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प्रियंका गांधी ने शपथ ली: राहुल की तरह हाथ में संविधान की कॉपी पकड़ी

Priyanka Gandhi took oath: held a copy of the Constitution in her hand like Rahul. नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र का गुरुवार को तीसरा दिन है। प्रियंका गांधी पहली बार संसद पहुंचीं। उन्होंने लोकसभा में सांसद पद की शपथ ली। इस दौरान हाथ में संविधान की कॉपी ली। प्रियंका के साथ उनकी मां सोनिया और राहुल गांधी भी संसद पहुंचे। प्रियंका वायनाड सीट से उपचुनाव जीती हैं। प्रियंका के साथ नांदेड़ से उपचुनाव जीतने वाले रविंद्र चव्हाण ने भी शपथ ली। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही अडाणी मुद्दे पर हंगामा होने लगा। राज्यसभा में भी हंगामा हुआ। इसके बाद दोनों सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राहुल ने बुधवार को संसद के बाहर कहा था कि अडाणी पर अमेरिका में 2 हजार करोड़ की रिश्वत देने का आरोप है। उन्हें जेल में होना चाहिए। मोदी सरकार उन्हें बचा रही है। पहली बार संसद में गांधी परिवार के तीन सदस्य केरल के वायनाड लोकसभा उपचुनाव में प्रियंका गांधी की जीत के बाद लोकसभा में दोबारा कांग्रेस के 99 सांसद हो गए हैं। वायनाड सीट राहुल गांधी ने छोड़ी थी, जबकि नांदेड़ सीट कांग्रेस सांसद बसंतराव चव्हाण के निधन के चलते खाली हुई थी। इन पर हाल ही में उपचुनाव हुए हैं और दोनों ही सीटें कांग्रेस के पास वापस आ गई हैं। यह पहली बार हुआ है कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े गांधी परिवार के 3 सदस्य एक साथ संसद के सदस्य होंगे। राहुल गांधी रायबरेली से और प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड से लोकसभा सांसद हैं। जबकि सोनिया गांधी राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं।

महाराष्ट्र में विपक्षी उम्मीदवार जो चुनाव हार चुके है उनकी ECI से मांग, ईवीएम और वीवीपैट का हो मिलान

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने वाले महा विकास आघाडी (एमवीए) के उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल्स (वीवीपैट) के मिलान की मांग करने का फैसला किया है। विपक्ष के एक नेता ने मुंबई में यह जानकारी दी है। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में चुनाव नतीजे सामने के बाद शिवसेना (यूबीटी) लगातार ईवीएम पर सवाल उठा रही है। चुनाव हारने वाले कई उम्मीदवारों ने मंगलवार को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ बातचीत के दौरान ईवीएम पर सवाल उठाए। उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित अपने आवास पर आयोजित बैठक में अपनी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा की। आपको बता दें कि पिछले सप्ताह आए चुनावी नतीजों में शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखा। इस चुनाव में महा विकास अघाड़ी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। 288 विधायकों वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन ने 230 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं महाविकास अघाड़ी को सिर्फ 46 सीटों से संतोष करना पड़ा। इनमें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) 20 सीट जीतकर विपक्षी खेमे में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। उसके बाद कांग्रेस ने 16 सीटें और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) 10 सीट के साथ सबसे पीछे रही। मुंबई की चांदीवली विधानसभा सीट से चुनाव हारने वाले कांग्रेस के नेता आरिफ नसीम खान ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे से चर्चा की है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से शिकायत मिली है कि ईवीएम से छेड़छाड़ की जा सकती है। खान ने कहा, ‘‘हमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से परिणामों पर संदेह व्यक्त करते हुए शिकायतें मिल रही हैं। लोकतंत्र में शिकायतों का सत्यापन होना जरूरी है और मेरे साथ ही हममें से कई लोग (जो हार गए हैं) सत्यापन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया में हैं।’’ मुंबई से शिवसेना (यूबीटी) के एक विधायक ने दावा किया है कि डाले गए वोट और ईवीएम में गिने गए वोट की संख्या में विसंगतियां थीं। विधायक ने कहा, ‘‘लगभग सभी उम्मीदवारों ने ईवीएम की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया है।’’

खतरे में महायुति? शिवसेना ने साफ कर दिया है कि एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगे

मुंबई महाराष्ट्र में बंपर जीत के बाद महायुति में मुख्यमंत्री पद को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। खबर है कि शिवसेना ने साफ कर दिया है कि एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगे। खबरें थीं कि भारतीय जनता पार्टी देवेंद्र फडणवीस को राज्य के शीर्ष पद पर तैनात करना चाहती है, लेकिन शिवसेना से चर्चाएं जारी हैं। महाविकास अघाड़ी सरकार गिरने के बाद शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी और सीएम बने थे। शिवसेना ने साफ कर दिया है कि शिंदे महाराष्ट्र के डिप्टी CM का पद स्वीकार नहीं करेंगे। मीडिया से बातचीत में शिवेसना ने संजय शिरसात ने कहा, ‘विधानसभा चुनाव एकनाथ शिंदे के नाम पर लड़े गए थे। वह CM के तौर वापसी के हकदार हैं। वह उपमुख्यमंत्री के पद को स्वीकार नहीं करेंगे।’ महायुति ने महाराष्ट्र की 288 में से 230 सीटों पर कब्जा किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवसेना नेता दावा कर रहे हैं लोकसभा चुनाव में महायुति के खराब प्रदर्शन के बाद तय किया गया था कि विधानसभा में महायुति आती है, तो सीएम शिंदे को बनाया जाएगा। जबकि, भाजपा नेताओं का कहना है कि पहले तय हुआ था कि चुनाव के नतीजों के ऐलान के बाद तीनों दलों के नेता साथ बैठकर फैसला लेंगे। जून-जुलाई 2022 में शिंदे समेत कई विधायक तब अविभाजित शिवसेना से अलग हो गए थे। तब शिंदे ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी और सीएम पद हासिल किया था। उस दौरान पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया था।

पदाधिकारियों के लिए संगठन ने तय कर दी है गाइड लाइन, 40 वर्ष तक उम्र के कार्यकर्ता ही मंडल अध्यक्ष बनेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश में संगठन चुनाव के तहत दिसंबर में भाजपा के मंडल और जिला अध्यक्ष बना दिए जाएंगे। चुनाव दो चरणों में होंगे। इसकी तैयारी के लिए बुधवार शाम प्रदेश कार्यालय में कार्यशाला आयोजित की जाएगी। पार्टी संगठन ने केंद्रीय नेतृत्व की तय गाइडलाइन के तहत कार्ययोजना बनाई है। जिन पर आर्थिक और आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, ऐसे नेताओं को जिला और मंडल अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। ऐसे नेता संगठन चुनाव में ही हिस्सा नहीं ले सकेंगे। आयुसीमा तय वहीं, मंडल और जिला अध्यक्ष के लिए क्रमश: 40 और 60 वर्ष की आयु सीमा भी निर्धारित की गई है, यानी पार्टी युवा और वरिष्ठता दोनों ही श्रेणी के नेताओं को अवसर देगी। इसी तरह, अपने चहेतों को मंडल और जिला अध्यक्ष बनाने के लिए सांसद, विधायक या मंत्री की अनुशंसा भी नहीं चलेगी। इसको लेकर पार्टी संगठन ने पहले ही गाइड लाइन तय कर दी है। कार्यशाला में ये रहेंगे उपस्थित भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने बताया कि बुधवार को होने वाली कार्यशाला को पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डा. महेंद्र सिंह एवं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद संबोधित करेंगे। कार्यशाला में प्रदेश कोर कमेटी, पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, संभाग प्रभारी, लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, महापौर, नेता प्रतिपक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री, प्रदेश निर्वाचन टोली, प्रदेश सक्रिय सदस्यता टोली, जिला निर्वाचन टोली, बूथ प्रबंधन जिला प्रभारी उपस्थित रहेंगे। बूथ समितियों के गठन की सराहना वहीं, मप्र के भाजपा संगठन की बूथ समितियों के गठन की शीर्ष नेतृत्व ने सराहना की है। अब पार्टी का फोकस मंडल और जिला अध्यक्ष के संगठन चुनाव पर है। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई बैठक में मिली गाइडलाइन के बाद प्रदेश संगठन ने यह कार्यशाला आयोजित की है। कार्यशाला के बाद पार्टी संगठन बुधनी और विजयपुर उपचुनाव को लेकर भी चर्चा करेगा।

शिंदे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि मैं अपने आप को कभी मुख्यमंत्री नहीं समझता हूं, मैं हमेशा अपने आपको कॉमन

