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बिजली उपभोक्‍ताओं से निरंतर संवाद बनाए रखें : सिंघल

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने उपभोक्‍ताओं की सुविधा को देखते हुए फ्यूज ऑफ कॉल (विद्युत अवरोध को दूर करना) समय पर अटेण्ड करने के निर्देश दिए हैं। प्रबंध संचालक ने कहा है कि कंपनी के समस्त मैदानी अधिकारी अथवा कार्मिक अपने मोबाईल फोन को 24 घंटे चालू रखें। उन्होंने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए बिजली कंपनी के सभी अधिकारी अपना मोबाईल 24 घंटे चालू रखें एवं उपभोक्‍ताओं के कॉल अटेण्‍ड करें। साथ ही क्षेत्रीय मुख्‍य महाप्रबंधक, महाप्रबंधक, संभागीय उपमहाप्रबंधक एवं सभी मैदानी अधिकारी कॉल सेन्‍टर 1912, व्‍हाट्सएप चैटबोट तथा स्‍थानीय वाट्सएप ग्रुप एवं अन्‍य माध्‍यम से सप्राप्‍त होने वाली विद्युत संबंधी शिकायतों का तत्‍काल समाधान करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। प्रबंध संचालक ने सभी मैदानी अधिकारियों से कहा है कि वे सीआरएम पोर्टल पर सतत् निगरानी रखें और जनप्रतिनिधि तथा उपभोक्‍ताओं से संवाद बनाये रखें। कंपनी ने कहा है कि ऑंधी, बारिश के दौरान एवं अन्य व्यवधान के कारण हुए बिजली फॉल्ट की शिकायतें दर्ज कराने के लिए कंपनी ने उपभोक्ताओं को अनेक विकल्प प्रदान किये हैं। अब उपभोक्ताओं के पास विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतों को दर्ज करने के लिए कॉल सेन्टर के टोल फ्री नंबर 1912, व्हाट्सएप नंबर 0755-2551222, मोबाइल ऐप ‘उपाय (UPAY) अथवा कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in का विकल्प मौजूद है। उपभोक्ता इन विकल्पों में से किसी भी एक विकल्प का उपयोग कर अपनी विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतें दर्ज कर आसानी से निराकरण करा सकते हैं। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए अपने मोबाइल में कंपनी के व्हाटसएप नंबर 07552551222 को सेव कर मैसेज “Hi” लिखकर भेजें एवं आगामी संदेशों का पालन करें। इसी प्रकार प्ले स्टोर के माध्यम से उपाय ऐप को डाउनलोड कर एवं उसके उपयोग से भी अपनी शिकायत आसानी से दर्ज करा सकते है। कंपनी के पोर्टल portal.mpcz.in पर जाकर एलटी सर्विसेज पर क्लिक करें उसके उपरांत कंपलेंट पर क्लिक करें तथा आगामी निर्देशों का पालन करें अथवा 1912  पर कॉल कर आईवीआरएस के माध्यम से त्वरित शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने कहा है कि बिजली कार्मिक विद्युत आपूर्ति और रखरखाव तथा ऑपरेशन्स को देखते हुए सतर्कता और सजगता से काम करें तथा कोई कार्मिक बिना परमीशन के अवकाश पर न जाए। यदि अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक कार्मिक की तैनाती की व्यवस्था पहले से ही करें। आंधी, तूफान और बारिश के दौरान कॉल सेन्टर में एफओसी (विद्युत अवरोध) से संबंधित उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए काल सेन्टर के ऑपरेशनल एवं सुपरवाइजरी स्टॉफ को और अधिक सजगता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि आपदा के समय संपर्क करने के लिये लाईनमेनों के मोबाईल नंबर आदि की जानकारी अपडेट रखें। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासन/पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से सपंर्क और समन्वय बनाए रखें।

ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा- जो अधिकारी जिम्मेदारी का निर्वहन नही कर पा रहे उन्हे रिप्लेस करें

भोपाल  बिजली कंपनियों के जिन अधिकारियों द्वारा अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है, उन्हें रिप्लेस करें। ऐसे अधिकारियों के स्थान पर उनके जूनियर सक्षम अधिकारियों को पदस्थ करें। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह निर्देश मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बिजली ट्रिपिंग और मेंटीनेंस कार्यों की समीक्षा के दौरान दिये। बैठक में एमडी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि बिजली उपभोक्ताओं का फोन नहीं उठाने पर 15 अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकी गयी है। टूर प्रोग्राम की जानकारी भेजें ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि क्षेत्र का सतत भ्रमण करें। उन्होंने कहा कि टूर प्रोग्राम की जानकारी एडवांस में भेजें। निरीक्षण के दौरान सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों, ट्रिपिंग और मेंटीनेंस की स्थिति प्रमुखता से देखें। जिन शिकायतों का निराकरण 3 से 4 घंटे में हुआ है, उनकी कारण सहित जानकारी दें। इस पर भी विचार करें कि क्या मेंटीनेंस का समय 4 घंटे से कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाओं पर तुरंत संज्ञान लें। समय-सीमा में करें शिकायतों का निराकरण मंत्री श्री तोमर ने जिलेवार लंबित शिकायतें एवं उनके निराकरण में लगने वाले समय की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि शिकायतों का निराकरण समय-सीमा में करें। अगर कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, तो निराकरण में न्यूनतम समय लगना चाहिये। अगर बड़ी घटना हुई है, तो उसका फोटो, वीडियो और की जा रही कार्यवाही को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर अपलोड करें। श्री तोमर ने खासतौर से इंदौर की स्थिति की समीक्षा के दौरान कम्पनी के एमडी को स्पष्ट निर्देश दिये कि जरूरत के अनुसार मेन-पॉवर और इक्यूपमेंट्स की कमी दूर करें। साथ ही यह भी देखें कि मेंटीनेंस के बाद भी ट्रिपिंग क्यों हो रही है। रहवासी संघों और जन-प्रतिनिधियों के साथ लगातार सम्पर्क में रहें। उन्होंने कहा कि मानसून तो अभी शुरू हो रहा है, इसके पहले ही बिजली ट्रिपिंग की इतनी घटनाएँ होना बहुत ही दुखद है। जहाँ जरूरी हो एफओसी की संख्या बढ़ायें। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि विद्युत अवरोध के सही कारणों से लोगों को अवगत करायें। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मण्डलोई ने कहा कि मेंटीनेंस के लिये तीनों कम्पनियों को 15-15 करोड़ रुपये दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि राशि का सदुपयोग करें और बेहतर ढंग से मेंटीनेंस सुनिश्चित करें, जिससे ट्रिपिंग कम से कम हो। विद्युत वितरण कम्पनियों के एमडी ने विद्युत ट्रिपिंग रोकने और शिकायतों के निराकरण के लिये की जा रही कार्यवाही से अवगत कराया। इस दौरान प्रबंध संचालक पॉवर मैनेजमेंट कंपनी श्री अविनाश लवानिया भी उपस्थित थे। अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सामाजिक विकास के लिए मिलकर करें काम

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मंगलवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग और चार प्रतिष्ठित गैर शासकीय संगठनों अंतरा फाउंडेशन, प्रदान, पीएचआईए फाउंडेशन और यूएनविमेन के मध्य समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान किया गया। इन एमओयू से प्रदेश के सुनियोजित, समावेशी, सकल और सतत् विकास को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश का सामाजिक परिदृश्य बदल रहा है। सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर सभी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सामाजिक विकास के सभी मानकों में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी और सबको विकास का लाभ देने के लिए सरकार गैर शासकीय संगठनों के अनुभवों का भी लाभ उठायेगी। उन्होंने कहा कि म.प्र. राज्य नीति आयोग प्रदेश में संचालित सभी जनहितैषी योजनाओं के लोकव्यापीकरण के जरिए मानवीय और सामाजिक विकास के सभी मानकों में सुधार और बढ़ोतरी के लिए ऐसे एनजीओ के साथ मिलकर काम करे, जिन्हें विषयगत विशेषज्ञता हासिल हो। उन्होंने कहा कि फील्ड में रह कर काम करने वाले एनजीओ से मिले सुझावों पर भी गंभीरता से अमल का प्रयास किया जाये। नीति आयोग, जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन आपसी समन्वय और सामंजस्य से जनता के हित में काम करें। उल्लेखनीय है कि म.प्र. राज्य नीति आयोग राज्य के सतत् विकास लक्ष्यों के अनुश्रवण और मध्यप्रदेश के दृष्टि पत्र-2047 की तैयारी में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इन साझेदारियों के माध्यम से राज्य में नीति नवाचार, डाटा आधारित सुशासन तथा बहु-क्षेत्रीय विकास को और अधिक सशक्तता एवं व्यापकता के साथ अमल में लाया जायेगा। नीति आयोग द्वारा जिन चार गैर शासकीय संगठनों के साथ एमओयू किया गया, उनमें अंतरा फाउंडेशन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और पोषण सुधार पर कार्य में सरकार की मदद करेगा। प्रदान संगठन ग्रामीण विकास एवं महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने में सहयोग करेगा। पीएचआईए फाउंडेशन जलवायु-लचीले विकास और समावेशी एवं सतत् विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में सरकार का नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागी बनेगा। इसी प्रकार यूएनविमेन प्रदेश में जेंडर उत्तरदायी शासन को आगे बढ़ाने में सरकार की मदद करेगा। मंगलवार को हुए समझौता ज्ञापन के तहत इन आपसी साझेदारियों से गरीबी उन्मूलन एवं आजीविका विकास, स्वास्थ्य और कल्याण, लैंगिक समानता, सभी को स्वच्छ जल, असमानता कम करने, जल सुरक्षा सहित वॉटरशेड संरचनाओं पर काम और जलवायु विकास आधारित कार्रवाई जैसे वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी आएगी। ये समझौते समृद्ध मध्यप्रदेश के संकल्प और विजन 2047 के क्रियान्वयन की दिशा में एक ठोस कदम हैं, जो शासन, नीति और नागरिक सेवाओं के सहज और सरल वितरण में नवाचार एवं सहभागिता को बढ़ावा देंगे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, अपर मुख्य सचिव योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी श्री संजय कुमार शुक्ला, म.प्र. राज्य नीति आयोग के सीईओ श्री ऋषि गर्ग सहित गैर शासकीय संगठन अंतरा फाउंडेशन से सुश्री चंद्रिका, प्रदान से सुश्री अर्चना सिंह, पीएचआईए फाउंडेशन से श्री अनिरुद्ध और यूएनविमेन से सुश्री जॉयट्री सहित अधिकारी मौजूद रहे।  

खरगोन जिले में नाव की मदद से बिजली कार्य का मेंटीनेस, ऊर्जा मंत्री तोमर ने कर्मचारियों के कार्य की प्रशंसा की

भोपाल मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खरगोन जिले में 33 केवी लाइन के मेंटीनेस के लिए मंगलवार को नाव की मदद लेना पड़ी। खरगोन जिले में 132 केवी तोरणी अति उच्चदाब ग्रिड से 33 केवी फीडर के माध्यम से अजन गांव, दौड़वा में बिजली वितरण होता है। तोरणी धनगांव 33 केवी फीडर पर इंसुलेटर से कंडक्टर झुलने की अवस्था में आने से बिजली कंपनी कर्मचारियों ने विधिवत परमिट लेकर इसे सुधारने के लिए मंगलवार को योजना बनाई। अंजनगांव वितरण केंद्र प्रभारी इंजीनियर श्री अंकित पटेल की अगुवाई में छः कर्मचारियों ने मेंटीनेस गतिविधियां प्रारंभ की, नावली तालाब के किनारे जहां पोल थे, वहां बारिश का पानी जमा होने पर नाव की मदद से कंडक्टर तार ठीक किए गए, उन्हें पोल पर ठीक से कसा गया एवं 33 केवी लाइन के मेंटीनेस के अन्य जरूरी कार्य किए गए। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने खरगोन जिले के बिजली कर्मचारियों के इस कार्य की प्रशंसा की हैं। 

बिजली कंपनी ने कंरट से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने किया आगाह

भोपाल  मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आम जनता तथा हाथ ठेले पर सामान बेचने वालों को आगाह किया है कि वे अपने हाथ ठेले तथा फुटकर सामान की दुकानें हाईटेंशन लाइनों से दूर लगाएं। कंपनी ने कहा है कि जरा सी असावधानी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए आमजन भी करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम में सहयोग करें एवं बिजली लाइनों तथा ट्रांसफार्मर से उचित दूरी बना कर ही अपना सामान बेचने के लिए रखें। कईं जग‍ह चाय की गुमठियां भी विद्युत लाइनों के समीप तथा ट्रांसफार्मरों से सटाकर चलाई जा रही है, जिनके कारण करंट लगने से कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। कंपनी ने उपभोक्‍ताओं से अपील में कहा है कि विद्युत लाइनों/ट्रांसफार्मरों एवं उपकरणों के साथ छेड़छाड़ न करें तथा सुरक्षित दूरी बनायें रखें। यदि आँधी तूफान में खंबे/तार टूटे हों तो इसकी सूचना तत्काल शिकायत कॉल सेंटर के टोल फ्री नं. 1912 पर/उपाय ऐप एवं समीप के वितरण केन्द्र कार्यालय में दें। जमीन पर पड़े तारों को छूने या स्पर्श करने की गलती न करें साथ ही पार करने का प्रयास न करें। पान टपरों तथा ऐसी दुकानों जिनमें लोहे की चादर का इस्तेमाल होता है, में वायरिंग को सुरक्षित ढंग से पी.वी.सी. पाईप के द्वारा ही कराई जाए। किसी प्रकार की कटी-फटी लूज वायरिंग से जान-माल का खतरा हो सकता है। बारिश के दौरान विद्युत खम्बे/स्टे के पास पानी भराव वाले स्थान से निकलने की जल्दी न करें। सावधानी अवश्‍य बरतें क्योंकि बारिश के दौरान करंट लीकेज की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि बच्चों और मवेशियों का विशेष ध्यान रखें। अपने मवेशी को बिजली के खम्बे, स्टे वायर इत्यादि से न बांधें। कपड़े सुखाने के लिये जी.आई. तार अथवा रस्सी, सर्विस लाईन के पाईप या बिजली के खम्बों से कभी न बांधें। इसमें करंट आने की संभावना बनी रहती है। घर की दीवार, उपकरण, नल आदि में लीकेज करंट आने पर प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन से तत्काल ठीक कराएं।       मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू विद्युत उपकरणों, वायरिंग, स्विच इत्यादि को स्वयं सुधारने के बजाय किसी प्रशिक्षित एवं अनुभवी इलेक्ट्रीशियन की सेवाएं लें। मानव जीवन अमूल्य है। बिजली के स्विच /सॉकिट/बिजली उपकरण बच्चों की पहुंच से दूर रखें। विद्युत पोल से ही कनेक्शन लें, बीच तारों में कटिया डालकर विद्युत का उपयोग न करें, यह दण्डनीय अपराध है। शादी, धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रमों में अतिरिक्त भार के लिये अस्थायी कनेक्शन लें तथा उचित क्षमता की उच्च गुणवत्ता की केबिल का ही उपयोग करें। कटे फटे तारों का उपयोग कतई ना करें। स्वीकृत भार से अधिक लोड का उपयोग न करें। उचित क्षमता के एम.सी.सी.बी/कट-आउट लगाने के साथ ही अच्छी गुणवत्ता की वायरिंग का ही उपयोग करें। वर्ष में 1 बार अपने परिसर की वायरिंग, फिटिंग, अर्थिंग अनुभवी एवं दक्ष इलेक्ट्रीशियन से अवश्य चैक कराएं। विद्युत लाईन के नीचे एवं ट्रांसफार्मरों के नजदीक भवन निर्माण/दुकान/बैनर/ईट भट्टा न लगाएँ। विद्युत लाईन के नीचे कोई स्थाई-अस्थाई निर्माण न करें। फसल इत्यादि का संग्रहण न करें। विद्युत लाइनों से सुरक्षित दूरी पर ही निर्माण करें। किसान भाई खेतों में कटाई एवं गहाई की जा रही फसलों को बिजली के तारों के नीचे, बिजली के खम्बों एवं स्थापित ट्रांसफार्मरों/स्टे तारों के पास एकत्रित न करें। खेतों में विद्युत उपयोग के लिये कटी-फटी डोरी का उपयोग न करें।  

योग विषय पर होगा शक्ति योग समागम कार्यक्रम 18 जून को

भोपाल 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भोपाल के तुलसी नगर स्थित आरोग्य भारती के केंद्रीय कार्यालय में 18 जून 2025 को शक्ति योग समागम कार्यक्रम आयोजित होगा। यह कार्यक्रम, शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय भोपाल, केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद नई दिल्ली प्रभा आरोग्य भारती केंद्रीय कार्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में होगा। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. जूही गुप्ता एवं डॉ. अनुपम मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम की श्रृंखला के अंतर्गत महिलाओं के लिए स्वास्थ्य एवं आनंद के लिए योग विषय पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम सायं 5 बजे से 6:30 तक आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में महिलाओं के जीवन में स्वास्थ्य एवं आनंद को संचारित कर उनके जीवन सुखमय बनाने का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा। कार्यक्रम में शहर की प्रतिष्ठित चिकित्सा अधिष्ठाता, वकील, पुलिसकर्मी एवं विभिन्न क्षेत्रों में अपना सहयोग देने वाली महिलाएं उपस्थित रहेंगी। डॉ. जूही ने बताया कि कार्यक्रम में डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय सलाहकार केंद्रीय आयुष मंत्रालय शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम, आगामी वर्षों में होने वाले अनेक कार्यक्रमों की आधारशिला के रूप में स्थापित होगा। स्त्री जीवन के विभिन्न पड़ाव में सहजता के साथ प्रसन्न एवं स्वस्थ रहकर स्वयं की और समाज की चिंता करने के लिए मातृशक्ति को इस कार्यक्रम के एवं आगामी कार्यक्रमों के माध्यम से तैयार किया जाएगा। इससे मातृशक्ति का एक ऐसा समूह तैयार होगा, जो पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य से सुरक्षा एवं सामाजिक दायित्वों के निर्वहन का नवीन अध्याय लिखेगा। कार्यक्रम की अधिक जानकारी के लिए दूरभाष क्रमांक 9202663862 पर सम्पर्क किया जा सकता है।  

वैश्विक दक्षता की दिशा में अभिनव पहल: सुभाष इनीशिएटिव के अंतर्गत जर्मन भाषा कोर्स की हुई शुरुआत

भोपाल  संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क (एसएसआरजीएसपी) में सुभाष इनीशिएटिव के तहत जर्मन भाषा प्रशिक्षण प्रारंभ कर अभिनव पहल की गई है। यह पहल मेटएक्स स्ट्रक्चर्स, जर्मनी के सहयोग से प्रारंभ हुई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक कार्य संस्कृति से परिचित कराना और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय रोजगार के अवसरों के लिए सक्षम बनाना है। मेटएक्स स्ट्रक्चर्स के प्रबंध निदेशक श्री ओंकार काकवडे ने जर्मन भाषा की उपयोगिता, औद्योगिक मांग और प्रशिक्षण के संभावित वैश्विक लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि नई संस्कृतियों और अवसरों का द्वार भी है। इस अवसर पर एसएसआरजीएसपी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गिरीश शर्मा ने छात्रों से संवाद करते हुए जर्मन भाषा की कुछ मूलभूत अवधारणाएं साझा की। उन्होंने बताया कि एसएसआरजीएसपी का प्रयास केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को वैश्विक नागरिक के रूप में तैयार करने की दिशा में भी समान रूप से प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नीशियन, मेक्ट्रॉनिक्स टेक्नीशियन, कंक्रीटर, मेटल वर्कर, सड़क निर्माण श्रमिक और राजमिस्त्री जैसे कोर्स से जुड़े विद्यार्थियों ने भाग लिया। भाषा प्रशिक्षण के इस समावेशन ने तकनीकी कौशल के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संवाद और समावेशन की समझ को भी बल दिया है। यह आयोजन एसएसआरजीएसपी की उस व्यापक सोच का उदाहरण है, जो युवाओं को बहुआयामी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सुभाष इनीशिएटिव के तहत जर्मन भाषा की यह शुरुआत भारत और जर्मनी के कौशल सहयोग की दिशा में एक सार्थक कदम है।  

उज्जैन में रामायणकालीन लक्ष्मण बावड़ी को मिला नवजीवन, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की पुनरूद्धार कार्य की सराहना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पुरानी जल-संरचनाओं को फिर से उसी स्वरूप में लाने के लिए चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान ने उज्जैन की रामायणकालीन लक्ष्मण बावड़ी को नवजीवन के साथ पुरानी वैभव भी लौटाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस शानदार कार्य की सराहना की है। उल्लेखनीय है कि विगत दिनों मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपने उज्जैन प्रवास के दौरान चिंतामण स्थित लक्ष्मी बावड़ी पहुंचे थे और बावड़ी उत्सव में शामिल होकर जीर्णोद्धार कार्य की शुरूआत पूजन करके की थी। उज्जैन में चिंतामण मंदिर स्थित लक्ष्मण बावड़ी का भी साफ-सफाई, रंगरोगन और पुनरुद्धार कार्य किया गया। प्राचीन लक्ष्मण बावड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पौराणिक स्थल है। इस बावड़ी का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। जन आस्था के अनुसार इसके जल को पवित्र और चमत्कारी माना जाता रहा है। यह बावड़ी रामायण काल से आज तक उज्जैन की धरती पर स्थित है और स्थानीय जनआस्था का केन्द्र बनी रही है। लेकिन समय के साथ रखरखाव की कमी के चलते यह अपना मूल स्वरूप खो चुकी थी।   जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत लक्ष्मण बावड़ी में किए गए कार्य के बाद बावड़ी को पुनर्जीवन मिला। भागीरथी प्रयासों से आज यह प्राचीन बावड़ी फिर से अपने पौराणिक स्वरूप में लौट आई है और आस्था के केन्द्र के रूप में पुनः स्थापित हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं “बावड़ी उत्सव” के दौरान इसी स्थान पर पहुंचे, उन्होंने बावड़ी का निरीक्षण, पूजन किया और जल संरक्षण का संदेश भी दिया। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत लाखों जल संरचनाओं को जीर्णोद्धार कर पुनर्जीवन प्रदान किया गया है। यह अभियान 30 जून तक संचालित होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जल गंगा संवर्द्धन अभियान के अंतर्गत अनेक स्थानों पर प्राचीन बावड़ी मिली है। जिला प्रशासन ने इनके संरक्षण के लिये जनभागीदारी से साफ-सफाई कार्य को प्राथमिकता से किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेशभर में 30 मार्च गुड़ी पड़वा नववर्ष प्रतिपदा पर जल गंगा संवर्द्धन अभियान की शुरूआत की गई थी। 

साकार हो रहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प, जरवाही में अब जल है, संघर्ष नहीं: जल जीवन मिशन से हुआ स्थायी समाधान

भोपाल  मध्यप्रदेश के जनजातीय अंचलों में अब विकास की धारा स्थायी रूप ले रही है। एक समय जहां पीने के पानी के लिए लंबा इंतज़ार और कई किलोमीटर की दूरी तय करना ग्रामीण जीवन की सच्चाई थी, वहां अब शहडोल जिले के जनजातीय बहुल ग्राम जरवाही हर घर नल से जल की सुविधा से समृद्ध हो चुका है। यह परिवर्तन सिर्फ भौतिक सुविधा नहीं, बल्कि जनजातीय समुदाय के सम्मान, सशक्तिकरण और समग्र विकास से जुड़ा अहम पहलू है। ‘जल जीवन मिशन’ और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत ग्राम जरवाही के 162 घरों तक नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इस मिशन के अंतर्गत न केवल पेयजल की सुविधा बढ़ाई गई, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे पहलुओं को भी मजबूत किया गया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जनजातीय अंचलों को प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय समाज के जीवनस्तर को ऊंचा उठाने के लिए अनेक योजनाओं पर कार्य कर रही है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों के लिए पृथक दृष्टिकोण अपनाते हुए ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ जैसे कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का भाव विकसित करना है। ग्राम जरवाही इस दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, यहाँ की महिलाओं और बच्चों को अब पानी के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ता। नल से मिलने वाला स्वच्छ जल अब उनके जीवन में सुविधा ही नहीं, बल्कि संभावनाओं का द्वार खोल रहा है। जल पहुंचा तो बढ़ा आत्मविश्वास गांव की महिलाओं का कहना है कि पहले दिनभर का समय पानी लाने में बीत जाता था। अब घर पर ही नल से जल उपलब्ध होने के कारण बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों में संतुलन बनाना आसान हुआ है। स्वच्छ जल से स्वास्थ्य में भी सुधार आया है, और बीमारियों की रोकथाम हुई है। यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और गरिमामय जीवन की ओर बढ़ा कदम है। जनजातीय गरिमा को मिला आधार जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए सरकार योजनाएं बनाकर प्रभावी रूप से विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य कर रही है। जल जीवन मिशन और उत्कर्ष अभियान जैसे प्रयास, इन क्षेत्रों में न्यायपूर्ण विकास और सामाजिक समरसता के नए मानक स्थापित कर रहे हैं।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा- धरती आबा अभियान को सफल बनाना हम सभी का दायित्व है

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर शुरू किया गया जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उद्देश्य जनजातीय समुदाय के नागरिकों का कल्याण, सशक्तिकरण और विकास करना है। सरकार का यह प्रयास है कि जनजातीय समुदाय के जो नागरिक अभी तक सरकार की सेवाओं, सुविधाओं और योजनाओं से वंचित रह गए हैं, उन्हें लाभान्वित किया जाएं। उनकी देश के विकास में सहभागिता को सशक्त नागरिक के रूप में सुनिश्चित किया जाए। राज्यपाल श्री पटेल धरती आबा अभियान के तहत सीहोर जिले के ग्राम झोलियापुर में आयोजित राज्य स्तरीय शिविर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार के 18 मंत्रालय समन्वित रूप से अभियान का संचालन कर रहे हैं। सभी जरूरतमंद नागरिकों के लिए पीएम आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, पीएम उज्ज्वला योजना, एनआरएलएम सहित अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का यह अभियान तभी सार्थक होगा, जब हम सभी मिलकर इस अभियान को सफल बनाने का प्रयास करेंगे। हम सभी का यह दायित्व है कि हम उन सभी जनजातीय समुदाय के नागरिकों को अभियान के तहत लगने वाले शिविरों में जाकर योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें और उनकी सहायता करें। उन्होंने कहा कि धरती आबा अभियान के तहत जनजातीय समुदाय के नागरिकों को दिए गए लाभ की मॉनिटरिंग भी की जा रही है और जल्द ही वे इसका अवलोकन करने पुन: सीहोर आएंगे। राज्यपाल श्री पटेल ने राज्य स्तरीय शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। धरती आबा अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए प्रचार रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर विधायक श्री रमाकांत भार्गव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रारंभ में कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने धरती आबा अभियान के तहत जिले में संचालित गतिविधियों एवं क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी दी। जिला पंचायत सीईओ डॉ नेहा जैन ने आभार व्यक्त किया।            

459 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्थापना, संचालन एवं भवन निर्माण के लिए 143 करोड़ 46 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 का किया अनुमोदन 2 लाख नवीन पद होंगे निर्मित म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 5163 करोड़ रुपये का अनुमोदन 459 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्थापना, संचालन एवं भवन निर्माण के लिए 143 करोड़ 46 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद का निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 का अनुमोदन किया गया है। अनुमोदन अनुसार आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर उनके हितों को संरक्षित किया गया है। अनुसूचित जनजाति के लिये 20% एवं अनुसूचित जाति के लिये 16% आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोकसेवकों को भी मेरिट के आधार पर पदोन्नति प्राप्त करने का अवसर दिया गया है। वर्तमान वर्ष में ही आगामी वर्ष की रिक्तियों के लिए पदोन्नति समिति की बैठक कर चयन सूची बनाये जाने का प्रावधान किया गया है, अर्थात अग्रिम डी.पी.सी. के प्रावधान किये गये है। पदोन्नति के सूत्र में वरिष्ठता का पर्याप्त ध्यान रखा गया है। वरिष्ठ लोक सेवकों में से मेरिट के अनुसार न्यूनतम अंक लाने वाले लोक सेवक पदोन्नति के लिए पात्र होंगे, प्रथम श्रेणी के लोक सेवकों के लिए merit cum seniority का प्रावधान किया गया है। पदोन्नति के सूत्र में कार्यदक्षता को प्रोत्साहित किया जाना लक्षित है, पदोन्नति के लिए अपात्रता का स्पष्ट निर्धारण किया गया है। किन परिस्थितियों में कोई लोक सेवक अपात्र होगा एवं दण्ड का क्या प्रभाव होगा यह स्पष्ट रूप से लेख किया गया है। किसी भी विभागीय पदोन्नति समिति बैठक के सन्दर्भ में निर्णय के पुनर्विलोकन के लिए रिव्यू डी.पी.सी. की बैठक आयोजित किये जाने के लिये स्पष्ट प्रावधान किये गये है। नवीन पदोन्नति नियमो में परिभ्रमण की व्यवस्था समाप्त की गई है। इससे पदोन्नति के लिए अधिक पद हो सकेंगे। पदोन्नति समिति को शासकीय सेवक की उपयुक्तता निर्धारण करने का अधिकार दिया गया है चतुर्थ श्रेणी के लिये अंक व्यवस्था नहीं होगी, केवल पदोन्नति के लिए उपयुक्त होने पर ही पदोन्नति प्राप्त हो सकेगी। अर्हकारी सेवा के लिए किसी वर्ष में की गई आंशिक सेवा को भी पूर्ण वर्ष की सेवा माना जायेगा, यदि वर्ष के एक भाग की सेवा भी की गई है तो उसे पूर्ण वर्ष की सेवा माना जाएगा। यदि किसी वर्ष में 6 माह का ही गोपनीय प्रतिवेदन उपलब्ध है तो उसे पूर्ण वर्ष के लिये मान्य किया जा सकेगा। यदि गोपनीय प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी की पदोन्नति रुकती है तो उसे पदोन्नति प्राप्त होने पर पूरी वरिष्ठता दी जायेगी। अप्रत्याशित रिक्तियों को चयन सूची/प्रतीक्षा सूची से भरे जाने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए शासकीय सेवक (जो आगामी वर्ष अर्थात पदोन्नति वर्ष में उपलब्ध नहीं होंगे) के पद के विरुद्ध पदोन्नति का प्रावधान किया गया है। गोपनीय प्रतिवेदनों में से यदि कोई गोपनीय प्रतिवेदन एन.आर.सी (नो रिपोर्ट सर्टिफिकेट), सक्षम स्तर से स्वीकृत अवकाश, पदग्रहण काल अथवा प्रशिक्षण के कारण है अथवा गोपनीय प्रतिवेदन में निर्धारित समय पर स्वमूल्यांकन के साक्ष्य है तो ऐसी स्थिति में गोपनीय प्रतिवेदन की अनुपलब्धता के आधार पर पदोन्नति नहीं रोकी जायेगी। विभागीय पदोन्नति समिति के बैठक से पूर्व केवल कारण बताओ सूचना पत्र के आधार पर बंद लिफाफा की कार्यवाही नहीं की जायेगी, जिससे अधिक लोक सेवकों को पदोन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। कुल मिलाकर पदोन्नति के पद जिस दिन उपलब्ध हो उसी दिन उपयुक्त योग्य एवं आरक्षित वर्गों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर भरे जा सके। इस तरह से लगभग 2 लाख नए पद निर्मित होंगे। इससे प्रशासन में सुधार एवं कार्यक्षमता बढ़ेगी। 459 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्थापना, संचालन तथा भवन निर्माण के लिए 143 करोड़ 46 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा ‘सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0″ योजना अंतर्गत विशेष जनजाति क्षेत्रों में PM-JANMAN कार्यक्रम के लिए 459 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्थापना, संचालन तथा भवन निर्माण की स्वीकृति दी गयी।स्वीकृति अनुसार 459 आंगनवाडी केन्द्रों के संचालन के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 459 पद (मानसेवी), आंगनवाड़ी सहायिका के 459 पद (मानसेवी) तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों के पर्यवेक्षण के लिए पर्यवेक्षक के 26 पद (नियमित शासकीय सेवक पद वेतनमान 25,300-80,500) के सृजन की स्वीकृति दी गयी है। वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक योजना पर राशि का व्यय भारत सरकार ‌द्वारा प्राप्त स्वीकृति के अनुसार किया जायेगा। योजना पर 143 करोड़ 46 लाख रूपये का व्यय अनुमानित है। इसमें केन्द्रांश राशि 72 करोड़ 78 लाख रूपये और राज्यांश राशि 70 करोड़ 68 लाख रूपये होगा । म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 5 हजार 163 करोड़ रुपये का अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश की विद्युत पारेषण कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 के लिए प्रचलित/निर्माणाधीन पूंजीगत योजनाओं और अनुमानित लागत राशि 5 हजार 163 करोड़ रूपये का अनुमोदन दिया गया। निर्णय अनुसार म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के लिए योजना लागत राशि 5 हजार 163 करोड़ रुपये का अनुमोदन प्रदान किया गया। योजना के लिए 20 प्रतिशत अंशपूंजी राज्य शासन के द्वारा तथा शेष 80 प्रतिशत ऋण वित्तीय संस्थाओं/बैंकों से प्राप्त किया जाएगा। योजनान्तर्गत आगामी वर्षों में अति उच्चदाब पारेषण परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए यथा केंद्रीय पारेषण इकाई से स्वीकृत पारेषण प्रणाली सुदृढीकरण के लिए आवश्यक निर्माण और उन्नयन कार्य के लिए 1 हजार 154 करोड़ रूपये, सिंहस्थ-2028 के लिए आवश्यक कार्य के लिए 185 करोड़ रूपये, प्रदेश में नवीन अति उच्चदाब उपकेन्द्रों का निर्माण के लिए 1 हजार 15 करोड़ रूपये, मुरैना संभागीय मुख्यालय और ग्वालियर शहर के उत्तरी भाग को अनवरत विद्युत् आपूर्ति के लिए नवीन अति उच्चदाब लाइनों के निर्माण के लिए 54 करोड़ रूपये, प्रदेश में विद्यमान अति उच्च्दाब ट्रांसफार्मरों की क्षमता संवर्धन/वृद्धि के लिए 1280 करोड़ रूपये, आरडीएसएस योजना के अंतर्गत वितरण कंपनियों के लिए 184 नग नवीन 33 केव्ही बे निर्माण के लिए 81 करोड़ रूपये, डीपी / एफपी लाइन (डबल पोल/फोर पोल) लाईन को डीसीडीएस /डीसीएसएस (डबल सर्किट डबल स्ट्रन्ग/डबल सर्किट सिंगल स्ट्रन्ग) टॉवर लाइन में रुपांतरण के लिए 662 करोड़, अति उच्चदाब टेप लाइनों के स्थान पर लाईनों का लूप-इन लूप-आउट (एलआईएलओ) किया जाना एवं एकल स्त्रोत से प्रदायित उपकेंद्रों के लिए नई लाइनों का निर्माण के लिए … Read more

प्रदेश के समावेशी और सतत् विकास को मिलेगा बल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मंगलवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग और चार प्रतिष्ठित गैर शासकीय संगठनों अंतरा फाउंडेशन, प्रदान, पीएचआईए फाउंडेशन और यूएनविमेन के मध्य समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान किया गया। इन एमओयू से प्रदेश के सुनियोजित, समावेशी, सकल और सतत् विकास को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश का सामाजिक परिदृश्य बदल रहा है। सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर सभी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सामाजिक विकास के सभी मानकों में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी और सबको विकास का लाभ देने के लिए सरकार गैर शासकीय संगठनों के अनुभवों का भी लाभ उठायेगी। उन्होंने कहा कि म.प्र. राज्य नीति आयोग प्रदेश में संचालित सभी जनहितैषी योजनाओं के लोकव्यापीकरण के जरिए मानवीय और सामाजिक विकास के सभी मानकों में सुधार और बढ़ोतरी के लिए ऐसे एनजीओ के साथ मिलकर काम करे, जिन्हें विषयगत विशेषज्ञता हासिल हो। उन्होंने कहा कि फील्ड में रह कर काम करने वाले एनजीओ से मिले सुझावों पर भी गंभीरता से अमल का प्रयास किया जाये। नीति आयोग, जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन आपसी समन्वय और सामंजस्य से जनता के हित में काम करें। उल्लेखनीय है कि म.प्र. राज्य नीति आयोग राज्य के सतत् विकास लक्ष्यों के अनुश्रवण और मध्यप्रदेश के दृष्टि पत्र-2047 की तैयारी में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इन साझेदारियों के माध्यम से राज्य में नीति नवाचार, डाटा आधारित सुशासन तथा बहु-क्षेत्रीय विकास को और अधिक सशक्तता एवं व्यापकता के साथ अमल में लाया जायेगा। नीति आयोग द्वारा जिन चार गैर शासकीय संगठनों के साथ एमओयू किया गया, उनमें अंतरा फाउंडेशन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और पोषण सुधार पर कार्य में सरकार की मदद करेगा। प्रदान संगठन ग्रामीण विकास एवं महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने में सहयोग करेगा। पीएचआईए फाउंडेशन जलवायु-लचीले विकास और समावेशी एवं सतत् विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में सरकार का नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागी बनेगा। इसी प्रकार यूएनविमेन प्रदेश में जेंडर उत्तरदायी शासन को आगे बढ़ाने में सरकार की मदद करेगा। मंगलवार को हुए समझौता ज्ञापन के तहत इन आपसी साझेदारियों से गरीबी उन्मूलन एवं आजीविका विकास, स्वास्थ्य और कल्याण, लैंगिक समानता, सभी को स्वच्छ जल, असमानता कम करने, जल सुरक्षा सहित वॉटरशेड संरचनाओं पर काम और जलवायु विकास आधारित कार्रवाई जैसे वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी आएगी। ये समझौते समृद्ध मध्यप्रदेश के संकल्प और विजन 2047 के क्रियान्वयन की दिशा में एक ठोस कदम हैं, जो शासन, नीति और नागरिक सेवाओं के सहज और सरल वितरण में नवाचार एवं सहभागिता को बढ़ावा देंगे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, अपर मुख्य सचिव योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी संजय कुमार शुक्ला, म.प्र. राज्य नीति आयोग के सीईओ ऋषि गर्ग सहित गैर शासकीय संगठन अंतरा फाउंडेशन से सुचंद्रिका, प्रदान से सुअर्चना सिंह, पीएचआईए फाउंडेशन से अनिरुद्ध और यूएनविमेन से सुजॉयट्री सहित अधिकारी मौजूद रहे।  

भारत के हृदय प्रदेश में पर्यटन ने बनाए नए रिकॉर्ड

“अतुल्य मध्यप्रदेश” बना पर्यटकों की पहली पसंद वर्ष 2024 में पहुंचे 13 करोड़ 41 लाख सैलानी भारत के हृदय प्रदेश में पर्यटन ने बनाए नए रिकॉर्ड भोपाल पर्यटन की दृष्टि से मध्यप्रदेश एक समृद्ध और विविधतापूर्ण राज्य है। इसकी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरें, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीव संपदा का आकर्षण “अतुलनीय मध्यप्रदेश” के रूप में पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा है। प्रदेश ने वर्ष 2024 में पर्यटन के क्षेत्र में कीर्तिमान रचा है। मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड 13 करोड़ 41 लाख पर्यटकों का आगमन हुआ। यह उपलब्धि वर्ष 2023 की तुलना में 19.6 प्रतिशत, 2019 से लगभग 50.6 प्रतिशत और 2020 की तुलना में 526 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है।    प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से मध्यप्रदेश भारत का एक समृद्ध और विविधतापूर्ण राज्य है। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संपदा, ऐतिहासिक धरोहरें और वन्यजीव विविधता, पर्यटकों को एक सम्पूर्ण अनुभव प्रदान करती हैं। वर्ष 2024 में 13 करोड़ 41 लाख पर्यटकों का आगमन इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश देश ही नहीं, वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर भी मजबूती से उभर रहा है। यह उपलब्धि शासन की दूरदर्शी नीतियों, आधारभूत ढांचे के विकास और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी का प्रतिफल है।   विदेशी पर्यटकों का आगमन वर्ष 2024 में 1.67 लाख विदेशी पर्यटकों ने भी मध्यप्रदेश की सैर की। खजुराहो में 33 हजार 131, ग्वालियर में 10 हजार 823 और ओरछा में 13 हजार 960 विदेशी पर्यटक पहुंचे। शहरी पर्यटन में भी विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई, जिसमें इंदौर में 9,964 और भोपाल में 1,522 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। बांधवगढ़ में 29 हजार 192, कान्हा में 19 हजार 148, पन्ना में 12 हजार 762 और पेंच में 11 हजार 272 विदेशी पर्यटक आए, जो मध्यप्रदेश की वैश्विक अपील को दर्शाता है।  धार्मिक पर्यटन : देश की आस्था का नया केंद्र प्रदेश के धार्मिक स्थलों ने वर्ष 2024 में 10.7 करोड़ पर्यटकों को आकर्षित किया, जो वर्ष 2023 की तुलना में 21.9% अधिक है। प्रदेश के शीर्ष 10 पर्यटन स्थलों में से 6 धार्मिक स्थल शामिल हैं। उज्जैन 7.32 करोड़ पर्यटकों के साथ इस सूची में सबसे आगे रहा, जो वर्ष 2023 के 5.28 करोड़ की तुलना में 39% अधिक है। चित्रकूट में भी 1 करोड़ से अधिक पर्यटक आए, जो वर्ष 2023 के 90 लाख की तुलना में 33% अधिक है। मैहर में 1.33 करोड़, अमरकंटक में 40 लाख, सलकनपुर में 26 लाख और ओंकारेश्वर में 24 लाख पर्यटक पहुंचे। महाकाल लोक, ओंकारेश्वर महालोक, श्रीराम वनगमन पथ, देवी लोक, राजा राम लोक, हनुमान जैसी परियोजनाओं ने धार्मिक पर्यटन को आध्यात्मिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। विरासत पर्यटन : इतिहास की जीवंत गाथा मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत ने 2024 में 80 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया, जो 2023 के 64 लाख की तुलना में 25% की वृद्धि दर्शाता है। ग्वालियर में पर्यटकों की संख्या में 3 गुना वृद्धि देखी गई, जहां 9 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे, जो 2023 की तुलना में 3.69 लाख की उल्लेखनीय वृद्धि है। खजुराहो (4.89 लाख), भोजपुर (35.91 लाख) और महेश्वर (13.53 लाख) में भी पर्यटकों ने इन समृद्ध विरासतों का आनंद लिया। यूनेस्को ने हाल ही में भोजपुर को अपनी टेंटेटिव सूची में शामिल किया है और ग्वालियर को “क्रिएटिव सिटी ऑफ म्यूजिक” के रूप में मान्यता दी है। मध्यप्रदेश में अब 3 स्थायी और 15 टेंटेटिव सूची में कुल 18 यूनेस्को धरोहरें हैं। स्थायी सूची में खजुराहो के मंदिर समूह, भीमबेटका की गुफाएं और सांची स्तूप शामिल हैं। सम्राट अशोक के शिलालेख, चौसठ योगिनी मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर, बुंदेला शासकों के महल और किले, ग्वालियर किला, बुराहनपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, मंडला स्थित राम नगर के गोंड स्मारक, धमनार का ऐतिहासिक समूह, मांडू के स्मारकों का समूह, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, नर्मदा घाटी में भेड़ाघाट–लमेटाघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और चंदेरी टेंटेटिव लिस्ट में हैं।  वन्यजीव पर्यटन : प्रकृति और रोमांच का संगम ग्रीन, क्लीन और सेफ मध्यप्रदेश “टाइगर स्टेट”, “लेपर्ड स्टेट”, “घड़ियाल स्टेट”, “चीता स्टेट” और “वल्चर स्टेट” के रूप में जाना जाता है, जिसमें देश का सबसे अधिक वन क्षेत्र है। राज्य में 12 राष्ट्रीय उद्यान, 25 वन्यजीव अभयारण्य और 9 टाइगर रिजर्व हैं। कान्हा (2.48 लाख), पेंच (1.92 लाख), बांधवगढ़ (1.94 लाख), पन्ना (3.85 लाख) और मढ़ई (4.34 लाख) जैसे प्रमुख वन्यजीव स्थलों पर पर्यटकों का आगमन हुआ। कुनो पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में अफ्रीकी चीतों की पुनर्स्थापना परियोजना ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। प्राकृतिक पर्यटन : प्रकृति की गोद में अविस्मरणीय अनुभव मध्यप्रदेश का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों के लिए एक अनमोल खजाना है। पचमढ़ी, अमरकंटक, भेड़ाघाट, हनुवंतिया, गांधीसागर, तामिया, सैलानी आइलैंड और सरसी आइलैंड जैसे स्थल प्राकृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं। वर्ष 2024 में पचमढ़ी में 2.87 लाख पर्यटक और भेड़ाघाट में 2.34 लाख पर्यटक पहुंचे। यहां रिसॉर्ट्स, एडवेंचर, स्पोर्ट्स, ट्रेकिंग ट्रेल्स और कैंपिंग सुविधाओं ने पर्यटकों को नया अनुभव दिया। गांधीसागर डैम, सैलानी आइलैंड, तामिया की पातालकोट घाटी और सरसी आइलैंड में प्राकृतिक सौंदर्य ने पर्यटकों को प्रकृति के और करीब लाया।  ग्रामीण पर्यटन : संस्कृति और आतिथ्य का जीवंत अनुभव मध्यप्रदेश में ग्रामीण पर्यटन ने स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 63 पर्यटन ग्राम विकसित किए गए हैं। प्रदेश में 470 से अधिक होमस्टे का निर्माण किया गया है, जिनसे अब तक 24 हजार से अधिक अतिथि स्थानीय संस्कृति और खानपान का अनुभव ले चुके हैं। पचमढ़ी, कान्हा और अमरकंटक जैसे क्षेत्रों के आसपास के गांवों में होम स्टे सुविधाएं पर्यटकों के लिए अनूठा अनुभव बन गई है। चंदेरी में भारत के पहले हैंडलूम गांव प्राणपुर ने स्थानीय शिल्पकारों को वैश्विक पहचान दिलाई है। आदिवासी समुदायों की कला जैसे गोंड, भील पेंटिंग और मांडना आर्ट पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।  फिल्म पर्यटन : सिनेमाई जादू का नया गंतव्य मध्यप्रदेश फिल्म पर्यटन के क्षेत्र में भी एक अलग पहचान बना रहा है। चंदेरी और महेश्वर जैसे स्थल फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बन गए हैं। “स्त्री 2” की शूटिंग ने चंदेरी को पर्यटकों के … Read more

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार हर नवाचार और तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहन दे रही

भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार हर संभव नवाचार और तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहन दे रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के स्वस्थ भारत के विजन को मूर्त रूप देने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सभी स्तरों पर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल मंत्रालय में ट्रिवीट्रॉन हेल्थकेयर के प्रतिनिधि मंडल से शिशुओं की स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा कर रहे थे। प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश में नवजात शिशुओं में कंजेनिटल मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए न्यू बॉर्न स्क्रीनिंग लैब की स्थापना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस प्रयोगशाला की स्थापना से जन्म के कुछ दिनों के भीतर ही शिशुओं में गंभीर आनुवांशिक विकारों की पहचान की जा सकेगी, जिससे समय रहते उपचार संभव हो सकेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ऐसे नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनहितैषी तकनीकों को प्राथमिकता देती है। इस प्रस्ताव पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक परीक्षण उपरांत सकारात्मक विचार किया जाएगा। प्रतिनिधियों ने बताया कि स्क्रीनिंग लैब में चार प्रमुख आनुवांशिक विकारों कंजेनिटल हाइपोथायरोडिज्म, कंजेनिटल एड्रेनल हाइपरप्लेशिया, ग्लूकोज-6-फास्फेट डीहाइड्रोजनेज डेफिशियेंसी और गैलेक्टोजीमिया की पहचान की जाएगी। उन्होंने बताया कि ट्रिवीट्रॉन हेल्थकेयर द्वारा यह सेवा केरल में पहले से ही प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने विश्व के अन्य देशों में इस तकनीक के सफल प्रयोगों और परिणामों की जानकारी भी साझा की। कंपनी द्वारा संचालित मोबाइल टेस्टिंग वैन सेवाओं की जानकारी दी। इसमें मैमोग्राफी और सिकल सेल स्क्रीनिंग की सुविधाएँ हैं। यह सेवा वर्तमान में तमिलनाडु में कंपनी द्वारा प्रदान की जा रही हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद का निर्णय, 2 लाख नवीन पद होंगे निर्मित

मंत्रि-परिषद ने म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 का किया अनुमोदन 2 लाख नवीन पद होंगे निर्मित म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 5163 करोड़ रुपये का अनुमोदन 459 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्थापना, संचालन एवं भवन निर्माण के लिए 143 करोड़ 46 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद का निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 का अनुमोदन किया गया है। अनुमोदन अनुसार आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर उनके हितों को संरक्षित किया गया है। अनुसूचित जनजाति के लिये 20% एवं अनुसूचित जाति के लिये 16% आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोकसेवकों को भी मेरिट के आधार पर पदोन्नति प्राप्त करने का अवसर दिया गया है। वर्तमान वर्ष में ही आगामी वर्ष की रिक्तियों के लिए पदोन्नति समिति की बैठक कर चयन सूची बनाये जाने का प्रावधान किया गया है, अर्थात अग्रिम डी.पी.सी. के प्रावधान किये गये है। पदोन्नति के सूत्र में वरिष्ठता का पर्याप्त ध्यान रखा गया है। वरिष्ठ लोक सेवकों में से मेरिट के अनुसार न्यूनतम अंक लाने वाले लोक सेवक पदोन्नति के लिए पात्र होंगे, प्रथम श्रेणी के लोक सेवकों के लिए merit cum seniority का प्रावधान किया गया है। पदोन्नति के सूत्र में कार्यदक्षता को प्रोत्साहित किया जाना लक्षित है, पदोन्नति के लिए अपात्रता का स्पष्ट निर्धारण किया गया है। किन परिस्थितियों में कोई लोक सेवक अपात्र होगा एवं दण्ड का क्या प्रभाव होगा यह स्पष्ट रूप से लेख किया गया है। किसी भी विभागीय पदोन्नति समिति बैठक के सन्दर्भ में निर्णय के पुनर्विलोकन के लिए रिव्यू डी.पी.सी. की बैठक आयोजित किये जाने के लिये स्पष्ट प्रावधान किये गये है। नवीन पदोन्नति नियमो में परिभ्रमण की व्यवस्था समाप्त की गई है। इससे पदोन्नति के लिए अधिक पद हो सकेंगे। पदोन्नति समिति को शासकीय सेवक की उपयुक्तता निर्धारण करने का अधिकार दिया गया है चतुर्थ श्रेणी के लिये अंक व्यवस्था नहीं होगी, केवल पदोन्नति के लिए उपयुक्त होने पर ही पदोन्नति प्राप्त हो सकेगी। अर्हकारी सेवा के लिए किसी वर्ष में की गई आंशिक सेवा को भी पूर्ण वर्ष की सेवा माना जायेगा, यदि वर्ष के एक भाग की सेवा भी की गई है तो उसे पूर्ण वर्ष की सेवा माना जाएगा। यदि किसी वर्ष में 6 माह का ही गोपनीय प्रतिवेदन उपलब्ध है तो उसे पूर्ण वर्ष के लिये मान्य किया जा सकेगा। यदि गोपनीय प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी की पदोन्नति रुकती है तो उसे पदोन्नति प्राप्त होने पर पूरी वरिष्ठता दी जायेगी। अप्रत्याशित रिक्तियों को चयन सूची/प्रतीक्षा सूची से भरे जाने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए शासकीय सेवक (जो आगामी वर्ष अर्थात पदोन्नति वर्ष में उपलब्ध नहीं होंगे) के पद के विरुद्ध पदोन्नति का प्रावधान किया गया है। गोपनीय प्रतिवेदनों में से यदि कोई गोपनीय प्रतिवेदन एन.आर.सी (नो रिपोर्ट सर्टिफिकेट), सक्षम स्तर से स्वीकृत अवकाश, पदग्रहण काल अथवा प्रशिक्षण के कारण है अथवा गोपनीय प्रतिवेदन में निर्धारित समय पर स्वमूल्यांकन के साक्ष्य है तो ऐसी स्थिति में गोपनीय प्रतिवेदन की अनुपलब्धता के आधार पर पदोन्नति नहीं रोकी जायेगी। विभागीय पदोन्नति समिति के बैठक से पूर्व केवल कारण बताओ सूचना पत्र के आधार पर बंद लिफाफा की कार्यवाही नहीं की जायेगी, जिससे अधिक लोक सेवकों को पदोन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। कुल मिलाकर पदोन्नति के पद जिस दिन उपलब्ध हो उसी दिन उपयुक्त योग्य एवं आरक्षित वर्गों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर भरे जा सके। इस तरह से लगभग 2 लाख नए पद निर्मित होंगे। इससे प्रशासन में सुधार एवं कार्यक्षमता बढ़ेगी। 459 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्थापना, संचालन तथा भवन निर्माण के लिए 143 करोड़ 46 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा ‘सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0″ योजना अंतर्गत विशेष जनजाति क्षेत्रों में PM-JANMAN कार्यक्रम के लिए 459 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्थापना, संचालन तथा भवन निर्माण की स्वीकृति दी गयी।स्वीकृति अनुसार 459 आंगनवाडी केन्द्रों के संचालन के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 459 पद (मानसेवी), आंगनवाड़ी सहायिका के 459 पद (मानसेवी) तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों के पर्यवेक्षण के लिए पर्यवेक्षक के 26 पद (नियमित शासकीय सेवक पद वेतनमान 25,300-80,500) के सृजन की स्वीकृति दी गयी है। वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक योजना पर राशि का व्यय भारत सरकार ‌द्वारा प्राप्त स्वीकृति के अनुसार किया जायेगा। योजना पर 143 करोड़ 46 लाख रूपये का व्यय अनुमानित है। इसमें केन्द्रांश राशि 72 करोड़ 78 लाख रूपये और राज्यांश राशि 70 करोड़ 68 लाख रूपये होगा । म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 5 हजार 163 करोड़ रुपये का अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश की विद्युत पारेषण कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 के लिए प्रचलित/निर्माणाधीन पूंजीगत योजनाओं और अनुमानित लागत राशि 5 हजार 163 करोड़ रूपये का अनुमोदन दिया गया। निर्णय अनुसार म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के लिए योजना लागत राशि 5 हजार 163 करोड़ रुपये का अनुमोदन प्रदान किया गया। योजना के लिए 20 प्रतिशत अंशपूंजी राज्य शासन के द्वारा तथा शेष 80 प्रतिशत ऋण वित्तीय संस्थाओं/बैंकों से प्राप्त किया जाएगा। योजनान्तर्गत आगामी वर्षों में अति उच्चदाब पारेषण परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए यथा केंद्रीय पारेषण इकाई से स्वीकृत पारेषण प्रणाली सुदृढीकरण के लिए आवश्यक निर्माण और उन्नयन कार्य के लिए 1 हजार 154 करोड़ रूपये, सिंहस्थ-2028 के लिए आवश्यक कार्य के लिए 185 करोड़ रूपये, प्रदेश में नवीन अति उच्चदाब उपकेन्द्रों का निर्माण के लिए 1 हजार 15 करोड़ रूपये, मुरैना संभागीय मुख्यालय और ग्वालियर शहर के उत्तरी भाग को अनवरत विद्युत् आपूर्ति के लिए नवीन अति उच्चदाब लाइनों के निर्माण के लिए 54 करोड़ रूपये, प्रदेश में विद्यमान अति उच्च्दाब ट्रांसफार्मरों की क्षमता संवर्धन/वृद्धि के लिए 1280 करोड़ रूपये, आरडीएसएस योजना के अंतर्गत वितरण कंपनियों के लिए 184 नग नवीन 33 केव्ही बे निर्माण के लिए 81 करोड़ रूपये, डीपी / एफपी लाइन (डबल पोल/फोर पोल) लाईन को डीसीडीएस /डीसीएसएस (डबल सर्किट डबल स्ट्रन्ग/डबल सर्किट सिंगल स्ट्रन्ग) टॉवर लाइन में रुपांतरण के लिए 662 करोड़, अति उच्चदाब टेप लाइनों के स्थान पर लाईनों का लूप-इन लूप-आउट (एलआईएलओ) किया जाना एवं एकल स्त्रोत से प्रदायित उपकेंद्रों के लिए नई लाइनों का निर्माण के लिए … Read more

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