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योजना के परिणामों का मैदानी स्तर पर हो मूल्यांकन- राज्यपाल श्री पटेल

भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि व्यक्तिगत और सामुदायिक योजना के परिणामों का मूल्यांकन मैदानी स्तर पर किया जाए। वंचित और छूट रहें व्यक्तियों और क्षेत्रों तक विकास की योजनाओं की पहुँच को सफलता का पैमाना माना जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजना को पहुँचाने के प्रयास किए जाने चाहिए। मॉनिटरिंग का भी यही लक्ष्य होना चाहिए। राज्यपाल श्री पटेल आज जनजातीय प्रकोष्ठ के द्वारा संयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक का आयोजन दो सत्रों में किया गया था। प्रथम सत्र में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और आयुष विभाग की समीक्षा की गई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार मौजूद थे। द्वितीय सत्र में जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं पर चर्चा की गई। जेनेटिक कार्ड वितरण में युवाओं को दें प्राथमिकता- राज्यपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि स्क्रीनिंग के दौरान सिकल सेल प्रभावितों की अधिक संख्या वाले चिन्हित क्षेत्रों और 20 से 30 वर्ष की आयु समूह की स्क्रीनिंग के कार्य को व्यापकता प्रदान की जाए। जांच का कार्य तेज गति से किया जाए। गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व और प्रसव के 72 घन्टों के भीतर जांच हो। इस संबंध में विभाग द्वारा कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। चिन्हित वाहक और रोगियों को प्राथमिकता के साथ जेनेटिक कार्ड उपलब्ध हो। रोगी और वाहक को तत्काल उचित औषधि उपलब्ध हो। वाहक और रोगी नियमित रूप से औषधि लें। इसकी मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है। मॉनिटरिंग के लिए सामुदायिक जन जागृति के प्रयास आवश्यक हैं। जरूरी है कि घर-घर जाकर इस संबंध में सीधा संपर्क और संवाद कायम किया जाए। उन्होंने मैदानी अमले का संवेदीकरण कर, उनके माध्यम से जन जागरण के प्रयासों के लिए निर्देश दिए है। सिकल सेल उन्मूलन में आयुष की विभिन्न पद्धतियों का तुलनात्मक परीक्षण हो राज्यपाल श्री पटेल ने आयुष विभाग की चर्चा के दौरान कहा कि सिकल सेल रोग प्रबंधन और उपचार में होम्योपैथी, आयुर्वेद और योग की भूमिका के संबंध में विभाग द्वारा किए जा रहे अनुसंधान का तुलनात्मक परीक्षण भी कराया जाए। पॉयलट जिलों की सभी तहसील के वाहक और रोगी अध्ययन में सम्मलित हो। इसकी सुनिश्चितता की जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों को व्यापकता प्रदान करने में आयुर्वेद की संभावनाएं बहुत प्रबल हैं। इस दिशा में विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।  प्रसव पूर्व जाँच के प्रयासों को भी व्यापकता दी जाए- उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज इंदौर के ट्रांसफ्यूज़न विभाग को केन्द्र सरकार द्वारा सेंटर ऑफ कॉम्पीटेंस घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल प्रभावितों को जेनेटिक कार्ड प्रदान करने के साथ ही प्रसव पूर्व जांच के प्रयासों को भी व्यापकता दी जाएगी। सिकल सेल के संबंध में महाविद्यालयों में चिकित्सक देगें जानकारी- आयुष मंत्री आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चिकित्सा विभाग के साथ समन्वय कर सिकल सेल जन जागृति के प्रयासों को विस्तारित करने की योजना है। उन्होंने बताया कि समस्त महाविद्यालयों में सिकल सेल के संबंध में चिकित्सकों के द्वारा जानकारी दिए जाने के लिए पीरियड निर्धारित कर विद्यार्थियों के माध्यम से जागरूकता प्रसार के प्रयास किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश में new aviation policy के तहत प्रत्येक 200 किमी पर एक एयरपोर्ट बनाया जाएगा

