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प्रदेश सरकार अपने नागरिकों की चिंता करने के साथ-साथ वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भी संवेदनशील :मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक वन क्षेत्र और वन्यजीवों की विविधता से संपन्न राज्य है। भारत में सबसे अधिक बाघ (टाइगर) मध्यप्रदेश की धरती पर देखने को मिलते हैं। तेंदुआ (लेपर्ड) और गिद्ध (वल्चर) की संख्या भी मध्यप्रदेश में सबसे अधिक है। प्रदेश के अलग-अलग वन क्षेत्रों में मगरमच्छ और घड़ियालों का बसेरा है। प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण, जंगलों की रक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वन्य प्राणी संरक्षण सहित सभी क्षेत्रों में तेज गति के साथ अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर स्थापित किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  गुजरात रवाना होने के पहले मीडिया में जारी एक संदेश में यह विचार रखे। संभाग स्तर पर आवश्यक हैं रेस्क्यू सेंटर  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए मध्यप्रदेश में किंग कोबरा भी लेकर आए हैं। चीतों को पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान से गांधी सागर वन क्षेत्र में छोड़कर एक नया नेशनल पार्क विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक दो नए टाइगर नेशनल पार्क बनने और चीतों के साथ-साथ दूसरे वन्य जीवों की संख्या बढ़ने से संभाग स्तर पर रेस्क्यू सेंटर की आवश्यकता महसूस हो रही है। इन सेंटर्स की स्थापना के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अब तक केवल एक रेस्क्यू सेंटर राजधानी भोपाल स्थित वन विहार में है। यहां प्रदेशभर से घायल और बीमार वन्यजीवों को इलाज के लिए लाया जाता है, लेकिन उनके अनुकूल वातावरण में बदलाव हो जाने के कारण कई बार परेशानियां आती हैं। वन्यप्राणियों की जीवन रक्षा और उनके जीवन में सुखद बदलाव लाने के लिए संभाग स्तर पर रेस्क्यू सेंटर शुरू करने का प्रयास है। मध्यप्रदेश में जू़ की संख्या बढ़ेगी राज्य सरकार प्रदेश में चिड़ियाघरों अर्थात प्राणी उद्यान (जू़) की संख्या में भी वृद्धि करने जा रही है। बजट में दो प्राणी उद्यान की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुजरात में देश का सर्वश्रेष्ठ जू एवं रेस्क्यू सेंटर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वे गुजरात की अध्ययन यात्रा में जामनगर में वन्यजीवों की देखरेख के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे साथ ही वन्यजीवों का आदान-प्रदान कर उनके जीवन रक्षा की संभावनाएं भी तलाशेंगे। नागरिकों के साथ-साथ वन्यजीवों के प्रति भी संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के कई विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में वेटनरी कोर्स और वेटनरी अस्पताल शुरू कर पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। निकट भविष्य में इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। वन संपदा और वन्यजीवों के संरक्षण का भी व्यापक अभियान प्रदेश में चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया है कि अगर किसी वन्यजीव के संकट में होने की जानकारी मिले या दिखाई दे तो नज़दीकी फॉरेस्ट ऑफिसर को सूचित करें। प्रदेश सरकार अपने नागरिकों की चिंता करने के साथ-साथ वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भी संवेदनशील है।

मध्य प्रदेश की इस तहसील को बनाया जाएगा जिला! सरकार ने राजस्व विभाग से मांगी जानकारी

डिंडोरी  मध्य प्रदेश का आदिवासी जिला डिंडोरी अब टूटने की कगार पर खड़ा हो गया है. इस जिले में दो विधानसभा हैं, डिंडोरी और शहपुरा. जिसमें शहपुरा क्षेत्र के लोग इसे नया जिला बनाने की मांग पर इस बार न सिर्फ अड़े हुए हैं, बल्कि आंदोलन के लिए भी लामबंद हैं. इसके लिए मंगलवार की दोपहर शहपुरा क्षेत्रवासियों और आमजनों ने एक मांग पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार शहपुरा को सौंपा है. इस पत्र में शहपुरा को नया जिला बनाने की मांग की है. 47 सालों से हो रही शहपुरा को जिला बनाने की मांग दरअसल, शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति ने शहपुरा तहसील कार्यालय पहुंचकर नायब तहसीलदार सुखमन कुलेश को ज्ञापन सौंपा है. जिसमें शहपुरा को जिला बनाने की मांग की गई है. बताया जा रहा है कि शहपुरा को जिला बनाने की मांग पिछले 47 सालों से लगातार की जा रही है. यह मांग बीच-बीच में तब तेज होती है जब विधानसभा या लोकसभा चुनाव आते हैं. लेकिन इस बार एक पत्र ने शहपुरा क्षेत्र वासियों की टेंशन बढ़ा दी. इस पत्र में मंडला जिले की सबसे बड़ी तहसील निवास को जिला बनाने के लिए विस्तृत जानकारी चाही गई है. जिसमें निवास को शहपुरा के साथ जोड़कर जिला बनाने की बात लिखी गई है. जिसके बाद शहपुरा के लोग लामबंद हो गए. राष्ट्रपति से लेकर मंत्रियों को सौंपा ज्ञापन ज्ञापन के माध्यम से शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया, ”सन 1977 से लेकर आज तक शहपुरा को डिंडोरी से पृथक कर अलग जिला बनाने की मांग क्षेत्रवासियों द्वारा की जा रही है. लेकिन अब तक प्रदेश सरकार ने कोई विचार नहीं किया है. यह मांग उस दौरान भी की गई जब मंडला जिले से डिंडोरी को अलग जिला बनाया जा रहा था. इसको लेकर क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों ने महामहिम राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यपाल से लेकर कैबिनेट मंत्रियों तक को ज्ञापन एवं मांग पत्र सौंपा है. शहपुरा को जिला बनाने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन क्षेत्रवासियों ने मांग की है, शहपुरा को जिला बनाने के लिए निवास, मेहदवानी, विक्रमपुर, चौरई, रहटा क्षेत्र एवं तहसील व विधानसभा को जोड़ा जाए. मांग पत्र में शहपुरा क्षेत्रवासियों ने उल्लेख किया है कि हाल में ही शासन प्रशासन के द्वारा एक पत्र जारी किया है. जिसमें उल्लेख है कि निवास को जिला बनाए जाने के लिए स्थानीय प्रशासन से राजस्व विभाग संबंधी जानकारी शहपुरा राजस्व क्षेत्र की चाही गई है. जिसमें शहपुरा और मेहदवानी ब्लॉक को शामिल किया जाना है. इस पत्र के वायरल होने के बाद से शहपुरा क्षेत्र की जनता एक बार फिर सक्रिय हुईं और मांग पत्र सौंपा है कि शहपुरा को ही अलग जिला बनाया जाए. बैठक हुई थी आयोजित शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में 6 जून को एक बृहद बैठक आयोजित की गई थी. जिसमें शहपुरा के भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे भी शामिल रहे. विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने क्षेत्रवासियों की मांग को जायज बताते हुए अपना समर्थन भी दिया है. शहपुरा संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा है कि, ”शहपुरा हर दृष्टि से जिला बनने के लिए उपयुक्त है. कोरे आश्वासन का क्षेत्र की जनता विरोध करती है और शहपुरा को जिला घोषित नहीं करने पर क्षेत्र की जनता अब उग्र जन आंदोलन करने को मजबूर होगी. जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी.”    भारतीय किसान संघ ने भी जिला बनाने का किया समर्थन शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति की मांग को जायज और क्षेत्र हित का बताते हुए भारतीय किसान संघ ने भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा. तहसील अध्यक्ष प्रमोद कुमार मौर्य ने कहा कि, ”शाहपुरा को जिला बनाने की मांग वर्षों पुरानी है. इसके लिए शाहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति सतत संघर्षरत है. कई बार ज्ञापन आंदोलन हुए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. आज पुनः शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति की मांग का भारतीय किसान संघ समर्थन करता है कि, शहपुरा को जल्द से जल्द जिला बनाया जाए.”

