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ममता बनर्जी ने रोके आलू से भरे ट्रक, ओडिशा और अन्य सीमावर्ती राज्यों में नहीं जा रहे, माझी सरकार संकट में

भुवनेश्वर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने राज्य में बढ़ रही आलू की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए ट्रकों के बाहर जाने पर रोक लगा दी है। इसके बाद आलू से भरे ट्रक ओडिशा और अन्य सीमावर्ती राज्यों में नहीं जा रहे हैं। इस फैसले से ओडिशा की माझी सरकार संकट में है। राज्य में आलू की बढ़ती मांग के बीच पश्चिम बंगाल की रोक ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा एक बार फिर आलू को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने राज्य में बढ़ रही आलू की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए ट्रकों के बाहर जाने पर रोक लगा दी है। इसके बाद आलू से भरे ट्रक ओडिशा और अन्य सीमावर्ती राज्यों में नहीं जा रहे हैं। ममता दीदी के इस फैसले से ओडिशा की माझी सरकार संकट में है। राज्य में आलू की बढ़ती मांग के बीच पश्चिम बंगाल की रोक ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि ओडिशा के मंत्री कह रहे हैं कि वे अब ममता सरकार से गुहार नहीं लगाएंगे और यूपी से आलू मंगा रहे हैं। इन सबके बीच ओडिशा में आलू की कीमतें 45 से 50 रुपये किलो के पार पहुंच गईं हैं। जानिए क्या मामला है पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शुक्रवार को राज्य से बाहर आलू की आपूर्ति पर रोक लगा दी। पश्चिम बंगाल का  आलू ओडिशा, झारखंड, असस समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में जाता है। पश्चिम बंगाल में लगातार बढ़ रहे आलू के दामों पर अंकुश लगाने के लिए ममता बनर्जी ने यह निर्देश दिए। इसके बाद पश्चिम बंगाल से अलग-अलग राज्यों को रवाना हुए आलू से भरे ट्रकों को सीमाओं पर रोक दिया गया। यहां ट्रक ड्राइवरों को कहा गया कि वे अपने ट्रक जहां से लाए हैं, वहां वापस ले जाएं। इसके बाद ट्रक वापस लौट गए। ओडिशा सरकार ने क्या कहा पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले पर ओडिशा की माझी सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ओडिशा के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने ममता बनर्जी पर आलू की आपूर्ति पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हम पश्चिम बंगाल से आपूर्ति बहाल करने का अनुरोध नहीं करेंगे। पहले भी वे ऐसा कर चुकी हैं। अगर पश्चिम बंगाल अपनी तरफ से आलू भेजता है, तो ओडिशा इसे स्वीकार कर लेगा। सामान की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं मंत्री पात्रा ने कहा कि किसी भी राज्य में सब्जियों या सामान की आपूर्ति को प्रतिबंधित करना उचित नहीं है क्योंकि सभी राज्य एक देश का हिस्सा हैं और सभी को एक साथ रहना चाहिए। पश्चिम बंगाल भी मछली और अन्य वस्तुओं के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर है। अगर चाहे तो ओडिशा भी मालवाहक वाहनों को अपनी सीमा पर रोक सकता है। लेकिन, हम ऐसा नहीं करेंगे। हमने आलू की आपूर्ति की व्यवस्था कर ली है। उत्तर प्रदेश से राज्य में आलू आना शुरू हो गया है। यूपी से लाए गए आलू पर उपभोक्ताओं को 2 रुपये प्रति किलो का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। ओडिशा सरकार ने अगले दो वर्षों में राज्य को आलू उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक कार्य योजना बनाई है। ओडिशा में बढ़ गईं आलू की कीमतें पश्चिम बंगाल द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के चलते ओडिशा के स्थानीय बाजारों में सब्जी की खुदरा कीमत बढ़ गई है। व्यापारियों ने कहा कि तीन दिन पहले ओडिशा के बाजारों में जो आलू 33 से 35 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह अब 45 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। ओडिशा के लिए क्यों जरूरी बंगाल का आलू ओडिशा के लिए बंगाल का आलू काफी मायने रखता है। दरअसल, बंगाल देश का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है। यहां हर साल 110 लाख टन आलू का उत्पादन होता है। इसमें से 20 से 22 लाख टन आलू दूसरे राज्यों में जाता है। वहीं ओडिशा को हर साल 13 लाख टन मीट्रिक टन आलू की जरूरत होती है। मगर यहां महज तीन लाख टन आलू का ही उत्पादन होता है।  

गांव में एकनाथ शिंदे की तबीयत बिगड़ गई, पहुंची डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की है और आराम करने की सलाह दी

