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प्रदेश में जल संरक्षण की यात्रा दिन प्रति दिन मजबूती से आगे बढ़ रही

भोपाल प्रदेश में जल संरक्षण की यात्रा दिन प्रति दिन मजबूती से आगे बढ़ रही है। जनभागीदारी से जल संरचनाओं के संरक्षण और सफाई के कार्य हाथ में लिये गये है। ऐतिहासिक, संस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले जल स्त्रोतों के सफाई के कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है। नर्मदा पथ पर यात्रा के माध्यम से नदी किनारे ग्रामों में जल चौपाल कर ग्रामीणों को नदी के आसपास साफ सफाई के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। जल है जीवन की धारा, कल का यही सहारा शहडोल जिले में स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से जल संवर्धन का कार्य लगातार किया जा रहा है। इसी के साथ जल है जीवन की धारा, कल का यही सहारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर “जल गंगा सवंर्धन अभियान” 30 मार्च से 30 जून तक चलाया जा रहा है। यह अभियान जन-जन के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है। अभियान के अंतर्गत जहां एक ओर नये तालाब बनाये जा रहे, वहीं दूसरी ओर पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुँओं का जीर्णाद्वार का कार्य भी किया जा रहा है।  नदियों को साफ-स्वच्छ एवं जल एकत्रित करने के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्रोतों तथा देवालयों में जल संरक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं। अभियान जन प्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय, जनभागीदारी, आमजन और सरकार के संयुक्त प्रयास से संचालित हो रहा है। अभियान में मशीन, सामग्री और श्रम का समुचित नियोजन किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत शहडोल जिले के जनपद पंचायत सोहागपुर के ग्राम पंचायत मैकी, ग्राम पंचायत दुलादर  सहित अन्य ग्राम पंचायतों में नवीन खेत तालाब के कार्य किये गए है। ग्राम समर्रा में नल कनेक्शनों में टोटियां लगायी गयी टीकमगढ़ कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय के निर्देशानुसार जिले में जलगंगा संवर्धन अभियान कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी क्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत ग्राम समर्रा में एकल जल प्रदाय योजना के अंतर्गत नल कनेक्शनों में टोंटियां लगायी गईं। ग्रामीणों को पानी के अनावश्यक बहने से राकेने की समझाइश दी गई। ग्राम समर्रा में करीब 20 घरों के नल कनेक्शनों में टोटियों को लगाया गया। यह पहल ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश से की गई है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि पानी भरते ही नल की टोटी बंद कर देना चाहिए, जिससे जल को बर्बाद होने से रोका जा सके। अभियान पर केन्द्रित प्रदर्शनी का सरपंचों ने किया अवलोकन राज्य सरकार के निर्देश पर 30 मार्च से प्रारंभ हुए प्रदेश स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जनसहभागिता से निरंतर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। आगामी 30 जून तक संचालित होने वाले इस महत्वाकांक्षी अभियान में प्राचीन जल स्त्रोतों एवं कुएं व बावड़ियों के जीर्णाद्धार कार्य सहित जल संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं अंतर्गत खेत तालाब निर्माण इत्यादि का कार्य ग्रामवासियों के सहयोग से क्रियान्वित हो रहा है। अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में विभिन्न कार्यों को जनसहभागिता से बेहतर रूप में क्रियान्वित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। जिले के सभी विकासखण्ड में अभियान के तहत पूर्ण हो चुके एवं प्रगतिरत कार्यों के बारे में जानकारी तथा तकनीकी पहलुओं से अवगत कराने के लिए जिला पंचायत परिसर में प्रदर्शनी लगाई गई। करीब 90 सरपंचो ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। पंचायत प्रतिनिधियों को जल की स्वच्छता एवं कचरा के उचित निस्तारण की जानकारी दी गई। अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के प्रश्नों का समाधान भी किया गया। एक्सपोजर विजिट में सरपंचों को जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अच्छे कार्यों का महत्व बताया गया। प्रदर्शनी में ग्रामीण क्षेत्र और पंचायतों के उत्कृष्ट कार्यों को प्रदर्शित किया गया। तालाब में किया गया श्रमदान दमोह जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में स्वच्छता ही सेवा का 49वें सप्ताह के अंतर्गत पाठक कॉलोनी तालाब में श्रमदान किया गया। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, जनप्रतिनिधियों,  विभिन्न सामाजिक संगठन, स्वंयसेवी संस्थाओं ने अपनी सहभागिता निभाई। यह श्रमदान कार्य पिछले 48 सप्ताह से जारी हैं। जिले में जल स्त्रोतों मे सीवेज का गंदा पानी न मिले इसके लिये सोक पिट का निर्माण किया गया है। जिले में सिंचाई की नहर प्रणाली की सफाई व्यवस्था में किसानों की सहभागीता सुनिश्चित की जा रही है। भरहटा में बावडी की सफाई सतना जिले में उचेहरा विकासखंड के कबीर आश्रम ग्राम पंचायत भरहटा में बावड़ी स्वच्छता कार्यक्रम में जनभगीदारी से सफाई कार्य किया जा रहा है। स्थानीय पुजारी के अनुसार सम्राट अशोक के समय इस बावड़ी का निर्माण कराया गया था। बताया गया कि प्राचीन समय में राहगीर और स्थानीय गांव के लोग इसी से पानी पीते थे। श्रमदान के बाद ग्रामीणों को पेयजल स्त्रोतों की उपयोगिता की जानकारी दी गई। उन्हें शपथ दिलाई गई की वे निंरतर श्रमदान कर बावड़ी के आस पार सफाई रखेंगे। जिले में किसानों को खेत तालाब के महत्व के बारे में विभागीय अधिकारियों द्वारा जानकारी देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है।  

