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बीजेपी एमएलए रामेश्वर शर्मा जनता के बीच उनकी समस्या और विकास कार्यों की प्रगति देखने मैदान पर उतरे

भोपाल  मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में हुए भाजपा के प्रशिक्षण शिविर के बाद विधायक रामेश्वर शर्मा एक्शन में नजर आए। बीजेपी एमएलए जनता के बीच उनकी समस्या और विकास कार्यों की प्रगति देखने मैदान पर उतरे। शर्मा मंगलवार की सुबह 7 बजे से अधिकारियों के साथ अपने क्षेत्र का दौरा किया।  विधायक रामेश्वर शर्मा ने भोपाल के संत नगर में 305 करोड़ से बन रहे एलिवेटेड फ्लाईओवर एवं फाटक रोड पर बन रहे ROB का निरीक्षण किया। उन्होंने बिजली के खंभों की शिफ्टिंग सहित फ्लाईओवर निर्माण संबंधी विभिन्न निर्देश अधिकारियों को दिए। निरीक्षण के दौरान विधायक रामेश्वर शर्मा ने लालघाट ग्रेड सेपरेटर, संत नगर इंदौर रोड पर बन रहे एलिवेटेड फ्लाइओवर, फाटक रोड पर ROB निर्माण, भौरी स्थित प्रधानमंत्री आवास, गांव बैरागढ़ के प्रस्तावित सब स्टेशन सहित भोपाल बाईपास पर बनने वाले 6 लेन फ्लाईओवर स्थल का निरीक्षण किया।  बता दें कि रामेश्वर शर्मा भोपाल की हुजूर विधानसभा के सीट से विधायक हैं। वे 2013 से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं। आरएसएस पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले रामेश्वर शर्मा हिंदुत्व के एजेंडे को लेकर आगे रहते हैं। 

इंदौर में Love Jihad के लिए कौन कर रहा फंडिंग ? हिंदू संगठन ने निष्पक्ष जांच की मांग

इंदौर  हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने वाले मुस्लिम युवकों को फंडिंग मामले में हिंदू संगठन ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। हिंदू संगठन नेता संतोष शर्मा ने कहा कि- संगठन शुरू से ही कह रहा है कि सनातन पर प्रहार के लिए फंडिंग हो रही है। लव जिहाद ही नहीं कई तरह के अपराध करने के लिए फंडिंग हो रही है। बता दें कि शहर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में अल्ताफ और साहिल को पकड़ा गया था जिनका वीडियो वायरल हुआ है। दोनों ने वायरल वीडियो में कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी का नाम लिया है। पार्षद अनवर कादरी पर लव जिहाद को लेकर फंडिंग करने का आरोप है। हिंदू संगठन के नेताओं का कहना है कि उनके लोगों ने उनका नाम उजागर किया है। पुलिस अनवर कादरी की मामले में तलाश कर रही है। दोनों ही मामलों में कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी के खिलाफ 120 बी के तहत प्रकरण दर्ज किया है। दो पीड़िताओं ने दुष्कर्म और धार्मिक स्वतंत्रता के तहत प्रकरण दर्ज कराया है। बाणगंगा थाना पुलिस ने दोनों ही प्रकरणों में आरोपी बनाया है।

हमीदिया कॉलेज प्रिंसपल ने मस्जिद से आने वाली आवाजों को लेकर की शिकायत ,इससे छात्रों को पढ़ाई में बाधा हो रही

भोपाल  राजधानी भोपाल में स्थित प्रतिष्ठित हमीदिया महाविद्यालय इन दिनों एक नए विवाद की चपेट में आ गया है। कॉलेज परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर छात्रों और फैकल्टी सदस्यों ने सुरक्षा, अनुशासन और पढ़ाई के माहौल पर सवाल खड़े किए हैं। जिसके बाद कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. पुष्पलता चौकसे ने उच्च शिक्षा विभाग के एसीएस अनुपम राजन से इसकी शिकायत की है।  उन्होंने बताया कि कॉलेज के पास बनी मस्जिद में अजान के कारण परीक्षा के दौरान छात्र डिस्टर्ब होते हैं। नीट सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान यह समस्या सामने आई है। मस्जिद में नमाज के दौरान बाहरी लोगों की आवाजाही  यहां अध्यनरत छात्रों का भी आरोप है कि मस्जिद में नमाज के दौरान बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है, जिससे कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होती है और साथ ही क्लासरूम में पढ़ाई और परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य बाधित होते हैं। उच्च शिक्षा विभाग की वीसी में कॉलेज प्रिंसिपल ने यह मुद्दा उठाया है।  मजार से भी क्लासरूम तक पहुंचती माइक की आवाजें कॉलेज के पास एक मजार भी है, जिसे स्थानीय लोग पारिवारिक बता रहे हैं। यहां भी माइक का उपयोग किया जाता है, जिसकी वजह से क्लास के दौरान पढ़ाई में समस्या आती है। प्रिंसिपल ने बताया कि लगातार आने-जाने और तेज आवाज से पढ़ाई का महौल प्रभावित हो रहा है। कॉलेज जमीन की स्थिति साफ हो तो खेल मैदान बनेगा प्राचार्य चौकसे ने यह भी बताया कि यदि मजार की विवादित जमीन कॉलेज की पुष्टि होती है, तो उसे खेल मैदान में परिवर्तित करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि भीड़भाड़ वाले त्योहारों पर परिसर की सुरक्षा और अनुशासन को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कॉलेज कुछ नहीं कर सकता, कार्रवाई शासन का जिम्मा कॉलेज प्रशासन ने एनसीसी विंग को इस तरफ शिफ्ट किया है, ताकि छात्र कम प्रभावित हों। प्रिंसिपल चौकसे ने स्पष्ट कहा कि कॉलेज प्रशासन केवल समस्याएं उजागर कर सकता है, निर्णय और कार्रवाई का जिम्मा शासन का है। कॉलेज की ओर खुलता है मस्जिद का गेट  प्रिंसिपल के अनुसार, मस्जिद का एक गेट कॉलेज की ओर खुलता है, जिससे बाहरी लोगों की आवाजाही बनी रहती है। इससे अनुशासन और सुरक्षा पर असर पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि मस्जिद कॉलेज की जमीन पर है या नहीं। डॉ. चौकसे का कहना है कि यदि जमीन कॉलेज की है, तो उसे खेल मैदान के रूप में विकसित करने की अनुमति दी जाए।

