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आगामी एक अप्रैल से यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू होने वाली है, पेंशन फंड रेगुलेटरी स्कीम को अमल में लाने वाली अधिसूचना जारी

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बेहद काम की खबर है। अगले महीने 1 अप्रैल से नई स्कीम लागू होने जा रही है। यह स्कीम यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) है। आगामी एक अप्रैल से यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू होने वाली है। बता दें कि केंद्र द्वारा सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू की गई एक नई पेंशन योजना है। अब बीते दिन गुरुवार को पेंशन फंड रेगुलेटरी और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम को अमल में लाने वाली अधिसूचना जारी कर दी। पीएफआरडीए ने बयान में कहा कि यूपीएस से संबंधित नियम एक अप्रैल, 2025 से लागू हो जाएंगे। बता दें कि इसके लागू होने से लगभग 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ होगा। क्या है स्कीम की डिटेल यूपीएस का उद्देश्य सरकार की राजकोषीय नीति और कर्मचारी लाभों के बीच संतुलन बनाना है। इस योजना के तहत रिटायरमेंट से पहले के 12 महीनों में मिले औसत मूल वेतन की 50 प्रतिशत राशि को सुनिश्चित पेंशन के तौर पर देने का प्रावधान है। इनमें कम से कम 10 साल की सेवा वाले कर्मचारियों के लिए प्रति माह ₹10,000 की सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन शामिल है। हालांकि, ओपीएस के तहत, जबकि कोई विशिष्ट न्यूनतम पेंशन राशि अनिवार्य नहीं थी, सेवानिवृत्त लोगों को आम तौर पर उनके अंतिम वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता था। यह स्कीम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत एक विकल्प के रूप में उपलब्ध होगी, जिसमें कर्मचारी NPS और UPS में से एक को चुन सकते हैं। फैमिली पेंशन का लाभ इसके अलावा फैमिली पेंशन के तहत केंद्रीय कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को कर्मचारी की पेंशन का 60% मिलेगा। योजना में कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 10% योगदान देंगे। वहीं, सरकार का योगदान 18.5% होगा। बता दें कि NPS में सरकार 14% का योगदान देगी। यह योजना NPS में शामिल केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू है, जो इसे चुनते हैं। वहीं, न्यूनतम 10 साल की सेवा वाले कर्मचारी निश्चित न्यूनतम पेंशन के हकदार होंगे। नामांकन कैसे करें? – पात्र कर्मचारी 1 अप्रैल, 2025 से प्रोटीन सीआरए पोर्टल (https://npscra.nsdl.co.in) के जरिए अपना नामांकन और दावा फॉर्म ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। – वैकल्पिक रूप से वे फिजिकली जमा करने का विकल्प चुन सकते हैं। – सरकार ने पहले 24 जनवरी, 2025 को एनपीएस के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक नए पेंशन ढांचे के रूप में यूपीएस को अधिसूचित किया था।

सरकारी बैंक की ओर से दिया जाने वाला डिविडेंड वित्त वर्ष 2023-24 में 33 प्रतिशत बढ़कर 27,830 करोड़ रुपये हुआ

नई दिल्ली सरकार क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की वित्तीय स्थिति में मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। इसके कारण सरकारी बैंक की ओर से दिया जाने वाला डिविडेंड वित्त वर्ष 2023-24 में 33 प्रतिशत बढ़कर 27,830 करोड़ रुपये हो गया है। सरकारी डेटा में बताया गया कि वित्त वर्ष 2022-23 में सरकारी बैंकों ने 20,964 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकारी बैंकों की ओर से दिए गए कुल डिविडेंड में से 65 प्रतिशत यानी 18,013 करोड़ रुपये सरकार को दिए गए हैं। इसकी वजह सरकार की पीएसबी में बहुलांश हिस्सेदारी होना है। वित्त वर्ष 2022-23 में पीएसबी से सरकार को 13,804 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला था। इसमें एसबीआई का भी नाम शामिल था। पीएसबी से सरकार को अधिक डिविडेंड की वजह, सरकारी बैंकों द्वारा रिकॉर्ड मुनाफा कमाना है। वित्त वर्ष 24 में 12 सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने सामूहिक रूप से अब तक का सबसे अधिक 1.41 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है, जबकि वित्त वर्ष 23 में यह आंकड़ा 1.05 लाख करोड़ रुपये था। अकेले वित्त वर्ष 25 के पहले नौ महीनों के दौरान, इन बैंकों ने 1.29 लाख करोड़ रुपये का लाभ आर्जित कर लिया है। वित्त वर्ष 24 में सरकारी बैंकों को कुल 61,077 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इसमें 40 प्रतिशत का योगदान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने दिया था। वित्त वर्ष 23 में पीएसबी को 50,232 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। वित्त वर्ष 24 में पंजाब नेशनल बैंक के मुनाफे में सबसे अधिक 228 प्रतिशत का उछाल देखने को मिला। इस दौरान बैंक को 8,245 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। समीक्षा अवधि में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का मुनाफा सालाना आधार पर 62 प्रतिशत बढ़कर 13,649 करोड़ रुपये का हुआ है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का मुनाफा सालाना आधार पर 61 प्रतिशत बढ़कर 2,549 करोड़ रुपये हो गया है। सरकारी बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन में यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि इन बैंकों ने वित्त वर्ष 18 में 85,390 करोड़ रुपये का भारी घाटा दर्ज किया था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने नौयान शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड में 74 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीदी, डील 382.73 करोड़ रुपये रुपये हुई

मुंबई मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के तहत एक और कंपनी आ चुकी है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के पूर्ण मालिकाना हक वाली स्टेप डाउन सब्सिडियरी नौयान ट्रेडिंग्स प्राइवेट लिमिटेड (NTPL) ने नौयान शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड (NSPL) में 74 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीद ली है. यह डील 382.73 करोड़ रुपये रुपये में वेलस्पन कॉर्प लिमिटेड से हुई है. रिलायंस इंडस्‍ट्रीज ने शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी है कि NSPL 21 मार्च से रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्टेप डाउन सब्सिडियरी बन गई है. इस डील से पहले एनटीपीएल ने एनएसपीएल को 93.66 करोड़ रुपये का अनसिक्योर्ड लोन दिया था. रिलायंस इडस्‍ट्रीज ने एक्‍सचेंज फाइलिंग में कहा कि अधिकारियों की मंजूरी के लिए जरूरी आवेदन किए जा रहे हैं. कंपनी के शेयरों में आई तेजी 21 मार्च को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर BSE पर 0.62 प्रतिशत बढ़त के साथ 1276.45 रुपये पर बंद हुए. कंपनी का मार्केट कैप 17.27 लाख करोड़ रुपये हो चुका है. यह शेयर 6 महीने के दौराप 14 फीसदी तक नीचे आ चुका है. साल 2025 में अब तक शेयर 4 प्रतिशत की तेजी दिखा चुका है. इस शेयर की फेस वैल्‍यू 10 रुपये है. कंपनी में दिसंबर 2024 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 50.13 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. यह देश की सबसे ज्‍यादा वैल्‍यूवेबल कंपनी है. पिछले एक साल में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के शेयर में 12.20 फीसदी की गिरावट आई है. हालांकि पांच साल के दौरान यह शेयर 153 फीसदी चढ़ा है. इसके 52 सप्‍ताह का हाई लेवल 1,608.80 रुपये और 52 सप्‍ताह का निचला स्‍तर 1,156 रुपये है. दिसंबर तिमाही में कितना हुआ मुनाफा रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के मुनाफे की बात करें तो अक्‍टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान कंपनी ने 18,540 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है. यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुनाफे 17,265 करोड़ रुपये से 7 प्रतिशत ज्यादा है. कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 2.40 लाख करोड़ रुपये रहा, जो दिसंबर 2023 तिमाही के रेवेन्यू 2.25 लाख करोड़ रुपये से 6.7 प्रतिशत ज्यादा है. कंपनी का EBITDA दिसंबर 2024 तिमाही में सालाना आधार पर 7.7 प्रतिशत बढ़कर 43,789 करोड़ रुपये हो गया. वहीं EBITDA मार्जिन की बात करें तो यह पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बढ़कर 18.3 प्रतिशत हो गया.  

2040-जेट… एक किलो सोने में क्या खरीद सकते हैं आप?1990-मारुति, 2000-एस्टीम, 2025-बीएमडब्ल्यू

नई दिल्ली  सोने की कीमत रोज-रोज नए रेकॉर्ड बना रही है। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 91,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई। यानी एक किलो सोने की कीमत 91 लाख रुपये के पार पहुंच गई है। इतने पैसों में आप आप एक BMW या Audi जैसी गाड़ी खरीद सकते हैं। 1990 मेंएक किलो सोने की कीमत में सिर्फ एक मारुति 800 आती थी। BMW X1 की शुरुआती कीमत लगभग 50.80 लाख रुपये है। वहीं नई X3 पेट्रोल/डीजल मॉडल की कीमत 97.80 लाख रुपये है। एक किलो सोने की कीमत में आप Audi A4, S5, A6 और Q3 जैसे मॉडल भी खरीद सकते हैं। SEBI में रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट ए के मंधान ने 16 मार्च को एक ट्वीट किया था। उन्होंने बताया कि कैसे सोने की कीमतें कारों की तुलना में बदल गई हैं। 1990 में 1 किलो सोना Maruti 800 खरीदने के लिए काफी था। साल 2000 तक इससे Maruti Suzuki Esteem खरीदी जा सकती थी। 2005 में यह एक Toyota Innova खरीदने के लिए पर्याप्त था। 2010 तक एक Toyota Fortuner खरीदी जा सकती थी। 2019 तक 1 किलो सोना BMW X1 खरीदने के लिए काफी था। कहां तक जाएगी कीमत उन्होंने ट्वीट किया, ‘1 किलो सोना रखिए और 2040 तक इंतजार कीजिए… शायद आप एक प्राइवेट जेट खरीद सकें।’ पिछले तीन साल से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। 2024 में इसने पिछले दस साल में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। बीते साल सोने की कीमत में 26% की बढ़ोतरी हुई है। सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और दुनिया में तनाव से सोने की चमक बढ़ी। 2025 में अब तक सोने की कीमत में 15% की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 11,735 रुपये बढ़ गई है। सोने की ताकत लगातार बढ़ रही है। यह हर साल ऊपर जा रहा है। जानकारों का कहना है कि सोने की कीमतें अभी और बढ़ेंगी। दुनिया में तनाव के कारण लोग सोना खरीदना पसंद कर रहे हैं। मध्य पूर्व में अस्थिरता और चीन की अतिरिक्त आर्थिक प्रोत्साहन योजनाओं ने सोने की सुरक्षित ठिकाने की मांग को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, गाज़ा संकट और ट्रेड टैरिफ को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाकर सोने में निवेश कर रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है।   1947: ₹8,000 1948: ₹9,587 1949: ₹9,417 1950: ₹9,918 1951: ₹9,805 1952: ₹7,681 1953: ₹7,306 1954: ₹7,775 1955: ₹7,918 1956: ₹9,081 1957: ₹9,062 1958: ₹9,538 1959: ₹10,256 1960: ₹11,187 1961: ₹11,935 1962: ₹11,975… बता दें कि बीते 3 वर्षों में सेंट्रल बैंकों की खरीद और वैश्विक तनाव के चलते इसकी कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। 2024 में भी यह रैली जारी है, और विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक प्रोत्साहन उपायों के कारण सोने की कीमतें और ऊंचाई छू सकती हैं।  

डॉलर के मुकाबले रुपया 17 पैसे मजबूत, आयात पर निर्भर इंडस्ट्री को फायदा होगा

मुंबई भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 86 रुपये से ऊपर पहुंच गया है. यह उसका पिछले दो साल में किसी भी एक सप्ताह का सबसे अच्छा प्रदर्शन है. तेल की कीमतों में स्थिरता, डॉलर इंडेक्स में गिरावट, और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में किए गए हस्तक्षेप जैसे कारकों ने रुपये को मजबूती दी है. इस सप्ताह रुपये ने 1.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की, जो जनवरी 2023 के बाद से सबसे अधिक है. विशेषज्ञों का कहना है कि RBI द्वारा डॉलर की तरलता (लिक्विडिटटी) बढ़ाने और नियमित हस्तक्षेप के कारण रुपया लगातार मजबूत हो रहा है. इसके अलावा, विदेशी निवेश, तेल की कीमतों में स्थिरता, घरेलू महंगाई में कमी, और व्यापार घाटे (ट्रेड डेफिसिट) में सुधार ने भी रुपये को सबल दिया है. फरवरी में भारत का व्यापार घाटा घटकर 14.05 अरब डॉलर (लगभग 1.17 लाख करोड़ रुपये) रह गया, जो जनवरी में 23 अरब डॉलर (लगभग 1.91 लाख करोड़ रुपये) था. यह सुधार निर्यात और आयात में गिरावट के कारण हुआ है. रुपये की मजबूती के मुख्य कारण     RBI का हस्तक्षेप: RBI ने डॉलर/रुपया स्वैप ऑक्शन के जरिए डॉलर की लिक्विडिटी बढ़ाई. स्वैप नीलामी का मतलब है कि RBI ने बैंकों से डॉलर खरीदे और उन्हें भविष्य में वापस बेचने का वादा किया.     तेल की कीमतों में स्थिरता: तेल की कीमतें स्थिर रहने से भारत का आयात बिल कम हुआ, जिससे रुपये को सपोर्ट मिला.     विदेशी निवेश: विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों में पैसा लगाया, जिससे डॉलर की आपूर्ति बढ़ी.     व्यापार घाटे में सुधार: फरवरी में व्यापार घाटा कम होकर 14.05 अरब डॉलर रह गया, जो अगस्त 2021 के बाद से सबसे कम है. विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की सही और समय पर नीतियों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है. इससे रुपये की मजबूती जारी रह सकती है. हालांकि, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और तेल की कीमतों में बदलाव जैसे कारक रुपये को प्रभावित कर सकते हैं. रुपये की मजबूती से किन सेक्टरों को लाभ रुपये की मजबूती से कई सेक्टरों को फायदा होगा, खासकर आयात पर निर्भर रहने वाली इंडस्ट्री को. जब रुपया मजबूत होता है, तो आयात होने वाला सामान जैसे कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और मशीनरी सस्ते हो जाते हैं. इससे पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल, और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को लागत में कमी आती है. साथ ही, विदेशी यात्रा करने वालों को भी फायदा होगा, क्योंकि डॉलर के मुकाबले उनकी खरीदारी क्षमता बढ़ जाती है. हालांकि, निर्यातकों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि मजबूत रुपये से उनके उत्पाद विदेशों में महंगे हो जाते हैं. खासकर आईटी कंपनियों को डॉलर के कमजोर होने और रुपये के मजबूत होने से दिक्कत होती है. बाजार पर विदेशी निवेश का असर   गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 3,239.14 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. इसके अलावा, भारतीय बॉन्ड मार्केट में भी 5,500 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला. विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की रियल यील्ड (Real Yield) 3.028% होने के कारण विदेशी निवेशक यहां निवेश को आकर्षक मान रहे हैं.    डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल में बढ़त डॉलर इंडेक्स (Dollar Index), जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 0.13% की बढ़त के साथ 103.98 पर रहा. ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) वायदा कारोबार में 0.44% बढ़कर 72.32 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था.   शेयर बाजार में भी दिखी मजबूती   घरेलू शेयर बाजार भी सकारात्मक कारोबार कर रहे हैं. दोपहर के कारोबार में 12 बजकर 7 मिनट के करीब BSE सेंसेक्स (Sensex) 581.34 अंक या 0.76% की बढ़त के साथ 76,929.40 पर कारोबार कर रहा था. Nifty 50 भी 165.10 अंक या 0.71% की बढ़त के साथ 23,355.75 पर पहुंच गया.   भारतीय बाजार के प्रति विदेशी निवेशकों की भरोसा कायम रुपये की मजबूती भारतीय बाजार के प्रति विदेशी निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है. आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव, तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स की चाल रुपये की दिशा तय करेगी. वहीं,  फेडरल रिजर्व के फैसले और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर रुपये की चाल पर पड़ सकता है.

आज सोने-चांदी के दाम में हुआ बड़ा बदलाव, जानें आज का लेटेस्ट रेट

भोपाल देशभर में मार्च के आखिरी हफ्ते में बाजार लगातार अस्थिरता का सामना कर रहे हैं. इस बीच देश में सोने-चांदी के दामों में भी लगातार उतार चढ़ाव दिख रहा है. सोने के भाव में ये बदलाव इंडियन शेयर मार्केट में गिरावट चल रही है. जिसका असर गोल्ड मार्केट में भी दिख रहा है. एमपी की राजधानी भोपाल में आज शनिवार (22 मार्च) को भारतीय बुलियन (www.bullions.co.in) के मुताबिक, बाजार शुरू होने तक सोने और चांदी के भाव कुछ इस प्रकार हैं: – भोपाल में 22 कैरेट सोने का रेट आज: 80,786 रुपए/10 ग्राम बीते दिन: 81,501 रुपए – भोपाल में 24 कैरेट सोने के दाम आज: 88,130 Rs/10gm बीते दिन: 88,910 रुपए प्रति 10 ग्राम – भोपाल में चांदी का भाव आज: 98,000 रुपए/1 किलो बीते दिन: 100,070 रुपए प्रति किलो बाजार में गिरावट, सोने के भी गिरे भाव अब बात करें तो देशभर में शेयर मार्केट रेड जोन में बना हुआ है. सेंसेक्स से लेकर निफ्टी 50 तक गिर रहे हैं. वहीं पिछले एक हफ्ते में सोने के भाव लगभग 1800 रुपए तक बढ़े है. आज येलो मेटल कहे जाने वाले सोने का शुरुआती कारोबार गिरावट के साथ शुरू हुआ, जहां देश में आज गोल्ड-सिल्वर रेट कुछ इस प्रकार से हैं: – भारत में 24 कैरेट गोल्ड रेट आज: 88,190 रुपए प्रति 10 ग्राम बीते दिन: 88,980 Rs/10gm – भारत में चांदी का भाव आज: 98,070 रुपए प्रति 1 किलो बीते दिन: 100,140 रुपए/किलो संकट में भारतीय बाजार, अब आगे क्या? देश-दुनिया में पिछले 5 महीने में शेयर बाजार रिकॉर्ड गिरावट से गुजर रहा है. जहां बाजार से बड़ी संख्या में फॉरेन इंवेस्टर भारत छोड़ रहे हैं. इस बीच सोने के भाव में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है और सेंसेक्स से लेकर निफ्टी तक रेड जोन में है. इसके अलावा इंटरनेशनल गोल्ड मार्केट में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी जारी है. अब अगर आप भी गोल्ड खरीदी की सोच रहे हैं तो फटाफट खरीद ले, क्योंकि आने वाले दिनों में सोना और भी रिकॉर्ड महंगाई छु सकता है. बाजार के ट्रेंड की माने तो इस साल के अंत तक सोना 95 हजार पार कर सकता है. हालमार्क ही है असली सोने की पहचान देखिए अगर आप सोने के गहने खरीदने जा रहे हैं तो कभी भी क्वालिटी से समझौता न करें. हॉलमार्क देखकर ही गहने खरीदें, क्योंकि यही सोने की सरकारी गारंटी है. भारत में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) हॉलमार्क का निर्धारण करता है. हर कैरेट के हॉलमार्क अंक अलग होते हैं, जिसे ध्यान से रखकर ही सोना खरीदें. अगर आप ऐसा नही करते हैं तो आपके सोने में मिलावट भी हो सकती है तो हमेशा जांच परख कर ही खरीदी करें.

GST में बड़ा बदलाव, कर चोरी करना पड़ेगा भारी, 1 अप्रैल से बदल रहा है नियम

नई दिल्ली भारत सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स के नियमों में काफी बदलाव किया है. इसके तहत 1 अप्रैल 2025 से इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर सिस्टम लागू होने जा रहा है. इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू का सही डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करना है. इसकी मदद से राज्य सरकारें एक ही जगह पर दी जा रही शेयर्ड सर्विसेज पर उचित मात्रा में टैक्स वसूल करेंगी. ISD मैकेनिज्म को लागू करने के लिए 2024 के फाइनेंस एक्ट के तहत सेंट्रल जीएसटी एक्ट में संशोधन किया गया है. यह मैकेनिज्म उन व्यवसायों को सुविधा देता है जो कई राज्यों में संचालित होते हैं. इसके तहत व्यवसाय अपनी एक हेडक्वार्टर में कॉमन इनपुट सर्विस के इनवॉइस को सेंट्रलाइज कर सकते हैं. इससे उन शाखाओं के बीच इनपुट टैक्स क्रेडिट का समान वितरण संभव होता है जो शेयर्ड सर्विसेज का इस्तेमाल करती हैं. इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रॉफिट इनपुट टैक्स क्रेडिट यह वो टैक्स होता जो व्यवसाय अपनी खरीद पर चुकाते हैं. इसे आउटपुट टैक्स से घटाया जा सकता है, जिससे व्यवसाय की कुल जीएसटी देनदारी कम हो जाती है. नए नियमो के तहत ISD सिस्टम का इस्तेमाल होना अनिवार्य होगा जिससे ITC सही वितरण हो सके. नए नियम क्या है पहले बिजनेस करने वालों के पास कॉमन ITC को अपने अन्य GST रजिस्ट्रेशन में आवंटित करने के लिए दो ऑप्शन थे. इसमें दो ऑप्शन यह थे कि ISD मैकेनिज्म या क्रॉस-चार्ज मेथड, लेकिन अब 1 अप्रैल 2025 से ISD का इस्तेमाल न करने पर रेसिपिएंट लोकेशन के लिए ITC नहीं दी जाएगी. अगर ITC का गलत वितरण होता है तो टैक्स अथॉरिटी ब्याज सहित राशि वसूल करती है. इसके साथ ही अनियमित वितरण के लिए जुर्माना भी लगेगा, जो ITC की राशि या 10 हजार रुपए से भी अधिक होगा. जीएसटी सिस्टम माना जा रहा है कि यह बदलाव जीएसटी सिस्टम को और अधिक व्यवस्थित करने की दिशी में एक और बड़ा कदम है. ISD सिस्टम से न केवल राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू वितरण होगा, बल्कि व्यवसायों को भी अपनी टैक्स देनदारियों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी. यह कदम टैक्स की चोरी रोकने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए काफी अच्छी साबित होगी.  

आरबीआई ने इंडसइंड बैंक के सीईओ सुमंत कठपालिया और उनके डिप्टी अरुण खुराना को पद से हटने को कहा

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने इंडसइंड बैंक के सीईओ सुमंत कठपालिया और उनके डिप्टी अरुण खुराना को पद से हटने को कहा है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक रिजर्व बैंक ने अकाउंटिंग गड़बड़ी के बाद इंडसइंड बैंक के मैनेजमेंट से यह बात कही है। दरअसल, आरबीआई जमाकर्ताओं के विश्वास को प्रभावित होने से बचाने के लिए व्यवस्थित बदलाव चाहता है। इस विसंगति के कारण मूडीज ने बैंक की रेटिंग को संभावित डाउनग्रेड के लिए समीक्षा के लिए रखा है। बैंक ने पेशेवर को किया नियुक्त इस बीच, इंडसइंड बैंक ने अपने वायदा-विकल्प खंड से संबंधित ऑडिटिंग विसंगतियों के मूल कारण का पता लगाने के लिए एक पेशेवर कंपनी को नियुक्त किया है। अनुमान के अनुसार, ऑडिटिंग में 2,100 करोड़ रुपये की विसंगति से बैंक की निवल संपत्ति पर 2.35 प्रतिशत का असर पड़ सकता है। बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया, निदेशक मंडल ने गुरुवार को अपनी बैठक में विसंगतियों के मूल कारण की पहचान करने, प्रचलित ऑडिटिंग मानकों के संबंध में व्युत्पन्न अनुबंधों के लेखांकन उपचार की शुद्धता व प्रभाव का आकलन करने के लिए एक व्यापक जांच करने हेतु स्वतंत्र पेशेवर कंपनी को नियुक्त करने का निर्णय लिया। इसके अलावा, यह कंपनी किसी भी चूक की पहचान करेगी और लेखांकन में विसंगतियों के संबंध में जवाबदेही सुनिश्चित करेगी। बता दें कि बैंक ने 10 मार्च को अपने वायदा-विकल्प खंड में कुछ विसंगतियों के बारे में जानकारी दी थी। बैंक की आंतरिक समीक्षा में पाया गया कि इससे दिसंबर 2024 तक उसकी कुल संपत्ति पर करीब 2.35 प्रतिशत का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मूडीज रेटिंग्स की नजर मूडीज रेटिंग्स ने 17 मार्च को बैंक की रेटिंग को संभावित डाउनग्रेड के लिए समीक्षा पर रखा। इसमें कहा गया है कि ऑडिटिंग में विसंगति बैंक के रिस्क मैनेजमेंट, अनुपालन और रिपोर्टिंग में कमजोरी को दिखाती है और इन क्षेत्रों में लगातार कमजोरियां इंडसइंड की प्रतिष्ठा को कमजोर कर सकती हैं। इसलिए इसकी फंडिंग और लिक्विडिटी को भी नुकसान पहुंचा सकती है। बता दें कि इस महीने इंडसइंड बैंक के शेयरों में 30% से अधिक की गिरावट आई है।

SBI, PNB सहित कई बैंकों ने बदले नियम, जाने नए नियम कुछ इस प्रकार

जम्मू बैंकिंग सिस्टम को और बढ़िया और ग्राहकों के लिए सिक्योर बनाने के चलते 1 अप्रैल, 2025 से एस.बी.आई., कैनरा सहित कई बैंकों के नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार ग्राहकों की सहूलियत और बैंकिंग सिस्टम को और सुरक्षित बनाने के लिए SBI Bank, PNB Bank, Canara Bank, HDFC Bank सहित कई अन्य बैंक अपने कुछ नियमों में बदलाव करने जा रहे हैं। ये नए नियम कुछ इस प्रकार हैं- 1 अप्रैल के बाद से बैंक के खाताधारकों को अपने सेविंग अकाउंट में पहले से ज्यादा मिनिमम बैलेंस रखना होगा। ऐसा न करने पर उन्हें पेनल्टी पड़ सकती है। 1 अप्रैल से अगर ग्राहक किसी और ए.टी.एम. से पैसे निकालते हैं तो एक लीमिट के बाद फ्री ट्रांजेक्शन बंद हो जाएगी। इसके अलावा लिमिटेड टाइम से ज्यादा ए.टी.एम. से पैसे निकालने पर पहले से ज्यादा टैक्स लगेगा। बैंकों ने एक अप्रैल से सेविंग अकाउंट और Fixed Deposit की ब्याज दरों में बदलाव किया है। लंबे समय तक चलने वाले FD पर ज्यादा Interest Rate मिलेगा। इसके अलावा ग्राहकों को अकाउंट बैलेंस के आधार पर अलग-अलग Interest Rates मिलेंगे।   सभी बैंकों में जल्द ही पॉजिटिव पे सिस्टम की शुरूआत होने जा रही है। इस दौरान ग्राहकों को बैंकों में 50 हजार से ज्यादा की अमाउंट की ट्रांजेक्शन के लिए चैक को जरूरी किया जाएगा। इसके चलते चैक को वेरिफाई करना होगा जिससे फ्रॉड के मामलों में कमी आएगी। 1 अप्रैल से मोबाइल और ऑनलाइन बैंकिंग के नए फीचर्स आने वाले हैं। इसमें ए.आई. चैटबॉट भी होगा जिससे ग्राहकों को ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग सिस्टम समझने में आसानी होगी। इसके अलावा बायोमेट्रिक और टू फेक्टर वेरिफिकेशन जैसी सेवाओं को भी अपग्रेड किया जाएगा।

जीएसटी में बड़ा बदलाव 1 अप्रैल से लागू होगा यह नया नियम, क्या बदलावों से व्यापारियों पर असर पड़ेगा?

नई दिल्ली भारत में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा। इस बदलाव के तहत, इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (ISD) सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इस नए सिस्टम के माध्यम से, राज्य सरकारें एक ही स्थान पर दी जा रही शेयर्ड सर्विसेज पर उचित टैक्स वसूल करने में सक्षम होंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू का सही तरीके से वितरण सुनिश्चित करना है। ISD मैकेनिज्म के तहत, यदि एक बिजनेस कई राज्यों में ऑपरेट करता है, तो उसे अपने कॉमन इनपुट सर्विसेज के इनवॉइस को एक स्थान पर केंद्रीकृत करने की अनुमति मिलती है। इन सर्विसेज में घरेलू या इम्पोर्टेड सर्विसेज शामिल हो सकती हैं। यह मैकेनिज्म व्यापारियों को यह सुविधा देता है कि वे अपनी शाखाओं के बीच इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को सही तरीके से वितरित कर सकें। इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्या होता है? इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वह टैक्स है जो एक रजिस्टर्ड बिजनेस या इंडिविजुअल किसी वस्तु या सेवा की खरीद पर चुकता करता है। इसे उस समय आउटपुट टैक्स के भुगतान के दौरान घटाया जा सकता है। सरल शब्दों में, ITC एक व्यापार के लिए भुगतान किए गए जीएसटी टैक्स का लाभ है, जिसे वह अपने द्वारा बेची गई वस्तुओं या सेवाओं पर चुकाए गए टैक्स से घटा सकता है। पुरानी व्यवस्था और ISD के लाभ इससे पहले, व्यवसायों को अपने अलग-अलग जीएसटी रजिस्ट्रेशंस के बीच ITC का वितरण करने के लिए ISD या क्रॉस-चार्जिंग मेथड का इस्तेमाल करने का विकल्प था। अब, ISD मैकेनिज्म को लागू करने से, विभिन्न शाखाओं के लिए ITC का वितरण और भी आसान हो जाएगा। अगर किसी व्यापार ने ISD मैकेनिज्म का उपयोग नहीं किया, तो वह अपनी शाखाओं के लिए ITC प्राप्त नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, अगर ITC का गलत वितरण होता है, तो टैक्स अथॉरिटीज उस राज्य से ब्याज सहित राशि वसूल सकती हैं। गलत डिस्ट्रीब्यूशन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो 10,000 रुपये या गलत डिस्ट्रीब्यूटेड ITC के मूल्य के बराबर हो सकता है, जो भी अधिक हो। क्या होगा अगर नियमों का पालन न किया गया? ISD मैकेनिज्म के तहत किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर, टैक्स अथॉरिटीज उस राज्य से ब्याज के साथ राशि वसूलने का अधिकार रखती हैं। साथ ही, यदि कोई व्यवसाय ITC के वितरण में गलतियां करता है, तो उसे जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। यह जुर्माना 10,000 रुपये या गलत वितरण किए गए ITC के मूल्य का होगा, जो भी ज्यादा हो। क्या बदलावों से व्यापारियों पर असर पड़ेगा? इस बदलाव का व्यापारियों पर सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि अब उन्हें अपने बिजनेस संचालन में इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर सिस्टम को सही तरीके से लागू करना होगा। अगर वे इसमें कोई लापरवाही करते हैं, तो उन्हें टैक्स या जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए व्यापारियों को 1 अप्रैल 2025 से पहले इस नए नियम को समझना और अपनी प्रणाली में लागू करना जरूरी है।

UFBU ने 24-25 मार्च को देशव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान, चार दिन तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी

मुंबई अगर आप अगले हफ्ते बैंक जाने की योजना बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने 24 और 25 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इससे देशभर में सार्वजनिक और निजी दोनों बैंकों की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। हड़ताल का आह्वान भारतीय बैंकों के संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ बातचीत असफल होने के बाद किया गया। किन बैंकों पर पड़ेगा असर? हालांकि SBI, PNB, BoB, ICICI और HDFC बैंक ने हड़ताल को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हड़ताल का असर सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks) पर पड़ सकता है। इससे ग्राहकों को चार दिन तक बैंकिंग सेवाओं में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। क्या है UFBU और कौन से बैंक यूनियन इसमें शामिल हैं? यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ़ बैंक यूनियन्स (UFBU) एक संगठन है जिसमें 9 प्रमुख बैंक यूनियन्स शामिल हैं। यह 8 लाख से अधिक बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें शामिल प्रमुख यूनियन्स हैं- ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (NCBE), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA)। बैंक यूनियनों की मांगें क्या हैं? बैंक यूनियनों ने अपनी कई मांगें सरकार और IBA के सामने रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:     बैंकों में सभी पदों पर पर्याप्त भर्ती की जाए, ताकि शाखाओं में स्टाफ की कमी न हो और ग्राहक सेवा बेहतर हो सके।     बैंकों में काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।     सभी बैंकों के लिए पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाए, जैसे कि RBI, बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों में लागू है।     परफॉर्मेंस रिव्यू और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को वापस लिया जाए, जिससे नौकरी की सुरक्षा बनी रहे और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्वायत्तता कमजोर न हो।     बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्राहकों द्वारा किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार से बचा जा सके। मैनपावर घटने से बैंकिंग सेवाएं हो रहीं प्रभावित बैंक कर्मी संगठनों ने कहा कि पिछले 11 साल में देश के सार्वजनिक बैंकों में एक लाख 39 हजार 811 कर्मी घट गए हैं। ये पद्द रिक्त हैं। सरकारी बैंकों में ग्राहकों की सेवा के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। बैंक शाखाओं में कर्मियों की बड़ी कमी के कारण संतोषजनक सेवाएं नहीं मिलने से अनियंत्रित लोगों कर्मियों पर हमला कर देते हैं। इस लिए बैंकों में पर्याप्त संख्या में कर्मियों की नियुक्ति की जाए और कर्मियों की सुरक्षा की व्यवस्था की जाय, ताकि ग्राहकों को संतोषजनक सेवाएं प्रदान की जा सकें और कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्यभार कम किया जा सके। बैंककर्मियों की मांग     सभी संवर्गों में पर्याप्त भर्ती, अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने     बैंकिंग क्षेत्र में सप्ताह में पांच दिन काम का नियम लागू करने     परफॉर्मेंस रिव्यू और पीएलआई संबंधित सरकारी निर्देश वापस हो     अनियंत्रित जनता के हमले से बचाने के लिए बैंक कर्मियों की सुरक्षा     सरकारी बैंकों में कामगार, अधिकारी और निदेशकों के रिक्त पदों की नियुक्ति     सरकारी कर्मियों के तर्ज पर 25 लाख रुपए की सीमा बढ़ाने के लिए ग्रेच्युटी अधिनियम में संशोधन     सरकारी बैंकों में खाली पदों को जल्द भरा जाए।     ग्रेच्युटी एक्ट में संशोधन कर इसकी अधिकतम सीमा ₹25 लाख की जाए, जैसा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू है।     बैंकिंग क्षेत्र में स्थायी नौकरियों की आउटसोर्सिंग को बंद किया जाए।     बैंकिंग सेक्टर में किसी भी प्रकार की अनुचित श्रम नीतियों पर रोक लगाई जाए। चार दिन तक बैंक सेवाएं रहेंगी प्रभावित 22 मार्च को महीना का चौथा शनिवार है, जो सभी सरकारी और निजी बैंकों के लिए अवकाश होता है। 23 मार्च को रविवार होने के कारण बैंकों की छुट्टी रहेगी। 24 और 25 मार्च को दो दिवसीय हड़ताल होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि बैंकिंग सेवाएं लगातार चार दिन तक प्रभावित रहेंगी। किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC) के उपाध्यक्ष पंकज कपूर ने ANI को बताया कि हड़ताल के कारण चेक क्लीयरेंस, नकद लेन-देन, ऋण सेवाएं और धन प्रेषण जैसी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी। हालांकि, ATM, UPI और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन बड़ी राशि के ट्रांजेक्शन और चेक क्लीयरेंस में देरी हो सकती है।  

सालभर में सोने में 25 हजार और चांदी में 26 हजार की लगाई छलांग

मुंबई कीमती धातुओं की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। पहली बार चांदी का भाव 1 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के पार चला गया है, जबकि सोना 91 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और अमेरिकी बाजार की स्थिति के कारण सोना-चांदी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। सोने में 25 हजार और चांदी में 26 हजार की महंगाई मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच सोना और चांदी के भावों में भारी उछाल देखा गया है। एक साल पहले मार्च 2024 में फाइन सोना 66 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर 91 हजार रुपए पर पहुंच गया है। इसी तरह फाइन चांदी की कीमत 75 हजार रुपए से बढ़कर 1 लाख 1 हजार रुपए हो गई है। सोना जेवर की कीमत – मार्च 2024 में 59 हजार रुपए थी, जो अब 84 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। चांदी जेवर की कीमत – पिछले साल 700 रुपए प्रति 10 ग्राम थी, जो अब 950 रुपए हो गई है। 60 दिनों में सोना 12 हजार और चांदी 9 हजार महंगी 2025 की शुरुआत से ही सराफा बाजार में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। 15 जनवरी से 15 मार्च के बीच मात्र 60 दिनों में सोना 12 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 9 हजार रुपए प्रति किलो महंगी हुई है।     15 जनवरी 2025 – सोना 79 हजार रुपए, चांदी 92 हजार रुपए     फरवरी 2025 – सोना 87 हजार रुपए, चांदी 98 हजार रुपए     15 मार्च 2025 – सोना 91 हजार रुपए, चांदी 1 लाख 1 हजार रुपए बाजार में हलचल, विशेषज्ञों की राय बढ़ती कीमतों के चलते सराफा बाजार में हलचल मच गई है। व्यापारियों के अनुसार, जब सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, तो इसका असर खरीदारी पर भी पड़ता है। रतलाम स्थित महावीर ज्वेलर्स के अभिषेक जैन ने बताया कि अमेरिका की आर्थिक नीतियों के कारण कीमतों में उछाल आया है और निकट भविष्य में गिरावट के आसार नहीं हैं। बंटू ज्वेलर्स के चिराग बंटू गौरी के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक सोना 12 हजार और चांदी 9 हजार रुपए महंगी हो चुकी है, जिससे ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हो सकती है। ज्यादातर जानकार सोने को लेकर फिलहाल बेहद बुलिश हैं। उनका मानना है कि ग्लोबल लेवल पर ट्रेड वॉर छिड़ने की आशंका के मद्देनजर जो अनिश्चतिता की स्थिति बनी है उसमें बतौर सुरक्षित विकल्प (safe-haven) सोने की मांग बरकरार रह सकती है। अमेरिकी डॉलर में नरमी भी गोल्ड की कीमतों मे तेजी भर रही है। फिलहाल अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (US dollar Index) 4 महीने के अपने लो पर है। इस साल अभी तक अमेरिकी डॉलर इंडेक्स तकरीबन 5 फीसदी कमजोर हुआ है। इस दौरान 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी तकरीबन 26 बेसिस प्वाइंट की गिरावट आई। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है तो सोना उन खरीदारों के लिए सस्ता हो जाता है जो इसे किसी अन्य करेंसी में खरीदना चाहते हैं। इससे सोने की मांग बढ़ सकती है और कीमतों में इजाफा हो सकता है। वहीं यूएस बॉन्ड यील्ड में गिरावट निवेशकों के लिए सोने के अपॉर्चुनिटी कॉस्ट (opportunity cost) को घटा देती है। इजरायल की तरफ से गाजा में हमास के ठिकानों पर किए गए ताजा मिलिटरी स्ट्राइक के बाद मिडिल ईस्ट में जियो पॉलिटिकल टेंशन एक बार फिर बढ़ गया है जिस वजह से भी बतौर सुरक्षित विकल्प सोने की मांग में तेजी देखी जा रही है। इसके अलावा इन्वेस्टमेंट डिमांड और सेंट्रल बैंकों की खरीदारी भी कीमतों के लिए सपोर्टिव हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी के दौरान लगातार तीसरे महीने इन्वेस्टमेंट डिमांड में तेजी देखने को मिली। ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश फरवरी के दौरान 9.4 बिलियन डॉलर बढ़ा। मार्च 2022 के बाद इन्वेस्टमेंट डिमांड में यह सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी है। वॉल्यूम /होल्डिंग के लिहाज से इस दौरान निवेश में 99.9 टन की वृद्धि हुई। सोने की कीमतों में तेजी और लगातार तीसरे महीने आए इनफ्लो के दम पर फरवरी 2025 के अंत तक गोल्ड ईटीएफ का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM बढ़कर रिकॉर्ड 306 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया। टोटल होल्डिंग भी पिछले महीने के अंत तक 3,353 टन पर दर्ज किया गया जो जुलाई 2023 के बाद सबसे ज्यादा है। जनवरी की तुलना में एसेट अंडर मैनेजमेंट और टोटल होल्डिंग दोनों में कमश: 4.1 फीसदी और 3.1 फीसदी की वृद्धि हुई। उधर चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) के मुताबिक उसकी तरफ से फरवरी  में 5 टन सोने की खरीद की गई। छह महीने के ब्रेक के बाद पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने लगातार चौथे महीने गोल्ड खरीदा है। फरवरी  के अंत तक चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़कर 2,290 टन पर पहुंच गया जो उसके कुल फॉरेक्स रिजर्व का 5.9 फीसदी है। यदि ट्रंप की नीतियों की वजह से चीन और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर टकराहट और बढ़ती है तो शायद चीन का केंद्रीय बैंक सोने की खरीद में और तेजी लाए। इस बात की गुंजाइश इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि चीन के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड की हिस्सेदारी अभी भी 6 फीसदी के नीचे है। जबकि भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 11 फीसदी के ऊपर पहुंच गई है। जानकार मानते हैं के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य (geo-political scenario) के मद्देनजर चीन गोल्ड की हिस्सेदारी को कम से कम 10 फीसदी तक बढ़ाना चाहेगा। फिलहाल बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की आज से शुरू हो रही दो दिवसीय मीटिंग पर है। हालांकि रेट में कटौती की गुंजाइश नहीं है फिर भी पोस्ट मीटिंग कमेंट्री का सबको बेसब्री से इंतजार है। यूएस फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल 19 मार्च (भारतीय समयानुसार 20 मार्च रात 12.30 बजे) को मीटिंग के बाद ब्याज दरों को लेकर ऐलान करेंगे। घरेलू फ्यूचर्स मार्केट घरेलू फ्यूचर्स मार्केट एमसीएक्स (MCX) पर सोने का बेंचमार्क अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट फिलहाल (1:30 PM IST) 408 रुपये यानी 0.46 फीसदी की मजबूती के साथ 88,431 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर है। इससे पहले यह आज … Read more