मुंबई महाराष्ट्र में अगले मुख्यमंत्री को लेकर महायुति में खींचतान जारी है. इसी बीच शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने ऐलान किया कि मैं अपने आप को कभी मुख्यमंत्री नहीं समझता हूं. मैं हमेशा अपने आपको कॉमन मैन समझता हूं. शिंदे ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र को फोन किया था. मैंने उनसे कहा कि हमारी तरफ से मुख्यमंत्री को लेकर कोई अड़चन नहीं आएगी. हमारा पूरा सहयोग रहेगा. शिंदे के इस बयान के बाद अब माना जा रहा है कि बीजेपी देवेंद्र फडणवीस के नाम का ऐलान कर सकती है. दरअसल, महाराष्ट्र का चुनाव एकनाथ शिंदे के चेहरे पर लड़ा गया था. लेकिन बीजेपी को महायुति में सबसे ज्यादा 132 सीटें मिलीं तो सीएम को लेकर खींचतान जारी हो गई. आखिरकार अब एकनाथ शिंदे ने खुद ये ऐलान कर दिया है कि वह बीजेपी के हर फैसले को मानने के लिए तैयार हैं. ऐसे में अब सीएम के लिए चल रहा गतिरोध खत्म होता दिख रहा है.    एकनाथ शिंदे ने इस दौरान शाह और मोदी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि बीजेपी और शाह-मोदी ने मेरा पूरा साथ दिया. वो चट्टान बनकर मेरे साथ खड़े रहे. मैंने पीएम मोदी को फोन करके कहा है कि हमारी तरफ से कोई दिक्कत नहीं है. आप जिसे भी सीएम के लिए चुनेंगे उसे मेरा सपोर्ट है. मैंने राज्य की बेहतरी के लिए काम किया इस दौरान शिंदे ने कहा कि मैंने हमेशा राज्य की बेहतरी के लिए काम किया है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की लाडली बहनों का मैं लाडला भाई हूं. अभी बहुत काम करना है. मैंने ढाई साल में राज्य के लिए खूब काम किया है. आगे भी हम इसी रफ्तार से काम करेंगे.महायुति मजबूत है और हम सब मिलकर काम करने को तैयार हैं. एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमने पिछले ढाई साल में लगातार काम किया है. मैं लाडली बहनो का लाडला भाई हूं. मैं हमेशा तत्पर रहता हूं. मैं आगे भी काम करने के लिए तैयार हूं. दरअसल, महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही नए मुख्यमंत्री को लेकर खींचतान जारी है. चाहे एकनाथ शिंदे हों, देवेंद्र फडणवीस हों या फिर अजित पवार… तीनों के ही समर्थक अपने नेता को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. इसकी बानगी नतीजे वाले दिन भी देखने को मिली थी, जब तीनों नेताओं के समर्थकों ने खुलकर अपने लीडर को सीएम बनाने की मांग शुरू कर दी थी. बता दें कि एकनाथ शिंदे इस समय कार्यवाहक मुख्यमंत्री हैं. दिल्ली बुलाए गए महायुति के नेता शिंदे, फडणवीस और पवार को बुलाया गया दिल्ली बता दें कि शिवसेना एनसीपी के प्रमुख नेताओं और देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली बुलाया गया है. बीजेपी के हाईकमान ने कल प्रफुल्ल पटेल, अजीत पवार, देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ अहम बैठक तय की है. बता दें कि महाराष्ट्र की 288 सीटों में से महायुति को 230 सीट मिली थी. बीजेपी ने 132 सीटों पर जीत हासिल की है. शिंदे, फडणवीस और पवार को बुलाया गया दिल्ली बता दें कि शिवसेना एनसीपी के प्रमुख नेताओं और देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली बुलाया गया है. बीजेपी के हाईकमान ने कल प्रफुल्ल पटेल, अजीत पवार, देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ अहम बैठक तय की है. माना जा रहा है कि इस बैठक में महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. इस मीटिंग में राज्य के मौजूदा सियासी हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है. इसके साथ ही बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजीत पवार गुट) के गठबंधन से जुड़े कुछ अहम मुद्दे भी उठ सकते हैं. सीएम पद को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं: म्हस्के सीएम पद को लेकर कुछ देर पहले ही एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के नेता नरेश म्हस्के का बयान आया. उन्होंने कहा कि सीएम पद को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं है. सरकार दो दिनों में नहीं बनती है. प्रक्रिया चल रही है. जल्द ही सीएम के नाम का ऐलान हो जाएगा. महायुति के नेता फैसला कर लेंगे. हालांकि, हमने सीएम पद की मांग की है. जैसे बिहार में छोटी पार्टी को सीएम पद दिया गया है, वैसे ही हमने भी सीएम पद मांगा हैं. सभी हमारे नेता, सबका सम्मान है: केसरकर शिवसेना के एक और नेता दीपक केसरकर ने इस मुद्दे पर बयान दिया है. दीपक केसरकर ने कहा,’सभी हमारे नेता हैं. हम सभी का सम्मान करते हैं. ये महायुति गुट है. हम विधानसभा चुनाव महायुति के फॉर्मूले से जीते हैं. चेहरा पीएम मोदी का है. मोदी के नाम पर मेंडेट आया है. वहीं, देवेंद्र फडणवीस ने कहा,’तीनों पक्ष मिलकर सरकार बनाएंगे.’ जल्दबाजी के मूड में नहीं है BJP नेतृत्व कहा जा रहा है कि सत्तारूढ़ महायुति नए मुख्यमंत्री का चेहरा फाइनल नहीं कर पाई है. अलांयस के तीनों सहयोगी दलों में सत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए लगातार मंथन चल रहा है. बीजेपी के सूत्र बताते हैं कि अलायंस के नेता बड़ी जीत से उत्साहित हैं. इसलिए इस बार ज्यादा जल्दबाजी के मूड में नहीं हैं. बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि सरकार बनने के बाद किसी भी अलांयस में सबसे ज्यादा खींचतान हैवीवेट मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर होती है, इसलिए पहले पोर्टफोलियो फाइनल किए जाने चाहिए, उसके बाद सीएम फेस घोषित किया जाएगा. यानी एनडीए, पहले विवादों की जड़ें खत्म करना चाहता है, उसके बाद सरकार के चेहरे को उजागर करने का फैसला लिया गया है. क्या रहे चुनावी नतीजे राज्य में 20 नवंबर को हुए चुनाव में बीजेपी ने 132 सीटें, शिवसेना ने 57 और एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं हैं. परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए गए थे.    