मुख्यमंत्री ने मजरा-टोला सड़क योजना को दी मंजूरी, मिली बड़ी सौगात, 39,900 किलोमीटर नई पक्की सड़कें और हजारों पुल-पुलिया होंगे तैयार

भोपाल  अब मध्यप्रदेश के मजरे-टोले भी विकास से जुड़ेंगे। इसके लिए 20,600 मजरे-टोलों को चिह्नित कर लिया है। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को स्वीकृति दी। इस योजना में 39,900 किमी सड़कें(New Road) बनेंगी। इन पर हजारों पुल-पुलिया बनेंगे। इस पर 21,630 करोड़ खर्च होगा। बारहमासी सड़कों से इलाके के स्कूली बच्चों, गर्भवतियों को बारिश में नदी-नाले रास्ता नहीं रोक पाएंगे। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 11 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कैबिनेट ने मंगलवार कोय ह सौगात दी। तबादले की डेडलाइन 17 जून करने समेत कई जनकल्याण निर्णय भी लिए। मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अब गांवों के सुदूर मजरे और टोले भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसमें 20,600 मजरे-टोले चिन्हित किए गए हैं। योजना के तहत कुल 39,900 किलोमीटर लंबी नई पक्की सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिन पर हजारों पुल और पुलिया भी बनेंगी। इस परियोजना पर अनुमानित 21,630 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बारहमासी सड़कों से सुविधाएं बढ़ेंगी इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इन सड़कों के माध्यम से ग्रामीण अंचलों में स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को बारिश में भी निर्बाध आवागमन मिल सकेगा। नदी-नालों और कच्चे रास्तों की दिक्कतें समाप्त होंगी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिया गया, जिससे राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी। योजना दो चरणों में पूरी होगी  मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहला चरण 2025-26 से 2029-30 तक चलेगा और दूसरा चरण 2030-31 से 2034-35 तक। इस दौरान 30,900 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे राज्य के सभी पात्र ग्रामीण टोलों को बारहमासी सड़कों से जोड़ा जाएगा। छोटे टोले भी होंगे शामिल, न्यूनतम आबादी और मकानों की शर्त पिछले 75 वर्षों में आबादी बढ़ने और परिवारों के बंटवारे के चलते मजरे-टोले स्वतंत्र इकाइयों के रूप में उभरे हैं, लेकिन अब तक अधोसंरचना से वंचित रहे हैं। सरकार ने तय किया है कि ऐसे मजरे और टोले भी इस योजना में शामिल होंगे जिनमें कम से कम 20 मकान, 100 से अधिक की आबादी और 6,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल होगा। ऐसे 20,600 मजरे-टोले पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं। हर जिले का विकास होगा योजनाबद्ध प्रदेश के प्रत्येक जिले का विकास योजनाबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जिला विकास सलाहकार समितियों के गठन को मंजूरी दी है। इन समितियों के अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं होंगे और उपाध्यक्ष प्रभारी मंत्री। स्थानीय जनप्रतिनिधि सदस्य होंगे और क्षेत्रीय विशेषज्ञों को भी सम्मिलित किया जाएगा। यह समिति जिले के लिए दीर्घकालिक विकास का रोडमैप तैयार कर सरकार को सौंपेगी। चार शहरों में बनेंगे सुरक्षित हॉस्टल कैबिनेट ने नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली और देवास में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित हॉस्टलों के निर्माण को भी स्वीकृति दी है। 40.59 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ये हॉस्टल उन महिलाओं को सुविधा देंगे जो औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ये आवास पूरी तरह सुरक्षित होंगे और महिला श्रमिकों के लिए एक सशक्त सहारा साबित होंगे। ब्याज मुक्त कर्ज और ग्रामीण सेवा की शर्त में होगा बदलाव कैबिनेट ने मेधावी छात्र योजना में भी महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। अब मेडिकल (MBBS) छात्रों को अपनी पढ़ाई का शुल्क स्वयं वहन करना होगा, लेकिन सरकार फीस पूर्ति के लिए छात्रवृत्ति और अतिरिक्त खर्चों के लिए ब्याज मुक्त कर्ज की व्यवस्था करेगी। यदि छात्र पांच वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करते हैं, तो सरकार कर्ज चुकाने में मदद करेगी। यह प्रावधान 2025 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। जो छात्र ग्रामीण सेवा नहीं करेंगे, उन्हें यह कर्ज स्वयं चुकाना होगा। तुअर दाल उद्योग को राहत प्रदेश में महाराष्ट्र जैसे राज्यों से आयातित तुअर से संचालित 134 दाल मिलों को भी सरकार ने राहत दी है। अभी तक इन पर मंडी टैक्स लगता था, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती थी। अब इस टैक्स को हटा दिया गया है, जिससे इन मिलों को गति मिलेगी और जीएसटी संग्रहण में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि मंडी राजस्व में लगभग 20 करोड़ रुपये की कमी आएगी, लेकिन राज्य सरकार का मानना है कि उद्योगों को राहत देना अधिक आवश्यक है। मेडिकल पढ़ाई में शुल्क से माफी नहीं, 5 साल के बांड से आजादी मेडिकल छात्रों को पढ़ाई के अतिरिक्त खर्च के लिए सरकार ब्याज मुक्त कर्ज दिलाएगी। मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना में बदलाव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। छात्रों को शुल्क खुद भरना होगा, फीसपूर्ति के लिए छात्रवृत्ती देंगे। अतिरिक्त खर्च के लिए कर्ज ले सकेंगे, जिसमें सरकार मदद करेगी। सरकार की मंशा अनुरूप 5 साल ग्रामीण इलाके में सेवा देंगे तो सरकार कर्ज चुकाने में मदद करेगी। जो ग्रामीण क्षेत्र में सेवा नहीं देंगे, उन्हें कर्ज खुद चुकाना होगा। यह बदलाव चालू वित्त वर्ष में एमबीबीएस में प्रवेश लेने वालों पर लागू होगा।