मुंबई पिछले दिनों एकनाथ शिंदे ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद महायुति नेताओं के साथ भी अमित शाह ने बैठक की थी। दिल्ली के बाद महायुति के नेताओं की एक बैठक महाराष्ट्र में होनी थी लेकिन कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दिल्ली से लौटने के बाद अचानक सतारा में अपने गांव के दौरे पर निकल गए थे।महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की अपने गांव में अचानक तबीयत बिगड़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई से डॉक्टरों की टीम उनके गृह जिले सतारा स्थित गांव पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि उनको थकान के चलते बुखार की समस्या हुई है। डॉक्टर जांच कर रहे हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हुए अब एक हफ्ता हो चुका है लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे पर संशय बरकरार है। पिछले दिनों एकनाथ शिंदे ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद महायुति नेताओं के साथ भी अमित शाह ने बैठक की थी। दिल्ली के बाद महायुति के नेताओं की एक बैठक महाराष्ट्र में होनी थी लेकिन कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दिल्ली से लौटने के बाद अचानक सतारा में अपने गांव के दौरे पर निकल गए थे। संभावना थी कि आज महाराष्ट्र के सीएम पद को लेकर नाम का एलान कर दिया जाएगा। इस बीच खबर आई कि गांव में एकनाथ शिंदे की तबीयत बिगड़ गई है। मुंबई से गांव पहुंची डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की है और आराम करने की सलाह दी है। कैसे रहे चुनाव के नतीजे महाराष्ट्र में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला महायुति और महा विकास अघाड़ी गठबंधनों के बीच था। जिसमें महायुति ने बाजी मारते हुए 288 विधानसभा सीटों में से 230 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं इसके उलट महा विकास अघाड़ी को 288 सीटों में से मात्र 46 सीटें ही जीत सकी। महाराष्ट्र में महायुति की ऐतिहासिक जीत के बाद सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई।  नतीजे के अगले ही दिन यानी 24 नवंबर को एनसीपी के विधायक दल की बैठक हुई जिसमें अजित पवार को नेता चुना गया। पार्टी के नेता छगन भुजबल ने अजित पवार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की। वहीं, शिवसेना विधायकों ने एकनाथ शिंदे को अपना नेता चुना। उधर 26 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल खत्म होना था लिहाजा इसी दिन राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही शिवसेना प्रमुख कार्यवाहक मुख्यमंत्री की भूमिका में आ गए। सीएम बनने से किया था इन्कार शिवसेना नेता शिंदे ने 27 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की अपनी दावेदारी छोड़ने का संकेत दिया। उन्होंने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि मेरे मन में सीएम बनने की लालसा नहीं है। पीएम मोदी और अमित शाह जो भी निर्णय लेंगे मुझे मंजूर होगा। सरकार बनाते समय मेरी तरफ से कोई अड़चन नहीं आएगी। मैं चट्टान की तरह साथ खड़ा हूं। भाजपा की बैठक में जो भी निर्णय लिया जाएगा, हमें मान्य होगा। भाजपा का सीएम मुझे मंजूर है।

इस्कॉन ने की पुष्टि, बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर जारी हमलों के बीच एक और हिंदू पुजारी की गिरफ्तारी

ढाका बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर जारी हमलों और दमन के बीच एक और हिंदू पुजारी की गिरफ्तारी हुई है। इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) ने इस बारे में पुष्टि की है। गिरफ्तार पुजारी की पहचान श्याम दास प्रभु के रूप में हुई है, जो कथित रूप से जेल में बंद आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास से मिलने गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, श्याम दास प्रभु को चटगांव पुलिस ने बिना किसी आधिकारिक वारंट के गिरफ्तार किया। इस घटना के बाद हिंदू समुदाय और धार्मिक संगठनों में गहरी नाराजगी है। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास ने इस गिरफ्तारी पर कड़ा विरोध जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “आज चटगांव पुलिस ने एक और ब्रह्मचारी श्याम दास प्रभु को गिरफ्तार कर लिया है।” पहले से ही तनावपूर्ण माहौल इससे पहले सोमवार को पूर्व इस्कॉन सदस्य और आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास को राजद्रोह के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें मंगलवार को जमानत देने से इनकार कर दिया गया, जिससे हिंदू समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल और बढ़ गया है। इस्कॉन ने किया गिरफ्तारी का विरोध इस्कॉन और अन्य हिंदू संगठनों ने इन गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है। राधारमण दास ने कहा कि यह कार्रवाई अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को डराने और धार्मिक स्वतंत्रता का दमन करने का प्रयास है। उन्होंने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

चक्रवात फेंगल के दौरान तमिलनाडु के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी, चेन्नई में सड़कें जलमग्न

