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ग्लोबल मार्केट में हड़कंप से भारतीय शेयर बाजार हुआ धाराशायी, सेंसेक्‍स 800 टूटा

मुंबई US स्‍टॉक मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है. गुरुवार रात अमेरिकी बाजार में नैस्डैक करीब 6 फीसदी टूट गया, जबकि Dow Jones इंडेक्स में 1600 अंक या करीब 4 फीसदी की गिरावट देखी गई. S&P 500 में भी करीब 5 फीसदी की गिरावट आई. जिसका असर आज भारतीय शेयर बाजार में भी देखने को मिल रहा है. भारतीय शेयर बाजार में गिरावट धीरे-धीरे हावी हो रही है. Sensex में 800 अंक से भी ज्‍यादा टूट चुका है, जबकि Nifty में भी 300 अंक से ज्‍यादा की गिरावट देखी जा रही है. निफ्टी अभी 23000 लेवल के नीचे कारोबार कर रहा है. जबकि Sensex 75500 के नीचे नजर आ रहा है. हालांकि निफ्टी बैंक में 90 अंकों की गिरावट है. BSE टॉप 30 शेयरों में से 26 शेयर भारी गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि HDFC Bank, Bharti Airtel समेत 2 और शेयर उछाल पर है. सबसे ज्‍यादा गिरावट Tata Motors के शेयर में 4 फीसदी की आई है. इसके बाद टाटा स्‍टील और एल एंड टी के शेयर भी 2.5 फीसदी के आसपास टूट चुके हैं. बिखर गए ये शेयर अमेरिकी बाजार का असर भारतीय बाजार में भी दिख रहा है. यहां आज Angel One के शेयर 4 फीसदी टूटकर कारोबार कर रहे हैं. Trump Tariff के कारण Tata Motors के शेयर में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है. वहीं हिंदुस्‍तान कॉपर्स 3 फीसदी, Mazagon Dock के शेयर में 6 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है. इसके अलावा, Vedanta के शेयर में 5.28 फीसदी की गिरावट आई है. 3 फीसदी से ज्‍यादा टूटा रिलायंस ग्‍लोबल टेंशन की वजह से रिलायंस इंडस्‍ट्रीज (RIL Share) के शेयर में बड़ी गिरावट देखी जा रही है. रिलायंस के शेयर 3.25% टूटकर 1205 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर HDFC बैंक ने मार्केट को संभालने की कोशिश की है. जो 2.35 फीसदी चढ़कर 1837 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा है, जिस कारण निफ्टी बैंक अब ग्रीन जोन में आ चुका है. शेयर बाजार की धीमी शुरुआत, ट्रंप के टैरिफ का दिखा असर 4 अप्रैल 2025 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत धीमी रही. प्री-ओपनिंग सेशन में सेंसेक्स 135.27 अंक यानी 0.18% नीचे  76,160.09 पर था. वहीं, निफ्टी 59.70 अंक यानी 0.26% की गिरावट के साछ 23,190.40 पर ट्रेड कर रहा था. प्री-ओपनिंग के बाद जब बाजार खुला, तो गिरावट और तेज हो गई. सुबह 9:21 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, सेंसेक्स 562.90 अंक गिरकर 75,732.46 पर पहुंच गया. निफ्टी भी 203.45 अंक टूटकर 23,046.65 पर कारोबार कर रहा था. ये गिरावट अमेरिका के नए टैरिफ ऐलान के चलते ग्लोबल मार्केट में आए भूचाल की वजह से देखी गई. ग्लोबल मार्केट में हाहाकार, वॉल स्ट्रीट को बड़ा झटका ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिका अब सभी इंपोर्ट्स पर कम से कम 10% टैरिफ लगाएगा. खासतौर पर चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया और यूरोपीय संघ (EU) के उत्पादों पर यह दर 25% तक जा सकती है. चीन पर कुल 54% तक टैरिफ लगाया गया है, जबकि वियतनाम पर 46%, कंबोडिया पर 49% और इंडोनेशिया पर 32% का टैरिफ लगाया गया है. NSE के 2,518 शेयरों में से 531 शेयर उछाल पर हैं, जबकि 1,934 शेयर गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं. इसके अलावा 53 शेयर अनचेंज दिख रहे हैं. 18 शेयरों में लोअर सर्किट और 124 शेयर अपर सर्किट पर है. 20 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर और 22 शेयर 52 सप्‍ताह के उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी, जापान, यूरोप सहित ग्लोबल मार्केट क्रैश इस फैसले का असर अमेरिकी बाजार पर भी पड़ा. डॉव जोंस 1,700 अंक लुढ़क गया और करेक्शन जोन में पहुंच गया. एसएंडपी 500 में 5% और नैस्डैक में करीब 6% की गिरावट आई. अमेरिका के साथ जापान, यूरोप और अन्य ग्लोबल बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई. टोक्यो का निक्केई 4% से ज्यादा गिरा, जबकि पेरिस और फ्रैंकफर्ट में 3% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली. भारतीय बाजार पर असर, निवेशकों को नुकसान भारतीय बाजार पर भी इस ग्लोबल गिरावट का असर पड़ा. गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 322.08 अंक यानी 0.42% गिरकर 76,295.36 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 809.89 अंक तक गिर गया था. हालांकि, फार्मा सेक्टर में मजबूती आने से बाजार की गिरावट कुछ हद तक थम गई. वहीं, निफ्टी 82.25 अंक यानी 0.35% गिरकर 23,250.10 पर बंद हुआ.

RBI इस महीने जारी करेगा 50 रुपये का नया नोट, क्या है नए नोट की खासियत?

