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पुणे में लिव इन पार्टनर के किसी और के साथ अफेयर का था शक, इसलिए मारा

पुणे  एक एसी मेंटेनेंस फर्म में सुपरवाइजर के तौर पर काम करने वाले 32 वर्षीय शख्स को वाकड़ पुलिस ने गिरफ्तार किया है। शख्स पर अपनी लिव-इन पार्टनर (27) की हथौड़े से पीट-पीटकर हत्या करने का आरोप है। घटना हैरान कर देने वाली है। हत्या के बाद आरोपी लिव इन पार्टनर की लाश को ठिकाने लगाने के लिए 130 किमी दूर गया। उसके बाद अपने तीन साल के बेटे को मंदिर के शहर अलंदी में छोड़ आया। बाद में बच्चे के लापता होने की खुद ही शिकायत दर्ज कराई। उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए कहानी गढ़ी लेकिन पकड़ा गया। पुलिस ने बताया कि 24 नवंबर की रात को वाकड़ में सर्विस रोड पर अपने साथी की हत्या करने के बाद, व्यक्ति ने शव को अपने चार पहिया वाहन में लगभग 130 किलोमीटर दूर सतारा जिले के खंडाला तहसील के खंबाटकी घाट तक ले जाकर फेंक दिया। बाद में, वह मारुंजी में अपने फ्लैट पर वापस आया और सोते हुए लड़के को लगभग 30 किलोमीटर दूर अलंदी ले गया और उसे वहीं छोड़ दिया। किसी और के साथ अफेयर का था शक वरिष्ठ निरीक्षक निवृति कोल्हटकर ने बताया कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति ने अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या करने की बात स्वीकार की है। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसे शक था कि उसकी पार्टनर का किसी और व्यक्ति के साथ संबंध है। 6 सालों से लिव इन में रह रही थी महिला बीड जिले के परली की रहने वाली थी। वह शादी के छह महीने बाद ही अपने पति से अलग हो गई थी और पिछले पांच-छह सालों से फर्म के सुपरवाइजर के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थी। सुपरवाइजर भी शादीशुदा है और उसकी पत्नी और बच्चे मावल तहसील के बौर में रहते हैं। वह हिंजेवाड़ी में एक चाय की दुकान भी चलाता है। उसने मारुंजी में एक फ्लैट किराए पर लिया था, जहां उसकी लिव-इन पार्टनर अपने बेटे के साथ रह रही थी। ऐसे मिला लड़का कोल्हटकर ने बताया कि 25 नवंबर की शाम को व्यक्ति ने हिंजेवाड़ी पुलिस से अपने बेटे के लापता होने की शिकायत दर्ज कराने के लिए संपर्क किया, जिसे उसने खुद अलंदी में छोड़ दिया था। वरिष्ठ निरीक्षक ने कहा कि जब वह व्यक्ति पुलिस स्टेशन में था, तब हिंजेवाड़ी पुलिस को पता चला कि उसका लड़का आलंदी में पाया गया है और वह वहां की पुलिस की हिरासत में है। लिव इन पार्टनर के गायब होने की छिपाई बात हिंजेवाड़ी पुलिस ने उसे अपने वाकड समकक्षों से संपर्क करने के लिए कहा क्योंकि उसने उन्हें बताया कि लड़का भुमकर चौक इलाके से लापता हो गया है। उसने महिला के बारे में कुछ भी नहीं बताया। जब पुलिस को पता चला कि लड़के की मां लापता है, तो उन्होंने उसे हिरासत में नहीं लिया और उससे कहा कि वह पहले उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराए। उन्होंने लड़के के नाना-नानी को सूचित किया, जो बाद में आलंदी के लिए रवाना हो गए। ट्रक ड्राइवर ने देखी महिला की लाश 26 नवंबर की सुबह, वह व्यक्ति वाकड पुलिस स्टेशन पहुंचा और अपने साथी से संबंधित गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इधर 26 नवंबर को, एक ट्रक चालक का ट्रक खंबाटकी घाट सेक्शन में पास खराब हो गया। वह वहां रुका था, तभी उसने झाड़ियों में एक महिला का शव देखा। शख्स ने खंडाला पुलिस को सूचित किया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने पाया कि महिला के शरीर पर चोटें थीं। ऐसे पुलिस ने पकड़ा कोल्हटकर ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि जब वह अपने बेटे की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के लिए हिंजेवाड़ी पुलिस के पास गया तो उसने अपने साथी के बारे में क्यों नहीं बताया। कोल्हटकर ने कहा कि जब हमने उसके सेलफोन रिकॉर्ड की जांच की तो पता चला कि 24 नवंबर से 26 नवंबर के बीच उसका गैजेट नियमित अंतराल पर बंद था। बुधवार को मामला तब बदल गया जब सतारा पुलिस ने पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस को खंबाटकी घाट सेक्शन में महिला के शव के बारे में सूचित किया। हमने पाया कि लापता महिला और शव पर मंगलसूत्र एक ही था। फिर हम उस व्यक्ति को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन ले आए। उसने 24 नवंबर की देर रात भूमकर चौक के पास सर्विस रोड पर हथौड़े से अपने लिव-इन पार्टनर की हत्या करने की बात स्वीकार की। फिर उसने शव को खंबाटकी घाट सेक्शन में फेंक दिया। उन्होंने बताया कि व्यक्ति को हत्या, साक्ष्य नष्ट करने तथा बीएनएस के एक अपराधी को बचाने के लिए झूठी सूचना देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

बांग्लादेश में ताजा हिंसा किशोरगंज जिले के भैराब शहर में हुई है, जहां एक हिंदू परिवार के चार लोग एक अपार्टमेंट में मृत पाए गए

