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विश्व पर्यावरण दिवस पर जबलपुर केंद्रीय जेल में अनूठा आयोजन, बंदियों ने किया पौधारोपण व गाजरघास सफाई अभियान

A unique event was organized in Jabalpur Central Jail on World Environment Day, prisoners did plantation and carrot grass cleaning campaign जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाताजबलपुर | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्रीय जेल जबलपुर में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। जेल अधीक्षक श्री अखिलेश तोमर के मार्गदर्शन में जेल परिसर को हराभरा और स्वच्छ बनाने के लिए व्यापक पर्यावरणीय गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस मौके पर उप जेल अधीक्षक प्रशासन मदन कमलेश, उप जेल अधीक्षक श्रीमती रूपाली मिश्रा, सहायक जेल अधीक्षक हिमांशु तिवारी सहित समस्त अधिकारी-कर्मचारी व बंदियों ने मिलकर जेल परिसर में पौधारोपण किया। बंदियों की भागीदारी से संवरा परिसरइस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें जेल के बंदियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने न सिर्फ पौधे लगाए, बल्कि परिसर के आसपास उग आए हानिकारक गाजर घास को उखाड़कर नष्ट किया। कल्याण अधिकारी श्रीमती सरिता घारू, लिपिक उपेन्द्र त्रिवेदी व अन्य कर्मचारियों की देखरेख में यह सफाई अभियान सफलता से संपन्न हुआ। गाजर घास मिट्टी की उर्वरता को कम करने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक मानी जाती है, ऐसे में इसका सफाया एक आवश्यक कदम था। जेल अधीक्षक ने दिया पर्यावरण सरंक्षण का संदेशइस अवसर पर जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने कहा, “विश्व में लगातार घटते जंगलों के कारण प्रदूषण व तापमान में वृद्धि हो रही है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में पेड़ लगाना और पर्यावरण की रक्षा करना हम सबका नैतिक कर्तव्य है।” उन्होंने सभी को वर्ष भर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाने की प्रेरणा भी दी। सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी की मिसालकेंद्रीय जेल में आयोजित यह अभियान न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक बना, बल्कि समाज से अलग-थलग पड़े बंदियों के भीतर एक नई सोच और जिम्मेदारी का भाव भी उत्पन्न किया। इस आयोजन से यह संदेश भी गया कि समाज के हर वर्ग को मिलकर धरती को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

केन्द्र सरकार ने प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया के नाम के अनाधिकृत उपयोग पर रोक लगाने के लिए एडवाइजरी की जारी

प्रेस-काउंसिल अथवा भारतीय प्रेस-परिषद के नाम का उपयोग करना अवैधानिक प्रेस-काउंसिल ने जारी की एडवाइजरी केन्द्र सरकार ने प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया के नाम के अनाधिकृत उपयोग पर रोक लगाने के लिए एडवाइजरी की जारी भोपाल केन्द्र सरकार ने प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया (भारतीय प्रेस परिषद) के नाम के अनाधिकृत उपयोग पर रोक लगाने के लिए एडवाइजरी जारी की है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा एडवाइजरी में कहा गया है कि उन्हें सूचना मिली है,कुछ प्रेस संगठनों द्वारा ‘प्रेस-परिषद’ शब्द का अनुचित उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया की संस्थागत महत्ता प्रभावित हो रही है और उसके विशिष्ट अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह एडवाइजरी जारी की गई है। सचिव सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया एक सांविधिक निकाय है। इसकी स्थापना प्रेस-परिषद अधिनियम-1978 के तहत प्रेस की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने और समाचार-पत्रों एवं समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखने एवं सुधारने के उद्देश्य से की गई थी। इसका सचिवालय नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स के सूचना भवन में है। सचिवालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय प्रेस-परिषद की किसी भी राज्य में कोई शाखा नहीं है, न ही उसने किसी अन्य निकाय को अपने समान या मिलते-जुलते नाम का उपयोग करने के लिए अधिकृत किया है। सचिवालय से जारी निर्देश के अनुसार किसी संगठन द्वारा प्रेस काउंसिल अथवा भारतीय प्रेस-परिषदशब्द का उपयोग करना, प्रतीक और नाम के अनुचित उपयोग निवारण अधिनियम, 1950 की धारा 3 और प्रविष्टि 7(ii) का उल्लंघन है। इस संदर्भ में केन्द्रीय विधि विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि किसी अन्य संगठन द्वारा इस नाम का उपयोग करना अवैध है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सचिवालय ने ‘प्रेस-काउंसिल’ अथवा भारतीय प्रेस परिषदशब्द का उपयोग न करने के संबंध में सभी जिला कलेक्टर्स को भी निर्देशित किया गया है। सचिवालय का निर्देश है कि यदि कोई स्थानीय, निजी अथवा सरकारी संगठन इस नाम का दुरुपयोग करता है, तो उनके पंजीकरण को निरस्त किया जाए अथवा उसमें आवश्यक सुधार किया जाए। सरकार की इस पहल का उद्देश्य प्रेस परिषद ऑफ इंडिया की प्रतिष्ठा को बनाए रखना और प्रेस की स्वतंत्रता व मानकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ऊर्जा मंत्री तोमर ने साइकिल चलाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

भोपाल. विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून के अवसर पर  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ग्वालियर में साइकिल चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साइकिल रैली में विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्कूली बच्चे, एनसीसी के छात्र-छात्रायें एवं यूथ हॉस्टल के सदस्यगण शामिल हुए। यूथ हॉस्टल द्वारा साइकिल रैली का शुभारंभ विश्व पर्यावरण दिवस पर शहर के हृदय स्थल महाराज बाड़े से किया गया। इस मौके पर पूर्व महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, संस्था के संरक्षक एवं पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, संस्था के चेयरमेन शैलेन्द्र माहौर सहित डीआईजी अमित सांघी, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए।   साइकिल रैली सराफा बाजार, गश्त का ताजिया, फालका बाजार, गुरुद्वारा, जयेन्द्रगंज होकर फ्लैग प्वॉइंट थीम रोड पहुँची। रैली के समापन अवसर पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्रतिभागियों को 250 पौधे एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। ऊर्जा मंत्री तोमर ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई।

उज्जैन में वेलनेस निवेश को मिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रोत्साहन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट में वेलनेस क्षेत्र के निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए खुले दिल से आमंत्रित किया और राज्य की अनुकूल निवेश नीतियों पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। सभी निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल और प्रगतिशील नीतियों की सराहना की और प्रदेश में निवेश के लिए संकल्प लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से अरबिंदो हॉस्पिटल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी, लीजर होटल्स ग्रुप के डायरेक्टर मुकुंद प्रसाद, शतायु आयुर्वेद के सीईओ और एमडी डॉ. मृत्युंजय स्वामी, मेफ़ेयर ट्रैवल्स के एमडी शरद थडानी, लाभम ग्रुप के डायरेक्टर युगांश सोनी, शांतिगिरी आश्रम के जोनल हेड स्वामी चितासुधन ज्ञान तपस्वी, रॉयल ऑर्किड होटल के डायरेक्टर सुदीप रॉय, एरा हॉस्पिटैलिटी के संस्थापक शिवंदर सिंह, सीएचएल हॉस्पिटल ग्रुप के डायरेक्टर राजुल भार्गव, लेटेन्ट डेवकॉन के डायरेक्टर देवांग कपाडिया, जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सुधीर एम.वी., ट्रैवलपैक के चेयरमैन अशोक पटेल, हार्टफुलनेस इंटरफेथ प्रोग्राम्स एंड इवेंट के डायरेक्टर त्रिलोचन चावला और सनसेट डेजर्ट कैंप के सीईओ और एमडी हितेश्वर सिंह सिसौदिया ने वन-टू-वन चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में, मध्यप्रदेश वेलनेस और आध्यात्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। निवेशकों के इस उत्साहजनक प्रतिसाद से प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे मध्यप्रदेश को वैश्विक वेलनेस मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान मिल सकेगा।

मध्यप्रदेश भारत के वेलनेस मिशन के नेतृत्व को तैयार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में “स्पिरिचुअल एंड वेलनेस समिट” में कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “हील इंडिया” और ‘लाइफ स्टाइल’ (LiFE) जैसे दूरदर्शी विचारों से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश को समग्र जीवनशैली और वेलनेस नवाचार का ग्लोबल सेंटर बनाया जा रहा है। समिट के माध्यम से प्रदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत के वेलनेस मिशन का नेतृत्व करने को पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट को एक परिवर्तनकारी पहलबताया और कहा कि यहां नीति, निवेश, अध्यात्म और समाज कल्याण का संगम हुआ है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब  भारत के वेलनेस मिशन का ग्लोबल इंजन बनने को तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट में वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के निवेशकों से14 वन-टू-वन बैठकेंकीं, जिनमें बुनियादी ज़रूरतों, निवेश समर्थक नीतियों और प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। समिट में 1929 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा एक ही दिन होने का सुखद संयोग हुआ है। इस अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का प्रदेश में पुनः शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 5 करोड़ पौधे रोपे गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि उनकी सरकार रोजगार सृजन के लिए तेजी से काम कर रही है। धार्मिक स्थानों पर सभी चिकित्सा पद्धतियों के बड़े केन्द्र बनाने के पीछे आशय यही है कि दुनिया भर के लोगों को स्वास्थ्य के साथ अध्यात्म भी प्राप्त हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले साल सभी संभागीय मुख्यालयों पर हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और फरवरी में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में हुए ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट 30 लाख करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, यहां 21 लाख 75 हजार रोजगार सृजन होने की संभावना भी है। उन्होंने कहा कि हमने 2025 को उद्योग वर्ष घोषित किया है और लगातार सेक्टर वार समिट का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदसौर और नरसिंहपुर में एग्री समिट के अलावा इंदौर में आईटी समिट के अच्छे परिणाम आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नीति आयोग ने प्रदेश को तेज गति से आगे बढ़ने वाले राज्यों में अग्रणी माना है। मध्यप्रदेश में सरप्लस बिजली के साथ उत्कृष्ट अधोसंरचना और नई नीतियों के चलते निवेशकों ने यहां का रूख किया है। उन्होंने एमएसएमई सहित अन्य उद्योग को घोषित नीति अनुसार 5000 करोड़ रूपये का अनुदान दिये जाने का उल्लेख भी किया।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश स्पष्ट नीति, सक्षम प्रशासन और मजबूत नेतृत्व के साथ निवेशकों को स्थायित्व और सफलता की गारंटी देता है। उन्होंने सभी वेलनेस उद्यमियों और संस्थाओं से प्रदेश में निवेश करने और उज्जैन से शुरुआत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश आएं, और भारत को विश्वगुरु बनाने की यात्रा में भागीदार बनें।” समिट में एनआईपीआर अहमदाबाद और एमपीआईडीसी के बीच समझौता हुआ, जिसके अंतर्गत उज्जैन मेडिकल डिवाइस पार्क को तकनीकी और शैक्षणिक सहायता प्राप्त होगी। यह पार्क टेस्टिंग और प्रमाणीकरण हब के रूप में विकसित किया जाएगा। समिट में शिवंदरसिंह संस्‍थापक एराहॉस्पिटैलिटी, मुकुंदप्रसाद डायरेक्‍टर लीजरहोटल्सग्रुप, अशोक पटेल चेयरमेन ट्रैवलपैक, शरदथडानी एमडी मेफ़ेयरट्रैवल्स एवं सुधीर एमवी सीएओ जिंदल नेचुरोकेयर इंस्टिट्यूट द्वारा निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने आध्यात्मिक संबोधन दिया और उज्जैन में केंद्र स्थापित करने के लिए राज्य सरकार को आशय पत्र (एलओआई) सौंपा। लीज़र होटल्स, शतायु आयुर्वेद और भंडारी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश को वेलनेस निवेश के लिए उपयुक्त गंतव्य बताया। प्रमुख निवेश प्रस्तावों में भंडारी ग्रुप –984 करोड़ रूपये, अमलतास ग्रुप –400 करोड़ रूपये, सीएचएल हॉस्पिटल ग्रुप –200 करोड़ रूपये, लेटेंट डेवकॉन, लाभम ग्रुप, शथायू आयुर्वेद, रॉयल ऑर्किड, शांतिगिरी आश्रम, जिंदल ग्रुप सहित अन्य निवेशकों के प्रस्ताव शामिल हैं। पैनल चर्चा में तैयार हुआ विज़न रोडमैप समिट में दो पैनल सत्र आयोजित किए गए, जिनमें वेलनेस इन्फ्रास्ट्रक्चर, सिंहस्थ आधारित मेडिकल टूरिज्म, रोज़गार सृजन, और कौशल विकास जैसे विषयों पर विचार हुआ। मुख्य सत्र में वेलनेस विज़निंग  में प्रदेश का समग्र रोडमैप प्रस्तुत किया गया।

नाइपर उज्जैन मेडिसिटी में नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है। मध्यप्रदेश को प्रकृति का पूर्ण स्नेह प्राप्त है। भारत के हृदय स्थल में स्थित मध्यप्रदेश में उत्कृष्ट एयर कनेक्टिविटी, रेल नेटवर्क और हाईवे हैं जो देश के हर कोने से मध्यप्रदेश की पहुँच को सुगम बनाते हैं। इन बुनियादी ढाँचों का सतत् विस्तार जारी है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सतना और दतिया एयरपोर्ट का शुभारंभ कर इन सुविधाओं को और समृद्ध किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक मन्त्रोचार की पवित्र ध्वनि के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर उज्जैन में स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट-2025 के मुख्य सत्र का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज गंगा दशहरा और पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट का आयोजन किया गया है। यह अवसर मध्यप्रदेश की वृहद प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का निरूपण भी है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और जीवनशैली आज पूरे विश्व का ध्यान आकृष्ट कर रही है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति प्रेम और पूजन अभिन्न अंग है। भारतीय जीवनदृष्टि केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी जीवनशैली को प्रोत्साहित करती है जिसमें व्यक्ति स्वस्थ रहे और रोगों की संभावना ही न हो। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को मेडिकल हब बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उज्जैन में मेडिसिटी की स्थापना की जा रही है और मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेतु मात्र ₹1 में 25 एकड़ भूमि प्रदान की जा रही है। निजी क्षेत्र को अस्पताल संचालन में भी हरसंभव सहयोग दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में यह वर्ष उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव, ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और सेक्टर आधारित समिट के आयोजन से हर क्षेत्र, हर सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में 18 नवीन इन्वेस्टर फ्रेंडली पॉलिसी के माध्यम से निवेश प्रक्रिया को सहज और आकर्षक बनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस में 30 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्ताव और 21 लाख 40 हज़ार से अधिक रोजगारों के सृजन के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि रोजगारपरक उद्यमों के लिए 5 हज़ार रुपए प्रति व्यक्ति के मान से विशेष प्रोत्साहन सरकार द्वारा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस है, शांति का टापू है, कुशल मैनपॉवर, उत्कृष्ट अधोसंरचना और प्राकृतिक, आध्यात्मिक स्थल इसे स्पिरिचुअल और वेलनेस क्षेत्र में निवेश के लिए आदर्श स्थल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत सहयोग के साथ-साथ 100 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों के लिए विशेष सहयोग कस्टमाइज्ड नीति के रास्ते भी उपलब्ध हैं। उन्होंने समस्त निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष नाइपर (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) और एमपीआईडीसी के मध्य एमओयू का हस्तांतरण हुआ। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग राघवेन्द्र कुमार सिंह और नाइपर के संचालक शैलेन्द्र सराफ़ ने एमओयू साझा किया। नाइपर उज्जैन मेडिसिटी में नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर तथा उज्जैन की समग्र धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत पर लघु फ़िल्मों का प्रदर्शन किया गया। चिदानंद सरस्वती महाराज ने स्पिरिचुअल और वेलनेस सेंटर स्थापना के लिए दिया आशय पत्र परमार्थ निकेतन के धार्मिक गुरु चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मध्यप्रदेश बहुत प्यारी धरती है। यहाँ सब कुछ है। उन्होंने कहा कि आज के उज्जैन में अधोसंरचना विकास को देखकर नहीं लगता कि यह पुराना उज्जैन है। उन्होंने उज्जैन के विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। महाकाल लोक की भव्यता अनुपम है। चारों धाम की यात्रा पूर्ण करने के बाद लोग महाकाल लोक आना चाहते हैं। आज भारत के धार्मिक नगर पर्यटन में शीर्ष पर पहुँच रहे हैं। यह समय है जब निवेशक इस अवसर का लाभ उठायें और पर्यटन अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण में सहभागी बनें। आने वाले सिंहस्थ में यहाँ अपार संभावनाओं का सृजन होने जा रहा है। देश विदेश से करोड़ों पर्यटकों का आगमन होगा। उसके लिए हम सभी को अभी से तैयार रहना होगा। गुरु चिदानंद सरस्वती महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर के समीप स्पिरिचुअल और वेलनेस सेंटर स्थापना के लिए आशय पत्र दिया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्यटन के लिए अनुकूल वातावरण हैं। प्रदेश में जंगल, जंगली जानवर, पवित्र नदियां हैं, वहीं धार्मिक पर्यटन के लिए महाकाल तथा ओंकारेश्वर दो ज्योतिर्लिंग और अन्य आकर्षक धार्मिक स्थल हैं। प्रदेश में आकर्षक हेरिटेज हैं, कई पुराने अच्छे रजवाड़े हैं, जिन्हे हेरिटेज के रूप में विकसित किया गया हैं। पूरे देश मे यूनेस्को के 62 हेरिटेज धरोहरों में से 18 हेरिटेज मध्यप्रदेश में है। मध्यप्रदेश देश के मध्य होने से यहाँ पहुँचना आसान है। प्रधानमंत्री ने टूरिज़्म बढ़ाने पर जोर दिया हैं। टूरिज़्म बढ़ाने के लिए स्वच्छता सबसे आवश्यक हैं। सबसे स्वच्छ शहर “इंदौर” मध्यप्रदेश में है। इन्दौर ही नहीं अन्य शहरों में भी स्वच्छता की स्थिति बेहतर है। इन्दौर की स्वच्छता पश्चिमी देशों के समतुल्य हैं। प्रदेश में इन्वेस्टमेंट के लिए 18 नई पॉलिसीज बनाई हैं और कुछ पुरानी पॉलिसीज हैं। इनमें निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रमुख रूप से आर्थिक मदद और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने का प्रावधान किया जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में बराबरी का हैं या बेहतर हैं। निवेशकों को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए आवश्यक अनुमतियां एनओसी को सुविधाजनक बनाया गया। प्रदेश में सबसे पहले राइट टू पब्लिक डिलीवरी सिस्टम लागू किया गया,जिसमें निर्धारित अवधि में अनुमतियां जारी होगी। इस अवसर पर भण्डारी ग्रुप के चेयरमैन विनोद भण्डारी ने उज्जैन में बन रहे मेडिकल टूरिज्म पर प्रकाश डाला। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं, अवसरों, नीतियों और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने आध्यात्मिक, धार्मिक, प्राकृतिक और वेलनेस पर्यटन में अवसरों पर विशेष प्रकाश डाला। प्रमुख सचिव शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश में पर्यटकों के आगमन की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। वर्ष 2019-20 में 8.87 करोड़ से वर्ष 2024-25 में 13.33 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ है। शीर्ष-5 पर्यटक स्थल में से 4 (उज्जैन, मैहर, चित्रकूट और अमरकंटक) धार्मिक … Read more

सिकल सेल रोग अनुसंधान के लिए चिकित्सक आगे आएं: राज्यपाल पटेल

भोपाल. राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों में शोध और अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों के द्वारा रोग उन्मूलन के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे वनों में प्रचुर मात्रा में जड़ी-बूटियां उपलब्ध है। आवश्यकता शोध और अनुसंधान के द्वारा उनकी उनकी उपयोगिता के प्रमाणीकरण की है। राज्यपाल पटेल गांधी मेडिकल कॉलेज में आयोजित सिकलसेल सेंसेटाइजेशन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन गांधी मेडिकल कॉलेज की एलुमिनाई द्वारा किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल भी मौजूद रहे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल के उन्मूलन प्रयासों के लिए सबके साथ और सबके प्रयासों की एकजुट आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर सिकल सेल की जागरुकता में सक्रिय सहभागिता करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जागरुकता ही सबसे बड़ा टूल है। हम में से प्रत्येक व्यक्ति सिकल सेल के लक्षणों, उपचार और संभावनाओं के प्रति स्वयं जागरूक हो। फिर जागरूकता दूत के रूप में अपने आस-पास, और समुदाय को जागरूक करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि नई पीढ़ी को सिकल सेल एनीमिया से बचाने के लिए वर-वधू शादी के पूर्व सिकल सेल जेनेटिक कार्ड का  मिलान ज़रूर करें। गर्भावस्था में जरूरी जाँचे कराए। संतान के जन्म के 72 घंटे के भीतर उनकी सिकल सेल एनीमिया की जाँच अवश्य करें। राज्यपाल पटेल ने सिकल सेल से पीड़ित बच्चों एवं उनके परिजनों से आत्मीय मुलाक़ात की। उनकी कुशल क्षेम जानी। सभी को अच्छे ख़ान-पान, व्यायाम और पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शहडोल से प्रारम्भ हुए सिकल सेल उन्मूलन मिशन- 2047 के तहत प्रदेश सरकार के प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिकल सेल जाँच की गहनता को बढ़ाने, प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रीनेटल टेस्टिंग के सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। सांसद आलोक शर्मा ने सिकल सेल उन्मूलन की प्रतिबद्धता के लिए केंद्रों एवं राज्य सरकार के सघन प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी और सराहना की। राज्यपाल पटेल का कार्यक्रम में पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। राज्यपाल पटेल को सिकल सेल जागरूकता पर आधारित किताब और एच.पी.सी.एल. की डायग्नोस्टिक किट भेंट की गई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल पटेल को एलुमिनाई एसोसिएशन के प्रतिनिधियों द्वारा पौधे भेंट किए गए। उन्होंने इन पौधों को गांधी मेडिकल कॉलेज परिसर में रोपण के लिए दे दिया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह ने दिया। आयोजन समिति के सचिव डॉ. ललित श्रीवास्तव ने सिकल सेल एनीमिया सेंसेटाजेशन कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। सिकल सेल उन्मूलन, शोध और रोकथाम प्रयासों में काम करने वाले विभिन्न क्षेत्रों के विषय, विशेषज्ञों डॉ. राहुल भार्गव, डॉ. आर. के. निगम, डॉ. दानिश जावेद, एन.एच.एम. उप संचालक डॉ. रूबी खान ने जानकारी दी। कार्यक्रम में एलुमिनाई एसोसिएशन के पदाधिकारी, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सक, शोधार्थी, विशेषज्ञ और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

सोहागी घाटी में बड़ा सड़क हादसा, ऑटो पर पलटा ट्रक, सात की मौत

 रीवा रीवा में मौत की घाटी कही जाने वाली सोहागी घाटी में एक बार फिर बड़ा सड़क हादसा हो गया। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। हादसा गुरुवार की दोपहर सोहागी थाना क्षेत्र अंतर्गत NH 30 में हुआ है। बताया गया कि ट्रक NH 30 से होकर गुजर रहा था। तभी ट्रक अनियंत्रित होकर ऑटो के ऊपर पलट गया। ऑटो में कुल 8 लोग सवार थे, इस हादसे के चलते ऑटो सवार उसकी चपेट में आ गए, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई। बताया गया है कि ऑटो सवार सभी लोग प्रयागराज से गंगा स्नान कर मऊगंज जिले के नईगढ़ी जा रहे थे। ऑटो सवार सभी लोग मऊगंज के नईगढ़ी के रहने वाले थे, जबकि ट्रक प्रयागराज से होकर रीवा की ओर आ रहा था। एडिशनल एसपी विवेक लाल ने बताया कि अभी सात लोगों की मौत की सूचना है, घायलों और मृतकों की पहचान की जा रही है। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाना ही हमारी प्राथमिकता है, हादसा किसकी लापरवाही से हुआ और हादसे की असल वजह क्या है, इसकी जांच की जा रही है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में नवीन टेलीमेडिसिन सेंटर का किया लोकार्पण

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि टेलीमेडिसिन सेवा से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ेगी। इस नवाचार से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के मरीजों को विशेषज्ञों द्वारा बेहतर इलाज एवं परामर्श प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के टेलीफोन के माध्यम से विस्तार के लिए प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में ई-संजीवनी पोर्टल प्रारंभ किया गया है। इस पोर्टल के द्वारा मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों से घर बैठे नि:शुल्क परामर्श ले सकते है। टेलीमेडिसिन सेवा से मरीजों की रेफरल संख्या भी कम होगी, जिससे मेडिकल कॉलेजों और जिला चिकित्सालयों में दबाव कम होगा। मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञों से उपचार सुविधा मिलेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने गुरुवार को गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं हमीदिया चिकित्सालय, भोपाल में नवीन टेलीमेडिसिन सेंटर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी, डीन गांधी चिकित्सा महाविद्यालय श्रीमती कविता सिंह सहित विभिन्न विभागों के एचओडी, डॉक्टर्स, प्रोफेसर, अधिकारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हम स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों, मेडिकल स्टॉफ की भर्ती की जा रही है। जिससे मेडिकल स्टॉफ की कमी की पूर्ति होगी। इन विशेषज्ञों की तैनाती ग्रामीण क्षेत्रों में की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि किसी समस्या के जड़ से समाधान के लिए जिद और जुनून की आवश्यकता है। टेलिमेडिसिन सेवा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह सेवा स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि इस सेवा का प्रभावी तरीके के क्रियान्वयन किया जाए। टेलीमेडिसिन सेवा से जुड़े विशेषज्ञ प्रोफेसर्स और डॉक्टर्स प्रत्येक मरीज को बेहतर से बेहतर इलाज प्रदान करें। इस सेवा का व्यापक प्रचार करें जिससे कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस सुविधा का ज्यादा के ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमीदिया चिकित्सालय 70 वर्षों के अधिक समय से प्रदेश के मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहा है। यहां की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल कैंपस में जर्जर भवनों का रिनोवेशन किया जायेगा। उन्होंने कमला नेहरू हॉस्पिटल में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में परिवर्तित करने की बात भी कही। इस दौरान उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेलीमेडिसिन हब रूम से सीहोर के मरीज और चिकित्सकों से चर्चा की। उन्होंने प्रेरणा सेवा ट्रस्ट द्वारा हॉस्पिटल को भेंट किए गए ई-रिक्शा का लोकार्पण किया। उन्होंने हॉस्पिटल में स्थापित बेबी फीडिंग रूम का लोकार्पण भी किया। थैलेसीमिया डे केयर सेंटर के बच्चों ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया। गांधी मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक सुनील टंडन ने कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों और नवाचारों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में स्पोर्ट्स प्रमोटर्स ग्रुप सरगुजा ने 251 पौधों का रोपण किया है। चिकित्सालय के समस्त क्लिनिकल विभाग का सहयोग प्राप्त कर आने वाले मरीजों को त्वरित एवम उचित उपचार दिए जाने के उद्देश्य से इमरजेंसी मेडिसिन विभाग और अधीक्षक कार्यालय द्वारा एक एसओपी जारी की गई है।चिकित्सालय में शव वाहन, नवीन कैथ लैब, सीटी-स्केन और एमआरआई जांच सुविधा की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमीदिया चिकित्सालय आने वाले मरीजों के त्वरित एवम उचित इलाज किए जाने के लिए लगातार प्रयासरत है।  

मंत्री सारंग ने कहा सहकारिता विभाग पूरी प्लानिंग के साथ हर सोसायटी और विभागीय परिसरों में पौधरोपण करें

भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि सहकारिता विभाग पूरी प्लानिंग के साथ हर सोसायटी और विभागीय परिसरों में पौधरोपण करें। उन्होंने इसके लिये राज्य संघ और बीज संघ को इसकी जिम्मेदारी दी। उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन और छायादार सहित उपयोगी प्रजाति के पौधो का रोपण किया जाये। मंत्री सारंग ने कहा कि मास्टर प्लान इस तरह का हो कि संरक्षण और संवर्धन के साथ साल भर में लाखों पौधे लगे। मंत्री सारंग ने गुरूवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर “एक पेड़ माँ के नाम” कार्यक्रम के तहत अपेक्स बैंक परिसर में अशोक का पौधा रोपा। अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने भी पौधरोपण किया। सनातन धर्म पर्यावरण का देता है संदेश मंत्री सारंग ने कहा कि पर्यावरण का संरक्षण-संवर्धन करना और आगे आने वाली पीढ़ी को जागरूक करना हमारी जिम्मेदारी है। हमारी संस्कृति, सनातन, दर्शन, धर्म, विचार सब पर्यावरण से जुडा हुआ है। पर्यावरण का अर्थ है पेड़, पौधे, पहाड, नदियाँ और ईको सिस्टम से मनुष्य पशु-पक्षी सब जुडें हैं। भारतीय संस्कृति नदी को वॉटर बॉडी नहीं मानती, हमारा अध्यात्म दर्शन नदी को माँ मानता है। नर्मदा मैया और गंगा मैया की हम अर्चना करते है, पर्वत को भगवान स्वरूप पूजते है। गोवर्धन पर्वत और कामतानाथ जी की हम परिक्रमा करते है। महिलाएँ साल भर में 5-6 ऐसे त्यौहार मनाती है जिसमें पेड़ों की परिक्रमा की जाती है। हरतालिका तीज जैसे त्यौहारों का विशेष महत्व है। यही नहीं भगवान का वाहन पशु-पक्षी हैं। शिवजी जहां एक ओर नाग को धारण किये है वहीं जटाओं के जरिये माँ गंगा को पृथ्वी पर लाये है। हमारा पूरा दर्शन, सनातन, धर्म, विचार पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। विकास हो विरासत के साथ मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकास की बात की तो विरासत को साथ लेकर चलने की बात की। विकास का मतलब पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचें और पेड़ भी नहीं कटे। कारखाने लगना विकास और भविष्य की लिये जरूरी है। इसलिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट के माध्यम से निर्णय लिया कि जितना औद्योगिक क्षेत्र बने उतना वन भी लगाया जाये। प्रधानमंत्री मोदी “एक पेड़ माँ के नाम” का संदेश यही है कि पृथ्वी माँ को चिरस्थायी बनाने के लिये पौधरोपण करें। यहीं नहीं अपने माता-पिता के नाम, अपने परिजन के जन्म दिवस और सालगिरह जैसे अवसरों पर समाज के उज्जवल भविष्य के लिये पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण कर आने वाली पीढ़ी को भविष्य के लिये उपयोगी, दीर्घकालीन उपहार सौपकर जायें, इससे हम रहे न रहे हमारी याद बनी रहे। इस अवसर पर प्रबंध संचालक विपणन संघ अलोक कुमार सिंह, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक मनोज पुष्प, उप सचिव मनोज सिन्हा, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक सहकारी संघ ऋतुराज रंजन, प्रबंध संचालक बीज संघ महेन्द्र दीक्षित, संयुक्त आयुक्त अम्बरीष वैद्य, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी अरूण माथुर सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल सिकल सेल सेंसेटाइजेशन कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों में शोध और अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों के द्वारा रोग उन्मूलन के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे वनों में प्रचुर मात्रा में जड़ी-बूटियां उपलब्ध है। आवश्यकता शोध और अनुसंधान के द्वारा उनकी उनकी उपयोगिता के प्रमाणीकरण की है। राज्यपाल पटेल गांधी मेडिकल कॉलेज में आयोजित सिकलसेल सेंसेटाइजेशन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन गांधी मेडिकल कॉलेज की एलुमिनाई द्वारा किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल भी मौजूद रहे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल के उन्मूलन प्रयासों के लिए सबके साथ और सबके प्रयासों की एकजुट आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर सिकल सेल की जागरुकता में सक्रिय सहभागिता करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जागरुकता ही सबसे बड़ा टूल है। हम में से प्रत्येक व्यक्ति सिकल सेल के लक्षणों, उपचार और संभावनाओं के प्रति स्वयं जागरूक हो। फिर जागरूकता दूत के रूप में अपने आस-पास, और समुदाय को जागरूक करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि नई पीढ़ी को सिकल सेल एनीमिया से बचाने के लिए वर-वधू शादी के पूर्व सिकल सेल जेनेटिक कार्ड का  मिलान ज़रूर करें। गर्भावस्था में जरूरी जाँचे कराए। संतान के जन्म के 72 घंटे के भीतर उनकी सिकल सेल एनीमिया की जाँच अवश्य करें। राज्यपाल पटेल ने सिकल सेल से पीड़ित बच्चों एवं उनके परिजनों से आत्मीय मुलाक़ात की। उनकी कुशल क्षेम जानी। सभी को अच्छे ख़ान-पान, व्यायाम और पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शहडोल से प्रारम्भ हुए सिकल सेल उन्मूलन मिशन- 2047 के तहत प्रदेश सरकार के प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिकल सेल जाँच की गहनता को बढ़ाने, प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रीनेटल टेस्टिंग के सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। सांसद आलोक शर्मा ने सिकल सेल उन्मूलन की प्रतिबद्धता के लिए केंद्रों एवं राज्य सरकार के सघन प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी और सराहना की। राज्यपाल पटेल का कार्यक्रम में पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। राज्यपाल पटेल को सिकल सेल जागरूकता पर आधारित किताब और एच.पी.सी.एल. की डायग्नोस्टिक किट भेंट की गई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल पटेल को एलुमिनाई एसोसिएशन के प्रतिनिधियों द्वारा पौधे भेंट किए गए। उन्होंने इन पौधों को गांधी मेडिकल कॉलेज परिसर में रोपण के लिए दे दिया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह ने दिया। आयोजन समिति के सचिव डॉ. ललित श्रीवास्तव ने सिकल सेल एनीमिया सेंसेटाजेशन कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। सिकल सेल उन्मूलन, शोध और रोकथाम प्रयासों में काम करने वाले विभिन्न क्षेत्रों के विषय, विशेषज्ञों डॉ. राहुल भार्गव, डॉ. आर. के. निगम, डॉ. दानिश जावेद, एन.एच.एम. उप संचालक डॉ. रूबी खान ने जानकारी दी। कार्यक्रम में एलुमिनाई एसोसिएशन के पदाधिकारी, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सक, शोधार्थी, विशेषज्ञ और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।  

प्रधानमंत्री मोदी ने दिया एक पेड़ मां के नामअभियान से जन-जन को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने का मौका- CM

अगली पीढ़ी को बेहतर धरती और वातावरण सौंपने के लिए पर्यावरण संरक्षण के प्रति सभी को सचेत होना होगा – मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा का एक ही दिन पर होना, बताता है कि भारतीय संस्कृति में पर्यावरण की कितनी महत्ता है प्रधानमंत्री मोदी ने दिया “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से जन-जन को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने का मौका हम पौधे को पुत्र समान मानते हैं भारतीय जीवनशैली में रची-बसी है रिसाइकिल-री-यूज की प्रक्रिया जल संरक्षण के लिए 75 हजार से अधिक खेत-तालाबों का निर्माण किया गया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “एक पेड़ मां के नाम”-2025 अभियान का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण प्रबंधन पोर्टल का लोकार्पण और वेटलैंड एटलस का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने म.प्र. वार्षिक पर्यावरण पुरस्कार प्रदान किए पर्यावरण संरक्षण के लिए केन्द्रीय विद्यालय क्रं-2 भोपाल, सेंट्रल एकेडमी शहडोल, सिंधिया कन्या विद्यालय ग्वालियर और शिशु कुंज इंदौर को मिला पुरस्कार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस पर किया संबोधित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विश्व पर्यावरण दिवस है और गंगा दशहरा भी आज है। दोनों भारतीय संस्कृति के लिए विशेष महत्व रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के साथ जोड़ा है। राज्य सरकार आज से इस अभियान की शुरुआत कर रही है। हमारी संस्कृति में एक वृक्ष को सौ पुत्रों के बराबर माना है। परंपरागत रूप से कहा जाता है कि एक बावड़ी 10 कुओं के बराबर है, 10 बाबड़ी एक तालाब के बराबर है, 10 तालाब एक पुत्र के बराबर है और 100 पुत्र एक वृक्ष के समान है। पुत्रों की तुलना वृक्ष के साथ करना, प्रकृति की महत्ता को दर्शाता है। अगर प्रकृति संरक्षित रहेगी तो हमें अपने आप फलने-फूलने का अवसर मिलता रहेगा। वर्तमान दौर में भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान को पुनर्स्थापित करने का समय है। आज रिसाइकिलिंग और री-यूज की चर्चा की जाती है, न्यूनतम संसाधनों से बेहतर जीवनशैली की ओर भी ध्यान दिया जा रहा है। अगली पीढ़ी को बेहतर धरती और वातावरण सौंपने के लिए पर्यावरण संरक्षण के प्रति सभी को सचेत होना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्व पर्यावरण दिवस पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष पर्यावरण दिवस का विषय “प्लास्टिक प्रदूषण उन्मूलन” है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सबको स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में योगदान देना होगा। वायु की गुणवत्ता मे सुधार, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और जल संरक्षण के लिए व्यक्तिगत जवाबदेही और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना जरूरी है। राज्य सरकार पर्यावरण अनुकूल उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय पौराणिक कथाओं में वृक्षों, नदियों, पहाड़ों के साथ-साथ वन्यजीवों की पूजा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा दी गई है, हमें इनसे प्रेरणा लेनी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 19वीं शताब्दी में महान वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु ने लंदन में रायल सोसाइटी को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करके बताया कि पौधों में प्राण होते हैं। जबकि भारत के लोक मानस में यह ज्ञान सदियों से रचा-बसा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार संस्कृति को संरक्षित करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति प्रदान कर रही है। पर्यावरण दिवस पर सभी पुरस्कार विजेता बधाई के पात्र हैं। बदलते दौर में प्लास्टिक के उपयोग को लेकर री-यूज, रि-साइकिल की बात कही जा रही है, यह प्रक्रियाएं भारतीय जीवनशैली में पहले से ही विद्यमान हैं। हमने नेट जीरो एमीशन का लक्ष्य रखा है। इसी आधार पर 2030 तक प्रदेश की ऊर्जा क्षमता को 500 गीगा वॉट तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है। जल गंगा संरक्षण अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में जल स्त्रोतों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। अब तक 60 हजार के लक्ष्य के विरूद्ध 75 हजार से अधिक खेत तालाबों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। तीन महीने के इस अभियान में 95 हजार 500 कुओं को रीचार्ज किया गया है और 1225 अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब नदियों पर बांध बनाए जाते हैं तो किसानों को भी लाभ मिलता है और सिंचाई का रकबा बढ़ता है। 2002-03 तक प्रदेश की सिर्फ 7 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित थी, जो अब 55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। विश्व का पहला नदी जोड़ो अभियान प्रदेश में चल रहा है, जिसके अंतर्गत दो नदियों को जोड़कर जल भंडारण क्षमता और उपयोगिता बढ़ाई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केन-बेतवा लिंक परियोजना का भी भूमि-पूजन किया है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्थान के साथ वर्षों से लंबित जल बंटवारे का समाधान निकाला। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। प्रदेश में सर्वाधिक 247 नदियां प्रवाहित होती हैं। प्रदेश की जलराशियां पड़ोसी राज्यों को भी समृद्धि प्रदान करती हैं। किसी राज्य को ज्यादा पानी भी मिल जाए तो कोई बुराई नहीं। भारतीय संस्कृति में उदारता का भाव समाया हुआ है। महाराष्ट्र सरकार के साथ तापी मेगा रिचार्ज परियोजना पर सहमति बन चुकी है। इस पर बांध बनाकर प्राकृतिक रूप से ग्राउंड वाटर को रिचार्ज किया जाएगा। जल भंडारण क्षेत्र में यह दुनिया का सबसे अनोखा प्रयोग होगा। दोनों राज्यों के 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षिप्रा नदी में श्रद्धालुओं के स्नान के लिए की जा रही व्यवस्था की भी जानकारी दी। सांसद खजुराहो वी.डी शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश जल जंगल जमीन और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए सभी क्षेत्रों में प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है संसाधनों के शोषण के आधार पर विकास नहीं हो, मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसके प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है। शर्मा ने प्रदेशवासियों से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान में योगदान देने का आहवान किया। मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण देश दुनिया के सामने बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया

उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट में वेलनेस क्षेत्र के निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए खुले दिल से आमंत्रित किया और राज्य की अनुकूल निवेश नीतियों पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। सभी निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल और प्रगतिशील नीतियों की सराहना की और प्रदेश में निवेश के लिए संकल्प लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से अरबिंदो हॉस्पिटल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी, लीजर होटल्स ग्रुप के डायरेक्टर मुकुंद प्रसाद, शतायु आयुर्वेद के सीईओ और एमडी डॉ. मृत्युंजय स्वामी, मेफ़ेयर ट्रैवल्स के एमडी शरद थडानी, लाभम ग्रुप के डायरेक्टर युगांश सोनी, शांतिगिरी आश्रम के जोनल हेड स्वामी चितासुधन ज्ञान तपस्वी, रॉयल ऑर्किड होटल के डायरेक्टर सुदीप रॉय, एरा हॉस्पिटैलिटी के संस्थापक शिवंदर सिंह, सीएचएल हॉस्पिटल ग्रुप के डायरेक्टर राजुल भार्गव, लेटेन्ट डेवकॉन के डायरेक्टर देवांग कपाडिया, जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सुधीर एम.वी., ट्रैवलपैक के चेयरमैन अशोक पटेल, हार्टफुलनेस इंटरफेथ प्रोग्राम्स एंड इवेंट के डायरेक्टर त्रिलोचन चावला और सनसेट डेजर्ट कैंप के सीईओ और एमडी हितेश्वर सिंह सिसौदिया ने वन-टू-वन चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में, मध्यप्रदेश वेलनेस और आध्यात्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। निवेशकों के इस उत्साहजनक प्रतिसाद से प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे मध्यप्रदेश को वैश्विक वेलनेस मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान मिल सकेगा।  

विकसित कृषि संकल्प अभियान के संचालन में नहीं छोड़े कोई कसर: कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल   कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे अधिकाधिक कृषकों तक शासन की योजनाओं और नवाचारों की जानकारी पहुंचे और वे लाभान्वित हो सकें।मंत्री कंषाना ने यह बात समीक्षा बैठक के दौरान कही। कृषि मंत्री कंसाना ने बताया कि यह अभियान29 मई से प्रारंभ होकर 12 जून तकसंचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना, उन्नत कृषि तकनीकों, नवीन किस्मों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में उन्हें जागरूक करना है। इसके माध्यम से किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, और नई कृषि तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मंत्री कंसाना ने कहा कि यह अभियान किसानों की आय में वृद्धि, खेती को लाभकारी बनाने और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सभी संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी इसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करें। अभियान के अंतर्गत कृषि-ड्रोन प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), ICAR संस्थानों एवं इफको द्वारा किया जा रहा है। आईसीटी माध्यमों से किसानों को योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। ICAR वैज्ञानिक, कृषि, बागवानी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन विभागों के अधिकारी, प्रगतिशील किसान, कृषि उद्यमी, एफपीओ, एफआईजी, तथा स्व-सहायता समूहों के सदस्य अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। बैठक में कृषि सचिव एम. सेलवेन्द्रन, कृषि संचालक अजय गुप्ता, उप संचालक श्रीमती रश्मि बर्गीस सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

पचमढ़ी सिल्क-टेक पार्क को प्रोजेक्ट मोड में विकसित किया जाए : राज्य मंत्री जायसवाल

भोपाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा है कि पचमढ़ी सिल्क टेक पार्क को प्रोजेक्ट मोड में विकसित करने की आवश्यकता है। मंत्री जायसवाल सिल्क-टेक पार्क पचमढ़ी का भ्रमण कर रहे थे। उन्होंने प्राकृतिक सिल्क शोरूम व मूंगा रेशम उत्पादन की गतिविधियों और प्रदेश के एकमात्र रेशम बीज उत्पादन केन्द्र की गतिविधियों का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री नगरीय प्रशासन एवं आवास श्रीमती प्रतिमा बागरी और राज्य मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती राधारानी सिंह ने भी रेशम केन्द्र तथा प्राकृत शोरूम पचमढ़ी का भ्रमण किया। पचमढ़ी प्रदेश का एकमात्र केन्द्र है जहां चारों प्रकार का रेशम होता है। मंत्री जायसवाल ने बिक्री बढ़ाने के लिए प्राकृत सिल्क शोरूम को फॉरेस्ट के टूरिज्म सर्किट से जोड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेशम उद्योग को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से पचमढ़ी रेशम केंद्र को और अधिक विकसित करने के निर्देश दिए हैं जिससे पचमढ़ी का रेशम देशभर में जाना जाये। केन्द्र के विकसित होने से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।  

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