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कंगना रनौत ने पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के सेल्फी वीडियो पर दिया ये रिएक्शन

मुंबई बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अपने बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती हैं। उन्हें जिनकी तारीफ करनी होती है, वह खुलकर करती हैं। उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा शेयर किए एक वीडियो पर रिएक्ट किया, जिसमें वह पीएम नरेंद्र मोदी के साथ सेल्फी लेते नजर आ रही हैं। कंगना रनौत ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश के मंडी सीट से लोकसभा चुनाव जीता है। शनिवार को, कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर पीएम मोदी और मेलोनी का वीडियो शेयर किया और लिखा: “मोदी जी की सबसे प्यारी खूबियों में से एक यह है कि वे महिलाओं को यह एहसास दिलाते हैं कि वह उन्हें आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि मेलोनी मोदी जी को एक टीम की तरह मानती हैं।” इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच काफी अच्छी दोस्ती है। उनकी दोस्ती सोशल मीडिया यूजर्स बेहद पसंद करते हैं, जिसके चलते उन्होंने इस दोस्ती को ‘हैशटैग मेलोडी’ का टैग भी दिया है। दरअसल, पीएम मोदी जी-7 सम्मेलन में शामिल होने के लिए इटली के अपुलिया पहुंचे थे, जहां जॉर्जिया मेलोनी ने उनका स्वागत हाथ जोड़कर नमस्ते कहकर किया। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी की यह पहली विदेश यात्रा थी। मुलाकात के दौरान मेलोनी ने पीएम मोदी के साथ एक वीडियो बनाया और शनिवार को अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया, जिसमें वह हसंते हुए कहती नजर आ रही है, ‘टीम मेलोडी की तरफ से हैलो’ इस दौरान दोनों नेताओं के चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती है। पीएम मोदी ने अपने एक्स पर मेलोनी का यह वीडियो फिर से शेयर किया और लिखा, “भारत-इटली की दोस्ती अमर रहे!” यह पहली बार नहीं है जब मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेल्फी शेयर की हो। पिछले दिसंबर में दुबई में आयोजित वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट (सीओपी28) के दौरान उन्होंने सेल्फी शेयर की थी और कैप्शन में लिखा था, ‘सीओपी28 में अच्छे दोस्त.. हैशटैग मेलोडी’ वहीं, कंगना की बात करें तो फिलहाल वह अपने परिवार के साथ समय बिता रही हैं। उनके निर्देशन में बनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ रिलीज होने के लिए तैयार है। इसमें वह पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका निभाती नजर आएंगी। यह फिल्म भारतीय सरकार के 1975-1977 के इमरजेंसी की कहानी है।

केंद्रीय मंत्री प्रलहाद जोशी ने कहा- येदियुरप्पा से जुड़े मामले में अदालत ने कांग्रेस सरकार को करारा तमाचा लगाया

बेंगलुरु केंद्रीय मंत्री प्रलहाद जोशी ने शनिवार को कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा से जुड़े मामले में अदालत ने कांग्रेस सरकार को करारा तमाचा लगाया है।हुबली में पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री जोशी ने कहा, “अदालत का आदेश कांग्रेस सरकार पर करारा तमाचा है। पुलिस ने आम चुनाव से पहले नोटिस जारी किया था। लोकसभा चुनाव के बाद जब नई सरकार सत्ता में आई तो पुलिस ने जानबूझकर अदालत से गिरफ्तारी वारंट हासिल कर लिया। येदियुरप्पा हमारे वरिष्ठ नेता हैं। संसदीय समिति के सदस्य के तौर पर उनका दिल्ली में होना स्वाभाविक है। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करना गलत था। इसके पीछे राज्य सरकार का हाथ है।” जोशी ने कहा, “अब यह स्पष्ट हो गया है कि यह सब राहुल गांधी के दबाव के कारण हुआ। सीएम सिद्धारमैया ने वरिष्ठ नेता येदियुरप्पा को गिरफ्तार करने की तैयारी करके अपनी कुर्सी बचाने की कोशिश की। लेकिन, देश में न्यायपालिका अधिक शक्तिशाली है।” कर्नाटक पुलिस ने चार महीने पहले दर्ज पॉक्सो मामले में येदियुरप्पा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट हासिल किया था। हाईकोर्ट ने पुलिस को उन्हें गिरफ्तार न करने और जांच जारी रखने का निर्देश दिया था। धारवाड़ में एक हिंदू कार्यकर्ता पर हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए जोशी ने कहा, “जब से कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनी है, हिंदू कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं। धारवाड़ में, स्वस्थ देशी नस्ल की गायों को अवैध रूप से ले जाया गया। सूचना देने पर हमला किया गया।” “मुस्लिम कट्टरपंथियों को कोई डर नहीं है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कर्नाटक में हिंदू विरोधी सरकार चला रहे हैं। जोशी ने चेतावनी दी कि अगर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो हम आंदोलन करेंगे।” एक प्रशंसक की हत्या के मामले में कन्नड़ सुपरस्टार दर्शन की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए जोशी ने कहा, “सभी अभिनेताओं को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि उनमें से एक ने ऐसी हरकत की हैं।” दर्शन को किसानों का ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए जोशी ने कहा, “ऐसा करने से पहले सरकारों को पृष्ठभूमि की उचित जांच करानी चाहिए। भले ही नियुक्ति पिछली भाजपा सरकार के दौरान की गई हो, फिर भी यह गलत है। दर्शन को अपनी पत्नी पर हमला करने के आरोप में जेल भेजा गया था। उन्होंने कहा, हालांकि, कन्नड़ सुपरस्टार दिवंगत पुनीत राजकुमार को कई परियोजनाओं के लिए एंबेसडर बनाया गया था। दिवंगत अंबरीश और विष्णुवर्धन अच्छे अभिनेता थे। सभी को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता।” कांग्रेस सरकार ने शुक्रवार को गिरफ्तार सुपरस्टार दर्शन से किसान ब्रांड एंबेसडर की उपाधि वापस ले ली है।

उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठकों का सिलसिला जारी, इस बीच अकाली दल नहीं लड़ेगा उपचुनाव

Sehatnama: Avoid leafy vegetables in monsoon

जालंधर जालंधर में 10 जुलाई को होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हो गई हैं। बेशक अभी तक किसी भी पार्टी की ओर से उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठकों का सिलसिला जारी है। इस बीच सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आई है कि इस बार अकाली दल जालंधर वेस्ट में उपचुनाव नहीं लड़ेगा। फिलहाल ये खबर सूत्रों के हवाले से सामने आई है। इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके साथ ही अकाली दल बागी नेताओं पर भी कार्रवाई कर सकता है। गौरतलब है कि अकाली दल की ओर से अनुशासन कमेटी का पुनर्गठन किया गया है। वहीं अकाली दल के चुनाव मैदान से हटने की चल रही चर्चा पर वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने इनकार किया है। डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अकाली दल के चुनाव मैदान से पीछे हटने का कोई कारण नहीं है। आज शाम को स्थानीय स्तर पर अकाली दल नेतृत्व के साथ बैठक रखी गई है, जिसमें उपचुनाव के लिए उम्मीदवार की घोषणा पर चर्चा की जाएगी। दलजीत सिंह ने कहा कि उनकी गुरु प्रताप सिंह वडाला और महिंदर सिंह केपी से बातचीत हुई है जोकि आज शाम को मीटिंग करने के बाद पार्टी को सब बता दिया जाएगा। डॉ. दलजीत चीमा ने कहा कि स्थानीय नेतृत्व अच्छा मार्गदर्शन कर सकता है। कोर कमेटी की बैठक में भी कहा था कि हम उपचुनाव जमकर लड़ेंगे। एक-एक चुनाव कराने की बजाय 5 उपचुनाव एक साथ करा लेते तो पार्टियों को आसानी होती।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-एससीपी प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कसा तंज

नई दिल्ली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-एससीपी प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर शनिवार को तंज कसा। उन्होंने कहा कि जहां भी प्रधानमंत्री का रोड शो और रैली हुई, वहां हमारी पार्टी के कैंडिडेट ने जीत दर्ज की। इसलिए मैं प्रधानमंत्री को धन्यवाद देना चाहता हूं और इसे अपना कर्तव्य समझता हूं। उन्होंने कहा, ‘हम एमवीए के पक्ष में राजनीतिक माहौल को अनुकूल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हैं।’ वहीं, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि महा विकास आघाडी (MVA) के लिए लोकसभा चुनाव की जीत अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा ने ही तो 400 पार का नारा दिया था। आखिर अच्छे दिन के नैरेटिव का क्या हुआ? मोदी की गारंटी का क्या हुआ? देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि हमारी सरकार रिक्शे के तीन पैरों जैसी है, आप देखिए कि केंद्र की भाजपा सरकार का भी यही हाल है।’ कैसा रहा महाराष्ट्र का चुनावी नतीजा बता दें कि महाराष्ट्र में एमवीए ने 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 48 सीटों में से 29 सीटें जीती हैं। महायुति ने 18 सीटें जीतीं और सांगली से एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। मराठवाड़ा क्षेत्र में 8 सीटों में से एमवीए ने 6 सीटें जीतीं जबकि महायुति ने केवल 2 सीटें जीतीं। विदर्भ क्षेत्र की 10 सीटों में से 7 एमवीए ने जीतीं और सिर्फ 3 सीटें महायुति ने जीतीं। उत्तर महाराष्ट्र क्षेत्र में 6 लोकसभा सीटों में से एमवीए को 4 और महायुति को केवल 2 सीटें मिलीं। कोकण क्षेत्र की 6 सीटों में से महायुति ने 5 और 1 सीट एमवीए ने जीती। मुंबई और उसके उपनगरीय जिलों में 6 सीटों में से एमवीए ने 4 और महायुति ने 2 सीटें जीतीं। वहीं, पश्चिमी महाराष्ट्र क्षेत्र में 12 सीटों में से एमवीए ने 7 सीटें जीतीं, जबकि 4 महायुति और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।  

15 जून से MP में शुरू होगा कांग्रेस का ”मंथन अभियान”

