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टीएमसी ने सभी छह सीटों पर जीत का परचम लहरा, किया क्लीन स्वीप

बंगाल पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने क्लीन स्वीप किया है। टीएमसी ने सभी छह सीटों क्रमश: सिताई, मदारीहाट, नैहाटी, हरोआ, मेदिनीपुर और तलदांगरा पर जीत का परचम लहरा है। इन सभी सीटों पर 13 नवंबर को मतदान हुआ था और 23 नवंबर को नतीजे घोषित किए गए। सभी छह सीटों के परिणाम सामने आ चुके हैं। सिताई सीट पर टीएमसी उम्मीदवार संगीता रॉय ने भाजपा के दीपक कुमार को 130636 वोटों के बड़े अंतर से हराया है। संगीता रॉय को कुल 165984 और भाजपा उम्मीदवार को कुल 35348 वोट मिले हैं। मदारीहाट सीट पर टीएमसी उम्मीदवार जय प्रकाश टोप्पो ने भाजपा उम्मीदवार राहुल लोहार को 28168 वोटों से हराया है। टीएमसी उम्मीदवार को 79186 और भाजपा उम्मीदवार को कुल 51018 मिले हैं। नैहाटी सीट पर टीएमसी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर टीएमसी उम्मीदवार सतन डे ने भाजपा उम्मीदवार रूपक मित्रा को 49277 वोटों के बड़े अंतर से हराया है। सतन डे को 78772 और रूपक मित्रा कुल 29495 वोट मिले। हरोआ सीट पर टीएमसी उम्मीदवार शेख रबी उल इस्लाम ने ऑल इंडिया सेक्यूलर फ्रंट के उम्मीदवार पियारूल इस्लाम को 131388 वोटों के बड़े अंतर से हराया है। जबकि 13570 वोटों के साथ भाजपा उम्मीदवार बिमल दास तीसरे स्थान पर रहे। टीएमसी उम्मीदवार को 157072, ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट के उम्मीदवार को 25684 वोट मिले। मेदिनीपुर सीट से टीएमसी उम्मीदवार सुजय हाजरा ने जीत दर्ज की है। सुजय ने भाजपा उम्मीदवार सुभाजीत रॉय (बंटी) को 33996 वोटों के अतंर से हराया है। टीएमसी प्रत्याशी को 115104 और भजापा प्रत्याशी को 81108 वोट मिले। तलदांगरा सीट पर भी टीएमसी उम्मीदवार फाल्गुनी सिंघबाबू ने जीत दर्ज की है। सिंघबाबू ने भाजपा उम्मीदवार अनन्या रॉय 34082 वोटों से हराया है। अनन्या रॉय को कुल 64844 वोट मिले हैं। जबकि, टीएमसी प्रत्याशी को 98926 वोट मिले। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने उम्मीदवारों की जीत से गदगद हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मां-माटी-जनता को विनम्र हृदय से प्रणाम। जय बांग्ला।”

देश और प्रदेश की जनता प्रधानमंत्री मोदी के साथ हैं, मतदाताओं के ध्रुवीकरण के प्रयासों को जनता ने नाकाम कर दिया: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रदेश की जनता ने हमें अभूतपूर्व जीत दी है। उन्होंने आगे कहा कि देश और प्रदेश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं। उनके दिए नारे ‘एक हैं तो सुरक्षित हैं’ के अनुरूप सभी वर्गों और समुदायों के लोगों ने एकजुट होकर हमें वोट दिया। यह महायुति, सीएम एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम अजित पवार और रामदास अठावले की जीत है, यह एकता की जीत है। विपक्ष की ओर से धर्म के आधार पर मतदाताओं के ध्रुवीकरण के प्रयासों को जनता ने नाकाम कर दिया। प्रदेश की जनता को हमारी सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर मिला है। जिसका परिणाम यह है कि जनता ने हमें बड़े बहुमत के साथ सेवा करने का एक और अवसर दिया है। महाराष्ट्र के अगले सीएम के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के चेहरे पर कोई विवाद नहीं होगा। यह पहले दिन से तय था कि चुनाव के बाद तीनों पार्टियों के नेता एक साथ बैठेंगे और इस पर फैसला करें। फैसला सभी को मान्य होगा, इस पर कोई विवाद नहीं है। जो होगा उचित निर्णय होगा। देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि मैंने पहले कहा था कि मैं आधुनिक अभिमन्यु हूं और चक्रव्यूह तोड़ना जानता हूं। मुझे लगता है कि इस जीत में मेरा योगदान छोटा है, यह हमारी टीम की जीत है। लोगों ने एकनाथ शिंदे को असली शिवसेना के रूप में स्वीकार कर लिया है। वहीं जनता ने अपने जनादेश से अजित पवार की एनसीपी को असली माना है। हम इस जीत के लिए प्रदेश की जनता का आभार जताते हैं। संजय राउत के बयान पर प्रतिक्रिया करते हुए उन्होंने तंज कसा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने झारखंड में जीत हासिल की है। वहां चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष हुआ। वहां चुनाव आयोग ने अच्छा काम किया। वहां ईवीएम इतनी मजबूत थी कि उसे हैक नहीं किया जा सका और महाराष्ट्र में हमें बहुत बड़ी जीत मिली है। यहां ईवीएम पक्षपाती हो गई। यहां लोकतंत्र की हत्या कर दी गई है। कभी-कभी आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत होती है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भारी बहुमत की ओर अग्रसर है। वहीं झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार किया है और सत्ता में लगातार दूसरी बार लौटने में कामयाब रही है। महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन 226 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं विपक्ष महाविकास अघाड़ी (एमवीए) 288 सदस्यीय विधानसभा में 54 सीटों पर आगे है। झारखंड में शुरू में काफी कड़ी टक्कर देखने को मिली लेकिन हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 41 के बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है और 55 सीटों पर बढ़त बना ली। वहीं एनडीए 25 सीटों पर आगे चल रहा है।

कांग्रेस और महा विकास आघाडी की करारी हार के बाद कोई वरिष्ठ नेता मुख्यालय नहीं पहुंचा, छाया सन्नाटा

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के नतीजों के दिन, चार जून को कांग्रेस मुख्यालय स्थित पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक के कमरे में नेताओं का जमघट लगा था और एक तरह से जश्न का माहौल था, लेकिन इसके करीब छह महीनों बाद 23 नवंबर को इस कमरे में वीरानी छाई हुई थी। यह वीरानी सिर्फ एक कमरे में नहीं थी, बल्कि लगभग समूचे मुख्यालय में थी और इसकी वजह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी और उसके गठबंधन की करारी हार थी। कोई वरिष्ठ नेता पार्टी मुख्यालय नहीं पहुंचा पिछले कुछ चुनावों से यह देखा गया है कि नतीजों वाले दिन पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता कांग्रेस मुख्यालय ‘24 अकबर रोड’ स्थित वासनिक के कमरे में जमा होते हैं और वहीं पर पत्रकारों के साथ उनका संवाद भी होता है, लेकिन शनिवार को ऐसा कुछ नहीं था। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के रुझानों में कांग्रेस और महा विकास आघाडी (एमवीए) के पिछड़ने के बाद पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता मुख्यालय नहीं पहुंचा और दोपहर 12 बजे तक तस्वीर साफ होने पर कार्यकर्ताओं-समर्थकों की बची-खुची उम्मीद भी खत्म हो गई तथा वे भी मुख्यालय से रवाना होने लगे। कांग्रेस मुख्यालय पहुंचने वाले वाले कुछ नेताओं में पार्टी की सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत शामिल थीं। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे दिवंगत अहमद पटेल की पुत्री मुमताज पटेल भी टेलीविजन चैनलों को प्रतिक्रिया देती दिखाई दीं। पार्टी कवर करने वाले पत्रकार प्रतिक्रिया के लिए वरिष्ठ नेताओं की राह देखते रहे। एक मीडियाकर्मी ने कहा, ‘‘अभी 12 बज रहे हैं, सुबह छह बजे से यहां हूं और अब तक वे बड़े चेहरे यहां नहीं दिखे जो अक्सर यहां आते हैं। महाराष्ट्र की हार के कारण यह स्वाभाविक भी लगता है।” कार्यकर्ताओं के चेहरों पर छाई मायूसी कांग्रेस मुख्यालय में सिर्फ वरिष्ठ नेताओं के कमरे ही नहीं खाली नहीं थे, बल्कि पार्टी मुख्यालय के बाहर, प्रांगण और कैंटीन में भी आम दिनों की तरह ही थोड़ी-बहुत हलचल थी। पार्टी कार्यकर्ताओं के चेहरे पर निराशा साफ देखी जा सकती थी। इस बीच कुछ कार्यकर्ता आपसी बातचीत में ‘‘ईवीएम में खेल होने” की बात करते सुने जा सकते थे। कांग्रेस की कैंटीन में भी बालूशाही, लड्डू और रसगुल्ले जैसी मिठाइयां बनाकर रखी हुई थीं, लेकिन शायद इनके उतने खरीददार नहीं थे, जिसकी उम्मीद कैंटीन चलाने वालों को रही होगी। पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘‘हरियाणा के बाद एक बार फिर से हमारी उम्मीदें टूटी हैं। झारखंड के नतीजों से थोड़ी राहत जरूर मिली है। काश दोनों राज्यों में ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार बनती।”

मुख्यमंत्री सोरेन ने पहला इंटरव्यू दिया, इस जीत और प्रचार के दौरान आई दिक्कतों के बारे में बात की

रांची, झारखंड झारखंड विधानसभा चुनाव के जारी मतगणना के बीच एक बात स्पष्ट हो गई है कि राज्य में एकबार फिर झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन की सरकार बनने जा रही है। राज्य की 81 विधानसभा सीटों में से गठबंधन के प्रत्याशी फिलहाल 50 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रहे हैं। ऐसे में इस सफलता का श्रेय राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुशल रणनीति को दिया जा रहा है। राज्य की चुनावी तस्वीर स्पष्ट होने के बाद मुख्यमंत्री सोरेन ने पहला इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने इस जीत और प्रचार के दौरान आई दिक्कतों के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि प्रचार के दौरान उन्होंने इतने भाषण दिए कि कई बार लगता था जैसे गले में अंदर खून बह रहा हो। जीत का श्रेय मतदाताओं को देते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि हमें पहले से ही पता था कि यह चुनाव बहुत कठिन होने वाला है,इसलिए हमने जमकर तैयारी कर रखी थी और हम अपनी बात लोगों तक पहुंचाने में सफल रहे। इसके अलावा इस जीत के लिए उन्होंने अपनी पत्नी कल्पना सोरेन की मेहनत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंईयां सम्मान योजना का फायदा भी गठबंधन को मिला। घुसपैठ और हिंदुत्व समेत भाजपा के सभी मुद्दों की हवा निकलने पर उन्होंने कहा कि हमने लोगों के बीच अपने विकास कार्य बताए साथ ही भाजपा के हर सवाल का जवाब भी दिया। जिस पर लोगों ने भरोसा किया। आदिवासी वोट भाजपा के साथ नहीं जाने का श्रेय सोरेन ने अपने पिता शिबू सोरेन को दिया। ‘इस बार हम एक से भले दो थे’ इंटरव्यू के दौरान जब हेमंत सोरेन से पूछा गया कि आपने ये सब कैसे किया, तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘हम लोगों ने पहले से ही होमवर्क कर रखा था, क्योंकि हमें पता था कि यह लड़ाई बहुत कठिन होने जा रही है। इतनी बड़ी टीम के साथ हम लोगों ने बहुत ग्राउंड लेवल पर जाकर काम किया। अच्छा टीम वर्क था, हमलोगों ने सभी चीजों को डिलीवर किया, हमें लोगों तक जो मैसेज पहुंचाना था, उसे हम पहुंचाने में सफल रहे। वैसे भी आपने लोकसभा चुनाव में देखा ही था कि हम लोगों के स्टेट में किस तरह से मैसेज का मूवमेंट होता है। उस समय तो मैं जेल में था, अगर उस समय भी मैं अगर बाहर होता तो रिजल्ट कुछ और होता। उस समय भी वन मैन आर्मी टाइप से कल्पना सोरेन का मूवमेंट था। इस बार तो एक से भले दो थे हम लोग। तो इस बार चीजों को हमने थोड़ा ईस्ट-वेस्ट-नॉर्थ-साऊथ सबको अच्छा करेक्ट किया था। बहुत टफ जरूर रहा, पर रिजल्ट आपके सामने है।’ ‘हमने उनके हर एक सवाल का जवाब दिया’ भाजपा के हिंदुत्व, घुसपैठ और हिंदू-मुस्लिम करने के सवाल पर सोरेन ने कहा, ‘देखिए यह मैन टू मैन थिंकिंग है, लोग किनकी बात सुनते हैं और कैसे समझते हैं। हमारे और जनता के बीच टीचर और स्टूडेंट वाला रिश्ता है। क्लास का टीचर और स्टूडेंट में बहुत अच्छा कॉर्डिनेशन होना चाहिए। स्टेट को पिछले पांच साल से हम हैंडल कर रहे थे, तो लोगों ने हमें बहुत करीब से देखा है। ये रीजनल इलेक्शन था, तो बहुत सारी चीजें हैं इसमें। जितने लोग यहां पर मूवमेंट कर रहे थे, हमने उनके हर एक सवाल का जवाब पब्लिक को दिया। हमने लोगों को बताया कि ये लोग क्या कहते हैं, क्या गलत करते हैं। आप लोगों के जरिए भी लोगों को कई सारी चीजें पता चल जाती है।’ ‘पिता की वजह से आदिवासी वोट BJP को नहीं मिला’ आदिवासी समुदाय भाजपा के साथ नहीं गया, इसकी वजह पूछने पर सोरेन ने इसका श्रेय अपने पिता शिबू सोरेन को देते हुए कहा, ‘यह हमारे पिताजी की बहुत बड़ी सफलता रही है कि उन्होंने यहां के आदिवासी आबादी को एक करके रखा। यह चुनाव हमारे लिए भी बहुत कठिन था। यह पहली बार है जब किसी चुनाव प्रचार के दौरान पिताजी हमारे साथ नहीं थे। फिर भी लोगों ने हमारा साथ दिया। इसका मतलब है कि लोग उनका संघर्ष अब भी भूले नहीं हैं।’ ‘हमारी प्राथमिकता राज्य के गरीब लोगों पर था’ मंईयां योजना और महिला वोट मिलने को लेकर सोरेन ने कहा, ‘ये बात सही है कि हमारा राज्य सबसे गरीब राज्यों में से एक है, जहां लोगों के लिए एक-एक रुपया बहुत ज्यादा मायने रखता है और आज के दिन में जिस तरह से महंगाई चल रही है। ऐसे में हम लोगों ने पहले ही सोच रखा था कि हमारा फोकस यहां के लोगों की सोशल सिक्यूरिटी पर रहेगा और वही हमारी पहली प्राथमिकता थी। उसी का रिजल्ट भी हमें देखने को मिला।’

महाराष्ट्र में बंपर जीत के बाद तेवर में देवेंद्र फडणवीस, जनता ने महायुति को आशीर्वाद दिया, तोड़ा चक्रव्यूह

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों से भाजपा गदगद है। सूबे के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कई बड़े नेताओं के साथ मिलकर मीडिया से बात की है। उन्होंने कहा कि यह जीत एकता की है। हम सभी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा और जनता ने महायुति को आशीर्वाद दिया है। उन्होंने इस दौरान खुद को आधुनिक अभिमन्यु बताते हुए कहा कि हमने फेक नैरेटिव को तोड़ दिया है। फडणवीस ने कहा कि मैं आधुनिक युग का अभिमन्यु हूं और चक्रव्यूह को तोड़ना जानता हूं। डिप्टी सीएम ने कहा, ‘महाराष्ट्र के सभी लोगों ने मिलकर जीत दिलाई है। लाडली बहनों और लाडले भाइयों का हमें समर्थन मिला है। लोकसभा चुनाव में जिस फेक नैरेटिव को तैयार किया गया था, उसे हमने तोड़ दिया है।’ भाजपा लीडर ने कहा कि हमने उस चक्रव्यूह को खत्म कर दिया है, जिसे हमारे खिलाफ रचा गया था। इस चुनाव में एक धर्म विशेष के ध्रुवीकरण का प्रयास किया गया था, लेकिन वह कामयाब नहीं हुआ। हमें सभी साधु-संतों का भी आशीर्वाद मिला और उन्होंने एक रहने का संदेश दिया। हमारे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम अजित पवार और सभी छोटे दलों ने भी मिलकर काम किया। महायुति की यह जीत है। मैं पीएम नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं, जिनके कारण यह जीत मिली है। इसके अलावा होम मिनिस्टर अमित शाह जी का भी आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने यहां समय दिया और जीत दिलाई। अमित शाह और गडकरी को भी दिया फडणवीस ने धन्यवाद फडणवीस ने इस दौरान राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे नेताओं को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के नेताओं ने अपनी सीटों पर ही नहीं बल्कि वहां भी काम किया, जहां हमारे दोस्त लड़ रहे थे। इस चुनाव ने साफ कर दिया कि एक हैं तो सेफ हैं। फडणवीस ने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि मैं आधुनिक अभिमन्यु हूं और मैं चक्रव्यूह को तोड़ना जानता हूं। कैसे होगा सीएम का फैसला, फडणवीस ने बताया पूरा प्लान डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य में लोगों को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश सफल नहीं हुई। इस दौरान सीएम पद को लेकर पूछा गया तो देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अमित शाह जी ने पहले ही क्लियर कर दिया था कि तीनों दल बैठकर फैसला लेंगे। पहले दिन से ही यह बात तय थी। एकनाथ शिंदे की पार्टी को असली शिवसेना के रूप में लोगों ने स्वीकार कर लिया है। इसी तरह एनसीपी पर अजित पवार का दावा मजबूत हुआ है।

सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा- महायुति ने जो काम किया, जनता ने उस पर वोट दिया

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा शनिवार को हो रही है। इसी बीच रुझानों में भाजपा, शिवेसना (शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) वाला महायुति गठबंधन प्रचंड जीत की ओर बढ़ रहा है। महायुति 200 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। इस पर शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का पहला रिएक्शन सामने आया। उन्होंने महाराष्ट्र की जनता और महायुति के कार्यकर्ताओं को इस नतीजों के लिए बधाई दी। सीएम शिंदे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि हमने यहां ढाई साल में काम करके उन्हें जवाब दिया है। इसलिए, हमें लैंडस्लाइड जीत मिली है। सीएम एकनाथ शिंदे ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “आज मैं महाराष्ट्र के तमाम मतदाताओं को धन्यवाद करता हूं क्योंकि ये जीत ऐतिहासिक है। मैंने कहा था कि महायुति को भारी बहुमत मिलेगा। मैं अपनी लाडली बहनों, किसानों और सभी वर्गों का धन्यवाद करता हूं।” उन्होंने आगे कहा, ”महायुति ने जो काम किया है, जनता ने उस पर वोट दिया है। इसलिए महायुति को इतनी बड़ी जीत हासिल हुई है, मैं महाराष्ट्र की जनता और महायुति के सभी कार्यकर्ताओं को भी धन्यवाद देता हूं। उन्होंने बहुत ही बढ़िया काम किया है और महायुति को जिताया।” इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री पद को लेकर भी बयान दिया। सीएम शिंदे ने कहा कि अंतिम आंकड़े आने के बाद तीनों पार्टी के प्रमुख मिलकर तय कर लेंगे। जैसे हम यहां पर मिलकर चुनाव लड़े हैं, हम लोग बैठकर मुख्यमंत्री पद पर फैसला कर लेंगे। सीएम एकनाथ शिंदे ने महाविकास अघाड़ी पर निशाना साधते हुए कहा, ”ढाई साल तो उनका आरोप लगाने में गया। अभी कम से कम अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। लोगों को आरोप पसंद है या काम। हमने आरोपों का जबाव काम करके किया। ढाई साल में जनता ने काम देखा है और जनता की आवाज बनकर हमने काम किया है। हमने यहां की जनता के लिए विकास और कल्याणकारी काम किए हैं। आज हमें लैंडस्लाइड जीत मिली है।” महाराष्ट्र की सभी 288 विधानसभा सीटों पर एक फेज में 20 नवंबर को वोट डाले गए थे। प्रदेश में महायुति गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी ने 149 सीटों पर चुनाव लड़ा है, वहीं शिवसेना (शिंदे) ने 81 सीटों पर और अजित पवार की एनसीपी 59 सीटों पर प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे। महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में कांग्रेस ने 101, शिवसेना (यूबीटी) ने 95 और एनसीपी (एसपी) ने 86 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे।  

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस पर तंज कसा कि विपक्ष को नेता बनने के लायक भी नहीं छोड़ा

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखकर कांग्रेस से बाहर किए गए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पार्टी पर तंज कसा है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसा कि विपक्ष को नेता बनने के लायक भी नहीं छोड़ा। राज्य के नतीजों की घोषणा जारी है। ताजा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का महायुति गठबंधन बंपर जीत की ओर जा रहा है। उन्होंने वायनाड सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को टैग कर लिखा, ‘महाराष्ट्र ने तो विपक्ष का नेता बनने लायक भी नहीं छोड़ा।’ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना यूबीटी चीफ उद्धव ठाकरे को भी टैग कर लिखा, ‘पालघर के साधुओं का श्राप ले डूबा।’ महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी 60 से कम सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। पालघर हादसा अप्रैल 2020 में महाराष्ट्र के पालघर के गढ़चिंचले में तीन लोगों की मॉब लिंचिंग कर दी गई थी। कहा जा रहा था कि हमले का शिकार हुए तीनों साधु थे और एक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गुजरात के सूरत जा रहे थे। खबर है कि बच्चों को किडनैप करने वालों के शक में तीनों पर हमला कर दिया गया था। इस मामले में 101 लोग गिरफ्तार हुए थे। महाराष्ट्र चुनाव रिजल्ट महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को जारी मतगणना के बीच महायुति गठबंधन 288 विधानसभा सीट में से 217 सीट पर बढ़त के साथ राज्य में सत्ता बरकरार रखने की ओर अग्रसर है। निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए 20 नवंबर को मतदान हुआ था। MVA लड़खड़ाता नजर आ रहा है। एमवीए उम्मीदवार मात्र 51 सीट पर आगे हैं जबकि उसके कई नेताओं ने शनिवार सुबह तक महायुति को हराने के दावे किए थे।

महाराष्ट्र में कैसे बने महाबली, महायुति की तिकड़ी ने किया कमाल, जाने 5 प्वाइंट

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सियासी पंडितों को चौंका दिया है। खबर लिखे जाने तक महायुति गठबंधन 220 सीटों पर आगे है। बीजेपी, शिंदे गुट और अजित पवार की एनसीपी की इस तिकड़ी ने ध्रुवीकरण, मराठा आंदोलन और विपक्ष के तमाम आरोपों को किनारे करते हुए अपनी पकड़ मजबूत रखी। आइए, जानते हैं कि आखिर वो कौन से फैक्टर थे, जिन्होंने महायुति को एक बार फिर सत्ता के करीब ला दिया। लड़की बहिन योजना ने किया कमाल एकनाथ शिंदे सरकार की लड़की बहिन योजना ने सीधे जनता के दिलों में जगह बना ली। इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने खातों में पैसे मिलना शुरू हुआ, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं ने महायुति को जमकर वोट दिया। देवेंद्र फडणवीस का प्रचार अभियान बीजेपी ने इस बार अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपेक्षाकृत कम सभाओं के बजाय, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस को प्रचार की कमान दी गई। स्थानीय नेताओं और मुद्दों पर फोकस ने महायुति को जनता के करीब लाने में मदद की। फडणवीस की जमीनी पकड़ और नेतृत्व ने गठबंधन को मजबूती दी। RSS और भाजपा ने तैयार की पिच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी इस बार बीजेपी के लिए जोर-शोर से काम किया। संघ के कार्यकर्ता घर-घर जाकर महायुति के समर्थन में प्रचार करते दिखे। उन्होंने लव जिहाद, भूमि जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दों को जनता तक पहुंचाया, जिससे महायुति को खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त समर्थन मिला।   पवार बनाम पवार का मिला फायदा महाराष्ट्र के कद्दावर नेता शरद पवार से अलग होकर अजित पवार महायुति में साथ आए। बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के साथ एनसीपी के साथ आने से ऐसे कई चेहरे भी महायुति का हिस्सा रहे जो पहले कांग्रेस या एमवीए की विचारधारा के करीब थे। वहीं पार्टी की छवि के तौर भी अजित पवार ने शरद पवार गुट से अपनी अलग पहचान बनाई। महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के रुझानों पर भी गौर करें तो अजित पवार अपने चाचा की पार्टी से कहीं आगे निकलते नजर आ रहे हैं। शिंदे के चेहरे से मिला मराठा वोट एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने मराठा वोट बैंक को साधने का ऐसा दांव चला, जिसे विपक्ष भेद नहीं पाया। शिंदे मराठा प्राइड के प्रतीक बनकर उभरे और उनका चेहरा जनता के बीच खूब लोकप्रिय हुआ। इससे न केवल शिंदे गुट को बल्कि महायुति को भी भारी समर्थन मिला। जरांगे पाटिल के मराठा आंदोलन का असर विपक्ष को जितना होने की उम्मीद थी, उतना नहीं हुआ क्योंकि शिंदे के चलते मराठा वोट बीजेपी के साथ बने रहे।

भाजपा 25 नवंबर को महाराष्ट्र विधायक दल की बैठक बुला सकती है, 26 को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की संभावना

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए जारी मतगणना में भाजपा नीत महायुति गठबंधन बड़ी जीत हासिल करता नजर आ रहा है। भाजपा-शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का महायुति गठबंधन महाराष्ट्र की 288 सीट में से 218 पर आगे है। यह सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में एक बड़ी लहर का संकेत है। कांग्रेस, राकांपा-शरदचंद्र पवार और शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे का महा विकास आघाडी (MVA) गठबंधन को मात्र 50 सीटों पर बढ़त हासिल है। इस बीच, सूत्रों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी 25 नवंबर को महाराष्ट्र विधायक दल की बैठक बुलाएगी। 26 तारीख को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की संभावना है। इसके बीच महायुति गठबंधन की एक और बड़ी बैठक भी हो सकती है, जहां मुख्यमंत्री पद से लेकर तमाम मंत्रालयों के बारे में विस्तार से चर्चा होगी। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र लोकसभा में 48 सांसद भेजता है। संसदीय चुनाव में एमवीए ने निर्णायक 30 सीटों पर विजय हासिल की, लेकिन इस बार रुख बदला नजर आया है। भाजपा 125 सीट पर आगे है। शिवसेना 56 और राकांपा 35 सीट पर आगे है। कांग्रेस सिर्फ 21, शिवसेना (UBT) 17 और एनसीपी (SP) 13 सीट पर आगे है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में आगे हैं। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष नाना पटोले साकोली निर्वाचन क्षेत्र से मामूली अंतर से आगे हैं। शिवसेना (यूबीटी) नेता और मौजूदा विधायक आदित्य ठाकरे वर्ली विधानसभा सीट पर टक्कर का सामना कर रहे हैं। किस पार्टी ने कितनी सीटों पर लड़ा चुनाव कांग्रेस के विधायक दल के नेता और पूर्व मंत्री बालासाहेब थोराट संगमनेर में पीछे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण कराड दक्षिण विधानसभा सीट पर पीछे हैं। महायुति गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी ने 149 विधानसभा सीट पर, शिवसेना ने 81 सीट पर और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 59 निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे थे। विपक्ष के एमवीए गठबंधन में कांग्रेस ने 101 उम्मीदवार, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 95 और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने 86 उम्मीदवार खड़े किए। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) जैसे दलों ने भी चुनाव लड़ा, जिसमें बसपा ने 237 उम्मीदवार और एआईएमआईएम ने 17 उम्मीदवार खड़े किए। वर्तमान राज्य विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को समाप्त हो रहा है।

पूर्व सीएम ने कांग्रेस की लीडरशिप पर निशाना साधा, कांग्रेस में आपसी कलह और आरोपों का दौर शुरू

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के रुझानों में भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन बहुमत हासिल कर चुका है। अकेले भाजपा ही 127 सीटों पर आगे चल रही है, जो 148 सीटों पर ही उतरी थी। 85 फीसदी के स्ट्राइक रेट के साथ भाजपा ने अपनी सफलता के सारे रिकॉर्ड ही तोड़ दिए हैं। इसके अलावा उसके सहयोगी दल एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी ने भी झंडे गाड़ दिए हैं। शिंदे की शिवसेना को 56 सीटों पर बढ़त है। इसके अलावा अजित पवार की एनसीपी को 37 सीटों पर लीड मिली है। इस तरह तीन में से यदि कोई दो दल भी चाहें तो वह सरकार का हिस्सा बन सकते हैं। भाजपा गठबंधन को बहुमत की जरूरत से 60 से ज्यादा सीटें मिली हैं। वहीं कांग्रेस में आपसी कलह और आरोपों का दौर भी शुरू हो गया है। पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण खुद दक्षिण कराड़ सीट से पीछे चल रहे हैं। उन्होंने वोटों की गिनती के बीच ही कांग्रेस की लीडरशिप पर निशाना साध दिया। चव्हाण ने कहा कि हमारी लीडरशिप बेहद खराब थी। यह भी हमारी हार की एक वजह हो सकती है। चव्हाण ने हार के कारणों पर चर्चा करते हुए कहा, ‘हम हार के कारणों का पता नहीं लगा सकते। शायद लड़की बहिन योजना से महायुति को फायदा मिला है। इसके अलावा हमारी लीडरशिप खराब थी, जबकि आरएसएस ने भाजपा को मदद की और उसे इसका फायदा मिला।’

छह महीने के अंदर राहुल गांधी के सारे दांव महाराष्ट्र में फेल, जिसने चढ़ाया था उसी ने फर्श पर ला पटका

नई दिल्ली महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के ताजा नतीजों और रुझानों के मुताबिक दोपहर 12.20 बजे तक भाजपा की अगुवाई वाली सत्ताधारी महायुति 288 सदस्यों वाली विधानसभा में 218 सीटें जीतती दिख रही है, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी सिर्फ 56 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। इन चुनावी रुझानों ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में नेता विपक्ष राहुल गांधी और उनकी टीम का वह नैरेटिव काम नहीं आया, जिसके बूते छह महीने पहले लोकसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन ने 48 में से 30 सीटें जीत ली थीं। यानी छह महीने के अंदर राहुल गांधी के सारे दांव महाराष्ट्र में फेल हो गए। दरअसल, राहुल गांधी अपनी सभी चुनावी सभाओं में संविधान का हवाला देते रहे हैं। वह आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से आगे बढ़ाने की भी बात करते रहे और जातिगत जनगणना की भी वकालत करते दिखे। वह यह भी दलील देते रहे कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी होनी चाहिए, इसलिए जाति जनगणना करवाकर आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी की सीमा से आगे किया जाना चाहिए। जाहिर सी बात है कि वह इस कार्ड के सहारे दलित, आदिवासी, ओबीसी वर्ग को लुभाने की कोशिश करते रहे हैं। महाराष्ट्र का सामाजिक ताना-बाना महाराष्ट्र में दलितों की आबादी करीब 12 फीसदी है, जबकि ओबीसी आबादी 38 फीसदी है। आदिवासी समुदाय की बात करें तो वह अकेले 9 फीसदी और मराठा समुदाय 28 फीसदी है। संविधान बचाने और आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी की दीवार तोड़कर ज्यादा करने की बात कहकर राहुल इन वर्गों को लुभाने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र की चुनावी जनसभा में बार-बार कहा, “संविधान समानता, एक व्यक्ति-एक वोट, सभी के लिए और हर धर्म, जाति, राज्य तथा भाषा के लिए सम्मान की बात करता है। संविधान में सावित्रीबाई फुले और महात्‍मा गांधी की आवाज है। मगर बीजेपी और संघ संविधान पर हमला कर रहे हैं। उनका हमला देश की आवाज पर हमला है।” अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान जब वह अपने हाथों में संविधान की प्रति लेकर चुनावी सभाओं में यह कहते दिखे कि भाजपा 400 सीटें जीतकर संविधान बदलना चाहती है और दलितों-पिछड़ों का आरक्षण खत्म करना चाहती है तो लोगों ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया और लोकसभा चुनावों में उनके इंडिया अलायंस को पूरा समर्थन दिया लेकिन जब वह फिर से वही बातें महाराष्ट्र चुनावों में भी करने लगे तो राज्य के लोगों ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। यानी जिन लोगों की वजह से 48 में से 30 सीटें इंडिया गठबंधन ने जीती थीं, उन्हीं लोगों ने इस बार मुंह फेर लिया। मौजूदा चुनाव में घट गए वोट परसेंट चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार अभी तक के प्राप्त रुझानों के मुताबिक कांग्रेस को 10.58 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि सहयोगी शरद पवार की एनसीपी को 11.58 फीसदी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 10.67 फीसदी यानी कुल 32.83 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं भाजपा को 25.08 फीसदी, अजित पवार की एनसीपी को 10.95 फीसदी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 12.70 फीसदी वोट यानी कुल 48.73 फीसदी वोट मिले हैं। लौकसभा चुनावों में किस दल को कितना परसेंट वोट छह महीने पहले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 16.92 फीसदी वोट मिले थे जबकि सहयोगी शरद पवार की एनसीपी को 10.27 फीसदी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 16.52 फीसदी यानी MVA को कुल 43.71 फीसदी वोट मिले थे। उधर, भाजपा को 26.18 फीसदी, अजित पवार की एनसीपी को 3.60 फीसदी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 12.95 फीसदी कुल 43 फीसदी वोट मिले थे। साफ है कि जिन समुदाय ने लोकसभा चुनाव के दौरान इंडिया अलायंस को अर्श पर चढ़ाया था, उसी ने छह महीने के अंदर फर्श पर पटक दिया है।

एमपी में चल रहे अदाणी के प्रोजेक्ट की भी जांच होनी चाहिए: जीतू पटवारी

भोपाल अदाणी पर अमरीका में केस दर्ज होने के बाद कांग्रेस हमलावर हुई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी जितेन्द्र सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया।  पटवारी ने कहा कि जब अदाणी पर अमरीका में एफआइआर हो सकती है तो हमारे देश में क्यों नहीं। शिवराज सरकार के दौरान अदाणी ने 80 हजार करोड़ रुपए निवेश के वादे किए थे। एमपी में चल रहे अदाणी के प्रोजेक्ट की भी जांच होनी चाहिए। अदाणी-मोदी सरकार का चोली-दामन का रिश्ता जितेंद्र भंवर सिंह ने कहा है कि बिजली कंपनियों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। अधिकारियों ने कब कितना पैसा लिया, इसका पूरा खुलासा एफबीआई ने किया है। जितेंद्र भंवर सिंह ने आगे कहा कि अदाणी और मोदी सरकार का चोली-दामन का रिश्ता है। सारे फायदे अदाणी और उनके सहयोगियों को सारे फायदे वाले काम अदाणी और उनके सहयोगियों को दिए जा रहे हैं। रक्षा संबंधी सौदे से जुड़े काम हों या फिर मुंबई के धारावी में एक लाख करोड़ की जमीन। देश के सारे बड़े काम अदाणी को दिए जा रहे हैं। इतने बड़े मामले सामने आने के बाद ही ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स को कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। बदल गया है मोदी सरकार का नारा- जीतू पटवारी पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि बीजेपी के नेता हमेशा अदाणी का बचाव करते रहे हैं। भाजपा सरकार हम दो हमारे दो वाली नीति पर चल रही है। इनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केस दर्ज हुए हैं वह सब नरेंद्र मोदी के दोस्त हैं। पटवारी ने कहा कि 2234 करोड़ की रिश्वत ऊर्जा विभाग के अफसरों को दी गई है। बहुत हुआ भ्रष्टाचार अबकी बार मोदी सरकार का नारा अब खूब करो भ्रष्टाचार चल रही मोदी सरकार में बदल गया है। देश नहीं बिकने दूंगा उनका नारा अब अदाणी के लिए होगा जीतू पटवारी ने आगे कहा कि अदाणी ने मीडिया से लेकर सरकारी संस्थानों पर अलग-अलग तरीके से कब्जा जमाया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख में अदाणी पर लगे आरोपों का खुलासा किया गया है। जीतू पटवारी ने कहा कि अदाणी पर अमरीका में कार्रवाई हो सकती है तो, उनके खिलाफ भारत में कार्रवाई क्यों नहीं हो सकती? पटवारी बोले, मोदी जी नारा लगाते हैं, देश नहीं बिकने दूंगा उनका नारा अब अदाणी के लिए होगा कि देश नहीं छूटने दूंगा। 10 साल में 7 गुना तक बढ़े बिजली के दाम जीतू ने भाजपा पर आरोप लगाया कि 10 साल में साढ़े 16 लाख करोड़ की कर्ज माफी और फायदा अदाणी को दिया गया है। देश में बिजली की कीमत 10 साल में 5 से 7 गुना बढ़ी है। उसके पीछे षड्यंत्र है।

कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक में उमंग सिंघार शामिल नहीं हुए, राजनीतिक मामलों की समिति के 25 में से 16 सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहे

भोपाल मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार को विवादों और मतभेद के बीच संपन्न हुई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमंग सिंघार शुक्रवार को इस बैठक में शामिल नहीं हुए, जबकि गुरुवार को राजनीतिक मामलों की समिति के 25 में से 16 सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहे। इस अनुपस्थिति ने पार्टी में असंतोष और अंदरूनी मतभेदों को और उजागर किया है, खासकर पिछले साल के विधानसभा चुनाव में बीजेपी से मिली करारी शिकस्त के बाद। बैठक के पहले दिन जिन प्रमुख नेताओं ने बैठक में भाग नहीं लिया, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व राज्य मंत्री गोविंद सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, प्रवीण पाठक, कमलेश्वर पटेल, शोभा ओझा और विधायक आरिफ मसूद शामिल थे। इसी तरह पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी बैठक से अनुपस्थित रहे। कांग्रेस की बैठक में मतभेद बैठक से अनुपस्थित रहने वाले नेताओं की सूची में इतने बड़े नामों के शामिल होने से पार्टी में असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख जीतू पटवारी ने हालांकि उमंग सिंघार की अनुपस्थिति को उनके गले में खराश के कारण बताया। बैठक के पहले दिन उनके रोने के बारे में पूछे जाने पर पटवारी ने इसे “मीडिया द्वारा गढ़ी गई कहानी” बताया और कहा, “मैं एक योद्धा हूं।’’ हालांकि, एक पार्टी नेता ने बताया कि बैठक में शामिल न होने वाले नेता बीजेपी सरकार की नीतियों और विफलताओं को लेकर अगले सप्ताह विधानसभा का घेराव करने का निर्णय लेने के पक्ष में थे। साथ ही पार्टी ने सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रभारी नियुक्त करने का फैसला किया है, ताकि आने वाले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके। पार्टी ने संगठनात्मक फैसले लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान पार्टी ने वार्ड, मोहल्ला और ग्राम समितियों के गठन का निर्णय भी लिया। यह बैठक पार्टी के नए संगठनात्मक ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि पिछले महीने इन समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई थी और यह पहली बैठक थी। बैठक में लिए गए फैसलों से पार्टी ने यह संकेत दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर गंभीर है, लेकिन अंदरूनी असंतोष और नेताओं के बीच मतभेद पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे से बड़ा कद देवेंद्र फडणवीस का चेहरा है, जो कि राज्य की कमान और भाजपा की कमान संभाल चुके

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में भाजपा, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) के गठबंधन ने प्रचंड जीत हासिल की है। भाजपा 124 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, शिवसेना 55 और एनसीपी 36 सीटों पर आगे चल रही है। महाराष्ट्र की तस्वीर साफ होते ही अब मुख्यमंत्री पद को लेकर गहमागहमी बढ़ गई है। भाजपा की तरफ से देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने की मांग होने लगी है। वहीं, शिवसेना की तरफ से एकनाथ शिंदे के हाथों में ही महाराष्ट्र की कमान रहने देने की बात कही जा रही है। अब सबकी निगाहें भाजपा पर जा टिकी हैं। भाजपा के अगले कदम को लेकर अटकलें लगाने से पहले बिहार में विधानसभा चुनाव की गणित को समझना जरूरी है, जो कि 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद बना था। भाजपा ने उस समय कम सीटें आने के बावजूद नीतीश कुमार के नेतृत्व को अपनाया था। उस चुनाव में भाजपा के खाते में 74 और नीतीश कुमार की जेडीयू को सिर्फ 43 सीटें मिली थी। इसके बावजूद भाजपा ने नीतीश कुमार का नेतृत्व स्वीकार किया था। भाजपा के पास इस समय राष्ट्रीय राजनीति में एक ऐसा संदेश देने का अवसर है, जिसमें वह गठबंधन की राजनीति पर बड़ा दिल दिखाए। भाजपा फिलहाल केंद्र में भी गठबंधन सरकार चला रही है। ऐसे में वह यह संदेश नहीं देना चाहती कि ज्यादा सीट मिलने पर उसका रुख बदल जाता है। बिहार से अलग है महाराष्ट्र की स्थिति भाजपा के लिए बिहार की तुलना में महाराष्ट्र की स्थिति अलग है। बिहार में उसके पास नीतीश कुमार की कद के बराबर का कोई चेहरा नहीं था। लेकिन महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे से बड़ा कद देवेंद्र फडणवीस का चेहरा है, जो कि राज्य की कमान और भाजपा की कमान संभाल चुके हैं। ऐसे में भाजपा के पास सत्ता पर कंट्रोल करने का एक बड़ा अवसर है।

महा विकास आघाड़ी को हार के करीब पहुंचता देख उद्धव गुट के सांसद संजय राउत भड़क गए, की दोबारा चुनाव कराने की मांग

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में वोटों की गिनती जारी है। जहां एक तरफ राज्य में बीजेपी का जादू चलता दिख रहा है और महायुति गठबंधन बड़ी जीत की ओर बढ़ती दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी महा विकास आघाड़ी का बुरा हाल है। चुनाव आयोग के रुझानों के मुताबिक भाजपा सेंचुरी के करीब पहुंच गई है। इस बीच महा विकास आघाड़ी को हार के करीब पहुंचता देख उद्धव गुट के शिवसेना सांसद संजय राउत भड़क गए हैं। उन्होंने ना सिर्फ ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया है बल्कि दोबारा चुनाव कराने की मांग भी है। संजय राउत सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं और लोग उन्हें लेकर मजेदार मीम भी बना रहे हैं। संजय राउत ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में भड़ास निकालते हुए कहा, “बैलेट पेपर पर फिर से चुनाव कराए जाएं। महाराष्ट्र का परिणाम जनता की राय नहीं है। नहीं! नहीं! नहीं! तीन बार नहीं। ऐसे नतीजे नहीं माने जा सकते।” संजय राउत ने इससे पहले मीडिया से बातचीत करते हुए भी महायुति पर गंभीर आरोप लगाए थे। संजय राउत ने इल्जाम लगाते हुए कहा था, “चुनाव से पहले एकनाथ शिंदे ने कहा था कि उनका एक भी विधायक नहीं हारेगा। आखिर उन्होंने किसके भरोसे यह बात कही थी?” उन्होंने कहा कि समझ नहीं आ रहा कि शिंदे के सभी विधायक कैसे जीत रहे हैं और यह गद्दारी कैसे हजम की जा रही है। इस बीच अपने बयान के बाद से संजय राउत सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं। लोग मजाक-मजाक में संजय राउत पर तंज कस रहे हैं। उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर मींस की बहार सी आ गई है। एक यूजर ने नतीजों पर संजय राउत के बयान का मजाक उड़ाते हुए कहा, “संजय राउत निराश हैं। महाराष्ट्र की हार के लिए अडानी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। राहुल गांधी के साथ रहने का असर।” वहीं एक अन्य यूजर ने चुटकी लेते हुए कहा, “महान शख्स से मिलिए, संजय राउत। इन्होंने महाराष्ट्र में अकेले पूरी शिवसेना और महा विकास आघाड़ी को बर्बाद कर दिया।” एक अन्य पोस्ट में उद्धव ठाकरे को लेकर भी बेहद दिलचस्प मीम नजर आया।

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