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रेलवे ने मुंबई उपनगरीय खंड पर 13 नई एसी लोकल ट्रेन सेवाओं की शुरुआत करने का निर्णय लिया

मुंबई मुंबई उपनगर क्षेत्र में सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पश्चिम रेलवे ने 27 नवंबर 2024 से मुंबई उपनगरीय खंड पर 13 नई एसी लोकल ट्रेन सेवाओं की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। इन नई सेवाओं के साथ ही एसी लोकल ट्रेनों की कुल संख्या 96 से बढ़कर 109 हो जाएगी। वहीं, शनिवार और रविवार को भी एसी लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़कर 52 से 65 हो जाएगी। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यात्रियों के बीच एसी लोकल ट्रेनों की बढ़ती लोकप्रियता और मांग को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और एसी सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, पश्चिम रेलवे ने 12 नॉन-एसी कार सेवाओं को बदलकर 13 नई एसी लोकल ट्रेन सेवाओं की शुरुआत की है। इन नई एसी लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वालों की सुविधा में इजाफा होगा और अधिक यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। पश्चिम रेलवे द्वारा शुरू की जा रही इन नई एसी लोकल ट्रेनों का नियमित परिचालन 27 नवंबर से शुरू होगा। पहली एसी लोकल ट्रेन चर्चगेट से सुबह 12:34 बजे रवाना होगी, और इसके बाद सभी नई एसी ट्रेनें समय सारणी के अनुसार चलेंगी। इन 13 नई एसी लोकल ट्रेनों में से 6 अप दिशा में और 7 डाउन दिशा में चलेंगी। अप दिशा में, विरार-चर्चगेट और भायंदर-चर्चगेट के बीच 2-2 सेवाएं, जबकि विरार-बांद्रा और भायंदर-अंधेरी के बीच एक-एक सेवा शुरू की जाएगी। डाउन दिशा में, चर्चगेट-विरार के बीच दो सेवाएं, चर्चगेट-भायंदर, अंधेरी-विरार, बांद्रा-भायंदर, महालक्ष्मी-बोरीवली और बोरीवली-भायंदर के बीच एक-एक सेवा शुरू की जाएगी। पश्चिम रेलवे पर एसी लोकल सेवाओं की कुल संख्या 109 हो जाएगी, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कुल लोकल सेवाओं की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा। पश्चिम रेलवे पर 109 एसी लोकल ट्रेन सेवाओं के साथ-साथ, अन्य लोकल ट्रेनों की कुल संख्या 1406 बनी रहेगी। पश्चिम रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि इन नई एसी लोकल ट्रेनों से भारी भीड़ और यात्रियों की बढ़ती संख्या को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा। खासकर गर्मी के दिनों में जब एयर कंडीशनिंग की सुविधा अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।  

पेंशनधारियों और बुजुर्ग नागरिकों की सुविधा के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्रों की संख्या रिकॉर्ड 1 करोड़ के पार

नई दिल्ली पेंशनधारियों और बुजुर्ग नागरिकों की सुविधा के लिए शुरू किए गए डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्रों (डीएलसी) की संख्या ने अभियान डीएलसी 3.0 के तहत एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में यह जानकारी दी। कार्मिक,लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह मील का पत्थर बुजुर्ग नागरिकों के लिए जीवन को आसान बनाने में एक लंबा रास्ता तय करेगा और पीएम नरेंद्र मोदी के विजन को पूरा करेगा, जैसा कि उन्होंने पिछले रविवार को मन की बात के हालिया एपिसोड में व्यक्त किया था।” मन की बात के 116वें एपिसोड में पीएम मोदी ने कहा था, “अब डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की सुविधा मिलने से चीजें बहुत सरल हो गई हैं; बुजुर्गों को बैंक जाने की जरूरत नहीं है। बुजुर्गों को तकनीक के कारण किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। बुजुर्गों को तकनीक के प्रति जागरूक बनाने जैसे प्रयासों से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र पाने वालों की संख्या 80 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। इनमें से 2 लाख से ज्यादा ऐसे बुजुर्ग हैं जिनकी उम्र 80 साल से भी ज्यादा हो गई है।” केंद्रीय मंत्री ने कहा, “पेंशनभोगियों के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए पीएम मोदी का विजन डीएलसी अभियान 3.0 के सफल क्रियान्वयन के जरिए साकार हो रहा है। सभी प्रमुख हितधारक – पेंशन वितरण करने वाले बैंक, पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग, रक्षा लेखा महानियंत्रक, रेल मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, डाक विभाग, आईपीपीबी, यूआईडीएआई और पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन पेंशनधारियों के डिजिटल सशक्तिकरण के विजन को साकार करने के लिए पूरी सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।” केंद्रीय मंत्री ने पेंशनधारियों के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया सेंटर से राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान 3.0 का शुभारंभ किया। डीएलसी अभियान 3.0 एक से 30 नवंबर तक देश भर के 800 शहरों और कस्बों में आयोजित किया जा रहा है। 1 से 25 नवंबर तक 1,984 शिविर आयोजित किए गए हैं और देश भर में 1.8 लाख डाकियों को तैनात किया गया है। डीएलसी अभियान 3.0 के तहत फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से जमा किए गए डीएलसी में 202 गुना वृद्धि हुई है। इस अभियान के तहत दिल्ली में 3, बेंगलुरु और हैदराबाद में 1-1 मेगा कैंप आयोजित किए गए हैं। शिविरों के दौरान पेंशनभोगियों और पेंशनभोगी कल्याण संघों ने बताया कि डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र का विकास पेंशनधारियों, विशेष रूप से वृद्ध, विकलांग और अस्पताल में भर्ती लोगों के लिए जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।  

छोटू लातेहार के नावाडीह इलाके में रात नक्सलियों के बीच वर्चस्व की जंग में मारा गया,15 लाख रुपए था इनाम

