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पीएम मोदी के आर्थिक सशक्तिकरण के विजन को साकार करने देशभर में चलाया जा रहा अभियान: सीएम यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गरीब, महिला, किसान और युवाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के विजन को साकार करने के लिये देशभर में अभियान चलाया जा रहा है। राज्य सरकार इस अभियान को मिशन मोड में संचालित कर रही है। प्रदेश में कमजोर वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें मनरेगा योजना गरीबों किसानों और श्रमिकों की आर्थिक समृद्धि का आधार बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस योजना के माध्यम से न सिर्फ गरीब, श्रमिकों और किसानों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला रहा है, बल्कि सिंचाई की उपलब्धता भी बन रही है। योजना के अंतर्गत खेत-तालाब, अमृत-सरोवर, कुएं, चेक-डैम, भूमि समतलीकरण, मेड़बंदी, बागवानी, जल निकायों का निर्माण, जीर्णोद्धार और वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण सहित जल संचयन के अन्य निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। मनरेगा योजना से जल गंगा संवर्धन अभियान में अब तक प्रदेश के 32 लाख लोगों को रोजगार मिला है। वर्ष 2025-26 में मजदूरों को अब तक लगभग 1500 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया है। 22 लाख परिवारों को मिला लाभ ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में निवासरत लोगों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिले, इसके लिए केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा मनरेगा योजना चलाई जा रही है। मनरेगा योजना में लोगों को स्थानीय स्तर पर 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। प्रदेश में अप्रैल माह से अब तक 22 लाख परिवारों के 32 लाख लोगों को मनरेगा योजना का लाभ मिला है। वृहद स्तर पर किए जा रहे जल संरचना के कार्य प्रदेश में बारिश के पानी का बड़े स्तर पर संचयन किया जा सके, लोगों को रोजगार मिले, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश में बड़े स्तर पर जल संरचना के कार्य किए जा रहे है। 14 जून की स्थिति में प्रदेश में 80 हजार 496 खेत तालाब, एक लाख एक हजार 61 कूप रिचार्ज पिट और एक हजार 283 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिल रहा है। कारगर साबित हो रहा जल गंगा संवर्धन अभियान प्रदेश सरकार द्वारा तीन माह के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। वह भी ऐसे समय में जब खेती-किसानी का समय नहीं रहता है। किसानों, गरीबों और श्रमिकों को रोजगार की तलाश रहती है। ऐसे में जल गंगा संवर्धन अभियान कारगर साबित हुआ है। मनरेगा के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला। जिससे काम की तलाश में दूसरे राज्यों या जिलों में नहीं जाना पड़ा। साथ ही लोगों के पलायन में भी कमी आई। खेती-किसानी और घरेलू खर्चों में बनी मददगार मनरेगा योजना से मिलने वाली मजदूरी श्रमिकों-किसानों-गरीबों के लिए केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि खेती-किसानी, घरेलू ज़रूरतों और बच्चों की शिक्षा जैसी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मददगार बन रही है। योजना के माध्यम से खेत-तालाब, अमृत सरोवर, कूप रिचार्ज पिट, सड़कों का सुधार, वर्षा जल संचयन सहित अन्य विकास कार्य किए जा रहे हैं, जो ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मज़बूत बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वास्थ्य क्षेत्र में रायसेन ज़िले के 31 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर सुधार और विस्तार की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 16 जून को उदयपुरा रायसेन में प्रदेश के 375 स्वास्थ्य संस्थानों में 425 करोड़ रुपए लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इसमें 267 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 108 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। उक्त के अलावा मुख्यमंत्री डॉ. यादव उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र के 138 करोड़ रूपये से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण करेंगे। इनमें 89 करोड़ 36 लाख के विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं 49 करोड़ 6 लाख रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इनमें 1 करोड़ रुपए तक की लागत से उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक सुविधाएं एवं संजीवनी क्लीनिक के 318 कार्य (218 लोकार्पण एवं 100 भूमिपूजन) शामिल हैं। 1 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये की लागत में कुल 38 कार्य हैं, जिनमें 33 लोकार्पण एवं 5 भूमिपूजन सम्मिलित हैं। इनमें 90 उप स्वास्थ्य केंद्र, 10 बी.पी.एच.यू., 118 संजीवनी क्लीनिक, 1 सिविल अस्पताल का उन्नयन, 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 2 आई.पी.एच.एल. लेब, 1 सीएमएचओ कार्यालय, 1 पी.आई.सी.यू. तथा 1 डी.ई.आई.सी. के निर्माण कार्य सम्मिलित हैं। वहीं 5 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले कुल 19 कार्यों में 16 कार्यों का लोकार्पण एवं 3 कार्यों का भूमिपूजन होगा। इनमें में 3 जिला अस्पतालों का उन्नयन, 7 सिविल अस्पतालों का उन्नयन, 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 3 नए सिविल अस्पतालों का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वास्थ्य क्षेत्र में रायसेन ज़िले के 31 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे, जिसकी कुल लागत राशि लगभग 27.98 करोड़ रुपए है। इनमें 14 उप स्वास्थ्य केंद्र, 5 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 1 आई.पी.एच.एल. लैब एवं 1 डी.ई.आई.सी. का लोकार्पण और 10 उप स्वास्थ्य केंद्रों का भूमिपूजन शामिल है।  

आज लाडली बहना योजना की 25वीं किस्त के रूप में 1,551.44 करोड़ रुपए हस्तांतरित करेंगे

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार (16 जून) को जबलपुर में एक कार्यक्रम के दौरान 1.27 करोड़ लाभार्थियों के खातों में लाडली बहना योजना की 25वीं किस्त के रूप में 1,551.44 करोड़ रुपए हस्तांतरित करेंगे। इस योजना के तहत, प्रत्येक पात्र महिला को सीधे उनके बैंक खातों में प्रति माह 1,250 रुपये मिलते हैं। इस लोकप्रिय योजना को 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान पेश किया गया था। हाल ही में, शिवराज चौहान की उपस्थिति में सीहोर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मोहन यादव ने घोषणा की थी कि मध्य प्रदेश सरकार ‘लाडली बहना योजना’ की मासिक किस्त को 3,000 रुपए तक बढ़ाने पर विचार कर रही है। ऊपर बताई गई योजनाओं के लिए फंड ट्रांसफर करने के अलावा, मुख्यमंत्री जबलपुर कार्यक्रम के दौरान 6,821 वंचित परिवारों को अनुग्रह सहायता के रूप में 150 करोड़ रुपए भी ट्रांसफर करेंगे। इसके अलावा, वह एलपीजी सिलेंडर रिफिलिंग के लिए 27 लाख से अधिक लाभार्थियों को 39.14 करोड़ रुपये भी ट्रांसफर करेंगे। मध्य प्रदेश में मजदूरों को सहायता देने के लिए संबल योजना एक और लोकप्रिय योजना है, जिसके तहत सरकार हर साल एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना के तहत स्थायी विकलांगता पर 2 लाख रुपए और आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपए दिए जाते हैं। इसके अलावा अंतिम संस्कार के लिए 5,000 रुपए दिए जाते हैं। इसके अलावा महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता के रूप में 16,000 रुपए दिए जाते हैं। एकमुश्त वित्तीय सहायता के अलावा सरकार श्रमिकों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए पूरी ट्यूशन फीस भी वहन करती है। इस दौरान मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 56.68 लाख लाभार्थियों के खातों में 341 करोड़ रुपए ट्रांसफर करेंगे। इस अवसर पर वे जबलपुर में विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी करेंगे। जबलपुर जिले के बरगी में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल समेत कई अन्य मंत्री शामिल होंगे।

ग्वालियर में सालों से एक ही दफ्तर में बने बैठे थे बाबू, अब 150 से ज्यादा पुलिकर्मियों का होगा तबादला

ग्वालियर बाबू बनकर सालों से पुलिस की अलग-अलग इकाई और अधिकारियों के दफ्तरों में तैनात पुलिसकर्मियों को भी हटाया जाएगा। यहां से हटाकर थानों और अन्य दफ्तरों में स्थानांतरित किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। पहली बार ऐसा है, जब आदेश में ही लिखा है- इस तरह की स्थिति में पुलिस कार्यप्रणाली की पारदर्शिता प्रभावित होती है। निहित स्वार्थ की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।   150 से ज्यादा पुलिसकर्मी परेशान ऐसे में अब वह पुलिसकर्मी परेशान हैं, जो पांच से लेकर 10 साल से एक ही दफ्तर में तैनात हैं। ग्वालियर में ऐसे 150 से ज्यादा पुलिसकर्मी हैं। जिन्होंने पूरी नौकरी ही दफ्तरों में बिना वर्दी के काट दी। आइजी कार्यालय, डीआइजी कार्यालय, एसएसपी कार्यालय, सभी एएसपी, डीएसपी कार्यालयों के साथ अवकाश, स्थापना, आर्म्स, आवास, वारंट सेल, चुनाव सेल सहित अन्य शाखाओं में तैनात पुलिसकर्मियों की सूची तैयार की जाएगी। जो यहां लंबे समय से तैनात हैं, उन्हें हटाया जाएगा। ग्वालियर में बन रही सूची दफ्तरों में तैनात बाबूओं को हटाने से कुछ दिन पहले थानों में चार साल से अधिक समय से तैनात पुलिसकर्मियों को हटाने के आदेश पुलिस मुख्यालय से आए थे। ग्वालियर में अब इसकी सूची बन रही है। एसएसपी कार्यालय से सभी थानों को इस संबंध में पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई है। इससे पूर्व भी सूची बनी थी। इसमें जो पुलिसकर्मी सालों से थे, उनसे स्थानांतरण के लिए तीन थानों के विकल्प भी पूछे गए थे, लेकिन इस बार सिर्फ ऐसे नाम मांगे गए हैं। ऐसे 500 से अधिक पुलिसकर्मी प्रभावित होंगे। इनका तबादला किया जाएगा। हर आवेदन से लेकर डायरी पर बाबूओं की नजर पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों में सालों से जिन बाबूओं ने कुर्सी पर कब्जा कर रखा है, ऐसे बाबू आवेदन से लेकर कुछ प्रमुख केस डायरी पर नजर रखते हैं। सीएसपी इंदरगंज, लश्कर, यूनिवर्सिटी सर्किल में तैनात ऐसे कई पुलिसकर्मी हैं, जो सीधे थानों तक में हस्तक्षेप रखते हैं। यह सालों से यहां तैनात हैं। अक्सर इनकी शिकायतें भी अधिकारियों तक पहुंचती हैं। अब सिफारिशों का दौर जिन पुलिसकर्मियों के निजी स्वार्थ थानों और दफ्तरों में तैनाती से जुड़े हैं। वह यहां से जाना नहीं चाहते, इसके चलते अब सिफारिशों का दौर शुरू हो गया है। कोई पुलिस अधिकारी तो कोई माननीयों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन इस बदलाव के आदेश पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना द्वारा दिए गए हैं, इसलिए इसका पालन बेहतर तरीके से होगा। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने इस मामले में कहा कि पुलिस मुख्यालय से जो आदेश आए हैं, उसका पालन किया जा रहा है। थानों से ऐसे पुलिसकर्मियों की जानकारी मांगी गई है। दफ्तरों में लंबी अवधि से तैनात पुलिसकर्मियों को भी बदला जाएगा। 

भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा शिवपुरी में 10 से 15 दिन बाद ही संपन्न कराने की तैयारी

ग्वालियर भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा शिवपुरी में ही होगी। शिवपुरी जिला प्रशासन से एक-दो दिन में लिखित अनुमति सेना के अधिकारियों को मिल जाएगी। ग्वालियर में तीन परीक्षा केंद्रों पर 30 जून से 10 जुलाई के बीच ऑनलाइन लिखित परीक्षा होगी। सागर में भी दो परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। ऑनलाइन परीक्षा में सुरक्षा की जिम्मेदारी सेना के साथ-साथ स्थानीय पुलिस के पास भी होगी। लिखित परीक्षा प्रारंभ होने से पहले सेना के अधिकारी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे।   10 से 15 दिन बाद ही शारीरिक परीक्षा ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, दतिया, भिंड, मुरैना, सागर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़ के 32 हजार 700 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। 20 जुलाई तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। इसके 10 से 15 दिन बाद ही शारीरिक परीक्षा संपन्न कराने की तैयारी है। ग्वालियर में फिर नहीं हो सकी शारीरिक परीक्षा, पिछली बार अचानक रद्द की थी अनुमति 2014 में उपद्रव का जो दाग ग्वालियर पर लगा था, इसके बाद से ही ग्वालियर में पुलिस-प्रशासन यहां भर्ती कराने को लेकर अनुमति जारी करने से बचते हैं। पिछली बार दिव्यांग खेल स्टेडियम में शारीरिक परीक्षा कराने की अनुमति केंद्रीय सामाजिक न्याय विभाग द्वारा दी गई थी, लेकिन परीक्षा के एक सप्ताह पहले इसे रद्द कर दिया गया था। 2024 में जो अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में चयनित हुए थे। उनकी शारीरिक परीक्षा इस साल सागर में हुई थी। पूरे एक साल बाद वह ट्रेनिंग पर जा सके थे। एक साल तक अभ्यर्थी उलझन में रहे, इसलिए अब सेना ने निर्णय लिया है कि ग्वालियर जिला प्रशासन से इस संबंध में अब कोई चर्चा या पत्राचार न कर शिवपुरी में ही परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा। ग्वालियर के परीक्षा केंद्र 1- भारतीय विद्या मंदिर शिक्षा समिति, चितौरा रोड 2- मालवा इंस्टीट्यूट आफ फार्मेसी, सिकरोदा, बड़ोरी, झांसी रोड 3- भारतीय विद्या मंदिर- यमुना नगर, दर्पण कालोनी, थाटीपुर सागर के परीक्षा केंद्र 1- एसएसएचसी जैन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च- नरसिंहपुर रोड, एमपीइबी कालोनी के पीछे, सागर 2- एडीना इंस्टीट्यूट आफ साइंड एंड टेक्नोलाजी- एनएच- 86, भोपाल रोड, बम्होरी सीड फार्म, सागर शिवपुरी में शारीरिक परीक्षा के लिए मौखिक अनुमति दे दी गई है। जल्द ही लिखित अनुमति भी मिल जाएगी। अगस्त के पहले सप्ताह में शारीरिक परीक्षा कराने के लिए मैदान को तैयार करना शुरू कर देंगे। अब ग्वालियर में हम स्थानीय प्रशासन से इस संबंध में कोई कम्युनिकेशन नहीं करेंगे, क्योंकि वहां से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है कर्नल पंकज कुमार, डायरेक्टर, सेना भर्ती कार्यालय