हाईकोर्ट ने मंत्री शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए बयान के बाद स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई अदालती कार्रवाई बंद कर दी

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए विवादित बयान के बाद प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई कानूनी कार्रवाई बंद कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को मप्र हाईकोर्ट से निवेदन किया था कि मंत्री विजय खिलाफ के खिलाफ कार्रवाई बंद कर दें। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सोमवार को जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने मामला समाप्त कर दिया। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह द्वारा इंदौर के पास महू-अंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक समारोह में दिए गए बयान पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था। 14 मई को पारित आदेश में शाम तक उनके खिलाफ बी.एन.एस. की धारा 152, 196(1)(बी) और 197(1)(सी) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि मंत्री ने भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने आमसभा में कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ गटर भाषा का इस्तेमाल किया है। उनका बयान प्रथम दृष्टया मुस्लिम धर्म के सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच वैमनस्य और दुश्मनी या घृणा या दुर्भावना पैदा करने की प्रवृत्ति का है। याचिका पर अगले दिन 15 मई को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया था कि मंत्री के खिलाफ दर्ज एफआईआर में उनके द्वारा किए गए अपराध का उल्लेख नहीं किया है। एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गई है, जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाए। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि अपराध के विवरण का उल्लेख करते हुए दोबारा एफआईआर दर्ज की जाए। हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के पूरे आदेश को सभी न्यायिक, अर्ध-न्यायिक और जांच प्रक्रिया में पैराग्राफ 12 के हिस्से के रूप में पढ़ा जाएगा। पुलिस की मंशा को देखते हुए हाईकोर्ट जांच की निगरानी करेगा। हालांकि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से निवेदन किया था। उसी पर हाईकोर्ट ने निर्णय लिया है। 

आदिवासीयों की 100 एकड़ जमीन से हटाया दबंगों का कब्जा, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

सागर  सागर जिले के मालथौन तहसील क्षेत्र में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक रसूखदार के कब्जे से आदिवासियों की 100 एकड़ जमीन की वापस करवाई है। मालथौन में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आदिवासी किसानों को उनकी लगभग 100 एकड़ जमीन का कब्जा पुनः दिलाया। लंबे समय से इस भूमि पर स्थानीय निवासी रानू सिंघई पिता गोकुल चंद्र जैन का अवैध कब्जा बना हुआ था। आरोप है कि सिंघई ने इस भूमि पर गैरकानूनी ढंग से अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया था। इस मामले में SDM मनोज चौरसिया के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। SDM के अनुसार इस भूमि के संबंध में आदिवासी किसानों द्वारा कई बार शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, जिसके बाद रविवार को नायब तहसीलदार कमलेश सतनामी, थाना प्रभारी अशोक यादव, पटवारी और अन्य राजस्व अमले की मौजूदगी में अवैध कब्जा हटाया गया। कार्रवाई के दौरान किसानों को मौके पर ही ट्रैक्टर से जमीन की बखरनी कराकर जमीन सौंप दी गई। यह जमीन मालथौन से सटी पड़ाये क्षेत्र की थी, जहां सरकार द्वारा पूर्व में आदिवासियों को पट्टे जारी किए गए थे। इन्हीं पट्टों की भूमि पर रानू सिंघई ने कब्जा कर रखा था। प्रशासन की इस कार्रवाई से कई आदिवासी महिलाओं और पुरुषों को उनकी पुश्तैनी जमीन वापस मिल गई। साथ ही रानू सिंघई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है। एसडीएम चौरसिया ने कहा कि प्रशासन आदिवासियों के हक की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी अवैध कब्जाधारी को बख्शा नहीं जाएगा।  

भारत में अरब संस्कृति के लिए कोई जगह नहीं, X पर लिखा- अरब ने इस्लाम फैलाया और भारत के हो गए तीन टुकड़े, यहां के हिंदू हमारे- IAS Niaz Khan

भोपाल  मध्यप्रदेश के चर्चित आईएएस नियाज खान एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वे अरब कंट्री और इस्लाम को लेकर चर्चा में है। उन्होंने अरब देश के कल्चर के खिलाफ मोर्चा खोला है। सोशल मीडिया एक्स (X) पर नियाज खान ने लिखा- इस्लाम अरब के लोगों ने फैलाया और परिणाम भारत के तीन हिस्से हो गए। भविष्य में अरब संस्कृति को भारत में घुसने नहीं दिया जाएगा। अभी भी कहीं कहीं अरब का लिबास, एक लंबा कपड़ा और सर पर रिंग लगा कपड़ा देखने को मिलता है। ऐसे लोग जो सूखभोगी अरब के कपड़े पहनते हैं वे भारत के लिए बंद कर दें। भारत को अब अरब नहीं बनने दिया जाएगा नियाज खान ने लिखा- यहां की संस्कृति का सभी मुस्लिम भाई सम्मान करना सीखें। भौतिक सुख और विलासिता में डूबे अरबी हमारे नहीं हैं। यहां के हिंदू हमारे हैं क्यों कि हम सब यहीं से निकले हैं। अरब के लोगों को केवल धन से मतलब है यहां के मुसलमानों से कुछ लेना देना नहीं है। नॉवेल राइटर और हाल में अपना पहला नॉवेला लिखने वाले एमपी कैडर के आईएएस खान ने मंगलवार सुबह एक्स पर किए ट्वीट में कहा है कि भौतिक सुख और विलासिता में डूबे अरबी हमारे नहीं हैं। यहां के हिंदू हमारे हैं क्योंकि हम सब यहीं से निकले हैं। अरब के लोगों को केवल धन से मतलब है। यहां के मुसलमानों से कुछ लेना देना नहीं है। एक अन्य ट्वीट में खान ने लिखा है कि इस्लाम अरब के लोगों ने फैलाया और परिणाम भारत के तीन हिस्से हो गए। भविष्य में अरब संस्कृति को भारत में घुसने नहीं दिया जाएगा। अभी भी कहीं-कहीं अरब का लिबास, एक लंबा कपड़ा और सर पर रिंग लगा कपड़ा देखने को मिलता है। ऐसे लोग जो सुखभोगी अरब के कपड़े पहनते हैं वे बंद कर दें भारत के लिए। यह ट्वीट भी किए हैं आईएएस खान ने     15 जून को आईएएस अफसर खान ने ट्वीट किया है कि कई बार लोग अपनी विचारधारा छिपा कर रखते हैं। दिखाते कुछ और हैं होते कुछ और हैं पर देर सबेर सत्य सबके सामने आ जाता है।     इसी दिन एक अन्य ट्वीट में लिखा कि पश्चिमी देश जिन्होंने एशियाई, अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी काले या अश्वेत देशों को गुलाम बनाया, वे आज भी पर्दे के पीछे से खेल खेल रहे हैं। काले या अश्वेत देश एक दूसरे के खिलाफ निरंतर संघर्ष में हैं और पश्चिम इसका आनंद ले रहा है। श्वेत नस्ल भरोसेमंद नहीं है     12 जून को किए ट्वीट में खान ने लिखा कि देश का आध्यात्मिक विकास करना है तो चारों शंकराचार्यों को सर्वोच्च सम्मान देना होगा। इनके विरुद्ध कभी भी कोई नकारात्मक टिप्पणी न की जाए।

