LATEST NEWS

अक्टूबर-नवंबर से MP में लागू हो सकता है ‘VB G-RAMJI’, राज्य सरकार बनाएगी अलग नियम

भोपाल मनरेगा की जगह शुरू होने जा रही विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी वीबी जी रामजी योजना प्रदेश में इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर से प्रारंभ हो सकती है। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तैयारियों में जुटा है। तैयारियों के संबंध में मंगलवार-बुधवार को दिल्ली में बैठक होने जा रही है, जिसमें सभी राज्यों से तैयारियों के संबंध में पूछा जाएगा। पंचायतों के बारे में जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे केंद्र सरकार राज्य को अनुदान के संबंध में नीति बना सके। अधिसूचना के बाद राज्य सरकार बनाएगी अपने नियम बता दें कि वीबी जी रामजी विधेयक संसद से पारित हो गया है। इसकी अधिसूचना अप्रैल या मई में जारी हो सकती है। इसके बाद राज्य सरकार अपने नियम बनाएगी, जो विधानसभा से पारित होंगे। इसमें लगभग छह माह का समय लगेगा। यह भी बता दें कि योजना में राज्य सरकारों को विकल्प दिया गया है कि वह केंद्र के नियम उसी रूप में स्वीकार कर लें या अपने अनुसार बदलाव कर लें। हर राज्य की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।   स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर होगा नियमों में बदलाव उदाहरण के तौर पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्र, श्रमिकों की संख्या, मनरेगा के अंतर्गत हुए काम, विकास कार्यों को लेकर राज्य सरकार की प्राथमिकता आदि। इन आधारों पर राज्य सरकार नियमों में कुछ परिवर्तन कर सकती है। विधानसभा से पारित होने के बाद इसे अमल में लाया जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद सबसे पहले संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि मनरेगा से नई योजना किस तरह अलग है, कौन से नए काम शामिल किए गए हैं और सामाजिक अंकेक्षण किस तरह से किया जाना है।   काम के आधार पर तीन श्रेणियों में बंटेंगी पंचायतें अगले चरण में पंचायतों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली वह पंचायतें जिनमें मनरेगा में कम काम हुआ है, उन्हें प्राथमिकता में रखकर वहां अधिक काम कराया जाएगा। इसके बाद मध्यम स्तर की ग्राम पंचायतें और तीसरी ऐसी पंचायतें होंगी जिन पर बहुत अधिक काम हो चुका है, वहां अब ज्यादा काम की आवश्यकता नहीं है। इस तरह सभी जगह समान रूप से विकास होगा। मनरेगा में कुछ ग्राम पंचायतों में बहुत अधिक तो कुछ में बहुत कम काम हुआ है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाड़ी देशों में उपजी परिस्थितियों के मद्देनजर की नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था में कहीं किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं है। सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति संसाधन उपलब्ध हैं। किसी को भी खाद्य पदार्थ, गैस या तेल आपूर्ति के लिए परेशान या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रदेश में बेहतर से बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परिस्थितियों पर गहनता से नजर बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में देश के साथ मध्यप्रदेश में भी कहीं कोई आपूर्ति संबंधित दिक्कत नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में खाड़ी देशों में उपजी विषम परिस्थितियों के मद्देनजर मध्यप्रदेश में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व और देश के समक्ष उपजी परिस्थितियों और संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यीय मंत्री और अधिकारियों की समिति प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी करेगी और आपूर्ति बहाल रखने के लिए सभी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे या वर्क वीजा पर गए या पर्यटन के लिए गए भारतीय नागरिकों, विशेषकर मध्यप्रदेश के निवासियों की स्वदेश वापसी के लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के सम्पर्क में है। राज्य सरकार से हेल्पलाइन के जरिए अब तक 255 लोगों ने संपर्क किया है, जिनकी सकुशल स्वदेश वापसी के लिए प्रयास तेज किए जा रहे हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, सभी मंत्रीगण सहित प्रभारी मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरूण शमी, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।  

सरकार की राहत योजना का असर: फरवरी में लाखों उपभोक्ताओं को बिजली बिल में करोड़ों की छूट

भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत, माह फरवरी 2026 के दौरान कुल 6, 13, 877 उपभोक्ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में टाइम ऑफ डे (ToD) छूट का लाभ प्रदान किया है, इसकी कुल राशि 3 करोड़, 68 लाख 01 हजार रूपए है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर ये छूट दी गई है। कंपनी ने बताया कि स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए जिसमें घरेलू, गैर घरेलू, सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और निम्‍नदाब औद्योगिक उपभोक्‍ताओं के लिए सोलर ऑवर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड / अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को ही दी जा रही है। स्मार्ट मीटर के फायदे स्मार्ट मीटर ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है। बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं। ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं। ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है। ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव कम होता है। ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद कर सकता है।

