LATEST NEWS

25 फीट की ऊंचाई से गिरकर मजदूर की मौत, मृतक के परिजनों ने मजदूरों के साथ किया प्रदर्शन

कोरबा दो दिन पहले कुसमुंडा खदान में 25 फीट की ऊंचाई से गिरकर मजदूर की मौत हो गई थी. वहीं आज मृतक के परिजनों ने मजदूरों के साथ प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रबंधन ने मुआवजा राशि दी. वहीं मजदूरों ने कंपनी पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि बिना सुरक्षा उपकरणों के जोखिम भरे काम कराए जाते हैं. जानकारी के अनुसार, 11 मार्च को कोल वाशरी के M.P.T K.D.I कंपनी में बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 26 वर्षीय मजदूर किशन कुमार कोल शिफ्टिंग के ऊपर वेल्डिंग का काम कर रहा था. इस दौरान वह 25 फीट ऊपर से नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इस हादसे के बाद खदान में अफरा-तफरी मच गई. प्रबंधन ने मृतक के शव को मोर्चरी में रखवा दिया था, जिसके बाद परिजन शव लेने पहुंचे और गुस्साए मजदूरों के साथ कंपनी की लापरवाही को लेकर जमकर नारेबाजी की और प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. मजदूरों का आरोप है कि खदान में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जाता, जिससे आए दिन इस तरह के हादसे हो रहे हैं. बिना सुरक्षा उपकरणों के कराया जा रहा था काम मौके पर मौजूद मजदूरों ने बताया कि मृतक किशन कुमार बिना हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट के वेल्डिंग कर रहा था, जिससे यह हादसा हुआ. यही नहीं, अन्य कई मजदूर भी बिना सुरक्षा उपकरणों के जोखिम भरा काम कर रहे थे, जिससे कंपनी की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है. मजदूरों का कहना है कि संबंधित विभाग सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है और जब तक किसी की जान नहीं जाती, तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती. आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? कुसमुंडा थाना प्रभारी रूपक शर्मा ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर लिया गया है. वहीं कंपनी ने मृतक के परिवार को मुआवजा देने की घोषणा की है. मामले में आगे की कार्रवाई जारी है.

राज्यपाल डेका को मुख्यमंत्री साय ने दी होली की शुभकामनाएं

  रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका से आज राजभवन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भेंट कर होली की शुभकामनाएं दीॅ और राज्य हित से जुड़े विषयों पर चर्चा की। श्री डेका ने भी उन्हें होली की शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल डेका को मुख्यमंत्री साय ने राजकीय गमछा पहनाकर सम्मानित किया।

नक्सलियों की बड़ी साजिश नाकाम, 5 किलोग्राम से अधिक वजन का प्रेशर कुकर आईईडी बरामद

नारायणपुर जिले के अमदई खदान (निको कंपनी) के डंप एरिया में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है. जवानों ने यहां से 5 किलोग्राम से अधिक वजन का प्रेशर कुकर आईईडी बरामद किया और उसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया. यह मामला छोटेडोंगर थाना क्षेत्र का है. नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए यह आईईडी प्लांट किया था. इससे पहले भी इसी क्षेत्र में आईईडी विस्फोट की घटना हो चुकी है, जिसमें एक कर्मचारी की मौत हो गई थी और कुछ अन्य घायल हुए थे. इस घटना के बाद एसपी ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि उन्हें कहीं आईईडी या संदिग्ध वस्तु दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें. सूचना देने वालों को इनाम दिया जाएगा.

राजधानी में होली की धूम : अलग-अलग थीम पर बनी होलिका, लोगों को लुभा रही मूर्तिकारों की क्रिएटिविटी

रायपुर राजधानी रायपुर में होली त्योहार की धूम देखने को मिल रही है. बाजारों में रौनक के साथ ही होलिका दहन की तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही हैं. जगह-जगह होलिकाओं का अनोखा अंदाज भी दिख रहा है. इस बार शहर के प्रसिद्ध स्थल में से एक कालीबाड़ी चौक पर ‘स्त्री 2’ फिल्म की थीम पर आधारित होलिका की मूर्ति आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. “ओ स्त्री कल आना” थीम के साथ मूर्ति के पास फिल्म के प्रसिद्ध कैरेक्टर ‘सरकटा’ की प्रतिमा भी बनाई गई है, जो लोगों को खासा आकर्षित कर रही है. इस अनोखी मूर्ति को पुजारी मूर्तिकार बंधुओं ने तैयार किया है. इसके साथ ही और भी कई अनोखी होलिका की मूर्तियां तैयार की गई हैं. मूर्तिकार राकेश पुजारी ने कहा कि वे पिछले 15 वर्षों से अलग-अलग थीम की मूर्तियां बना रहे हैं. इस बार ‘स्त्री 2’ फिल्म का ट्रेंड काफी चल रहा है. इस थीम पर सरकटा के रूप में होलिका दहन के लिए मूर्ति बनाई है. अब तक राजधानी रायपुर में 20 से ज्यादा मूर्तियां मैंने बेची हैं और अलग-अलग थीम की मूर्तियां भी इस बार रायपुर में देखने को मिलेंगी, जो काफी आकर्षक रहेंगी. होलिका दहन का मुहूर्त आज रात्रि 10.44 बजे के बाद रायपुर. श्रीजगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती आश्रम बोरियाकला के प्रधान दंडी स्वामी एवं ज्योतिषाचार्य ब्रह्मचारी डॉ. इंदुभवानंद ने बताया कि होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी गुरुवार, 13 मार्च को रात्रि 10:44 बजे के बाद ही करना चाहिए.

बिहान से जुड़ी महिलाओं ने दिन-रात हर्बल गुलाल तैयार किया

बेमेतरा इस बार होली को लेकर बिहान समूह से  जुड़े महिलाओं के द्वारा हर्बल गुलाल तैयार किया गया है । स्व सहायता समूह की स्वरोजगार से जुड़ी महिलाएं दिन-रात हर्बल गुलाल तैयार करने में लगी है। इस गुलाल को लगाने से जहां चेहरे पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है । महिला स्वयं सहायता समूह के जरिए तैयार किए जा इन हर्बल गुलाल और हर्बल रंग की कई विशेषताएं हैं । इसमें फूलों के रंग का इस्तेमाल किया जाता है । इतना ही नहीं गुलाल और रंग में महक के लिए भी फूलों का ही इस्तेमाल किया जाता है. इसमें किसी भी तरह का केमिकल नहीं मिलाया जाता है, जो नुकसान करें। यही वजह है कि इस गुलाल और रंग की डिमांड ज़िले सहित आसपास के ज़िलो में से भी आ रही है। वहीं, महिलाओं को घर बैठे स्वरोजगार भी उपलब्ध हो रहा है ।      बेमेतरा ज़िले के ब्लॉक साजा ग्राम पंचायत महीदही जय मां सिद्धि महिला स्व-सहायता समूह की महिलायें भी हर्बल गुलाल बनाने में जुट हैं । समूह की सचिव श्रीमती पार्वती साहू ने बताया कि पिछले साल होली में  30 किलो हर्बल गुलाल महिलाओं ने बनाया ।जिसकी काफ़ी माँग रही।उन्होंने कहा कि पिछले,20 और 50 रुपए के हर्बल गुलाल के पैकेट बनाए थे।  इस बार समूह की महिला सदस्यों ने हर्बल गुलाल ज़्यादा बनाए जाने का लक्ष्य रखते हुए 95  किलो   हर्बल गुलाल  बनाया गया है। इस बार 50 और 110 रुपये का पैकेट बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पालक,लालभाजी, हल्दी.जड़ी, बुटी व फूलों से हर्बल गुलाल बनाने का कार्य कर रही ।     इसके अलावा मंदिरों फूलों के बाजार से निकलने वाली इस्तेमाल किए हुए फूल पत्तियों को सुखाकर प्रोसेसिंग यूनिट में पीसकर गुलाल तैयार किया जाता है। गुलाब, गेंदे, स्याही फूल के साथ चुकंदर, हल्दी, आम और अमरूद की हरी पत्तियां को भी प्रोसेस किया जाता है।     महिलाओं ने बताया कि एक किलो हर्बल गुलाल बनाने में करीब 75 रुपये खर्च आ रहा है। गुलाल को बनाने में वे पालक, चुकंदर, सिंदूर आदि का उपयोग करती है। इस गुलाल के प्रयोग से किसी तरह का त्वचा को नुकसान नहीं होगा। इसलिए क्षेत्र के लोग भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि लोगों को हर्बल गुलाल के फायदे को समझाएं ताकि लोग इन्हें अपनाएं।      महिला स्व सहायता समूह द्वारा इस वर्ष की होली के लिए पालक,लालभाजी, हल्दी. फूलों से हर्बल गुलाल बना रही है। उनके द्वारा वर्तमान मे पीला, संतरा, लाल एवं चंदन रंग के गुलाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसका विक्रय स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा  कलेक्ट्रेट सहित अन्य स्थानों पर स्टॉल लगाकर किया जा रहा है ।

विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से बस्तर को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर छत्तीसगढ़ के  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (KVNP) को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में प्राकृतिक श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ये छत्तीसगढ़ के लिये बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ये हर्ष का विषय है कि यूनेस्को द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है । कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान न केवल जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि यह स्थानीय जनजातीय संस्कृति और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देता है। इस सूची में शामिल होने से बस्तर क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी एवं पर्यटन को और भी बढ़ावा मिलेगा । यह उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है । उल्लखेनीय है कि यह उद्यान तीन महत्वपूर्ण मापदंडों—प्राकृतिक सौंदर्य, भूवैज्ञानिक विशेषताएँ, और जैव विविधता पर खरा उतरता है।  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा उद्यान को  यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था,  जिसे यूनेस्को द्वारा अपने अस्थाई सूची में चयन किया गया है। कांगेर घाटी में प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संरचनाएँ कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपने मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों, हरी-भरी घाटियों, गहरी खाइयों और झरनों के लिए प्रसिद्ध है। तीरथगढ़ जलप्रपात, जो कांगेर नदी से निकलता है, 150 फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। कांगेर नदी अपने स्वच्छ जल और अनूठी चट्टानी संरचनाओं के कारण महत्वपूर्ण पर्यटन  स्थल है। इसके अलावा, कोटमसर, कैलाश, दंडक और ऐसी १५ से अधिक गुफाएँ अपने अद्वितीय प्राकृतिक स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश और विदेश के पर्यटकों और वैज्ञानिकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। भूवैज्ञानिक विशेषताएँ और जैव विविधता यह उद्यान अपनी भूवैज्ञानिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की कार्स्ट संरचनाएँ, चूना पत्थर की गुफाएँ, जल संरचनाएँ और चट्टानी परतें वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इस क्षेत्र में भूवैज्ञानिक परिवर्तन देखे जाते हैं।  चूना पत्थर की गुफाएँ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है |  जैवविविधता से भरपूर यह उद्यान में विभिन्न वनस्पति, वन्यजीव और विशेष प्रजाति के प्रजातीय पाए जाते है| 963 प्रकार की वनस्पतियाँ, जिनमें 120 फ़ैमिली  और 574 प्रजातियाँ शामिल हैं। यहाँ दुर्लभ ऑर्किड की 30 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। 49 स्तनपायी, 210 पक्षी, 37 सरीसृप, 16 उभयचर, 57 मछलियाँ और 141 तितली प्रजातियाँ है । बस्तर हिल मैना (छत्तीसगढ़ का राज्य पक्षी), ट्रैवणकोर वुल्फ स्नेक, ग्रीन पिट वाइपर, मोंटेन ट्रिंकेट स्नेक जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ है । बस्तर क्षेत्र में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करता है। यहाँ गोंड और धुरवा जनजातियाँ रहती हैं, जो अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों, नृत्य, लोकगीतों और त्योहारों के लिए प्रसिद्ध हैं। इस क्षेत्र में स्थानीय आदिवासियों द्वारा हस्तशिल्प कला जैसे  बांस शिल्प कलाकृतियाँ विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।  यहाँ के आदिवासी समुदाय प्रकृति से गहराई से जुड़े हुए हैं और जंगलों से जुड़ी अनेक कहानियाँ और मान्यताएँ पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन गतिविधियों में  जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, ट्रेकिंग ,कयाकिंग बम्बू राफ्टिंग , कैम्पिंग , होमस्टे , गुफा भ्रमण और फोटोग्राफी के  बेहतरीन अवसर मिलते हैं, जिससे यह रोमांचक पर्यटन स्थल बनता है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक गुफाएँ, वन्यजीव, और सांस्कृतिक विरासत इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान  के विशेषता को देखते हुए इसे यूनेस्को ने अस्थायी सूची में शामिल किया गया है । उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया जाने से बस्तर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर में जल प्रवाह को नियंत्रित कर इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया है। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया, जिससे इंद्रावती नदी में जल स्तर में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से इंद्रावती नदी के जल संकट के समाधान हेतु चर्चा की। इस पर केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को समस्या के निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। जिसके परिणामस्वरूप उड़ीसा राज्य की सहमति से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर को अस्थायी रूप से एक फीट ऊंचा किया गया, जिससे इंद्रावती नदी के जल प्रवाह में सुधार हुआ। इसके अतिरिक्त, इंद्रावती नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा रेत को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में कलेक्टर हरिस एस के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग और जल संसाधन विभाग के ईई वेद पांडेय ने स्थानीय किसानों को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभा कक्ष में पूरी जानकारी दी। इंद्रावती नदी और जोरा नाला की समस्या इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा राज्य के कालाहांडी जिले के रामपुर धुमाल गांव से हुआ है। यह नदी 534 किलोमीटर की यात्रा के बाद गोदावरी नदी में मिलती है। नदी का कैचमेंट एरिया 41,665 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें ओडिशा में 7,435 वर्ग किमी, छत्तीसगढ़ में 33,735 वर्ग किमी और महाराष्ट्र में 495 वर्ग किमी शामिल हैं। ओडिशा राज्य की सीमा पर ग्राम सूतपदर में इंद्रावती नदी दो भागों में बंट जाती है। एक भाग इंद्रावती नदी के रूप में 5 किमी बहकर ग्राम भेजापदर के पास छत्तीसगढ़ में प्रवेश करता है, जबकि दूसरा भाग जोरा नाला के रूप में 12 किमी बहते हुए शबरी (कोलाब) नदी में मिल जाता है। पहले जोरा नाला का पानी इंद्रावती में आता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका बहाव बढ़ने से इंद्रावती का जल प्रवाह कम हो गया। समस्या गंभीर होने पर दिसंबर 2003 में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में जोरा नाला के मुहाने पर जल विभाजन के लिए कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने का निर्णय लिया गया। यह स्ट्रक्चर ओडिशा सरकार द्वारा बनाया गया, जिसकी डिज़ाइन केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने तैयार की। निर्माण के बाद भी जोरा नाला में अधिक पानी जाने से छत्तीसगढ़ को ग्रीष्म ऋतु में औसतन 40.71% और ओडिशा को 59.29% जल प्रवाह मिला। राज्य सरकार की पहल से समाधान की दिशा में प्रगति इंद्रावती नदी में न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कई प्रयास किए। 6 जनवरी 2021 को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम में जलभराव रोकने के लिए रेत और बोल्डर हटाने तथा जोरा नाला के घुमाव को सीधा करने का अनुरोध किया गया। वर्ष 2018 के बाद इंद्रावती नदी में सतत जल प्रवाह कम होने की समस्या बनी हुई थी। अब राज्य सरकार के प्रयासों से ओडिशा सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ है, जिससे नदी के जल प्रवाह को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे इंद्रावती नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

बस्तर के असल जीवन को करीब से जानने-समझने का मिलेगा अवसर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : मुख्यमंत्री ने किया ‘बस्तर पंडुम 2025’ का लोगो अनावरण मुख्यमंत्री ने किया ‘बस्तर पंडुम 2025’ का लोगो अनावरण बस्तर में शांति स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा बस्तर पंडुम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बस्तर के असल जीवन को करीब से जानने-समझने का मिलेगा अवसर बस्तर पंडुम 2025: लोकसंस्कृति और परंपराओं का भव्य उत्सव बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की अनूठी पहल है बस्तर पंडुम रायपुर बस्तर के लोग जीवन का हर पल उत्सव की तरह जीते हैं और अपनी खुशी की अभिव्यक्ति के लिए उनके पास समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। बस्तर में शांति स्थापना के लिए हम तेजी से अपने कदम बढ़ा रहे हैं और बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के लोकजीवन और लोकसंस्कृति को सहेजने के साथ ही उनकी उत्सवधर्मिता में हम सहभागी बनेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में मांदर की थाप पर नाचते कलाकारों की मौजूदगी में बस्तर पंडुम 2025 के लोगो का अनावरण किया और यह बातें कही। उन्होंने बस्तर पंडुम के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही बस्तर के प्रतिभाशाली कलाकारों को सशक्त मंच प्रदान करेगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बस्तर पंडुम के बुकलेट का विमोचन किया।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद बस्तर का विकास और वहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल रहा है। बस्तर को माओवाद से मुक्त करने की दिशा में हमने तेजी से अपने कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक और हाल ही में आयोजित अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन में भी बस्तर वासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। यह दर्शाता है कि बस्तर वासियों का विश्वास लगातार शासन के प्रति बढ़ा है और वे क्षेत्र में शांति और अमन-चैन चाहते हैं।         मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने बजट में नक्सली हिंसा से ग्रसित रहे पुवर्ती गांव में भी अस्पताल खोलने का बड़ा निर्णय लिया है। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से हम बस्तर वासियों के मूलभूत जरूरत को तेजी से पूरा कर रहें हैं।         मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोग अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं और हर मौके को अपने खास अंदाज में सेलिब्रेट करते हैं । बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के असल जीवन को और करीब से देखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम में नृत्य, गीत, लोककला, लोकसंस्कृति, नाट्य, शिल्प, रीति- रिवाज, परंपरा और व्यंजन सहित विभिन्न 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। साय ने कहा कि बस्तर में खुशहाली हो, लोग भयमुक्त होकर अपने अंदाज में जिये और उन्हें शासन की सभी सुविधाओं का लाभ मिले।        इस मौके पर उप मुख्यमंत्री अरूण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, विधायक किरण देव, विधायक सुलता उसेंडी, विधायक विनायक गोयल, संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी. और संचालक संस्कृति विवेक आचार्य मौजूद रहे। बस्तर की पहचान को दर्शा रहा है बस्तर पंडुम का लोगो      बस्तर पंडुम के लोगो में बस्तर के लोकजीवन को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है और यह उनकी सांस्कृतिक पहचान से गहरे से जुड़ा हुआ है। बस्तर के विरासत को बहुत ही कलात्मक ढंग से दिखाने का प्रयास इसमें किया गया है।  “बस्तर पंडुम” गोंडी का शब्द है जिसका अर्थ है बस्तर का उत्सव। प्रतीक चिन्ह में बस्तर की जीवनरेखा इंद्रावती नदी, चित्रकूट जलप्रपात, छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वनभैंसा, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, बायसन हॉर्न मुकुट, तुरही, ढोल, सल्फी और ताड़ी के पेड़ को शामिल गया है। इस प्रतीक चिन्ह के माध्यम से सरल, सहज और उम्मीदों से भरे अद्वितीय बस्तर को आसानी से जाना और समझा जा सकता है। नृत्य, गीत समेत 07 प्रमुख विधाओं पर केंद्रित होगा आयोजन ‘‘बस्तर पंडुम 2025’’ में जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषण, शिल्प-चित्रकला और जनजातीय व्यंजन एवं पारंपरिक पेय से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ये स्पर्धाएं तीन चरणों में संपन्न होंगी। जनपद स्तरीय प्रतियोगिता 12 से 20 मार्च, जिला स्तरीय प्रतियोगिता 21 से 23 मार्च, संभाग स्तरीय प्रतियोगिता दंतेवाड़ा में 1 से 3 अप्रैल तक सम्पन्न होगी। प्रत्येक स्तर पर प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। बस्तर के लोकजीवन और परंपराओं पर आधारित आयोजन होंगे प्रमुख आकर्षण     बस्तर पंडुम में बस्तर की पारंपरिक नृत्य-शैली, गीत, रीति-रिवाज, वेशभूषा, आभूषण और पारंपरिक व्यंजनों का शानदार प्रदर्शन होगा। प्रतियोगियों के प्रदर्शन को मौलिकता, पारंपरिकता और प्रस्तुति के आधार पर अंक दिए जाएंगे। आयोजन में समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। प्रतियोगिता के विजेताओं के चयन के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ आदिवासी समाज के वरिष्ठ मुखिया, पुजारी और अनुभवी कलाकार शामिल रहेंगे। इससे प्रतियोगिता में पारदर्शिता बनी रहेगी और पारंपरिक लोककला को न्याय मिलेगा।

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का अवसर भी: मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का अवसर भी है। यह पर्व हमें छोटी-छोटी अनबन को भुलाकर नए सिरे से दोस्ती की शुरुआत करने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में यह बात कही। रंगों के बीच पत्रकारों संग झूमे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री श्री साय का रायपुर प्रेस क्लब के सदस्यों ने अनूठे अंदाज में भिंडी की माला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रेस क्लब के होली विशेषांक ‘सेंसलेस टाइम्स’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब में पर्वों को मिल-जुलकर मनाने की एक गौरवशाली परंपरा है। हर साल इस होली उत्सव में शामिल होने का अवसर मिलता है। मैं रायपुर प्रेस क्लब परिवार का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। हर्ष और उल्लास से भरा यह पर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करे, यही मेरी मंगलकामना है। मुख्यमंत्री ने बजाया नगाड़ा, रंगों के उल्लास में झूमे पत्रकार रायपुर प्रेस क्लब के होली मिलन समारोह में रंगों और उमंग का अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने खुद नगाड़ा बजाकर उत्सव का जोश दोगुना कर दिया। मुख्यमंत्री के नगाड़ा बजाते ही समारोह में मौजूद पत्रकारों और गणमान्यजनों ने तालियों से उत्साह बढ़ाया और पूरे माहौल में उल्लास की लहर दौड़ गई। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की धुन पर मुख्यमंत्री भी पत्रकारों के साथ फाग गीतों और होली की मस्ती में झूमते नजर आए। होली के इस रंगीन माहौल में संगीत, उत्सव और आपसी भाईचारे का अनूठा संगम देखने को मिला। पत्रकारों के लिए बड़ी सौगात, प्रेस क्लब के लिए 1 करोड़ का बजट प्रावधान मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर प्रेस क्लब की परंपरा को सराहते हुए कहा कि इस वर्ष के बजट में पत्रकारों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का दर्पण होते हैं, जो लोकतंत्र की मजबूती में अहम भूमिका निभाते हैं। रायपुर प्रेस क्लब को राजधानी की गरिमा के अनुरूप विकसित करने के लिए 1 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जिससे इसके भवन का रिनोवेशन और विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा पत्रकारों के लिए एक्सपोजर विजिट की भी मांग उठी थी, जिसे पूरा करते हुए 1 करोड़ रुपये का अलग से बजट प्रावधान किया गया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने वरिष्ठ पत्रकारों के कल्याण की चिंता करते हुए कहा कि लंबे समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र में जनसेवा करने वाले साथियों को सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार ने सम्मान निधि को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह कर दिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मुझे लगता है कि यह होली केवल रंगों और फाग की मस्ती का पर्व नहीं, बल्कि पत्रकार मित्रों के लिए भी बड़ी सौगात लेकर आई है। महिला पत्रकारों के योगदान को सराहा मुख्यमंत्री ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवसर पर उन्होंने महिला पत्रकारों का सम्मान किया और उनके संघर्ष व उपलब्धियों को करीब से समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारिता में चुनौतियाँ बहुत हैं, लेकिन उनके हौसले और संकल्प भी उतने ही ऊँचे हैं। लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में पत्रकारों की अहम भूमिका मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी होते हैं, जिनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में उनके लिए इस तरह के सांस्कृतिक और मिलन समारोह जरूरी हैं, जिससे कार्य के दबाव से अलग हटकर परस्पर सौहार्द को बढ़ावा मिले। रायपुर प्रेस क्लब वर्षों से होली मिलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता आ रहा है। यह परंपरा आगे भी जारी रहनी चाहिए। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री सुनील सोनी, रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे,मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, श्री अमित चिमनानी, श्री अनुराग अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक  और अधिकारीगण कार्यक्रम में शामिल हुए। रायपुर प्रेस क्लब की ओर से अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल ठाकुर सहित प्रेस क्लब के सदस्यगण उपस्थित थे।

मंत्री-विधायकों के फाग गीतों पर झूमे सदस्य, डॉ. सुरेंद्र दुबे की कविताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांधा

रायपुर विधानसभा परिसर में आज होली मिलन समारोह का रंगारंग आयोजन हुआ, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित तमाम विधायकों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। आयोजन का पूरा माहौल होली के उल्लास में सराबोर रहा। मंत्रियों और विधायकों ने पारंपरिक फाग गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिस पर विधानसभा सदस्य झूमते नजर आए। मंत्री-विधायकों के फाग गीतों से गूंजा विधानसभा परिसर होली मिलन समारोह में लोक परंपरा का विशेष रंग देखने को मिला। मंत्री-विधायकों द्वारा गाए गए फाग गीतों से विधानसभा परिसर में सांस्कृतिक समृद्धि की झलक दिखी।   राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मुख मुरली बजाए, छोटे से श्याम कन्हैया गीत की मधुर प्रस्तुति दी।विधायक अनुज शर्मा ने का तैं मोला मोहिनी डाल दिये रे और रंग बरसे गीत गाकर समां बांध दिया। विधायक कुंवर सिंह निषाद ने फागुन मस्त महीना और चना के डार राजा गीत गुनगुनाया। विधायक दिलीप लहरिया ने नदिया के पार म, कदली कछार म गीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विधायक रामकुमार यादव और श्रीमती चातुरी नंद ने भी फाग गीतों से समां बांधा। डॉ. सुरेंद्र दुबे की कविताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया रंग     लोकप्रिय कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे ने अपनी हास्य और होली की रंगीन कविताओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा राकेश तिवारी और उनकी टीम ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने डॉ. सुरेंद्र दुबे, राकेश तिवारी व उनकी टीम को सम्मानित किया।     इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वनमंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन, विधायक अजय चंद्राकर, धर्मलाल कौशिक, पुरंदर मिश्रा, धर्मजीत सिंह, मोतीलाल साहू, सुशांत शुक्ला, संदीप साहू, गुरु खुशवंत साहेब, भैयालाल राजवाड़े, ईश्वर साहू, कुंवर सिंह निषाद, रिकेश सेन, रामकुमार यादव, श्रीमती भावना बोहरा, योगेश्वर राजू सिन्हा, अटल श्रीवास्तव, ललित चंद्राकर सहित विधानसभा के अधिकारी, कर्मचारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने लागू की गई नीति राज्य में धान उत्पादन को नए उच्च स्तर तक ले जा रही

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में तमिलनाडु कावेरी फार्मर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान तमिलनाडु के किसानों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक रूप से धान और पान से बनी माला पहनाकर अभिनंदन किया और अपनी परंपरा के अनुरूप रेड बनाना (लाल केला), आम, नारियल के पौधे और कटहल उपहार स्वरूप भेंट किए। इस आत्मीय स्वागत के लिए मुख्यमंत्री साय ने किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी उपस्थित थे। तमिलनाडु के किसानों ने छत्तीसगढ़ सरकार की नीति को बताया अनुकरणीय मुलाकात के दौरान तमिलनाडु के किसानों ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों को दिए जा रहे देश के सर्वाधिक धान मूल्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की नीति किसानों के लिए एक मिसाल है। इस पहल को किसानों की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए उन्होंने कहा कि जब किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिलता है, तो वे न केवल अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित होते हैं, बल्कि खेती को एक स्थायी आजीविका के रूप में भी देख सकते हैं। एसोसिएशन के महासचिव स्वामीमलाई सुंदर विमलनाथन ने मुख्यमंत्री की इस नीति की सराहना करते हुए कहा कि उचित समर्थन मूल्य किसानों को आश्वस्त करता है कि उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा। जब मूल्य उत्पादन लागत से मेल खाता है, तो किसान निडर होकर खेती कर सकते हैं और अपनी आजीविका को समृद्ध बना सकते हैं। छत्तीसगढ़ का यह कदम पूरे देश में मिसाल बन सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ दिलाना है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। धान के लिए उच्चतम समर्थन मूल्य और समय पर भुगतान हमारी प्राथमिकता है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि किसान न केवल आत्मनिर्भर बनें बल्कि समृद्ध भी हों। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू की गई यह नीति राज्य में धान उत्पादन को नए उच्च स्तर तक ले जा रही है। किसान हितैषी योजनाओं के कारण प्रदेश में धान का उत्पादन लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो राज्य के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ की कृषि नीति को राष्ट्रीय पहचान तमिलनाडु के किसानों ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार की कृषि नीतियों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान की सराहना की। किसानों ने कहा कि जब सरकार किसानों के हित में ठोस नीतियाँ बनाती है, तो उनका सीधा प्रभाव उनकी आय, जीवन स्तर और समृद्धि पर पड़ता है। यह मुलाकात दो राज्यों के किसानों के बीच आपसी सौहार्द और कृषि सहयोग का प्रतीक बनी। इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ सरकार की किसान-केंद्रित नीतियां न केवल राज्य में बल्कि देशभर में अनुकरणीय बन रही हैं। इस अवसर पर एसोसिएशन के महासचिव स्वामीमलाई सुंदर विमलनाथन के साथ चेरन, कालिया पेरूमल, समीनाथन, सेनगुटटुवन, सुगुमारन, बालाजी, सीतारामन, सबरी नाथन, जी. बालाजी सहित अन्य किसान नेता उपस्थित थे।