दिल्ली विधानसभा चुनाव की हलचल तेज, कांग्रेस ने पूर्व मंत्री प्रियवत सिंह को चुनाव में वार रूम का अध्यक्ष नियुक्त किया

भोपाल दिल्ली विधानसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई है. एक तरफ आम आदमी पार्टी ने चुनाव का ऐलान होने से पहले ही अपने कुछ प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है तो अब कांग्रेस भी चुनावी मोड में आ गई है. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश एक पूर्व मंत्री को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अहम जिम्मेदारी सौंपी है, पार्टी ने उन्हें इलेक्शन में वार रूम का अध्यक्ष बनाया है. माना जा रहा है कि कांग्रेस भी इस बार दिल्ली विधानसभा के लिए जल्द ही अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर सकती है. हालांकि अभी चुनाव आयोग की तरफ से विधानसभा चुनाव को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है. कांग्रेस ने प्रियव्रत सिंह को सौंपी जिम्मेदारी दरअसल, कांग्रेस ने पूर्व मंत्री प्रियवत सिंह को दिल्ली विधानसभा चुनाव में वार रूम का अध्यक्ष नियुक्त किया. कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल की तरफ से यह आदेश जारी किया गया है. प्रियव्रत सिंह को राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है, प्रियव्रत सिंह जल्द ही दिल्ली पहुंचकर वॉर रूम की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं. माना जा रहा है कि उनके अलावा पार्टी एमपी कांग्रेस के कई और नेताओं को भी दिल्ली विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारियां सौंप सकते हैं. कमलनाथ सरकार में मंत्री रह चुके हैं प्रियव्रत सिंह प्रियव्रत सिंह 15 महीने की कमलनाथ सरकार में मंत्री रह चुके हैं. वह राजगढ़ जिले की खिलचीपुर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं. हालांकि 2023 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. प्रियव्रत सिंह मध्य प्रदेश में युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के अलावा संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. ऐसे में कांग्रेस ने अब उन्हें दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है. फरवरी में हो सकते हैं दिल्ली विधानसभा चुनाव वहीं बात अगर दिल्ली विधानसभा चुनाव की जाए तो यहां चुनाव अगले साल फरवरी में हो सकते हैं. क्योंकि 2020 में चुनाव की घोषणा 6 जनवरी को हुई थी, जबकि फरवरी के महीने में वोटिंग और रिजल्ट आया था. ऐसे में माना जा रहा है कि विधानसभा का कार्यकाल होने तक फरवरी में ही चुनाव की घोषणा हो सकती है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार भी मुकाबला त्रिकोणीय देखने को मिल सकता है, जहां सत्ताधारी आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी फाइट होगी. 

भाजपा नेतृत्व कुछ अन्य नामों पर भी विचार कर रही, ओबीसी और मराठा समुदाय से किसी नेता को CM बनाने के विकल्प भी शामिल

मुंबई महाराष्ट्र में भाजपा नेतृत्व वाली महायुति की सरकार के गठन में अभी कुछ समय लग सकता है। भाजपा नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर मंथन जारी है। जैसे ही नाम तय होगा, भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी। इसके बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। इस बीच, शिवसेना और एनसीपी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री के नाम का निर्णय भाजपा नेतृत्व पर छोड़ दिया है। दोनों दलों ने कहा है कि जो भी निर्णय लिया जाएगा वह दोनों घटक दलों के लिए मान्य होगा। महायुति की भारी जीत के बाद भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री और महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व अभी तक इस पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है और अटकलें हैं कि भाजपा नेतृत्व कुछ अन्य नामों पर भी विचार कर रहा है। इनमें ओबीसी और मराठा समुदाय से किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने के विकल्प भी शामिल हैं। यह लगभग स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही होगा, जबकि एनसीपी और शिवसेना से उपमुख्यमंत्री पद पर नेता होंगे। भाजपा के मुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस पिछली सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे थे। अब यह संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार में एकनाथ शिंदे को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, इस बारे में अभी तक केंद्रीय स्तर पर औपचारिक विचार-विमर्श नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, शिवसेना अपने विधायकों को साधने के लिए एकनाथ शिंदे को राज्य के नेतृत्व में बनाए रखना चाहती है। शिंदे को केंद्र में भेजने से शिवसेना को नुकसान हो सकता है। इसलिए संभावना है कि शिंदे राज्य सरकार में भी शामिल रहें। इसके अलावा, एक फॉर्मूला यह भी चर्चा में है कि शिंदे को केंद्र में भेजा जाए और राज्य में उनके बेटे को उपमुख्यमंत्री बना दिया जाए। अब देखना यह है कि भाजपा और महायुति के अन्य घटक दलों के बीच इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय कब और कैसे लिया जाएगा।

