली सार्वभौमिक बाल संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा के लिये एक महत्वपूर्ण आधार है। केन्द्र सरकार जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के अनुसार देश के सभी जन्म और मृत्यु को पंजीकृत किया जाना अनिवार्य है। मध्यप्रदेश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण सुनिश्चित करने के प्रयासों में नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) की कार्यप्रणाली को समझना महत्वपूर्ण है। प्रमुख सचिव श्री शुक्ला म.प्र. में सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का उद्देश्य बाल संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा के लिये सिविल रजिस्ट्रेशन की क्षमता को सुदृढ़ करना है। कार्यशाला में यूनिसेफ की पूजा सिंह और पीयूष एंथनी वर्चुवली शामिल हुए। इस कार्यशाला में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुभवों पर भी चर्चा की गई। इस कार्यशाला में स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत, जनजातीय वर्ग और महिला बाल विकास के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन नियम 2023 पर जनगणना विभाग द्वारा चर्चा की गई। इस अवसर पर आयुक्त योजना एवं सांख्यिकी विभाग श्री ऋषि गर्ग, अध्यक्ष राज्य सांख्यिकी आयोग श्री प्रवीण श्रीवास्तव, आयुक्त जनगणना सुश्री भावना वालिम्बे, अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार सिविल रजिस्ट्रेशन श्री आर.जी. मित्रा एवं सुश्री उर्वशी कौशिक यूनिसेफ नई दिल्ली उपस्थित रहे।  

सड़क और पुल निर्माण में नवीनतम तकनीकों पर केंद्रित दो दिवसीय सेमिनार 19-20 अक्टूबर को

भोपाल सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में उभरती नवीनतम प्रवृत्तियों और तकनीकों पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन रवीन्द्र भवन भोपाल में 19 और 20 अक्टूबर को किया जा रहा है। इसमें सड़क और पुल निर्माण की नवीनतम तकनीकों, सामग्रियों और अनुबंध निष्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सहयोग से होगा। सेमिनार के पहले दिन 19 अक्टूबर को उद्घाटन-सत्र में केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गड़करी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोकनिर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी(EPC इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन)) अनुबंध निष्पादन की चुनौतियों पर अपने विचार साझा करेंगे। पहले दिन की प्रमुख चर्चाओं में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का कार्यान्वयन, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग, और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली नई सामग्रियों पर फोकस रहेगा। सड़क सुरक्षा, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों का उपयोग, और सीमांत सामग्रियों के उपयोग पर भी गहन मंथन किया जाएगा। दूसरे दिन 20 अक्टूबर को ईपीसी (EPC इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन)) अनुबंधों की संरचना शेड्यूलिंग, अनुबंध निष्पादन में ठेकेदारों की भूमिका और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें अनुबंधों से जुड़े विवादों और चुनौतियों के समाधान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि पैनल चर्चा के माध्यम से सड़क और पुल निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को सुधारने और नवीनतम तकनीकों के माध्यम से समयबद्ध और टिकाऊ अवसंरचना का विकास सुनिश्चित करना है। सरकारी और निजी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अनुभवों और नवाचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रदेश की अवसंरचना परियोजनाओं को नई दिशा और मजबूती मिल सके। इस दो दिवसीय आयोजन से मध्यप्रदेश के अवसंरचना विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और यह आयोजन राज्य की निर्माण परियोजनाओं में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सहायक साबित होगा।  

सीईओ श्री सुखवीर सिंह ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को दी जानकारी