सर्वेक्षण गुणात्मक एवं प्रमाणिकता के साथ करें : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार विमुक्‍त, घुमन्‍तु एवं अर्द्धघुमन्‍तु जातियों के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इन जातियों के कल्याण की गतिविधियों को पावन कार्य बताते हुए कहा कि यह गर्व करने योग्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिये इन समुदायों का सर्वेक्षण के माध्यम से डाटा इक्कठा किया जायेगा। इस डाटा के आधार पर कार्यक्रम बनाये जायेगें और राज्य एवं केन्द्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से इन समुदायों को लाभांवित किया जायेगा। राज्य पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय के सर्वेक्षण-2025 पर बुधवार को हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि जन अभियान परिषद और विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण विभाग के बीच सर्वेक्षण के लिये एमओयू हुआ है। सर्वेक्षण प्रमाणिकता के साथ होगा। उन्होंने कहा कि सर्वे कार्य में लगे कार्य समन्वयक पूरी ईमानदारी एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि घुमन्तु समाज के उत्थान का यह पुण्य एवं पवित्र कार्य है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण विभाग के कार्य की सराहना भी की। पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदायों के परिवारों के समेकित विकास के दृष्टिगत सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में प्रदेश के 12 जिलों में सर्वेक्षण का कार्य होगा और यह कार्य तय समय सीमा 3 माह में पूरा किया जायेगा। सितम्बर में सर्वेक्षण का प्रथम चरण पूरा होने के बाद दूसरे चरण में प्रदेश के शेष जिले में सर्वेक्षण होगा। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण से इन समुदायों की जानकारी एकत्र की जायेगी और जानकारी के आधार पर इन समुदायों के विकास के लिये कार्यक्रम बनाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण दल यह सुनिश्चित करें कि सर्वेक्षण से एक भी परिवार नहीं छूटे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सर्वेक्षण के लिये दिये गये प्रस्ताव पर तुरंत सहमति दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया। कार्यशाला में क्षेत्रीय प्रमुख घुमन्तु कार्य श्री गौरेलाल ने सर्वेक्षण कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि वह विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदायों के बीच में पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहे है। उन्होंने कार्य के दौरान हुए अनुभवों पर आधारित इन समुदायों की समास्याओं से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाये और कहा कि इन समुदायों के विकास के लिये व्यवस्थित कार्य योजना जरूरी है और सर्वेक्षण का डाटा महत्वपूर्ण होगा। कार्यशाला को मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर, अध्यक्ष विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय विकास अभिकरण श्री बाबूलाल बंजारा ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में प्रमुख सचिव विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय विकास विभाग श्री ई. रमेश कुमार और कार्य पालक निदेशक जन अभियान परिषद डॉ. बकुल लाड ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर जानकारी दी। कार्यशाला में जनअभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड और संचालक विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तुसमुदाय विकास विभाग श्री नीरज वशिष्ठ ने एमओयू का दस्तावेज एक दूसरे को सौंपा। इस अवसर पर विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय विभाग द्वारा तैयार किये गये पोस्टर का विमोचन भी किया गया।  

अमृत हरित कार्यशाला 13 जून को रवीन्द्र भवन में, हरित क्षेत्र से जुड़े विषय-विशेषज्ञों के होंगे व्याख्यान

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा शुक्रवार 13 जून को प्रात: 8:30 बजे राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला अमृत हरित अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में हरित क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों और पहलों का प्रसार करना है। कार्यशाला में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, महापौर, निकायों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और जन-प्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यशाला में प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। प्रत्येक नगर निगम से 6, नगरपालिका परिषद से 4 और नगर परिषद से 2 प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गयी है। कार्यशाला के दौरान कृषि और उद्यानिकी से संबंधित उत्पादों एवं यंत्रों की प्रदर्शनी के साथ ही नर्सरी प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जायेगा। कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों जैसे इफ्को एवं भारतीय प्रबंध संस्थान के विषय-विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की जायेगी। कार्यशाला में स्थानीय वृक्ष प्रजातियों की विशेषताएँ एवं संरक्षण, जैव-विविधता एवं जलवायु परिवर्तन, बगीचों के लिये तकनीक एवं उपकरण की आवश्यकताएँ, वृक्षारोपण और पौध-रोपण से संबंधित अधिनियमों का विश्लेषण तथा वृक्षारोपण उपरांत समुचित प्रबंधन विषय पर चर्चा की जायेगी। हरित क्षेत्र बढ़ाने की रणनीतियाँ कार्यशाला में दिव्यांग पार्क, होशंगाबाद एवं उज्जैन की सफलता की कहानियों को भी साझा किया जायेगा। इन कहानियों पर आधारित फिल्म का विशेष प्रस्तुतिकरण किया जायेगा। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण समस्त नगरीय निकायों में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से किया जायेगा, जिससे राज्य के सभी निकाय इस अभियान से जुड़ सकें। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त श्री संकेत भोंडवे के निर्देशन में अपर आयुक्त श्री कैलाश वानखेड़े ने सभी नगरीय निकायों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किये हैं। इसके साथ ही पौध-रोपण कार्य में संलग्न शासकीय और अशासकीय संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यशाला में भाग लेंगे।  