मल्लिकार्जुन खरगे का बड़ा एलान, कहा कि हमें ईवीएम नहीं चाहिए, हमें बैलेट पेपर चाहिए,देशभर में चलाएंगे अभियान’

नई दिल्ली मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जाति जनगणना से डरते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि फिर हर कोई अपना हिस्सा मांगना शुरू कर देगा। मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर आप वाकई देश में एकता चाहते हैं, तो आपको नफरत फैलाना बंद कर देना चाहिए। दरअसल, तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस पार्टी द्वारा आज संविधान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जहां पर उन्होंने ये टिप्पणी की। EVM पर कही ये बात कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देश में होने वाली चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चुनावों में पहले इस्तेमाल किए जाने वाले बैलेट पेपर सिस्टम की वापसी जाए। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम का समापन हो। उन्होंने कहा कि हमें ईवीएम नहीं चाहिए, हमें बैलेट पेपर चाहिए। बैलेट पेपर लिए चलाएगे अभियान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि देश में अगर फिर से बैलेट पेपर से होने वाली वोटिंग प्रक्रिया की शुरुआत नहीं होती है तो एक बड़ा अभियान कांग्रेस चलाएगी। मल्लिकार्जुन खरगे ने बैलेट पेपर की वापसी के लिए कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के पैमाने पर अभियान चलाने का भी आह्वान किया। केंद्र सरकार पर साधा निशाना मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आप सत्ता में आए और लूटपाट करके इसे अडानी, अंबानी और उनके जैसे अन्य लोगों को दे रहे हैं। इन लोगों ने कभी देश के बारे में नहीं सोचा। मोदी और वे एक-दूसरे के बारे में सोचते हैं। मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि महाराष्ट्र के चुनावों में अडानी की अहम भूमिका थी। पीएम मोदी ने उन्हें बहुत सारी संपत्तियां दीं और वे इसे रोक नहीं पा रहे हैं। वे इसे चुनावों में भाजपा की ओर से बांट रहे हैं। उनके पास कोई संवैधानिक मूल्य नहीं है। उनमें संस्थागत अखंडता की कमी है। उनके पास संघीय चरित्र नहीं है।

कल्याण बनर्जी ने कांग्रेस के प्रदर्शन और नेतृ्त्व पर सवाल उठाया, कहा-गठबंधन तो है, मगर परिणाम अपेक्षित नहीं, बड़ी विफलता

नई दिल्ली महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिली करारी हार के बाद अब सहयोगी दल भी सवाल उठाने लगे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी ने कांग्रेस के प्रदर्शन और नेतृ्त्व पर सवाल उठाया। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि कांग्रेस हरियाणा और महाराष्ट्र में उम्मीदों के मुताबिक परिणाम लाने में विफल रही है। हमें कांग्रेस से बहुत उम्मीद थी कि वे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। बनर्जी ने कहा कि I.N.D.I.A गठबंधन तो है, मगर परिणाम अपेक्षित नहीं हैं। यह कांग्रेस की बड़ी विफलता है। आज अगर भाजपा से लड़ना है तो जरूरी है कि I.N.D.I.A मजबूत हो। और इसे मजबूत बनाने के लिए एक नेता की आवश्यकता है। अब नेता कौन हो सकता है? यही मूल प्रश्न है। कांग्रेस ने हर तरह के प्रयोग किए। मगर सफलता नहीं मिली। महायुति को मिला प्रचंड बहुमत महाराष्ट्र की कुल 288 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को मतदान हुआ। 23 नवंबर को नतीजों की घोषणा हुई। महाराष्ट्र की जनता ने महायुति को भारी जनादेश दिया। वहीं विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी को करारी हार का सामना करना पड़ा। महायुति को 236 और महा विकास अघाड़ी को सिर्फ 48 सीटों पर जीत मिली। सबसे अधिक 132 सीटों पर भाजपा ने कब्जा किया। 57 सीटों पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना और 41 सीटों पर अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने जीत हासिल की है। अगर विपक्ष की बात करें तो सबसे अधिक 20 सीटों पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), 16 सीटों पर कांग्रेस और महज 10 सीटों पर शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) ने जीत दर्ज की है।

बालाघाट बलात्कार मामले में प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष नूरी खान ने पीसीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर जमकर हमला बोला

भोपाल बालाघाट बलात्कार मामले में प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष नूरी खान ने पीसीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि गरीब किसी मामले में फंसता है तो उनके घर पर बुलडोजर चलता है, लेकिन वहीं भाजपा के नेता की बलात्कार के मामले में अभी तक गिरफ्तारी तक नहीं हुई। नूरी खान ने पुलिस को सात दिन का समय दिया और कहा है अगर गिरफ्तारी नहीं होती है तो महिला कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी और आंदोलन करेगी। बता दें, बालाघाट जिले के भाजयुमो जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सोहागपुरे पर महिला से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगा है। पीड़िता ने युवा नेता की सगाई के दौरान पहुंचकर हंगामा किया और यौन शोषण के आरोप लगाए थे। जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। एमपी में में 28857 महिलाएं एमपी से गायब नूरी खान ने कहा कि मध्य प्रदेश में से पिछले पौने 3 साल में 28857 महिलाएं गायब हुई हैं। रोज औसतन 28 महिलाएं और 3 बच्चियों गायब होने के केस दर्ज किए जा रहे हैं। महिला अपराधों का ग्राफ चिंताजनक और भयावह है। 7 महीने में 2319 रेप और 150 से ज्यादा गैंगरेप के मामले सामने आ चुके हैं। पीड़ितों में 3 साल की बच्चियों से लेकर 60 साल की महिलाएं शामिल हैं। अकेले जबलपुर में 70 छात्राओं के अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया। महू में सेना के अधिकारियों की महिला मित्रों के साथ दुष्कर्म, उज्जैन में फुटपाथ पर दुष्कर्म, ऐसे कई मामले हैं, जो सामने नहीं आ पाते। नारी न्याय आंदोलन शुरू मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने देशभर में नारी न्याय आंदोलन और नारी न्याय यात्रा का आगाज किया है। 15 सितंबर से महिला कांग्रेस की देशव्यापी सदस्यता अभियान की शुरूआत की गई है। अब तक 3 लाख महिलाओं ने देशभर में महिला कांग्रेस की सदस्यता ली है। एमपी में अब तक 20 हजार महिलाएं कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ले चुकी हैं।

सत्ता व संगठन के सामने नए सिरे से जोर-आजमाइश शुरू, रामनिवास रावत का इस्तीफा सरकार ने होल्ड पर रखा

भोपाल विजयपुर उपचुनाव हारने के बाद वनमंत्री रामनिवास रावत द्वारा दिया गया इस्तीफा सरकार ने होल्ड पर रख लिया है। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विदेश से लौटने के बाद इस्तीफे पर निर्णय होगा। उसके पहले रावत के पास मौजूद वन एवं पर्यावरण विभाग पर मौजूदा चार मंत्रियों और 12 से अधिक विधायकों की नजर है। इन्होंने सत्ता व संगठन के सामने नए सिरे से जोर-आजमाइश शुरू कर दी है।  हालांकि रावत जनवरी 2025 के पहले सप्ताह तक मंत्री बने रह सकते हैं, क्योंकि कानूनी रूप से रावत को शपथ के छह महीने के भीतर चुनाव जीतकर आना था। इस अवधि के पहले चुनाव हुए और वह हार गए। तब भी छह महीने की अवधि पूरी होनी बाकी है, इसके पूरे होने तक उनके इस्तीफे के बावजूद भी सरकार चाहे तो उन्हें मंत्री रख सकती है। सरकार के पास विभाग बंटवारे के ये तीन विकल्प 1.विदेश से लौटने के बाद सीएम यदि रावत का इस्तीफा मंजूर करते हैं तो वन और पर्यावरण विभाग के बंटवारे को लेकर सरकार दो विकल्प में से किसी एक को अपना सकती है। जानकारों के मुताबिक जो विभाग किसी के पास नहीं होते वे स्वत: राज्य के मुख्यमंत्री के हो जाते हैं, इसी तरह वन व पर्यावरण विभाग भी मुख्यमंत्री के पास चले जाएंगे। 2.सीएम चाहें तो ये दोनों विभाग मंत्रिमंडल का विस्तार किए बिना किसी भी मौजूदा मंत्रियों को दे सकते हैं। 3.सरकार चाहे तो किसी नए विधायक को विभाग दे सकती है, लेकिन इस प्रक्रिया के लिए सरकार को राज्यपाल को मंत्रिमंडल विस्तार की सूचना देनी होगी। चर्चा… ये मंत्री रावत के विभाग पाने के इच्छुक नागर सिंह चौहान: अनुसूचित जाति कल्याण विभाग है। पूर्व में वन व पर्यावरण इन्हीं के पास था। इन्हीं से लेकर रावत को दिया था। राकेश शुक्ला: नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग है। चर्चा है कि ये बड़ा विभाग चाहते हैं। गौतम टेटवाल, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। मुख्यमंत्री के गृह जिले के प्रभारी मंत्री हैं। कृष्णा गौर: राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार गौर के पास  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण व विमुक्त घुमन्तु और अद्र्धघुमंतु कल्याण विभाग है। राजधानी में रहने वाली एकमात्र महिला राज्यमंत्री हैं। ‘मैं भाजपा छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला’ भोपाल. मंत्री रामनिवास रावत के विजयपुर से चुनाव हारने के बाद से तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। सोमवार को चर्चा रही कि रावत भाजपा छोड़ सकते है। पत्रिका से बातचीत में उन्होंने अपनी हार के पीछे जनता का फैसला और खुद की किस्मत को बताया। भाजपा छोडऩे के सवाल पर कहा, मुझे नहीं पता ये अफवाह कौन उड़ा रहा है। मैं भाजपा छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला हूं। वहीं इस्तीफे को लेकर कहा कि चुनाव हारते ही मैंने सीएम को इस्तीफा सौंप दिया था। भितरघात को लेकर इतना ही कहा कि अभी तक सत्ता और संगठन की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं मांगी गई है। अगर पूछा जाता है तो मैं जरूर रिपोर्ट दूंगा।

