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किसानों को लाभ पहुंचाने वाली योजना पास: 1 लाख सोलर पंप और 25 हजार करोड़ रुपये का ऋण प्रावधान, आबकारी नीति को हरी झंडी

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार आज विधानसभा में ₹4.65 लाख करोड़ का ऐतिहासिक बजट पेश कर रही है। क्या युवाओं को मिलेगी पक्की नौकरी? क्या किसानों और महिलाओं के लिए खुलेगा सरकारी खजाना? विकास की सौगात से लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश तक, बजट की हर बड़ी घोषणा और उसका आपकी जेब पर होने वाला सीधा असर देखिए हमारे इस लाइव ब्लॉग में। विधानसभा से हर पल की सटीक और सबसे तेज अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें। जन धन योजना: 4.61 करोड़ खातों के साथ वित्तीय समावेशन वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में अब तक 4 करोड़ 61 लाख खाते खोले जा चुके हैं। इसने बैंकिंग सेवाओं को गरीब से गरीब व्यक्ति तक पहुंचाने का काम किया है। श्रम विभाग के लिए 1 हजार 335 करोड़ का प्रावधान- वित्त मंत्री वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा- सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए श्रम विभाग के लिए 1335 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान प्रस्तावित किया है। इस बजट का उद्देश्य मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों और गरीब वर्ग को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत अब तक राज्य में 4 करोड़ 61 लाख से ज्यादा खाते खोले जा चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में अब तक 3 करोड़ 64 लाख लोगों का पंजीयन हो चुका है। इस योजना के तहत दुर्घटना की स्थिति में बीमा सुरक्षा दी जाती है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से भी बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं। इस योजना में अब तक 1 करोड़ 54 लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीयन कराया है, जिससे उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। शिक्षा के लिए खास बजट में शिक्षा के लिए स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। वहीं, छात्रवृत्ति के लिए 986 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों को लिए ये भी     पीएम फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।     सीएम कृषक उन्नति योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।     किसानों को 337 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।     वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया गया है।     6.69 लाख किसानों को 337 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जाएगी।     1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। श्रम विभाग को मिले ₹1335 करोड़, श्रमिकों का होगा कल्याण असंगठित और संगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए श्रम विभाग के बजट में ₹1,335 करोड़ का प्रस्ताव रखा गया है। यह राशि श्रमिकों के कल्याण, उनके अधिकारों की सुरक्षा और विभिन्न सहायता योजनाओं पर खर्च की जाएगी। जनजातीय विकास: 11,277 गांवों के लिए ₹793 करोड़ जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार ने विशेष बजट आवंटित किया है। जनजातीय क्षेत्रों के 11,277 गांवों के विकास के लिए ₹793 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसका सीधा लाभ पिछड़े और दुर्गम क्षेत्रों के निवासियों को मिलेगा। ग्रामीण सड़कों का जाल: ₹21,630 करोड़ की मंजूरी ग्रामीण कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मजरा–टोला सड़क योजना’ के तहत ₹21,630 करोड़ की भारी-भरकम राशि को मंजूरी दी है। इससे प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जा सकेगा। मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए ₹412 करोड़ का फंड नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मत्स्य उत्पादन क्षेत्र में ₹412 करोड़ के निवेश का प्रावधान किया है। इससे न केवल मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में इस सेक्टर की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी। ‘देश का तीसरा युवा प्रदेश’ बनेगा आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की जनसांख्यिकी का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि हम देश के तीसरे सबसे युवा प्रदेश हैं। उन्होंने संकल्प दोहराया कि युवाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार के लिए सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। युवाओं को सशक्त बनाने के लिए बजट में विशेष प्रावधानों का खाका खींचा गया है। सिंहस्थ 2028 के लिए ‘विशेष फंड’ का प्रावधान उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ कुंभ के लिए सरकार ने अभी से तैयारी तेज कर दी है। चूंकि केंद्र सरकार के बजट में इसके लिए अलग से राशि नहीं मिली थी, इसलिए राज्य सरकार ने अपने बजट में सिंहस्थ से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। वित्त मंत्री ने लक्ष्य रखा है कि आयोजन से जुड़े अधिकांश बड़े निर्माण कार्य वित्त वर्ष 2026-27 में ही पूरे कर लिए जाएं। किसान सम्मान निधि और कल्याण योजना से ₹12,000 की मदद वित्त मंत्री ने खेती को लाभ का धंधा बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में किसान परिवारों को ‘किसान सम्मान निधि’ और ‘मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना’ के संयोजन से प्रति वर्ष कुल ₹12,000 की नकद सहायता दी जा रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को खाद-बीज की खरीद में सीधी मदद मिल रही है। सोयाबीन के लिए किसानों को करोड़ों का भुगतान जगदीश देवड़ा ने कहा, ”मध्य प्रदेश देश का तीसरा सबसे युवा प्रदेश है. मध्य प्रदेश में युवाओं की बड़ी संख्या है. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारी सरकार जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रस्थान तथा पोस्ट हार्वेस्ट कार्रवाई प्रबंधन जैसी गतिविधियों द्वारा कृषि कार्य के प्रत्येक चरण में किसानों के साथ हमारी सरकार खड़ी है. इसके साथ ही किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान सम्मन निधि तथा शून्य ब्याज पर कृषि दिन जैसी आर्थिक समर्थन की योजनाएं भी प्रचलित है कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए सिंचाई की आवश्यकता सर्वोपरि है. किसानों को स्थाई सिंचाई पंप कनेक्शन की योजना अंतर्गत 125000 ट्रांसफार्मर स्थापित है. सिंचाई के लिए ऊर्जा की निर्माण आपूर्ति के सुधार करने के लिए प्रधानमंत्री कृषक सूर्यमित्र योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में रुपए 3000 करोड़ की लागत से 11 सोलर सिंचाई पंप किसानों को उपलब्ध कराया जाना लक्षण है. हमारी सरकार किसानों के लिए कृषि उद्यानिकी पशुपालन तथा मत्स्य पालन आदि को मूल्य संवर्धन से जोड़कर … Read more

