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धोखाधड़ी के केस में भाजपा विधायक पर कार्रवाई करे जबलपुर पुलिस – “हाईकोर्ट”

हाईकोर्ट ने कहा- धोखाधड़ी के केस में भाजपा विधायक पर कार्रवाई करे जबलपुर पुलिस जबलपुर ! हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पनागर से भाजपा विधायक सुशील तिवारी इंदु व किशोर रावत के विरुद्ध शिकायत से जुड़े एक मामले में जबलपुर पुलिस को जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जांच के बाद यदि पाया जाता है कि विधायक ने संज्ञेय अपराध किया है तो पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई करे। याचिका जबलपुर निवासी रीतेश तिवारी ने दायर की थी। जिसके मुताबिक विधायक और फरियादी ने इसकी शिकायत गोहलपुर थाने में की, लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की। याचिकाकर्ता के मुताबिक इस मामले में आईपीसी की धारा 420, 406, 467, 468, 471 के तहत कार्रवाई की जानी थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि वह शिकायत की प्रारंभिक जांच करे। उनके साथी किशोर रावत ने चेक की राशि धोखाधड़ी से अपने खाते में ट्रांसफर कर ली थी।

कलेक्ट्रेट में पटवारियों ने किया प्रदर्शन:

Patwaris demonstrated in the Collectorate: जबलपुर ! पंजीयन के सत्यापन में बरती गई लापरवाही को लेकर जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने गुरुवार को तत्कालीन एसडीएम और मझौली के प्रभारी तहसीलदार सहित दो पटवारियों को निलंबित कर दिया। कलेक्टर की इस कार्रवाई को लेकर सैकड़ों पटवारियों ने आज कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और कलेक्टर से मिलकर पटवारियों पर हुई कार्रवाई को गलत बताया। करीब आधे घंटे तक कलेक्टर ने पटवारियों की बात सुनी और आश्वासन दिया कि इसकी जांच करवा ली जाएगी।धान फर्जीवाड़े को लेकर जबलपुर कलेक्टर ने तत्कालीन एसडीएम धीरेंद्र सिंह एवं मझौली के प्रभारी तहसीलदार आदित्य जंघेला को आरोप पत्र दिया है, साथ ही दो पटवारी राहुल पटेल और अभिषेक विश्वकर्मा को निलंबित कर दिया। कलेक्टर की कार्रवाई को लेकर पटवारियों का कहना है कि धान खरीदी मैं राजस्व विभाग के कर्मचारियों का सीधा कहीं कोई दखल नहीं होता किसान अपनी उपज का रजिस्ट्रेशन सहकारी समितियां में करवाता है, इन सहकारी समितियां के कंप्यूटर ऑपरेटर और पंजीयन किसान की फसल का रजिस्ट्रेशन करते हैं, और यहीं पर किसान जमीनों के सिकमी नामे को जमा करता है l किसानों के जो भी रजिस्ट्रेशन किए जाते हैं, उनके माध्यम से वेरीफाई कर दिया जाता है। इसमें केवल 10% केस ही भौतिक रूप से सत्यापन के लिए आते हैं, जिन्हें पटवारी को सत्यापित करना होता है lजबलपुर में धान खरीदी में जो घोटाला हुआ उसमें कुछ स्थानों पर 35% जमीन सिकमी नाम के माध्यम से रजिस्ट्रेशन में दर्शाई गई है, मतलब इस जमीन पर जमीन का मालिक खेती नहीं कर रहा है, बल्कि उसने किसी को किराए से दी है और इसी किराए की जमीन की उपज लेकर किसान खरीदी केंद्र में गया। लगभग 50 हजार क्विंटल धान उन खरीदी केंद्रों पर पहुंची है, जिन खरीदी केंद्र को सरकार ने खरीदी करने की अनुमति नहीं दी थी। यही धान अब खरीदी केंद्र के बाहर लावारिस ढंग से पड़ी हुई है इसमें कई किसान भी फंस गए हैंपटवारी संघ के अध्यक्ष जागेश्वर पीपरे का कहना है कि कलेक्टर से मुलाकात कर उन्होंने कहा कि ये गलती पटवारियों की नहीं बल्कि व्यवस्था की लापरवाही है। उन्होंने बताया कि जब तक सिकमीनामे की हार्ड कापी नहीं मिलेगी तब तक हम कैसे मालूम होगा। तहसील कार्यालय में सिकमी नामे की एक कॉपी होना चाहिए था, पर जब से सिकमी नामा अधिनियम बना है तब से लेकर आज तक एक कॉपी भी नहीं है। पटवारियों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में हम लगे हुए थे, इसके बाद भी हमने कार्रवाई गलत नहीं है। कलेक्टर ने मामले पर कहा जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने मामले पर कहा कि पटवारियों ने मुझसे मुलाकात कर बताया कि चुनाव ड्यूटी के कारण कुछ काम छूट गया था, वहीं यह भी देखा गया है कि पटवारियों को जानकारी देने में भी कुछ गलती हुई है। पटवारियों ने अपनी कुछ मजबूरियां भी बताई है, जिसको देखा जा रहा है। निलंबन को लेकर कलेक्टर ने कहा कि पटवारियों की लापरवाही ये है कि उन्हें जिस सिकमी नामे का वेरिफिकेशन नहीं करना था, उसका भी करके पास कर दिया गया है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को मिले तीन नए न्यायाधीश, नियुक्त की अनुशंसा