चेन्नई चक्रवात फेंगल आज यानी 30 नवंबर की शाम 70-80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुडुचेरी के पास कराईकल और महाबलीपुरम के बीच उत्तर तमिलनाडु व पुडुचेरी के तटों को पार करेगा। इस बीच तमिलनाडु के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी है। खराब मौसम की वजह से चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को शनिवार शाम सात बजे तक अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। उधर, इंडिगो एयरलाइंस ने चेन्नई आने वाली सभी उड़ानों को डायवर्ट कर दिया है। भारी बारिश की वजह से तमिलनाडु के नौ जिलों के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। समुद्र तटों पर बढ़ाई गई सुरक्षा प्रशासन ने पुडुचेरी तट पर सुरक्षा भी बढ़ा दी है। पुडुचेरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलैवानन ने क्षेत्र में समुद्र तटों और तटीय सड़कों का दौरा किया। तमिलनाडु में लोगों को चेन्नई में मरीना बीच, पट्टिनापक्कम और एडवर्ड इलियट बीच समेत समुद्र तटों पर न जाने की सलाह दी गई है। पुडुचेरी में पर्यटन स्थलों को चक्रवात फेंगल के कारण एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया है। पुडुचेरी में तटीय क्षेत्रों मे 300 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। आईएमडी के अनुसार शनिवार सुबह पुडुचेरी में मध्यम बारिश हुई। तमिलनाडु के विलुप्पुरम के मरकानम में भारी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। चेन्नई के बेसेंट नगर इलाके में पेड़ उखड़ गए हैं। चेन्नई में सड़कें जलमग्न चेन्नई में भारी बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गई हैं। कई इलाकों में लोग जलभराव से जूझ रहे हैं। न्यू वाशरमैनपेट, जेमिनी फ्लाईओवर और माउंट रोड इलाके में टखने तक जलभराव है। तूफान की वजह से तटीय इलाकों में बारिश और तेज हवाओं की वजह से मौसम बदल चुका है। चेन्नई में शुक्रवार की रात से आज सुबह तक लगातार भारी से मध्यम बारिश दर्ज की गई। आईएमडी के अनुसार बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में चक्रवात ‘फेंगल’ पहले पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया और आज शाम तक उत्तर तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटों को पार करने की उम्मीद है। कई इलाकों में रेड अलर्ट जारी आईएमडी ने कहा कि मौसम विभाग चेन्नई, श्रीहरिकोटा और चेन्नई के डॉपलर मौसम रडार के अलावा उपग्रह अवलोकनों से चक्रवात फेंगल पर लगातार नजर रख रहा है। आईएमडी के अनुसार चक्रवात आज शाम उत्तरी तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों से टकराएगा और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों समेत दक्षिणी राज्यों के विभिन्न हिस्सों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।

विदेशी छात्रों और कर्मचारियों को 20 जनवरी से पहले शीतकालीन अवकाश से लौटने की सलाह दी, ट्रंप के शपथ लेने से पहले आदेश जारी

वाशिंगटन अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों ने विदेशी छात्रों और कर्मचारियों को 20 जनवरी से पहले शीतकालीन अवकाश से लौटने की सलाह दी है। इस दिन डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। ट्रंप ने पहले ही किया है एलान मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (एमआइटी) सहित अन्य विश्वविद्यालयों की ओर से यह सलाह ट्रंप प्रशासन की ओर से अवैध अप्रवासियों के बड़े पैमाने पर निर्वासन की चर्चा के कारण सामने आई है। अनुमान है कि देश में एक करोड़ से अधिक अवैध आप्रवासी हैं। भारतीयों को सबसे ज्यादा नुकसान इंटरनेशनल एजुकेशनल एक्सचेंज पर ओपन डोर्स रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में 11 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं। इनमें 330,000 के साथ सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। हायर एड इमिग्रेशन पोर्टल का अनुमान है कि वर्तमान में 400,000 से अधिक ऐसे छात्र वर्तमान में अमेरिकी उच्च शिक्षा में नामांकित हैं, जो बिना उचित दस्तावेज के यहां रह रहे हैं। वैध एफ वीजा वाले नहीं होंगे प्रभावित एमआइटी की ओर से कहा गया कि जिनके पास वैध एफ वीजा है, उनके ट्रंप प्रशासन द्वारा किसी भी वीजा प्रतिबंध से प्रभावित होने की संभावना नहीं है। साथ ही बिना दस्तावेज वाले छात्रों के विदेश यात्रा की संभावना नहीं है। 2017 के ट्रंप प्रशासन के अनुभव को देखते हुए यह सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। ट्रंप प्रशासन ने 27 जनवरी 2017 को एक कार्यकारी आदेश जारी कर सात बहुसंख्यक मुस्लिम देशों के अप्रवासियों और गैर-आप्रवासी यात्रियों को 90 दिनों के लिए अमेरिका में प्रवेश से रोक दिया गया था।

जिला कोर्ट ने मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी ऑफ हिमाचल की अपील खारिज की, गिराई जाएंगी संजौली मस्जिद की 3 मंजिल