आर्थिक समीक्षा में अभ्युदय मध्य प्रदेश का विकसित भारत संकल्प

आर्थिक समीक्षा में अभ्युदय मध्य प्रदेश का विकसित भारत संकल्प  लेखक सत्येंद्र जैन,आर्थिक चिंतक। मध्यप्रदेश की विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु आर्थिक समीक्षा उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत की गयी है।आर्थिक समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की दूरदर्शी आर्थिक नीतियों, कार्यक्रमों का समावेश किया गया है।इन दूरदर्शी आर्थिक नीतियों द्वारा संतुलित और समावेशी विकास का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।डॉ मोहन यादव के अभ्युदय मध्यप्रदेश का उदय हो रहा है। भारत के भागीरथी,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल एवं योग्य मार्गदर्शन में भारत को विश्व की सबसे सशक्त अर्थव्यवस्था निर्मित करने हेतु मध्यप्रदेश सर्वस्व अर्पण के भाव से योगदान दे रहा है।यही कारण है कि मप्र का भारत की जीडीपी में योगदान लगभग 3.25 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 5.8 प्रतिशत हो गया है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने आर्थिक समृद्धि के अनेक कदम उठाये हैं।इसके सुखद परिणाम मिलना आरंभ हो गये हैं। वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद GSDP प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रूपये अनुमानित है।पिछले वर्ष 2024-25 के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार स्थिर भाव वर्ष 2011-12 के सापेक्ष जीएसडीपी 7,81,911 करोड़ रूपये अनुमानित है,।जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को प्रतिबिंबित करता है। आर्थिक विस्तार केवल मूल्य वृद्धि का परिणाम नहीं,अपितु वास्तविक उत्पादन और गतिविधियों में वृद्धि का परिणाम है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2011-12 में प्रचलित भाव पर 38,497 रूपये रही प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,69,050 रूपये हो गई है। यह आय स्तर में सुधार का परिचायक है, जो जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन को रेखांकित करता है।वर्ष 2025-26 में प्रचलित भाव पर सकल राज्य मूल्य वर्धन जीएसवीए में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत रहा। इससे प्रकट होता है कि कृषि आधारित आधार को मजबूती देते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग और सेवा क्षेत्रों में भी संतुलित विस्तार हुआ है। प्राथमिक क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रूपये रहा, जो पिछले वर्ष के 6,33,532 करोड़ रूपये की तुलना में 7.31 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इस क्षेत्र में फसलें 30.17 प्रतिशत भागीदारी के साथ प्रमुख घटक रहीं। पशुधन, वानिकी, खनन एवं उत्खनन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कृषि एवं ग्रामीण विकास के मोर्चे पर वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। उद्यानिकी क्षेत्रफल 28.39 लाख हेक्टेयर रहा है।दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा है। गांवों की समृद्धि के लिए 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवासों के निर्मित होने से ग्रामीण आधार सशक्त हुआ है। द्वितीयक क्षेत्र का कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन- GSVA वर्ष 2025-26 में 3,12,350 करोड़ रूपये रहा, जो 9.93 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। निर्माण, विनिर्माण तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाओं का प्रमुख योगदान है। औद्योगिक विकास के अंतर्गत 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार के अवसरों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही। तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज गति से वृद्धि की है। वर्ष 2025-26 में इसका कुल GSVA 5,85,588 करोड़ रूपये रहा, जो 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, लोक प्रशासन तथा अन्य सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा है। पर्यटन क्षेत्र में 13.18 करोड़ पर्यटकों के आगमन से पर्यटन क्षेत्र में तीव्रता आई है। वर्ष 2025-26 में 618 करोड़ रूपये राजस्व आधिक्य, अनुमानित कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि तथा ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत का होना मध्यप्रदेश के वित्तीय अनुशासन में निरंतर सुधार को प्रकट करता है। नगरीय विकास के अंतर्गत अमृत 2.0 में 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन और 1,134 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण हुए तथा स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को 8 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल व्यय 34,112 करोड़ रुपये रहा।यह GSDP का 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए और वर्ष 2001-03 के सापेक्ष मातृ मृत्यु दर 379 से घटकर वर्ष 2021-23 में 142 प्रति लाख हो गई। शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य रही और कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई। 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है। महाराजा विक्रमादित्य की भाँति कुशल प्रशासक ,मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अखंड प्रचण्ड पुरुषार्थ करते हुए अर्थव्यवस्था को सशक्त कर रहे हैं। महानतम अर्थशास्त्री चाणक्य के अनुसार- तस्मान्नित्योत्थितो राजा कुर्यादर्थानुशासनम् । अर्थस्य मूलमुत्थानमनर्थस्य विपर्ययः । अर्थात राजा प्रतिदिन उद्यमशील होकर शासन करे । अर्थ अनुशासन करे।अर्थ मूल को संवर्धित करे। चाणक्य के इस मंत्र को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अभ्युदय मध्य प्रदेश की रचना कर रहे हैं।अभ्युदय मध्य प्रदेश के सर्वागीण विकास द्वारा विकसित  भारत 2047 का संकल्प स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रहा है, झलक रहा है। इति श्री।

भोपाल मेट्रो बजट अपडेट: 2 रूटों पर फंडिंग की उम्मीद, पिछले बजट में मिली 41 सड़कें याद दिलाईं

भोपाल भोपाल में मेट्रो के 2 रूट पर काम चल रहा है। ऑरेंज लाइन के फेज-2 का रूट सुभाषनगर से करोंद के बीच है, जबकि ब्लू लाइन भदभदा से रत्नागिरी तक गुजरेगी। इन दोनों रूट के लिए बजट का प्रावधान हो सकता है। पिछले बजट में भोपाल को 425 करोड़ रुपए मिले थे। बजट से कई सड़कों के निर्माण को लेकर भी बजट मिलने की उम्मीद है। पिछली बार 41 सड़कें और 3 फ्लाईओवर मंजूर किए गए थे। वहीं, शहर के लगभग हर इलाके और ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के निर्माण के लिए टोकन राशि बजट में रखी गई थी। इनकी अनुमानित लागत 447.21 करोड़ रुपए थी। पिछले बजट में शैतान सिंह तिराहे से कोलार मेन रोड को जोड़ने वाली सड़क और बावड़िया के प्रस्तावित नए आरओबी की एप्रोच रोड बनाने का प्रावधान था। हालांकि, एक साल में यह काम नहीं हो सका है। बजट से भोपाल में खेल और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों को लेकर भी उम्मीदें हैं। पिछले बजटों में इन दोनों ही विभागों को लेकर बजट मिला था।

उत्सव की तरह मनाया जायेगा रामकृष्ण परमहंस जी का जन्मदिन।

Ramakrishna Paramhansa’s birthday will be celebrated like a festival. हरिप्रसाद गोहे आमला। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ग्राम ससाबड़ स्थित महाकाली दरबार में जगतमाता महाकाली के परम भक्त श्री रामकृष्ण परमहंस जी का जन्मोत्सव 19 फरवरी 2026 को धूमधाम से उत्सव की तरह मनाया जाएगा।आयोजन को लेकर मंदिर समिति ने सभी तैयारियां भी पूरी कर ली है कल सुबह महाकाली की पूजा अर्चना के साथ कार्यक्रम विधिवत् शुभारंभ होगा जो देर शाम तक चलता रहेगा। मंदिर समिति प्रमुख कमल मालवीय ने बताया इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणजनों को प्रसाद वितरित किया जाएगा। वहीं भजन-कीर्तन एवं धार्मिक संगीतमय कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा। मंदिर समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।

एमपी बजट 2026: वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा करेंगे पेश, CM बोले—राज्य में होगा अनोखा बदलाव

भोपाल   मध्य प्रदेश विधानसभा में आज बुधवार, 18 फरवरी को बजट 2026 (Madhya Pradesh Budget 2026) पेश किया जाएगा. राज्य के वित्त मंत्री वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा आज सुबह 11 बजे विधानसभा के पटल पर बजट पेश करेंगे. अगले साल 2027 के पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए इस बार का बजट कई मायनों में अहम माना जा रहा है. सरकार आज बजट में महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती हैं. इसके अलावा कुछ नई विकास योजनाओं की भी घोषणा की जा सकती हैं.  विधानसभा में बजट पेश होने से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक होगी, जिसमें इस बजट का मंजूरी दी जाएगी. इस बार का बजट एमपी सरकार का सबसे बड़ा बजट हो सकता है. ये बजट मोहन सरकार के कार्यकाल का तीसरा बजट होगा.  किसानों से महिलाओं तक… मोहन सरकार कर सकती है बड़ी घोषणाएं माना जा रहा है कि सरकार इसमें महिलाओं को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती हैं. इसके अलावा किसानों को लेकर भी अहम वादे कर सकती हैं. बजट में किसानों के लिए अलग से कुछ प्रावधान किए जा सकते हैं.  इस बजट में ‘सीएम केयर’ योजना से सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार, स्टेट कार्डियक सेंटर, अंग प्रत्यारोपण संस्थान, मेडिकल कॉलेजों में कैंसर और हार्ट सुपर, 1.40 करोड़ बच्चों को मिलेगा टेट्रा पैक दूध, युवाओं के लिए 50 हजार नई भर्तियों की तैयारी में हैं. कर्ज को लेकर क्या बोले वित्त मंत्री देवड़ा वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने आगे कहा कि महंगाई को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों गंभीर हैं. बजट से सभी लोगों को राहत मिलेगी. देवड़ा ने बताया कि एमपी में कर्ज नहीं निवेश है. पूंजीगत कार्यों के लिए कर्ज लिया जाता है. ऐसा कोई प्रदेश नहीं है, जिसने कर्ज लेकर काम नहीं किया हो. हम समय पर ब्याज देते हैं और कर्ज चुकाते हैं. कर्ज लिमिट में है. कांग्रेस सरकार ने कर्ज लेकर वेतन भत्ते में खर्च किया, जबकि बीजेपी की सरकार ने पूंजीगत व्यय में खर्च किया. वित्त मंत्री देवड़ा ने आगे कहा कि पहले जीरो बजटिंग के हिसाब से बजट था. अब रोलिंग बजट के हिसाब से हमने प्रयोग किया है. बजट के जरिए 3 साल आगे तक का रोडमैप तैयार किया है, जिसका वित्तीय प्रबंधन में लाभ मिलेगा. कैबिनेट में आज नई आबकारी नीति (MP New Excise Policy) आ सकती है. आगामी बजट पूरी तरह जनता को समर्पित: देवड़ा वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश का आगामी बजट पूरी तरह जनता को समर्पित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बजट “जनता का और जनता के लिए” होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने बजट में चार प्रमुख वर्गों महिला, युवा, किसान और गरीब पर विशेष फोकस किया है। इन वर्गों के सशक्तिकरण और विकास के लिए ठोस प्रावधान किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष को सरकार ने ‘उद्योग वर्ष’ के रूप में मनाया था, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया और निवेश को बढ़ावा मिला। वहीं इस वर्ष को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की पूरी कोशिश है कि किसान आत्मनिर्भर बनें और उनकी आय में वृद्धि हो। बजट में इस दिशा में विशेष ध्यान रखा गया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि बजट निर्माण प्रक्रिया में आम जनता से मिले सुझावों को भी शामिल किया गया है, ताकि यह बजट अधिक सहभागी और जनहितकारी बन सके। सीएम बोले- अनूठा नवाचार करने जा रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्य प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य होगा, जो अनूठा नवाचार करने जा रहा है। हमारे इस बजट में अगले 3 साल का खाका होगा, जिसमें इस वर्ष के विस्तृत बजट के साथ अगले 2 साल की विकास योजनाओं की आउटलाइन भी शामिल रहेगी। नेता प्रतिपक्ष बोले- बजट जमीनी हकीकत से दूर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- बजट में प्रदेश को नई सौगात नहीं मिलने वाली। बेहतर बजट वो होता है, जो आम जनता को लाभ पहुंचाए। यह जमीनी हकीकत से दूर का बजट है। बीजेपी की सपने दिखाने की आदत है। बजट एससी-एसटी, किसान, ओबीसी किसी के पक्ष में नहीं है। जो पुरानी योजनाएं चल रही हैं, उन्हीं को नए आंकड़ों के साथ लाएंगे। किसान की आय दोगुनी नहीं कर सकते। किसान को काम नहीं देना चाहते और किसानों का वर्ष मना रहे हैं।  

पुलिस विभाग में हलचल, लंबे समय से तैनात अफसरों के तबादले की संभावना बढ़ी

इंदौर मध्य प्रदेश में विधानसभा का बजट सैशन चल रहा है और सदन में बीजेपी-कांग्रेस के बीच जबरदस्त घमासान देखा जा रहा है । वहीं दूसरी ओर अब एक हलचल पुलिस महकमे में मचने वाली है। जानकारी के मुताबिक जल्द ही प्रशासनिक फेरबदल किए जाने के संकेत है। दरअसल लंबे समय से एक ही जगह सेवाएं दे रहे  पुलिस अफसरों के तबादले को लेकर आहट तेज हो गई है। बहुत जल्द ये तबादला सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है। इस सूची में इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के साथ ही पास के  जिलों के कई अधिकारियों को बदलाव सहन करना पडेगा । क्यों होने जा रहा  है प्रशासनिक फेरबदल? इस प्रशासनिक फेरबदल के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं । जानकारी के मुताबिक, कानून-व्यवस्था, अपराध में सुधार लाने के साथ ही  पुलिस को जवाबदेह बनाने के मकसद से  पुलिस महकमे में बदलाव का मसौदा तैयार कर लिया गया है। बदलाव बडे स्तर पर होगा जिसमें एसपी से लेकर डीआइजी स्तर तक के अधिकारी होगें। इसके साथ ही निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को यहां से वहां किए जाने की खबर है। कब तक है ये फेरबदल संभव? जानकारी है कि अभी बजट सत्र चल रहा है लेकिन फरवरी के लास्ट हफ्ते तक  प्रशासनिक सर्जरी की पूरी संभावना है। इस प्रशासनिक सर्जरी के तहत आइपीएस और डीआइजी स्तर के करीब 2 दर्जन अधिकारी प्रभावित होंगे। वहीं दूसरे ओर  लंबे समय से एक ही जिले और थाने में चिपके बैठे अधिकारियों पर भी नजर है।  गृह विभाग ने इस संबंध में समीक्षा कर ली है। गृह विभाग द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के सुझाव और दिशा-निर्देशों पर चर्चा के बाद सूची फाइनल हो जाएगी। वहीं इंदौर डीआरपी लाइन में निरीक्षक स्तर के करीब 1 दर्जन पुलिस अधिकारी थाना मिलने के इंतजार में हैं। वहीं जानकारी के मुताबिक पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने, असंतोषजनक कार्यशैली, विभागीय जांच जैसे कई  बिंदुओं का आकलन किया गया है।  

नौकरी की आस पर लगा ब्रेक, 900 अतिथि शिक्षकों को आरक्षण का लाभ नहीं

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी आइटीआई संस्थानों में लंबे समय से कार्यरत लगभग 900 अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं। विभाग ने 1120 प्रशिक्षण अधिकारी (टीओ) पदों पर भर्ती निकली है, इस सीधी नियमित भर्ती में उन्हें न आरक्षण मिला, न अनुभव का लाभ और न ही आयु सीमा में छूट दी गई है। इन शिक्षकों में कई ऐसे हैं जो 10 से 15 वर्षों से न्यूनतम मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब विभाग में नियमित स्टाफ की कमी थी, तब उन्होंने संस्थानों को संभाला। अब जब स्थायी नियुक्ति का अवसर आया, तो उन्हें सामान्य अभ्यर्थियों की तरह प्रतिस्पर्धा में खड़ा कर दिया गया है। अलग नीति अपना रही सरकार कई शिक्षक आयु सीमा पार करने की स्थिति में हैं, जिससे उनकी नौकरी की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है। अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि सरकार अन्य विभागों में अलग नीति अपना रही है। स्कूल शिक्षा विभाग में अतिथि शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जबकि उच्च शिक्षा में 25 प्रतिशत आरक्षण और अनुभव के अंक का प्रावधान है। लेकिन आईटीआई अतिथि शिक्षकों को ऐसा कोई लाभ नहीं मिला। तत्कालीन मंत्री यशोधरा राजे ङ्क्षसधिया के समय प्रस्तावित ‘संविदा नीति’ आज तक लागू नहीं हो सकी। वर्तमान मंत्री गौतम टेटवाल से भी संगठन कई बार मिल चुका है। उच्च शिक्षा विभाग में भी यही हाल इधर उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेज में कार्यरत अतिथि विद्वानों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। जिन कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति हो रही है उनसे अतिथि विद्वानों को बाहर कर दिया गया है। जबकि उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किसी भी अतिथि विद्वान को बाहर न करने की घोषणा की थी हरियाणा मॉडल पर नियम तैयार कर इनको नियमित करने की बात भी कही गई थी। स्थिति यह है कि अब तक 100 से अधिक अतिथि विद्वान सेवा से बाहर हो चुके हैं लेकिन अन्य कॉलेजों में नियुक्ति नहीं दी गई।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नई पहल, 4100 कुओं पर मुंडेर बनाए जाएंगे, जानवरों की सुरक्षा को दिया जोर

उमरिया उमरिया स्थित विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन और टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने रिजर्व क्षेत्र के नौ परिक्षेत्रों में लगभग 4,100 खुले कुओं पर मुंडेर (सुरक्षा दीवार) बनाने का काम की शुरुआत हो गई है।  वन क्षेत्र और उससे सटे ग्रामीण इलाकों में स्थित इन खुले कुओं में अक्सर जंगली जानवर और कभी-कभी ग्रामीण भी गिर जाते हैं। धमोखर परिक्षेत्र सहित कई इलाकों से ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल ही में जनवरी माह में धमोखर के रायपुर क्षेत्र में एक बाघ के कुएं में गिरने से मौत हो गई थी, जिसके बाद इस अभियान को और तेज किया गया। टाइगर रिजर्व के कोर और बफर दोनों क्षेत्रों में चिन्हित कुओं पर मुंडेर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें गांव-गांव जाकर बिना मुंडेर वाले कुओं का सर्वे कर रही हैं और प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य करा रही हैं। वन्यजीव फोटोग्राफर चेतन घारपुरे ने इस पहल को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि बिना मुंडेर वाले कुओं में वन्य प्राणियों के साथ-साथ ग्रामीणों के गिरने का भी खतरा बना रहता है। कुओं पर मजबूत मुंडेर बनने से वन्यजीव और मानव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। जिला प्रशासन और टाइगर रिजर्व प्रबंधन का लक्ष्य है कि चिन्हित सभी कुओं पर चरणबद्ध तरीके से मुंडेर निर्माण पूरा कर पूरे क्षेत्र को वन्यजीवों और स्थानीय निवासियों के लिए सुरक्षित बनाया जाए।

पीएचडी एडमिशन और प्रोसेस में पारदर्शिता, सभी यूनिवर्सिटी को अनिवार्य रूप से कैलेंडर जारी करने का निर्देश

भोपाल   अब हर विश्वविद्यालय को यूजी-पीजी की तरह पीएचडी कैलेंडर भी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा। इसका उद्देश्य है प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और छात्रों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना। अब तक स्थिति यह थी कि कई विश्वविद्यालय पीएचडी की तारीखें, सीटों की संख्या और पात्रता शर्तें सार्वजनिक नहीं करते थे। कई बार सीटें होते हुए भी यह बताया जाता था कि उम्मीदवार नहीं मिले। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने यूजीपीजी की पीएचडी की जानकारी भी वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ विश्वविद्यालयों में पसंदीदा अभ्यर्थियों के लिए रास्ता आसान करने के आरोप भी लगते रहे हैं। जब प्रवेश प्रक्रिया की स्पष्ट समय-सीमा नहीं होती, तो इंटरव्यू, वेटेज और पात्रता के नियम भी मनमाने ढंग से लागू किए जाते थे। यही कारण है कि कई सरकारी विश्वविद्यालयों में पीएचडी सीटें खाली रह जाती हैं। कई विषयों में आधी से ज्यादा सीटें खाली बीयू में करीब 40 विषयों में पीएचडी की कुल 2,379 सीटें हैं। जुलाई में शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया के दौरान केवल नेट स्कोर को पात्र मानने की वजह से कई विषय में आधी से अधिक सीटें खाली रह गईं हैं। इसके लिए बीयू ने नवंबर में एक बार फिर अभ्यर्थियों को मौका दिया, लेकिन एंट्रेंस टेस्ट नहीं लिया। इस बार भी नेट क्वालिफाई को ही मौका दिया गया। स्थिति यह है कि किस विषय में कितनी सीटें खाली हैं स्थिति क्या है। यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। पीएचडी में नहीं चलेगा AI से कॉपी-पेस्ट! पीएचडी करने वाले स्टूडेंट्स को जानकारी के लिए बता दें कि बीते दिनों पहले यूनियन ग्रांट कमीशन (UGC) ने कई रिसर्च थीसिस को वापस किया है जिनमें AI से लिखा गया कंटेंट पाया गया। बिहार की एक यूनिवर्सिटी से दर्जनों छात्रों की पीएचडी थीसिस यूजीसी को भेजी थी, जिनमें ये गड़बड़ियां पाईं गई। यूनिवर्सिटी से भेजी गई रिसर्च थीसिस में यूजीसी के चेक करने पर 40 प्रतिशत से ज्यादा कंटेंट चोरी का पाया गया। यूजीसी ने इसको वापस कर दिया है। बताया गया है कि सबसे ज्यादा इंग्लिश भाषा में सबमिट हुई थीसिस में एआई कंटेंट पाया गया है। हिंदी में जमा की गईं थीसिस में ज्यादा गड़बड़ी नहीं पाई गईं हैं।

गोरखपुर में धूमधाम से संपन्न हुई भव्य “शिव बारात”, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

The grand “Shiv Baraat” concluded with great pomp in Gorakhpur, thousands of devotees took blessings. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव / कैमरामैन अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर। गोरखपुर स्थित श्री शिव शक्ति महाकाल खाटू श्याम मंदिर में चार दिवसीय भव्य “शिव बारात” कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो गया। 13 से 16 फरवरी 2026 तक चले इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम की शुरुआत संगीत एवं ढोल-डीजे के साथ हुई, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। 14 फरवरी को आयोजित हल्दी समारोह में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भाग लिया। 15 फरवरी को शाम 6 बजे निकली शिव बारात मुख्य आकर्षण रही। भगवान शिव की आकर्षक झांकी, भव्य साज-सज्जा और भक्तों के जयकारों से पूरा गोरखपुर क्षेत्र गूंज उठा। 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे चुनरी चढ़ाने की रस्म संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने श्रद्धा पूर्वक भाग लिया। इसके बाद दोपहर 3 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने बताया कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्थानीय नागरिकों और स्वयंसेवकों का विशेष सहयोग रहा। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे ही धार्मिक आयोजनों के सफल आयोजन का संकल्प दोहराया।

जलवायु मुद्दों पर मुंबई में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अहम भूमिका