लातेहार झारखंड के लातेहार में 15 लाख रुपए के इनामी माओवादी नक्सली कमांडर छोटू खरवार की हत्या कर दी गई है। बताया जा रहा है कि छोटू लातेहार के नावाडीह इलाके में रात नक्सलियों के बीच वर्चस्व की जंग में मारा गया है। लातेहार, पलामू, गढ़वा, चतरा, गुमला सहित कई जिलों में छोटू लंबे समय से आतंक का पर्याय बना हुआ था। वह 100 से भी अधिक वारदातों में वांटेड था। पुलिस ने उसकी लाश बरामद कर ली है। झारखंड पुलिस ने उसपर जहां 15 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था, वहीं नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी एनआईए ने भी उसे मोस्ट वांटेड नक्सलियों की सूची रखते हुए तीन लाख के इनाम की घोषणा की थी। छोटू खरवार लातेहार के छिपादोहर सिकिद गांव का रहने वाला था। वह भाकपा माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का मेंबर था और संगठन में सुजीत जी के नाम से भी जाना जाता था। अगस्त में उसके घर पर पुलिस ने पोस्टर चिपकाया था और उसे 30 दिन के अंदर न्यायालय में पेश होने को कहा गया था। झारखंड में नक्सलियों के सबसे बड़े गढ़ बूढ़ापहाड़ में पिछले साल जब सुरक्षा बलों और पुलिस ने ऑपरेशन ऑक्टोपस चलाया था, तो वहां से कई नक्सली भाग खड़े हुए थे। छोटू खरवार भी इन्हीं में एक था। वह कोयल और शंख जोन में संगठन के विस्तार में जुटा था। छोटू ने हत्या, रंगदारी एवं लेवी वसूली, विस्फोट, आगजनी, गोलीबारी, पुलिस पर हमले सहित कई वारदातों को अंजाम दिया था। हाल में उसने लातेहार के छिपादोहर के इलाके में एक दैनिक वेतन भोगी कर्मी की हत्या कर दी थी। वर्ष 2016 में लातेहार के बालूमाथ थाने की पुलिस ने सहारा इंडिया के मैनेजर चंदन कुमार के पास से 3 लाख रुपए बरामद किए थे। मैनेजर ने पुलिस से कहा था कि पैसे छोटू खेरवार के हैं। उसके पास से छोटू के 26 लाख रुपए के निवेश का डिपॉजिट स्लिप भी पुलिस को मिला था। 19 जनवरी 2018 को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने केस टेकओवर किया था। पुलिस ने नक्सलियों का पैसा निवेश कराने के मामले में उसकी पत्नी ललिता देवी को 19 अक्टूबर 2019 को गिरफ्तार किया था।  

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान दिवस पर सुप्रीम कोर्ट के राम जन्म भूमि फैसले का हिंदी संस्करण जारी किया

नई दिल्ली कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 75वें संविधान दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट के राम जन्म भूमि फैसले का हिंदी संस्करण जारी किया है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने राम जन्मभूमि पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस फैसले का हिंदी संस्करण कानून एवं न्याय मंत्रालय के अंतर्गत विधि साहित्य प्रकाशन द्वारा किया गया है। इस मौके पर सरकार ने भारतीय संविधान पर एक ऑनलाइन पाठ्यक्रम की भी घोषणा की है। राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित इस समारोह में कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हिंदी में अनुवाद कानूनी साहित्य को अधिक आसान, समावेशी और समझने योग्य बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह पहल हमारे राष्ट्र की भावना का प्रतीक है। इस मौके पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी, कानून सचिव राजीव मणि और अतिरिक्त सचिव डॉ. मनोज कुमार सहित कई अन्य अधिकारी और वकील उपस्थित थे। समारोह का आयोजन कानून एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा किया किया गया था। इस अवसर पर विभाग ने भारतीय संविधान पर एक ऑनलाइन पाठ्यक्रम की भी घोषणा की। यह पाठ्यक्रम लोगों को भारतीय संविधान के प्रमुख पहलुओं से परिचित होने की सुविधा देगा। मनोज कुमार ने कहा कि इस पहल को बड़े पैमाने पर जनता के बीच संविधान की समझ बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।  राम मंदिर निर्माण में मजदूर बने चुनौती अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक का आज दूसरा दिन है। राम मंदिर निर्माण में अब तक 800 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। निर्माण पूरा होने में लगभग 1800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। राम मंदिर निर्माण में अभी भी मजदूरों की कमी है। मजदूरों की संख्या को दोगुनी करने के लिए निर्माण समिति ने एलएंडटी से अनुरोध किया है। 22 जनवरी 2025 को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ पर रामलला के अलावा अतिरिक्त मंदिरों के दर्शन पर अभी संशय बना हुआ है। आज भी बनी मजदूरों की चुनौती राम मंदिर भवन निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि शिखर को छोड़कर इसी माह के अंत तक पत्थर लगाने का कार्य पूरा हो जाएगा। राम मंदिर के शिखर  में 55000 क्यूबिक फीट पत्थर अभी और लगने हैं।  8,20,000 क्यूबिक फीट पत्थर परकोटा में लगेंगे। निर्माण कार्य में चुनौती आज भी मजदूरों की है। महापुरुषों के दर्शन पर संशय मजदूरों की संख्या जब तक दोगनी नहीं होगी, तब तक कार्य की गति धीमी रहेगी। इस समय लगभग  800 मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए हैं। जब तक 1500 के आसपास मजदूर कार्य नहीं करेंगे तब तक निर्माण में पीछे रहेंगे। 2025 को भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा की प्रथम वर्षगांठ पर रामलला के अलावा किसी और महापुरुषों के दर्शन पर संशय है।  

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले और धर्मगुरु चिन्मय की गिरफ्तारी के बाद ISKCON पर बैन लगाने की तैयारी, हाईकोर्ट में याचिका दायर