चंडीगढ़ शिमला की संजौली मस्जिद को लेकर जिला कोर्ट से मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी को बड़ा झटका लगा है. जिला कोर्ट ने मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी ऑफ हिमाचल की अपील खारिज दी, जिसमें मस्जिद गिराने के फैसले को चुनौती दी गई थी. याचिका में नगर निगम आयुक्त के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें मस्जिद की तीन मंजिलों को अवैध अतिक्रमण बताते हुए गिराने को कहा गया था. कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब मस्जिद की मंजिलों को गिराने का काम शुरू किया जा सकेगा. हाईकोर्ट ने 20 दिसंबर तक मामले को निपटाने का आदेश दिया था. क्या है पूरा मामला? शिमला के संजौली में जो 5 मंजिला मस्जिद बनाई गई है वहां पुरानी छोटी मस्जिद की जगह एक अवैध इमारत खड़ी कर दी गई है. आरोप है कि इस मस्जिद को बिना किसी मंजूरी के 5 मंजिल तक बनाया गया है. इस मस्जिद का निर्माण 2009 में शुरू हो गया था और इसे लेकर 2010 में विवाद शुरू हो गया. विवाद होने के 2 साल बाद 2012 में वक्फ बोर्ड ने मस्जिद बनाने की मंजूरी दी थी. नगर निगम की आपत्ति पर 2013 में एक अन्य व्यक्ति ने मस्जिद की ओर से एक मंजिल का प्रस्तावित नक्शा निगम में दिया और 2018 तक बिना वैध मंजूरी के 5 मंजिला मस्जिद बना डाली. स्थानीय लोगों ने इसको लेकर आपत्ति जताई थी. लोगों का कहना है कि जब शिमला में साढ़े तीन मंजिल से ज्यादा किसी भी इमारत के निर्माण पर सख्त प्रतिबंध है तो फिर शिमला के संजौली इलाके में सरकारी जमीन पर पांच मंजिला अवैध मस्जिद का निर्माण कैसे हुआ और अब जब सरकार को ये पता चल गया कि ये मस्जिद गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई है तो सरकार इसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है? जानें कब क्या हुआ – इसी साल मतियाणा में युवकों की पिटाई के बाद संजौली मस्जिद विवाद उठा और हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया. – 11 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी ने अवैध बताए जा रहे हिस्से को हटाने की पेशकश की थी. – 5अक्टूबर को नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने मस्जिद की तीन मंजिलें तोड़ने को स्वीकृति दी. – 21 अक्टूबर को हिमाचल हाई कोर्ट ने भी संजौली मस्जिद के पूरे ढांचे की वैधता पर अंतिम फैसला आठ हफ्ते के भीतर करने के आदेश जारी किए. – 6 नवंबर को जिला अदालत में सुनवाई शुरू हुई और 11 स्थानीय लोगों की याचिकाकर्ता बनने पर सुनवाई की गई. – 14 नवंबर को स्थानीय याचिकाकर्ताओं को इस मामले में पार्टी बनाने की अनुमति नहीं मिली. – 18 नवंबर को वक्फ बोर्ड को इस मामले में मस्जिद कमेटी के अधिकृत होने या न होने पर शपथ पत्र दायर करने के निर्देश दिए.

कनाडा की अदालत ने मोस्‍ट वांटेड गैंगस्‍टर अर्श डल्‍ला को महज 30 हजार डॉलर के निजी मुचलके पर दी जमानत

कनाडा कनाडा के प्रधानमंत्री जस्‍ट‍िन ट्रूडो की खालिस्तानियों से दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मोस्‍ट वांटेड गैंगस्‍टर अर्श डल्‍ला को कनाडा की अदालत ने महज 30 हजार डॉलर के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। अर्श डल्‍ला पर भारत में 70 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें कई हत्‍याओं और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। इस फैसले ने एक बार फिर कनाडा में खालिस्तान समर्थक आतंकियों के प्रति सहानुभूति को उजागर किया है। अर्श डल्‍ला, जो कभी लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य था, अब अपने पुराने सहयोगियों से जानी दुश्मनी बना चुका है। इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2025 को होगी। भारत सरकार अर्श डल्‍ला के प्रत्यर्पण के लिए कनाडा से बातचीत की तैयारी कर रही थी, लेकिन अदालत से जमानत मिल जाने के बाद मामला और जटिल हो गया है। कनाडा में गिरफ्तारी, फिर जमानत भारत में आतंकी गतिविधियों में लिप्त अर्श डल्‍ला को कनाडा पुलिस ने 28 अक्टूबर 2024 को गिरफ्तार किया था। वह खालिस्तान टाइगर फोर्स का प्रमुख है और पंजाब के युवाओं को कनाडा बुलाकर आतंकवाद में शामिल करने का आरोप है। पुलिस को उसके पास से कई हाईटेक हथियार भी मिले थे, जिससे उसकी आतंकवादी गतिविधियों की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अर्श डल्‍ला पर आरोप है कि वह भारत में हत्‍याओं और वसूली के मामलों में भी सक्रिय रहा है और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के साथ उसका संपर्क रहा है। भारतीय एजेंसियां उसे भारत लाकर इन मामलों में उसकी जांच करना चाहती हैं। गोलीबारी और गिरफ्तारी की कहानी 28 अक्टूबर 2024 की रात कनाडा में एक गोलीबारी की घटना हुई, जिसमें अर्श डल्‍ला घायल हो गया था। सूत्रों के मुताबिक, वह अपने साथी गुरजंत सिंह के साथ कार में जा रहा था, तभी कार में रखी बंदूक से एक्‍स‍िडेंटली गोली चल गई। गोली डल्‍ला के दाहिने हाथ में लगी और उसे अस्‍पताल में भर्ती कराना पड़ा। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। डल्‍ला ने पुलिस को अपनी गिरफ्तारी से पहले एक झूठी कहानी सुनाई थी, जिसमें उसने खुद पर हमले का दावा किया था। भारत के लिए खतरा अर्श डल्‍ला का पूरा नाम अर्शदीप डल्‍ला है और वह पंजाब के मोगा जिले का निवासी है। भारत में उसकी गिरफ्तारी के बाद उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। वह कनाडा में बैठकर भारतीय युवाओं को आतंकवादी समूहों में शामिल करता है और आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिलवाता है। भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां उसे गिरफ्तार करने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तत्‍पर हैं।

आरएसएस ने बांग्लादेश सरकार से कहा हिंदू आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास को जेल से तत्काल रिहा किया जाए

