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जेएफए फर्म के कार्यालय और बेलार्ड एस्टेट के ऑफिस में बम रखा गया, ईमेल के जरिये दी धमकी, लोगो में दहशत

मुंबई मुंबई की एक लॉ फर्म को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। मेल के जरिए जेएसए लॉ फर्म बेलर्ड पेयर और जेएसए ऑफिस कमला मिल लोअर पर्ल को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। यह ई-मेल फरजान अहमद के नाम से आया है। ई-मेल में स्पष्ट कहा गया है कि जेएफए फर्म के कार्यालय और बेलार्ड एस्टेट के ऑफिस में बम रखा गया है। ईमेल आते ही दफ्तर के कर्मचारियों ने पुलिस को सूचित किया। धमकी की सूचना मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई। पुलिस जांच में जुट गई है। पुलिस ने आश्वस्त किया है कि इस धमकी देने वाले व्यक्ति को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बता दें कि इससे पहले बीते गुरुवार (14 नवंबर) को मुंबई एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। धमकी देने वाले शख्स ने मुंबई एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ को फोन कर एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। इसके बाद एयरपोर्ट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों सहित अन्य लोग खौफजदा हो गए थे। धमकी देने वाले शख्स ने सीआईएसएफ कर्मचारी को फोन कर कहा था कि एयरपोर्ट पर बम रखा हुआ है। इसके बाद जांच में सामने आया कि मोहम्मद नाम का व्यक्ति विस्फोटक सामग्री लेकर मुंबई से अजरबैजान जाने की योजना बना रहा था। लगभग एक साल से देश के कई राज्यों में स्कूल, होटल, एयरपोर्ट, मार्केट, ट्रेन, बस आदि को बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं। हालांकि जांच के बाद सभी फर्जी पाई जाती हैं। 27 अक्टूबर को भी मुंबई एयरपोर्ट पर एक धमकी दी गई थी। कहा गया था कि अगर विमान उड़ा तो कोई भी यात्री जिंदा नहीं बचेगा। जांच में यह धमकी भी झूठी पाई गई थी।  

स्टालिन ने अरियालुर जिले में 1,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली एक फुटवियर विनिर्माण इकाई की आधारशिला रखी

चेन्नई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हुए शुक्रवार को अरियालुर जिले में 1,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली एक फुटवियर विनिर्माण इकाई की आधारशिला रखी। यह विनिर्माण इकाई जिले के जयमकोंदम में एसआईपीसीओटी औद्योगिक परिसर में स्थापित की जाएगी। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इससे लगभग 15,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। एक अन्य आधिकारिक समारोह में उन्होंने कुपोषित बच्चों और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण योजना के दूसरे चरण की भी शुरुआत की, जिससे 0-6 महीने के आयु वर्ग के 76,705 बच्चे लाभान्वित होंगे। एक अन्य कार्यक्रम में, श्री स्टालिन ने 88 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से कई विकास परियोजनाएं भी शुरू कीं।  

महंगाई ने बिगाड़ दिया रसोई का बजट; लोग हो रहे परेशान

अल्मोड़ा. महंगाई का असर अब सीधा घर के बजट पर पड़ने लगा है। सितंबर से नवंबर के बीच दाल, सब्जियों सहित खाद्य पदार्थाें की कीमतों में लगातार उछाल आया है। निम्न मध्यम वर्गीय परिवार का तो महंगाई की मार ने दम ही निकाल दिया है। बाजार में दालों के साथ पैकेट वाले सामानों की बिक्री भी कम होने लगी है। महंगाई का असर अब रोजमर्रा की चीजों में भी दिखाई दे रहा है। महंगाई ने पहले दीपावली पर्व को फीका किया। धीरे-धीरे इसका असर उसके दैनिक जीवन में भी दिखाई देने लगा है। दाल-सब्जी खाने वाले अब एक समय में या तो दाल खा रहे है या सब्जी ही खा रहे हैं। यही हाल सब्जियों का आम लोग इसे सीधे सरकार की नाकामी मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा ही रहा तो आने वाले दिन और भयानक हो सकते हैं। जल्द सरकार को इस बढ़ी हुई कीमतों पर लगाम लगानी के लिए मजबूत नीति बनानी होगी। यही हाल सब्जियों का भी है। दालें, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर चना, 90, 95, 100 उड़द 120, 120, 125 मूंग 120, 120, 130 अरहर 170, 175, 180 मलका, 85, 90, 90 आटा, 33, 35, 40 तेल, सरसों, 165, 180 प्रति ली. तेल, रिफाइंड, 130, 140 सब्जी, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर आलू 30, 40, 50 प्याज 60, 65, 70 टमाटर 80, 100, 60 लौकी 30, 30, 40 नोट- दाम प्रति किलो में

लाहौर में सांस लेना भी हुआ मुहाल, AQI 1900 के पार; मंत्री ने भारत को लेकर दिया अजीबोगरीब तर्क

लाहौर पाकिस्तान का ऐतिहासिक शहर इन दिनों एक बड़ी परेशानी से गुजर रहा है. लाहौर में वायु प्रदूषण चरम सीमा पर पहुंच गया है. यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हाल ही में 1900 तक पहुंच गया है. लाहौर में रिकॉर्ड स्तर के वायु प्रदूषण ने गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है, जिससे अस्पतालों और प्राइवेट क्लिनिकों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर लोगों ने मास्क नहीं पहना और प्रशासनिक आदेशों का पालन नहीं किया, तो पूरे शहर में लॉकडाउन की स्थिति बन सकती हैं. ऑलामा इकबाल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल फैसल असगर नकी ने यहां की प्रदूषण की स्थिति को चिंताजनक बताया. वहीं, एक मरीज हसन अख्तर ने बताया कि उन्हें फ्लू और सीने में इंफेक्शन है. उनका मानना है कि इसकी वजह तेजी से घट रहे पेड़-पौधे और वाहनों से निकलता धुआं है. हसन ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार को हरियाली बढ़ाने, वाहन सुधारने और तकनीकी बदलाव लाने की जरूरत है. ये तो हो गई पाकिस्तान के अस्पतालों की हालत. अब जानेंगे कि आखिर पाकिस्तान में ये हालात कैसे पैदा हो गएं. लाहौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स लाहौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स लोगों की सेहत के लिए काफी खराब है. वहीं इसपर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ते प्रदूषण से अस्पतालों में मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, जो सांस संबंधी बीमारियों से काफी परेशान हैं. वहीं इस पर पंजाब सरकार ने लोगों को फेस मास्क पहनने, अनावश्यक बाहर न निकलने और बच्चों व बुजुर्गों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी है. ग्रीन लॉकडाउन की स्थिति लाहौर में स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है, और वाहनों व निर्माण कार्यों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं. इसके अलावा, सरकारी दफ्तरों के 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ‘ग्रीन लॉकडाउन’ के तहत घर से काम करने की अनुमति दी गई है. सरकार ने यह भी कहा है कि जो क्षेत्र “ग्रीन लॉकडाउन” का पालन नहीं करेंगे, वहां पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. क्या कह रहें विशेषज्ञ? वहीं विशेषज्ञों की मानें तो लाहौर का प्रदूषण स्तर इतनी तेजी से बढ़ने का कारण आसपास के इलाकों में होने वाली पराली जलाने की घटनाएं हैं. पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी ने इस पर कहा कि भारत से आने वाली हवाएं लाहौर में प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रही हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय शहर अमृतसर और चंडीगढ़ की ओर से आने वाली हवाओं के कारण वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, और आने वाले कुछ दिनों तक यह स्थिति बने रहने की संभावना है. लाहौर प्रशासन उठा रहा ये कदम लाहौर प्रशासन ने प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए कृत्रिम वर्षा कराने की योजना पर भी विचार किया है ताकि वायु की गुणवत्ता में सुधार हो सके. साथ ही, पंजाब के मुख्यमंत्री ने भारत के पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री के साथ मिलकर प्रदूषण की इस गंभीर समस्या पर चर्चा करने की योजना बनाई है. लाहौर को कभी हरियाली और बाग-बागीचों का शहर माना जाता था, लेकिन तेजी से शहरीकरण और हरियाली में गिरावट के कारण यहां वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन गया है. WHO के लिमिट से भी 122 गुना ज्यादा     कई दिनों से शहर के 1.4 करोड़ लोग धुंध से प्रभावित हैं। स्विस वायु गुणवत्ता मानीटर आइक्यूएयर घातक पीएम 2.5 प्रदूषकों के स्तर 613 पर पहुंच गया।     यह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्वास्थ्य के लिए खराब माने जाने वाले स्तर से 122.6 गुना अधिक है। अब हरकत में आई सरकार पंजाब की वरिष्ठ मंत्री मरियम औरंगजेब ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सरकार ने एक सप्ताह के लिए प्राथमिक स्कूलों को बंद कर दिया है और अभिभावकों को सलाह दी है कि वे सुनिश्चित करें कि बच्चे मास्क पहनें, क्योंकि शहर में धुंध की मोटी चादर छाई हुई है। औरंगजेब ने कहा कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 50 फीसद कार्यालय कर्मचारी घर से काम करेंगे। लाहौर में वायु प्रदूषण का अब तक का रिकॉर्ड सरकार ने एक एडवाइजरी भी जारी की जिसमें लोगों से घर के अंदर रहने, दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने और जब तक आवश्यक न हो यात्रा करने और घर से बाहर जाने से बचने का आग्रह किया गया। भारत पर फोड़ा ठीकरा मंत्री औरंगजेब ने वायु प्रदूषण की इतनी खराब स्थिति का कारण पड़ोसी भारत को बताया। उन्होंने कहा कि इस वायु प्रदूषण का कारण भारत से आने वाली हवाएं हो सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत के साथ बातचीत के बिना इसे हल नहीं किया जा सकता है। प्रांतीय सरकार पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के माध्यम से अपने बड़े पड़ोसी के साथ बातचीत शुरू करेगी।

डीजीपी ने सभी जिला प्रभारियों के कसे पेच, दिए बैरियर व सीसीटीवी की निगरानी बढ़ाने के निर्देश

देहरादून. अल्मोड़ा जिले में ओवरलोड के कारण बस हादसा व देहरादून में ओवरस्पीड इनोवा कार हादसे को देखते हुए पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने बैरियर चेकिंग व सीसीटीवी कैमरे की निगरानी बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में सभी जिलों के एसएसपी व एसपी को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों के सापेक्ष सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण शराब पीकर नशे में वाहन चलाना, वाहन चालकों की ओर से अन्य वाहनों से प्रतिस्पर्धा करना, वाहन चालकों की ओर से मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए वाहन चलाना है। पुलिस की सक्रियता से दुर्घटनाओं पर पाया जा सकता है नियंत्रण डीजीपी ने कहा कि इन दुर्घटनाओं पर पुलिस की सक्रियता से नियंत्रण पाया जा सकता है। ऐसे में पुलिस की ओर से समय-समय पर बैरियर चेकिंग, सीसीटीवी कैमरे की निगरानी की कार्रवाई की जाए। इसके अलावा देर रात तक चलने वाले बार व पब के लाइसेंस चेक कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करें, सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने व पिलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करें, पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं तथा उनका रखरखाव भी नियमित रूप से किया जाए। निर्देशित किया कि पुलिस कंट्रोल रूम पर सीसीटीवी कैमरे से नियमित मॉनिटरिंग की जाए व सड़क पर पर्याप्त साइन बोर्ड एव उचित निगरानी की जाए। सड़क हादसे रोकने के लिए जांच में लाएं तेजी डीजीपी ने कहा कि नशे में वाहन चलाने वाले वाहन चालकों की जांच के लिए चेक पोस्ट व बैरियरों पर एवं यातायात पुलिस को पर्याप्त एल्कोमीटर उपलब्ध कराए जाएं। चालक नशे में पाया जाता है तो वाहन तत्काल सीज किया जाए। स्पीडोमीटर व रडार गन की मदद से ओवर स्पीड वाले वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की, सवारी वाहन में क्षमता से अधिक सवारी पाए जाने व नाबालिग की ओर से वाहन चलाते हुए पाए जाने पर वाहन स्वामी के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करें। होटल, पब व रेस्टोरेंट प्रबंधकों की भी फिक्स करें जिम्मेदारी डीजीपी ने बार लाइसेंसधारक होटल, पब व रेस्टोरेंट प्रबंधक की जिम्मेदारी फिक्स करने के भी निर्देश दिए हैं। कहा कि नशे वाले व्यक्ति को प्रस्थान करने पर वाहन चलाने से रोकते हुए उसके स्वजन को सूचित कर उनके सुपुर्द किया जाएगा। स्वजनों से संपर्क न होने पर बार संचालक ऐसे व्यक्ति की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम में देंगे। यदि कोई होटल, पब व रेस्टोरेंट प्रबंधक निर्देशों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।

शादी की खुशियों के बीच स्‍कॉर्पियो हुई हादसे की शिकार, 4 की मौत

रुड़की. हादसे के बाद दूल्हे और उसके स्वजन के अलावा कुछ चुनिंदा लोगों की मौजूदगी में शादी की रस्मे पूरी हुई। वहीं इससे पहले जिस किसी ने भी हादसे की बात सुनी वह मौके की तरफ दौड़ पड़ा। अपनों के शव और घायलों को देख कर लोग दहाड़ मारकर रोते रहे। इस हादसे से सारी खुशी मातम में बदल गईं। मेरठ के थाना दौराला निवासी ब्रजेश के बेटे मनीष की बरात गुरुवार की रात रुड़की के चंद्रपुरी में आई थी। बरात में शामिल एक स्काॅर्पियो कार मंगलौर के देवबंद तिराहे के पास अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराकर पलट गई। हादसे में स्काॅर्पियाे ने कई कलाबाजी खाई। हादसे में चार बरातियों की मौत हादसे में सुजल (22), शेखर उर्फ सोनू (24) निवासी अख्तियारपुर थाना दौराला मेरठ, वंश (20) निवासी दौराला मेरठ तथा चिराग उर्फ दीक्षित निवासी अलीपुर सरधना मेरठ के अलावा काशी, तुषार, अमित और दीक्षांत निवासी अख्तियारपुर घायल हो गये थे। अस्पताल में चिकित्सकों ने सुजल, सोनू, वंश और चिराग को मृत घोषित कर दिया था। चार मौत से खुशी का माहौल मातम में बदल गया था। हादसे की सूचना पाकर बराती से लेकर घराती सभी अस्पताल की तरफ दौड़ पड़े। अपनों के शव देख कर लोग दहाड़े मार कर रोते रहे। किसी को भी यकीन नहीं आ रहा था कि ऐसा हो गया है। हादसे के बाद दुल्हन पक्ष के लोग भी अस्ताल पहुंचे। हादसे के बाद न तो बैंड बाजा और न किसी तरह का नाच गाना हुआ। दूल्हे पक्ष के चुनिंदा लोगों की मौजूदगी में शादी की रस्में हुई। इसके बाद दुल्हन को विदा किया गया। वहीं दूल्हे पक्ष के लोग भी भारी मन से दुल्हन को लेकर रवाना हुए। कई लोग पोस्टमार्टम कराने के लिए रुड़की में ही रुक गये। देर रात चिराग के रुप में हुई चौथे मृतक की शिनाख्त हादसे मे मरने वाले तीन लोगों की पुलिस ने शिनाख्त कर ली थी, लेकिन चौथे की शिनाख्त नहीं हो पाई थी। देर रात को पुलिस ने चौथे मृृतक की शिनाख्त चिराग निवासी अलीपुर थाना सरधना मेरठ के रुप में हुई। पुलिस ने सभी के शव कब्जे में लिये। शुक्रवार को सभी के शव का पोस्टमार्टम हुआ।  

नेशनल हाईवे पर भीषण सड़क दुर्घटना, सड़क पर लगा लंबा जाम, एक व्यक्ति की मौत, पुलिस ने शुरू की जांच

कर्नाटक कर्नाटक के चिकोडी के निपाणी शहर में शुक्रवार को स्तवनिधि घाट से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भीषण सड़क दुर्घटना हुई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। हादसे की वजह से सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिसे बहाल करने में पुलिस और प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अनियंत्रित ट्रक बना हादसे की वजह निपाणी पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना एक अनियंत्रित ट्रक के कारण हुई, जो मुंबई जा रहा था। ट्रक ने पहले एक जीप को टक्कर मारी, जिससे जीप सड़क के दूसरी ओर चली गई और दो कारों तथा एक दोपहिया वाहन से टकरा गई। इस हादसे में खानपुर के जंबोती निवासी 65 वर्षीय नारायण नागु परवलकर की मौत हो गई। हादसे के समय नारायण और अन्य लोग जंबोती से कोल्हापुर स्थित महालक्ष्मी देवी और ज्योतिबा मंदिर जा रहे थे। वीडियो में दिखा भयावह मंजर घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रक को सड़क के नीचे पलटा हुआ देखा जा सकता है। इसके अलावा, कुछ अन्य वाहन और कारें भी क्षतिग्रस्त हालत में दिखाई दे रही हैं। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी हादसे में 45 वर्षीय रेशमा कुदथुरकर और 28 वर्षीय शंकर परवलकर गंभीर रूप से घायल हो गए। इन्हें तुरंत बेलगाम अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा, 15 अन्य लोगों को मामूली चोटें आई हैं। मृतक नारायण नागु परवलकर के घर में शोक का माहौल है। पुलिस ने शुरू की जांच निपाणी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे की जांच शुरू कर दी है। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगने के कारण पुलिस और प्रशासन मार्ग को जल्द से जल्द बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं।  

2024 में अटलांटिक महासागर में तूफानों का सीजन, सारा तूफान के कारण भारी बारिश और बाढ़ की आशंका, भारी बारिश की संभावना

नई दिल्ली चक्रवाती तूफान हेलेन के बाद अब अमेरिका में एक और विनाशकारी तूफान सारा का खतरा मंडरा रहा है। यह तूफान कैरेबियन सागर में उठकर फिलहाल होंडुरास से 165 मील (266 किलोमीटर) दूर पूर्व-दक्षिणपूर्व में स्थित निकारागुआ के पास है। तूफान की गति 12 मील प्रति घंटे (19 किमी प्रति घंटा) है और यह मैक्सिको की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है। आगामी सप्ताह में यह तूफान फ्लोरिडा के तट से टकरा सकता है, लेकिन यह फ्लोरिडा में सीधे नहीं आएगा, बल्कि टैम्पा और फोर्ट मेयर्स के रास्ते इससे टक्कर हो सकती है। सारा तूफान के कारण भारी बारिश और बाढ़ की आशंका नेशनल हरिकेन सेंटर (NHC) ने सारा तूफान के चलते आंधी-तूफान, भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने की संभावना है, जिससे होंडुरास, बे आइलैंड, निकारागुआ, फ्लोरिडा और आसपास के क्षेत्रों में रहने वालों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। होंडुरास में 40 मील प्रति घंटा (65 किमी प्रति घंटा) की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं, जो फ्लोरिडा पहुंचने तक 100-150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती हैं। उत्तरी होंडुरास में 30 इंच (76 सेंटीमीटर) तक बारिश हो सकती है, वहीं निकारागुआ और पूर्वी मैक्सिको तक 15 इंच (38 सेंटीमीटर) बारिश का अनुमान है। पूर्वानुमान है कि सारा तूफान मैक्सिको के युकाटन द्वीप तक पहुंचने पर कमजोर पड़ सकता है। 2024 में अटलांटिक महासागर में तूफानों का सीजन 2024 में सारा चक्रवाती तूफान अटलांटिक महासागर में उठने वाला 18वां तूफान है। अटलांटिक तूफान सीजन हर साल 1 जून से 30 नवंबर तक होता है, जिसमें उत्तरी अटलांटिक महासागर में उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय चक्रवात बनते हैं। अब तक इस साल 17 तूफान आ चुके हैं और सारा तूफान 18वां है। मई 2024 में अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने अनुमान जताया था कि इस वर्ष 17 से 25 तूफान आ सकते हैं, जिनमें से कई का असर बहुत भारी हो सकता है। यह लगातार आठवां साल है जब 14 से अधिक तूफान आए हैं। इसके पीछे कारण अल नीनो पैटर्न का प्रभाव है, जिसने पिछले कुछ मौसमों में तूफानों की संख्या में कमी की थी। हालांकि, 2024 में महासागर के गर्म तापमान ने अल नीनो के प्रभाव को कम कर दिया, जिससे तूफानों की संख्या और प्रभाव में वृद्धि हुई है। फ्लोरिडा के लिए बढ़ती चिंता सारा तूफान के रास्ते में फ्लोरिडा और आसपास के क्षेत्रों के लोग तैयार रहें, क्योंकि तूफान की तीव्रता बढ़ने की संभावना है। प्रभावित क्षेत्रों में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन का खतरा रहेगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने सभी को पहले से तैयारी करने और सुरक्षित रहने की चेतावनी दी है।

पीएम मोदी के विमान में आई खराबी, तकनीकी खराबी ठीक होने तक विमान को अब एयरपोर्ट पर ही रुकना होगा

देवघर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विमान में शुक्रवार को झारखंड के देवघर में तकनीकी खराबी आ गई। तकनीकी खराबी ठीक होने तक विमान को अब एयरपोर्ट पर ही रुकना होगा। दिल्ली से दूसरा विमान देवघर भेजा जा रहा है, जिससे पीएम के राजधानी लौटने में देरी हो रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली झारखंड के उलिहातू गांव का दौरा किया और उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। मोदी भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु गांव का दौरा करने वाले प्रथम प्रधानमंत्री है। प्रधानमंत्री ने एक टवीट में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी के गांव उलिहातू में उन्हें शीश झुकाकर नमन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहां आकर अनुभव हुआ कि इस पवित्र भूमि में कितनी ऊर्जा-शक्ति भरी है। इस मिट्टी का कण-कण देशभर के मेरे परिवारजनों को प्रेरित कर रहा है। उलिहातू का दौरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री मोदी का स्थानीय लोगों ने ढोल और मांदर जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर नृत्य करते हुए गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने बिरसा मुंडा के जन्मस्थान की मिट्टी को पवित्र बताते हुए उससे तिलक भी लगाया। प्रधानमंत्री ने आदिवासी प्रतीक बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर 20 नवंबर को दूसरे दौर के मतदान से पहले शुक्रवार को झारखंड में दो रैलियों को संबोधित किया। अपनी रैलियों में पीएम मोदी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी पर अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों के लोगों को कमजोर करने के लिए आरक्षण खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उधर, देवघर से 80 किलोमीटर दूर झारखंड के गोड्डा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हेलीकॉप्टर एटीसी से मंजूरी के इंतजार में 45 मिनट तक खड़ा रहा। कांग्रेस ने दावा किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता के कार्यक्रम को बाधित करने के लिए जानबूझकर देरी की गई थी। कांग्रेस ने देवघर के पास पीएम की रैली की ओर इशारा करते हुए सुझाव दिया था कि उनके कार्यक्रम को गांधी के कार्यक्रमों पर प्राथमिकता दी जा रही है। राहुल गांधी के हेलिकॉप्टर को 45 मिनट बाद उड़ान भरने की इजाजत दी गई।

शिंदे ने कहा- सरकार दलितों और पिछड़ी जातियों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम कर रही है

महाराष्ट्र महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पिछली सरकार पर प्रमुख परियोजनाओं को रुकवाने और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की विचारधारा से हटने का आरोप लगाया। इंटरव्यू में शिंदे ने कहा, “यह चुनाव विकास पर केंद्रित है। लोगों का पूरी तरह से विश्वास है कि यह हमारी सरकार है, यह हमारे मुख्यमंत्री हैं। लोग महायुति सरकार को फिर से सत्ता में लाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।” शिंदे ने आरोप लगाया कि पूर्व महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को रोक दिया था। इनमें अटल सेतु, कोस्टल रोड, मेट्रो, नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं शामिल थीं। शिंदे का कहना था कि उनकी सरकार ने इन बाधाओं को हटाया और विकास की गति फिर से शुरू की। बाल ठाकरे की विचारधारा से विश्वासघात शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से विश्वासघात करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, “उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को छोड़ दिया, उन्होंने भाजपा से विश्वासघात किया और जनता के विश्वास को तोड़ा। जो जनादेश शिवसेना-भाजपा गठबंधन को मिला था, उसे उद्धव ठाकरे ने तोड़ दिया।” मराठा आरक्षण पर क्यों बोले शिंदे मराठा आरक्षण के मुद्दे पर शिंदे ने अपनी सरकार की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया, जो पहले नहीं दिया गया था। मराठा समुदाय के कुछ नेता ओबीसी वर्ग में आरक्षण की मांग कर रहे हैं। शिंदे ने कहा, “हमने मराठा समुदाय को वह दिया, जो पहले दिया जाना चाहिए था। पहले की सरकारों ने मराठा समुदाय का इस्तेमाल तो किया, लेकिन असली लाभ नहीं दिया। हमारी सरकार ने 10 प्रतिशत आरक्षण दिया और हाई कोर्ट में इसका बचाव किया।” हमने नहीं किया गिरफ्तार शिंदे ने अपनी सरकार पर राज्य एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पूर्व MVA सरकार ने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “लोगों को हनुमान चालीसा का पाठ करने पर गिरफ्तार किया गया, जिसमें महिलाएं और पत्रकार भी शामिल थे। क्या हमने किसी को गलत तरीके से जेल में डाला है?” शिंदे ने कहा कि उनकी सरकार दलितों और पिछड़ी जातियों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम कर रही है। विपक्ष ने इन समुदायों के खिलाफ झूठी नकारात्मकता फैलाई है।

ब्राजील में सुप्रीम कोर्ट के बाहर मचा हड़कंप, शख्स ने खुद को बम से उड़ाया

ब्राजील ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश करने में असफल रहे एक व्यक्ति ने इमारत के बाहर विस्फोट कर खुद को खत्म कर लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि घटना के बाद न्यायाधीशों और कर्मचारियों ने इमारत खाली कर दी और बाहर आ गए। ब्राजील के उच्चतम न्यायालय की ओर से इस घटना पर बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया कि सत्र समाप्त होने के बाद शाम को करीब साढ़े 7 बजे दो बार तेज धमाकों की आवाज सुनी गई। ऐसे में सभी न्यायाधीश और कर्मचारी सुरक्षित रूप से भवन से बाहर निकल गए। अग्निशमन कर्मियों ने राजधानी ब्रासीलिया में एक व्यक्ति की घटनास्थल पर ही मौत हो जाने की पुष्टि की। हालांकि, मृतक की पहचान नहीं की जा सकी है। ब्राजील के संघीय जिले की लेफ्टिनेंट गवर्नर सेलिना लियो ने कहा कि संदिग्ध ने पहले संसद की पार्किंग में एक कार में विस्फोटक लगाया था। मगर, इससे कोई हताहत नहीं हुआ। स्पीकर आर्थर लिरा के अनुसार, लीओ ने जोखिमों से बचने के लिए गुरुवार को संसद बंद करने का सुझाव दिया था। ब्राजील की सीनेट ने उनकी बात मान ली और निचला सदन दोपहर तक बंद रहा। 20 सेकंड के अंतराल पर हुए विस्फोट ब्रासीलिया के थ्री पॉवर्स प्लाजा में सुप्रीम कोर्ट के बाहर लगभग 20 सेकंड के अंतराल पर विस्फोट हुए। इस स्थान पर उच्चतम न्यायालय, संसद और राष्ट्रपति भवन सहित ब्राजील की मुख्य सरकारी इमारतें स्थित हैं। घटना के बाद काफी समय तक अफरातफरी मची रही। कुछ दिनों पहले ब्राजील के शहर मैसियो में एक आवासीय इमारत में विस्फोट हुआ था। इस घटना में 10 वर्षीय बच्चे सहित 3 लोगों की मौत हो गई और 5 घायल हो गए। अग्निशमन विभाग ने गुरुवार को यह जानकारी दी। नागरिक सुरक्षा प्रवक्ता की प्रारंभिक जानकारी से पता चला कि विस्फोट मैसियो के सिडेड यूनिवर्सिटेरिया पड़ोस में एक अपार्टमेंट के सिस्टम से गैस रिसाव के कारण हुआ। विस्फोट से आग लग गई जिससे 2 मंजिला इमारत नष्ट हो गई, जिसमें 20 अपार्टमेंट थे।

1000 साल की अवधि में भारत विज्ञान में पीछे रह गया, उस दिशा में सोच ही विकसित नहीं हो सकी: नारायणमूर्ति

बेंगलुरु आईटी कंपनी इन्फोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति का कहना है कि भारत यदि विज्ञान पिछड़ गया तो इसकी वजह यह रही 1000 साल तक हमलावरों का राज रहा। उन्होंने कहा कि 1000 साल की अवधि में भारत को विज्ञान में पीछे रह गया और यहां माहौल ऐसा रहा कि युवाओं की उस दिशा में सोच ही विकसित नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि 1000 ईसवी से 1947 तक का काल ऐसा था, जिसमें साइंस को लेकर सोच विकसित नहीं हो सकी। इस दौरान साइंस को लेकर विचार नहीं पनपा और विश्लेषणात्मक सोच का अभाव रहा। यही कारण रहा कि इस अवधि में भारत में नवाचार, आविष्कार या शोध नहीं दिखते। नारायणमूर्ति ने 2024 इन्फोसिस साइंस प्राइजेज सेरेमनी के दौरान दिए वर्चुअल भाषण में ये बातें कहीं। इजरायल के पूर्व नेता शिमोन पेरेज के भाषण का भी उन्होंने जिक्र किया। पेरेज ने कहा था, ‘इज़राइल में हमने अपनी सबसे बड़ी धरोहर को पहचाना है और वह हमारा दिमाग। हमने रचनात्मकता, नवाचार और नए आविष्कारों के माध्यम से बंजर रेगिस्तानों को फलते-फूलते खेतों में बदल दिया और विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नई ऊंचाइयां दीं और दुनिया का नेतृत्व किया।’ मूर्ति ने कहा किसी भी देश के विकास के लिए ऐसे विचार क्रांतिकारी हैं। इसके आगे वह कहते हैं कि इतिहास बताता है कि एक दौर में भारत गणित, विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग, मेडिसिन और सर्जरी में अग्रणी था। वैदिक काल से तब तक ऐसी स्थिति थी, जब तक हमलावरों ने भारत पर आकर कब्जा नहीं किया। 700 से 1520 ई. तक उज्बेकिस्तान से अफगानिस्तान तक के हमलवारों ने अटैक किए और यहां सत्ता भी कायम की। इसके बाद अंग्रेज आ गए, जिन्होंने भारत को अपना उपनिवेश ही बना लिया था। उन्होंने कहा कि जो हमलावर आए थे, उनका साइंस, मैथ से कोई लेना-देना नहीं था। हालांकि उनकी तुलना में अंग्रेजों ने भारतीयों को महत्वाकांक्षी कामों के लिए कुछ हद तक प्रोत्साहित भी किया। वह कहते हैं कि हमारी प्रोग्रेस धीमी रही है। इसका कारण था कि हमारी युवा पीढ़ी पर बीते दौर की छाप थी। जिज्ञासु दिमागों की कमी हो गई। विश्लेषणात्मक सोच एवं नवाचार का विचार पहले जैसा नहीं रहा। समस्या को समझना और उसका हल निकालना, यह विचार कम दिखा। वह कहते हैं कि स्वतंत्रता के बाद भारत में विज्ञान की दोबारा शुरुआत हुई और इतने कम अरसे में ही हमने दिखाया है कि साइंस के माध्यम से क्या-क्या बदला जा सकता है। इसे अभी और विस्तार देने की जरूरत है।

इस वर्ष पड़ेगी कड़ाके की ठंड, IMD की भविष्याणी ने बढ़ा दी टेंशन, ला नीना के एक्टिव होने की संभावना

नई दिल्ली भारत में इस साल ठंड के तेवर कैसे रहेंगे इसको लेकर मौसम विभाग की चेतावनी आ गई है। आईएमडी के मुताबिक इस साल देश में कड़ाके की ठंड पड़ने के आसार हैं। इसके मुताबिक इस दौरान हालात बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। मौसम विभाग के मुताबिक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में सर्दी काफी ज्यादा सता सकती है। गौरतलब है कि मौसम ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तर भारत के शहरों में सुबह धुंध की चादर में लिपटी नजर आ रही है। इसके अलावा दिन और रात के तापमान में ठीक-ठाक अंतर महसूस होने लगा है। क्यों कहा जा रहा कि पड़ेगी कड़ाके की ठंड इसकी वजह है अक्टूबर-नवंबर के दौरान ला नीना के एक्टिव होने की संभावना। IMD के अनुसार अक्टूबर-नवंबर में ला नीना की स्थिति बनने की 71% संभावना है। हालांकि मौसम विभाग का यह भी कहना है कि ठंड कितनी पड़ेगी इसका सटीक पूर्वानुमान नवंबर में ही लग पाएगा। ला नीना के इसी महीने एक्टिव होने पर दिसंबर और जनवरी के महीने में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। ला नीना की वजह से आमतौर पर तापमान में गिरावट आती है। सर्दियों में भी इसकी वजह से अधिक बारिश होती है। ला नीना का प्रभाव कितना ला नीना के दौरान पूर्वी हवाएं समुद्र के पानी को पश्चिम की ओर धकेलती हैं। इस वजह से समुद्र की सतह ठंडी हो जाती है। आईएमडी के अनुमान के मुताबिक ला नीना अक्टूबर और नवंबर के बीच एक्टिव होने की संभावना 71 प्रतिशत है। IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार अक्टूबर-नवंबर में ला नीना की स्थिति बनने की 71% संभावना है। जब ला नीना होता है, तो उत्तर भारत, खासकर उत्तर-पश्चिमी भारत और आसपास के मध्य क्षेत्र में तापमान सामान्य से कम हो जाता है। क्यों पड़ेगी अधिक ठंड मौसम विभाग के मुताबिक भारत में अधिक ठंड का संबंध ला-नीना से है। ला-नीना मौसम की एक खास अवस्था है। अगर ला-नीना बनता है तो भारत के उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी और दिल्ली-एनसीआर समेत मध्य क्षेत्र में आमतौर पर ठंड का प्रकोप देखने को मिलता है। हालांकि ला-नीना का पूरा प्रभाव आने वाले महीने में समझ में आएगा। क्या है ला-नीना स्पेनिश में ला-नीना का मतलब होता है छोटी लड़की, यह अल-नीनो का उलटा होता है। जब ला-नीना बनता है तो यह काफी ज्यादा ठंड ले आता है। यह प्रशांत महासागर की सतह पर ठंड को बढ़ाता है। इस दौरान बारिश खूब होती है और तापमान में कमी आती है। ला-नीना विभिन्न वैश्विक जलवायु परिवर्तनों से जुड़ा हुआ है। जैसे-अटलांटिक में अधिक तूफान, दक्षिण अमेरिका में सूखा, और दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में गीला मौसम। यह अप्रैल और जून के बीच शुरू होता है, अक्टूबर से फरवरी तक मजबूत होता है। यह 9 महीने से लेकर 2 साल तक कहीं भी रह सकता है। भारत पर कितना असर सितंबर में आईएमडी ने भविष्यवाणी की थी कि ला नीना के चलते भारत में कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है। यह उम्मीद की जाती है कि उत्तरी क्षेत्रों, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर को ठंड के तापमान का सामना करना पड़ेगा, जो संभावित रूप से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। तेज बरसात के साथ खतरनाक ठंड सर्दियों की फसल को भी नुकसान पहुंचा सकती है। फिलहाल भारत में फॉग शुरू हो चुका है। उत्तरी भारत, जिसमें जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में सुबह धुंध भरी हो रही है। इसके अलावा आने वाले कुछ दिनों में देश के उत्तर और मध्य हिस्सों में मिनिमम टेम्प्रेचर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं, अगले दो दिन में पूर्वी भारत में तापमान में तीन से चार डिग्री की गिरावट आ सकती है। वहीं, अगले कुछ दिन के अंदर तापमान में काफी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

ट्रंप ने अमेरिका में जासूसी से जुड़ी जिम्मेदारी के लिए तुलसी गबार्ड को चुना, US में पैदा हुईं तुलसी हिंदू और पूरी तरह शाकाहारी

वाशिंगटन अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में डोनोल्ड ट्रंप को जीत हासिल हुई है। ट्रंप ने बुधवार को अपना ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ (DNI) चुना। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व सदस्य तुलसी गबार्ड को DNI बनाने का फैसला किया है। गबार्ड चार बार सांसद रह चुकी हैं और 2020 में वह राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए उम्मीदवार भी थीं। गबार्ड के पास पश्चिम एशिया और अफ्रीका के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में तीन बार तैनाती का अनुभव है। वह हाल ही में डेमोक्रेटिक पार्टी को छोड़कर रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हुई थीं। ट्रंप ने घोषणा की, ‘मुझे यह ऐलान करते हुए काफी खुशी हो रही है कि पूर्व सांसद लेफ्टिनेंट कर्नल तुलसी गबार्ड डीएनआई के रूप में सेवाएं देंगी। दो दशकों से अधिक समय तक तुलसी ने हमारे देश और सभी अमेरिकियों की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी है।’ उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व उम्मीदवार के रूप में उन्हें दोनों दलों में व्यापक समर्थन प्राप्त है, लेकिन अब वह रिपब्लिकन पार्टी की अहम सदस्य हैं…।’ कौन हैं तुलसी तुलसी अमेरिका की पहली हिंदू महिला सांसद हैं। उन्होंने अक्सर पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार की निंदा की है। गबार्ड अमेरिका में जन्मी थीं। उनकी मां ने हिंदू संस्कृति के अनुसार अपने बच्चों का पालन-पोषण किया। वह एक आजीवन शाकाहारी हैं। कांग्रेस की सदस्य होने की शपथ उन्होंने भगवद गीता पर हाथ रखकर ली। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ उत्पीड़न का मुद्दा वह उठाती रही हैं। हिंदुओं का उठाया था मुद्दा साल 2021 में तुलसी गबार्ड ने बांग्लादेश में बार-बार अत्याचार के बाद हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी कांग्रेस में एक प्रस्ताव पेश किया। 1971 में अल्पसंख्यक समूह के खिलाफ क्रूरता के लिए उन्होंने पाकिस्तानी सेना पर हमला बोला। अपने प्रस्ताव में उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे 50 साल पहले पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश में हजारों बंगाली हिंदुओं को मार डाला, प्रताड़ित किया और उनके घरों से निकाल दिया। उन्होंने पाकिस्तान की जमीन का आतंकियों की ओर से इस्तेमाल होने का मुद्दा उठाया था।

शहबाज सरकार की मुश्किलें बढ़ेगी, अब चीन अपनों की सुरक्षा खुद करेंगे, पाकिस्तान में चीनी नागरिकों पर कई घातक हमले हुए

इस्लामाबाद चीन ने पाकिस्तान में काम कर रहे अपने हजारों नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने स्वयं के सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का प्रस्ताव रखा है। पाकिस्तान में हाल के दिनों में चीनी नागरिकों पर कई घातक हमले हुए हैं। इस ताजा घटनाक्रम के पीछे अक्टूबर में कराची हवाई अड्डे के बाहर हुए कार बम विस्फोट को ज्यादा जिम्मेदार माना जा रहा है। इस विस्फोट में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत काम कर रहे चीनी निवेशक और इंजीनियरों को निशाना बनाया गया था। इस हमले में दो चीनी नागरिकों की मौत हो गई थी। इस हमले को लेकर चीन में नाराजगी है और इसे पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी विफलता के रूप में देखा जा रहा है। चीन का मानना है कि पाकिस्तान की सेना विफल रही है। इसे देखते हुए बीजिंग ने भविष्य में एक संयुक्त सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली की मांग की है, जो उसे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने कर्मियों को तैनात करने की अनुमति देगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रस्ताव पिछले महीने चीनी प्रधानमंत्री ली चियांग के पाकिस्तान दौरे के दौरान दिया गया था, जब वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के लिए इस्लामाबाद आए थे। ली चियांग एक दशक से भी अधिक समय बाद पाकिस्तान का दौरा करने वाले पहले चीनी प्रधानमंत्री थे। उनका रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने स्वागत किया। रिपोर्टें बताती हैं कि बंद दरवाजों के पीछे हुई कई बैठकों के बाद, पाकिस्तान में अपने सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के चीनी प्रस्ताव पर स्थानीय सरकार की सहमति मिलने की संभावना जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि इस्लामाबाद को बीजिंग द्वारा एक लिखित प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर सुरक्षा एजेंसियां विचार कर रही हैं। इस प्रस्ताव के तहत आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहायता के लिए दोनों देशों के सुरक्षा बलों को एक-दूसरे के क्षेत्र में तैनात करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। हालांकि, कई उच्च पदस्थ अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर गंभीर संदेह व्यक्त किया है और इसे भविष्य में पाकिस्तान के लिए गंभीर परिणाम देने वाला कदम बताया है। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा, “पाकिस्तान सीधे हस्तक्षेप के बजाय चीन से अपनी खुफिया और निगरानी क्षमता को बेहतर बनाने में मदद प्राप्त करना पसंद करेगा।” चीन भी पाकिस्तान के साथ चल रही सुरक्षा सहयोग वार्ताओं को गोपनीय बनाए हुए है। कराची बम विस्फोट और इस घटना की जांच ने बीजिंग को नाराज कर दिया है क्योंकि इसमें एक अंदरूनी व्यक्ति की संलिप्तता पाई गई थी, जिसने इंजीनियरों की यात्रा और रूट की जानकारी लीक की थी। ऐसी स्थिति में अमेरिका सहित कई देशों ने पहले ही पाकिस्तान में चीन के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है और इस प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच, गुरुवार को पाकिस्तान के विदेश कार्यालय (FO) ने बीजिंग द्वारा इस्लामाबाद पर सुरक्षा प्रयासों में शामिल होने के लिए दबाव बनाने की रिपोर्टों को “अफवाहें” कहकर खारिज कर दिया और इसे “भ्रामक एजेंडा” का हिस्सा बताया। इस्लामाबाद में एक साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जेहरा बलोच ने कहा, “हम उन मीडिया अटकलों पर प्रतिक्रिया नहीं देते जो अविश्वसनीय स्रोतों पर आधारित होती हैं और हमारे संबंधों की प्रकृति के बारे में भ्रम पैदा करने के उद्देश्य से प्रेरित होती हैं।” प्रवक्ता ने आगे जोर देकर कहा, “हम पाकिस्तान-चीन रणनीतिक साझेदारी को कमजोर करने के किसी भी प्रयास की अनुमति नहीं देंगे।” इस वर्ष के दौरान दो बड़े घातक हमले हुए हैं – मार्च में खैबर पख्तूनख्वा के बिशाम में हुए विस्फोट में पांच चीनी नागरिकों की मौत हो गई थी, जबकि कराची हवाई अड्डे के पास हुए दूसरे विस्फोट में दो नागरिकों की जान चली गई थी।

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