प्रदेश में पेयजल स्रोतों की सफाई के साथ जनजागरूकता अभियान भी जारी

भोपाल  प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान 30 मार्च से जारी है। अभियान के दौरान ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाकर सुखद भविष्य के बारे में बताया जा रहा है। अभियान के दौरान जिले भर में प्राचीन बावड़ियों को चिन्हित कर उनकी मरम्मत और सफाई कार्य हाथ में लिया गया है। प्रदेश में लगातार जल यात्राएं निकाली जा रही हैं। वर्षा के मौसम को देखते हुए व्यापक पौधरोपण की कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है।   उत्कृष्ट कार्य करने वालो किया सम्मानित सिंगरौली जिले में नौगढ़ में जन अभियान परिषद द्वारा हनुमान मंदिर के पास बावड़ी में साफ-सफाई वृक्षारोपण व दीप प्रज्ज्वलित कर बावड़ी उत्सव मनाया गया। जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाली नवांकुर संस्था को विधायक श्री राम निवास शाह और कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर शुक्ला ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में पानी की बचत को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल यात्रा का आयोजन किया गया। इसी के साथ जल स्रोतों की साफ-सफाई जनभागीदारी से की गई। जल चौपाल में जन सामान्य को नदी-तालाबों के किनारों पर निरंतर सफाई करते रहने की समझाइश दी गई। सामूहिक भागीदारी में महिला कार्यकर्ताओं के माध्यम से अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी करने के लिये जन जागरूकता अभियान चलाया गया। 19 तालाबों का होगा सौंदर्यीकरण कटनी जिले में कलेक्टर श्री दिलीप कुमार यादव ने 5 जनपद पंचायतो में 19 तालाबों के मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ 83 लाख रूपये की स्वीकृति जारी की। कलेक्टर ने कहा कि जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के सभी कार्य आने वाले 15 दिनों में हर हाल में पूरे किये जायें। उन्होंने कहा कि जिले में मानसून की बारिश के दौरान व्यापक स्तर पर पौधरोपण की कार्ययोजना तैयार की जाये। पौधरोपण में स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ अधिक से अधिक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाये। उन्होंने बताया कि जिले में चिन्हित की गई प्राचीन बावड़ियों की सफाई का कार्य आगे भी लगातार चलता रहे, यह व्यवस्था भी की जानी चाहिए। जनभागीदारी से होगा प्राचीन जल स्रोतों का संरक्षण जबलपुर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जन अभियान परिषद द्वारा बावड़ी उत्सव कार्यक्रम का आयोजन कर पनागर में जयप्रकाश वार्ड स्थित प्राचीन बावड़ी की साफ-सफाई की गई। विधायक श्री सुशील तिवारी “इंदु” की उपस्थिति में हुए कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। विधायक श्री सुशील तिवारी ने बावड़ी संरक्षण के कार्यों में जनसमुदाय की भागीदारी को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पनागर विधानसभा क्षेत्र में जल संवर्धन के कार्यों तथा बावड़ी, तालाब और कुओं जैसे जल स्त्रोतों के सरंक्षण में शासन-प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों एवं आम जनता का भी सहयोग लिया जायेगा। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय समीक्षा डिण्डोरी जिले में कलेक्टर श्रीमती नेहा मारव्या की अध्यक्षता में जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति का समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत राज्य स्तर से समस्त जिलों की समीक्षा खेत तालाब, निर्माण कार्य, पुराने प्रगतिरत कार्यो की पूर्णता, कूप रिचार्ज, अमृत सरोवर निर्माण पर लक्ष्य निर्धारित कर पूर्णताः के आधार पर की जा रही है। जिले को किसानों के खेत में 2171 खेत तालाब निर्माण का लक्ष्य दिया गया था, जिसके विरूद्ध जिले में 2321 कार्यों की स्वीकृति जारी कर 2200 कार्य निर्माण प्रारंभ किये जा चुके हैं। अभियान के दौरान जिले को 1500 कुओं का जल स्तर बढाने के लिये रिचार्ज संरचनाएं बनाने का लक्ष्य दिया गया था। जिले में 1570 कूपों में रिचार्ज संरचना निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया है। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि समस्त कूपों में 15 जून तक गुणवत्ता‍पूर्ण रिचार्ज संरचना शत-प्रतिशत निर्मित करते हुये नियमानुसार मजदूरी एवं सामग्री का मूल्यांकन कर एफटीओ किया जाए। जिले में जनपद पंचायत में 187 सार्वजनिक तालाब का निर्माण किया जा रहा है। पेयजल स्त्रोतों में किया गया क्लोरिनेशन मंडला जिले में कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के निर्देश पर ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्ता पूर्ण शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिये पेयजल स्रोतों में जर्मेक्स डालकर क्लोरिनेशन कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों को पानी को उबालकर, छानकर, शुद्ध पानी पीने एवं ताजा भोजन करने की समझाइश दी गई। जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में किये जा रहे कार्यों की निरंतर समीक्षा की जा रही है। जिले में जनसमुदाय की उपस्थिति में बावड़ी उत्सव का भी आयोजन किया गया है। बावड़ियों की पूजन कर ग्रामीणों को पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई की शपथ भी दिलाई गई। आदर्श ग्राम कन्हान वनग्राम में बोमली नाला में साफ-सफाई छिन्दवाड़ा जिले में जन अभियान परिषद के तत्वाधान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर 30 मार्च से निरंतर पेजयल स्रोतों की साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्राम के बोमली नाला में सामूहिक जन-भागीदारी से बोमली खेत तालाब जल स्त्रोत की साफ-सफाई और गहरीकरण किया गया। यह कार्य निरंतर चलता रहेगा। सफाई कार्य के दौरान ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जिले में ग्रामीणों क्षेत्रों में जल चौपालों का आयोजन लगातार किया जा रहा है। ग्रामीणों को पानी की बर्बादी रोकने के लिये शपथ दिलाई जा रही है।

ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय: मंत्री पटेल

भोपाल  राज्य मंत्रि परिषद की गत दिवस हुई बैठक में ‘मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना’ के अंतर्गत 30 हजार 900 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण के लिए 21 हजार 630 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय न केवल सुदूर ग्रामीण अंचलों को शहरों से जोड़ेगा, बल्कि प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक प्रगति का सशक्त आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण बस्तियों की मूलभूत सुविधाओं की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जो विकास को अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाने के संकल्प को साकार करेगी। राज्य सरकार ने सुदूर ग्रामीण बसाहटों जैसे मजरा, टोला, धोनी, पुरा आदि को हर मौसम में संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। योजना के अंतर्गत कुल 30 हजार 900 किलोमीटर लंबाई के मार्गों का निर्माण किया जाएगा। योजना का क्रियान्वयन दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक और दूसरा चरण 2030-31 से 2034-35 तक संचालित होगा। इस व्यापक योजना का कुल आकार 21 हजार 630 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। यह योजना पूर्णतः राज्य मद से क्रियान्वित की जाएगी। योजना से संबंधित निर्णय लेने के लिए मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की साधिकार समिति को अधिकृत किया गया है। ग्राम पंचायतों में अभी भी कई बसाहटें ऐसी हैं, जिनमें मुख्य सड़क मार्ग से ग्राम पंचायतों में पहुँचने के लिए सड़क उपलब्ध नहीं है। ग्रामवासियों को सुविधाजनक मार्ग उपलब्ध कराने के लिए “मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना” वित्तीय वर्ष 2025- 26 के बजट में प्रस्तावित की गई थी। यह महत्वाकांक्षी योजना प्रदेश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों को मुख्य सड़कों से जोड़े जाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।  

ऊर्जा मंत्री ने बिजली संबंधी शिकायतों के निपटारे में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की

भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बिजली संबंधी शिकायतों के निपटारे पर हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रबंध संचालक से लेकर कार्यपालन स्तर तक के सभी अधिकारी रात्रि के समय क्षेत्रों का भ्रमण कर बिजली की वास्तविक स्थिति का आंकलन करें। साथ ही निरीक्षण रिपोर्ट मेरे कार्यालय में प्रस्तुत करें। श्री तोमर ने बुधवार को विद्युत आपूर्ति में आ रहे अवरोध एवं कॉल-सेंटर के माध्यम से प्राप्त हो रही शिकायतों के निराकरण की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिये। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि शिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के लिये टीम की संख्या बढ़ायें। उन्होंने कहा कि विद्युत अवरोध एवं उसके निराकरण से संबंधित जानकारी जन-प्रतिनिधियों, स्थानीय मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित करें। मैदानी स्तर के अधिकारियों द्वारा उपभोक्ताओं के फोन अटेंड करना सुनिश्चित हो। विद्युत कनेक्शन में भार वृद्धि के संबंध में जागरूक किया जाये। ऊर्जा मंत्री के कार्यालय में बना कॉल-सेंटर ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि वर्षाकाल में बिजली की शिकायतों के मद्देनजर मेरे कार्यालय में भी आगामी 3 माह के लिये एक अस्थाई कॉल-सेंटर स्थापित किया गया है। कॉल-सेंटर का नम्बर 0755-4344299 है। उन्होंने उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि इस नम्बर पर सम्पर्क करने के पूर्व बिजली कम्पनी के मुख्य कॉल-सेंटर 1912 पर शिकायत जरूर दर्ज करायें और उसका क्रमांक साझा करें। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में प्रबंध संचालक एमपी पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी श्री अवनीश लवानिया, सभी विद्युत कम्पनियों के एमडी, क्षेत्रीय मुख्य अभियंता और मुख्य महाप्रबंधक शामिल हुए। 

नियम विरुद्ध स्वीकृति जारी करने पर सहायक यंत्री लालजी चौहान निलंबित

भोपाल  आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास श्री संकेत भोंडवे ने नगरपालिक निगम भोपाल में पदस्थ सहायक यंत्री लालजी चौहान को नियम विरुद्ध भवन निर्माण की स्वीकृति जारी करने के आरोप में निलंबित किया है। इस संबंध में अपर आयुक्त श्री कैलाश वानखेड़े ने आज आदेश जारी किये हैं। आयुक्त नगर निगम भोपाल द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार लालजी चौहान ने अपने कार्यकाल के दौरान नगर निवेशक के रूप में सौंपे गये दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं अनियमितता बरती। प्रस्ताव में बताया गया कि 31 मार्च, 2025 से 2 मई, 2025 तक नगर निवेशक श्री अनूप गोयल के अर्जित अवकाश अवधि में लालजी चौहान को उनका कार्यभार सौंपा गया था। इस अवधि में लालजी चौहान ने नियम विरुद्ध स्वीकृतियाँ जारी कीं।  

