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UPI की सर्विस अचानक ठप पड़ गईं थीं, कुछ समय के बाद ये सर्विस दोबारा शुरू हो गईं

मुंबई भारत के दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में शनिवार दोपहर को Unified Payments Interface (UPI) की सर्विस अचानक ठप पड़ गईं, जिसके कुछ समय बाद वे सर्विस दोबारा शुरू हो गईं. इस दौरान बहुत से लोग UPI से पेमेंट नहीं कर पा रहे थे और कुछ समय बाद ये सर्विस दोबारा पटरी पर लौट आईं. आउटेज को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Downdetector ने भी इस आउटेज की जानकारी दी थी. इस आउटेज का असर Paytm, PhonePe और Google Pay यूजर्स पर नजर आया. Downdetector से पता लता है कि इस आउटेज की शुरुआत करीब शनिवार दोपहर 12 बजे के आसपास हुई. इस दौरान Paytm, PhonePe और Google Pay यूजर्स UPI पेमेंट नहीं कर पाए. इस दौरान कुछ यूजर्स ने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया. बताते चलें कि भारत में UPI सर्विस देने वाले कई ऐप मौजूद हैं. जिसमें बैंकिंग ऐप से लेकर Paytm और PhoePe जैसे नाम भी शामिल हैं. शनिवार दोपहर से UPI की सर्विस प्रभावित हुईं Downdetector पर UPI प्रोब्लम को लेकर शनिवार दोपहर 12 बजे के आसपास से लोगों ने रिपोर्ट करना शुरू किया. इस दौरान यूजर्स को UPI QR Code स्कैन करने के बाद पेमेंट का प्रोसेस तो नजर आ रहा है, लेकिन 5 मिनट बाद भी पेमेंट प्रोसेस कंप्लीट नहीं हो रहा है. हालांकि अभी इस आउटेज को लेकर ये जानकारी सामने नहीं आई है कि इससे भारत के कौन-कौन से राज्य प्रभावित हुए हैं. सोशल मीडिया पर छाटा ट्रेंड UPI की सर्विस प्रभावित होने के बाद बहुत से यूजर्स को पेमेंट करने में परेशानी आ रही हैं, जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने इसको लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करना शुरू कर दिया. Elon Musk के X प्लेटफॉर्म पर कुछ ही मिनट में #upidown ट्रेंड करने लगा. इसका हैशटैग का इस्तेमाल करके बहुत से लोगों ने इंटरनेट पोस्ट किया और कई लोगों ने तो UPI Down दिखाने के लिए स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए.   कई बैंकिंग सर्विस भी प्रभावित Downdetector ने अपने पोर्टल पर बताया है कि SBI, Google Pay, HDFC Bank और ICICI बैंकिंग की UPI सर्विस भी प्रभावित हुई हैं. UPI भारत में एक पॉपुलर सर्विस है, जिसकी मदद से यूजर्स चाय की दुकान से लेकर रेल टिकट बुकिंग तक में पेमेंट करते हैं. ऐसे में अगर ये सर्विस ठप पड़ जाती है, तो उसकी वजह से कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. UPI क्या है? यूपीआई (UPI) एक शॉर्ट नेम है, जिसका फुल फॉर्म Unified Payments Interface है. यह भारत में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा डेवलप किया है और एक डिजिटल पेमेंट सिस्टम है. यह सिस्टम तुरंत और सुरक्षित बैंक खातों के बीच रुपये ट्रांसफर करने की सुविधा देती है.  

10 ग्राम सोना 1 लाख नहीं, सीधे 2 लाख रुपए से भी ज्यादा का हो सकता है!, सोने की कीमतों पर आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

मुंबई अगर आप अब तक सोच रहे थे कि सोना महंगा हो गया है, तो रुकिए! असली झटका तो अभी बाकी है। एक्सपर्ट्स की मानें, तो अगले कुछ सालों में गोल्ड की कीमतें ऐसे ऊंचाई पर पहुंच सकती हैं, जिसकी कल्पना भी आम निवेशकों ने शायद न की हो। 10 ग्राम सोना 1 लाख नहीं, सीधे 2 लाख रुपए से भी ज्यादा का हो सकता है! आइए जानते हैं इस चौंकाने वाली भविष्यवाणी के पीछे की पूरी कहानी।  सोना हो सकता है ₹2.18 लाख प्रति 10 ग्राम! एक कमोडिटी विशेषज्ञ  ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगले 5 सालों में गोल्ड की कीमतें $8000 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। अगर मौजूदा एक्सचेंज रेट (₹85/$) के हिसाब से गणना करें, तो भारतीय बाजार में इसका मतलब है:     ₹8000 × ₹85 = ₹6,80,000 प्रति औंस     1 औंस = 31.1035 ग्राम     यानी ₹6,80,000 ÷ 31.1035 = ₹21,862 प्रति ग्राम     और फिर 10 ग्राम सोना = ₹2,18,500 जी हां, आपने सही पढ़ा—₹2.18 लाख प्रति 10 ग्राम!  क्या है गोल्ड में इस तेजी की वजह? विशेषज्ञों का मानना है कि:     ग्लोबल इकनॉमिक अनिश्चितता     डॉलर में उतार-चढ़ाव     जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ती महंगाई और ब्याज दरें…ये सभी फैक्टर्स सोने की डिमांड को बढ़ा सकते हैं। वर्तमान में थोड़ी बहुत गिरावट की संभावना ज़रूर बताई गई है—जैसे कि $2800-$2900 प्रति औंस का लेवल—लेकिन 2025 के मध्य तक यह $3500 और फिर 5 सालों में $8000 तक उछल सकता है। ध्यान देने वाली बात यह खबर निवेशकों के लिए उत्साहित करने वाली जरूर है, लेकिन जरूरी है कि आप बिना सोचे-समझे पैसा न लगाएं। हर निवेश जोखिम के साथ आता है, और इसलिए फैसला लेने से पहले किसी फाइनेंशियल एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।    