भोपाल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुखवीर सिंह ने बुधवार को निर्वाचन सदन में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने दल पदाधिकारियों को श्योपुर जिले की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 02-विजयपुर और सीहोर जिले की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 156-बुधनी में उप निर्वाचन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। सीईओ श्री सिंह ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने दोनों विधानसभा क्षेत्रों में उप निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। घोषणा के साथ ही श्योपुर और सीहोर जिले की सम्पूर्ण सीमाक्षेत्र में आदर्श आचार संहिता पूरी तरह से प्रभावशील हो गई है। उन्होने दल पदाधिकारियों से आदर्श आचार संहिता का शब्दशः पालन करने की अपील की। उन्होंने दल पदाधिकारियों को बताया कि उप निर्वाचन के लिए 18 से 25 अक्टूबर तक नाम-निर्देशन पत्र भरे जाएंगे। नाम-निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 28 अक्टूबर को होगी और 30 अक्टूबर तक नाम-निर्देशन पत्र वापस लिये जा सकेंगे। मतदान 13 नवम्बर को एवं मतगणना 23 नवम्बर को होगी। विजयपुर में 327 एवं बुधनी में हैं 363 मतदान केंद्र सीईओ श्री सिंह ने बताया कि विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में 327 एवं बुदनी विधानसभा क्षेत्र में 363 मतदान केन्द्र बनाये गये हैं। विजयपुर एवं बुधनी में मतदाता सीईओ श्री सिंह ने बताया कि श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 2 लाख 54 हजार 750 मतदाता हैं, जिसमें 1 लाख 21 हजार 01 महिला मतदाता और 1 लाख 33 हजार 554 पुरुष मतदाता हैं। थर्ड जेण्डर मतदाता 02 और सर्विस वोटर्स 103 हैं। इसी प्रकार सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 2 लाख 76 हजार 591 मतदाता हैं, जिसमें 1 लाख 33 हजार 280 महिला मतदाता और 1 लाख 43 हजार 111 पुरूष मतदाता हैं। थर्ड जेण्डर 06 और सर्विस वोटर्स 194 हैं। बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजेश कुमार कौल, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री बसंत कुर्रे, श्री विवेक श्रोतिय, मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी से श्री एस.एस. उप्पल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से श्री जे.पी. धनोपिया, आम आदमी पार्टी से श्री सुमित चौहान एवं बहुजन समाज पार्टी से श्री पूर्णेंद्र अहिरवार उपस्थित रहे। उप निर्वाचन कार्यक्रम 18 अक्टूबर को उप निर्वाचन के गजट नोटिफिकेशन के साथ नाम-निर्देशन पत्र भरने की प्रक्रिया होगी शुरू 25 अक्टूबर – नाम-निर्देशन पत्र भरने की अंतिम तारीख 28 अक्टूबर – नाम-निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 30 अक्टूबर – नाम वापसी की अंतिम तारीख 13 नवम्बर – मतदान दिवस 23 नवम्बर – मतगणना दिवस

ई-नर्सरी पोर्टल: उद्यानिकी क्षेत्र में एक नई पहल, पोर्टल के माध्यम से हो सकेगा पौधों का क्रय-विक्रय

भोपाल घर, गार्डन या खेतों में उत्तम गुणवत्ता के पौधे लगाने के लिये, अच्छे और स्वस्थ पौध के लिये अब नर्सरी के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है। उद्यानिकी विभाग द्वारा ई-नर्सरी पोर्टल पर 300 से अधिक नर्सरियों की जानकारी ऑनलाईन उपलब्ध करवाई गई है। इसके माध्यम से पौधों का क्रय-विक्रय आसानी से किया जा सकता है। नर्सरी प्रबंधन और पौध विपणन की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार की यह नई पहल है, जिसे काफी सराहा जा रहा है। संचालक उद्यानिकी श्री एस.बी. सिंह ने बताया कि ई-नर्सरी पोर्टल उद्यानिकी क्षेत्र में तकनीकी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर रहा है, बल्कि राज्य के उद्यानिकी विकास में भी इसका योगदान सराहनीय है। उन्होंने बताया कि ई-नर्सरी पोर्टल पर विभाग की सभी नर्सरियों की पूरी जानकारी उपलब्ध हो गई है, जिसमें पौधवार स्टॉक रिपोर्ट, नर्सरीवार स्टॉक रिपोर्ट, पौध बिक्री रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी शामिल है। ई-नर्सरी पोर्टल से कृषकों और उद्यान प्रेमियों को नर्सरियों की आसान पहुँच मिल सकीं है। श्री सिंह ने बताया कि विभागीय नर्सरियों की मान्यता, रेटिंग प्रमाणन और विस्तृत विवरण भी पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। जिससे नर्सरियों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सकती है। इस पोर्टल के माध्यम से नर्सरियों की समस्त अधोसंरचनाओं का प्रबंधन और विपणन की पारदर्शिता एवं सुगमता सुनिश्चित हो रही है।  

