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सहकारी समितियों की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

It is necessary to ensure transparency in the working of cooperative societies: Chief Minister Dr. Yadav जून 2025 तक सभी समितियों का ऑडिट सुनिश्चित किया जाएमुख्यमंत्री ने दिसम्बर 2025 तक सभी समितियों का कम्प्यूटराईजेशन करने के दिए निर्देशसमितियों के पारम्परिक गतिविधियों के साथ-साथ एग्रीड्रोन, जन औषधी केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंसहकारिता क्षेत्र में पीपीपी मोड से व्यवसाय के नए अवसर खोजेंड्रिप-एरीगेशन, ग्रेडिंग-सार्टिंग और पैकेजिंग, जंगल सफारी व गेस्ट हाउस, खाद्य प्र-संस्करण जैसी गतिविधियां को करें प्रोत्साहितवर्ष 2024-25 में 35 लाख 3 हजार कृषकों को 21 हजार 232 करोड़ रुपए का फसल ऋण किया वितरित भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सहकारी समितियों की साख और जन सामान्य में उनके प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए समितियों की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। अत: सभी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के कार्यों का शत प्रतिशत कम्प्यूटराईजेशन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जून 2025 तक समितियों का ऑडिट पूर्ण कर कृषकों को लेन-देन की सूचना एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध कराने और इस वर्ष के अंत अर्थात दिसम्बर 2025 तक सभी समितियों के कायों का कम्प्यूटराईजेशन सु‍निश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देशित कर रहे थे। बैठक में सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्री अशोक वर्णवाल तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अल्पसेवित पंचायतों की पहचान कर नवीन सहकारी समितियों के गठन के लिए प्राथमिकता पर कार्यवाही की जाए। वर्तमान परिदृश्य और आवश्यकताओं को देखते हुए अधिक से अधिक समितियों में पारंपरिक गतिविधियों के साथ-साथ कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, जन औषधि केंद्र, जल कर वसूली केंद्र और एग्री ड्रोन संचालन जैसी गतिविधियां चलाई जाएं। इसके साथ ही को-ऑपरेटिव- पब्लिक- प्राइवेट- पार्टनरशिप (सीपीपीपी) के माध्यम से सहकारी-सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी से सहकारी समितियों को व्यवसाय के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में विशेष प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सहकारिता में नवाचार करते हुए ड्रिप एरीगेशन, ग्रेडिंग-सार्टिंग और पैकेजिंग, जंगल सफारी, गेस्ट हाउस और खाद्य प्र-संस्करण जैसी गतिविधियां को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। बैठक में जनकारी दी गई कि वर्ष 2024-25 में 35 लाख 3 हजार कृषकों कों 21 हजार 232 करोड़ रुपए का फसल ऋण वितरित किया गया, जो गत वर्ष की तुलना में 1286 करोड़ रुपए अधिक है। प्रदेश के आठ आकांक्षी जिलों क्रमश: खण्डवा, बड़वानी, गुना, राजगढ़, विदिशा, दमोह, छतरपुर और सिंगरौली में आगामी पांच वर्ष 6710 करोड़ रुपए का ऋण वितरण का लक्ष्य है। प्रदेश के 13 आकांक्षी विकास खण्डों में विभिन्न गतिविधियों पर आधारित 26 सहकारी समितियां गठित की गई हैं। जिला बैंकों और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में आईबीपीएस मुम्बई के माध्यम से अधिकारियों और समिति प्रबंधकों की नियुक्ति प्रक्रिया के अंतर्गत 36 अधिकारियों और 1358 समिति प्रबंधकों की नियुक्ति की कार्यवाही पूर्ण कर ली गई है। जिला सहकारी बैंकों के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।

मध्यप्रदेश राज्य में स्वावलंबी गौ-शालाओं की स्थापना नीति-2025″ स्वीकृत

“Policy for establishment of self-reliant cow shelters-2025” approved in Madhya Pradesh state गौ-शालाओं में प्रति गाय 40 रूपये प्रति दिवस किये जाने का निर्णयमुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना का नाम “डॉ. अम्बेडकर पशुपालन विकास योजना” रखे जाने की स्वीकृतिप्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एडसिल (इण्डिया) लिमिटेड से एमओयू किए जाने का निर्णयमंदसौर में 2932 करोड़ 30 लाख रूपये की मल्हारगढ़ (शिवना) दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की स्वीकृतिमुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल : मंगलवार, अप्रैल 8, 2025, 15:40 IST मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में निराश्रित गौवंश की समस्या के निराकरण के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अंतर्गत “मध्यप्रदेश राज्य में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति : 2025” की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया हैं। गौ-शालाओं को प्रति गाय 40 रूपये प्रति दिवस किये जाने का निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा गौशालाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करने और मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुक्रम में गौ-शालाओं को 20 रुपये प्रति गौवंश प्रति दिवस से बढ़ाकर 40 रूपये प्रति गौवंश प्रति दिवस किये जाने का निर्णय लिया गया। “मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना” को “डॉ. अम्बेडकर विकास योजना” किये जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा राज्य में पशुपालन एवं डेयरी से संबंधित गतिविधियों में रोजगार के नवीन अवसर बढ़ाने, उत्पादकता बढाने, किसानों की आय बढने से जीएसडीपी में वृद्धि और राष्ट्र की जीडीपी में योगदान बढाने के लिए मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना की निरन्तरता (वर्ष 2024-25 तथा 2025-26) रखते हुए योजना का नाम “डॉ. अम्बेडकर पशुपालन विकास योजना” रखे जाने का निर्णय लिया गया। स्वीकृति अनुसार सहकारिता के माध्यम से पशुपालन गतिविधियों के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसान को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करायें जायेंगे। नस्ल सुधार के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण कार्यक्रम और बांझ निवारण शिविरों का आयोजन किया जायेगा। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, चारा उत्पादन कार्यक्रम, प्रदेश की मूल गौवंशीय नस्ल एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दूधारू गायों के लिए पुरस्कार कार्यक्रम, मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय कार्यक्रम तथा पशुपालकों को योजनाओं की जानकारी प्रदाय करने एवं उन्मुखीकरण के लिए प्रचार-प्रसार कार्यक्रम की निरन्तरता पर स्वीकृती दी गयी। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एडसिल (इण्डिया) लिमिटेड से एमओयू किए जाने का निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के अन्तर्गत भारत सरकार से संबद्ध संस्था एडसिल (इण्डिया) लिमिटेड के माध्यम से प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किए जाने के लिए एमओयू किए जाने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध संस्था एडसिल (इण्डिया) लिमिटेड (भारत सरकार की मिनी रत्न श्रेणी-1) सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एन्टरप्राइजेज (सीपीएसई) संस्था है। संस्था के द्वारा म.प्र. में समग्र शिक्षा अभियान अंतर्गत गुणवत्ता सुधार, एलईपी (कक्षा VI-XII) के अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न गतिविधियों को संचालित किया जायेगा। इसमें सीखने में वृद्धि कार्यशालाएँ, सीखने के परिणाम आधारित मूल्यांकन, राज्य के बाहर वैज्ञानिक एक्सपोजर विजिट, शिक्षक विकास, सतत व्यावसायिक विकास और परिणाम शिक्षण रणनीतियों में सुधार शामिल हैं। मल्हारगढ़ (शिवना) दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना अंतर्गत मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ (शिवना) दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना लागत राशि 2932 करोड़ 30 लाख रूपये, सैंच्य क्षेत्र 60 हजार हैक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत परियोजना से मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ तहसील के 32 ग्राम एवं मंदसौर तहसील के 115 ग्राम लाभान्वित होंगे। विद्युत कंपनियों के लिए कार्यशील पूँजी ऋण सुविधा के लिए शासकीय प्रत्याभूति प्रदान किये जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश की विद्युत कंपनियों के लिए कार्यशील पूँजी ऋण या नगद साख सुविधा के लिए शासकीय प्रत्याभूति प्रदान किये जाने की स्वीकृति दी गयी। लोक वित्त से वित्त पोषित कार्यक्रमों (योजनाओं) अन्तर्गत आने परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा लोक वित्त से वित्त पोषित कार्यक्रमों (योजनाओं) अन्तर्गत आने परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन वाली परियोजनाओं के परीक्षण और प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया का अनुमोदन किया गया हैं। इसे जारी करने के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया हैं। चिकित्सा महाविद्यालयों को पीपीपी मोड पर स्थापित करने संशोधित निविदा प्रपत्र प्रारूप का कार्योत्तर अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में चिकित्सा महाविद्यालयों को पीपीपी मोड पर स्थापित करने संशोधित निविदा प्रपत्र प्रारूप को कार्योत्तर अनुमोदन दिया। साथ ही निविदा प्रपत्र में आवश्यक परिवर्तन करने एवं अन्य निराकरण किये जाने के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पी.पी.पी. परियोजनाओं के लिए गठित राज्य स्तरीय सशक्त समिति को अधिकृत किया गया है।