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से यह सुनिश्चित करने की शनिवार को अपील की कि हिंदुओं पर अत्याचार बंद हो और हिंदू आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास को जेल से तत्काल रिहा किया जाए। RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने एक बयान में भारत सरकार से अपील की कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों को रोकने के लिए अपने प्रयास जारी रखे तथा उनके प्रति समर्थन में वैश्विक राय बनाने के लिए ‘जल्द से जल्द’ आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश में हिंदुओं, महिलाओं और अन्य सभी अल्पसंख्यकों पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमलों, हत्याओं, लूटपाट, आगजनी और अमानवीय अत्याचार की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसकी निंदा करता है।’ होसबाले ने कहा कि मौजूदा बांग्लादेश सरकार और अन्य एजेंसियां इन्हें रोकने के बजाय ​​केवल मूकदर्शक बनी हुई हैं। RSS महासचिव ने कहा, ‘बांग्लादेश के हिंदुओं के खिलाफ अन्याय और अत्याचार का एक नया दौर उभरता हुआ प्रतीत हो रहा है ताकि आत्मरक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जा रही उनकी आवाज को दबाया जा सके।’ उन्होंने कहा, ‘इस तरह के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में हिंदुओं का नेतृत्व कर रहे इस्कॉन से जुड़े संत चिन्मय कृष्ण दास को जेल भेजना बांग्लादेश सरकार का अन्याय है।’ बांग्लादेश पुलिस ने सोमवार को चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह चटगांव जा रहे थे। होसबाले ने कहा, ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बांग्लादेश सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील करता है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार तुरंत बंद हो और श्री चिन्मय कृष्ण दास को जेल से रिहा किया जाए।’ RSS महासचिव ने कहा कि भारत और वैश्विक समुदाय तथा संस्थाओं को बांग्लादेश के पीड़ितों के साथ इस महत्वपूर्ण समय में खड़ा होना चाहिए तथा अपना समर्थन व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और भाईचारे के लिए यह आवश्यक है।

राज्य सरकार ने आईओए को किया मेल- हम पूरी तरह तैयार, राष्ट्रीय खेल प्रस्तावित तारीख पर ही होंगे

देहरादून. राज्य सरकार ने कहा है कि 38वें राष्ट्रीय खेल 28 जनवरी से 14 फरवरी के बीच ही कराए जाएंगे। बीते 24 नवंबर को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने 15 फरवरी से दो मार्च के बीच खेल कराने के लिए पत्र भेजा था, जिससे असमंजस की स्थिति बनी। इस पर शुक्रवार को राज्य की ओर से आईओए को स्पष्ट कर दिया गया कि उत्तराखंड पूर्व प्रस्तावित तारीखों में ही राष्ट्रीय खेल के गौरवपूर्ण आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार है। इस संबंध में खेल मंत्री रेखा आर्या के निर्देश पर खेल निदेशक प्रशांत आर्य ने आईओए को ई-मेल से भेजा है, वहीं विशेष प्रमुख सचिव, खेल अमित सिन्हा ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आईओए की चेयरमैन पीटी ऊषा से मुलाकात करके भी राज्य का पक्ष रखा। माना जा रहा है कि शनिवार तक आईओए का भी जवाब आ जाएगा। उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डीके सिंह ने बताया कि असमंजस को खत्म करने के लिए दो दिन पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में भी बैठक हुई थी, जिसमें तय हुआ कि राज्य पूर्व निर्धारित तारीख पर ही खेलों की मेजबानी करेगा।

नई एसपी सरिता डोभाल ने संभाली कमान, मस्जिद विवाद के बीच शहर में कानून व्यवस्था बनाने की है सामने चुनौती

देहरादून. मस्जिद विवाद के बीच एसपी अमित श्रीवास्तव के तबादले के बाद शासन ने यहां सरिता डोभाल को एसपी की जिम्मेदारी सौंपी हैं। जो कि राज्य गठन के बाद 19वें एसपी के रूप में पदभार ग्रहण करेंगी। उनके लिए यहां चार माह से चल रहे मस्जिद विवाद के बीच कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी। उन्होंने आज शनिवार को पदभार ग्रहण कर लिया है। बता दें कि सरिता डोभाल प्रांतीय पुलिस सेवा की 2005 बैच की अधिकारी हैं। इससे पूर्व वह देहरादून सहित हरिद्वार में एसपी देहात के रूप में सेवा कर चुकी हैं। उत्तरकाशी जनपद में नियुक्ति से पूर्व वह एसपी रेलवे के रूप में तैनात थीं। दूसरी महिला पुलिस अधिकारी जनपद गठन के बाद वह दूसरी महिला पुलिस अधिकारी हैं, जिन्हें सीमांत जनपद में एसपी के पद पर नियुक्त किया गया है। इससे पूर्व अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय वर्ष 1995 से 98 तक आईपीएस तनुजा श्रीवास्तव उत्तरकाशी में एसपी रह चुकी हैं। राज्य गठन के बाद वर्ष 2016 में विमला गुंज्याल एक माह के लिए एसपी के रूप में वैकल्पिक व्यवस्था पर चार्ज पर रहीं थी। सरिता डोभाल के पदभार ग्रहण करते ही सबसे बड़ी चुनौती होगी जिले में मस्जिद विवाद के बीच कानून व्यवस्था बनाए रखना। क्योंकि एक दिसंबर को कई संगठनों ने महापंचायत का एलान किया है। इसके साथ ही जनपद में नशे के कारोबार को रोकना भी प्रमुख चुनौती होगी। एसपी अमित श्रीवास्तव को दी गई विदाई इधर, पुलिस लाइन ज्ञानसू में एसपी अमित श्रीवास्तव को अधिकारियों और जवानों ने विदाई दी। इस दौरान सीओ सुरेंद्र भंडारी ने उनके कार्यों के अनुभवों को साझा किया। एसपी अमित श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तरकाशी पुलिस दृढ़ संकल्पित टीम है। जिससे हमें हमेशा समाज के असहाय लोगों की मदद के लिए आगे आकर कार्य करना चाहिए।

