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श्याम के भजनों से गूंज उठा पांडाल, चढ़ोकार परिवार ने किया खाटु श्याम भजन संध्या का आयोजन आयोजन ।

The pandal echoed with the hymns of Shyam, Chadhokar family organised Khatu Shyam Bhajan Sandhya. स्थानीय सहित छिंदवाड़ा के कलाकारों ने दी भजन संध्या की प्रस्तुति। हरिप्रसाद गोहे  आमला। रविवार, रात गोविंद कालोनी क्षेत्र में स्थित चढ़ोकार निवास पर चढ़ोकार परिवार द्वारा बाबा खाटू श्याम भजन संध्या का आयोजन आयोजित किया गया। जिसमे स्थानीय कलाकार महेन्द्र मानकर, एवं छिंदवाड़ा की मशहूर भजन गायिका अनुराधा ने एक से बढ़कर एक बाबा खाटू श्याम भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्याम भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उक्त आयोजन  नगर में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का अनूठा संगम बन गया। कार्यक्रम में नगर सहित आसपास क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वरविहार ग्रुप के संचालक सुरेंद्र मानकर द्वारा किया गया। उन्होंने श्री श्याम बाबा का मनमोहक दरबार सजाया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। बाबा के दरबार को फूलों, दीपों और रंगीन रोशनी से सजाया गया था।  आरती के पश्चात छप्पन भोग अर्पित किया गया, जिससे वातावरण में सुगंध और भक्ति दोनों का अद्भुत समावेश हुआ। इसके बाद आमला शहर के प्रसिद्ध गायक महेंद्र मानकर ने कीर्तन की शुरुआत की। उनके द्वारा गाए गए भजनों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महेंद्र मानकर ने एक के बाद एक कई लोकप्रिय और भक्तिमय भजन प्रस्तुत किए, जिनमें “श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम”, “तेरे दर पे आया हूँ श्याम”, “श्याम तेरा दीवाना” जैसे गीतों ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति का भाव जगा दिया। उनकी मधुर आवाज़ और भावपूर्ण प्रस्तुति से पूरा पंडाल श्याम नाम के जयकारों से गूंज उठा। भजन संध्या की शोभा तब और बढ़ गई जब छिंदवाड़ा की प्रसिद्ध भजन गायिका अनुराधा मंच पर पहुंचीं।  उन्होंने अपनी भक्ति और संगीत से वातावरण को और अधिक ऊर्जावान बना दिया। अनुराधा ने “तीन बार के धारी तीनों बाण चलाओ ना”, “मेरी गाड़ी मेरा बंगला मेरा पैसा सब कुछ तेरा सरकार”, “जरीब की पगड़ी बांधे सुंदर आंखों वाला”, “करके इशारे बुलाई गई रे बरसाने की छोरी”, “बांके बिहारी तेरे कजरारे नैन”, “तु कृपा कर बाबा कीर्तन करवाऊंगी”, “श्याम बाबा तेरे पास आए हैं चरणों में तेरे अरदास लाया हूं”, “सुन लो कन्हैया अर्जी हमारी”, “सियाराम जी के चरणों के दास बालाजी” जैसे एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए।उनकी हर प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूम उठे। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और युवा सभी भक्ति के इस माहौल में भावविभोर होकर नृत्य करते नजर आए। देर रात तक कीर्तन चलता रहा और पंडाल में “जय श्री श्याम”, “श्याम बाबा की जय” के जयकारे गूंजते रहे। भजन संध्या का यह आयोजन न केवल भक्तिभाव से ओत-प्रोत रहा, बल्कि इसने समाज में एकता, प्रेम और भक्ति का संदेश भी दिया। कार्यक्रम में गौशाला परिवार, व्यापारी संघ, नगर के समाजसेवी, महिला मंडल और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।  रात लगभग 12 बजे कार्यक्रम का समापन छप्पन भोग के प्रसाद वितरण के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के चरणों में प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम की सफलता पर आयोजन समिति और यशवंत चढ़ोकार परिवार का नगरवासियों ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर भक्तों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से समाज में भक्ति और सद्भाव का वातावरण बनता है और नई पीढ़ी में भी भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था जाग्रत होती है।

नलखेड़ा नगर में देवउठनी ग्यारस पर किया तुलसी विवाह कार्यक्रम

Tulsi marriage ceremony was organised on Devuthani Gyaras in Nalkheda town. संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नगर में देवउठनी ग्यारस के उपलक्ष में नगर की महिला और पुरुषों द्वारा तुलसी विवाह का कार्यक्रम रखा गया जिसमें सप्तमी के दिन माता पूजन धोली कलश  कार्यक्रम रखा गया, ग्यारस के दिन श्री राम मंदिर से भगवान शालिग्राम की बारात बैंड बाजे के साथ निकली जो नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए बारात निकली जहां रास्ते में नगर की जनता द्वारा जगह जगह पुष्पों से बारात का स्वागत किया गया व फलाहार मिठाई से स्वागत किया जिसमें बाराती नाचते गाते हुए भारत में चल रहे थे, ,उसके पश्चात  बारात गणपति मंदिर पहुंची जहां पर तुलसी माता और भगवान शालिग्राम का विधि विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया साथ ही तुलसी माता के  मामा पवन कुशवाहा द्वारा शादी विवाह का हथेला छुड़वाया गया,  उसके पश्चात नगर के भक्तगणों   द्वारा भोजन प्रसादी का आयोजन रखा गया था जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भोजन प्रसादी का लाभ उठाया !

मां बगलामुखी मंदिर में बच्चे कर रहे छीना-झपटी, भिक्षावृत्ति का वीडियो वायरल; भोपाल मॉडल जैसी कार्रवाई की मांग — SDM व मंदिर प्रशासन पर सवाल

Video of children engaging in physical assault and begging at the Maa Baglamukhi Temple goes viral; demands for action similar to the Bhopal model—SDM and temple administration questioned. संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा। विश्वप्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से जबरदस्ती भिक्षा मांगने और सामान छीनने की कोशिश का वीडियो वायरल हो गया है। वीडियो में कुछ बच्चे पर्यटकों और भक्तों के पीछे भागते, सामान पकड़ते और छीना-झपटी की कोशिश करते दिख रहे हैं। इस घटना ने मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की चौकसी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का दावा सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है। धार्मिक पर्यटन स्थल होने के बावजूद सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने में प्रशासन नाकाम नजर आ रहा है। भोपाल में भिक्षावृत्ति अपराध, नलखेड़ा में क्यों ढील? भोपाल में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के तहत भीख मांगना और देना, दोनों को दंडनीय अपराध घोषित किया है। साथ ही भिक्षुकों के पुनर्वास की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है — “जब यह सख्त कदम राजधानी में उठाया जा सकता है, तो नलखेड़ा जैसे भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल पर क्यों नहीं?” SDM सर्वेश यादव की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल मंदिर परिसर में 24 घंटे पुलिसकर्मी और CCTV कैमरे मौजूद हैं। इसके बावजूद भिक्षावृत्ति और श्रद्धालुओं के साथ असुविधा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि SDM नलखेड़ा सर्वेश यादव द्वारा प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है और मंदिर क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिखते। स्थानीय नागरिकों की प्रमुख मांगें भिक्षावृत्ति में शामिल बच्चों की पहचान कर पुनर्वास कराया जाए बच्चों को भिक्षा दिलाने वाले परिजनों/गिरोहों पर FIR मंदिर परिसर में सुरक्षा एवं चेकिंग सिस्टम मजबूत किया जाए बाल संरक्षण विभाग द्वारा नियमित अभियान चलाया जाए त्वरित शिकायत और कार्रवाई के लिए हेल्पलाइन स्थापित हो “नलखेड़ा अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल, व्यवस्था पर समझौता नहीं” भक्तों ने कहा कि माँ बगलामुखी धाम की प्रतिष्ठा विश्वस्तरीय है। ऐसे में प्रशासन को भोपाल मॉडल लागू कर मंदिर क्षेत्र को भिक्षावृत्ति-मुक्त बनाना चाहिए। “भोपाल में नियम लागू हो सकते हैं, तो नलखेड़ा में क्यों नहीं?” यह सवाल अब स्थानीय समाज और श्रद्धालुओं का है।

प्रेस क्लब नलखेड़ा ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ की बड़ी पहल

Press Club Nalkheda took a big initiative against quack doctors. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! क्षेत्र में बढ़ते झोलाछाप डॉक्टरों के आतंक और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर अब प्रेस क्लब नलखेड़ा ने निर्णायक कदम उठाया है। बीते मंगलवार को प्रेस क्लब प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) को एक शिकायती आवेदन सौंपा, जिसमें झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन में उल्लेख किया गया कि नलखेड़ा नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता के लोगों का इलाज कर रहे हैं। इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, बल्कि शासन के स्वास्थ्य नियमों का भी खुला उल्लंघन हो रहा है। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं राज्य में झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त अभियान चलाने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन नलखेड़ा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आवेदन में इस बात पर नाराजगी जताई गई कि पूर्व में जिन झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग ने सील लगाई थी, उन्होंने सील तोड़कर पुनः अपने क्लीनिक चालू कर लिए, जो सीधा-सीधा कानूनी अपराध है। प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश कश्यप ने कहा कि प्रेस क्लब ने यह शिकायत जनता की सुरक्षा और जनहित में दी है। जब प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तब मीडिया को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। अब स्वास्थ्य विभाग को यह साबित करना होगा कि मुख्यमंत्री के निर्देश सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी लागू होते हैं। आवेदन में यह भी मांग की गई है कि जिन झोलाछाप डॉक्टरों ने सील तोड़ी है, उनके खिलाफ तत्काल कार्यवाही की जाकर उनके क्लीनिकों को स्थायी रूप से बंद कराया जाए। प्रेस क्लब ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में यह लापरवाही किसी बड़ी जनस्वास्थ्य त्रासदी का कारण बन सकती है। छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में जिस तरह जहरीली दवा से मासूम बच्चों की मौत हुई थी, उसी तरह झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा गलत दवा या इलाज नलखेड़ा क्षेत्र में भी किसी गंभीर हादसे का रूप ले सकता है। इसलिए इस खतरे को देखते हुए तत्काल और ठोस कार्रवाई आवश्यक है। जनता और मीडिया की बढ़ती जागरूकता के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग वास्तव में इन झोलाछाप डॉक्टरों पर शिकंजा कस पाएगा या मामला फिर से फाइलों में दबकर रह जाएगा। इस संबंध में जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश देहलकर ने कहा कि, झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ जांच कराई जाएगी। यदि किसी ने सील तोड़ी है या अवैध रूप से इलाज किया जा रहा है, तो उसके विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

नलखेड़ा में सरदार पटेल जयंती पर भव्य रैली

Grand rally on Sardar Patel Jayanti in Nalkheda चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर आज नलखेड़ा में समस्त पाटीदार समाज नलखेड़ा द्वारा भव्य शोभायात्रा एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। नगर में सुबह से ही उत्साहपूर्ण माहौल रहा और लोगों में विशेष जोश देखा गया। नगर के प्रमुख मार्गों को आकर्षक पुष्प सजावट, रंग-बिरंगे झंडों एवं स्वागत द्वारों से सजाया गया था। बच्चों व युवाओं की टोलियों द्वारा देशभक्ति गीतों, ढोल-ढाकों और बैंड-बाजों के साथ रैली निकाली गई। महिलाओं ने परंपरागत परिधानों में भाग लेकर समाज की एकता और सांस्कृतिक गौरव को प्रकट किया। रैली नगर के मुख्य मार्गों से होकर सरदार पटेल की प्रतिमा स्थल पर पहुंची, जहाँ उपस्थित जनसमूह द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। समाजजनों द्वारा राष्ट्रीय एकता और भाईचारे के नारों से शहर गुंजायमान होता रहा। इस अवसर पर श्री गोविंद पाटीदार (निवासी टोलक्याखेड़ी) ने कहा कि लौह पुरुष सरदार पटेल ने अपने लोहे जैसे संकल्प, अदम्य साहस और दूरदर्शिता के बल पर देश को एक सूत्र में बांधकर इतिहास रचा। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए राष्ट्रहित, समाज उत्थान और एकजुटता की भावना को निरंतर मजबूत करें। वक्ताओं ने कहा कि पाटीदार समाज सदैव राष्ट्र सेवा, कृषि उन्नति, सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण में अग्रणी रहा है, और आगे भी यही परंपरा जारी रहेगी। समाज द्वारा भविष्य में शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों को और मजबूत करने का संकल्प भी लिया गया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों, युवा वर्ग, महिला शक्ति सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। शोभायात्रा एवं श्रद्धांजलि समारोह उत्साह और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम राठौर ने उठाई आवाज — वर्षों से बंद मट पंप से नागरिकों को नहीं मिल रही सुविधा, ओडीएफ श्रेणी पर भी उठे सवाल

Former Nagar Panchayat President Prem Rathore raised his voice – the water pump, which has been out of service for years, has been depriving citizens of its services, and questions have also been raised about the ODF category. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। नलखेड़ा नगर पंचायत क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़ा मट पंप अब नगरवासियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। इस संबंध में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम राठौर ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि नगर पंचायत की पूर्व परिषद द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए यह मट पंप खरीदा गया था, ताकि घर-घर बने सेफ्टिक टैंकों की सफाई आसानी से की जा सके। लेकिन यह मट पंप लंबे समय से खराब होकर बेकार पड़ा है, जिससे नगर के लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। राठौर ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शासन द्वारा घर-घर शौचालय और सेफ्टिक टैंक बनवाए गए थे। इन टैंकों की समय-समय पर सफाई आवश्यक होती है, जिसके लिए नगर पंचायत ने मट पंप खरीदा था। नागरिक एक निश्चित शुल्क देकर इसकी सेवा लेते थे, जिससे नगर पंचायत को राजस्व भी प्राप्त होता था और नागरिकों को सुविधा भी मिलती थी। पूर्व अध्यक्ष राठौर के अनुसार, प्रशासक काल के दौरान से यह मट पंप खराब पड़ा हुआ है। कुछ माह पूर्व इसे दुरुस्त करवाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके चलते नागरिकों को मजबूरी में अन्य नगरों जैसे सारंगपुर से मट पंप मंगवाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। हाल ही में एक स्थानीय नागरिक ने सारंगपुर से मट पंप बुलाकर अपने टैंक की सफाई करवाई। उन्होंने बताया कि नया मट पंप खरीदने पर लगभग 3 से 4 लाख रुपये का खर्च आएगा, जबकि पुराने पंप को कुछ हजार रुपये में ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नागरिकों की इस मूलभूत सुविधा की ओर नहीं जा रहा है। ओडीएफ डबल प्लस श्रेणी पर उठे सवाल पूर्व अध्यक्ष प्रेम राठौर ने यह भी बताया कि नलखेड़ा नगर पंचायत ओडीएफ डबल प्लस श्रेणी में शामिल है, जिसमें मट पंप की उपलब्धता अनिवार्य शर्तों में शामिल है। ऐसे में वर्षों से बंद पड़े मट पंप के कारण नलखेड़ा की ओडीएफ श्रेणी पर भी सवाल उठ रहे हैं। राठौर ने जिला प्रशासन एवं नगर पंचायत से आग्रह किया है कि नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मट पंप को शीघ्र दुरुस्त करवाया जाए, ताकि नगरवासियों को इस आवश्यक सेवा से फिर से जोड़ा जा सके।

अभी गुर्जर बने पुनः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर मंत्री

Now Gurjar has again become the city minister of Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की नगर इकाई में संगठन पुनर्गठन के दौरान अभी गुर्जर को पुनः नगर मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके पिछले कार्यकाल में उत्कृष्ट संगठनात्मक कार्य, विद्यार्थियों के हित में सक्रिय भूमिका और बेहतर व्यवहार को देखते हुए परिषद पदाधिकारियों ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। अभी गुर्जर अपने मिलनसार स्वभाव और नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में नगर में विद्यार्थी परिषद की गतिविधियों को नई दिशा दी थी। परिषद द्वारा आयोजित अनेक शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। संगठन के प्रति उनका समर्पण और अनुशासन उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाता है।नवनियुक्त नगर मंत्री अभी गुर्जर ने कहा कि संगठन ने जो विश्वास उन पर जताया है, वह उसे पूरी निष्ठा, अनुशासन और परिश्रम से निभाएँगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद सदैव विद्यार्थियों की आवाज़ रही है और आगे भी समाज व शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मक कार्य जारी रखेगी।इस अवसर पर परिषद के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उन्हें बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में संगठन और भी सशक्त और सक्रिय बनेगा।

नलखेड़ा के साईं श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय कुश्ती में जीता स्वर्ण पदक, प्रदेश का नाम किया रोशन

Sai Srivastava of Nalkheda won the gold medal in the national wrestling competition, bringing glory to the state. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा । नगर के होनहार खिलाड़ी साईं श्रीवास्तव ने विद्या भारती द्वारा भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में अपने दमदार प्रदर्शन से 86 किलोग्राम फ्री स्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। मूल रूप से नलखेड़ा निवासी साईं श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल श्रीवास्तव के पुत्र हैं। साईं वर्तमान में सरस्वती विद्या मंदिर, मारूतीगंज (उज्जैन) में अध्ययनरत हैं, जहां वे शिक्षा के साथ खेल में भी लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रतियोगिता में देशभर से आए नामी पहलवानों के बीच साईं ने अपने मजबूत इरादों और शानदार दांव-पेच से सभी को मात दी। फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को परास्त कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। साईं की इस उपलब्धि से नलखेड़ा नगर में खुशी की लहर दौड़ गई। नगरवासियों, विद्यालय परिवार और खेल प्रेमियों ने साईं को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने छोटे से कस्बे से निकलकर यह सिद्ध किया है कि मेहनत और लगन से किसी भी मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है। साईं श्रीवास्तव की यह जीत न केवल उज्जैन संभाग बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय बनी है।

नलखेड़ा में बैलों की भव्य शोभायात्रा निकली, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने किया किसानों का उत्साहवर्धन

नलखेड़ा में बैलों की भव्य शोभायात्रा निकली, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने किया किसानों का उत्साहवर्धन Municipal Council President representative Vijay Soni encouraged the farmers. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। परंपरा और संस्कृति का संगम देखने को मिला जब दीपावली के बाद पड़वा पर नलखेड़ा नगर में हर वर्ष की तरह इस बार भी बैलों के जोड़े का पारंपरिक पथ संचलन धूमधाम से निकाला गया। कार्यक्रम की शुरुआत सांवलिया नाथ मंदिर से हुई, जहां विभिन्न गांवों से आए कुल 13 जोड़े बैलों के एकत्र हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में आधे रहे। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच बैलों का यह संचलन नगर के मुख्य मार्ग, चौक बाजार होते हुए गणपति चौराहे तक पहुंचा। रास्तेभर युवाओं ने नाचते-गाते हुए परंपरा का उल्लास मनाया। कार्यक्रम का समापन बड़ा गणपति मंदिर के सामने हुआ, जहां गौ सेवा समिति नलखेड़ा द्वारा बैलों के पालन-पोषण करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण इस प्रकार रहा: प्रथम पुरस्कार ₹11,000 — धरोला के दुर्गेश पिता पन्नालाल द्वितीय पुरस्कार ₹5,100 — ढंडेडा के प्रेम नारायण तृतीय पुरस्कार ₹3,100 — तराना के बाबूलाल.     चतुर्थ पुरस्कार ₹1,100 — नंदू सिंह पिता पर्वत सिंह इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी नगर के पार्षदों के साथ उपस्थित रहे और किसानों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि “नलखेड़ा की पहचान उसकी परंपराओं से है, और बैलों के जोड़े का यह संचलन हमारी कृषि संस्कृति का प्रतीक है। इसे जीवित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।” समिति सदस्य सोनू जायसवाल ने बताया कि इस बार बैलों के जोड़ों की संख्या में कमी आई है, जिससे यह स्पष्ट है कि किसानों में पारंपरिक पशुपालन की प्रवृत्ति घट रही है। इस अवसर पर थाना प्रभारी नागेश यादव भी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे और प्रथम पुरस्कार विजेता किसान का सम्मान किया। गोवर्धन पूजा से खिला नगर नगर में जगह-जगह गोवर्धन पूजा का आयोजन हुआ। गोबर से बनाए गए गोवर्धन पर्वत की पूजा में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। गवली मोहल्ला की परंपरा इस बार भी आकर्षण का केंद्र रही, जहां बच्चों को गोवर्धन पर्वत पर लिटाकर पूजा की गई — यह अनोखी परंपरा पीढ़ियों से यहां निभाई जा रही है। नलखेड़ा की सड़कों पर इस दिन परंपरा, श्रद्धा और संस्कृति ने मिलकर एक अद्भुत दृश्य रचा, जहां नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने परंपरा को नई ऊर्जा और सम्मान दिया।

नलखेड़ा : SDM ने अब तक नहीं किया स्थान निर्धारित, लाइसेंस के लिए ₹1500 की मांग का आरोप — नगर पालिका प्रतिनिधि विजय सोनी ने जताई नाराज़गी

Nalkheda: SDM has not yet determined the location, and is demanding ₹1,500 for the license. Municipal representative Vijay Soni expressed his displeasure. चंदा कुशवाहनलखेड़ा। दिवाली में अब केवल दो दिन शेष हैं, लेकिन नगर में इस बार अब तक पटाखों की दुकानें नहीं लग सकी हैं। इसका कारण है — SDM कार्यालय द्वारा पटाखा बाजार के लिए स्थान निर्धारित न किया जाना। व्यापारी तैयार बैठे हैं, लेकिन अनुमति और स्थान न मिलने से वे दुकानें नहीं सजा पा रहे हैं। इधर, कई व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि SDM कार्यालय द्वारा पटाखा दुकान के लाइसेंस के लिए ₹1500 की मांग की जा रही है। एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “हम पिछले कई सालों से पटाखे बेचते आ रहे हैं, लेकिन इस बार लाइसेंस जारी करने में देरी की जा रही है और ₹1500 की मांग की जा रही है। अगर जल्द अनुमति नहीं मिली, तो दिवाली का पूरा व्यापार ठप हो जाएगा।” नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि “नलखेड़ा में हर साल सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर दिवाली का पर्व मनाते हैं। यह हमारे सनातन धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है, लेकिन इस बार बच्चों के चेहरे पर खुशी की जगह मायूसी है क्योंकि पटाखों की दुकानें ही नहीं लगीं।” उन्होंने प्रशासन से तुरंत स्थान तय कर व्यापारियों को राहत देने की मांग की है।व्यापारी भी कहते हैं कि तैयारी पूरी है — स्टॉक आ चुका है, पर बेचने की अनुमति नहीं मिली। दिवाली तक अगर जगह तय नहीं हुई तो उनका माल बेकार हो जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की देरी से हर साल की तरह इस बार भी अंतिम समय पर हड़बड़ी मचेगी। लोग चाहते हैं कि त्योहार की खुशियों में रुकावट न आए और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौटे।

नलखेड़ा तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने थामी कमान, देर रात तक चल रहा मुआवज़ा तैयार करने का काम

Farmers may receive a bell of relief on Dhanteras! Nalkheda Tehsildar Priyank Srivastava is in charge, and the work of preparing compensation continues late into the night. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! आगर मालवा ज़िले के नलखेड़ा से राहत भरी खबर लंबे इंतज़ार के बाद किसानों को इस धनतेरस पर मुआवज़े की सौगात मिल सकती है। जब ज़िले को मुआवज़े की सूची से वंचित रखा गया और किसानों में नाराज़गी बढ़ी, तब नलखेड़ा तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने खुद मोर्चा संभाला। सूत्रों के अनुसार, तहसील कार्यालय में बीते कई दिनों से तहसीलदार श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी और राजस्व निरीक्षक डिंपल उइके लगातार काम में जुटे हुए हैं। तीनों अधिकारी देर रात तक दफ़्तर में रहकर मुआवज़ा सूची की जांच, सत्यापन और बिल तैयार कराने का काम कर रहे हैं, ताकि हर पात्र किसान तक राहत राशि समय पर पहुंच सके। राजस्व निरीक्षक डिंपल उइके द्वारा एक-एक गांव के प्रकरण की बारीकी से जांच की जा रही है, जिससे कोई भी पात्र किसान मुआवज़े से वंचित न रह जाए।एक पटवारी ने बताया कि “तहसीलदार साहब हर सूची खुद देख रहे हैं, कहीं कोई गलती न रह जाए इसके लिए रोज़ मॉनिटरिंग हो रही है। उनका लक्ष्य साफ़ है — धनतेरस पर किसानों के खातों में मुआवज़ा पहुंचना चाहिए।” कर्मचारियों का कहना है कि “अगर यह काम पहले शुरू होता तो हम भी परिवार के साथ दीवाली मना पाते, लेकिन अब किसानों की मुस्कान ही हमारी दीवाली है।” नलखेड़ा तहसील प्रशासन की यह कार्यशैली पूरे जिले के लिए मिसाल बन गई है — जब बाकी जगह फाइलें अटकी रहीं, नलखेड़ा में अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात डटे हुए हैं।

नलखेड़ा मंडी में नहीं बिक रही सोयाबीन… बिक रही है किसानों की मजबूरी!

Soybean is not being sold in Nalkheda Mandi… Farmers’ helplessness is being sold! चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नलखेड़ा कृषि उपज मंडी में इस बार किसान भारी परेशानी झेल रहे हैं। सोयाबीन की खरीदी न शुरू होने से लेकर अव्यवस्था तक, हर मोर्चे पर किसानों का सब्र टूटता दिख रहा है। मंडी में न बैठने की जगह है, न पीने के पानी की व्यवस्था और न ही शौचालय। किसान खुले आसमान के नीचे अपनी बोरियां लिए मंडी प्रांगण में बैठे हैं — उम्मीद बस यही कि कोई व्यापारी आए और दाम थोड़ा ठीक मिल जाए।  “ना दाम मिल रहा, ना व्यवस्था… मजबूरी में बेच रहे हैं” ग्राम नालखेड़ा  के किसान चिन्तामन विश्वकर्मा  ने बताया — “सुबह से मंडी में बैठे हैं, लेकिन कोई भाव ही नहीं लगाता। जो आ भी रहे हैं वो ₹3500 से ऊपर देने को तैयार नहीं। MSP जो कि ₹5300 रुपए का तो नाम तक नहीं ले रहे।” एक अन्य किसान बोले — “बैठने की जगह तक नहीं है। मंडी में पानी नहीं, टॉयलेट नहीं, अधिकारी दिखते तक नहीं।” पंजीयन पोर्टल पर फसल नहीं दिख रही, किसान हैरान कई किसानों ने शिकायत की कि पंजीयन के समय पोर्टल पर उनकी सोयाबीन की एंट्री दिख ही नहीं रही। इससे वे खरीदी प्रक्रिया से वंचित रह गए हैं। इस बारे में जब तहसील  नलखेड़ा के एक पटवारी से बात की गई तो उन्होंने कहा — “गिरदावरी का काम शासन द्वारा नियुक्त स्थानीय युवाओं द्वारा समय पर किया गया था। सभी रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड भी किए गए हैं। यह समस्या संभवतः तकनीकी गड़बड़ी के कारण है।” SDM सुसनेर की लापरवाही पर उठे सवाल किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी की बदहाल व्यवस्था पर SDM सुसनेर का ध्यान नहीं है। ना तो उन्होंने मौके का निरीक्षण किया, और ना ही मंडी प्रशासन को कोई सख्त निर्देश दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन इस बार हालत और खराब हैं। मंडी में व्यवस्था सुधारना SDM की जिम्मेदारी है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

नलखेड़ा: मां बगलामुखी मंदिर के बाहर खुलेआम बिक रहा नशा, SDM सर्वेश यादव की भूमिका पर उठे सवाल

Nalkheda: Drugs being sold openly outside the Maa Baglamukhi temple, questions raised about the role of SDM Sarvesh Yadav. चंदा कुशवाह ( विशेष संवाददाता )  नलखेड़ा । मां बगलामुखी मंदिर  आस्था और साधना का केंद्र, जहां रोज़ सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इस पवित्र स्थल के बाहर अब नशे का कारोबार पांव पसार चुका है। मंदिर के आस-पास की दुकानों पर गुटखा, सिगरेट, भांग, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है, और प्रशासन चुप है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस मंदिर के अध्यक्ष स्वयं उपखंड अधिकारी (SDM) सर्वेश यादव हैं। मंदिर व्यवस्था और वीआईपी प्रोटोकॉल की समीक्षा के लिए वे अक्सर यहां आते-जाते रहते हैं, फिर भी मंदिर के बाहर यह अवैध गतिविधि कैसे चल रही है? क्या इन दुकानों को SDM की मौखिक मंजूरी मिली है, या फिर इनके पास कोई लिखित अनुमति पत्र मौजूद है? यदि नहीं, तो प्रशासन की चुप्पी आखिर क्यों? स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर के बाहर इस तरह का वातावरण श्रद्धा के माहौल को कलंकित कर रहा है। “जहां देवी की उपासना होती है, वहां नशे का कारोबार चलता देखना दुखद है, एक भक्त ने नाराज़गी जताते हुए कहा। मंदिर के चारों ओर फैले मादक पदार्थों की बिक्री न केवल धार्मिक गरिमा पर धब्बा है, बल्कि यह प्रशासनिक निष्क्रियता और लापरवाही का भी प्रतीक बन चुकी है। अब श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक मांग कर रहे हैं कि मंदिर क्षेत्र में नशे के इस कारोबार पर तत्काल रोक लगाई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाए।

राहत वितरण में देरी पर किसानों का रोष, किसान संघ ने की त्वरित कार्रवाई की माँग।

Farmers angry over delay in relief distribution, farmers union demands immediate action. चंदा कुशवाह ( विशेष संवाददाता )नलखेड़ा ! जिले में सोयाबीन फसल के भारी नुकसान के बावजूद किसानों को अब तक राहत राशि नहीं मिल पाने से किसानों में गहरा असंतोष व्याप्त है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय किसान संघ, जिला इकाई आगर मालवा ने बुधवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की माँग की।संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि मौसमी बीमारियों पीलामोजक और असमय वर्षा के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। शासन के आरबी-6 (4) के प्रावधानों के तहत सर्वे कर राहत राशि का वितरण किया जाना था, लेकिन सर्वे कार्य नियमानुसार और उदारतापूर्वक नहीं किया गया, जिससे जिले के किसान राहत से वंचित रह गए।भारतीय किसान संघ ने प्रशासन से माँग की है कि— सर्वे पत्रक, अनावरी रिपोर्ट और नेत्रांकन सर्वे के पंचनामों की प्रति प्रत्येक पटवारी हल्केवार किसान संघ को उपलब्ध कराई जाए।पूर्व में बनी रिपोर्टों का पुनः परीक्षण कर संशोधित रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जाए, ताकि वास्तविक प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।संघ ने कहा कि किसानों को नुकसान की भरपाई न मिलने से ग्रामीण अंचलों में निराशा और रोष बढ़ रहा है। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो भारतीय किसान संघ जिला इकाई आगर मालवा किसानों के हितों की रक्षा हेतु धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होगा।संघ ने आशा जताई कि प्रशासन इस विषय की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द उचित कदम उठाएगा, ताकि किसानों को न्याय और राहत दोनों मिल सकें। ज्ञापन देने वाले प्रमुख पदाधिकारी: रामनारायण तेजरा, जिला अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ जिला आगर मालवा जगदीश पाटीदार, जिला कार्यालय मंत्री, भारतीय किसान संघ, जिला आगर मालवा प्रमोद जोशी, जिला कोषाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, जिला आगर मालवा राघुसिंह चौहान, जिला मंत्री, भारतीय किसान संघ, जिला आगर मालवा

कम नुकसान प्रतिशत की रिपोर्ट—SLR के सख़्त आदेश का कमाल! ”

Low loss percentage reported—the magic of SLR’s strict order!” चंदा कुशवाह (संवाददाता)अगर मालवा ! ज़िले में किसानों के लिए राहत अब बस एक छलावा बनकर रह गई है। प्राकृतिक आपदा से फसलें चौपट हो गईं, किसान मुआवज़े की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन राहत मिलने के बजाय उन्हें सिर्फ़ बहलाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस पूरी स्थिति के पीछे ज़िला अधीक्षक भू-अभिलेख (SLR) प्रीति चौहान का ही दबाव है। जानकारी के मुताबिक, विभाग द्वारा शासन को भेजी गई कम नुकसान प्रतिशत वाली रिपोर्ट भी SLR मैडम के सख़्त निर्देशों पर ही तैयार की गई थी। यानी आंकड़ों में ‘कटौती’ कर्मचारियों ने अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि दबाव में की। कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि असली समस्या उनकी नहीं, बल्कि ऊपर से आने वाले आदेशों की है। “हम किसानों को सही नुकसान दिखाना चाहते हैं, लेकिन हमें निर्देश मिलता है कि नुकसान कम बताओ और किसानों को सिर्फ़ चक्कर कटवाओ। फिर जब हंगामा होता है तो दोष हम पर डाल दिया जाता है।” व्यंग्य की बात यह है कि जिस अधिकारी को जनता की शिकायतें सुननी चाहिए, दुख समझना चाहिए और किसानों की समस्या शासन तक साफ़ तौर पर पहुँचानी चाहिए, उनकी मंशा उलटी है—न शिकायत सुनने का इरादा, न दुख समझने का और न ही समस्या शासन तक पहुँचाने का। सूत्र बताते हैं कि SLR मैडम अपने कैबिन में कर्मचारियों को आने तक नहीं देतीं और दिनभर मोबाइल पर रील्स देखने में व्यस्त रहती हैं। किसानों की समस्याएँ फाइलों में धूल खाती रहती हैं और अधिकारी रीलों में ‘टारगेट’ अचीव करती रहती हैं। अब किसानों की नाराज़गी बढ़ने लगी है। कुछ किसान संघ प्रतिनिधियों ने SLR की वह रिपोर्ट मांगी है, जिसमें नुकसान का प्रतिशत घटाकर भेजा गया है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर किस दबाव में और किस मंशा से किसानों के साथ ऐसा अन्याय किया गया। किसानों का साफ कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। आखिर सवाल यही है—क्या प्रशासन जनता के लिए है या जनता को गुमराह करने के लिए?

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