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राम माधव की वापसी: भाजपा के लिए जम्मू-कश्मीर चुनाव में नए समीकरण

Ram Madhav's return: New equations for BJP in Jammu and Kashmir elections

Ram Madhav’s return: New equations for BJP in Jammu and Kashmir elections ” राजीव रंजन झा ” जम्मू-कश्मीर में होने वाला आगामी विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए विशेष महत्व का है। अनुच्छेद 370 और 35 ए हटने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है। ऐसे में भाजपा के लिए यह चुनाव एक प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। इस चुनाव की तैयारी को और भी गंभीरता से लेने के लिए भाजपा ने अपने पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री राम माधव को संघ से वापस बुलाकर जम्मू-कश्मीर की कमान सौंपी है। राम माधव का राजनीतिक सफरराम माधव, जो पहले भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से आते हैं। वह आरएसएस के पहले प्रवक्ता बने थे और उनका जम्मू-कश्मीर की राजनीति में गहरा हस्तक्षेप रहा है। जब अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब राम माधव राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में जम्मू-कश्मीर के प्रभारी थे। 2020 में जब जगत प्रकाश नड्डा भाजपा के अध्यक्ष बने, तो राम माधव को नई टीम में शामिल नहीं किया गया, जिसके बाद वह संघ में वापस लौट गए थे। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में राम माधव की भूमिकाराम माधव को जम्मू-कश्मीर की राजनीति में दो बड़े मामलों का श्रेय दिया जाता है। पहला, उन्होंने पीडीपी के साथ गठबंधन कर भाजपा को जम्मू-कश्मीर में पहली बार सत्ता में आने में मदद की। हालांकि, यह सरकार 2018 में गिर गई। दूसरा, उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ भी गठबंधन बनाने की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बैकआउट कर लिया। इसके बावजूद, राम माधव की वापसी को भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भाजपा के लिए वर्तमान चुनौतियाँ2020 में पार्टी से हटाए जाने के बाद राम माधव ने संघ में वापसी की, लेकिन अब उन्हें फिर से भाजपा में लाया गया है। उनके वापसी को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं, खासकर यह कि उन्हें पहले क्यों हटाया गया और अब क्यों वापस बुलाया गया। लेकिन ऐसी खबरें हैं कि राम माधव स्वयं पार्टी में लौटने के इच्छुक थे और संघ से उन्हें अनुमति मिल गई। हालांकि, संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि अबकी बार भाजपा में जाने के बाद उनकी संघ में वापसी नहीं हो सकेगी। राम माधव की वापसी को लेकर पार्टी के भीतर भी कई चर्चाएँ हो रही हैं। भाजपा के कुछ नेताओं का मानना है कि राम माधव का अनुभव और संगठनात्मक क्षमता पार्टी के लिए लाभदायक साबित हो सकती है, खासकर जम्मू-कश्मीर के आगामी विधानसभा चुनाव में। लेकिन यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह चुनाव के बाद भी पार्टी में सक्रिय रहेंगे या नहीं। भाजपा के संगठन में कमियां और सुधार की आवश्यकता2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी, जिसका कारण बूथ स्तर की कमेटियों का निष्क्रिय होना माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी संगठन में एक अजीब तरह की बेचैनी, बिखराव और कर्तव्यबोध की कमी दिखाई दे रही है। भाजपा के संगठन में राम माधव की वापसी को पार्टी के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि उन्हें कितनी स्वतंत्रता और समय दिया जाएगा ताकि वह अपने अनुभव और क्षमता का पूरा उपयोग कर सकें। भविष्य की चुनौतियाँ और संभावनाएँराम माधव की वापसी के बाद यह देखना होगा कि भाजपा जम्मू-कश्मीर चुनाव में कितनी सफलता प्राप्त कर पाती है और क्या राम माधव की वापसी से पार्टी में नई ऊर्जा का संचार होता है। भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में सुधार की आवश्यकता को समझते हुए, राम माधव की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। चुनावी नतीजे ही यह तय करेंगे कि राम माधव की वापसी भाजपा के लिए कितनी फायदेमंद साबित होती है और क्या उनकी नियुक्ति से पार्टी को वह बढ़त मिल पाती है जिसकी उसे आवश्यकता है।

दिग्विजय सिंह ने की सोयाबीन के दाम बढ़ाने की मांग, पीएम-सीएम से की यह अपील

Digvijay Singh demanded to increase the price of soybean, made this appeal to PM-CM