डॉक्टरों और तकनीशियनों को 1 जुलाई से एमजीएम मेडिकल कॉलेज में कार्निया प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण दिया जाएगा

इंदौर नेत्रदान को बढ़ावा देने और ज्यादा लोगों तक इलाज पहुंचाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक नई पहल की है। अब प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में कार्निया (आंख का पारदर्शी हिस्सा) प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके लिए राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) ने प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है। कॉर्निया ट्रांसप्लांट की हुई पहल इस योजना के पहले चरण में इंदौर और उज्जैन संभाग के 15 जिलों के अस्पतालों में प्रत्यारोपण केंद्र शुरू होंगे। इन जिलों में डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे अपने-अपने जिलों में यह सुविधा शुरू कर सकें। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी ट्रेनिंग ट्रेनिंग का काम 1 जुलाई से इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में शुरू होगा। डॉक्टरों को एक महीने और तकनीशियनों को 15 दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम देगी। इस विभाग में हर साल करीब 100 कार्निया प्रत्यारोपण पहले से ही किए जाते हैं और यहां नेत्र बैंक भी है। राज्य के अधिकांश जिला अस्पतालों में पहले से ही ऑपरेशन थिएटर, माइक्रोस्कोप और जरूरी उपकरण मौजूद हैं क्योंकि वहां मोतियाबिंद जैसी सर्जरी होती है। इसलिए कार्निया ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रिया को भी वहां आसानी से शुरू किया जा सकता है। इन जिलों में पहले शुरू होगी सुविधा     इंदौर संभाग के – आलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, इंदौर, झाबुआ, खंडवा और खरगोन।     उज्जैन संभाग के – देवास, आगर-मालवा, शाजापुर, रतलाम, उज्जैन, मंदसौर और नीमच। एमवाय अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की एचओडी डॉ. प्रीति रावत के अनुसार, इस पहल से उन मरीजों को राहत मिलेगी जो पैसों की कमी या दूरी के कारण बड़े शहरों में इलाज नहीं करवा पाते। अब उन्हें अपने जिले में ही आंखों के प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सकेगी। इसके साथ ही नेत्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे ज्यादा मरीजों को रोशनी मिल पाएगी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि यह योजना स्वास्थ्य विभाग और शासन के सहयोग से लागू की जाएगी। ट्रेनिंग खत्म होने के तीन महीने बाद हर जिले में प्रत्यारोपण केंद्र चालू हो जाएंगे।

इसबार क्या बढ़कर आएगी लाड़ली बहना योजना की किस्त ? 1250 का इंतजार

भोपाल  मध्य प्रदेश की करोड़ों बहनों के लिए जून का महीना बड़ी राहत लेकर आया है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत 25वीं किस्त जल्द जारी होने वाली है, जिसमें करीब 1.27 करोड़ महिलाओं के खातों में ₹1250 ट्रांसफर किए जाएंगे। यही नहीं, इस बार 26 लाख से ज्यादा बहनों को गैस सिलेंडर रिफिलिंग के लिए भी अतिरिक्त राशि दी जाएगी। यह खुशखबरी उन महिलाओं के लिए है जो इस योजना से हर महीने आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। 15 तारीख तक आएगी 25वीं किस्त अब तक हर महीने की 10 तारीख तक किस्त जारी की जाती थी, लेकिन अप्रैल 2025 से सरकार ने तारीख को थोड़ा आगे बढ़ाया है। अब हर महीने की 15 तारीख के आसपास भुगतान किया जाएगा। अप्रैल में 16 और मई में 15 तारीख को किस्तें आई थीं, ऐसे में अनुमान है कि 25वीं किस्त 15 जून 2025 तक बहनों के खातों में पहुंच सकती है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है। रक्षाबंधन पर पर बढ़ेगी राशि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में रीवा जिले के मनगवां में एक महिला सम्मेलन में ऐलान किया कि रक्षाबंधन पर लाड़ली बहनों को अतिरिक्त सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा उन्होंने वादा किया कि अगले 3 वर्षों में योजना की राशि को बढ़ाकर ₹3000 प्रति माह कर दिया जाएगा। मई 2023 में हुई थी योजना की शुरूआत लाड़ली बहना योजना मई 2023 में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई थी, जिसका मकसद था महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना। शुरुआती किस्त ₹1000 की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹1250 किया गया। अब हर साल ₹15,000 तक की मदद मिलने लगी है। कौन महिलाएं हैं पात्र? जानिए नियम और शर्तें इस योजना का लाभ पाने के लिए महिला की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। केवल विवाहित महिलाएं, चाहे वे विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता हों, पात्र मानी जाती हैं। महिला या उसके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही परिवार में कोई टैक्सपेयर, सरकारी कर्मचारी या पेंशनधारी सदस्य नहीं होना चाहिए। जिन महिलाओं के पास ट्रैक्टर को छोड़कर चारपहिया वाहन हैं या 5 एकड़ से ज्यादा जमीन है, वे भी इस योजना से बाहर हैं। रक्षाबंधन पर मिलेगा बहनों को उपहार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने रीवा जिले के मनगवां में महिला स्वसहायता समूह सशक्तिकरण सम्मेलन में ऐलान किया है कि रक्षाबंधन में बहनों को इस योजना से अतिरिक्त राशि दी जाएगी। इस योजना की राशि 3 वर्ष में बढ़ाकर 3 हजार रुपए तक ले जाएंगे।इससे पहले सारणी में एक सभा के दौरान भी सीएम ने ऐलान किया था कि लाड़ली बहना योजना की राशि 1250 से बढ़ाकर 3 हजार रुपए प्रतिमाह तक की जाएगी। आने वाले 5 वर्षों में लाड़ली बहनों को प्रतिमाह तीन हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी। जब योजना शुरू की गई थी, तब सरकार ने वादा किया था कि 1000 रुपये का भुगतान धीरे-धीरे बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से मई 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 24 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 28 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। जानिए लाड़ली बहना योजना के लिए आयु/पात्रता/नियम     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। लाड़ली बहना योजना के ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं     जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।     जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।     जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। लाभार्थी सूची में चेक करें नाम, पैसा मिलेगा या नहीं?     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर … Read more

50,000 सरकारी कर्मचारियों को पिछले महीनों से सैलरी नहीं मिली, सामने आया 230 करोड़ का वेतन घोटाला

भोपाल मध्य प्रदेश में 230 करोड़ का वेतन घोटाला सामने आया है जिसमें 50,000 सरकारी कर्मचारियों को पिछले महीनों से सैलरी नहीं मिली है। जानकारी के मुताबिक एमपी के कार्यबल के लगभग 9 फीसदी हिस्से को सैलरी ना दिया जाने की समस्या ने बड़े घोटाले का रूप ले लिया है और माना जा रहा है कि राज्य का अब तक का सबसे बड़ा सैलरी स्कैम हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिन कर्मचारियों को सैलरी नहीं दी गई उनके नाम सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद हैं। इन कर्मचारियों का नाम और कर्मचारी कोड सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। किन किसी कारण से पिछले साल दिसंबर से इनकी सैलरी इन्हें नहीं दी गई है। तीन बड़े सवाल ऐसी चीजें सामने आने के बाद अब तीन बड़े सावल खड़े हो गए हैं। क्या ये कर्मचारी अनपेड लीव पर हैं? क्या इन्हें निलंबित किया गया है? या ये महज़ घोस्ट कर्मचारी हैं यानी कागज़ों पर तो हैं, असल में नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक 23 मई को आयुक्त कोषागार एवं लेखा (CTA) ने सभी ड्रॉइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर्स (DDO) को लेटर भेजा था। इस लेटर में इस चौंकाने वाले मामले की जांच के लिए कहा गया था। इसमें कहा गया था, IFMIS के अंतर्गत रेगुलर/नॉन रेगुलर कर्मचारियों का डेटा, जिनका वेतन दिसंबर 2024 से नहीं निकाला गया है। हालांकि कर्मचारी कोड मौजूद हैं, लेकिन IFMIS में उनका वेरिफिकेशन अधूरा है, और एग्जिट प्रोसेस भी नहीं किया गया है। इस लेटर के बाद, 6,000 से ज्यादा DDO जांच के दायरे में हैं और उनसे 15 दिनों में संभावित 230 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। इसकी समय-सीमा आज समाप्त हो जाएगी।  

भोपाल में एक साल में 13 किमी ज्यादा नयी सड़कें शहरवासियों को मिलीं, बीते एक साल में 387 किमी सड़कों पर काम हुआ

