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कृषि रथ के माध्यम से किसानों को बताया प्राकृतिक और जैविक खेती का महत्व

भोपाल. कृषक कल्याण वर्ष 2026 राज्य शासन द्वारा घोषित कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत किसानों को खेती की नई पद्धतियों की जानकारी दी जा रही है। इसी क्रम में हरदा जिले की ग्राम पंचायतों में कृषि रथ का संचालन किया गया। कृषि रथ के साथ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, कृषि विभाग एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा कृषकों से सीधा संपर्क कर ई-विकास प्रणाली से उर्वरक क्रय करने के लिये जागरूक किया गया। साथ ही नरवाई प्रबंधन, ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के स्थान पर उडद, मूंगफली, तिल आदि फसलों को प्रोत्साहन के साथ प्राकृतिक और जैविक कृषि करने के लिए प्रेरित किया गया। मृदा स्वास्थ कार्ड के आधार पर उर्वरकों की संतुलित मात्रा का उपयोग करने और भूमि पर बोई गई फसल अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग करने सहित समसामयिक सलाह भी प्रदान की गई। किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती करने के लिए प्रेरित करते हुए बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से अनेक जानलेवा बीमारियां बढ़ रही हैं। प्राकृतिक और जैविक खेती से बीमारियां होने का खतरा नहीं रहता है। प्राकृतिक और जैविक खेती एक ऐसी खेती है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और जैविक पदार्थों का उपयोग करके फसलें उगाई जाती हैं। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जल संरक्षण होता है, जैव विविधता बढ़ने के साथ किसानों की आय बढ़ती है और फसलों की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। किसानों को मिल रही सोलर पम्प की सौगात प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत हरदा जिले के किसानों को सिंचाई सुविधा सुलभ कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा योजना के तहत हरदा जिले में 361 किसानों का ऑफ ग्रिड सोलर पम्प प्रदाय करने के लिए चयन किया गया है। इस योजना से किसानों को दिन के समय निर्बाध सिंचाई, कम लागत में खेती तथा पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता का लाभ मिल रहा है।  

मध्‍यप्रदेश पुलिस की त्वरित कार्रवाई

भोपाल . मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में सतत रूप से की जा रही जनसुरक्षा एवं बाल संरक्षण से जुड़ी कार्यवाहियों के क्रम में नरसिंहपुर एवं शिवपुरी जिलों में नाबालिग बच्चों की सकुशल दस्तयाबी की दो प्रमुख कार्यवाहियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय रहीं, जिन्होंने पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता एवं पेशेवर दक्षता को सशक्त रूप से रेखांकित किया है। नरसिंहपुर: चंद घंटों में दो नाबालिग बालिकाओं की सकुशल दस्तयाबी दिनांक 10 फरवरी को थाना गोटेगांव, जिला नरसिंहपुर में 9 वर्षीय एवं 8 वर्षीय बालिका के गुम होने की सूचना प्राप्त होते ही पुलिस ने तत्काल सघन तलाश प्रारंभ की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश के नेतृत्व में चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। टीमों द्वारा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों एवं सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से व्यापक खोजबीन की गई। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप दोनों बालिकाएं ग्राम कमती के सेमरावारी खेत स्थित कोहा के पेड़ के पास झाड़ियों में सुरक्षित अवस्था में मिलीं। पूछताछ में ज्ञात हुआ कि कुरकुरे खाने के बाद परिजनों की डांट के भय से वे स्वयं छिप गई थीं। दोनों बालिकाओं को सकुशल परिजनों के सुपुर्द किया गया। शिवपुरी: हॉस्टल से लापता तीन नाबालिग बालकों को गुना से सुरक्षित दस्तयाबकिया दिनांक 12 फरवरी को थाना कोतवाली, जिला शिवपुरी में हॉस्टल से तीन नाबालिग बालकों (उम्र 14, 15 एवं 17 वर्ष) के लापता होने की रिपोर्ट पर तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। पुलिस अधीक्षक श्री अमन सिंह राठौड़ के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। टीम द्वारा शिवपुरी एवं गुना में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं आसपास के क्षेत्रों में 80 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की गहन जांच करते हुए सघन तलाश की गई, जिसके परिणामस्वरूप तीनों बालकों को गुना रेलवे स्टेशन से सकुशल दस्तयाबकर परिजनों के सुपुर्द किया गया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा जनसहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रतिदिन अनेक प्रभावी कार्रवाइयाँ की जा रही हैं। इन प्रयासों के माध्यम से पुलिस न केवल सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि समाज में विश्वास, सहयोग और सकारात्मक संवाद की मजबूत नींव भी रख रही है।  

जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने के लिए मध्यप्रदेश की हुई सराहना

जनगणना प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने का है अभियान प्रधानमंत्री मोदी ने लिया डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला कलेक्टर-कमिश्नर्स समय-सीमा में पूर्ण करें जनगणना कार्य जनगणना में मजरों-टोलों का भी किया जाए आंकलन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। जनगणना के आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है। आज भारत विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला राष्ट्र है। यह जनगणना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व की भी है। जनगणना का कार्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे व्यापक और निर्णायक अभियान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनगणना-2027 के प्रथम चरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन में जनगणना-2027 की प्रक्रिया पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सत्र में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, रजिस्ट्रॉर जनरल तथा जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिवशेखर शुक्ला उपस्थित थे। सम्मेलन में प्रदेश के सभी संभागायुक्त, कलेक्टर्स, नगर निगम आयुक्त तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। देश में आखिरी बार वर्ष 1931 में सामाजिक स्तर की जनगणना की गई थी। उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया में गांवों, मजरों-टोलों के साथ-साथ बेचिराग गांवों की स्थिति के आंकलन की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल एवं अन्य कार्यों की योजनाएं जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनाई जाती हैं। जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, यह राज्य की संवेदनशीलता, प्रशासन की विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की चुनौतियां भिन्न हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाते हुए समयबद्ध रूप से जनगणना की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता का केन्द्र मैदानी प्रशासनिक अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स और कमिश्नर्स से जनगणना कार्य को रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करते हुए जनगणना के सभी उद्देश्यों की समय सीमा में पूर्ति करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में उपस्थित प्रदेश के सभी कमिश्नर-कलेक्टरों से कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 6 मार्च तक चलेगा। उन्होंने आगामी महाशिवरात्रि और होली जैसे त्यौहारों के दृष्टिगत शांति समितियों के साथ बैठक कर अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने में जन भावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। नागरिकों के स्वास्थ्य की दृष्टि से मिलावटी मिठाई, रंगों में मिलावट एवं अन्य खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं। होली के त्यौहार में सामाजिक समरसता सुनिश्चित हो। प्रदेश में जल संरचनाओं के निर्माण में मुआवजे के प्रकरणों का निराकरण संवेदनशीलता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि हमें विकास के साथ-साथ जनभावनाओं का ध्यान भी रखना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत जी-रामजी योजना के क्रियान्वयन के लिए बेहतर प्रबंध किए जाएं। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है। किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं और कार्यों के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। ग्रीष्मकालीन फसलों में राज्य सरकार उड़द और मूंगफली के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। मक्का की फसलों से भी किसान लाभान्वित हो रहे हैं। नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने में विभिन्न जिले स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखें। प्रदेश में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज, पंजीयन, आबकारी के अंतर्गत राजस्व संग्रहण लक्ष्यों को प्राप्त करना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना को प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे कठिन कार्य माना जाता है। देश में हर 10 साल में जनगणना होती है। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए जनगणना, अपनी प्रबंधन दक्षता को सिद्ध करने और अपने अनुभवों का समृद्ध करने का श्रेष्ठ अवसर है। इस बार तकनीक के बेहतर उपयोग से जनगणना के आंकड़े डिजिटल व्यवस्था के परिणामस्वरूप जल्दी आएंगे। मध्यप्रदेश विविधता से समृद्ध राज्य है। यहां करीब 1 लाख 27 हजार मजरे-टोले हैं, अगर मकानों की गणना के पत्रक में एक कॉलम मजरे टोले का रखा जाए, तो इससे राज्य सरकार को भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। जीआईएस सिस्टम से महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। अगर आंकड़े सही तरीके से फीड किए जाएंगे तो जनगणना का परिणाम बेहतर मिलेगा। यह नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी सही जानकारियां फील्ड अधिकारियों को उपलब्ध कराएं। 

पुलिस मुख्‍यालयस्‍तर से डायल-112 जवानों को किया जा रहा है पुरस्‍कृत

भोपाल. डायल-112 केवल आपात सेवा नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जीवन रक्षक संबल है। एक पिकअप वाहन के दुर्घटनाग्रस्‍त होने से घायल हुए 12 लोगों को समय पर अस्‍पताल पहुंचाकर डायल-112 ने त्वरितप्रतिक्रिया, मानवीय संवेदनशीलता और जन-सुरक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। दिनांक 13 फरवरी 2026 को प्रातः 08 बजे विलइत घाट स्थित नायरा पेट्रोल पंप के समीप एक पिकअप वाहन के अनियंत्रित होकर पलट जाने से महिला व बच्चों सहित कुल 12 व्यक्ति घायल हो गए। यह सभी लोग पतरहटा से बारहो कार्यक्रम में शामिल होकर अपने गांव अखड़ार लौट रहे थे।इस दुर्घटना की सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम, डायल-112 भोपाल को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही तत्परता दिखाते हुए थाना चंदिया क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। कुछ ही समय में डायल-112 स्टाफ आरक्षक सुनील सिकरवार एवं पायलट विजय कुमार यादव घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेकर त्वरित राहत कार्य प्रारंभ किया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 जवानों ने गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को प्राथमिक सहायता प्रदान की और बिना समय गंवाए एफआरव्ही वाहन तथा चिकित्सा वाहन की सहायता से सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चंदिया पहुंचाया। उनकी तत्परता, सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता के चलते सभी घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका, जिससे संभावित गंभीर परिणामों को टाला जा सका। डायल 112 हीरोजने विषम परिस्थितियों में भी जिस समर्पण और तेजी से अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह न केवल प्रशंसनीय है बल्कि समाज में पुलिस के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ करता है।यही सच्चे अर्थों में “हीरोज” हैं — जो बिना किसी अपेक्षा के, केवल मानवता के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं। इस सराहनीय कार्य के लिए डायल-112 जवानों को मुख्‍यालयस्‍तर से पुरस्‍कृत किया जा रहा है।  