महाराष्ट्र में मुख्यमत्री का नाम तय नहीं, लेकिन नई सरकार बनने की आई तारीख, 5 दिसंबर को बनेगी सरकार

मुंबई महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए सात दिन हो चुके हैं। महायुति गठबंधन ने चुनाव में जोरदार जीत हासिल की है। लेकिन नई सरकार के गठन की तारीख अभी तक तय नहीं हो पाई है। पहले कहा जा रहा था कि 26 नवंबर तक नई सरकार बन जाएगी। फिर कुछ नेताओं ने दो दिसंबर की तारीख बताई। अब भाजपा के एक नेता ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में पांच दिसंबर को नई सरकार बनेगी। इस नेता ने यह भी कहाकि देवेंद्र फडणवीस अगले मुख्यमंत्री बनने के उम्मीदवारों की दौड़ में सबसे आगे हैं। महाराष्ट्र में 20 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के गठबंधन महायुति ने 288 में से 230 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी। भाजपा 132 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जबकि शिवसेना ने 57 और राकांपा ने 41 सीट जीतीं। हालांकि, 23 नवंबर को चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद भी इस बात पर कोई फैसला नहीं हुआ है कि मुख्यमंत्री कौन होगा। शिंदे, फडणवीस और पवार ने महाराष्ट्र में अगली सरकार बनाने को लेकर समझौते पर बातचीत करने के लिए गुरुवार देर रात भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सतारा जिले में अपने पैतृक गांव के लिए रवाना होने के बाद शुक्रवार को होने वाली महायुति की महत्वपूर्ण बैठक स्थगित कर दी गई, जो अब यह संभवतः रविवार को होगी। भाजपा नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि नयी सरकार का शपथ ग्रहण पांच दिसंबर को होगा। नेता ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता फडणवीस मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हैं। हालांकि अब तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है कि भाजपा विधायक दल अपना नया नेता चुनने के लिए बैठक कब करेगा। शिंदे ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अगले मुख्यमंत्री के संबंध में भाजपा नेतृत्व के निर्णय का पूरा समर्थन करेंगे और इस प्रक्रिया में बाधा नहीं बनेंगे। वहीं अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा ने मुख्यमंत्री पद के लिए फडणवीस का समर्थन किया है।

उत्तराखंड में आपात चिकित्सा सेवाओं के लिए ट्रामा नेटवर्क तैयार

देहरादून. प्राकृतिक आपदा व सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायलों को तत्काल सटीक इलाज मिल सके, इसके लिए ट्रामा नेटवर्क बनाया जा रहा है। इस नेटवर्क में प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों के साथ ही बड़े अस्पतालों को सुविधाओं के आधार पर जोड़ा जाएगा। इसके तहत किसी घायल को सीधे उसी अस्पताल रेफर किया जाएगा, जहां उसकी जरूरत के हिसाब से उपचार सुविधा उपलब्ध होगी। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के दूरस्थ क्षेत्रों में बड़े अस्पताल नहीं हैं। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ जिला अस्पतालों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, साथ ही उच्च चिकित्सा सुविधा का भी अभाव है। इस कारण कई बार घायलों को एक अस्पताल से दूसरे और तीसरे अस्पताल रेफर करना पड़ता है। जिससे घायलों को जल्दी और स्टीक इलाज नहीं मिल पाता। नई पहल के लिए उच्च स्तर पर कई दौर की बैठकें हुईं प्रदेश सरकार इस समस्या के समाधान के लिए ट्रामा नेटवर्क तैयार कर रही है। सरकारी अस्पतालों के साथ ही एम्स ऋषिकेश, निजी अस्पताल व निजी मेडिकल कॉलेजों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके बाद घायल को सीधे उसी अस्पताल रेफर किया जाएगा, जहां उसकी जरूरत के हिसाब से डॉक्टर और इलाज उपलब्ध होगा। इस नई पहल के लिए उच्च स्तर पर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, जल्द ही इसका शुभारंभ कर दिया जाएगा।

चंद्रचूड़ का फैसला गलत था, इससे और मस्जिदों के सर्वे का रास्ता खुल गया: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, भड़का