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 50 रुपए के नए नोट को लेकर एक अहम घोषणा की है, जिससे इस नोट को लेकर जनता में हलचल मच गई है। नए 50 रुपए के नोट में गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे, और इसे जल्द ही सर्कुलेशन में लाया जाएगा। RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे पहले जारी किए गए सभी 50 रुपए के नोट वैध बने रहेंगे, यानी पुराना नोट चलन से बाहर नहीं होगा। साथ ही, यह नया नोट महात्मा गांधी (NEW) सीरीज के डिज़ाइन के अनुरूप होगा, जो पहले से जारी किए गए 50 रुपए के नोटों जैसा ही होगा। नए नोट का आकार और डिज़ाइन भी पहले जैसे होंगे, जिसमें फ्लोरोसेंट नीला रंग और हम्पी के रथ का चित्र शामिल होगा, जो भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है। क्या है नए नोट की खासियत?- इस नोट के पीछे हम्पी के रथ का चित्र है, जो भारतीय संस्कृति की समृद्धि और इतिहास को प्रदर्शित करता है। महात्मा गांधी (नई) सीरीज में जारी होने वाले इस नोट में कुछ नई सुरक्षा विशेषताएं भी होंगी, जो इसे और अधिक सुरक्षित बनाएंगी। पुराने नोट भी रहेंगे वैध- RBI ने यह भी कहा कि पुराने 50 रुपए के नोट जो पहले जारी किए गए थे, वे वैध मुद्रा बने रहेंगे और उनका कोई भी असर नए नोट पर नहीं पड़ेगा। 2000 रुपये के नोट की वापसी का अपडेट- वहीं, 2000 रुपए के नोटों को लेकर भी हाल ही में एक महत्वपूर्ण अपडेट आया है। रिजर्व बैंक ने बताया कि 31 जनवरी 2025 तक 98.15% 2000 रुपए के नोट वापस बैंकिंग सिस्टम में लौट चुके हैं, और अब भी कुछ पुराने नोट लोगों के पास हैं। नए नोट के जारी होने से पहले, यह एक अहम वक्त है जब जनता को पुराने और नए नोटों के बीच अंतर समझने और उनका इस्तेमाल सही तरीके से करने की आवश्यकता है।

बीएसएनल से जुड़े एक प्रश्न पर चर्चा चल रही थी, तभी धनखड़ ने मजेदार टिप्पणी की, बदल गया माहौल

Tiramahu firing case accused arrested

नई दिल्ली राज्यसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान सभापति जगदीप धनखड़ ने ऐसी बात कह दी, जिसने सदन का माहौल में हल्का कर दिया। सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनल से जुड़े एक प्रश्न पर चर्चा चल रही थी, तभी सभापति धनखड़ ने मजाकिया अंदाज में बीएसएनल का नया नामकरण कर दिया। उन्होंने कहा, बीएसएनल मतलब- “भाई साहब निश्चित लगेगा”। दरअसल, इससे पहले सदन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कह रहे थे देश के दूर-दराज के इलाकों में निजी टेलीकॉम कंपनियों का नेटवर्क अक्सर काम नहीं करता, लेकिन बीएसएनएल वहां भी मौजूद रहता है और सेवाएं देता है। पटेल की इस टिप्पणी का समर्थन करते हुए सभापति धनखड़ ने कहा कि बीएसएनएल के कनेक्शन को लेकर लोगों के मन में भरोसा बना रहता है। इसी संदर्भ में उन्होंने बीएसएनएल को नया नाम देते हुए कहा, “भाई साहब निश्चित लगेगा,” यानी इस नेटवर्क पर भरोसा किया जा सकता है। बता दें कि बीएसएनएल एक सरकारी टेलीकॉम कंपनी है, जो मुख्य रूप से दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में संचार सेवाएं उपलब्ध कराती है। राज्यसभा में आज वक्फ बिल पर चर्चा राज्यसभा में बृहस्पतिवार को सरकार की तरफ से मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन बिल पेश किया। रिजिजू ने कहा कि वक्फ़ संशोधन विधेयक को लेकर पहले सरकार और फिर संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) ने विभिन्न पक्षों से व्यापक विचार विमर्श किया और इसके जरिये वक्फ़ बोर्ड को समावेशी बनाया गया है। इससे पहले देर रात लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल बहुमत के साथ पास हो गया है। बिल के पक्ष में 288 मत पड़े थे। वहीं, विपक्ष के 232 सांसदों ने विरोध में मतदान किया।

मारुति सुजुकी इन मॉडलों की कीमतों में करेगी बढ़ोतरी

नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने घोषणा की है कि वह 8 अप्रैल 2025 से अपने यात्री वाहनों (PVs) की कीमतों में बढ़ोतरी करने जा रही है. यह वृद्धि इनपुट लागत, संचालन खर्च, नियामकीय बदलाव और नए फीचर्स को जोड़ने के कारण की जा रही है. मॉडल कीमत में वृद्धि Grand Vitara 62,000 रुपए तक Eeco 22,500 रुपए तक WagonR 14,000 रुपए तक Ertiga 12,500 रुपए तक XL6 12,500 रुपए तक Dzire Tour S 3,000 रुपए तक Fronx 2,500 रुपए तक मारुति ने कहा कि वह खर्चों को कम करने और ग्राहकों पर प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बढ़ती लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना जरूरी हो गया है. Nexa और Arena आउटलेट्स पर कौन-कौन सी कारें बिकती हैं? मारुति अपनी गाड़ियां दो अलग-अलग चैनलों से बेचती है:  Nexa आउटलेट्स: Ignis, Baleno, Ciaz, Fronx, Grand Vitara, Jimny, XL6, Invicto  Arena आउटलेट्स: Alto K10, S-Presso, Celerio, Eeco, WagonR, Swift, Dzire, Brezza, Ertiga गौरतलब है कि जनवरी 2025 में मारुति ने पहले ही अपनी कारों की कीमतों में 4% तक की बढ़ोतरी की थी. आमतौर पर, हर साल दो बार वाहन निर्माता कंपनियां कीमतों में संशोधन करती हैं. अन्य कार निर्माता भी बढ़ा रहे हैं कीमतें मारुति के अलावा Hyundai, Tata Motors, Mahindra & Mahindra और Kia India ने भी अप्रैल 2025 से अपनी कारों की कीमतों में इजाफा करने की घोषणा की है. क्या आप नई कार खरीदने की सोच रहे हैं? अगर हां, तो 8 अप्रैल से पहले बुकिंग करवाने पर आपको कीमतों में बढ़ोतरी से बचने का मौका मिल सकता है!

आज सर्राफा बाजारों में ट्रंप के टैरिफ से सोना नए शिखर पर, एक झटके में चांदी 2236 रुपये हुई सस्ती

नई दिल्ली आज सर्राफा बाजारों में बिना जीएसटी 24 कैरेट गोल्ड 209 रुपये महंगा हो गया। सोने ने आज नए ऑल टाइम हाई 91205 रुपये प्रति ग्राम के रेट पर खुला। दूसरी ओर, चांदी के रेट में 2236 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई है। आज चांदी 97300 रुपये प्रति किलो की दर से खुली। ये रेट बिना जीएसटी के हैं। अगर 3 पर्सेंट जीएसटी जोड़ लें तो आज सोने के भाव 93941 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी के 100219 रुपये प्रति किलो पर पहुंच रहे हैं। सर्राफा बाजार के रेट इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने जारी किए हैं, जिनमें जीएसटी नहीं लगा है। हो सकता है आपके शहर में इससे 1000 से 2000 रुपये का अंतर आ रहा हो। आईबीजेए दिन में दो बार रेट जारी करता है। एक बार दोपहर 12 बजे के करीब दूसरा 5 बजे के आसपास। 14 से 23 कैरेट गोल्ड के रेट आईबीजेए रेट्स के मुताबिक 23 कैरेट गोल्ड भी आज 208 रुपये महंगा होकर 90840 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव से खुला। वहीं, 22 कैरेट गोल्ड का औसत हाजिर भाव दोपहर 1 बजे के करीब 192 रुपये तेज होकर 83544 रुपये पर खुला। 18 कैरेट गोल्ड का भाव भी 157 रुपये महंगा होकर 68404 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। जबकि, 14 कैरेट गोल्ड की कीमत 122 रुपये बढ़कर 53355 रुपये पर पहुंच गई है। इस साल अबतक सोने के रेट में 15465 रुपये और चांदी के भाव में 11283 रुपये का उछाल आया है। ग्लोबल लेबल पर सोने की कीमतें सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं। सत्र की शुरुआत में 3,167.57 डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद स्पॉट गोल्ड 0.4 प्रतिशत बढ़कर 3,145.93 डॉलर प्रति औंस हो गया। अमेरिकी सोना वायदा 0.1 प्रतिशत मजबूत होकर 3,170.70 डॉलर पर पहुंच गया।

राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ ऐलान से शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को कई देशों पर ताबड़तोड़ टैरिफ लगाने का ऐलान कर दुनियाभर में खलबली मचा दी. भारत और चीन समेत कई देशों पर रियायती रेसिप्रोकल टैरिफ (Discounted Reciprocal Tariff) लगाया गया है. अब भारत की ओर से ट्रंप के इस टैक्स पर प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 27 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण किया जा रहा है. वाणिज्य मंत्रालय इसका विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने बताया कि अमेरिका में सभी तरह के इंपोर्ट पर सार्वभौमिक 10 फीसदी टैरिफ पांच अप्रैल से लागू होगा जबकि बाकी 16 फीसदी टैरिफ 10 अप्रैल से प्रभावी होगा. वाणिज्य मंत्रालय इन टैरिफ के प्रभावों का विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने बताया कि इसमें एक प्रावधान है कि अगर कोई देश टैरिफ से जुड़ी हुई चिंताओं को अमेरिका के समक्ष रखता है तो ट्रंप प्रशासन उस देश पर टैरिफ की दर घटाने पर विचार कर सकता है. ट्रंप ने इस टैरिफ को रियायती बताकर बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं. भारत पर उसके 52 फीसदी की जगह 27 फीसदी टैरिफ लगाया गया है. इससे ट्रंप ने भारत के साथ बातचीत की संभावना को खुला रखा है. दोनों देश लगातार एक दूसरे के संपर्क में हैं. ट्रंप का टैरिफ भारत के लिए नहीं है झटका भारत पहले से ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहा है. दोनों देशों का लक्ष्य इस साल सितंबर-अक्तूबर तक इस समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने का है. अधिकारी ने बताया कि ट्रंप का भारत पर यह टैरिफ झटका नहीं है बल्कि इसका मिला-जुला असर हो सकता है. बता दें कि अमेरिका ने भारत पर 27 फीसदी डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. ट्रंप ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल में ही अमेरिका आए थे. वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. लेकिन इस दौरे के दौरान मैंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं. भारत हमेशा अमेरिका से 52 फीसदी टैरिफ वसूलता है. बता दें कि व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दो अप्रैल को अमेरिका के लिए मुक्ति दिवस बताया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को इस लिबरेशन डे की लंबे समय से जरूरत थी. अब से दो अप्रैल को अमेरिकी इंडस्ट्री के पुनर्जन्म के तौर पर याद किया जाएगा. इसी दिन को हम अमेरिका को फिर से संपन्न राष्ट्र बनाने के तौर पर याद रखेंगे. हम अमेरिका को फिर से संपन्न बनाएंगे. सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान के बाद दुनियाभर के बाजारों में हड़कंप मच गया है. एशियाई बाजारों से लेकर अमेरिकी स्टॉक मार्केट तक, हर जगह गिरावट देखने को मिल रही है. इस फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी ने भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की. शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों को झटका आजा यानी गुरुवार को बाजार खुलते ही भारतीय स्टॉक मार्केट में बिकवाली हावी हो गई. सेंसेक्स 805.58 अंकों की गिरावट के साथ 75,811.86 पर आ गया. निफ्टी 50 भी 182.05 अंक लुढ़ककर 23,150.30 पर कारोबार कर रहा है. हालांकि, शुरुआती कारोबार में बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिली. सुबह 9:30 बजे सेंसेक्स 345.21 अंक (0.45%) की गिरावट के साथ 76,272.23 और निफ्टी 77.70 अंक (0.33%) की गिरावट के साथ 23,254.65 पर ट्रेड कर रहा था. मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त, लार्जकैप शेयरों में दबाव शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे, जबकि लार्जकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 125 अंकों (0.24%) की बढ़त के साथ 52,183 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 121 अंकों (0.75%) की तेजी के साथ 16,283 पर कारोबार कर रहा था. फार्मा, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में तेजी सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, मेटल और मीडिया सेक्टर में गिरावट देखी गई. वहीं, फार्मा, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली. सेंसेक्स के टॉप लूजर्स और गेनर्स इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी और कोटक महिंद्रा बैंक टॉप लूजर स्टॉक्स रहे. वहीं, सन फार्मा, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टाइटन और अल्ट्राटेक सीमेंट टॉप गेनर के रूप में उभरे. अमेरिकी और एशियाई बाजार भी धड़ाम ट्रंप के ऐलान के बाद अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट आई.डाउ जोन्स 2.4% गिरा,नैस्डैक 4.2% टूटा,एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 3.5% की गिरावट,टोक्यो के निक्केई 225 इंडेक्स में 2.9% की गिरावट,कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.9% टूटा और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 1.8% गिरकर बंद हुआ. क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की है. ट्रंप ने करीब 180 देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है. भारत पर 26 प्रतिशत, चीन पर 34 प्रतिशत, वियतनाम पर 46 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन पर 20 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है. इसके तहत,जापान पर 24%,दक्षिण कोरिया पर 25% टैरिफ लगाए गए हैं. इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है, जिससे बाजार में डर का माहौल बन गया है. भारतीय कंपनियों को भी इस फैसले से झटका लग सकता है, खासकर वे जो एक्सपोर्ट और टेक सेक्टर से जुड़ी हैं. ट्रंप के इस फैसले से रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे विदेशी निवेश प्रभावित होगा. रेसिप्रोकल टैरिफ और न्यूनतम बेसलाइन टैरिफ का ऐलान: इसके अलावा, ट्रंप ने 10% न्यूनतम बेसलाइन टैरिफ की भी घोषणा की है, जो उन देशों पर लागू होगा जो अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाते हैं। ट्रंप का कहना है कि यह नीति उन देशों पर दबाव बनाने के लिए है, जो अमेरिकी निर्यात के खिलाफ ऊंचे शुल्क लगाते हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका के व्यापारिक साझेदार अपनी नीतियों से अमेरिका को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं, और इसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। ऑटोमोबाइल्स पर भारी टैरिफ: ट्रंप ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें उन्होंने विदेशी … Read more