600 करोड़ रूपए की नई सिंचाई परियोजना से खेत होंगे सिंचित 33 गांवों को मिलेगा लाभ

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नोहलेश्वर महादेव की महिमा ऐसी है जो यहाँ एक बार आता है, उसका मन बार-बार यहां आने को करता है। कृपावंत, कृपाशंकर भगवान नोहलेश्वर महादेव के आशीर्वाद से हम प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए पूरी ऊर्जा और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। नोहलेश्वर महोत्सव आस्था ही नहीं, स्थानीय संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का भी उत्सव है। हमारी सरकार आस्था के स्थलों के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को दमोह जिले के ग्राम नोहटा में नोहलेश्वर महोत्सव मेले के अवसर पर आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेले का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। साथ ही नोहलेश्वर मंदिर परिसर और मेला परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई विकास प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय जनता की मांग पर नोहटा को परीक्षण के उपरांत नगर परिषद बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में 2 करोड़ रूपए की लागत से गीता भवन का निर्माण किया जाएगा। दमोह जिले में बांदकपुर-सेमरखो जलाशय की क्षमता में वृद्धि कर 600 करोड़ रूपए की नई सिंचाई परियोजना विकसित की जाएगी। इससे जिले के 33 गांवों के खेतों को सिंचाई के लिये भरपूर पानी मिलेगा। दमोह में 10 करोड़ रूपए की लागत से वॉटर स्पोर्ट्स, बोट क्लब सहित अन्य पर्यटन गतिविधियों का विकास किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तेंदूखेड़ा और हटा में खेल गतिविधियों के प्रोत्साहन के लिए नए स्टेडियम बनाए जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुप्रसिद्ध भजन गायिका शहनाज अख्तर का अभिनंदन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार दमोह के साथ पूरे बुंदेलखंड के विकास के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। दमोह के तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ की नई योजना को स्वीकृति दी गई है। दमोह के लिए नया फोर लेन भी मंजूर किया गया है। दमोह में पर्यटन के साथ उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में समान रूप से प्रयास कर रही है। दमोह जिले में जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए जैविक हाट लगाए जा रहे हैं। अब तक जिले में 69 जैविक हाटों में 28 लाख रुपए के उत्पादों की बिक्री हुई है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किसानों को खाद वितरण के लिए की गई ई-टोकन की व्यवस्था की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं। उनकी खुशहाली और समृद्धि से ही देश खुशहाल बनेगा। उन्होंने कहा कि हम खेती के साथ पशुपालन को भी प्रोत्साहन दे रहे हैं। कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण बढ़ाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पशुपालन से दूध उत्पादन बढ़ेगा। हमने प्रदेश का दूध उत्पादन 9 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। हमारी सरकार पशुपालन, गौपालन और गौ-संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किसी भी देश के साथ रिश्तों में किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं किया। खेतों में किसान और सीमा पर जवान, दोनों हमारे लिए बराबर सम्मान रखते हैं। राज्य सरकार किसानों के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रख रही है। विकास कार्यों को गति देने में हमारी सरकार सदैव जनता के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माताओं-बहनों का स्थान सर्वोपरि है। हम अपने देश को भी माता का दर्जा देते हुए भारत माता कहकर सम्मान देते हैं। माताएं-बहनें हमारे परिवार की गरिमा हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार हमेशा लाड़ली बहनों के साथ है। लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की सहायता राशि दी जा रही है। वे अपनी मेहनत और निष्ठा से पूरे कुल, खानदान, परिवार का लालन-पालन करती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में औद्योगिक प्रक्षेत्र के विकास के साथ क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। सूखे खेत को पानी मिल जाए, तो फसल सोने जैसी हो जाती है। दमोह जिले को देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना से सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी और गीता जयंती को भव्यता के साथ मनाने की शुरुआत की। मध्यप्रदेश, देश का एकमात्र राज्य है, जो विकास के साथ विरासत का भी संरक्षण कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नोहटा का नोहलेश्वर मंदिर 1100 साल से अधिक प्राचीन है, जिसे कलचुरी साम्राज्य में महारानी नोहला ने बनवाया था। नोहलेश्वर महोत्सव के आयोजन से इस क्षेत्र के पर्यटन को नई ऊर्जा मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों के पुनर्स्थापन से नया चमत्कार हुआ है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में विदेश से 20 चीता लाए गए थे, अब 35 चीते प्रदेश की धरती पर दौड़ लगा रहे हैं, चीतों का परिवार बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले मादा चीता आशा ने 5 शावकों को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी साल जून में नौंरादेही अभयारण्य में चीतों को छोड़ा जाएगा। मध्यप्रदेश टाइगर, चीता, गिद्ध और घड़ियाल के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर है। उन्होंने कहा कि वन्य जीव पर्यटन को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने होम-स्टे योजना बनाई है। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और वे पर्यटकों को अपने घरों में होम-स्टे बनाकर ठहरा सकेंगे। होम-स्टे तैयार करने वाले हितग्राहियों को शासकीय अनुदान भी दिया जा रहा है। उन्होंने होम-स्टे संचालनकर्ताओं से कहा कि जब पर्यटक आएं, तो उनकी अच्छी तरह मेहमाननवाज़ी करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन पर्यटन क्षेत्रों में होम-स्टे चल रहे हैं, वहाँ होम-स्टे से ग्रामीणों की आय तेजी से बढ़ रही है। संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश ने ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति करते हुए आज 26 हजार मेगावॉट से अधिक बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की है। मध्यप्रदेश में किसानों को ब्याज रहित ऋण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ‘मैन ऑफ आइडियाज’ हैं। उन्होंने अनेक जनकल्याणकारी … Read more