ढाका बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के निरस्त होने के बाद से लगातार हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार हो रहे हैं। ताजा हिंसा किशोरगंज जिले के भैराब शहर में हुई है, जहां एक हिंदू परिवार के चार लोग एक अपार्टमेंट में मृत पाए गए। मृतकों की पहचान 32 वर्षीय जॉनी बिस्वास, उनकी गर्भवती पत्नी और उनके दो बच्चों के रूप में हुई है। पुलिस ने बुधवार को हत्या का मामला दर्ज किया। पुलिस प्रशासन इस हत्याकांड को आत्महत्या की तरह पेश कर रहा है। स्थानीय पुलिस ने कहा है कि जॉनी ने अपनी पत्नी और बच्चों की हत्या करने के बाद खुद को भी मौत के घाट उतार लिया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम जांच कर रहे हैं।” इस खौफनाक घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई है। आपको बता दें कि बांगलादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में तेजी देखी जा रही है। अधिकारियों ने मामले की गहराई से जांच करने और समुदाय में बढ़ते डर को कम करने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है। बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री हसन महमूद ने कहा है कि भारत विरोधी बयानबाजी और कट्टरपंथियों एवं आतंकवादी ताकतों को बढ़ावा देना परस्पर संबंधित रणनीतियां हैं, जिन्होंने बांग्लादेश को पूर्ण अराजकता की ओर धकेल दिया है। उन्होंने मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लेदश की अंतरिम सरकार पर लोकतंत्र को भीड़तंत्र में तब्दील करने का आरोप लगाया। बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बाद बिगड़े हालात के बाद अपना देश छोड़कर आए महमूद ने हाल ही में एक अज्ञात स्थान से टेलीफोन पर एक विशेष साक्षात्कार में पीटीआई को बताया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को खतरनाक करार दिया। उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी सहित चरमपंथी समूह सक्रिय हो गए हैं। महमूद ने जोर देकर कहा कि हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर हमलों का घटनाक्रम एक चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह अल्पसंख्यक विरोधी भावना को दर्शाता है जो चरमपंथी बयानबाजी से मेल खाती है, जिससे धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ रहे हैं। इस बीच, बांग्लादेश के चटगांव शहर में एक वकील की हत्या और एक प्रमुख हिंदू नेता की गिरफ्तारी को लेकर सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने के आरोप में कम से कम 30 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

भारत में 5G का तेजी से विस्तार, 2030 के अंत तक 5G सदस्यता का अनुमान लगभग 970 मिलियन तक पहुँचने का है

नई दिल्ली एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 5G (पाँचवीं पीढ़ी) मोबाइल सेवाओं का विस्तार बहुत तेज़ी से हो रहा है। 2030 के अंत तक 5G सदस्यता का अनुमान लगभग 970 मिलियन तक पहुँचने का है, जो देश में कुल मोबाइल सदस्यताओं का 74 प्रतिशत होगा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2024 के अंत तक भारत में 5G सदस्यताओं की संख्या 270 मिलियन से अधिक हो जाएगी, जो कुल मोबाइल सदस्यताओं का लगभग 23 प्रतिशत होगा। इस बीच, 4G अभी भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली तकनीक है, जो अब भी कुल मोबाइल सदस्यताओं का 54 प्रतिशत है। हालांकि, 5G के बढ़ते उपयोग के कारण 4G सदस्यताओं में गिरावट आने की संभावना है, जो 2024 में 640 मिलियन से घटकर 2030 तक 240 मिलियन हो सकती है। भारत में 5G सेवाओं को बड़े पैमाने पर लागू किया गया है, और उम्मीद है कि 2024 के अंत तक देश की लगभग 95 प्रतिशत आबादी 5G नेटवर्क की पहुँच में आ जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर 2022 को इंडिया मोबाइल कांग्रेस में 5G सेवाओं की शुरुआत की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जनरेटिव AI (GenAI) ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या अगले पाँच सालों में काफी बढ़ने की संभावना है। स्मार्टफोन उपयोगकर्ता वीडियो कॉलिंग, स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन भुगतान जैसे सेवाओं के लिए बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं और इसके लिए वे प्रीमियम शुल्क भी चुकाने को तैयार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले पाँच वर्षों में लगभग 67 प्रतिशत 5G स्मार्टफोन उपयोगकर्ता नियमित रूप से GenAI ऐप का उपयोग करेंगे। इसके अलावा, भारत में 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार स्टेडियम, हवाई अड्डों और सार्वजनिक परिवहन केंद्रों जैसे प्रमुख स्थानों पर उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करेगा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 5G उपयोगकर्ता इवेंट स्थलों पर सुनिश्चित कनेक्टिविटी के लिए अपने मासिक मोबाइल खर्च में 20 प्रतिशत तक वृद्धि करने के लिए तैयार हैं। स्मार्टफोन खरीदने वाले भारतीय उपयोगकर्ता अब AI फीचर्स को सबसे बड़ी प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कैमरा क्वालिटी, स्क्रीन साइज़ और स्टोरेज जैसे पारंपरिक फीचर्स से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। AI तकनीक का तेजी से उपयोग बढ़ने के कारण स्मार्टफोन और नेटवर्क दोनों से बेहतर प्रदर्शन की माँग भी बढ़ रही है। इस रिपोर्ट से यह साफ़ होता है कि भारत में 5G नेटवर्क की तैनाती से डिजिटल दुनिया में बदलाव आएगा और यह विभिन्न क्षेत्रों जैसे खनन, टेलीमेडिसिन, वेयरहाउसिंग और विनिर्माण में नई संभावनाएँ पैदा करेगा।

पाकिस्तान में करीबी रिश्तेदारों में शादी की परंपरा बन रही बच्चों में जेनेटिक्स बीमारी की मुख्य वजह