मध्यप्रदेश में बनेंगे कामधेनु निवास, निराश्रित गौवंश के आश्रय का होगा स्थाई समाधान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित गौवंश की आश्रय समस्या के निराकरण के लिए स्थाई समाधान निकाला गया है। अब प्रदेश में कामधेनु निवास (स्वावलंबी गौशाला) स्थापित होगी, जहां बड़ी संख्या में गौवंश की देखभाल की जाएगी। इसके लिए सरकार द्वारा “मध्यप्रदेश राज्य में स्वावलंबी गौशालाएं (कामधेनु निवास) स्थापना की नीति 2025” को स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है। इस नीति के तहत प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाएं स्थापित की जाएगी , जिनमें न्यूनतम 5000 गौवंश का पालन अनिवार्य होगा। इनमें से 30 प्रतिशत गौवंश उन्नत दुधारू नस्ल का हो सकता है। सरकार द्वारा अधिकतम 125 एकड़ शासकीय भूमि के उपयोग के अधिकार गौशाला संचालकों को दिए जाएंगे। इन गौशालाओं में 5000 से अधिक गौवंश होने पर प्रति 1000 गौवंश पर 25 एकड़ अतिरिक्त शासकीय भूमि दी जा सकेगी। पशुपालन एवं डेयरी विभाग लैंड बैंक तैयार करेगा। भूमि पशुपालन एवं डेयरी विभाग के स्वामित्व में रहेगी तथा विभाग की तरफ से मध्यप्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड और गोपालक संस्था के मध्य उपयोग अनुबंध निष्पादित किया जाएगा। भूमि जैसी है वैसी के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी। भूमि पर विकास कार्य गोपालक संस्था को करवाना होगा। कामधेनु निवास   की स्थापना के लिए कोई भी पंजीकृत संस्था जैसे कि फर्म, ट्रस्ट, समिति, कंपनी अथवा उनके संघ इस योजना का लाभ ले सकेंगे। संघ अधिकतम पांच संस्थाओं के लिए मान्य होगा, इससे अधिक संख्या वाले संघ को मान्यता नहीं होगी।  इन गौशालाओं में गोपालन के साथ ही पंचगव्य निर्माण, बायोगैस, जैविक खाद, नस्ल सुधार, दुग्ध प्रसंस्करण, सौर ऊर्जा, बायोगैस आदि व्यावसायिक गतिविधियां की जा सकेंगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2024-25 के अंतर्गत 8 वर्किंग वूमेन हॉस्टल की स्वीकृति प्रदान की गई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की कामकाजी महिलाओं के लिये वर्किंग वुमेन हॉस्टल की सौगात दी है। भारत सरकार की स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंट ऑफ स्टेटस फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट 2024-25 के अंतर्गत 8 वर्किंग वूमेन हॉस्टल की स्वीकृति प्रदान की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि योजना अंतर्गत महिला श्रम बल भागीदारी दर (फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट) को बढ़ाने और महिलाओं के जीवन को आसान बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में 8 वर्किंग वूमेन हॉस्टल की स्वीकृति प्रदान की गई है जिसमें से महिला बाल विकास विभाग द्वारा 4 वर्किंग वूमेन हॉस्टल और शेष 4 हॉस्टल औद्योगिक नीति निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा बनाये जायेंगे। 289 करोड़ रूपये की स्वीकृति हुई जारी मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि महिला बाल विकास विभाग द्वारा देवास, नर्मदापुरम और सिंगरौली में 100 सीटर तथा झाबुआ में 50 सीटर हॉस्टल बनाये जायेंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा उज्जैन में 1554 सीटर, धार में 1776, रायसेन 776 और भिण्ड में 666 सीटर हॉस्टल का निर्माण किया जायेगा। उन्होंने बताया कि वर्किंग वूमेन हॉस्टल के निर्माण के लिये 289.72 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से 40.59 करोड़ की राशि महिला बाल विकास विभाग व्यय करेगी। वर्किंग वूमेन हॉस्टल का स्वामित्व राज्य सरकार के पास रहेगा और रख-रखाव का काम पीपीपी मोड पर किया जायेगा। हॉस्टल में होंगी आधुनिक सुविधाएँ वर्किंग वूमेन हॉस्टल में आधुनिक सुविधाओं सहित डे केयर सेंटर, जिम, इंडोर स्पोर्टस, लायब्रेरी, वाय-फाई, पर्याप्त पार्किंग, फूड कोर्ट और मनोरंजन गतिविधियां आदि उपलब्ध होंगी। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराये जा रहे हैं, जिससे कामकाजी महिलाओं का जीवन आसान होगा। विशेष रूप से जनजातीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों में महिला श्रमिकों की आवास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह योजना क्रांतिकारी सिद्ध होगी।  

पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता को घर-घर तक पहुंचाने की संकल्पना हो रही है पूरी : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित के नवनियुक्त प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता के पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में शामिल हुए और उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले के फरसाबहार में अपेक्स बैंक की नई शाखा का वर्चुअल शुभारंभ किया और क्षेत्रवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकार से समृद्धि की संकल्पना को साकार किया जा रहा है। उनकी प्रेरणा से प्रदेश के घर-घर को सहकारिता से जोड़ने का कार्य हमारी सरकार कर रही है। श्री साय ने कहा कि नवनियुक्त प्राधिकृत अधिकारी के नेतृत्व में प्रदेश में सहकारिता को और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि सहकारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ मिलकर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में हमने दुधारू पशु वितरण का शुभारंभ किया है, जिसके अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश के 6 जिलों का चयन कर हितग्राहियों को दो-दो दुधारू गाय वितरित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के किसानों और ग्रामीण जनों को बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने की एक बड़ी पहल हमने इस वर्ष पंचायती राज दिवस से प्रारंभ की है। प्रदेश के 1460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र खोले गए हैं, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायत भवन में ही बैंकिंग सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि अगले पंचायती राज दिवस तक यह सुविधा प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में उपलब्ध हो जाएगी, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान सहकारिता के क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री सिंह ने किसानों को अल्पकालिक ऋण के लिए भारी-भरकम ब्याज दर से मुक्ति दिलाई और ब्याज दरों को लगातार कम कर किसानों को राहत दी। अब किसानों को कृषि कार्यों के लिए बिना किसी ब्याज के अल्पकालिक ऋण उपलब्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने फरसाबहार में अपेक्स बैंक की नई शाखा खुलने पर क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि अब किसानों को बैंकिंग सुविधा के लिए 50-60 किलोमीटर दूर पत्थलगांव नहीं जाना पड़ेगा। इस पुनीत पहल के लिए उन्होंने सहकारिता विभाग को साधुवाद दिया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में सहकारिता का बीजारोपण करने वाले महान विभूतियों को पुण्य स्मरण करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में श्री वामनराव लाखे और ठाकुर प्यारेलाल जैसे पुरोधाओं ने सहकारिता की नींव रखी, जिसका विकसित स्वरूप आज हम सभी देख रहे हैं। यह वर्ष सहकारिता का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष है, और केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के प्रयासों से निश्चित रूप से इस क्षेत्र में चमत्कारिक परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के अथक प्रयासों से प्रदेश के किसानों के जीवन में खुशहाली आई है। पूरे देश में वे पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने प्रति एकड़ 21 क्विंटल और 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता को राज्य के अंतिम गांव तक पहुंचाने का कार्य किया है। अपेक्स बैंक प्रदेश में 40 हजार करोड़ रुपए के टर्नओवर के साथ सबसे शक्तिशाली संगठन है और इसके माध्यम से अब तक 7 हजार 5 सौ करोड़ रुपए का ऋण किसानों को उपलब्ध कराया गया है। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से देश के हर एक नागरिक को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया और इसी का परिणाम है कि आज बिना किसी बिचौलिए के शत-प्रतिशत राशि सीधे हितग्राहियों के खाते में प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में अभी भी अपार संभावनाएं हैं और शत-प्रतिशत किसानों को सहकारिता और अपेक्स बैंक से जोड़ने का काम शीघ्र पूरा करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड ने सत्य साईं हॉस्पिटल को 2.25 करोड़ रुपए की सहायता राशि सौंपी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में कार्यक्रम में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड ने सीएसआर गतिविधियों के तहत राजधानी रायपुर के सत्य साईं हृदय चिकित्सालय को 2.25 करोड़ रुपए की सहायता राशि का चेक सौंपा। मुख्यमंत्री ने इस पुनीत कार्य के लिए मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। पदभार ग्रहण समारोह में सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, विधायक श्री राजेश मूणत, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री सुनील सोनी, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्री सुब्रत साहू और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

पुस्तक केवल पठन नहीं, सोच की नींव होती है : मंत्री टेटवाल

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)श्री गौतम टेटवाल ने राजगढ़ जिले के सारंगपुर जनपद मुख्यालय में विकासखंड स्तरीय पुस्तक मेले का शुभारंभ किया। पुस्तक को बच्चों के हाथों तक पहुंचाने की इस पहल को उन्होंने शिक्षा की दिशा में एक व्यावहारिक, प्रभावी और दूरगामी प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की यात्रा तब सार्थक होती है, जब हर विद्यार्थी को समय पर समुचित संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले। “पुस्तक केवल पढ़ने की वस्तु नहीं होती, यह सोचने की आदत, जीवन की दृष्टि और आत्मविश्वास का आधार बनाती है। हम बच्चों को शुरुआती दौर में यह सुविधा दे पाएं, तो उनका भविष्य सशक्त होगा और समाज भी अधिक सजग बनेगा। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि शिक्षा को सुलभ और गरिमामयी बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, और इस प्रकार के आयोजन इसी दिशा में सार्थक कदम हैं। जनपद शिक्षा केंद्र एवं समग्र शिक्षा अभियान सारंगपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पुस्तक मेले का मुख्य उद्देश्य अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों, गणवेश, स्टेशनरी एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री को किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक एवं स्कूल प्रतिनिधि शामिल हुए। बच्चों में किताबें स्वयं चुनने का उत्साह देखा गया, तो वहीं शिक्षकों ने इस पहल को शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने वाला बताया। कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी पसंद की किताबें खरीदीं और पहली बार शिक्षा को अपनी पसंद के रूप में अपनाने का अनुभव किया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इतिहास और सौंदर्य का संगम बन रहा है मध्यप्रदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी और प्रेरक नेतृत्व में मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध विरासत को सँजोते हुए देश और दुनिया के एक अनुपम पर्यटन राज्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री की परिकल्पना एक ऐसे मध्य प्रदेश की है जहाँ आधुनिकता और प्राचीनता का सामंजस्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दे। मध्यप्रदेश देश का एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है, जहाँ धरती से निकलने वाले चमकदार और बेशकीमती रत्नों की तरह ही, यहाँ के रमणीय स्थल भी अपनी आभा बिखेरते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से प्रदेश का हर कोना इतिहास के अलग-अलग कालखंडों को दर्शाता एक विशाल संग्रहालय प्रतीत होता है। मध्यप्रदेश यानि भव्य किले, उत्कृष्ट नक्काशीदार मंदिर, प्राचीन शैल चित्र और अद्भुत स्मारक एक गौरवपूर्ण अतीत की जीवंत कहानी कहते हैं। मुख्यमंत्री का प्रयास है कि मध्यप्रदेश न केवल अपनी अमूल्य धरोहरों को संरक्षित करे, बल्कि उन्हें विश्व पटल पर एक अद्वितीय पहचान दिलाए, जिससे हर पर्यटक यहाँ आकर अपनी आत्मा को सुकून और ज्ञान से परिपूर्ण कर पाए। मध्यप्रदेश जहाँ हर 100 किलोमीटर से भी कम की यात्रा में पुरातात्विक चमत्कारों और प्राचीन इमारतों के बीच आप अपने आपको पाते हैं। यहाँ का हर स्थान इतिहास के अलग-अलग काल को दर्शाने वाला एक विशाल संग्रहालय जैसा है। यहाँ मौजूद भव्य किले, नक्काशीदार मंदिर, ऐतिहासिक शैल चित्र और अद्भुत स्मारक एक गौरवपूर्ण इतिहास की कथा कहते हैं। “यूनेस्को की विश्व धरोहर” मध्यप्रदेश के खजुराहो की अलौकिक मूर्तियाँ, सांची का शांति स्तूप और भीमबेटका की ऐतिहासिक कलाकृतियाँ यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थायी सूची में सम्मिलित हैं। इन धरोहरों के अतिरिक्त 18 अन्य पर्यटन स्थल भी यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल होने के साथ अब यात्रियों को आकर्षित करने के लिए तैयार हैं। मध्यप्रदेश अपने मूल मंत्र “अतिथि देवो भव” को गर्व से अपनाते हुए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश महिलाओं के अनुकूल यात्रा गंतव्य के रूप में भी विशेष स्थान हासिल कर चुका है, जो एकल और समूह यात्रियों के लिए समान रूप से आरामदायक और सुरक्षित अनुभव प्रदान करता है। यहाँ आने वाले यात्री प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों की उन कहानियों के साक्षी बनेंगे, जो हजारों वर्षों पुराने इतिहास को बयां करती हैं और जो उनको दुनिया की हलचल से दूर सुकून के पलों का आनंद देने के लिए पर्याप्त हैं। अतीत की कहानियों से रूबरू कराता ग्वालियर कल्पना कीजिए एक ऐसे भव्य शहर की, जो देश के बाकी हिस्सों से आवागमन के लिए अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, जिसका राजसी किला सुनहरी धूप में किसी मोती की तरह चमकता है। यहाँ का हर पत्थर एक कहानी सुनाता है, हर गली सदियों पहले के राजाओं, कवियों और यात्रियों के पदचिह्नों की गूँज से भरी हुई है। यह वही शहर है, जो गणित में शून्य के पहले लिखित प्रमाण का संरक्षक भी है। यह शहर है ग्वालियर, जो अपने शाही गलियारों में आपका स्वागत करने के लिए आतुर है। मांडू – एक बीते युग के किस्से प्रदेश में मौजूद एक अन्य ऐतिहासिक शहर, जहाँ छठी शताब्दी ईसा पूर्व के भव्य स्मारक और नाजुक महल, शाही प्रेम कहानियों, चाँदनी रातों के गीतों और प्रेम-स्नेह के उन प्रेरणाओं को संजोए हुए हैं, जिन्होंने कवियों और सपने देखने वालों को प्रेरित किया। यही वह स्थान है, जहाँ ताजमहल निर्माण की कल्पना ने जन्म लिया। मनमोहक मांडू भी पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। चंदेरी – छिपे रहस्यों को उजागर करते स्थल चंदेरी एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है, जहाँ ज़मीन के नीचे भी चमत्कार छिपे हुए हैं। यहाँ की प्राचीन बावड़ियाँ, जिनकी अद्भुत समरूपता और भूलभुलैया जैसी सीढ़ियाँ पर्यटकों को एक रहस्यमयी दुनिया में ले जाती हैं। यहां की बावड़ियां केवल कहानी ही नहीं सुनाती लोककथा भी कहती है जिनके अनुसार जब तक महासागरों में पानी रहेगा, तब तक ये बावड़ियाँ नहीं सूखेंगी। चंदेरी के किले और बावड़ियाँ पर्यटकों के इंतज़ार में हैं। ठंडी फुहारों का आनंद – जबलपुर एक रोमांचक अनुभव के लिए प्रसिद्ध शहर, जहाँ सफेद संगमरमर की ऊँची चट्टानों के बीच नाव की सवारी करते हुए पर्यटक सूरज की रोशनी में चमकते पानी और झरनों की गूँजती ध्वनि का अनुभव कर सकते हैं। यहाँ नर्मदा नदी में चप्पुओं की लयबद्ध आवाज़ और ठंडी फुहारों का आनंद लेने के लिए पर्यटकों के स्वागत के लिए जबलपुर तैयार है।  धामनार – अखंड गुफाओं की कहानियां एक ऐसा स्थान, जहाँ पत्थर की उत्कृष्ट कारीगरी और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ 5वीं-7वीं शताब्दी की कलात्मक और आध्यात्मिक उत्कृष्टता का प्रमाण स्वरूप पहाड़ी में उकेरी गई 51 से अधिक अखंड गुफाएँ मौजूद हैं। गुफाओं के भव्य दरवाजे, ऊँचे पत्थर के स्तंभ और जटिल मूर्तिकला शांति की अनुभूति कराते हैं। धामनार पर्यटकों को बीते युग की यात्रा पर ले जाने के लिए रोज ब रोज तैयार है। बुरहानपुर – एक अद्भुत परंपरा का स्वाद मध्य प्रदेश की यात्रा यहाँ के अद्वितीय स्वादों के अनुभव के बिना अधूरी है! यहाँ की गलियाँ मलाईदार मावा-जलेबी की सुगंध से महकती हैं। यहाँ दाल-चावल की एक साधारण थाली को भी पीली मिर्च के साथ परोसा जाता है और इसके साथ मिलने वाली जंगल के फूलों से बनी तीखी, सुगंधित महुआ चटनी इसका स्वाद और भी अनूठा बना देती है। बुरहानपुर पर्यटकों को ऐसे ही लज़ीज़ व्यंजनों से भरपूर दावत का हर समय अनुभव कराने के लिए तैयार है। मंडला – राजाओं और रानियों की विरासत की दास्तान एक ऐसा शहर, जो चार शताब्दियों तक राजसी रानियों, वीर राजाओं और शक्तिशाली साम्राज्यों का साक्षी रहा है। यहाँ तलवारों की टकराहट और दरबारी फुसफुसाहटें आज भी गलियों में गूँजती सी लगती हैं। 

नगरीय आपदाओं की रोकथाम के लिये नियंत्रण कक्ष

भोपाल आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोंडवे के निर्देश पर वर्षा ऋतु में प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में जल-भराव, बाढ़, जर्जर भवनों के गिरने जैसी संभावित आपदाओं से निपटने के लिये भोपाल में राज्य स्तर पर आपदा नियंत्रण कक्ष की स्थापना की है। नियंत्रण कक्ष के संचालन एवं समन्वय के लिये एक विशेष दल का गठन किया गया है, जिसमें कार्यपालन यंत्री श्री उपदेश शर्मा, सहायक यंत्री श्री सुनील श्रीवास्तव सहित कुल 8 अधिकारी-कर्मचारी पदस्थ किये गये हैं। यह दल प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों में जर्जर एवं क्षतिग्रस्त भवनों को चिन्हित करने और संबंधित नगरीय निकायों के बीच कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। राज्य स्तरीय आपदा नियंत्रण कक्ष बाढ़ अथवा जल-भराव की स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों के विस्थापन, मूलभूत सुविधाओं जैसी उपलब्धता के लिए समन्वय भी सुनिश्चित करेगा। नियंत्रण कक्ष मौसम कार्यालय से समन्वय कर पूर्व सूचना प्राप्त करेगा तथा संभावित रूप से प्रभावित नगरीय निकायों को अलर्ट भी जारी करेगा।  

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