31 मई तक नियमों के सरलीकरण के प्रस्ताव प्रस्तुत करें: मुख्य सचिव जैन

भोपाल. मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने विकसित भारत 2047 और सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के दृष्टिगत मध्यप्रदेश में व्यवसाय और उद्योगों सहित जनमानस से जुडे 28 प्राथमिक क्षेत्रों के नियम-कायदों को सरलीकरण करने के लिए संबंधित विभागों से 31 मई तक अनुशंसाएं और आवश्यक परिवर्तन प्रस्तुत करने की अपेक्षा की है। मुख्य सचिव  जैन और वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार की सचिव एवं ईज ऑफ डूईगं बिजनेस टास्क फोर्स की चेयरपर्सन  नीलम शमी राव की उपस्थिति में शुक्रवार को मंत्रालय में टास्क फोर्स की बैठक हुई। मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और अन्य तरह के रिफार्म में अग्रणी है। सीएस कॉन्फ्रेंस में भी मध्यप्रदेश की बेस्ट प्रेक्टिस की तारीफ की गई। उन्होंने कहा कि देश में मध्यप्रदेश सर्वश्रेष्ठ 5 राज्यों में शामिल हैं। विकसित भारत 2047 और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के नियमों और कानूनों को आसान बनाने के लिए अंतर्राराष्ट्रीय बैंच मार्क के हिसाब से बदलाव प्रास्तावित करें। भारत सरकार के संभावित विभागों से समन्वय करने के साथ ही उच्च अधिकार समिति से भी मार्गदर्शन लिया जा सकता है। मुख्य सचिव  जैन ने टास्क फोर्स की अध्यक्ष को सुझाव दिया कि पी.एम.प्रगति पोर्टल से परिवेश पोर्टल को जोड़ने से सभी राज्यों में अपनाई जाने वाली बेस्ट प्रैक्टिस और वहां के रिफार्म से सभी को जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने स्कूल शिक्षा के लिए सी.बी.एस.सी और उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए यू.जी.सी से एक जैसे नियम कानून बनाने की सलाह भी दी। मुख्य सचिव  जैन ने बताया कि मध्यप्रदेश ने म.प्र. जन विश्वास संशोधन और प्रावधान एक्ट 2024 और 2025 के माध्यम से प्रदेश में रिफार्म और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए राज्य के 26 कानूनों में 108 प्रावधान किए हैं। इससे उद्योग और व्यवसाय लगाना और संचालन आसान हुआ है। मध्यप्रदेश बना लीडर, मिली दूसरी रैंक :  राव टास्क फोर्स की अध्यक्ष  राव ने ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के प्रथम चरण में 23 प्राथमिकता क्षेत्र में मध्यप्रदेश के देश में दूसरी रैंक अर्जित करने पर अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में 5 और प्राथमिकता क्षेत्रों को शामिल किया गया है। उन्होंने पूर्व के 23 क्षेत्रों के अलावा ऊर्जा, पर्यटन, पर्यावरण शिक्षा और हेल्थ केयर को भी प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अपने राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिस को पोर्टल पर दर्ज करें। टास्क फोर्स ने सभी राज्यों के नियमों के सरलीकरण और रिफार्म के लिए 30 जून 2026 तिथि तय की है। इससे पहले वन, उच्च शिक्षा, नगरीय प्रशासन एवं विकास, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, पर्यटन आदि विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों ने आगामी समय में नियम-कानूनों में किए जाने वाले सरलीकरण की जानकारी दी। प्रमुख सचिव उद्योग एवं निवेश प्रोत्साहन  राघवेन्द्र सिंह ने मध्यप्रदेश में जन विश्वास अधिनियम और नियम-कानूनों के सरलीकरण के बाद उद्योग और व्यवसाय आदि में हुई सुगमता का प्रस्तुतीकरण दिया। इस अवसर पर भारत सरकार और राज्य शासन के अधिकारी उपस्थित थे।  

राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने ग्राम बैहाटोला में 25 लाख लागत के मंगल भवन का किया भूमिपूजन

अनूपपुर.  मध्यप्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  दिलीप जायसवाल ने आज जनपद पंचायत कोतमा अंतर्गत ग्राम पंचायत बैहाटोला में 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले मंगल भवन का भूमिपूजन किया। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री  जायसवाल ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सामाजिक, सांस्कृतिक, वैवाहिक तथा सामुदायिक आयोजनों के लिए एक सुलभ, सुव्यवस्थित एवं सर्वसुविधायुक्त स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस भवन का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कहा कि यह मंगल भवन विशेष रूप से कम आय वर्ग के नागरिकों को कम खर्च में आयोजन की सुविधा प्रदान करेगा। इससे सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सहायता मिलेगी। ऐसे सामुदायिक भवन समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए समारोहों को अधिक सुविधाजनक, किफायती एवं व्यवस्थित बनाकर जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होंगे। राज्यमंत्री  जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रत्येक पात्र हितग्राही को सीधे लाभान्वित कर रही है। किसानों के कल्याण हेतु बिना ब्याज के ऋण उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा विभिन्न योजनाओं की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि स्थानीय मांगों की पूर्ति के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मती ममता मिश्रा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

आयुष्मान कार्ड योजना गरीबों के लिए वरदान- राज्य मंत्री श्री दिलीप जायसवाल

अनूपपुर. मध्य प्रदेश शासन की कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर एवं संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत एवं मध्य प्रदेश को विकसित बनाने का सपना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा देखा गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नागरिकों का स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से आयुष्मान कार्ड योजना लागू की गई है, जो गरीब एवं जरूरतमंद वर्ग के लिए वरदान साबित हो रही है। योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार शासकीय एवं निजी चिकित्सालयों में उपलब्ध कराया जाता है। राज्यमंत्री श्री जायसवाल कोतमा में निजी स्वास्थ्य संस्थान द्वारा आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर को संबोधित कर रहे थे। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि मानवता की सेवा ही सच्ची सेवा है। केंद्र एवं राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का परम कर्तव्य है कि मरीज अपनी पीड़ा लेकर आए और उपचार के पश्चात स्वस्थ एवं संतुष्ट होकर वापस जाए, यही चिकित्सक की वास्तविक उपलब्धि होती है। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एयर एम्बुलेंस योजना संचालित की जा रही है। इस योजना का लाभ डॉक्टर की अनुशंसा एवं कलेक्टर के प्रतिवेदन के आधार पर पात्र हितग्राहियों को सरलता से उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि कोतमा के विश्वनाथ गोस्वामी सहित अन्य हितग्राही भी इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि शहडोल संभाग में वर्तमान समय में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। संभाग में मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं, जहां 24 घंटे चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, सभी इन सेवाओं का लाभ लें और स्वस्थ रहें। स्वास्थ्य शिविर में 518 मरीजों ने लिया निःशुल्क उपचार का लाभ*  राज्य मंत्री श्री दिलीप जायसवाल ने स्वास्थ्य शिविर के दौरान दंत चिकित्सा, स्त्री रोग विशेषज्ञ, नेत्र परीक्षण एवं जनरल चेकअप सहित विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी ली और व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। प्रभारी मंत्री ने स्वयं भी बीपी एवं शुगर का भी जांच कराया। शिविर में लगभग 518 लोगों ने पंजीयन कराकर निःशुल्क परीक्षण एवं उपचार का लाभ प्राप्त किया। शिविर में उपाध्यक्ष जनपद पंचायत कोतमा श्री अभिषेक सिंह, नगर पालिका परिषद कोतमा के पार्षद राजेंद्र सोनी सहित श्री पुष्पेंद्र जैन, श्री  हनुमान गर्ग सहित जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय जन उपस्थित थे।

20 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत

भोपाल रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक 20 हजार 98 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। किसान 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन अवश्य करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। मंत्री राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 4084, उज्जैन में 9524, ग्वालियर में 476, चम्बल में 123, जबलपुर में 788, नर्मदापुरम में 900, भोपाल में 3602, रीवा में 68, शहडोल में 83 और सागर में 450 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। किसानों को करें एसएमएस खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया है कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं।  