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में कजिन मैरिज (चचेरे, ममेरे भाई-बहनों के बीच होने वाली शादियों) के बढ़ने से कई तरह की बीमारियां पैदा हो रही हैं। एक्सपर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि कजिन मैरिज बढ़ने से आनुवंशिक विकारों में तेजी आई है। कराची की डोव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस (DUHS) में जीनोमिक डिसऑर्डर एंड रिसेसिव डिसऑर्डर पर बात करते हुए विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में कजिन मैरिज की बढ़ती दर पर फिक्र का इजहार किया है। जियो टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर स्टाइलियानोस एंटोनाराकिस ने बताया कि आनुवंशिक परिवर्तनशीलता (जेनेटिक वेरिएबिलिटी) विकास को बढ़ा सकती है लेकिन इसका एक बड़ा खतरा ये है कि ये आनुवंशिक विकारों (जेनेटिक डिसॉर्डर) का बोझ भी डालती है। यह बोझ विशेष रूप से उन आबादियों में ज्यादा होता है, जहां कजिन मैरिज की दर अधिक है। पाकिस्तान में बढ़ता जा रहा कजिन मैरिज का चलन पाकिस्तान में कुल होने वाली शादियों में से करीब 65 प्रतिशत कजिन मैरिज होती हैं। देश के कुछ समुदायों में कजिन मैरिज की दर 85 फीसदी तक है। DUHS के वाइस चांसलर प्रोफेसर सईद कुरैशी ने कहा कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक कारणों से कजिन मैरिज का चलन बढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि इसके कुछ जैविक लाभ हैं लेकिन ये बच्चों में रिसेसिव और डोमिनेंट जेनेटिक विकारों का जोखिम काफी बढ़ा देता है।’ जिनेवा विश्वविद्यालय के डॉक्टर स्टाइलियानोस एंटोनाराकिस ने बताया कि 2,980 जीन रिसेसिव बीमारियों से जुड़े हैं। आगा खान विश्वविद्यालय की अम्बरीन फातिमा ने भी पाकिस्तान में चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह की बढ़ती दर और इसके परिणामस्वरूप होने वाले आनुवंशिक विकारों के बारे में चिंता जताई। एक्सपर्ट ने एक मत से कहा कि सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। हेल्थ सेक्टर में काम किए जाने की जरूरत प्रोफेसर सईद ने कहा कि जिन परिवारों में आपस में शादियां होती हैं। वहां थैलेसीमिया, माइक्रोसेफली जैसी आनुवंशिक बीमारियां आम हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में कजिन मैरिज की दर को देखते हुए स्वास्थ्य सेवा हस्तक्षेप की जरूरत है। प्रोफेसर अताउर्रहमान ने आनुवंशिक बीमारियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक विकास के महत्व पर जोर दिया। थैलेसीमिया एक रक्त विकार है जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को प्रभावित करता है। माइक्रोसेफली एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे का सिर असामान्य रूप से छोटा होता है। रिसेसिव जेनेटिक डिसऑर्डर तब होते हैं जब बच्चे को माता-पिता दोनों से जीन का एक दोषपूर्ण संस्करण विरासत में मिलता है। डोमिनेंट जेनेटिक डिसऑर्डर भी बच्चे को विरासत में मां-पिता से ही मिलता है।

देश में उत्पादकता में सुधार 2023-24 में दूध उत्पादन बढ़कर 239 मिलियन टन हो गया

नईदिल्ली भारत का दूध उत्पादन 2023-24 में 4 प्रतिशत बढ़कर 239.3 मिलियन टन हो गया है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने हाल ही में यह जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता भी 2022-23 में 459 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 2023-24 में 471 ग्राम प्रतिदिन हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत के दूध उत्पादन में औसत वृद्धि दुनिया के औसत 2 प्रतिशत के मुकाबले 6 प्रतिशत रही है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2024 के अवसर पर बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी 2024 जारी की, जिसे हर साल 26 नवंबर को श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन के सम्मान में मनाया जाता है, जिनका जन्म इसी दिन हुआ था। दूध उत्पादन बढ़कर लगभग 239 मिलियन टन राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि उत्पादकता में सुधार के कारण 2023-24 में दूध उत्पादन बढ़कर लगभग 239 मिलियन टन हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, “विदेशी/संकर नस्ल मवेशियों से दूध उत्पादन में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और पिछले वर्ष की तुलना में 2023-24 में देशी मवेशियों से दूध उत्पादन में 44.76 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।” अंडा उत्पादन में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023-24 में कुल अंडा उत्पादन 3.17 प्रतिशत बढ़कर 142.77 बिलियन हो गया। प्रति व्यक्ति अंडे की उपलब्धता 103 अंडे प्रति वर्ष है। मांस उत्पादन में 4.95 प्रतिशत की वृद्धि इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया कि मांस उत्पादन में 4.95 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2023-24 में 10.25 मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है। देश में कुल ऊन उत्पादन 33.69 मिलियन किलोग्राम आंका गया है। डेयरी किसानों को संगठित क्षेत्र में लाने की आवश्यकता केंद्रीय मंत्री ने डेयरी किसानों को संगठित क्षेत्र में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया क्योंकि इससे दूध उत्पादन और उनकी आय बढ़ेगी और बिचौलियों को खत्म किया जा सकेगा। उन्होंने डेयरी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बात की। केन्द्रीय मंत्री ने डेयरी किसानों से अपने पशुओं का टीकाकरण करने को कहा केंद्रीय मंत्री रंजन सिंह ने डेयरी किसानों से अपने पशुओं का टीकाकरण करने को कहा क्योंकि सरकार उन्हें बीमारी से बचाने में मदद करने के लिए मुफ्त टीकाकरण प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि खुरपका और मुंहपका रोग तथा ब्रुसेलोसिस को 2030 तक देश से खत्म कर दिया जाएगा और इससे निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार का पशुधन की नस्ल सुधार पर भी ध्यान केंद्रित केंद्रीय मंत्री ने डेयरी किसानों से सेक्स-सॉर्टेड सीमन और कृत्रिम गर्भाधान को बड़े पैमाने पर अपनाने को भी कहा। रंजन सिंह ने कहा कि सरकार पशुधन की नस्ल सुधार पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।