सफलता की कहानी : सास-बहू से देवरानी-जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से खिल रहा ग्रामीण पर्यटन

Success Story: From Mother-in-law and Daughter-in-law to Sister-in-law and Sister-in-law: Rural Tourism is Flourishing Through Relationship Sharing सास-बहू, मां-बेटी या देवरानी-जेठानी के रिश्तों को अक्सर तकरार और मतभेद के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम इन धारणाओं को बदलते हुए एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। जिले के गॉवों की महिलाएं आपसी सहयोग और विश्वास के साथ होम-स्टे चला रही हैं और रिश्तों की मजबूती को तरक्की की नई राह में बदल रही हैं। पर्यटन ग्राम धूसावानी की श्रीमती मनेशी धुर्वे और श्रीमती अलका धुर्वे रिश्ते में सास-बहू हैं, लेकिन जब उनके होम-स्टे में पर्यटक आते हैं तो दोनों मिलकर पूरे उत्साह से मेहमाननवाजी में जुट जाती हैं। इसी तरह सावरवानी में श्रीमती मालती यदुवंशी अपनी सास श्रीमती शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे जिले में उभरती एक नई सामाजिक और आर्थिक तस्वीर है, जहां रिश्तों की साझेदारी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। रिश्तों की साझेदारी से मिली पहचान छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्रामों में चल रहे होम-स्टे केवल आय का साधन नहीं हैं, बल्कि ये महिलाओं की सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास का भी प्रतीक बन चुके हैं। यहां सास-बहू, मां-बेटी और देवरानी-जेठानी मिलकर पर्यटकों का स्वागत करती हैं, भोजन तैयार करती हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं। इन रिश्तों की सामूहिक ताकत ने यह साबित किया है कि जब परिवार की महिलाएं साथ मिलकर काम करती हैं, तो घर ही नहीं बल्कि पूरा गांव विकास की राह पर आगे बढ़ सकता है। जिले में 50 से अधिक होम-स्टे मध्यप्रदेश में सर्वाधिक होम-स्टे संचालित करने वाले जिलों में शामिल छिंदवाड़ा में इस समय 50 से अधिक होम-स्टे संचालित हैं। खास बात यह है कि इन सभी होम-स्टे का पंजीयन महिलाओं के नाम पर किया गया है और संचालन की अधिकांश जिम्मेदारी भी महिलाएं ही संभाल रही हैं। सावरवानी, चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में स्थानीय महिलाएं पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्वाद और संस्कृति से जुड़ते पर्यटक गांव की महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक और स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजन तैयार करती हैं। इसके साथ ही वे लोकनृत्य और लोक गायन से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी पर्यटकों को परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलता है, वहीं महिलाओं को आय का सम्मानजनक साधन भी प्राप्त हो रहा है। महिलाओं के हाथों में होम-स्टे की कमान गांव की महिलाएं स्वयं होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। पर्यटकों के स्वागत से लेकर भोजन व्यवस्था, आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रबंधन तक की पूरी जिम्मेदारी वे ही निभाती हैं। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सास-बहू, देवरानी-जेठानी जैसे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध ही नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास के मजबूत आधार भी बन सकते हैं। यही साझेदारी आज छिंदवाड़ा के ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान दे रही है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बन रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि होम-स्टे की यह पहल गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों के और विस्तार की संभावनाएं भी दिखाई दे रही हैं।

गजब है एमपी: गैस संकट, लेकिन रिटायर्ड शिक्षक के घर से मिले 25 सिलेंडर; प्रशासन ने रात में मारा छापा

chhatarpur gas crisis administration seizes 25 lpg cylinders from retired teacher home छतरपुर ! शहर की विश्वनाथ कॉलोनी में देर रात घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के अवैध भंडारण का बड़ा मामला सामने आया है। प्रशासन ने एक रिटायर्ड शिक्षक के घर छापेमारी कर बड़ी संख्या में घरेलू गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। कार्रवाई के दौरान इलाके में हड़कंप मच गया और आसपास के लोग मौके पर जुट गए। जानकारी के अनुसार, शहर में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। इसी बीच प्रशासन को सूचना मिली कि विश्वनाथ कॉलोनी में रहने वाले एक रिटायर्ड शिक्षक, जिन्हें स्थानीय लोग अहिरवार सर के नाम से जानते हैं, उनके घर में बड़ी संख्या में घरेलू गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण किया गया है। सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल छापेमारी की कार्रवाई की। प्रशासनिक टीम और पुलिस बल मौके परकार्रवाई के दौरान एसडीएम और तहसीलदार कोतवाली पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। टीम ने घर की तलाशी ली तो अंदर बड़ी संख्या में घरेलू एलपीजी सिलेंडर रखे मिले। इसके बाद प्रशासन ने सिलेंडरों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की और उनकी गिनती की। मौके पर कुल 25 गैस सिलेंडर मिले, जिनमें से 22 खाली और 3 भरे हुए पाए गए। फिलहाल प्रशासन मामले की जांच कर रहा है कि इतने सिलेंडर किस उद्देश्य से जमा किए गए थे और इन्हें कहां से लाया गया था। जमाखोरी की आशंका, जांच जारीअधिकारियों के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडरों का इस तरह भंडारण करना नियमों के खिलाफ है और इससे गैस की कालाबाजारी की आशंका भी जताई जा रही है। मामले में गैस एजेंसियों से भी जानकारी ली जा रही है। यदि अवैध भंडारण या कालाबाजारी की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। छापेमारी की खबर फैलते ही विश्वनाथ कॉलोनी में लोगों की भीड़ लग गई। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भारतीय ज्ञान परंपरा हमारी ताकत, इसे आगे बढ़ाना समय की मांग : मंत्री परमार

