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योगी-मोदी की रैली पर वरुण का निशाना:बोले- रात में कर्फ्यू और दिन में लाखों की भीड़

पीलीभीत। पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी लगातार अपनी ही पार्टी पर हमलावर हैं। सोमवार को एक बार फिर उन्होंने ट्वीट करके सीएम योगी के प्रदेश में नाइट कर्फ्यू लगाने के फैसले पर निशाना साधा। वरुण ने कहा- रात में कर्फ्यू लगाना और दिन में रैलियों में लाखों लोगों को बुलाना, ये सामान्य जनमानस की समझ से परे है। उत्तर प्रदेश की सीमित स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के मद्देनजर हमें ईमानदारी से ये तय करना पड़ेगा कि हमारी प्राथमिकता भयावह ओमिक्रॉन को फैलने से रोकना है, चुनावी शक्ति प्रदर्शन करना नहीं। वरुण पहले भी कर चुके हैं वार कुछ दिन पहले वरुण ने सीएम योगी को संविदा कर्मियों की मांगों को लेकर घेरा था। उन्होंने सीएम को एक पत्र लिखकर कहा था कि आपने संविदा कर्मियों को उनकी मांगों को लेकर आश्वासन दिया था। इसके ढाई महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। वरुण 19 दिसंबर को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे संविदा कर्मियों के कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहां उनके बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनी थीं। UPTET पेपर लीक मामले में वरुण ने सरकार से पूछा था कि आखिर रसूखदारों पर एक्शन कब होगा? उन्होंने कहा था कि ज्यादातर शिक्षण संस्थानों के मालिक राजनीतिक रसूखदार हैं। कृषि कानून और किसानों के मुद्दे पर भी वरुण सरकार के लिए कई बार असहज स्थिति उत्‍पन्‍न कर चुके हैं। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार को कई बार लेटर लिखा था। इसमें किसानों की मांग को पूरा करने की बात कही थी। वरुण गांधी ने एक किसान के फसल जलाने पर भी BJP को घेरा था। उन्होंने लिखा था कि यूपी के किसान श्री समोध सिंह पिछले 15 दिनों से अपनी धान की फसल को बेचने के लिए मंडियों में मारे-मारे फिर रहे थे, जब धान बिका नहीं तो निराश होकर इसमें स्वयं आग लगा दी।। केंद्र के निजीकरण प्रस्ताव का भी कर चुके हैं विरोध वरुण ने केंद्र सरकार के बैंकों के निजीकरण का भी विरोध किया था। वहीं अमेजन, फ्लिपकार्ट पर भी हमला किया था। उन्होंने कहा था कि किसानों के हित में केवल मैं खड़ा हुआ था। इसके विरोध करने की बाकी किसी भी सांसद की हिम्मत नहीं हुई थी। गन्ना मूल्य को लेकर परोक्ष रूप से राजनीतिक दलों पर कटाक्ष करते हुए वरुण ने कहा कि टिकट कटने के डर से पार्टी के नेता ऐसे मुद्दे नहीं उठाते।

क्या खत्म हो गया PM मोदी का करिश्मा … रैली के लिए भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सरकारी अफसरों पर

कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा क्या खत्म हो गया है। 28 दिसंबर को कानपुर में रैली के लिए भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सरकारी अफसरों के कंधों पर है। 16 विभागों को 70 हजार की भीड़ जुटाने का फिक्स टारगेट दिया गया है। यह विभाग अपनी अलग-अलग योजनाओं के 70 हजार लाभार्थियों को पीएम के कार्यक्रम में लेकर आएंगे। इन्हें लाने और ले जाने से लेकर खाने-पीने का इंतजाम भी सरकारी अफसर ही करेंगे। यानी पीएम मोदी के कार्यक्रम में दिखने वाली भीड़ भी सरकारी ही होगी। कार्यक्रम में 70 हजार लोगों की भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी डीएम विशाख जी. को दी गई है। उन्होंने सीएमओ से लेकर समाज कल्याण अधिकारी, आईटीआई के प्रिंसिपल, केडीए सचिव, परियोजना अधिकारी डूडा समेत 16 अलग-अलग विभागों को लाभार्थियों को लाने का लक्ष्य दिया है। सभी विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के लाभार्थियों को लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। विभाग की ओर से ही 2250 बसों का इंतजाम किया गया है। विभागों के चपरासी से लेकर बाबू और अफसरों को बस से लाभार्थियों को लाने और वापस निर्धारित स्थान पर पहुंचाने के साथ ही खाने का भी इंतजाम करने की जिम्मेदारी दी गई है। मोदी के आगमन पर इन सभी विभागों में कामकाज ठप रहेगा। अगर किसी भी विभाग ने इसमें लापरवाही की तो संबंधित अफसर या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही गई है। चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग, कृषि, उद्यान विभाग, खाद्य एवं रसद, समाज कल्याण, बैंक, विद्युत विभाग, श्रम विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, पंचायती राज, स्किल डेवलपमेंट, नगर निगम, डूडा और केडीए समेत 16 विभागों से 70 हजार लाभार्थियों को बुलाया गया है। योगी-मोदी की सभा में पहले भी जुटाई गई है भीड़ CM योगी की रविवार को प्रयागराज के लीडर प्रेस मैदान में जनसभा थी। इसमें भीड़ जुटाने के लिए जिले के आला अफसर पिछले तीन-चार दिनों से लगे थे। सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वह ज्यादा से ज्यादा संख्या में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचें। इसमें शिक्षा विभाग, एनआरएलएम, डूडा, समाज कल्याण, ग्राम्य विकास विभाग जैसे सभी विभागों को शामिल किया गया था। सुल्तानपुर में 16 नवंबर को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने पीएम मोदी पहुंचे थे। मोदी की सभा में शामिल होने के लिए करीब 2 लाख लोगों को लाने का लक्ष्य रखा गया था। इतने लोगों को लाने-ले जाने के लिए सुल्तानपुर के DM ने 2 हजार बसें उपलब्ध कराई थीं। 19 नवंबर को महोबा जिले में PM नरेंद्र मोदी की रैली थी। आसपास के जिलों से भीड़ लाने के लिए 1,600 रोडवेज बसों का जुगाड़ किया गया था। डीएम मनोज कुमार ने परिवहन विभाग से बसों की मांग की थी।