Digvijay Singh demanded to increase the price of soybean, made this appeal to PM-CM भोपाल। सोयाबीन खेती की लागत वर्ष 2011 से दो-तीन गुना बढ़ गई है, पर इसका मूल्य 4300 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है। किसानों की लागत भी नहीं निकल रही है। इसका न्यूनतम मूल्य प्रति क्विंटल छह हजार रुपये से कम नहीं होना चाहिए। यह मांग पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से की है।13 साल पहले जो भाव था, आज भी वहीदिग्विजय ने कहा कि देश में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक सोयाबीन का उत्पादन मध्य प्रदेश में होता है। वर्ष 2011 में प्रति क्विंटल भाव लगभग 4300 रुपये था। आज भी भाव इसके आसपास ही है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन के उत्पादन पर भाव निर्भर करता है। इस वर्ष भी मूल्य में वृद्धि की संभावना नहीं है, इसलिए सरकार उपार्जन करे और लागत को देखते हुए न्यूनतम मूल्य 6000 रुपये प्रति क्विंटल से कम न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।जैविक कपास उत्पादकों के फर्जी समूह बनाने का लगाया आरोपदिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में जैविक कपास उत्पादकों के फर्जी समूह बनाए जाने का आरोप लगाया। इसमें बताया कि इन समूहों में ऐसे गांवों के किसानों के नाम भी शामिल किए गए हैं, जो जैविक तो दूर साधारण कपास की खेती भी नहीं करते हैं।दिग्विजय ने कहा कि धार जिले के भीलकुंडा और उसके आसपास के गांवों के किसान इसका उदाहरण हैं। इन किसानों को उत्पादक बताकर उनसे खरीदी करना दर्शाया गया है। व्यापारियों के साथ मिलीभगत कर प्रमाणीकरण संस्था से प्रमाण पत्र जारी कराए गए। इसको लेकर आयुक्त वाणिज्यिक कर इंदौर को करोड़ों रुपये के जीएसटी की चोरी की शिकायत भी की गई है। इस पूरे मामले की जांच कराई जाए।

2 अक्टूबर को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, पढ़ें पूरी डिटेल्स

Second solar eclipse of the year on October 2, read complete details

Second solar eclipse of the year on October 2, read complete detailsसाल का दूसरा सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर को लगेगा। इससे पहले 8 अप्रैल को सूर्यग्रहण लगा था, जो अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको, अटलांटिक, इंग्लैंड के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र और आयरलैंड में देखा गया था। भारत में ग्रहण प्रभावी नहीं था। 2 अक्टूबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार ग्रहण होगा। इस दौरान रिंग ऑफ फायर नजर आएगा, जो सात मिनट 25 सेकंड तक दिखाई देगा। कहां दिखाई देगा 2024 का दूसरा सूर्य ग्रहण2 अक्टूबर 2024 का सूर्य ग्रहण की शुरुआत उत्तरी प्रशांत महासागर में हवाई के दक्षिण से होगी। यह दक्षिणी अटलांटिक महासागर में दक्षिण जॉर्जिया में खत्म होगा। सूर्य ग्रहण जिस इलाके से शुरू होगा और खत्म होगा। वह यात्रा 14 हजार 163 किमी की होगी। रिंग ऑफ फायर की घटना साउथ अमेरिका में चिली और अर्जेंटीना के दक्षिण एरिया में दिखाई देगी। स्पेस डॉटकॉम के अनुसा, रिंग ऑफ फायर का सबसे अच्छा नजारा रापा नुई नाम के सुदूर वोल्केनो द्वीप से दिखेगा। क्या भारत में दिखेगा साल 2024 का दूसरा सूर्यग्रहण?अप्रैल में लगा पहला सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आया था। अब दूसरा ग्रहण भी दिखाई नहीं देगा, क्योंकि जिस वक्त सूर्य ग्रहण शुरू होगा, तब भारत में रात होगी। अमेरिकी अंतरिक्ष स्पेस एजेंसी नासा के यूट्यूब चैनल पर इस ग्रहण को लाइव स्ट्रीम किया जाएगा। सूर्य ग्रहण के सूतक काल का समयसूतक काल उस अवधि को कहा जाता है जब सूर्य ग्रहण लगता है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण लगने के 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

जम्मू-कश्मीर के सोपोर में एक आतंकी ढेर, सुरक्षाबलों और दहशतगर्दों के बीच मुठभेड़ जारी

One terrorist killed in Sopore, Jammu and Kashmir, encounter continues between security forces and terrorists

One terrorist killed in Sopore, Jammu and Kashmir, encounter continues between security forces and terrorists जम्मू-कश्मीर के सोपोर में सुरक्षाबलों ने आतंकियों से मुठभेड़ में एक दहशतगर्द को मार गिराया है। जानकारी के मुताबिक सोपोर को राफियाबाद में सोपोर पुलिस और 32 राष्ट्रीय राइफल की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन चलाया हुआ है। फिलहाल सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और सर्च ऑपरेशन चलाया है। सूत्रों के मुताबिक अभी कुछ आतंकी छिपे हो सकते हैं।

कीव में प्रधानमंत्री पीएम मोदी का हुआ भव्य स्वागत ,भारत माता की जय के नारे

Prime Minister PM Modi received grand welcome in Kiev, slogans of Bharat Mata ki Jai

Prime Minister PM Modi received grand welcome in Kiev, slogans of Bharat Mata ki Jai पीएम मोदी का यह यूक्रेन दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरे में पीएम मोदी यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे।

नेपाल में बड़ा सड़क हादसा, 40 भारतीय यात्री बस नदी में गिरी कई लोगों के मारे जाने की आशंका

Major road accident in Nepal, 40 Indian passenger bus falls into river, many feared dead

Major road accident in Nepal, 40 Indian passenger bus falls into river, many feared dead Nepal Bus Accident : नेपाल में बड़े हादसे की खबर सामने आई है. 40 भारतीय लोगों को लेकर जा रही बस एक नदी में गिर गई. बचाव कार्य जारी है. कई लोगों के मारे जाने की आशंका है. नेपाल पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि 40 लोगों को लेकर जा रही एक भारतीय यात्री बस तनहुन जिले में मार्सयांगडी नदी में गिर गई है. जिला पुलिस कार्यालय तनहुन के डीएसपी दीपकुमार राया ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि यूपी एफटी 7623 नंबर प्लेट वाली बस नदी में गिर गई. अधिकारी के अनुसार, बस पोखरा से काठमांडू जा रही थी. कई लोग लापता, कुछ को किया रेस्क्यूअधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण नदी भी उफान पर है. बस में 40 लोग सवार थे, जिनमें से कुछ को रेस्क्यू किया गया. लेकिन कई लोग अब भी लापता हैं. नेपाल पुलिस ने बताया है कि यह हादसा तानाहुन जिले में हुआ है. बस उत्तर प्रदेश की है. लेकिन यह जानकारी अभी तक नहीं मिल सकी है कि बस में सवार लोग उत्तर प्रदेश में किस जिले से नेपाल गए थे. वहीं, उत्तर प्रदेश के रिलीफ कमिश्नर ने कहा कि नेपाल में हुई घटना के संबंध में पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बस में सवार लोग कहां के थे. इसके लिए संपर्क साधा जा रहा है.

जम्मू-कश्मीर के साथ मेरा खून का रिश्ता है – राहुल गांधी

I have blood relations with Jammu and Kashmir - Rahul Gandhi

I have blood relations with Jammu and Kashmir – Rahul Gandhi वहां के लोगों के दिलों में जो दुख-दर्द है, उसे मिटा कर उन्हें उनका statehood और representation वापस दिलाना ही मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है।

रक्षाबंधन पर प्रियंका ने शेयर की बचपन की तस्वीर, राहुल गांधी के लिए लिखा प्यारभरा संदेश

Priyanka shared childhood picture on Rakshabandhan, wrote a loving message for Rahul Gandhi

Priyanka shared childhood picture on Rakshabandhan, wrote a loving message for Rahul Gandhi नई दिल्ली ! कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने रक्षाबंधन के मौके पर अपने भाई और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश के साथ, उन्होंने तस्वीरों का एक कोलाज पोस्ट किया, जिसमें उनके बचपन की तस्वीरें शामिल हैं, जिनमें से एक उनके पिता और पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी के साथ है। कोलाज में राहुल और प्रियंका की एक साथ एक छोटी खिलौना कार में खेलने की तस्वीर भी शामिल है। फुलवारी है भाई-बहन का रिश्ताअपनी पोस्ट में, प्रियंका ने भाई-बहन के रिश्ते की तुलना एक रंग-बिरंगे फूलों की क्यारी से की, जहां प्यारी यादें, साझा अनुभव और एक बढ़ती हुई दोस्ती फलती है, जो परस्पर सम्मान, प्यार और समझ पर आधारित है। प्रियंका ने लिखा कि भाई-बहन का रिश्ता उस फुलवारी की तरह होता है जिसमें सम्मान, प्रेम और आपसी समझदारी की बुनियाद पर अलग-अलग रंगों वाली यादें, संग के किस्से-कहानियां व दोस्ती को और गहरा करने का संकल्प फलता-फूलता है। भाई-बहन संघर्ष के साथी होते हैं, स्मृतियों के हमराही भी और संगवारी के खेवैया भी। आप सभी को राखी की हार्दिक शुभकामनाएं। रिश्ते को मजबूती से जोड़े रक्षा सूत्रइस बीच राहुल गांधी ने भी राखी के त्योहार पर देशवासियों को भी शुभकामनाएं दीं। साथ ही उन्होंने भाई-बहन के बीच के अटूट प्यार और स्नेह के बंधन पर जोर दिया। उन्होंने इस मौके पर अपने और प्रियंका की एक तस्वीर साझा की। राहुल ने अपने संदेश में लिखा भाई-बहन के अटूट प्रेम एवं स्नेह के पर्व, रक्षाबंधन की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। रक्षा का यह सूत्र आपके इस पावन रिश्ते को सदैव मजबूती के साथ जोड़े रहे।

भारत दर्शन: मां वैष्णो देवी घूमने से पहले जाने कहां कहां घूमे सम्पूर्ण यात्रा विडियो के माध्यम से

Bharat Darshan: Before visiting Maa Vaishno Devi, know where to visit through complete journey video.