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का किया शुभारंभ भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारत देश कभी गरीब नहीं था, बल्कि एक समृद्ध देश था। भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। भारत का ज्ञान सर्वश्रेष्ठ था और यहां का किसान आत्मविश्वासी और सामर्थ्यवान था। भारत का समाज, शिक्षित समाज था। भारत की संस्कृति और परंपराएं मजबूत थी। वैज्ञानिक भारतीय समाज की विशेषता थी। भारत की इसी समृद्धि के कारण ही विदेशी लुटेरे, मुगल और अंग्रेज भारत आए तथा समृद्ध भारत को हर स्तर पर लूटने का प्रयास किया। संस्कृति, परंपराओं,वेदों , शिक्षा केंद्रों, खेल परिसरों आदि को नष्ट करने के कार्य के साथ भारतीय समाज के अशिक्षित होने, रूढ़िवादी होने, अंधविश्वासी होने का दुष्प्रचार भी किया। अब समय आ गया है जब हम भारत के महानतम ज्ञान एवं भारतीय समाज के बारे में भ्रांतियां को दूर करने के सशक्त उपाय करते हुए देश की स्वतंत्रता की 100वी वर्षगांठ वर्ष-2047 तक भारत को, विकसित भारत के महानतम लक्ष्य के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के वैशिष्ट्य को पूरी क्षमता से मनाए। मंत्री परमार ने कहा भारतीय समाज की अवधारणा को समझने और पुनः स्मरण करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एक उपयुक्त अवसर है कि जब हम वैज्ञानिक शोध करें और यदि हमें सामाजिक मान्यताओं में रूढ़िवाद, अंध विश्वास दिखे, तो हमें छोड़ना पड़ेगा। हम युगानुकल परिवर्तन के पक्षधर हैं। मंत्री परमार नेसोमवार को महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित 2 दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। इसके पहले मंत्री परमार ने एविएशन विंग का भ्रमण कर गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। मंत्री  परमार ने उड़ान अकादमी के अधिकारियों से विचार विमर्श कर कार्यक्रम के प्रगति की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भारत सरकार, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एस. पी. गौतम एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार कुडरिया, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ आर पी सिंह, पूर्व कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा, पूर्व कुलगुरु प्रो कपिल देव मिश्रा सहित शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

डीजीपी इलेवन टीम ने पुलिस मुख्यालय में डीजीपी कैलाश मकवाणा से की सौजन्य भेंट’