पूर्व स्पेशल डीजी व कांग्रेस नेता समेत तीन लोगों के द्वारा किए गए अतिक्रमण पर बुलडोजर चला, सरकारी जमीन पर कब्जा था

मुरैना जौरा कस्बे की एमएस रोड पर पूर्व स्पेशल डीजी पुरुषोत्तम शर्मा व कांग्रेस नेता समेत तीन लोगों के द्वारा किए गए अतिक्रमण पर बुलडोजर चला। सभी ने अपने घरों के सामने खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर बुधवार को एसडीएम व तहसीलदार ने जेसीबी से यहां जमीन पर किए गए अस्थाई व स्थाई निर्माणों को ढहाने की कार्रवाई की। पूर्व स्पेशल डीजी पुरुषोत्तम शर्मा, पूर्व मंत्री लाखन सिंह के भतीजे संजय यादव, एक अन्य त्रिलोक कुशवाह ने बेशकीमती 10 बिस्वा जमीन पर कब्जा कर लिया था। इसको लेकर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने इस अतिक्रमण को हटाने के आदेश जारी किए।   हाईकोर्ट के आदेश पर एक्शन मंगलवार को एसडीएम प्रदीप सिंह तोमर, तहसीलदार कल्पना कुशवाह सहित राजस्व व पुलिस का अमला अतिक्रमण को हटाने पहुंचा। लगभग दो से तीन घंटे तक चली अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दौरान जेसीबी से अतिक्रमण को हटाया गया। एसडीएम प्रदीप सिंह तोमर का कहना है कि न्यायालय में अवमानना याचिका के पालन में शासकीय भूमि पर किए कब्जे को हटाने कार्रवाई की गई है। राजनीतिक जमीन तलाश में सरकारी जमीन पर कब्जा दोनों नेता संजय यादव और त्रिलोक कुशवाह जौरा में अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाश करने पहुंचे थे, जिसके लिए उन्होंने यहां अपने मकान भी बनवाए, लेकिन इस बीच सरकारी जमीन पर ही कब्जा कर लिया। इस जमीन की कीमत लगभग दो करोड़ रुपये आंकी गई है, जमीन तीनों के घरों के सामने थी, जहां शौचालय, पार्क टिनशेड व पक्के फर्श कराकर खुद के उपयोग में लेना शुरू कर दिया गया था।

समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार, बाजरा उपार्जन के लिए 7 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन: खाद्य मंत्री श्री राजपूत