RBI को मिल गया चौथा डिप्टी गवर्नर, इकोनॉमिस्ट पूनम गुप्ता को किया नियुक्त, तीन साल का रहेगा कार्यकाल

नई दिल्ली सरकार ने प्रतिष्ठित शोध संस्थान नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लॉयड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की महानिदेशक पूनम गुप्ता को तीन साल के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिप्टी गवर्नर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। माइकल देबव्रत पात्रा के जनवरी में पद छोड़ने के बाद आरबीआई में डिप्टी गवर्नर का पद खाली हो गया था। सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने गुप्ता की आरबीआई में डिप्टी गवर्नर पद पर नियुक्ति को उनके कार्यभार संभालने की तारीख से तीन साल के लिए मंजूरी दी है। वर्तमान में, गुप्ता एनसीएईआर की महानिदेशक हैं। वह प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य और 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद की संयोजक भी हैं। वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक में लगभग दो दशक तक वरिष्ठ पदों पर काम करने के बाद वह 2021 में एनसीएईआर में शामिल हुईं। गुप्ता ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड (अमेरिका) में पढ़ाया और आईएसआई (भारतीय सांख्यिकी संस्थान), दिल्ली में ‘विजिटिंग फैकल्टी’ के रूप में काम किया। वह राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) में आरबीआई चेयर प्रोफेसर और आईसीआरआईईआर में प्रोफेसर भी रही हैं। गुप्ता के पास अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नात्कोत्तर डिग्री और पीएचडी तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र पर पीएचडी के लिए 1998 में एक्जिम बैंक पुरस्कार जीता था।

नया टैक्स रिजीम और ओल्ड टैक्स रिजीम दोनों में कुछ अहम परिवर्तन, TDS में भी हुआ बदलाव

नई दिल्ली 1 अप्रैल से नया फाइनेंशियल ईयर शुरू हो गया है, और इस दिन से ही बजट में हुए बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों के तहत, नया टैक्स रिजीम और ओल्ड टैक्स रिजीम दोनों में कुछ अहम परिवर्तन किए गए हैं। खास बात यह है कि इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यू टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये तक कमाने वालों के लिए टैक्स को शून्य कर दिया है, जिसका फायदा टैक्सपेयर को होगा। नया टैक्स रिजीम: क्या बदला? नए टैक्स रिजीम में 0 से लेकर 24 लाख रुपये तक की कमाई पर अलग-अलग टैक्स स्लैब लगाए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि अगर किसी व्यक्ति की सालाना आय 12 लाख रुपये तक है, तो उसे कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसके अलावा, सैलरी बेस्ड लोगों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा, जिससे उनकी टैक्सेबल आय पर राहत मिलेगी। यहां तक कि अगर किसी की सैलरी 20 लाख से 24 लाख रुपये के बीच है, तो उसे 25 प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा। अब यह नया टैक्स स्लैब ओल्ड टैक्स रिजीम से थोड़ा अलग है, क्योंकि ओल्ड रिजीम में ऐसी कोई छूट नहीं मिलती। इनकम टैक्स स्लैब (रुपए में)       इनकम टैक्स रेट (%) 0-4,00,000                                   0 4,00,001-8,00,000                        5 8,00,001-12,00,000                      10 12,00,001-16,00,000                    15 16,00,001-20,00,000                    20 20,00,001-24,00,000                    25 24,00,001 and above                   30 ओल्ड टैक्स रिजीम: कौन सा बेहतर विकल्प? हालांकि, ओल्ड टैक्स रिजीम को ज्यों का त्यों रखा गया है, इसमें टैक्सपेयर को कई फायदे मिल सकते हैं। अगर आप HRA (हाउस रेंट अलाउंस), होम लोन या मेडिकल खर्चों जैसी डिडक्शन का लाभ लेते हैं, तो ओल्ड टैक्स रिजीम आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। ओल्ड टैक्स रिजीम में आपको 80C, 80D और होम लोन के ब्याज पर डिडक्शन मिलता है, जो नए टैक्स रिजीम में नहीं मिलेगा। अगर आपकी आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है और आप डिडक्शन का फायदा उठाते हैं, तो ओल्ड रिजीम में आपका टैक्स कम हो सकता है। वहीं, न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब भले कम हों, लेकिन डिडक्शन न मिलने से टैक्स ज्यादा हो सकता है। आय सीमा (रुपए )                     कर दर (%) 2,50,000 तक                    शून्य (कोई कर नहीं) 2,50,001 – 5,00,000        5% 5,00,001 – 10,00,000     20% 10,00,000 से अधिक         30% कौन सा विकल्प चुनें? अगर आप ज्यादा डिडक्शन का लाभ लेते हैं, जैसे कि HRA, होम लोन या मेडिकल खर्च, तो ओल्ड टैक्स रिजीम आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। वहीं, अगर आपकी आय कम है और आप ज्यादा डिडक्शन नहीं ले पाते, तो न्यू टैक्स रिजीम आपके लिए बेहतर हो सकता है। टैक्सपेयर को अपनी आय, खर्च और निवेश के आधार पर दोनों रिजीम्स का सही मूल्यांकन करना चाहिए ताकि वह अपनी टैक्स योजना को सही ढंग से बना सके। TDS सीमा में बदलाव इस बार बजट में TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) की सीमा भी बढ़ाई गई है। रेंट से होने वाली इनकम पर TDS की सीमा 2.4 लाख से बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक FD पर ब्याज आय पर TDS की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। इसी तरह, प्रोफेशनल सर्विस पर TDS की सीमा 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। इन बदलावों का असर यह होगा कि कम आय वाले व्यक्तियों पर TDS का बोझ कम होगा और उनकी नकदी प्रवाह में सुधार होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित टैरिफ ऐलानों से भी बाजार बेखौफ दिखा, सेंसेक्स 592 अंक उछला

मुंबई सेंसेक्स आज यानी 2 अप्रैल को शेयर बाजार में तेजी रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित टैरिफ ऐलानों से भी बाजार बेखौफ दिखा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 592 अंक चढ़कर 76,616 के स्तर पर, वहीं निफ्टी में 166 अंक की बढ़त रही, ये 23,332 के स्तर पर बंदग हुआ। आज सबसे ज्यादा तेजी रियल्टी सेक्टर में रही। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 2.69% चढ़ा। ऑटो इंडेक्स भी करीब 1% ऊपर था। IT, FMCG, मेटल और फार्मा इंडेक्स में करीब 0.50% की तेजी रही। निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में मामूली गिरावट रही। शेयर बाजार में आज की तेजी के 3 बड़े कारण 1. ग्लोबल मार्केट्स से मजबूत संकेत एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख रहा, शंघाई हरे रंग में कारोबार कर रहा था, जबकि हांगकांग लाल रंग में रहा। वॉल स्ट्रीट पर, एसएंडपी 500 21.22 अंक या 0.38 प्रतिशत बढ़कर 5,633.07 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 150.60 अंक या 0.87 प्रतिशत बढ़कर 17,449.89 पर बंद हुआ। हालांकि, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 11.80 अंक या 0.03 प्रतिशत गिरकर 41,989.96 पर बंद हुआ। शेयर बाजार इस समय ट्रंप के संभावित टैरिफ ऐलानों पर करीब नजर बनाए हुए हैं, जिससे निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर पड़ सकता है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने कहा, ‘ट्रंप आज रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान करने वाले हैं। इसके बाद ट्रंप टैरिफ को लेकर अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है लेकिन व्यापार नीतियों में पिछली अनिश्चिचता को देखते हुए अस्थिरता बनी रह सकती है।’ 2. निचले स्तर पर खरीदारी शेयर बाजार में पिछले 2 दिनों की की गिरावट के बाद, आज लार्ज-कैप शेयरों में निचले स्तर पर खरीदारी देखने को मिली। HDFC Bank, Maruti Suzuki, ICICI Bank और कई प्रमुख IT शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ी। 3. वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) में गिरावट शेयर बाजार में डर का संकेत देने वाला इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) आज कारोबार के दौरैान 0.89% गिरकर 13.66 पर आ गया, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार में घबराहट कम हो रही है।   ग्लोबल मार्केट में बढ़त एशियाई बाजारों में जापान के निक्केई में 0.28% और चीन के शंघाई कम्पोजिट में 0.05% की तेजी रही। वहीं हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.019% गिरकर बंद हुआ। 1 अप्रैल को अमेरिका का डाओ जोंस 0.028% गिरकर 41,989 पर बंद हुआ। नैस्डेक कंपोजिट में 0.87% की तेजी रही जबकि S&P 500 इंडेक्‍स 0.38% चढ़कर बंद हुआ। 1 अप्रैल को विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 5,901 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू निवेशकों (DIIs) ने 4,322 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।  

FY 2025 में देश में कुल 43 लाख गाड़ियां बिकीं, वैगनआर की बिक्री 1.98 लाख यूनिट रही

नई दिल्ली  आजकल लोगों के बीच SUV गाड़ियां खरीदने का चलन बढ़ रहा है। लेकिन देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी की पुरानी गाड़ी वैगनआर ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में वैगनआर देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ी रही। उसने टाटा की पंच को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया है। पिछले वित्त वर्ष में देश में वैगनआर की बिक्री 1.98 लाख यूनिट रही जबकि टाटा की पंच 1.96 लाख यूनिट के साथ दूसरे नंबर पर रही। हुंडई की क्रेटा 1.94 लाख यूनिट के साथ तीसरे नंबर पर रही। वैगनआर की जीत इसलिए भी खास है क्योंकि टॉप 5 में ये अकेली छोटी गाड़ी है। बाकी सब SUV या UV गाड़ियां हैं। मारुति की अर्टिगा 1.90 लाख यूनिट के साथ चौथे और ब्रेजा 1.89 लाख यूनिट के साथ पांचवें नंबर पर रही। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (मार्केटिंग एंड सेल्स) पार्थो बनर्जी ने कहा कि कई लोगों को लगता था कि हैचबैक गाड़ियां अब नहीं चलेंगी। लेकिन वैगनआर की बिक्री ने दिखा दिया कि अभी भी इस कैटगरी में दम है। उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा देश है और यहां हर तरह के ग्राहक हैं। कुछ लोग हैचबैक गाड़ियों को पसंद करते हैं और उन्हें खरीदना चाहते हैं। बनर्जी ने यह भी कहा कि मारुति हर तरह की गाड़ियां बनाने और बेचने पर ध्यान दे रही है। इसमें SUV भी शामिल हैं, जो कंपनी के लिए एक अहम क्षेत्र है। एसयूवी की बिक्री उन्होंने कहा कि मारुति हर कैटगरी में गाड़ियां बेचती है। हम SUV या किसी और कैटगरी को कम नहीं आंकते। हम ग्राहकों को विकल्प देकर उनकी पसंद को सीमित नहीं करना चाहते। बाजार में SUV गाड़ियों की मांग बहुत ज्यादा है। पिछले कुछ साल में SUV की बिक्री दोगुनी हो गई है। अब ये सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ियां हैं। FY25 में SUV की बिक्री 54% रहने का अनुमान है। इस दौरान कुल मिलाकर 43 लाख गाड़ियां बिकीं। मारुति की एक और हैचबैक गाड़ी स्विफ्ट 1.79 लाख यूनिट के साथ छठे नंबर पर रही। बलेनो की बिक्री 1.67 लाख यूनिट रही। मार्च में गाड़ियों की बिक्री मार्च में मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर की थोक बिक्री में सालाना आधार पर गिरावट आई। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स की होलसेल बिक्री एसयूवी मॉडलों की मांग के दम पर बढ़ गई। मारुति ने पिछले महीने घरेलू बाजार में डीलरों को 1,50,743 यात्री वाहन भेजे, जबकि एक साल पहले इसी महीने में 1,52,718 वाहनों की बिक्री घरेलू बाजार में हुई थी। यह सालाना आधार पर 1% की गिरावट है। हुंडई की मार्च में उसकी घरेलू बिक्री 51,820 यूनिट रही, जो पिछले साल मार्च में 53,001 यूनिट रही थी। महिंद्रा एंड महिंद्रा की घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री 18% बढ़कर 48,048 यूनिट हो गई जबकि मार्च 2024 में यह 40,631 यूनिट रही थी। इसी तरह टाटा मोटर्स की मार्च में कुल यात्री वाहन बिक्री 3% बढ़कर 51,872 यूनिट हो गई, जो मार्च, 2024 में 50,297 यूनिट थी। किआ इंडिया की थोक बिक्री मार्च में 19% बढ़कर 25,525 यूनिट हो गई। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने कहा कि उसने पिछले महीने 11 प्रतिशत वृद्धि के साथ 30,043 गाड़ियां बेचीं, जो पिछले साल इसी महीने 27,180 यूनिट थी। जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया की थोक बिक्री इस साल मार्च में नौ प्रतिशत बढ़कर 5,500 यूनिट हो गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में उसने 5,050 गाड़ियां बेची थीं। होंडा कार्स इंडिया ने मंगलवार को कहा कि मार्च में उसकी घरेलू बिक्री सालाना आधार पर दो प्रतिशत बढ़कर 7,228 यूनिट हो गई, जो पिछले साल मार्च में 7,071 यूनिट थी।

मोबाइल बैकिंग और ATM कुछ भी नहीं कर रहे काम, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सेवाएं अचानक ठप पड़ गई

नई दिल्ली स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की सेवाएं मंगलवार को अचानक ठप पड़ गई हैं और इस बैंक को बड़े आउटेज का सामना करना पड़ा है। अचानक आई इस दिक्कत के चलते यूजर्स को पैसे ट्रांसफर करने, मोबाइल बैकिंग करने और ATM तक की सेवाएं यूज करने में दिक्कत आई। कंपनी ने इस मामले में बयान जारी किया है। SBI ने आधिकारिक बयान में इस दिक्कत का जिक्र किया है। बैंक ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर अपने अकाउंट पर बताया कि एनुअल क्लोजिंग ऐक्टिविटीज के चलते इसकी सेवाएं दोपहर 1 बजे से लेकर शाम के 4 बजे तक प्रभावित रहेंगी। SBI ने बताया है कि 1 अप्रैल को इसकी सेवाएं प्रभावित रहने के दौरान यूजर्स को UPI Lite और ATM यूज करने की सलाह दी जाती है। यूजर्स को कई सेवाओं में आई दिक्कत प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइट्स के डाउनटाइम को मॉनीटर करने वाली सेवा Downderector ने बताया है कि सैकड़ों यूजर्स ने इस बारे में रिपोर्ट किया और कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इस बारे में लिखा। रिपोर्ट करने वाले ज्यादातर यूजर्स को मोबाइल बैंकिंग के दौरान दिक्कत आई। वहीं, करीब 31 प्रतिशत को फंड्स ट्रांसफर करने में परेशानी हुई। साथ ही ATM सेवाएं भी कई यूजर्स के लिए प्रभावित हुई हैं। फिलहाल, बैंक की ओर से जारी बयान के मुताबिक शाम के बाद सेवाएं पहले की तरह ठीक से काम करने लगेंगी। बता दें, NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) ने भी आधिकारिक X अकाउंट पर लिखा कि वित्तीय वर्ष खत्म होने और क्लोजिंग के चलते कई बैंकों की वित्तीय सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, UPI सेवा अच्छे से काम कर रही है।

भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक बन गया, 25 से अधिक देशों को चाय निर्यात

