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हार पर चिंता करने की बजाय पार्टी को कारणों की पड़ताल करना चाहिए -कुमारी सैलजा

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अप्रत्याशित हार ने पार्टी में कलह को और बढ़ा दिया है। चुनाव के दौरान ही कुमारी सैलजा और भूपिंदर सिंह हुड्डा के बीच सीधा टकराव दिख रहा था। इसके अलावा एक और तीसरा धड़ा रणदीप सिंह सुरजेवाला का था। अब यह कलह फिर से सतह पर आती दिख रही है। कुमारी सैलजा ने तो हाईकमान से मांग कर दी है कि संगठन में बदलाव किए जाएं। इस तरह फिर से उनका सीधा निशाना भूपिंदर सिंह हुड्डा पर ही है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष उदयभान को हुड्डा का ही करीबी माना जाता है। सिरसा की सांसद ने कहा कि इन नतीजों ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को निराश किया है, लेकिन वे हताश नहीं हैं। हाईकमान इस हार की पड़ताल करेगा। कुमारी सैलजा का कहना है कि इस हार पर चिंता करने की बजाय पार्टी को उसके कारणों की पड़ताल करना चाहिए और आगे के लिए मंथन करना होगा। उन्होंने संगठन में बदलाव पर जोर दिया और कहा कि बीते 10 से 12 सालों में संगठन ठीक से काम नहीं कर रहा है। सैलजा ने कहा कि पार्टी की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी कार्यकर्ताओं से बात करेगी और उनकी राय ली जाएगी। यह पूछा जाएगा कि आखिर आप हार के क्या कारण मानते हैं। सैलजा ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही हाईकमान कोई फैसला लेगा। उन्होंने कहा कि हमारी जो हार हुई है, उसका अनुमान तो किसी को भी नहीं था। कोई यह नहीं सोच रहा था कि ऐसा नतीजा भी आ सकता है। फिर भी किसी नतीजे तक पहुंचने से पहले हम फीडबैक लेंगे। वहीं आपसी कलह पर राहुल गांधी के गुस्से वाली खबरों को सैलजा ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि अब तक इस पर उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बता दें कि हरियाणा चुनाव की बड़ी वजह कलह को ही माना जा रहा है। चर्चा है कि भूपिंदर सिंह हुड्डा के हाथ में ही चुनाव की पूरी कमान होने से कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला ने दूरी बना ली। कैप्टन अजय यादव ने भी लगाए थे उपेक्षा के आरोप दोनों ही प्रचार से दूर रहे। इसके अलावा अहीरवाल में कैप्टन अजय सिंह यादव जैसे नेता भी उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में कुमारी सैलजा की ओर से बदलाव की मांग ने रार को नए सिरे से तेज कर दिया है। बता दें कि सभी एग्जिट पोल्स में भी कांग्रेस की ही जीत की भविष्यवाणी की गई थी। लेकिन जब नतीजे आए तो कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक पंडित भी हैरान रह गए।

भाजपा ने कर्नाटक सरकार पर फिर से जमीन सौदों में भ्रष्टाचार को लेकर लगाया आरोप, कांग्रेस चला रही है ‘भू हड़प आंदोलन’

नई दिल्ली कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर सोमवार को भाजपा ने फिर से जमीन सौदों में भ्रष्टाचार को लेकर आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस का समूचा शीर्ष नेतृत्व भूमि सौदों से जुड़े भ्रष्टाचार में लिप्त है और इन मामलों में पोल खुलने के बाद उसे नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। भाजपा की ओर से कांग्रेस पर यह हमला ऐसे समय किया गया है, जब कर्नाटक में सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के अध्यक्ष राहुल एम. खरगे ने ‘बहु-कौशल विकास केंद्र, प्रशिक्षण संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र’ स्थापित करने के लिए बेंगलुरु में पांच एकड़ जमीन के आवंटन के अपने अनुरोध को रविवार को वापस ले लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे राहुल खरगे का यह कदम सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती द्वारा मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण को 14 भूखंड वापस लौटाने के बाद आया है। लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले को लेकर सिद्धरमैया, उनकी पत्नी और एक रिश्तेदार के खिलाफ मामला दर्ज किया था। भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ये फैसले नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की प्रतिकूल रिपोर्ट और कानूनी कार्यवाही के कारण लिए गए हैं और एक तरह से यह उसके नेताओं की स्वीकारोक्ति है कि भू-आवंटन गलत था। उन्होंने दावा किया कि कानूनी कार्रवाई के दौरान होने वाली ‘जलालत’ से बचने के लिए ऐसा किया गया। त्रिवेदी ने सिद्धारमैया समेत कांग्रेस के कई नेताओं पर कथित जमीन घोटालों का आरोप लगाया और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से पूछा की उनकी ‘मोहब्बत की दुकान’ अब ‘अवैध प्रॉपर्टी डीलर की दुकान’ में कैसे तब्दील हो गई? त्रिवेदी ने खरगे और सिद्धरमैया के परिवार के सदस्यों से जमीन लौटाने की पेशकश का उल्लेख करते हुए कहा, ‘यह एक प्रकार से उनकी स्वीकारोक्ति है। सत्ता का दुरुपयोग करके भूमि को हड़पने का कार्य कर्नाटक में कांग्रेस में सर्वोच्च स्तर पर हो रहा था।’ उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया, ‘सिर्फ जमीन वापस करने से काम नहीं चलेगा। नैतिकता के आधार पर जिन लोगों ने जमीन वापस कर दी, क्या उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए?’ मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूखंड आवंटन घोटाले मामले में लोकायुक्त पुलिस ने 25 सितंबर को विशेष न्यायालय के आदेश के बाद 27 सितंबर को सिद्धरमैया, उनकी पत्नी पार्वती बी एम, उनके करीबी रिश्तेदार मल्लिकार्जुन स्वामी, देवराजू (जिनसे मल्लिकार्जुन स्वामी ने जमीन खरीदकर पार्वती को उपहार में दी थी) तथा अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी 30 सितंबर को मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की, जिसमें एमयूडीए की ओर से उनकी पत्नी पार्वती बी एम को 14 भूखंडों के आवंटन में कथित अनियमितताएं करने का आरोप है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती द्वारा भूखंड लौटाने की पेशकश किये जाने के बाद, एमयूडीए ने उन्हें आवंटित 14 भूखंडों को वापस लेने का एक अक्टूबर को फैसला किया था। सोनिया और राहुल की प्रेरणा से चल रहा ‘भू हड़प आंदोलन’ त्रिवेदी ने कहा कि जमीन लौटाए जाने के फैसलों से इन नेताओं का पर्दाफाश हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक समय महात्मा गांधी और विनोबा भावे के ‘भूदान’ से जुड़ी पार्टी अब सोनिया गांधी और राहुल गांधी की ‘प्रेरणा’ से ‘भू हड़प आंदोलन’ चला रही है। भाजपा सांसद ने उल्लेख किया कि सोनिया और राहुल नेशनल हेराल्ड मामले में आरोपी हैं। आरोप है कि गांधी परिवार ने कांग्रेस पार्टी के धन का इस्तेमाल कर नेशनल हेरालड को प्रकाशित करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) पर कब्जा किया और 20 अरब रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित करने का प्रयास किया।

अब जम्मू-कश्मीर के सत्यपाल मलिक ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा, ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

नई दिल्ली विपक्ष लंबे समय से ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव करवाने की मांग करता रहा है। हरियाणा चुनाव के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े किए। वहीं अब जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आज के हालात को देखकर ईवीएम से भरोसा उठने जैसा हो गया है। मलिक ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर कहा, अभी हरियाणा में हुए चुनावों में पोस्टल बैलेट पेपर में कांग्रेस 74-16 से आगे थी, जैसे ही EVM खुली धीरे धीरे कांग्रेस सत्ता से बाहर ओर और भाजपा सत्ता में। जो शुरुआती रुझानों में दिखाया गया था और एग्जिट पोल्स में भी दिखाया था सब उसके विपरीत हो रहा है। आज वर्तमान स्तिथि देखकर चुनाव आयोग और EVM से भरोसा उठने जैसा हो गया है। EVM का खेल आखिर कब तक चलेगा, आज AI का ज़माना है अगर निष्पक्ष चुनाव चाहते हो तो EVM को हटाना भी एक मात्र विकल्प है। हाल ही में लाइव हिंदुस्तान से बातचीत में भी सत्यपाल मलिक ने कहा था कि हरियाणा के नतीजे उम्मीद के विपरीत आए हैं। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में एकता नहीं है। कांग्रेस के लोग उतनी मेहनत नहीं करते। वहीं बीजेपी के लोग 24 घंटे राजनीति करते हैं। उनके मुकाबले कांग्रेस की मेहनत नहीं टिकती है। उन्होंने कहा था कि हरियाणा की हार के लिए राहुल गांधी जिम्मेदार नहीं हैं। मलिक ने कहा था कि बीजेपी के 50 अनुषांगिक संगठन हैं। कांग्रेस के लोग बीजेपी के बराबर राजनीति और संघर्ष नहीं करते। सड़कों पर नहीं रहते। उन्होंने कहा कि कुमारी सैलजा की वह से कांग्रेस के दलित वोट कट गए। वहीं बैकवर्ड सीएम की वजह से पिछड़ा वोट भी बीजेपी को मिल गया। बता दें कि चुनाव परिणाम वाले दिन अजय माकन, भूपेंद्र सिंह हुड्ड् और कुमारी सैलजा जैसे कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि दोपहर में गिनती धीमी हो गई है। उन्होंने गिनती में गड़बड़ी की आशंका जताई थी। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने ईवीएम पर सवाल भी खड़े किए थे। जवाब देते हुए बीजेपी ने कहा था कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप क्यो नहीं लगा रही है। जबकि जम्मू-कश्मीर में उसका गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में है। बाद में कांग्रेस ने ईवीएम के मामले को लेकर एक फैक्ट फाइंडिंग टीम बना दी और कहा कि जब तक पुख्ता सबूत नहीं मिल जाते कांग्रेस ईवीएम के मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं करेगी।

वरिष्ठ मंत्री रहे अनिल विज ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, इस मुलाकात के हरियाणा में खूब हो रहे चर्चे

नई दिल्ली अंबाला कैंट सीट से लगातार 7वीं बार विधायक चुने गए हरियाणा के सीनियर भाजपा नेता अनिल विज ने जेपी नड्डा से मुलाकात की है। वह पार्टी चीफ से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचे। वरिष्ठ मंत्री रहे अनिल विज की जेपी नड्डा से मुलाकात के हरियाणा में भी चर्चे हैं। फिलहाल इस बात के कयास लग रहे हैं कि उन्हें कौन सा मंत्रालय नई सरकार में मिल सकता है। वह मनोहर लाल खट्टर की सरकार में गृह मंत्री थे, लेकिन नायब सिंह सैनी को कमान मिलने के बाद उन्होंने शपथ नहीं ली थी। वह सिर्फ विधायक के तौर पर काम कर रहे थे। इस बार फिर उन्होंने अंबाला से जीत हासिल की है। इस जीत के बाद फिर से उनके कैबिनेट में आने की चर्चाएं हैं। नायब सिंह सैनी के 17 अक्टूबर को कुछ मंत्रियों के साथ शपथ होगी। अब चर्चा है कि 17 अक्टूबर को अनिल विज उनके साथ शपथ लेंगे या नहीं। दरअसल अनिल विज ने हरियाणा चुनाव के नतीजों से पहले सीएम पद पर दावा किया था। उनका कहना था कि वह वरिष्ठ नेता हैं और सीएम पद के लिए उपयुक्त हैं। ऐसे में अब वह नायब सैनी की सरकार में बतौर मंत्री शपथ लेंगे या फिर नहीं। इसको लेकर भाजपा में आंतरिक चर्चाएं तेज हैं। हालांकि अनिल विज ने दावा करने के बाद यह भी कहा था कि यह मेरी नहीं बल्कि समर्थकों की राय है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि जब मनोहर लाल खट्टर के स्थान पर नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया गया तो मेरे समर्थकों की राय थी कि मैं भी इसके लिए सही विकल्प था। फिर मैंने जब कुछ नहीं कहा तो लोगों ने कहा शुरू किया कि अनिल विज खुद ही सीएम नहीं बनना चाहता। इसलिए मैंने इस मसले पर बात करते हुए कहा कि मैं भी मुख्यमंत्री बन सकता हूं। ऐसा इसलिए कहा था ताकि अपने समर्थकों के बीच भ्रम दूर कर सकूं। बता दें कि अनिल विज को हरियाणा भाजपा के फायर ब्रांड नेताओं में गिना जाता है। वह तब से भाजपा के विधायक हैं, जब पार्टी राज्य में कमजोर थी और तीसरे या चौथे नंबर की पार्टी हुआ करती थी। भाजपा को इस बार के चुनाव में 48 सीटें मिली हैं और वह लगातार तीसरी बार राज्य की सत्ता में लौटी है।

दीपक बाबरिया ने पार्टी नेतृत्व से इस्तीफे की पेशकश की है और हरियाणा की हार के लिए नैतिक जिम्मेदारी ली

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव की अप्रत्याशित हार ने कांग्रेस में बवाल बढ़ा दिया है। नेता एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं तो वहीं अब इस्तीफों का दौर भी शुरू हो सकता है। सबसे पहले राज्य के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस्तीफे की पेशकश की है और हरियाणा की हार के लिए नैतिक जिम्मेदारी ली है। उन्होंने हाईकमान से कहा है कि उनकी जगह पर किसी नए शख्स को यह जिम्मेदारी दी जाए। इसे लेकर सीधे राहुल गांधी से ही बाबरिया ने बात की है। दीपक बाबरिया चुनाव के दौरान बीमार थे और अस्पताल में एडमिट थे। उनकी सीधे तौर पर सीनियर लीडर कैप्टन अजय सिंह यादव ने आलोचना की थी। उनका कहना था कि चुनाव के बीच में दीपक बाबरिया बीमार थे। वह अस्पताल में एडमिट थे और कामकाज ठप था। यदि ऐसी स्थिति थी तो उन्हें हाईकमान को बताना चाहिए था कि उनका कोई विकल्प देखा जाए। इस तरह उन्होंने बाबरिया पर लापरवाही का आरोप लगाया था। अब खुद बाबरिया ने नैतिक जिम्मेदारी ली है और इस्तीफा देने की बात कही है। दरअसल हरियाणा में जब टिकटों का बंटवारा हो रहा था और प्रचार जोरों पर था, तब दीपक बाबरिया दिल्ली के एम्स में एडमिट थे। उन्हें रक्तचाप से जुड़ी समस्या हो गई थी। दरअसल दीपक बाबरिया का हरियाणा में कोई जनाधार नहीं रहा है और उन्हें ज्यादातर नेता महत्व नहीं देते। इसी को लेकर बवाल होता रहा है। कैप्टन अजय यादव तो उन पर सीधे हमलावर हुए। उन्होंने कहा कि आखिर ऐसे कैसे कोई प्रभारी हो सकता है, जो चुनाव के वक्त सीन से ही गायब था। दरअसल दीपक बाबरिया को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का करीबी माना जाता है। कर्नाटक में पार्टी की जीत के बाद बाबरिया को विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर भेजा गया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था। बता दें कि हरियाणा में कांग्रेस ने हार के बाद फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का फैसला लिया है। यह कमेटी हार के कारणों की पड़ताल करेगी। कांग्रेस सूत्रों ने बताया था कि हरियाणा की हार को लेकर जो मीटिंग हुई थी, उसमें राहुल गांधी ने हैरानी जताई थी। उनका कहना था कि कुछ लोगों ने पार्टी हितों की बजाय निजी हितों को ज्यादा प्राथमिकता दी थी। कयास लग रहे हैं कि दीपक बाबरिया के बाद पार्टी के स्टेट चीफ उदयभान भी इस्तीफा दे सकते हैं।

कांग्रेस के शीर्ष नेता भ्रष्टाचार और गरीब की जमीन हड़पने में शामिल हैं : सुधांशु त्रिवेदी

नई दिल्ली भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष (सोनिया गांधी और राहुल गांधी) से लेकर वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एवं उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से लेकर अन्य राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, अशोक गहलोत और भूपेश बघेल तक कांग्रेस का सभी शीर्ष नेता गरीबों की जमीन हड़पने में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सब भ्रष्टाचार में और गरीब की जमीन हड़पने जैसे मामले में शामिल हैं। भाजपा राष्ट्रीय मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कटाक्ष किया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के विचारों से प्रेरित होकर कांग्रेस पार्टी देश में भू-हड़प अभियान चला रही है। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार के ट्रस्ट द्वारा कर्नाटक में आवंटित की गई जमीन को लौटाने के प्रकरण को भ्रष्टाचार की स्वीकारोक्ति बताते हुए कहा कि एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे इसकी गंभीरता को समझा जा सकता है। उन्होंने खड़गे के परिवार और इससे पहले सिद्धारमैया के परिवार द्वारा आवंटित जमीन को लौटाने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ये लोग इसलिए जमीन वापस नहीं कर रहे हैं कि इनकी आत्मा जाग गई है बल्कि अदालत की कार्यवाही के दौरान होने वाली जलालत से बचने के लिए ये जमीन वापस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी को यह बताना चाहिए कि क्या जमीन वापस करने वालों को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा नहीं देना चाहिए? अगर मान लिया कि गलती हुई है तो कर्नाटक सरकार एफआईआर कब करेगी? उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामले में इंडी गठबंधन के नेताओं की चुप्पी से यह बात बिल्कुल साफ हो रही है कि भ्रष्टाचार और जनता की जमीन हड़पने के मामले में ये सब एक साथ हैं, मिले हुए हैं और एक दूसरे को मौन समर्थन दे रहे हैं। भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि भ्रष्टाचार जिसकी सहज और स्वाभाविक प्रवृत्ति है, उस कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से अब वह जमीन खिसकती नजर आ रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार द्वारा संचालित ट्रस्ट पर आक्षेप लगने के बाद आवंटित भूमि को लौटाने का जो निर्णय लिया है, वह स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है कि सत्ता का दुरुपयोग करके भूमि को हड़पने का कार्य कर्नाटक में सर्वोच्च स्तर से हो रहा था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर लैंड ग्रैब का केस लग चुका है, जोकि 1986 में आवंटित भूमि के समय से चल रहा था। मुडा स्कैम में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर आरोप लग रहे हैं। केआईएडीबी लैंड आवंटन घोटाले में खड़गे के परिवार के लोग शामिल हैं। इससे पूर्व मध्य प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ का नाम सामने आ चुका है। राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत का नाम बीकानेर के लैंड स्कैम में सामने आ चुका है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी सामने आ चुका है। नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आरोप है। यानी मुख्यमंत्री हो, उपमुख्यमंत्री हो या पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष हो या वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष हो, कांग्रेस का पूरा शीर्ष नेतृत्व भूमि हड़पने के आंदोलन में समान रूप से संलिप्त है। राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए त्रिवेदी ने आगे कहा कि राहुल गांधी मोहब्बत की दुकान की बात करते हैं लेकिन उनकी मोहब्बत की दुकान तो किसी भूमाफिया प्रॉपर्टी डीलर की दुकान नजर आ रही है। कांग्रेस पार्टी पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी के बयान को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस की कलई खुल गई है। कांग्रेस पार्टी को इस पर सफाई देनी चाहिए। हर गैर राजनीतिक आंदोलन का एकमात्र उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना ही होता है। बहराइच की घटना के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले चार-पांच महीनों में देश में इस तरह की घटनाएं बढ़ी है और रेल सहित इन तमाम घटनाओं को समग्रता से देखने की जरूरत है। यह भारत को कमजोर करने की बड़ी साजिश का हिस्सा है। देश की जनता यह सोचे। उन्होंने संजय राउत के बयान की भी कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें याद दिलाया कि 90 के दशक में बालासाहेब ठाकरे ने अंडरवर्ल्ड के खिलाफ किस तरह से सख्त स्टैंड लिया था लेकिन आज वे अंडरवर्ल्ड का साथ देने वालों के साथ ही खड़े हैं।  

राहुल गांधी आज महाराष्ट्र के नेताओं से मुलाकात करेंगे, आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चल रहीं तैयारियों की समीक्षा करेंगे

मुंबई कांग्रेस ने आगामी महाराष्ट्र चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. यूपी के रायबरेली से सांसद और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार को महाराष्ट्र के नेताओं से मुलाकात करेंगे. सूत्रों ने बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चल रहीं तैयारियों की समीक्षा करेंगे. सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी आज 10 बजे महाराष्ट्र के नेताओं से मुलाकात करेंगे. इस बैठक में राहुल गांधी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चल रहीं तैयारियों की समीक्षा करेंगे. बैठक में महाराष्ट्र कांग्रेस चीफ नान पटोले, विजय वडेट्टीवार, पृथ्वीराज चव्हाण, बालासाहेब थोराट, वर्षा गायकवाड़ और रमेश चेन्नितला शामिल होंगे. बीते दिनों जानकारी आई थी कि महाराष्ट्र में कांग्रेस से टिकट पाने की इच्छा 1800 से अधिक लोगों ने जाहिर की है, जबकि पार्टी लगभग 100-110 सीटों पर ही चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. टिकट के लिए पूरे राज्य भर से एप्लीकेशन आए हैं, जबकि चुनाव की घोषणा अब तक नहीं हुई है. इस बार विदर्भ और मराठवाड़ा इलाके से सबसे ज्यादा लोगों ने एप्लीकेशन फाइल किया है. महाराष्ट्र में आवेदकों को नामांकन के लिए रजिस्टर करना पड़ता है और कुछ पैसे भी जमा कराने होते हैं. एससी/एसटी उम्मीदवारों के लिए 10,000 रुपये और सामान्य उम्मीदवारों के लिए 20,000 रुपये की फी निर्धारित की गई है. कांग्रेस का कहना है कि महाराष्ट्र में एप्लीकेशनों की संख्या हरियाणा से आगे बढ़ सकती है, क्योंकि हर दिन नए एप्लीकेशन आ रहे हैं. 26 नवंबर से पहले होंगे चुनाव बता दें कि चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र समीक्षा दौरे के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव की तैयारियों के बारे में जानकारी दी. मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि हम यहां आपको आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग की तैयारियों के बारे में जानकारी देने आए हैं. हमने पिछले दो दिनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के सभी राजनीतिक दलों से मुलाकात की. हम सभी कानून प्रवर्तन अधिकारियों संग बैठक की. हमने उन्हें कई निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग ने बताया कि महाराष्ट्र में 26 नवंबर से पहले चुनाव कराना होगा, क्योंकि नवंबर में महाराष्ट्र विधानसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है.

हरियाणा में भाजपा 17 अक्टूबर को वाल्मिकी जयंती के अवसर पर नई सरकार लेगी शपथ

चंडीगढ़ हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार 17 अक्टूबर को शपथ लेगी। पहले ऐसी खबरें थीं कि सैनी सरकार 15 अक्टूबर को शपथ लेगी, लेकिन फिर 17 अक्टूबर का दिन तय हो गया। तारीख में परिवर्तन क्यों किया गया, इसकी वजह अब साफ हो गई है। असल में 17 अक्टूबर को वाल्मिकी जयंती है। इस दिन शपथ लेकर भाजपा दलितों को खास संदेश देना चाहती है। बता दें कि हरियाणा सरकार ने पहले ही रामचरितमानस के रचयिता के जन्म की तारीख पर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा कर रखी है। वाल्मीकि संप्रदाय में वाल्मिकी जयंती परगट दिवस के रूप में मनाई जाती है। गौरतलब है कि शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में हरियाणा में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। वह यहां पर 10 में से केवल पांच सीटें ही जीत पाई थी। लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए चीजें पूरी तरह से बदल गई हैं। विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर भाजपा हरियाणा में रिकॉर्ड तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। भाजपा की इस जीत के पीछे जाटलैंड में उसकी मजबूती और दलित-ओबीसी वोटों पर पकड़ का अहम योगदान रहा है। लोकसभा चुनाव में यही दलित-ओबीसी वोट कांग्रेस के खाते में चले गए थे। इसके अलवा सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं की भूमिका भी काफी अहम रही है। इसमें 500 रुपए में सिलिंडर, मध्य प्रदेश के लाडली बहन योजना की तर्ज पर लाडो लक्ष्मी योजना लाना खास रहा। इन योजनाओं ने दलितों और महिला वोटरों को पार्टी की तरफ मोड़ा। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया कि भाजपा ही वह पार्टी है, जिसने गरीबों, पिछड़ों और दलितों को सम्मान दिया है। यह उन दलों की तरह नहीं है, जो केवल इन लोगों तक पहुंचने का दिखावा करती हैं। साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही भाजपा ने इन सभी के लिए कई जरूरी कदम उठाए हैं। इस चुनाव से पहले भाजपा ने हरियाणा में अपना सीएम बदला था। उसने मनोहर लाल खट्टर को हटाकर ओबीसी नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया। फिर चुनाव में भी उन्हें ही सीएम फेस बनाया। पार्टी को इसका फायदा भी मिला है। हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिड्यूल कास्ट के लिए रिजर्व 17 में से 8 सीटें जीती हैं। यह इस आबादी का कुल 20 फीसदी है। वहीं, करीब 30 फीसदी ओबीसी वोटर भी भाजपा को मिले हैं। इस चुनाव में भाजपा का चेहरा रहे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खुद भी ओबीसी समुदाय से हैं। यह पहली बार नहीं है भाजपा ने महर्षि वाल्मिकी को दिमाग में रखकर कोई कदम उठाया है। जनवरी में उसने अध्योध्या इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मिकी के नाम पर कर दिया था। भाजपा के मुताबिक यह सत्य, नैतिकता और आध्यात्म का संदेश देने वाला होगा। इसके अलावा हरियाणा में साल 2014 में सत्ता के आने के साथ ही भाजपा ने संतों को लेकर विभिन्न कार्यक्रम शुरू कर दिए थे। अक्टूबर 2015 में खट्टर सरकार ने हरियाणा की यूनिवर्सिटी का नाम महर्षि वाल्मिकी के नाम पर कर दिया। 2016 के बाद से 17 अक्टूबर के दिन प्रदेश में वाल्मिकी जयंती मनाई जा रही है। जून 2021 में खट्टर के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने कैथल यूनिवर्सिटी को महर्षि वाल्मिकी संस्कृत यूनिवर्सिटी कर दिया था। इसी तरह जनवरी में अयोध्या में राम मंदिर उद्धाटन के मौके पर पानीपत में गोहना इंटरसेक्शन को श्रीराम चौक और रेलवे रोड इंटरसेक्शन को वाल्मिकी चौक नाम दिया गया था। अपने कार्यकाल में खट्टर ने भाजपा के लिए महर्षि वाल्मिकी के महत्व पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा था कि हमारी सरकार का मकसद अंत्योदय और सामाजिक समरसता है। भाजपा विकास कार्यों के जरिए महर्षि वाल्मिकी के राम राज्य की कल्पना को साकार कर रही है। उन्होंने कहा था कि देश को शक्तिशाली बनाने में महर्षि वाल्मिकी की शिक्षाओं का योगदान अहम है। वाल्मिकी जयंती के अलावा भाजपा सरकार ने हरियाणा में अन्य संतों को भी महत्व दिया है। जून 2022 में खट्टर ने आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास को संत कबीर कुटीर नाम दिया था। इसी साल खट्टर सरकार ने संत-महापुरुष विचार सम्मान और प्रसार योजना शुरू की। इसमें प्रदेश सरकार के कार्यक्रमों में धार्मिक नामों को पहचान दी गई।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने हरियाणा में कांग्रेस की हार के पीछे भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जिम्मेदार बताया

कुरुक्षेत्र किसान नेता और संयुक्त संघर्ष पार्टी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने हरियाणा में कांग्रेस की हार के पीछे भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस का नाश करेंगे और अब यह सच साबित हो गया है। चढूनी ने कहा कि हमें लोकसभा चुनाव में एक टिकट देने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में भूपेंद्र सिंह मुकर गए। अगर वह अभय चौटाला के साथ समझौता करते और एक टिकट देते, तो उनकी पार्टी को हरियाणा में 9 सीटें मिल सकती थीं। उनके मुताबिक विधानसभा भूपेंद्र सिंह ने उनके साथ गद्दारी की। बोले, लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि मुझे रोहतक सीट पर समर्थन कर दो। हालांकि, उन्हें पूरे हरियाणा के लिए बात करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हुड्डा ने कई बड़े नेताओं को किनारे कर दिया। किसान नेताओं से भी पल्ला झाड़ा। इनमें रमेश दलाल, हर्ष छिकारा, बलराज कुंडू, कुमारी शैलजा, किरण चौधरी, रणदीप सुरजेवाला नाम शामिल हैं। किसान नेता के मुताबिक हुड्डा सभी को किनारे करते-करते खुद किनारे लग गए हैं। मुझे विश्वास था कि राहुल गांधी ने किसान नेताओं को चुनाव में तवज्जो देने की बात की थी। प्रियंका गांधी ने भी कहा था कि किसान नेताओं को साथ रखना फायदेमंद होगा, लेकिन भूपेंद्र सिंह ने ऐसा नहीं किया। चढूनी ने कांग्रेस हाईकमान से अपील की कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष न बनाएं। उन्होंने कहा, पिछले 10 सालों में भूपेंद्र सिंह ने विपक्ष की भूमिका नहीं निभाई, जबकि किसान यूनियन ने यह भूमिका निभाई है। वहीं, किसान आंदोलन के बारे में उन्होंने कहा कि यह गलत हाथों में चला गया है। मेरी विचारधारा अब यह है कि हमें संसद या विधानसभा में पहुंचना चाहिए, ताकि हम अपनी आवाज उठा सकें। चढूनी ने कहा कि वह लोगों की जागरूकता को लेकर हैरान हैं। आज कई किसान नेता भाजपा के साथ खड़े हैं। साल 2001 में मैंने अपने पैसों से जमीन मुक्ति का काम किया, लेकिन लोग उसे भूल गए। आज वही लोग बीजेपी के साथ हैं। उन्होंने कांग्रेस पर बड़ा हमला करते हुए कहा, राजनीति में पैसे का खेल आम है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के अहंकार ने उसे नुकसान पहुंचाया है। इसके साथ ही चढूनी ने कांग्रेस को बचाने का रास्ता भी सुझाया। उन्होंने कहा कि अगर प्रियंका गांधी पार्टी की कमान संभालें, तो कांग्रेस बच सकती है। वरना, भाजपा का राज यहां से नहीं जाएगा। कांग्रेस को अपने नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर कार्रवाई करनी चाहिए। यह सबसे जरूरी है।  

BJP को आतंकी पार्टी कहने पर भड़के मोदी के मंत्री, कभी सोनिया गांधी ने बहाए थे आतंकियों के लिए आंसू

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया मिली है जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को “आतंकवादी पार्टी” कहकर संबोधित किया था। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के दौरान के आतंकी घटनाओं को जिक्र करते हुए कांग्रेस पर आतंकवाद के दोषियों के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने आतंकवादी अफजल गुरु के प्रति नरम रहने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पर हमला किया और कहा कि सोनिया गांधी ने बटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की थी। जोशी ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, “मल्लिकार्जुन खरगे ने गलती से भाजपा को आतंकवादी पार्टी कह दिया। वह यह सोनिया गांधी ही थीं जिन्होंने बटला हाउस में मारे गए आतंकवादियों के लिए आंसू बहाए थे। यह कांग्रेस ही थी जो अफजल गुरु के प्रति नरम थी। यह कांग्रेस ही थी जिसने 2004 में पोटा को निरस्त किया था। यह उनके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे जिन्होंने अलगाववादी आतंकवादियों से हाथ मिलाया था।” उन्होंने कहा, “केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही हमने आतंकवादी गतिविधियों में उल्लेखनीय गिरावट देखी है। आज कश्मीरी युवाओं के पास पत्थर नहीं बल्कि नौकरियां हैं। एक वरिष्ठ नेता के रूप में, खरगे को अपनी बातों की दोबारा जांच करनी चाहिए।” आपको बता दें कि मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की थी। खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के उस दावे को खारिज कर दिया कि कांग्रेस अर्बन नक्सलियों द्वारा नियंत्रित है। खरगे ने भाजपा पर अनुसूचित जातियों और आदिवासियों के खिलाफ हिंसा के कृत्यों से जुड़े होने का आरोप लगाया। खरगे ने कहा, “प्रगतिशील लोगों को शहरी नक्सली कहा जा रहा है। यह उनकी आदत है। उनकी पार्टी भाजपा खुद एक आतंकवादी पार्टी है। वे लिंचिंग करते हैं। अनुसूचित जातियों के सदस्यों के मुंह में पेशाब और आदिवासियों के साथ बलात्कार करते हैं। वे इन कृत्यों को करने वालों का समर्थन भी करते हैं और फिर दूसरों को दोषी ठहराते हैं।” खरगे ने आगे कहा, “जहां भी उनकी सरकार सत्ता में है वहां अनुसूचित जातियों, खासकर आदिवासियों के लोगों पर अत्याचार किए जाते हैं। फिर वे इन अत्याचारों के बारे में बात करते हैं।”

भाजपा नेतृत्व ने झारखंड और महाराष्ट्र में बदली रणनीति, हारी हुई सीटों पर बदलेगी रणनीति

नई दिल्ली भाजपा नेतृत्व ने झारखंड और महाराष्ट्र में पिछली बार हारी सीटों को लेकर खास रणनीति बनाई है। इन सीटों पर विरोधी दलों के विधायकों के खिलाफ माहौल है, जिसे वह भुनाने की कोशिश करेगी। हालांकि महाराष्ट्र में शिवसेना और राकांपा में टूट के बाद कई सीटों की स्थिति बदली है। वहां पर वह अपने हिस्से में आने वाली पिछली बार की हारी लगभग 65 सीटों पर नए समीकरण बना रही है। भाजपा झारखंड में विरोधी सत्तारूढ़ गठबंधन की लगभग 50 सीटों में से आधी जीतने को कोशिश कर रही है। इसके लिए भाजपा की अपनी टीम के साथ संघ के कुछ संगठन भी अपने स्तर पर मदद कर रहे हैं। झारखंड में भाजपा ने विधानसभा की 81 सीटों में से 25 जीती थी, जबकि जेवीएम को तीन व आजसू को दो सीटें मिली थीं। राज्य में भाजपा ने लगभग 50 हारी हुई सीटों के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए आदिवासी व गैर आदिवासी दोनों वर्गों में अपने दूसरे राज्यों के नेताओं को भी सक्रिय किया हुआ है। इनमें बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ के नेता शामिल हैं। दूसरे राज्यों के नेता अपने सामाजिक समूहों के बीच जाने के साथ दूर दराज तक की रिश्तेदारियों के जरिये गांव-गांव संपर्क कर रहे हैं। संघ से जुड़ा वनवासी कल्याण आश्रम भी परोक्ष रूप से भाजपा की सहायता कर रहा है। लोकसभा चुनाव के समय से तैयारी महाराष्ट्र में पिछली बार भाजपा व शिवसेना के गठबंधन ने 288 में से 161 सीटें जीती थीं। इनमें भाजपा की 105 सीटें शामिल थीं। बाद में गठबंधन टूट गया और अब गठबंधन सरकार में भाजपा के साथ शिवसेना का एक बड़ा धड़ा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में और राकांपा का बड़ा धड़ा उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व में उसके साथ है। सूत्रों के अनुसार भाजपा महाराष्ट्र में लगभग 170 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उसके पास लगभग 65 सीटें ऐसी होंगी जो हारी हुई हैं। उन पर जीत के लिए पार्टी ने अपनी तैयारी लोकसभा चुनाव के समय से ही कर रखी है। चूंकि भाजपा खुद सत्ता में है, ऐसे में वह काफी संभल कर चल रही है। विरोधी विधायकों को लेकर तो वह आक्रामक है, लेकिन सरकार का बचाव कर रही है।

ओवैसी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को हराने के लिए सभी को साथ लेकर चलना होगा

हैदराबाद  ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ पार्टियां चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-विरोधी मतों में सेंध लगाने के लिए उन पर (ओवैसी पर) आरोप लगाती थीं, लेकिन हरियाणा में एआईएमआईएम के उम्मीदवारों को न उतारने के बावजूद कांग्रेस कैसे हार गई? ओवैसी ने कांग्रेस पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को हराने के लिए ‘पुरानी पार्टी’ को सभी को साथ लेकर चलना होगा। तेलंगाना के विकाराबाद में  एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (भाजपा) हरियाणा कैसे जीत लिया? मैं वहां नहीं था। वरना वे ‘बी टीम’ कहते… वे वहां हार गए। अब आप ही बताइए, वे किसके कारण हारे?’’ ओवैसी ने कहा, ‘‘मैं पुरानी पार्टी (कांग्रेस) से कहना चाहूंगा कि मेरी बात समझिए, मोदी को हराने के लिए सबको साथ लेकर चलना होगा। आप अकेले कुछ नहीं कर पाओगे।’’ भाजपा ने हरियाणा में सत्ता-विरोधी लहर को मात देते हुए लगातार तीसरी बार शानदार जीत हासिल की और कांग्रेस की वापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हरियाणा में भाजपा ने 90 विधानसभा सीट में से 48 सीट जीतीं, जो सरकार बनाने के लिए 46 के जादुई आंकड़े से कहीं अधिक है।  

कांग्रेस अपने युवराज को बार-बार लॉन्चिंग पैड पर ले जाती है लेकिन वो लॉन्च नहीं होता, जनता ने उन्हें नकार दिया: गिरिराज

पटना कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतगणना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में विसंगतियों का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग को शुक्रवार को और भी शिकायतें सौंपी। वहीं, इस पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की जनता ने उन्हें नकार दिया है। ‘कांग्रेस अपने युवराज को बार-बार लॉन्चिंग पैड पर ले जाती है लेकिन…’ गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस अपने युवराज को बार-बार लॉन्चिंग पैड पर ले जाती है लेकिन वो लॉन्च नहीं होता… हरियाणा की जनता ने उन्हें नकार दिया है। वे (राहुल गांधी) संविधान की फोल्डर अपने पास रखते हैं, उनके पास फोल्डर तो है, लेकिन उनके अंदर कुछ नहीं है। वो कभी चुनाव आयोग को दोष दे रहे हैं, कभी हुड्डा को, तो कभी किसी और को और कह रहे हैं कि कश्मीर में मैं जीत गया लेकिन कहां जीते?  सच्चाई यह है कि भाजपा ने उन्हें वहां इतनी बुरी तरह हराया है कि जोकर की तरह वे जोकर का किरदार निभा रहे थे, वह खत्म हो गया है। उन्होंने 4 दर्जन सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन सिर्फ 6 सीटें जीतीं। बता दें कि बीजेपी ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई है। एग्जिट पोल में जहां कांग्रेस की सरकार बनती हुई दिख रही थी, वहीं चुनावों के नतीजों ने सबको चौंका दिया। अंतिम रुझानों में बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया और हरियाणा में बीजेपी ने 48 सीटें जीत ली।  

दिग्विजय सिंह ने कहा- जब अंग्रेजों के राज में हिंदू खत्म नहीं हुआ तो अब मोदी राज में हिदुओं को खतरा क्यों?

इंदौर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने विजयदशमी की इंदौर, मप्र और देशवासियों को शुभकामनाएं दी। इंदौर में मीडिया के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रभु राम ने रावण का वध किया उसी तरह देश में सद्भाव अन्याय और अहिंसा के लिए काम करने वालों को भगवान राम का आशीर्वाद मिले। दुर्गाअष्टमी पर कन्या पूजन को लेकर कहा कि हमने तो पहले भी कन्या पूजन किया है। आपने ध्यान नहीं दिया। शस्त्र पूजन क्षत्रिय करते रहे हैं। जो अहिंसा करे वह आज का रावण है। वहीं मोहन भागवत के बयान को लेकर कहा कि देश सभी का संविधान सभी का है, पूरे देशवासियों को एक रहने को क्यों नहीं कहते आरएसएस या मोहन भागवत। वे सनातन की बात करते हैं तो पूरा विश्व हमारा है, हमारा एक ही नारा है हम पहले भारतीय है। भारतीय संविधान और सनातन एक ही है। जब मुगलों का राज था जब अंग्रेजी का राज था तब हिंदू खत्म नहीं हुआ तो अब हिंदू सम्राट मोदी के राज में हिंदू संकट में कैसे हो सकता है। वहीं एक गरबा में गैर हिंदू की नो एंट्री को लेकर कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सभी को आमंत्रित करना चाहिए, हम ईद मिलन और होली मिलन में जाते है। गरबा गुजरात से आई संस्कृति है इसमें सभी जाए एक जुटता नजर आए। भोपाल ड्रग्स कांड को लेकर कहा कि हमारे लिए यह युवाओं के लिए खतरे को घंटी है। देश के युवाओं को तीन चीजें बिगाड़ रही है ड्रग्स, नासिक से कैप्सूल चलता है, ऑनलाइन गेमिंग से युवा बहुत अधिक लुट रहे हैं। हर कोई करोड़ पति बनाना चाहता है। इसे बंद करना चाहिए।  तीसरा शराब है इसे भी बंद होना चाहिए। सरकार की नाक के नीचे ड्रग्स बांट रहा है आप कुछ नहीं कर पा रहे। एनसीबी गुजरात की पुलिस 15 दिन से वहां थी। भोपाल पुलिस कमिश्नर को कोई जानकारी नहीं है। यह हमारे लिए बड़ा कलंक है, हमारी राजधानी में सरकार की नाक के नीचे ड्रग्स फैक्ट्री चल रही थी। इसमें गुजरात पुलिस को एमपी पुलिस पर भरोसा नहीं था, उन्हें एमपी पुलिस पर मिलीभगत का शक था। थाने में शस्त्र पूजन पर कहा कि थाने में शस्त्र पूजा पर आपत्ति नहीं है, लेकिन वहां किसी एक धर्म का आयोजन होगा तो आपत्ति है। नरेला विधायक पर भ्रष्टाचार का आरोप है, उसकी एफआईआर करवाने थाने जाने कर भाजपा द्वारा सुंदर काण्ड करवा दिया जाता है। थानों में धार्मिक अनुष्ठान हो कोई आपत्ति नहीं है न्याय सभी को मिलना चाहिए हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सबको।  

राहुल गांधी ने कहा- रेल हादसे में कितने परिवारों के तबाह होने पर जागेगी सरकार, नहीं कोई सबक लिया

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तमिलनाडु में हुए ट्रेन हादसे को लेकर शनिवार को सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जवाबदेही शीर्ष स्तर से शुरू होती है और अनेक दुर्घटनाओं के बावजूद कोई सबक नहीं लिया गया। उन्होंने यह सवाल भी किया कि आखिर कितने परिवारों के तबाह होने के बाद यह सरकार जागेगी? तमिलनाडु के पोन्नेरी-कावरापेट्टई रेलवे स्टेशनों के बीच चेन्नई-गुडूर रेलखंड पर ट्रेन संख्या 12578 मैसूर-दरभंगा एक्सप्रेस की पीछे से मालगाड़ी से टक्कर हो गई। इस हादसे में 19 लोग घायल हुए हैं। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘मैसूर-दरभंगा ट्रेन दुर्घटना भयावह बालासोर दुर्घटना को प्रतिबिंबित करती है। एक यात्री ट्रेन एक मालगाड़ी से टकरा गई। अनेक दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान चले जाने के बावजूद कोई सबक नहीं लिया जाता। जवाबदेही सबसे ऊपर से शुरू होती है।’ उन्होंने सवाल किया कि आखिर कितने परिवारों के तबाह होने के बाद यह सरकार जागेगी? बता दें कि दुर्घटनाग्रस्त दरभंगा बागमती एक्सप्रेस के यात्री शनिवार को एक विशेष ट्रेन से दरभंगा के लिए रवाना हो गए। दक्षिणी रेलवे ने यह जानकारी दी। घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश रेलवे अधिकारियों ने बताया कि घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। अभी दुर्घटनास्थल पर पटरी की मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है। रेलवे ने बताया कि ट्रेन संख्या 12578 मैसुरु-दरभंगा बागमती एक्सप्रेस 11 अक्टूबर को रात करीब साढ़े 8 बजे मालगाड़ी से टकरा गई थी। यात्रियों को बसों से पोन्नेरी और फिर 2 ईएमयू विशेष ट्रेन से चेन्नई सेंट्रल ले जाया गया। सभी यात्रियों के पहुंचने के बाद उन्हें दरभंगा जाने वाली विशेष ट्रेन में रवाना किया गया, जो अराक्कोणम, रेनीगुंटा और गुडुर से होकर गुजरेगी। यात्रियों को भोजन के पैकेट और पानी उपलब्ध कराया गया और विशेष ट्रेन सुबह 4 बजकर 45 मिनट पर रवाना हो गई। ट्रेनों के समय और रूट में हुआ बदलाव इस बीच, दक्षिणी रेलवे ने इस मार्ग से गुजरने वाली सभी ट्रेनों का रास्ता बदल दिया है। विशाखापत्तनम एक्सप्रेस को 12 अक्टूबर को सुबह 10 बजे डॉ. एमजीआर चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन से रवाना होना था, लेकिन उसका समय बदलकर अब दोपहर साढ़े 12 बजे कर दिया गया है। इसका मार्ग अराक्कोणम, रेनीगुंटा और गुडुर की ओर परिवर्तित कर दिया गया है। घटनास्थल पर पटरी की मरम्मत का काम तेजी से हो रहा है। दक्षिणी रेलवे के महाप्रबंधक, अतिरिक्त महाप्रबंधक, विभागों के प्रमुख और रेलवे के अन्य अधिकारी घटनास्थल पर मरम्मत कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं। गंभीर रूप से घायल 3 यात्रियों को स्टेनली मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और 4 यात्रियों का पोन्नेरी के सरकारी अस्पताल में उपचार किया गया, उन्हें मामूली चोटें आई थीं।

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