इंदौर नगर निगम के अफसर चेतन पाटिल के घर ईओडब्ल्यू का छापा, आय से अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप

इंदौर  इंदौर में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नगर निगम के अधिकारी चेतन पाटील के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की। इस छापेमारी का मुख्य कारण वित्तीय अनियमितताएं और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप था। सुबह से ही EOW की टीम ने कार्रवाई शुरू कर दी थी, और नगर निगम परिसर के साथ-साथ अन्य स्थानों पर भी ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। EOW की कार्रवाई का कारण     चेतन नगर निगम में सहायक अधीक्षक हैं। EOW को चेतन पाटील के खिलाफ कई महीनों से वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। पाटील पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप था। इसके चलते आज (मंगलवार) सुबह से ही EOW की टीम उनके घर और कार्यालय पर छापेमारी करने पहुंची। टीम ने नगर निगम परिसर में स्थित उनके कार्यालय को भी सील कर दिया। पहले भी लग चुके हैं आरोप चेतन पाटील कई वर्षों से नगर निगम के उद्यान विभाग में कार्यरत थे, और इस दौरान उन पर विभिन्न गंभीर आरोप लग चुके हैं। दावा है कि सालों से नगर निगम में कार्यरत पाटील ने पिछले कुछ वर्षों में अपने संपत्ति में अप्रत्याशित वृद्धि की थी, जिससे उन पर संदेह और सवाल उठने लगे थे। इसी संदर्भ में, EOW ने उनके खिलाफ छापेमारी की योजना बनाई और आज इसे अंजाम दिया। पाटील का कार्यालय सील EOW की टीम नगर निगम की नई बिल्डिंग में भी पहुंची और वहां स्थित पाटील के कार्यालय को सील कर दिया। इस कदम से नगर निगम में चल रही वित्तीय जांच पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगर निगम में यह पहली बार नहीं है कि किसी अधिकारी पर इस प्रकार के आरोप लगे हैं। हाल ही में कई अन्य अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं।

MP के कर्मचारी अधिकारियों को लेकर आज बड़ा फैसला, 9 सालों का सपना होगा पूरा

भोपाल  मध्य प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों के हक में प्रदेश की मोहन सरकार बड़ा फैसला करने जा रही है. पिछले 9 सालों से अटके प्रमोशन में आरक्षण के प्रस्ताव को आज कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है. इसके बाद प्रदेश में कर्मचारी-अधिकारियों के प्रमोशन शुरू हो सकेंगे. आज होने जा रही कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा. 10 जून को हुई कैबिनेट की बैठक में प्रमोशन में आरक्षण के प्रस्ताव का प्रजेंटेशन किया जा चुका है. इससे जुड़े सभी पक्षों से भी राज्य शासन चर्चा कर चुकी है. कैबिनेट से प्रस्ताव पास होने के बाद पदोन्नति में आरक्षण का नियम लागू हो जाएगा. नए प्रारूप में किए गए कई प्रावधान राज्य शासन द्वारा तैयार किए गए प्रमोशन में आरक्षण के प्रारूप में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं. राज्य सरकार की कोशिश है कि सभी कर्मचारियों को समान रूप से इसका लाभ मिल सके और किसी के भी हितों को बहुत ज्यादा नुकसान न हो. प्रारूप में तय किया गया है कि पहले से पदोन्नत कर्मचारियों को रिवर्ट नहीं किया जाएगा. इसके अलावा पदोन्नति के बिना रिटायर्ड हो चुके कर्मचारियों को भी नए नियमों का लाभ नहीं दिया जाएगा. सबसे पहले भरे जाएंगे एससी-एसटी के पद प्रारूप में तय किया किया गया है कि प्रमोशन में आरक्षण के लिए सबसे पहले अनुसूचित जाति के 16 फीसदी और अनुसूचित जनजाति के 20 फीसदी पद भरे जाएंगे. यदि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित पद पर कोई पात्र व्यक्ति नहीं मिलता है तो किसी दूसरे वर्ग को इस पद पर लाभ नहीं दिया जाएगा. यह पद खाली रखे जाएंगे. हर साल होगी डीपीसी पदोन्नति के लिए हर साल डीपीसी की जाएगी. इसके लिए 31 दिसंबर को रिटायर्ड होने वाले कर्मचारियों की पात्रता का निर्धारण करने के बाद हर साल 1 जनवरी को खाली होने वाले पदों का निर्धारण होगा और इन पदों पर प्रमोशन का लाभ दिया जाएगा. डीपीसी हर साल सितंबर से नंवबर के बीच होगी.   अलग-अलग तैयार होगी लिस्ट प्रमोशन के लिए क्लॉस 1 अधिकारियों और क्लॉस 2 अधिकारियों के लिए अलग-अलग लिस्ट तैयार होगी. क्लास वन अधिकारियों के लिए पदोन्नति का आधार मैरिट कम सीनियरिटी को बनाया जाएगा. वहीं क्लास 2 के लिए सीनियरिटी कम मैरिट को आधार बनाकर सूची तैयार की जाएगी.