INDI गठबंधन के दल कांग्रेस पर फोड़ने लगे महाराष्ट्र में हार का ठीकरा, कहा-राहुल गांधी ने नहीं मानी सलाह?

मुंबई महाराष्ट्र में कांग्रेस की अगुआई में चुनाव लड़ने वाली महाविकास अघाड़ी की करारी हार के बाद गठबंधन के सहयोगी राहुल गांधी पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। इंडी गठबंधन में रार चुनाव परिणाम आते ही देखने को मिलने लगी। पहला संकेत तो यही था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गठबंधन की बैठक बुलाई और इसमें टीएमसी का कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। बाद में टीएमसी नेता ने यह भी कहा कि अब गठबंधन का नेतृत्व टीएमसी को करना चाहिए। टीएमसी ने कहा कि उसेक नेता कोलकाता में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में व्यस्त थे। संसद का सत्र भी शुरू होने वाला था। ऐसे में भी टीएमसी नेता का दिल्ली में बैठक में शामिल ना होना कांग्रेस के लिए चिंता की बात है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक एक टीएमसी नेता ने कहा, टीएमसी ने अपने दम पर उपचुनाव में सभी छह सीटें जीत लीं। बीजेपी के अलावा कांग्रेस और सीपीएम भी सामने थे। हम चुनावी गठबंधन में नहीं हैं इसलिए यह भी जरूरी नहीं है कि किसी पार्टी के लिए जवाबदेह हों। टीएमसी के कल्याण बनर्जी ने यहां तक कहा कि ममता बनर्जी को इंडिया का मुखिया बना देना चाहिए। इंडिया गठबंधन के नेता राहुल गांधी को भी इस हार के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका कहना है कि चुनाव के दौरान वीर सावरकर का नाम लेकर हमला करना, कांग्रेस ही नहीं बल्कि उसके सहयोगियों के भी खिलाफ चला गया। बहुत सारे लोगों की भावनाएं आहत हुईं और इसी दौरान ‘बटोगे तो कटोके’ का नारा आ गया। राहुल गांधी फिर भी नहीं रुके और उसी तरह हमला करते चले गए। इंडिया गठबंधन के दलों का कहना है कि जातिगत सर्वे की बात भी नुकसानदेह साबित हुई। बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आई तो आरक्षण खत्म कर देगी और महाविकास अघाड़ी इसे काउंटर नहीं कर पाया। इसके अलावा राहुल गांधी ने सीधा प्रधानमंत्री पर हमला करना शुरू किया। कई सहयोगियों ने समझाया भी कि इससे काम नहीं बनने वाला है। इसके बाद भी उन्होंने किसी सलाह पर ध्यान नहीं दिया और अपने अंदाज में हमला करते चले गए। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी के कुछ करीबियों ने भी उन्हें समझाया था कि संविधान खतरे में हैं, वाली बात ना दोहराएं। इसके बाद भी राहुल गांधी ने अपना पुराना अंदाज जारी रखा।

संजय राउत ने कहा- भाजपा को जितना बहुमत मिला है, उसे देखते हुए लगता है कि देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री बनेंगे

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्यपाल से मुलाकात कर इस्तीफा सौंप दिया है। उनके साथ दोनों डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार भी राजभवन पहुंचे थे। इस इस्तीफे के साथ ही महाराष्ट्र की विधानसभा भंग हो गई है और अब राज्यपाल ने नई सरकार के गठन तक एकनाथ शिंदे से कार्य़वाहक सीएम बने रहने को कहा है। इस बीच नई सरकार के गठन को लेकर कोशिशें तेज हो गई हैं, लेकिन सीएम पद को लेकर रस्साकशी का दौर जारी है। इस बीच उद्धव ठाकरे सेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत का कहना है कि ज्यादा संभावना है कि देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री बनेंगे। संजय राउत ने कहा कि भाजपा को जितना बहुमत मिला है, उसे देखते हुए लगता है कि देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री बनेंगे। यही नैतिकता भी कहती है। इसके साथ ही उन्होंने तंज भी कसा कि ये लोग तो पार्टियां तोड़ने में भी माहिर हैं। ऐसा भी हो सकता है कि ये लोग एकनाथ शिंदे या फिर अजित पवार की पार्टी को ही तोड़ दें। इन लोगों को दलों को तोड़ने में महारत ही हासिल है। इसलिए ऐसा नहीं हो सकता कि भाजपा वाले एकनाथ शिंदे को फिर से मुख्यमंत्री बनने दें। संजय राउत ने कहा कि ऐसा होना मुश्किल है और देवेंद्र फडणवीस ही रेस में आगे हैं। इस बीच एकनाथ शिंदे गुट का बयाम भी आया है, जिससे लग रहा है कि मसला शायद मिल-बैठकर सुलझ जाएगा। शिंदे गुट की ओर से कहा गया है कि सीएम पद को लेकर भाजपा से कोई नाराजगी नहीं है। ऐसी खबरें गलत हैं। शिवसेना के सीनियर लीडर दीपक केसरकर ने कहा कि एकनाथ शिंदे कह चुके हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ओर से जो भी तय किया जाएगा, जो उसे माना जाएगा। केसरकर ने नए सीएम को लेकर कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह जो फैसला लेंगे, उसे लेकर भी सभी लोग राजी हो जाएंगे।

महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं, एकनाथ शिंदे ने दिया इस्तीफा

मुंबई महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। खबर है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और दोनों उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार राजभवन पहुंच रहे हैं। सीएम शिंदे ने पद से इस्तीफा दे दिया हैं। इसी बीच शिंदे की एक पोस्ट ने भी चर्चाएं बढ़ा दी हैं। दरअसल, शिंदे ने अपने समर्थकों से आवास के बाहर जश्न नहीं मनाने की अपील की है। कहा जा रहा है कि महायुति की जीत के बाद सीएम पद की रेस में सबसे आगे फडणवीस चल रहे हैं। इधर, शिवसेना भी शिंदे का नाम आगे बढ़ा रही है। शिंदे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘महायुति गठबंधन की बड़ी जीत के बाद राज्य में एक बार फिर हमारी सरकार बनेगी। हमने एक महागठबंधन के रूप में मिलकर चुनाव लड़ा और हम आज भी साथ हैं।’ उन्होंने अपने समर्थकों से ‘वर्षा’ के बाहर या उनके समर्थन में किसी अन्य स्थान पर इकट्ठा नहीं होने की अपील की। शिंदे ने कहा, ‘मेरे प्रति प्रेम के कारण कुछ लोगों ने सभी से मुंबई आने और एकत्र होने की अपील की है। मैं आपके प्यार के लिए बहुत आभारी हूं लेकिन मैं अपील करता हूं कि कोई भी मेरे समर्थन में इस तरह से एकत्र नहीं हो।’ नहीं बनी सहमति 23 नवंबर शनिवार को नतीजों के ऐलान के बाद महायुति ने 288 में से 230 सीटें जीतकर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया था। तब 132 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ा दल बनकर उभरी थी। वहीं, शिवसेना को 57 और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी या NCP ने 41 सीटें अपने नाम की थीं। फडणवीस दिल्ली पहुंचे फडणवीस अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक के लिए सोमवार देर रात राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। फडणवीस यहां एक होटल में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बेटी अंजलि के विवाह से संबंधित प्रीति भोज में शामिल हुए। फडणवीस के साथ महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर भी मौजूद थे। महाराष्ट्र में अगली सरकार के गठन की रूपरेखा पर चर्चा के लिए फडणवीस गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात कर सकते हैं।

महाराष्ट्र चुनाव में विजयी निर्दलीय उम्मीदवार ने भाजपा को बिना शर्त समर्थन दिया

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में विजयी निर्दलीय विधायक शिवाजी पाटिल ने निवर्तमान उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की। पार्टी के एक पदाधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। महाराष्ट्र में 20 नवंबर को हुए राज्य विधानसभा चुनाव से पहले पाटिल कोल्हापुर जिले की चांदगढ़ सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। हालांकि, महायुति सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे के तहत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने इस सीट से अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया। शिवाजी पाटिल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और राकांपा के राजेश पाटिल को हराया। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि उन्होंने रविवार रात फडणवीस से मुलाकात कर भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की और इस आशय का एक पत्र सौंपा। फडणवीस ने आभार स्वरूप उन्हें शॉल भेंट की। शनिवार को घोषित राज्य चुनाव परिणामों में महायुति गठबंधन ने 288 विधानसभा में से 230 सीट हासिल कीं। महायुति गठबंधन में भाजपा, निवर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा शामिल है। सहयोगी दलों में भाजपा ने 149 सीट पर चुनाव लड़कर 132 सीट जीतीं, जबकि शिवसेना और राकांपा को क्रमशः 57 और 41 सीट मिलीं। राज्य में सरकार बनाने को लेकर किसी पार्टी या गठबंधन के लिए बहुमत का आंकड़ा 145 है। सबका ध्यान फडणवीस पर है, जिन्हें तीसरी बार राज्य के शीर्ष पद पर आसीन होने के लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।  

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