भोपाल राजधानी भोपाल में आबादी और क्षेत्र विस्तार के साथ सड़कों की लंबाई और चौड़ाई भी बढ़ रही है। पीडब्ल्यूडी ने बीते एक साल में शहर में 25 किमी नई सड़क बनाई। हर साल करीब 12 किमी लंबाई की नयी सड़कें पीडब्ल्यूडी तैयार करता है। लेकिन इस साल 13 किमी ज्यादा नयी सड़कें शहरवासियों को मिलीं। बीते एक साल में 387 किमी सड़कों पर काम हुआ। सड़क पर सालाना 50 करोड़ खर्च सड़क नई बनाना हो या फिर नवीनीकरण, उन्नयन या फिर चौड़ीकरण करना हो शासन शहर पर औसतन 50 करोड़ रुपए खर्चें करता है। ये राशि सिर्फ पीडब्ल्यूडी की है। इसमें यदि बीडीए, हाउसिंग बोर्ड, नगरीय निकाय को भी शामिल करें तो बजट करीब 100 करोड़ के पास होगा। खराब सड़कों की हो जांच सालाना 300 किमी से अधिक लंबाई की सड़कों पर काम होता है। 50 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की जाती है, बावजूद इसके आमजन टूटी सड़कों(News Road built in MP) से गुजरने को मजबूर हैं। शहर के लोगों का कहना है कि सड़के खराब हैं तो करोड़ों रुपए का खर्च कहां किया जा रहा, इसकी जांच की जरूरत है। नर्मदापुरम रोड की सर्विस लेन से लेकर करोद रोड, भानपुर सर्विस लेन, 11 मिल तिराहे की सड़कें सबसे अधिक खराब हैं। इनकी मरमत की ज्यादा जरूरत है। भोपाल में सड़कें     573 किमी सड़कें पीडब्ल्यूडी की     268 सड़कें हैं कुल पीडब्ल्यूडी की     400 किमी सड़कें परफॉर्मेंस गारंटी में     4000 किमी लंबी सड़कें नगर निगम की शहर में सड़क सुधार और निर्माण के लिए विभाग तय शहर में सड़क सुधार और निर्माण के लिए विभाग तय हैं। सभी के पास बजट है और लगातार प्रस्ताव व कार्य चलते रहते हैं। ये नियमित व सतत काम है। पीडब्ल्यूडी का लक्ष्य लोगों को आवाजाही का बेहतर माध्यम देना है।– केपीएस राणा, इएनसी, पीडब्ल्यूडी

बिजली कंपनी की भर्ती परीक्षा में प्रोविजनल सूची में चयनित आवेदकों के दस्तावेज सत्यापन 23 से 25 जून तक

भोपाल  मध्यप्रदेश शासन ऊर्जा विभाग के अधीन 6 बिजली कंपनियों में विभिन्न खाली पदों की पूर्ति के लिये परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल द्वारा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदों के अंतर्गत कनिष्ठ अभियंता (विद्युत), कनिष्ठ अभियंता (सिविल), विधि सहायक, कार्यालय सहायक श्रेणी-तीन एवं लाइन परिचारक के पदों को भरने के लिए दस्तावेज सत्यापन हेतु प्रोविजनल सूची जारी कर दी गयी है। कंपनी द्वारा इन तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदों की पूर्ति के लिये कुल 546 सफल आवेदकों की प्रोविजनल सूची जारी कर दस्तावेज सत्यापन के लिये सूचना जारी की गई है।  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया है कि कंपनी द्वारा प्रोविजनल सूची में शॉर्टलिस्ट आवेदकों में कनिष्ठ अभियंता (विद्युत) के 63, कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के 5,  विधि सहायक के 21 एवं कार्यालय सहायक श्रेणी-तीन के 309 आवेदकों को 23 जून से 25 जून तक अलग-अलग तारीखों में दस्तावेज सत्यापन के साथ ही लाइन परिचारक के 148 आवेदकों को 26 जून को शारीरिक दक्षता परीक्षण के लिये व्यक्तिगत सूचना जारी की गई है। कंपनी द्वारा आवेदकों के दस्तावेज सत्यापन मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के गोविन्दपुरा मुख्यालय स्थित पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रेनिंग सेन्टर में किया जाएगा तथा लाइन परिचारक के दस्तावेज सत्यापन एवं शारीरिक दक्षता परीक्षण कंपनी के शिवपुरी, भोपाल, नर्मदापुरम एवं ग्वालियर स्थित महाप्रबंधक वृत्त कार्यालय में 26 जून को किये जायेंगे। प्रोविजनल सूची में दस्तावेज सत्यापन के लिये चयनित आवेदकों के नाम, सत्यापन तिथि एवं शारीरिक दक्षता परीक्षण की तिथि की जानकारी कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर भी देखी जा सकती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बूंद सहेजे बावड़ी पुस्तक का किया विमोचन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  जल गंगा संवर्धन अभियान में श्री चिंतामण गणेश मंदिर परिसर स्थित लक्ष्मण बावड़ी से बावड़ी उत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘बूंद सहेजे बावड़ी’ पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘एक पेड़ मां के नाम अभियान’ में चिंतामण गणेश मंदिर परिसर में सिंदूर के पौधे का रोपण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्री चिंतामण गणेश के आशीर्वाद से देश-प्रदेश विकास की नई ऊंचाईयाँ छू रहा है। उज्जैन में आयोजित की गई वेलनेस समिट में हजारों करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। उज्जैन देश-विदेश के लिए मानसिक शांति, आध्यात्म, वेलनेस केयर का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 दृष्टिगत श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन-इंदौर नवीन फोरलेन पर भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चिंतामण गणेश रेलवे स्टेशन का उन्नयन भी किया जाएगा। मां क्षिप्रा को कान्ह क्लोज़ डक्ट परियोजना और सेवारखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना से स्वच्छ, निर्मल और प्रवाहमान किया जा रहा है। इससे सिंहस्थ स्नान मां क्षिप्रा के स्वच्छ जल से हो होगा। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नवीन क्षिप्रा घाटों का निर्माण किया जा रहा है। सभी सुविधा श्रद्धालुओं को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से 30 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है जिसमें प्रदेश में जल संरक्षण का संदेश, जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार और भू-जल स्तर में सुधार पर कार्य कर जल की एक-एक बूंद को संरक्षित करने के उपाय किये गये हैं। बावड़ी-उत्सव जन अभियान परिषद द्वारा बताया गया कि बावड़ी उत्सव में बावड़ियों के स्थल की जन सहभागिता से जीर्णोद्धार, प्रकाश, साफ सफाई, साज-सज्जा, जल आने के मार्गो को खोलकर जल संरचनाओं को नव जीवन प्रदान किया जा रहा है। जीर्णोद्धार के बाद बावड़ी उत्सव अंतर्गत बावड़ी का परंपरागत पूजन भी किया जा रहा है और जलस्त्रोत संरक्षण केन्द्रित संदेश अथवा बावड़ी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक महत्व के बारे में जानकारी देकर, जल संचय का संदेश दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में संपूर्ण अभियान में परिषद के प्रयासों से 36 लाख 34 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित हुई है। परिषद् द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में 2139 बावड़ी सफाई, 4254 तालाब सफाई, 3468 नदी घाट सफाई,15913 जल संगोष्ठी,1677 नुक्कड़ नाटक, दीवार लेखन के कार्य किए गए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने बावड़ी उत्सव में लक्ष्मण बावड़ी का पूजन किया। कार्यक्रम का संचालन श्री पीयूष त्रिपाठी ने किया और आभार संभाग समन्वयक श्री शिवप्रसाद मालवीय ने किया। कार्यक्रम में सांसद श्री अनिल फिरोजिया, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, जनप्रतिनिधि श्री संजय अग्रवाल, श्री रवि सोलंकी, चिंतामण गणेश मंदिर प्रशासक श्री अभिषेक शर्मा, पुजारी श्री राजेश गुरु, जनअभियान परिषद के कार्यपालक निर्देशक डॉ बकुल लाड़,सदस्य श्रीमती अजीता परमार,जिला समन्वयक श्री देवेंद्र शर्मा और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने किया देव फ़िल्म एंड टीवी इंस्टिट्यूट के कार्यालय का शुभारंभ

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने देव श्री फ़िल्म एंड टीवी इंस्टिट्यूट के भोपाल कार्यालय का उद्घाटन किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने संस्थान की स्थापना को स्थानीय प्रतिभाओं के प्रोत्साहन और क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, विशेष रूप से भोपाल और उसके आस-पास के अंचल में कला, संगीत, अभिनय, निर्देशन और तकनीकी दक्षता से परिपूर्ण प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है तो उन्हें उचित मंच देने की। उन्होंने कहा कि देव श्री फ़िल्म एंड इंस्टिट्यूट इस दिशा में एक सशक्त भूमिका निभा सकता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि आज का युग संचार, सिनेमा और डिजिटल मीडिया का है, जिसमें क्षेत्रीय भाषाएँ, लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाएं भी वैश्विक मंच पर पहुँच रही हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह संस्थान मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक मूल्यों को फिल्म और मीडिया के माध्यम से उजागर करेगा, जिससे न केवल राज्य की पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और पहचान के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री विनोद तिवारी को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर सांस्कृतिक, मीडिया और शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।  

सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया अब और तेज, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत पद

भोपाल मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया अब और तेज हो गई है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग ने इसके लिए अधीनस्थ संस्थाओं और विभागों के भर्ती नियमों में संशोधन करते हुए इसे लागू करना शुरू कर दिया है। “मध्य प्रदेश फर्म्स एवं संस्थाएं सेवा भर्ती नियम 1988” में अब सीधी भर्ती के पदों में 27 प्रतिशत पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इसके अलावा अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 20 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रहेगा।   पूर्व में मध्य प्रदेश में ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण मिलता था, जिसे वर्ष 2019 में बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। हालांकि, इस निर्णय की वैधानिकता को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई और इसके क्रियान्वयन पर रोक लग गई थी। कुछ भर्तियों में संशोधित आरक्षण के अनुसार परीक्षा तो हुई, लेकिन परिणाम अटक गए। स्थिति को ध्यान में रखते हुए सितंबर 2021 में “83:13 फॉर्मूला” लागू किया गया था, जिसके तहत 27 प्रतिशत आरक्षण वाले पदों को स्थगित कर बाकी पदों पर नियुक्तियां की गईं। इस फॉर्मूले को भी हाई कोर्ट में चुनौती दी गई और अगस्त 2023 में इस पर भी रोक लगा दी गई। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिससे अब इस पर कोई कानूनी बाधा नहीं बची है। सरकार आरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध आरक्षण की मांग को लेकर मुखर लोकेंद्र गुर्जर का कहना है कि अब सरकार को तत्काल 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पहले ही साफ कर चुके हैं कि सरकार इस आरक्षण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इससे जुड़ी लंबित याचिकाओं पर गंभीर संवाद जारी है। महिलाओं को भी मिलेगा आरक्षण महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं को भी आरक्षित वर्गों के भीतर 35 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। वहीं, एससी-एसटी के लिए आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था यथावत बनी रहेगी। सरकार द्वारा सेवा भर्ती नियमों में किए जा रहे संशोधन से अब स्पष्ट हो गया है कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है।

बिजली बिल कम करने तथा खपत को नियंत्रित करने में मददगार साबित हुआ स्‍मार्ट मीटर

भोपाल  केन्द्र सरकार की रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) योजना के अंतर्गत वितरण कंपनियों द्वारा लगाये गये स्मार्ट मीटर बेहतर कार्य कर रहे हैं। जहां-जहां स्‍मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां पर समय पर बिलिंग तथा रीडिंग हो रही है। कंपनी ने कहा है कि स्‍मार्ट मीटर लगने से उपभोक्‍ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो रहा है। स्‍मार्ट मीटर लगाने का काम समय सीमा में पूर्ण करने के लिए कंपनी की टीमें लगातार कार्य में जुटी हुई हैं। रियल टाइम डेटा उपलब्‍ध स्‍मार्ट मीटर से रियल टाइम डेटा प्राप्‍त किया जा सकता है। इससे उपभोक्‍ताओं को सटीक और समय पर बिलिंग सुनिश्चित की जा रही है। नए टैरिफ आर्डर के अनुसार स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को अब खपत के आधार पर दिन के टैरिफ में छूट भी दी जा रही है। रीडिंग में कोई गड़बड़ी नहीं उपभोक्‍ताओं को वा‍स्‍तविक समय में ऊर्जा खपत की सटीक तथा अद्यतन जानकारी मिल रही है, साथ ही रीडिंग में किसी तरह की कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। उपभोक्‍ताओं के परिसर में जाकर रीडिंग लेने की जरूरत भी नहीं है, क्‍योंकि निर्धारित तिथि पर ऑटोमेटिक रीडिंग करके उपभोक्‍ताओं के पंजीकृत मोबाइल पर बिल जारी किया जा रहा है। उपभोक्‍ता स्‍वयं खपत की निगरानी कर रहे जहां-जहां भी स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं वहां पर निर्धारित समय पर तथा सटीक रीडिंग मिल रही है। उपभोक्‍ता स्‍वयं भी ऊर्जा खपत की निगरानी कर सकते हैं, इसके लिए हर 15 मिनट में डाटा अद्यतन हो रहा है, ताकि यह समझने में आसानी रहे कि किस समय कितनी ऊर्जा की खपत हुई है। अब बिजली खपत को नियंत्रित करने में आसानी हो रही है। बिलों में त्रुटि की संभावना नहीं स्‍मार्ट मीटर से बिजली के बिलों में त्रुटि की संभावना बहुत कम हो गई है और बिजली की चोरी रोकने में भी स्‍मार्ट मीटर मददगार साबित हो रहे हैं। स्‍मार्ट मीटर वास्तविक समय में अपनी बिजली की खपत पर नज़र रखने में मदद करते हैं, जिससे उपभोक्‍ता स्‍वयं भी अपनी खपत को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। साथ ही गैरजरूरी उपकरणों को बंद करके ऊर्जा की बचत कर सकते हैं।  

नक्शा’ वेब-जीआईएस प्लेटफॉर्म बनेगा भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण की आधारशिला

भोपाल ‘नक्शा’ वेब-जीआईएस समाधान पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन तकनीकी सत्रों, विचार-विमर्श और राज्यों के अनुभव-साझा के साथ हुआ। कार्यशाला का आयोजन मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन एवं भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यशाला में देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए 44 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी एवं जीआईएस विशेषज्ञों ने भाग लिया। भूमि संसाधन विभाग, भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री कुणाल सत्यार्थी ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्य स्तर पर सहयोग और व्यवहारिक समाधान अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “सबसे अच्छी तकनीक वही होती है जिसे लोग सहज रूप से अपनाएं।” उन्होंने प्रशिक्षण, सुधार और नागरिक-केंद्रित डिजिटल सिस्टम विकसित करने का आग्रह किया। कार्यशाला के दूसरे दिन की शुरुआत सांची क्षेत्र के फील्ड सर्वेक्षण डेटा के लाइव प्रदर्शन से हुई। इसमें NAKSHA ऐप की प्रमुख कार्यक्षमताएं जैसे भूखंडों का विभाजन-मिलान, रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RoR) सुधार और प्रकाशन प्रक्रिया का वर्कफ़्लो प्रदर्शित किया गया। एमपीएसईडीसी टीम ने बताया कि कैसे ऑफलाइन डेटा अपलोड और इंटरैक्टिव डैशबोर्ड जैसे फीचर्स भूमि प्रबंधन को अधिक सरल और सुलभ बनाते हैं। सत्र के दौरान विभिन्न राज्यों ने अपनी डिजिटल सर्वेक्षण पहलों को साझा किया। केरल ने अपनी “एंटे भूमि” परियोजना के तहत विकसित वेब-जीआईएस प्लेटफॉर्म प्रस्तुतिकरण दिया, जो शिकायत निवारण, फील्ड मॉनिटरिंग और नागरिक सेवाओं को एकीकृत करता है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने भी अपने नवाचारों और डिजिटल मैपिंग के अनुभव साझा किए। बाद में प्रतिभागियों को राज्यों के चार समूहों में विभाजित कर एमपीएसईडीसी की तकनीकी टीम के साथ राउंडटेबल सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें डेटा एकीकरण, प्रशिक्षण, कार्यान्वयन की समय-सीमा और यूजर इंटरफेस सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन संवाद हुआ। विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, केरल और मेघालय के प्रस्तुत सुझावों को सराहना मिली। कार्यक्रम के समापन पर एमपीएसईडीसी के एडिशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री संदीप गोयल ने सभी राज्यों के योगदान और सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यशाला भारत में डिजिटल भूमि प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुई है। साथ ही, ‘नक्शा’ पहल के राष्ट्रीय विस्तार हेतु सहयोग का सशक्त मंच भी बनी है।  

स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को खपत के आधार पर दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की मिलेगी छूट

भोपाल मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया है कि स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को दिन के टैरिफ में छूट प्रदान की जाएगी। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी को छोड़कर की जाएगी। कंपनी ने कहा है कि यह छूट निम्‍नदाब उपभोक्ता श्रेणियों के लिए विशिष्ट नियमों और शर्तों के आधार पर दिन के विभिन्न समय (सोलर ऑवर) के दौरान खपत की अवधि के अनुसार ऊर्जा शुल्क पर लागू होगी। सामान्‍य उपभोक्‍ताओं को सोलर आवर में छूट घरेलू और गैर घरेलू सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट श्रेणी के उपभोक्‍ताओं को सोलर ऑवर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। इसी तरह गैर-घरेलू और निम्नदाब के औद्योगिक उपभोक्‍ताओं, आटा चक्‍की आदि को सौर ऑवर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। यह छूट 10 किलोवाट से अधिक स्वीकृत लोड, अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को ही मिलेगी। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को सोलर ऑवर में छूट स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए जिसमें घरेलू, गैर घरेलू, सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और निम्‍नदाब औद्योगिक उपभोक्‍ताओं के लिए सोलर ऑवर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। यह छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड, अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को ही मिलेगी।  

पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर स्मरण प्रसंग

भोपाल संस्कृति विभाग की मराठी साहित्य अकादमी द्वारा “स्मरण प्रसंग’’ शीर्षक से पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर 7 एवं 8 जून को दो दिवसीय पोवाडा एवं नृत्यनाट्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन शाम 5 बजे से हंसध्वनि सभागार, रवीन्द्र भवन में होगा। निदेशक मराठी साहित्य अकादमी भोपाल श्री संतोष गोडबोले ने बताया कि सांस्कृतिक संध्या में भोपाल की लगभग 14 स्थानीय संस्थाओं के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति लोक-नृत्यों, अभंग-गायन, पर्व एवं त्यौहार आदि की संगीतमय प्रस्तुति होगी। सांगली महाराष्ट्र से आमंत्रित कलाकार शाहीर रत्न प्रसाद विभूते एवं साथी कलाकारों द्वारा मराठी पोवांडा गायन की संगीतमय प्रस्तुति होगी। इस दौरान आई साहेब मातृशक्ति सम्मेलन भी होगा।  

रेगुलर, नॉन रेगुलर कर्मचारियों के डाटा का परीक्षण सरकार की निरंतर प्रक्रिया

भोपाल  राज्य शासन द्वारा रेगुलर और नॉन रेगुलर कर्मचारियों के डाटा का परीक्षण आईएफएमआईएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से नियमित रूप से किया जा रहा है। यह एक निरंतर प्रक्रिया है। इस संबंध में कार्यालय आयुक्त एवं लेखा द्वारा सभी कोषालय, आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को समय-समय पर पत्र लिखकर डाटा की पुष्टि के लिए निर्देश दिए गये है। आयुक्‍त कोष एवं लेखा कार्यालय के अंतर्गत एक राज्‍य वित्तीय इंटेलिजेंस सेल (एस.एफ.आई.सी.) संचालित है जो नियमित अंतराल पर कोषालय के डाटा का विश्‍लेषण करता है। जिसमें कर्मचारियों के वेतन आहरण की मॉनिटरिंग भी की जाती है। इस सेल द्वारा ऐसे लगभग 50 हजार कर्मचारियों के कर्मचारी कोड के डेटा का विश्‍लेषण किया गया, जिनके पिछले चार महिनों से वेतन का आहरण कोषालय सॉफ्टवेयर से नहीं किया गया। इसलिए ऐसे कर्मचारियों के विवरण का सत्‍यापन कोषालय अधिकारियों के माध्‍यम से संबंधित डी.डी.ओ. से करवाये जाने हेतु आयुक्‍त कोष एवं लेखा द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं। यह एक निरंतर प्रक्रिया है जो समय-समय पर आयुक्‍त कोष एवं लेखा कार्यालय द्वारा की जाती है। माह दिसंबर 2024 के डाटा का परीक्षण कर पाया गया कि ऐसे कर्मचारी हैं जिनके एम्पलाई कोड आवंटित है किंतु सेवानिवृत्ति तिथि की प्रविष्टि नहीं हुई है। आईएफएमआईएस सॉफ्टवेयर में एग्जिट प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है, फिर भी चार माह से वेतन आहरण नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में कार्यालय आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा सभी कोषालय अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को संबंधित डाटा प्रदान कर 15 दिन में कारण सहित पुष्टि करायी जाए। उनके द्वारा वेतन आहरण किस कारण से नहीं किया जा रहा है। आहरण एवं संवितरण अधिकारियों से प्राप्त जानकारी को कार्यालय आयुक्त कोष-लेखा को अवगत कराया जायेगा। यदि डेटा के सत्यापन में कोई ऋटि संज्ञान में आती है तो संभागीय संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा के माध्यम से तत्काल प्रतिवेदन भेजा जाना होगा। इससे स्पष्ट है कि रेगुलर और नॉन रेगुलर एम्पलाई के डाटा संबंधी परीक्षण और निरीक्षण एक सामान्य और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। 

एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस के प्रकरणों में मौसमी वृद्धि के दृष्टिगत सतर्कता बरतने व हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारी के निर्देश

भोपाल प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव ने एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस के प्रकरणों में मौसमी वृद्धि के दृष्टिगत प्रदेश के समस्त जिलों के कलेक्टर, डीन मेडिकल कॉलेज, सीएमएचओ और सिविल सर्जन को इन्पेशेंट केयर इंस्टिट्यूशन्स की तैयारी की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। ज़ारी आदेश में यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी डायग्नॉस्टिक फैसिलिटीज़, आवश्यक दवाएं, पीपीई किट्स, आईसोलेशन बेड्स, मेडिकल ऑक्सीजन, आईसीयू तथा वेंटिलेटर सपोर्टेड बेड्स की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। साथ ही पीएसए प्लांट्स की कार्यशीलता सुनिश्चित करने के लिए मॉक ड्रिल्स कराई जाए। कोविड-19 की रोकथाम के मॉडिफाइड सर्विलांस स्ट्रैटेजी अनुसार एसएआरआई मामलों और न्यूनतम 5% आईएलआई मामलों के सैम्पल्स की टेस्टिंग की जाए। कोविड पॉज़िटिव पाए गए एसएआरआई पेशेंट्स के सैम्पल्स को होल जीनोमिक सीक्वेंसिंग के लिए क्षेत्रीय वीआरडीएल सेंटर्स को भेजे जाने के निर्देश हैं। जिला स्तर पर कार्यरत डिस्ट्रिक्ट सर्विलांस यूनिट्स को अपने क्षेत्रों में आईएलआई / एसएआरआई ट्रेंड्स पर करीबी निगरानी रखने और एसएआरआई केस रेश्यो की नियमित मॉनिटरिंग करने के लिए कहा गया है। निर्देश दिए गए हैं कि सभी कोविड-19 संबंधित डेटा, जिसमें को-मॉर्बिडिटीज़ की जानकारी भी सम्मिलित हो, आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर नियमित रूप से दर्ज किया जाए। सभी सूचनाएं स्टेट सर्विलांस यूनिट को भेजी जाएं और सार्थक पोर्टल पर भी अपलोड किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। सामुदायिक स्तर पर कोविड उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता गतिविधियों के संचालन के निर्देश दिए गए हैं। इसमें हाथ धोने की आदत, रेस्पिरेटरी हाइजीन, खाँसते/छींकते समय मुँह ढकना, सार्वजनिक स्थानों पर न थूकना आदि व्यवहार शामिल हों। वरिष्ठ-जन, को-मॉर्बिड एवं इम्यूनो-कम्प्रोमाइज़्ड व्यक्तियों को कम हवादार या भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से बचने और ऐसे क्षेत्रों में फेस मास्क्स का प्रयोग करने के लिए कहा गया है। तीव्र श्वसन संक्रमण के लक्षण वाले लोगों को अपने स्वास्थ्य की सेल्फ-मॉनिटरिंग करने और यदि उन्हें सांस लेने में तकलीफ़, सीने में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण हों तो निकटतम हेल्थ फैसिलिटी से तुरंत संपर्क करने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।  

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