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ऐतिहासिक मंदिरों के आस-पास नदी, तालाब, बावड़ी संरक्षित करना हमारा कर्तव्य: उपमुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री एवं सागर ज़िले के प्रभारी मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि ऐतिहासिक मंदिरों के आस-पास नदी, तालाब, बावड़ी, कुआँ, आदि स्थापित जलस्रोत को संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है। आज इनमें से कई जल स्रोत लगभग विलुप्त होने की कगार पर हैं और अत्यधिक प्रदूषित भी हैं। जल जीवन का अभिन्न घटक है और इसकी प्रत्येक बूंद को बचाना हमारी आवश्यकता और जिम्मेदारी है। हर तरह के जल स्रोत का संरक्षण हम सबको करना चाहिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने जल गंगा संवर्धन अभियान में सागर के भूतेश्वर मंदिर प्रांगण में जनप्रतिनिधियों के साथ प्राचीन जलस्रोत की साफ-सफाई कार्य में सहभागिता की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने भूतेश्वर मंदिर में बने प्राचीन बावड़ी कुआँ से कचरा निकाल कर सफाई एवं जीर्णोद्धार अभियान प्रारम्भ किया। उन्होंने प्रांगण के विकास कार्यों की जानकारी ली और कहा कि प्राचीन सिद्ध स्थलों व मंदिरों का संरक्षण महत्वपूर्ण है। बताय ा गया कि भूतेश्वर महादेव मंदिर सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर पत्थरों से निर्मित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नगर पालिक निगम सागर द्वारा लगभग 100 कुओं की साफ-सफाई कर इन्हें पुनः उपयोगी बनाया जा रहा है इनके जल को पीने योग्य बनाने के लिये किये जा रहे सफाई व जीर्णोद्धार कार्य और ऐतिहासिक जलस्रोतों के संरक्षण का यह कार्य सराहनीय है। विधायक श्री शैलेन्द्र जैन, महापौर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी, निगमाध्यक्ष श्री वृंदावन अहिरवार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि विभागीय अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। 

मृतक राजा रघुवंशी के परिवार ने हत्याकांड में काले जादू या नरबलि की आशंका भी जताई थी: कामाख्या मंदिर प्रशासन

इंदौर  इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड ने देश भर के लोगों को हिला कर रख दिया है। इस मामले में रोज कुछ न कुछ नया सामने आ रहा है। नर बलि के आरोपों पर अब कामाख्या देवी माता मंदिर प्रशासन का बयान सामने आया है। उन्होंने इस तरह के आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई है। दरअसल, हाल ही में मृतक राजा रघुवंशी के परिवार ने हत्याकांड में काले जादू या नरबलि की आशंका भी जताई थी। मृतक के परिजनों ने कहा था कि हो सकता है कि सोनम ने किसी और के साथ रहने के लिए असम में कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन किए और फिर पति कि बलि चढ़ा दी। नरबलि के आरोपों पर जवाब देते हुए मंदिर प्रशासन ने कहा कि राजा रघुवंशी का शव मेघालय में मिला था। मंदिर में ऐसा कोई भी काम नहीं किया जाता है। मंदिर के पुजारी सरू डोलोई हिमाद्रि ने कहा, “हम इस तरह के बयानों की निंदा करते हैं। कामाख्या मंदिर में मानव बलि की कोई रस्म नहीं है। सदियों से कामाख्या मंदिर अपने वैदिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। यहां मानव बलि जैसा कोई भी काम नहीं किया जाता है। इस मामले के अलावा भी, जब भी कामाख्या मंदिर के आसपास कोई हत्या का मामला होता है तो मंदिर में मानव बलि का मुद्दा उठाया जाता है।” हिमाद्रि ने कहा, “राज्य और केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी इस तरह के बेबुनियाद आरोपों से ऐतिहासिक कामाख्या मंदिर की छवि को खराब न करे। इस तरह के आरोपों से यहाँ के लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। , हर साल देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु कामाख्या मंदिर आते हैं। इस तरह के आरोपों से मंदिर की छवि खराब होगी, जिसकी उम्मीद नहीं है। मेरी आसम सरकार के विनती है कि इसको लेकर सख्त नियम बनाए जाएं ताकि देश के प्रतिष्ठित शक्ति पीठों में से एक कामाख्या माता मंदिर पर ऐसे आरोप न लगाए जा सकें।” गौरतलब है कि रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम की शादी 11 मई को हुयी थी और वे हनीमून ट्रिप पर गुवाहाटी और मेघालय गये थे। वे 20 मई को मेघालय पहुंचे और 23 मई को मेघालय के सोहरा के नोंग्रियाट गांव में एक होमस्टे से दोनों लापता हो गये, जिसके बाद पुलिस ने दो जून को चेरापूंजी में एक झरने के पास एक घाटी से रघुवंशी का शव बरामद किया, जबकि सोनम लापता रही। बाद में, नौ जून को इंदौर और उत्तर प्रदेश की पुलिस ने सोनम को गाजीपुर में एक ढाबे से हिरासत में लिया। इसके अलावा, चार अन्य को भी गिरफ्तार कर लिया। मेघालय पुलिस ने सोनम सहित सभी पांच संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित हत्या है और सोनम ने ही इस हत्या को अंजाम देने के लिए राजा रघुवंशी को पूर्वोत्तर में बहला-फुसलाकर बुलाया था।  

अहमदाबाद विमान हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी सवार थे, जिनका इस हादसे में मौत निधन

इंदौर अहमदाबाद में एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर प्लेन क्रैश का बड़ा हादसा हुआ है। इसमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी सवार थे, जिनका इस हादसे में मौत निधन हो गया है। विमान के गिरते ही पूरा इलाका धुएं के गुबार ढक गया था। इसमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित 242 पैसेंजर सवार थे, जिसमें 56 ब्रिटिश और 6 पुर्तगाल नागरिक भी थे। विजय रूपाणी लंदन अपनी बेटी व पत्नी से मिलने के लिए जा रहे थे। विजय रूपाणी का नाम गुजरात भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं में आता है। वह भाजपा के उन खांटी नेताओं में गिने जाते हैं, जो शुरू से पार्टी से जुड़े रहे। इसका इनाम भी उनको मिला। उन्होंने 2014 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता था। 2016 में आनंदीबेन पटेल को हटाकर उनको राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया।   म्यांमार हुआ था जन्म 2 अगस्त 1956 को विजय रूपाणी का जन्म म्यांमार की राजधानी रंगून में हुआ था। उनके पिता वहां बिजनेस किया करते थे, लेकिन उनके जन्म के ठीक 4 साल बाद वह राजकोट लौट आए थे। उन्होंने राजकोट में ही शिक्षा प्राप्त की थी। युवा दौर में ही राष्ट्रवादी विचारों से थे प्रेरित विजय रूपाणी का छात्र जीवन से राष्ट्रवादी विचारों की तरफ झुकाव था। ऐसे में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर छात्र राजनीति की शुरुआत की। 1971 में जनसंघ से जुड़कर राजनीतिक मैदान में उतरे। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना होने पर उसकी सदस्यता ले ली। ऐसे में वह पार्टी से उसके स्थापना काल से जुड़े थे। इमरजेंसी में इंदिरा गांधी को ललकारा विजय रूपाणी इमरजेंसी के दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ मुखर रहे। उनको 1976 में पुलिस ने पकड़ लिया था। 11 महीने उन्होंने भावनगर और भुज की जेल में बिताए। 1987 में उन्होंने चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। राजकोट नगर निगम का चुनाव लड़ा। 1996 से 1997 तक वह राजकोट के मेयर पद पर रहे। उसके बाद उनको संगठन में तरजीह दी गई। वह 1998 में भाजपा गुजरात इकाई के महासचिव रहे। 2006 में उनको गुजरात पर्यटन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2006 में उनको पार्टी ने राज्यसभा भेजा।   2014 में लड़ा पहला विधानसभा चुनाव, 2016 में बन गए सीएम वाजुभाई वाला को केंद्रीय नेतृत्व ने राज्यपाल बना दिया था। उनको अपनी सीट से इस्तीफा देना पड़ा। उस सीट पर चुनाव लड़ने का विजय रूपाणी को मौका मिला। वह पहली बार विधानसभा पहुंचे। नवंबर 2014 में आनंदीबेन पटेल की सरकार ने पहला मंत्रीमंडल विस्तार किया, तो उनको परिवहन, जल आपूर्ति, श्रम और रोजगार मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया। पार्टी ने उनको संगठन की भी जिम्मेदारी सौंपी। वह फरवरी 2016 से लेकर अगस्त 2016 तक बीजेपी के स्टेट प्रेसिडेंट बने। उसके बाद 5 अगस्त 2016 को आनंदीबेन पटेल की जगह उनको गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया।

ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है, मध्यप्रदेश में बिजली सरप्लस

बिजली उपभोक्ताओं के घर पहुंचकर ऊर्जा मंत्री ने सुनी समस्याएं  ऊर्जा मंत्री ने विद्युत वितरण केन्द्र पहुंचकर निरीक्षण किया, उपभोक्ताओं से सीधे फोन पर बात कर निराकरण किया ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है, मध्यप्रदेश में बिजली सरप्लस  ग्वालियर  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर गुरुवार सुबह 4 बजे भोपाल एक्सप्रेस से ग्वालियर पहुंचते ही एक्शन में नजर आए। उन्होंने रेलवे स्टेशन से महाराजपुरा विद्युत वितरण केन्द्र पहुंचकर निरीक्षण किया तथा एफओसी के तहत दर्ज विद्युत शिकायतों का, उपभोक्ताओं से सीधे फोन पर बात कर निराकरण किया। तोमर ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी परिस्थिति में बेवजह का विद्युत अवरोध नहीं होना चाहिए। यथासंभव उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ऊर्जा मंत्री तोमर के साथ मुख्य अभियंता अमित श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता नितिन मांगलिक, कार्यपालन अभियंता श्रीनिवास यादव के अलावा अन्य अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने महाराजपुरा विद्युत वितरण केन्द्र का निरीक्षण करने के उपरांत ग्वालियर के गोवर्धन कॉलोनी, सैनिक कॉलोनी, दीनदयाल नगर, शताब्दीपुरम सहित कई इलाकों में जाकर नागरिकों से प्रत्यक्ष संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और सुधार के लिये तत्काल निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी तकनीकी खामियां समयबद्ध रूप से दुरुस्त की जाएँ, ताकि नागरिकों को निर्बाध व गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा उपलब्ध हो सके। ऊर्जा मंत्री तोमर ने इस दौरान उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर विद्युत समस्याओं को सुना और उनका त्वरित निराकरण किया।  उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में पंखे कूलर और एसी का उपयोग आवश्यक है, लेकिन ऐसा कोई कार्य ना करेंजिससे बिजली आपूर्ति में कोई व्यवधान आए। ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ताओं से कहा कि वह ऊर्जा विभाग का सहयोग करें। सामने आ रही बिजली की समस्या के निदान के लिए यह सेवक और पूरा ऊर्जा विभाग मैदान में है। बिजली की खपत बढ़ने से ट्रांसफार्मर पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार से बचने का तरीका यह है कि उपभोक्ता अपनी घरेलू बिजली का लोड बढ़वाएं तथा वैध विद्युत कनेक्शन लेकर ही बिजली का उपयोग करें। ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है, मध्यप्रदेश में बिजली सरप्लस है, लेकिन तकनीकी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने अपील की कि अगर हम बिजली कंपनी का सहयोग करें, तो तकनीकी समस्याओं को दूर करने में काफी हद तक निजात पाई जा सकती है। विद्युत आपूर्ति व्यवस्था का निरीक्षण करने के उपरांत ऊर्जा मंत्री तोमर सीधे न्यू कॉलोनी कांच मील स्थित नवीन पार्क पहुंचे तथा यहां सफाई दूतों के साथ स्वर्गीय देवेन्द्र सिंह तोमर मार्ग  पर झाड़ू लगाकर सफाई अभियान में हिस्सा लिया।  

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विभागीय समीक्षा के दौरान लापरवाह अधिकारियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिये

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ग्वालियर वृत्त अंतर्गत संचारण संधारण डबरा संभाग में विद्युत आपूर्ति सेवाओं के दौरान अनधिकृत रूप से अनुपस्थित होने एवं कार्य में लापरवाही बरतने के कारण डबरा विद्युत संभाग में पदस्थ उप महाप्रबंधक शुभम कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। गौरतलब है कि गत दिवस ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विभागीय समीक्षा के दौरान लापरवाह अधिकारियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिये थे। निलंबन अवधि में शुभम कुमार का मुख्यालय वृत्त कार्यालय श्योपुर नियत किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने सभी अमले को समझाइश दी है कि कार्य में पारदर्शिता, लगन, निष्ठा और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बरदाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कंपनी में जीरो टोलरेंस की नीति लागू है और सभी मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे उपभोक्ता सेवाओं और कंपनी की उत्तरोत्तर तरक्की के लिए निरन्तर प्रयास करते रहें। प्रबंध संचालक ने कहा है कि निर्बाध विद्युत आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के विरुद्ध कंपनी द्वारा सख्त कार्यवाही की जाएगी।  