Paytm, PhonePe और Google Pay नहीं कर रहे काम,नहीं हो पा रही UPI ट्रांजैक्शन

नई दिल्ली  शनिवार सुबह भारत में यूपीआई (Unified Payments Interface) एक बार फिर से डाउन है। यूपीआई में आई इस दिक्कत की वजह से लाखों यूजर्स डिजिटल पेमेंट्स नहीं कर पा रहे हैं। इस अचानक आई खराबी ने PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे लोकप्रिय एप्स के जरिए लेन-देन करने वाले लोगों और व्यापारियों दोनों को बुरी तरह प्रभावित किया। आउटेज को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Downdetector ने भी इस आउटेज की जानकारी दी. इस आउटेज का असर Paytm, PhonePe और Google Pay यूजर्स पर नजरआया है. Downdetector से पता लता है कि इस आउटेज की शुरुआत करीब शनिवार दोपहर 12 बजे के आसपास हुई. इस दौरान Paytm, PhonePe और Google Pay यूजर्स UPI पेमेंट नहीं कर पाए. इस दौरान कुछ यूजर्स ने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया. बताते चलें कि भारत में UPI सर्विस देने वाले कई ऐप मौजूद हैं. जिसमें बैंकिंग ऐप से लेकर Paytm और PhoePe जैसे नाम भी शामिल हैं. शनिवार दोपहर से UPI की सर्विस प्रभावित हुईं Downdetector पर UPI प्रोब्लम को लेकर शनिवार दोपहर 12 बजे के आसपास से लोगों ने रिपोर्ट करना शुरू किया. इस दौरान यूजर्स को UPI QR Code स्कैन करने के बाद पेमेंट का प्रोसेस तो नजर आ रहा है, लेकिन 5 मिनट बाद भी पेमेंट प्रोसेस कंप्लीट नहीं हो रहा है. हालांकि अभी इस आउटेज को लेकर ये जानकारी सामने नहीं आई है कि इससे भारत के कौन-कौन से राज्य प्रभावित हुए हैं. सोशल मीडिया पर छाटा ट्रेंड UPI की सर्विस प्रभावित होने के बाद बहुत से यूजर्स को पेमेंट करने में परेशानी आ रही हैं, जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने इसको लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करना शुरू कर दिया. Elon Musk के X प्लेटफॉर्म पर कुछ ही मिनट में #upidown ट्रेंड करने लगा. इसका हैशटैग का इस्तेमाल करके बहुत से लोगों ने इंटरनेट पोस्ट किया और कई लोगों ने तो UPI Down दिखाने के लिए स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए.   इससे पहले, 26 मार्च को भी यूपीआई सेवा में भारी तकनीकी गड़बड़ी आई थी, जब अलग-अलग यूपीआई एप्स के यूजर्स लगभग 2 से 3 घंटे तक ट्रांजेक्शन नहीं कर पाए थे। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इस समस्या का कारण तकनीकी दिक्कतें बताया था, जिससे पूरे देश में आम यूजर्स और व्यापारियों की डिजिटल भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। कई बैंकिंग सर्विस भी प्रभावित Downdetector ने अपने पोर्टल पर बताया है कि SBI, Google Pay, HDFC Bank और ICICI बैंकिंग की UPI सर्विस भी प्रभावित हुई हैं. UPI भारत में एक पॉपुलर सर्विस है, जिसकी मदद से यूजर्स चाय की दुकान से लेकर रेल टिकट बुकिंग तक में पेमेंट करते हैं. ऐसे में अगर ये सर्विस ठप पड़ जाती है, तो उसकी वजह से कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. UPI क्या है? यूपीआई (UPI) एक शॉर्ट नेम है, जिसका फुल फॉर्म Unified Payments Interface है. यह भारत में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा डेवलप किया है और एक डिजिटल पेमेंट सिस्टम है. यह सिस्टम तुरंत और सुरक्षित बैंक खातों के बीच रुपये ट्रांसफर करने की सुविधा देती है. UPI Outage : यूजर्स क्या करें अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यूपीआई में ये परेशानी आखिर आई कैसे? यूजर्स को जल्द ही समस्या ठीक होने की उम्मीद है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और ना ही किसी बड़े UPI ऐप ने अब तक इसे लेकर किसी तरह की जानकारी दी है। ऐसे में यूजर्स को पूरी तरह सर्विस चालू होने तक किसी तरह के पेमेंट से बचना चाहिए। UPI क्यों इतना जरूरी यूपीआई देश का सबसे पॉपुलर पेमेंट सिस्टम बन गया है। इसे NPCI ने तैयार किया है। यह सिस्टम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की निगरानी में काम करता है। इससे लोग बिना किसी फीस के तुरंत पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। चायवाले से लेकर बड़े-बड़े मॉल और कंपनियों तक में आज UPI ही यूज किया जा रहा है। इसमें कई जबरदस्त फीचर्स भी हैं, जो यूजर्स को सहूलियत देते हैं।

लगातार 3 दिन बैंक रहेंगे बंद, सोमवार को शेयर मार्केट में भी नहीं होगा काम

मुंबई 14 अप्रैल सोमवार को अंबेडकर जयंती के अवसर पर भारतीय शेयर मार्केट बंद रहेगा। हॉलीडे कैलेंडर के अनुसार, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में सोमवार को कोई ट्रेडिंग नहीं होगी। दूसरी ओर सोमवार को अवकाश के कारण बैंक लगातार 3 दिन तक बंद रहेंगे। प्रत्येक महीने का दूसरा और चौथा शनिवार बैंक बंद रहते हैं। 12 अप्रैल को सेकेंड सैटरडे पड़ रहा है। इसलिए इस दिन बैंकों में कोई काम नहीं होगा। जबकि, रविवार को साप्ताहिक अवकाश के कारण बैंकों में छुट्टी रहती है। सोमवार को अंबेडकर जयंती पड़ रही है और आरबीआई कैलेंडर के अनुसार इस दिन मिजोरम, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, नई दिल्ली, छत्तीसगढ़, मेघालय और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। शेयर मार्केट भी तीन दिन नहीं खुलेगा शेयर मार्केट हर शनिवार और रविवार को बंद रहता है। इस बार भी बंद रहेगा। सोमवार को अंबेडकर जयंती की छुट्टी की वजह से शेयर बाजार बंद रहेगा। यानी मार्केट लगातार तीन दिन तक क्लोज रहेगा। बता दें बीएसई कैलेंडर अप्रैल 2025 के महीने में तीन छुट्टियां दिखाता है। महावीर जयंती (10 अप्रैल), जो बीत चुका है, डॉ बाबा साहेब अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) और गुड फ्राइडे (18 अप्रैल)। 10 दिन में 6 दिन मार्केट रहेगा बंद 12 अप्रैल- शनिवार का अवकाश 14 अप्रैल – अंबेडकर जयंती मई से दिसंबर तक शेयर बाजार की छुट्टियों की लिस्ट 1 मई – महाराष्ट्र दिवस 2 अक्टूबर – महात्मा गांधी जयंती और दशहरा 21 अक्टूबर – दिवाली (लक्ष्मी पूजन) 22 अक्टूबर – दिवाली बलिप्रतिपदा 5 नवंबर – प्रकाश गुरुपर्व (श्री गुरु नानक देव)

भारतीय शेयर बाजार के कारोबारी सत्र में बड़ी तेजी के साथ बंद, ऑटो और फार्मा शेयर उछले

मुंबई भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। बाजार के सभी सूचकांकों में खरीदारी देखी गई। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 1,310 अंक या 1.77 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,157 और निफ्टी 429 अंक या 1.92 प्रतिशत की तेजी के साथ 22,828 पर था। शेयर बाजार में तेजी की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ को 90 दिनों के लिए टालने को माना जा रहा है। बाजार में तेजी का नेतृत्व ऑटो और फार्मा शेयरों ने किया। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2.03 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसके अलावा, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, मेटल, एनर्जी और मीडिया के साथ सभी इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी पैक में हिंडालको, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, कोल इंडिया, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, ओएनजीसी, अदाणी एंटरप्राइजेज, ग्रासीम, पावर ग्रिड, ट्रेंट, सिप्ला, एनटीपीसी और एचडीएफसी बैंक टॉप गेनर्स थे। एनएसई के बेंचमार्क इंडेक्स में केवल टीसीएस, एशियन पेंट्स और अपोलो हॉस्पिटल्स टॉप लूजर्स थे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 919 अंक या 1.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 50,501 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 439 अंक या 2.88 प्रतिशत की बढ़त के साथ 15,696 पर बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर 3,115 शेयर हरे निशान में, 846 शेयर लाल निशान में और 118 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट, रूपक दे का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,000 एक रुकावट का स्तर है। अगर एनएसई बेंचमार्क इस स्तर को पार करने में सफल हो जाता है तो 23,500 के लेवल भी देखने को मिल सकते हैं। गिरावट की स्थिति में 22,750 एक अहम सपोर्ट लेवल होगा। शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई थी। सुबह 9:38 पर सेंसेक्स 1,349 अंक या 1.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,196 और निफ्टी 444 अंक की तेजी के साथ 22,843 पर था।

सोना 1300 रुपए महंगा हुआ, 95 हजार प्रति 10 ग्राम के पार, हालांकि चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट

जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोने (Gold) की कीमतों में एक बार फिर से लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सोने की कीमतें ऑल टाइम हाई पर पहुँच गई हैं। बीते दिन सोने में 2700 रुपए की बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन शुक्रवार को एक बार फिर सोने की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई है। शुक्रवार को सोना 1300 रुपए महंगा हुआ, हालांकि चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को जयपुर सर्राफा बाजार की ओर से जारी सोने और चांदी की कीमतों की बात करें तो बीते दिन के मुकाबले 24 कैरट सोने की कीमतों में 1300 रुपए का उछाल देखने को मिला, जिसके बाद 24 कैरेट सोने की कीमत 95 हजार 550 रुपए प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमतों में भी 1200 रुपए प्रति 10 ग्राम का उछाल देखने को मिला और 22 कैरेट सोने के दाम 87 हजार 450 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए। इस बीच, भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में जून डिलीवरी वाला सोना 11 अप्रैल को ₹93,736 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। चांदी में गिरावट सोने में तेजी के रुख के बाद चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को चांदी की कीमतों में 200 रुपए प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद जयपुर सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 95 हजार 300 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। जयपुर सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मित्तल का कहना है कि अमेरिका में ट्रंप के सत्ता में आने के बाद सोने की कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है और इसका कारण है ट्रंप की नीतियाँ। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी रिसर्च विश्लेषक मानव मोदी ने बताया, “सोने की कीमतों ने $3,200 का नया रिकॉर्ड पार कर लिया है, जो पिछले सप्ताह की थोड़ी स्थिरता के बाद देखने को मिला। यह तेजी बाजार में अस्थिरता और अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक तनाव के चलते है। भले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ पर 90 दिन की राहत दी है, लेकिन कुल मिलाकर चीनी आयात पर अब 145% तक शुल्क लगाया गया है, जिसमें 125% बेस रेट और अन्य जवाबी शुल्क शामिल हैं।” उन्होंने आगे कहा, “इस बार अमेरिका और चीन के बीच तनाव की रफ्तार 2016 के मुकाबले कहीं ज्यादा है। अगर जल्दी समाधान नहीं निकला, तो यह बाजार में और अनिश्चितता पैदा कर सकता है।” 22 कैरेट और 24 कैरेट में क्या अंतर है? 24 कैरेट सोना 99.9% शुद्धता वाला होता है और इसमें किसी अन्य धातु की मिलावट नहीं होती। जबकि 22 कैरेट सोना लगभग 91.67% शुद्ध होता है, जिसमें थोड़ी मात्रा में तांबा या चांदी जैसी मिश्रित धातुएं मौजूद होती हैं। यही कारण है कि 22 कैरेट सोना ज्यादातर गहनों में इस्तेमाल किया जाता है।

आज शेयर बाजार में तूफानी तेजी, 1100 अंक चढ़ा सेंसेक्‍स, इन 10 स्‍टॉक्‍स में तगड़ी उछाल

मुंबई भारतीय बाजार में आज शानदार तेजी देखी जा रही है. सेंसेक्‍स 1000 अंक ऊपर चढ़कर खुला है, जबकि निफ्टी में करीब 360 अंकों की उछाल आई है. इसके अलावा, बैंक निफ्टी में 500 अंकों की तेजी आई है. हालांकि कुछ देर बाद सेंसेक्‍स 1151 अंक उछलकर 75000 के ऊपर पहुंच गया, जबकि Nifty 364 अंक चढ़कर 22764 लेवल पर पहुंच गया. वहीं बैंक निफ्टी में 700 अंकों की ज्‍यादा तेजी आई है. BSE टॉप 30 शेयरों में से 3 शेयरों को छोड़कर बाकी के सभी शेयर शानदार तेजी दिखा रहे हैं. सनफार्मा के शेयर (Sun Pharma Share) में 4.44 फीसदी की तेजी आई है. इसके अलावा Tata Motors के शेयर में 4.21 फीसदी और टाटा स्‍टील के शेयर में 3.50 फीसदी की तेजी आई है. टीसीएस और एशियन पेंट्स के शेयर में मामूली गिरावट देखी जा रही है. क्‍यों आई ये शानदार तेजी? शेयर बाजार में तेजी की बड़ी वजह बुधवार को ग्‍लोबल मार्केट में आई उछाल और डोनाल्‍ड ट्रंप द्वारा चीन को छोड़कर बाकी देशों पर 90 दिनों तक टैरिफ को रोक दिया. जिसे लेकर भारतीय बाजार में शानदार तेजी देखी जा रही है. इसके अलावा, सनफार्मा और रिलायंस जैसे हैवीवेट शेयरों तेजी से खरीदारी बढ़ रही है. आज के टॉप गेनर शेयर Welspun Living के शेयर आज 6 फीसदी से ज्‍यादा चढ़कर 120 रुपये पर कारोबार कर रहा है. नुवामा वेल्‍थ के शेयरों में 5 फीसदी, Keynes Tech के शेयर में 4.66 प्रतिशत की तेजी आई है. PI industries के शेयर 5.45 फीसदी, KPIT Tech के शेयर में 5 प्रतिशत की तेजी आई है. इसके अलावा, सोलर इंडस्‍ट्रीज के शेयर में 3.50 फीसदी, Adani Enterprises के शेयर 4.60 फीसदी, टाटा स्‍टील के शेयर 4.36 फीसदी, टाटा मोटर्स के शेयर में 4.21 प्रतिशत और जेएसडब्‍लू के शेयर में 4.26 फीसदी की तेजी आई है.   एशियन और ग्‍लोबल मार्केट में गिरावट बुधवार की तेजी के बाद ग्‍लोबल मार्केट में गुरुवार को भारी गिरावट आई है. डॉउ जोन्‍स 1000 अंकों से ज्‍यादा गिरा. वहीं 3 से 4 फीसदी तक टूट गए. इसके अलावा, एशियन मार्केट में गिरावट देखने को मिली. जापान के निक्‍केई में 1400 अंकों की गिरावट आई थी. वहीं चीन के शेयर बाजार में मामूली तेजी देखी गई है.

सोने की कीमतों में एक बार फिर भारी उछाल, सोने के दाम में लगभग ₹3,000 बड़े दाम

मुंबई सोने की कीमतों में एक बार फिर भारी उछाल देखा गया है, साथ ही चांदी की कीमत में भी तगड़ा इज़ाफा हुआ है। 10 अप्रैल, 2025 को सोने के दाम में लगभग ₹3,000 का उछाल आया, और चांदी की कीमत भी बढ़ी। यह बढ़ोतरी अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के कारण हुई है, जिसने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है। क्या कारण है इस बढ़ोतरी का? सोने की कीमतों में यह अचानक उछाल अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध के कारण आया है। चीन ने अमेरिकी आयात पर 84% टैरिफ लगा दिया है, जिससे अमेरिका ने चीनी वस्त्रों पर 125% टैरिफ बढ़ा दिया है। इस तनाव के बढ़ने से निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का रुख कर रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों में उछाल आया है। इससे पहले सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही थी, विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण। लेकिन इन अनुमानित गिरावटों को सोने ने नकारा, और अब इसकी कीमत फिर से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-चीन के बीच तनाव लंबे समय तक जारी रहने की संभावना है, जिससे सोने की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। सोने और चांदी की कीमतें 10 अप्रैल 2025 को: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम होने की संभावना नहीं दिख रही है, और ऐसे में सोने में निवेश बढ़ सकता है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं। हालांकि, गोल्ड में कुछ समय के लिए गिरावट आ सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसमें नरमी की उम्मीद नहीं है।   कैसे तय होती हैं कीमतें? सोने की कीमतें वैश्विक स्तर पर निर्धारित होती हैं, और लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) द्वारा प्रकाशित सोने की कीमतें विश्वभर में एक बेंचमार्क के रूप में काम करती हैं। भारत में, भारतीय बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) आयात शुल्क और स्थानीय करों को जोड़कर सोने की कीमत तय करता है। यह बढ़ती सोने और चांदी की कीमतें यह दर्शाती हैं कि वैश्विक व्यापारिक गतिविधियाँ, जैसे व्यापार युद्ध, सीधे तौर पर इन वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित करती हैं, जिससे निवेशकों के लिए सोना एक महत्वपूर्ण सुरक्षित निवेश विकल्प बन जाता है।  

SBI बैंक ने किया बड़ा बदलाव, बदल दिए विड्रॉल के नियम, अब एटीएम सर्विस चार्ज को भी बढ़ा दिया