नई दिल्‍ली भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक बन गया है। उसने श्रीलंका को पीछे छोड़ दिया है। भारतीय चाय बोर्ड के अनुसार, भारत ने 2024 में 25.5 करोड़ किलो चाय का निर्यात किया। केन्या पहले स्थान पर है। भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत का चाय निर्यात बढ़ा है। 2024 में निर्यात 10 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। चाय निर्यात से भारत को अच्छी कमाई हुई है। इराक को भेजे जाने वाले शिपमेंट में बढ़ोतरी हुई है। भारत 25 से ज्‍यादा देशों को चाय निर्यात करता है। भारत दुनिया के शीर्ष पांच चाय निर्यातकों में से एक है। भारतीय चाय बोर्ड के आंकड़ों से पता चला है कि भारत ने चाय निर्यात में बड़ी सफलता हासिल की है। भारत अब श्रीलंका से आगे निकल गया है और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक बन गया है। 2024 में भारत ने 25.5 करोड़ किलो चाय का निर्यात किया। इससे देश को 7111 करोड़ रुपये की आय हुई। चाय निर्यात पर कोई खास असर नहीं दुनिया में कई तरह की परेशानियां चल रही हैं। इसके बाद भी भारत के चाय निर्यात पर कोई खास असर नहीं पड़ा। यह पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा है। 2023 में यह आंकड़ा 23.16 करोड़ किलो था। इसका मतलब है कि 2024 में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। चाय के निर्यात से भारत को खूब फायदा हुआ है। 2023 में भारत ने 6,161 करोड़ रुपये की चाय निर्यात की थी। 2024 में यह बढ़कर 7,111 करोड़ रुपये हो गई। यह 15 फीसदी की बढ़ोतरी है। 2024 में उत्तरी भारत (असम और पश्चिम बंगाल) ने 15.5 करोड़ किलो चाय का निर्यात किया। इससे 4833 करोड़ रुपये मिले। वहीं, दक्षिणी भारत ने 9.98 करोड़ किलो चाय का निर्यात किया। इससे 2278 करोड़ रुपये की आय हुई। उत्तरी भारत का योगदान मात्रा के हिसाब से 60.79% और मूल्य के हिसाब से 67.96% रहा। दक्षिणी भारत का योगदान मात्रा के हिसाब से 39.21% और मूल्य के हिसाब से 32.04% रहा। भारत 25 से ज्यादा देशों को चाय बेचता है। यूएई, इराक, ईरान, रूस, अमेरिका और ब्रिटेन भारत के प्रमुख ग्राहक हैं। श्रीलंका में चाय की फसल कम होने के कारण कई भारतीय व्यापारियों को पश्चिम एशिया के बाजारों में जाने का मौका मिला। अब वे वहां पर अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल हो रहे हैं। दुनिया के टॉप पांच चाय निर्यातकों में शामिल भारत भारत दुनिया के टॉप पांच चाय निर्यातकों में शामिल है। पूरी दुनिया में जितनी चाय का निर्यात होता है, उसका लगभग 10 फीसदी भारत से होता है। असम, दार्जिलिंग और नीलगिरी की चाय को दुनिया की सबसे अच्छी चाय माना जाता है। भारत से ज्यादातर ‘ब्लैक टी’ चाय का निर्यात होता है। यह कुल निर्यात का लगभग 96 फीसदी है। इसके अलावा, रेगुलर टी, ग्रीन टी, हर्बल चाय, मसाला चाय और लेमन टी भी निर्यात की जाती हैं। भारत सरकार चाय के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है। सरकार चाहती है कि भारतीय चाय की एक खास पहचान बने। इसके साथ ही, सरकार चाय उद्योग से जुड़े परिवारों की मदद भी करना चाहती है। असम में दो मुख्य चाय उत्पादक क्षेत्र हैं: असम घाटी और कछार। पश्चिम बंगाल में तीन प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र हैं: दोआर्स, तराई और दार्जिलिंग। दक्षिण भारत देश के कुल चाय उत्पादन का लगभग 17 फीसदी उत्पादन करता है। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक यहां के मुख्य चाय उत्पादक राज्य हैं। छोटे चाय उत्पादक भी चाय के उत्पादन में बड़ा योगदान दे रहे हैं। कुल उत्पादन का लगभग 52 फीसदी हिस्सा छोटे चाय उत्पादकों का होता है। अभी लगभग 2.30 लाख छोटे चाय उत्पादक हैं जो चाय के कारोबार से जुड़े हैं।  

हल्दीराम ने भारतीय पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया, 10 अरब डॉलर पर हुई हिस्सेदारी की डील

नई दिल्ली  मिठाई और नमकीन बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी हल्दीराम ने भारतीय पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया है। कंपनी ने अपने स्नैक्स बिजनस में छह फीसदी हिस्सेदारी दो नये निवेशकों आईएचसी (इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी) और अल्फा वेव ग्लोबल को बेच दी है। कंपनी ने इस सौदे के ब्योरे का खुलासा नहीं किया है। उद्योग सूत्रों के अनुसार यह डील करीब 10 अरब डॉलर (लगभग 85,000 करोड़ रुपये) की वैल्यूएशन पर हुई है जो भारतीय पैकेज्ड खाद्य उद्योग के लिए सबसे बड़ा मूल्यांकन माना जा रहा है। इससे पहले कंपनी ने सिंगापुर की वैश्विक निवेश कंपनी टेमासेक द्वारा अल्पांश हिस्सेदारी खरीदने की पुष्टि की थी। हालांकि इस सौदे के विवरण का भी खुलासा नहीं किया गया है। हल्दीराम ने बयान में कहा कि कंपनी को टेमासेक की हाल की भागीदारी के बाद अपने जारी इक्विटी दौर में दो नये निवेशकों, आईएचसी (इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी) और अल्फा वेव ग्लोबल को जोड़ने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। इस रणनीतिक कदम से हल्दीराम की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी। कंपनी ग्लोबल स्तर पर खासकर अमेरिका और पश्चिम एशिया में अपने बिजनस का विस्तार करना चाहती है। अल्फा वेव एक वैश्विक निवेश कंपनी है जो तीन मुख्य क्षेत्रों निजी इक्विटी, निजी ऋण और सार्वजनिक बाजारों पर ध्यान केंद्रित करती है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की आईएचसी दुनिया की सबसे बड़ी निवेश कंपनियों में से है। कितने देशों में फैला है कारोबार ब्लैकस्टोन, अल्फा वेव ग्लोबल और बेन कैपिटल के नेतृत्व वाले समूह सहित कई निजी इक्विटी कंपनियां हल्दीराम स्नैक्स फूड में हिस्सेदारी लेने की दौड़ में थीं। हल्दीराम ब्रांड की शुरुआत 1937 में गंगा बिसन अग्रवाल ने की थी। आज इसका बिजनस 100 से अधिक देशों में फैला हुआ है। कंपनी 400 से अधिक तरह के फूड आइटम्स बेचती है। इनमें नमकीन, मिठाइयां, स्नैक्स, रेडी टु ईट फूड, फ्रोजन फूड, बिस्कुट, कनफेक्शनरी, रेडी टु ड्रिंक बेवरेजेज और पास्ता आदि शामिल हैं। कंपनी भारत के बाहर भी कई देशों को एक्सपोर्ट करती है। इनमें यूरोप और अमेरिका के कई देश शामिल हैं। रिसर्च फर्म IMARC ग्रुप की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत का स्नैक्स बाजार 2023 में 42,694 करोड़ रुपये का था और 2032 तक इसके 95,521 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है। भारत के स्नैक्स और नमकीन मार्केट में हल्दीराम का मुख्य मुकाबला बालाजी वैफर्स, बीकानेरवाला फूड्स, आईटीसी, पार्ले प्रॉडक्ट्स और पेप्सिको आदि से है। भारत के स्नैक फूड मार्केट में हल्दीराम की हिस्सेदारी 21% है जबकि पेप्सिको की हिस्सेदारी 15% है। इस मार्केट में करीब 3,000 छोटे और रीजनल प्लेयर्स की हिस्सेदारी 40% है। हल्दीराम की वैल्यूएशन वित्त वर्ष 2022 में उसके कारोबार की बिक्री के मुताबिक लगभग 83,000 करोड़ रुपये है।

सरकार से Voda Idea को मिली बड़ी राहत, इक्विटी में बदलेगा बकाया ₹37 हजार करोड़; शेयरों पर रखें नजर

मुंबई वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। वोडाफोन आइडिया ने रविवार को एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया है कि सरकार कंपनी पर बकाया राशि को इक्विटी में बदलेगी। इस बदलाव के बाद कंपनी वोडाफोन आइडिया में सरकार की कुल हिस्सेदारी 49 प्रतिशत हो जाएगी। मौजूदा समय में सरकार के पास 22.60 प्रतिशत हिस्सा है। बता दें, इस बदलाव के बाद भी कंपनी का कंट्रोल प्रमोटर्स के पास ही रहेगा। सरकार को कंपनी के 36950 करोड़ रुपये के शेयर मिलने जा रहे हैं। कंपनी के ऊपर यह बताया स्पेक्ट्रम नीलामी का है। जिसे अब शेयरों में बदला जा रहा है। मंत्रालय की भी लगी मुहर वोडाफोन आइडिया ने जारी बयान में कहा है कि सूचना प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Communications) ने 29 मार्च को ही इसका आदेश दे दिया था। कंपनी को 30 मार्च को यह ऑर्डर मिला है। बता दें, यह प्रक्रिया सितंबर 2021 के टेलीकॉम रिफॉर्म पैकेज के जरिए किया जा रहा है। कैसे तय होगा शेयरों का दाम? प्रक्रिया के तहत वोडाफोन आइडिया अब 3695 करोड़ रुपये के शेयर अगले 30 दिन के अंदर जारी करेगी। इन शेयरों की फेस वैल्यू 10 रुपये होगी। वहीं, शेयरों की कीमत बीते 90 दिन या फिर 26 फरवरी 2025 के पहले 10 दिन के एवरेज प्राइस के आधार तय किया जाएगा। शुक्रवार को कंपनी के शेयरों का भाव बीएसई में 1.73 प्रतिशत की गिरावट के बाद 6.81 रुपये के लेवल पर था। बीते एक हफ्ते में यह स्टॉक 10 प्रतिशत गिरा है। वहीं, एक साल से कंपनी के शेयरों को होल्ड करने वाले निवेशकों को अबतक 48 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा है। अब मंगलवार को जब बाजार खुलेगा तब कंपनी के शेयरों पर नजर बनाए रखनी होगी।

रॉकेट की रफ्तार से भागेगी भारत की इकोनॉमी, बस करना होगा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में निवेश : रिपोर्ट

नई दिल्ली भारतीय अर्थव्यवस्था अगले वित्त वर्ष (2025-26) में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. ईवाई इकनॉमी वॉच ने यह अनुमान लगाया है. ईवाई का मानना है कि एक अच्छी तरह से संतुलित राजकोषीय रणनीति जो राजकोषीय विवेक को बनाए रखते हुए मानव पूंजी विकास का समर्थन करती है, दीर्घकालिक वृद्धि की संभावनाओं को बढ़ाएगी. ईवाई इकनॉमी वॉच के मार्च संस्करण में वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. अगले वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इसमें कहा गया है कि इसके लिए राजकोषीय नीति को देश की विकसित भारत की यात्रा के मिलाने की जरूरत है. सरकारी खर्च बढ़ाना होगा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के पिछले महीने जारी संशोधित राष्ट्रीय लेखा खाता आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर अब क्रमश: 7.6 प्रतिशत, 9.2 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए तिमाही वृद्धि दर के संबंध में, तीसरी तिमाही की वृद्धि 6.2 प्रतिशत अनुमानित है. इसका अर्थ है कि एनएसओ द्वारा अनुमानित 6.5 प्रतिशत की वार्षिक जीडीपी वृद्धि प्राप्त करने के लिए चौथी तिमाही में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि की जरूरत होगी. रिपोर्ट कहती है, अंतिम तिमाही में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि के लिए निजी अंतिम उपभोग व्यय में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि की आवश्यकता होगी. हाल के वर्षों में इतनी अधिक वृद्धि देखने को नहीं मिली है. इसका एक विकल्प निवेश व्यय में वृद्धि करना है, जिसमें सरकार की ओर पूंजीगत व्यय वृद्धि एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. इसमें कहा गया है कि संशोधित अनुमानों के अनुसार, सरकार का राजकोषीय घाटा अनुदान की किसी भी अनुपूरक मांग से प्रभावित हो सकता है. इस चीज पर बढ़ाना होगा बजट रिपोर्ट में कहा गया, बढ़ती आबादी और विकसित आर्थिक ढांचे के साथ, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में अतिरिक्त निवेश दीर्घकालिक वृद्धि को बनाए रखने और मानव पूंजी परिणामों में सुधार करने के लिए आवश्यक हो सकता है. ईवाई इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो दशक में, भारत को अपने सामान्य सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यय को धीरे-धीरे बढ़ाने की आवश्यकता होगी, जिससे यह उच्च आय वाले देशों के करीब पहुंच सकता है. नौकरियों पर देना होगा जोर विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की युवा आबादी और बढ़ती कार्यबल आवश्यकताओं को देखते हुए, सरकार द्वारा शिक्षा पर खर्च को वित्त वर्ष 2047-48 तक जीडीपी के मौजूदा 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत करने की आवश्यकता हो सकती है. बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंच और परिणाम सुनिश्चित करने के लिए सरकार के स्वास्थ्य व्यय को इस दौरान 2021 के 1.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047-48 तक 3.8 प्रतिशत करने की जरूरत होगी.  

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