MP: हाईकोर्ट ने भोज विश्वविद्यालय की नियुक्तियां कीं निरस्त, नए सिरे से भर्ती के कोर्ट ने दिए आदेश; जानें

the appointments made in bhoj university are arbitrary and corrupt मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में की गई नियुक्तियों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने मनमानी और दूषित करार देते हुए निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने चयनित अभ्यर्थियों के पक्ष में जारी एकलपीठ के आदेश को रद्द करते हुए नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। मध्य प्रदेश शासन और भोज मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा दायर अपील में कहा गया था कि वर्ष 2015 में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर समेत अन्य पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। अपील में यह भी बताया गया कि चयन समिति में संबंधित विषयों के विशेषज्ञों को शामिल नहीं किया गया था, बल्कि अन्य विषयों के विशेषज्ञों से चयन कराया गया, जो नियमों के खिलाफ था। इसके अलावा, चयन समिति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया। अपील में यह भी उल्लेख किया गया कि अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों की न तो ठीक से जांच की गई और न ही उनका निष्पक्ष मूल्यांकन किया गया। अंकों के कई कॉलम बिना किसी स्पष्टीकरण के खाली छोड़ दिए गए थे। साक्षात्कार में कुछ अभ्यर्थियों को अत्यधिक अंक देकर अन्य अधिक योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी की गई, जिससे चयन प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण प्रतीत होती है। इसके साथ ही, विज्ञापनों में महिलाओं और दिव्यांगों के लिए आरक्षण का उल्लेख नहीं किया गया था और न ही आरक्षण रोस्टर उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार तैयार किया गया था। इन अनियमितताओं के कारण चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया था। इसके विरुद्ध चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर एकलपीठ ने उनके पक्ष में राहतकारी आदेश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए यह अपील दायर की गई थी।

एमपी में 900 करोड़ का एंबुलेंस घोटाला! कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह का सनसनीखेज खुलासा, जानें क्या कहा?

Ambulance scam of Rs 900 crore in MP! Sensational disclosure by Congress leader Jaivardhan Singh, know what he said? भोपाल ! कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश करने का दावा किया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह पिछले ढाई साल में दो हजार एंबुलेंस के लिए 900 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है, जो एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। इस मामले को गंभीर बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ढाई साल में एंबुलेंस के लिए किराये के तौर पर छत्तीसगढ़ की एक निजी कंपनी को जो पैसा दिया है, वह एंबुलेंस की कीमत से तीन गुना ज्यादा है। जयवर्धन सिंह ने कहा कि हर सरकार का दायित्व होता है कि राज्य में चिकित्सा सुविधाओं पर नियंत्रण हो और उसकी गुणवत्ता अच्छी हो। मैंने विधानसभा में एक सवाल पूछा था कि एंबुलेंस के लिए प्रदेश सरकार ने अब तक कितना भुगतान किया है। मुझे जानकारी मिली कि पिछले ढाई साल में छत्तीसगढ़ की एक निजी कंपनी जय अम्बे इमरजेंसी सर्विसेज को 900 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इस कंपनी के पास करीब दो हजार एंबुलेंस हैं और इसका औसत किराया प्रति एंबुलेंस 45 लाख रुपये दिया गया है। एनएचएम के तहत मिलने वाले पैसों का गलत इस्तेमाल उन्होंने कहा कि अगर आप इसकी तुलना करें तो एक पूरी तरह से सुसज्जित एंबुलेंस, जिसमें हर आधुनिक उपकरण जैसे वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की व्यवस्था हो, उसकी अधिकतम कीमत 20 लाख रुपये होती है। लेकिन, यहां सरकार 45 लाख रुपये किराये के रूप में भुगतान कर चुकी है। यह सीधा-साधा भ्रष्टाचार और सरकारी धन का दुरुपयोग है। यह सब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मिलने वाले केंद्र सरकार के पैसों का गलत इस्तेमाल है। कम से कम 600 से 700 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। इसमें भाजपा के दलाल, कुछ सरकारी अधिकारी और यह छत्तीसगढ़ी निजी कंपनी शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी पैसों का गबन किया है। इस पैसे को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए था, जिससे लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं की मदद हो सकती थी। कंपनी को जारी किए गए थे 40 नोटिस उन्होंने इस घोटाले के कई उदाहरण भी पेश किए। उन्होंने कहा कि गुना से एक बच्चा भोपाल इलाज के लिए जा रहा था, लेकिन रास्ते में ऑक्सीजन खत्म हो गया और बच्चे की मौत हो गई। ऐसे कई मामले सामने आए हैं। जयवर्धन सिंह ने यह भी बताया कि जय अम्बे कंपनी के खिलाफ 40 से अधिक नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन सरकार ने इसके बावजूद इस कंपनी को पूरा भुगतान किया। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो कांग्रेस विधायक ने बताया कि वह इस मामले में लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में शिकायत करने का निर्णय ले चुके हैं। उन्होंने कहा, “मैंने तय किया है कि मैं इस मामले में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में शिकायत करूंगा ताकि इस पूरे घोटाले की जांच हो सके। जिन लोगों ने सरकारी पैसों का दुरुपयोग किया है, उन्हें सजा मिलनी चाहिए और इस घोटाले में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। यह घोटाला एक बड़े खेल का हिस्सा है, जिसे पूरी तरह से उजागर किया जाना चाहिए ताकि सरकारी पैसों का सही उपयोग हो सके और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो।

Bhopal Nagar Nigam Budget: परिषद में वफ्फ संशोधन बिल का विरोध, विपक्ष ने किया हंगामा, बजट पर नहीं हुई चर्चा

bhopal municipal corporation budget

bhopal municipal corporation budget Bhopal Nagar Nigam Budget: भोपाल नगर निगम परिषद की शुरुआत हंगामे से हुई। बजट बैठक में प्रश्नकाल समाप्त हो चुका है। इसमें कुल 15 सवाल पूछे गए, जिसमें से 11 सवालों के ही जवाब दिए गए। हालांकि फिर भी हंगामा नहीं थमा। 32 मिनट देरी से शुरु हुई परिषद की 12वीं बैठकआईएसबीटी के परिषद हॉल में गुरुवार, 3 अप्रैल को 32 मिनट देरी से परिषद की बैठक शुरू हुई। वंदे मातरम गान के साथ शुरू की गई। परिषद की बैठक में अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने GIS का जिक्र किया। GIS की सफलता पर सभी अधिकारी, पार्षद, एमआईसी और महापौर को धन्यवाद दिया। फिर एमआईसी सदस्य रविंद्र यति ने वफ्फ संशोधन बिल के लिए पीएम मोदी को बधाई का प्रस्ताव रखा। जिसका नेता प्रतिपक्ष शब्सिता जाकी ने विरोध किया। इसके बाद वफ्फ संशोधन बिल पर विपक्ष का हंगामा शुरु हुआ। यह मौजूदा परिषद की यह 12वीं बैठक है। इसमें 3300 करोड़ रुपए का बजट पेश हो सकता है। मेट्रो के कारण सड़कों की हालात खराब, जा रही लोगों की जानविपक्ष ने भोपाल मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष ने कहा कि मेट्रो के कारण सड़कों की हालात खराब हो रही है। इससे कई लोगों की जान जा रही। मेट्रो की वजह से लोगों को असुविधा हो रही है। माइक प्रॉपर वर्क न करने पर कार्रवाई के निर्देशआयुक्त महोदय को जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है। माइक प्रॉपर वर्क न करने पर कार्रवाई के निर्देश दिए। हर पार्षद के पास माइक ले जाना पड़ता है। पार्षद बोले टेबल पर लगे माइक काम नहीं कर रहे है। वन नेशन—वन इलेक्शन पर चर्चा जरुरी— अध्यक्षपरिषद में वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर प्रस्ताव रखा गया। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि देश के विधानसभा लोकसभा में अच्छे प्रस्ताव पारित होने है, ऐसे में इस पर परिषद में चर्चा जरूरी है। विपक्ष ने आसंदी के पास किया हंगामाबीजेपी पार्षदों वन नेशन वन इलेक्शन के प्रस्ताव का समर्थन किया तो विपक्ष ने आसंदी के पास जाकर हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष शकिता जकि ने कहा एजेंडे पर चर्चा की जाए। यह लोकसभा का मामला है, नगर निगम में इसे क्यों उठाया जा रहा है। पूर्व एमएल ने गलत लगाई थी याचिका— यतिनिगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा वन नेशन वन इलेक्शन प्रस्ताव पर बुराई क्यां हैं। एमआईसी सदस्य रविंद्र यति ने कहा कि पूर्व एमएलए ने जो याचिका लगाई थी, वो गलत लगाई थी। देश में एक चुनाव होना चाहिए। बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाए— विपक्षकांग्रेस पार्षद ने कहा बैलेट पेपर से चुनाव किया जाए। बीजेपी पार्षदों ने कहा कि नगर निगम के जनप्रतिनिधि की चुनाव लड़ते हैं। कांग्रेस को डर है कि स्टार प्रचारक कहा से लाएंगे। बीजेपी में कई सारे स्टार प्रचारक हैं। स्मार्ट सिटी मल्टी को अटल बिहारी वाजपेयी नाम दियापरिषद में भोपाल के न्यू मार्किट स्थित स्मार्ट सिटी मल्टी का नामकरण किया गया। परिषद की ओर से स्मार्ट सिटी मल्टी को अटल बिहारी वाजपेयी के नाम का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव को परिषद में पारित कर लिया गया।

खास दुकान से यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब खरीदने को किया मजबूर, तो एमपी में स्कूल पर होगा एक्शन

uniforms and copy books from a particular shop action will be taken against the schoo भोपाल ! निजी स्कूलों ने शुल्क ढांचे (फीस स्ट्रक्चर) में मनमानी की या यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब को किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव बनाया तो उन पर कार्रवाई हो सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। स्कूलों को 31 मार्च तक अपना फीस स्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया है, ताकि पेरेंट्स को इसकी जानकारी हो जाए। भोपाल के अधिकांश निजी स्कूलों द्वारा किताबों की सूची और फीस की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके साथ ही स्कूलों द्वारा निश्चित दुकानों से कॉपी-किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाने लगा है। संयुक्त संचालक अरविंद चौरगड़े की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले निजी स्कूल लेखक एवं प्रकाशक के नाम और मूल्य के साथ कक्षावार पुस्तकों की सूची विद्यालय में प्रदर्शित करें।ऐसी सूची मांगने पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि विद्यार्थी या अभिभावक इनको खुले बाजार से भी खरीद सकें। प्रत्येक स्कूल प्रबंधक, प्राचार्य स्कूल में हर कक्षा की पाठ्यपुस्तकों और प्रकाशकों की जानकारी को डीईओ की वेबसाइट पर अनिवार्य अपलोड करें।किसी भी प्रकार की शिक्षण सामग्री पर स्कूल का नाम अंकित नहीं होना चाहिए। स्कूल के सूचना पटल पर यह भी अंकित किया जाए कि अभिभावक किसी दुकान विशेष से खरीदने के लिए बाध्य नहीं हैं। डीईओ पर निगरानी की जिम्मेदारीआदेश में जिला शिक्षा अधिकारी को निगरानी और आदेश लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। कहा गया है कि डीईओ सुनिश्चित करें कि जिले के सीबीएसई, आईसीएसई, एमपी बोर्ड समेत सभी प्री प्राइमरी से लेकर 12वीं तक स्कूल में संचालित की जाने वाली किताबों, कॉपियों व यूनिफॉर्म की सूची 31 मार्च तक विद्यालय के सूचना पटल पर लग जाएं। एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्यआदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली से 12वीं तक की कक्षाओं में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य कर दिया है। कहा गया है कि इस आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए, नहीं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

HAPPY birthday cm : ‘जल पुरुष’ डॉ. मोहन यादव का संकल्प हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाना, सिंचाई के क्षेत्र में हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धियां

Happy birthday mohan yadav: ‘Water Man’ Dr. Mohan Yadav’s resolve to deliver water to every farmer’s field, achieved unprecedented achievements in the field of irrigation भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अक्सर कहते हैं कि प्राचीन काल में भारत में पारस पत्थर हुआ करता था, जिसके स्पर्श से लोहा सोना हो जाता था। इस पारस पत्थर का काम पानी करता है जब वह सूखे खेतों पर पहुंचता है। जल के स्पर्श से खेतों में सुनहरी फसलें लहलहाती हैं। Happy birthday mohan yadav पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने दो दशक पहले देश की नदियों को जोड़कर हर खेत तक पानी पहुंचाने का सपना देखा था, जो राज्यों के बीच जल विवाद के चलते दो दशकों से अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी महत्वाकांक्षी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाएं मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच सहमति न बन पाने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। दो बड़ी परियोजनाओं में मिली सफलतामुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार और राज्यों से निरंतर चर्चा कर इन परियोजनाओं के गतिरोध को समाप्त किया और प्रदेश ने दो बड़ी परियोजनाओं के रूप में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश आकर देश की पहली नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना केन-बेतवा का शिलान्यास किया। Happy birthday mohan yadav मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि अब महाराष्ट्र सरकार के साथ वार्ता के बाद विश्व की सबसे बड़ी ग्राउंड वाटर रिचार्ज अंतर्राज्यीय संयुक्त परियोजना “ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना” का अवरोध दूर हो गया है। मध्यप्रदेश शीघ्र ही महाराष्ट्र सरकार के साथ इस संबंध में करार करने की ओर बढ़ रहा है। जल्द ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भोपाल आमंत्रित कर करार की कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि “ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना के जरिए हम महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती नदी की तीन धाराएं बनाकर राष्ट्रहित में नदी जल की बूंद-बूंद का उपयोग सुनिश्चित कर कृषि भूमि का कोना-कोना सिंचित करेंगे।” जानिए केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के बारे मेंकेन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है, जिसमें केन नदी पर दौधन बांध एवं लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।रुपये 44 हजार 605 करोड़ लागत की इस परियोजना के पूर्ण होने पर मध्य प्रदेश के सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 08 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और प्रदेश की 44 लाख आबादी को पेयजल सुविधा प्राप्त होगी।साथ ही परियोजना से 103 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा, जिसका पूर्ण उपयोग मध्यप्रदेश करेगा। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिले-छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लगभग 02 हजार ग्रामों के लगभग 07 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभांवित होंगे।सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर की स्थिति सुधरेगी। औद्योगीकरण, निवेश एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों में आत्मनिर्भरता आयेगी तथा लोगों का पलायन रुकेगा। परियोजना के साकार रूप लेने पर मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी।पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजनासंशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों एवं केंद्र के मध्य 28.01.2024 को त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ और दोनों राज्यों एवं केंद्र के मध्य 05.12.2024 को जयपुर में अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रुपये की है, जिसमें मध्यप्रदेश 35 हजार करोड़ एवं राजस्थान 37 करोड़ की हिस्सेदारी होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश में मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 11 जिले क्रमशः गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर-मालवा, शाजापुर एवं राजगढ़ जिलों में कुल 6.14 लाख हेक्टेयर नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिंड मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। परियोजना से लगभग 03 हजार 150 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी एवं इस समेकित परियोजना में मध्य प्रदेश की 19 सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया है। क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवाहमान होगीमुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प है कि क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवाहमान बने और सिंहस्थ 2028 में क्षिप्रा के जल में ही श्रद्धालुओं को स्नान कराया जाए। क्षिप्रा नदी के जल को शुद्ध रखने के लिए 900 करोड़ रुपये की लागत की “कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना” के द्वारा कान्ह नदी के दूषित जल को क्षिप्रा नदी में मिलने से रोका जायेगा। वर्ष-2028 से पहले यह योजना पूर्ण कर ली जायेगी। Happy birthday mohan yadav क्षिप्रा को वर्ष भर अविरल, प्रवहमान बनाने के लिए उज्जैन जिले की सेवरखेडी एवं सिलारखेडी (लागत लगभग 615 करोड़) योजना का कार्य भी आरंभ हो गया है। इससे आमजन एवं श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष भर विशेष पर्वों पर उनकी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप क्षिप्रा नदी में स्नान करने का अवसर मिलेगा। क्षिप्रा नदी पर सिंहस्थ में स्नान सुविधा के लिये क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर लगभग 29 किलोमीटर लंबाई में घाटों का निर्माण किया जाएगा, जिसकी राशि रू. 778.91 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। Read more: Kuno National Park sheopur: चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने बुन्देलखण्ड में दूर होगा जलसंकटमध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर को बढ़ाने, पेयजल संकट को दूर करने एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “अटल भू-जल योजना” प्रारंभ की गई है। यह योजना प्रदेश के 06 जिलों के 09 विकासखण्डों में क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना से चयनित क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार होने से स्थानीय किसानों को लाभ प्राप्त होगा तथा किसानों की आय बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल प्रदाय के लिये टिकाऊ जल स्रोत भी उपलब्ध हो सकेंगे। बांधों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बांधों की सुरक्षा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पूरी सजगता के साथ काम कर रही है। इसके लिये प्रदेश में “डैम सेफ्टी रिव्यू पेनल” गठित है, जो प्रतिवर्ष संवेदनशील बांधों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। आने वाले 05 वर्षों में प्रदेश के 27 बांधों की सुरक्षा एवं मरम्मत … Read more

परिवहन घोटाले को लेकर विपक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट, नेता प्रतिपक्ष बोले- जद में हैं कई अधिकारी और नेता

opposition will go to supreme court regarding transport scam भोपाल ! मध्य प्रदेश में परिवहन घोटाले को लेकर विपक्ष ने अब सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार इस मामले में लीपापोती कर रही है। कई बड़े अधिकारी और नेता इसकी जद में आ रहे थे, इसी कारण लोकायुक्त डीजी जयदीप प्रसाद का तबादला किया गया। उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार इस घोटाले को दबाने का प्रयास कर रही है। जब बड़े अधिकारी और नेता जांच के दायरे में आने लगे तो लोकायुक्त डीजी को हटा दिया गया। हम इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे और दोषियों को बेनकाब करेंगे। सत्र संचालन पर भी उठाए सवाल विधानसभा सत्र को लेकर भी उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर सही जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि विधायकों द्वारा उठाए गए मामलों का भी जवाब नहीं दिया गया। हमने मांग की थी कि सदन की कार्यवाही का लाइव प्रसारण होना चाहिए, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। विश्वास सारंग बोले- बिना जांच पूरी हुए निष्कर्ष न निकालें विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं और विपक्ष को जांच के निष्कर्ष तक रुकना चाहिए। सारंग ने कहा कि हर स्तर पर जांच हो रही है और जांच के आधार पर कार्रवाई भी की जा रही है। विपक्ष को बिना जांच पूरी हुए निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

डॉक्टर पर कार्रवाई को लेकर विधायक कमलेश्वर ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

MLA Kamleshwar warned of hunger strike for action against the doctor भोपाल ! मध्य प्रदेश विधानसभा में भारत आदिवासी पार्टी के एकमात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार ने रतलाम जिला अस्पताल के डॉक्टर चंद्र प्रताप सिंह राठौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके निलंबन की मांग की है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर ने उन्हें जातिसूचक गालियां देकर न केवल उनका बल्कि संपूर्ण आदिवासी समाज का अपमान किया है। विधायक ने चार महीने से डॉक्टर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होने पर आक्रोश व्यक्त किया है। अन्याय के खिलाफ आमरण अनशन का एलान विधायक कमलेश्वर डोडियार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर बताया कि अगर 24 मार्च 2025 को सदन में उनकी सुनवाई नहीं होती है, तो वे विधानसभा परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक डॉक्टर को निलंबित नहीं किया जाता, तब तक वे न भोजन करेंगे और न ही पानी ग्रहण करेंगे। चार महीने से न्याय की लड़ाई विधायक डोडियार ने बताया कि यह घटना 5 दिसंबर 2024 की है, जब वे खुद की तबीयत खराब होने के कारण रतलाम जिला अस्पताल पहुंचे थे। वहां इमरजेंसी वार्ड में एक व्यक्ति से डॉक्टर की उपलब्धता के बारे में पूछने पर उसने उन्हें जातिसूचक गालियां दीं। बाद में पता चला कि वह व्यक्ति डॉक्टर चंद्र प्रताप सिंह राठौर थे। इस मामले में उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आदिवासी समाज में आक्रोश विधायक ने कहा कि इस मामले को उन्होंने विधानसभा के पिछले सत्र में भी उठाया था, लेकिन सरकार ने अब तक डॉक्टर को निलंबित करने या अभियोजन की स्वीकृति देने का निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अब तक मामले की जांच पूरी नहीं की और न ही न्यायालय में चालान पेश किया। इससे न सिर्फ उनका बल्कि संपूर्ण आदिवासी समाज का अपमान हुआ है। सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग डोडियार ने कहा कि यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि संपूर्ण भीलप्रदेश (मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र) के आदिवासियों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से तत्काल डॉक्टर के निलंबन की मांग की और कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो वे अपना आमरण अनशन जारी रखेंगे।

लोकायुक्त से मिलने पहुंचे कांग्रेसी, सौरभ शर्मा और गोविंद सिंह राजपूत से जुड़े सौंपे दस्तावेज

Congressmen reached to meet Lokayukta, submitted documents related to Saurabh Sharma and Govind Singh Rajput भोपाल ! राजधानी भोपाल में सोमवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार प्रतिनिधिमंडल के साथ मध्य प्रदेश के लोकायुक्त से मिलने पहुंचे. उमंग सिंघार अपने साथ सौरभ शर्मा और उसके साथियों से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ मंत्री गोविंद सिंह राजपूत जो की पूर्व में परिवहन विभाग के मंत्री थे, उनकी कई संपत्तियों की जानकारी व उनकी रजिस्ट्री लेकर लोकायुक्त के पास पहुंचे. जहां उन्होंने लोकायुक्त से निवेदन किया है कि इस पूरे मामले की जांच करवाकर इस पर कार्रवाई की जाए. लोकायुक्त को सौंपे दस्तावेजभोपाल में लोकायुक्त से मिलने के बाद उमंग सिंघार ने बताया कि “हमने परिवहन विभाग के पूरे घोटाले के संपूर्ण दस्तावेज और उन घोटाले के पैसों से खरीदी गई संपत्तियों की जानकारी लोकायुक्त को दे दी है. सौरभ शर्मा जो अभी जेल में बंद है. तीनों जांच एजेंसियां उससे उसकी कार में मिले 52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश के बारे में कुछ भी नहीं उगलवा सकी. सौरभ शर्मा के मामले में अभी मध्य प्रदेश विधानसभा में भी चर्चा होना बाकी है. उमंग सिंघार को गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ आरोपलोकायुक्त से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने बताया कि “किस तरह जनता के पैसों से यह लोग सोना-चांदी खरीद रहे थे. इस पूरे प्रकरण में तीन-तीन जांच एजेंसियों ने जांच करी, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं. इसको लेकर भी हमने लोकायुक्त से बात की है कि इस पूरे मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए. इसके साथ ही पूर्व में परिवहन मंत्री रहे गोविंद सिंह राजपूत और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी हमने लोकायुक्त को विस्तृत दस्तावेज दिए हैं. जिसमें हमने सभी प्रकार के दस्तावेज जैसे कि किस समय कौन सी जमीन गोविंद सिंह राजपूत या उनके परिजनों के नाम पर कहां-कहां खरीदी गई है. इसका विस्तृत उल्लेख किया है लोकायुक्त ने मामले में जांच करवाने के साथ-साथ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया है.

एमपी सदन में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ पर मऊगंज विधायक ने उठाया मुद्दा

Mauganj MLA raised the issue of illegal infiltration of Bangladeshi and Rohingya Muslims in MP House भोपाल। मध्यप्रदेश के मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से विधानसभा में बांग्लादेशी रोहिंग्या मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ का मामला उठाया है। विधायक ने कहा कि मध्यप्रदेश के मऊगंज जिला समेत सीमावर्ती जिले जो यूपी की सीमाओं से जुड़े हैं अवैध मुस्लिम आब्रजकारियों विशेषकर बांग्लादेशी रोहिंग्या मुस्लिमों को अवैध तरीकों से मूल निवास प्रमाणपत्र और आधारकार्ड जनप्रतिनिधियों जैसे पार्षद और सरपंचों के वेरिफिकेशन पर जारी किये जा रहे हैं। भाजपा विधायक ने चिंता जताते हुए कहा कि एमपी के 10 बड़े जिलों के सीमावर्ती इलाकों में इनकी तादाद बहुत तेजी से बढ़ी है जो भविष्य में प्रदेश के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकते हैं ,घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोकने के लिए सिटीजन शिप अमेंडमेंट एक्ट सीएए और एनआरसी के तहत कार्यवाही शुरु न होने से अवैध मुस्लिमों का बढ़ना सुरक्षा में चूक है। प्रदीप पटेल ने इस गंभीर मामले में सदन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि सरकार हस्तक्षेप कर अवैध घुसपैठ पर रोक लगाए। मऊगंज के विधायक प्रदीप पटेल द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के कई महत्वपूर्ण आयाम हैं, जिनका विश्लेषण राजनीतिक, सुरक्षा, कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से किया जा सकता है।   1. राजनीतिक पहलू यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक द्वारा उठाया गया है, जो पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने के पक्ष में रही है। अवैध घुसपैठ का मुद्दा भाजपा की मुख्य चुनावी रणनीति का हिस्सा भी रहा है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर और बंगाल में।   2. सुरक्षा संबंधी चिंताएँ 3. कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियाँ 4. सामाजिक प्रभाव विधायक द्वारा उठाया गया मुद्दा गंभीर है, लेकिन इसे निष्पक्ष जांच और ठोस प्रमाणों के आधार पर ही आगे बढ़ाना चाहिए। घुसपैठ को रोकना आवश्यक है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी भी कानूनी रूप से रह रहे व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन न हो।  