एचपी भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए एक दो-आयामी रणनीति अपना रहा, भारत में बढ़ेगा निवेश

नई दिल्ली एचपी (ह्यूलट-पैकार्ड) के सीईओ एनरिक लोरेस ने भारत में कंपनी की बढ़ती उपस्थिति और विस्तार की योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचपी भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए एक दो-आयामी रणनीति अपना रहा है। कंपनी न सिर्फ स्थानीय विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगी बल्कि सॉफ्टवेयर विकास में काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों को भी शामिल करेगी ताकि वह अपने उत्पादों में उन्नत सॉफ़्टवेयर सुविधाएं प्रदान कर सकें। भारत में HP की बढ़ती उपस्थिति एनरिक लोरेस ने कहा, “भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहां हमारे सबसे अधिक कर्मचारी हैं और इनमें से बड़ी संख्या में इंजीनियर हैं जो सॉफ़्टवेयर विकास में काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इन इंजीनियरों के योगदान से हमारे बाकी उत्पादों में नई तकनीकी सुविधाओं का समावेश होगा।” पीसी बाजार में एचपी की स्थिति भारत पहले ही एचपी के लिए एक महत्वपूर्ण पीसी बाजार बन चुका है। इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (आईडीसी) के अनुसार भारत में एचपी सबसे बड़ी पीसी निर्माता कंपनी है। लोरेस ने बताया कि एचपी की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी विभिन्न श्रेणियों में सबसे अधिक है और कंपनी भारत में आंतरिक विकास और शोध कर रही है जिसका लाभ कंपनी के अन्य वैश्विक उत्पादों में भी देखने को मिलेगा। भारत में विनिर्माण और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना एचपी ने पिछले साल के अंत में भारतीय अनुबंध निर्माता डिक्सन टेक्नोलॉजीज को “मेक इन इंडिया” योजना के तहत लैपटॉप और डेस्कटॉप बनाने का ऑर्डर दिया था। इसके माध्यम से एचपी अपने उत्पादों की कीमत को कम करने में सक्षम होगी जिससे उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। लोरेस ने बताया, “भारत में उत्पादों का निर्माण स्थानीय स्तर पर किया जाना चाहिए और इस दिशा में हम अप्रैल महीने से भारत में नोटबुक उत्पादन शुरू करने जा रहे हैं।” चीन पर निर्भरता कम करना एचपी और अन्य तकनीकी कंपनियां भारत में अपने ध्यान केंद्रित कर रही हैं ताकि चीन पर उनकी निर्भरता कम हो सके। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई कंपनियां चीन से अपनी उत्पादन सुविधाएं बाहर स्थानांतरित करने पर विचार कर रही हैं। एचपी को भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ का सामना करना पड़ा है जिससे कंपनी ने भारत में अधिक उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई है। भारत में PC की बढ़ती मांग और AI सुविधाएं स्मार्टफोन की तुलना में भारत में पीसी की पहुंच अभी भी कम है जिससे एचपी जैसी कंपनियों को इस बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल रहा है। इसके अलावा एचपी अब अपने पीसी में बिल्ट-इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सुविधाएं जोड़ने पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिससे यह कंपनियां और छोटे व्यवसायों के लिए आदर्श बन सकें। एचपी का मानना है कि भारत में एआई आधारित पीसी की मांग बढ़ेगी। स्थानीय AI मॉडल के साथ नई योजनाएं लोरेस ने यह भी साझा किया कि एचपी स्थानीय रूप से विकसित AI मॉडल को अपने उत्पादों में लागू करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कंपनी स्पेन और सऊदी अरब में स्थानीय विश्वविद्यालयों और सरकारों के साथ मिलकर स्पेनिश और अरबी भाषाओं के लिए AI मॉडल विकसित कर रही है और इसी तरह के मॉडल भारत में भी विकसित किए जा सकते हैं। अंत में कहा जा सकता है कि एचपी भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है। कंपनी का उद्देश्य न सिर्फ स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना है बल्कि भारतीय इंजीनियरों को अपनी सॉफ़्टवेयर टीम में शामिल कर अपने उत्पादों को और अधिक उन्नत बनाना है। साथ ही एचपी चीन पर अपनी निर्भरता कम करते हुए भारत में अपने उत्पादन को बढ़ा रही है जिससे उसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लाभ मिलेगा।  

भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी दिन धुआंधार तेजी, सेंसेक्स 899 अंक उछलकर 76,348 पर हुआ बंद

मुंबई भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी दिन धुआंधार तेजी देखने को मिली। आज सेंसेक्स 899 अंक उछलकर 76,348 के स्तर पर, जबकि निफ्टी 283 अंकों की बढ़त के साथ 23,190 के स्तर पर बंद हुआ। शेयर बाजार की तेजी के 3 प्रमुख कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व का नरम रुख फेडरल रिजर्व ने महंगाई और संभावित मंदी की आशंका के बावजूद इस साल ब्याज दरों में कटौती के संकेत दिए हैं। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि टैरिफ बढ़ने से महंगाई पर कुछ असर पड़ेगा, लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं रहेगा। इससे बाजार की घबराहट कम हुई और निवेशकों की धारणा मजबूत हुई। घरेलू डिमांड और चुनिंदा सेक्टरों की वापसी विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उपभोक्ता स्टॉक्स में मजबूत खरीदारी देखने को मिली है। कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस, इंडिगो और मुथूट फाइनेंस जैसे स्टॉक्स ने 52-वीक हाई छुआ है। इसके अलावा डिफेंस और शिपिंग सेक्टर में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए। डॉव जोन्स 383 अंक (0.92%) चढ़कर 41,964.63 पर बंद हुआ, S&P 500 में 1.08% की बढ़त रही, और Nasdaq 1.41% उछलकर 17,750.79 पर बंद हुआ। इससे भारतीय बाजार में भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा।   कल बाजार में रही थी तेजी इससे पहले कल यानी 19 मार्च को बाजार में तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 147 अंक ऊपर 75,449 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में 73 अंक की तेजी रही, ये 22,907 के स्तर पर बंद हुआ।

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