ढाका पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश इस समय भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है. हिंदुओं पर हमले और धर्मगुरु चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी के बाद ISKCON पर बैन लगाने की तैयारी की जा रही है. इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. इस बीच बांग्लादेश सरकार ने ISKCON को धार्मिक कट्टरपंथी संगठन बता दिया है. हाईकोर्ट में बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह सरकार का मुख्य एजेंडा है और इसके लिए जरूरी तैयारी शुरू कर दी गई है. इसका मतलब है कि ISKCON पर जल्द ही बैन लगेगा. अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि ISKCON एक धार्मिक कट्टरपंथी संगठन है. इस पर कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वह इस्कॉन पर सरकार के रुख और देश की मौजूदा स्थिति का खाका पेश करे. कोर्ट ने सरकार को सचेत रहने को कहा है ताकि देश में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़े. हाईकोर्ट की जस्टिस फराह महबूब और जस्टिस देबाशीष रॉय की पीठ ने इस संबंध में कहा कि इससे पहले एक वकील ने इस्कॉन पर बैन लगाने के लिए याचिका दायर की और चटगांव में वकील सैफुल आलम की हत्या सहित पूरी स्थिति को कोर्ट के संज्ञान में लेकर आया. इस पर अब कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इस्कॉन संगठन क्या है? यह कहां से आया है? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह कोई राजनीतिक दल नहीं है बल्कि धार्मिक कट्टरपंथी संगठन है. बता दें कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने संविधान से धर्मनिरपेक्षता शब्द को हटाने की मांग की थी. बता दें कि बांग्लादेश की लॉ एंफोर्समेंट एजेंसी ने चिन्मय कृष्ण दास को देशद्रोह के आरोप में 25 नवंबर को गिरफ्तार किया था. बांग्लादेश की अदालत ने उन्हें मंगलवार को उन्हें जमानत नहीं दी और जेल भेज दिया. इसके बाद चिन्मय दास के समर्थक सड़कों पर उतर आए और उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू किया. सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प के दौरान पत्रकारों सहित कम से कम 10 लोग घायल हो गए. बांग्लादेश से किन अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं चिन्मय प्रभु विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, अल्पसंख्यकों के घरों और दुकानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले दर्ज किए गए हैं. इन घटनाओं के अपराधी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि शांतिपूर्ण तरीके से वैध मांगें करने वाले धार्मिक नेता के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं. चिन्मय दास की गिरफ्तारी क्यों? चिन्मय दास को तब गिरफ्तार किया गया था, जब वो ढाका से चटगांव आ रहे थे. उन्हें ढाका एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया था. इस दौरान सादे कपड़ों में आए कुछ लोगों ने उन्हें जबरदस्ती वैन में बैठा लिया. उन लोगों ने खुद को बांग्लादेशी पुलिस का जासूस बताया था. इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधा रमन दास ने बताया कि बिना कुछ कारण बताए ही चिन्मय दास को जबरदस्ती वैन में डाल दिया गया. बांग्लादेशी पुलिस ने चिन्मय दास पर देशद्रोह का आरोप लगाया है. उनपर अक्टूबर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेशी झंडे का अपमान करने का आरोप है. ऐसा दावा है कि इस विरोध प्रदर्शन में भगवा ध्वज को बांग्लादेशी झंडे से ज्यादा ऊंचा फहराया गया था. हालांकि, राधा रमन दास ने इन आरोपों को खारिज किया है. चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद उनकी रिहाई की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों को दबाया जा रहा है. बांग्लादेश में जब से मोहम्मद युनूस की सरकार आई है तब से हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं. ऐसी क्या मांगें कर रहे थे चिन्मय दास? 1. अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न से जुड़े मामले में तुरंत सुनवाई के लिए स्पेशल ट्रिब्यूनल बनाए जाए. पीड़ितों को मुआवजा और पुनर्वास मिले. 2. अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए एक कानून बनाया जाए. 3. अल्पसंख्यकों के लिए एक मंत्रालय बनाया जाए, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के मुद्दे और परेशानियों को उठाया जा सके. 4. कब्जाई गई देबोत्तर (मंदिर) की संपत्तियों को वापस किया जाए. मंदिरों और अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए कानून बने. 5. सभी स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों में अल्पसंख्यकों के लिए पूजा स्थल बनाए जाएं, ताकि वो भी पूजा कर सकें. 6. अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों को बढ़ाया जाए. साथ ही साथ पाली और संस्कृत बोर्डों का आधुनिकिकरण किया जाए. 7. दुर्गा पूजा के लिए पांच दिन का पब्लिक हॉलीडे घोषित किया जाए, क्योंकि ये हिंदुओं के लिए काफी अहम त्योहार है. बांग्लादेश में किस हालत में हैं अल्पसंख्यक? बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का इतिहास लंबा रहा है, खासकर हिंदू समुदाय को. याद होगा कि दो साल पहले भी बांग्लादेश में हिंदू विरोधी भावनाएं भड़क गई थीं, जिसके बाद कई हिंदुओं की हत्या भी कर दी गई थी. हाल ही में, शेख हसीना के इस्तीफे के बाद सैकड़ों जगहों से हिंदुओं पर हमले के मामले सामने आए हैं. इस्कॉन टेम्पल और दुर्गा मंदिरों को निशाना बनाया गया है. हिंदुओं के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की गई है. दिनाजपुर में उपद्रवियों ने एक श्मशान घाट पर भी कब्जा कर लिया था. अभी तो हिंदुओं पर हो रही हिंसा के मामले सामने आ भी जा रहे हैं, लेकिन वहां दशकों से इनके साथ उत्पीड़न हो रहा है. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन का दावा है कि 1964 से 2013 के बीच एक करोड़ से ज्यादा हिंदू बांग्लादेश छोड़कर भाग गए हैं. फाउंडेशन का कहना है कि हर साल 2.30 लाख हिंदू बांग्लादेश छोड़ रहे हैं. बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों की आबादी तेजी से घटी है. 1951 में बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में गैर-मुस्लिम आबादी 23.2% थी. यहां आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी. उसमें सामने आया था कि बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों की आबादी घटकर 9.4% हो गई है.  