भोपाल   समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा के उपार्जन के लिए 7 लाख 66 हजार 923 किसानों ने पंजीयन कराया है। गत वर्ष 7 लाख 54 हजार 384 किसानों ने पंजीयन कराया था। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि मोटे अनाज का उपार्जन 22 नवम्बर और धान का उपार्जन 2 दिसम्बर 2024 से किया जायेगा। किसान पंजीयन में रकबा 13 लाख 79 हजार 632 लाख हेक्टेयर है। रकबे का सत्यापन राजस्व विभाग के अमले द्वारा किया जा रहा है। पंजीयन की आखिरी तारीख 14 अक्टूबर 2024 थी। प्रदेश में हुए कुल पंजीयन में मुख्य रूप से जिला बालाघाट में एक लाख 28 हजार 327 किसान, रीवा में 61 हजार एक, सतना में 54 हजार 639, जबलपुर में 54 हजार 465, सिवनी में 54 हजार 409, कटनी में 52 हजार 171, मण्डला में 40 हजार 959, पन्ना में 33 हजार 213, शहडोल में 33 हजार 5, मैहर में 24 हजार 964, डिण्डोरी में 24 हजार 91, उमरिया में 23 हजार 662, सीधी में 23 हजार 227, सिंगरौली में 23 हजार 238, अनूपपुर में 21 हजार 679, नर्मदापुरम् में 20 हजार 636, दमोह में 19 हजार 269, मऊगंज में 17 हजार 597, नरसिंहपुर में 11 हजार 825, रायसेन में 9 हजार 334, बैतूल में 7 हजार 800, सीहोर में 6 हजार 196, सागर में 3 हजार 922, ग्वालियर में 3 हजार 630, छिंदवाड़ा में 1 हजार 876, शिवपुरी में 1 हजार 162, दतिया में 1 हजार 26, भिण्ड में 2 हजार 239, विदिशा में 880, मुरैना में 7 हजार 781 किसानों ने पंजीयन कराया है।

मालवा-निमाड़ में बिजली वितरण के लिए नए 48 सब स्टेशन

भोपाल   मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र वितरण कंपनी ने वर्ष 2023 एवं 24 के दौरान मालवा और निमाड़ क्षेत्र में 48 नए ग्रिड तैयार किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के नए ग्रिडों से रबी सीजन में किसानों को मदद मिलेगी। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निर्देशानुसार बने इन ग्रिडों से शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को भी फायदा पहुंचेगा। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर की प्रबंध निदेशक सुश्री रजनी सिंह ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति के सघनतम प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं को दस घंटे एवं अन्य सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को चौबीस घंटे विद्युत आपूर्ति व्यवस्था है। सुचारू विद्युत आपूर्ति के लिए लाइन एवं ग्रिडों के क्षमता बढ़ाने एवं नए 33/11 केवी ग्रिडों को समय़ पर तैयार किया जा रहा है। आरडीएसएस के तहत अब तक 43 ग्रिड तैयार हुए है। इनमें इन्दौर शहर के बिलावली, सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल, इंदौर ग्रामीण वृत्त का ईमलीखेड़ा, महेश्वर रोड, गुलझेरा, बड़ियाकीमा बिचौली, राजोदा, खरगोन का आम्बा, कामोदवाड़ा, गेरूबेड़ी, शिवना, धार का जोलाना, बड़वानी का कालापाट, खंडवा का अमलानी, बड़ौदा अहीर, मालगांव, कुम्हारखेड़ा, सेगवाल, , बुरहानपुर का सिवल, झाबुआ का सेमलिया ग्रिड शामिल है। इसी तरह उज्जैन रीजन के नए 33/11 केवी के ग्रिडों में देवास का राबड़िया, खूटखेड़ा, तिवड़िया खातेगांव, गोदना, आगर का नई पुलिस लाइन मालीखेड़ी, उज्जैन का करोदिया, बहलोला, परसोली, रजला, निंबोडिया खुर्द, जीवनखेड़ी, गेलाखेड़ी, मंदसौर का अभिनंदन नगर, शाजापुर का खेड़ापहाड, भैंसायगढ़ा, मोहम्मदखेड़ा, कमलिया, कनाडिया, रतलाम का बरखेड़ी, नायन, राजाखेड़ी का ग्रिड़ शामिल हैं। इंदौर शहर के रसोमा विजय नगर के पास ग्रिड का 98 फीसदी कार्य पूर्ण हो चुका हैं। जल्दी ही यहां से बिजली वितरण प्रारंभ हो जाएगा। आरडीएसएस के साथ ही एसएसटीडी योजना के तहत इंदौर के राऊ-केट रोड तिराहे के पास 33/11 केवी का ग्रिड व धार का गवली पडियाल, खंडवा का गुलाई, खरगोन का मोहनपुरा, रतलाम का अमलेठा, आगर के गुड़ीकला, खंडवा के दूधतलाई में नए ग्रिडों से बिजली वितरण हो रहा है। प्रत्येक ग्रिडों से हजारों बिजली उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में ज्यादा गुणवत्ता के साथ बिजली प्रदाय की जा रही है। पहले से स्थापित करीब 140 ग्रिडों की क्षमता का भी विस्तार किया गया है।  

मंदिर में सजावट के लिए दो श्रृद्धालुओं ने 50, 20 व 10 रुपये के नोट दिए, महालक्ष्मी मंदिर में नोटों से सजावट शुरू

रतलाम शहर के माणकचौक स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों द्वारा सजावट के लिए दिए जाने वाले जेवर, सिक्के, मोती, चांदी-सोना आदि से विशेष शृंगार की तैयारी हो गई है। मंदिर में सजावट के लिए बुधवार को झाबुआ जिले के पेटलावद से दो श्रृद्धालुओं ने 50, 20 व 10 रुपये के नोट दिए। 17 से 28 अक्टूबर तक सामग्री ली जाएगी। बुधवार रात से ही नोटों से सजावट शुरू कर दी गई। सजावट होने के बाद पांच दिवसीय दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस पर ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खोले जाएंगे। दीपोत्सव में नोट, सोने-चांदी के जेवर, हीरे-मोती आदि से होने वाली सजावट को लेकर मंदिर में दर्शन के लिए देशभर से श्रृद्धालु आते हैं। धनतेरस से शुरू हुए विशेष शृंगार के दर्शन भाई दूज तक लगातार किए जा सकेंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं को सामग्री वापस देना शुरू की जाएगी। रतलाम के अलावा बांसवाड़ा, दाहोद, पीथमपुर सहित अन्य जिलों से भी भक्त सामग्री देने रतलाम आते हैं। दी जाने वाली सामग्री को रजिस्टर में दर्ज कर श्रद्धालु को टोकन दिया जाता है, इसी टोकन से सामग्री वापस मिल जाती है। इस बार भी यही व्यवस्था रहेगी। पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान सुरक्षा के लिए मंदिर समिति व पुलिस प्रशासन भी सभी जरूरी इंतजाम करता है। अतिरिक्त पुलिस बल लगाया जाता है। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे का डिस्पले पास में स्थित माणकचौक थाने पर रहता है। वहां से भी निगरानी होती है। मंदिर के संजय पुजारी ने बताया कि 17 से 28 अक्टूबर तक सामग्री ली जाएगी। भाई दूज के बाद रजिस्टर में दर्ज फोटो, टोकन आदि के आधार पर ही सामग्री वापस की जाएगी। महालक्ष्मी मंदिर में विशेष शृंगार पर नजर सामग्री: सोने-चांदी के नोट, चांदी की सिल्लियां, पांच से लेकर 500 रुपये तक के नोट, श्रीयंत्र, कछुआ, तिजोरी आदि। सामग्री देने वाले औसतन श्रद्धालु-करीब 3000 मान्यता : शृंगार सामग्री वापस लेने के बाद घर की तिजोरी, पूजन स्थान पर रखने से सालभर सुख-समृद्धि बनी रहती है। व्यवस्था : धनतेरस से विशेष दर्शन शुरू होते हैं। दर्शन व्यवस्था में भी भक्त सहयोग करते हैं। सुरक्षा : दीपोत्सव में मंदिर में विशेष पुलिस बल के साथ ही सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जाती है।  

राज्य स्तरीय निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति की 7वीं बैठक हुई

