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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए

रायपुर   मंत्रिपरिषद की बैठक में परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के हित में निर्णय लिया गया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल एवं विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड, सरगुजा/बस्तर/बिलासपुर द्वारा आयोजित परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी अभ्यर्थी जो परीक्षा अथवा साक्षात्कार में उपस्थित होंगे उन्हें उनके द्वारा दी गई परीक्षा शुल्क की राशि वापस की जाएगी।          इससे सिरियस केन्डीडेट की परीक्षा में उपस्थिति का प्रतिशत बढ़ेगा, वहीं नॉन सिरियस केन्डीडेट और इनइलिजिबल केन्डीडेट परीक्षा फॉर्म नहीं भरेंगे और इनके कारण राज्य शासन को होने वाली आर्थिक क्षति भी कम होगी।     कैबिनेट की बैठक में राज्य के छोटे व्यापारियों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए छत्तीसगढ़ बकाया कर, ब्याज एवं शास्ति के निपटान (संशोधन) अध्यादेश-2025 के प्रारूप में निहित संशोधन का अनुमोदन किया गया।          जिसके अनुसार राज्य सरकार छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित करेगी और 10 साल से अधिक पुराने लंबित मामलों में 25 हजार रूपए तक की वैट देनदरियों को माफ करेगी। इससे 40 हजार से अधिक व्यापारियों को लाभ होगा और 62 हजार से अधिक मुकदमेबाजी के मामलों में कमी आएगी।     कैबिनेट की बैठक में नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ में एन.आई.एफ.टी. (NIFT) के कैम्पस को मंजूरी प्रदान की गई। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) का नया कैम्पस छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में स्थापित किया जाएगा। कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार इस परियोजना की कुल संभावित लागत करीब 271.18 करोड़ रुपये होगी। इसमें भूमि क्रय हेतु 21.18 करोड़, भवन निर्माण के लिए 200 करोड़ और मशीनरी, फर्नीचर आदि के लिए 50 करोड़ रुपये का व्यय शामिल है। इस संस्थान की स्थापना से फैशन शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और फैशन उद्योग को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित मानव संसाधन भी उपलब्ध हो सकेंगे। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) भारत में फैशन शिक्षा का एक प्रमुख संस्थान है, जिसकी स्थापना 1986 में कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के तहत हुई थी। एन.आई.एफ.टी. के पूरे भारत में 17 परिसर हैं, जिनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु शामिल हैं। यह संस्थान फैशन डिजाइन, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी में स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रदान करता है। संस्थान फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल डिजाइन, फैशन प्रबंधन और फैशन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखता है। यह छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और प्लेसमेंट के अवसर प्रदान करने के लिए फैशन उद्योग के साथ सहयोग करता है।     मंत्रिपरिषद ने राज्य के नगरीय निकायों में जैव अपशिष्ट सह कृषि अपशिष्ट के प्रसंस्करण हेतु स्थापित किये जा रहे बायो-सीएनजी संयंत्रों हेतु रियायती लीज (Lease) दरों पर शासकीय भूमि आबंटन किये जाने की सहमति प्रदान करते हुए आगे की कार्यवाही के लिए नगरीय प्रशासन विभाग एवं संबंधित नगर निगमों को अधिकृत किया है।     मंत्रिपरिषद ने राज्य में सहकारिता को प्रोत्साहन दिये जाने के उद्देश्य से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत शक्कर वितरण हेतु अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक आवश्यक शक्कर का क्रय राज्य के सहकारी शक्कर कारखानों से करने का निर्णय लिया है। इस हेतु शक्कर का क्रय मूल्य 37,000 रू. प्रति टन (एक्स फैक्ट्री, जी.एस.टी. अतिरिक्त) निर्धारित किया गया है।     मंत्रिपरिषद ने स्थानीय रोजगार और सूक्ष्म-लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को राज्य में हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके लिए 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया है।

CM साय ने राजधानी रायपुर स्थित मैग्नेटो मॉल के सिनेमाघर में छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘सुहाग’ के विशेष प्रदर्शन को देखने पहुँचे

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित मैग्नेटो मॉल के सिनेमाघर में छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘सुहाग’ के विशेष प्रदर्शन को देखने पहुँचे। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले पद्मसम्मानित और धरसीवा के विधायक अनुज शर्मा के अभिनय की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने इस फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया था, और आज यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा कितनी खूबसूरती से अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर  कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक किरण देव सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि और आयोगों/मंडलों के नवनियुक्त अध्यक्षगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘सुहाग’ एक पारिवारिक फिल्म है और भारत में पारिवारिक मूल्यों पर आधारित फिल्मों का सदा से विशेष स्थान रहा है। उन्होंने याद किया कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘मोर छइहां भुइहां’ भी पारिवारिक थी, और अब ‘सुहाग’ उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है। फिल्म के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, रिश्तों की गरिमा और पारिवारिक जीवन की सहजता को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। साय ने छत्तीसगढ़ी सिनेमा की प्रतिभाओं की भी सराहना करते हुए कहा हमारे कलाकार, निर्देशक और पूरी यूनिट मेहनत और लगन से कार्य करते हैं, इसलिए छत्तीसगढ़ी सिनेमा आज दर्शकों के दिलों को छू रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित फिल्म सिटी का निर्माण, छत्तीसगढ़ी सिनेमा को बेहतर अधोसंरचना, बेहतर अवसर और राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त होगी।