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को पत्र लिखा, रेलवे प्रोजेक्ट के लिए की भूमि अधिग्रहण की अपील

नई दिल्ली केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को पत्र लिखा है। उन्होंने इस पत्र के जरिए रुके हुए रेलवे प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने के लिए तकनीकी और पर्यावरणीय मुद्दों को हल करने की अपील की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्र लिखकर कहा कि अगर तकनीकी और पर्यावरणीय मुद्दों को सुलझा लिया जाए तो केरल सरकार की रुकी हुई रेल परियोजनाएं आगे बढ़ सकती हैं। जो भी तकनीकी और पर्यावरणीय मुद्दे हैं, कृपया उनका शीघ्र समाधान करें, ताकि परियोजना को भी आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “भारत सरकार ने देशभर में बेहतर रेल सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए रेलवे नेटवर्क के विस्तार को प्राथमिकता दी है। इससे केरल के विकास में भी काफी मदद मिलेगी। वर्तमान में केरल में 12,350 करोड़ रुपये की लागत वाली रेलवे परियोजनाएं प्रगति पर हैं और वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 3,011 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक बजट आवंटन भी किया गया है। हालांकि, केरल में अधिकांश रेलवे परियोजनाएं आवश्यक जमीन की अनुपलब्धता के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।” उन्होंने आगे कहा, “रेलवे ने अधिकतर स्वीकृत रेलवे परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के प्रयास शुरू किए थे, लेकिन भूमि अधिग्रहण में सफलता नहीं मिली। लगभग 470 हेक्टेयर जमीन के लिए केरल सरकार को 2,100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, मगर 64 हेक्टेयर जमीन का ही अधिग्रहण किया जा सका है। इस मामले में केरल सरकार का सहयोग जरूरी है।” रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केरल के सीएम पिनाराई विजयन से अपील करते हुए कहा कि मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि आप संबंधित अधिकारियों को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए निर्देश जारी करें, ताकि उपरोक्त परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया जा सके।  

देश में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए खर्च किए 3,623 करोड़ रुपये: केंद्र सरकार

नई दिल्ली देश की केंद्र सरकार ने 2018 से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली प्रबंधन पर 3,623.45 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में यह जानकारी दी। पंजाब को सबसे अधिक 1,681.45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसके बाद हरियाणा को 1,081.71 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। निचले सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश को 763.67 करोड़ रुपये, दिल्ली को 6.05 करोड़ रुपये और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को 83.35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने निचले सदन को बताया कि इस राशि का उपयोग पराली प्रबंधन मशीनरी को सब्सिडी देने और पराली जलाने पर रोक लगाने और सस्टेनेबल प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित करने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि तीन लाख से अधिक मशीनें वितरित की गई हैं, जिनमें 4,500 बेलर और रेक शामिल हैं। सरकार ने प्लांट की क्षमता के आधार पर पेलेटाइजेशन (फसल अवशेषों को जैव-कोयले में परिवर्तित करना) प्लांट के लिए 1.4 करोड़ रुपये और टॉरफिकेशन प्लांट के लिए 2.8 करोड़ रुपये तक देने की जरूरत को समझा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब तक ऐसे प्लांट के लिए 17 आवेदनों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 15 से सालाना 2.70 लाख टन धान के भूसे को संसाधित करने की उम्मीद है। फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की खरीद को समर्थन देने और दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना को लेकर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 2018 में एक योजना भी शुरू की थी। 2023 में, मंत्रालय ने फसल अवशेष/धान के भूसे की सप्लाई चेन स्थापित करने के लिए सहयोग बढ़ाने के लिए योजना के दिशा-निर्देशों को संशोधित किया, जिससे मशीनरी और उपकरणों की पूंजीगत लागत के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य प्राधिकरणों और इसरो, आईसीएआर और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) जैसी एजेंसियों के साथ मिलकर सरकार ने फसल अवशेष जलाने की समस्या से निपटने के लिए एक कार्य योजना शुरू की है। खेतों में सीधे फसल अवशेषों का प्रबंधन करने के लिए सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनरी आवंटित की है, जो धान के भूसे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक है। सरकार ने कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) के उपयोग को भी अनिवार्य कर दिया है, जो भूसे को काटकर खेतों में समान रूप से फैला देता है, जिससे जलाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। इसके अतिरिक्त, आईएआरआई द्वारा विकसित बायो-डीकंपोजर के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाता है ताकि धान के भूसे को प्राकृतिक रूप से विघटित किया जा सके, जिससे यह एक मूल्यवान फर्टिलाइजर में बदला जा सके।  

एस जयशंकर ने इटली, जापान और दक्षिण कोरिया के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं

फ़िउग्गी (इटली)/नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इटली के फ़िउग्गी में जी 7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान इटली, जापान और दक्षिण कोरिया के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इटली के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी के साथ अपनी बैठक के बारे में विदेश मंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट लिखा“ दोनों ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे, यूक्रेन संघर्ष और इंडो-पैसिफिक पर विचारों का आदान-प्रदान किया। आज इटली के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी के साथ गर्मजोशी से भरी बैठक हुई। प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, उर्वरक, रेलवे और निवेश में अवसरों पर चर्चा की। आईएमईसी, यूक्रेन और इंडो-पैसिफिक पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। हाल ही में घोषित संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना हमारी गतिविधियों का मार्गदर्शन करती है। 2025 में भारत में उनका स्वागत करने के लिए तत्पर हैं।” दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ताए-युल के साथ अपनी बैठक के बारे में उन्होंने पोस्ट किया, “कोरिया गणराज्य के विदेश मंत्री चो ताए-युल से मिलकर बहुत अच्छा लगा। भारत-प्रशांत क्षेत्र में हमारे बढ़ते सहयोग, जीवंत आर्थिक साझेदारी, मजबूत रक्षा संबंधों और सक्रिय तकनीकी सहयोग की सराहना करता हूं।” दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री ने पोस्ट किया “फ़िउग्गी में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक की हलचल में डॉ़ एस जयशंकर से मिलकर और उनसे बातचीत करके भी प्रसन्नता हुई, हमेशा की तरह व्यावहारिक!”  

बांगलादेश में हिंदुआों पर लगातार हो रहे हमले के बीच हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, ISKCON पर प्रतिबंध लगाने की मांग

ढाका बांगलादेश में हिंदुआों पल लगातार हो रहे हमले के बीच हाईकोर्ट में बुधवार को एक याचिका दायर की गई, जिसमें इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। याचिका में चिटगांव और रंगपुर में जारी अशांति को रोकने के लिए इन दोनों शहरों में आपातकाल की स्थिति घोषित करने की भी मांग की गई है। ईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि ISKCON की हालिया गतिविधियों के संदर्भ में उसने अब तक क्या कदम उठाए हैं। अदालत ने इस पर जानकारी देने के लिए गुरुवार को एटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जामन को निर्देश दिया है। हाईकोर्ट की बेंच में जस्टिस फराह महबूब और जस्टिस देबाशीष रॉय चौधरी शामिल हैं। हिंदू साधु की गिरफ्तारी पर विरोध प्रदर्शन हिंसा और अशांति की शुरुआत 25 नवम्बर को ढाका एयरपोर्ट पर प्रमुख हिंदू साधु चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी से हुई। यह साधु धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए काम करने के लिए प्रसिद्ध थे। उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया है और उन्हें जमानत नहीं दी गई है। उनकी गिरफ्तारी के बाद बांगलादेश भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। हिंदू समुदाय ने उनकी रिहाई की मांग की है। चिटगांव कोर्ट के बाहर हुए प्रदर्शनों में हिंसा फैल गई। इसके कारण एक वकील की मौत हो गई। इस हिंसा में 20 से अधिक लोग घायल हो गए। चिन्मय कृष्ण दास प्रभु ने हाल ही में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों पर ध्यान आकर्षित करने और समुदाय के लिए मजबूत सुरक्षा की मांग करने के लिए कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। उनकी गिरफ्तारी ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच भय और असुरक्षा को और बढ़ा दिया है। ISKCON का अंतरराष्ट्रीय समर्थन की अपील इस्कॉन ने गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने का आह्वान किया। इस्कॉन के एक प्रवक्ता ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र को बांगलादेश में अल्पसंख्यकों को बचाने के लिए कदम उठाना चाहिए।” भारत ने भी जताई चिंता भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की। मंत्रालय ने कहा, “यह घटना बांगलादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर कट्टरपंथी तत्वों द्वारा किए गए कई हमलों के बाद हुई है। इनमें अल्पसंख्यकों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आगजनी, लूटपाट, चोरी और मंदिरों तथा देवी-देवताओं की अपवित्रता शामिल है।” विदेश मंत्रालय ने शांति से चल रहे हिंदू विरोध प्रदर्शनों पर हमलों की भी निंदा की और बांगलादेश सरकार से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। बांगलादेश का पलटवार बांगलादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत की प्रतिक्रिया पर आलोचना की और कहा कि यह मामला बांगलादेश के आंतरिक मामलों से संबंधित है। बांगलादेश सरकार ने यह भी कहा कि चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी पर कुछ पक्षों ने गलत व्याख्या की है। उन्हें विशेष आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया है।

पाकिस्तान की राजनीति में हलचल तेज, इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी हो गईं किडनैप?

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी किडनैप हो गई हैं या फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। बुशरा बीबी की बहन मरियम रियाज वट्टू ने एक वीडियो स्टेटमेंट जारी कर यह आरोप लगाया तो पाकिस्तान की राजनीति में हलचल तेज हो गई। इस्लामाबाद में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के आंदोलन के बीच ऐसे आरोपों ने जोर पकड़ा तो अब एक नई खबर आई है। इन रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि बुशराबा बीबी और खैबर पख्तूनख्वा के सीएम अली अमीन गंदापुर को राज्य विधानसभा के स्पीकर बाबर सलीम स्वाती के घर पर देखा गया है। जानकारी मिली है कि दोनों नेताओं के साथ पीटीआई के एक और लीडर तैमूर सलीम खान भी थे। तैमूर ने बताया कि वह, बुशरा बीबी और सीएम गंदापुर ने मानशेरा के सर्किट हाउस में रात गुजारी थी और फिर राजधानी के लिए निकले। इस तरह सुबह ही मची हलचल अब जाकर शांत हुई है। बुशरा बीबी की बहन ने वीडियो जारी कर रहा था कि आखिर मेरी बहन कहां हैं। यह जानकारी मिल रही है कि बुशरा बीबी को अरेस्ट कर लिया गया है। कुछ लोगों का कहना है कि वह खैबर पख्तूनख्वा पहुंच गई हैं। वहीं यह भी आशंका जताई जा रही है कि उन्हें अरेस्ट कर लिया गया है। यह वीडियो स्टेटमेंट ऐसे समय में आया, जब इमरान खान की पार्टी ने ‘करो या मरो’ का नारा देते हुए आंदोलन छेड़ा था। अब इस आंदोलन को वापस ले लिया गया है। पीटीआई के हजारों समर्थक रविवार से ही इस्लामाबाद पहुंच रहे थे और सोमवार को तो हिंसा भड़क गई। इस हिंसा में अब तक 6 लोगों के मारे जाने की जानकारी मिली है। इसके बाद ही पीटीआई ने आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया है। वहीं इमरान खान ने अपने समर्थकों से कहा है कि हमें आखिरी गेंद तक लड़ना है। पीटीआई का दावा है कि पंजाब सरकार की पुलिस और पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में उसके 8 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई है। वहीं प्रशासन का कहना है कि झड़पों में 4 सैनिकों समेत 6 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। वहीं मरियम रियाज वट्टू का कहना है कि यदि उनकी बहन सुरक्षित हैं और खैबर पख्तूनख्वा में हैं तो फिर परिवार के साथ उनका संपर्क क्यों नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा इस्लामाबाद को घेरने वाला आंदोलन स्थगित करने पर भी मतभेद पैदा हो हैं। वट्टू का कहना है कि बुशरा बीबी ने पहले ही कहा था कि आंदोलन को रोकने का अधिकार सिर्फ इमरान खान का है। उनकी सलाह के बिना कोई भी आंदोलन को वापस लेने का ऐलान नहीं कर सकता।

महाराष्ट्र: नई सरकार को सत्ता में आते ही एक चुनौती का सामना करना होगा। यह चुनौती है, मराठा आरक्षण की

मुंबई महाराष्ट्र में फिलहाल सरकार गठन को लेकर रस्साकशी चल रही है। भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर दावेदारी का दौर जारी है। जल्दी ही नए मुख्यमंत्री को लेकर फैसला हो सकता है, लेकिन नई सरकार को सत्ता में आते ही एक चुनौती का सामना करना होगा। यह चुनौती है, मराठा आरक्षण की। चुनाव में मराठा आरक्षण आंदोलन का कोई खास असर नहीं दिखा और सत्ताधारी दलों को बड़ी जीत के साथ वापसी का मौका मिला है। इसके बाद भी मराठा आरक्षण की मांग करने वाले नेता मनोज जारांगे पाटिल ने नए सिरे से आंदोलन का फैसला लिया है। उनका कहना है कि वह अब सामूहिक भूख हड़ताल करेंगे। जालना के अपने गांव अंतरवाली में मनोज जारांगे पाटिल ने यह ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि बीड़ जिले में इस भूख हड़ताल का आयोजन होगा। मनोज पाटिल ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, ‘अब चुनाव खत्म हो गया है। उसकी बात छोड़िए। अब यह सोचिए कि आपके समाज और आपके बच्चों का भविष्य क्या होगा। इसलिए आरक्षण की बात की जाए। सभी मराठाओं को अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। इसलिए सभी मराठा फिर से एकजुट हो जाएं और आमरण अनशन की तैयारी करें।’ उन्होंने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद मैं सामूहिक भूख हड़ताल का ऐलान करूंगा और उसकी तारीख के बारे में भी बताऊंगा। वहीं चुनाव के नतीजों को लेकर मनोज जारांगे पाटिल ने कहा कि मैंने तो पहले ही कहा था कि आप जिसे मतदान करना चाहें कर दें। लेकिन मेरा समाज मेरे साथ है और मैंने भी अपनी भूमिका में कोई बदलाव नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखना होगा कि मराठाओं से झूठे वादे न किए जाएं। पाटिल ने कहा कि भले ही वे सत्ता में वापस आ गए हैं, लेकिन हम फिर से भूख हड़ताल करेंगे। हमें अच्छे से पता है कि सरकार के पास जितनी ताकत है, वह उससे ही काम करेगी। मराठा समाज के लोगों ने विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों की ही वोट दिया है। इसलिए दोनों तरफ के लोगों को मराठाओं के साथ खड़ा होना चाहिए।

बांग्लादेश में ISKCON से जुड़े दास ब्रह्मचारी की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन के दौरान एक वकील की हत्या, बढ़ा बवाल

नई दिल्ली बांग्लादेश में ISKCON से जुड़े हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन के दौरान एक वकील की हत्या हो गई है। चट्टग्राम जिले के बार एसोसिएशन के सदस्य रहे 32 साल के सैफुल इस्लाम का कत्ल हो गया था। यह घटना उस वक्त हुई, जब जिला अदालत में पेशी के बाद चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को ले जाया जा रहा था। इस दौरान करीब 2 हजार की संख्या में चिन्मय कृष्ण ब्रह्मचारी के समर्थक मौजूद थे। इसके अलावा अन्य तमाम लोग भी मौजूद थे। पुलिस, वकील और हिंदू संत के समर्थकों के बीच झड़प हुई थी। बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार की खबर के अनुसार इस हिंसा में वकील सैफुल इस्लाम मारे गए और 10 अन्य लोग जख्मी हुए हैं। अब तक पुलिस ने इस मामले में 30 लोगों को अरेस्ट किया है। इस बीच बवाल बढ़ गया है और पूरे बांग्लादेश की ही जिला अदालतों में वकीलों ने काम करने से इनकार किया है। माना जा रहा है कि आज भी प्रदर्शन हो सकता है। चट्टग्राम जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नाजिमुद्दीन चौधरी ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा कि कोर्ट परिसर के मुख्य गेट के बाहर ही सैफुल इस्लाम की हत्या की गई। यह वाकया दोपहर करीब 3:30 बजे का है। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया था, जहां उनको मृत घोषित किया गया। बांग्लादेश पुलिस प्रशासन का आरोप है कि सैफुल इस्लाम की हत्या में चिन्मय कृष्णदास ब्रह्मचारी के समर्थकों का हाथ है। चिट्टग्राम के गुलाम रसूल मार्केट में काम करने वाले मोहम्मद दीदार का कहना है कि सैफुल इस्लाम को मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बचाने की कोशिश की थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। डेली स्टार के अनुसार स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्हें रोड के किनारे बुरी तरह पीटकर मार डाला गया। जिला अस्पताल के निदेशक तस्लीमुद्दीन का कहना है कि वकील सैफुल इस्लाम के सिर में भी गहरी चोटें आई हैं। इस मामले में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस का बयान भी आया है और उन्होंने जांच के आदेश भी दिए हैं।