नई दिल्ली देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने ATM लेन-देन के नियमों में बड़े बदलाव की घोषणा की है। अगर आपका भी SBI में अकाउंट है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अब आपको फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट, सर्विस चार्जेज और अन्य बदलावों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। आइए, जानते हैं कि एसबीआई ने किन-किन नियमों में बदलाव किया है और इसका आपके ATM लेनदेन पर क्या असर पड़ेगा। फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा में बदलाव SBI ने अब एटीएम पर फ्री लेन-देन की संख्या में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक, सभी ग्राहकों को अब हर महीने SBI एटीएम पर 5 मुफ्त ट्रांजैक्शन और दूसरे बैंकों के एटीएम पर 10 मुफ्त ट्रांजैक्शन करने का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा, अगर आपके खाते में 25,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच औसत बैलेंस है, तो आपको दूसरे बैंकों के एटीएम पर 5 फ्री ट्रांजैक्शन मिलेंगे। वहीँ, 50,000 रुपये से 1,00,000 रुपये के बीच बैलेंस रखने वाले खाताधारकों के लिए भी यही नियम लागू होंगे। लेकिन अगर आपके खाते में 1,00,000 रुपये से अधिक औसत मासिक बैलेंस है, तो आपको SBI और अन्य बैंक के एटीएम पर असीमित मुफ्त ट्रांजैक्शन मिलेंगे। यानी आपके लिए कोई ट्रांजैक्शन लिमिट नहीं होगी। एटीएम सर्विस चार्ज में बदलाव SBI ने अब एटीएम सर्विस चार्ज को भी बढ़ा दिया है। अगर आप अपनी फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद SBI एटीएम का उपयोग करते हैं, तो बैंक 15 रुपये + GST वसूल करेगा। वहीं, दूसरे बैंकों के एटीएम पर यह शुल्क 21 रुपये + GST होगा। इसके अलावा, बैलेंस इंक्वायरी और मिनी स्टेटमेंट जैसी सेवाओं के लिए, फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद SBI एटीएम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। लेकिन दूसरे बैंकों के एटीएम का इस्तेमाल करने पर प्रति ट्रांजैक्शन 10 रुपये + GST का शुल्क लिया जाएगा। अगर आपके खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण एटीएम ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है, तो 20 रुपये + GST का जुर्माना लगेगा। 1 मई 2025 से, SBI ग्राहकों को अपनी मुफ्त मासिक सीमा पार करने के बाद प्रत्येक एटीएम ट्रांजैक्शन पर 23 रुपये का शुल्क देना होगा। इन बदलावों से स्पष्ट है कि अब SBI के ग्राहक को ज्यादा सतर्कता के साथ अपने ATM ट्रांजैक्शन की योजना बनानी होगी। बैंक द्वारा किए गए इन बदलावों से जहां कुछ ग्राहकों के लिए राहत मिलेगी, वहीं कुछ को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

बैंक ऑफ बड़ौदा की सिर्फ 2 लाख रुपये की FD पर आपको 51,050 रुपये का फायदा एक निश्चित अवधि में मिलेगा

मुंबई अगर आप अपनी बचत पर अच्छा ब्याज पाने का सोच रहे हैं, तो बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) की इस नई एफडी स्कीम के बारे में जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इस पब्लिक सेक्टर बैंक ने हाल ही में अपनी एफडी स्कीम में ब्याज दरों को और आकर्षक बना दिया है, और आपको अब 2 लाख रुपये निवेश पर गारंटीड लाभ मिलने का मौका मिल रहा है। खास बात यह है कि इस स्कीम में आपको 51,050 रुपये का फायदा एक निश्चित अवधि में मिलेगा, और यह सब कुछ बिना किसी जोखिम के। कैसे मिलेगा 51,050 रुपये का फायदा? बैंक ऑफ बड़ौदा 2 साल और 1 दिन से लेकर 3 साल तक की अवधि वाली फिक्स्ड डिपोजिट (FD) पर 7.15% से लेकर 7.65% तक का ब्याज दे रहा है। सामान्य नागरिकों को इस स्कीम में 7.15% ब्याज मिल रहा है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दर 7.65% है। अगर आप एक सामान्य नागरिक हैं और 2 लाख रुपये 3 साल के लिए निवेश करते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपको कुल 2,47,379 रुपये मिलेंगे, जिसमें 47,379 रुपये का ब्याज शामिल है। वहीं, यदि आप वरिष्ठ नागरिक हैं, तो आपको 2,51,050 रुपए मिलेगा, जिसमें 51,050 रुपये का गारंटीड रिटर्न मिलेगा। इसके साथ ही बैंक ने 444 दिनों की एक नई स्पेशल एफडी स्कीम भी पेश की है, जिसमें सामान्य नागरिकों को 7.15 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों को 7.65 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की है। इस फैसले का असर लोन की ब्याज दरों के साथ-साथ एफडी की ब्याज दरों पर भी पड़ेगा।  FD ब्याज दरों में हो सकती है कटौती बैंक ऑफ बड़ौदा की यह स्कीम एक शानदार मौका है, क्योंकि हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती का ऐलान किया है। इससे लोन और एफडी की ब्याज दरें धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। ऐसे में, अगर आप इस स्कीम का लाभ उठाना चाहते हैं, तो जल्द ही FD करा लेना बेहतर रहेगा, ताकि आप इस स्कीम के आकर्षक ब्याज दरों का फायदा उठा सकें। बैंक ऑफ बड़ौदा की नई FD स्कीम न केवल सुरक्षित है, बल्कि इससे अच्छा रिटर्न भी मिल रहा है। अगर आप अपनी बचत को सही जगह निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह एक बेहतरीन अवसर हो सकता है।

RBI की बैठक में बड़े ऐलान- मिडिल क्लास को राहत, UPI ट्रांजैक्शन लिमिट में बदलाव, जाने बैठक की मुख्य बातें

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कटौती कर आम आदमी को बड़ी राहत दी है। आज 9 अप्रैल को आरबीआई ने रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6 प्रतिशत करने का फैसला किया। इससे पहले 7 फरवरी 2025 में आरबीआई ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 6.25 प्रतिशत किया गया था। यह मई 2020 के बाद पहली कटौती और ढाई साल में पहला रिविजन था। रेपो दर में कमी का असर मिडिल क्लास पर अधिक होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रेपो रेट में कटौती के बाद बैंक और वित्तीय संस्थानों को RBI से कम लागत पर फंड उधार में मिल जाते हैं। इससे होम लोन, ऑटो लोन और नए पर्सनल लोन पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं और आम लोगों का ईएमआई का बोझ कम होता है। आइए जानते हैं मॉनेटरी पॉलिसी बैठक की मुख्य बातें — प्रमुख ब्याज दर (रेपो) को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6 प्रतिशत किया गया। रेपो दर में लगातार दूसरी बार चौथाई प्रतिशत की कटौती की गई। केंद्रीय बैंक के मौद्रिक रुख को ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘उदार’ करते हुए आगे ब्याज दर में एक और कटौती का संकेत दिया। इससे ग्राहकों के लिए कर्ज की मासिक किस्त (ईएमआई) में और कमी आ सकती है। आरबीआई ने अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) को ‘ग्राहकों से दुकानदारों’ को यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) के माध्यम से लेनदेन की सीमा में संशोधन की अनुमति देने का निर्णय किया है। हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच यूपीआई के जरिये लेनदेन की सीमा पहले की तरह एक लाख ही रहेगी। वर्तमान में ग्राहकों से दुकानदारों (पी टू एम) को पूंजी बाजार, बीमा, जैसे मामलों में प्रति लेनदेन दो लाख रुपये, जबकि कर भुगतान, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पताल, आईपीओ के लिए भुगतान सीमा पांच लाख रुपये है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत किया गया। मल्होत्रा ने कहा कि निवेश गतिविधियों में तेजी आई है और उच्च क्षमता उपयोग, सरकार के बुनियादी ढांचे पर खर्च को लेकर जोर, बैंकों और कंपनियों के बेहतर बही-खाते और वित्तीय स्थितियों में सुधार के कारण आगे निवेश और बढ़ने की उम्मीद है। आरबीआई का कहना है कि व्यापार शुल्क संबंधी उपायों ने अनिश्चितताओं को और बढ़ा दिया है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक परिदृश्य पर असर पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को 4.2 प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत किया गया। आरबीआई ने सोने के आभूषणों और गहनों के बदले दिए जाने वाले लोन को लेकर मौजूदा नियमों की समीक्षा करते हुए नए मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आरबीआई ने कहा कि सोने के बदले कर्ज से संबंधित प्रस्तावित दिशानिर्देशों का मकसद नियमों को सख्त करना नहीं, बल्कि लेंडर के व्यवहार को सुसंगत करना है। बता दें कि इन लोन का उपयोग आम तौर पर कंजम्पशन और इनकम जेनरेट दोनों उद्देश्यों के लिए किया जाता है। केंद्रीय बैंक ने को-लोन देने के दायरे का विस्तार करने और सामान्य विनियामक ढांचा जारी करने का प्रस्ताव किया। एमपीसी की 54वीं बैठक की पूर्ण जानकारी 23 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी। आरबीआई ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के फंसे हुए कर्जों (स्ट्रेस्ड एसेट्स) के समाधान के लिए एक नए ढांचे ‘सिक्योरिटाइजेशन ऑफ स्ट्रेस्ड एसेट्स फ्रेमवर्क’ पर मसौदा दिशा-निर्देश जारी किया है। यह नया ढांचा फंसे हुए कर्जे के सिक्योरिटाइजेशन (प्रतिभूतिकरण) को बढ़ावा देगा। सिक्योरिटाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें इन फंसे हुए कर्जों को मिलाकर प्रतिभूतियों में बदला जाता है और फिर निवेशकों को बेचा जाता है। इससे बैंकों को जोखिम कम करने और ऐसे कर्जों से निकलने का एक रास्ता मिलेगा। 4 से 6 जून को अलगी बैठक बता दें कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 6 बैठकें होगी। पहली बैठक 7 से 9 अप्रैल तक थी। अब एमपीसी की अगली बैठक चार से छह जून, 2025 को होगी।

डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, फार्मास्यूटिकल्स पर भी जल्द लगाया जाएगा टैरिफ, जानिए किन सामानों के एक्सपोर्ट पर क्या असर होगा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तकरीबन 180 देशों पर लगाया गया रेसिप्रोकल टैरिफ आज से लागू हो गया है. सुबह 9.31 बजते ही भारत पर लगाया गया 26 फीसदी टैरिफ लागू हो गया. भारत पर लगाए गए इस टैरिफ के बाद आज से अमेरिका में निर्यात किए जाने वाले हर भारतीय सामान पर 26 फीसदी शुल्क लगेगा. कहा जा रहा है कि इस टैरिफ का भारत पर कई स्तरों पर असर देखने को मिल सकता है. अमेरिका में भारत के सामान पर 26 फीसदी टैरिफ लगाने से यकीनन उस सामान की कीमत बढ़ेगी. इससे वहां भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है, खासकर उन देशों की तुलना में जिन पर कम टैरिफ लगाया गया है. भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल हैं. ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का सबसे ज्यादा असर दवाओं पर पड़ेगा. भारत से अमेरिका में सस्ती दवाएं जाती हैं. भारत से अमेरिका 12 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं और फार्मा प्रोडक्ट्स लेता है. 2023-24 में भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस 35.32 अरब डॉलर था. टैरिफ से यह सरप्लस कम हो सकता है. कॉमर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक, भारत से 73.7 अरब डॉलर का निर्यात जबकि अमेरिका से 39.1 अरब डॉलर का आयात होता है. हालांकि, अमेरिकी सरकार के आंकड़े इससे अलग हैं. अमेरिका के आंकड़े बताते हैं कि भारत से 91.2 अरब डॉलर का निर्यात तो 34.3 अरब डॉलर का आयात होता है. अमेरिका के साथ कारोबार करना भारत के लिए फायदे का सौदा रहा है क्योंकि उसके इंपोर्ट कम और एक्सपोर्ट ज्यादा है. टैरिफ के कारण एक्सपोर्ट कम हो सकता है. लेकिन भारत पर टैरिफ क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की दोस्ती जगजाहिर है. दोनों एक-दूसरे को अच्छा दोस्त बताते हैं. ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ रैलियों को इसका सशक्त उदाहरण भी बताया जाता है. लेकिन ट्रंप कई मौकों पर भारत को टैरिफ किंग बता चुके हैं. ट्रंप ने कहा था कि भारत बहुत अधिक टैरिफ लगाता है यह बहुत Brutal है. ऐसे में ट्रंप ने भारत पर 26 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है. वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के आंकड़ों की माने तो भारत में औसत टैरिफ सबसे ज्यादा है. भारत में औसत टैरिफ 17 फीसदी तो अमेरिका में 3.3 फीसदी ही है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से आने वाले खाने-पीने के सामान, मांस और प्रोसेस्ड फूड पर भारत में 37.66 फीसदी टैरिफ लगता है, जबकि इन्हीं सामानों पर भारत, अमेरिका में 5.29 फीसदी टैरिफ देता था. अब तक ऑटोमोबाइल पर भारत 24.14 फीसदी तो अमेरिका 1.05 फीसदी टैरिफ लगाता आया है. शराब पर भारत 124.58 फीसदी तो अमेरिका 2.49 फीसदी टैरिफ वसूलता है. सिगरेट और तंबाकू पर अमेरिका में 201.15 फीसदी तो भारत में 33 फीसदी टैरिफ लगता रहा है. ट्रंप का मानना है कि टैरिफ की मदद से अमेरिका का व्यापार घाटा कम किया जा सकता है. व्यापार घाटा उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई देश किसी दूसरे देश से आयात ज्यादा करता है लेकिन निर्यात कम करता है. भारत और अमेरिका के बीच करीब 45 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है. वहीं, कैबिनेट की आज सुबह 11 बजे की मीटिंग में ट्रंप के टैरिफ के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. केंद्रीय कैबिनेट आज से लागू होने जा रहे टैरिफ को लेकर भारत की रणनीति पर चर्चा कर सकती है. कहा जा रहा है कि इसे लेकर सरकार निर्यातकों के संपर्क में हैं. वाणिज्य मंत्रालय आज निर्यातकों के साथ बैठक भी कर सकता है. जल्द ही दवाओं पर भी लगाएंगे भारी भरकम शुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति और टैरिफ किंग डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा धमाका किया है। दुनियाभर के 180 से अधिक देशों पर 2 अप्रैल को पारस्परिक टैरिफ लगाने के बाद ट्रंप ने अब एलान किया है कि जल्द ही दवाओं के आयात पर शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका जल्द ही दवा आयात पर बड़े टैरिफ की घोषणा करेगा। नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमेटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि इस टैरिफ से दवा कंपनियों को अपना कारोबार अमेरिका में सेटअप करना पड़ेगा। चीन पर लगाया 104 फीसदी टैरिफ मंगलवार की आधी रात से सभी देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर टैरिफ की नई दर लागू हो गई है। इस बीच ट्रंप ने चीन पर 104 फीसदी टैरिफ का एलान किया है। पहले चीन पर अमेरिका ने कुल 54 फीसदी टैरिफ लगाया था। जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर 34 फीसदी टैरिफ की घोषणा की। इससे डोनाल्ड ट्रंप भड़क उठे थे। इस बीच ट्रंप ने मंगलवार को चीन पर अमेरिकी टैरिफ से बचने की खातिर अपनी मुद्रा में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने कहा कि आपको उन्हें जवाब देना होगा। वे आज टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए अपनी मुद्रा में हेरफेर कर रहे हैं। बातचीत में जुटे 70 देश ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 26 फीसदी टैरिफ लगाया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि 70 देशों के साथ व्यापार के मुद्दे पर बात चल रही है। हर देश के साथ एक कस्टम-मेड डील पर सहमत होने की कोशिश है। कई नेताओं से ट्रंप ने की बात डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा से बात की और इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू से भी बात की। अमेरिका इस बात पर खफा है कि चीन ने बातचीत के बजाय जवाबी शुल्क लगाने का फैसला किया, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप हर समय फोन उठाने को तैयार हैं।

RBI का बड़ा एलान, सभी बैंकों को अब पेंशन भुगतान में किसी भी देरी के लिए 8% प्रति वर्ष का ब्याज देना अनिवार्य

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक हालिया निर्देश में रिटायर केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारियों को पेंशन बांटने के लिए जिम्मेदार सभी बैंकों को अब पेंशन भुगतान में किसी भी देरी के लिए 8% प्रति वर्ष का ब्याज देना अनिवार्य है। RBI के मास्टर सर्कुलर में बढ़ोतरी इस आवश्यकता का उद्देश्य पेंशनभोगियों को उनके बकाया के देर से भुगतान के लिए क्षतिपूर्ति करना है। सर्कुलर के अनुसार, ‘पेंशन भुगतान करने वाले बैंकों को पेंशन/बकाया राशि जमा करने में देरी के लिए पेंशनभोगी को भुगतान की नियत तिथि के बाद 8 प्रतिशत प्रति साल की निश्चित ब्याज दर पर मुआवजा देना चाहिए।’ क्या है डिटेल? निर्देश में आगे स्पष्ट किया गया है कि यह मुआवजा पेंशनभोगियों से किसी भी दावे की आवश्यकता के बिना ऑटोमेटिक रूप से प्रदान किया जाएगा। तय पेमेंट डेट के बाद होने वाली किसी भी देरी के लिए मुआवजा 8% प्रति साल की निश्चित ब्याज दर पर प्रदान किया जाना चाहिए। ब्याज उसी दिन पेंशनभोगी के खाते में जमा किया जाएगा जिस दिन बैंक संशोधित पेंशन या पेंशन बकाया राशि संसाधित करेगा, जो 1 अक्टूबर, 2008 से सभी लेट भुगतानों पर लागू होगा। क्या है सर्कुलर में? सर्कुलर में बैंकों द्वारा पेंशन डिस्बर्समेंट के लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है, ताकि संबंधित पेंशन भुगतान अधिकारियों से पेंशन आदेशों की कॉपीज तुरंत प्राप्त करके देरी से बचा जा सके। बैंकों को आरबीआई से निर्देशों की वेट किए बिना पेंशन भुगतान पूरा करने का निर्देश दिया गया है, इस प्रकार यह सुनिश्चित किया जाता है कि पेंशनभोगियों को अगले महीने के भुगतान चक्र में उनका लाभ मिले। इसके अलावा, RBI ने बैंकों से बेहतर ग्राहक सेवा प्रदान करने का आग्रह किया है, खासकर बुजुर्ग पेंशनभोगियों को, ताकि सहज बातचीत की सुविधा मिल सके। सर्कुलर में कहा गया है, “पेंशन डिस्ट्रिब्यूट करने वाले सभी एजेंसी बैंकों को सलाह दी जाती है कि वे पेंशनभोगियों, खासकर उन पेंशनभोगियों को जो वृद्ध हैं, विचारशील और सहानुभूतिपूर्ण ग्राहक सेवा प्रदान करें।” इस कदम से पेंशनभोगियों को प्रदान की जाने वाली बेहतर सर्विस मिलने की उम्मीद है, जिससे उनके लिए बैंकिंग अनुभव कम बोझिल हो जाएगा।  

सोने के दाम में आ रही बड़ी गिरावट: इस महीने पहुंचेगा 56,000 रुपये तोला, एक्सपर्ट्स की भविष्यवाणी

मुंबई सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, और निवेशक जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या सोने का भाव 56,000 रुपये तक गिर सकता है। हालिया घटनाओं और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कई Gold Market एक्सपर्ट्स इस संभावना को लेकर अपने विचार साझा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ महीनों में सोने के दामों में और गिरावट आने की संभावना है, और अगर ये ट्रेंड जारी रहता है, तो सोने का भाव 56,000 रुपये तक पहुंच सकता है। इसका मुख्य कारण अमेरिका के tariff chart, वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव, और डॉलर की मजबूत स्थिति को माना जा रहा है। इसके अलावा, मांग में कमी और अधिक खनन के कारण भी सोने के दामों में गिरावट आ सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ चार्ट ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों पर टैरिफ लगाने का फैसला किया, जिसके बाद इन देशों ने भी जवाबी कार्रवाई में टैरिफ बढ़ा दिए। इसका असर वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ा, और कहीं न कहीं हर देश में महंगाई बढ़ने की आंशका जताई जा रही है। इसी बीच, सोने की कीमतों को लेकर एक नया अनुमान सामने आया है। गोल्ड एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप के टैरिफ की वजह से अगले महीने सोने की कीमतों में भारी गिरावट आने वाली है। कब तक आएगी सोने में गिरावट? रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने के दाम 40% तक गिर सकते हैं, और ये गिरावट अगले महीने तक महसूस हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सोने का दाम 90,000 रुपये से घटकर महज 50-55 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। क्या है सोने के दाम गिरने की वजह? सोने के दाम में यह गिरावट अमेरिका के टैरिफ चार्ट, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव, और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण हो सकती है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की नीतियों में बदलाव और सोने की मांग में कमी भी इसकी वजह हो सकती है। अगर आप सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए बेहतरीन हो सकता है। मगर, क्या यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी, या यह महज एक अस्थायी बदलाव है? क्यों गिरेगा सोने का भाव? अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थितियां: वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव सोने के दाम को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती: डॉलर के मजबूत होने से सोने के दाम में गिरावट हो सकती है, क्योंकि डॉलर की तुलना में सोने की मांग घट सकती है। सार्वभौमिक खनन और आपूर्ति: सोने के ज्यादा खनन और कम डिमांड के चलते भी इसकी कीमतों में कमी हो सकती है। निवेशकों के लिए क्या है सही समय? अगर आप सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अच्छा हो सकता है, खासकर अगर सोने के दाम में गिरावट आती है। लेकिन, जैसा कि एक्सपर्ट्स का कहना है, सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना है, तो आपको सावधानी से काम करना चाहिए और बाजार की स्थिति को ध्यान से देखना चाहिए।  

टैरिफ बढ़ोतरी के कारण ग्लोबल ट्रेड वॉर को लेकर दुनियाभर में टेंशन, इस बीच RBI से राहत की उम्मीद

मुंबई टैरिफ बढ़ोतरी के कारण ग्लोबल ट्रेड वॉर को लेकर दुनियाभर में टेंशन है। इससे शेयर मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस बीच, अब पूरा फोकस भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी मीटिंग पर फोकस है। दरअसल, नए वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक की पहली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी बैठक सोमवार, 7 अप्रैल को शुरू हुई। आज मंगलवार को इस बैठक का दूसरा दिन था  गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​​​की अध्यक्षता वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा कल बुधवार, 9 अप्रैल को की जाएगी। इस मीटिंग में रेपो रेट में 0.25% की कटौती का अनुमान लगाया गया है। यानी, आने वाले दिनों में लोन सस्ते हो सकते हैं, इससे इएमआई का बोझ भी कम होगा। बता दें कि RBI ने अपनी पिछली बैठक जो कि इसी साल फरवरी में हुई थी, उसमें प्रमुख ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 6.25 प्रतिशत कर दिया था। यह मई, 2020 के बाद रेपो दर में पहली कटौती और ढाई साल के बाद पहला संशोधन था। क्या है डिटेल अलग-अलग एनालिस्ट के मुताबिक, आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी बैठक में राहत भरे ऐलान हो सकते हैं। अधिकांश एनालिस्ट्स का मानना ​​है कि ग्लोबल इश्यूज के बढ़ने से पहले अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए आरबीआई अप्रैल और जून में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इंडस्ट्रीज के एनालिस्ट का मानना है कि आगामी नीति बैठक में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की दर कटौती होगी। मुद्रास्फीति में कमी, आर्थिक वृद्धि में कमी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के साथ एनालिस्ट का मानना ​​है कि आरबीआई के पास अब एक्शन करने की गुंजाइश है। हालांकि, आरबीआई किस तरह का रुख अपनाएगा, इस पर कुछ बहस चल रही है। क्या कहती है एसबीआई की रिपोर्ट एसबीआई की एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि कारोबार से संबंधित शुल्क बाधाओं, मुद्रा में तेज उतार-चढ़ाव और खंडित पूंजी प्रवाह के परस्पर संबद्ध प्रभावों के कारण वैश्विक वृद्धि को महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल, 2025 की नीतिगत समीक्षा बैठक में 0.25 प्रतिशत की दर कटौती की उम्मीद है। दर कटौती के समूचे चक्र में कुल एक प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है। जून, 2025 की बैठक में अंतराल रहने के बाद अगस्त एवं अक्टूबर में दो और कटौती हो सकती हैं। बजाज ब्रोकिंग रिसर्च ने कहा कि अमेरिका में भारतीय आयात पर 26 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि में 0.20-0.40 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इस आर्थिक तनाव का मुकाबला करने के लिए आरबीआई दरों में और कटौती के लिए प्रेरित हो सकता है। पीरामल समूह के मुख्य अर्थशास्त्री देबोपम चौधरी ने कहा कि घटती अमेरिकी ब्याज दरें, मजबूत रुपया और लक्षित स्तर से नीचे गिरती घरेलू मुद्रास्फीति के मेल का एक दुर्लभ अवसर इस समय दिख रहा है। चौधरी ने कहा, ‘‘केंद्रीय बैंक को इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए और दर में 0.50 प्रतिशत की कटौती करनी चाहिए।’’

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