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सीधी के स्‍कूल में 13 विद्यार्थियों में आते हैं सिर्फ दो, दो अतिथि शिक्षक के अलावा दो रसोइये भी

 सीधी  सीधी जिले का प्रशासन लंबे समय से यह दावा कर रहा है कि जिले में कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है। इन सब दावों से हटकर सीधी जिले के ग्राम घूघा में एक ऐसी पाठशाला है जो बिना किसी नियमित शिक्षक के चल रही है। ऐसे में जिस प्राथमिक पाठशाला में पिता प्रभारी शिक्षक है, तो बेटा उसी को स्कूल में अतिथि शिक्षक के तौर पर मास्टर साहब बना हुआ है। छात्रों की संख्या 13, लेकिन स्कूल आते सिर्फ दो इस विद्यालय का संचालक मात्र दो अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं उससे भी बड़ी बात यह है कि इस विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 13 है लेकिन स्कूल आने वाले छात्रों की संख्या सिर्फ दो है। इस स्कूल में दो रसोईया भी है जो बच्चों के लिए खाना बनाते हैं अब ऐसे में बेहतर स्कूल बेहतर शिक्षक का दावा करने वाली सरकार के दावों की कलई खुलती नजर आती है कि इस विद्यालय में नियमित शिक्षक क्यों नहीं है। दो बच्चे, दो अतिथि शिक्षक और दो रसोईए आते हैं विद्यालय में पढ़ने वाले सभी 13 छात्र स्कूल क्यों नहीं आते यह बड़ा सवाल है वही दो बच्चों को पढ़ाने और दो अतिथि शिक्षक और उन्हें भोजन खिलाने दो रसोईए स्कूल इसलिए आते हैं कि उन्हें अपने वेतन और मानदेय से मतलब है और शायद इसीलिए यह स्कूल आज तक संचालित है वरना इस स्कूल का क्या फायदा इस प्राथमिक स्कूल की समस्या को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नियमित शिक्षक न होने के सवाल पर वह गोल-माल जवाब जब जिला शिक्षा अधिकारी पीएल मिश्रा से जानकारी चाहि तो उन्होंने भी स्कूल की जांच करने की बात कही वही स्कूल में नियमित शिक्षक न होने के सवाल पर वह गोल-माल जवाब देते नजर आए जिला शिक्षा अधिकारी के बयान के बाद यह बात तो स्पष्ट हो जाती है कि जिले में शिक्षक विहीन शाला न होने का दवा अभी पूरा नहीं हुआ है जिस दिन यह दाबा पूरा हो जाएगा उस दिन से स्कूलों में ना आने वाले सभी छात्र शायद पढ़ते भी आने लगेंगे। प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पूरी तरीके से चौपट बहरहाल सीधी जिले में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पूरी तरीके से चौपट हो गई है आलम यह है कि इस स्कूल जैसे दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में न जाने और ऐसी कितनी स्कूल है सिर्फ कागज में दर्जन भर छात्र और शिक्षक विहीन शालाएं शिक्षा विभाग के अफसर के फाइलों में संचालित हो रही हैं, जिसकी कलाई जांच मीडिया की जीरो ग्राउंड रिपोर्टिंग के दरमियान सामने आ गई है। पिता प्रभारी शिक्षक, बेटा उसी स्कूल में अतिथि शिक्षक ऐसे में जिस प्राथमिक पाठशाला में पिता प्रभारी शिक्षक है तो बेटा उसी स्कूल में अतिथि शिक्षक के तौर पर मास्टर साहब बना हुआ है जो कागज में 13 छात्र लेकिन जमीनी हकीकत में सिर्फ दो छात्रों को शिक्षा दीक्षा दे रहा है ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले के शिक्षा विभाग अपने कर्तव्य में लापरवाही करतें हुए व्यक्तिगत स्वार्थ और अपनों को आर्थिक लाभ पहुंचाने में लगा हुआ है उसे बच्चों के भविष्य से कोई सरोकार नहीं है।

गौतम गंभीर मां पीतांबरा सिद्धपीठ पहुंचे, वनखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक भी किया

ग्वालियर  भारत और बांग्लादेश के बीच टी20 सीरीज की शुरुआत 6 अक्टूबर से हो रही है। सीरीज का पहला मुकाबला ग्वालियर के नए माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम पर होना है। इस मैच के लिए दोनों ही टीमें ग्वालियर पहुंच चुकी हैं। मैच की तैयारी भी पूरी हो चुकी है। 14 साल बाद ग्वालियर में कोई इंटरनेशनल मैच खेला जा रहा है। आखिरी बार 2010 में यहां हुए मुकाबले में सचिन तेंदुलकर ने वनडे इतिहास का पहला दोहरा शतक लगाया था। मां पीतांबरा सिद्धपीठ पहुंचे गौतम गंभीर भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ग्वालियर के पास स्थित दतिया के मां पीतांबरा सिद्धपीठ पहुंचे। नवरात्री की शुरुआत हो चुकी है और भारतीय हेड कोच ने मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने इस दौरा पीला कुर्ता पहन रखा था। इसके साथ ही उन्होंने भगवान वनखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक भी किया। मां पीतांबरा सिद्धपीठ की स्‍थापना 1935 में की गई थी। यहां मां के दर्शन के लिए कोई दरबार नहीं सजाया जाता बल्कि एक छोटी सी खिड़की है, जिससे मां के दर्शन का सौभाग्‍य मिलता है। भारी सुरक्षा के बीच खेला जाएगा मैच मैच की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया जा रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर ग्वालियर के अलावा बाहर से भी पुलिस बल बुलाया गया है। खिलाड़ियों को एयरपोर्ट से होटल लाने और होटल से स्टेडियम तक ले जाने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। स्टेडियम में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। मैच शुरू होने से 3 घंटे पहले ही सुरक्षाकर्मी अपनी ड्यूटी पर तैनात हो जाएंगे। 6 घंटे में ही बिक गए टिकट माधवराव सिंधिया इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता है। इस मैच को लेकर ग्वालियर के दर्शकों में भारी उत्साह है। 20 सितंबर को सुबह 10 बजे टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू हुई। 6 घंटे में 22400 टिकट बिक गए। 1500 टिकट छात्रों के लिए और 100 टिकट दिव्यांगों के लिए पहले ही आरक्षित रखे गए थे। वहीं 6000 टिकट वीआईपी के लिए रखे गए हैं।

रतलाम स्टेशन के करीब डीजल से भरी मालगाड़ी के दो टैंकर बेपटरी हुए, बाल्टियों और कैन डीजल भरने टूट पड़े लोग

रतलाम    दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर रतलाम रेलवे स्टेशन के पास पेट्रोलियम पदार्थ से भरी एक मालगाड़ी बेपटरी हो गई. दिल्ली की तरफ जाने वाली डाउन लाइन पर यह हादसा हुआ है. हादसे के बाद मालगाड़ी के दो वैगन पटरी से उतर गए. दुर्घटनाग्रस्त हुए एक वैगन से ज्वलनशील पदार्थ का रिसाव भी होने लगा. हादसे की जानकारी मिलने के बाद रेलवे के आला अधिकारियों सहित एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन मौके पर पहुंची है. अधिकारियों का मानना है कि यह भी ट्रेन डिरेल करने की कोई साजिश हो सकती है.  हादसे की सूचना मिलने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। इस दौरान यात्री ट्रेनों का परिचालन भी बाधित हो गया और कई यात्री ट्रेनें अपने नियमित समय के विपरीत चलने लगी। रेल हादसे की खबर के बाद अधिकारियों में भी  हड़कंप मच गया। यह दुर्घटना गुरुवार रात 9.30 बजे की बताई जा रही है। रेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बड़ौदा की ओर से रतलाम स्टेशन होते हुए बी नागदा साइड जा रही मालगाड़ी रतलाम रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूर घटला ब्रिज के आगे अपयार्ड की ओर बेपटरी हो गई। दुर्घटना में दो डिब्बे बे पटरी से उतर गए। उसमे से एक डिब्बा  पलटी भी खा गया। रेलवे के माल गाड़ी के टिकट का डिब्बे में ज्वलनशील पदार्थ (डीजल) भरा हुआ था। इस हादसे के बाद इस रूट से गुजरने वाली कई  यात्री ट्रेनों का परिचालन बाधित हो गया। इधर दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद राहत ट्रेन मौके पर पहुंच गई और रूट सुधारने का कार्य शुरू कर दिया गया। साथ ही डीआरएम रजनीश कुमार व अधिकारी मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल में पहुंचे और व्यवस्थाओ पर नजर बनाए रखी । हादसे की जांच के आदेश जारी डीआरएम ने इस हादसे की जांच के भी आदेश दे दिए है। इसके साथी दुर्घटना वाले क्षेत्र में लाउडस्पीकर पर ज्वलनशील पदार्थ नहीं ले जाने का भी अनाउंस किया गया जिससे कोई बड़ा हादसा ना हो सके। वही इस संबंध में रेलवे की ओर से जारी सूचना के तहत उन्होंने बताया कि 03 अक्टूबर, 2024 को नागदा की ओर जा रही गुड्स ट्रेन लगभग 10 बजे रतलाम-रतलाम ई केबिन के मध्य Km 655/10-12 के पर दो वैगन डिरेल हो गई है तथा एक वैगन पलट गई है। इसके कारण दिल्ली मुम्बई डाउन लाइन प्रभावित हुई है तथा अप लाइन से ट्रेनें चल रही है। डिरेल वैगन को छोड़कर शेष वैगन को वहां से रवाना कर दिया गया है तथा डिरेल वैगन को रिरेल करने का कार्य जारी है। जल्द ही डाउन लाइन को चालू कर दिया जाएगा। इसमें किसी प्रकार की जनहानि नही हुई है। इस घटना के कारण डाउन की दो ट्रेने प्रभावित हुई है। मंडल रेल प्रबंधक सिहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवम कर्मचारी घटना स्थल पर उपस्थित हैं। रतलाम DRM रजनीश कुमार के अनुसार नागदा की ओर जा रही गुड्स ट्रेन रात लगभग 10 बजे रतलाम-रतलाम ई केबिन के मध्य किलोमीटर 655/10-12 के पर दो वैगन डिरेल हो गई है तथा एक वैगन पलट गई है। इसके कारण दिल्ली मुम्बई डाउन लाइन प्रभावित हुई है तथा अप लाइन से ट्रेनें चल रही है। डिरेल वैगन को छोड़कर शेष वैगन को वहां से रवाना कर दिया गया है तथा डिरेल वैगन को रिरेल करने का कार्य जारी है। जल्द ही डाउन लाइन को चालू कर दिया जाएगा। इसमें किसी प्रकार की जनहानि नही हुई है। इस घटना के कारण डाउन की दो ट्रेन प्रभावित हुई है। विभागों के अधिकारी और कर्मचारी घटना स्थल पर उपस्थित हैं। लापरवाही की भयावह तस्वीर, जान पर खेल कर लोगों ने मचा दी डीजल की लूट… रतलाम में हुए इस हादसे के बाद लापरवाही की भयावह तस्वीर भी सामने आई कि स्थानीय लोगों ने टैंकरों से डीजल लीक होता देखा तो जान की परवाह किए बिना अपने बरतन और प्लास्टिक के केन लेकर पहुंच गए। देखते ही देखते वहां ऐसे सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई और डीजल की लूट मच गई। यह नजारा दिल दहला देने वाला…कैसे लोग अपनी जान पर खेल जाते हैं…। इन ट्रेनों को किया री शेड्यूल -गाड़ी संख्या 09546- नागदा रतलाम स्पेशल 01 घंटे -गाड़ी संख्या 09545- रतलाम नागदा 1.30 घंटे -गाड़ी संख्या 19341- नागदा बिना 1.30 घंटे -गाड़ी संख्या 09382- रतलाम दाहोद -गाड़ी संख्या 09350 दाहोद आनंद 02.00 घंटे लेटेस्ट अपडेट बता दें कि 3 अक्टूबर को नागदा की ओर जा रही गुड्स ट्रेन लगभग 22.00 बजे रतलाम-रतलाम ई केबिन के मध्य Km 655/10-12 के पर दो वैगन डिरेल हो गई थी । वैगनों को डिरेल कर तथा ट्रैक एवम OHE का मरम्मत कर डाउन लाइन को 04 अक्टूबर, 2024 को 10.00 बजे फिट दे दिया गया है। कॉशन आर्डर के साथ ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। टला बड़ा हादसा, रेलवे की कई टीमें पहुंचीं ज्वलनशील पदार्थ से भरी मालगाड़ी रतलाम रेलवे स्टेशन के समीप डाउन लाइन पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, ये जानकारी लगते ही रेलवे में हड़कंप मच गया. ये मालगाड़ी दिल्ली-मुंबई रूट पर नागदा की ओर जा रही थी. इसी दौरान स्टेशन से कुछ मीटर की दूरी पर मालगाड़ी के 2 वैगन पटरी से उतर गए. दुर्घटनाग्रस्त हुए हुए एक वैगन से डीजल का रिसाव होने की वजह से रेलवे की टीम को ट्रैक से वेगन हटाने में समय लगा. वैगन से हो रहे ज्वलनशील पदार्थ के रिसाव को रोकने के लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की एक्सपर्ट टीम को भी सूचना दी गई है. गनीमत ये रही कि रेलवे की तत्परता से डीजल में आग नहीं लगी, वरना बड़ी घटना हो सकती थी. शुरू की गई हादसे के कारणों की जांच रतलाम डीआरएम रजनीश कुमार ने ईटीवी भारत से चर्चा में बताया कि ” डिरेल होने की सूचना मिलने पर रेलवे की टीम तत्काल दुर्घटनाग्रस्त वैगन को हटाने और डाउन लाइन पर यातायात बहाल करने का प्रयास कर रही है. घटनास्थल पर एक्सीडेंट रिलीफ टीम और रेलवे के इंजीनियर रेलवे ट्रैक से वैगन हटाने और डाउन लाइन पर रेल यातायात शुरू करने में जुटे हैं. मालगाड़ी डिरेल होने के कारणों की जांच भी रेलवे की टीम कर रही है.”  

रतलाम में बालम ककड़ी खाने से 5 साल के बच्चे की मौत, दो बहनें आईसीयू में भर्ती

रतलाम  जिले के जड़वासा कलां गांव में बालम ककड़ी खाने से एक ही परिवार के 5 लोग बीमार हो गए। इनमें से 5 वर्षीय बालक की मौत हो जबकि मां और दो बेटियों का मेडिकल कॉलेज में उपचार जारी है। जानकारी के अनुसार जड़वासा कलां निवासी किसान मांगीलाल पाटीदार (36), पत्नी कविता, बेटी दक्षिता (11), साक्षी (8) और बेटे क्रियांश (5) को बुधवार सुबह अचानक उल्टियां होने लगी। उन्हें रतलाम के एक निजी हॉस्पिटल में लाया गया था। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी और सभी गांव लौट गए थे। बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात 3 बजे कविता, दक्षिता, साक्षी और क्रियांश की फिर से तबीयत बिगड़ गई। इससे परिजन ने चारों को शासकीय मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया। यहां तड़के 4 बजे डॉक्टर ने क्रियांश को मृत घोषित कर दिया। दक्षिता और साक्षी की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। दोनों का आईसीयू में जबकि मां कविता का जनरल वार्ड में उपचार जारी है। बालम ककड़ी खाने से बिगड़ी तबीयत परिजन ने बताया कि मांगीलाल ने सोमवार को सैलाना-धामनोद रोड से बालम ककड़ी खरीदी थी। सभी ने शाम को बालम ककड़ी खाई। आशंका है कि ककड़ी खाने के कारण फूड पॉइजनिंग होने से सभी की तबीयत बिगड़ी। मांगीलाल के भाई रवि के अनुसार भाभी कविता और दोनों भतीजियों का उपचार जारी है। डॉक्टर भी प्रथमदृष्टया फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है। फूड पॉइजनिंग के बाद भर्ती कराए गए थे रतलाम मेडिकल कॉलेज के ऐपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव बोरीवाल ने बताया कि पांचों मरीज फूड पॉइजनिंग के कारण बीमार होकर‎ आए थे। सही ‎इलाज मिलने में लंबा गैप होने से भी ‎स्थिति बिगड़ी। क्रियांश का ब्लड सैम्पल लिया है‎, जांच करवाई जाएगी। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. विनय शर्मा ने कहा कि प्रथम दृष्टया बच्चे की मौत‎ फूड पॉइजनिंग से हुई है। मां‎ और दो बेटियों को इलाज किया जा रहा है। पुलिस ‎चौकी को इन्वेस्टिगेशन के‎ लिए लिखकर दिया था। वहीं, पुलिस चौकी प्रभारी सुनील राघव ने‎ बताया कि फिलहाल इस तरह का ‎मामला नहीं आया है। जानकारी ‎आएगी तो पड़ताल की जाएगी। कीटनाशक का छिड़काव करते हैं किसान ऐपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव बोरीवाल ने बताया, ‘किसान फल और सब्जियों में लगने वाले कीड़ों को मारने के लिए ‎कीटनाशक का छिड़काव करते हैं, जो इनको अच्छी तरह धोने से ही साफ हो पाता‎ है। ककड़ी में पित्त भी होता है, जिसे उसके दोनों सिरों को काटने के बाद ‎रगड़कर निकाला जाता है। ककड़ी देखकर खरीदें कि कहीं यह ज्यादा पुरानी तो नहीं है। फल और ‎सब्जी को काटते समय चेक करें क्योंकि इनमें कई बार कीड़े भी निकलते‎ हैं। क्या है बालम ककड़ी बालम ककड़ी मध्य भारत का मौसमी विशेष खीरा है। मध्य भारत के कुछ हिस्सों में आम तौर पर पाई जाने वाली विशाल ककड़ी की मौसमी किस्म, बालम ककड़ी एक ताज़ा देशी सामग्री है जो हाइड्रेटिंग है और कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है इसे कब खाना चाहिये खीरा दिन या रात के किसी भी समय खाया जा सकता है क्योंकि यह शरीर को संतुलित करने में मदद करता है और शरीर में पानी की मात्रा को बनाए रखने में मदद करता है। अगर आपका पाचन कमजोर या खराब है तो आपको रात में इसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि खीरे के बीज पचने में भारी होते हैं।

रानी दुर्गावती को जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है

भोपाल वीरांगना रानी दुर्गावती महिला शासकों के भारतीय स्वर्णिम इतिहास का एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर है। रानी दुर्गावती ने 16वीं शताब्दी में गोंडवाना राज्य की शासक के रूप में अपने साहस और नेतृत्व के लिए ख्याति प्राप्त की। उनकी जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। रानी ने एक संतुलित, न्यायपूर्ण और विकासात्मक प्रणाली के रूप में शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए गोंडवाना को एक मजबूत और समृद्ध साम्राज्य बनाया। वीरांगना रानी दुर्गावती के शासन में गोंड संस्कृति ने देश की सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध किया है। उन्होंने अपनी पारंपरिक प्रथाओं से पर्यावरण के संवर्धन और संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाई है। आज़ादी के प्रति असीम प्रेम और किसी की अधीनता स्वीकार न करने की जिद और जुनून गोंड समाज की पहचान रही है। रानी दुर्गावती गोंड समुदाय के पराक्रम, भारतीय वीरता और शूरता की साक्षात् प्रतिमूर्ति थीं। मुगल साम्राज्य की अधीनता स्वीकार न करने वाली रियासतों के लिए मुगल काल में सुरक्षित रहना बहुत कठिन माना जाता था, क्योंकि विशाल मुगल सेना के सामने युद्ध भूमि में सामना करना बहुत चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में गोंडवाना साम्राज्य की संरक्षिका के रूप रानी दुर्गावती के कार्य एवं अपूर्व वीरता के साथ राज्य के विकास में किया गया अभूतपूर्व योगदान सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। रानी दुर्गावती के कार्यों और वीरता का गुण-गान आज भी जनजातीय क्षेत्रों में विभिन्न बोलियों और कई भाषाओं में किया जाता है, जो भावी पीढ़ियों के लिये प्रेरणास्पद है। रानी दुर्गावती का संघर्ष मुगलों के खिलाफ था और वे जनजातीय संस्कृति और विरासत की सुरक्षा के प्रति कृत-संकल्पित थीं। उन्होंने मुगलों के खिलाफ एक सशक्त प्रतिरोध का आधार तैयार किया, जिसने देश के दूसरे क्षेत्रों में रहने वाले राजा-महाराजा और अधीनता स्वीकार न करने वाले अनेक समूहों को मुगल सत्ता के खिलाफ लगातार लड़ने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान जबलपुर उनके साम्राज्य का केंद्र था। रानी ने करीब 16 वर्ष तक शासन किया। उन्होंने अपने कार्य-काल में अनेक मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ियां तथा धर्मशालाएं बनवाईं। लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए रानी की कीर्ति दूर-दूर तक फ़ैल गई। रानी दुर्गावती के गढ़ मंडला पर मुगल सूबेदार बाजबहादुर की बुरी नजर थी, लेकिन युद्ध में रानी दुर्गावती ने उसकी पूरी सेना का सफाया कर दिया और फिर वह कभी पलटकर नहीं आया। मुगल सेना के कई हमलों को नाकाम करने वाली रानी दुर्गावती का खौफ दिल्ली की मुगल सत्ता को भी प्रभावित करने लगा। रानी दुर्गावती को अपनी रणनीतिक योग्यता, पारम्परिक सैन्य संसाधन और सैन्य शक्ति पर इतना विश्वास था कि वे विशाल मुगल सेना से कभी विचलित नहीं हुईं। रणक्षेत्र में रानी ने मुगलों की अपेक्षा में बेहद छोटी सेना होने के बाद भी असीम वीरता का परिचय दिया। इस कारण मुगल सेना युद्ध मैदान से भाग खड़ी हुई। रानी दुर्गावती ने मुगलों के खिलाफ अपनी भूमि की रक्षा के लिए जिस अद्वितीय साहस का परिचय दिया, वह भारत की मातृशक्ति के पराक्रम, शौर्य और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। रानी दुर्गावती को भारतीय इतिहास की सर्वाधिक प्रसिद्ध महारानियों और बेहतर प्रशासकों में शुमार किया जाता है। उन्होंने जिस कुशलता से राज संभाला, उसकी प्रशस्ति इतिहासकारों ने भी की है। आईन-ए-अकबरी में अबुल फ़ज़ल ने लिखा है कि “दुर्गावती के शासनकाल में गोंडवाना इतना सुव्यवस्थित और समृद्ध था कि प्रजा लगान की अदायगी-स्वर्ण मुद्राओं और हाथियों से करती थी।” रानी दुर्गावती ने गोंडवाना की स्थिरता, विकास तथा कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए प्रभावी न्याय प्रणाली की स्थापना की। उन्होंने स्व-शासन को बढ़ावा देते हुए गांवों को मजबूत किया, जिससे किसान खुशहाल हुए। रानी दुर्गावती ने कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। उन्होंने कृषि सुधारों और सिंचाई योजनाओं को लागू किया, जिससे खाद्य उत्पादन बढ़ा। रानी दुर्गावती ने शिक्षा और संस्कृति के विकास पर अधिक जोर दिया। उन्होंने साहित्य, कला और संगीत को प्रोत्साहित किया, जिससे गोंडवाना की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा मिला। रानी दुर्गावती की नेतृत्व क्षमता, साहस और बलिदान, राजनैतिक समझ, सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने के कार्य, सांस्कृतिक समृद्धि और राज्य में स्थिरता बनाये रखने की कोशिशें अतुलनीय थी। जन-कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता और मातृभूमि की सुरक्षा के संकल्प ने रानी दुर्गावती को एक महान नेतृत्वकर्ता और शासक के रूप में इतिहास में अमर बना दिया। उनका जीवन और न्यायपूर्ण शासन आज भी प्रेरणा का ऊर्जा स्रोत है।  

निगम आयुक्त ने किया मेडिकल स्टोरो का औचक निरीक्षण, नियमो का उलंघन करने वाले पर हुई जुर्माने की कार्यवाही

सिंगरौली नगरीय क्षेत्र में संचालित मेडिकल स्टोर संचालको के द्वारा मेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण नहीं किया जाता l मेडिकल वेस्ट को नगर निगम के कचरा संग्रहण गड़ियो में डाला जा रहा है। जबकि नियमानुसार मेडिकल वेस्ट को बायोमेडिकल प्लांट में डिस्पोज किया जाना है। जिसकी शिकायत लंबे समय से मिल रही थी जिसके परिपालन में कुछ मेडिकल संचालकों को सूचना और नोटिस दी गई कि वह मेडिकल वेस्ट को नगर निगम की कचरा गाड़ी में ना डालें l नगर निगम आयुक्त श्री डी.के शर्मा को इस आशय की जानकारी मिली कि नोटिस मिलने के बाद भी कुछ मेडिकल संचालक मेडिकल वेस्ट का उचित निराकरण नही कर रहे। मेडिकल वेस्ट को निगम की कचरा परिवहन की गाड़ियो में लगातार पॉलीथिनो में बंद करके डाला जा रहा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुये आज निगम आयुक्त द्वारा निगम अमले के साथ न्यायालय परिसर के सामने स्थित मेडिकल स्टोर, तुलसी मार्ग पर संचालित मेडिकल स्टोर तथा थाना रोड में संचालित मेडिकल स्टोरो का औचक निरीक्षण किया l मेडिकल वेस्ट निस्तारण और उनके रजिस्ट्रेशन की जाॅच की गई। मेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण न करने पर 5 मेंडिकल स्टोर संचालको के विरूद्ध जुर्माना की कार्यवाही की गई। इसके साथ ही हिदायत दी गई कि मेडिकल स्टोर का संचालन नियमानुसार करे अगर पुनः निरीक्षण के दौरान नियमो का उलंघन करना पाया गया तो मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ जुर्माने की कार्यवाही के साथ मेडिकल स्टोर को सील करने की कार्यवाई भी होगी l तत्पश्चात निगमायुक्त के द्वारा जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेन्टर का निरीक्षण कर मेडिकल वेस्ट निस्तारण के संबंध में जानकारी ली गई।इस दौरान नगर निगम के उपायुक्त आरपी बैस, सहायक यंत्री एस.एन द्विवेदी, सीटाडेल मैनेजर रावेन्द्र सिंह, सहित निगम अमला उपस्थित रहा।

मंडला में आकर्षक का केंद्र बनी 51 शक्तिपीठ की स्थापना

मण्डला  श्री सिद्ध सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति बड़ी खैरी मंडला द्वारा इस वर्ष नवरात्र पर भव्य आयोजन किया जा रहा है। नवरात्र के नौ दिनों तक विविध कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई गई है। जिसका प्रारंभ नवरात्र के प्रथम दिवस से प्रारंभ किया गया। सर्वप्रथम बड़ी खैरी स्थित रामघाट नर्मदा तट पर समिति के पदाधिकारी एवं मातृशक्तियां पहुंची जहां पर मां नर्मदा की प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन करते हुए घट पूजा की गई। और यहां से गाजे बाजे के साथ मां नर्मदा को पंडाल तक लाया गया जहां पर देर रात तक पूजन पाठ के साथ 51 शक्तिपीठ की स्थापना हुई। कार्यकर्ता नीतेश पटेल ने बताया कि मां दुर्गा के 53 वें स्थापना वर्ष को आकर्षक बनाने के लिए इस वर्ष श्री सिद्ध दुर्गोत्सव समिति द्वारा अनेक भव्य आयोजन करती है। नवरात्र में प्रत्येक दिन अनेक प्रकार की धार्मिक कार्यक्रम होंगे, जो जनमानस के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगा। यहां नवरात्रि के प्रथम दिवस पर वैदिक मंत्रोचारण के बीच घटस्थापना कर देवी माता का आव्हान किया जाता है। इसके बाद नवरात्रि का पूजन व व्रत रखा जाता है  मान्यता है कि शैलपुत्री की पूजा से चंद्र ग्रह से जुड़े नकरात्मक प्रभावों से मां रक्षा करती हैं चमेली का फूल देवी शैलपुत्री को काफी प्रिय है। देवी माता के शैलपुत्री रूप में उन्हें दो भुजाओं के साथ देखा जा सकता है उनके एक हाथ (दाहिने) में त्रिशूल होता है। वहीं दूसरे (बायें) हाथ में उन्हें कमल पुष्प के साथ देख सकते हैं। यहां पर झूला प्रदर्शनी सहित अनेक कलाकार आ चुकें हैं।  

रेलवे में 14 हजार से पदों के लिए RRB ने दोबारा शुरू की भर्ती, इस तारीख से आवेदन कर सकते हैं उम्मीदवार

नई दिल्ली  रेलवे भर्ती की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी है. रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) ने रेलवे टेक्निशयन भर्ती 2024 के लिए आवेदन करने का एक और मौका दिया है. इस भर्ती अभियान के माध्यम से 14000 से अधिक रिक्तियों को भरा जाएगा. जो योग्य उम्मीदवार पहले आवेदन नहीं कर पाए थे, वे अब 16 अक्टूबर 2024 तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. इससे पहले रेलवे टेक्निशियन ग्रेड I सिंगल और टेक्निकल ग्रेड III भर्ती 2024 की एप्लीकेशन विंडो 9 मार्च से 8 अप्रैल 2024 तक खोली गई थी. ओपन लाइन (17 श्रेणियों) के लिए भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या 9144 थी, जिसे क्षेत्रीय रेलवे/उत्पादन इकाइयों से अतिरिक्त मांग प्राप्त होने के बाद आरआरबी द्वारा बढ़ाकर 14298 कर दिया गया था. आरआरबी ने फिर से ऑनलाइन एप्लीकेशन विंडो खोलकर युवाओं को रेलवे में सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) पाने का मौका दिया है. भर्ती परीक्षा से संबंधित जानकारी जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी.   RRB Railway Technician Vacancy: यहां देखें वैकेंसी डिटेल्स टेक्नीशियन ग्रेड 1 सिग्नल: 1092 पद टेक्नीशियन ग्रेड 3 ओपन लाइन: 8052 पद टेक्नीशियन ग्रेड 3 वर्कशॉप एंड PUs: 5154 पद कुल खाली पदों की संख्या: 14298 शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा टेक्नीशियन ग्रेड 1 सिग्नल: मान्यता प्राप्त विश्विविद्यालय या संस्थान से फिजिक्स / इलेक्ट्रॉनिक्स / कंप्यूटर विज्ञान / इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी / इंस्ट्रूमेंटेशन में साइंस बैचलर डिग्री होनी चाहिए या बीएससी या बीई / बी.टेक / 3 वर्षीय इंजीनियरिंग पॉलिटेक्निक डिप्लोमा मांगा गया है. टेक्नीशियन ग्रेड 3 ओपन लाइन और टेक्नीशियन ग्रेड 3 वर्कशॉप एंड PUs: मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होने के साथ संबंधित ट्रेड में एनसीवीटी या एससीवीटी से आईटीआई सर्टिफिकेट होना चाहिए. अभी अप्लाई करने के लिए यहां क्लिक करें- आयु सीमा: 01/07/2024 तक उम्मीदवारों की कम से कम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम टेक्नीशियन ग्रेड III के लिए 33 वर्ष और तकनीशियन ग्रेड I सिग्नल के लिए 36 वर्ष तक ही होनी चाहिए. हालांकि रेलवे भर्ती बोर्ड आरआरबी टेक्नीशियन भर्ती विज्ञापन संख्या सीईएन 02/2024 रिक्ति नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अधिक जानकारी के लिए रेलवे भर्ती नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें. आवेदन शुल्क सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के उम्मीदवारों को 500 रुपये, एससी/एसटी/पीएच कैटेगरी और महिला उम्मीदवारों को 250 रुपये आवेदन शुल्क जमा करना होगा. स्टेज I परीक्षा में बैठने के बाद यूआर/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस को 400/- और एससी/एसटी/पीएच/महिलाओं को 250/- शुल्क वापसी की जाएगी. परीक्षा शुल्क का भुगतान केवल डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग शुल्क मोड के माध्यम से करें.  

श्रीराम फायनेंस कम्पनी से पहले लिया लोन फिर हो गया गायब, तीन साल से पुलिस कर रही थी तालाश, बिनैका तिराहा में पकड़ाया आरोपी

मंडला  कोतवाली थाना अंतर्गत पुलिस ने तीन साल से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार रामनगर निवासी राकेश बरमैया द्वारा श्रीराम फायनेंस लिमिटेड से एक इनोवा वाहन 25 जून 2021 को फायनेंस कराया था फायनेंस के पश्चात् ही उक्त वाहन राकेश बरमैया द्वारा अविधिक तरीके से किसी अन्य व्यक्ति को विक्रय कर दिया था, जिसके बाद राकेश बरमैया से लोन समझौता की बात करने पर राकेश बरमैया द्वारा एक 3,50,000 का एक चैक समझौता के तौर पर दिया था, जो बैंक से अनादरित हो गया, कंपनी ने न्यायालय की शरण ली तथा 138 एन आई ए चैक बाउंसिंग का मामला राकेश बरमैया के विरूद्ध न्यायालय में दर्ज किया, जिसके बार न्यायालय ने अनेकों बार वारण्ट जारी किए, लेकिन राकेश बरमैया उपस्थिति दर्ज नही हो सकीं। पुन:  एक बार फिर न्यायालय ने आरोपी की गिरफ्तारी वारण्ट जारी किया। कोतवाली पुलिस ने उक्त आरोपी को 1 अक्टूबर को बिनैका तिराहा में घेराबंदी दबौच लिया गया। पुलिस ने उक्त आरोपी को न्यायालय में पेश करते हुए जेल भेज दिया गया।

विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

University’s convocation ceremony is an important milestone in the life of students: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। मात्र पाठ्यक्रम तक सीमित रहने वालों को शिक्षक कहा जा सकता है, परंतु जो विद्यार्थी के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देते हैं, उन्हें सम्मानपूर्वक गुरु का संबोधन प्राप्त होता है। विश्वविद्यालय, विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक वातावरण, सुविधा और मार्गदर्शन उपलब्ध कराते हैं, इसलिये प्रदेश के विश्वविद्यालय के कुलपति को कुलगुरु का संबोधन प्रदान किया गया है, जो भारतीय परंपरा के अनुकूल है। शैक्षणिक संस्थाओं का उत्साह से भरपूर वातावरण और दीक्षांत समारोह की गरिमा विद्यार्थियों में आत्म-विश्वास का संचार करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कोठरीकलां जिला सीहोर में वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के 5वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में महिला छात्रावास ब्लॉक-2 एवं पुरूष छात्रावास ब्लॉक-6 का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में से एक है। यहां प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का प्लेसमेंट सुनिश्चित है। यहाँ भोपाल सहित अमरावती, वेल्लोर, तमिलनाडु के विश्वविद्यालय भारतीय युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरदर्शिता के अनुरूप है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश आत्मविश्वास के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के जननायक प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विश्व में भारत की साख को स्थापित किया है। उनका स्वयं का नीर क्षीर जीवन देश को समर्पित है, वे एक-एक पल देश के विकास और जन-कल्याण के लिए सक्रिय हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी, अद्यतन तकनीक का उपयोग करते हुए देश की युवा पीढ़ी को वैश्विक मानकों के अनुरूप कदम से कदम मिलाकर चलने में सक्षम बनाने के लक्ष्य को समर्पित हैं। उनकी मंशा और भावना के अनुरूप वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज विदेशी विद्यार्थी भी हमारी शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन के लिए आ रहे हैं। देश की युवा शक्ति भविष्य के भारत की ध्वज वाहक है। भारत में वैज्ञानिक सोच और ज्ञान परंपरा प्राचीन काल से ही पर्याप्त संपन्न रही है, इसके पर्याप्त उदाहरण हमारे प्राचीन ग्रंथो में मिलते हैं। कोविड काल की कठिन परिस्थितियों से संघर्ष में भारत ने अपनी सामर्थ्य और बौद्धिक क्षमता से संपूर्ण विश्व को परिचित कराया। जी-20, आसियान आदि सभी मंचों पर भारत ने अपनी क्षमता का परिचय दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था 2014 में विश्व में 11वें स्थान पर थी, जो अब चौथे स्थान पर है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अगले 5 साल में भारत विश्व की तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों का आहृवान करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ ही दीक्षा अर्थात सबको जोड़कर चलते हुए, अपने परिवार-समाज और देश के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हुए आगे बढ़े। यह सौभाग्य की बात है कि संस्थान में अध्यनरत देश के अलग-अलग भागों के विद्यार्थियों का मध्यप्रदेश से संबंध जुड़ा है। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य के लिए आशीष और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अंग वस्त्रम पहना कर स्वागत किया गया। उन्होंने एक पौधा भी लगाया। दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी की स्थापना, संचालित अकादमी गतिविधियों , विद्यार्थियों की उपलब्धियों और विस्तार योजनाओं के संबंध में जानकारी दी गई। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक श्री सुदेश राय, विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर, वीआईटी. समूह के संस्थापक सह चांसलर डॉ. जी. विश्वनाथन तथा रिलायंस जियो और रिलायंस रिटेल के प्रेसिडेंट डॉ. रवि पी गांधी सहित वरिष्ठ अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

भारत में अगले दो वर्षों में टेक्नोलॉजी सेक्टर में बढ़ेगी 22 प्रतिशत नौकरियां

नई दिल्ली भारत में टेक्नोलॉजी से जुड़ी नौकरियों की मांग में बीते 12 महीनों में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसी के साथ अगले 24 महीनों में यह मांग 22 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड डिजिटल टैलेंट सॉल्यूशंस प्रोवाइडर एनएलीबी सर्विसेज के मुताबिक, आर्थिक मंदी के बाद यह आईटी टैलेंट इकोसिस्टम में 39 प्रतिशत के सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वैश्विक क्षमता केंद्र के नेतृत्व वाली भर्ती अगले तीन वर्षों में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। कंपनियां में एआई और मशीन लर्निंग जैसे फील्ड उभरने के साथ टेक्नोलॉजी भूमिकाएं तेजी सी बढ़ रही हैं। यही वजह है कि स्किल्ड टैलेंट की मांग बढ़ी है। एनएलबी सर्विसेज के सीई सचिन अलुग का कहना है, ”बीते कुछ वर्षों में आईटी सेक्टर में सुस्त पड़े हायरिंग एनवायरमेंट के बावजूद टेक्नोलॉजी से जुड़ी कुछ भूमिकाओं की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस मांग में बढ़ोतरी की वजह इंडस्ट्री 4.0 पर ध्यान केंद्रित किया जाना है, जिसमें लोकल मैन्युफैक्चरिंग, एआई अपनाने और कोरोना महामारी के बाद डिजिटल परिवर्तन शामिल है।” इस साल आईटी सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट, सेल्सफोर्स डेवलपर्स, साइट रिलायबिलिटी इंजीनियर्स, क्लाउड इंजीनियर्स, डेटा एनालिस्ट और मशीन लर्निंग इंजीनियर्स जैसी नौकरियों की अधिक मांग है। वर्ष 2025 में भारत में सीनियर टेक भूमिकाएं जैसे चीफ एआई ऑफिसर, क्वांटम कम्प्यूटिंग ऑफिसर, डेटा एथिक्स ऑफिसर और साइबर सिक्योरिटी ऑफिसर की मांग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। आने वाले समय में आईटी का विस्तार केवल बड़े हब जैसे बेंगलुरू, गुरुग्राम और हैदराबाद तक सीमित नहीं रह जाएगा। चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे और कोयंबटूर जैसे शहरों में मैन्युफैक्चरिंग, फिनटेक और ई-कॉमर्स जैसी इंडस्ट्री में जीसीसी बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन क्षेत्रों को चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। खासकर स्किल्ड टैलेंट को लेकर मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कम करना एक बड़ी चुनौती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए देश की कंपनियां डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और अन्य उभरते क्षेत्रों में अपने कर्मचारियों को बेहतर कौशल प्रदान करने के लिए निवेश कर रही हैं।

रातों-रात गायब हो गया पूरा मंदिर! इलाके में फैली सनसनी

The entire temple disappeared overnight! Sensation spread in the area Sidhi News: मध्य प्रदेश में आप आए दिन अजीबोगरीब घटनाएं सुनते होंगे. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि मंदिर भी रातों-रात गायब हो जाते हैं? जी हां, सीधी जिले में स्थित तुर्रानाथ मंदिर में बड़ी घटना हुई है. चोरों ने आधी रात को मंदिर में घुसकर जेसीबी से मां जगदंबा और शिव की प्राचीन मूर्तियों को तोड़ दिया और वहां स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियां चुरा लीं. इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है. वहीं सूचना के बाद क्षेत्रीय पुलिस के साथ वन अमला मामले की जांच में जुट गया है. सीधी में रातोंरात गायब हुआ पूरा मंदिर!दरअसल आदिवासियों की आस्था का केंद्र तुर्रानाथ मंदिर में चोरों ने शिव प्रतिमा के साथ मां जगदंबा की मूर्ति भी चुरा ली. चोरों ने आधी रात को जेसीबी लगाकर मंदिर में तोड़फोड़ की और फिर इस घटना को अंजाम दिया. बता दें कि यह मंदिर 1000 साल से भी ज्यादा पुराना था. मंदिर जंगल के बीच में था जहां मां जगदंबा और शिव शंभू स्वयं विराजमान थे, जहां एक दर्जन से ज्यादा ग्रामीण पूजा-अर्चना करते थे. नवरात्रि के पहले दिन जब लोग पूजा करने पहुंचे तो देवी-देवताओं की मूर्तियां गायब थीं. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. वहीं सूचना के बाद क्षेत्रीय पुलिस के साथ वन अमला मामले की जांच में जुट गया. पूरा मामला आदिवासी वन परिक्षेत्र कुसमी क्षेत्र का है. चोरों ने चुरा ली प्राचीन मूर्तियांबता दें कि सीधी जिला मुख्यालय से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित तुर्रानाथ मंदिर में मां भगवती और भोलेनाथ की मूर्तियां विराजमान थीं. यह मंदिर जंगलों के बीच स्थित है. यह मंदिर लगभग 1,000 वर्ष पुराना माना जाता है. इस मंदिर की कलाकृति बेहद भव्य और आकर्षक थी, जिसे कीमती पत्थरों से सजाया गया था. हाल ही में चोरों ने इस मंदिर को निशाना बना लिया है. हालांकि मंदिर का कुछ हिस्सा अभी सुरक्षित है. नवरात्रि के पहले दिन ऐसी घटना से स्थानीय निवासियों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है.

आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को रोकने पुलिस नई पहल की शुरुआत करने जा रही

इंदौर आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस नई पहल की शुरुआत करने जा रही है। इसमें गूगल, डॉक्टर और काउंसलर की सहायता ली जाएगी। आयुक्त राकेश गुप्ता ने पिछले तीन वर्षों के आंकड़े निकलवाए हैं। इनके आधार पर इंटेलिजेंस से आत्महत्या करने वालों की उम्र, स्थान, कारण का विश्लेषण करवाया जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून) अमित सिंह के मुताबिक, इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र है। देशभर के छात्र-छात्राएं कालेज और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने आते हैं। कई बार पढ़ाई और स्वजन के दबाव में भी बच्चे आत्महत्या कर लेते हैं। पिछली घटनाओं में देखा गया कि कई लोगों ने आत्महत्या के पूर्व गूगल सर्च इंजन से जानकारी जुटाई थी। लिहाजा गूगल से करार किया जाएगा। जब भी कोई व्यक्ति तनाव, आत्महत्या की मंशा व्यक्त करने, स्वयं को नुकसान पहुंचाने और उससे जुड़े फोटो-वीडियो सर्च करेगा, गूगल तुरंत पुलिस को खबर करेगा। साइबर एक्सपर्ट मोबाइल नंबर और फोन के आधार पर उस व्यक्ति तक पहुंच सकेंगे। एडी. सीपी के मुताबिक, पुलिस मनोचिकित्सकों और काउंसलर से भी संपर्क में रहेगी। डॉक्टर से ऐसे लोगों का ब्योरा साझा करेगी, जो लगातार अवसाद में चल रहे हैं, उनके अंदर बार-बार आत्महत्या का भाव आता है। ऐसे लोगों को स्वजन और काउंसलर की मदद से समझाया जाएगा। अकेला छोड़ने पर हुईं घटनाएं एडी. सीपी अमित सिंह के मुताबिक, पिछली कुछ घटनाओं में देखा गया कि अवसाद का उपचार कर रहे कुछ लोगों ने अकेला छोड़ते ही आत्महत्या कर ली। एक युवती का उपचार कर रहे डॉक्टर ने दवाओं के साथ-साथ अकेला न छोड़ने के बारे में भी लिखा था। खरगोन के एक एएसआई ने भी अकेले में आत्महत्या कर ली थी। जबकि वह आत्महत्या के एक मामले की जांच करने गया था। ऐसे में डॉक्टर से अवसाद के मरीजों का डेटा लेकर काउंसलिंग की जाएगी। मेटा से मिलता है साइबर सेल को अलर्ट मेटा (फेसबुक) से पुलिस को अलर्ट मिलता है। जब भी कोई व्यक्ति आत्महत्या करने के बारे में मैसेज, फोटो और वीडियो साझा करता है तो मेटा साइबर सेल को अलर्ट कर देता है। पुलिस अब गूगल की सहायता लेकर घटनाएं रोकेगी।

सिंग्रामपुर में राजा दलपत शाह की समाधी स्थल एवं रानी दुर्गावती की विशाल प्रतिमा स्थापित

दलपत शाह और रानी दुर्गावती की स्मृतियों को सहेजे है सिंग्रामपुर वीरांगना रानी दुर्गावती भारतीय इतिहास की एक महान शासक थीं सिंग्रामपुर में राजा दलपत शाह की समाधी स्थल एवं रानी दुर्गावती की विशाल प्रतिमा स्थापित “जाने दमोह जिले के सिंग्रामपुर को” भोपाल सिंग्रामपुर, दमोह जिले की तहसील जबेरा अंतर्गत आने वाली एक ग्राम पंचायत है, जिसकी दूरी दमोह मुख्यालय से लगभग 54 कि.मी. एवं जबलपुर जिले से लगभग 51 कि.मी. है, जो गोंड शासक राजा दलपत शाह एवं रानी दुर्गावती की राजधानी रही है। सिंग्रामपुर के समीप ही रानी दुर्गावती का किला है जो सिंगौरगढ़ किले के नाम से प्रसिद्ध है। सिंग्रामपुर में राजा दलपत शाह की समाधी स्थल एवं रानी दुर्गावती की विशाल प्रतिमा स्थापित है। क्षेत्र के पर्यटन स्थल     सिंगौरगढ़ का किला     नज़ारा व्यू प्वांइट     भैंसाघाट स्थित निदान कुंड जल प्रपात     सद्भावना शिखर     वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश का महाकौशल एवं आंशिक रूप से बुन्देलखण्ड क्षेत्र तत्कालीन गोंड साम्राज्य के अंतर्गत आता था। वर्तमान में यह क्षेत्र जबलपुर एवं सागर संभाग के अधीन है। इस साम्राज्य के अधीन 52 गढ़ आते थे। इस साम्राज्य में संग्राम शाह, दलपत शाह और रानी दुर्गावती ने सन् 1500 से 1564 तक शासन किया तथा मुगल आक्रमणकारियों से राज्य की रक्षा की। ब्रिटिश साम्राज्य के विरूद्ध इनका संघर्ष उल्लेखनीय रहा है। सिंग्रामपुर कैसे पहुंचे सिंग्रामपुर सड़क मार्ग के माध्यम से सीधा पहुंचा जा सकता है जो दमोह मुख्यालय से 54 कि.मी. एवं जबलपुर से 51 कि.मी. की दूरी पर है। भोपाल राजधानी से नर्मदापुरम होते हुये जबलपुर से सिंग्रामपुर पहुंचा जा सकता है। भोपाल से सागर होते हुये दमोह से सिंग्रामपुर पहुंचा जा सकता है। राजा दलपत शाह राजा दलपत शाह गोंडवाना साम्राज्य के 49वें राजा थे, जो रानी दुर्गावती के पति थे। उन्होंने सिंग्रामपुर के समीप स्थित सिंगौरगढ़ के किले से शासन किया। सिंग्रामपुर के समीप ही इनका समाधी-स्थल मौजूद है। रानी दुर्गावती वीरांगना रानी दुर्गावती भारतीय इतिहास की एक महान शासक थीं, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और आत्म-सम्मान की रक्षा के लिये अपने प्राणों का बलिदान दिया। दमोह जिले की तहसील जबेरा के ग्राम सिंग्रामपुर के पास सिंगौरगढ़ का किला स्थापित है। सिंगौरगढ़ के किले पर रानी दुर्गावती का आधिपत्य था। रानी दुर्गावती महोबा के चन्देलवंशीय राजा कीरत सिंह चन्देल की एक मात्र सन्तान थी। रानी दुर्गावती की जयंती 5 अक्टूबर को मनाई जाती है। रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर (वर्तमान में जिला बांदा) के किले में हुआ था। गोंडवाना राज्य के राजा संग्रामशाह मड़ावी चंदेल राजकुमारी दुर्गावती से बहुत प्रभावित थे, सन् 1542 में संग्रामशाह ने अपने पुत्र दलपतशाह मड़ावी से दुर्गावती का विवाह कराया। सन् 1545 में रानी दुर्गावती ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम वीरनारायण रखा। सन् 1950 में राजा दलपतशाह की असामयिक मृत्यु के बाद रानी दुर्गावती ने उल्प-वयस्क राजा की संरक्षिका के रूप में 1564 तक गोंड साम्राज्य की बागडोर सम्भाली। रानी दुर्गावती को मुगल साम्राज्य के खिलाफ अपने राज्य की रक्षा के लिए गर्व से स्मरण किया जाता है। उन्होंने अपने मान-सम्मान, धर्म की रक्षा एवं स्वतंत्रता के लिए युद्ध भूमि को चुना और अनेकों बार शत्रुओं को पराजित करते हुए अपना बलिदान दे दिया।

Ladli Behna Yojana: लाड़ली बहनों को नवरात्रि पर मिलेगी बड़ी खुशखबरी, तारीख हुई घोषित, आ गया अपडेट!

भोपाल  मध्यप्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए फिर खुशखबरी आ रही है। इस बार अक्टूबर में बहुत सारे त्यौहार पड़ रहे है, जिनको लेकर प्रदेश की लाड़ली बहनें काफी उत्साहित है। इसी खुशी को दोगुना करेगी लाड़ली बहना योजना की 17 वीं किस्त।  बता दें कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के लिए शुरू की गई एक बड़ी योजना है। इसके तहत हर महीने की 10 तारीख 1.29 करोड़ लाभार्थी बहनों को 1250 रुपए दिए जाते है। लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी। कब आएगी 17 वीं किस्त जानकारी के लिए बता दें कि 17 वीं किस्त दशहरे से पहले आने वाली है। वैसे तो ये किस्त 10 अक्टूबर को जारी की जाएगी। इसके तहत फिर 1.29 करोड़ लाभार्थी बहनों के खाते में 1250 रुपए भेजे जाएंगे। इससे पहले सागर से सीएम मोहन यादव ने 9 सितंबर को 16वीं किस्त के 1574 करोड़ रुपए जारी किए थे। वहीं दूसरी ओर माना ये भी जा रहा है कि इस बार भी नवरात्रि को देखते हुए अक्टूबर में समय से पहले किस्त जारी हो सकती है। इस बारे में सीएम अपने बयान में कई बार कह चुके है कि हर महीने की 10 तारीख को बहनों के बैंक खाते में राशि जमा हो जाएगी और यदि छुट्टी अथवा अन्य किसी कारण से ऐसा संभव नहीं हुआ तो पहले जमा हो जाएगी। इससे पहले सितंबर में 10 की बजाय किस्त 9 सितंबर जारी की गई थी। हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लाडली बहना योजना 17 किस्त का पैसा कब आएगा? सभी महिलाओं का इंतजार जल्द समाप्त होने वाला है, क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के बैंक खाते में 17वीं किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जाने वाला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव जी द्वारा निर्धारित समय पर किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है जिसमें 10 अक्टूबर 2024 तक बहनों के बैंक खाते में 1250 रुपए की राशि स्थानांतरित कर दी जाएगी। लाडली बहना योजना 17 किस्त मैं कितना पैसा मिलेगा? लाडली बहनों के लिए लगातार किस्तों में पैसा प्रदान किया जा रहा है। उसी प्रकार आगे आने वाली किस्त में महिलाओं के लिए कितना पैसा मिलेगा यह जानकारी तलाश कर रही महिलाओं के लिए काफी अच्छा मौका प्रदान किया जा रहा है। बता दें मुख्यमंत्री मोहन यादव जी द्वारा बहुत जल्द महिलाओं के लिए ₹1500 प्रतिमाह देने की घोषणा की जाने वाली है। यदि आप भी इस योजना से पंजीकृत महिला है, तो आपके लिए 17वीं किस्त में 1250 रुपए मिलने वाले हैं। लेकिन मोहन यादव जी द्वारा कोई नया अपडेट जारी करते हुए आपकी किस्त में इजाफा किया जा सकता है। लाडली बहना योजना 17वीं किस्त न्यू अपडेट 2024 मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के हित में कई प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया गया है और महिलाओं को लाभ दिलाया जा रहा है। यदि आप भी 17वीं किस्त का इंतजार कर रही महिला है तो यहां पर काफी बड़ा अपडेट सामने आया है। अपडेट के मुताबिक बताया जा रहा है कि महिलाओं के लिए किस्त मिलने की डेट से कुछ दिन पहले पैसा दिए जाने की उम्मीद है तो आपके लिए केवल इंतजार करना होगा, कुछ ही दिनों पश्चात आपके बैंक खाते में 1250 रुपए की राशि ट्रांसफर होने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और आपको यह पैसा मिल सकेगा। लाडली बहना योजना तीसरा चरण कब शुरू होगा? मध्य प्रदेश की लाखों महिलाएं लाडली बहन योजना से वंचित है यदि आप पात्र होकर ऐसी योजना से लाभ नहीं ले पा रही है तो आपके लिए काफी अच्छा मौका अक्टूबर 2024 में मिलने की उम्मीद बताई जा रही है। मध्य प्रदेश में सीएम मोहन यादव जी द्वारा बहनों के लिए किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। उसके साथ ही ऐलान किया जा सकता है कि महिलाओं के लिए फिर से आवेदन का मौका मिले और वह सभी महिलाएं जो कि इस योजना से लाभ नहीं ले पा रही है वह लाभ उठा सके। लाडली बहना योजना 17 किस्त 2024 स्थिति कैसे देखें? लाडली बहना योजना के तहत किस्त की स्थिति देखने हेतु आपको दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा, जो कुछ इस प्रकार है:-     सबसे पहले लाडली बहना योजना का पोर्टल खोलें।     होम पेज पर जाएं।     यहां पर आवेदन की स्थिति विकल्प का चयन करें।     समस्त जानकारी जो की मांगी जा रही है वह दर्ज करते हुए सबमिट करें।     सबमिट करते ही समस्त किस्तों का विवरण एवं आने वाली किस्त से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित हो जाएगी। मध्य प्रदेश में बहनों का इंतजार जल्द समाप्त होने वाला है क्योंकि आगे आने वाली किस्त का पैसा महिलाओं के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। यदि आप इस योजना से पंजीकृत महिला है, तो आपके बैंक खाते में जल्द पैसा ट्रांसफर होने वाला है, जिसकी पूरी अपडेट आपके लिए यहां पर दी जा चुकी है अधिक जानकारी आपके लिए नवीनतम खबरों के माध्यम से प्रदान कर दी जाएगी।

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