सिद्धू को मनाने के मूड में नहीं हाईकमान,CM चन्नी को भी मिलने से रोका

जालंधर। नवजोत सिद्धू का रवैया देख कांग्रेस हाईकमान भी अड़ गया है। सिद्धू को साफ संदेश भेज दिया गया है कि उनकी हर जिद अब पूरी नहीं होगी। इसी वजह से सिद्धू के इस्तीफे के 2 दिन बीतने के बाद भी हाईकमान ने उनसे बात नहीं की। यह देख अब पंजाब में सिद्धू के प्रधान बनने से जोश में दिख रहे विधायक और नेता भी उनका साथ छोड़ने लगे हैं। कैप्टन का तख्तापलट करते वक्त सिद्धू के साथ 40 विधायक थे, अब वे अकेले पड़ गए हैं। उनके समर्थन में सिर्फ रजिया सुल्ताना ने ही मंत्रीपद छोड़ा। उनके करीबी परगट सिंह डटकर सरकार के साथ खड़े हैं। बुधवार रात मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी चंडीगढ़ से पटियाला जाने की तैयारी में थे। ऐन वक्त पर यह दौरा टल गया। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें इनकार कर दिया। चुनाव की घोषणा में सिर्फ 3 महीने बचे हैं। ऐसे में उन्हें सरकार के काम पर फोकस करने को कहा गया है। हाईकमान सिर्फ परिणाम चाहता है ताकि पंजाब में अगली सरकार कांग्रेस की बन सके। सिद्धू को मनाने के लिए हाईकमान के कहने पर CM चरणजीत चन्नी ने नवजोत के ही करीबी मंत्री परगट सिंह और अमरिंदर राजा वडिंग की कमेटी बना दी है। वे पहले 2 बार सिद्धू से मिल चुके हैं, लेकिन आगे कोई बात नहीं हुई है। सिद्धू की शर्तें मानी तो सुपर-CM पर लगेगी हाईकमान की मुहर कांग्रेस ने पंजाब में पहला अनुसूचित जाति का CM बनाया है। पंजाब में 32% अनुसूचित जाति का वोट बैंक है। इसी को निशाना बना चन्नी सीएम बन गए। अगर सिद्धू की शर्तें मान ली तो DGP और AG को हटाना पड़ेगा। ऐसा हुआ तो सरकार कमजोर पड़ जाएगी। हाईकमान ने ऐसा करवा दिया तो सिद्धू के सुपर CM बनने पर मुहर लग जाएगी। ऐसे में चन्नी को लेकर विरोधी मुद्दा बनाकर कांग्रेस का यह दांव फेल कर देंगे। इसी वजह से सिद्धू के बिना बात किए अचानक इस्तीफा देने पर कांग्रेस हाईकमान ने उनसे दूरी बना ली है। हाईकमान ने नया प्रधान ढूंढने को कहा सिद्धू के अड़ियल रवैए को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने अब पंजाब में नए प्रधान के संकेत दे दिए हैं। कांग्रेस के पर्यवेक्षक हरीश चौधरी बुधवार सुबह ही चंडीगढ़ पहुंच गए थे। इसके बाद उन्होंने कुछ नेताओं से मुलाकात और बातचीत की। चर्चा यही है कि सिद्धू के इस्तीफा वापस न लेने की सूरत में नया प्रधान बना दिया जाए। मंत्री पद पाने से आखिरी समय में चूके कुलजीत नागरा इसके बड़े दावेदार हैं। चर्चा पूर्व CM बेअंत सिंह के परिवार से जुड़े सांसद रवनीत बिट्‌टू की भी है। यह भी संभव है कि सुनील जाखड़ को वापस प्रधान बना दिया जाए ताकि उनकी भी नाराजगी दूर हो सके। सिद्धू की मनमानी नहीं आ रही रास सिद्धू भले ही मुद्दों की बात कर रहे हों, लेकिन उनके तरीके को लेकर कांग्रेस के भीतर ही नाराजगी है। सिद्धू ने इस्तीफा तब दिया, जब मंत्री चार्ज संभाल रहे थे। यह टाइमिंग सबको नागवार गुजरी। पहले इसके बारे में किसी से बात नहीं की। सीधे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। जब सब पूछते रहे कि नाराजगी की वजह क्या है तो सोशल मीडिया पर फिर वीडियो पोस्ट कर दिया। CM चन्नी ने भी इस ओर इशारा किया कि वे पार्टी प्रधान हैं, परिवार में बैठकर बात करते। सिद्धू का यह रवैया किसी को रास नहीं आ रहा। जाे अब तक साथ थे, वो अलग होते चले गए कैप्टन अमरिंदर के विरोध के बावजूद सिद्धू पंजाब कांग्रेस प्रधान बने। इसमें अहम रोल मौजूदा डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा और मंत्री तृप्त राजिंदर बाजवा का रहा। नई सरकार बनी तो अब वे सिद्धू का साथ छोड़ गए। परगट सिंह सिद्धू के करीबी थे, उन्होंने भी सिद्धू के समर्थन में इस्तीफा न देकर किनारा कर लिया। अमरिंदर राजा वडिंग को मंत्री बनाने में सिद्धू ने खूब लॉबिंग की, वे मंत्री बन गए तो अब सिद्धू का सपोर्ट करके नहीं, बल्कि मध्यस्थ बनकर काम कर रहे हैं। इसी बड़ी वजह सिद्धू के अचानक लिए जाने वाले फैसले हैं। पहले कैप्टन और अब सिद्धू के चक्कर में टिकट न कटे, इसलिए विधायक और नेता कूदकर सरकार के पाले में चले गए हैं। इस बार अपने स्टाइल से खुद झटका खा गए सिद्धू नवजोत सिद्धू के अचानक फैसले लेने का स्टाइल समर्थकों को खूब रास आता रहा है। उनके बयान से लेकर हर बात पर अड़ जाने की खूब चर्चा रही। सिद्धू की जिद के आगे हाईकमान को कैप्टन को हटाना पड़ा। चरणजीत चन्नी का नाम भी सिद्धू ने ही आगे किया था। चन्नी सीएम बने तो अब सिद्धू की सुनवाई नहीं हो रही। संगठन प्रधान होने के बावजूद वे खुद उसकी सीमा लांघ गए। सब कुछ सार्वजनिक तरीके से कर रहे है। सीएम चन्नी ने भी यही बात कही थी कि अगर उन्हें कोई एतराज है तो वे बैठकर बात कर सकते हैं। वे जिद्दी नहीं हैं, फैसला बदला जा सकता है। हालांकि, सिद्धू चर्चा नहीं बल्कि सीधे मनमाफिक फैसला चाहते हैं, जिसे हाईकमान मानने को तैयार नहीं है।

महाराष्ट्र : खड़से ने दी बीजेपी को करारी चोट, जलगांव में BJP को बड़ा झटका

मुंबई। महाराष्ट्र के जलगांव जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को ज़बर्दस्त झटका लगा है. जलगांव में बीजेपी में पार्टी के अंदर का असंतोष खुल कर सामने आ गया है. जिले के मुक्ताईनगर और बोधवड नगरपालिका से जुड़े 11 नगरसेवक (Corporators) आज (24 सितंबर, शुक्रवार) शिवसेना (Shiv Sena) में शामिल हो रहे हैं. ये सभी के सभी कॉर्पोरेटर्स मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) की मौजूदगी में शिवबंधन बांधेंगे. प्राप्त जानकारी के मुताबिक जलगांव जिले के 11 नगरसेवकों ने बीजेपी को छोड़ने का फ़ैसला किया है. जलगांव जिले के ये सारे नगरसेवक एकनाथ खडसे (Eknath Khadse) के समर्थक बताए जाते हैं. याद दिला दें कि एकनाथ खडसे पहले बीजेपी में ही थे. जब राज्य में देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) की सरकार बनी थी, तब वे नाराज हो गए थे. वे अपने आप को मुख्यमंत्री के पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार समझ रहे थे, क्योंकि वे फडणवीस सरकार बनने से पहले नेता प्रतिपक्ष भी थे. बाद में बीजेपी छोड़कर वे एनसीपी (NCP) में चले गए. जब से वे एनसीपी में गए हैं तब से बीजेपी को किसी ना किसी तरह से नुकसान पहुंचाते आ रहे हैं. फिलहाल उनके खिलाफ जमीन घोटाले के मामले में ईडी की जांच शुरू है. एकनाथ खडसे बीजेपी को पहुंचा रहे हैं नुकसान, ईडी की कार्रवाई का बदला? महाराष्ट्र के पूर्व राजस्व मंत्री रहे एकनाथ खडसे पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा है. ईडी ने पुणे के जमीन घोटाले से जुड़े मामले में उन पर कार्रवाई करते हुए उनकी 5.73 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर ली है. उनका एक बैंक अकाउंट भी सील किया गया है. उस खाते में कुल 86 लाख रुपए डिपॉजिट थे. इसके अलावा ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उनका लोनावाला का एक बंगला, जलगांव में तीन फ्लैट और जमीन भी जब्त कर लिए हैं. ये सारी प्रॉपर्टी एकनाथ खडसे, उनकी पत्नी मंदाकिनी खडसे और दामाद गिरीश चौधरी के नाम पर है. एकनाथ खडसे ने जब बीजेपी को छोड़ कर एनसीपी ज्वाइन किया था तब कहा था कि अगर मेरे पीछे ईडी लगाई गई तो मैं सीडी निकालूंगा (बीजेपी से जुड़े लोगों के भ्रष्टाचार का खुलासा करूंगा). लेकिन ईडी की जांच शुरू भी हो गई, लोग खडसे की सीडी का इंतजार ही कर रहे हैं. खडसे सीडी तो नहीं ला पाए, लेकिन बीजेपी को नुकसान पहुंचाने का कोई मौका नहीं चूकते हैं. 11 नगरसेवकों की बीजेपी से छुट्टी करवा कर शिवसेना में शामिल करवाना खडसे के बदले की ही एक मिसाल है.