CM साय ने श्रमजीवी गिल्ड फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित होली विशेषांक ‘गुलाल’ का विमोचन किया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में श्रमजीवी गिल्ड फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित होली विशेषांक ‘गुलाल’ का विमोचन किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल  उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने ‘गुलाल’ विशेषांक की सराहना करते हुए इसके प्रकाशन के लिए फाउंडेशन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि होली उल्लास, प्रेम और सौहार्द का पर्व है, और यह विशेषांक भी इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाने का कार्य करेगा। जैसे होली के रंग आपसी भाईचारे और सकारात्मकता का प्रतीक होते हैं, वैसे ही यह पत्रिका समाज में खुशियों का संचार करेगी। फाउंडेशन के सदस्यों ने मुख्यमंत्री साय को अवगत कराया कि अब तक ‘गुलाल’ विशेषांक का प्रकाशन कोरिया और सरगुजा से होता रहा है, लेकिन इस बार इसे राजधानी रायपुर से प्रकाशित किया गया है। इस अवसर पर आर.के. गांधी, दीपक विश्वकर्मा, जगजीत सिंह, श्रीकांत यदु एवं सुजिज्ञासा चंद्रा सहित अन्य गणमान्य पत्रकार उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक-2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया

मंत्रिपरिषद के निर्णय : दिनांक – 12 मार्च 2025 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –     मंत्रिपरिषद ने राज्य में नक्सल समस्या के समाधान के लिए ठोस पहल करते हुए छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन नीति-2023 के स्थान पर छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 को मंजूरी प्रदान की है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को आर्थिक सहायता, पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।     छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल विधेयक-2025 विधानसभा के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।     छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक-2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।     छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक-2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।     मुख्यमंत्री ने 27 फरवरी को फिल्म ‘‘छावा‘‘ को राज्य में टैक्स फ्री करने की घोषणा की थी। मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुपालन में फिल्म छावा के प्रदर्शन पर प्रवेश हेतु देय राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) के समतुल्य धनराशि की प्रतिपूर्ति किए जाने का अनुमोदन किया गया।     मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और वैज्ञानिक योजना तैयार करने के लिए राज्य जल सूचना केन्द्र (SWIC) का गठन करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय से समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की सहमति प्रदान की गई। रायपुर          स्टेट वाटर इंफॉर्मेशन सेंटर वर्षा, नदी और जलाशयों के स्तर, भूजल गुणवत्ता, गाद, नहरों में जल प्रवाह, फसल कवरेज, जलभृत मानचित्रण, भूमि और मिट्टी के डेटा सहित जल संसाधन संबंधी विभिन्न सूचनाओं का संग्रह, विश्लेषण और भंडारण करेगा।     SWIC, NWIC  द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफार्म की सहायता से जल संसाधन प्रबंधन के लिए प्रमाणिक डेटा उपलब्ध कराएगा। इससे नीति निर्माण, रणनीतिक निर्णय, मॉडलिंग, विश्लेषणात्मक उपकरणों के विकास और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।     मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के जल संसाधन विभाग के 09 बॉधों के सुधार कार्यों के लिए 522.22 करोड़ रूपए भारत सरकार के माध्यम से ऋण स्वीकृति प्राप्त करने का निर्णय लिया गया। इनमें मनियारी टैंक, घोंघा टैंक, दुधावा, किंकारी, सोंढूर, मूरूमसिल्ली (भाग-2), रविशंकर सागर परियोजना (भाग-2), न्यूज रूद्री बैराज और पेण्ड्रावन टैंक शामिल हैं।     मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य में सुशासन और नीति क्रियान्वयन को मजबूत करने में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप योजना शुरू करने का निर्णय लिया गया है।     यह योजना आईआईएम रायपुर और ट्रांसफार्मिंग रूरल इंडिया फाउण्डेशन नई दिल्ली के सहयोग से सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा संचालित की जाएगी। यह योजना छत्तीसगढ़ के मूल निवासी युवाओं के लिए होगी। इस कार्यक्रम को सुफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले फेलो को आईआईएम रायपुर द्वारा एमबीए के डिग्री प्रदान की जाएगी। प्रारंभिक तौर पर चयनित फेलो को दो वर्ष की कुछ अवधि में आईआईएम रायपुर में शैक्षणिक सत्र में शामिल होना होगा तथा शेष अवधि में जिला/विभाग में राज्य की योजनाओं एवं कार्यक्रम हेतु कार्य करके जिला/विभाग को सहयोग प्रदान करना होगा। इस कार्यक्रम में होने वाले खर्च का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा साथ ही फेलो को प्रति माह स्टाईपेंड भी प्रदान किया जाएगा।     मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ में भारत माला परियोजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार की प्राप्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच ईओडब्ल्यू के माध्यम से जांच कराने का निर्णय लिया है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी

रायपुर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज रायपुर में मुख्यमंत्री निवास में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने उप मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित पत्रकार-वार्ता में कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।

छत्तीसगढ़ वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को ने टेंटेटिव वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में जोड़ा

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी नेशनल पार्क को यूनेस्को ने 2025 की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की तदर्थ (टेंटेटिव) सूची में शामिल कर लिया है। यह प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार किसी स्थल को इस सूची में स्थान मिला है। अब छत्तीसगढ़ सरकार को एक साल के भीतर पूरी तथ्यात्मक जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना दावा पेश करना होगा, ताकि इसे पूर्ण रूप से वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिल सके। पहली बार छत्तीसगढ़ की किसी साइट को यह सम्मान कांगेर घाटी नेशनल पार्क अपनी समृद्ध जैव विविधता और दुर्लभ जीव-जंतुओं के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र 200 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और यहां की भौगोलिक संरचना, गुफाएं, वनस्पतियां, दुर्लभ पक्षी एवं जनजातीय संस्कृति इसे अनोखा बनाती हैं। वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए भेजा गया प्रस्ताव यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। यूनेस्को की सूची में शामिल होने की प्रक्रिया यूनेस्को किसी स्थल को तीन श्रेणियों में वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा देता है— प्राकृतिक धरोहर सांस्कृतिक धरोहर मिश्रित धरोहर छत्तीसगढ़ सरकार ने कांगेर घाटी के लिए प्राकृतिक धरोहर श्रेणी में आवेदन किया था, जिसे यूनेस्को ने प्राथमिकता सूची में शामिल कर लिया है। अब सरकार को अगले एक साल में सभी जरूरी तथ्यों और शोध के साथ विस्तृत रिपोर्ट जमा करनी होगी। कैसे हुआ चयन? करीब दो साल पहले कांगेर घाटी नेशनल पार्क के तत्कालीन डायरेक्टर गणवीर धम्मशील ने इस दिशा में काम शुरू किया था। उन्होंने पुरातत्व विभाग और अन्य विशेषज्ञों की मदद से करीब एक साल तक शोध किया और यूनेस्को को प्रस्ताव भेजा। इसके बाद यूनेस्को ने इसे प्राथमिक सूची में शामिल कर लिया है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की विशेषताएँ अद्वितीय जैव विविधता: यहां दुर्लभ वनस्पतियां और जीव-जंतु पाए जाते हैं, जिनमें विशेष रूप से पहाड़ी मैना शामिल है, जो इंसानों की तरह बोलने की क्षमता रखती है। प्राकृतिक गुफाएं: इस उद्यान में कोटमसर गुफा समेत 16 लाइमस्टोन (चूना पत्थर) की गुफाएं हैं, जो लाखों साल पुरानी हैं। खास बात यह है कि ये गुफाएं अभी भी “जिंदा” हैं यानी इनमें प्राकृतिक रूप से चूना पत्थर की संरचनाओं का निर्माण जारी है। अंधी मछलियां और दुर्लभ जीव: इन गुफाओं में रहने वाले कुछ जीव-जंतु जैसे अंधी मछलियां और विशेष प्रकार के चमगादड़ वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। धुरवा जनजाति का योगदान: इस क्षेत्र में रहने वाली धुरवा जनजाति हजारों साल पुरानी परंपराओं और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है। ये जनजातियां जंगल के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आगे की प्रक्रिया अब छत्तीसगढ़ सरकार को एक साल के भीतर वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा पाने के लिए पूरी रिपोर्ट और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो कांगेर घाटी नेशनल पार्क न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में स्थापित होगा और यह पर्यटन व संरक्षण की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए यह गौरव का क्षण है, क्योंकि पहली बार प्रदेश की कोई प्राकृतिक धरोहर यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हुई है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet