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राज कुशवाह बस एक प्यादा , सोनम का प्यार कोई और… राजा रघुवंशी केस में अब नए किरदार की एंट्री

इंदौर  मेघालय में पति राजा रघुवंशी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार की गई इंदौर की सोनम रघुवंशी के राज बहुत गहरे हैं। हनीमून कपल के मेघायल में लापता होने की कहानी हर दिन नए मोड़ लेते हुए मर्डर मिस्ट्री तक पहुंच गई। अब तक यह तो साफ हो चुका है कि राजा का कत्ल हुआ और इसे अंजाम दिया सोनम, राज और उसके तीन दोस्तों ने। लेकिन अब भी कई अनसुलझे सवाल जिनकी तलाश पुलिस आरोपियों से पूछताछ के जरिए कर रही है। अभी यह साफ होना बाकी है कि इस हत्याकांड का असली मास्टरमाइंड कौन है, राज कुशवाहा या सोनम रघुवंशी?  रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों से बातचीत के आधार पर बताया गया है कि सोनम ही इस पूरे मामले की असली मास्टरमाइंड है और संभव है कि राजा का इस्तेमाल एक मोहरे के रूप में ही किया गया। सभी आरोपियों से पूछताछ की निगरानी कर रहे वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सोनम ने सभी को झांसे में लेकर इस्तेमाल किया। राज को प्यार का वादा दिया तो अन्य को पैसों का लालच। अब तक यह माना जा रहा था कि राज इस पूरे मामले का असली साजिशकर्ता है। उसे सोनम का प्रेमी बताया जा रहा था। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस मामले में और भी बड़े खेल का खुलासा हो सकता है। ऐसा प्रतीत होता है कि राज का इस्तेमाल मोहरे के रूप में हुआ। उन्हें शक है कि सोनम किसी तीसरे के साथ भागने की फिराक में थी और राज इस बड़े खेल से अनभिज्ञ था और इसलिए वह सोनम रघुवंशी की मदद करता रहा। वहीं, सोनम का परिवार और प्लाईवुड कंपनी में काम करने वाले लोग यह बार-बार दोहरा रहे हैं कि सोनम और राज के बीच प्रेम संबंध नहीं था. सोनम के भाई गोविंद ने भी कहा- राज सोनम को दीदी बोलता था और तीन साल से सोनम उसे राखी बांध रही थी. ऐसे में सवाल अब ये उठ रहा है कि अगर सोनम और राज के बीच सच में कोई ऐसा रिश्ता नहीं था तो उसने किसके लिए अपने पति की जान ली? क्राइम सीन रीक्रिएट करवाया जाएगा शिलॉन्ग पुलिस अब घटनास्थल पर सोनम और अन्य आरोपियों को ले जाएगी. फिर वहां क्राइम सीन रीक्रिएट करके सबूत जुटाएगी. इसके बाद आरोपियों को इंदौर भी लाने की योजना है। राजा की हत्या के बाद सोनम इंदौर में कहां रुकी और किस-किस से मिली, इसकी तहकीकात के बाद नए पहलू सामने आ सकते हैं. फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है. बताया जा रहा है कि सोनम की जब जेल में राज के साथ वीडियो कॉल करवाई पर बात करवाई गई तो वो रोने लगी. एक टक राज को देखती रही. फिर उसने गुनाह कबूल कर लिया. अब यह तीसरा शख्स कौन था यह खुलासा होना बाकी है। लेकिन ध्यान देने लायक बात यह है कि सोनम का परिवार और प्लाईवुड कंपनी में काम करने वाले लोग यह बार-बार दोहरा रहे हैं कि सोनम और राज के बीच प्रेम संबंध नहीं था। राज सोनम को दीदी बोलता था और सोनम उसे कई बार राखी बांध चुकी थी। यदि सोनम और राज के बीच सच में कोई ऐसा रिश्ता नहीं था तो उसने किसके लिए अपने पति की जान ली, यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शिलॉन्ग पुलिस जहां घटनास्थल पर सोनम और अन्य आरोपियों को ले जाकर क्राइम सीन रीक्रिएट करके सबूत जुटाएगी तो दूसरी तरफ आरोपियों को इंदौर भी लाने की योजना है। राजा की हत्या के बाद सोनम इंदौर में कहां रुकी और किस-किस से मिली, इसकी तहकीकात के बाद नए पहलू सामने आ सकते हैं। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। बुधवार को सूत्रों के हवाले से खबर आई कि सोनम ने सबूतों को देखकर अपना गुनाह कबूल कर लिया है। सोनम रघुवंशी ने सूटकेस में क्यों छोड़ा मंगलसूत्र मेघालय पुलिस ने रहस्यमय हनीमून हत्याकांड को सुलझा लिया है। इस केस को सुलझाने में मंगलसूत्र ने अहम भूमिका निभाई है। यह मंगलसूत्र एक सूटकेस में मिला था। मेघालय डीजीपी आई नोंगरंग ने यह जानकारी दी है। 22 मई को होमस्टे में पहुंचा था जोड़ा राजा रघुवंशी (29) और उनकी पत्नी सोनम (25) की शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी। वे 20 मई को हनीमून के लिए निकले थे। 22 मई को यह जोड़ा पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा पहुंचा और एक होमस्टे में कमरा लेने की कोशिश की। लेकिन, पहले से बुकिंग न होने के कारण उन्हें कमरा नहीं मिल पाया। दो जून को मिला शव 2 जून को राजा का शव वेइसवडोंग वाटरफॉल के पास एक खाई में मिला। सोनम की तलाश जारी थी। आखिरकार, 9 जून की सुबह सोनम ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में, जो कि लगभग 1,200 किलोमीटर दूर है, आत्मसमर्पण कर दिया। उसी दिन उसके कथित प्रेमी, राज कुशवाहा और तीन भाड़े के हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया गया। सोनम ने मंगलसूत्र क्यों छोड़ा? सोनम रघुवंशी ने अपना मंगलसूत्र क्यों छोड़ा? इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने एक अंगूठी और सोनम का मंगलसूत्र बरामद किया। मंगलसूत्र एक पवित्र हार होता है जिसे विवाहित हिंदू महिलाएं पहनती हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह जोड़ा 22 मई को सोहरा में एक होमस्टे पर बिना बुकिंग के पहुंचा था। कमरा उपलब्ध नहीं होने के कारण, उन्होंने अपना सूटकेस होमस्टे में छोड़ दिया। उन्होंने सोचा कि 3,000 से अधिक सीढ़ियों वाली नोंग्रियाट गांव की ट्रेकिंग पर इसे ले जाना मुश्किल होगा। वे वहां डबल-डेकर रूट ब्रिज देखने जा रहे थे। सूटकेस में मिला मंगलसूत्र और अंगूठी मेघालय डीजीपी ने बताया कि हमने सोहरा में एक होमस्टे में जोड़े द्वारा छोड़े गए सूटकेस से सोनम का ‘मंगलसूत्र’ और एक अंगूठी बरामद की। डीजीपी ने आगे कहा कि एक विवाहित महिला का गहने छोड़कर जाना, हमें इस मामले में उसे संदिग्ध के रूप में देखने का एक सुराग दे गया। दूसरे होमस्टे में बिताई रात उनका सूटकेस सोहरा होमस्टे में ही रहा, जबकि उन्होंने नोंग्रियाट में एक होमस्टे में रात बिताई और 23 मई को सुबह जल्दी ही वहां से निकल … Read more

कनाड़िया में मुकेश बनकर युवती को प्रेम जाल में फंसाया …किया रेप,धर्म परिवर्तन के लिए धमकाया

कनाड़िया शहर के कनाड़िया क्षेत्र में एक युवती के साथ नकली पहचान से दोस्ती कर दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन के दबाव का मामला सामने आया है। आरोपी ने खुद को मुकेश बताकर पहले युवती से नजदीकियां बढ़ाईं, फिर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।  कनाड़िया थाना पुलिस ने 25 वर्षीय युवती की शिकायत पर मुकेश उर्फ यूसुफ पुत्र अय्यूब खान निवासी खजराना के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376 (दुष्कर्म), 323 (मारपीट), 506 (धमकी) और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। ऐसे बढ़ीं नजदीकियां युवती ने पुलिस को बताया कि वह मूलतः उज्जैन की रहने वाली है और वर्तमान में इंदौर की स्कीम नंबर 78 में एक डॉक्टर के यहां काम करती है। डेढ़ साल पहले वह एक सहेली की बर्थडे पार्टी में राउ स्थित एक ढाबे पर गई थी, जहां उसकी मुलाकात यूसुफ से हुई। उसने अपना नाम मुकेश बताया और फोन नंबर देकर किसी भी मदद के लिए संपर्क करने को कहा। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। आरोपी युवती को अलग-अलग कारों से इंदौर में घुमाने लगा और मिलने उसके फ्लैट आने-जाने लगा। उसने उसे शादी का प्रस्ताव भी दिया और कहा कि वह नौकरी छोड़ दे, उसका सारा खर्च वही उठाएगा। कुछ समय बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए। जब सामने आई सच्चाई कुछ दिन पहले फ्लैट में शराब पार्टी के दौरान युवती को यूसुफ पर तब शक हुआ, जब उसका एक दोस्त उसे साहिल कहकर बुला रहा था। संदेह होने पर युवती ने उसका पर्स चुपके से देखा, जिसमें यूसुफ खान नाम की आईडी मिली। जब युवती ने उससे जवाब मांगा, तो आरोपी ने खुलासा किया कि वह मुस्लिम है और शादी के लिए युवती को धर्म परिवर्तन करना होगा। इंकार करने पर आरोपी ने मारपीट की और उसके फोटो व वीडियो वायरल करने की धमकी दी। हिंदूवादियों की मदद से आरोपी पकड़ा गया घबराई युवती ने इस बात की जानकारी हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ता मानसिंह राजावत और अंकित विश्वकर्मा को दी। इसके बाद दोनों ने युवती के साथ मिलकर आरोपी को फ्लैट से पकड़ा और कनाड़िया पुलिस को सौंप दिया।  

राजा रघुवंशी हत्याकांड के चारों आरोपियों ने कुबूला जुर्म, जाने क्या कहा?

इंदौर  इंदौर के राजा रघुवंशी की हत्या में शामिल चार मुख्य आरोपियों को मेघालय पुलिस ने एक साथ मीडिया के सामने पेश किया. चारों आरोपियों की जो तस्वीर सामने आई है, उसमें हत्या का आरोपी और सोनम का प्रेमी राज कुशवाह सफेद शर्ट में अकेले बैठा दिख रहा है, उसके बगल में आनंद बैठा है, जबकि आकाश काले टी-शर्ट में और विशाल सफेद चेक्स की शर्ट में नजर आ रहा है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. अन्य तीन आरोपी सोनम के प्रेमी राज कुशवाह ने हायर किए थे. इनकी प्लानिंग के अनुसार, राजा और सोनम मेघालय के वेसॉडोंग वॉटरफॉल्स घूमने गए थे, जहां पहले से मौजूद इन तीनों ने मिलकर राजा रघुवंशी की हत्या कर दी. इस दौरान सोनम भी मौके पर मौजूद थी. इस मामले के खुलासे में उस वक्त बड़ा मोड़ आया, जब पुलिस को सोनम द्वारा छोड़े गए सूटकेस में ‘मंगलसूत्र’ और अंगूठी मिली. इसके बाद पुलिस ने सोनम को यूपी के गाजीपुर में ट्रेस किया, जहां वह खुद ही सरेंडर करने पहुंच गई. इसके बाद पुलिस ने उसके प्रेमी राज और तीनों आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया. इन चारों आरोपियों को अब शिलॉन्ग की कोर्ट से 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. पुलिस इनसे हत्या की योजना, पैसे के लेन-देन और साजिश से जुड़े कई बिंदुओं पर पूछताछ कर रही है. हत्या के इस मामले में पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. सूटकेस और उसमें मिले मंगलसूत्र से सुलझी हत्या की गुत्थी दरअसल, इंदौर से शादी के बाद मेघालय हनीमून मनाने पहुंचे राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. केस की गुत्थी एक छोड़े गए सूटकेस और उसमें मिले ‘मंगलसूत्र’ से सुलझी. राजा की पत्नी सोनम, उसका प्रेमी राज कुशवाहा और तीन सुपारी किलर को गिरफ्तार कर लिया गया है. सभी आरोपी शिलॉन्ग पुलिस कस्टडी में हैं. 29 साल के राजा रघुवंशी और 25 साल की सोनम की शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी. दोनों 20 मई को असम के गुवाहाटी होते हुए मेघालय के मशहूर पर्यटन स्थल चेरापूंजी (सोहरा) पहुंचे. 22 मई को ये कपल बिना बुकिंग के एक होमस्टे में पहुंचा, लेकिन कमरा न मिलने पर उन्होंने अपना सूटकेस वहीं छोड़ दिया और करीब 3,000 सीढ़ियों की चढ़ाई वाले नोंग्रियात गांव में रात बिताई. 23 मई को दोनों नोंग्रियात से वापस सोहरा आए, जहां से स्कूटर उठाकर वे वेसॉडोंग फॉल्स गए. यहीं राजा की हत्या कर दी गई. पुलिस के अनुसार, इस वारदात को सोनम ने अपने प्रेमी राज कुशवाह और तीन सुपारी किलर की मदद से अंजाम दिलवाया. हैरान कर देने वाला यह हनीमून मर्डर केस उस वक्त सुलझा जब पुलिस को छोड़े गए सूटकेस में सोनम का ‘मंगलसूत्र’ और एक अंगूठी मिली. मेघालय की पुलिस महानिदेशक (DGP) एल. नोंग्रांग ने बताया कि शादीशुदा महिला द्वारा मंगलसूत्र छोड़ जाना सामान्य नहीं था, जिससे पुलिस को शक हुआ और सोनम पर फोकस किया गया. इसी आधार पर जांच ने मोड़ लिया और सोनम के यूपी के गाजीपुर में पकड़े जाने के साथ पूरा षड्यंत्र सामने आ गया. पुलिस के मुताबिक, हत्या के दौरान सोनम मौके पर मौजूद थी और राजा की हत्या उसकी आंखों के सामने की गई.  

विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण सत्रों में व्याख्यान के साथ हुई कार्यशाला

दो दिवसीय इनक्यूबेटर कार्यशाला विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण सत्रों में व्याख्यान के साथ हुई कार्यशाला भोपाल उच्च शिक्षा एवं मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय इनक्यूबेटर कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा अत्यंत उपयोगी विषयों पर व्याख्यान दिए गए। प्रथम सत्र में श्री रोनाल्ड फर्नांडीज़ द्वारा “फायनेशियल प्लानिंग एंड रेवेन्यू मॉडल फॉर इनक्यूबेटर” विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने इनक्यूबेटर के दीर्घकालिक संचालन हेतु वित्तीय योजना, संसाधनों के विविधीकरण तथा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उपायों पर प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में डॉ. संजीव पाटनी, सीईओ, एआईसी-प्रेस्टिज इंदौर द्वारा “क्रिएटिंग विजिबिलिटी एंड इन्क्यूबेटी पाइपलाइन” विषय पर व्याख्यान दिया गया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक इनक्यूबेटर को सामाजिक एवं औद्योगिक स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है तथा नवाचारकर्ताओं की एक सतत पाइपलाइन कैसे तैयार की जाए। तृतीय सत्र में श्री अपूर्व गैवक, निदेशक, सेंटर फॉर इनोवेशन, डिजाइन एंड इनक्यूबेशन, SGSITS इंदौर ने “HR Planning for Incubators” पर सारगर्भित जानकारी साझा की। उन्होंने मानव संसाधन नियोजन की रणनीतियों एवं टीम निर्माण की प्रक्रिया को रेखांकित किया। अंतिम सत्र में श्री प्रदीप करंबेलकर, निदेशक, VASPL Initiative Pvt. Ltd., भोपाल द्वारा “Mentorship in Incubation Ecosystem” विषय पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने एक प्रभावशाली मेंटरशिप प्रणाली के निर्माण और मेंटर्स की भूमिका के महत्व पर बल दिया। कार्यशाला में प्रदेश के 12 निजी विश्वविद्यालयों, 16 शासकीय विश्वविद्यालयों, 18 स्वायत्त महाविद्यालयों एवं 1 संबद्ध महाविद्यालय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला की समाप्ति के बाद सभी सहभागियों ने फीडबैक दिया एवं सभी सहभागियों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र प्रदान किये गए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुश्री नव्या तिवारी को दी बधाई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन निवासी सुश्री नव्या तिवारी को एयर फोर्स फ्लाइंग ब्रांच में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि सुश्री तिवारी मध्यप्रदेश की पहली फ्लाइंग ऑफिसर बनकर प्रदेश को गौरवान्वित करेंगी।  

हत्यारे चूक जाते तो इस तरीके से देती पति को दर्दनाक मौत, राजा रघुवंशी के लिए तैयार था सोनम का प्लान-B

इंदौर  इंदौर की सोनम रघुवंशी की साजिश के तार अब धीरे-धीरे खुल रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सोनम ने अपनी शादी के पांच दिन बाद ही राजा की हत्या का प्लान तैयार कर लिया था। हत्यारों को उसने 15 हजार रुपये कैश दिए और 20 लाख रुपये बाद में देने का वादा किया। इतना ही नहीं, राजा की हत्या होते हुए उसने अपनी आंखों से देखा। अब एक और अहम जानकारी निकलकर सामने आई है। दरअसल, अपने पति राजा रघुवंशी को मौत की नींद सुलाने के लिए सोनम ने एक प्लान बी भी तैयार कर रखा था। पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सोनम ने राजा रघुवंशी की हत्या के लिए दो प्लान तैयार किए थे। इनमें पहला प्लान हत्यारों के जरिए उसे मरवाने का था। वहीं, प्लान बी के तहत अगर हत्यारे उसे मारने से चूक जाते तो सोनम खुद इस हत्या को अंजाम देती। वह राजा को सेल्फी लेने के बहाने पहाड़ के किनारे पर लेकर जाती और मौका देखकर उसे धक्का दे देती। सोनम के दोनों प्लान ऐसे थे, जिनमें राजा रघुवंशी के बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी। राजा की लाश 2 जून को खाई में मिली थी। माना जा रहा है कि 23 मई को उनकी हत्या की गई थी। तीनों हत्यारे राज के दोस्त पुलिस की तफ्तीश में पता चला है कि राजा की जान लेने वाले तीनों हत्यारे, सोनम के प्रेमी राज कुशवाहा के दोस्त हैं। सोनम ने जब राजा की हत्या की योजना के बारे में राज को बताया तो उसने ही इन तीन लोगों को हायर किया था। हत्याकांड को अंजाम देने के लिए तीनों हत्यारे शिलॉन्ग गए, लेकिन राज इंदौर में ही रुका रहा। इतना ही नहीं, वह राजा के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुआ। दरअसल, सोनम का प्लान था कि राज पर किसी भी तरह से कोई शक ना कर पाए। राजा की हत्या के इस प्लान में अगर कोई चूक हो जाती है तो इसके लिए उसकी पत्नी सोनम ने एक और ‘प्लान बी’ भी तैयार कर रखा था। इस प्लान के मुताबिक अगर प्लान ए कहीं से भी फेल होता नजर आए तो सोनम अपने पति को खुद ही खाई में धकेल कर हत्या कर देती। राजा रघुवंशी की निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, और अब इस केस में हर दिन एक नया और चौंकाने वाला एंगल सामने आ रहा है। अब हत्या में शामिल मुख्य आरोपियों के कबूलनामे के साथ-साथ हवाला कारोबार से जुड़ा एक संदिग्ध सुराग सामने आया है, जो इस साजिश को और बड़ा व गहरा बना रहा है। पुलिस को पूछताछ के दौरान राज कुशवाहा के मोबाइल से कुछ ऐसे नंबर मिले हैं, जो सामान्य नहीं थे। ये नंबर ₹10 के नोटों के सीरियल नंबर थे। सूत्रों के मुताबिक, इस तरह की नंबरिंग का इस्तेमाल अक्सर हवाला लेन-देन की ट्रैकिंग में किया जाता है। आरोपियों ने कबूला जुर्म, बताई हत्या की पूरी कहानी खुली राजा हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपियों से जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो चारों आरोपियों- राज कुशवाहा, विशाल उर्फ विक्की, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उन्होंने पुलिस को बताया कि राजा रघुवंशी की हत्या उन्होंने पहले से तय किए गए प्लान के मुताबिक की गई। राजा की हत्या के बाद शव को मेघालय के शिलांग क्षेत्र में खाई में फेंक दिया गया। आरोपियों ने इस बात का भी खुलासा किया कि यह साजिश सोनम रघुवंशी और राज कुशवाहा ने मिलकर रची थी। इंदौर क्राइम ब्रांच ने भी आरोपियों के कबूलनामे की विधिवत पुष्टि की है। अब पुलिस उनके बयानों के आधार पर सबूतों को क्रॉस-चेक कर रही है, जिससे कोर्ट में मुकदमा मजबूत हो सके। राजा रघुवंशी हत्याकांड में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। अब यह लगभग साफ होता जा रहा है कि इस खौफनाक हत्या की मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि राजा की पत्नी सोनम रघुवंशी ही थी। पिछले दो दिनों से लगातार पूछताछ में आरोपियों के कबूलनामों और डिजिटल साक्ष्यों ने सोनम की भूमिका को केंद्र में ला खड़ा किया है। एसीपी पूनम यादव ने बताया हत्या का मास्टरमाइंड कौन इंदौर की ACP पूनम चंद यादव ने इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिससे साफ होता है कि यह कोई अचानक हुई क्राइम नहीं थी, बल्कि शादी से भी पहले से सोच-समझकर रचा गया प्लान था। ACP पूनम चंद यादव ने बताया, ‘चारों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड राज कुशवाहा है।’ सोनम रघुवंशी और उसका कथित प्रेमी राज कुशवाहा, पहले से राजा की हत्या की तैयारी में जुटे थे। दोनों ने तय किया कि राजा को शादी के बाद हनीमून ट्रिप पर मार डालना सबसे आसान और ‘साफ-सुथरा’ तरीका होगा। जैसे ही राजा और सोनम हनीमून के लिए शिलांग रवाना हुए, उससे पहले ही तीनों सुपारी किलर्स विशाल (विक्की), आकाश और आनंद शिलांग पहुंच चुके थे। इस दौरान इनका काम था, सोनम और राजा की लोकेशन ट्रैक करना, राजा की हत्या का मौका देखना और हत्या करने के बाद उसकी डेडबॉडी को ठिकाने को लगाना। यह सब इतनी चुपचाप और बारीकी से किया गया कि किसी को शक न हो। इंदौर आई थी सोनम पुलिस की जांच में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। राजा की हत्या के बाद, सरेंडर करने से पहले सोनम छिपकर इंदौर भी आई थी। यहां उसके प्रेमी राज ने एक किराए के कमरे का इंतजाम किया, जिसमें सोनम रही। हालांकि, मेघालय पुलिस से जब तीनों कॉन्ट्रैक्ट किलर को मध्य प्रदेश और यूपी से गिरफ्तार कर लिया तो सोनम गाजीपुर पहुंची और सरेंडर कर दिया। इसके बाद मेघालय पुलिस सोनम को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। आखिरी वक्त पर प्लान से हटा राज वहीं, मेघालय पुलिस के साथ मिलकर इस मामले की तफ्तीश में जुटे इंदौर के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि आखिरी वक्त पर राज प्लान से हटना चाहता था। पूछताछ में राज ने दावा किया कि वह इस साजिश में सोनम का साथ नहीं देना चाहता था और आखिरी वक्त पर उसने मेघालय जाने का अपना प्लान कैंसल … Read more

शराब की जायज कीमत की जानकारी के लिए ठेकों पर लगाए गए क्यूआर कोड, MSP और MRP की जानकारी इसी पर मिलेगी

इंदौर मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में अनोखे प्रयोग के तहत आबकारी विभाग ने ग्राहकों तक शराब की सही कीमत की जानकारी पहुंचाने के लिए ठेकों पर क्यूआर कोड लगा दिए हैं। अधिकारियों ने  यह जानकारी दी।  देशी और विदेशी शराब को अधिक मूल्य पर बेचने की शिकायत के बाद अब आबकारी विभाग ने जिले की सभी 173 शराब दुकानों पर क्यूआर कोड लगाए है। प्रत्येक दुकान पर तीन स्थानों पर स्पष्ट क्यूआर कोड चस्पा किए है। उपभोक्ता अब इन को स्कैन कर किसी भी शराब ब्रांड के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) और अधिकतम विक्रय मूल्य (एमआरपी) की जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। अनुचित मूल्य वसूली पर लगेगी रोक जिले की शराब दुकानों से अधिक मूल्य पर शराब बेचने की ढेरों शिकायते जिला प्रशासन और सीएम हेल्पलाइन पर पहुंच रही थी। मामले में कलेक्टर आशीष सिंह ने इस पर अंकुश लगाने के निर्देश आबकारी विभाग को दिए। अब आबकारी विभाग ने जिले की सभी दुकानों पर क्यूआर कोड लगाए है। इससे अनुचित मूल्य वसूली पर रोक लगेगी और सभी ब्रांड की शराब के मूल्य की जानकारी उपभोक्त को मिल सकेगी। क्या होगा इन कोड में     सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी इंदौर ने बताया कि राज्य शासन को प्रदेश के विभिन्न जिलों से यह शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि कुछ मदिरा दुकानों पर निर्धारित न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) से कम और अधिकतम विक्रय मूल्य (MRP) से अधिक दरों पर शराब बेची जा रही है। ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने एवं उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर शराब उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इन क्यूआर कोड को स्कैन करने पर आबकारी विभाग की साइट आएगी। इसमें आप शराब के ब्रांड का नाम डालकर उसकी सही कीमत देख सकते हैं। शराब का सही मूल्य जान सकेंगे उपभोक्ता वहीं विक्रेताओं की जवाबदेही सुनिश्चित होगी। तय मूल्य से अधिक या कम पर शराब बेची जाती है, तो आबकारी विभाग में शिकायत दर्ज की जा सकती है। सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी का कहना है कि उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए क्यूआर कोड लगवाए है, ताकि वह शराब का सही मूल्य जान सके। 18 दुकानों पर की जा चुकी है कार्यवाही सीएम हेल्पलाइन पर शराब दुकानों से अधिक मूल्य वसूलने की शिकायतों की विगत दिनों जांच कराई गई थी। शिकायत सही पाए जाने पर आबकारी विभाग ने जिले की 18 शराब दुकानों पर कार्रवाई कर 19 प्रकरण बनाए। सभी को नोटिस जारी किए गए है और इन दुकानों पर 51 लाख जुर्माना लगाया जाएगा।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व हर हाथी की तस्वीर खींचकर उसे एक विशेष कोड और पहचान क्रमांक दिया जा रहा

उमरिया मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक अनोखी और पहली बार की जा रही पहल के चलते एक बार फिर सुर्खियों में है। जहां अब तक यह टाइगर रिजर्व बाघों के संरक्षण और गणना के लिए प्रसिद्ध रहा है, वहीं अब यहां जंगली हाथियों की पहचान भी डिजिटल तरीके से की जा रही है। प्रबंधन द्वारा एलीफेंट आईडी परियोजना शुरू की गई है, जिसके तहत हर हाथी की तस्वीर खींचकर उसे एक विशेष कोड और पहचान क्रमांक दिया जा रहा है। यह प्रक्रिया प्रदेश में पहली बार किसी टाइगर रिजर्व में अपनाई जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य यह है कि अब तक जिन जंगली हाथियों की संख्या का सिर्फ अनुमान ही लगाया जाता था, उनकी सटीक गिनती और गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इसके साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि कौन-कौन से हाथी किस-किस झुंड का हिस्सा हैं और वे किन क्षेत्रों में ज्यादा सक्रिय हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के नौ परिक्षेत्रों की 139 बीटों में समय-समय पर हाथियों की गतिविधियां देखी जाती हैं। जब भी किसी क्षेत्र में हाथियों का मूवमेंट दिखाई देता है, तो रिजर्व प्रबंधन द्वारा हाथी विशेषज्ञों की टीम मौके पर भेजी जाती है। यह टीम हाथियों के सिर, कान, पूंछ और पीठ की तस्वीरें लेती है। इन अंगों की तस्वीरों को आधार बनाकर कंप्यूटर पर उनकी विशिष्ट पहचान यानी आईडी तैयार की जाती है। इसके बाद हर हाथी को एक कोड नंबर दिया जाता है, जो E-1 , E-2 जैसे प्रारूप में होता है। इस परियोजना की अनुमति प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) से ली गई है, जिसके तहत टाइगर रिजर्व की टीम और विशेषज्ञ मिलकर यह कार्य कर रहे हैं। इस दौरान पूरी सावधानी बरती जाती है ताकि जंगली हाथियों से टीम की सुरक्षा बनी रहे और उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे। हाथियों की पहचान की इस प्रक्रिया से न केवल उनकी सटीक संख्या सामने आएगी, बल्कि उनकी लोकेशन, गतिविधियों और समूहों की निगरानी भी संभव हो सकेगी। इसके चलते हाथी मानव संघर्ष जैसी घटनाओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है, क्योंकि समय रहते हाथियों की लोकेशन का पता लगाकर एहतियाती कदम उठाए जा सकेंगे।  

मुख्यमंत्री यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रमिक परिवारों के खातों में संबल योजनाओं की राशि करेंगे अंतरित आज अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये का होगा अंतरण मुख्यमंत्री यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे। आज शुक्रवार को जबलपुर के बरगी में होने वाले इस कार्यक्रम में श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। प्रदेश में संबल योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। योजना अन्तर्गत प्रारंभ से अब तक 1 करोड़ 76 लाख श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। पंजीयन प्रक्रिया निरंतर जारी है। योजना में अनुग्रह सहायता अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये प्रदान किये जाते हैं। स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रुपये तथा अंत्येष्टि सहायता के लिए 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में जहाँ एक ओर महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के लिये 16 हजार रुपये दिये जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिये सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। भारत सरकार के नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना में सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है, जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसमें श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है, जिसे लागू करने का श्रेय प्रदेश की सरकार को है। मध्यप्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये भी निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनायें संचालित की जाती हैं, इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, उन्हें 5 लाख रुपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा का लाभ मिल रहा हैं।  

प्रदेश सरकार अपने नागरिकों की चिंता करने के साथ-साथ वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भी संवेदनशील :मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक वन क्षेत्र और वन्यजीवों की विविधता से संपन्न राज्य है। भारत में सबसे अधिक बाघ (टाइगर) मध्यप्रदेश की धरती पर देखने को मिलते हैं। तेंदुआ (लेपर्ड) और गिद्ध (वल्चर) की संख्या भी मध्यप्रदेश में सबसे अधिक है। प्रदेश के अलग-अलग वन क्षेत्रों में मगरमच्छ और घड़ियालों का बसेरा है। प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण, जंगलों की रक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वन्य प्राणी संरक्षण सहित सभी क्षेत्रों में तेज गति के साथ अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर स्थापित किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  गुजरात रवाना होने के पहले मीडिया में जारी एक संदेश में यह विचार रखे। संभाग स्तर पर आवश्यक हैं रेस्क्यू सेंटर  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए मध्यप्रदेश में किंग कोबरा भी लेकर आए हैं। चीतों को पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान से गांधी सागर वन क्षेत्र में छोड़कर एक नया नेशनल पार्क विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक दो नए टाइगर नेशनल पार्क बनने और चीतों के साथ-साथ दूसरे वन्य जीवों की संख्या बढ़ने से संभाग स्तर पर रेस्क्यू सेंटर की आवश्यकता महसूस हो रही है। इन सेंटर्स की स्थापना के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अब तक केवल एक रेस्क्यू सेंटर राजधानी भोपाल स्थित वन विहार में है। यहां प्रदेशभर से घायल और बीमार वन्यजीवों को इलाज के लिए लाया जाता है, लेकिन उनके अनुकूल वातावरण में बदलाव हो जाने के कारण कई बार परेशानियां आती हैं। वन्यप्राणियों की जीवन रक्षा और उनके जीवन में सुखद बदलाव लाने के लिए संभाग स्तर पर रेस्क्यू सेंटर शुरू करने का प्रयास है। मध्यप्रदेश में जू़ की संख्या बढ़ेगी राज्य सरकार प्रदेश में चिड़ियाघरों अर्थात प्राणी उद्यान (जू़) की संख्या में भी वृद्धि करने जा रही है। बजट में दो प्राणी उद्यान की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुजरात में देश का सर्वश्रेष्ठ जू एवं रेस्क्यू सेंटर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वे गुजरात की अध्ययन यात्रा में जामनगर में वन्यजीवों की देखरेख के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे साथ ही वन्यजीवों का आदान-प्रदान कर उनके जीवन रक्षा की संभावनाएं भी तलाशेंगे। नागरिकों के साथ-साथ वन्यजीवों के प्रति भी संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के कई विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में वेटनरी कोर्स और वेटनरी अस्पताल शुरू कर पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। निकट भविष्य में इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। वन संपदा और वन्यजीवों के संरक्षण का भी व्यापक अभियान प्रदेश में चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया है कि अगर किसी वन्यजीव के संकट में होने की जानकारी मिले या दिखाई दे तो नज़दीकी फॉरेस्ट ऑफिसर को सूचित करें। प्रदेश सरकार अपने नागरिकों की चिंता करने के साथ-साथ वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भी संवेदनशील है।

मध्य प्रदेश की इस तहसील को बनाया जाएगा जिला! सरकार ने राजस्व विभाग से मांगी जानकारी

डिंडोरी  मध्य प्रदेश का आदिवासी जिला डिंडोरी अब टूटने की कगार पर खड़ा हो गया है. इस जिले में दो विधानसभा हैं, डिंडोरी और शहपुरा. जिसमें शहपुरा क्षेत्र के लोग इसे नया जिला बनाने की मांग पर इस बार न सिर्फ अड़े हुए हैं, बल्कि आंदोलन के लिए भी लामबंद हैं. इसके लिए मंगलवार की दोपहर शहपुरा क्षेत्रवासियों और आमजनों ने एक मांग पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार शहपुरा को सौंपा है. इस पत्र में शहपुरा को नया जिला बनाने की मांग की है. 47 सालों से हो रही शहपुरा को जिला बनाने की मांग दरअसल, शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति ने शहपुरा तहसील कार्यालय पहुंचकर नायब तहसीलदार सुखमन कुलेश को ज्ञापन सौंपा है. जिसमें शहपुरा को जिला बनाने की मांग की गई है. बताया जा रहा है कि शहपुरा को जिला बनाने की मांग पिछले 47 सालों से लगातार की जा रही है. यह मांग बीच-बीच में तब तेज होती है जब विधानसभा या लोकसभा चुनाव आते हैं. लेकिन इस बार एक पत्र ने शहपुरा क्षेत्र वासियों की टेंशन बढ़ा दी. इस पत्र में मंडला जिले की सबसे बड़ी तहसील निवास को जिला बनाने के लिए विस्तृत जानकारी चाही गई है. जिसमें निवास को शहपुरा के साथ जोड़कर जिला बनाने की बात लिखी गई है. जिसके बाद शहपुरा के लोग लामबंद हो गए. राष्ट्रपति से लेकर मंत्रियों को सौंपा ज्ञापन ज्ञापन के माध्यम से शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया, ”सन 1977 से लेकर आज तक शहपुरा को डिंडोरी से पृथक कर अलग जिला बनाने की मांग क्षेत्रवासियों द्वारा की जा रही है. लेकिन अब तक प्रदेश सरकार ने कोई विचार नहीं किया है. यह मांग उस दौरान भी की गई जब मंडला जिले से डिंडोरी को अलग जिला बनाया जा रहा था. इसको लेकर क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों ने महामहिम राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यपाल से लेकर कैबिनेट मंत्रियों तक को ज्ञापन एवं मांग पत्र सौंपा है. शहपुरा को जिला बनाने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन क्षेत्रवासियों ने मांग की है, शहपुरा को जिला बनाने के लिए निवास, मेहदवानी, विक्रमपुर, चौरई, रहटा क्षेत्र एवं तहसील व विधानसभा को जोड़ा जाए. मांग पत्र में शहपुरा क्षेत्रवासियों ने उल्लेख किया है कि हाल में ही शासन प्रशासन के द्वारा एक पत्र जारी किया है. जिसमें उल्लेख है कि निवास को जिला बनाए जाने के लिए स्थानीय प्रशासन से राजस्व विभाग संबंधी जानकारी शहपुरा राजस्व क्षेत्र की चाही गई है. जिसमें शहपुरा और मेहदवानी ब्लॉक को शामिल किया जाना है. इस पत्र के वायरल होने के बाद से शहपुरा क्षेत्र की जनता एक बार फिर सक्रिय हुईं और मांग पत्र सौंपा है कि शहपुरा को ही अलग जिला बनाया जाए. बैठक हुई थी आयोजित शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में 6 जून को एक बृहद बैठक आयोजित की गई थी. जिसमें शहपुरा के भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे भी शामिल रहे. विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने क्षेत्रवासियों की मांग को जायज बताते हुए अपना समर्थन भी दिया है. शहपुरा संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा है कि, ”शहपुरा हर दृष्टि से जिला बनने के लिए उपयुक्त है. कोरे आश्वासन का क्षेत्र की जनता विरोध करती है और शहपुरा को जिला घोषित नहीं करने पर क्षेत्र की जनता अब उग्र जन आंदोलन करने को मजबूर होगी. जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी.”    भारतीय किसान संघ ने भी जिला बनाने का किया समर्थन शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति की मांग को जायज और क्षेत्र हित का बताते हुए भारतीय किसान संघ ने भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा. तहसील अध्यक्ष प्रमोद कुमार मौर्य ने कहा कि, ”शाहपुरा को जिला बनाने की मांग वर्षों पुरानी है. इसके लिए शाहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति सतत संघर्षरत है. कई बार ज्ञापन आंदोलन हुए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. आज पुनः शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति की मांग का भारतीय किसान संघ समर्थन करता है कि, शहपुरा को जल्द से जल्द जिला बनाया जाए.”

मुख्यमंत्री ने मजरा-टोला सड़क योजना को दी मंजूरी, मिली बड़ी सौगात, 39,900 किलोमीटर नई पक्की सड़कें और हजारों पुल-पुलिया होंगे तैयार

भोपाल  अब मध्यप्रदेश के मजरे-टोले भी विकास से जुड़ेंगे। इसके लिए 20,600 मजरे-टोलों को चिह्नित कर लिया है। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को स्वीकृति दी। इस योजना में 39,900 किमी सड़कें(New Road) बनेंगी। इन पर हजारों पुल-पुलिया बनेंगे। इस पर 21,630 करोड़ खर्च होगा। बारहमासी सड़कों से इलाके के स्कूली बच्चों, गर्भवतियों को बारिश में नदी-नाले रास्ता नहीं रोक पाएंगे। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 11 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कैबिनेट ने मंगलवार कोय ह सौगात दी। तबादले की डेडलाइन 17 जून करने समेत कई जनकल्याण निर्णय भी लिए। मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अब गांवों के सुदूर मजरे और टोले भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसमें 20,600 मजरे-टोले चिन्हित किए गए हैं। योजना के तहत कुल 39,900 किलोमीटर लंबी नई पक्की सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिन पर हजारों पुल और पुलिया भी बनेंगी। इस परियोजना पर अनुमानित 21,630 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बारहमासी सड़कों से सुविधाएं बढ़ेंगी इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इन सड़कों के माध्यम से ग्रामीण अंचलों में स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को बारिश में भी निर्बाध आवागमन मिल सकेगा। नदी-नालों और कच्चे रास्तों की दिक्कतें समाप्त होंगी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिया गया, जिससे राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी। योजना दो चरणों में पूरी होगी  मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहला चरण 2025-26 से 2029-30 तक चलेगा और दूसरा चरण 2030-31 से 2034-35 तक। इस दौरान 30,900 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे राज्य के सभी पात्र ग्रामीण टोलों को बारहमासी सड़कों से जोड़ा जाएगा। छोटे टोले भी होंगे शामिल, न्यूनतम आबादी और मकानों की शर्त पिछले 75 वर्षों में आबादी बढ़ने और परिवारों के बंटवारे के चलते मजरे-टोले स्वतंत्र इकाइयों के रूप में उभरे हैं, लेकिन अब तक अधोसंरचना से वंचित रहे हैं। सरकार ने तय किया है कि ऐसे मजरे और टोले भी इस योजना में शामिल होंगे जिनमें कम से कम 20 मकान, 100 से अधिक की आबादी और 6,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल होगा। ऐसे 20,600 मजरे-टोले पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं। हर जिले का विकास होगा योजनाबद्ध प्रदेश के प्रत्येक जिले का विकास योजनाबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जिला विकास सलाहकार समितियों के गठन को मंजूरी दी है। इन समितियों के अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं होंगे और उपाध्यक्ष प्रभारी मंत्री। स्थानीय जनप्रतिनिधि सदस्य होंगे और क्षेत्रीय विशेषज्ञों को भी सम्मिलित किया जाएगा। यह समिति जिले के लिए दीर्घकालिक विकास का रोडमैप तैयार कर सरकार को सौंपेगी। चार शहरों में बनेंगे सुरक्षित हॉस्टल कैबिनेट ने नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली और देवास में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित हॉस्टलों के निर्माण को भी स्वीकृति दी है। 40.59 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ये हॉस्टल उन महिलाओं को सुविधा देंगे जो औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ये आवास पूरी तरह सुरक्षित होंगे और महिला श्रमिकों के लिए एक सशक्त सहारा साबित होंगे। ब्याज मुक्त कर्ज और ग्रामीण सेवा की शर्त में होगा बदलाव कैबिनेट ने मेधावी छात्र योजना में भी महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। अब मेडिकल (MBBS) छात्रों को अपनी पढ़ाई का शुल्क स्वयं वहन करना होगा, लेकिन सरकार फीस पूर्ति के लिए छात्रवृत्ति और अतिरिक्त खर्चों के लिए ब्याज मुक्त कर्ज की व्यवस्था करेगी। यदि छात्र पांच वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करते हैं, तो सरकार कर्ज चुकाने में मदद करेगी। यह प्रावधान 2025 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। जो छात्र ग्रामीण सेवा नहीं करेंगे, उन्हें यह कर्ज स्वयं चुकाना होगा। तुअर दाल उद्योग को राहत प्रदेश में महाराष्ट्र जैसे राज्यों से आयातित तुअर से संचालित 134 दाल मिलों को भी सरकार ने राहत दी है। अभी तक इन पर मंडी टैक्स लगता था, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती थी। अब इस टैक्स को हटा दिया गया है, जिससे इन मिलों को गति मिलेगी और जीएसटी संग्रहण में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि मंडी राजस्व में लगभग 20 करोड़ रुपये की कमी आएगी, लेकिन राज्य सरकार का मानना है कि उद्योगों को राहत देना अधिक आवश्यक है। मेडिकल पढ़ाई में शुल्क से माफी नहीं, 5 साल के बांड से आजादी मेडिकल छात्रों को पढ़ाई के अतिरिक्त खर्च के लिए सरकार ब्याज मुक्त कर्ज दिलाएगी। मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना में बदलाव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। छात्रों को शुल्क खुद भरना होगा, फीसपूर्ति के लिए छात्रवृत्ती देंगे। अतिरिक्त खर्च के लिए कर्ज ले सकेंगे, जिसमें सरकार मदद करेगी। सरकार की मंशा अनुरूप 5 साल ग्रामीण इलाके में सेवा देंगे तो सरकार कर्ज चुकाने में मदद करेगी। जो ग्रामीण क्षेत्र में सेवा नहीं देंगे, उन्हें कर्ज खुद चुकाना होगा। यह बदलाव चालू वित्त वर्ष में एमबीबीएस में प्रवेश लेने वालों पर लागू होगा।

सर्वेक्षण गुणात्मक एवं प्रमाणिकता के साथ करें : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार विमुक्‍त, घुमन्‍तु एवं अर्द्धघुमन्‍तु जातियों के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इन जातियों के कल्याण की गतिविधियों को पावन कार्य बताते हुए कहा कि यह गर्व करने योग्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिये इन समुदायों का सर्वेक्षण के माध्यम से डाटा इक्कठा किया जायेगा। इस डाटा के आधार पर कार्यक्रम बनाये जायेगें और राज्य एवं केन्द्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से इन समुदायों को लाभांवित किया जायेगा। राज्य पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय के सर्वेक्षण-2025 पर बुधवार को हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि जन अभियान परिषद और विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण विभाग के बीच सर्वेक्षण के लिये एमओयू हुआ है। सर्वेक्षण प्रमाणिकता के साथ होगा। उन्होंने कहा कि सर्वे कार्य में लगे कार्य समन्वयक पूरी ईमानदारी एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि घुमन्तु समाज के उत्थान का यह पुण्य एवं पवित्र कार्य है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण विभाग के कार्य की सराहना भी की। पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदायों के परिवारों के समेकित विकास के दृष्टिगत सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में प्रदेश के 12 जिलों में सर्वेक्षण का कार्य होगा और यह कार्य तय समय सीमा 3 माह में पूरा किया जायेगा। सितम्बर में सर्वेक्षण का प्रथम चरण पूरा होने के बाद दूसरे चरण में प्रदेश के शेष जिले में सर्वेक्षण होगा। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण से इन समुदायों की जानकारी एकत्र की जायेगी और जानकारी के आधार पर इन समुदायों के विकास के लिये कार्यक्रम बनाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण दल यह सुनिश्चित करें कि सर्वेक्षण से एक भी परिवार नहीं छूटे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सर्वेक्षण के लिये दिये गये प्रस्ताव पर तुरंत सहमति दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया। कार्यशाला में क्षेत्रीय प्रमुख घुमन्तु कार्य श्री गौरेलाल ने सर्वेक्षण कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि वह विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदायों के बीच में पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहे है। उन्होंने कार्य के दौरान हुए अनुभवों पर आधारित इन समुदायों की समास्याओं से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाये और कहा कि इन समुदायों के विकास के लिये व्यवस्थित कार्य योजना जरूरी है और सर्वेक्षण का डाटा महत्वपूर्ण होगा। कार्यशाला को मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर, अध्यक्ष विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय विकास अभिकरण श्री बाबूलाल बंजारा ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में प्रमुख सचिव विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय विकास विभाग श्री ई. रमेश कुमार और कार्य पालक निदेशक जन अभियान परिषद डॉ. बकुल लाड ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर जानकारी दी। कार्यशाला में जनअभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड और संचालक विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तुसमुदाय विकास विभाग श्री नीरज वशिष्ठ ने एमओयू का दस्तावेज एक दूसरे को सौंपा। इस अवसर पर विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय विभाग द्वारा तैयार किये गये पोस्टर का विमोचन भी किया गया।  

अमृत हरित कार्यशाला 13 जून को रवीन्द्र भवन में, हरित क्षेत्र से जुड़े विषय-विशेषज्ञों के होंगे व्याख्यान

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा शुक्रवार 13 जून को प्रात: 8:30 बजे राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला अमृत हरित अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में हरित क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों और पहलों का प्रसार करना है। कार्यशाला में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, महापौर, निकायों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और जन-प्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यशाला में प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। प्रत्येक नगर निगम से 6, नगरपालिका परिषद से 4 और नगर परिषद से 2 प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गयी है। कार्यशाला के दौरान कृषि और उद्यानिकी से संबंधित उत्पादों एवं यंत्रों की प्रदर्शनी के साथ ही नर्सरी प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जायेगा। कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों जैसे इफ्को एवं भारतीय प्रबंध संस्थान के विषय-विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की जायेगी। कार्यशाला में स्थानीय वृक्ष प्रजातियों की विशेषताएँ एवं संरक्षण, जैव-विविधता एवं जलवायु परिवर्तन, बगीचों के लिये तकनीक एवं उपकरण की आवश्यकताएँ, वृक्षारोपण और पौध-रोपण से संबंधित अधिनियमों का विश्लेषण तथा वृक्षारोपण उपरांत समुचित प्रबंधन विषय पर चर्चा की जायेगी। हरित क्षेत्र बढ़ाने की रणनीतियाँ कार्यशाला में दिव्यांग पार्क, होशंगाबाद एवं उज्जैन की सफलता की कहानियों को भी साझा किया जायेगा। इन कहानियों पर आधारित फिल्म का विशेष प्रस्तुतिकरण किया जायेगा। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण समस्त नगरीय निकायों में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से किया जायेगा, जिससे राज्य के सभी निकाय इस अभियान से जुड़ सकें। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त श्री संकेत भोंडवे के निर्देशन में अपर आयुक्त श्री कैलाश वानखेड़े ने सभी नगरीय निकायों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किये हैं। इसके साथ ही पौध-रोपण कार्य में संलग्न शासकीय और अशासकीय संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यशाला में भाग लेंगे।  

प्रदेश में पेयजल स्रोतों की सफाई के साथ जनजागरूकता अभियान भी जारी

भोपाल  प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान 30 मार्च से जारी है। अभियान के दौरान ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाकर सुखद भविष्य के बारे में बताया जा रहा है। अभियान के दौरान जिले भर में प्राचीन बावड़ियों को चिन्हित कर उनकी मरम्मत और सफाई कार्य हाथ में लिया गया है। प्रदेश में लगातार जल यात्राएं निकाली जा रही हैं। वर्षा के मौसम को देखते हुए व्यापक पौधरोपण की कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है।   उत्कृष्ट कार्य करने वालो किया सम्मानित सिंगरौली जिले में नौगढ़ में जन अभियान परिषद द्वारा हनुमान मंदिर के पास बावड़ी में साफ-सफाई वृक्षारोपण व दीप प्रज्ज्वलित कर बावड़ी उत्सव मनाया गया। जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाली नवांकुर संस्था को विधायक श्री राम निवास शाह और कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर शुक्ला ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में पानी की बचत को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल यात्रा का आयोजन किया गया। इसी के साथ जल स्रोतों की साफ-सफाई जनभागीदारी से की गई। जल चौपाल में जन सामान्य को नदी-तालाबों के किनारों पर निरंतर सफाई करते रहने की समझाइश दी गई। सामूहिक भागीदारी में महिला कार्यकर्ताओं के माध्यम से अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी करने के लिये जन जागरूकता अभियान चलाया गया। 19 तालाबों का होगा सौंदर्यीकरण कटनी जिले में कलेक्टर श्री दिलीप कुमार यादव ने 5 जनपद पंचायतो में 19 तालाबों के मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ 83 लाख रूपये की स्वीकृति जारी की। कलेक्टर ने कहा कि जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के सभी कार्य आने वाले 15 दिनों में हर हाल में पूरे किये जायें। उन्होंने कहा कि जिले में मानसून की बारिश के दौरान व्यापक स्तर पर पौधरोपण की कार्ययोजना तैयार की जाये। पौधरोपण में स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ अधिक से अधिक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाये। उन्होंने बताया कि जिले में चिन्हित की गई प्राचीन बावड़ियों की सफाई का कार्य आगे भी लगातार चलता रहे, यह व्यवस्था भी की जानी चाहिए। जनभागीदारी से होगा प्राचीन जल स्रोतों का संरक्षण जबलपुर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जन अभियान परिषद द्वारा बावड़ी उत्सव कार्यक्रम का आयोजन कर पनागर में जयप्रकाश वार्ड स्थित प्राचीन बावड़ी की साफ-सफाई की गई। विधायक श्री सुशील तिवारी “इंदु” की उपस्थिति में हुए कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। विधायक श्री सुशील तिवारी ने बावड़ी संरक्षण के कार्यों में जनसमुदाय की भागीदारी को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पनागर विधानसभा क्षेत्र में जल संवर्धन के कार्यों तथा बावड़ी, तालाब और कुओं जैसे जल स्त्रोतों के सरंक्षण में शासन-प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों एवं आम जनता का भी सहयोग लिया जायेगा। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय समीक्षा डिण्डोरी जिले में कलेक्टर श्रीमती नेहा मारव्या की अध्यक्षता में जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति का समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत राज्य स्तर से समस्त जिलों की समीक्षा खेत तालाब, निर्माण कार्य, पुराने प्रगतिरत कार्यो की पूर्णता, कूप रिचार्ज, अमृत सरोवर निर्माण पर लक्ष्य निर्धारित कर पूर्णताः के आधार पर की जा रही है। जिले को किसानों के खेत में 2171 खेत तालाब निर्माण का लक्ष्य दिया गया था, जिसके विरूद्ध जिले में 2321 कार्यों की स्वीकृति जारी कर 2200 कार्य निर्माण प्रारंभ किये जा चुके हैं। अभियान के दौरान जिले को 1500 कुओं का जल स्तर बढाने के लिये रिचार्ज संरचनाएं बनाने का लक्ष्य दिया गया था। जिले में 1570 कूपों में रिचार्ज संरचना निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया है। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि समस्त कूपों में 15 जून तक गुणवत्ता‍पूर्ण रिचार्ज संरचना शत-प्रतिशत निर्मित करते हुये नियमानुसार मजदूरी एवं सामग्री का मूल्यांकन कर एफटीओ किया जाए। जिले में जनपद पंचायत में 187 सार्वजनिक तालाब का निर्माण किया जा रहा है। पेयजल स्त्रोतों में किया गया क्लोरिनेशन मंडला जिले में कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के निर्देश पर ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्ता पूर्ण शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिये पेयजल स्रोतों में जर्मेक्स डालकर क्लोरिनेशन कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों को पानी को उबालकर, छानकर, शुद्ध पानी पीने एवं ताजा भोजन करने की समझाइश दी गई। जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में किये जा रहे कार्यों की निरंतर समीक्षा की जा रही है। जिले में जनसमुदाय की उपस्थिति में बावड़ी उत्सव का भी आयोजन किया गया है। बावड़ियों की पूजन कर ग्रामीणों को पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई की शपथ भी दिलाई गई। आदर्श ग्राम कन्हान वनग्राम में बोमली नाला में साफ-सफाई छिन्दवाड़ा जिले में जन अभियान परिषद के तत्वाधान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर 30 मार्च से निरंतर पेजयल स्रोतों की साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्राम के बोमली नाला में सामूहिक जन-भागीदारी से बोमली खेत तालाब जल स्त्रोत की साफ-सफाई और गहरीकरण किया गया। यह कार्य निरंतर चलता रहेगा। सफाई कार्य के दौरान ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जिले में ग्रामीणों क्षेत्रों में जल चौपालों का आयोजन लगातार किया जा रहा है। ग्रामीणों को पानी की बर्बादी रोकने के लिये शपथ दिलाई जा रही है।

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