वॉरेन बफे ने अरबों की संपत्ति का उत्तराधिकारी किया तय, दान दिए ₹10000Cr…

ओमाहा बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन और अमेरिकी व्यवसायी, निवेशक और परोपकारी वॉरेन बफे ने अपनी मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति का क्या होगा, इस बात की अब तक की सबसे बड़ी योजना खुद शेयर किया है। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि वह अपनी चौंका देने वाली संपत्ति दान करना जारी रखेंगे। 94 वर्ष के बफे ने इस संबंध में लगभग 1,300 शब्दों का एक पत्र शेयरधारकों को लिखा  है। सीएनएन की खबर के मुताबिक, पत्र में चर्चा करते हुए उन्होंने मृत्यु की प्रकृति पर विचार किया, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे उन्हें एक बार उम्मीद थी कि उनकी दिवंगत पहली पत्नी उनसे अधिक जीवित रहेंगी और यह तय करेंगी कि उनकी संपत्ति को कैसे वितरित किया जाए। कंपनी ने एक बयान में बताया कि 94 वर्षीय निवेशक 1,600 बर्कशायर की क्लास ए शेयरों को 24 लाख क्लास बी शेयरों में बदलेंगे. इसके बाद वे उन शेयरों में से 15 लाख शेयर अपनी दिवंगत पत्नी के नाम पर बनी सुसान थॉम्पसन बफेट फाउंडेशन को देंगे और 3 लाख शेयर अपने बच्चों की फाउंडेशनों, शेरवुड फाउंडेशन, हावर्ड जी. बफेट फाउंडेशन और नोवो फाउंडेशन को देंगे. 2010 में बफे ने अपने दोस्तों बिल गेट्स और मेलिंडा फ्रेंच गेट्स के साथ मिलकर ‘गिविंग प्लेज’ की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने कहा कि वे अपनी संपत्ति या तो अपने जीवनकाल में या अपनी मौत के बाद दान कर देंगे. 4 साल पहले उन्होंने गेट्स फाउंडेशन और अपने बच्चों से जुड़ी फाउंडेशनों को बड़े पैमाने पर दान देना शुरू कर दिया था. नहीं बताई उत्तराधिकारी की पहचान अमेरिकी अरबपति ने यह फैसला कर लिया है उनकी मौत के बाद उनकी संपत्ति का उत्तराधिकारी कौन होगा. हालांकि उन्होंने उत्तराधिकारी पहचान नहीं बताई है. उन्होंने कहा कि मेरे बच्चे इस बारे में जानते हैं और उनसे सहमत हैं. दिग्गज निवेशक ने कहा कि उन्हें अभी भी अपने परिवार में वंशवादी संपत्ति बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है. बता दें कि बफे के 3 बच्चे हैं- सूसी, हॉवर्ड और पीटर. 150.2 अरब डॉलर के मालिक हैं वॉरेन बफे ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, वॉरेन बफे की कुल संपत्ति 150.2 अरब डॉलर है, जिससे वह दुनिया के सातवें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. समार्ट इंवेस्टमेंट के लिए जाने जाते है बफे बफे समय के साथ इतनी बड़ी संपत्ति बनाने के रहस्य, चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति और बर्कशायर समूह की स्थिर वृद्धि के लिए जाने जाते हैं। बफे कई कंपनियों के अधिग्रहणों और अरबों डॉलर के एप्पल शेयर खरीदने जैसे स्मार्ट निवेशों के माध्यम से अपनी संपत्ति को बढ़ाने की बात करते रहे हैं। बफे ने वर्षों से अपने बर्कशायर के किसी भी शेयर को नहीं बेचा और धन के मोह का भी विरोध किया और कभी भी ज्यादा लिप्त नहीं हुए। वहीं, वो बरसो से अपने पुराने ओमाहा घर में रहना पसंद करते हैं, जिसे उन्होंने दशकों पहले खरीदा था और हर दिन लगभग 20 ब्लॉक काम करने के लिए समझदार लक्जरी सेडान चलाते हैं। बिल गेट्स के फाउंडेशन को कई बिलियन किए दान वॉरेन बफे ने अब तक बिल गेट्स के गेट्स फाउंडेशन को 55 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्टॉक दान किए हैं, क्योंकि उनके मित्र बिल गेट्स ने पहले से ही अपना फाउंडेशन स्थापित कर रखा था। बफे बर्कशायर हैथवे के अध्यक्ष और सीईओ के रूप में काम करते हैं और सेवानिवृत्त होने की उनकी कोई योजना नहीं है। हालांकि उन्होंने समूह की दर्जनों कंपनियों के लिए दिन-प्रतिदिन के अधिकांश प्रबंध कर्तव्यों को दूसरों को सौंप दिया है।

संभल में हुई हिंसा को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण लोक सभा की कार्यवाही दिन भर के लिये स्थगित

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण बुधवार को लोक सभा की कार्यवाही गुरुवार पूर्वाह्न 11 बजे तक स्थगित कर दी गयी। आज दोपहर 12 बजे सदन के पुन: समवेत होते ही समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य विपक्षी सदस्य संभल में हुई हिंसा के विरोध में शाेरशराबा और नारेबाजी करने लगे। सपा सदस्य शोरगुल करते हुये सदन के बीचोबीच आ गये और ‘संभल के हत्यारों को फांसी दो, फांसी दो’ नारे लगाने लगे। कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदपवार) और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य भी इस दौरान अपने-अपने स्थानों पर खड़े होकर सपा सदस्यों की नारेबाजी का साथ दे रहे थे। इस बीच, पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाये। श्री सैकिया ने शोरशराबा कर रहे विपक्षी सदस्यों से अपने-अपने स्थान पर जाने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने का बार-बार आग्रह किया लेकिन विपक्षी सदस्यों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को उनकी बात कहने का मौका दिया जायेगा, वे अपने-अपने स्थान पर जायें और सदन की कार्यवाही चलने दें। सदन का समय बहुत कीमती है और सारा देश इसे देख रहा है। हंगामा जारी रहने पर श्री सैकिया ने सदन की कार्यवाही गुरुवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिये स्थगित कर दी। इससे पहले आज पूर्वाह्न 11 बजे सदन के समवेत होते ही अडानी मामले में बहस कराने की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण लोकसभा में आज प्रश्नकाल नहीं चल पाया और सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गयी। अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्वाह्न 11 बजे जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की और भारतीय जनता पार्टी के अरुण गोविल को प्रश्न पूछने के लिये पुकारा। इसी बीच विपक्षी सदस्य सदन के बीचोबीच जमा हो कर अडानी मामले में तुरंत चर्चा की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। शोरगुल के बीच रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उत्तर दिया, लेकिन शोरशराबा बढ़ गया। अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से अपील की कि वे प्रश्नकाल चलने दें। इसके बाद उनके मुद्दे पर विचार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि विपक्ष नियोजित तरीके से सदन को चलने नहीं देना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी। राज्यसभा में शून्यकाल बाधित, सदन दिन भर के लिए स्थगित राज्यसभा में बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने दिल्ली में कानून व्यवस्था की स्थिति, और उत्तर प्रदेश के संभल और मणिपुर में हिंसा तथा अडानी समूह की कथित अनियमिताओं की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की मांग को लेकर शोरशराबा किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई और शून्यकाल बाधित हुआ। सभापति जगदीप धनखड़ ने पहले स्थगन के बाद 11 बजकर 30 मिनट पर जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की तो विपक्ष के सदस्य शोर शराबा करने लगे। श्री धनखड़ ने सदस्यों से शांत होने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करना चाहिए। इस बीच कांग्रेस के जयराम रमेश और प्रमोद तिवारी ने बोलने का प्रयास किया तो सभापति ने कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं लेने के निर्देश दिए। द्रविड़ मुनेत्र कषगम के तिरुचि शिवा व्यवस्था का प्रश्न उठाने की अनुमति मांगी तो श्री धनखड़ ने कहा की अव्यवस्था में व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। पहले सदस्यों को शांत होना होगा। इस पर सदन में हंगामा होने लगा। स्थिति को देखते हुए सभापति ने सदन की कार्यवाही 11 बजकर 32 मिनट पर दिन भर के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इसके कारण शीतकालीन सत्र में आज सदन में दूसरी बार शून्यकाल बाधित हुआ। इससे पहले सभापति ने सुबह सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए तीन सदस्यों बिकाश रंजन भट्टाचार्य, डा वानवैरोए खारलुखी और धर्मशिला गुप्ता को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी और आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाएं। इसके बाद सभापति ने कहा कि उन्हें नियम 267 के अंतर्गत 18 नोटिस मिले हैं। ये नोटिस दिल्ली में कानून व्यवस्था की स्थिति, उत्तर प्रदेश के संभल और मणिपुर में हिंसा तथा अडानी समूह में कथित अनियमिताओं की जांच करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने पर चर्चा कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि यह नोटिस प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने के कारण अस्वीकार किए जाते हैं। इसके बाद विपक्ष के सदस्य अपने आसन से आगे आ गये और जोर-जोर से बोलने लगे। सभापति ने कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं लेने के निर्देश दिए तथा सदस्यों से शांत होने की अपील की। उनकी इस अपील का कोई असर नहीं हुआ तो उन्होंने 11:10 बजे सदन की कार्यवाही 11:30 के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।  

इजरायल ने लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह को कमजोर कर उसे दशकों पीछे धकेला, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम

तेल अवीव अमेरिका और फ्रांस की मध्यस्थता से इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम हो गया है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इजरायल ने लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह को कमजोर कर उसे दशकों पीछे धकेल दिया है. नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने कैबिनेट की मंजूरी के बाद सीजफायर को ग्रीन सिग्नल दे दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान और हमास समर्थित हिजबुल्लाह मौजूदा समय में बहुत कमजोर हो चुका है. नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह ने आठ अक्तूबर को लेबनान से हम पर हमला करने का सोचा. एक साल बाद हिज्बुल्लाह अब वह पुराना हिजबुल्लाह नहीं रह गया है. हमने उसे दशकों पीछे धकेल दिया है. हमने हसन नसरल्लाह सहित उसके कई बड़े लीडर्स को मार गिराया है. हमने उनके हजारों आतंकियों को मार गिराया है और उनकी सुरंगों को तबाह कर दिया है, जिन्हें दोबारा तैयार करने में उन्हें सालों लगेंगे. उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में हमने शतरंज की चाल पलट दी है. हम पर सात मोर्चों से हमला किया गया लेकिन हम डटकर लड़े. हम मिडिल ईस्ट का चेहरा बदल रहे हैं. बता दें कि इस सीजफायर के तहत इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान से अपने सैनिकों को वापस बुलाएगी और लेबनान की सेना इस क्षेत्र में अपने सैनिकों की तैनाती करेगी. इसके साथ ही हिजबुल्लाह लिटानी नदी से सटे इलाकों से अपने लड़ाकों को हटाएगी. क्या हैं सीजफायर की शर्तें सीजफायर समझौते के तहत इजरायली सैनिकों को दक्षिण लेबनान से वापस जाना होगा और लेबनान की सेना को इस क्षेत्र में तैनात करना होगा. इसके साथ ही हिज्बुल्लाह लिटानी नदी के दक्षिण में सीमा पर अपनी सशस्त्र मौजूदगी भी खत्म कर देगा. लेबनान के विदेश मंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि लेबनान की सेना इजरायली सैनिकों के वापस जाने पर दक्षिणी लेबनान में कम से कम 5000 सैनिकों को तैनात करने के लिए तैयार है. नेतन्याहू का कहना है कि युद्धविराम की अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि लेबनान में क्या होता है. अगर हिज्बुल्लाह समझौते का उल्लंघन करता है और खुद को हथियारबंद करने की कोशिश करता है, तो हम हमला करेंगे, अगर वह सीमा के पास आतंकवादी बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण करने की कोशिश करता है, तो हम हमला करेंगे. अगर वह रॉकेट लॉन्च करता है, अगर वह सुरंग खोदता है, अगर वह रॉकेट ले जाने वाला ट्रक लाता है, तो हम हमला करेंगे.  

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