क्या मठ की अथाह संपत्ति बनी महंत नरेंद्र गिरि की मौत की वजह?

महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. उनका शव उनके कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला था. उनके कमरे से एक सुसाइड नोट (Suicide Note) भी बरामद हुआ है. वहीं महंत की आत्‍महत्या को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं. महंत नरेंद्र गिरी की मौत को बाघंबरी गद्दी मठ (Baghambari Math) और निरंजनी अखाड़े (Niranjani Akhara) की अकूत धन-संपदा और वैभव को लेकर भी जोड़ा जा रहा है. बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े से जुड़े लोग हत्‍या की भी आशंका जता रहे हैं. बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े की अकूत धन-संपदा (Property Dispute) को लेकर विवादों का रिश्ता पुराना रहा है. मीडिया में आई तमाम रिपोर्ट के मुताबिक, मठ और अखाड़े की सैकड़ों बीघे जमीनें बेचने, सेवादारों और उनके परिवारीजनों के नाम मकान, जमीन खरीदने को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और उनके करीबी शिष्य आनंद गिरि के बीच विवाद लंबे समय से रहा है. मंहत नरेंद्र गिरि के अधीन संपत्तियां: बाघंबरी मठ: प्रयागराज के अल्लापुर इलाके में बाघंबरी गद्दी और मठ है, जो करीब 5 से 6 बीघे जमीन में है. यहां निरंजनी अखाड़े के नाम एक स्कूल और गौशाला भी है. दारागंज में भी अखाड़े की जमीन है. प्रयागराज में हनुमान मंदिर जिसे संगम तट पर लेटे हुए हनुमान जी के नाम से जाना जाता है, वो भी इसी बाघंबरी मठ का ही मंदिर है. जहां प्रयागराज और संगम आने वाले सभी श्रद्धालु मत्था जरूर टेकते हैं. मांडा (प्रयागराज) में 100 बीघा और मिर्जापुर के महुआरी में भी 400 बीघे से ज्यादा की जमीन बाघंबरी मठ के नाम है. मिर्जापुर के नैडी में 70 और सिगड़ा में 70 बीघा जमीन अखाड़े की है. प्रयागराज और आसपास के इलाकों में निरंजनी अखाड़े के मठ, मंदिर और जमीन की कीमत 300 करोड़ से ज्यादा की है, जबकि हरिद्वार और दूसरे राज्यों में संपत्ति की कीमत जोड़े तो वो हजार करोड़ के पार है. निरंजनी अखाड़े की कुंभ नगरी उज्जैन और ओंकारेश्वर में 250 बीघा जमीन, आधा दर्जन मठ और दर्जनभर आश्रम हैं. कुंभ नगरी नासिक में 100 बीघा से अधिक जमीन, दर्जनभर आश्रम और मंदिर हैं. बड़ोदरा, जयपुर, माउंटआबू में भी करीब 125 बीघा जमीन, दर्जन भर मंदिर और आश्रम हैं. हरिद्वार स्थित मुख्यालय के अधीन दर्जनभर मठ-मंदिर हैं. नोएडा में मंदिर और जमीन है तो वहीं वाराणसी में मंदिर और आश्रम के साथ करोड़ों की जमीन है.

पीएम मोदी के बर्थडे पर बना कीर्तिमान, महज 9 घंटे में 2 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगी

नई दिल्ली। भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुक्रवार को महज 9घंटे में ही कोरोना वायरस के खिलाफ 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बनाया है। अभी भी वैक्सीनेशन जारी है। यानी यह आंकड़ा अभी और ऊपर जाएगा। इससे पहले दोपहर डेढ़ बजे तक ही एक करोड़ से ज्‍यादा डोज लगाए जा चुके थे। वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि हर सेकेंड 527 से ज्‍यादा डोज लगाए जा रहे हैं। हर घंटे 19 लाख से ज्‍यादा डोज दिए जा रहे हैं। राज्यों को 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज मुहैया कराए गए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन के 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध कराए गए है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी वैक्सीन के 6.17 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध हैं। चौथे दिन एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगे इससे पहले 27 अगस्त, 31 अगस्त और 6 सितंबर को देश में एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगाए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को आह्वान किया था कि देश में वैक्सीनेशन ड्राइव को रफ्तार देनी चाहिए। यह प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन का सबसे अच्छा तोहफा होगा। भाजपा ने इस मौके पर देशभर में अपनी यूनिट्स को निर्देश दिया था कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन का डोज लगाया जाए। 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने PM मोदी के जन्मदिन पर 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान शुरू किया है, जो 7 अक्टूबर तक चलेगा। पार्टी इस दौरान मोदी के सार्वजनिक जीवन में दो दशक पूरा करने का भी जश्न मनाएगी। इसमें वह वक्‍त भी शामिल है, जिस दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे।

MP : केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की पत्नी की चप्पलें समर्थकों ने धोयीं

दमोह। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 71वें जन्म दिवस को ‘समर्पण सेवा दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। दमोह में शुक्रवार को पौधरोपण करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री की पत्नी की चप्पल में लगी कीचड़ को साफ करने के लिए एक साथ कई समर्थक आगे आ गए। समर्थकों ने केंद्रीय मंत्री की पत्नी के पैरों से चप्पल निकाली और कीचड़ साफ कर लौटा दीं। पूरे मामले का वीडियो भी सामने आया है। दमोह के बेलाताल तालाब में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल अपनी पत्नी पुष्पलता सिंह के साथ शामिल हुए। उनकी पत्नी ने भी पौधरोपण किया, लेकिन इस दौरान उनकी चप्पलों में कीचड़ लग गया। वहां मौजूद मंत्री के समर्थकों ने जैसे ही कीचड़ देखा तो तत्काल चप्पलों को पैरों से निकालकर अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद पास के ही कुएं से पानी निकाला। चप्पलों पर पानी डालकर हाथ से साफ किया। हालांकि जिस समर्थक ने चप्पल से कीचड़ साफ किया, उसने ग्लब्स पहना था। पटेल बोले- सभी पौधे जरूर लगाएं स्वच्छता पर केंद्रीय मंत्री पटेल ने कहा कि तीन बिंदुओं पर सबको काम करना चाहिए। जल, जीवन मिशन समय से पहले पूरा हो जाना चाहिए। इसमें एक-एक व्यक्ति को तय करना होगा, इसमें सिस्टम ऐसा बने कि इसे समाज संचालित करे। दूसरा ODF प्लस। तीसरा संकल्प होना चाहिए। अपने जन्मदिन या पितरों की याद में वृक्ष जरूर लगाएं।