Madhya Pradesh High Court gets three new judges, recommendation for appointment मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए न्यायिक अधिकारी रामकुमार चौबे, एडवोकेट दीपक खोत और एडवोकेट पवन कुमार द्विवेदी के नामों की अनुशंसा। जबलपुर। भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए न्यायिक अधिकारी रामकुमार चौबे के नाम की अनुशंसा केंद्र सरकार से की है। मप्र हाई कोर्ट में 40 न्यायाधीश नियुक्तवर्तमान में मप्र हाई कोर्ट में 40 न्यायाधीश नियुक्त हैं। जबकि कुल स्वीकृत पद 53 हैं। लिहाजा, तीन जज बढ़ने से कुल जज 43 हो जाएंगे। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट कालेजियम की अनुशंसा पर राष्ट्रपति की मुहर की प्रतीक्षा है।

हिट एंड रन कानून के विरोध में ड्राइवरों द्वारा चक्का जाम हड़ताल

Chakka jam strike by drivers in protest against hit and run law केंद्र सरकार के तीन कृषि काले कानून के बाद हिट एंड रन कानून के विरोध में ड्राइवरों द्वारा चक्का जाम हड़ताल दिनेश राज शर्मा जबलपुर ! केंद्र सरकार ने तीन कृषि काले कानून के बाद हिट एंड रन कानून के विरोध में गाड़ी चलाको, ड्राइवरों ने चक्का जाम कर हड़ताल पर बाघ्य हुए सरकार ने बिना सोचे समझे मोटर कानून में बदलाव करके चालक से एक्सीडेंट होने पर 10 साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना का प्रावधान किया जाना पूर्णतःगलत है कोई भी ड्राइवर या गाड़ी चालक जानबूझकर एक्सीडेंट नहीं करता जब गाड़ी का मालिक गाड़ी का इंश्योरेंस कराकर हर साल 25 से ₹30000 इसलिए चुकता है, कि रिस्क कवर हो गाड़ी का इंश्योरेंस है तो ड्राइवर से 5 लाख का जुर्माना लेने का प्रावधान क्यों किया गया?कांग्रेस पूर्व प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ने जो इंश्योरेंस कंपनियों का प्राइवेटीकरण किया है उसको फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से एक तरफा कानून में बदलाव कर गाड़ी मालिक और ड्राइवर का गाड़ी का चक्का जाम के लिए मजबूर किया।कांग्रेस नेता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि सोशल मीडिया पर ट्रक ड्राइवर एवं बस चालक सोशल मीडिया पर हड़ताल पर जाने की विगत कई दिनों से चेतावनी दे रहे थे उसके बावजूद शासन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। और आम जनता को पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की कमी से जूझने के लिए मजबूर कर दिया। अभी तो शुरुआत है शासन प्रशासन से मांग है कि ड्राइवर की मांगों पर तत्काल ध्यान दें । और आम जनता को राहत पहुचाने आवश्यक कदम शीघ्र उठाये।

जबलपुर धान खरीदी घोटाला जिम्मेदार कौन

Who is responsible for Jabalpur paddy purchase scam धान खरीदी में फर्जीवाड़े से नाराज किसानों ने घंटों लगाया जाम उदित नारायणभोपाल ! आज जबलपुर में सैकड़ो किसान धान खरीदी के भुगतान के लिए सड़क पर चक्का जाम कर रहे हैं. जिला प्रशासन की नाक के नीचे हुए धन उपार्जन घोटाले के लिए जबलपुर से लेकर भोपाल तक हड़कंप मचा हुआ है. इस पूरी प्रक्रिया में जिला प्रशासन की लापरवाही सर्वाधिक है, परंतु जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ जयंती सिंह ने सारा ठीकरा जिला फूड कंट्रोलर कमलेश ताडेकर, जिला विष्णन अधिकारी रोहित सिंह बघेल, एमपी वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन डी के हवलदार, सिहोरा ब्रांच मैनेजर बीके पाठक, पाटन ब्रांच मैनेजर आनंद पांडे, शाहपुर ब्रांच मैनेजर ऋतिक सिनाटिया, रिछाई ब्रांच मैनेजर एम.के उपाध्याय को निलंबित किया गया है. कल जिला प्रशासन द्वारा आनन फानन में 36 वेयरहाउस संचालकों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया. वही प्रदेश शासन ने वेयरहाउसिंग के सहकारिता प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव को ट्रांसफर कर दिया है. हजारों किसानों की फसल की बंदरवाट करने के लिए दोषियों को जिस प्रकार संरक्षण दिया जा रहा है उससे यह स्पष्ट है कि इस पूरे घोटाले को सत्ता पक्ष का संरक्षण प्राप्त है. जमीनी हकीकत यह है कि जिले में धान के उपार्जन के लिए कमेटी के अध्यक्ष जिला कलेक्टर होते हैं. जिला प्रशासन द्वारा उपार्जन केन्द्रो की सूची खरीद के निर्धारित व घोषित तिथि 3 दिसंबर के पूर्व जारी क्यों नहीं की, धान खरीदी के लिए प्रभारी अधिकारी जिला पंचायत सीईओ उपार्जन तिथि से शिकायत की तिथि तक क्या कर रही थी, 36 केन्द्रो व तीन तहसीलों के क्षेत्र में जब उपार्जन का व्योरा तक अपलोड नहीं किया, तो प्रदेश शासन के जिम्मेदार अधिकारी की नींद क्यों नहीं खुली जिला कलेक्टर के द्वारा धान खरीदी जैसे कृषक हित के कार्यों में घनघोर लापरवाही किसके दबाव में की इन सभी सवालों के बीच किसान अपनी फसल के भुगतान के लिए सड़कों पर है. जिला कलेक्टर सारे घोटाले पर पर्दा डालने में सक्रिय है. वेयरहाउसिंग संचालकों को ब्लैक लिस्ट करने के जगह उनके विरुद्ध एफ.आई.आर की कार्यवाही कब तक की जाएगी. हजारों किसानों का यही सवाल है लगभग जबलपुर जिले की 75% उपज पर डाका डालने की साजिश पर खुद को किसान हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार के लिए कठिन कार्य साबित होता जा रहा है. “अब देखना यह है कि जन हितैषी भाजपा सरकार दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करतीं हैं या फिर कर्मचारियों की ग़लती मानकर सारे मामले को रफा-दफा करतीं हैं ! साथ ही हितग्राही किसानों को भुगतान कैसे किया जाऐगा ?

जिसका सीएम ने मंच से तबादला किया उसके हाथ जबलपुर का उपार्जन.

The one whose transfer was announced by the Chief Minister, has been assigned to Jabalpur. विशेष संवाददाता, सहारा समाचार, जबलपुर.  जबलपुर धान उपार्जन में मुख्यमंत्री के निर्देश पर फूड कंट्रोलर कमलेश टांडेकर की बर्खास्त्गी के बाद निलंबन का क्रम जारी है।इस सनसनीखेज मामले में लगातार भोपाल स्तर पर कठोर कार्यवाही से हड़कंप मचा हुआ है।इस बीच यह चर्चा भी गर्म है कि उपार्जन समिति के सदस्य होते है उपायुक्त सहकारिता। जब नियमानुसार सहकारी समितियों को केंद्र बनाया जाना था या एक समिति को दो केंद्र दिए जाने थे तो देरी सहकारिता विभाग से हुई है।उपार्जन और कमीशन से सहकारी समितियों के आर्थिक हित जुड़े होते है।अब फूड कंट्रोलर के सस्पेंड होने के बाद दो केंद्र बनाने की कार्यवाही हो रही जबकि सहकारिता विभाग को शुरू से ही सहकारी संस्थाओं को आगे बढ़ाना था।सहकारी संस्थाओं को केंद्र बनाने के प्रस्ताव तो सहकारिता विभाग की होती है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान उपायुक्त सहकारिता निगम उपार्जन में गड़बड़ी के चलते केवलारी विधायक के तत्कालीन मुखमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंच से सिवनी से भोपाल ट्रांसफर किए गए थे।जबलपुर का घोटाला सहकारिता विभाग की शिथिलता का मामला है।ऐसी नव निर्मित संस्थाओं को उपार्जन दिया गया है जिनके कार्यालय और निर्वाचन की जानकारी भी नही मिलती।अखिलेश निगम की भूमिका की जांच होनी चाहिए।इस संबंध में कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के शिव चौबे ने जिला कलेक्टर को संबोधित एक ज्ञापन बुधवार को संयुक्त आयुक्त सहकारिता को सौंपा।उन्होंने आयुक्त सहकारिता और प्रमुख सचिव से उचित कार्यवाही की मांग की है।

ग्वालियर, जबलपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी

Preparation to implement police commissioner system in Gwalior, Jabalpur, decision may be taken in January भोपाल ! प्रदेश में भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के बाद राज्य सरकार जल्द ही जबलपुर और ग्वालियर में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करेगी। गृह विभाग ने इसके संकेत दिए हैं कि इस मामले में जनवरी में ही सरकार निर्णय ले सकती है। उधर दोनों ही जिलों के पुलिस अधीक्षक को भी मैसेज किया गया है कि सरकार इसको लेकर जल्द फैसला करेगी। साथ ही आवश्यक जानकारी लेने का काम भी जिलों से शुरू किया गया है। बीजेपी के संकल्प पत्र 2023 में ग्वालियर और जबलपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की बात कही गई है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ हुई पहली बैठक में साफ कहा है कि संकल्प पत्र का हर वादा पूरा करना है और इसके लिए सभी विभागों से सात दिन में आवश्यक कार्ययोजना तैयार कर सीएम सचिवालय में देने के लिए कहा गया था। सूत्रों का कहना है कि वैसे तो संकल्प पत्र में पुलिस कमिश्नर प्रणाली सरकार बनने के बाद दो साल में लागू करने के लिए कहा गया है लेकिन इसके लिए किसी तरह के अतिरिक्त बजट की जरूरत नहीं है। इसलिए संकल्प पत्र को लेकर सीएम यादव द्वारा दिए गए निर्देश के बाद माना जा रहा था कि इस पर शीघ्र फैसला होगा। अब गृह विभाग ने इसको लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ट्वीट भी किया है। इसमें कहा गया है कि मोदी की गारंटी यानी गारंटी पूरी होने की गारंटी, हर नागरिक की सुरक्षा का संकल्प है। जल्द ही ग्वालियर और जबलपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होगी। इस ट्वीट के बाद यह माना जा रहा है कि मोहन यादव सरकार लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले इन दोनों ही जिलों में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर सकती है।

धान उपार्जन में लापरवाही एक और अफसर पर पड़ी भारी: जबलपुर के प्रभारी फूड कंट्रोलर के बाद अब प्रबंधक व जिला विपणन अधिकारी भी सस्पेंड

Negligence in paddy procurement fell heavily on another officer: After the food controller in-charge of Jabalpur, now the manager and district marketing officer are also suspended. सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। उदित नारायण भोपाल ! राज्य शासन ने जिला विपणन अधिकारी और मंडल प्रबंधक जबलपुर रोहित सिंह बघेल को भी सस्पेंड कर दिया है। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक आलोक कुमार सिंह ने की है। प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी नीति के अनुसार धान उपार्जन का कार्य नहीं कराया गया है। अधिकारी की लापरवाही के चलते शासन के समक्ष संघ की छवि धूमिल हुई है। इसलिए बघेल को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबन अवधि में बघेल का मुख्यालय विपणन संघ भोपाल तय किया गया है। मंगलवार को प्रभारी फूड कंट्रोलर हुए थे सस्पेंड इससे पहले मंगलवार को खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया था। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है। आदेश में कहा था कि जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। राज्य शासन ने जबलपुर के फूड कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया है। मोहन यादव कैबिनेट के गठन के बाद शासकीय काम में लापरवाही के मामले में की गई यह पहली कार्रवाई है। खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया है। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है।विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के लिए जारी की गई नीति के मुताबिक ई-उपार्जन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से एक दिसंबर 2023 तक उपार्जन कार्य कराया जाना था। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ एनआरएलएम में रजिस्टर्ड महिला स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र के संचालन का काम देने के निर्देश 29 नवंबर को जारी किए गए थे। इसमें जिला उपार्जन समिति के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को उपार्जन केंद्र की अनुमति का प्रस्ताव खाद्य संचालनालय को भेजा जाना था। जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। इस संबंध में न तो प्रभारी फूड कंट्रोलर द्वारा संचालनालय को जानकारी दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर जनहित का काम किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। आजीविका समिति की जाँच कराने की माँग कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शित्रकुमार चौबे ने जिले में कुछ आजीविका समितियों का फर्जी तरह से कार्य करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि पंजीयन के 6 माह के अंदर समितियों के निर्वाचन के प्रस्ताव चले जाने चाहिए मगर पिछले 2 साल से किसी भी एक समिति का चुनाव प्रस्ताव कार्यालय उपायुक्त सहकारिता से नहीं गया है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्वाचन नहीं होता है तो तत्काल विभाग को किसी शासकीय कर्मचारी को प्रशासक बना देना चाहिए, मगर कार्यालय के स्तर पर इस तरह की भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें क्यों छोड़ा गया धान खरीदी की जाँच का जिम्मा तमाम एसडीएम को दिया गया था, खाद्य विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल थे, वहीं वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफेड के अधिकारियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत भी खरीदी केन्द्र की जाँच के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन 1 दिसम्बर से अभी तक केवल लोकायुक्त ने ईमानदारी से कार्य किया और रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा, बाकी किसी ने भी किसी केन्द्र में कोई जाँच नहीं की। सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। रातों-रात गायब हुई धान जानकारों का कहना है कि जैसे ही वेयरहाउस संचालकों को यह पता चला कि जाँच दल आ रहा है तत्काल ही बिना अनुमति खरीदी करने वाले वेयरहाउसों से धान को गायब करवाया गया। यहाँ तक की कई वेयरहाउसों में जाँच दल पहुँच भी गया था लेकिन एप्रोच लगाकर जाँच दल को रोका गया और उनकी मौजूदगी में ही धान गायब करवाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी बारदानों यानी बोरों में बिना अनुमति खरीदी हुई, यह कैसे हुआ कोई बताने तैयार नहीं। रातभर बाहर किया धान, फिर भी अंदर रखा मिला 30 हजार क्विंटल प्रमुख सचिव … Read more

फर्जी उपार्जन केंद्रों पर बड़ी कार्यवाही, फूड कंट्रोलर सस्पेंड, सीएम मोहन यादव ने लिया संज्ञान.

Major crackdown on fake purchasing centers, Food Controller suspended; CM Mohan Yadav takes cognizance. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Jabalpur. जबलपुर । नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्रालय भोपाल द्वारा मंगलवार की शाम जबलपुर के फूड कंट्रोलर कमलेश टांडेकर को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्हें उपार्जन केंद्रों की स्थापना में हुई देरी और अनियमियता का दोषी पाया गया है। जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है। इसके अलावा जो 20 सदस्य जांच दल जबलपुर आया हुआ था उसने भी अपनी रिपोर्ट मेल के माध्यम से मुख्यालय में भेज दी है जिसके बाद मंगलवार देर रात या बुधवार को और भी बड़ी कार्यवाहियां हो सकती हैं। जिसमें कुछ गोदाम को ब्लैकलिस्टेड करने की बात सामने आ रही है। इस पूरे मामले की गंभीरता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि वल्लभ भवन से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा इस पूरे मामले की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों से मांगी गई है जबकि जबलपुर आई टीम के द्वारा अपनी रिपोर्ट दे दी गई है। ऐसे में सीएम को वास्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा।

क्रिसमस डे, का धीरेंद्र कृष्‍ण शास्त्री ने किया विरोध

Dhirendra Krishna Shastri opposed Christmas Day सांता क्लाज बनाने की जगह बच्चों को राम मंदिर लेकर जाओ, धीरेंद्र कृष्‍ण शास्त्री ने कहा उन्होंने ईसाई पूजा पद्धति पर टिप्पणी करते कहा कि जब दो प्रतिशत लोग हमारी रामनवमी नहीं मनाते तो हम 98 प्रतिशत लोग उनका त्योहार क्यों मनाएं। कटनी ! बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सोमवार को यहां पुरैनी में बागेश्वर धाम आश्रम का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में उन्होंने ईसाई पूजा पद्धति पर टिप्पणी करते कहा कि जब दो प्रतिशत लोग हमारी रामनवमी नहीं मनाते तो हम 98 प्रतिशत लोग उनका त्योहार क्यों मनाएं। सांता क्लाज को सांता क्रूज़ में भेज दिया जाए। क्रिसमस पर सांता क्लाज बनाने की जगह बच्चों को राम मंदिर लेकर जाओ, तिलक लगाओ, बच्चों को वहां गिफ्ट दो।इससे तुम्हारी पीढ़ी व पूर्वज प्रसन्न होंगे, बालक संस्कारी बनेगा। उन्होंने कहा कि हम किसी मजहब के विरोधी नहीं हैं। हकीकत है कि हम अपने धर्म के कट्टर हैं। 22 जनवरी को भगवान श्रीराम अयोध्या में विराजित हो रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है।

सहकारी समिति प्रबंधक को रिश्वत लेते लोकायुक्त ने दबोचा

Lokayukta caught cooperative society manager taking bribe धान तुलाई के नाम पर किसान से रिश्वत ले रहे सहकारी समिति के प्रबंधक को लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने बुधवार को एक होटल से दबोचा। जबलपुर‌‌। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि डुमारी लाल यादव पिताश्री रतिराम यादव उम्र 54 वर्ष निवासी ग्राम छत्तरपुर ने लिखित शिकायत दी थी कि वह एवम् उनके पुत्र कृष्ण यादव की लगभग 300 क्विंटल धान सेवा सहकारी संस्था छतरपुर में तौल के लिए रखी गई। धान तुलाई मजदूरी शासन द्वारा देय होती है। उक्त धान की तौल की प्रति क्विंटल ₹35 के हिसाब से सेंटर एवं स्वयं के लिए 5 से ₹10 प्रति क्विंटल की दर से ₹15000 की रिश्वत समिति प्रबंधक पनागर नवल किशोर खंपरिया द्वारा मांग की जा रही है।जिसके शिकायत का सत्यापन कराया गया। मोल भाव पर ₹9000 लेना तय हुआ। जिसके बाद आज बुधवार को वेदांत होटल जबलपुर -कटनी राष्ट्रीय राजमार्ग पर समिति प्रबंधक पनागर नवल किशोर खंपरिया को ₹9000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।ट्रैप दल में उप पुलिस अधीक्षक सुरेखा परमार , निरीक्षक भूपेंद्र कुमार दीवान, निरीक्षक कमल सिंह उईके एवं 5 सदस्यीय दल शामिल था।

शून्य दुघर्टना सर्वोच्च लक्ष्य एम पी ट्रांसकों की समीक्षा बैठक में – एम.डी. श्री सुनील तिवारी

Zero accident is the highest goal, in the review meeting of MP Trans, MD Shri Sunil Tiwari Special Correspondent, Sahara Samachaar, Jabalpurजबलपुर ! एम पी ट्रांसकों के प्रबंध संचालक इंजी. सुनील तिवारी ने मैदानी अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली एवं उन्हें यह सख्त निर्देश दिये कि कंपनी के सभी कार्यों में पूर्ण सावधानी रखी जावे एवं शून्य दुघर्टना ही हमारा सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए। इस हेतु आवश्यक सभी कदम उठाये जावें । इंजीनियर सुनील तिवारी ने विगत विधानसभा चुनावों के दौरान संपूर्ण मध्यप्रदेश में व्यवधान रहित विद्युत आपूर्ति के लिये कंपनी के सभी कार्मिकों को बधाई देते हुए कहा कि इसी प्रकार आगामी रबी सीजन में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जावे । उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आप विधानसभा चुनावों के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति की परीक्षा में खरे उतरे उसी प्रकार आगामी लोकसभा चुनावों के दौरान भी व्यवधान रहित विद्युत आपूर्ति हेतु आवश्यक संधारण कार्य पूर्ण किये जावें ताकि कंपनी पुनः अपने लक्ष्य में खरी उतर सके । इस समीक्षा बैठक में एम पी ट्रांसको के संपूर्ण मध्यप्रदेश के अधिकारी तथा मुख्यालय में पदस्थ अधिकारी उपस्थित थे।

तेंदुआ की खाल सहित दो तस्कर मंडला पुलिस ने किया गिरफ्तार.

Mandla police arrested two smugglers with leopard skin. मंडला ! थाना बिछिया पुलिस को सूचना मिली थी की बालाघाट निवासी दो व्यक्ति तेन्दुआ की खाल लेकर आटो रिक्शा स्टेण्ड ग्राम सिझौरा में जबलपुर जाने के लिये बस का इंतजार कर रहे हैं। उक्त सूचना पर पुलिस अनुविभाग अधिकारी बिछिया के निर्देशन में थाना प्रभारी बिछिया धर्मेन्द्र धुर्वे के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए रेड कार्यवाही बताये गये स्थान ग्राम सिझौरा हाई वे स़्थित बस स्टैंड पर जबलपुर जाने के लिये बस का इंतेजार कर रहे दो व्यक्ति बताये गये हुलिया के मिले उनके पास बैग के अंदर वन्य जीव तेंदु‌आ का खाल मिला। जिनसे पूछताछ के दौरान एक व्यक्ति ने अपना नाम आकाश धुर्वे पिता रामलाल धुर्वे उम्र 22 साल निवासी डोडियाटोला थाना मलाजखण्ड जिला बालाघाट तथा उसके साथ दूसरा व्यक्ति काले रंग की बेकेट पहना हुआ था उसने अपना नाम रंजन धुर्वे पिता शंकर सिंह धुर्वे उम्र 31 वर्ष निवासी बाकीगुड़ा थाना मलाजखण्ड जिला बालाघाट का रहने वाला बताये। जिनसे उक्त तेंदुआ के खाल के रखने के संबंध में दस्तावेज के बारे में पूछा गया जो कोई दस्तावेज नहीं होना बताये हैं। उक्त आरोपियों पर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए आरोपी से तेंदुआ की खाल जप्त किया जाकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आरोपियों का कृत्य धारा- 2,9.39.49 (B),50 51 वन्य प्राणी संरक्षण धिनियम 1972 के तहत अपराध का पाये जाने से थाना बिछिया में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। गिरफ्तार सुदा आरोपियों को आज दिनाँक को माननीय न्यायालय बिछिया पेश किया गया। जिन्हे न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया।उक्त संपूर्ण कार्यवाही थाना प्रभारी बिछिया के नेतृत्व में उनकी टीम जिसमें उप निरीक्षक जगदीश पंद्रे स.उ.नि. धनपाल बिसेन, आर, सुनीराम मरावी चा. आर. धनेश मरावी से महावीर झारिया एवं थाना बिछिया में आये वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो से सराहनीय योगदान रहा।

अपर सचिव वन के खिलाफ लोकायुक्त में मामला दर्ज.

A case has been filed against the Deputy Secretary of Forests in the Lokayukta. लोकायुक्त संगठन तत्कालीन छतरपुर डीएफओ एवं वर्तमान अवर सचिव वन अनुराग कुमार के खिलाफ वायरबेड और चैनलिंक खरीदी में अनियमित किए जाने पर प्रकरण पंजी बात कर लिया है। जांच की जिम्मेदारी एसपी सागर लोकायुक्त को दी गई है। लोकायुक्त संगठन ने वन विभाग को पत्र लिखकर खरीदी से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के बार-बार निर्देश दिए जा रहे है किन्तु विभाग दस्तावेज उपलब्ध कराने में टालमटोल कर रहा है। उज्जैन एसपी लोकायुक्त ने 3 साल पहले एपीसीसी सत्यानंद के खिलाफ प्रकरण पंजीबद किया था। इसके बाद से सत्यानंद से संबंधित जांच आगे नहीं बढ़ पाई। इसके अलावा खरगोन डीएफओ प्रशांत कुमार, इको टूरिज्म बोर्ड में पदस्थ साहिल गर्ग सहित आधा दर्जन आईएफएस अधिकारियों के खिलाफ जांच लंबित है किंतु फैसला अभी तक नहीं लिया जा सका है। मैं इस मामले को दिखवाता हूं। कमल अरोरा सीसीएफ जबलपुर

एचडीएफसी बैंक जबलपुर शाखा द्वारा 46 केंद्रों में रक्तदान अभियान के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया.

HDFC Bank’s Jabalpur branch collected 4661 units of blood across 46 centers through a blood donation campaign. भोपाल! भारत का अग्रणी निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक ने शुक्रवार 8 दिसंबर, 2023 से शुरू होने वाले अपने राष्ट्रव्यापी रक्तदान अभियान के 15वें संस्करण का आयोजन जबलपुर के विजय नगर शाखा में किया। अपने प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम परिवर्तन के तहत भारत के 1200 शहरों में 6,000 केंद्रों पर रक्तदान शिविर का संचालन किया गया। रक्तदान शिविर का उद्घाटन निर्मला देवी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के संस्थापक श्री मुनेंद्र मिश्रा जी के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। श्री मिश्रा ने एचडीएफसी बैंक द्वारा किए जा रहे रक्तदान शिविर की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बैंक व्यवसायिक दायित्वों के निर्वाह के साथ साथ सामाजिक दायित्व के निर्वहन में भी देश का नंबर वन बैंक बन चुका है। एचडीएफसी बैंक के सर्किल हेड श्री अनूप शर्मा ने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि इस दान से बड़ा और कोई दान नहीं हो सकता। श्री शर्मा ने शहर के सभी युवाओं को स्वेच्छा से रक्तदान करने का आग्रह किया। गत माह में एचडीएफसी बैंक के जबलपुर सर्किल के द्वारा 45 विभन्न कैंपों के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया गया। एचडीएफसी बैंक अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, कॉरपोरेट्स, रक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों सहित विभिन्न प्रकार के रक्त दानदाताओं को जुटाने के लिए तैयार है। इस साल एक अनोखे दृष्टिकोण में एचडीएफसी बैंक ने लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए ‘फीलिंग ऑफ सेविंग समवन नामक एक फिल्म लॉन्च की है। फिल्म व्यक्तियों को इस जीवन रक्षक कार्य में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करती है और रक्तदान की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देती है। यह फिल्म बैंक के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज की जाएगी, यह जनता के बीच उनके योगदान के प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करेगा और अभियान में बड़े पैमाने पर रक्तदान के लिए प्रेरित करेगा। एचडीएफसी बैंक के कार्यकारी निदेशक, श्री भावेश ज़वेरी ने कहा, “एचडीएफसी बैंक में हम लोगों को इस प्रयास में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने में बहुत गर्व महसूस करते हैं, क्योंकि दान किए गए रक्त की हर बूंद एक संभावित जीवन रक्षक है। अपने 15वें अखिल भारतीय रक्तदान अभियान के साथ हम नागरिकों को इस नेक काम में भाग लेने और अपना योगदान देने के लिए एक मंच देना चाहते हैं।” यह पहल 2007 में केवल 88 केंद्रों और 4000 दानदाताओं के साथ शुरू की गई थी जो केवल बैंक कर्मचारियों के बीच ही चलाई गई थी। पिछले कुछ वर्षों में इस अभियान का दायरा बढ़ा दिया गया और इसमें कॉलेज के छात्रों, कॉरपोरेट्स और सेना और सेवा कर्मियों को शामिल किया गया। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्डसा” से सबसे बड़े (सिंगल डे, मल्टीपुल वेन्यू) रक्तदान अभियान के रूप में मान्यता और प्रमाणन प्राप्त हुआ। 2022 में बैंक ने 25 लाख यूनिट से अधिक रक्त एकत्र किया। कुछ महत्वपूर्ण दानकर्ता 1500- कॉलेजों, 550 कॉरपोरेट्स और 105- रक्षा और सेवा कर्मियों से आए जिन्होंने रक्तदान अभियान में भाग लिया। एचडीएफसी बैंक के रक्तदान अभियान के बड़े पैमाने और व्यापक आधार ने देश के समग्र रक्त संग्रह को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।रक्तदान शिविर का संचालन जबलपुर शाखा के ऑपरेशन प्रबंधक श्री लीजू जोसेफ ने किया एवं समस्त स्टाफ ने स्वेच्छा से रक्तदान करने आए बैंक के ग्राहकों एवं युवा वर्ग का आभार व्यक्त किया।

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