नई दिल्ली संबल और अजमेर शरीफ पर निचली अदालतों के फैसलों ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को निशाने पर ला दिया है। उन पर आरोप लगाया जा रहा है कि उनके फैसले ने देश में धार्मिक स्थलों के सर्वेक्षणों और याचिकाओं के लिए दरवाजे खोल दिए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और समाजवादी पार्टी (SP) के सांसदों ने 2023 में चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के सर्वे की अनुमति देने वाले फैसले को गलत बताया है। SP सांसद जिया-उर-रहमान बरक और मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा, “चंद्रचूड़ का फैसला गलत था। इससे और सर्वे की याचिकाओं का रास्ता खुल गया है। सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए और ऐसे सर्वे रोकने चाहिए।” पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी बयान जारी कर कहा कि यह फैसला “प्लेस ऑफ वर्शिप ऐक्ट, 1991” की भावना के खिलाफ है। बोर्ड ने कहा, “बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिनियम का हवाला देकर कहा था कि किसी भी पूजा स्थल की स्थिति को 15 अगस्त 1947 के अनुसार बदला नहीं जा सकता। लेकिन ज्ञानवापी मामले में अदालत ने सर्वे की अनुमति देकर अपनी स्थिति नरम कर दी।”   सर्वे को लेकर बढ़ते विवाद ज्ञानवापी फैसले के बाद मथुरा के शाही ईदगाह, लखनऊ के टीले वाली मस्जिद और अब संबल की जामा मस्जिद के साथ-साथ अजमेर शरीफ में मंदिर होने के दावों पर याचिकाएं दाखिल हुई हैं। पर्सनल लॉ बोर्ड और विपक्ष का कहना है कि इन सर्वेक्षणों से सांप्रदायिक तनाव और बढ़ सकता है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “1991 के कानून के अनुसार पूजा स्थल की स्थिति नहीं बदली जा सकती। ऐसे में इन सर्वे का क्या उद्देश्य है?” संविधान और कानून की दुहाई हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि 1991 का कानून ASI द्वारा संरक्षित स्थलों पर लागू नहीं होता। उन्होंने कहा, “संबल की साइट ASI द्वारा संरक्षित है। इसलिए, प्लेस ऑफ वर्शिप ऐक्ट यहां लागू नहीं होता।” जैन ने 1950 के प्राचीन स्मारक अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई स्मारक धार्मिक स्थल है तो ASI उसकी धार्मिक प्रकृति तय करेगा और संबंधित समुदाय को वहां पूजा की अनुमति देगा। चंद्रचूड़ का फैसला और उसका प्रभाव 3 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में ASI द्वारा वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अनुमति दी थी। इस फैसले में अदालत ने कहा था कि “1991 के अधिनियम की धारा 3 पूजा स्थल की धार्मिक प्रकृति का पता लगाने से मना नहीं करती, हालांकि धारा 4 इसकी स्थिति बदलने पर रोक लगाती है।” इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिसंबर 2023 में मथुरा के शाही ईदगाह परिसर में सर्वेक्षण की अनुमति दी। इसी तरह मध्य प्रदेश के भोजशाला में भी सर्वे को लेकर विवाद बढ़ा। RSS प्रमुख मोहन भागवत के 2022 के बयान का हवाला देते हुए विपक्ष ने कहा कि हर मस्जिद में शिवलिंग खोजने की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा, “इन सर्वेक्षणों का उद्देश्य केवल सांप्रदायिक तनाव बढ़ाना है।” भविष्य में इन सर्वेक्षणों और याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और फैसले पर देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

समुद्र तट के करीब पहुंचा भयंकर चक्रवात ‘फेंगल’, भारी बारिश के बीच चेन्नई एयरपोर्ट बंद