भोपाल में देर रात पुलिस विभाग में थोकबंद तबादले, 699 पुलिसकर्मी किए इधर से उधर, देखें लिस्ट

भोपाल  पुलिस कमिश्नरेट के अंतर्गत आने वाले 37 थानों में 5 साल से अधिक समय से जमे 699 पुलिसकर्मियों का देर रात तबादला कर दिया गया है, जिसमें उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षक शामिल हैं। ऐसा एक ही थाने और संभाग में लंबे समय से जमे होने की वजह से सामने आ रही शिकायतों के चलते किया गया है, ताकि थानों में नए पुलिसकर्मियों को पदस्थ किया जा सके। 37 थानों पर हुई कार्रवाई भोपाल पुलिस कमिश्नरेट के अधीन आने वाले 37 थानों में यह कार्रवाई की गई है। देर रात 699 पुलिस कर्मियों की तबादला सूची जारी की गई। इसमें ऐसे पुलिसकर्मी जो एक ही संभाग में अथवा एक ही थाने में 5 साल और इससे अधिक समय से थे, उन्हें इधर से उधर किया गया है। ट्रांसफर हुए पुलिसकर्मियों में शहर के 30 उप निरीक्षक, 56 सहायक उप निरीक्षक, 313 प्रधान आरक्षक और 301 आरक्षक शामिल हैं। एक ही थाने में जमे थे पुलिसकर्मी पुलिस विभाग में हुए इस ट्रांसफर को लेकर कहा जा रहा है कि एक ही थाने में लंबे से जमे होने की वजह से कई शिकायतें सामने आ रही थी जिसके चलते इस पर संज्ञान लिया गया। जिन पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर किए गए है उनमें ऐसे पुलिसकर्मी भी शामिल है जिनका पहले भी इन थानों से ट्रांसफर हो चुका था, लेकिन बाद में फिर से ये उसी थाने में पदस्थ हो गए थे। ऐसी समस्या प्रदेश भर में सामने आई जिसके बाद पुलिस मुख्यालय ने इस व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश दिए थे, कि लंबे समय से जमे पुलिसकर्मियों को ट्रांसफर कर नए पुलिसकर्मियों को थानों में पदस्थ किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बेलखेड़ा को शासकीय महाविद्यालय की दी सौगात: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

लाड़ली बहनों और माताओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रक्षाबंधन पर लाड़ली बहनों को 250 रूपए शगुन दिया जाएगा मुख्यमंत्री ने बेलखेड़ा को शासकीय महाविद्यालय की दी सौगात लाड़ली बहना सहित अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को मिली 2081 करोड़ से अधिक की राशि 56.68 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के हितग्राहियों को 341 करोड़ रूपये 27 लाख बहनों को गैस सिलेंडर रिफलिंग के लिए 39.14 करोड़ रूपये की अनुदान राशि हुई अंतरित 6 हजार से अधिक श्रमिक परिवारों को 150 करोड़ रूपये की अनुग्रह राशि अंतरित राज्य सरकार वीरांगनाओं के नाम पर चला रही है योजनाएं शहपुरा में एसडीएम/एसडीओपी कार्यालय की घोषणा मुख्यमंत्री ने 22.44 करोड़ रूपये की लागत वाले 8 विकास कार्यों का किया लोकार्पण व भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव जबलपुर जिले के बेलखेड़ा में राज्य स्तरीय लाड़ली बहना एवं महिला सम्मेलन में हुए शामिल जबलपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि माताओं, बहनों और बेटियों को मान-सम्मान और उनका वाजिब हक दिलाने में राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। लाड़ली बहनों को आत्मनिर्भर बनाने, सुरक्षा, सम्मान, स्वाभिमान और समृद्धि प्रदान करने के लिए हमारी सरकार द्वारा हर महीने बहनों के खातों में राशि भेजकर बहनों का रक्षाबंधन मनवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगले महीने रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में लाड़ली बहनों को 250 रूपए बढ़ाकर दिया जाएगा, जिससे ताकि बहनें उत्साह पूर्वक त्यौहार मना सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को जबलपुर जिले के बेलखेड़ा गांव में राज्य स्तरीय लाड़ली बहना एवं महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की लाड़ली बहनों सहित अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक के जरिये 2081 करोड़ रूपसे से अधिक की सम्मान एवं सहायता राशि अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारी सरकार ने विरासत से विकास का संकल्प लिया है। जबलपुर क्षेत्र महारानी दुर्गावती, रानी अवंतीबाई जैसी वीरांगनाओं की धरती है। हमारी सरकार ने इन वीरांगनाओं के नाम पर योजनाएं चलाई हैं। इनका लाभ प्रदेश की लाखों महिलाओं को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की माताओं और बहनों को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना ही हमारा लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पूरे देश सहित मध्यप्रदेश की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की 1 करोड़ 27 लाख लाड़ली बहनों के खातों में लाड़ली बहना योजना की जून माह की किश्त 1551 करोड़ 44 लाख रूपये अंतरित किये। योजनान्तर्गत लाड़ली बहनों को मिलने वाली यह 25वीं किश्त है। योजना में प्रत्येक लाड़ली बहना को प्रत्येक माह 1250 रूपये की राशि उनके बैंक खाता में अंतरित की जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहनों की जिंदगी को बेहतर करने मध्यप्रदेश सरकार प्रति महीने साढ़े पंद्रह सौ करोड़ रुपए अंतरित करती है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में 30 हजार करोड़ रूपए से अधिक की राशि बहनों को दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 56 लाख 68 हजार सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में 341 करोड़ रूपए की राशि, 27 लाख से अधिक बहनों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर रिफिलिंग की 39.14 करोड़ रुपए की अनुदान राशि और मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना में 6 हजार 821 श्रमिक परिवारों को 150 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि का भी सिंगल क्लिक से अंतरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के लाभार्थियों को हितलाभ वितरण करने के साथ ही करीब 22 करोड़ 44 लाख रूपये के विकास कार्यों का भी लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बरगी विधायक नीरज सिंह के अनुरोध पर बेलखेड़ा में शासकीय महाविद्यालय प्रारम्भ करने और शहपुरा में अनुविभागीय राजस्व कार्यालय व शासकीय कर्मचारियों के आवास भवन के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने शहपुरा में एसडीओपी की पदस्थापना की भी घोषणा की। बहनों के आशीर्वाद से धन्य हुई जिंदगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहनों का आशीर्वाद मिल जाए तो जिंदगी धन्य हो जाती है। उन्होंने कहा कि भाई अकेले अपने घर को गौरवान्वित करता है जबकि बहनें ससुराल और मायके दोनों घरों का गौरव बनती हैं। उन्होंने कहा कि माताएं और बहने घर-परिवार के लिए समर्पण करती हैं और परिवार में बच्चों को बड़ा करने में माताओं और बहनों की भूमिका देवतुल्य होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की गौरवशाली संस्कृति रही है। हमारे यहां सात जन्मों की कसमों के साथ विवाह की रस्में होती हैं। सबको पक्का आवास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गांव, पहाड़ और नगर में रहने वाले, कच्चे और टूटे छत के मकान में रहने वाले सभी लोगों को पक्का मकान देने का काम किया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस योजना से हमारी माताओं और बहनों की आंखों को धुएं से मुक्ति दिलाने का काम भी प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गैस रिफिलिंग के तहत प्रदेश की 27 लाख से अधिक बहनों के खाते में भी आज 39.14 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर जल जीवन मिशन के तहत अब हर घर नल से जल पहुंच रहा है इससे माताओं और बहनों को कुंए और दूर दराज के जल स्त्रोतों से पानी लाने के कष्ट से निजात मिली है। मुख्यमंत्री ने बहनों के लिए प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी कई योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना में भी बेटियों को बराबरी का दर्जा मिल रहा है। गरीबों को मिल रहा निःशुल्क खाद्यान्न मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेडीमेड गारमेंट के माध्यम से व्यवसाय करने वाली बहनों को 5 हजार रूपए अलग से देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कोदो-कुटकी खरीदने पर प्रति क्विंटल 1 हजार रुपए का बोनस देना प्रारंभ किया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 1 करोड़ 33 लाख परिवारों को निःशुल्क खाद्यान्न देने का काम भी सरकार कर रही है। बच्चों की पढ़ाई, लिखाई की जवाबदारी सरकार निभा रही है। उन्होंने कहा कि अगले महीने मेधावी छात्रों को स्कूटी और लैपटॉप भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने सांदीपनि विद्यालयों का जिक्र करते हुए कहा कि विद्यालयों में सभी प्रकार … Read more