भोपाल एम्‍स कैंसर मरीजों की देखभाल करेगा AI, पूछेगा- क्‍या आपको दर्द हो रहा है, खाने में समस्‍या तो नहीं!

AI will take care of cancer patients in Bhopal AIIMS, will ask- are you in pain, are you having problem in eating! भोपाल। एम्स भोपाल को कैंसर मरीजों की जीवन गुणवत्ता सुधारने के लिए एक बड़ी उपलब्धि मिली है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने डिजिटल आन्कोलाजी (कैंसर देखभाल) के लिए एम्स भोपाल को 20 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान प्रदान किया है। यह शोध आईआईटी इंदौर के नवाचार केंद्र के सहयोग से किया जाएगा। ऐसे होगा मरीजों की जिंदगी पर असर इस परियोजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से कैंसर मरीजों के इलाज के बाद उनकी जीवन गुणवत्ता (क्वालिटी आफ लाइफ) पर शोध किया जाएगा। एआई पूछेगा यह सवाल इसके लिए एक डिजिटल प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा, जो मरीजों से उनके स्वास्थ्य और समस्याओं के बारे में सवाल पूछेगा, जैसे – क्या आपको दर्द हो रहा है? खाने-पीने में दिक्कत तो नहीं? आपको सबसे ज्यादा तकलीफ किस चीज से हो रही है? मरीजों से मिले इन जवाबों का विश्लेषण करके डॉक्टर उनके लिए बेहतर उपचार योजना बना सकेंगे। डिजिटल हेल्थ में बड़ी पहल इस परियोजना से कैंसर मरीजों की शारीरिक और मानसिक सेहत, सामाजिक जुड़ाव और इलाज के प्रभावों का मूल्यांकन किया जाएगा। भारत में अभी तक ऐसा कोई डिजिटल टूल नहीं था जो कैंसर मरीजों की जीवन गुणवत्ता को माप सके। यह शोध इस कमी को पूरा करेगा और कैंसर मरीजों को बेहतर देखभाल और व्यक्तिगत उपचार समाधान देगा।

1 साल में नहीं हुआ कोई भी विकास का कार्य ,पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं करा पाई सरकार : पंकज उपाध्याय 