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन द्वारा 17 से 19 फरवरी 2026 तक आयोजित मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में राज्य की सतत, स्केलेबल एवं निवेश-अनुकूल नवकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा भंडारण संबंधी नवाचारों का प्रेजेंटेशन किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 फरवरी 2026 को सायं 6:30 बजे से 8:10 बजे तक मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित होटल सोफिटेल में विशेष आयोजन में प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण रोडमैप पर केंद्रित प्रेजेंटेशंस का नेतृत्व करेंगे। ‘मुंबई क्लाइमेट वीक 2026’ का आयोजन भारत में जलवायु संबंधी कार्यवाहियों को गति देने के लिये एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय मंच के रूप किया जा रहा है। इस मंच पर राज्यों की जलवायु संबंधी नवाचारों के प्रस्तुतिकरण के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और जलवायु संबंधी बेसिक इको सिस्टम पर हितधारकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद किया जायेगा। देश-विदेश के नीति-निर्माता, अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ, निवेशक एवं क्लाइमेट क्षेत्र से जुड़े प्रैक्टिशनर भाग लेंगे। यह आयोजन राज्य को हरित ऊर्जा निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में म.प्र. सरकार के प्रेजेंटेशन से यह प्रदर्शित किया जायेगा कि प्रदेश ग्रीन एनर्जी की सुलभता, विश्वसनीयता और निवेश प्रतिस्पर्धा के साथ सतत विकास की दिशा में अग्रसर है।  

रसोई तक पहुंचा जहर: एमपी में मिलावटी मसालों का भंडाफोड़, ऐसे हो रहा है खिलवाड़

ग्वालियर आज के दौर में  खाद्य पदार्थों में जो मिलावटी जहर मिलाकर बेचा जा रहा है वो किसी से छिपा नहीं है।  मिटावटी चीजें खाने से ही लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है और कई तरह की बीमारियां भी लग रही हैं। मिलावट का ये धंधे थमने का नाम नहीं ले रहा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जो खाद्य विभाग ने कार्रवाई की है वो रौंगटे खड़े करने वाली है। साबुत हल्दी, साबुत लाल मिर्च, साबुत धनिया में भूसी (चौकर) और लकड़ी का बुरादा मिलाकर लोगो की सेहत के साथ मजाक किया जा रहा है। हॉस्पिटल रोड पर स्थित एक मसाला पिसाई चक्की पर टीम ने कार्रवाई की है मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले मे खाद्य विभाग ने मिलावट के संदेह पर बड़ी कार्रवाई की है। मसाला पिसाई केंद्र पर जांच के दौरान लकड़ी का बुरादा मिलने से हड़कंप मच गया। खाद्य विभाग की टीम ने गरम मसाले और अन्य मसालों के नमूने जांच के लिए भेजे हैं और मौके से करीब 30 हजार 700 रुपये कीमत का मसाला जब्त किया गया है। लोगो के स्वास्थ्य से किया जा रहा खिलवाड़ आम जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। जांच में धनिया, हल्दी, लाल मिर्च और गरम मसाले के साथ चौकर और लकड़ी का बुरादा भी पाया गया, जिसे मिलावट के लिए इस्तेमाल किए जाने का संदेह है। निरीक्षण के दौरान जो सामने आया, उसने टीम भी चौंक गई।  परिसर में ही साबुत हल्दी, साबुत लाल मिर्च, साबुत धनिया और तैयार धनिया पाउडर के साथ गरम मसाला पाउडर और भूसी (चौकर) और लकड़ी का बुरादा भी पाया गया है। जांच में सामने आया कि, भूसी और लकड़ी के बुरादे का इस्तेमा धनिया पाउडर में मिलावट के लिए किया जा रहा था। भूसी और लकड़ी का बुरादा मिलाकर यहां धनिया बेचा जा रहा था। चक्की को किया गया सील खाद्य विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित पिसाई केंद्र का पंजीयन निरस्त किया जाएगा और नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद टीम ने तत्काल ही मसाला कारोबार बंद करा दिया है। साथ ही, पिसाई केंद्र को सील कर दिया।  

प्रगतिशील किसानों को हितलाभ करेंगे वितरित, उन्नत कृषि तकनीक पर लगेगी प्रदर्शनी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कृषक कल्याण वर्ष के पहले राज्य स्तरीय विशाल एवं भव्य किसान सम्मेलन 18 फरवरी बुधवार को ग्वालियर जिले के ग्राम कुलैथ में शुभारंभ करेंगे। वे 87.86 करोड़ रुपए लागत के 41 विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे। किसान सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर एवं सांसद भी भारत सिंह कुशवाह सहित अन्य अतिथिगण शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उन्नत खेती कर रहे प्रगतिशील किसानों को हितलाभ वितरित करेंगे। कुलैथ में उन्नत कृषि तकनीक पर प्रदर्शनी भी लगेगी। प्रदर्शनी में उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती व पशु नस्ल सुधार को प्रमुखता से शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसान सम्मेलन में लगाई गई कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। इस अवसर पर स्थानीय किसानों की पारंपरिक बैलगाड़ी-दौड़ होगी। साथ ही भगवान कृष्ण आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति भी होगी।

धीरेंद्र शास्त्री बोले- ‘कर्ज का हिसाब बराबर करते हैं’, कुबेरेश्वर धाम में दिया बड़ा बयान

सीहोर धर्म और आस्था की नगरी सीहोर उस समय ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी जब कुबेरेश्वर धाम में चल रही शिव महापुराण कथा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन हुआ। उनके मंच पर पहुंचते ही पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने बागेश्वर सरकार के स्वागत में उत्साह का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। कथा स्थल पर उपस्थित संतों और भक्तों को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने चिरपरिचित चुटीले अंदाज में कहा कि उन्होंने “महाराज जी का कर्ज उतार दिया है।’ उनका इशारा कुबेरेश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा की ओर था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा महाराज जी बागेश्वर धाम आए थे, अब हम यहां आ गए हैं। हम किसी का कर्ज उधार नहीं रखते, आज हिसाब बराबर हो गया, उनके इस वक्तव्य पर पंडाल तालियों और जयघोष से गूंज उठा, उन्होंने आगे कहा कि पंडित प्रदीप मिश्रा उनसे वरिष्ठ हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। महाराज जी जैसा करते हैं, वैसा ही हम भी करते हैं, कहते हुए उन्होंने आपसी स्नेह और संत परंपरा की मर्यादा को रेखांकित किया। मंच से उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वह डबरा से आए हैं तो अब हम डबरा जा रहे हैं, जिससे श्रोताओं के बीच सहज हंसी और आनंद का वातावरण बन गया। यह पहला अवसर था जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर सीहोर की पावन धरा पर पहुंचे। कुबेरेश्वर धाम समिति के प्रवक्ता मनोज दीक्षित के अनुसार पंडित शास्त्री ने व्यासपीठ पर पहुंचकर विधिवत नमन किया और संत परंपरा का सम्मान किया। दो प्रखर सनातनी संतों के इस मिलन को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे थे, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। कथा स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रशासन और धाम समिति द्वारा भीड़ प्रबंधन, पार्किंग और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई थी। आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्थाओं की सराहना भी की गई। सीहोर में इन दोनों संतों का यह मिलन श्रद्धालुओं के लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा। मंच से दिए गए संदेशों में आपसी सम्मान, धर्म के प्रति समर्पण और समाज सेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण बताया।

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियमों पर मंथन

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मंगलवार को सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्‍वशासी महाविद्यालय भोपाल में कोचिंग संस्थानों के नियमों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने की। बैठक में माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देश एवं राष्‍ट्रीय कार्यबल के अनुक्रम में उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में विद्यार्थियों की आत्‍महत्‍या की रोकथाम एवं मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संरक्षण के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पैरा-37 के तहत कोचिंग सेंटरों के लिए नि‍यम अधि‍सूचित किए जाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा  राजन ने विद्यार्थियों, बैठक में सहभागिता करने वाले विभिन्न-विभागों के प्रतिनिधियों, कोचिंग सेंटर संचालकों एवं समिति सदस्यों से महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए। कार्यक्रम के दौरान भोपाल जिले के बीएसएस कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव पर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति भी दी गई। अपर मुख्य सचिव  राजन ने कहा कि विद्यार्थियों में बढ़ती मानसिक दबाव की स्थिति को गंभीरता से समझते हुए घटनाओं की प्रभावी रोकथाम आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों को भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए और विद्यार्थियों को सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थी जीवन की चुनौतियों और मानसिक समस्याओं का सामना नहीं कर पाते, जिसके कारण गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसलिए सभी संबंधित संस्थाओं के सहयोग से विद्यार्थियों के हित में एक प्रभावी नि‍यम तैयार किया जाना है, जिससे मानसिक दबाव से उत्‍पन्‍न होने वाली गंभीर परिस्‍थ‍ितियों को रोकने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि सभी उच्‍च शि‍क्षण संस्‍थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर जारी किए गए हेल्‍पलाइन नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शि‍त किए जाएं। साथ ही व्‍यापक स्‍तर पर इसका प्रचार प्रसार भी किया जाए। बैठक के दौरान राज्य में संचालित सभी कोचिंग संस्‍थानों का पंजीकरण, बेहतर संचालन, निर्धारित मानकों का पालन, कोचिंग संस्थानों में सुरक्षित वातावरण, पारदर्शी शुल्क व्यवस्था, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए एक समयबद्ध और पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर चर्चा की गई। साथ ही सुझाव प्राप्‍त किए गए। यह बैठक प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के संचालन को सुव्यवस्थित, जवाबदेह और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उच्च शिक्षा आयुक्त  प्रबल सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों को यह जानकारी अवश्य होनी चाहिए कि उनके लिए ऐसे माध्यम उपलब्ध हैं, जहां वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर उचित सहयोग और परामर्श मिलने से विद्यार्थियों को मानसिक दबाव से उबरने में सहायता मिलती है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। बैठक में एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तन्यम जोशी ने प्रजेंटेशन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। बैठक में गृह, जिला न्‍यायालय भोपाल, विधि एवं विधायी कार्य, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान, तकनीकी शिक्षा, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण और एडि‍शनल डीसीपी पुलि‍स और एनएलआईयू के प्रतिनिधि उपस्‍थ‍ित रहे। 

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