नई दिल्ली चक्रवाती तूफान ‘फेंगल’ के शनिवार को दिन में पुडुचेरी के निकट पहुंचने की संभावना और इसके समुद्र तट की ओर बढ़ने के बीच उत्तरी तमिलनाडु के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है। तेज बारिश की वजह से चेन्नई एयरपोर्ट को भी बंद करना पड़ा है। इंडिगो समेत कई एयरलाइन्स ने कहा है कि कुछ समय के लिए उनका ऑपरेशन बाधित हो रहा है। तेज बारिश और जलभराव के मद्देनजर शाम 7 बजे तक चेन्नई एयरपोर्ट बंद रहेगा। तटीय क्षेत्रों में शुक्रवार रात पहले रुक-रुककर और फिर भारी बारिश हुई जिससे उपनगरीय क्रोमपेट में सरकारी अस्पताल परिसर के कुछ हिस्से समेत कई इलाकों में जलभराव हो गया और कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने राज्य आपातकालीन केंद्र में शीर्ष अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने बाद में संवाददाताओं से कहा कि सभी एहतियाती कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं और उन क्षेत्रों के लोगों के लिए शिविर स्थापित किए गए हैं जहां अधिक नुकसान होने की आशंका है तथा लोगों को भोजन भी वितरित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने एक पंपिंग स्टेशन का भी निरीक्षण किया। ग्रेटर चेन्नई निगम के अधिकारियों ने बताया कि इंजीनियर, अधिकारियों और सफाई कर्मचारियों समेत 22,000 कर्मचारी काम पर हैं और 25-एचपी (हॉर्सपावर) और 100-एचपी समेत विभिन्न क्षमताओं के कुल 1,686 मोटर पंप इस्तेमाल में हैं। ट्रैक्टर पर लगे 484 पंप और 100-एचपी क्षमता वाले 137 पंप लगाए गए हैं। जीसीसी ने कहा कि 134 स्थानों पर जलभराव से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर काम जारी है और तूफान के कारण गिरे नौ पेड़ों में से पांच को हटा दिया गया है। कुल 22 उपमार्गों में से 21 में यातायात सुचारू है। गणेशपुरम उपमार्ग को रेलवे पुल के काम से संबंधित कार्यों के लिए पहले ही बंद कर दिया गया था। निचले इलाके मदीपक्कम के कई निवासियों ने अपने वाहनों को पास के वेलाचेरी फ्लाईओवर के दोनों ओर खड़ा कर दिया। ऐसे ही कई अन्य इलाकों के निवासियों ने भी अपने वाहन सुरक्षित स्थानों पर खड़े कर दिए। सड़कें मुख्य रूप से सुनसान रहीं और विभिन्न स्थानों पर नागरिक कार्यकर्ता, पुलिस और अग्निशमन एवं बचावकर्मियों को तैनात किया गया है। राज्य द्वारा संचालित परिवहन निगमों ने चेन्नई और आस-पास के इलाकों में सीमित सेवाएं संचालित कीं। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि चेन्नई मंडल के सभी उपनगरीय खंडों में ईएमयू ट्रेन सेवाएं अगली सूचना तक कम आवृत्ति के साथ संचालित होंगी। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि ट्रेन (एक्सप्रेस/सुपरफास्ट सहित) सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं लेकिन इनमें कुछ देरी हुई है। चेन्नई मेट्रो रेल ने कहा कि उसकी सेवाएं सुचारू रूप से चालू हैं और इसने लोगों को उन खास स्टेशन पर पार्किंग क्षेत्रों के बारे में सूचित किया जहां पानी भरने की आशंका है। समुद्र में लहरें बहुत तेज हैं, इसलिए पुलिस ने मरीना और मामल्लपुरम सहित प्रसिद्ध समुद्र तटों तक पहुंच को अवरुद्ध करने के लिए अवरोधक लगाए हैं। सरकारी दुग्ध आपूर्ति ‘आविन’ प्रभावित नहीं हुई और अधिकतर क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सामान्य है। सरकार ने पहले ही 30 नवंबर को शैक्षणिक संस्थानों के लिए अवकाश घोषित कर दिया था और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों से अनुरोध किया था कि वे अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दें। मौसम कार्यालय की ओर से चेन्नई, कांचीपुरम, तिरुवल्लुर, चेंगलपट्टू, विल्लुपुरा, कुड्डालोर और कल्लाकुरिची जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है और उत्तरी तटीय तथा कावेरी डेल्टा जिलों, आंतरिक जिलों सहित कई जिलों में बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी है। वहीं सुबह चार बजे से अब तक, उत्तर चेन्नई के एन्नोर में अधिकतम 13 सेंटीमीटर (सेमी) बारिश दर्ज की गई, जबकि शहर और उपनगरों में कई स्थानों पर 10 सेमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। बारिश की तीव्रता चक्रवात के आज शाम तक पहुंचने तक जारी रहने के आसार हैं।

सीरिया के शहर में विद्रोहियों ने किया कत्लेआम, एक और मुस्लिम देश में शुरू हो गया युद्ध, भागने लगी सेना

सीरिया दुनिया के खूबसूरत शहरों में गिने जाने वाले सीरिया के अलेप्पो शहर में इस्लामिक संगठन हयात तहरीर अल शाम (HTS) ने कत्लेआम मचा दिया है। आठ साल बाद एक बार फिर इस्लामिक कट्टरपंथी गुट ने शहर पर हमला करके कब्जा कर लिया है। इसके बाद सीरिया की बशर अल असद सरकार ने अलेप्पो की सड़कों और एयरपोर्ट को बंद कर दिया है। 2016 में ही अलेप्पो से विद्रोहियों को खदेड़ा गया था। अचानक विद्रोही शहर के केंद्र तक घुस गए और कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है। विद्रोहियों की ताकत के आगे एक बार फिर असद की सेना कमजोर साहित हो रही है। सीरिया को भरोसा रहता था कि जरूरत पड़ने पर उसे ईरान औऱ रूस से मदद मिलेगी। ईरान इजरायल के खिलाफ औऱ रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में ही व्यस्त है। इसका फायदा उठाकर विद्रोहियों ने हमला एक बार फिर कर दिया। एचटीएस का दावा है कि उसने अधे से ज्यादा अलेप्पो पर कब्जा कर लिया है। सीरिया 2011 से ही गृह युद्ध की चपेट में है। बताया जा रहा है कि सीरियाई शासन की मदद के लिए दो दिनों में गोला-बारूद और हथियार पहुंच सकते हैं। वहीं सूत्रों का कहना है कि असद प्रशासन ने सेना को विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके से सुरक्षित निकलने का आदेश दे दिया है। बता दें कि तुर्की इन विद्रोहियों के साथ खड़ा है। अलेप्पो को सीरिया की सांस्कृतिक और आर्थिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है। अब यहां पैदा हुए हालात मध्य एशिया में तनाव की एक नई वजह बन सकते हैं। जानकारी के मुताबिक विद्रोही गुटों ने सीरियाई सरकार के 40 से ज्यादा सैन्य अड्डों पर कब्जा कर लिया है। 2011 में अरब क्रांति के बाद सीरिया में गृह युद्ध शुरू हुआ था। बशऱ अल असद के साथ लोकतंत्र के समर्तकों ने 2000 में ही विरोध शुरू कर दिया था। फ्री सीरियन आर्मी नाम के विद्रोही गुट ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसमें अमेरिका, रूस, ईरान और सऊदी अरब भी शामिल हो गए। इसके बाद यहां आईएसआईएस ने भी पैर पसारे। एक दशक तक चले गृह युद्ध में 3 लाख लोग मारे गए थे। इसके बाद 2020 में सीजफायर का समझौता हुआ था।

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