किसानों और उनकी जमीन की सुरक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर आवाज उठाने का आग्रह किया:चंद्रशेखरनाथ स्वामीजी

बेंगलुरु विश्व वोक्कालिगा महासमस्तन मठ के प्रमुख कुमार चंद्रशेखरनाथ स्वामीजी ने वक्फ संपत्ति विवाद पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसा कानून लाया जाना चाहिए। जिसमें मुस्लिम समुदाय के पास वोट देने का अधिकार न हो। उन्होंने किसानों और उनकी जमीन की सुरक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर आवाज उठाने का आग्रह किया। वक्फ बोर्ड पर सवाल स्वामीजी ने कहा कि वक्फ बोर्ड द्वारा किसी की भी जमीन पर दावा करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने इसे धर्म के खिलाफ बताते हुए कहा, “किसानों की जमीन छीनना धर्म नहीं है। सभी को यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ना चाहिए कि किसानों की जमीन उनके पास ही रहे।” किसानों के समर्थन में अपील बेंगलुरु में भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित एक विरोध सभा में उन्होंने किसानों को अन्नदाता बताते हुए उनकी रक्षा की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा “किसानों की जमीन और संपत्ति सुरक्षित रहनी चाहिए। कोई भी इसे न छीन सके। यह सुनिश्चित करना जरूरी है।” वोटिंग अधिकार पर विवादित बयान स्वामीजी ने सुझाव दिया कि भारत में मुसलमानों को वोट देने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा “नेता वोटों के लिए गलत फैसले लेते हैं। अगर मुसलमानों को वोट का अधिकार न हो, तो हर कोई शांति से रह सकता है। पाकिस्तान में भी ऐसा ही किया गया है। जहां गैर-मुसलमानों को वोट देने का अधिकार नहीं है। भारत में भी ऐसा होना चाहिए।” वक्फ संपत्ति पर विवाद कर्नाटक में कुछ किसान और संगठनों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया है। इस मुद्दे को लेकर किसान समूह, कुछ संगठन और विपक्षी बीजेपी इसका विरोध कर रही है।  

केंद्र सरकार बजट 2025-26 में 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा फैसला लेगी! न्यूनतम वेतन 34 हजार और पेंशन 17 हजार

नई दिल्ली फरवरी में पेश होने वाले बजट 2025-26 से पहले 8वें वेतन आयोग की चर्चा तेज हो चली है।चुंकी सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हर 10 साल में नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है। 7वें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में किया गया था, लेकिन इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गई, जिसका समय 31 दिसंबर 2025 को खत्म होगा, इस आधार पर अब अगले वेतन आयोग की मांग उठने लगी है। कयास लगाए जा रहे है कि केंद्र सरकार बजट 2025-26 में 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकती है।अगर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो न्यूनतम वेतन 34 हजार और पेंशन 17 हजार तक पहुंच सकती है।हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।बता दे कि नए वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को अलग-अलग आर्थिक मापदंडों खासतौर पर महंगाई के हिसाब से रिवाइज किया जाता है। 8th Pay Commission लागू हुआ तो बढ़ेगा फिटमेंट फैक्टर ?     मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो साल 2025-26 में अगर 8वां वेतन आयोग लागू होता है तो फिटमेंट फैक्टर में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। फिटमेंट फैक्टर 2.57 से बढ़कर 2.86 फीसदी हो सकता है, जिससे न्यूनतम सैलरी में 186 फीसदी की वृद्धि होगी।     वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत केन्द्रीय कर्मचारियों का फिटमेंट फैक्टर 2.57 है और बेसिक सैलरी 18000 है। माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग में मोदी सरकार फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 2.86% कर सकती है।इससे सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 186 प्रतिशत बढ़कर 51,480 रुपए हो जाएगा और पेंशन में भी 186 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो मौजूदा पेंशन 9,000 रुपए से बढ़कर 25,740 रुपये हो जाएगी।हालांकि अभी अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।     इससे पहले आखिरी बार केन्द्र सरकार ने 2016 में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाया था और इसी साल से 7th pay commission को भी लागू किया गया था।इससे करीब 48.62 लाख कर्मचारियों और 67.85 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। Fitment Factor वृद्धि की मांग क्यों?     फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसके जरिए सैलरी (Salary) और पेंशन (Pension) में संशोधन किया जाता है।फिटमेंट फैक्टर का केन्द्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय करने में अहम रोल माना जाता है।     इस फैक्टर के कारण ही केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में ढाई गुना से अधिक की बढ़ोतरी होती है। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर ही पुरानी बेसिक पे से रिवाइज्ड बेसिक पे की कैलकुलेशन की जाती है।पिछली वेतन आयोग की रिपोर्ट में फिटमेंट फैक्टर एक महत्वपूर्ण सिफारिश है, इसी आधार पर वेतन वृद्धि तय होगी।     यदि 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारी की बेसिक सैलरी 20,000 रुपए है, तो भत्तों को छोड़कर उसकी सैलरी 20,000 X 2.57= 51,400 रुपए होगी। अगर इसे 8वें वेतन आयोग में बढ़ाकर 2.86 कर दिया जाता है, तो यही सैलरी 20,000 x 2.86 = 57,200 रुपये हो जाएगी।

तरल पदार्थ के रिसाव के कारण हुई दुर्घटना, फार्मा प्लांट में जहरीली गैस लीक होने से 1 की मौत, 20 अस्पताल में भर्ती