No development work was done in 1 year, government could not even provide drinking water: Pankaj Upadhyay जौरा | विधानसभा में जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने राज्यपाल की अभिभाषण में कहा कि , कल राज्यपाल जी का भाषण सुना आज बड़े ही दुखी मन से यहां अपनी बात रख रहा हूं . मैं पहली बार का विधायक हूं और बड़ी उम्मीद लेकर आया था . आपको देखा , प्रहलाद जी को देखा , कैलाश जी को देखा और बरिष्ठ लोगों को देखा तो लगा कि बिजली , पानी , सड़क सभी काम बड़ी आसानी से हो जाएंगे , मैं जो यहाँ पर बोलूंगा वह होगा , लेकिन मैं जहां एक साल पहले खड़ा था आज भी वहीं पर खड़ा हूं . पानी की समस्या की बात करें तो हमने लगातार नलजल योजना की यहां बात की है कैलाश विजयवर्गीय जी ने पिछली बार आश्वासन दिया कि जिले की एक समिति बनाएंगे जिन विधायकों को रखेंगे और वह गांव – गांव जाकर देखेंगे कि क्या स्थिति है . एक साल में कोई भी ऐसी कार्यवाही नहीं हुई ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम करे जा रहे हैं . पूरे विभाग का हर कर्मचारी अपनी मर्जी से काम किये जा रहा है . एक भी नल की टोंटी में से पानी नहीं निकल रहा है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है . एक साल से हम प्रत्येक विधान सभा में इस प्रश्न को लगाते हैं और उत्तर मिल जाता है कार्यवाही जारी है , हो रहा है , होगा लेकिन काम कब होगा यह आज तक पता नहीं चल पाया है . ऐसे ही विकलांग हैं जिनके दोनों पैर खराब होते हैं उनको साठ प्रतिशत का प्रमाणपत्र पकड़ा दिया है और जो विकलांग नही थे , बहरे , अंधे नहीं थे उन लोगो को आपने फर्जी प्रमाण पत्र देकर नौकरियां दे दी हैं . आपने 100-100 प्रतिशत के प्रमाण पत्र दे दिये हैं लेकिन जिनके दोनों पैर नहीं हैं आज तक हम उन लोगों को सायकिल नहीं दे पाए . बहुत ही शर्म आती है जब वह लोग हमारे पास में आते हैं कि आप विधायक हो हमको सायिकल तो दिला दो . इस पर मेरा सदन से अनुरोध है कि यह बड़ी ही संवेदनशील बात है कि जिन लोगों के दोनों पैर नहीं हैं और हमें आंखों से दिख रहा है लेकिन हम उन्हें सायकिल नहीं दिला पा रहे हैं . इस पर आप कुछ कार्यवाही करें . खाद मांगने जाते हैं तो डंडे पड़ रहे हैं . किसान अपनी फसल बेचने जाता है तो वह लाईन में लगा रहता है . मेरा आपसे अनुरोध है कि जो खरीदी केन्द्र हैं उनकी संख्या बढ़ाई जाए .अध्यक्ष महोदय , राज्यपाल जी ने जो भाषण दिया पेज नम्बर 9 पर हमने अस्पतालों की बातें सुनीं हमारे जौरा में अस्पताल बने हैं लेकिन उनमें डॉक्टर नहीं हैं . स्टॉफ नहीं है , दवाईयां नहीं है . अभी आपने नये अस्पताल का उद्घाटन किया लेकिन 50 प्रतिशत डॉक्टर भी वहां पर उपलब्ध नहीं हैं . वहां पर तीन माह से महिलाओं की डॉक्टर नहीं हैं . जब डिलेवरी होने आती है तो वह पहले वहां पर आती हैं और फिर मुरैना पहुंचाई जाती हैं . आप समझ सकते हैं कि यह कितनी गंभीर बात है . अगर तीन माह से वहां पर डॉक्टर नहीं हैं तो कैसे क्या व्यवस्था हो रही होगी यह बहुत ही गंभीर विषय है , लेकिन सरकार लगातार अपनी पीठ थपथपा रही थी और मैं सोच रहा था कि मेरे क्षेत्र का तो कुछ काम ही नहीं हुआ भवन बन गए हैं लेकिन डॉक्टर नहीं हैं . यहां पर अटल एक्सप्रेस वे की घोषणा हुई माननीय अध्यक्ष जी पहले आपने घोषणा की थी कि आप बीहड़ में से इस सड़क को निकालेंगे हमने बहुत स्वागत किया कई उत्साह मने कि बहुत ही बढ़िया काम हो रहा है लेकिन आप उपजाऊ भूमि में से अगर सड़क को निकालेंगे तो यह किसान कहां जाएंगे , जो सीमान्त किसान हैं वह कहां जाएंगे . मेरा आपने अनुरोध है कि हमें इस पर गंभीरता से विचार करना होगा यदि हमने इन लोगों को आज बेरोजगार कर दिया तो आने वाले समय में हमें कोई माफ नहीं करेगा . वह जो हजारों एकड़ का बिहड़ पड़ा है आप उस बिहड़ पर सड़क निकालिए आपका स्वागत है . ऐसे ही आपने सोलर प्लांट की योजना ला दी सबने तारीफ की कि बहुत बड़ा सोलर प्लांट बन रहा है . प्रदेश का सबसे बड़ा सोलर प्लांट बन रहा है . जो पशुवन यहां वहां घूम रहा है वह कहां जाएगा , आपने यदि हमारी पच्चीस हजार बीघा जमीन ले ली और जहां जमीन पर सोलर प्लांट लग जाएगा तो जमीन में से पानी कम जो जाएगा . वहां के किसान कहां जाएंगे इस बारे में किसी ने कोई चर्चा नहीं की है . मैं फिर कहना चाहता हूं कि जो हमारा बिहड़ का इलाका है । चंबल के पास का वहां लाखों एकड़ भूमि खाली पड़ी हुई है वह आप इन उद्योगपतियों को दीजिए , अडानी , अम्बानी को हमारी उपजाऊ जमीन देने की पंकज उपाध्याय ने कहा कि लोगों को बिजली नहीं मिल रही हैं , लोग घंटों – दिनों तक खड़े रहते हैं . डीपी जल जाती है तो दो – दो माह तक बिजली नहीं आती है , जब तक रिश्वत नहीं दी जाती है , तब तक डीपी नहीं बदली जाती है , मेरा अनुरोध है कि ये बहुत ही गंभीर विषय है इस पर आपको चिंतन करना होगा .  यहां से सबसे ज्यादा लोग सेना में जाते हैं . इतने लोग शहीद हो जाते हैं . उसके बाद भी हम मुरैना जिले एक ट्रेनिंग सेंटर आज तक नहीं बना पाये कि जहां हमारे नए युवा ट्रेनिंग कर सकें , मैं , विगत एक वर्ष में 5 बार इस सदन में , इसकी मांग कर चुका हूं लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगती है . शहीदों की केवल एक बार तारीफ कर दो , फिर उन्हें भूल जाओ . वहां स्कूल नहीं हैं । हमारे युवाओं के साथ भेदभाव हो रहा है , वे सेना में भर्ती होने के … Read more

शहरों में बदलता परिदृश्य: कॉर्पोरेट में सक्रिय महिलाएँ, संघर्षरत पुरुष, क्या खड़ी होने वाली बड़ी समस्या?

Changing scenario in cities: Women active in corporate, men struggling, is a big problem arising? शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती रोजगार भागीदारी और पुरुषों में बेरोजगारी की बढ़ती दर, दोनों ही समाज के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हैं. जहां एक तरफ महिलाओं ने पारंपरिक सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में अपने कदम मजबूत किए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुरुषों के लिए रोजगार के अवसरों की कमी बढ़ती जा रही है. यह असंतुलन न सिर्फ परिवारों के भीतर आर्थिक संरचना को प्रभावित कर रहा है, बल्कि समाज में नए सामाजिक और मानसिक दबावों को भी जन्म दे रहा है. ऐसे में इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि आखिर शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के रोजगार में बढ़ रही भागेदारी का क्या कारण है और इस असंतुलन का भविष्य में हमारे समाज और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? क्या यह स्थिति समाज में नई समस्याओं को जन्म दे सकती है? क्या कहता है आंकड़ा हाल ही में ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (GLIM) के शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट जारी की है. जिसके अनुसार साल 2023-24 में 20 से लेकर 24 साल की उम्र के बीच पुरुषों में बेरोजगारी की दर 10% देखी गई, जबकि महिलाओं में यही दर पुरुषों से कम यानी 7.5% देखा गया है. इसी तरह, 25-29 साल की उम्र में भी पुरुषों की बेरोजगारी दर 7.2% है, जो महिलाओं से ज्यादा है. बेरोजगारी का ये आंकड़ा दर्शाता है कि शहरी इलाकों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन पुरुषों के लिए यह अवसर घटते जा रहे हैं. ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (GLIM) के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि पिछले कुछ सालों में शहरी भारत में महिलाओं का रोजगार 10% बढ़ा है. जबकि साल 2017-18 से लेकर 2023-24 तक, शहरी महिलाओं में रोजगार की दर 28% तक पहुंच गई है. दिलचस्प बात ये है कि इसी साल 40 साल और उससे ऊपर की उम्र वाली शहरी महिलाओं में रोजगार दर सबसे ज्यादा 38.3% दर्ज की गई. जिससे यह संकेत मिलता है कि महिलाएं अब बच्चों के बड़े होने के बाद अपने करियर पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं. महिलाओं को नहीं है नौकरी की तलाश इसी रिपोर्ट के अनुसार भले ही देश में महिलाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके भारत की 89 मिलियन से ज्यादा शहरी महिलाएं अभी भी नौकरी की तलाश में नहीं हैं. यह संख्या जर्मनी, फ्रांस या यूनाइटेड किंगडम की पूरी जनसंख्या से भी ज्यादा है. इसका मतलब है कि अभी भी लाखों महिलाएं कामकाजी जीवन में शामिल नहीं हो पाई हैं. इस स्थिति में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर पुरुषों को पर्याप्त नौकरी के मौके नहीं मिलेंगे और महिलाएं बेहतर रोजगार के अवसरों का लाभ उठाएंगी, तो आने वाले समय में समाज में असंतुलन बढ़ सकता है. एक ओर जहां महिलाओं के लिए रोजगार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुरुषों की बेरोजगारी बढ़ने से समाज में तनाव और असंतोष का माहौल बन सकता है. महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम तैयार इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई कंपनियां महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम तैयार कर रही है, जैसे स्कूल और ऑफिस के घंटों को मिलाना और बच्चों के लिए चाइल्डकेयर की सुविधा देना. इसके अलावा ज्यादातर कंपनियां महिलाओं को घर से काम करने का विकल्प दे रही है, जिससे वे अधिक आराम से काम कर पा रही हैं, लेकिन घर से काम करने के दौरान नेटवर्किंग की समस्या भी खड़ी हो रही है, जिससे उनकी करियर ग्रोथ में रुकावट आ सकती है. इस शोध में यह भी बताया गया है कि अगर हम सिर्फ महिलाओं के रोजगार पर ध्यान देंगे और पुरुषों के रोजगार की चिंता नहीं करेंगे, तो भविष्य में इसे लेकर समाज में समस्याएं आ सकती हैं. इसलिए, महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से रोजगार के मौके बढ़ाने की जरूरत है, ताकि कोई भी समुदाय इससे प्रभावित न हो. पुरुषों में क्यों बढ़ रही है बेरोजगारी आजकल शहरी इलाकों में महिलाओं का रोजगार बढ़ रहा है, लेकिन पुरुषों के लिए बेरोजगारी एक बड़ी चिंता बन चुकी है. खासकर, जो पारंपरिक काम जैसे निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग और कम कौशल वाला काम करते है. इसका मतलब है कि पहले जो काम पुरुषों के लिए आम थे, अब उनमें नौकरी के मौके कम हो गए हैं. इसके अलावा, नई तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने पुरुषों के लिए और भी मुश्किलें पैदा की हैं. पहले जो लोग मैन्युअल (हाथ से काम करने वाले) या कम कौशल वाले काम करते थे, उनके लिए अब इन कामों की जगह मशीनों और रोबोट्स ने ले ली है. अब ये लोग अपनी नौकरी छूट जाने के खतरे से जूझ रहे हैं. शहरी इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर हो रही है क्योंकि यहां रोजगार के मौके कम हो गए हैं और युवा पुरुषों को नौकरी ढूंढने में कठिनाई हो रही है. इसे एक बड़ी समस्या के रूप में देखा जा सकता है, जिसका समाधान समय रहते करना जरूरी है. असंतुलन का क्या होगा समाज पर असर? अगर यह असंतुलन जारी रहता है तो इसका समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. पहले तो, यह पारिवारिक संरचनाओं को प्रभावित करेगा. पारंपरिक समाज में पुरुषों को कमाने वाले के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब महिलाएं भी कमाने वाली बन रही हैं. इससे परिवारों के भीतर भूमिकाओं में बदलाव आएगा और कई पुरुष इस बदलाव को स्वीकार करने में मुश्किल महसूस कर सकते हैं. इसके अलावा, बेरोजगारी की बढ़ती दर से पुरुषों के बीच निराशा और मानसिक दबाव बढ़ सकता है. बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण अपराधों में वृद्धि हो सकती है और समाज में अस्थिरता पैदा हो सकती है. महिलाओं के बढ़ते रोजगार का प्रभाव पुरुषों पर महिलाओं के बढ़ते रोजगार का प्रभाव पुरुषों पर सीधा और अप्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है. कुछ पुरुषों को यह बदलाव चुनौतीपूर्ण लग रहा है, क्योंकि पहले वे ही परिवार के मुख्य कमाने वाले होते थे. अब जब महिलाएं भी अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, तो पारंपरिक भूमिका … Read more

लाडली बहनों से लेकर किसानों को एमपी के बजट में क्या मिला? पढ़ें बड़ी बातें

From Laadli sisters to farmers, what did they get in MP’s budget? Read the important points MP Budget 2025 News: मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में मोहन यादव सरकार का बजट पेश किया. वित्त मंत्री ने 2025-26 के लिए राज्य का 4,21,032 करोड़ रुपये का बजट पेश किया. बजट में महिलाओं, किसानों और युवाओं को लेकर घोषणाएं की गई हैं. अहम बात यह है कि मध्य प्रदेश सरकार ने किसी नए टैक्स की घोषणा नहीं की है. यह सीएम मोहन यादव सरकार का दूसरा बजट है. बजट के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बैठकर बजट भाषण सुनते देखे. मध्य प्रदेश बजट 2025 हाइलाइट्स लाड़ली बहनों को अटल पेंशन योजना से जोड़ेंगे.लाड़ली बहना योजना के लिए 18679 करोड़श्री कृष्ण पाथेय के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधानराम वन पथ गमन के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधानप्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना का लाभआगामी 5 वर्षों में उद्योगों को 30,000 करोड़ रुपये इंसेंटिवखाद्यान्न योजना के लिए 7,132 करोड़ रुपये का प्रावधानश्रम विभाग के लिए 1,808 करोड़ रुपये का प्रावधानआकांक्षा योजना के लिए 20.52 करोड़ रुपये का प्रावधानजनजातीय वर्ग के लिए प्रमुख योजनाएं 23,000 प्राथमिक स्कूल, 6,800 माध्यमिक स्कूल, 1,100 हाई स्कूल.900 उच्चतर माध्यमिक स्कूल, 1,078 आश्रम, 1032 सीनियर छात्रावास.कुपोषण मुक्ति आहार अनुदान – 2.20 लाख महिलाओं को 1,500 रुपयेअनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग कल्याण अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के लिए 25 करोड़ रुपयेपिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 1,086 करोड़ रुपयेगरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए विशेष बीमा योजनारोजगार व औद्योगिक विकास प्रदेश में 39 नए औद्योगिक क्षेत्र – 3 लाख से अधिक नौकरियांप्रसूति, विवाह और अंत्येष्टि सहायता के लिए 3,917 करोड़ रुपयेविशेष पिछड़ी जातियों के लिए 53,000 से अधिक आवास, 22 नए छात्रावास.विकास के दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2047 तक सकल घरेलू उत्पाद 250 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्यवार्षिक आय 22.33 लाख रुपये तक बढ़ाने की योजना2024 की तुलना में बजट में 15% वृद्धिसकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर देश में सबसे अधिक – 22 वर्षों में 17 गुना वृद्धिकिसान और कृषि नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल एंड रुपया 183 करोड़ रुपये का प्रावधान.कृषि उपभोक्ताओं को विद्युत बिल में दी जा रही राहत जारी रहेगी. इसके लिए 19000 करोड़ रुपये का प्रावधानप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 2 करोड़ 42 लाख प्रकरणों में रुपए 2955 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है.इसमें 2025-26 में 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान.किसान प्रोत्साहन योजना के लिए 5230 करोड़ रुपयेप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 2 हजार करोड़ रुपयेधान उपार्जन बोनस के लिए 850 करोड़ रुपये

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