भोपाल राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य स्तरीय निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति की 7वीं बैठक मंत्रालय में प्रमुख सचिव पर्यावरण श्री गुलशन बामरा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विशेष रूप से मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन द्वारा दिये गये निर्देशों के अंतर्गत नगरीय निकायों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (ए.क्यू.आई.) को नियंत्रित करने के लिये उपायों की समीक्षा की गई। विभिन्न शहरों के प्रस्तुतिकरण में यह पाया गया कि सभी निकायों द्वारा कार्य-योजना के अनुसार कार्रवाई की जा रही है, जो संतोषजनक पाई है। बैठक में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न नगरीय निकायों में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास और सागर के कलेक्टर्स द्वारा इन शहरों में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिये किये गये विभिन्न कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया गया। प्रमुख सचिव पर्यावरण श्री बामरा द्वारा सभी संबंधित शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (ए.क्यू.आई.) को वर्तमान शीतकालीन ऋतु में विशेष रूप से नियंत्रित रखने के लिये कार्य-योजना अनुसार विभिन्न त्वरित उपाय करने के लिये निर्देशित किया गया। श्री बामरा ने बैठक में कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के अनुसार ओपन बॉयोमॉस/गारबेज जलाने पर कड़ाई से प्रतिबंध लगाया जाये और समस्त सफाई मित्रों को कचरा एकत्रीकरण के पश्चात न जलाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि शहर में जहाँ ज्यादा धूल उड़ने की संभावना है, उसे हॉट-स्पॉट के रूप में चिन्हित कर वहाँ पर जल छिड़काव नियमित रूप से किया जाये। शहर में ऐसे स्थान चिन्हित किये जायें जहाँ भारी वाहन गतिविधियाँ संचालित होती हैं और पीक ऑवर्स के समय इन्हें ट्रैफिक डायवर्जन कर नियंत्रित किया जाये। श्री बामरा ने कहा कि वाहनों के पीयूसी प्रमाण-पत्र की जाँच के लिये विशेष अभियान चलाया जाये। उन्होंने कहा कि आगामी दीपावली उत्सव के दौरान ग्रीन फटाखों के उपयोग के लिये जन-जागृति अभियान चलाकर प्रोत्साहित किया जाये। श्री बामरा ने नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों से विशेष रूप से यह आग्रह किया कि आपके शहर के आसपास के खेतों में ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाने की गतिविधियों पर निगरानी रखकर चालान की कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक नियमित रूप से की जाये और स्थानीय विभिन्न विभागों से समन्वय कर वायु गुणवत्ता सुधार के लिये प्रभावी कदम उठाये जायें। समिति के सदस्य के रूप में सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रदेश स्तर पर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस अवसर पर भारत सरकार के पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंचलिक कार्यालय के वैज्ञानिक के अलावा समिति के सदस्य के रूप में मध्यप्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के प्रतिनिधि और जिलों के नगरीय निकायों के आयुक्त भी उपस्थित रहे।  

पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्य मंत्री लखन पटेल ने कहा- गौ- सेवा हमारे जीवन में सर्वोच्च स्थान दिला सकती है

भोपाल पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा है कि गौ- सेवा हमारे जीवन में सर्वोच्च स्थान दिला सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन के कार्य निरंतर जारी है। इस वर्ष हमारी सरकार गौ- संरक्षण एवं संवर्धन वर्ष भी मना रही है। हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह इस क्षेत्र में अपना पूरा-पूरा योगदान दे। मंत्री श्री पटेल ने महू में आज पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय के नवीन कन्या छात्रावास का लोकार्पण किया। मंत्री श्री पटेल ने पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय की विभिन्न इकाईयों हॉस्पिटल, डेयरी फार्म, मुर्गी फार्म, बालक एवं बालिका छात्रावास का भ्रमण किया तथा महाविद्यालय की गतिविधियों का जायजा लिया। नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलगुरु प्रोफेसर (डॉ.) मनदीप शर्मा भी उपस्थित थे। मंत्री श्री पटेल ने महाविद्यालय के छात्र छात्राओं से बात कर उनकी समस्याओं के बारे में जाना और हल किया। उन्होंने इंटर्नशिप छात्रों का मानदेय बढ़ाने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने महाविद्यालय की समस्याओं को जल्द दूर करने का आश्वासन दिया। मंत्री श्री पटेल ने महाविद्यालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कुलगुरु डॉ. शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य श्री सुनील मानसिंका ने भी उद्बोधन दिया। सभागार में आयोजित कार्यक्रम में महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. बी.पी. शुक्ला ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा महाविद्यालय की उपलब्धियां एवं गतिविधियों की जानकारी दी। इस दौरान विश्वविद्यालय के संपदा अधिकारी डॉ. एस के कारमोरे, अस्सिटेंट रजिस्टार श्री रामकिंकर, जिला पंचायत सदस्य श्री दिनेश सिंह चौहान आदि उपस्थित थे। संचालन डॉ. संदीप नानावटी ने किया तथा आभार डॉ. हेमंत मेहता ने माना।  