Bharat Darshan: Before visiting Maa Vaishno Devi, know where to visit through complete journey video. क्या आप अपने व्यस्त दैनिक जीवन से आराम करने के लिए अद्भुत यात्रा अनुभवों की तलाश करते हैं? उसके बाद वैष्णो देवी की यात्रा की योजना बनाएं। यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में से एक है। यह आपको अस्थायी रूप से अपनी सभी चिंताओं और कठिनाइयों को एक तरफ रखने की अनुमति देता है और आपको माता वैष्णो देवी के पवित्र मंदिर की शांति में डुबो देता है। वैष्णो देवी के पास घूमने के लिए कई तरह की जगहें हैं। जम्मू-कश्मीर में यह क्षेत्र त्रिकुटा पर्वत की तलहटी में स्थित है। यदि आप इस स्थान की यात्रा करने का निर्णय लेते हैं तो नीचे वैष्णो देवी के पास घूमने के स्थानों की जाँच करें। आप अपने यात्रा कार्यक्रम की योजना बना सकते हैं और उसके आधार पर एक शानदार यात्रा कर सकते हैं। आप वैष्णो देवी पहुँच सकते हैं: ट्रेन से: वैष्णो देवी तक पहुँचने के कई रास्ते हैं। श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन वैष्णो देवी का मुख्य रेलवे स्टेशन है, और त्रिची और इसके आसपास के क्षेत्रों में कार्य करता है। यह वैष्णो देवी से 16.5 किमी दूर स्थित है। हवाई मार्ग से: यदि आप हवाई मार्ग से वैष्णो देवी पहुंचना चाहते हैं, तो आप जम्मू हवाई अड्डे के लिए उड़ान भर सकते हैं। यह हवाई अड्डा शहर से 50 किमी दूर स्थित है। सड़क मार्ग से : यदि आप जम्मू और कश्मीर में रहते हैं, तो आप कार या सार्वजनिक परिवहन द्वारा वैष्णो देवी पहुँच सकते हैं। दुनिया में सबसे प्रसिद्ध तीर्थ मार्गों में से एक वैष्णो देवी यात्रा है, जो यात्रा करती है कटरा से वैष्णो देवी मंदिर। 13 किमी यात्रा का प्रारंभिक स्थान बाणगंगा है, जो कटरा के प्रमुख शहर से लगभग 2 किमी दूर है। माता वैष्णो देवी के दर्शन के साथ, यह पवित्र गुफा का समापन करता है। कटरा से वैष्णो देवी पहुंचने के लिए आप पालकी, पिठू, पोनी या पैदल भी जा सकते हैं। यदि आप पैसा खर्च करना चाहते हैं, तो आप नियमित रूप से निर्धारित रोपवे या हेलीकॉप्टर सेवा ले सकते हैं। रोपवे और हेलीकॉप्टर प्रस्थान समय की जाँच के बाद अपनी यात्रा की योजना बनाएं। आपको किसी भी चीज़ की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि रोपवे टिकट भवन में आसानी से उपलब्ध हैं। भले ही वैष्णो देवी जाने के लिए कभी भी बुरा समय न हो, लेकिन उत्सव के समय जाना सबसे अच्छा है। यह आपको देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने और शहर को एक अलग दृष्टिकोण से देखने में सक्षम बनाता है। आप वैष्णो देवी यात्रा पर एक स्थान ऑनलाइन आरक्षित कर सकते हैं क्योंकि यात्रा में भाग लेने से पहले पंजीकरण आवश्यक है। घूमने का समय: सारा दिन दूरी: वैष्णो देवी से 13 किमी माता वैष्णो देवी की यात्रा में सबसे पहले बस स्टैंड के पास स्थित कार्यालय से रजिस्ट्रेशन करवा कर आरएफआईडी प्राप्त कर ले। पैदल चलने के लिए लाठी या डंडा खरीदकर पैदल चलते हुए बाणगंगा के मुख्य द्वार पर पहुंच जाएं। बाणगंगा द्वार से ही यात्रा की शुरुआत होती है। गेट पर चेक करने के बाद पैदल चलते हुए आगे बढ़ाते जाना है। आगे जानें पर दो रास्ते विभाजित हो जाते हैं जो माता के दरबार तक जाते हैं। एक रास्ता है अर्धकुवारी से जो KM लंबा है और दूसरा रास्ता हिमकोटी मार्ग का है जो 5.5 किमी लंबा है। अधिकतर भक्त अर्धकुवारी के रास्ते हाथीमाता मार्ग से होकर जाते हैं। हाथीमाता मार्ग के रास्ते में बहुत ही लुभावने दृश्य देखने को मिलते हैं। बाणगंगा से पैदल रास्ता 12 किमी का है। रास्ते में अनेकों होटल, खानें पीने की अनेकों दुकानें देखने को मिलती हैं। वैष्णो देवी यात्रा करने का सबसे अच्छा मौसम | Vaishno Devi Kab Jaye वैष्णो माता की यात्रा करने का सबसे अच्छा मौसम मार्च से जून तक माना जाता है। मार्च से जून के बीच दर्शन करने के लिए मौसम अनुकूल रहता। सर्दियों के मौसम में यहां बहुत ठंडी पड़ती है और बर्फबारी होती रहती है। जिस कारण सर्दियों के मौसम में यहां का तापमान माइनस में पहुंच जाता है और ठंडी के कारण यात्रियों के आवागमन की संख्या कम हो जाती है। माता वैष्णो देवी के द्वार भक्तो के लिए हमेशा खुले रहते हैं। भक्त साल में किसी भी मौसम में घूमने जा सकते है।