नई दिल्ली बुधवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के अनकापल्ली में एक फार्मा प्लांट में जहरीली गैस लीक होने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और 20 लोग बेहोश हो गए। सभी पीड़ितों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि तरल पदार्थ के रिसाव के कारण यह दुर्घटना हुई। कर्मचारियों ने HCl और कोलोरफॉर्म के मिश्रण को सांस के जरिए अंदर ले लिया। कोलोरफॉर्म एक वाष्पशील रंगहीन सघन तरल पदार्थ है जिसका उपयोग उद्योगों और चिकित्सा उपयोग के लिए विलायक के रूप में किया जाता है। 10 लोगों ने रिसाव को साफ किया पीड़ितों के परिवार ने आरोप लगाया कि प्रबंधक ने इस दुर्घटना को छिपाने की कोशिश की। सूत्रों ने कहा कि किसी ने भी दुर्घटना को गंभीरता से नहीं लिया। जब यह गैस आग में तब्दील हुई तो उन्होंने आग बुझाने के लिए कास्टिक सोडा डालने की कोशिश की। शिफ्ट में 180 लोग थे, जिनमें से 10 लोगों ने रिसाव को साफ किया, बाकी घर चले गए। देर शाम जब कर्मचारियों को सांस लेने में तकलीफ हुई, तब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। ओडिशा के युवक की मौत फार्मा प्लांट की तरफ से एक प्रेस नोट जारी किया गया। उसमें कहा गया कि कंपनी के उत्पादन संयंत्र में रिएक्टर-कम-रिसीवर टैंक (जीएलआर-325) से तरल रूप में 400 लीटर एचसीएल लीक हो गया और नीचे फर्श पर गिर गया। इस हादसे में ओडिशा का रहने वाला 23 वर्षीय युवक अमित (सहायक) का अस्पताल में निधन हो गया। हालांकि, अब कोई भी कर्मचारी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है। पीड़ित अस्पताल में भर्ती फार्मा अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों को कंपनी द्वारा विशाखापत्तनम के गजुवाका में पवन साईं अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। नौ में से तीन को बाद में विशाखापत्तनम के शीलानगर में केआईएमएस अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। पहले यहां भी हो चुका हादसा बता दें कि पिछले हफ्ते महाराष्ट्र में एक उर्वरक संयंत्र में गैस रिसाव के बाद तीन लोगों की मौत हो गई और नौ घायल हो गए। 22 नवंबर को महाराष्ट्र के सांगली जिले में एक उर्वरक संयंत्र में एक रिएक्टर में विस्फोट के कारण गैस रिसाव हुआ। कडेगांव पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक संग्राम शेवाले ने बताया कि गैस रिसाव के कारण यूनिट में काम करने वाले करीब 12 लोग प्रभावित हुए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इनमें से दो महिला कर्मचारी और एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई। नौ अन्य का इलाज चल रहा है।

मुंबई में एयर इंडिया के पायलट के की खुदकुशी, 25 साल थी उम्र, आरोपी ब्वॉयफ्रेंड गिरफ्तार

नई दिल्ली एयर इंडिया के पायलट के खुदकुशी करने की खबर है। पायलट की लाश उसके फ्लैट से बरामद की गई है। इस घटना के बाद मुंबई के इलाके में हड़कंप मच गया है। पायलट की उम्र सिर्फ 25 साल थी। पुलिस ने छानबीन करते हुए उसके ब्वॉयफ्रेंड को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी में पता चला है कि मामला अंधेरी इलाके का है। मृतका का नाम सृष्टि तुली (25) था, जबकि उसका ब्वॉयफ्रेंड आदित्य पंडित (27) है। आदित्य को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसे 29 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। ब्वॉयफ्रेंड पर परिजनों के गंभीर आरोप रिपोर्ट के मुताबिक, आदित्य दिल्ली के रहने वाला है, जबकि सृष्टि यूपी के गोरखपुर जिले की थी। मृतका के परिजनों ने आदित्य पर कई आरोप लगाए हैं। सृष्टि के रिश्तेदार ने बताया कि आदित्य उसके साथ दुर्व्यवहार करता था और बहस करता था। एक रिश्तेदार ने तो ये भी कहा कि आदित्य ने पहले उसकी हत्या की और फिर खुदकुशी का रूप दे रहा है। उन्होंने आगे ये भी बताया कि आरोपी ने सृष्टि को नॉनवेज खाने से रोका था। परिवारवालों ने दोषी को सख्त सजा देने की मांग की है। क्या बोली पुलिस? पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि उत्पीड़न के कारण वह मानसिक रूप से परेशान थी। उन्होंने बताया कि आदित्य पायलट की परीक्षा की तैयारी कर रही थी, लेकिन वह पास नहीं हो पाया। FIR में क्या है? पुलिस ने अपनी FIR में कहा कि सृष्टि और आदित्य की मुलाकात करीब दो साल पहले दिल्ली में कमर्शियल पायलट लाइसेंस की ट्रेनिंग के दौरान हुई थी। उस वक्त सृष्टि दिल्ली में ही रहती थी। एयर इंडिया में नौकरी लगने के बाद वह मुंबई में रहने लगी।

माइकोप्लाज्मा निमोनिया एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जापान में बढे मामले