कभी सोचा नहीं था कि मेरी दुकान में चाय पीने.. आयेंगे मुख्यमंत्री

जबलपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर के बेलखेड़ा में सोमवार को राज्य स्तरीय लाड़ली बहना एवं महिला सम्मेलन में शामिल होने के बाद सड़क मार्ग से डुमना विमानतल के रास्ते में काफिला रूकवाकर अंध-मूक चौराहा स्थित शंकर चाट भंडार के स्टॉल पर चाय का आनंद लिया। इस अवसर पर सांसद आशीष दुबे, विधायक अशोक रोहाणी, जिला अध्यक्ष राजकुमार पटेल, नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर एवं अखिलेश जैन भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने दुकानदार ब्रजेश लोधी से कुशलक्षेम पूछीं और उनके परिवार और व्यवसाय के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री को अकस्मात् अपनी दुकान में पाकर ब्रजेश प्रफुल्लित हो उठे, उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी छोटी सी दुकान में स्वयं मुख्यमंत्री चाय पीने आए हैं। ब्रजेश ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उसके जैसे छोटे दुकानदार से भी बड़ी ही आत्मीयता से मिले। ब्रजेश ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर बहुत खुशी हुई, हमारे मुख्यमंत्री बड़े सहज और सरल स्वभाव के हैं।।  

कुछ मिनटों में समझ सकेंगे गंभीर बीमारियों की जड़, कम टाइम में होंगे ऑपरेशन, एक बूंद खून से चुटकियों में पता चलेगी जानलेवा बिमारी

भोपाल जब शरीर में संक्रमण का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है, तो मरीज का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है. जब शरीर के सभी अंग प्रभावित होते हैं. तो मरीज की मौत भी हो सकती है. रोग की इसी स्थिति को सेप्सिस कहा जाता है. हालांकि इस दुर्लभ बीमारी सेप्सिस के दौरान मरीज के शरीर में स्थित संक्रमण का जल्द से जल्द पता लगाने की जरुरत होती है. जिससे मरीज की जान बचाई जा सके, लेकिन अब तक कोई ऐसी तकनीकी नहीं थी, जिससे 15 से 20 मिनट में संक्रमण का पता लगाया जा सके. जिससे इस बीमारी से पीड़ित अधिकतर मरीजों की मृत्यु हो जाती है. पहले टेस्ट रिपोर्ट आने में 3 दिन का लगता था समय बता दें कि ऑटोप्सी के दौरान पहले कल्चर रिपोर्ट आने में 3 से 4 दिन का समय लगता था, लेकिन अब प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट से 15 से 20 मिनट में डॉक्टर मरीज के शरीर में संक्रमण का पता लगा सकेंगे. इस शोध को अमेरिका के बाल्टीमोर में हाल में ही आयोजित 77वें अमेरिकन एकेडमी ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया. इस शोध के जरिए जो टूल बनाया गया है, उससे मरीज के शरीर में संक्रमण के स्तर का पता बहुत ही कम समय में लगाया जा सकता है. एम्स भोपाल में पारिसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग की हेड डॉ. अरनीत अरोरा ने बताया कि “पॉइंट ऑफ केयर टूल मरीजों के इलाज में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. इस शोध में ऑटोप्सी के दौरान सेप्सिस का पता लगाने के लिए प्रोकैल्सिटोनिन (पीसीटी) बायोमार्कर का उपयोग किया गया है. यह टूल 15 से 30 मिनट में बता देता है संक्रमण बता दें कि यह टूल एक सरल विधि पर कार्य करता है, इसके लिए पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के शरीर से केवल एक बूंद खून और अंग का नमूना लिया जाता है. प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट के जरिए 10 से 15 मिनट में परिणाम मिल जाते हैं. इसकी ग्रेडिंग होती है. जो 05 से 50 के पार तक होती है. यदि अंक 10 से ऊपर हैं, तो यह संकेत देता है कि मृतक के शरीर में संक्रमण का स्तर बहुत अधिक था. यह टेस्ट मरीज के जीवित रहते भी किया जा सकता है, जैसे कल्बर टेस्ट. यह 15 से 30 मिनट में बता देता है कि शरीर में संक्रमण किस स्तर तक फैल चुका है, इससे पहले कल्बर टेस्ट (जिसकी रिपोर्ट दिन में आती है) पर ही निर्भर रहना पड़ता था. भारत में अभी केवल एम्स भोपाल में हुआ शोध दरअसल, कल्चर टेस्ट की रिपोर्ट में 3 दिन लगते थे, जिससे इलाज में देरी होती थी. बॉयोकेमिस्ट्री की मशीनों से प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट में 3 घंटे लगते थे, जो ऑटोप्सी के लिए उपयुक्त नहीं था. भारत में अभी यह शोध केवल एम्स भोपाल में हुआ है. विदेशों में जर्मनी और फ्रांस जैसे कुछ देशों में ही सीमित संस्थान इसका उपयोग करते हैं. देश में ऐसी तकनीक अभी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है. बैक्टीरिया, वायरस के संक्रमण से शुरू होता है सेप्सिस यह टूल मरीजों को तुरंत सही इलाज दिलाने में मदद करेगा. सेप्सिस की जल्द पहचान से जान बचाने की संभावना बढ़ेगी. अस्पताल में भर्ती मरीजों का समय पर यह टेस्ट हो गया तो, संक्रमण के स्तर का पता लगाकर जरूरी दवाएं समय पर देकर उसकी जान बचाई जा सकती है. सेप्सिस एक जानलेवा स्थिति है, जो शरीर में बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होने वाले गंभीर संक्रमण से शुरू होती है. यह तब होता है, जब शरीर का इम्यून सिस्टम संक्रमण से लड़ते हुए खुद के ऊतकों और अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है. यह आमतौर पर फेफड़े, मूत्र मार्ग या पेट के रास्ते से शुरू हो सकता है. यदि समय पर इलाज न हो तो यह मल्टी-ऑर्गन फेलियर होने से मौत का कारण बन सकता है. अभी 1000 से 1300 रुपये में होती हैं जांच एम्स भोपाल के डायरेक्टर प्रो. अजय सिंह ने बताया कि “अभी तक डॉक्टरों को यह पता नहीं चल पाता था कि मरीज में संक्रमण कितना गंभीर है. प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट से नंबर के आधार पर तुरंत स्थिति स्पष्ट हो जाती है, जिससे सही समय पर सटीक इलाज शुरू हो सकता है. यह चिकित्सा क्षेत्र में तेज और प्रभावी निदान को दिशा में इनोवेशन ला सकता है. अभी तक 100 केस पर टेस्ट किए गए हैं, 300 और केस के बाद निष्कर्ष निकाले जाएंगे. यह टूल सेप्सिस की त्वरित पहचान कर इलाज को आसान बनाएगा. इसकी लागत करीब 1000 रुपए से 1300 तक प्रति टेस्ट है.”

गर्मी में कूनो नेशनल पार्क में चीता शावकों के लिए एक नई जीवन रेखा मिली, लगाया सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर लिफ्ट सिस्टम

श्योपुर  इस गर्मी में कूनो नेशनल पार्क में चीता शावकों के लिए एक नई जीवन रेखा मिली है। यह है सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर लिफ्ट सिस्टम। इसने उन्हें भीषण गर्मी और कठोर परिस्थितियों से बचने में मदद की है। जून में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया था। इससे पानी के स्रोतों पर बहुत दबाव पड़ा। मई 2023 में, नामीबियाई चीता ज्वाला के तीन शावकों की अत्यधिक गर्मी के कारण राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश में मौत हो गई थी। उस अनुभव से सीख लेकर, अधिकारियों ने एक सौर ऊर्जा से चलने वाला सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम कूनो नदी से पानी पंप करता है और इसे 8.6 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पार्क के अंदर 15 से अधिक स्थानों पर स्प्रिंकलर और पानी की तश्तरियों तक पहुंचाता है। कूनो नदी से पानी निकालकर जंगल में ला रहे अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक और चीता परियोजना निदेशक, उत्तम कुमार शर्मा ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि कूनो नदी से पानी निकालकर, इसे किलोमीटर दूर ले जाकर, स्प्रिंकलर का उपयोग करके हरे-भरे स्थान बनाना, और पानी की उपलब्धता में सुधार करना, खासकर मां और नवजात शावकों के लिए, एक नियोजित तरीके से, काफी सफल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पानी का महत्व केवल इसकी अनुपस्थिति में महसूस होता है और यह कूनो में गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा महसूस होता है… ‘लू’ नामक गर्म हवाओं और 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास के तापमान में, वन्यजीवों, विशेष रूप से युवाओं के लिए जीवन बहुत कठिन हो जाता है। 17 शावक हैं जीवित 2022-23 में, 20 अफ्रीकी चीतों को कूनो लाया गया था। तब से, भारत में 26 शावक पैदा हुए हैं। इनमें से 17 जीवित बचे हैं। दक्षिण अफ्रीकी चीता वीरा ने फरवरी 2025 में दो शावकों को जन्म दिया। एक अन्य दक्षिण अफ्रीकी चीता, निर्वा ने अप्रैल में पांच शावकों को जन्म दिया। निर्वा के दो शावकों की मौत हो गई, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि बाकी ठीक हैं। उन्होंने कहा कि शावक पहली बार ऐसी कठोर परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। मां और उनके बच्चे दोनों नियमित रूप से पानी के बिंदुओं का उपयोग कर रहे थे, जो इस पहल की सफलता का संकेत है। शावकों को गर्मी से राहत पहले, गर्मी के कारण शावकों की मौत हो जाती थी। इसलिए, इस बार अधिकारियों ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। उन्होंने कूनो नदी से पानी निकालने के लिए सोलर पंप लगाए। फिर पाइपलाइन से पानी को जंगल में अलग-अलग जगहों पर पहुंचाया गया। इससे शावकों और उनकी मां को गर्मी से राहत मिली। उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि पानी की कमी होने पर ही इसका महत्व पता चलता है। कूनो में गर्मी के मौसम में यह बात सच साबित होती है। लू चलने और तापमान 48 डिग्री तक पहुंचने पर जानवरों के लिए जीना मुश्किल हो जाता है। खासकर छोटे शावकों के लिए। अधिकारियों ने बताया कि वीरा और निर्वा के शावक पहली बार इतनी गर्मी देख रहे हैं। लेकिन वे पानी के लिए बनाए गए पॉइंट्स पर जा रहे हैं। इससे पता चलता है कि यह योजना सफल हो रही है।

छिंदवाड़ा से सिवनी तक फोरलेन के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ प्रयासों की आवश्कता, किसान और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

छिंदवाड़ा नेशनल हाइवे 347 को छिंदवाड़ा से सिवनी तक फोरलेन में तब्दील करने के लिए मांग उठने लगी है. एनएचएआई (National Highways Authority of India) के तय मानकों के अनुकूल टू लेन हाइवे को फोरलेन में अपग्रेड करने के लिए सभी खूबियां मौजूद हैं. सबसे ज्यादा जरूरी ट्रैफिक की स्थिति होती है. यहां पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) का 10 हजार से अधिक का आंकलन किया गया है. एनएचएआई के मानकों के अनुकूल 10 हजार पीसीयू में फोरलेन का निर्माण किया जा सकता है. छिंदवाड़ा से सावनेर तक फोरलेन बनाने का गडकरी ने किया था वादा छिंदवाड़ा से सावनेर तक एनएच 547 को फोरलेन में तब्दील करने की मांग स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जताई है. सौंसर के बजाज तिराहे से राजना जोड़ तक फोरलेन की मांग पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पूर्व में आश्वासन दे चुके हैं. छिंदवाड़ा से सिवनी तक फोरलेन के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ प्रयासों की आवश्कता है. अभी छिंदवाड़ा-सिवनी 2 लेन हाइवे की ये स्थिति छिंदवाड़ा से सिवनी तक टू लेन हाइवे की लंबाई 70 किलोमीटर है. चौड़ाई 24 से 36 मीटर तक है. फोरलेन में 45 से 60 मीटर तक चौड़ाई की आवश्कता होगी. छिंदवाड़ा से सिवनी के बीच सिर्फ दो नदियां पड़ती हैं. पहली झिलमिली के पास पेंच नदी पर बड़ा पुल बना हुआ है. दूसरी लखनवाड़ा में बैनगंगा नदी, जहां नए सिरे से पुल निर्माण की आवश्कता होगी. किसान और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा चौरई विधायक सुजीत सिंह चौधरी ने बताया कि, ”जिला महानगरों की तर्ज पर विकसित हो रहा है. यहां वेस्टर्न कोल फील्ड्स की कोयला खदानें पहले से संचालित हैं. बड़ी औद्योगिक इकाइयां भी जिले में स्थापित हैं. कृषि आधारित उद्योग भी छिंदवाड़ा-पांढुर्ना में स्थापित किए जाने हैं. ढाई हजार करोड़ की पेंच व्यपवर्तन सिंचाई परियोजना लगभग पूरी हो गई है. कन्हान नदी पर 4 हजार करोड़ लागत वाले छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स पर काम जारी है. फोरलेन बनने से इनको बढ़ावा मिलेगा.” सिवनी मंडी में सब्जी बेच सकेंगे किसान इस नेशनल हाईवे के बन जाने से किसानों को भी फायदा पहुंचेगा. क्योंकि छिंदवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा सब्जी उत्पादक किसान हैं, जो सिवनी सब्जी मंडी से जुड़ जाएंगे. क्योंकि सिवनी की सब्जी मंडी में महाराष्ट्र के गोंदिया और छत्तीसगढ़ के रायपुर से व्यापारी पहुंचते हैं, ताकि किसानों को अपनी सब्जियों के अच्छे दाम मिल जाते हैं. इस नेशनल हाईवे के बन जाने से छिंदवाड़ा का किसान भी सिवनी सब्जी मंडी में अपनी फसल लेकर जा सकता है. हाइवे पर हादसों को रोकने में मिलेगी मदद यातायात विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, टू लेन हाइवे को फोरलेन में बदलकर सड़क दुर्घटनाओं को भी कम किया जा सकेगा. जिले में हाइवे पर हादसों के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2024 में 550 से ज्यादा दुर्घटनाएं हुई थीं, जिसमें 200 से ज्यादा जाने गई थीं. वहीं, इस साल जनवरी से 31 मई तक कुल 556 हादसे हुए हैं. जिनमें 718 घायल हुए, जबकि 218 की जान गई. इनमें अधिकांश हादसे हाईवे पर ही हुए. फोरलेन बनाने के लिए जरूरी मापदंड पूरे करता है हाईवे सबसे जरूरी पैसेंजर कार यूनिट 10 हजार से ज्यादा है, जो फोरलेन के लिए तय मानकों के अनुसार है. पहाड़ी या घाटी वाला क्षेत्र नहीं है, फॉरेस्ट भी बहुत कम मात्रा में है. मैदानी या समतल हिस्सा ज्यादा है. छिंदवाड़ा से सिवनी के बीच रोड अलाइ‌मेट के बदलने की आवश्यकता नहीं है. टू लेन को आसानी से फोरलेन में तब्दील किया जा सकता है. मेजर रोड कनेक्टिविटी भी पर्याप्त है. हाईवे नागपुर और जबलपुर से जुड़ेगा, सिवनी से बालाघाट के लिए भी आसानी होगी. बंडोल से चौरई व चौरई से रेमंड चौक तक स्टेट हाइवे कनेक्ट है. चौरई में बायपास पहले ही बना हुआ है. 70 किमी के हाइवे पर दूसरी बड़ी बसाहटें नहीं है. तीन बसाहटों ईसरा उमरिया, झिलमिली और लखनवाड़ा में पहले ही फोरलेन के अनुसार चौड़ी सड़क बनी हुई है.

सर्पदंश की घटनाओं के नियंत्रण के लिए जिलों के कलेक्टर को आवश्यक तैयारी एवं जन जागरूकता सुनिश्चित करने के लिये निर्देश जारी

भोपाल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गृह विभाग ने वर्षाकाल के दृष्टिगत सर्पदंश की घटनाओं के नियंत्रण एवं बेहतर प्रबंधन के लिए सभी जिलों के कलेक्टर को आवश्यक तैयारी एवं जन जागरूकता सुनिश्चित करने के लिये निर्देश जारी किये हैं। सर्प-दंश स्थानीय आपदा घोषित है, इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए हर ज़िले के लिए 23.17 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि का उपयोग प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, मॉक ड्रिल, उपकरण की व्यवस्था और प्रचार-प्रसार जैसे कार्यों में किया जाएगा। वर्षाकाल में सर्पदंश की संवेदनशीलता वर्षा ऋतु में सांपों के प्राकृतिक आवासों में जलभराव हो जाने से वे मानव बस्तियों की ओर आ जाते हैं, जिससे सर्प-दंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, खेतों, नदी किनारे एवं बस्तियों की परिधियों में यह खतरा अधिक होता है। उक्त के प्रति लोगों में जागरूकता लाना, तथा प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाना अति आवश्यक है। सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे पंचायत एवं शहरी वार्ड स्तर पर जागरूकता अभियान संचालित करें। स्कूलों, आंगनबाड़ियों और सामुदायिक स्थलों पर जागरूकता सत्र आयोजित हों। सोशल मीडिया, रेडियो, दीवार लेखन, बैनर-पोस्टर एवं लोक-प्रदर्शन (नुक्कड़ नाटक आदि) के माध्यम से सूचना का व्यापक प्रसार किया जाए। निर्देशों में कहा गया है कि सर्पदंश के प्रति संवेदनशील इलाकों में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर ‘सर्प मित्र’, सिविल डिफेंस वालंटियर्स एवं स्नेक-कैचर्स की टीम बनाई जाए। स्नेक-कैचर्स का डाटाबेस करें तैयार, हेल्पलाइन नंबर करें जारी शासन द्वारा यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी जिलों में ‘स्नेक-कैचर्स’ और ‘सर्प मित्रों’ का विस्तृत डाटाबेस तैयार कर, उन्हें पंचायत/वार्ड स्तर पर नियुक्त किया जाए। सर्प मित्रों के हेल्पलाइन नंबर जारी कर व्यापक प्रचार भी किया जाए। इन मित्रों को स्नेक रेस्क्यू किट, फर्स्ट एड किट एवं आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे वे सर्पदंश की स्थिति में त्वरित और सुरक्षित बचाव कार्य कर सकें। अस्पतालों में एंटी-वेनम व उपचार की समुचित व्यवस्था के निर्देश शासकीय चिकित्सा संस्थानों में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयाँ, उपकरण और पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम स्टॉक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं जिला अस्पतालों में नागरिकों को प्राथमिक उपचार, चेतावनी संकेत, तथा सर्पदंश से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी देने वाले सूचना बोर्ड प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है। आपदा प्रबंधन योजना में सर्प-दंश को शामिल कर बनायें योजना जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे जिला आपदा प्रबंधन योजना में सर्प-दंश को स्थानीय आपदा के रूप में शामिल करें। इसके तहत पूर्व वर्षों की घटनाओं का जोखिम मूल्यांकन, प्रभाव क्षेत्र और प्रभावित वर्गों की पहचान कर एसओपी तैयार किया जाए। जीआईएस आधारित मैपिंग करते हुए डिजिटल डाटाबेस बनाया जाए, जिसमें घटनाओं की संख्या, स्थान, सांप की प्रजाति, एवं मृत्यु/रोगी की जानकारी सहेजी जाए। सर्पदंश से बचाव के लिए सावधानियाँ एवं सलाह जन सामान्य को सलाह दी गई है कि वे वर्षा ऋतु में विशेष सतर्कता बरतें। खेतों में कार्य करते समय जूते-मोज़े पहनें, गहरे रंग के कपड़े पहनें और हाथों में दस्ताने लगाएं। झाड़ियों, पुआल के ढेर, लकड़ी के गट्ठर आदि स्थानों में काम करने से पहले वहां डंडे या लाठी से हल्का प्रहार करें। अंधेरे में टॉर्च का उपयोग करें और बच्चों को बिना देखरेख खुले स्थानों पर न भेजें। घर के आसपास साफ-सफाई रखें, झाड़ियाँ काटें और कूड़ा-कचरा हटाएं। घरों की दीवारों में मौजूद दरारें बंद करें और खुले में सोने से परहेज़ करें। यदि किसी को सर्प ने डस लिया हो तो घबराएं नहीं, शरीर को शांत रखें और तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुँचें। घाव को चाकू से काटना, चूसना या उस पर कोई रसायन लगाना अत्यंत हानिकारक है। झाड़-फूंक, टोना-टोटका या तांत्रिक क्रियाओं में समय न गंवाएं। यह समय जीवन रक्षक हो सकता है, इसलिए हर क्षण अमूल्य है। सर्पदंश ग्रसित व्यक्ति को यथाशीघ्र अस्पताल ले जाएं। यदि संभव हो तो सांप का रंग, लंबाई या कोई चित्र याद रखें लेकिन उसे मारने या पकड़ने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे और खतरा हो सकता है। कई बार सांप विषैला नहीं भी होता, पर उपचार में देर जानलेवा साबित हो सकती है। सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे सर्प-दंश से संबंधित इस आपदा को गंभीरता से लें। शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंध तभी प्रभावी होंगे जब नागरिक स्वयं भी सावधानी बरतेंगे, समय पर उपचार लेंगे और जागरूकता फैलाने में सहयोग करेंगे। संयुक्त प्रयासों से ही सर्पदंश से होने वाली जनहानि को नियंत्रित किया जा सकता है।  

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