भारत दर्शन: ताज महल घूमने से पहले जाने कहां कहां घूमे सम्पूर्ण यात्रा विडियो के माध्यम से 

Bharat Darshan: Know where you should go before visiting Taj Mahal through complete travel video

Bharat Darshan: Know where you should go before visiting Taj Mahal through complete travel video पौराणिक मान्यताओं के आधार पर लोग मानते हैं कि ताजमहल से पहले यहां बहुत ही पुराना शिव मंदिर हुआ करता था। इसमें एक ऐसा प्राकृतिक शिवलिंग था जहां पर अपने आप पानी रिसता था और अभी भी वहां से पानी गिर रहा है। इस प्रकार की मान्यता आसपास के लोगों के द्वारा मानी जाती है। ताजमहल में नीचे की तरफ भी कई मीटर की दूरी पर विभिन्न कमरों का निर्माण किया गया था। इन्हें हम गुप्त कमरे भी कह सकते हैं, लेकिन अभी तक इस बात का पता नहीं लगाया गया कि इन कमरों का निर्माण क्यों किया गया था और इनका इस्तेमाल किसलिए किया जाता था। भारत सरकार ने ताजमहल के ऐसे सभी गुप्त दरवाजे बंद कर दिए हैं जिनका अभी तक कोई ठिकाना ही नहीं है कि ये कहां तक जाते हैं और कहां खुलते हैं… https://youtu.be/rXS3IIY-Ypw इसके अंदर कमरे हैं भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक भवन बनाए गए हैं जो किसी न किसी घटना या प्रेम कहानी का प्रतीक हैं। सम्राट शाहजहां बेगम मुमताज को इतना प्यार करता था कि उसकी मृत्यु के बाद उसने अपना होश-हवास खो बैठा और खाना-पीना भी छोड़ दिया। वह मुमताज़ की मृत्यु से इस कदर पागल सा हो गया कि उसने यह निर्णय लिया कि वह मुमताज़ की यादों को भूलने नहीं देगा और उसने किले के ही सामने यमुना नदी के किनारे ताजमहल का निर्माण करने का आदेश दिया। आज भी ताजमहल का रहस्य एक ऐसा रहस्य है जो पूरी तरह से अभी तक उजागर नहीं हुआ है। अर्थात यहां पर ताजमहल के बारे में पूर्णता किसी को ज्ञात नहीं है कि ताजमहल के बहुत से दरवाजे ऐसे हैं यह भी पता नहीं है कि यह दरवाजे कहां खुलते हैं। ताजमहल में ऐसी सुरंग बनी हुई है, जिन्हें अब बंद कर दिया गया है। यहां तक कि भारत सरकार ने भी आदेश दे दिया कि ताजमहल पर कोई भी रिसर्च नहीं करेगा तथा इसके अंदर के सभी दरवाजे तथा रास्ते बंद कर दिए गए। इनमें से ताजमहल के कुछ अद्भुत रहस्य हैं खास दरवाजा। ताजमहल में ऐसे कई दरवाजे हैं जिन्हें किसी न किसी मकसद से बनाया गया था। इसी में से एक है खास दरवाजा। ताजमहल में हमेशा शाहजहां इसी दरवाजे से प्रवेश किया करता था। यह दरवाजा यमुना नदी के किनारे ताजमहल से थोड़ी दूर स्थित है जहां पर नाव के द्वारा जाया जाता है।

शिवसेना UBT और MNS में ठनी, उद्धव ठाकरे के काफिले पर हमला करने वालों को राज ठाकरे ने दी शाबाशी

Shiv Sena clashed with UBT and MNS, Raj Thackeray praised those who attacked Uddhav Thackeray's convoy.

Shiv Sena clashed with UBT and MNS, Raj Thackeray praised those who attacked Uddhav Thackeray’s convoy. महाराष्ट्र में शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के काफिले पर राज ठाकरे की पार्टी मनसे के कार्यकर्ताओं ने गोबर, नारियल और चूड़ियां फेंकीं. इसके बाद राज ठाकरे ने सभी कार्यकर्ताओं को वीडियो कॉल कर उन्हें शाबाशी दी और अभिनंदन किया. दूसरी तरफ मनसे ने उद्धव ठाकरे के काफिले पर गोबर और नारियल से हमला करने की जिम्मेदारी ली. मनसे का कहना है कि यह घटना पहले हुई थी, जब शिवसेना के सदस्यों ने राज ठाकरे के वाहन पर सुपारी फेंकी थी. मनसे नेता अविनाश जाधव ने आगे किसी भी उकसावे पर कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है. ‘कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त’उद्धव ठाकरे के काफिले पर हमले को लेकर शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे की भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा अब हमें पता चल गया कि राज ठाकरे और उनकी पार्टी को ‘सुपारीबाज’ क्यों कहा जाता है. उद्धव ठाकरे जो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, उन्हें Z श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है और वे बालासाहेब ठाकरे के बेटे हैं, अगर वे राज्य में सुरक्षित नहीं हैं तो वे (महायुति सरकार) आम लोगों की सुरक्षा कैसे करेगी. यह हमला राज्य सरकार की विफलता है. यहां कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है, गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए. आनंद दुबे ने आगे कहा कि देवेंद्र फडणवीस की पुलिस, एकनाथ शिंदे की कथित शिवसेना और उनका ठाणे नगर जिला वहां ऐसे हमले हो रहे हैं. इसका मतलब ये सुपारी नहीं तो क्या है. पहले हम सुनते थे कि राज ठाकरे और उनकी पार्टी सुपारियां लेते हैं. लेकिन अब तो स्पष्ट हो गया कि आप हमारे एरिये में आइये और हम आप ऊपर हमले करवाएंगे, पूरी की पूरी सरकार महायुति की फिर भी पुलिस की फैलीयर है. खुफिया एंजेसी की फैलीयर है तो किसपर विश्वास किया जाए आम इंसान कहां जाएगा. शिवसेना (UBT) नेता ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे जैसे बड़े नेता राज्य में सुरक्षित नहीं तो हम और आप कहां जाएं. क्या इसके लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को आप सत्ता देना चाहते हैं.

खूबसूरत पहाड़ियों और मंदिरों से घिरा हुआ मध्यप्रदेश का अमरकंटक, जानिये यहां के बारे में सबकुछ

Amarkantak of Madhya Pradesh is surrounded by beautiful hills and temples

Amarkantak of Madhya Pradesh is surrounded by beautiful hills and temples, know everything about it अमरकंटक नाम की उत्पत्ति को लेकर कई सारी कहानियां प्रचलित हैं. प्रसिद्ध संस्कृत कवि कालिदास ने इस स्थान का नाम अमरकूट बताया है क्योंकि यहां आम (अमरा) के बहुत सारे पेड़ थे. कहा जाता है किबाद में अमरकूट अमरकंटक बन गया. Amarkantak Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश स्थित अमरकंटक हिंदुओं का प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है जो अनूपपुर और शहडोल के तहसील पुष्पराजगढ़ में मेकल की पहाड़ियों के बीच बसा हुआ शहर है. यहां सुप्रसिद्ध अमरकंटक मंदिर है जो 1065 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. पहाड़ों और घने जंगलों मे बीच इस मंदिर की खूबसूरती अलग ही प्रतीत होती है. यह छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा है. यह जगह विंध्य, सतपुड़ा और मैदार की पहाड़ियों का मिलन स्थल है, जिसका दृश्य मन मोह लेने वाला होता है. अमरकंटक तीर्थराज के रूप में भी काफी प्रसिद्ध है. यही वजह है कि इस मंदिर को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं. अमरकंटक नाम की उत्पत्ति को लेकर कई सारी कहानियां प्रचलित हैं. प्रसिद्ध संस्कृत कवि कालिदास ने इस स्थान का नाम अमरकूट बताया है क्योंकि यहां आम (अमरा) के बहुत सारे पेड़ थे. कहा जाता है किबाद में अमरकूट अमरकंटक बन गया. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब भगवान शिव ने आग से त्रिपुरा को नष्ट कर दिया तो तीन में से एक राख अमरकंटक पर गिर गई, जो हजारों शिवलिंगों में बदल गई. ऐसा ही एक लिंग ज्वलेश्वर में आज भी पूजा जाता है. संस्कृत में अमरकंटक का अर्थ है अनंत स्त्रोत, जो भारत कि सबसे पवित्र नदी नर्मदा नदी से जुड़ा हुआ है. यहां कई सारे मंदिर हैं जो कि विभिन्न शासकों के युग का वर्णन करते हैं. अमरकंटक में प्रमुख आकर्षण नर्मदाकुंड और कलचुरी काल के प्राचीन मंदिर हैं. नर्मदाकुंड के मंदिर परिसर के भीतर 16 छोटे मंदिर हैं, जो शहर के मध्य में स्थित हैं. अमरकंटक के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलअमरकंटक में कई प्रसिद्ध पर्यटक स्थल हैं. यहां टूरिस्ट नर्मदा नदी का उद्गम स्थल देख सकते हैं. कलचुरी का प्राचीन कालीन मंदिर देख सकते हैं. इसके अलावा, कर्ण मंदिर, पातालेश्वर मंदिर,सोनमुडा अमरकंटक, दूधधारा प्रपात अमरकंटक, कपिल धारा प्रपात अमरकंटक इत्यादि जगहों पर पर्यटक घूम सकते हैं. नर्मदा नदी का उद्गम स्थलअमरकंटक में नर्मदा नदी और सोनभद्रा नदियों का उद्गम स्थल है. यह आदिकाल से ही ऋषि और मुनियों की तपोभूमि रही है. नर्मदा का उद्गम यहां के एक कुंड से और सोनभद्रा के पर्वत शिखर से हुआ है. नर्मदा नदी यहां पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है. इस नदी को “मध्यप्रदेश और गुजरात की जीवनदायनी नदी” भी कहा जाता है. ऐसे में आप यहां नर्मदा नदी का उद्गम स्थल घूम सकते हैं.

ट्रेन ,ट्रैक और स्टेशन पर रील बनाने वाले हो जाओ सावधान, अब जाना होगा जेल , आरपीएफ की नजर

Those who make reels on trains, tracks and stations, be careful

Those who make reels on trains, tracks and stations, be careful, now they will have to go to jail, RPF is keeping an eye on them. जबलपुर। रेलवे स्टेशन से लेकर ट्रेन और ट्रैक की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए रील (शाॅर्ट वीडियो) बनाने वालों पर रेलवे अब सख्त कार्रवाई करेगी। आरपीएफ ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर उन्हें जेल भी भेजेगी। हाल ही में रेलवे की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए कई रील इंटरनेट मीडिया में वायरल हुए हैं, जिसने रेलवे की चिंता बढ़ा दी है। रेलवे की सुरक्षा से खिलवाड़ यह वीडियो रेलवे ट्रैक ही नहीं बल्कि ट्रेन और रेल परिसर पर सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले हैं। इसके बाद आरपीएफ के महानिदेशक ने इन शाॅर्ट वीडियो बनाने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद जबलपुर समेत भोपाल और कोटा मंडल में ऐसे लोगों की तलाश शुरू कर दी है। आरपीएफ महानिदेशक के निर्देश के बाद जबलपुर मंडल की सीमा में आने वाले सभी रेलवे स्टेशन, ट्रैक और यहां से गुजरने वाली ट्रेनों में रेल संरक्षा से खिलवाड़ करते हुए वीडियो बनाने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाड़ रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।- मो. मुनव्वर खान, सीनियर डीएससी, जबलपुर रेल मंडल कैमरे से नजर, आरपीएफ रख रही खबर ट्रेनों की बढ़ती दुर्घटनाओं को राेकने के लिए अब रेलवे ट्रैक पर पहले से ही सुरक्षा बढ़ा दी गई है।रेलवे ट्रैक के सुरक्षा से खिलवाड़ करने के वीडियो सामने आने के बाद अधि‍कारियों की चिंता बढ़ गई है।आरपीएफ ने ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए स्टेशन के साथ रेलवे फाटक पर कैमरों से निगरानी बढ़ा दी है।ऐसे लोगों पर कार्रवाई के निर्देश आरपीएफ के महानिदेशक के आदेश के बाद पश्चिम मध्य रेलवे के आरपीएफ आईजी, जबलपुर, भोपाल और कोटा मंडल के सीनियर डीएससी ने सभी स्टेशन में बनी आरपीएफ थाना, चौकी पर ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इधर आरपीएफ के साथ रेलवे अधिकारी और कर्मचारियों को भी रेल संरक्षा से खिलवाड़ करने वालों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यह न करें

मनीष सिसोदिया को मिली जमानत, 17 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे

Manish Sisodia gets bail, will come out of jail after 17 months

Manish Sisodia gets bail, will come out of jail after 17 months सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति कथित घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में शुक्रवार (9 अगस्त 2024) को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया की जमानत दे दी. न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया. इससे पहले अदालत ने 6 अगस्त को सिसोदिया की याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मनीष सिसोदिया को रद्द की जा चुकी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 के निर्माण व कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं में संलिप्तता के लिए 26 फरवरी, 2023 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. जांच एसेंसी को बताया देरी के लिए जिम्मेदार सुनवाई के दौरान मनीष सिदोतिया के वकील ने कहा कि अक्टूबर में हमें बताया गया था कि 6-8 महीने में मुकदमा पूरा हो सकता है. हमने कहा था कि अगर ऐसा न हुआ तो आरोपी दोबारा ज़मानत की मांग कर सकता है. आरोपी लंबे समय से जेल में है. ऐसे में इन्हें PMLA सेक्शन 45 में दी गई ज़मानत की कड़ी शर्तों से रियायत की मांग की गई. वहीं जांच एजेंसी ने आरोपी को मुकदमे में देरी के लिए जिम्मेदार बताया. ED ने कहा कि आरोपी गैरजरूरी दस्तावेज मांग रहे हैं. सैकड़ों आवेदन दाखिल किए, लेकिन कोई भी ऐसा रिकॉर्ड नहीं दिखाते. ED और CBI दोनों मामलों में बहुत अधिक आवेदन दाखिल नहीं हुए, इसलिए मुकदमे में देरी के लिए आरोपी को ज़िम्मेदार मानने के निचली अदालत और हाई कोर्ट के निष्कर्ष से हम सहमत नहीं हैं. ‘आरोपी को दस्तावेज देखने का अधिकार है’ सिसोदिया के वकील ने आग कहा, ED के वकील ने 3 जुलाई तक जांच पूरी करने की बात कही गई थी. यह अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट को बताए गई 6-8 महीने की सीमा के परे है. इस देरी के चलते निचली अदालत में मुकदमा शुरू हो पाने का सवाल ही नहीं था. व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है. इसका बिना उचित वजह के हनन नहीं हो सकता है. डेढ़ साल से जेल में बंद हैं मनीष सिसोदिया सीबीआई ने दिल्ली आबकारी नीति के निर्माण एवं कार्यान्वयन में अनियमितताओं में कथित संलिप्तता को लेकर सिसोदिया को 26 फरवरी, 2023 को गिरफ्तार किया था. ईडी ने उन्हें नौ मार्च 2023 को सीबीआई की प्राथमिकी से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था. सिसोदिया ने 28 फरवरी, 2023 को दिल्ली मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था.

जमीन बेचना …. ‘अखिलेश यादव ने बीजेपी का किया नामकरण ? जाने नाम

Selling land…'Akhilesh Yadav named BJP? know name

Selling land…’Akhilesh Yadav named BJP? know name समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वक्फ बोर्ड संशोधक बिल को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला किया है. सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा इस वक्फ बोर्ड संशोधन के बहाने जमीन को हथियाना चाहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एक रियल स्टेट कंपनी की तरह काम कर रही है. इस दौरान उन्होंने नजूल संपत्ति और अन्य जमीनों को लेकर भी हमला किया. अखिलेश यादव ने वक्फ बिल का विरोध करते हुए एक्स पर लिखा- ‘वक्फ बोर्ड’ का ये सब संशोधन भी बस एक बहाना है. रक्षा, रेल, नज़ूल लैंड की तरह जमीन बेचना निशाना है. वक्फ बोर्ड की जमीनें, डिफेंस लैंड, रेल लैंड, नज़ूल लैंड के बाद ‘भाजपाइयों के लाभार्थ योजना’ की शृंखला की एक और कड़ी मात्र हैं. भाजपा क्यों नहीं खुलकर लिख देती:‘भाजपाई-हित में जारी’ सपा अध्यक्ष ने कहा कि, ‘इस बात की लिखकर गारंटी दी जाए कि वक्फ बोर्ड की जमीनें बेची नहीं जाएंगी. भाजपा रियल स्टेट कंपनी की तरह काम कर रही है. उसे अपने नाम में ‘जनता’ के स्थान पर ‘जमीन’ लिखकर नया नामकरण कर देना चाहिए: भारतीय जमीन पार्टी. #नहींचाहिएभाजपा.’ बता दें कि आज केंद्र सरकार लोकसभा में वक्फ बोर्ड में बदलाव के लिए संशोधन बिल पेश करेगी. इस विधेयक को लेकर आज सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है. किरण रिजिजु इस बिल को सदन में पेश कर सकते हैं. सरकार का कहना है कि विधेयक वक्फ की संपत्तियों की देखरेख के लिए लाया जा रहा है. वहीं विपक्षी दलों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन ने वक्फ बोर्ड बिल का विरोध करने का फैसला किया है. जिसके बाद इस बिल को लेकर आज भी सदन में हंगामा देखने को मिल सकता है. विपक्षी दलों ने इस विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की अपील की. वहीं मुस्लिम संगठनों में इसका विरोध देखने को मिल रहा है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि वक्फ बोर्डों की कानूनी स्थिति और शक्तियों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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