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस की डीजीपी इलेवन क्रिकेट टीम ने वर्तमान खेल सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए चार प्रमुख क्रिकेट प्रतियोगिताओं में विजेता बनकर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस अवसर पर डीजीपी इलेवन टीम के खिलाड़ियों ने पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डीजीपी  मकवाणा ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके अनुशासन, टीम भावना और खेल के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारी अपने कर्तव्यों के साथ-साथ खेल गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं, जो संगठन के लिए गर्व की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उल्लेखनीय है कि डीजीपी इलेवन टीम ने इस सत्र में आयोजित चार प्रमुख क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए सभी में विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। टीम ने हमीदिया कप टी-10 क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में गिल्ट फ्री टीम को पराजित कर खिताब अपने नाम किया। इस मैच में डीजीपी इलेवन की ओर से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विशाल भदौरिया को मैन ऑफ द फाइनल चुना गया। इसी प्रकार टीम ने 5वीं स्व.  हुकुम सिंह ठाकुर स्मृति डिपार्टमेंटल क्रिकेट प्रतियोगिता में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए नगर निगम कमिश्नर एकादश को पराजित कर चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। इस मुकाबले में अरुण सिंह ने प्रभावी गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट प्राप्त किए और उन्हें मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त महेश्वर खेल-कूद शिक्षण एवं सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित 18वीं चैलेंजर ट्रॉफी क्रिकेट प्रतियोगिता के विभागीय फाइनल में डीजीपी इलेवन ने जिला पुलिस बल भोपाल को 121 रनों से पराजित कर खिताब अपने नाम किया। नेहरू नगर पुलिस लाइन, भोपाल में खेले गए इस मुकाबले में डीजीपी इलेवन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 218 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिला पुलिस बल भोपाल की टीम डीजीपी इलेवन की सधी हुई गेंदबाजी के सामने 97 रन पर सिमट गई। डीजीपी इलेवन की ओर से राहुल रावत ने 4 विकेट, नरेंद्र रैकवार ने 3 विकेट तथा अरुण ने 1 विकेट लेकर टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिशांत खरे को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। टीम ने इसी सत्र में आयोजित 31वें इंटर प्रेस क्रिकेट टूर्नामेंट में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया, जिसमें डीजीपी इलेवन की ओर से अंकुश सराठे ने 4 विकेट लेकर जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डीजीपी इलेवन की इस उपलब्धि ने यह भी प्रदर्शित किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस में खेल गतिविधियाँ केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, टीम भावना और सकारात्मक कार्यसंस्कृति को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। खिलाड़ियों का उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित प्रदर्शन पुलिस बल में स्वस्थ कार्यसंस्कृति, आपसी सहयोग और कल्याण की भावना को भी सशक्त करता है।  

MP में खेल शिक्षक भर्ती को लेकर हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश, नियुक्ति अंतिम फैसले के अधीन

जबलपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में माध्यमिक शिक्षक खेल के पदों पर होने वाली नियुक्तियों को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया है। इस पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता को चुनौती देने के मामले में कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, लोक शिक्षण संचालनालय, मप्र कर्मचारी चयन बोर्ड के चेयरमैन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को नियत की गई है। याचिकाकर्ता मुरैना निवासी सुरेन्द्र सिंह कुशवाह और मुरारी लाल शाक्य की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने माध्यमिक शिक्षक (खेल) भर्ती 2024 में भाग लिया। पात्रता और चयन परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनका नाम मैरिट में आया। इसके बाद दस्तावेज परीक्षण में उनकी उम्मीदवारी निरस्त कर दी गई। याचिकाकर्ताओं के पास डिप्लोमा इन फिजिकल एजुकेशन की योग्यता है। परीक्षण में यह कहा गया कि उक्त पद के लिए बैचलर आफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) की योग्यता चाहिए। दलील दी गई कि भर्ती अधिसूचना में बीपीएड और डीपीएड को समकक्ष योग्यता का प्रविधान किया गया था। याचिकाकर्ता योग्य थे, तभी चयन प्रक्रिया में सम्मिलित हुए थे। उनका नाम मैरिट सूची में भी आया और दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी की गई, किंतु बाद में मौखिक रूप से यह कहा गया कि उनकी डीपीएड योग्यता को बीपीएड के समकक्ष नहीं माना जाएगा।  

मंत्री भूरिया ने कहा- सीएम यादव, महान शिक्षाविद सावित्रीबाई फुले के सपनों को कर रहे हैं साकार

भोपाल महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार महान समाजसेविका और देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के सपने को पूरा करने का कार्य कर रही है। नारी सशक्तिकरण के लिये प्रदेश में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। भारत के सामाजिक इतिहास में सावित्रीबाई फुले नाम महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की पहली अग्रदूत के रूप में आदर के साथ लिया जाता है। वे देश की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने ऐसे समय में बालिकाओं की शिक्षा के लिए अलख जगाई, जब समाज में महिलाओं को पढ़ाने की कल्पना भी नहीं की जाती थी। सावित्रीबाई फुले ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए बेटियों को शिक्षा से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया और महिलाओं के सम्मान, अधिकार और समानता की नींव रखी। भारत के सामाजिक इतिहास में चुनिंदा ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने अपने साहस, दूरदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण से देश को नई दिशा दी। ऐसी ही महिला सशक्तिकरण की अग्रदूत थीं सावित्री बाई फुले। उनकी पुण्यतिथि हमें पुण्य स्मरण कराती है कि महिलाओं को शिक्षा के साथ समानता के अधिकार और सम्मान के बिना समाज की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब समाज में महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा जाता था। उन्होंने न केवल देश का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ भी आवाज़ बुलंद की। उनके प्रयासों ने महिलाओं को आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन की राह दिखाई। आज उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मध्यप्रदेश सरकार भी सावित्रीबाई फुले के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए महिलाओं और बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, शिक्षित, स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह योजना बेटियों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। इसी प्रकार लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत आधार दे रही है, जिससे वे परिवार और समाज में अधिक आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाओं और बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए पोषण अभियान तथा आंगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के समुचित पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और गर्भवती और धात्री माताओं के स्वास्थ्य तथा बालिकाओं के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं, जागरूकता अभियानों और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ कर रही है। स्व-सहायता समूहों और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार तथा उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके। महान शिक्षाविद सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि के अवसर पर हम उन्हें केवल स्मरण ही न करें, बल्कि उनके स्थापित आदर्शों को अपनाकर अन्य लोगों को भी प्रेरित करें। प्रत्येक बेटी को जब शिक्षा, सम्मान और अवसर मिलेगा, तभी एक समतामूलक और सशक्त समाज का निर्माण संभव होगा। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना भी है, जहां महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर सकें। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक अवसरों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री सुश्री भूरिया ने सभी से अपील की है कि सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर हम सभी यह संकल्प लें कि महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और सम्मान के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यही एक विकसित और सशक्त भारत की दिशा में हमारा महत्वपूर्ण कदम होगा।  

कृषि क्षेत्र को मजबूती देने पर जोर, मंत्री ऐदल सिंह कंषाना बोले—किसानों का कल्याण हमारी प्राथमिकता

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि किसानों का कल्याण करना राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित कर खेती को लाभ का धंधा बनाने और किसानों की आय आय बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं और गतिविधियां संचालित की गई हैं । विभाग का प्रमुख दायित्व प्रदेश में कृषि फसलों की उत्पाद‌कता में वृद्धि, भूमि एवं जल प्रबंध, लघु सिंचाई कार्यक्रमों का विस्तार एवं नवीनतम विकसित कृषि तकनीकी को खेतों तक पहुंचाने के लिए कृषकों को प्रेरित करना है। आधुनिक कृषि उपकरणों तथा उन्नत प्रमाणित बीजों का उपयोग बढ़ाने के साथ-साथ अन्य आदान सामग्री की उपलब्धता सुचारू रखने का दायित्व भी विभाग का है। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि समन्वित रूप से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में कृषकों की आय में वृद्धि करने के उद्‌देश्य से वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। डिजीटल एग्रीकल्चर के माध्यम से क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने एवं कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के अतिरिक्त मूल्य संवर्धन के माध्यम से नये रोजगार सृजन करना इसके आधारभूत लक्ष्य हैं। ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ की दिशा में कृषक कल्याण वर्ष-2026 में प्रदेश में कृषि विकास का बहु आयामी मॉडल निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत विभिन्न बहुउद्‌देशीय गतिविधियों का समावेश किया गया है। ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने एवं किसानों को आवश्यक उर्वरकों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए “ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान)” की शुरुआत की गई है। यह एक डिजिटल प्रणाली है, जिसका उ‌द्देश्य किसानों को अनुशंसित मात्रा अनुसार उर्वरक प्रदाय करने एवं उर्वरक प्राप्ति में होने वाली समस्याओं जैसे लंबी कतारें, कालाबाजारी, अनियमित वितरण एवं बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना है। 1 अक्टूबर 2025 से प्रदेश के तीन जिलों विदिशा, शाजापुर एवं जबलपुर में ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली लागू की गयी। इसके सकारात्मक परिणाम स्वरूप ई-विकास प्रणाली को सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में लागू किया गया है। ई-विकास के माध्यम से वर्तमान में 2 लाख 11 हजार किसानों द्वारा 1.28 लाख मीट्रिक टन उर्वरक क्रय किया गया है। भावांतर भुगतान योजना राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में किसान भाईयों के लिये खरीफ वर्ष 2025 में सोयाबीन फसल के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू की गई। यह योजना प्रदेश के किसानों को सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से लागू की गई है जिससे प्रदेश में सोयाबीन के उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकेगा। योजना में 1700 से अधिक पंजीयन केंद्रों पर 9 लाख से अधिक किसानों द्वारा फसल विक्रय के लिए पंजीयन कराया गया। अन्न (कोदो-कुटकी) प्रोत्साहन प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में अन्न (कोदो-कुटकी) के क्षेत्र विस्तार एवं उत्पादन को प्रोत्साहित कर किसानों की आय में वृध्दि किये जाने के लिए “रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना” अंतर्गत खरीफ 2025 में लगभग 30 हजार मीट्रिक टन कोदो एवं कुटकी का उपार्जन किया गया। कुटकी 3500 रुपए प्रति क्विंटल एवं कोदो 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से उपार्जन किया जाता है। निर्धारित क्रय मूल्य के अतिरिक्त राज्य सरकार दवारा 1000 रुपए प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदाय की जाती है। योजना अंतर्गत वर्ष 2025-26 में कोदो कुटकी उपार्जन के लिए कुल 22 हजार 886 कृषकों का पंजीयन किया गया, जिसका रकबा 20 हजार 616 हैक्टेयर है। मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में कृषकों की आय संवर्धन एवं आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से पहली बार मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना 2024 लागू की गई है। मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना में राज्य स्तरीय कार्यक्रम 24 सितम्बर, 2025 को कटंगी, जिला बालाघाट में आयोजित किया जाकर वर्ष 2024 में धान उपार्जन करने वाले किसानों को राशि रूपये 337.12 करोड़ डीबीटी के माध्यम से 6 लाख 69 हजार 272 कृषकों को प्रदाय कर लाभान्वित किया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों का फसल बीमा करने में देश में प्रथम स्थान पर है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग अंतर्गत प्रदेश को 1513 क्लस्टर में 75 हजार 650 हैक्टेयर (189125 एकड़) के लिए 189125 किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग अंतर्गत 3026 कृषि सखी का चयन किया गया है। पराली प्रबंधन कृषकों द्वारा फसल अवशेष (पराली) जलाने से रोकने के लिए शासन द्वारा कई कदम उठाये गये हैं, जिसमें प्रदेश स्तर पर 46,800 से अधिक नरवाई प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्र अनुदान पर वितरित करने के लिए कुल 468 करोड़ की अनुदान राशि जारी की गई है। वर्ष 2025-26 में पराली प्रबंधन से संबंधित 15 फसल अवशेष सप्लाई चैन (एग्रीगेटर) स्थापित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में पराली प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ रीपर, बेलर जैसे 7 हजार कृषि यंत्रों को अनुदान के माध्यम से वितरित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। मृदा परीक्षण प्रदेश में किसानों को निःशुल्क स्वाइल हैल्थ कार्ड उपलब्ध कराये जाने के लिए भारत सरकार की स्वाइल हैल्थ एंड फर्टीलिटी योजना संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत प्रदेश में वृहद स्तर पर अभियान चला कर स्वाइल हैल्थ कार्ड उपलब्ध कराये गये है। विकासखण्ड स्तर पर मृदा नमूना परीक्षण उपलब्ध कराये जाने हेतु 265 नवीन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। देश में मध्यप्रदेश स्वाईल हैल्थ कार्ड वितरण में प्रथम स्थान पर है। बीज वितरण खरीफ 2025 में कुल 22.46 लाख क्विंटल तथा रबी 2025-26 में 8.53 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का शासकीय, सहकारी एवं पंजीकृत निजी बीज उत्पादक संस्थाओं के माध्यम से वितरण किया गया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उददेश्य प्रदेश में ग्राम स्तर तक सिंचाई क्षेत्र में निवेश को बढ़ाकर हर खेत में पानी पहुंचाना है। उपलब्ध जल का उचित प्रबंध कर “पर ड्रॉप-मोर क्राप” के लक्ष्य को प्राप्त करना है। वर्ष 2025-26 के लिए भौतिक लक्ष्य 57924 हैक्टेयर के विरुद्ध 18003 हैक्टेयर क्षेत्र के कृषकों को लाभान्वित किया गया है। प्राकृतिक खेती बोर्ड किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग … Read more

गुना के डायल 112हीरोज: तत्परता से मिली मदद, ऑटो पलटने से घायल महिलाओं को पहुँचाया अस्पताल

भोपाल गुना जिले के थाना धरनावदा क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में घायल हुई महिलाओं को डायल-112 जवानों की त्वरित कार्रवाई से समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। 10 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना धरनावदा क्षेत्र में रुठियाई से धरनावदा रोड पर एक सवारी ऑटो मोड़ पर अनियंत्रित होकर पलट गया है, जिससे उसमें सवार कई महिलाएँ घायल हो गई हैं। सूचना मिलते ही धरनावदा थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर आरक्षक  मोहर सिंह एवं पायलट  माखन सिंह गुर्जर ने पाया कि रुठियाई से पटना गाँव की ओर जा रहा सवारी ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया था, जिससे उसमें सवार लगभग 07-08 महिलाएँ घायल हो गई थीं। डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को सुरक्षित रूप से एफआरव्ही वाहन की सहायता से रुठियाई अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उनका उपचार प्रारंभ किया गया। डायल-112 जवानों की तत्परता और जिम्मेदार कार्रवाई के कारण घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकी। डायल 112हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस हर आपात स्थिति में आमजन की सहायता और जीवन रक्षा के लिए सदैव तत्पर और समर्पित है।  

AI ट्रेडिंग का झांसा, इंदौर में शख्स से 2.10 लाख रुपये की साइबर ठगी

इंदौर  शेयर ट्रेडिंग के नाम से 2 लाख से ज्यादा की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपितों ने एआई ट्रेडिंग बॉट के माध्यम से शेयर खरीदने का झांसा देकर ठगी की है। साइबर हेल्पलाइन से मिले निर्देशों के बाद राजेंद्र नगर पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक धोखाधड़ी कुंदन नगर निवासी संजय पुत्र किशोर बनवार के साथ हुई है। टेलीग्राम ग्रुप और फर्जी निवेशकों का मायाजाल किशोर ने पुलिस को बताया कि पिछले साल 30 अक्टूबर को टेलीग्राम पर ‘साक्सोग्रोथ इन्वेस्टमेंट’ में ऐड किया था। ग्रुप में करीब सौ लोग जुड़े थे जो शेयर बाजार में निवेश करने और ट्रेडिंग संबंधित चर्चा करते थे। आरोपितों ने संजय से भी चर्चा की और कहा कि हमारा सिस्टम एआई बेस्ड है। एआई ट्रेडिंग बॉट ही फॉरेक्स मार्केट में ट्रेडिंग करता है और 100 प्रतिशत मुनाफा दिलाता है। आरोपितों ने निवेशक को निवेश करने की सलाह दी और कहा कि मुनाफा करवाना उनकी जिम्मेदारी है। 100% मुनाफे का झांसा और एक अन्य ठगी का मामला उन्होंने ग्रुप में शामिल अन्य निवेशकों से भी पुष्टि करवा दी। इस तरह संजय से 2 लाख 10 हजार रुपये ले लिए थे। बाद में पता चला ग्रुप में शामिल नंबर भी उनके ही थे। रावजी बाजार पुलिस ने भी सुंदरम पुत्र कृष्णकांत तिवारी निवासी शनि गली की शिकायत पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। सुंदरम के साथ डेढ़ लाख रुपये की वित्तीय ठगी हुई है।

तकनीक के सहारे बड़ी कार्रवाई, मध्यप्रदेश पुलिस ने ढूंढ निकाले कई गुम मोबाइल

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए किये जा रहे तकनीकी प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रदेश के तीन जिलों विदिशा, बुरहानपुर और अनूपपुर में की गई प्रभावी कार्यवाही के तहत जिलों की पुलिस टीमों ने कुल 698 गुम मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 68 लाख रुपये से अधिक है। इन मोबाइलों को तकनीकी माध्यमों और CEIR पोर्टल की सहायता से ट्रेस करउनके वास्तविक मालिकों को वापस किया गया है। विदिशा जिले में संचालित “मिशन मोबाइल रिकवरी” के अंतर्गत जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से कुल 603 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 50 लाख 75 हजार रुपये है। इन मोबाइलों को आधुनिक तकनीकी माध्यमों से ट्रैक करते हुए बरामद किया गया और उनके वास्तविक मालिकों को वापस किया जा रहा है। मोबाइल बरामदगी की यह कार्रवाई केवल जिले तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और बिहार जैसे अन्य राज्यों से भी मोबाइल ट्रेस कर बरामद किए गए है। बुरहानपुर जिले में साइबर सेल तथा थानों में स्थापित साइबर हेल्प डेस्क ने कुल 70 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 13 लाखरुपये है। इन मोबाइलों में विभिन्न कंपनियों के एंड्रॉयड स्मार्टफोन शामिल हैं, जिनकी कीमत 10 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक है। मोबाइलों को स्थानीय क्षेत्र के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों तथा पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी ट्रेस कर बरामद किया गया है। मोबाइल फोन बरामद होने के बाद उन्हें उनके वास्तविक मालिकों को वापस किया गया, जिनमें कई विद्यार्थी भी शामिल थे जिनके लिए मोबाइल पढ़ाई और ऑनलाइन गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण साधन था। अपने खोए हुए मोबाइल वापस मिलने पर नागरिकों ने पुलिस की इस कार्यवाही के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे जनहित में किया गया सराहनीय प्रयास बताया है। अनूपपुर थाना रामनगर एवं थाना बिजुरी क्षेत्र में प्राप्त शिकायतों के आधार पर तकनीकी माध्यमों से मोबाइल फोन ट्रैक कर कार्रवाई की गई। पुलिस टीमों द्वारा गुम हुए कुल 25 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 4 लाख 32 हजार रुपये है। बरामद मोबाइलों को उनके वास्तविक मालिकों को वापस किया गया, जिससे फरियादियों के चेहरों पर खुशी लौट आई है। मोबाइल वापस मिलने पर नागरिकों ने पुलिस की तत्परता और जनहितैषी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गुम मोबाइल फोन की ट्रेसिंग के लिए तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। नागरिकों से भी अपील की गई है कि मोबाइल गुम होने की स्थिति में तुरंत संबंधित थाने में सूचना दें तथा CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें, जिससे मोबाइल के दुरुपयोग को रोका जा सके और उसे ट्रेस कर वापस दिलाने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जा सके। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में बड़ी संख्या में गुम मोबाइल फोन बरामद कर नागरिकों को राहत प्रदान की जा रही है तथा पुलिस के प्रति जनविश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।  