MP : उपचुनाव के सर्वे ने उड़ाए बीजेपी के होश, तीनों विधानसभाओं में हार का खतरा, देखें कहां क्या तस्वीर

भोपाल। मध्य प्रदेश में 1 लोकसभा और 3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, लेकिन उपचुनाव से पहले कराए गए सर्वे के नतीजों ने सत्ताधारी पार्टी के होश उड़ा दिए हैं. बीजेपी के सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि पार्टी विधानसभा की तीनों सीटों पर चुनाव हार सकती है. सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि बढ़ती महंगाई से परेशान जनता बीजेपी को चुनावों में हार का स्वाद चखा सकती है. उपचुनावों को लेकर किये गए सर्वे से पार्टी नेताओं के होश उड़े हुए हैं. यही वजह है कि पार्टी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इन क्षेत्रों में मोर्चा संभालने उतार दिया है. खुद सीएम भी उपचुनाव वाले इन क्षेत्रों में जनदर्शन यात्रा निकाल कर जनता के सामने अधिकारियों की क्लास लगाकर उन पर तत्काल कार्रवाई भी कर रहे हैं, लेकिन इन सब के बावजूद सर्वे का डर पार्टी को सता रहा है, हालांकि सर्वे के मुताबिक बीजेपी खंडवा लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में जीत हासिल कर सकती है, जबकि विधानसभा उपचुनावों के नतीजे पार्टी के लिए किसी बुरे सपने के तरह हो सकते हैं. 4 मुद्दे बिगाड़ सकते हैं खेल पार्टी सूत्रों के मुताबिक चार सीटों पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी को जिन वजहों से नुकसान हो सकता है वे महंगाई, कोरोना काल के चलते रोजगार का खत्म होना , हालात संभालने में सरकार की नाकामी और बेरोजगारी ये मुद्दे बीजेपी पर भारी पड़ने वाले हैं.उपचुनाव के सर्वे ने उड़ाए बीजेपी के होश, तीनों विधानसभाओं में हार रही है पार्टीभितरघात का भी खतरा रैगांव विधानसभा सतना की रैगांव विधानसभा सीट बीजेपी से दिवंगत विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन से खाली हुई थी. यहां से उनके बड़े पुत्र पुष्पराज बागरी टिकट मांग रहे हैं, वहीं उनकी छोटी बहू वंदना बागरी भी दावेदारी कर रही हैं. इसके अलावा भाजपा नेत्री रानी बागरी और नगर पंचायत अध्यक्ष राकेश कोरी भी दौड़ में है. दूसरी तरफ संघ से जुड़े सत्यनारायण बागरी और प्रतिमा बागरी भी दावेदारी जता रहे हैं. एक सीट के लिए इतने सारे लोगों का दावा अंतर्विरोध की वजह बन सकती है जिससे पार्टी को नुकसान हो सकता है. बीजेपी यहां सहानुभूति वोट की उम्मीद रखे हुए है लेकिन बागरी परिवार के बीच मचा द्वंद पार्टी पर भारी पड़ सकता है. जोबट विधानसभा सीएम शिवराज सिंह चौहान यहां जनदर्शन यात्रा निकालने के साथ ही इमोशनल कार्ड भी खेल चुके हैं. मुख्यमंत्री ने अपने हेलीकॉप्टर में आदिवासी को सवार करा कर यह संदेश देने की कोशिश की यह सिर्फ शिवराज में ही संभव है कि जो व्यक्ति मोटरसाइकिल पर ना बैठा हो वह सीधे हेलीकॉप्टर में बैठ गया. कांग्रेस ने इस पर फोटो जारी कहा ये वो आदिवासी हैं जो बीजेपी और संघ से जुड़े हैं. इस सीट पर आदिवासी संगठन जयस भी बीजेपी का खेल बिगाड़ेगा. कांग्रेस अगर यहां कांतिलाल भूरिया की पसंद का उम्मीदवार उतार देती है बीजेपी की मुश्किलें और बढ़ेंगी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की की तमाम कोशिशों के बावजूद भी भाजपा यहां पर जीत हासिल नहीं कर पाई है. पिछले चुनाव में कांग्रेस की कलावती भूरिया ने यह सीट जीती थी, उनका कोरोना से निधन होने की वजह से ही यह सीट खाली हुई है. पृथ्वीपुर विधानसभा यह सीट पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह के दबदबे वाली मानी जाती रही है, लेकिन कोरोना में उनके निधन से यह सीट भी खाली हो गई. कांग्रेस चाहती है कि उनके परिवार से किसी को टिकट देकर सहानुभूति वोट बटोरे वहीं शिवराज ने जनदर्शन के दौरान यहां पर घोषणाओं का पिटारा खोलते हुए कई घोषणाएं की थीं जो कि पूरी नहीं की गई थीं. बीजेपी की अनीता नायक 2013 और 2018 तक विधायक रहीं लेकिन वे ज्यादा सक्रीय नहीं रही. इस बार बीजेपी से गनेणी लाल दावेदारी जता रहे हैं, लेकिन सत्ताधारी दल को 5 बार के विधायक रहे बृजेन्द्र सिंह राठौर के परिवार से लड़ना है, जिनको कांग्रेस के गढ़ रहे इस इलाके में सहानुभूति वोट भी भरपूर मिलने की उम्मीद है. खण्डवा (लोकसभा) इस लोक सभा सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा है बीजेपी सांसद नंदकुमार सिंह चौहान यहां से सांसद थे लेकिन कोरोना काल में उनका निधन होने से यह सीट खाली है. यहां पर बीजेपी को सहानुभूति वोट मिलने की उम्मीद है, लेकिन नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस को टिकिट दिए जाने का विरोध कर रहे हैं. उनके अलावा वर्तमान जिला अध्यक्ष भी दौड़ में शामिल हैं. बीजेपी के सामने यहां पर उम्मीदवार घोषित करने को लेकर असमंजस की स्थिति है बावजूद इसके खंडवा लोकसभा सीट पर बीजेपी की स्थिति कांग्रेस की तुलना में मजबूत है. कांग्रेस भी लोकसभा की इस सीट पर पूरा दमखम लगाना चाहती है. इसके लिए पार्टी ने आने वाले दिनों में उपचुनाव वाली सीटों पर कमलनाथ दौरा प्लान किया है. कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ही पार्टियां इन उपचुनावों में सहानुभूति वोटों के सहारे ही है और जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं. टिकिट के दावेदार भी भोपाल से लेकर दिल्ली दरबार तक जोर लगा रहे हैं. भीतरघात दोनों ही पार्टी की समस्या है बावजूद इसके महंगाई , बेरोजगारी और कोरोना महामारी को संभालने में विफल रहने के आरोप बीजेपी पर भारी पड़ सकते हैं, जबकि कांग्रेस के पास खोने को ज्यादा कुछ नहीं है जबकि बीजेपी की लड़ाई अपनी साख बचाने की भी होगी.

PM मोदी के जन्मदिन पर टि्वटर पर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस ट्रेंड, लोग बोले- दो करोड़ नौकरियां कहां हैं?

नई दिल्ली। पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस नाम का टॉपिक ट्रेंड हो रहा है। जिसमें उनसे ‘दो करोड़ नौकरियां कहां हैं’ पूछा जा रहा है। सवाल पूछने वालों की फेरहिस्त में युवाओं के साथ-साथ कई राजनीतिक दिग्गज और रिटायर्ड IAS अधिकारी भी हैं। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पीएम पर कटाक्ष करते हुए लिखा है कि देश अपने पीएम को राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस की शुभकामनाएं दे रहा है। राम तीरथ (@IESramteerath) नाम के यूजर ने एक अखबार की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अगस्त महीने में 15 लाख से ज्यादा लोगों की नौकरियां गईं। ग्रेजुएट बड़ी संख्या में बेरोजगार हैं। वहीं गगनदीप कौर (@ikaur_deep) नाम की यूजर लिखती हैं जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए हैं भारत रोजगार मुक्त देश हो गया है। मोदी आपको एक और मास्टर स्ट्रोक के लिए साधुवाद। तो वहीं रिटायर्ड IAS अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए पूछा है कि 2 करोड़ नौकरियां कहां हैं। प्रधानमंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल कर तमाम फनी मीम्स भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी नेता रहे किर्ती आजाद (@KirtiAzaad) ने हैशटैग राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस का इस्तेमाल करते हुए लिखा, नहीं चाहिए अच्छे दिन, बुरे दिन ही लौटा दो प्लीज। वहीं प्रतीक मिश्रा (@Prateek79077318) नाम के यूजर लिखते हैं कि सरकार रोजगार के नाम पर पैसा कमाती है, सबसे पहले वह कम सीटों वाली भर्तियों की जानकारी प्रकाशित करवाती है, इसके बाद आवेदन शुल्क के नाम पर 600 से 2000 रुपये लिए जाते हैं, फिर सेंटर्स के बारे में विकल्प पूछते हैं और आखिर में सेंटर को शहर से बाहर कर देते हैं। ट्विटर पर ट्रेंड के बीच मुकाबला: ट्विटर पर भी ट्रेंड के बीच एक तरह की रेस चल रही है, कभी राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस ट्रेंड कर रहा है तो कभी हैप्पी बर्थडे मोदी जी ट्रेंड में आगे निकल जा रहा है। इसके अलावा जुमला दिवस और श्री नरेंद्र मोदी का ट्रेंड भी लगातार रेस में बना हुआ है। यूथ कांग्रेस ने किया था ऐलान: पीएम मोदी के जन्मदिन को यूथ कांग्रेस द्वारा ​’राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस’ मनाने का ऐलान किया गया था। इसकी तैयारियों में यूथ कांग्रेस पहले से जुटी हुई थी। इसके लिए नुक्कड़ नाटक किए जाएंगे, देश के कई शहरों में पद यात्रा निकालने का भी ऐलान किया गया है। इधर, NDA ने कांग्रेस की इस तैयारी पर कहा है कि वह अपनी बेरोजगारी दूर करने के लिए बेरोजगार दिवस मना रही है।

विश्लेषण : एक झटके में क्यों बदल गई पूरी बीजेपी सरकार? क्या फेल हो गया गुजरात मॉडल ?

अहमदाबाद। गुजरात में बीजेपी सरकार के नए मंत्रिमंडल ने शपथ ले ली है. नई कैबिनेट में पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार वाले एक भी मंत्री को जगह नहीं दी गई है. बीजेपी ने सभी पुराने मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. यानी एक तरह से आगामी विधानसभा चुनावों से क़रीब एक साल पहले बीजेपी ने गुजरात में पूरी सरकार को बदल दिया है. विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी ने ये फेरबदल गुजरात में दरकती सियासी ज़मीन को रोकने और देशभर के बेजीपी नेताओं को संदेश देने के लिए किया है. सवाल ये भी उठ रहा है कि जिस गुजरात मॉडल का प्रचार बीजेपी ने देशभर में किया है, क्या अब वो कमज़ोर पड़ गया है? नए मंत्रियों में से चुनिंदा के पास ही सरकार में रहने का अनुभव है. इनमें से राघवजी पटेल 90 के दशक में शंकरसिंह वघेला सरकार में मंत्री रह चुके हैं, जबकि कृष्णानाथ राणा राज्य की नरेंद्र मोदी सराकर में मंत्री थे. राजेंद्र त्रिवेदी आनंदीबेन पटेल की सरकार में मंत्री थे. क्यों हुआ इतना बड़ा फ़ेरबदल? वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक जतिन देसाई मानते हैं कि बीजेपी को लग रहा था कि गुजरात में उसका मज़बूत किला दरक रहा है और अगर तुरंत कुछ नहीं किया गया तो हालात हाथ से बाहर हो जाएँगे. देसाई कहते हैं, “रूपाणी और उनकी टीम का प्रदर्शन बहुत ख़राब था और बीजेपी नेताओं को लगा कि इसके दम पर चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है. बीजेपी ने सरकार विरोधी लहर को कम करने और लोगों की नाराज़गी से बचने के लिए सरकार को बदला है.” वहीं बीबीसी गुजराती सेवा के संपादक अंकुर जैन कहते हैं, “इसके दो बड़े कारण हैं. पहला तो ये कि बीजेपी जनता को ये संदेश देना चाहती है कि अगर मंत्री भी काम नहीं कर करेंगे तो हम उन्हें भी हटा देंगे. आने वाले दिनों में हो सकता है कि बीजेपी इस बात को ज़ोर-शोर से जनता में उठाए कि पार्टी के लिए जनता पहले है और अपने नेता बाद में.” अंकुर कहते हैं, “भारतीय जनता पार्टी के लिए गुजरात मॉडल बेहद अहम है. नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने गुजरात में कई प्रयोग कर किए हैं. ऐसे में दूसरा कारण ये हो सकता है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह बाक़ी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को ये संदेश दे रहे हों कि अगर वो भी काम ठीक से नहीं करेंगे, तो उन्हें भी हटाया जा सकता है.” अंकुर जैन के मुताबिक़, “अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने गुजरात में इतना बड़ा फेरबदल करके देशभर के बीजेपी नेताओं और मंत्रियों को ये संदेश दे दिया है कि पूर्ण इम्यूनिटी या सुरक्षा किसी के पास नहीं हैं. पार्टी जब चाहे, जिसे चाहे हटा सकती है. यूपी या दूसरे राज्यों के सीएम को ये संदेश देने की कोशिश की गई होगी कि अगर आप पार्टी की नीति या लाइन के हिसाब से काम नहीं कर रहे हैं तो आपको भी बदला जा सकता है.” ख़तरे को भांप लिया है अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने? गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है. बीजेपी शीर्ष नेतृत्व इस बात को अच्छी तरह से समझता है कि अगर गुजरात में सियासी ज़मीन दरकी, तो वह केंद्र में उनकी सत्ता पर भी सवाल उठेंगे. विश्लेषक मानते हैं कि गुजरात में लोगों के असंतोष और नाराज़गी से नेतृत्व वाकिफ़ था और ऐेसे में पार्टी ने बड़ा क़दम उठाते हुए पूरी सरकार को ही बदल दिया है. अंकुर जैन कहते हैं, “कोरोना महामारी के दौरान बीजेपी सरकार ने अपनी रही-सही साख भी गँवा दी थी, ख़ासकर कोविड प्रबंधन को लेकर सरकार को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा. बीजेपा के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने इस ख़तरे को भाँप लिया था. उन्हें लगने लगा था कि अगर ऐसे ही सब चलता रहा, तो 2022 के चुनाव में पार्टी को गुजरात में हार का सामना भी करना पड़ सकता है.” वहीं जतिन देसाई कहते हैं, “सरकारी आँकड़ों के मुक़ाबले वास्तविकता में कहीं अधिक लोगों की मौत कोरोना की वजह से हुई है और इसे लेकर गुजरात के लोगों में भारी असंतोष है. बीजेपी पूरी सरकार को हटाकर उस असंतोष को ही ख़त्म करने का प्रयास कर रही है.” “एंटी इन्कम्बेंसी और सरकार के ख़राब प्रदर्शन की वजह से लोगों में बीजेपी के ख़िलाफ़ जो भावना बन रही थी, उसे रोकने के लिए सरकार को बदला गया है. ख़ासकर मोदी और शाह के लिए गुजरात बेहद अहम है, ऐसे में पार्टी यहाँ कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है.” कुछ महीने पहले केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल में फ़ेरबदल हुआ था और अन्य पिछड़ा वर्ग से बड़ी तादाद में मंत्रियों को रखा गया था. प्रधानमंत्री मोदी की नई सरकार में 12 दलित मंत्री हैं और 27 ओबीसी मंत्री हैं. जतिन देसाई कहते हैं, “जिस तरह यूपी चुनाव को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार में ओबीसी मंत्रियों को जगह दी गई है उसी तरह गुजरात की नई सरकार में भी जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है.” गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है. पार्टी यहां कोई जोख़िम उठाना नहीं चाहती है गुजरात में सीएम और मंत्रियों को बदले जाने से पहले ही ये चर्चाएँ चलने लगी थीं कि सरकार में फ़ेरबदल हो सकता है. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ना सिर्फ़ मुख्यमंत्री को बदला बल्कि पूरी कैबिनेट को ही बदल दिया गया. क्या गुजरात मॉडल नाकाम हो गया है, इस सवाल पर देसाई कहते हैं, “गुजरात के विकास मॉडल की बात होती है, लेकिन अगर आप आँकड़ें देखेंगे तो सामाजिक विकास के सूचकांकों में गुजरात देश के बाक़ी राज्यों के मुक़ाबले काफ़ी पीछे है.” ”बीजेपी हाई कमान को ये लगता रहा था कि गुजरात उनका गढ़ है और वहाँ पार्टी का कुछ नहीं हो सकता. लेकिन अब पार्टी ने गुजरात के गढ़ में अपने सभी कमांडरों को हटा दिया है इससे ये तो बिल्कुल स्पष्ट है कि गुजरात में बीजेपी में और सरकार में सबकुछ ठीक नहीं है. पार्टी ने अपने अंदरूनी आकलन में ये भी स्वीकार किया होगा कि यहाँ क़िला दरक गया है.” समूची सरकार को हटाने के बाद ये सवाल उठा है कि ऐसे करके बीजेपी सरकार … Read more

‘हैप्पी बर्थडे, मोदी जी’, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को दी कुछ इस अंदाज में बधाई

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (Prime Minister Narendra Modi) यानी 17 नवंबर को अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं. साल 1950 में इसी तारीख को उनका जन्म हुआ था और वे इस बार 72वें साल में प्रवेश कर रहे हैं. उम्र के इस पड़ाव पर आकर भी नरेंद्र मोदी ऊर्जावान बने हुए हैं. वहीं इस मौके पर देशभर के तमाम नेता उन्हें जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं. कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी है. इस बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Congress MP Rahul Gandhi) ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए ट्वीट किया है. राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, “Happy birthday, Modi ji.” वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया (Social Media) पर कई लोग उनकी लंबी उम्र की कामना कर रहे हैं. गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भी ट्वीट कर पीएम को उनके खास दिन की बधाई दी है. अमित शाह ने अपने ट्वीट में लिखा, “मोदी जी ने सुरक्षा, गरीब-कल्याण, विकास व ऐतिहासिक सुधारों के समांतर समन्वय का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है. पीएम मोदी जी के संकल्प व समर्पण ने देशवासियों में एक नई ऊर्जा व आत्मविश्वास पैदा किया है, जिससे आज देश नित नए कीर्तिमान स्थापित कर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मिदन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता ऐतिहासिक बनाने में जुटे हैं. इसके लिए कई तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं. संस्कृति मंत्रालय 17 सितंबर से प्रधानमंत्री को मिले उपहारों और स्मृति-चिन्हों की ई-नीलामी आयोजित करने जा रहा है. इस नीलामी से मिलने वाली राशि नमामि गंगे मिशन को दी जाएगी. बीजेपी इस दिन को बनाना चाहती है एतिहासिक वहीं बीजेपी आज ज्यादा से ज्यादा संख्या में Covid-19 वैक्सीनेशन (Covid-19 Vaccination) का रिकॉर्ड बनाना चाहती है. इस रिकॉर्ड को पूरा करने के लिए पार्टी ने हेल्थ वॉलेंटियर्स को यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया है कि आज एक दिन में ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके. भारत ने इससे पहले एक दिन में एक करोड़ से ज्यादा COVID-19 टीके लगाने का रिकॉर्ड कायम किया है.

MP : पब में फैशन शो पर बवाल, हिंदू जागरण मंच की दबिश, छुपकर भागीं मॉडल्स

इंदौर। इंदौर के एक पब में आयोजित फैशन शो में बवाल हो गया। हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने शो को बंद करा दिया। मॉडल्स को आनन-फानन में पब के पीछे के रास्ते से निकालना पड़ा। हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पब में अश्लीलता परोसी जा रही है। लव जिहाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनकी शिकायत पर विजयनगर पुलिस मौके पर पहुंची और आयोजकों को थाने ले आई। यहां पर भी हिंदू संगठनों ने हंगामा करना जारी रखा। पुलिस ने आयोजक फैज अहमद गौरी, कोरियोग्राफर आदित्य कोतवाल, डिजाइनर अरबाज खान, मेकअप मैन और पब मालिक पर FIR दर्ज कर ली है। शहर के विजयनगर के शो-शॉ पब में बुधवार रात नौ बजे फैज अहमद गौरी ने हाई हील्स नाम से फैशन शो का आयोजन किया था। शो शुरू होने के पहले ही हिंदू जागरण मंच से जुड़े सुमित हार्डिया, सोनू कल्याणे सहित अन्य लोग यहां पहुंचे। इस दौरान जमकर हंगामा किया गया। मौके पर पहुंचे युवक और युवतियों को पीछे के रास्ते से बाहर करना पड़ा। काफी देर तक हंगामा होने के बाद यहां टीआई तहजीब काजी पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई की बात करते हुए आयोजक को थाने ले जाने की बात कही। थाने पर भी हंगामा हिंदूवादी संगठन के लोग थाने पहुंच गए। उन्होंने यहां पर भी हंगामा किया। उनका आरोप था कि पब में इस तरह के आयोजन कर हिंदू संस्कृति को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने अश्लीलता परोसने और लव जिहाद को बढ़ावा देने की बात कही। यहां अफसरों को केस दर्ज करने की बात का आश्वासन देकर मामले को शांत कराया गया। आयोजक के खिलाफ केस दर्ज टीआई तहजीब काजी ने बताया कि मामले में शो के कोरियाग्राफर आदित्य कोतवाल, डिजाइनर अरबाज खान, फोटोग्राफर फैज अहमद गोरी, मैनेजर लारेंस, पब मालिक भूपेंद्र रघुवंशी और मेकअप मैन कशिश पर धारा 181 ओर 151 के तहत कार्रवाई की गई है।

राहुल गांधी ने कहा- भाजपा वाले झूठे हिन्दू हैं, ये धर्म की दलाली करते हैं

नई दिल्ली . कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक बार फिर से BJP पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि भाजपा ने जब GST लागू किया तो दुकानदारों के घर में लक्ष्मी डाली या निकाली? कांग्रेस ने जब मनरेगा लागू किया तब लोगों के घर में लक्ष्मी डाली या निकाली? राहुल ने कहा कि हमने RTI लागू करके करोड़ों लोगों के हाथों में दुर्गा की शक्ति डाली। उन्होंने कहा कि भाजपा वाले अपने आपको हिंदू पार्टी कहते हैं और पूरे देश में लक्ष्मी और दुर्गा पर आक्रमण करते हैं। ये झूठे हिन्दू हैं। ये हिन्दू धर्म का प्रयोग करते हैं। ये धर्म की दलाली करते हैं। राहुल ने ये बातें महिला कांग्रेस के स्थापना दिवस पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कही। संघ और भाजपा की विचारधारा से कभी समझौता नहीं करूंगा आज देश में RSS वाली बीजेपी की सरकार है। इनकी विचारधारा और हमारी विचारधारा दोनों अलग हैं। या एक विचारधारा देश पर राज करेगी या दूसरी विचारधारा देश पर राज करेगी। कांग्रेस का कार्यकर्ता होने के नाते मैं बाकी दूसरी विचारधाराओं के साथ समझौता कर सकता हूं, लेकिन भाजपा और संघ की विचारधारा से कभी समझौता नहीं कर सकता। गांधीजी, सावरकर और गोडसे की विचारधारा में क्या अंतर है? ये एक बड़ा और गहरा सवाल है। RSS की विचारधारा ने उस हिन्दू की छाती में 3 गोली क्यों मारी? बीजेपी और संघ के लोग कहते हैं कि वो हिन्दू पार्टी हैं। पिछले सौ-दो सौ साल में किसी एक व्यक्ति ने हिन्दू धर्म को समझा हो और उसे अपने प्रैक्टिस बनाई है तो उस व्यक्ति का नाम महात्मा गांधी है। इसे हम भी मानते हैं और भाजपा-RSS के लोग भी मानते हैं। अगर महात्मा गांधी ने हिन्दू धर्म को समझा और उन्होंने पूरी जिंदगी हिन्दू धर्म को समझने में लगा दी तो RSS की विचारधारा ने उस हिन्दू की छाती में तीन गोली क्यों मारीं? जिसको पूरी दुनिया एक उदाहरण मानती है। नेल्सन मंडेला से लेकर मार्टिन लूथर किंग तक कहते थे कि महात्मा गांधी एक उदाहरण थे और गांधी ने अहिंसा को सबसे अच्छे तरीके से समझा और सिखाया। राहुल ने लक्ष्मी और दुर्गा का मतलब भी बताया राहुल ने लक्ष्मी और दुर्गा का मतलब भी बताया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं से पूछा कि लक्ष्मी का मतलब क्या है? किसी ने नारी शक्ति तो किसी ने धन से जोड़कर जवाब दिया। इस पर राहुल ने बताया कि जम्मू में मैंने किसी से ये सवाल पूछा तो उन्होंने बताया, लक्ष्मी वो शक्ति है जो घर में पैसा लाती है। गलत इंटरप्रिटेशन। लक्ष्मी शब्द लक्ष्य से आता है। लक्ष्य को जो शक्ति पूरा करती है उसे लक्ष्मी कहा जाता है। राहुल ने फिर दुर्गा का मतलब बताया। उन्होंने कहा- देखिए हमारा धर्म जो है बड़ा लॉजिकल है। दुर्गा शब्द आता है दुर्ग से। दुर्ग का मतलब किला। दुर्गा मतलब वो शक्ति जो रक्षा करती है। मतलब साफ है। जो लक्ष्य को पूरा करे वो लक्ष्मी और जो रक्षा करे वो दुर्गा।  लक्ष्मी और दुर्गा को भाजपा और कांग्रेस की योजनाओं से जोड़ा राहुल ने लक्ष्मी और दुर्गा को आज की राजनीति से जोड़ते हुए कहा- राजनेता का काम दुर्गा (रक्षा) और लक्ष्मी (लक्ष्य) की शक्तियों को हर व्यक्ति तक पहुंचाने का होता है। बिना भेदभाव के हर व्यक्ति के घर में दुर्गा मतलब रक्षा, लक्ष्मी मतलब लक्ष्य पूरा करने की शक्ति डालने का काम हर राजनेताओं का होता है। मैंने कुछ गलत बोला? ठीक पटरी पर चल रही है गाड़ी? अब सवाल पूछता हूं… जब मोदी जी ने नोटबंदी की तब उन्होंने हमारी माताओं-बहनों के घर में लक्ष्मी की शक्ति बढ़ाई या कम की? कम की न…। जब नरेंद्र मोदी जी ने किसानों पर तीन कानून लागू किए उनसे लक्ष्य पूरे करने वाली शक्ति उन्होंने छीनी या उनको दी?…छिनी। जब जीएसटी लागू किया। छोटे दुकानदारों के घर में उन्होंने लक्ष्मी और दुर्गा डाली या निकाली? और जब कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा लागू किया तो करोड़ों लोगों के घर में लक्ष्मी की शक्ति डाली या निकाली? जब हमने आरटीआई लागू किया तो करोड़ों लोगों के हाथों में दुर्गा की शक्ति डाली है या नहीं? जब हमने संविधान की लड़ाई लड़ी? वन मैन वन बोर्ड दिया तो हमने दुर्गा की शक्ति बढ़ाई या कम की? लक्ष्मी की शक्ति ज्यादा की या कम की? …तो ये हो क्या रहा है? वो पूरे देश में लक्ष्मी और दुर्गा पर आक्रमण करते हैं वो अपने आपको हिन्दू पार्टी कहते हैं। और पूरे देश में लक्ष्मी और दुर्गा पर आक्रमण करते हैं। जहां ये जाते हैं। कहीं ये लक्ष्मी को मारते हैं तो कहीं ये दुर्गा को मारते हैं। और फिर कहते हैं कि हम हिन्दू हैं। ये किस प्रकार के हिन्दू हैं? ये झूठे हिन्दू हैं। ये हिन्दू धर्म का प्रयोग करते हैं। ये हिन्दू धर्म की दलाली करते हैं। मगर ये हिन्दू नहीं हैं। राहुल ने भीड़ से पूछा…बात समझ आई..क्लियर थी? मीडिया को भी घेरा, कहा-टीवी पर ये मेरा भाषण नहीं दिखाएंगे राहुल ने अपने संबोधन में मीडिया को भी घेरा। उन्होंने कहा कि अभी जो मैं भाषण दे रहा हूं। यह टीवी पर चल ही नहीं सकता। यहां मीडिया के कई साथी हैं। उनसे पूछिए क्या ये भाषण उनके चैनल पर चलेगा? मैं बताता हूं, ये चल ही नहीं सकता। इस पर भीड़ में ठहाके गूंजने लगे। महात्मा गांधी के आसपास इसलिए रहती थीं महिलाएं.. राहुल गांधी ने आगे बताया कि महात्मा गांधी की तस्वीरों में आप लोगों ने देखा होगा कि उनके आसपास दो-तीन महिलाएं होती थीं। क्या आपने RSS प्रमुख मोहन भागवत के आसपास किसी महिला को देखा है? ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस महिलाओं का सम्मान करती है और उन्हें मंच देती है। मोदी और RSS देश को महिला प्रधानमंत्री नहीं दे सकते। कांग्रेस ने ऐसा किया है। कांग्रेस के निशान हाथ को हर धर्म से जोड़ा राहुल ने स्थापना दिवस पर महिला कांग्रेस का नया लोगो जारी जारी किया। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से इसका मतलब भी पूछा और आखिरी में खुद इसके बारे में बताया। राहुल ने कहा आपने भगवान शिव, महावीर, बुद्ध, गुरुनानक, जीसस क्राइस्ट, साईं बाबा सबकी तस्वीरों में सामने हाथ होता है। मुस्लिम धर्म में चिह्न … Read more

CM शिवराज ने मंच से ही कर दिया भ्रष्ट अफसरों को सस्पेंड

टीकमगढ़. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj) मंगलवार को टीकमगढ़ और निवाड़ी के दौरे पर थे. ओरछा में उन्होंने राम राजा के दर्शन किये और पृथ्वीपुर में जनसभा भी की. अपने दौरे के दौरान शिवराज ने प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार करने पर जेरोन नगर पंचायत के पूर्व सीएमओ और उपयंत्री को निलंबित (Suspend) करने का ऐलान भरी सभा में मंच से ही कर दिया. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यहां जनदर्शन यात्रा के लिए आए थे. प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार की शिकायत उन्हें मिली थी. वो यहां सभा कर रहे थे उसी दौरान उन्होंने मंच से ही जेरोन नगर पंचायत के तत्कालीन सीएमओ उमाशंकर मिश्रा और उपयंत्री अभिषेक राजपूत तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दे दिये. जनदर्शन यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से गांव के लोगों ने शिकायत की थी. सीएम ने कमिश्नर को तत्काल प्रभाव से जांच करने के लिए कहा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा- भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. सीधा जेल भेजा जाएगा. पूरे मामले की EOW से जांच करायी जाएगी. जनता का पैसा खाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. सीएम ने जब निलंबन का ऐलान किया तो सभा में जुटी भीड़ ने ताली बजाकर स्वागत किया. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंगलवार को टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले के दौरे पर थे. मोहनगढ़ से पृथ्वीपुर तक उनकी जनदर्शन यात्रा थी. वो पहले ओरछा पहुंचे और रामराजा सरकार के दर्शन किये. दर्शन के बाद वो मोहनगढ़ रवाना हुए और जनदर्शन यात्रा शुरू की. उन्होंने लोगों से कोरोना का टीका लगवाने की अपील की.

यूपी में प्रियंका गाँधी के मास्टर स्ट्रोक से अन्य दलों में खलबली

लखनऊ। यूपी चुनाव को लेकर सभी पार्टियां ताल ठोक रही हैं. कांग्रेस कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के मास्टर स्ट्रोक से अन्य दलों में खलबली मच गयी है। अगले साल होने वाले UP विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव और UP प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली या अमेठी की किसी सीट से मैदान में उतर सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो प्रियंका, गांधी परिवार की पहली सदस्य होंगी जो विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। इससे पहले गांधी परिवार के सभी सदस्यों ने सिर्फ लोकसभा चुनाव लड़ा है। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका की पहली पसंद अमेठी है, क्योंकि वहां राहुल गांधी की हार का बदला लेने के लिए अमेठी में लोकसभा चुनावों की जमीन तैयार करेंगी, जिससे स्मृति ईरानी को 2024 के लोकसभा चुनावों में चुनौती दी जा सके। प्रशांत किशोर ने भी प्रियंका को दिया है सुझाव बीते दिनों लखनऊ में हुई मीटिंग में एडवायजरी कमेटी ने भी प्रियंका से कहा था कि उनके चुनाव मैदान में आने से कांग्रेस को UP में नई ताकत मिलेगी। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी प्रियंका को सुझाव दिया था कि उन्हें विधानसभा चुनाव में खुद मैदान में उतरना चाहिए। प्रियंका के चुनाव के लिए कांग्रेसियों ने कसी कमर प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ने या ना लड़ने को लेकर खुद कोई संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी के ऑफिस की तरफ से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए रायबरेली और अमेठी के डेटा जुटाए जा रहे हैं। रायबरेली या अमेठी ही क्यों? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के चुनाव हार जाने के बाद वहां गांधी परिवार का दबदबा कम हुआ है। वहीं, कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी की सेहत ठीक नहीं होने के चलते रायबरेली में भी गांधी परिवार का जनता से संपर्क कम हुआ है। ऐसे में प्रियंका के चुनाव लड़ने से अमेठी और रायबरेली क्षेत्र की जनता के साथ कांग्रेस के संबंधों को मजबूती मिल सकती है। रायबरेली और अमेठी बरसों से गांधी परिवार का गढ़ रहा है और प्रियंका इस रिश्ते को कमजोर नहीं होने देना चाहती हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद तो औपचारिक रूप से कह चुके हैं कि UP विधानसभा चुनाव में प्रियंका कांग्रेस का चेहरा होंगी। रायबरेली में अब तक सिर्फ 3 बार हारी है कांग्रेस रायबरेली में 1952 से लेकर 2019 तक लोकसभा चुनाव में सिर्फ तीन बार कांग्रेस हारी है। 1977, 1988 और 1996 में इस सीट पर कांग्रेस को हार मिली थी। इस सीट से फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी, शीला कौल, अरुण नेहरू और सतीश शर्मा चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। अमेठी में 18 चुनाव में 16 बार कांग्रेस की जीत अमेठी में 17 लोकसभा और 2 उपचुनाव में कांग्रेस ने 16 बार जीत हासिल की है। सिर्फ तीन बार 1977, 1998 और 2019 में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में पहली बार कांग्रेस हारी थी। इसके बाद 1980 में संजय गांधी यहां से सांसद बने। संजय की मौत के बाद राजीव गांधी ने अमेठी की बागडोर संभाली। फिर 1999 में सोनिया गांधी ने चुनाव जीता। इसके बाद 2004, 2009 और 2014 में राहुल गांधी यहां से जीते , लेकिन 2019 में स्मृति ईरानी ने राहुल को हरा दिया था। कांग्रेस ने फंड जुटाने के लिए UP में नया तरीका भी निकाला है। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि जिसे भी टिकट चाहिए उसे 25 दिसंबर तक पार्टी फंड में 11 हजार रुपए जमा कराने होंगे। टिकट के लिए पहले आवेदन पत्र जमा करना होगा।

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