टोक्यो जापान में माइकोप्लाज्मा निमोनिया के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के अनुसार, 17 नवंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान देश भर के चिकित्सा संस्थानों में औसतन 2.84 मरीज मिले हैं। यह आंकड़ा पिछले सप्ताहों की तुलना में मामलों में वृद्धि दिखाता है। वर्तमान ट्रैकिंग प्रणाली शुरू होने के बाद से यह अब तक का उच्चतम आंकड़ा है। माइकोप्लाज्मा निमोनिया एक बैक्टीरियल इंफेक्शन (जीवाणु संक्रमण) है। यह इंफेक्शन ज्यादातर बच्चों में देखने को मिलता है। यह सांस के साथ निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों से या करीबी संपर्क में आने से फैलता है। इसके लक्षणों में मरीजों को लगातार खांसी, बुखार, थकान और सिरदर्द जैसी परेशानी दिखाई देती है। इसके कई मामले बिना गंभीर जटिलताओं के ठीक हो जाते हैं। वहीं, कुछ मामले गंभीर निमोनिया में बदल सकते हैं जिसके लिए मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता पड़ सकती है। फुकुई प्रान्त ने प्रति चिकित्सा संस्थान ने 8.83 मामलों के साथ उच्चतम क्षेत्रीय औसत की सूचना दी। उसके बाद आओमोरी (5.0), क्योटो (4.71) और होक्काइडो (4.59) का स्थान रहा। रिपोर्ट के अनुसार, टोक्यो और ओसाका जैसे प्रमुख शहरों में भी क्रमशः 4.32 और 3.17 की उच्च दर दर्ज की गई। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी नागरिकों से निवारक उपाय अपनाने का आग्रह कर रहे हैं। मरीजों को मास्क पहनने, स्वच्छता का ध्यान रखने के साथ डॉक्टरों से परामर्श लेने की सलाह दी है। माइकोप्लाज्मा निमोनिया सभी मानव रोगजनकों में सबसे अधिक पहचाने जाने वाले जीवाणुओं में से एक है। इस वायरस की 200 से अधिक प्रजातियां हैं।

हमारे देश की संस्कृति और उन देशों की संस्कृति के बीच बहुत अंतर है, जहां पर अश्लील कंटेंट प्रदर्शित होते हैं: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली लोकसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है इस बीच, बीजेपी सांसद अरुण गोविल ने संसद में सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती अश्लील कंटेंट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन प्लेटफार्म्स पर बिना किसी रोक-टोक के अश्लील सामग्री प्रसारित हो रही है, जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ है और इसका समाज पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। आइए जानते है कि इस पर केंद्रीय मंत्री अश्निनी वैष्णव ने क्या जवाब दिया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अरुण गोविल के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “हमारे देश की संस्कृति और उन देशों की संस्कृति के बीच बहुत अंतर है, जहां पर अश्लील कंटेंट प्रदर्शित होते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर भी अश्लील सामग्री प्रसारित की जाती है, और इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे। आम सहमति की अपील अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा, “मैं चाहूंगा कि इस मुद्दे पर एक स्थायी समिति बने और इस पर विचार किया जाए। हमें मौजूदा कानूनों को और मजबूत करने की आवश्यकता है और इसके लिए सभी पार्टियों के बीच आम सहमति बनानी चाहिए।” उनका यह बयान लोकसभा में मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। नई नीति पर सरकार का काम जारी केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए एक नई नीति का मसौदा तैयार कर रही है। उन्होंने कहा, “पहले संपादकीय टीम होती थी, जो पब्लिश होने वाली सामग्री को चेक करती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब हमें इस तरह के कंटेंट पर नियंत्रण पाने के लिए नई नीति की आवश्यकता है।” यह बयान एल मुरुगन, जो केंद्रीय मंत्री हैं, के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार ओटीटी कंटेंट को विनियमित करने के लिए नई नीति बना रही है। दिल्ली हाई कोर्ट को दी गई जानकारी पिछले साल अगस्त में, सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया था कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और उनके बीच के बिचौलियों को नियंत्रित करने के लिए नियम बना रही है। सरकार का उद्देश्य यह है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अभद्र भाषा और अपवित्रता से मुक्त सामग्री प्रसारित हो। अदालत की टिप्पणी और आवश्यक कदम दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सामग्री को विनियमित करने के लिए भारत को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य देशों की तरह भारत को भी इस चुनौती से निपटने के लिए उपयुक्त कानून, दिशानिर्देश, और नियम बनाने चाहिए। सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील कंटेंट पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार गंभीर प्रयास कर रही है। नई नीति के तहत इन प्लेटफॉर्म्स को विनियमित किया जाएगा और भारत की संस्कृति के अनुरूप सामग्री प्रसारित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सरकार और अदालत दोनों इस दिशा में गंभीर हैं और उम्मीद की जा रही है कि इस मुद्दे पर जल्द ही ठोस समाधान निकलेगा।

भ्रष्टाचार के मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, EPFO ऑफिस बद्दी के रीजनल कमिश्नर समेत 3 गिरफ्तार

हिमाचल हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफओ) कार्यालय में भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रीजनल पीएफ कमिश्नर एनफोर्समैंट ऑफिसर और कंसल्टैंट को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर एक फर्म के पीएफ मामले को निपटाने के लिए 10 लाख रुपए रिश्वत की मांग की थी। उक्त आरोपियों ने शिकायतकर्ता की फर्म के पीएफ मामले में अड़चन डालते हुए पैसे न देने पर भारी जुर्माने की धमकी दी। मजबूर होकर फर्म मालिक ने सीबीआई को इसकी शिकायत दी, जिसके बाद एजैंसी ने जाल बिछाकर तीनों आरोपियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। पुख्ता सबूतों के बाद की गिरफ्तारी बता दें कि सीबीआई ने 24 नवम्बर को एनफोर्समैंट ऑफिसर मदन लाल और कंसल्टैंट संजय कुमार यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान रीजनल कमिश्नर रवि आनंद का नाम भी सामने आया। इसके बाद तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद आज को उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की गई। सीबीआई द्वारा तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश करने की प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थलों की सुरक्षा से संबंधित याचिका पर 4 दिसंबर को सुनवाई करेगा

नई दिल्ली देश में विभिन्न धार्मिक स्थलों, खासकर मंदिरों और मस्जिदों को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित जामा मस्जिद का सर्वेक्षण कोर्ट के आदेश पर हुआ था, जिसके बाद हिंसा की घटनाएं सामने आईं। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने 1991 के पूजा स्थल कानून और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने का संकेत दिया है। आइए जानते हैं इस मामले के बारे में और कब होगी इसपर सुनवाई। सुप्रीम कोर्ट में कब होगी सुनवाई? सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थलों की सुरक्षा और 1991 के पूजा स्थल कानून से संबंधित याचिका पर 4 दिसंबर 2024 को सुनवाई होगी। इस सुनवाई में भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ शामिल होगी। सुनवाई करने वाले न्यायधीश इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पी नरसिम्हा, और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच शामिल होगी। यह केस जमीअत उलमा-ए-हिंद और गुलजार अहमद नूर मोहम्मद आजमी की तरफ से दायर किया गया है, और इनके वकील एजाज मकबूल कोर्ट में उनका पक्ष रखेंगे। क्या है 1991 का पूजा स्थल कानून? 1991 का पूजा स्थल कानून भारत में धार्मिक स्थलों के स्वरूप को लेकर एक महत्वपूर्ण कानून है। इसके तहत, यह प्रावधान किया गया कि 15 अगस्त 1947 को जिस रूप में धार्मिक स्थल था, उसे उसी रूप में बनाए रखा जाएगा। इसका मतलब है कि स्वतंत्रता संग्राम के समय के बाद से किसी भी धार्मिक स्थल का रूप बदलने पर रोक लगा दी गई है। इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और रूप में बदलाव से होने वाले विवादों को रोकना है। खासतौर पर इसने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर एक अपवाद रखा था, जिससे विवादित बाबरी मस्जिद को लेकर कोई बदलाव नहीं किया जा सका था। धारा 3 के तहत, यह कानून किसी व्यक्ति या समूह को किसी धार्मिक स्थल को दूसरे धर्म के स्थल में बदलने से रोकता है। क्या बदलाव होगा इस कानून में? इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वरूप को स्थिर रखना था ताकि किसी भी धार्मिक स्थल में बदलाव या तोड़फोड़ से विवादों की स्थिति पैदा न हो। लेकिन, कई बार इस कानून की व्याख्या को लेकर विवाद उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून पर सुनवाई होने से भविष्य में इस कानून के प्रभाव और इसकी व्याख्या पर कुछ नया रुख सामने आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अब जब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट पूजा स्थल कानून की परिभाषा और उसके दायरे को कैसे निर्धारित करता है। इसके अलावा, कोर्ट यह भी तय करेगा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं। यह मामला धार्मिक स्थलों से जुड़ी संवेदनशीलता को लेकर है, और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि इस कानून में कोई बदलाव किया जाता है, तो वह देशभर में धार्मिक स्थलों के विवादों को प्रभावित कर सकता है। 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई देश भर के लोगों और धार्मिक संगठनों के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकती है।

चीन में रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के खिलाफ करप्शन के आरोपों ने चीन की आर्मी को हिलाकर रख दिया, मुश्किलें बढ़ी

बीजिंग चीन में शी जिनपिंग सरकार के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। लगातार तीसरे रक्षा मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। सरकार ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के खिलाफ करप्शन के आरोपों ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को हिलाकर रख दिया है। फाइनेंशियल टाइम्स ने बुधवार को बताया कि डोंग जुन के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। एफटी ने वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि डोंग कथित तौर भ्रष्टाचार के लिए जांच का सामना करने वाले लगातार तीसरे चीनी रक्षा मंत्री हैं। हालांकि चीन के रक्षा मंत्रालय ने मामले में टिप्पणी नहीं दी है। चीन की सेना में पिछले साल से व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया है। अब तक कम से कम नौ पीएलए जनरलों और मुट्ठी भर रक्षा उद्योग के अधिकारियों को राष्ट्रीय विधायी निकाय से हटाया जा चुका है, अब एक बार फिर नए आरोपों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। एक साल पहले ही हुई नियुक्ति पीएलए के पूर्व नौसेना प्रमुख डोंग को दिसंबर 2023 में रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था। उनके पूर्ववर्ती ली शांगफू को सात महीने के कार्यकाल के बाद हटा दिया गया था। डोंग ने पिछले हफ्ते लाओस में रक्षा मंत्रियों की एक बैठक के दौरान अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन से मिलने से इनकार कर दिया था। तब पेंटागन प्रमुख ने बुधवार को कहा था कि यह कदम दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके कार्यकाल के दौरान हाल ही में अमेरिका-चीन के सैन्य-से-सैन्य संबंधों में नरमी भी आई। दोनों देशों के बीच सितंबर में पहली बार सफल थिएटर-स्तरीय कमांडर वार्ता हुई। दो पूर्व रक्षा मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में हटाए गए डोंग से पहले दो पूर्व रक्षा मंत्री ली और वेई फ़ेंगहे को जून में “अनुशासन के गंभीर उल्लंघन” और भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उस समय पार्टी के एक बयान में कहा गया था कि इन दोनों ने “पार्टी और केंद्रीय सैन्य आयोग के विश्वास को धोखा दिया है। बयान में कहा गया है कि इन्होंने रिश्वत के रूप में बड़ी रकम ली और पदोन्नति या सेना में उच्च रैंकिंग में नियुक्ति को लेकर घोटाला किया।

हमें अपने किशोरों को उनकी खुशी बनाए रखने के लिए उपकरण और तकनीकें देने की जरूरत है – गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

बेंगलुरु एक ऐतिहासिक पहल में वैश्विक आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग ने 70 स्कूलों और विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी की है और कई समझौता ज्ञापनों (एम.ओ.यू) पर हस्ताक्षर किए हैं। कार्यक्रम में  माइलस्टोन एकेडमी भिलाई और अरपा रिवर वैली इंटरनेशनल स्कूल बिलासपुर भी शामिल हुए।  इस सहयोग का उद्देश्य 178,000 से अधिक छात्रों को सुदर्शन क्रिया और अन्य ध्यान तकनीकों के परिवर्तनकारी श्वास अभ्यास से परिचित कराकर सशक्त बनाना है जो मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक कल्याण और तनावमुक्त वातावरण को बढ़ावा देते हैं। गुरुदेव ने अपने संबोधन में कहा, “बच्चे जब पैदा होते हैं तब वे खुश रहते हैं लेकिन जब तक वे किशोरावस्था में पहुँचते हैं, तब वे खुश नहीं रह जाते। हमें उनकी खुशी को बनाए रखने के लिए उपकरण और तकनीक देना बहुत महत्त्वपूर्ण है।” गुरुदेव अपने संबोधन में बताते हैं, “मैं दुनिया भर में अक्सर देखता हूँ कि विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र जबरदस्त तनाव से गुजर रहे हैं। छात्र एक ओर अवसाद से ग्रस्त हो रहे हैं और दूसरी ओर आक्रामक हो रहे हैं।” विद्यालय परिसरों में आत्महत्या से मरने वाले छात्रों की संख्या आसमान छू रही है। बैंगलोर के आर्ट ऑफ लिविंग अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में गुरुदेव की उपस्थिति में 70 भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए गए। यह पहल आर्ट ऑफ लिविंग की नशामुक्त खुशहाल परिसर बनाने और आने वाली पीढ़ियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों और युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम इस समय भारतीय युवाओं में अवसाद की दर 31% से 57% तक पहुँच चुकी है जो बहुत अधिक है । ऐसे में आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम बहुत जरूरी हैं। स्कूली बच्चों के लिए मेधा योग, उत्कर्ष योग और कॉलेज के छात्रों के लिए YES!+(यूथ एम्पोवेर्मेंट एंड स्किल्स) जैसे विशेष रूप से तैयार किए गए कार्यक्रमों को जबरदस्त सराहना मिली है। ये कार्यक्रम छात्रों को तनाव से निपटने, एकाग्रता में सुधार करने, रचनात्मकता बढ़ाने और नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करने में मदद करने के लिए श्वास तकनीक, ध्यान और जीवन के कौशल को एकीकृत करते हैं। कार्यक्रम बच्चों और किशोरों में डिजिटल एडिक्शन जैसी चुनौतियों से लड़ने में भी मदद कर रहे हैं। आर्ट ऑफ लिविंग ने एम्स, आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, एनएलयू, आईआईआईटी जैसे दुनिया भर के प्रतिष्ठित संस्थानों सहित कई अग्रणी विश्वविद्यालयों में  ऐसी ही पहल को सफलतापूर्वक लागू किया है। संस्था के कार्यक्रम अमेरिका के 135 से अधिक परिसरों में सक्रिय हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से, आर्ट ऑफ लिविंग युवा मन को आकार देने का कार्य कर रहा है और साथ ही शिक्षा प्रणालियों में बढ़ती चुनौतियों का समाधान कर रहा है। “हमारे सातवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए शुरू किया गया मेधा योग और उत्कर्ष योग कार्यक्रम से बेहतर बदलाव देखा जा रहा है । कई छात्रों ने स्वास्थ्य लाभ, बेहतर सम्बन्ध और मानसिक शांति का अनुभव किया है । यह पहल शैक्षिक संस्थानों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है,” भारती विद्या भवन हायर सेकेंडरी स्कूल, एरोड  की अध्यक्ष अरुणा रामकृष्ण ने साझा किया। मेयो कॉलेज अजमेर के निदेशक एस.एच. कुलकर्णी ने इसका समर्थन करते हुए कहा, “आर्ट ऑफ लिविंग कार्यशालाओं में सिखाई गई सुदर्शन क्रिया ने छात्रों के जीवन में काफी परिवर्तन किया है । छात्रों ने बेहतर तनाव प्रबंधन, भावनात्मक स्थिरता और उच्च एकाग्रता स्तर की जानकारी दी है। यह शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए आशीर्वाद है।” शिक्षाविद युवा पीढ़ी के व्यक्तित्व को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे युवा दिमागों को प्रेरित करके उनकी ऊर्जा को सही दिशा में लगा सकते हैं, जो समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। ये कार्यक्रम विशेष रूप से छात्रों और शिक्षकों की चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार किए गए हैं। गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के विषय में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर एक मानवतावादी, आध्यात्मिक गुरु और  शांतिदूत हैं। अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से गुरुदेव ने दुनिया भर में लाखों लोगों को तनावमुक्त और हिंसामुक्त दुनिया के अपने दृष्टिकोण से प्रेरित किया है। उन्होंने ऐसे कार्यक्रम डिज़ाइन किए हैं जो एक गहरी और खुशहाल जिंदगी जीने के लिए तकनीकें और उपकरण प्रदान करते हैं। उन्होंने आर्ट ऑफ़ लिविंग तथा इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन वैल्यूज जैसी गैर-लाभकारी संगठनों की स्थापना की है जो लिंग, जाति, राष्ट्रीयता और धर्म की सीमाओं से परे मानवता का समर्थन करती  हैं। आर्ट ऑफ लिविंग  के बारे में 43 वर्षों में आर्ट ऑफ लिविंग ने 180 से अधिक देशों में लाखों लोगों को नवाचारी कार्यक्रमों के माध्यम से सशक्त किया है। इसके कार्यक्रम छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों के लिए प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीकों के साथ मिलाकर ऐसे वातावरण का निर्माण करते हैं जो सीखने और विकास के लिए अनुकूल होते हैं।

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