भोपाल मध्यप्रदेश में अनेक हवाई अड्डे बनाए जाएंगे। राज्य सरकार इसके लिए नई पॉलिसी बना रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश में हर 200 किमी पर एक एयरपोर्ट बनाया जाएगा। इस प्रकार प्रदेश के छोटे शहरों में भी एयरपोर्ट बन सकेंगे। एयरपोर्ट विकसित कर यहां अंतरराज्यीय उड़ानें शुरू की जाएंगी। इसके साथ ही राज्य की हवाई पट्टियों का भी विकास किया जाएगा। प्रदेश में पर्यटन और उद्योग की संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए एमपी की नई विमानन पॉलिसी में इन बातों पर विचार किया जा रहा है।  मध्यप्रदेश में अब जिला और ब्लाक स्तर पर भी हवाई यातायात उपलब्ध होगा। प्रदेश में कई नए एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं जोकि पीपीपी मोड पर तैयार किए जाएंगे। जल्द ही हर 200 किमी पर हवाई अड्डा दिखाई देगा। इसके साथ ही हर 150 किमी पर एक हवाई पट्टी भी बनेगी। बढ़ेगी रीजनल कनेक्टिविटी प्रदेश में रीजनल कनेक्टिविटी योजना उड़ान के तहत कम दूरी की उड़ानें संचालित की जा रही हैं। वहीं छोटे शहरों से भी दो राज्यों के बीच उड़ान शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत राज्य सरकार ने हर 200 किमी पर एयरपोर्ट बनाने का निर्णय लिया है। प्रदेश में फिलहाल 6 एयरपोर्ट हैं और 31 जिलों में हवाई पट्टी भी है। धार्मिक पर्यटन और बड़े शहरों में यात्रियों की सुविधा के लिए पीएमश्री हवाई सेवा संचालित की जा रही है। अब राज्य सरकार नई विमानन नीति- एविएशन पॉलिसी बना रही है। इसमें हवाई सेवाओं के विस्तार पर फोकस किया जा रहा है। नई पॉलिसी के तहत प्रदेश का लोक निर्माण विभाग कई एयरपोर्ट बनाएगा। विकासखंड स्तर पर हेलीपैड भी बनाए जाएंगे। प्रदेशभर की सभी हवाई पट्टियों को जेट विमानों की उड़ान के हिसाब से विकसित किया जा रहा है। सरकारी हवाई पट्टियों के साथ ही सार्वजनिक संगठनों और प्राइवेट हवाई पट्टियों को भी विकसित किया जा रहा है। यहां से छोटे विमान संचालित किए जाएंगे। इसके लिए विमानन विभाग और पर्यटन विभाग की चर्चा हो चुकी है। यहां हैं हवाई पट्टी प्रदेश के 55 जिलों में से 31 जिलों में हवाई पट्टी है। इसके अलावा सार्वजनिक संगठनों और निजी क्षेत्रों की हवाई पट्टियां भी हैं। इनमें दमोह (डायमंड सीमेंट), शहडोल (ओरिएंट पेपर मिल), नागदा (ग्रेसिम) हवाई पट्टी हैं। इन्हें जेट विमान के उड़ान योग्य तैयार किया जा रहा है। इनके अलावा इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, छतरपुर (खजुराहो) एवं जबलपुर में राष्ट्रीय विमान पत्तन प्राधिकरण (एएआइ) के हवाई अड्डे हैं। छोटे विमान भी चलेंगे धार्मिक पर्यटन स्थलों के लिए छोटे विमान संचालित किए जाएंगे। धार्मिक एवं अन्य प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को वायु सेवा से जोड़ने के लिए पर्यटन विभाग वेंचुरा, अर्चना एयरवेज जैसी सहायता प्राप्त योजनाएं लाने जा रहा है। विमानन विभाग और पर्यटन विभाग के बीच सहमति बन गई है। पर्यटन विभाग पीपीपी के तहत छोटे रूट पर विमानों का संचालन शुरू करने पर काम कर रहा है।

मध्य प्रदेश के 20 जिलों के 50 ब्लॉक्‍स में 2-2 ट्राइबल छात्रावासों बनाए जाएंगे: मंत्री शाह

भोपाल धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में केन्द्र सरकार द्वारा देशभर में जनजातीय विद्यार्थियों की शिक्षा-दीक्षा एवं उनकी आवासीय सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके तहत केन्द्र सरकार ने देश के सभी प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार ट्राइबल छात्रावासों के निर्माण के लिये स्वीकृति दी है. मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री डॉ कुंवर विजय शाह ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भेजे गये प्रस्ताव को मान्य करते हुए 20 जिलों में 100 ट्राइबल छात्रावासों के निर्माण की मंजूरी दी गई है.अब मध्य प्रदेश के 20 जिलों के 50 ब्लॉक्‍स में (हर ब्लॉक में) 2-2 ट्राइबल छात्रावासों बनाए जाएंगे. यह सभी ट्राइबल छात्रावासों 4-4 करोड़ रूपये की लागत और 100-100 सीटर होंगे.     देश के 60 हजार से अधिक आदिवासी ग्रामों के विकास के लिए धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान आरंभ किया गया है। इसका उद्देश्य जनजातीय समाज का समग्र विकास करना है, इसके अंतर्गत 80 हजार करोड़ रुपए लागत के विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगे     -प्रधानमंत्री श्री… pic.twitter.com/Fmx1XJjzeF     — Jansampark MP (@JansamparkMP) November 15, 2024 कहां-कहां बनेंगे हॉस्टल? जनजातीय कार्य मंत्री डॉ विजय शाह ने बताया कि अभियान के तहत अलीराजपुर जिले के अलीराजपुर, जोबट, कट्ठीवाड़ा, सोण्डवा एवं उदयगढ़, बड़वानी जिले के पानसेमल एवं पाटी, बैतूल जिले के भीमपुर, मुल्ताई एवं शाहपुर, छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा, बिछुआ, हर्रई, जुन्नारदेव, परासिया एवं तामिया, दमोह जिले के तेंदूखेडा, डिंडोरी जिले के डिंडोरी, मेहंदवानी, समनापुर एवं शाहपुरा, जबलपुर जिले के कुंडम, झाबुआ जिले के पेटलावद, रामा, रानापुर एवं थांदला, खरगोन जिले के भगवानपुरा, भीकनगांव एवं झिरन्या, मंडला जिले के नारायणगंज, नरसिंहपुर जिले के नरसिंहपुर, पन्ना जिले के पवई, सतना जिले के रामपुर-बघेलान, सीहोर जिले के नसरूल्लागंज, सिवनी जिले के छपारा, धनौरा, कहानापस (घन्सौर) एवं लखनादौन, शहडोल जिले के ब्यौहारी, बुढ़ार एवं जयसिंहनगर, श्योपुर जिले के कराहल एवं विजयपुर, शिवपुरी जिले के खनियांधाना एवं शिवपुरी, सीधी जिले के सीधी एवं सिंहावल तथा सिंगरौली जिले के बैढ़न, चितरंगी एवं देवसर में यह हॉस्टलस् बनाये जाएंगे. मंत्री ने बताया कि यह ट्राइबल छात्रावासों ऐसे स्थान पर (संभवत: सीएम राइज स्कूल परिसर में या इसके समीप) बनाए जायेंगे, जिससे आस-पास के गांवों के जनजातीय विद्यार्थियों को रहने और शिक्षा पाने की स्थायी सुविधा मिल सके. MP में इतनों को मिलेगा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का फायदा मंत्री डॉ विजय शाह ने बताया कि देश के सभी जनजातीय बहुल गांवों के समग्र विकास एवं कल्याण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान में प्रदेश के 51 जिलों के 267 विकासखंडों में स्थित 11 हजार 377 जनजातीय बहुल गांवों का संर्वागीण विकास किया जायेगा. इन 51 जिलों में 43 जनजातीय समुदायों के 18 लाख 58 हजार परिवार निवास करते हैं, जिनकी कुल 93 लाख 23 हजार आबादी इस अभियान से सीधे तौर पर लाभान्वित होगी.