भोपाल  मध्य प्रदेश के चुनावों में लगातार हार को देखते हुए कांग्रेस अब अपने संगठन को मजबूत करने आगामी 10 सालों की कार्य योजना बनाएगी. इसके लिए कांग्रेस 15 जून से मंथन अभियान शुरू करने जा रही है. इसमें पार्टी के तमाम वरिष्ट नेता ब्लॉक स्तर तक जाएंगे और पार्टी पदाधिकारी से लेकर पंचायत जिला जनपद के पदाधिकारी से पार्टी को मजबूत बनाने के सुझाव लेंगे. कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में बुलाई गई लोकसभा उम्मीदवारों और आला नेताओं की समीक्षा बैठक में इसका निर्णय लिया गया. 15  जून से अगले चुनाव की तैयारी में कांग्रेस अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और मध्य प्रदेश के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘समीक्षा बैठक में मिले फीडबैक के बाद निर्णय लिया गया है कि 4 जून को चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस 15  जून से अगले आने वाले चुनाव की तैयारी में जुट जाएगी. कांग्रेस मंथन कार्यक्रम की शुरुआत कर रही है. यह कार्यक्रम 15 जून से शुरू होगा. इसमें पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता ब्लॉक स्तर तक जाएंगे और बूथ, मंडल और सेक्टर से लेकर जनपद पंचायत, नगर पालिका के सदस्यों से बात करेंगे. इसमें सुझाव लिए जायेंगे कि कैसे संगठन को और मजबूत बनाया जा सकता है.’ मध्य प्रदेश के विकास को आगे बढ़ाने के लिए क्या पार्टी की कार्य योजना होना चाहिए. जमीनी स्तर से सुझाव लेने के बाद प्रदेश स्तर पर अलग-अलग वर्कशॉप होगी. इसमें तय किया जाएगा कि संगठन को मजबूत करने के लिए क्या-क्या बदलाव करने की जरूरत है. वर्तमान परिस्थितियों में पार्टी से कैसे युवा महिला और विभिन्न वर्ग के लोगों को जोड़ा जाए. अगले 10 साल के लिए मध्य प्रदेश में कांग्रेस का रोडमेप बनाया जाएगा. यह कार्यक्रम 15 जुलाई तक चलेगा. उम्मीदवारों को संगठन से कोई नाराजगी नहीं कांग्रेस प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह ने कहा की ‘समीक्षा बैठक के दौरान चुनाव मैदान में उतरे लोकसभा उम्मीदवारों ने अपनी बात रखी. किसी को भी संगठन या स्थानीय स्तर पर पार्टी नेताओं से कोई नाराजगी नहीं है. सभी नेताओं ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा. किसी कि कोई नाराजगी नहीं और जो खिलाफत करने वाले थे. वह सभी चुनाव के दौरान ही पार्टी छोड़कर चले गए.’ सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव में राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया. इलेक्शन कमीशन, प्रशासन ने बीजेपी के कार्यकर्ता के रूप में काम किया. पूरा चुनाव जाति, धर्म, क्षेत्र के आधार पर प्रयोग करके चुनाव जीतने के लिए किया, लेकिन मध्य प्रदेश की जनता ने बीजेपी का असली चेहरा देखा है. उन्होंने कहा कि चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा परफॉर्मेंस किया है. मध्य प्रदेश और पूरे देश में चौंकाने वाले नतीजे आने वाले हैं.  

कांग्रेस 99 पर क्या पहुंची, आतंकवादी समूह सक्रिय हो गए- बीजेपी

 नई दिल्ली भाजपा ने आतंकवादी संगठनों को मुंहतोड़ जवाब देने का दावा करते हुए कहा है कि कांग्रेस 99 पर क्या पहुंची देश में आतंकवादी समूह फिर से सक्रिय हो गए हैं। फैजाबाद में भाजपा की हार के बाद जैश-ए-मोहम्मद अयोध्या में राम मंदिर को उड़ाने की धमकी देने लगा है। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “कांग्रेस 99 पर क्या पहुंची, आतंकवादी समूह सक्रिय हो गए। एक तरफ विपक्ष फैजाबाद में भाजपा की हार का जश्न मना रहा है तो दूसरी तरफ जैश-ए-मोहम्मद अयोध्या में राम मंदिर को उड़ाने की धमकी दे रहा है। कांग्रेस की तरह, उन्हें भी जल्द ही एहसास होगा कि 99 पर कोई केवल ‘नैतिक’ जीत का ही दावा कर सकता है, सरकार बनाने का नहीं। मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।” लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के अयोध्या से हारने के बाद और पूरे देश के नतीजे आने के बाद से ही विपक्षी दल लगातार भाजपा की जीत पर सवाल उठा रहे हैं। अयोध्या की हार को भाजपा के लिए बड़ी हार बताते हुए विपक्षी दल लोकसभा में भाजपा की सीटों की संख्या कम होने पर भी कटाक्ष कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह भाजपा की नैतिक हार है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों में जम्मू कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखी गई है। आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अयोध्या में राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। आतंकी धमकी के मद्देनजर अयोध्या में सुरक्षा-व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है।

हरियाणा कांग्रेस में फिर मचा घमासान, एसआरके और हुड्डा गुट आमने-सामने

चंडीगढ़  लोकसभा चुनाव में हरियाणा की पांच सीटों पर जीत के साथ जहां इस बार प्रदेश कांग्रेस मजबूती से ऊपर उठी है, वहीं चुनाव परिणाम के बाद टिकट बंटवारे को लेकर घमासान छिड़ गया है। चुनाव में जीतने वाले चार सांसद तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में एकजुटता दिखा रहे हैं, लेकिन कुमारी सैलजा अलग चल रही हैं। वह आए दिन नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के फैसलों पर सवालिया निशान लगा रही हैं। हालांकि, एसआरके गुट में रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी ने चुप्पी साध रखी है। सिरसा से सांसद बनने के बाद सैलजा ने हरियाणा में जिलास्तर पर अपने समर्थकों को लामबंद करना शुरू कर दिया है। समर्थकों के साथ बैठकों के दौरान सैलजा लगातार लोकसभा चुनाव में टिकट आवंटन को लेकर बयान दिए जा रही हैं। सैलजा ने अंबाला में वरुण मुलाना को उनकी सिफारिश पर टिकट दिए जाने का बयान देकर सभी को चौंका दिया है। इसके बाद उन्होंने गुड़गांव और भिवानी-महेंद्रगढ़ में टिकट बंटवाने को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सैलजा ने कह दी ये बात बासांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि और बेहतर तरीके से टिकट वितरण कर सकते थे। सैलजा ने अपनी ही पार्टी से सवाल पूछा कि कैंडिडेट इम्पोर्ट करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने माना कांग्रेस में गुटबाजी है। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि ऐसे ही तेरा मेरा करते रहे तो मुश्किल हो जाएगी। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सैलजा ने कहा कि प्रभारी को निष्पक्ष होगा होगा। मैरिट के आधार पर टिकटें दी जाए। सीएम पद को लेकर सैलजा ने कहा कि इसका फैसला हाईकमान करेगा। उदयभान ने भी सैलजा के खिलाफ खोला मोर्चा वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर जहां भूपेंद्र सिंह हुड्डा चुप हैं, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान ने भी सैलजा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा है कि वह पार्टी में वरिष्ठ हैं। उन्हें जो भी बात कहनी है वह पार्टी के प्लैटफॉर्म पर आकर कहें। कांग्रेस अध्यक्ष ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि टिकट वितरण बेहतर हुआ था, तभी हरियाणा में कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली है। हरियाणा में कांग्रेस का ग्राफ भी बढ़ा है। कुमारी सैलजा को इस तरह से जनता में या फिर मीडिया में बयान नहीं देना चाहिए। कांग्रेस इस चुनाव के बाद मजबूत होकर उभरी है और प्रदेश के विधानसभा चुनाव में 70 से अधिक सीटों पर जीतकर सरकार बनाएगी।

‘कांग्रेस अब 99 के चक्कर में फंस गई है’, जेडीयू ने खड़गे पर किया पलटवार

Encounter continues in Kulgam, eight terrorists eliminated

नई दिल्ली कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र में गठबंधन सरकार गलती से बनी है और वह कभी भी गिर सकती है। आपको बता दें कि लोकसभा चुनावों में भाजपा को कुल 240 सीटें मिलीं, जो बहुमत के लिए जरूरी 272 के आंकड़े से कम है। हालांकि चुनाव पूर्व तैयार हुए एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला है। केंद्र में अब एनडीए की सरकार भी बन चुकी है। खड़गे ने आगे कहा, “एनडीए सरकार गलती से बनी है। मोदी जी के पास जनादेश नहीं है। यह अल्पमत की सरकार है। यह सरकार कभी भी गिर सकती है। हम चाहते हैं कि यह चलती रहे। देश के लिए यह अच्छा हो। हमें देश को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री की आदत है कि वे किसी चीज को चलने नहीं देते। लेकिन हम देश को मजबूत बनाने के लिए सहयोग करेंगे।” पीएम मोदी और गठबंधन सरकार पर खड़गे के कटाक्ष पर बिहार में उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। जेडीयू ने खड़गे को कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रधानमंत्रियों के स्कोरकार्ड की याद दिलाई। बिहार के पूर्व आईपीआरडी मंत्री और जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने खड़गे की जानकारी पर सवाल उठाया। उन्होंने उनसे पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के स्कोरकार्ड के बारे में पूछा। 1991 के आम चुनाव में कांग्रेस ने 2024 में भाजपा के बराबर सीटें जीती थीं। जब कोई भी पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर पाई, तो कांग्रेस ने लगभग रिटायर हो चुके नरसिम्हा राव के नेतृत्व में अल्पमत की सरकार बनाई। कांग्रेस पार्टी किसी तरह सरकार बनाने में कामयाब रही। नरसिम्हा राव ने चुपचाप छोटी पार्टियों में फूट डाली और दो साल में अल्पमत वाली कांग्रेस को बहुमत वाली पार्टी में बदल दिया। नीरज कुमार ने पूछा कि क्या खड़गे कांग्रेस की विरासत से अनभिज्ञ हैं। कांग्रेस अब “99 के चक्कर” में फंस गई है। वहीं राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा, “खड़गे सही कह रहे हैं। जनादेश मोदी सरकार के खिलाफ था। मतदाताओं ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। फिर भी वे सत्ता में आए।”  

अब मोदी मंत्रिमंडल में जगह चाहती हैं बारामती से हार चुकीं अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार!

Collector Commissioner cannot write APAR of DFO and Forest Conservator

मुंबई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद में किसी भी तरह का प्रस्ताव स्वीकार करने में खुशी होगी और वह इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का प्रयास करेंगी.उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी एनसीपी पुणे जिले की बारामती लोकसभा सीट पर मिली हार का आत्मचिंतन कर रही है और विश्लेषण के बाद सुधारात्मक कदम उठाएगी. लोकसभा चुनाव के दौरान सुनेत्रा पवार पश्चिमी महाराष्ट्र के बारामती सीट पर अपनी ननद और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले से हार गईं थी. गुरुवार को उन्होंने राज्य में राज्यसभा उपचुनाव के लिए एनसीपी उम्मीदवार के तौर पर मुंबई में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. चूंकि वह मैदान में एकमात्र उम्मीदवार हैं, इसलिए सुनेत्रा पवार का संसद के ऊपरी सदन में निर्विरोध चुना जाना तय है. अवसर का उठाऊंगी लाभ पुणे पहुंचने पर स्थानीय एनसीपी इकाई ने उनका भव्य स्वागत किया. पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का प्रस्ताव स्वीकार करेंगी, उन्होंने कहा, “बेशक, अगर मौका मिला तो मैं निश्चित रूप से इस अवसर का लाभ उठाऊंगी.” अजित पवार की अगुआई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), जो कि भाजपा की सहयोगी है, का वर्तमान में केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जिसने पिछले रविवार को शपथ ली थी. एनसीपी ने वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को नई एनडीए सरकार में स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री के रूप में शामिल करने के भाजपा के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. बारामती की हार की कर रहे हैं समीक्षा सुनेत्रा पवार ने कहा कि पवार परिवार के गढ़ बारामती लोकसभा क्षेत्र में प्रचार के दौरान उन्हें लोगों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, लेकिन अंततः मतदाताओं के फैसले को स्वीकार करना होगा. उन्होंने जोर देकर कहा, “हम (बारामती में हार का) आत्मनिरीक्षण कर रहे हैं कि वास्तव में क्या हुआ और विश्लेषण के बाद सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे.” सुनेत्रा पवार ने एनसीपी के वरिष्ठ नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं को उन्हें राज्यसभा में प्रवेश का अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया.

भुजबल बोले नासिक से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, राज्यसभा नामांकन के लिए भी उत्सुक थे

Rahul Gandhi reached the house of the victims, hugged and consoled

पुणे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता और महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने  कहा कि उनकी इच्छा सांसद बनने की है और इसीलिए वह नासिक क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे तथा राज्यसभा नामांकन के लिए भी उत्सुक थे। भुजबल इन खबरों को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राकांपा अध्यक्ष अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उच्च सदन के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद वह परेशान थे। यह पूछे जाने पर कि क्या लोकसभा और राज्यसभा टिकट को लेकर उनके साथ अन्याय हुआ है, प्रमुख ओबीसी नेता ने कहा कि यह सवाल ‘उनसे’ पूछा जाना चाहिए। सुनेत्रा पवार ने बृहस्पतिवार को आगामी राज्यसभा उपचुनाव के लिए राकांपा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल किया। इससे पहले वह बारामती से लोकसभा चुनाव हार गई थीं। फरवरी में प्रफुल्ल पटेल द्वारा अपनी सीट खाली करने और उनके छह साल के पूर्ण कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद उपचुनाव की आवश्यकता हुई। भुजबल ने कहा, “यह मेरी इच्छा है (सांसद बनने की)। इसीलिए मैं नासिक लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने को तैयार था। मुझे बताया गया था कि दिल्ली में मेरा टिकट फाइनल हो गया है, मैंने काम करना शुरू कर दिया था, लेकिन जब फैसला (नाम की घोषणा) एक महीने तक खिंच गया, तो मैंने काम बंद कर दिया क्योंकि काफी अपमान हो चुका था।’ उन्होंने कहा कि भाजपा नीत महायुति गठबंधन में राकांपा की सहयोगी शिवसेना के हेमंत गोडसे भी नासिक से टिकट के लिए कोशिश कर रहे थे। भुजबल ने कहा कि उन्होंने तब फैसला किया कि जिसे भी टिकट मिलेगा, वह खुश रहेंगे। नासिक सीट पर शिवसेना (यूबीटी) के राजाभाऊ वाजे को जीत मिली। भुजबल ने कहा कि जब पार्टी के मामलों की बात आती है, तो सभी चीजें किसी एक की इच्छा के अनुसार नहीं होती हैं। उन्होंने कहा, ‘(उन्हें टिकट न देने के) कुछ कारण हो सकते हैं। कभी-कभी, यह नियति या कोई मजबूरी होती है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या राकांपा में ‘वंशवाद की राजनीति’ हो रही है, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इससे पहले बृहस्पतिवार को भुजबल ने कहा था कि वह राज्यसभा टिकट के लिए उत्सुक थे, लेकिन वह सुनेत्रा पवार को उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज नहीं हैं और यह पार्टी का ‘सामूहिक निर्णय’ था।    

येदियुरप्पा के खिलाफ मामला राहुल गांधी के मानहानि मुकदमे के प्रतिशोध में रची गयी राजनीतिक साजिश है : भाजपा

बेंगलुरु  कर्नाटक प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि राज्य की कांग्रेस सरकार पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ पॉक्सो मामले में बदले की राजनीति कर रही है।भाजपा का कहना है कि येदियुरप्पा के खिलाफ मामला कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मानहानि मुकदमे के प्रतिशोध में रची गयी राजनीतिक साजिश है। पार्टी अदालत के आदेश का सम्मान करने और इसके पीछे की मंशा को चुनौती देने के लिए प्रतिबद्ध है। पूर्व भाजपा राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर निशाना साधते हुए कहा, “क्या यह बदले की राजनीति नहीं है। उन्होंने (सिद्दारमैया) दावा किया था कि वह इस तरह की चाल नहीं चलेंगे, लेकिन अब वह ठीक वैसा ही कर रहे हैं। राज्य के लोग उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहरायेंगे।” उन्होंने मामला दर्ज होने के बाद सरकार की कार्रवाई में चार महीने के विलंब का उल्लेख किया और गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर द्वारा मामले को खारिज करने वाले बयान का हवाला दिया। विधानपरिषद सदस्य एवं भाजपा के मुख्य सचेतक एन रविकुमार ने भी मामले को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि शिकायतकर्ता का अधिकारियों और राजनेताओं के खिलाफ कई मामले दर्ज करने का इतिहास रहा है। विधानसभा परिषद सदस्य चालावाड़ी नारायणस्वामी ने कहा, “चार महीने की निष्क्रियता के बाद कांग्रेस अचानक हरकत में आयी है। येदियुरप्पा के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाना बेहद निंदनीय है।” गौरतलब है कि गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में येदियुरप्पा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।        

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अकेले लड़ सकती है बीजेपी

मुंबई 2024 लोकसभा चुनावों के बाद से महाराष्ट्र में उथल-पुथल की अटकलें लग रही है। अब सामने आया है कि लोकसभा चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद बीजेपी विधानसभा चुनावों में अकेले चुनाव लड़ सकती है। सूत्रों के अनुसार पार्टी ने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक आंतरिक सर्वेक्षण कर रही है। यह सर्वेक्षण लोकसभा चुनावों में अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हो रहा है। उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र में लोकसभा की सीटों की संख्या सबसे ज्यादा है। उत्तर प्रदेश में 80 और महाराष्ट्र में 48 सीटें हैं। इनमें बीजेपी को सिर्फ 9 पर जीत मिली है। बीजेपी के आंतरिक सर्वे करवाने की चर्चा ऐसे वक्त पर सामने आई है जब आरएसएस से जुड़े रहे एक नेता ने अजित पवार से गठजोड़ करने पर सवाल खड़े किए हैं। क्या है बीजेपी की तैयारी? लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 28 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे। इनमें उसे सिर्फ 9 पर जीत मिली है। राज्य में इस साल अक्टूबर में विधानसभा प्रस्तावित है। ऐसे में पार्टी आगे की रणनीति बनाने में जुटी है। सूत्रों के अनुसार बीजेपी ने 2019 के विधानसभा चुनावों में राज्य की 106 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। पार्टी ने आगे की रणनीति को तय करने के लिए इन्हीं 106 विधानसभा क्षेत्रों में एक आंतरिक सर्वेक्षण शुरू किया है। सूत्रों की मानें पार्टी ने अभी तक अजित पवार को छोड़ने पर फैसला नहीं किया है, लेकिन पार्टी मौजूदा मूड और सीटों को अकेले ही बरकरार रखने की चुनौतियों का आकलन कर रही है। अगर पार्टी विधानसभा चुनावों में अकेले जाने का फैसला करती है, तो जमीनी हकीकत का अध्ययन करने के लिए जल्द ही शेष 182 विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह के सर्वेक्षण शुरू किए जाएंगे। महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें है। सरकार बनाने के लिए 145 सीटें चाहिए। सर्वेक्षण में क्या-क्या है? बीजेपी के एक सूत्र ने कहा कि ये सर्वेक्षण यह पता लगाने के लिए शुरू किए गए हैं कि पार्टी अकेले कैसे बहुमत हासिल करेगी। इसके अलावा सर्वेक्षण में यह भी सामने आए कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन में भाजपा कैसा प्रदर्शन करेगी? सर्वेक्षण यह भी पता लगाएगा कि क्या एनसीपी के साथ गठबंधन जारी रहना चाहिए या फिर नहीं। 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की सीटें 23 के मुकाबले घटकर 9 पर आ गईं, जबकि शिवसेना ने 7 और एनसीपी ने एक सीट जीती, जिससे महायुति की कुल ताकत 17 हो गई, जबकि महा विकास आघडी को 31 सीटें मिली हैं। सूत्रों कहा कहना है कि यह सर्वेक्षण आरएसएस पत्रिका द ऑर्गनाइजर द्वारा यह सुझाव दिए जाने से बहुत पहले शुरू किए गए थे कि अजीत पवार को एनडीए में शामिल करने के बीजेपी के कदम ने पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित किया है। द ऑर्गनाइजर में प्रकाशित एक लेख में आरएसएस के वरिष्ठ नेता रतन शारदा ने लिखा था कि महाराष्ट्र बीजेपी और एकनाथ शिंदे के पास राज्य में आराम से बहुमत था। उन्होंने लिखा था कि पार्टी ने अजित पवार को साथ लेकर अपनी ब्रैंड वैल्यू खो दी। लेख पर क्या बाेले नेता? महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्याय का कहना है कि द ऑर्गेनाइजर स्वतंत्र विचारों की पत्रिका है। बीजेपी हर अखबार के संपादकीय का सम्मान करती है। बीजेपी हर जीत और हार के बाद मंथन करती है और उसके आधार पर पार्टी आगे की रणनीति तय करती है। उन्होंने विधानसभा चुनाव में बीजेपी के एनसीपी से अलग होने की संभावना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यह लेख भाजपा का आधिकारिक रुख नहीं है। इसके किसी भी पदाधिकारी ने कोई बयान नहीं दिया है। यह एक व्यक्तिगत विचार है। हर एक बात पर हमें स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया की जरूरत नहीं है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले सप्ताह पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए सरकार से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। तब उन्होंने कहा था कि महायुति को 43.6 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि महा विकास अघाड़ी को 43.9 प्रतिशत वोट मिले हैं। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद उपमुख्यमंत्री बने रहने का फैसला किया था।

अल्मोड़ा: जंगल की आग में जलने से चार वन कर्मियों की मौत पर प्रियंका गांधी ने जताया दुख, राज्य सरकारों से की अपील

First crime registered in Sarni police station under Indian Judicial Code against SDO Forest Vijay Maurya

उत्तराखंड कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के वनक्षेत्र में लगी आग की चपेट में आने से चार वनकर्मियों की मौत पर दुख जताते हुए शुक्रवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को आग लगने की घटनाओं के रोकने के उपाय करने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिमालय को बचाने के लिए सबके सहयोग से व्यापक स्तर पर कारगर प्रयास किए जाने की भी जरूरत है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में सिविल सोयम वन प्रभाग के तहत बिनसर वन्यजीव विहार में आग की चपेट में आने से चार वनकर्मियों की मृत्यु हो गयी और चार अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में जंगल की आग बुझाने गए चार कर्मचारियों की मृत्यु और कई अन्य के घायल होने का समाचार अत्यंत दुखद है। सभी के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हूं। मैं पीड़ित परिवारों को मुआवजा और हर संभव स्तर पर सहायता का आग्रह राज्य सरकार से करती हूं।” उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कई महीने से उत्तराखंड के जंगल लगातार जल रहे हैं। सैकड़ों हेक्टेयर जंगल तबाह हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में भी जंगलों में जगह-जगह आग लगने की सूचनाएं हैं। एक अध्ययन के मुताबिक, हिमालय क्षेत्र के जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर हमारे हिमालय और पर्वतीय पर्यावरण पर हुआ है।” प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘मेरी केंद्र और राज्य सरकारों से अपील है कि आग लगने की घटनाओं के रोकने के उपाय हों और हिमालय को बचाने के लिए सबके सहयोग से व्यापक स्तर पर कारगर प्रयास किए जाएं।”  

कांग्रेस ने कहा- NEET घोटाला दूसरा व्यापम, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस पर मूकदर्शक बने नहीं रह सकते

नई दिल्ली कांग्रेस ने चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश से जुड़ी परीक्षा ‘नीट-स्नातक’ में कथित धांधली को लेकर शुक्रवार को इसे ‘व्यापम 2.0′ करार दिया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस पर मूकदर्शक बने नहीं रह सकते। मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि इस मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में फोरेंसिक जांच होनी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बयान में आरोप लगाया कि मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री व एनटीए ने नीट घोटाले की लीपापोती चालू कर दी है। पेपर लीक नहीं हुआ तो गिरफ़्तारियां क्यों हुई? उन्होंने सवाल किया, ‘‘अगर नीट में पेपर लीक नहीं हुआ तो बिहार में 13 आरोपियों को पेपर लीक के चलते गिरफ़्तार क्यों किया गया? क्या रैकेट में शामिल शिक्षा माफिया व संगठित गिरोह को पेपर के बदले 30-50 लाख रुपये तक के भुगतान का पटना पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पर्दाफ़ाश नहीं किया? गुजरात के गोधरा में नीट-स्नातक में धोखाधड़ी करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ नहीं हुआ है? ” उन्होंने यह सवाल भी किया, ‘‘अगर मोदी सरकार के मुताबिक़ नीट में कोई पेपर लीक नहीं हुआ तो ये गिरफ़्तारियां क्यों हुई? इससे क्या निष्कर्ष निकला? क्या मोदी सरकार देश की जनता की आंखों में पहले धूल झोंक रही थी या अब?” सरकार ने 24 लाख युवाओं के अरमानों का गला घोंटा खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने 24 लाख युवाओं के अरमानों का गला घोंटा है। उन्होंने दावा किया, ‘‘इन एक लाख सीटों (एमबीबीएस की) में से क़रीब 55,000 सरकारी कॉलेजों की सीट हैं जहां एससी, एसटी, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं। मोदी सरकार ने एनटीए का दुरुपयोग कर स्कोर और रैंक की ज़ोरदार धांधली की है जिससे आरक्षित सीटों का कटऑफ भी बढ़ गया है।” ‘नीट घोटाला’ ‘व्यापम 2.0′ है- पवन खेड़ा कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि ‘नीट घोटाला’ ‘व्यापम 2.0′ है जिस पर मोदी सरकार लीपापोती करना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार को नीट घोटाले में उच्चतम न्यायालय न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र फोरेंसिक जांच का आदेश देना चाहिए।” खेड़ा ने कहा कि कुछ भी गड़बड़ नहीं होने संबंधी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान ‘शर्मनाक’ और छात्रों के घावों नमक छिड़कने की तरह है। उन्होंने कहा, ‘‘क्या यह सच नहीं है कि इस साल 67 टॉपर थे जिन्हें 720 पूर्णांक मिले? 2023 में यह संख्या सिर्फ दो थी। 2022 में कोई भी अभ्यर्थी पूरे अंक हासिल नहीं कर सका। 2021 में सिर्फ तीन उम्मीदवार ही यह स्कोर हासिल कर सके।” प्रधानमंत्री हमेशा की तरह चुप क्यों हैं- कांग्रेस उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी हमेशा मूकदर्शक नहीं रह सकते। जब 24 लाख युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है, तो वे चुप क्यों हैं? खेड़ा का कहना था, ‘‘अगर मोदी सरकार का दावा है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी है, तो उसे पिछले साल और इस साल 580 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों का पूरा परिणाम एनटीए द्वारा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। 580 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों के केंद्रों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पता चल सके कि कितने छात्र अपने स्थान से दूर नीट परीक्षा देने आए थे।” उन्होंने कहा, ‘‘लाखों युवा छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए केवल उच्चतम न्यायालय की निगरानी में फोरेंसिक जांच ही एक समाधान है। मोदी सरकार को खुद को देश के प्रति जवाबदेह बनाना चाहिए।”  

JDU ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए भाजपा उम्मीदवार का सपोर्ट करने की बात कही, कैबिनेट में दबदबा

Rahul Gandhi released Gmail account for public

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट में इस बार भी भारतीय जनता पार्टी का ही दबदबा रहने वाला है। जी हां, जनता दल (यूनाइटेड) ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए भाजपा उम्मीदवार का सपोर्ट करने की बात कही है। मालूम हो कि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का जदयू हिस्सा है। JDU के नेता केसी त्यागी ने कहा कि उनकी पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) एनडीए का हिस्सा हैं और लोकसभा स्पीकर पद के लिए बीजेपी की ओर से नामित कैंडिडेट का समर्थन करेंगे। त्यागी ने कहा, ‘जेडीयू और टीडीपी मजबूती से NDA से जुड़े हैं। हम स्पीकर के लिए भाजपा के नामित व्यक्ति का समर्थन करेंगे।’ केसी त्यागी से कुछ विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों के बारे में सवाल पूछा गया। उनसे कहा गया कि क्या नया लोकसभा अध्यक्ष टीडीपी या जेडीयू से हो सकता है? इसके जवाब में उन्होंने भाजपा की ओर से नामित उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कही। मालूम हो कि भाजपा केंद्र में अपने सहयोगियों के साथ गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही है। जेडीयू लीडर त्यागी की टिप्पणी इस टिप्पणी को बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी स्पीकर पद के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा कर सकती है। अध्यक्ष पद का उम्मीदवार पार्टी के सहयोगियों में से नहीं होने वाला है। 26 जून को लोकसभा अध्यक्ष पद का चुनाव लोकसभा 26 जून को अपने नए अध्यक्ष का चुनाव करेगी। सदन के सदस्य उम्मीदवारों के समर्थन में प्रस्ताव के लिए एक दिन पहले दोपहर 12 बजे तक नोटिस दे सकते हैं। 18वीं लोकसभा की पहली बैठक 24 जून को होगी और सत्र 3 जुलाई को समाप्त होगा। लोकसभा की ओर से इसे लेकर बुलेटिन जारी किया गया। इसमें कहा गया कि अध्यक्ष के चुनाव के लिए तय तिथि से एक दिन पहले कोई भी सदस्य अध्यक्ष पद के लिए किसी अन्य सदस्य के समर्थन में प्रस्ताव के लिए महासचिव को लिखित रूप से नोटिस दे सकता है। मौजूदा मामले में अध्यक्ष के चुनाव के लिए प्रस्ताव के वास्ते नोटिस मंगलवार, 25 जून दोपहर 12 बजे से पहले दिए जा सकते हैं। सत्र के पहले 2 दिन नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के लिए समर्पित होंगे। अध्यक्ष के चुनाव के लिए 26 जून की तिथि तय की गई है, जबकि 27 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। प्रस्ताव के लिए नोटिस का समर्थन किसी तीसरे सदस्य द्वारा किया जाना चाहिए। साथ ही, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार द्वारा यह बयान भी दिया जाना चाहिए कि वह निर्वाचित होने पर अध्यक्ष के रूप में काम करने के लिए तैयार है। लोकसभा सचिवालय ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि कोई सदस्य अपना नाम प्रस्तावित नहीं कर सकता है या अपने नाम वाले किसी प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर सकता है।

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