नस्ल सुधार से पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ मजबूत आधार

अब तक 15 लाख 21 हजार से अधिक प्रजनन योग्‍य पशुओं में किया जा चुका है कृत्रिम गर्भाधान भोपाल मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य की प्राप्‍त‍ि के लिए पशुओं में नस्ल सुधार किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ संचालित किया जा रहा है। पशुओं के नस्ल सुधार का यह अभि‍यान पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत आधार बना है। अभियान के अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान, बधियाकरण, गोशालाओं में नस्ल सुधार सहित पशुपालकों को सेक्‍सड सॉर्टेंड सीमन के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्‍य उद़देश्‍य गोशालाओं को आत्‍मनिर्भर बनाना, कृत्रिम गर्भाधान और स्‍थानीय स्‍तर पर प्रत्‍येक ग्राम पंचायत के बेरोजगार युवा को स्‍वरोजगार से जोड़ा जा सके। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) की व्‍यवस्‍था करना है। कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस प्रदेश सरकार द्वारा कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस किया जा रहा है। वर्तमान में 15.21 लाख पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। वहीं सॉर्टेड सेक्स सीमन के उपयोग को बढ़ावा देते हुए अब तक 1.65 लाख पशुओं में इसका सफल उपयोग किया गया है। कृत्रिम गर्भाधान की गुणवत्ता सुधारने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है। साथ ही जागरुकता के लिए राज्य, जिला और विकासखंड स्तर पर निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा कॉल सेंटर के माध्यम से प्रतिदिन किए गए कार्यों का टेलीफोनिक सत्यापन भी किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो रही है। पंचायतों में ‘मैत्री’ कार्यकर्ता की व्‍यवस्‍था पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) का प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अभी तक 12 हजार 988 से अधिक मैत्री प्रशिक्षित किए गए हैं। गोशालाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर अभियान के अंतर्गत प्रदेश की गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। इसके लिए प्रजनन योग्‍य गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान एवं अनुपयोगी सांडों का बधियाकरण किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश की विभिन्‍न गोशालाओं में उपलब्‍ध 11 हजार 551 गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान तथा 37 हजार 355 सांडों का बधियाकरण किया गया है। कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना के माध्‍यम से किया जाएगा पुरस्कृत विभाग द्वारा नस्ल सुधार कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों, मैत्री एवं अन्य कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए “कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना प्रारंभ की जाएगी। विकासखंड, जिला एवं राज्य स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कॉल सेंटर के माध्‍यम से प्रतिदिन किया जा रहा सत्‍यापन हिरण्यगर्भा अभियान अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का राज्‍य स्‍तर पर प्रतिदिन कॉल सेंटर के माध्‍यम से सत्‍यापन किया जा रहा है। प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के कार्य की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ है। प्रदेश में सेक्सड सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कराने की मांग बढ़ी है। साथ ही प्रदेश में दुग्ध संकलन में भी इजाफा हुआ है।  

उज्जैन बाइपास को मंजूरी, मध्य प्रदेश के रेल नेटवर्क को मिलेगा नया विस्तार

भोपाल मध्य प्रदेश में रेल नेटवर्क को मजबूत करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने राज्य में कई महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन योजनाओं से न केवल ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि माल ढुलाई, क्षेत्रीय संपर्क और धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। उज्जैन बाइपास रेलवे लाइन को मंजूरी भारतीय रेलवे के अंतर्गत पश्चिमी रेलवे ने नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोड़ने वाली 8.60 किलोमीटर लंबी उज्जैन बाईपास रेलवे लाइन को 189.04 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी है। यह परियोजना विशेष रूप से उज्जैन जंक्शन पर ट्रेनों के रिवर्सल की समस्या को समाप्त करेगी। अभी कई ट्रेनों को दिशा बदलने के लिए उज्जैन स्टेशन पर रुककर रिवर्सल करना पड़ता है, जिससे समय और परिचालन क्षमता दोनों प्रभावित होते हैं। बाईपास लाइन बनने से यह प्रक्रिया खत्म होगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी। सिंहस्थ 2028 और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा यह परियोजना वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के दौरान बेहतर रेल प्रबंधन और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होता है। बायपास लाइन बनने से तीर्थयात्रियों को सीधे और तेज रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच और सुगम होगी। पितृ पर्वत से उज्जैन बायपास तक नया फोरलेन, सिंहस्थ से पहले तैयार होगी इंदौर-उज्जैन की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बल रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं से मालगाड़ियों की आवाजाही भी अधिक व्यवस्थित होगी, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। यात्रा समय में कमी, समयपालन में सुधार और भीड़भाड़ में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।  इन स्वीकृतियों को मध्य प्रदेश के रेल ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है  बेहतर संपर्क और विश्वसनीय सेवा से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।  

जनगणना से विकास की योजना बनती है, सीएम ने इस प्रक्रिया की अहमियत पर जोर दिया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में जनगणना – 2027 के प्रथम चरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा किआदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इसके क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, देश के लिए आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा और भारत सरकार की अपेक्षाओं एवं उद्देश्यों की सफल पूर्ति करेगा।राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनगणना-2027 की प्रक्रिया पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसके आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है। आज जब भारत विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला राष्ट्र है, तब यह जनगणना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व की भी है। जनगणना का कार्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे व्यापक और निर्णायक अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिल फैसला लिया है। देश में आखिरी बार 1931 में सामाजिक स्तर की जनगणना की गई थी। उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया में गांवों, मंजरों-टोलों के साथ-साथ बेचिराग गांवों की स्थिति के आंकलन की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता बताई।  जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही विकसित होते हैं। इसलिए जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, यह राज्य की संवेदनशीलता, प्रशासन की विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की चुनौतियां भिन्न हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाते हुए समयबद्ध रूप से जनगणना की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता का केन्द्र मैदानी प्रशासनिक अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर और कमिश्नर्स से जनगणना कार्य को रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करते हुए जनगणना के सभी उद्देश्यों की समयसीमा में पूर्ति करने का आव्हान किया। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में उपस्थित प्रदेश के सभी कमिश्नर-कलेक्टरों से कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 6 मार्च तक चलेगा। उन्होंने आगामी महाशिवरात्रि और होली जैसे त्योहारों के दृष्टिगत शांति समितियों के साथ बैठक कर अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन की अधिकारियों को दी बधाई  मुख्यमंत्री ने भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जी-रामजी की योजना क्रियान्वयन के लिए बेहतर प्रबंध किए जाएं। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है। किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं और कार्यों के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। ग्रीष्मकालीन फसलों में राज्य सरकार उड़द और मूंगफली को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। मक्का की फसलों से भी किसान लाभान्वित हो रहे हैं। नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने में विभिन्न जिले स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखें। प्रदेश में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री ने  खनिज, पंजीयन, आबकारी के अंतर्गत राजस्व संग्रहण लक्ष्यों को प्राप्त करना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। पहला चरण 1 मई से शुरू होगा  बता दें देश की जनगणना 2027 का पहला चरण, जिसे हाउसलिस्टिंग (मकान सूचीकरण) और आवास जनगणना कहा जाता है, 1 मई 2026 से शुरू होगी। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। इस चरण में 30 दिनों की अवधि में घरों की स्थिति और सुविधाओं की गणना की जाएगी। इसके बाद जगणना का दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा।  

सिविलियन ड्रोन क्षेत्र में भारत पिछड़ा, MP में क्रांति के बावजूद रुचि नहीं, ग्लोबल रैंक 13वीं

भोपाल  मध्यप्रदेश को ‘ड्रोन हब’ बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने ‘एमपी ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025’ लागू कर भारी-भरकम सब्सिडी के द्वार तो खोल दिए हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के शीर्ष राज्यों के मुकाबले मध्यप्रदेश में ड्रोन रजिस्ट्रेशन की रफ्तार बेहद सुस्त है। जहां महाराष्ट्र 8,210 ड्रोन के साथ देश में टॉप पर है, वहीं मध्यप्रदेश में यह संख्या महज 480 पर सिमटी हुई है। नीति में ‘बम्पर ऑफर’, पर रुझान कम राज्य सरकार ने अपनी नई पॉलिसी में निवेशकों के लिए रेड कार्पेट बिछाया है। नीति के तहत ड्रोन निर्माण के लिए 40% तक की कैपिटल सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपए तक) और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए 2 करोड़ रुपए तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद, पंजीकरण के मामले में मध्यप्रदेश देशभर में 13वें स्थान पर पिछड़ गया है। यहां तक कि हरियाणा (2,179) और आंध्र प्रदेश (1,876) जैसे राज्य भी हमसे कहीं आगे निकल चुके हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कोसों पीछे हम सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 38,475 ड्रोन रजिस्टर्ड हैं। इसमें मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 2% भी नहीं है। महाराष्ट्र: 8,210 (नंबर 1) तमिलनाडु: 5,878 (नंबर 2) तेलंगाना: 3,657 (नंबर 3) मध्य प्रदेश: 480 (नंबर 13) किसानों और युवाओं के लिए बड़े वादे, पर रजिस्ट्रेशन का ‘पेच’ सरकार का दावा है कि ड्रोन नीति से कृषि क्षेत्र में क्रांति आएगी और 8,000 नए रोजगार पैदा होंगे। ‘नमो ड्रोन दीदी’ और ‘सीखो-कमाओ योजना’ के जरिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और रिमोट पायलट लाइसेंस को लेकर जागरूकता की कमी के कारण लोग आधिकारिक पंजीकरण (UIN) कराने से कतरा रहे हैं। ड्रोन पॉलिसी 2025 की 3 बड़ी बातें: भारी सब्सिडी: नए निवेश पर 40% सब्सिडी और लीज रेंट पर 25% की छूट। पेटेंट में मदद: घरेलू पेटेंट के लिए 5 लाख और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता। ट्रेनिंग इंसेंटिव: ड्रोन ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को 8,000 रुपए प्रति माह का स्टाइपेंड। वजन के आधार पर होता है ड्रोन का रजिस्ट्रेशन ‘ड्रोन नियम 2021’ के तहत भारत में ड्रोन का वर्गीकरण और पंजीकरण उनके वजन (Weight) के आधार पर किया जाता है। क्या अन्य प्रकार के ड्रोन भी रजिस्टर्ड होते हैं? इसके संबंध में जानकारी नीचे दी गई है: सैन्य ड्रोन (Military Drones): ड्रोन नियम 2021 स्पष्ट रूप से उन ड्रोन पर लागू नहीं होते जो भारत की नौसेना, थल सेना या वायु सेना के स्वामित्व में हैं या उनके द्वारा उपयोग किए जाते हैं। इनके लिए सैन्य प्रोटोकॉल के तहत अलग व्यवस्था होती है। शोध और विकास (R&D): अनुसंधान, विकास और परीक्षण के उद्देश्य से उपयोग किए जाने वाले ड्रोन को ‘टाइप सर्टिफिकेट’, ‘विशिष्ट पहचान संख्या’ (UIN) और ‘रिमोट पायलट लाइसेंस’ की आवश्यकता से छूट दी गई है, बशर्ते वे निर्धारित ग्रीन जोन में संचालित हों। प्रतिबंधित वस्तुएं: ड्रोन नियमों के तहत हथियारों, गोला-बारूद या किसी भी प्रकार के खतरनाक सामान की ढुलाई पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