औसत से पांच गुना ज्यादा आया बिल, अब बिजली कंपनी 15 हजार रुपया हर्जाना चुकाएगी

भोपाल बिजली कंपनी के मनमाने बिल से परेशान उपभोक्ताओं के लिए उपभोक्ता आयोग ने उम्मीद जगाई है। भोपाल के एक उपभोक्ता की शिकायत पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने बिजली मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को 15 हजार रुपया हर्जाना चुकाने का आदेश दिया है। औसत से पांच गुना ज्यादा आया बिल दरअसल, हुजूर के मोरगा गांव निवासी नीलेश जोशी ने वर्ष 2022 में जिला उपभोक्ता आयोग में बिजली कंपनी के खिलाफ याचिका लगाई। उनका कहना था कि उनके घर में बिजली के सीमित उपकरण हैं। प्रत्येक माह उनका बिजली बिल 300 रुपये से 500 रुपये तक ही आता रहा है। मई 2022 में उनका बिल 1480 रुपये आया। शिकायत की, लेकिन कार्यवाही नहीं परेशान होकर उन्होंने कंपनी में गलत रीडिंग की शिकायत की, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। बिजली कंपनी का तर्क था कि उपभोक्ता के यहां कभी भी विद्युत आपूर्ति कम नहीं की गई। बिजली खपत के अंतर के कारण बिल में बढ़ोत्तरी हुई है। उपभोक्ता को बिल मीटर रीडिंग और उपयोग के अनुसार ही दिया गया है। नया बिल जारी करने का आदेश उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह, सदस्य अंजुम फिरोज और प्रीति मुद्गल की बेंच ने कंपनी के तर्क को मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि उपभोक्ता की शिकायतों के संबंध में कार्यवाही न कर कंपनी ने सेवा में कमी की है। इस कारण वे वास्तविक खपत के साथ नया बिल जारी करें। मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 15 हजार रुपये भी देने का आदेश हुआ।

फ्लाईओवर ब्रिज का स्लैब गिरा, दुर्घटना में काम कर रहे छह मजदूर स्लैब की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में देर रात एक बड़ा हादसा हो गया. पोहरी रोड स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर ब्रिज का स्लैब अचानक गिर गया. हादसे के समय पुल पर निर्माण कार्य चल रहा था और मजदूर रात के समय भी काम में जुटे हुए थे. बताया जा रहा है कि जल्दबाजी में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के स्लैब डाला जा रहा था, जो अचानक नीचे गिर गया. इस दुर्घटना में काम कर रहे छह मजदूर स्लैब की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए. मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया. फिलहाल सभी मजदूरों का इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है. स्थानीय प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. फिलहाल मौके पर निर्माण कार्य रोक दिया गया है और मामले की जांच जारी है.  

कान्हा टाइगर रिजर्व शाकाहारी वन्य-जीवों की संख्या में देश में अव्वल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वन अभ्यारण्य के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व को बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास घोषित किए जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन अमले को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि अन्य रिजर्व भी इस दिशा में सकारात्मक पहल करेंगे। भारतीय वन्य-जीव संस्थान, देहरादून द्वारा जारी की गयी रिपोर्ट के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्य-प्राणियों की संख्या देश में सबसे अधिक है। कान्हा टाइगर रिजर्व को देश में बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास क्षेत्र घोषित किया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व प्रदेश के मण्डला जिले में स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 2074 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 917.43 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 1134 वर्ग किलोमीटर में बफर जोन शामिल है। कान्हा टाइगर रिजर्व वन्य-जीव सम्पदा संरक्षण में देश में सर्वश्रेष्ठ है। भारतीय वन्य-जीव संस्थान, देहरादून द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्य-जीवों की संख्या 1 लाख 2 हजार 485 है। इनका प्रति वर्ग किलोमीटर घनत्व 69.86 आंका गया है। अभयारण्य का कुल बायोमास 12.6 लाख किलोग्राम 8602.15 किलोग्राम/वर्ग किलोमीटर है। कान्हा टाइगर रिजर्व में चीतल, सांभर, गौर, जंगली सुअर, बार्किंग डियर, नीलगाय और हॉग डियर की बहुतायत है। इस आधार पर इस रिपोर्ट में कान्हा टाइगर रिजर्व को बाघों की बढ़ती आबादी के लिये एक आदर्श निवास घोषित किया है। यहाँ विविध शाकाहारी प्रजातियों की संख्या में लगातार आनुपातिक वृद्धि से यह जैविक रूप से सबसे समृद्ध और संतुलित वन्य-जीव पारिस्थितिकी तंत्र बन गया है। प्रबंधन रणनीतियाँ बनी सफलता की आधारशिला कान्हा टाइगर रिजर्व अपनी प्रबंधन नीतियों के कारण आदर्श बाघ निवास बन सका है। यहाँ वर्षभर घास भूमियों की देखरेख, जल स्रोतों का निर्माण, झाड़ियों की सफाई, लांटाना जैसी घासों का उन्मूलन और बाघ-आहार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने के लिये आवास सुधार के कार्य जारी रहते हैं। गर्मियों में जल संकट से निपटने के लिये कृत्रिम जलकुंड, सोलर बोरवेल्स और तालाबों का गहरीकरण एवं साफ-सफाई नियमित रूप से की जाती है। अभयारण्य क्षेत्र में M-STriPES मोबाइल ऐप पर सतत निगरानी रखी जाती है। अभयारण्य में अप्रैल-2025 में 88,600 किलोमीटर क्षेत्र में गश्ती निगरानी की गयी, जो देश में सबसे अधिक है। अभयारण्य के कोर क्षेत्र से गाँवों के स्थानांतरण के बाद पुनर्जीवित घास-भूमियों ने वन्य-जीवों को बिना मानवीय हस्तक्षेत्र के फलने-फूलने का अवसर दिया। अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों से कम घनत्व वाले क्षेत्रों में चीतल जैसी प्रजातियों का स्थानांतरण किया गया और विभिन्न घास-भूमियों को जोड़ने वाले गलियारे बनाये गये इससे बारहसिंगा, चीतल और गौर जैसी प्रजातियों को मुक्त रूप से विचरण की स्वतंत्रता मिलती है। वनकर्मियों को नियमित प्रशिक्षण एवं डब्ल्यूआईआई, देहरादून से तकनीकी मार्गदर्शन से आंकड़ों की विश्वसनीयता और वैज्ञानिकता सुनिश्चित की गयी। बंजर घाटी में पहले से अधिक घनत्व होने के कारण हालन घाटी में घास-भूमि के विकास और प्रजातियों के सतत स्थानांतरण के जरिये शाकाहारी प्रजातियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। कान्हा टाइगर रिजर्व विविध आवास प्रकारों और सशक्त प्रबंधन से देश के अभयारण्यों में शीर्ष पर है। यहाँ के उच्च बायोमास, संतुलित प्रजाति वितरण और न्यूनतम मानव-वन्य-जीव संघर्ष इसे अन्य अभयारण्यों के लिये मॉडल बनाता है।  