प्रदेश के विकास के लिए बैंक एवं शासकीय विभाग मिलकर कार्य करें : मुख्य सचिव श्री जैन

भोपाल मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में 191वीं राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी की बैठक हुई। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि योजनाओं में समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जाये। जिन बैंकों ने लक्ष्य पूरे नहीं किये है उन्हें ज्यादा प्रयास करने की आवश्यकता है। स्व-सहायता समूहों को इस तरह गतिशील करें कि लोगों की जिंदगी में बदलाव आ सके। प्रदेश में तरक्की लाने के लिए बैंक एवं शासकीय विभाग मिलकर काम करें। लंबित प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता से किया जाये। लोगों की दक्षता एवं कार्यकुशला को देखते हुए माइक्रो प्लान बनाया जाये। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक किसानों को निर्बाध रूप से विद्युत प्रदाय हो सके। इसके लिए सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कृषि, ऊर्जा एवं बैंक मिलकर अभियान चलायें। दुर्घटना बीमा योजना की जानकारी ग्रामों में जाकर दी जाये। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक ब्रांच का विस्तार किया जाये। बैंको की ऋण वसूली के लिए राजस्व अधिकारियों का भी सहयोग लिया जाये। मुख्य सचिव ने एमएसएमई, स्व सहायता समूह, सोलर एनर्जी, स्टाम्प ड्यूटी एवं बैंको से संबंधित समस्याओं का निराकरण करने के समितियां गठित कर एक माह में प्रतिवेदन देने के निर्देश भी दिये। बैठक में 11 जुलाई, 2024 को आयोजित 189वीं और 190वीं एसएलबीसी बैठक के कार्यवृत की पुष्टि की गयी। बैठक में वार्षिक ऋण योजना वित्त वर्ष 2024-25, सरकार प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत प्रगति की समीक्षा की गयी। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रदर्शन, ट्रेड्स और एमएसएमई क्लस्टरों को बढ़ावा देना, ऊर्जा विभाग एवं संस्थागत वित्त की प्रस्तुति पर विस्तृत चर्चा की गई। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम, कृषि अवसरंचना निधि, पीएम विश्कर्मा योजना, सीएम ग्रामीण आवास, पीएम स्वनिधि, सीएम ग्रामीण स्ट्रीट वेंडर, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको में एक समान बैंकिंग समय, सरकारी योजनाओं में स्टाम्प शुल्क, कृषि भूमि का हस्तांतरण/अधिग्रहण, बैंक प्रभार के साथ, पीएम कुसुम-ए और पीएम कुसुम-सी योजनाओं के विषय में चर्चा की गयी। समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव, सामान्य प्रशासन श्री संजय दुबे, नगरीय विकास एवं आवास श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी, वित्त श्री मनीष रस्तोगी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, सचिव स्कूल शिक्षा श्री संजय गोयल, सचिव तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार श्री एम. रघुराज एवं भारतीय रिजर्वं बैंक, नाबार्ड, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, इंडियन बैंक, ओवरसीज बैंक, पंजाब एवं सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक, महाप्रबंधक, क्षेत्रीय प्रमुख और मुख्य प्रबंधक उपस्थित थे।  

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