स्थापना दिवस समारोह की तैयारियां पूरी, राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम में रावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे

राज्य निर्वाचन आयोग का स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  रावत होंगे मुख्य अतिथि भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का 32वां स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को सुबह 11 बजे से आयोजित किया जायेगा। समारोह के मुख्य अतिथि भारत निर्वाचन आयोग के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ओ.पी. रावत होंगे।  रावत “वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देंगे। पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त  आर परशुराम “स्थानीय निर्वाचन में सुधार की चुनौतियाँ” विषय पर उद्बोधन देंगे। दैनिक भास्कर, स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष  नरेन्द्र कुमार सिंह “जमीनी लोकतंत्र में पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव” विषय पर और एडवोकेट  सिद्धार्थ सेठ स्थानीय निर्वाचन में न्यायालयीन सबक” विषय पर उद्बोधन देंगे। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग  दीपक सिंह ने बताया है कि समारोह में आयोग के निर्वाचन साहित्य-ई बुक का विमोचन और प्रेक्षा मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया जायेगा। साथ ही स्थानीय निर्वाचन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र भी वितरित किये जायेंगे।  

भोपाल में करोड़ों के विकास कार्यों की शुरुआत, राज्यमंत्री गौर ने किया शिलान्यास

भोपाल के विकास की नई उड़ान: राज्यमंत्री  गौर ने किया साढ़े 5 करोड़ से अधिक लागत के विकासकार्यों का भूमिपूजन साकेत नगर में 2 करोड़ 29 लाख, बाइपास से संपदा कॉलोनी तक 3 करोड़ 36 लाख की लागत से तक बनेगी सड़क भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शुक्रवार को गोविंदपुरा क्षेत्र में करीब साढ़े 5 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाली दो मुख्य सड़कों का भूमिपूजन किया। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि क्षेत्र के विकास में स्थानीय जनप्रतिनिधि महती भूमिका निभा रहे हैं। हर कार्य को उत्कृष्टता के साथ पूर्ण करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि लगातार मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साकेत नगर में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं और ऐसे विकासकार्य निरंतर जारी रहेंगे। राज्यमंत्री गौर ने पंचवटी मार्केट से साकेत नगर एरिया में 1.7 किलोमीटर के रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया, इसकी अनुमानित लागत 2 करोड़ 29 लाख रुपए है। उन्होंने वार्ड 62 में पिरिया मोहल्ला संपदा कॉलोनी में 60 मीटर चौड़ाई वाली 1.3 किलोमीटर की सड़क का भी भूमिपूजन किया, जिसकी अनुमानित लागत 3 करोड़ 36 लाख रुपए है। कार्यक्रम में पार्षद ममता विश्वकर्मा,  अर्चना परमार,  छाया ठाकुर,  नीरज सिंह,  संतोष ग्वाला,  मनोज विश्वकर्मा,  नरेंद्र ठाकुर, समाजसेवी  करनेल सिंह,  लीलाधर मालवीय,  सुरेंद्र द्विवेदी,  अनिल गुप्ता सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और रहवासी मौजूद रहे।  

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