जौरा के पास डैम के करीब सड़क पर घूमते हुए दिखाई दिए पांच चीते

मुरैना, मध्य प्रदेश के कूनाे नेशनल पार्क से निकलकर एक बार फिर चीते दूर जा पहुंचे हैं। इस बार पांच चीतों का एक समूह मुरैना में देखा गया है। ये चीते रविवार सुबह जौरा के पास डैम के करीब सड़क पर घूमते हुए दिखाई दिए। वहां मौजूद लोगों ने उनका वीडियो बना लिया। सूचना मिलते ही वन विभाग, चीता मित्रों की टीम निगरानी के लिए तैनात कर दी गई है और ग्रामीणों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। इधर चीतों को लेकर गांवों के लोग दहशत में भी है। दरअसल, मुरैना जिले के जौरा इलाके में रविवार सुबह कूनो नेशनल पार्क से निकले पांच चीते पगारा बांध के पास नजर आए। रविवार सुबह सैर पर निकले राहगीरों ने जब अचानक चीतों को देखा तो वे दहशत में आ गए। वहां माैजूद लाेगाें ने चीतों का वीडियो बनाया। डिप्टी रेंजर विनोद कुमार उपाध्याय ने बताया कि रविवार सुबह 6:45 बजे कैलारस से आए चीते जौरा के पगारा डैम की कोठी पर देखे गए। जौरा वन क्षेत्र के स्टाफ को लोकेशन मिलते ही टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। चीते अभी भी पगारा डैम की कोठी की घटिया पर बैठे हुए हैं। चीता मित्र उनके पास मौजूद हैं और कुछ दूरी पर निगरानी कर रहे हैं। वन विभाग की टीम ने इलाके को घेरकर निगरानी शुरू कर दी है। प्रभारी डिप्टी रेंजर विनोद ने बताया कि ये चीते कूनो नेशनल पार्क श्योपुर से कैलारस होते हुए जौरा क्षेत्र में पहुंचे हैं। वर्तमान में सभी चीते पगारा डैम, कोठी और जोगी देवगढ़ गांव की घटिया के ऊपरी क्षेत्र में आराम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चीतों के साथ चार चीता मित्र भी मौजूद हैं। चीतों के गले में ट्रैकिंग कॉलर लगे हैं, जिनसे उनकी लोकेशन की जानकारी मिल रही है। वन विभाग की टीम चीतों के साथ-साथ चल रही है और उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है। उन्होंने बताया कि अब तक चीतों ने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। चीतों के आने से इलाके में दहशत : जौरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में चीते आने से दहशत का माहौल है। लोग समूह में ही बाहर निकल रहे हैं और बच्चों को घरों के अंदर ही रखा जा रहा है। चीतों के वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग ने लोगों को खेतों में अकेले न जाने, बच्चों को बाहर खेलने से रोकने और चीतों की लोकेशन की जानकारी तत्काल वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को देने का निर्देश दिया है।  

पीएम आवास योजना के बहाने की ठगी, ठग ने लगाया 82 लाख का चूना, पुलिस ने आरोपित को सूरत से पकड़ा

इंदौर अपराध शाखा ने एक ठग को गिरफ्तार किया है जो प्रधानमंत्री (पीएम) आवास योजना का झांसा देकर लोगों से ठगी करता है। आरोपित सस्ते मकान का झांसा देकर 82 लाख रुपये की ठगी कर चुका है। उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस ने आरोपित को गुजरात से पकड़ा है। वह नाम बदल कर धोखाधड़ी करता है।   12वीं तक पढ़ा है आरोपी डीसीपी (अपराध) राजेश त्रिपाठी के मुताबिक आरोपित का नाम जतीन भाई मानिया है। उसके कई अलग पहचान भी थे, जैसे- दीपक तुरकर, शैलेष, नीरज पटेल, ऐके पटेल, संदीप पटेल। आरोपी गुजरात के भावनगर रहने वाला है।फिलहाल सूरत में छिप कर फरारी काट रहा था। उसके विरुद्ध चंदन पटेल, नमन सहित कईं लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई थी। आरोपित 12वीं तक पढ़ा है। वह ओएलएक्स और 99 एकड़ ऑनलाइन प्लेटफार्म से किराये के रूम सर्च कर लेता था। फर्जी आवंटन पत्र, बुकिंग रसीद, सेल्स टेंडर बनाता था अलग-अलग शहरों में रुम लेकर रहता था। इसी दौरान लोगों से नजदीकी बढ़ा लेता था। आरोपित रुम पार्टनर व परिचितों को मानिया द बिजनेस एम्पायर का कर्मचारी बताता था। उन्हें पीएम आवास योजना के तहत इमारत बनाने का झांसा देता था। लोगों को सस्ते मकान-फ्लैट दिलाने का बोलकर रुपये ले लेता था। उन्हें फर्जी आवंटन पत्र, बुकिंग रसीद, सेल्स टेंडर तक बना कर दे देता था। पुलिस ने आरोपित को सूरत से पकड़ा डीसीपी के मुताबिक आरोपित ने सतपुड़ा परिसर, सुपर कोरिडोर, अरावली परिसर, भूरी टेकरी पर बन रहे फ्लैट दिखाए और सस्ते फ्लैट दिलाने का झांसा देकर 82 लाख रुपये ले लिए। प्रकरण दर्ज होने के बाद आरोपित मोबाइल बंद कर फरार हो गया। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपित को सूरत से पकड़ लिया। फर्जी आरटीओ बनकर लाखों रुपये ठगे डीसीपी के अनुसार आरोपित शातिर अपराधी है। वह बार बार नाम और नंबर बदल लेता है। उसने पूछताछ के दौरान मुंबई में फर्जी आरटीओ बनकर 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी और मुंबई नगर पालिका निगम में नौकरी के नाम पर भी 20 लाख रुपयों की ठगी करना स्वीकारी है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने वरिष्ठ पत्रकार जगदीप सिंह बैस के निधन पर व्यक्त किया शोक

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने वरिष्ठ पत्रकार “नया इंडिया” भोपाल के संपादक श्री जगदीप सिंह बैस के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने दिवंगत आत्मा को शांति और परिजन को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।  

स्कूल शिक्षा में संस्कृत और संस्कृति का उदय

भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा में नई शिक्षा नीति वर्ष 2020 में संस्कृत के व्यापक प्रसार की अनुशंसा की गई है। इसके अनुरूप मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड एवं महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान ने 53 चयनित एजुकेशन फॉर ऑल (ईएफए) विद्यालय में कक्षा एक के पूर्व एलकेजी एवं यूकेजी के स्थान पर अरूण एवं उदय कक्षाएं प्रारंभ की हैं। इन कक्षाओं का माध्यम संस्कृत किया गया है। संस्कृत भाषा एक बीज भाषा है, जो सभी भाषाओं की जननी है। जो विद्यार्थी प्रारंभ से संस्कृत बोलते हैं, वह बाद के वर्षों में विश्व की किसी भी भाषा को बोलने की क्षमता रखते हैं। बच्चों के मस्तिष्क के उचित विकास और शारीरिक वृद्धि को सुनिश्चित करने के लिये उसके आरंभिक 6 वर्षों को महत्वपूर्ण माना गया है। 

दमोह, धार और मैहर जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से 6 लोगों की मौत

भोपाल, मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में पिछले दो दिनों में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 6 लोग मारे गए हैं। कई झुलसे हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। दो दिनों में दमोह, धार और मैहर जिलों में बेमौसम आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने की ये घटनाएं दर्ज की गईं। दमोह जिले के मगरोन थाने के अंतर्गत सिमरी बड़ौदा गांव में शनिवार शाम को तीन बच्चों पर बिजली गिरी। एक नारायण अहिरवार नाम के व्यक्ति का 14 वर्षीय बेटा अमित अपने दोस्त मदन (15) और अनिल (17) के साथ खेत पर गया था। खराब मौसम के बीच आकाशीय बिजली उन पर गिर गई। पुलिस ने बताया कि कमोदा अहिरवार का बेटा मदन बेहोश था, जब उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया तो वहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। घायल अमित और अनिल का इलाज चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मदन की छाती पर बिजली गिरने के निशान थे और कपड़े फटे हुए थे, जिससे पता चलता है कि बिजली गिरने की घटना कितनी गंभीर थी। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। धार के सरदारपुर क्षेत्र में तीन अलग-अलग घटनाओं में खेत में काम कर रहे मजदूरों की जान चली गई। रुंडी गांव की वरदी बाई और नाहरपुरा जोलाना गांव के सुखराम खेत से लौटते समय बिजली की चपेट में आए। अमझेरा थाने के राताकोट गांव में सोहन सिंह डामोर की पत्नी मुन्नी पर भी खेत में काम करते हुए बिजली गिरी और उनकी मौत हो गई। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से कई मवेशी भी मर गए। अमझेरा क्षेत्र में बख्तावर के पास बिजली गिरने से 7 बकरियां मर गईं और पशुओं की देखभाल कर रहा 25 वर्षीय नितेश झुलस गया। अमझेरा स्वास्थ्य केंद्र में उसका इलाज चल रहा है। मैहर में बिजली गिरने से मड़ई गांव के 35 वर्षीय सूरज रावत की मौत हो गई, जो पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। आसपास के गांवों में भी अन्य लोगों के घायल होने की खबर है। 13 वर्षीय अतुल और उसके 23 वर्षीय चाचा महाजन बकरियां चराते समय बिजली की चपेट में आ गए, जबकि 32 वर्षीय कल्पना सिंह और 8 वर्षीय किशन सिंह सोनवारी में खेतों में काम करते समय झुलस गए।  

राजा की हत्या की साजिश सोनम से उसकी शादी के 11 दिन पहले ही रच ली गई थी, तीनों लड़कों ने इसलिए की राजा की हत्या