परिवार की महिलाएं बनीं बदलाव की ताकत: रिश्तों की साझेदारी से बढ़ रहा ग्रामीण पर्यटन

होम-स्टे से बदली गांव की तस्वीर भोपाल सफलता की कहानी सास-बहू, मां-बेटी या देवरानी-जेठानी के रिश्तों को अक्सर तकरार और मतभेद के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम इन धारणाओं को बदलते हुए एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। जिले के गॉवों की महिलाएं आपसी सहयोग और विश्वास के साथ होम-स्टे चला रही हैं और रिश्तों की मजबूती को तरक्की की नई राह में बदल रही हैं। पर्यटन ग्राम धूसावानी की श्रीमती मनेशी धुर्वे और श्रीमती अलका धुर्वे रिश्ते में सास-बहू हैं, लेकिन जब उनके होम-स्टे में पर्यटक आते हैं तो दोनों मिलकर पूरे उत्साह से मेहमाननवाजी में जुट जाती हैं। इसी तरह सावरवानी में श्रीमती मालती यदुवंशी अपनी सास श्रीमती शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे जिले में उभरती एक नई सामाजिक और आर्थिक तस्वीर है, जहां रिश्तों की साझेदारी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। रिश्तों की साझेदारी से मिली पहचान छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्रामों में चल रहे होम-स्टे केवल आय का साधन नहीं हैं, बल्कि ये महिलाओं की सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास का भी प्रतीक बन चुके हैं। यहां सास-बहू, मां-बेटी और देवरानी-जेठानी मिलकर पर्यटकों का स्वागत करती हैं, भोजन तैयार करती हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं। इन रिश्तों की सामूहिक ताकत ने यह साबित किया है कि जब परिवार की महिलाएं साथ मिलकर काम करती हैं, तो घर ही नहीं बल्कि पूरा गांव विकास की राह पर आगे बढ़ सकता है। जिले में 50 से अधिक होम-स्टे मध्यप्रदेश में सर्वाधिक होम-स्टे संचालित करने वाले जिलों में शामिल छिंदवाड़ा में इस समय 50 से अधिक होम-स्टे संचालित हैं। खास बात यह है कि इन सभी होम-स्टे का पंजीयन महिलाओं के नाम पर किया गया है और संचालन की अधिकांश जिम्मेदारी भी महिलाएं ही संभाल रही हैं। सावरवानी, चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में स्थानीय महिलाएं पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्वाद और संस्कृति से जुड़ते पर्यटक गांव की महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक और स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजन तैयार करती हैं। इसके साथ ही वे लोकनृत्य और लोक गायन से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी पर्यटकों को परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलता है, वहीं महिलाओं को आय का सम्मानजनक साधन भी प्राप्त हो रहा है। महिलाओं के हाथों में होम-स्टे की कमान गांव की महिलाएं स्वयं होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। पर्यटकों के स्वागत से लेकर भोजन व्यवस्था, आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रबंधन तक की पूरी जिम्मेदारी वे ही निभाती हैं। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सास-बहू, देवरानी-जेठानी जैसे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध ही नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास के मजबूत आधार भी बन सकते हैं। यही साझेदारी आज छिंदवाड़ा के ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान दे रही है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बन रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि होम-स्टे की यह पहल गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों के और विस्तार की संभावनाएं भी दिखाई दे रही हैं।  

बिजली कर्मचारियों के लिए खास पहल: स्वास्थ्य बीमा योजना बनी सुरक्षा की ढाल

भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निर्देश एवं मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह के मार्गदर्शन में कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए कैशलेस बीमा योजना लागू की गई है। कम प्रिमियम पर अधिक चिकित्सकीय व्यय लाभ दिलाने वाली यह य़ोजना बिजली कार्मिकों के लिए अनोखे कवच के रूप में काम आएगी। इस योजना के बिजली कंपनी एवं मेडसेव हेल्थ इंश्योरेंस के बीच दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया मंगलवार को प्रबंध निदेशक कार्यालय में की गई। इस अवसर पर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश सिंह चौहान, संयुक्त सचिव संजय मालवीय, इंश्योरेंस कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक विनय रिछारिया आदि मौजूद थे। इस कैशलेस हेल्थ बीमा योजना से कार्मिकों के परिवार का पांच सौ रूपए प्रतिमाह की प्रिमियम पर 5 लाख का, एक हजार मासिक प्रिमियम पर दस लाख का, दो हजार मासिक प्रिमियम पर 25 लाख का कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस कवर रहेगा। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनर भी सपरिवार इस योजना का चुनिंदा शर्तों के अधीन लाभ ले सकेंगे।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet