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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार आयोजन के संबंध में कलेक्टरों को दिए दिशा-निर्देश

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी करते हुए “सुशासन तिहार-2025” के आयोजन के निर्देश दिए है। यह तिहार प्रदेश में सुशासन की सशक्त स्थापना, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान, जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और जन संवाद को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि सरकार शासन के प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता, प्रभावशीलता और जन-हितैषी प्रशासन की स्थापना को लेकर कटिबद्ध है। इस तिहार के माध्यम से शासन-प्रशासन सीधे आम जनता से जुड़कर, उनकी समस्याओं को समयबद्ध ढंग से सुलझाने का कार्य करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार राज्य में सुशासन की स्थापना को लेकर लगातार काम कर रही है। शासन-प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर शासकीय काम-काज में पारदर्शिता आए, शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो, इसका लाभ समाज के उन वर्गों को तत्परता से मिले, जिनके लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं, इसको लेकर शासन-प्रशासन स्तर पर प्रभावी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर सुशासन तिहार-2025 के संचालन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि “सुशासन तिहार-2025” के आयोजन के उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना तथा विकास कार्यों में गति लाने के साथ ही आम जनता, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से सीधा संवाद स्थापित करना है। सुशासन तिहार-2025 का आयोजन तीन चरणों में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार-2025 का आयोजन तीन चरणों में होगा। पहले चरण में 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक आम जनता से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। दूसरे चरण में लगभग एक माह के भीतर प्राप्त आवेदनों का निराकरण किया जाएगा। तीसरे एवं अंतिम चरण में 05 मई से 31 मई 2025 के बीच समाधान शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस तिहार को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं एवं एक पोर्टल बनाया जा रहा है। प्रत्येक जिले की परंपराओं, आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुसार नवाचार भी किए जा सकते हैं, जिससे यह तिहार अधिक जनोपयोगी और प्रभावशाली बने। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि आम जनता से उनकी समस्याओं के संबंध में 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक ग्राम पंचायत मुख्यालयों और नगरीय निकाय कार्यालयों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। इन स्थलों पर समाधान पेटी रखी जाएगी, ताकि लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें निःसंकोच लिखकर उसमें डाल सकें। आवेदन प्राप्त करने के लिए समाधान पेटी की व्यवस्था जिला और विकासखण्ड मुख्यालय स्तर पर भी की जाए। आवश्यकतानुसार हाट बाजारों में भी आवेदन संग्रह किये जा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की भी पोर्टल में व्यवस्था रहेगी। कॉमन सर्विस सेंटर का भी ऑनलाइन आवेदन लेने हेतु उपयोग किया जा सकता है। प्रत्येक आवेदन को एक कोड देने की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। निर्धारित प्रारूप में खाली आवेदन पत्र (ग्रामवार/नगरीय निकायवार कोड सहित) प्रिन्ट कराकर ग्रामीणों को उपलब्ध कराये जा सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रत्येक आवेदन को पोर्टल में पंजीकृत कर ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा, साथ ही, आवेदनकर्ता को पावती दी जाएगी। जनता को आवेदन लिखने में सहायता प्रदान करने हेतु कलेक्टर आवश्यकतानुसार अधिकारियों/कर्मचारियों की ड्यूटी लगा सकते हैं। इन तिथियों का विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। आवेदनों का निराकरण मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सभी प्राप्त आवेदनों को स्कैन कर सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा और संबंधित जिला/जनपद/नगरीय निकाय के अधिकारियों को ऑनलाइन व भौतिक रूप से भेजा जाएगा। संबंधित विभाग/अधिकारी लगभग एक माह में इन आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित करेंगे। मांग से संबंधित आवेदनों को बजट की उपलब्धता के आधार पर निराकृत किया जाएगा। इन आवेदनों के निराकरण की गुणवत्ता का विश्लेषण जिला और राज्य स्तर पर किया जाए। समाधान शिविर का आयोजन मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 05 मई से 31 मई 2025 के दौरान प्रत्येक 08 से 15 पंचायतों के मध्य समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आवेदकों को उनके आवेदनों की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। नगरीय निकायों में भी आवश्यकतानुसार समाधान शिविर आयोजित होंगे। शिविरों के आयोजन की तिथि की जानकारी आवेदकों को एस.एम.एस. के माध्यम से तथा आवेदन की पावती के माध्यम से दी जाए, साथ ही इन तिथियों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए। इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों की प्रविष्टि भी पोर्टल में की जाए तथा जिन आवेदनों का निराकरण शिविर में सम्भव हो, शिविर में किया जाए, शेष आवेदनों का समाधान एक माह में कर आवेदकों को सूचित किया जाए। शिविरों में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और हितग्राहीमूलक योजनाओं के आवेदन पत्र/प्रपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक शिविर के लिए एक खंडस्तरीय अधिकारी को प्रभारी बनाया जाए, जो शिविर के समुचित संचालन को सुनिश्चित करेंगे। समाधान शिविरों में विकासखंड एवं अनुभाग स्तर के सभी अधिकारी उपस्थित रहेंगे, जिला स्तर से भी कुछ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इसी तरह की व्यवस्था नगरीय निकायों के शिविरों में भी की जाए।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को खनिज राजस्व में ऐतिहासिक सफलता

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और खनिज साधन विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद के निर्देशन में छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व प्राप्ति में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश में संचालित खनन संक्रियाओं से 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विगत वर्ष 2023-24 के 12,795 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 11% की वृद्धि (1400 करोड़ रुपये अधिक) दर्शाता है। प्रदेश में खनिज राजस्व प्राप्ति में दंतेवाड़ा अव्वल वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के खनिज राजस्व संग्रहण में जिला दंतेवाड़ा ने सर्वाधिक 6580 करोड़ रुपये का योगदान देकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा, कोरबा से 2148 करोड़, रायगढ़ से 2027 करोड़, बालोद से 1313 करोड़, सरगुजा से 585 करोड़, बलौदाबाजार से 354 करोड़, कांकेर से 328 करोड़, तथा सूरजपुर से 155 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय राजस्व भागीदारी दर्ज की गई है। खनिज संसाधनों में राष्ट्रीय भागीदारी छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों की दृष्टि से देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में मात्र 4% की हिस्सेदारी होते हुए भी छत्तीसगढ़ का  देश के कुल खनिज उत्पादन मूल्य में 16% से अधिक की भागीदारी है। यहां मुख्य रूप से लौह अयस्क, कोयला, चूनापत्थर और बाक्साइट के विशाल भंडार हैं, जो खनिज राजस्व के प्रमुख स्रोत हैं। इसके अलावा, राज्य में सामरिक महत्व के खनिजों सहित कुल 28 प्रकार के खनिज भंडार की पुष्टि हुई है। ई-नीलामी प्रणाली से अतिरिक्त राजस्व वर्ष 2015 से खनिज विभाग द्वारा खनिजों का ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन की कार्यवाही की जा रही है, जिससे रॉयल्टी के अलावा प्रीमियम के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो रही है। खनिज राजस्व में हो रही बढ़ोत्तरी में ई नीलामी के माध्यम से स्वीकृत खदानों का योगदान अब स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। खनिज विकास मद से अधोसंरचना को बल राज्य शासन द्वारा खनिज राजस्व की कुल प्राप्ति की 5% राशि “खनिज विकास मद” में अंतरित की जाती है। इससे प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में खनिज संसाधनों के विकास और अधोसंरचना निर्माण का कार्य किया जा रहा है। आगामी वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में केवल रेल कॉरिडोर निर्माण हेतु प्रावधानित किए गए हैं। समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान प्रदेश की खनन संक्रिया केवल औद्योगिक संस्थानों को कच्चा माल प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक विकास का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। “छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा से नहीं, विकास की असीम संभावनाओं और जनकल्याण के संकल्प से भी समृद्ध है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त कर प्रदेश ने एक नई ऊँचाई को स्पर्श किया है। यह उपलब्धि हमारी दूरदर्शी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन, और ईमानदार कार्यसंस्कृति का प्रतिफल है। ई-नीलामी प्रणाली, तकनीकी नवाचार और सुशासन के माध्यम से हम खनिज क्षेत्र को केवल राजस्व संग्रहण का माध्यम नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों के लिए विकास के इंजन के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं।”  

छत्तीसगढ़ को मिली 8741 करोड़ रुपए की बड़ी सौगात: खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा रेल परियोजना से खुलेगा विकास का नया द्वार

रायपुर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने भारतीय रेलवे की चार महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत लगभग 18,658 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र और ओडिशा के कुल 15 ज़िलों को जोड़ते हुए रेलवे नेटवर्क में 1247 किलोमीटर की महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। छत्तीसगढ़ के लिए विशेष रूप से स्वीकृत ‘खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा 5वीं एवं 6वीं लाइन’ परियोजना से राज्य के औद्योगिक नक्शे में ऐतिहासिक परिवर्तन की संभावनाएं बनेंगी। यह परियोजना बलौदा बाजार जैसे क्षेत्रों को सीधी रेलवे कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे सीमेंट संयंत्रों, इस्पात इकाइयों और अन्य औद्योगिक निवेश के लिए आधारभूत संरचना तैयार होगी। यह मार्ग कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और चूना पत्थर जैसी सामग्रियों के परिवहन में क्रांतिकारी सुधार लाएगा। इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी, संचालन की गति बढ़ेगी और उद्योगों को निर्बाध सप्लाई चेन मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को मिली यह ऐतिहासिक रेल परियोजना आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है। खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा लाइन से बलौदा बाजार और आस-पास के क्षेत्रों को  रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे यहाँ के युवाओं के लिए रोज़गार और स्वरोज़गार के नए द्वार खुलेंगे। यह परियोजना छत्तीसगढ़ में नया अध्याय लिखेगी, जिससे न केवल कोयला, सीमेंट और लौह अयस्क जैसे क्षेत्रों में उत्पादन और परिवहन को गति मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की आवश्यकता और क्षमता को पहचान कर रेल परियोजनाओं के माध्यम से राज्य को ‘विकास के फास्ट ट्रैक’ पर लाने का काम किया है। उल्लखेनीय है कि खरसिया से परमलकसा तक 5वीं और 6वीं नई रेल लाइन बिछाने के लिए ₹8,741 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति मिल गई है, जिससे छत्तीसगढ़ को लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों के क्षेत्र में बड़ी बढ़त मिलेगी। मुख्य विशेषताएँ कुल लंबाई: 278 किमी लंबा रेलमार्ग, 615 किमी ट्रैक की लंबाई स्टेशनों की संख्या: 21 पुल और फ्लाईओवर: 48 बड़े पुल, 349 छोटे पुल, 14 आरओबी, 184 आरयूबी, 5 रेल फ्लाईओवर ट्रैफिक क्षमता: 21 से 38 मिलियन टन कार्गो, 8 मेल/एक्सप्रेस/सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें ईंधन और पर्यावरण संरक्षण: 22 करोड़ लीटर डीजल की बचत प्रतिवर्ष 113 करोड़ किग्रा CO2 की कटौती – यह लगभग 4.5 करोड़ पेड़ों के लगाने के बराबर है। लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी: सड़क परिवहन की तुलना में प्रतिवर्ष ₹2,520 करोड़ की बचत इन ज़िलों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ:रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदा बाज़ार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव। राज्य की प्रगति का नया युग इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों में तीव्र गति आएगी। यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता और ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को नया आयाम देगी।

जिला पंचायत महासमुंद की स्थायी समिति गठन हेतु पीठासीन अधिकारी नियुक्त

महासमुंद छत्तीसगढ़ जनपद पंचायत तथा जिला पंचायत स्थायी समितियाँ नियम 1994 के नियम 6 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जिला महासमुंद के लिए स्थायी समिति गठन हेतु पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति की है। जिला पंचायत महासमुंद के लिए अपर कलेक्टर श्री रविराज ठाकुर को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह निर्वाचन (सम्मिलन) दिनांक 09 अप्रैल 2025 को प्रातः 11:00 बजे से जिला पंचायत महासमुंद के सभाकक्ष में संपन्न होगा। यह नियुक्ति स्थायी समिति गठन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से की गई है।

कलेक्टर ने किया 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा के उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन केन्द्र का निरीक्षण

 गौरेला पेंड्रा मरवाही कलेक्टर  लीना कमलेश मंडावी ने 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा के उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन केन्द्र स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम पेण्ड्रा का निरीक्षण किया। उन्होंने मूल्यांकन केन्द्राधिकारी से आज दिनांक तक मूल्यांकित एवं अमूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या और मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की विषयवार प्रविष्टि की जानकारी ली। उन्होंने केन्द्राधिकारी को मूल्यांकन कार्य में लगे सभी शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराते हुए 12 अप्रैल तक मूल्यांकन कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान संयुक्त कलेक्टर दिलेराम डाहिरे एवं जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अमित सिन्हा भी उपस्थित थे।

राज्यपाल को पहली बार अपने क्षेत्र में देखकर अभिभूत हुए ग्रामीण

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका ने आज नगर पालिका परिषद् सुकमा के वार्ड क्रमांक 01 सुभाषचंद्र बोस वार्ड में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लाभान्वित परिवार के घर पहुंचकर उनसे भेंट की। यह पहली बार हुआ है कि जब प्रदेश के राज्यपाल इस क्षेत्र में आए है। उन्हें देखकर ग्रामीणों में प्रसन्नता व्याप्त हो गई । राज्यपाल डेका ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही समीर विश्वास के घर पहुचे और उनसे बातचीत कर शासन से मिलने वाली योजनाओं की जानकारी ली। उनके आगमन से ग्रामीण अभिभूत हुए और उन्होंने इस ऐतिहासिक क्षण के लिए प्रसन्नता व्यक्त किया।

घरेलू विद्युत उपकरण सुधार व चार पहिया वाहन का निःशुल्क प्रशिक्षण के लिए 15 अप्रैल तक करा सकते है पंजीयन

महासमुंद बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, महासमुन्द द्वारा जिले के 18 से 45 वर्ष के युवाओं के लिए घरेलू विद्युत उपकरण सुधार व चार पहिया वाहन का निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इच्छुक हितग्राही 15 अप्रैल तक पंजीयन करा कर इस सुनहरे अवसर का लाभ उठा सकते हैं। प्रशिक्षण के लिए आवश्यक दस्तावेजों में बी.पी.एल. राशन कार्ड की दो फोटो कॉपी, आधार कार्ड की दो फोटोकॉपी, पासपोर्ट साइज की 5 फोटो, शैक्षणिक योग्यता की अंकसूची की फोटो कॉपी शामिल है। प्रशिक्षण से संबंधित अधिक जानकारी के लिए प्रतीक साहेब गुप्ता के मोबाइल नंबर +91-93402-81974 पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को खनिज राजस्व में ऐतिहासिक सफलता

 वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद के निर्देशन में छत्तीसगढ़  ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व प्राप्ति में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश में संचालित खनन संक्रियाओं से 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विगत वर्ष 2023-24 के 12,795 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 11% की वृद्धि (1400 करोड़ रुपये अधिक) दर्शाता है। प्रदेश में खनिज राजस्व प्राप्ति में दंतेवाड़ा अव्वल वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के खनिज राजस्व संग्रहण में जिला दंतेवाड़ा ने सर्वाधिक 6580 करोड़ रुपये का योगदान देकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा, कोरबा से 2148 करोड़, रायगढ़ से 2027 करोड़, बालोद से 1313 करोड़, सरगुजा से 585 करोड़, बलौदाबाजार से 354 करोड़, कांकेर से 328 करोड़, तथा सूरजपुर से 155 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय राजस्व भागीदारी दर्ज की गई है। खनिज संसाधनों में राष्ट्रीय भागीदारी छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों की दृष्टि से देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में मात्र 4% की हिस्सेदारी होते हुए भी छत्तीसगढ़ का  देश के कुल खनिज उत्पादन मूल्य में 16% से अधिक की भागीदारी है। यहां मुख्य रूप से लौह अयस्क, कोयला, चूनापत्थर और बाक्साइट के विशाल भंडार हैं, जो खनिज राजस्व के प्रमुख स्रोत हैं। इसके अलावा, राज्य में सामरिक महत्व के खनिजों सहित कुल 28 प्रकार के खनिज भंडार की पुष्टि हुई है। ई-नीलामी प्रणाली से अतिरिक्त राजस्व वर्ष 2015 से खनिज विभाग द्वारा खनिजों का ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन की कार्यवाही की जा रही है, जिससे रॉयल्टी के अलावा प्रीमियम के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो रही है। खनिज राजस्व में हो रही बढ़ोत्तरी में ई नीलामी के माध्यम से स्वीकृत खदानों का योगदान अब स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। खनिज विकास मद से अधोसंरचना को बल राज्य शासन द्वारा खनिज राजस्व की कुल प्राप्ति की 5% राशि “खनिज विकास मद” में अंतरित की जाती है। इससे प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में खनिज संसाधनों के विकास और अधोसंरचना निर्माण का कार्य किया जा रहा है। आगामी वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में केवल रेल कॉरिडोर निर्माण हेतु प्रावधानित किए गए हैं। समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान प्रदेश की खनन संक्रिया केवल औद्योगिक संस्थानों को कच्चा माल प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक विकास का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। “छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा से नहीं, विकास की असीम संभावनाओं और जनकल्याण के संकल्प से भी समृद्ध है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त कर प्रदेश ने एक नई ऊँचाई को स्पर्श किया है। यह उपलब्धि हमारी दूरदर्शी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन, और ईमानदार कार्यसंस्कृति का प्रतिफल है। ई-नीलामी प्रणाली, तकनीकी नवाचार और सुशासन के माध्यम से हम खनिज क्षेत्र को केवल राजस्व संग्रहण का माध्यम नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों के लिए विकास के इंजन के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं।”

सरकारी सहायता से बदली भुलऊ तकदीर

बेमेतरा छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के रहने वाले भुलऊ मेहर का जीवन वर्षों से मोची के काम पर निर्भर था। वे पिछले 16 वर्षों से यह कार्य कर रहे थे, लेकिन सीमित संसाधनों और पुराने औजारों के कारण उनका व्यवसाय सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार का भरण-पोषण कठिनाई से हो रहा था। उनके पास नई तकनीक और आधुनिक औजारों का अभाव था, जिससे उनकी आमदनी सीमित थी। लेकिन सरकार की योजनाओं ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। छत्तीसगढ़ सरकार की संत रविदास चर्मशिल्प योजना ने भुलऊ मेहर के जीवन में नई रोशनी लाई। इस योजना के तहत उन्हें एक नई मोची पेटी और आधुनिक औजार प्रदान किए गए। इससे उनके काम की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार हुआ। अब वे अधिक ग्राहकों को सेवा दे पा रहे हैं और उनकी आमदनी भी बढ़ गई है। आज, शुक्रवार को, जब कलेक्टर रणबीर शर्मा ने स्वयं भुलऊ मेहर को यह औजार सौंपे, तो उनके चेहरे पर एक नई खुशी की झलक साफ दिखाई दी। इस अवसर पर एडीएम अनिल वाजपेयी और सहायक आयुक्त आदिवासी विकास अभिषेक जायसवाल भी उपस्थित थे। भुलऊ ने सभी का आभार व्यक्त किया और बताया कि अब उनका व्यवसाय बेहतर तरीके से चल रहा है। परिवार को भी मिल रहा लाभ भुलऊ मेहर को सिर्फ संत रविदास चर्मशिल्प योजना का ही नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की कई अन्य योजनाओं का भी लाभ मिला है।     1.    प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें पक्का घर मिला, जिससे अब उनका परिवार सुरक्षित और आरामदायक जीवन जी रहा है।     2.    राशन कार्ड के माध्यम से उन्हें हर महीने उचित मूल्य पर खाद्य सामग्री मिलती है, जिससे भोजन की चिंता कम हो गई है।     3.    आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका आयुष्मान कार्ड बना है, जिससे वे और उनका परिवार अब मुफ्त में इलाज करवा सकते हैं। इन सभी योजनाओं ने मिलकर भुलऊ मेहर को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बना दिया है। प्रेरणा की मिसाल बने भुलऊ मेहर भुलऊ मेहर की सफलता की कहानी अन्य चर्मशिल्पकारों के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि मेहनत के साथ सही सहायता मिल जाए, तो जीवन में बदलाव आ सकता है। सरकार की योजनाओं ने उनकी राह को आसान बनाया, लेकिन उनकी अपनी मेहनत और लगन ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। आज वे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हुए अपनी नई सफलता की कहानी लिख रहे हैं। उनके प्रयास और सरकार की सहायता ने मिलकर उनके जीवन को बदल दिया है। अब वे न केवल खुद सशक्त हुए हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि सही योजना और मेहनत से हर कोई आगे बढ़ सकता है। भुलऊ मेहर की यह नई उड़ान समाज के हर उस व्यक्ति के लिए संदेश है, जो संसाधनों की कमी के कारण आगे बढ़ने से डरता है। अगर इरादे मजबूत हों और सही अवसर मिले, तो सफलता निश्चित है!

कोरबा में तेज रफ्तार ट्रेलर पलटने से साइकिल सवार की मौत

कोरबा दीपका थाना क्षेत्र अंतर्गत विजय नगर बाईपास मार्ग पर आज सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया. कोयला लोड कर एसईसीएल खदान से निकली एक तेज रफ्तार ट्रेलर अनियंत्रित होकर पलट गई. इस हादसे की चपेट में सड़क किनारे चल रहा एक साइकिल सवार आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इस हादसे में हाइवा चालक को भी मामूली चोंटे आई है. राहगिरों से सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. फिलहाल पुलिस हाईवा चालक को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है. पुलिस ने मृतक की पहचान 40 वर्षीय धनसाय, निवासी जवाली गांव के रूप में की है. परिजनों को सूचना देने के बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.

राज्यपाल के दंतेवाड़ा आगमन पर आत्मीय स्वागत

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका के आज दंतेवाड़ा आगमन पर कारली हैलीपेड में वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया । इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ सी.आर. प्रसन्ना एवं दंतेवाड़ा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, सहित जिला प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

एसीबी ने सीमांकन के नाम पर दस हजार की घूस लेते पटवारी को रंगे हाथ पकड़ा

बलरामपुर पटवारी और रिश्वतखोरी एक तरह से पर्याय हो चुका है. ऐसा ही एक मामला जिले में सामने आया है, जिसमें सीमांकन के लिए प्रार्थी से दस हजार रुपए की मांग करने वाले पटवारी को एसीबी ने घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है. प्रार्थी राजेश पटेल परसडीहा जनपद पंचायत वाड्रफनगर जिला बलरामपुर रामानुजगंज के द्वारा अपने निजी भूमि के सीमांकन हेतु आवेदन दिया गया था, जिसके बाद राजस्व हल्का पटवारी हेमंत कुजूर उससे पैसे की डिमांड कर रहा था. प्रार्थी के अनुसार, पटवारी ने 10000 रुपए की मांग की थी. प्रार्थी ने बतौर एडवांस 2000 रुपए पटवारी को दे चुका था, जिसके बाद शेष 8000 रुपए की रकम देना था. आज पटवारी को रकम देने के लिए तहसील कार्यालय के ठीक सामने आवेदक पहुंचा था. पटवारी के रकम लेते हुए एसीबी की टीम ने 8000 रुपए के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया.

छुट्टी पर घर आया जवान हुआ लापता, माता-पिता ने मदद के लिए प्रशासन से लगाई गुहार

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद में एक आर्मी का जवान लगभग 1 महीने से लापता है. वह अपने बीमार पिता के इलाज के लिए घर कलंगपुर आया हुआ था, लेकिन 6 मार्च को वह घर से अचानक निकला और अब तक लौटकर नहीं आया और न ही उसकी कोई खबर आई. गुमशूदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद भी अब तक कुछ पता नहीं चला, तो अब जवान के मां और बीमार पिता अपने बेटे को ढूंढने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं. उन्होंने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर अपने बेटे को खोजने में मदद की गुहार लगाई है. जानकारी के अनुसार, आर्मी जवान शेजसिंह मंडावी जम्मू-कश्मीर में पदस्थ है. वह छुट्टी पर घर लौटने के बाद रहस्यमय तरीके से लापता हो गया. परिजन काफी समय से जवान की तलाश कर रहे हैं, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. परिवार का कहना है कि शेजसिंह कहां है और किस हाल में है, इसकी कोई जानकारी नहीं है. अब वे दर-दर भटक कर लोगों और शासन-प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि उनके बेटे को ढूंढने में मदद की जाए.

रामसागार पारा, श्रीरामपुर एवं लाटादादर को राजस्व ग्राम घोषित नहीं होने से सैकड़ों परिवारों को शासकीय योजनाओं का नहीं मिल पा रहा लाभ

महासमुंद बारनवापारा अभयारण्य के वन ग्राम से 399 परिवारों को दस वर्ष पूर्व महासमुंद जिले के रामसागार पारा (भावा), श्रीरामपुर एवं लाटादादर में लाकर शासन ने बसाया था. लेकिन आज तक इन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित नहीं किए जाने से सैकड़ों परिवारों को शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे परेशान ग्रामीण कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं. वर्ष 2013 में महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत भावा के आश्रित ग्राम रामसागरपारा में बारनवापारा अभयारण्य के वनों में बसे 399 परिवारों में से 168 परिवारों को बसाया गया था. उस वक्त प्रत्येक परिवार को 12 डिसमिल मे मकान बनाकर दिया गया था, साथ में जीविकोपार्जन के लिए प्रत्येक परिवार को 5-5 एकड़ भूमि खेती- किसानी के लिए दी गई थी. उस वक्त के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसे राजस्व ग्राम बनाने के साथ सभी मूलभूत सुविधा प्रदान करने की बात कही थी, पर आज दस वर्ष से ज्यादा हो जाने के बाद भी ये ग्राम न तो राजस्व ग्राम घोषित हुआ, और न ही इन परिवारों की जमीन ऑनलाइन हुई, जिसकी वजह से इन ग्रामवासियों को शासन की कई महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है. इन परिवारों के बच्चों का न तो जाति प्रमाण पत्र बन पा रहा है और न ही निवास प्रमाण पत्र. इन लोगों का किसान क्रेडिट कार्ड, वृद्धा पेंशन, मनरेगा का जॉब कार्ड, किसान सम्मान निधि, बैंक से ऋण भी नहीं मिल रहा है. परेशान ग्रामीण राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर आला अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं. इस पूरे मामले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह का कहना है कि जल्द से जल्द राजस्व ग्राम घोषित कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा. कलेक्टर के आश्वासन के बाद पीड़ित परिवारों की समस्या जल्द दूर होने की उम्मीद जगी है.

गरियाबंद में ओपन परीक्षा में बड़ी लापरवाही : 12वीं के बजाए 10वीं का थमाया पेपर, 3 जिम्मेदारों पर कार्रवाई

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में ओपन परीक्षा में बड़ी लापरवाही सामने आई है. कक्षा 12वीं की परीक्षा में 10वीं कक्षा के पेपर बच्चों में बांट दिए गए. इस लापरवाही से कल आयोजित होने वाले 10 वीं का पर्चा एक दिन पहले ही लीक हो गया. जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला लोहरसी परीक्षा केंद्र का है. पेपर बांटने में गड़बड़ी को लेकर केंद्राध्यक्ष नारायण सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि आज 12 वीं का गृह विज्ञान का पेपर था, लेकिन गलती से 10 वीं का गृह विज्ञान पर्चा दे दिया गया था. हालांकि गलती का पता चलते ही केंद्राध्यक्ष नारायण सिंह ने पेपर बदल दिया. लेकिन परीक्षा में हुई इस बड़ी लापरवाही को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने केंद्राध्यक्ष समेत 3 जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की है. DEO सारस्वत ने अब दसवीं के खुल चुके पर्चे को बदलने के अलावा परीक्षा की तारीख निरस्त करने के लिए राज्य ओपन परीक्षा को पत्र भेजा है. डीईओ सारस्वत ने बताया कि लापरवाही के चलते ड्यूटी में तैनात केंद्राध्यक्ष नारायण सिंह,सहायक केंद्राध्यक्ष तुलसी राम यादव,और ऑब्जर्वर नितू साह को हटाया गया है.

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