बीईएमएल के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट संयंत्र को मंजूरी, स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को औद्योगिक और आर्थिक विकास के नए शिखर पर ले जाने की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी मंत्रालय भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) को राज्य में हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र के स्थापना की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इस संयंत्र के लिए बिलासपुर, चांपा के समीप नेशनल हाईवे से लगी 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार सृजन और सूक्ष्म-लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देना है। छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति 2024-30, जो एक नवंबर 2024 से लागू हुई, ने राज्य को निवेशकों के लिए अनुकुल बना दिया है। इस नीति का मूल मंत्र न्यूनतम शासन, अधिकतम प्रोत्साहन है, जिसके तहत उद्योगों को स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0, ऑनलाइन आवेदन, और त्वरित प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं ने उद्यमियों के लिए छत्तीसगढ़ में कारोबारी माहौल को आसान किया है। नीति में फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इस नीति के तहत उद्योगों को 30-50 प्रतिशत सब्सिडी, 5 से 12 वर्ष तक की कर छूट और ब्याज अनुदान जैसे आकर्षक प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा, 1000 से अधिक रोजगार प्रदान करने वाली इकाइयों के लिए बी-स्पोक पॉलिसी और प्रति व्यक्ति 15,000 रुपये तक का प्रशिक्षण अनुदान भी शामिल है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 5 लाख नए रोजगार सृजित करना है, जो स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बीईएमएल के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरिंग संयंत्र की स्थापना से न केवल छत्तीसगढ़ में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इस संयंत्र के लिए 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आवंटित करने का निर्णय निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार किए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को सभी स्वीकृतियां एक ही मंच पर प्रदान की जा रही हैं, जिससे समय और लागत की बचत हो रही है। ऑनलाइन सुविधाओं के विस्तार ने भी उद्योगों की स्थापना को गति दी है। उद्यमी अब घर बैठे विभिन्न स्वीकृतियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए सार्थक पहल की है। दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु में आयोजित इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में देश-विदेश के उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया, जिसके परिणामस्वरूप 4 लाख 40 हजार  करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुंबई समिट में 6,000 करोड़ रुपये, दिल्ली में 15,184 करोड़ रुपये, और बेंगलुरु में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की सहमति ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को रेखांकित किया है। प्रोजेक्ट टूडे सर्वे के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ में 218 नई परियोजनाओं में 1,63,749 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो देश के कुल निवेश का 3.71 प्रतिशत है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को देश के टॉप टेन निवेश वाले राज्यों में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री साय ने उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल नीतियों के साथ हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति न केवल उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देती है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि पर भी जोर देती है। हमारा लक्ष्य अमृतकाल-छत्तीसगढ़ विजन 2047 नवा अंजोर के तहत विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि राज्य अब नक्सल प्रभावित छवि से बाहर निकलकर एक औद्योगिक और तकनीकी हब के रूप में उभर रहा है।

हादसे का इंतजार: जर्जर भवन में चल रही है राशन दुकान

महासमुंद  छत्तीसगढ़ में लोग जान जोखिम में डालकर सरकारी राशन लेने के लिए मजबूर है. मामला महासमुंद जिले के पिथोरा नगर के क्रमांक-2 की उचित मूल्य दुकान का है. यह दुकान एक ऐसे भवन में चल रही है, जो जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुका है. लंबी कतारों में घंटों इंतजार करने वाले लोग न केवल बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, बल्कि हर पल हादसे की आशंका के साये में राशन लेने पहुंच रहे हैं. छत्तीसगढ़ सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली सस्ते अनाज का वादा तो करती है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की अनदेखी ने पिथौरा के लोगों को मुसीबत में डाल दिया है. राशन दुकान में न बैठने की जगह, न पीने का पानी, और न ही शौचालय. अगर किसी को वॉशरूम की जरूरत पड़े, तो घर लौटना पड़ता है, जिससे उनका नंबर छूट जाता है और दिन बर्बाद हो जाता है. महिलाओं को सबसे ज्यादा मुसीबत छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना संचालित कर रही है, लेकिन इस राशन दुकान में सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को ही हो रही है. महिलाएं अपने बच्चों के साथ कतार में घंटों खड़ी रहती हैं. स्थानीय लोग कहते हैं, “प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है.” 90 लाख की कमाई, फिर भी नहीं हुई मरम्मत यह दुकान कौड़िया सहकारी विपणन संस्था की जमीन पर है. संस्था ने दुकान के सामने 9 दुकानें बनाकर नीलामी से 90 लाख रुपये कमाए और हर महीने 700 रुपये प्रति दुकान किराया भी वसूल रही है. इसके बावजूद, वर्षों से जर्जर पड़े राशन वितरण भवन की मरम्मत तक नहीं कराई गई. जब नगर पंचायत पिथौरा के अध्यक्ष देवसिंह निषाद से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि सहकारी समिति को व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि यह उनकी संस्था है. वर्षों से भवन जर्जर है. पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था जल्द कराई जाएगी. वहीं सहकारी उप पंजीयक के संजय कुमार गुप्ता ने मामले पर कहा कि अभी दो-तीन दिन ही हुए हैं पदभार ग्रहण किए. पिथौरा के कर्मचारियों को पुराने भवन का एस्टीमेट तैयार करने कहा गया है. जल्द ही सुधार कार्य शुरू होगा.

छत्तीसगढ़ में फिर बदला मौसम का मिजाज, कही बारिश तो कही गर्मी

रायपुर छत्तीसगढ़ में आज मौसम का मिजाज फिर बदल गया है. प्रदेश के कई जिलों में आज मेघ गर्जन, तेज हवा के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने आगामी दिनों में तेज हवाएं, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश के साथ चार डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई है. बुधवार को प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 38.6°C दुर्ग में दर्ज किया गया. पिछले 24 घंटों में छत्तीसगढ़ में एक-दो स्थानों पर मेघ गर्जन, वज्रपात, तेज हवा के साथ ओलावृष्टि और हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई. मौसम विभाग ने कल प्रदेश में एक-दो स्थानों पर मेघ गर्जन और तेज हवा के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना जताई है. वहीं 2 दिनों के बाद कुछ इलाकों में मेघ गर्जन और तेज हवा के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने के आसार है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अलग-अलग द्रोणिका और ऊपरी हवा का साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है. सिक्किम से उत्तर उड़ीसा तक द्रोणिका 3.1 किलोमीटर से 5.8 किलोमीटर ऊंचाई तक फैला हुआ है. एक द्रोणिका पूर्वी मध्य प्रदेश से गंगेटिक पश्चिम बंगाल तक छत्तीसगढ़ होते हुए 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. इसके अलावा दूसरा द्रोणिका पूर्वी मध्य प्रदेश से दक्षिण अंदरूनी कर्नाटक तक 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण 1.5 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है. रायपुर में मौसम का हाल रायपुर शहर में आज आकाश मुख्यतः साफ रहने और दोपहर/शाम को आंशिक मेघमय रहने की संभावना है. अधिकतम 39°C और न्यूनतम तापमान 23°C के आसपास रहने की संभावना है.

करोड़ों रुपए स्वीकृत फिर भी अधर में लटकी नहर परियोजना, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे किसान

कवर्धा प्रदेश सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन कबीरधाम जिले की स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। गर्मी के इस मौसम में यहां के किसान बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। धरती के पुत्र कहे जाने वाले ये किसान आज खुद बेहाल हैं, क्योंकि सिंचाई के लिए पानी ही उपलब्ध नहीं है। रघुपारा, तिलाईभाट और बद्दो गांव के किसानों ने वर्षों पहले नहर विस्तारीकरण की मांग की थी। राज्य सरकार ने किसानों की समस्या को देखते हुए करिया आमा से राम्हेपुर तक तीन किलोमीटर लंबी नहर निर्माण के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी थी, जिससे किसान धान, चना, गन्ना जैसी फसलें उगा सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बने। नहर निर्माण कार्य शुरू भी हुआ और करीब दो किलोमीटर तक नहर तैयार भी हो गई, लेकिन पिछले पांच वर्षों से यह परियोजना अधर में लटकी हुई है। किसान जमीन देने तैयार नहीं इसलिए रुका है नहर का काम दरअसल, बद्दो गांव से आगे नहर निर्माण इसलिए रुका हुआ है क्योंकि कुछ किसानों ने अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया है, जबकि आधा दर्जन से अधिक किसान इसके लिए तैयार हैं। इसी कारण नहर का विस्तार कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। आज गांव में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। यदि नहर निर्माण कार्य पूरा होता है तो तिलाईभाट, बद्दो, रघुपारा समेत आसपास के दर्जनों गांवों के खेतों तक पानी पहुंचता और पानी की समस्या से राहत मिल जाती। विवाद सुलझने के बाद नहर निर्माण कार्य में आएगी तेजी : सब इंजीनियर जल संसाधन विभाग की सब-इंजीनियर रेखा ने बताया कि किसानों के बीच मध्यस्थता न बन पाने के कारण नहर निर्माण का कार्य रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि जैसे ही विवाद सुलझेगा, नहर निर्माण का काम तेजी से पूरा किया जाएगा। इसके बाद क्षेत्र में पानी की किल्लत खत्म हो जाएगी।

छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्रांति की नई शुरुआत , बीईएमएल के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट संयंत्र को मंजूरी

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को औद्योगिक और आर्थिक विकास के नए शिखर पर ले जाने की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी मंत्रालय भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) को राज्य में हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र के स्थापना की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इस संयंत्र के लिए बिलासपुर, चांपा के समीप नेशनल हाईवे से लगी 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार सृजन और सूक्ष्म-लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देना है। छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति 2024-30, जो एक नवंबर 2024 से लागू हुई, ने राज्य को निवेशकों के लिए अनुकुल बना दिया है। इस नीति का मूल मंत्र न्यूनतम शासन, अधिकतम प्रोत्साहन है, जिसके तहत उद्योगों को स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0, ऑनलाइन आवेदन, और त्वरित प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं ने उद्यमियों के लिए छत्तीसगढ़ में कारोबारी माहौल को आसान किया है। नीति में फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इस नीति के तहत उद्योगों को 30-50 प्रतिशत सब्सिडी, 5 से 12 वर्ष तक की कर छूट और ब्याज अनुदान जैसे आकर्षक प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा, 1000 से अधिक रोजगार प्रदान करने वाली इकाइयों के लिए बी-स्पोक पॉलिसी और प्रति व्यक्ति 15,000 रुपये तक का प्रशिक्षण अनुदान भी शामिल है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 5 लाख नए रोजगार सृजित करना है, जो स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बीईएमएल के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरिंग संयंत्र की स्थापना से न केवल छत्तीसगढ़ में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इस संयंत्र के लिए 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आवंटित करने का निर्णय निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार किए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को सभी स्वीकृतियां एक ही मंच पर प्रदान की जा रही हैं, जिससे समय और लागत की बचत हो रही है। ऑनलाइन सुविधाओं के विस्तार ने भी उद्योगों की स्थापना को गति दी है। उद्यमी अब घर बैठे विभिन्न स्वीकृतियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए सार्थक पहल की है। दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु में आयोजित इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में देश-विदेश के उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया, जिसके परिणामस्वरूप 4 लाख 40 हजार  करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुंबई समिट में 6,000 करोड़ रुपये, दिल्ली में 15,184 करोड़ रुपये, और बेंगलुरु में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की सहमति ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को रेखांकित किया है। प्रोजेक्ट टूडे सर्वे के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ में 218 नई परियोजनाओं में 1,63,749 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो देश के कुल निवेश का 3.71 प्रतिशत है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को देश के टॉप टेन निवेश वाले राज्यों में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री साय ने उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल नीतियों के साथ हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति न केवल उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देती है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि पर भी जोर देती है। हमारा लक्ष्य अमृतकाल-छत्तीसगढ़ विजन 2047 नवा अंजोर के तहत विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि राज्य अब नक्सल प्रभावित छवि से बाहर निकलकर एक औद्योगिक और तकनीकी हब के रूप में उभर रहा है।

कराए के मकान में दबिश देकर पुलिस ने तीन गांजा तस्करों को दबोचा, 30 किलो गांजा बरामद

आरंग  छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक बार फिर सूखे नशे की तस्करी करने वालों पर शिकंजा कसा है. कराए के मकान में दबिश देकर पुलिस ने तीन गांजा तस्करों को दबोचा. आरोपियों के कब्जे से 30 किलों अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद किया गया है. कार्रवाई में गिरफ्तार मुख्य आरोपी पहले भी गांजा तस्करी में पहले भी पकड़ा जा चुका है. आरंग थाना प्रभारी राजेश सिंह ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने बैहार में संतोष साहू के मकान में दबिश दी, उसने अपना मकान किराए से दे रखा था. तलाशी के दौरान आरोपी तुषार देवांगन, बलराम साहू और मोहन साहू मकान में मौजूद थे. इस दौरान पुलिस को स्टील में एक बड़े पेटी में से 30 पैकेट में  30 किलो गांजा मिला. साथ ही 1 इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन भी बरामद किया गया. जानकारी के अनुसार, आरोपी आरंग से रायपुर सहित आसपास के अन्य जिलों में गांजे की तस्करी करता है. फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों को NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है.

साय कैबिनेट में हुए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय

रायपुर मंत्रिपरिषद की बैठक में परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के हित में निर्णय लिया गया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल एवं विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड, सरगुजा/बस्तर/बिलासपुर द्वारा आयोजित परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी अभ्यर्थी जो परीक्षा अथवा साक्षात्कार में उपस्थित होंगे उन्हें उनके द्वारा दी गई परीक्षा शुल्क की राशि वापस की जाएगी।          इससे सिरियस केन्डीडेट की परीक्षा में उपस्थिति का प्रतिशत बढ़ेगा, वहीं नॉन सिरियस केन्डीडेट और इनइलिजिबल केन्डीडेट परीक्षा फॉर्म नहीं भरेंगे और इनके कारण राज्य शासन को होने वाली आर्थिक क्षति भी कम होगी। कैबिनेट की बैठक में राज्य के छोटे व्यापारियों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए छत्तीसगढ़ बकाया कर, ब्याज एवं शास्ति के निपटान (संशोधन) अध्यादेश-2025 के प्रारूप में निहित संशोधन का अनुमोदन किया गया।          जिसके अनुसार राज्य सरकार छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित करेगी और 10 साल से अधिक पुराने लंबित मामलों में 25 हजार रूपए तक की वैट देनदरियों को माफ करेगी। इससे 40 हजार से अधिक व्यापारियों को लाभ होगा और 62 हजार से अधिक मुकदमेबाजी के मामलों में कमी आएगी। कैबिनेट की बैठक में नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ में एन.आई.एफ.टी. (NIFT) के कैम्पस को मंजूरी प्रदान की गई। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) का नया कैम्पस छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में स्थापित किया जाएगा। कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार इस परियोजना की कुल संभावित लागत करीब 271.18 करोड़ रुपये होगी। इसमें भूमि क्रय हेतु 21.18 करोड़, भवन निर्माण के लिए 200 करोड़ और मशीनरी, फर्नीचर आदि के लिए 50 करोड़ रुपये का व्यय शामिल है। इस संस्थान की स्थापना से फैशन शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और फैशन उद्योग को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित मानव संसाधन भी उपलब्ध हो सकेंगे। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) भारत में फैशन शिक्षा का एक प्रमुख संस्थान है, जिसकी स्थापना 1986 में कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के तहत हुई थी। एन.आई.एफ.टी. के पूरे भारत में 17 परिसर हैं, जिनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु शामिल हैं। यह संस्थान फैशन डिजाइन, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी में स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रदान करता है। संस्थान फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल डिजाइन, फैशन प्रबंधन और फैशन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखता है। यह छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और प्लेसमेंट के अवसर प्रदान करने के लिए फैशन उद्योग के साथ सहयोग करता है। मंत्रिपरिषद ने राज्य के नगरीय निकायों में जैव अपशिष्ट सह कृषि अपशिष्ट के प्रसंस्करण हेतु स्थापित किये जा रहे बायो-सीएनजी संयंत्रों हेतु रियायती लीज (Lease) दरों पर शासकीय भूमि आबंटन किये जाने की सहमति प्रदान करते हुए आगे की कार्यवाही के लिए नगरीय प्रशासन विभाग एवं संबंधित नगर निगमों को अधिकृत किया है। मंत्रिपरिषद ने राज्य में सहकारिता को प्रोत्साहन दिये जाने के उद्देश्य से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत शक्कर वितरण हेतु अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक आवश्यक शक्कर का क्रय राज्य के सहकारी शक्कर कारखानों से करने का निर्णय लिया है। इस हेतु शक्कर का क्रय मूल्य 37,000 रू. प्रति टन (एक्स फैक्ट्री, जी.एस.टी. अतिरिक्त) निर्धारित किया गया है। मंत्रिपरिषद ने स्थानीय रोजगार और सूक्ष्म-लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को राज्य में हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके लिए 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया है।

डीएफओ अशोक कुमार पटेल को तेंदूपत्ता बोनस घोटाला मामले में किया गिरफ्तार

रायपुर छत्तीसगढ़ के सुकमा वनमंडल में हुए करोड़ों के तेंदूपत्ता बोनस घोटाला मामले में गुरुवार को एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने निलंबित आइएफएस अधिकारी(डीएफओ) अशोक कुमार पटेल को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पटेल को रायपुर की विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां ईओडब्ल्यू की ओर से आवेदन पेशकर उन्हें 30 अप्रैल तक पूछताछ करने पुलिस रिमांड में रखने की मांग की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई को बाद 23 अप्रैल तक कस्टोडियल रिमांड मंजूर कर एसीबी-ईओडब्ल्यू को सौंपने का आदेश सुनाया।   जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2021 के तेंदूपत्ता बोनस वितरण में 6.50 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है। इसके तार कई अधिकारियों और प्रबंधकों से जुड़े हुए निकले है। भारी अनियमितताओं की परतें डीएफओ की गिरफ्तारी के बाद खुलने की उम्मीद है। जांच के दौरान एसीबी और ईओडब्ल्यू की संयुक्त टीम ने 10 अप्रैल को सुकमा जिले में नौ ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें नामी प्रबंधकों और नेताओं की संलिप्तता सामने आई। इन अधिकारियों के नाम जांच में शामिल उनमें सीपीआई नेता मनीष कुंजाम, कोंटा प्रबंधक मोहम्मद शरीफ़ खान, पालाचलमा प्रबंधक सीएच वेंकट, फूलबगड़ी प्रबंधक राजशेखर पुराणिक, जगरगुंडा प्रबंधक रवि गुप्ता, मिशिगुडा प्रबंधक राजेश आयतु, एर्राबोर प्रबंधक मितेंद्र सिंह राजू, पेदाबोडकेल प्रबंधक सुनील और जग्गावरम प्रबंधक मनोज कवासी के नाम जांच में शामिल हैं। इसके अलावा 11 अप्रैल को सुकमा के दोरनापाल में एक वनकर्मी के घर पर भी एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने छापेमारी की थी। 6.50 करोड़ की हेराफेरी के मिले सुबूत एसीबी-ईओडब्ल्यू के अधिवक्ता मिथलेश वर्मा ने एसीबी,ईओडब्ल्यू के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुपलेश कुमार की ओर से विशेष कोर्ट में पेश रिमांड पत्रक में बताया कि सुकमा वनमंडल में जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित सुकमा के अंतगर्त तेंदूपत्ता सीजन 2021-22 में अप्रैल का प्राप्त प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि का आहरण कर विभिन्न वन अधिकारियों व अन्य ने आपस में बटवारा कर लिया। इस संबंध में अब्दुल शेख करीम द्वारा प्रेषित शिकायत पर अपराध पंजीबद्व किया गया था। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वनांचल के गरीब आदिवासियों के मेहनत की तेंदूपत्ता बोनस राशि करीब 6.50 करोड़ रुपये की हेराफेरी वन अधिकारियों और अन्य ने मिलकर की थी। हेराफेरी के ठोस सुबूत मिलने पर तेलीबांधा क्षेत्र के 81,ऐश्वर्या रेसीडेंसी निवासी डीएफओ 46 वर्षीय अशोक पटेल की विधिवत गिरफ्तारी सुबह 11 बजे की गई। पटेल मूलत: रायगढ़ जिले के कृष्णा वाटिका कालोनी बोईरदादर निवासी है।  

विवेकानंद महाविद्यालय में भूतपूर्व छात्र-छात्राओं का मिलनोत्सव

एमसीबी/मनेंद्रगढ़ आज दिनांक 16.04.25 को शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय मनेन्द्रगढ़ में प्राचार्य डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में तथा एलुमनी समिति प्रभारी डॉ. रश्मि तिवारी के संयोजन में भूतपूर्व छात्र-छात्राओं (एलुमनी) का मिलनोत्सव आयोजित हुआ। इस आयोजन में उपस्थित भूतपूर्व छात्र-छात्राओं का सर्वप्रथम महाविद्यालय समिति द्वारा कुंकुम-रोली से टीका एवं बैज लगाकर स्वागत किया गया। तत्पश्चात् प्राचार्य डॉ. चक्रवर्ती ने अपने उद्बोधन में सभी उपस्थित भूतपूर्व छात्र-छात्राओं का हार्दिक अभिनंदन किया एवं उन्हें महाविद्यालय का गौरव बताया। उन्होंने बताया कि इस मिलनोत्सव का उद्देश्य महाविद्यालय के भूतपूर्व छात्र-छात्राओं से दोबारा संपर्क स्थापित कर संस्थान से उनका भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करना एवं उनके कैरियर अनुभव और जीवन से जुड़ी सीखें वर्तमान छात्रों व शिक्षकों से साझा करना प्रमुख है। साथ ही महाविद्यालय की प्रगति, उपलब्धियों व भावी योजनाओं से आप सभी को अवगत कराना ताकि हमारा एक सक्रिय एलुमनी एसोसिएशन हो। आपकी मदद से न केवल संस्था की गरिमा और गुणवत्ता में वृद्धि होती है, बल्कि यह नैक मूल्यांकन में भी महाविद्यालय को उच्च स्तर पर पहुँचाने में सहायक सि़द्ध होता है।        कार्यक्रम का संचालन कर रहीं एलुमनी प्रभारी डॉ. रश्मि तिवारी ने बताया कि इस मिलन समारोह का उद्देश्य केवल पुनर्मिलन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है- यह एक ऐसा सेतु जो भूतपूर्व छात्रों को महाविद्यालय के वर्तमान और भविष्य से जोड़ता है। आप सभी एलुमनी, अपने अनुभव, संसाधन और सहयोग के माध्यम से इस संस्थान को और अधिक सशक्त बना सकते हैं। इसके पश्चात् उपस्थित एलुमनी सतीश उपाध्याय, ज्योति मजूमदार, ममता राणा, रामचरित द्विवेदी, डॉ. अमूल्यचंद्र झा, मंजूलता कश्यप, सुमन पाठक, राकेश बेहरा एवं गोपाल गुप्ता जी ने अपने महाविद्यालय से जुड़ी बहुत सारी स्मृतियां साझा की एवं महाविद्यालय के उत्तरोत्तर विकास हेतु कृत संकल्पित होकर हर संभव प्रयास करने की बात कही। सभी ने महाविद्यालय के इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए एक साझा मंच प्रदान करने के लिए आभार जताया। तत्पश्चात् एलुमनी समिति के सदस्य डॉ. सुशील तिवारी एवं आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. अरूणिमा दत्ता ने महाविद्यालय के विकास में एलुमनी के योगदान को विस्तार से बताया।      कार्यक्रम के अंत में समिति सदस्य एवं एलुमनी भीमसेन भगत सहायक प्राध्यापक भूविज्ञान के द्वारा उपस्थित एलुमनी से आगे भी इसी तरह की सहयोग की अपेक्षा के साथ सभी के प्रति आभार जताया। आज के आयोजन को सफल बनाने में कार्यालयीन स्टॉफ रजिस्ट्रार यशवंत शाक्य, मनीष श्रीवास्तव, बी.एल.शुक्ला, सुनीत जॉनसन बाड़ा, मीना त्रिपाठी, साधना बुनकर, हेमंत सिंह, प्रदीप मलिक, पारस, सतीश सोनी एवं ममता का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

मुख्यमंत्री साय की कैबिनेट ने नवा रायपुर में एन.आई.एफ.टी. कैम्पस की स्थापना की दी मंजूरी

रायपुर,  छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में फैशन शिक्षा और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में नवा रायपुर में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एन.आई.एफ.टी.) के नए कैम्पस की स्थापना को मंजूरी प्रदान की गई। इस परियोजना की अनुमानित लागत 271.18 करोड़ रुपये है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम न केवल छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए फैशन शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा, बल्कि राज्य में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एन.आई.एफ.टी.) भारत में फैशन डिजाइन, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों में से एक है। 1986 में कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के तहत स्थापित इस संस्थान के वर्तमान में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु सहित देश भर में 17 परिसर हैं। नवा रायपुर में स्थापित होने वाला यह 18वां नया कैम्पस छत्तीसगढ़ के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि होगी। यह संस्थान फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल डिजाइन, फैशन प्रबंधन और फैशन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रदान करेगा। साथ ही, यह फैशन उद्योग के साथ सहयोग के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और प्लेसमेंट के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। नवा रायपुर में एन.आई.एफ.टी. की स्थापना से छत्तीसगढ़ के युवाओं को विश्वस्तरीय फैशन शिक्षा प्राप्त करने का अवसर अपने राज्य में ही मिलेगा। यह संस्थान तकनीकी रूप से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करके फैशन और टेक्सटाइल उद्योग को मजबूती प्रदान करेगा। इसके अलावा, यह परियोजना स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य राज्य के युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करना है। नवा रायपुर में एन.आई.एफ.टी. कैम्पस की स्थापना न केवल फैशन शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांति लाएगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को औद्योगिक और आर्थिक विकास के नए शिखर पर ले जाएगी। नवा रायपुर एक उभरता हुआ वैश्विक केंद्र नवा रायपुर, जो पहले से ही एक स्मार्ट सिटी के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, अब शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में भी एक नया मुकाम हासिल कर रहा है। एन.आई.एफ.टी. कैम्पस की स्थापना से नवा रायपुर को फैशन और टेक्सटाइल उद्योग का एक प्रमुख केंद्र बनने का अवसर मिलेगा। यह परियोजना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की छवि को भी निखारेगी।

मुख्यमंत्री साय ने 18 नए अग्निशमन वाहनों को दिखाई हरी झंडी

नवा रायपुर में अग्निशमन केंद्र सह आवासीय परिसर का किया लोकार्पण अत्याधुनिक अग्निशमन वाहनों से राहत कार्यों को मिलेगी गति रायपुर प्रदेश की नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार लगातार प्रतिबद्ध प्रयास कर रही है। संसाधनों के आधुनिकीकरण, अग्निशमन सेवाओं को तकनीकी रूप से उन्नत करने और जवानों के प्रशिक्षण व मनोबल को प्राथमिकता देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के माना कैंप स्थित नगर सेना केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 18 नवीन अग्निशमन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने सेक्टर-13, नवा रायपुर में नवनिर्मित अग्निशमन केंद्र सह आवासीय परिसर और माना में नवीन सेनानी कार्यालय का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। आपातकालीन सेवाओं को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ये अत्याधुनिक अग्निशमन वाहन प्रदेश की त्वरित आपातकालीन सेवाओं की क्षमता को नई गति देंगे। उन्होंने इसे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकार्पित भवनों के माध्यम से अग्निशमन तंत्र को मजबूती मिलेगी और हमारे जवानों की दक्षता में भी इजाफा होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन नए वाहनों से आगजनी की घटनाओं पर पहले से कहीं अधिक प्रभावी तरीके से और तेज़ी से काबू पाया जा सकेगा, जिससे जान-माल की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि जीवन की रक्षा सबसे बड़ा कार्य है और इसे पूरी निष्ठा और तत्परता से निभाने वाले अग्निशमन कर्मी हमारे सच्चे नायक हैं, जिनकी सेवाओं को समाज हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखता है। आपातकालीन सेवा का डेमो और अत्याधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी कार्यक्रम के दौरान राज्य आपदा मोचन बल और अग्निशमन राहत दल द्वारा आगजनी की घटना पर आधारित आपातकालीन सेवा का प्रदर्शन (डेमो) भी किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को गहरी रुचि और गंभीरता से देखा और जवानों की तत्परता व सजगता की भूरी-भूरी प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने अग्निशमन सेवाओं में उपयोग होने वाले अत्याधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें लुकास जैक, ग्लास ब्रेकर, एयर लिफ्टिंग बैग, पेलिकन टावर लाइट, डायमंड टिप, चेन सॉ, फायर जैल ब्लैकेट, फायर सूट और अंडर वॉटर कैमरा जैसे उपकरणों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता की जानकारी दी। अग्निशमन सेवाओं का निरंतर हो रहा सशक्तिकरण उप पुलिस महानिरीक्षक अजात शत्रु बहादुर सिंह ने बताया कि वर्ष 2017 में अग्निशमन सेवा को नगरीय निकाय से हस्तांतरित किया गया था। वर्तमान में प्रतिवर्ष औसतन 8,000 फायर कॉल प्राप्त होते हैं, जबकि ग्रीष्मकाल में यह संख्या प्रतिदिन 40 तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि आज जिन 18 नवीन अग्निशमन वाहनों को शामिल किया गया है, उनके साथ विभाग के पास अब कुल 161 अग्निशमन वाहन उपलब्ध हो गए हैं। रायगढ़, कोरबा, कबीरधाम, दंतेवाड़ा, धमतरी, कोरिया और अंबिकापुर जैसे जिलों को आज ही ये वाहन सौंपे गए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि एनआरडीए द्वारा नवा रायपुर में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के लिए 5.5 करोड़ रुपये की लागत से फायर स्टेशन सह आवासीय परिसर का निर्माण कराया गया है, जिसका आज लोकार्पण हुआ। शहीद अग्निशमन कर्मियों को समर्पित अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह अजात शत्रु बहादुर सिंह ने बताया कि अग्निशमन सेवाओं में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर कर्मचारियों की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को शहीद दिवस मनाया जाता है और 14 से 20 अप्रैल तक पूरे देश में अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह आयोजित किया जाता है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में भी इस वर्ष अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में विधायक  मोतीलाल साहू, अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना बनी दिव्यांग दंपति का सहारा

रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना बनी दिव्यांग दंपति का सहारा। यह कहानी ग्राम पंचायत खजुरी जनपद पंचायत प्रतापपुर जिला सूरजपुर के दिव्यांग पति व पत्नी की है। जो जन्म से ही आंखों की रोशनी खो चुके हैं  विवाह के बाद जीवन यापन में आई आर्थिक तंगी मे मनरेगा योजना सहारा बना है। जन्म से ही इस दिव्यांगता के अभिशाप को ढोकर चल रहे दंपत्ति के सामने आर्थिक मदद के तौर पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के पहल से जिला प्रशासन के द्वारा इनकी जीवन शैली में सुधार हेतु कई योजनाओं का लाभ देते हुए इस दंपत्ति का मनरेगा में जॉब कार्ड बनाया गया और दंपत्ति कार्यस्थल पर मजदूरों को पानी पिलाकर अपने कर्तव्य का निर्वहन भी कर रहे हैं। ग्राम पंचायत खजुरी में श्यामसाय पैकरा एवं उनकी पत्नी निरपति दोनो आंखों से दिव्यांग है। इनके पास कोई काम नहीं होने की स्थिति में सोसायटी से मिलने वाला राशन एवं निरपति को मिलने वाला पेंशन ही इनके जीवन निर्वाह करने का साधन था। बढ़ती महंगाई में दम्पत्ति को आर्थिक समस्याओं का सामना कर पड़ रहा था, जिससें जिला प्रशासन के सामने गुहार लगाकर अपने लिए रोजगार सृजन किया व मनरेगा में जाबकार्ड बनवा कर मजदूरों को पानी पिलाकर जीवनयापन कर रहे हैं। आर्थिक और कई समस्याओं से जूझ रहे इस दिव्यांग जोड़े के नाम जॉबकार्ड जारी होने तथा अब मजदूरी मिलने के बाद इनके सामने भरण पोषण की समस्या खत्म हो गई है।     जिला प्रशासन के नजर में आने से इनको जिला प्रशासन की ओर से प्रोत्साहन राशि भी प्रदान किया जा रहा हैं। बहरहाल जन्म से ही इस दिव्यांग दंपत्ति के सामने आर्थिक मदद के तौर पर मनरेगा जॉंबकार्ड जारी कर रोजगार उपलब्ध करा दिया गया है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इस दम्पत्ति ने विकट परिस्थिति में भी भीख मांगकर गुजारा करने की बजाय अपने लिए रोजगार का सृजन किया है और कार्यस्थल पर मजदूरों को पानी पिलाकर अपने कर्तव्य का निर्वहन भी कर रहे हैं। शासन की मंशानुरूप मनरेगा इस बेसहारा परिवार के लिए बड़ा सहारा बन गया है।

पूर्व वन मंत्री के भाई की कंपनी पर गंभीर आरोप, 38 किमी लंबी सड़क 5 साल बाद भी अधूरी

गरियाबंद राजिम क्षेत्र में 109 करोड़ की लागत से बन रही 38 किमी लंबी सड़क 5 साल बाद भी अधूरी है  पाण्डुका से जतमई होते हुए मूड़ागांव तक बनाई जा रही इस सड़क का निर्माण 2019 में शुरू हुआ था, जिसे 2022 तक पूरा हो जाना था. लेकिन अब तक इसका निर्माण अधूरा है. इस परियोजना का ठेका पूर्व वन मंत्री के भाई असगर खान की रायपुर कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला था. हालांकि फॉरेस्ट लैंड की अनुमति में देरी के चलते 2024 तक एक्सटेंश मिला. इसके बावजूद, आज भी लगभग ढाई किलोमीटर घाटी का हिस्सा अधूरा है. भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रीतम सिन्हा ने सड़क निर्माण कार्य में गुणवत्ता में कमी का आरोप लगाया है. सड़क निर्माण कार्य की गुणवक्ता में कमी का आरोप भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रीतम सिन्हा ने कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्माण में इस्तेमाल हो रहे मुरम और गिट्टी की लैब जांच केवल औपचारिकता मात्र है और अमानक सामग्री का इस्तेमाल खुलेआम हो रहा है. विभाग ने परियोजना की निगरानी के लिए एक कंसल्टेंट नियुक्त किया है. इंजीनियर किसलया चक्रवर्ती का कहना है कि निर्माण कार्य मई 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा. अतरिक्त समय मिला हुआ है. उपयोग की जा रही सामग्री की नियमित लैब जांच हो रही है. अवैध खनन पर भी उठे सवाल, विभाग मौन 2022 से पाण्डुका क्षेत्र में अवैध मुरम खनन का सिलसिला जारी है. जानकारी के अनुसार, रवेली गांव में वन अधिकार पट्टे की जमीन से खनन शुरू किया गया था, जो आज भी जारी है. रवेली के अलावा पाण्डुका वन परिक्षेत्र के तौरेंगा, मड़ेली, खड़मा, पंडरीतराई और गाय डबरी जैसे कई अन्य स्थलों से भी मुरम निकाली जा रही है. खदान के लिए पेड़ गिराने के अलावा जंगल आने जाने के लिए भी पेड़ो को धराशाई कर रास्ता बनाया गया. जब मामले पर डीएफओ लक्ष्मण सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने पहले अनभिज्ञता जताई, लेकिन जब उन्हें वीडियो और फोटो दिखाए गए, तब उन्होंने रेंजर से संपर्क किया. हालांकि, उनके मातहतों ने भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी. डीएफओ ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की बात कही है. पिचिंग बोल्डर तोड़ रहे, अनजान बनकर बैठा खनिज विभाग प्रभाव शाली ठेकेदार के इस काम में माइनिंग और राजस्व भी भारी मेहरबानी दिखाई पड़ती है. ठेका कंपनी का 2020 में साकरा में बड़े झाड़ जंगल में अपना प्लांट स्थापित करने में सफल हो गया।प्रशासनिक मेहरबानी के चलते सड़क किनारे बनाए जा रहे ड्रेनेज वाल में इस्तेमाल होने वाले पिचिंग बोल्डर की तुड़ाई में जंगलों में अवैध तरीके से किया गया है. खनिज विभाग के सहायक खनिज अधिकारी रोहित साहू ने भी मामले की जानकारी से इनकार किया है, लेकिन उन्होंने मौके का निरीक्षण कर कार्रवाई की बात कही है.

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