इंदौर इंदौर की राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। सोनम और उसके लवर राज कुशवाहा के साथ राजा की हत्या करने वाले तीनों लड़के फिलहाल मेघालय पुलिस की 8 दिनों की कस्टडी में हैं। इस दौरान पुलिस की पूछताछ में सोनम और राज ने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने ने ही राजा को मारने की साजिश रची थी। इसी के साथ ये भी पता चला है कि राजा की हत्या की साजिश सोनम से उसकी शादी के 11 दिन पहले ही रच ली गई थी। इससे पहले खबर थी कि तीनों लड़के, विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी ने पैसों के लिए सोनम के कहने पर राजा की हत्या की। लेकिन अब इस पर एक नया खुलासा हुआ है। दरअसल पहले बताया जा रहा था कि राजा की हत्या के लिए सोनम और राज ने भाड़े पर तीन लोगों को बुलाया था और राजा की सुपारी दी थी। लेकिन मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की अटकलों को खारिज कर दिया है। पुलिस ने साफ किया है कि तीनों लड़के राज कुशवाहा के पहचान वाले हैं। इनमें से एक राज का चचेरा भाई भी है। पुलिस ने बताया कि तीनों लड़कों को पैसे के लिए राजा की हत्या का काम नहीं सौंपा गया था बल्कि राज के साथ वफ़ादारी और लंबे समय से चली आ रही दोस्ती की खातिर उन्होंने राज की हत्या की और सोनम का साथ दिया। बताया ये भी जा रहा है कि सोनम के संकेत देने के बाद ही विशाल ने सबसे पहले राजा पर वार किया था जिसके बाद अन्य दो लड़कों ने भी वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। यह सब सोनम की आंखों के सामने हुआ। इसके बाद राजा के शव को खाई में फेंकने में तीनों लड़कों के साथ-साथ सोनम ने भी मदद की थी। बता दें, इंदौर से हनीमून के लिए सोनम और राजा 23 मई को लापता हो गए थे। उनकी तलाश के लिए मेघालय पुलिस सर्च ऑपरेशन भी चलाया जिसके बाद 2 जून को पुलिस को एक खाई में राजा का शव मिला। शव काफी खराब हालत में था। लेकिन सोनम अब भी लापता थी। इसके बाद पुलिस को राजा की हत्या में इस्तेमाल हुआ चाकू, उनकी स्कूटी और रेनकोट भी मिला था। इसके बाद पुलिस ने अपने जांच के एंगल को बदला और सोनम से जुड़ी सभी जानकारी जुटाने में लग गई। जिस होम स्टे में सोनम और राजा रुके थे, जिस गाइड ने देखा था, उनके बयान से लेकर सोनम की कॉल डिटेल, तक हर छोटी से छोटी चीज पुलिस खंगालने लगी। सोनम की कॉल डिटेल से पुलिस को पता चला कि सोनम राज कुशवाहा नाम के एक शख्स से लगातार संपर्क में थी। इसके बाद पुलिस की जांच आगे बढ़ी और 8 जून की रात को राज कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया गया। राजा की हत्या के बाद इंदौर में सीक्रेट फ्लैट में रह रही थी सोनम बताया ये भी जा रहा है कि राजा की हत्या के बाद सोनम रूट बदलकर वापस इंदौर गई थी और 30 जून से 7 जून तक वही रही थी। लेकिन राजा के पकड़े जाने के बाद वह घबरा गई और गाजीपुरे के काशी नाम के ढाबे में जाकर उसके मालिक से फोन लेकर अपने घरवालों को फोन किया और अपनी लोकेशन बताई। इसके बाद सोनम के भाई गोविंद और ढाबे के मालिक ने तुरंत पुलिस को जानकारी दी जिसके बाद पुलिस उसे वहां से ले गई। सभी हत्यारों को भी पुलिस ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ के दौरान पहले सोनम ने अपनी किडनैपिंग की झूठी कहानी सुनाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन आखिर में टूट गई और राजा की हत्या की बात स्वीकार कर ली।  

सांसदों और विधायकों के प्रशिक्षण वर्ग का दूसरा दिन, विभिन्न वक्ता देंगे संबोधन

पचमढ़ी, मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के सांसदों और विधायकों के प्रशिक्षण वर्ग के दूसरे दिन आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री सी आर पाटिल समेत अन्य कई वक्ता अपने संबोधन देंगे। प्रशिक्षण वर्ग के आज सात सत्र होंगे। दोपहर को सांसदों और विधायकों के लिए कार्यालय प्रबंधन और सामाजिक शिष्टाचार का सत्र होगा, जिसमें केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल संबोधन देंगे। आज ही मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विकसित मध्यप्रदेश 2047 – अवसर एवं चुनौती विषय पर जनप्रतिनिधियों के समक्ष विचार प्रस्तुत करेंगे। पार्टी महासचिव विनोद तावड़े आज पार्टी के सांसदों और विधायकों को सोशल मीडिया और मीडिया विषय पर संबोधित करेंगे। तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण वर्ग का आज दूसरा दिन है। शनिवार को प्रशिक्षण के पहले दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपना संबोधन दिया था। सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रशिक्षण वर्ग के समापन सत्र को संबोधित करेंगे।  

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