गुरमीत चौधरी ने बताया सफलता का सहज सा मंत्र

मुंबई, अभिनेता गुरमीत चौधरी ने ईट, स्लीप, वर्क, रिपीट (खाओ, सोओ, काम करो और दोहराओ) को अपनी सफलता का मंत्र बताया है। गुरमीत ने इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें पोस्ट कीं। एक तस्वीर में अभिनेता अवॉर्ड संग पोज देते देखे जा सकते हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा, “इट, स्लीप, वर्क, रिपीट (खाओ, सोओ, काम करो, दोहराओ)।” गुरमीत जल्द ही ‘ये काली काली आंखें’ सीजन 2 में नजर आएंगे। 13 नवंबर को रिलीज ट्रेलर में उनकी झलक दिखी थी। ट्रेलर के मुताबिक- ताहिर राज भसीन के किरदार विक्रांत के इशारे पर पूर्वा के मुख्य किरदार की हत्या करने के बजाय उसका अपहरण कर लिया जाता है। अपहरणकर्ता को 100 करोड़ रुपये की फिरौती मांगते हुए देखा जा सकता है, क्योंकि विक्रांत कई लोगों की जान जोखिम में डालता है। इस सीजन में गुरमीत चौधरी की भी एंट्री होती है, जो पूर्वा का दोस्त है और उसे सुरक्षित घर वापस लाने की कसम खाता है। यह अस्तित्व का एक घातक खेल है, और इस सीजन में गुरमीत चौधरी की दमदार एंट्री के साथ, दांव और भी ऊंचे हो गए हैं। सीरीज में अंचल सिंह, सौरभ शुक्ला, अरुणोदय सिंह, वरुण बडोला, बृजेंद्र काला, अनंत जोशी, सूर्या शर्मा, शशि वर्मा, अंजुमन सक्सेना और हेतल गडा भी हैं, जो दर्शकों को हर मोड़ पर रोमांच का एहसास कराते हैं। सीरीज का निर्देशन सिद्धार्थ सेनगुप्ता ने किया है। सीजन 2 में रोमांच और बेहतर कहानी का मेल होगा। इसमें बताया गया है कि प्यार या बदला लेने के लिए कोई किस हद तक जा सकता है। एजस्टॉर्म वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित, ‘ये काली काली आंखें’ का दूसरा सीजन 22 नवंबर को नेटफ्लिक्स पर आने वाला है। गुरमीत ने 2009 की टेलीविजन सीरीज रामायण में देबिना बनर्जी के साथ राम की भूमिका निभाकर प्रसिद्धि पाई। देबिना ने माता सीता की भूमिका निभाई थी। दोनों ने बाद में शादी कर ली। इसके बाद अभिनेता ‘गीत-हुई सबसे पराई’, ‘पुनर्विवाह’, ‘झलक दिखला जा’, ‘नच बलिए 6’, ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी (सीजन 5)’ जैसे शो में भी दिखाई दिए। बॉलीवुड में गुरमीत ने 2015 की फिल्म: “खामोशियां” से डेब्यू किया था।

नाना पाटेकर ने फिल्म वनवास के को-स्टार उत्कर्ष शर्मा की तारीफ की

मुंबई, बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने फिल्म वनवास के को-स्टार उत्कर्ष शर्मा की तारीफ की है। ज़ी स्टूडियोज और अनिल शर्मा की आने वाली फिल्म वनवास एक भावनात्मक पारिवारिक कहानी है, जिसमें नाना पाटेकर, उत्कर्ष शर्मा और सिमरत कौर मुख्य भूमिका में हैं। नाना पाटेकर जल्द ही अनिल कपूर के साथ एक दिलचस्प बातचीत करते दिखेंगे। नाना पाटेकर, अनिल कपूर एक पॉडकास्ट पर आने के लिए तैयार हैं। बातचीत के दौरान के सामने आए एक क्लिप में नाना पाटेकर को अनिल कपूर से उत्कर्ष शर्मा को किसी फिल्म में कास्ट करने के लिए कहते नजर आ रहे हैं। अनिल शर्मा द्वारा निर्मित, निर्देशित और लिखित फिल्म वनवास, ज़ी स्टूडियोज़ के तहत दुनिया भर में रिलीज़ के लिए तैयार है। फिल्म वनवास 20 दिसंबर को रिलीज होने के लिए तैयार है।