प्रदेश में 4197 पीवीटीजी गांव के अंतर्गत 11 लाख 67 हजार 373 परिवार इस योजना के तहत लाभांवित हुए

पीवीटीजी के 7.84 लाख परिवारों के हर घर में नल और हर नल से जल हर घर में नल हर नल में जल योजना के तहत 6019.95 लाख रूपये की राशि स्वीकृत की गई प्रदेश में 4197 पीवीटीजी गांव के अंतर्गत 11 लाख 67 हजार 373 परिवार इस योजना के तहत लाभांवित हुए  भोपाल पीएम जनमन योजना के अंतर्गत (पीवीटीजी) विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के परिवारों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दृष्टि से अन्य योजनाओं के साथ पेयजल आपूर्ति के लिये 360 पीवीटीजी गांवों के 7 लाख 84 हजार 327 घरों में नल कनेक्शन जारी किये गये है। प्रधानमंत्री जनमन आदिवासी न्याय महाअभियान के अंतर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा जनजाति संवर्ग के उत्थान के लिये इस योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशा के अनुरूप नल-जल योजना भी विभिन्न क्षेत्रों दी जा रही सुविधाओं में से एक है। मध्यप्रदेश में 4197 पीवीटीजी गांव है। इसके अंतर्गत 11 लाख 67 हजार 373 परिवार इस योजना के तहत लाभांवित हुए है। वर्ष 2027 तक अधिकांश गांवों को सतही जल योजना के माध्यम से कवर कर लिया जाएगा। हर घर में नल हर नल में जल योजना के तहत 6019.95 लाख रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। 432 बसाहटों में से 192 बसाहटों कार्यपूर्ण किया जा चुका है। शेष 240 बसाहटों को कार्य 30 जून 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। 60 गांव हुए नल – जल युक्त लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के माध्यम से प्रदेश के 400 स्वीकृत पीवीटीजी गांवों में से 60 गांवों में के हर घर में नल जल संचालित है। अभी 340 गांवों में कार्य प्रगति पर है। कार्य पूर्ण हो चुके गांव में 61 प्रतिशत के साथ दतिया प्रथम स्थान पर है इसके पश्चात 58 प्रतिशत सैचुरेरडे गांव के साथ ग्वालियर के 134 गांव में से 78 गांव में नल जल योजना का कार्य पूरा हो चुका है। शिवपुरी में सर्वाधिक स्वीकृत 592 गांव में से 97 गांव में नल जल योजना का काम पूरा हो चुका है। 495 गांवों कार्य प्रगति पर है। दूसरे नबंर पर शहडोल के 431 स्वीकृत गांवों में से 208 गांव में नल जल का कार्य पूर्ण हो चुका है शेष 223 गांव में कार्य प्रगति पर है। पीएम जनमन योजन के अंतर्गत जनजाति बसाहट वाले गांवों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के माध्यम से सामुदायिक जल आपूर्ति का काम प्रचलन में है। आगामी दो वर्षो में इस योजना के अंतरित लक्ष्य प्राप्ति प्रस्तावित है।      

हरित क्षेत्र से जुड़े विषय-विशेषज्ञों के होंगे व्याख्यान

प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिये 13 जून को कार्यशाला अमृत हरित कार्यशाला भोपाल के रवीन्द्र भवन में हरित क्षेत्र से जुड़े विषय-विशेषज्ञों के होंगे व्याख्यान भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा शुक्रवार 13 जून को प्रात: 8:30 बजे राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में अमृत हरित अभियान पर केन्द्रित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में हरित क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों और पहलों का प्रसार करना है। कार्यशाला में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, महापौर, निकायों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और जन-प्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यशाला में प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। प्रत्येक नगर निगम से 6, नगरपालिका परिषद से 4 और नगर परिषद से 2 प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गयी है। कार्यशाला के दौरान कृषि और उद्यानिकी से संबंधित उत्पादों एवं यंत्रों की प्रदर्शनी के साथ ही नर्सरी प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जायेगा। कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों जैसे इफ्को एवं भारतीय प्रबंध संस्थान के विषय-विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की जायेगी। कार्यशाला में स्थानीय वृक्ष प्रजातियों की विशेषताएँ एवं संरक्षण, जैव-विविधता एवं जलवायु परिवर्तन, बागीचों के लिये तकनीक एवं उपकरण की आवश्यकताएँ, वृक्षारोपण और पौध-रोपण से संबंधित अधिनियमों का विश्लेषण तथा वृक्षारोपण उपरांत समुचित प्रबंधन विषय पर चर्चा की जायेगी। हरित क्षेत्र बढ़ाने की रणनीतियाँ कार्यशाला में दिव्यांग पार्क, नर्मदापुरम एवं उज्जैन की सफलता की कहानियों को भी साझा किया जायेगा। इन कहानियों पर आधारित फिल्म का विशेष प्रस्तुतिकरण किया जायेगा। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण समस्त नगरीय निकायों में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से किया जायेगा। सीधे प्रसारण से राज्य के सभी निकाय इस अभियान से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही पौध-रोपण कार्य से जुड़े शासकीय और अशासकीय संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यशाला में भाग लेंगे। कार्यशाला में होंगे 3 सत्र उद्घाटन सत्र में कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों का उद्बोधन होगा। प्रथम सत्र में इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट (आईआईएफएम) के प्रतिनिधि स्थानीय वृक्षों की प्रजातियों की विशेषताओं एवं संरक्षण पर जानकारी देंगे। एप्को के श्री राम रतन जैव विविधता एवं जलवायु परिवर्तन पर, आईआईएफएम के पूर्व प्रो. डी.के. वर्मा बागीचे के लिये तकनीक एवं उपकरण आवश्यकता से संबंधी जानकारी देंगे। द्वितीय सत्र में ‘वूमेन फॉर ट्री’ विषय पर प्रमुख अभियंता श्री प्रदीप एस. मिश्रा का उद्बोधन होगा। समापन सत्र में राम वाटिका सिवनी-मालवा, दोहेला पार्क खुरई की सफलता की कहानी के साथ प्रदेश में हरित विकास संवर्धन के कार्यों की जानकारी दी जाएगी। सत्र का समापन शाम 5 बजे होगा।  

मध्यप्रदेश में कोरोना से एक और मौत, अब तक तीन लोगों ने गंवाई जान, 86 एक्टिव केस

भोपाल  मध्य प्रदेश में कोरोना से एक और मौत हुई है। कोविड 19 डैशबोर्ड से इसकी पुष्टि हुई है। प्रदेश में अब तक कुल तीन लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में कोविड के अब तक 123 मामले सामने आ चुके हैं। वर्तमान में 86 एक्टिव केस है। 11 जून को 21 नए मामले आए सामने भारत में कोरोना की नई लहर में एक्टिव केसों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है। रोजोना सैकड़ों नए केस सामने आ रहे हैं। प्रदेश में बुधवार, 11 जून को कोरोना के 21 नए केस दर्ज किए गए। जो इस साल एक दिन में दर्ज सबसे अधिक मामले हैं। इसके साथ ही 2025 में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 123 हो गई है। इनमें 34 मरीज रिकवर हो चुके हैं। वर्तमान में 86 एक्टिव केस हैं। इन जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी। जानकारी के मुताबिक, महिला रतलाम की रहने वाली थीं और इंदौर के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उन्हें 8 जून को सांस लेने में तकलीफ होने पर भर्ती किया गया था। 10 जून को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई और इसके बाद उन्हें एमआरटीबी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रेफर किया गया, जहां 11 जून को उनकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने नहीं जारी किए जिलेवार आंकड़े प्रदेश में कोरोना की स्थिति को लेकर इंटिग्रेटेड डिजीज सर्विलेंस प्रोग्राम (IDSP) द्वारा अब जिलेवार आंकड़े जारी नहीं किए जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्य अभी भी रोजाना हेल्थ बुलेटिन जारी कर रहे हैं। IDSP के प्रभारी डॉ. अश्विनी भागवत से संपर्क करने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन न तो फोन का जवाब मिला और न ही मैसेज का। साल 2020 में महामारी शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब अधिकारी कोरोना से जुड़ी जानकारी साझा करने से बच रहे हैं। एक दिन में 21 नए केस, अब तक 123 संक्रमित प्रदेश में बुधवार, 11 जून को कोरोना के 21 नए केस दर्ज किए गए। यह इस साल एक दिन में दर्ज सबसे ज्यादा मामले हैं। इसके साथ ही 2025 में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 123 हो गई है। इनमें से 86 एक्टिव केस हैं और 34 मरीज रिकवर हो चुके हैं। अब तक 3 मौतें हुई हैं। इन 3 जिलों की महिलाओं की हुई मौत     रतलाम: 52 वर्षीय महिला, जिन्हें टीबी, ब्रोंकाइटिस और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां थीं। मौत 11 जून को इंदौर में इलाज के दौरान हुई।     खरगोन: 44 वर्षीय महिला, जिन्होंने हाल ही में एमटीएच अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। 6 जून को एमआरटीबी अस्पताल में मृत्यु हुई।     इंदौर: 74 वर्षीय महिला, जिन्हें किडनी की बीमारी थी। 27 अप्रैल को अरबिंदो अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हुई थी। 3 की हो चुकी हैं मौत वहीं प्रदेश में अब तक 3 मौतें हुई हैं। 11 जून को रतलाम जिले की रहने वाली 52 वर्षीय महिला की इंदौर में इलाज के दौरान मौत हो गई। महिला को ब्रोंकियल अस्थमा था। कोविड 19 डैशबोर्ड से इसकी पुष्टि हुई है। इससे पहले खरगोन जिले की 44 वर्षीय महिला, जिन्होंने हाल ही में एमटीएच अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। 6 जून को एमआरटीबी अस्पताल में मृत्यु हुई थी। वहीं इंदौर की 74 वर्षीय महिला, जिन्हें किडनी की बीमारी थी। 27 अप्रैल को अरबिंदो अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हुई थी। कमजोर इम्यूनिटी वाले, गर्भवती महिलाएं रहें अलर्ट भारत में फिलहाल कोरोना का JN.1 वैरिएंट सबसे अधिक देखा जा रहा है। जांच में आधे से ज्यादा सैंपल में यही वैरिएंट पाया गया है। इसके बाद BA.2 (26%) और ओमिक्रॉन सबलाइनज (20%) के मामले मिल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने JN.1 को ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ माना है, यानी इस पर निगरानी बनाए रखने की जरूरत है। भोपाल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव के अनुसार, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा, पुराने रोगियों और गर्भवती महिलाओं को भी कोरोना से संबंधित सभी सावधानियां बरतनी चाहिए। भोपाल और इंदौर में नए केस     भोपाल: अब तक कुल 13 केस सामने आए हैं, जिनमें से 2 नए केस बुधवार को मिले।     इंदौर: अब तक कुल 81 केस दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 12 नए मामले बुधवार को सामने आए।

जल गंगा संवर्धन अभियान से घोड़ा पछाड़ नदी पुनर्जीवित, अन्य सहायक नदियाँ भी प्रवहमान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल संरक्षण की दिशा में जल गंगा संवर्धन अभियान मध्यप्रदेश सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में यह अभियान 30 मार्च से 30 जून तक संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नदियों, जल स्त्रोतों और वेटलैण्ड्स का संरक्षण व पुनर्जीवन है। शासन और समाज के समन्वित प्रयासों से इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। घोड़ा पछाड़ नदी पुनर्जीवित, अन्य सहायक नदियाँ भी प्रवहमान खण्डवा जिले में आम नागरिकों और प्रशासन के सहयोग से नर्मदा की सहायक घोड़ा पछाड़ नदी को पुनर्जीवित किया गया है। अंधाधुंध भू-जल दोहन के कारण यह नदी और आसपास की कई छोटी नदियाँ सूख चुकी थीं, जिससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही थी। रिज टू वैली सिद्धांत पर आधारित जल संरचनाओं के निर्माण से लगभग 33 किलोमीटर क्षेत्र में जल संचय किया गया। परिणामस्वरूप घोड़ा पछाड़ नदी में फिर से जल प्रवाह शुरू हो गया है, जिससे वर्ष भर इन नदियों के प्रवहमान रहने की संभावनाएं बनी हैं। राज्य की नदियों का सर्वेक्षण और जल शोधन संयंत्रों की स्थापना मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नर्मदा, चंबल, क्षिप्रा, बेतवा, सोन, टोंस, ताप्ती, कान्ह, माही, सिंध, और बेनगंगा सहित प्रमुख नदियों का सर्वेक्षण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि 158 नालों से प्रतिदिन लगभग 450 मिलियन लीटर घरेलू अपशिष्ट जल सीधे इन नदियों में बहाया जा रहा है। इस स्थिति में सुधार के लिए नगरीय विकास विभाग द्वारा 869 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) की स्थापना की जा रही है। वेटलैण्ड संरक्षण में मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका वर्ष 2002 में जहां मध्यप्रदेश में केवल एक रामसर साइट थी, वहीं आज यह संख्या बढ़कर पाँच हो चुकी है। साथ ही इंदौर को देश का पहला वेटलैण्ड सिटी घोषित किया जाना राज्य के लिए गौरव की बात है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण ने 2.25 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले 13,565 वेटलैण्ड्स का भौतिक सत्यापन और सीमांकन समय-सीमा में पूर्ण किया है। इंदौर नगर निगम एवं एप्को ने मिलकर शहर के 330 पारंपरिक कुएं और बावड़ियों का संरक्षण कार्य किया है। यह पहल शहर की जल-परंपरा को पुनर्जीवित करने में सहायक सिद्ध हो रही है। प्रकृति के संरक्षण के लिये साझा जिम्मेदारी प्रकृति में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए समाज की सहभागिता आवश्यक है। नदियाँ, पेड़, पहाड़ और मानव – सब एक-दूसरे पर आश्रित हैं। जल गंगा अभियान इसी पारस्परिक जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है, जिससे जल, जीवन और प्रकृति की यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहे।  

बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के प्रयासों में सरकार के सहभागी बनें नागरिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के नागरिकों से आहवान किया है कि वे बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए अभावग्रस्त बच्चों को उत्तम स्वास्थ्य, शिक्षा और समानता प्रदान करने के प्रयासों में सरकार के सहभागी बनें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर ‘एक्स’ पर कहा कि एक सभ्य समाज में बाल श्रम के लिए कोई स्थान नहीं है, इस सामाजिक अपराध पर अंकुश लगाना सभी नागरिकों का कर्तव्य है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमान दुर्घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अहमदाबाद में एयर इंडिया के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्रार्थना की है कि विमान में सवार यात्रियों की जीवन रक्षा का कार्य सफल रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुर्घटना में दिवंगत नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की है। दूर से दिख रहा धुएं का गुबार अहमदाबाद के मेघानी इलाके में यह हादसा हुआ है। हादसे के बाद आसमान में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह यात्री विमान है और अहमदाबाद एयरपोर्ट से टेकऑफ करते ही हादसे का शिकार हो गया। घटनास्थल पर अग्निशमन दल की टीमें पहुंच गई हैं और राहत और बचाव कार्य जारी है।  इंदौर से जाते हैं यात्री गुजरात और अहमदाबाद  बड़ी संख्या में इंदौर के यात्री भी जाते हैं। व्यापार के अलावा अन्य कार्यों से भी इंदौर के नागरिकों का बड़ी संख्या में वहां आना जाता होता है। अभी पता नहीं चल सका है कि किन किन शहरों के यात्री थे। विमान में दो यात्रियों के सवार होने की भी बात सामने आ रही है लेकिन अभी कन्फर्म नहीं हो रहा है।  जीतू पटवारी ने किया ट्वीट मप्र कांग्रेस प्रभारी जीतू पटवारी ने ट्वीट करके यात्रियों के लिए प्रार्थना की है। उन्होंने लिखा है कि अहमदाबाद से लंदन (गैटविक) एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाले एयर इंडिया के B787 ड्रीम-लाइनर विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की दुखद सूचना प्राप्त हुई! मैं यात्रियों की कुशलता के लिए, प्रभु से प्रार्थना करता हूं!  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर को दी जन्मदिन की बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर को जन्म वर्षगांठ  की बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘एक्स’ पर कहा कि श्री तोमर पर बाबा महाकाल की कृपा सदैव बनी रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री तोमर के उत्तम स्वास्थ्य और सुदीर्घ एवं मंगलमय जीवन की कामना की है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरु हरगोबिंद सिंह साहिब के प्रकाश पर्व पर दीं शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नागरिकों को सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोबिंद सिंह साहिब के प्रकाश पर्व पर शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘एक्स’ पर कहा कि गुरु हरगोबिंद जी शौर्य एवं वीरता के पर्याय थे। उन्होंने  समाज के शोषित, वंचित और कमजोर वर्ग की सेवा कर धर्म एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। लोक कल्याण के संकल्प की सिद्धि में गुरु हरगोविंद सिंह का प्रेरणादायक जीवन एवं पथ प्रदर्शन अनंतकाल तक अनुकरणीय रहेगा।  

मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना की 25वीं किस्त होगी जारी, इस दिन खाते में आ जाएंगे 1250 रुपये

भोपाल  मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की करोड़ों लाड़ली बहनों के लिए खुशखबरी है। योजना की 25वीं किस्त को लेकर इंतजार खत्म होने वाला है। 13 जून शुक्रवार को सीएम मोहन यादव जबलपुर से 1.27 करोड़ बहनों के खाते में 1250 रुपए आंतरित करेंगे। इसके साथ ही 26 लाख से अधिक बहनों को सिलेंडर रिफिलिंग के लिए भी राशि जारी की जाएगी।इसकी जानकारी महिला व बाल विकास विभाग ने एक्स पर पोस्ट करके दी है।इधर, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ऐलान किया है कि रक्षाबंधन में बहनों को इस योजना से अतिरिक्त राशि दी जाएगी। आने वाले समय में योजना की राशि भी 1250 से बढ़ाकर 3 हजार रुपए प्रतिमाह तक की जाएगी। अप्रैल से हुआ है किस्त जारी करने की तारीख में बदलाव आमतौर पर योजना की किस्त हर महीने की 10 तारीख तक जारी कर दी जाती थी, लेकिन अप्रैल 2025 से तारीख में बदलाव किया गया है।इस दौरान कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार ने फैसला किया था कि वह प्रतिमाह 15 तारीख के आसपास बहनों के खाते में राशि भेजेगी। यही कारण था कि अप्रैल में 16 तारीख को 23वीं किस्त और 15 मई को 24वीं किस्त जारी की गई है। अब 13 जून को 25वीं किस्त आने का अनुमान है। लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से मई 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 24 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 28 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। जानिए लाड़ली बहना योजना के लिए आयु/पात्रता/नियम     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। लाड़ली बहना योजना के ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं     जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।     जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।     जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। लाभार्थी सूची में चेक करें नाम, पैसा मिलेगा या नहीं?     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

नाबालिग रेप पीड़ित को अबॉर्शन की इजाजत, 28 सप्ताह से ज्यादा का गर्भ, डॉक्टरों की विशेष निगरानी में होगा गर्भपात

 जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रेप पीड़िता नाबालिग को गर्भपात करने की अनुमति दे दी है, हाई कोर्ट ने कहा है कि क्योंकि नाबालिक का गर्भ 28 सप्ताह से ज्यादा है। लिहाजा डॉक्टरों की विशेष निगरानी में गर्भपात किया जाए। दरअसल दमोह निवासी एक नाबालिग और उसके परिवार ने दमोह जिला एवं सत्र न्यायालय में गर्भपात की अनुमति के लिए याचिका लगाई थी, जिसको सुनते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय ने हाई कोर्ट को एक पत्र भेजा था। जिस पर हाईकोर्ट ने गर्भपात करने की अनुमति दे दी है।  महिला विशेषज्ञ की निगरानी में किया जाए गर्भपात- हाईकोर्ट  हाई कोर्ट ने कहा है की नाबालिग का गर्भपात महिला विशेषज्ञ की निगरानी में किया जाए। साथ यह भी कहा है कि यदि बच्चा जिंदा पैदा होता है तो उसके देखरेख की जिम्मेदारी शासन की होगी। वहीं यदि बच्चा मृत निकलता है तो फिर डीएनए जांच के लिए उसका भ्रूण सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। नाबालिग की मेडिकल रिपोर्ट में खतरे की बात  आपको बता दे की  रेप पीड़िता नाबालिग का गर्भ 28 सप्ताह से ज्यादा का हो चुका है, लिहाजा उसके मेडिकल रिपोर्ट में जोखिम की बात की गई है। जिस पर पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी हम हर जोखिम उठाने के लिए तैयार है। जिसे हाईकोर्ट में गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द डॉक्टर की निगरानी में गर्भपात की अनुमति दी है।अब अनुमति मिलने के बाद पीड़िता को दमोह से जबलपुर के मेडिकल कॉलेज लाया जाएगा। जहां पर डॉक्टरों और रेडियोलॉजिस्ट की विशेष निगरानी में पीड़िता का गर्भपात किया जाएगा।

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