राज्यपाल द्वारा जनजातीय कार्य, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आयुष योजनाओं की समीक्षा

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि व्यक्तिगत और सामुदायिक योजना के परिणामों का मूल्यांकन मैदानी स्तर पर किया जाए। वंचित और छूट रहें व्यक्तियों और क्षेत्रों तक विकास की योजनाओं की पहुँच को सफलता का पैमाना माना जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजना को पहुँचाने के प्रयास किए जाने चाहिए। मॉनिटरिंग का भी यही लक्ष्य होना चाहिए। राज्यपाल पटेल आज जनजातीय प्रकोष्ठ के द्वारा संयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक का आयोजन दो सत्रों में किया गया था। प्रथम सत्र में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और आयुष विभाग की समीक्षा की गई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार मौजूद थे। द्वितीय सत्र में जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं पर चर्चा की गई। जेनेटिक कार्ड वितरण में युवाओं को दें प्राथमिकता- राज्यपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि स्क्रीनिंग के दौरान सिकल सेल प्रभावितों की अधिक संख्या वाले चिन्हित क्षेत्रों और 20 से 30 वर्ष की आयु समूह की स्क्रीनिंग के कार्य को व्यापकता प्रदान की जाए। जांच का कार्य तेज गति से किया जाए। गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व और प्रसव के 72 घन्टों के भीतर जांच हो। इस संबंध में विभाग द्वारा कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। चिन्हित वाहक और रोगियों को प्राथमिकता के साथ जेनेटिक कार्ड उपलब्ध हो। रोगी और वाहक को तत्काल उचित औषधि उपलब्ध हो। वाहक और रोगी नियमित रूप से औषधि लें। इसकी मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है। मॉनिटरिंग के लिए सामुदायिक जन जागृति के प्रयास आवश्यक हैं। जरूरी है कि घर-घर जाकर इस संबंध में सीधा संपर्क और संवाद कायम किया जाए। उन्होंने मैदानी अमले का संवेदीकरण कर, उनके माध्यम से जन जागरण के प्रयासों के लिए निर्देश दिए है। सिकल सेल उन्मूलन में आयुष की विभिन्न पद्धतियों का तुलनात्मक परीक्षण हो राज्यपाल पटेल ने आयुष विभाग की चर्चा के दौरान कहा कि सिकल सेल रोग प्रबंधन और उपचार में होम्योपैथी, आयुर्वेद और योग की भूमिका के संबंध में विभाग द्वारा किए जा रहे अनुसंधान का तुलनात्मक परीक्षण भी कराया जाए। पॉयलट जिलों की सभी तहसील के वाहक और रोगी अध्ययन में सम्मलित हो। इसकी सुनिश्चितता की जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों को व्यापकता प्रदान करने में आयुर्वेद की संभावनाएं बहुत प्रबल हैं। इस दिशा में विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।  प्रसव पूर्व जाँच के प्रयासों को भी व्यापकता दी जाए- उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज इंदौर के ट्रांसफ्यूज़न विभाग को केन्द्र सरकार द्वारा सेंटर ऑफ कॉम्पीटेंस घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल प्रभावितों को जेनेटिक कार्ड प्रदान करने के साथ ही प्रसव पूर्व जांच के प्रयासों को भी व्यापकता दी जाएगी। सिकल सेल के संबंध में महाविद्यालयों में चिकित्सक देगें जानकारी- आयुष मंत्री आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चिकित्सा विभाग के साथ समन्वय कर सिकल सेल जन जागृति के प्रयासों को विस्तारित करने की योजना है। उन्होंने बताया कि समस्त महाविद्यालयों में सिकल सेल के संबंध में चिकित्सकों के द्वारा जानकारी दिए जाने के लिए पीरियड निर्धारित कर विद्यार्थियों के माध्यम से जागरूकता प्रसार के प्रयास किए जाएंगे। विकास का मूलाधार सबका साथ और विकास- राज्यपाल बैठक के दूसरे सत्र में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विकसित भारत का मूलाधार सबका साथ और सबका विकास है। इसी के लिए सरकार की योजनाओं का निर्माण किया गया है। योजना की मंशा की सफलता क्रियान्वयन की दृष्टि और दिशा पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि सरकारी अमला सरकार के चालक है। अमला जितना सजग और सक्रिय होगा। सरकार भी उतनी ही गतिशील होगी। इसलिए आवश्यक है कि शीर्ष से लेकर जमीनी स्तर तक का अमला योजना की मंशा के प्रति संवेदनशील हो। मॉनीटरिंग की प्रणाली धरातल पर छूट गए व्यक्तियों, क्षेत्रों को चिह्नित करने पर फोकस हो। प्रयास, ऐसे क्षेत्रों, समुदाय और व्यक्तियों को लाभान्वित करने के लिए आवश्यक प्रावधान, संशोधन और नवाचार पर केन्द्रित होने चाहिए। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने जनजातीय कार्य विभाग की विभिन्न योजनाओं प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) और विभागीय योजनाओं पर चर्चा में कहा कि विभाग द्वारा पी.वी.टी.जी जिलों में नए जिले शामिल किये जाने चाहिए। पेसा ग्राम सभाओं के लिए अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने के लिए महाराष्ट्र राज्य के प्रावधानों का अध्ययन कर विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार किया जाना चाहिए। जनजातीय हितग्राहियों के लिए पीएचडी छात्रवृत्ति और विषय के कोटे को भी समाप्त किया जाना चाहिए। बैठकों में अध्यक्ष जनजातीय प्रकोष्ठ दीपक खाण्डेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव मुकेश चन्द गुप्ता, प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अन्य अधिकारी मौजूद थे। प्रथम सत्र में प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य संदीप यादव, आयुष आयुक्त श्रीमती उमा महेश्वरी, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। द्वितीय सत्र में प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य गुलशन बामरा, आयुक्त जनजातीय श्रीमन शुक्ला एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में 2 वर्षों में 75 हजार बेटियों के विवाह के लिये 414 करोड़ रुपये की सहायता दी गयी

भोपाल राज्य शासन द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में गत 2 वर्षों में 75 हजार से अधिक बेटियों के विवाह के लिये 414 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गयी। आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण डॉ. आर.आर. भोंसले से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की कन्याओं को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में एक विवाह/निकाह के लिये 55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें 49 हजार रुपये का एकाउंटपेयी चेक वधु (कन्या) के नाम से तथा 6 हजार रुपये आयोजन करने वाले निकाय को दिये जाते है। आयुक्त डॉ. भोंसले ने बताया कि वर्ष 2023-24 में प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में 62 हजार 84 विवाह कराये गये हैं। इसमें 341 करोड़ 46 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गयी। चालू वित्त वर्ष में एक अप्रैल, 2024 से अभी तक 12 हजार 979 कन्याओं के विवाह/निकाह के लिये 73 करोड़ 22 लाख रुपये की सहायता राशि दी गयी है।  

ग्लोबल स्किल्स पार्क में उद्योग जगत के विशेषज्ञ डॉ. बसु करेंगे छात्रों का मार्गदर्शन

भोपाल संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क (एसएसआर जीएसपी) में 21 नवंबर 2024, गुरुवार को ‘आयशर जीएसपी टॉक्स’ का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष सत्र में वीई कमर्शियल व्हीकल्स लिमिटेड (वोल्वो ग्रुप और आयशर मोटर्स का संयुक्त उपक्रम) के प्रमुख मानव संसाधन अधिकारी डॉ. पार्थसारथी बसु मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम ग्लोबल स्किल्स पार्क के मुख्य ऑडिटोरियम में शाम 4:30 बजे होगा। सत्र में छात्रों को मानव संसाधन प्रबंधन और उद्योग जगत की नवीनतम रणनीतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जायेगी। इस सत्र में शामिल होने के लिये छात्र-छात्राओं को पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के लिए क्यूआर कोड उपलब्ध कराया गया है, और अधिक जानकारी के लिए 9981919733 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा कार्यक्रम से संबंधित जानकारी www.globalskillSpark.in पर भी उपलब्ध है। ग्लोबल स्किल्स पार्क मध्यप्रदेश में कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इस सत्र के माध्यम से छात्र-छात्राएं उद्योग विशेषज्ञों से जुड़कर अपनी क्षमताओं को नया आयाम दे सकेंगे।  

विधानसभा उप निर्वाचन-2024 : 23 नवम्बर को सुबह 8 बजे से आरंभ होगी मतगणना

भोपाल विधानसभा उप निर्वाचन-2024 के अंतर्गत श्योपुर जिले की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र.-02 विजयपुर एवं सीहोर जिले की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र.-156 की मतगणना शनिवार, 23 नवम्बर को सुबह 8 बजे से आरंभ होगी। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना के सभी इंतजाम किए जा चुके हैं। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी को मतगणना के लिये सभी सुरक्षा मापदंडों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गये हैं। विजयपुर विधानसभा की मतगणना के लिये लगाई जाएंगी 16 टेबल्स विजयपुर विधानसभा की मतगणना शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, श्योपुर में होगी। इस विधानसभा क्षेत्र के 327 मतदान केन्द्रों में मतदाताओं द्वारा ईव्हीएम में डाले गये मतों की गणना के लिए 16 टेबल्स लगाई जाएंगी। मतगणना 21 राउंडस् में सम्पन्न कराई जाएगी। बुधनी विधानसभा की मतगणना के लिये लगाई जाएंगी 14-14 टेबल्स बुधनी विधानसभा क्षेत्र की मतगणना शसकीय महिला पॉलिटेक्निक महाविद्यालय सीहोर में होगी। इस विधानसभा क्षेत्र के 363 मतदान केन्द्रों में मतदाताओं द्वारा ईव्हीएम में डाले गये मतों की गणना के लिए 2 कक्षों में 14-14 टेबल्स लगाई जाएंगी। मतगणना 13 राउंडस् में सम्पन्न कराई जाएगी। मतगणना स्थल पर रहेगी त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था मतगणना स्थल पर त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। केवल अधिकृत प्राधिकार पत्र प्राप्त व्यक्ति ही प्रवेश कर सकेंगे। कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति मतगणना सेंटर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। मतगणना कर्मियों का त्रि-स्तरीय रेण्डमाईजेशन होगा। गणना व्यवस्था प्रत्येक मतगणना टेबल पर एक काउंटिंग सुपरवाईजर, एक काउंटिंग असिस्टेंट, एक काउंटिंग स्टॉफ तथा एक माइक्रो ऑर्ब्जवर रहेगा। समुचित संख्या में गणनाकर्मी मतगणना सम्पन्न कराएंगे। मतगणना हॉल के भीतर ये सामग्री ले जा सकेंगे मतगणना हॉल के भीतर पासधारी अभ्यर्थी, निर्वाचन अभिकर्ता, मतगणना अभिकर्ता को कोरा कागज, मतपत्र लेखा प्रारूप 17 सी भाग-1 की प्रति, रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा प्रदाय किए गए ईवीएम और वीवीपैट की सूची जो विभिन्न मतदान केन्द्रों में प्रयोग में लाई गई है तथा प्लास्टिक पेन या पेंसिल ले जाने की अनुमति रहेगी। ये सामग्री रहेगी प्रतिबंधित मतगणना हॉल में मोबाइल फोन, आईपैड, लैपटॉप, स्मार्ट वॉच, कैमरा, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बीड़ी, सिगरेट और गुटखा प्रतिबंधित रहेगा। किसी को भी मतगणना हॉल में मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगीI केवल आरओ, एआरओ, काउंटिंग सुपरवाइजर जो ईटीपीबीएमएस/इनकोर से जुडे हैं, वे केवल ईटीपीबीएमएस/इनकोर ओपन करने के लिए ओटीपी हेतु मोबाइल ले जा सकेंगे।  

‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में बसंती का किरदार निभाने के लिए करुणा पांडे ने सीखा कानपुरी लहजा

मुंबई, अभिनेत्री करूणा पांडे ने सोनी सब के शो ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में बसंती का किरदार निभाने के लिए कानपुरी लहजा सीखा। सोनी सब के शो पुष्पा इम्पॉसिबल ने दर्शकों को पुष्पा की प्रेरक कहानी से आकर्षित किया है, जो एक दृढ़ इच्छाशक्ति वाली महिला है। वह जीवन की चुनौतियों का साहस और आशावाद के साथ सामना करती है। पुष्पा का किरदार निभाने वाली करुणा पांडे ने हाल ही में शो में दोहरी भूमिका निभाई है। इसमें वह पुष्पा और उसकी हमशक्ल बसंती दोनों की भूमिका में हैं। कहानी में एक चौंकाने वाला मोड़ आता है, जिसमें कानपुर में रहने वाली बसंती मुंबई में पुष्पा के परिवार में पहुंच जाती है, जबकि असली पुष्पा खुद को बसंती की जगह कानपुर में पाती है। करुणा पांडे ने बताया कि कैसे उन्होंने बसंती की भूमिका निभाने के लिए कानपुर की बोलने की शैली को अपनाया और कैसे एक कलाकार होना और हर दिन कुछ नया सीखना मजेदार है।करुणा पांडे ने कहा,बसंती की भूमिका निभाने से मेरे जीवन में नई चुनौतियां और अनोखे अनुभव आए हैं। बसंती को भरोसेमंद तरीके से चित्रित करने के लिए मुझे ग्रामीण जीवन की बारीकियों में उतरना पड़ा क्योंकि वह कानपुर के चुन्नीगंज नामक स्थान से आती है। इससे मुझे परफॉर्मेंस को और अधिक यथार्थवादी बनाने में मदद मिली।मैंने कानपुर का लहजा सीखने का काम अपने हाथ में लिया, जो मुझे शुरू में मुश्किल लगा। यह ऐसी चीज नहीं थी जिसकी मुझे आदत थी। प्रोडक्शन टीम ने एक लैंग्वेज इंस्ट्रक्टर मुहैया कराया जो सेट पर मेरे साथ रहता है और जब भी मैं कोई गलती करती हूँ तो मेरा मार्गदर्शन करता है। यह सहयोग अमूल्य रहा है, जिससे मुझे बोली को बेहतर बनाने और बसंती के किरदार में प्रामाणिकता लाने में मदद मिली। सोनी सब का शो पुष्पा इम्पॉसिबल हर सोमवार से शनिवार रात 9.35 प्रसारित होता है।

मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों को किया पुरस्कृत

भोपाल राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 43वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मंगलवार को “मध्यप्रदेश दिवस” का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेले में विभिन्न विभागों से शामिल स्व-सहायता समूह, उद्यमियों व कलाकारों को पुरस्कृत किया। मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत 2 स्व-सहायता समूहों को प्रथम व द्वितीय पुरस्कार मिले। प्रथम स्थान पर धार के मांडव का रेवा स्व-सहायता समूह रहा, जिन्हें बाग प्रिंट के लिए पुरस्कार मिला। वहीं संत रविदास स्व-सहायता समूह उज्जैन को बांस से बनी हुई सामग्री एवं कलात्मक खिलौने गुड़िया के लिए द्वितीय पुरस्कार दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए समूहों का उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से उनके अनुभव भी सुने। स्व-सहायता समूह की दीदीयों ने डॉ. यादव को समूहों के उत्पाद भी भेंट किए। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती सविता ठाकुर, मध्य सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चेतन कॉश्यप, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी भी उपस्थित थीं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, आयुक्त भरत यादव व मिशन संचालक एवं अपर आयुक्त कैलाश वानखेड़े ने दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों को इस उपलब्धि पर बधाई भी दी है।  

राज्यपाल पटेल ने प्रो. त्रिपाठी को राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिन्दवाड़ा का कुलगुरू नियुक्त किया

भोपाल राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने राजा शंकर शाह  विश्वविद्यालय,  छिन्दवाड़ा   के  कुलगुरू के पद पर प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी को नियुक्त किया है। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट, जिला सतना (म.प्र.) के विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय के प्रोफेसर एवं अधिष्ठाता प्रो. त्रिपाठी है। प्रो. त्रिपाठी का कार्यकाल, कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 4 वर्ष की कालावधि  अथवा  70 वर्ष की आयु जो भी पूर्वतर हो, के लिए रहेगा।  

नागरिक सुविधा व जनसामान्य के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग का मुख्यमंत्री डैशबोर्ड एक उत्कृष्ट उदाहरण है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार के कामकाज को बेहतर बनाने और नागरिक सुविधा व जनसामान्य के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग का मुख्यमंत्री डैशबोर्ड एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधीनगर में गुजरात सीएम डैशबोर्ड की कार्यप्रणाली का अवलोकन करने तथा उसके संचालन संबंधी जानकारी प्राप्त करने के बाद उक्त विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ई-गवर्नेंस एप्लीकेशन, वेब सर्विसेज, कॉल सेंटर, ग्राम और तालुका स्तर से डाटा कलेक्शन, डाटा इंटीग्रेशन, डाटा वैलिडेशन, परफॉर्मेंस मेजरमेंट, फीडबैक सिस्टम और फीडबैक के आधार पर हितग्राही संतुष्टि से अवगत होने के लिए स्थापित व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पारदर्शिता बढ़ाने और वास्तविक समय में डेटा प्राप्त करने में सहायक उल्लेखनीय है कि गुजरात सीएम डैशबोर्ड एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। यह राज्य सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं और प्रगति की निगरानी और मूल्यांकन में सहायक है। यह डैशबोर्ड राज्य के प्रशासन को पारदर्शी, प्रभावी और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। डैशबोर्ड पर योजनाओं की निगरानी और उनकी प्रगति का आंकलन किया जाता है, इससे यह सुनिश्चित होता है कि योजनाएं समय पर और प्रभावी तरीके से लागू हो रही हैं। डैशबोर्ड पर विभिन्न सरकारी विभागों के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों को ट्रैक भी किया जाता है, यह संकेतक राज्य के विकास और प्रशासन की गति को मापने में सहायक हैं। डैशबोर्ड पारदर्शिता को भी बढ़ावा देने और वास्तविक समय में डेटा प्राप्त करने में सहायक है। डैशबोर्ड स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क निर्माण व अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार और बेहतर प्रदर्शन में भी सहायक है।  

प्रदेश के Lawyer पराली जलाने वालों का केस नहीं लड़ेंगे, MP हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने लिया कड़ा फैसला

जबलपुर मध्य प्रदेश में पराली जलाने (Stubble Burning) के आंकड़े चिंताजनक हैं. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में 15 सितंबर से 18 नवंबर 2024 के बीच लगभग 27 हजार 319 मामले पराली जलाने के सामने आए हैं. इसमें बताया गया है कि सबसे ज्यादा पराली के मामले मध्य प्रदेश के श्योपुर में रिकॉर्ड किए गए हैं. MP में 15 सितंबर से 14 नवंबर 2024 के बीच पराली जलाने की जो घटनाएं सामने आईं, उनमें सर्वाधिक 489 श्योपुर में दर्ज की गईं. जबलपुर में 275 घटनाएं हुईं तो ग्वालियर, नर्मदापुरम्, सतना, दतिया जैसे जिलों में लगभग 150-150 घटनाएं दर्ज की गईं. यह आंकड़ें पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान प्रदेशों से भी अधिक हैं. वहीं अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (MP High Court Bar Association) ने पराली जलाने के मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए यह निर्णय लिया है कि इस आरोप में फंसे किसानों की ओर से अधिवक्ता पैरवी नहीं करेंगे. यह निर्णय एसोसिएशन की कार्यकारिणी सभा की बैठक में लिया गया. वकीलों का क्या कहना है? एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता डीके जैन ने बताया कि बैठक में पराली जलाने के कारण होने वाले गंभीर पर्यावरणीय खतरों और जनजीवन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर चर्चा की गई. पराली जलाने से खेतों की उर्वरता प्रभावित होती है, जीव-जंतुओं की मौत होती है, वायुमंडल जहरीला बनता है और लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर हुआ विमर्श     पराली जलाने से खेतों की उर्वरक क्षमता घटती है, जिससे अधिक रासायनिक खाद का उपयोग करना पड़ता है.     देश भर में पराली जलाने से वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन गया है, खासकर हरियाणा, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों में.     मध्य प्रदेश में पलारी (फसल अवशेष) जलाने पर पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है. इस पर विभिन्न कानूनों के तहत अपराध दर्ज किया जा सकता है, जैसे वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 जिसके तहत पलारी जलाना वायु प्रदूषण फैलाने का अपराध माना जाता है. इसमें दोषी पाए जाने पर जुर्माना या कारावास हो सकता है. ये अधिनियम भी हैं पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 : इस अधिनियम के तहत पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों पर रोक लगाई गई है. धारा 15 के तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. भारतीय दंड संहिता (IPC) : धारा 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना) अगर प्रशासन ने फसल जलाने पर प्रतिबंध लगाया हो और फिर भी कोई इसका उल्लंघन करे, तो यह अपराध दर्ज हो सकता है. धारा 269/270: जीवन के लिए खतरनाक लापरवाही या जानबूझकर बीमारी फैलाने का प्रयास. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देश : NGT ने पराली जलाने पर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं. जिला प्रशासन और संबंधित विभाग दोषियों पर जुर्माना लगाते हैं. जुर्माने की राशि भूमि क्षेत्र के हिसाब से तय होती है. जैसे  2 एकड़ तक: ₹2,500 वहीं 2-5 एकड़ पर ₹5,000 जबकि 5 एकड़ से अधिक पर ₹15,000 जुर्माना हो सकता है. स्थानीय प्रशासनिक नियम : जिला कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारी संबंधित क्षेत्र में विशेष आदेश जारी कर सकते हैं. किसानों को अवगत कराने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं. समाधान और प्रोत्साहन पराली प्रबंधन मशीनरी की व्यवस्था के लिए किसानों को अनुदान मिलता है. वहीं जागरूकता अभियान के जरिए वैकल्पिक विधियों (जैसे मल्चिंग, खाद बनाना) को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है. यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उस पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है. एसोसिएशन ने बताया क्या है समस्या का प्रमुख कारण? एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि देशहित में पराली जलाने पर प्रतिबंध का समर्थन करते हुए इससे जुड़े अपराधियों की पैरवी नहीं की जाएगी. साथ ही, जागरूकता की कमी और प्रशासनिक उदासीनता को भी इस समस्या का प्रमुख कारण बताया गया. यह कदम पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. एसोसिएशन ने सरकार और न्यायालय द्वारा पराली जलाने पर जारी निर्देशों के पालन का आह्वान भी किया.

अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण आवेदन में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाए: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि शासकीय सेवकों की स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जाए। अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण आवेदन में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाए। सामान्य प्रशासन विभाग के प्रविधानों के अनुसार स्थानांतरण प्रक्रिया में विभिन्न कारणों यथा पति-पत्नी शासकीय सेवक हैं और एक ही कार्यस्थल में पदस्थापना चाहते हैं, स्वयं की गंभीर बीमारी, परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य समस्याओं या अन्य बड़े कारणों के लिए प्राथमिकता दी जाए। पोर्टल पर समय पर उपलब्ध कराएं जानकारी उन्होंने कहा, ई-एचआरएमआइएस में ऐसे प्रविधान किए जाएं कि स्थानांतरण में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो। पोर्टल में शासकीय सेवकों की आवश्यकताओं और प्रविधानों के अनुरूप सभी जरूरी सुधार किए जाएं। रिक्तियों की अद्यतन जानकारी पोर्टल पर समय पर उपलब्ध कराई जाए। एक सप्ताह में तैयारियां करने को कहा उप मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए ई-एचआरएमआइएस पोर्टल के प्रविधानों की समीक्षा की। उन्होंने पोर्टल में सभी तैयारियां एक सप्ताह में करने के लिए कहा है। एमपीएसईडीसी के प्रतिनिधियों ने पोर्टल के प्रविधानों पर प्रस्तुतीकरण दिया। बता दें कि ई-एचआरएमआइएस से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में स्थानांतरण के लिए पहली बार आनलाइन सुविधा प्रारंभ की जा रही है। 1700 हेक्टेयर वन भूमि पर होंगे विकास कार्य, भारत सरकार ने दी स्वीकृति मप्र की 1700 हेक्टेयर वन भूमि पर विकास कार्य किए जाएंगे। इसके लिए भारत सरकार ने स्वीकृति दे दी है। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने मध्य प्रदेश के वन क्षेत्र में कुल एक हजार 709.45 हेक्टेयर भूमि 37 परियोजनाओं के लिए मंजूर की है। इसके बदले में अन्यत्र राजस्व भूमि एवं वर्तमान दर पर ली गई है।इन परियोजनाओं में जल संसाधन विभाग से संबंधित सात प्रकरणों में 1310.08 हेक्टेयर, विद्युत प्रोजेक्ट के 13 प्रकरणों में 220.36 हेक्टेयर, रेलवे के एक प्रकरण में 12.97 हेक्टेयर, खनन के दो प्रकरणों में 56.63 हेक्टेयर, सड़क के चार प्रकरणों में 35.42 हेक्टेयर और 10 अन्य प्रकरणों में 73.95 हेक्टेयर वन भूमि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा 48 प्रकरणों में 998.27 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्सन की सैद्धांतिक सहमति भी भारत सरकार ने दी है।

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