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‘द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव’ पुस्तक का उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के करकमलों से विमोचन

रायपुर. उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज विधायक कार्यालय कवर्धा में द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव ‘राजा भोरमदेव की कहानी’ पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक के रचनाकार  रामप्रसाद बघेल को उप मुख्यमंत्री ने बधाई तथा आगे के सफल साहित्यिक कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।  शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक जिलेवासियों के लिए गर्व का विषय है तथा इससे हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं को नयी पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। यह कहानी अंर्तराष्ट्रीय स्तर का है इस पुस्तक के प्रकाशन से भोरमदेव की ख्याति को अंर्तराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।  उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि पुस्तक न केवल राजा भोरमदेव के जीवन और काल की महिमा को उजागर करता है, बल्कि मनुष्य, प्रकृति और चेतना के बीच संतुलन की गूढ़ दार्शनिकता को भी बखूबी प्रस्तुत करता है। उन्होंने आग्रह किया कि वे इस पुस्तक को पढ़ें और इसके संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करें। लेखक  रामप्रसाद बघेल ने बताया कि ‘राजा भोरमदेव की कहानी’ की शुरुआत एक प्राचीन और रहस्यमयी युग से होती है, जब पृथ्वी पर आकाश से गिरा एक विशाल धूमकेतु ने न केवल प्राकृतिक संतुलन को बाधित किया, बल्कि अंधकार से ऊर्जा प्राप्त करने वाले ड्रैगन जैसे घातक प्राणियों का आगमन भी किया। ये प्राणी अंधकार में और अधिक शक्तिशाली होते गए तथा धीरे-धीरे संपूर्ण पृथ्वी को एक भयावह अनंत संध्या की ओर ले जाने लगे, जहाँ मानव, पशु और प्रकृति कोई भी सुरक्षित नहीं रहा। कथा का प्रमुख नायक कुरुगुरु भद्रदेव बैगा है, जो विज्ञान, अध्यात्म एवं प्रकृति के संतुलन को समझता है। विद्वानों के नेतृत्व में यह खोज की जाती है कि ड्रैगनों के माथे पर चमकता नीला चिह्न कोई सजावट नहीं, बल्कि अंधकार से ऊर्जा खींचने वाला यंत्र है, और जैसे-जैसे अंधकार बढ़ता है, वे और अधिक अजेय बनते जाते हैं। कहानी में एक प्राचीन राजवंश के शासक राजा परसमनिधर देव तथा रानी नागमती की गहन तपस्या और दिव्य-वैज्ञानिक शक्तियों का विवरण भी मिलता है। राजा के पास पारस रत्न है, जो सूर्य की ऊर्जा से पदार्थ और जीवन को रूपांतरित करने की क्षमता रखता है, जबकि रानी नागमती के पास नागमणि यंत्र है, जो किसी भी पदार्थ को नष्ट करने अथवा विष को निष्प्रभावी बनाने की शक्ति रखता है। कहानी केवल युद्ध और संघर्ष की नहीं है, बल्कि प्रेम, नियति एवं चेतना की भी है। झील के तट पर बिना शब्दों के केवल दृष्टियों और अनुभूतियों से राजा और रानी का प्रेम जन्म लेता है। उनका विवाह दो शक्तिशाली वंशों का नहीं, बल्कि विज्ञान, प्रकृति और चेतना के मिलन का प्रतीक बनता है। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे,संतोष पटेल,जनपद उपाध्यक्ष कवर्धा  गणेश तिवारी, बोडला  नंद श्रीवास,नरेंद्र मानिकपुरी,मनीराम साहू,अमर कुर्रे,प्रवीण शर्मा,जसबीर सालुजा,शैलेन्द्र उपाध्याय सहित जन प्रतिनिधि, क्षेत्र के नागरिक उपस्थित रहे।

आर्थिक विकास का खाका है केंद्रीय बजट: सीएम ने गिनाए राजस्थान को मिलने वाले फायदे

      जयपुर,  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 12 साल से देश वित्तीय अनुशासन और स्थायित्व के साथ विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रविवार को केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट को आत्मनिर्भर से विकसित, संभावनाओं से उपलब्धियों और संकल्प से सिद्धि की ओर ले जाने वाला बजट बताया। उन्होंने कहा कि इस बजट में नए भारत की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ अंतिम व्यक्ति को आगे लाने की प्रतिबद्धता का भी पूरा ध्यान रखा गया है।       मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय बजट पर सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति केन्द्रित इस बजट में युवाओं के लिए रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और सर्विस सेक्टर पर फोकस बढ़ाने वाले प्रावधान किए गए हैं, इससे युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। एक लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल, 1 लाख 50 हजार केयर गिवर्स और टूरिस्ट गाइड्स को कौशल प्रशिक्षण से भी युवाओं को फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में  एवीजीसीएक्सआर पॉलिसी पहले ही लागू की जा चुकी है। अब माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों में कंटेट क्रियेटर लैब्स की स्थापना से राजस्थान के युवाओं को दोहरा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि बजट में महिलाओं के लिए सशक्तिकरण, सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने, कृषि अवसंरचना एवं बाजार तक किसानों की पहुंच बढ़ाने और जोखिम घटाने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। हैवी मशीनरी निर्माण के लिए प्रदेश में निवेश का किया आह्वान       शर्मा ने कहा यूरोप के साथ ऐतिहासिक समझौता होने के बाद इस बजट ने देश के छोटे-बड़े उद्योगों, मैन्युफैक्चरर्स, कारीगरों और कामगारों को वैश्विक बाजार में जगह बनाने के लिए नई दिशा दिखाई है। बायो फार्मा, केमिकल्स, टेक्सटाइल, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बजट में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। उन्होंने उद्योग जगत का आह्वान किया कि कंस्ट्रक्शन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की हैवी मशीनरी के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बजट में लाई गई विशेष योजना का लाभ लेते हुए राजस्थान के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में अपनी इकाइयां लगाएं। उन्होंने कहा कि इस बजट से प्रदेश के निर्यातकों को नए खुल रहे बाजारों में निर्यात वृद्धि  के अवसर भी मिलेंगे। राजस्थान के सोलर सेक्टर को मिलेगी नई गति       मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट में राजस्थान की संभावनाओं और आवश्यकताओं को पूरा स्थान मिला है। अक्षय ऊर्जा के लिए 30 प्रतिशत ज्यादा करीब 32 हजार 914 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसी प्रकार पीएम सूर्यघर योजना को 22 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं। सोलर ग्लास मैन्युफेक्चरिंग में प्रयोग आने वाले सोडियम एंटीमोनेट के आयात पर कस्टम ड्यूटी में छूट दी गई है। बीईएसएस में उपयोग में आने वाले लीथियम आयन सेल बैटरी निर्माण में प्रयुक्त पूंजीगत सामानों के लिए कस्टम ड्यूटी में छूट दी गई है। राजस्थान सौर ऊर्जा में पहले से ही अग्रणी प्रदेश है, अब इन प्रावधानों से प्रदेश के सौर ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलेगी। सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर प्रावधानों से प्रदेश होगा लाभान्वित       शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में सेमीकंडक्टर नीति, एआईएमएल नीति और डेटा सेंटर नीति लागू की हैं। इसलिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, एआई मिशन, नेशनल क्वांटम मिशन, इलेक्ट्रोनिक कम्पोनेन्ट मेनुफेक्चरिंग स्कीम, डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विसेज को दिए गए इंसेंटिव्स का फायदा लेते हुए सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर हब बनने के लिए प्रदेश पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि एसएमई विकास निधि और आत्मनिर्भर भारत टॉपअप छोटे उद्योगों के लिए बड़ी सौगात हैं। महात्मा गांधी स्वराज योजना और चैम्पियन एमएसएमई बनाने की पहल से राजस्थान के छोटे उद्योगों के ग्लोबल बिजनेस हाउस बनने की राह प्रशस्त होगी। मेगा टैक्सटाइल पार्क, टेक्सटाइल लेबर इंसेंटिव स्कीम और देशभर में 200 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को फिर से मजबूत करने की घोषणा भी राजस्थान की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।       मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में अवसंरचना विकास पर विशेष जोर देते हुए 12 लाख 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश के शहरी ढांचे को मजबूत करने के लिए अधिक राशि मिल सकेगी। इनविट बॉन्डस, आरईआईटी और म्युनिसिपल बॉन्डस से मिलने वाले आर्थिक संबल से प्रदेश के शहर बड़े पैमाने पर लाभान्वित होने जा रहे हैं।       इस दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।  

लाभार्थियों को मिली स्कूटी, हर्ष के साथ उपमुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त

रायपुर. उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा की तत्परता से दो दिव्यांगों को मिली स्कूटी, चेहरे पर लौटी मुस्कान उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने आज विधायक कार्यालय कवर्धा में दो दिव्यांग लाभार्थियों को स्कूटी का वितरण किया। इस अवसर पर उन्होंने बोड़ला विकासखंड के ग्राम मारियाटोला निवासी  विद्याधा वर्मा तथा ग्राम नेऊरगाँव निवासी  भूपेंद्र चंद्रवंशी को स्कूटी की चाबी सौंपकर उन्हें शुभकामनाएँ दीं। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके दैनिक जीवन को सुगम करना है। स्कूटी मिलने से लाभार्थियों को आवागमन में सुविधा होगी तथा वे अपने कार्यों को स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय सरकार की प्राथमिकता है। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे,  संतोष पटेल, जनपद उपाध्यक्ष कवर्धा  गणेश तिवारी, बोडला  नंद श्रीवास,  नरेंद्र मानिकपुरी,  मनीराम साहू,  अमर कुर्रे सहित जन प्रतिनिधि, क्षेत्र के नागरिक उपस्थित रहे।  उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा की तत्परता से दो दिव्यांगों को मिली स्कूटी, चेहरे पर लौटी मुस्कान उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि दिव्यांगजनों को स्कूटी उपलब्ध कराए जाने से उनके दैनिक आवागमन में सुगमता प्राप्त होगी तथा वे स्वावलंबी जीवन की ओर अग्रसर होंगे। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, सामाजिक समावेशन एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा निरंतर जनकल्याणकारी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। स्कूटी प्राप्त होने से लाभार्थियों के दैनिक कार्यों के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार एवं सामाजिक गतिविधियों में भी सुविधा मिलेगी, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे सम्मानजनक एवं स्वतंत्र जीवन यापन कर सकेंगे। यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके अंतर्गत दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास किया जा रहा है। बोड़ला विकासखंड के ग्राम मारियाटोला निवासी  विद्याधा वर्मा तथा ग्राम नेऊरगाँव निवासी  भूपेंद्र चंद्रवंशी ने स्कूटी प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा एवं शासन – प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया। लाभार्थियों ने बताया कि उन्होंने स्कूटी के लिए उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा को आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसे उन्होंने तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ स्वीकार किया। आवेदन पर शीघ्र कार्रवाई करते हुए आज उन्हें स्कूटी प्रदान की गई, जिससे वे बहुत खुश हैं।

कपड़ा दुकान बनी आग का शिकार, लाखों का सामान स्वाहा

सरगुजा बतौली थाना क्षेत्र के शांतिपारा स्थित ‘अमित क्लॉथ’ नामक दुकान में देर रात भीषण आग लग गई. आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते दुकान में रखा लाखों रुपये का कपड़ा और कीमती सामान जलकर खाक हो गया. स्थानीय लोगों की सूचना पर तत्काल दमकल की टीम और बतौली पुलिस मौके पर पहुँची, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. आग लगने का कारण फिलहाल अज्ञात है और पुलिस मामले की जांच कर रही है. दुकानदार के अनुसार इस अग्निकांड में भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. गनीमत रही कि दमकल की सक्रियता से आग आसपास की अन्य दुकानों और रिहायशी इलाके में फैलने से पहले ही बुझा ली गई.

कबीर संत समागम समारोह को सीएम साय का समर्थन, सहायता राशि बढ़ाने की घोषणा

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा में माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सतगुरु कबीर संत समागम समारोह में शामिल हुए। इस दौरान सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है। छत्तीसगढ़ को बहुत आगे ले जाना है और विकसित प्रदेश के रूप में खड़ा करना है। उन्होंने संत समागम समारोह दामाखेड़ा की राशि 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपए करने की घोषणा की। इस अवसर पर सीएम साय ने पंथ श्री उदित मुनि नाम साहेब, पंथ श्री प्रकाश मुनि नाम साहब को चादर श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय माघ पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा का संत समागम समारोह हर साल भव्य होते जा रहा है, जो लोगों में बढ़ते आस्था का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव है इसलिए यहां के लोग शांति प्रिय है। वे बचपन से ही कबीर पंथ से परिचित है और उनके गांव बगिया में भी 8-10 कबीर पंथी परिवार है। उन्होंने दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्मनगर करने के संबंध में बताया कि राजपत्र में प्रकाशन हेतु अंतिम प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार से लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है। अब ​मुख्यमंत्री ने कहा कि छतीसगढ़ के विकास की बाधा की नक्सलवाद अब जल्द ही जड़ से समाप्त होने वाला है। नक्सलवाद का प्रदेश से 31 मार्च 2026 तक समूल नष्ट हो जाएगा। हमने जनता से किया वादा को तेजी से पूरा किया है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंथ श्री उदित मुनि नाम साहब का चादर तिलक अद्भुत और अलौकिक रहा। पंथ श्री ने वृक्षारोपण, समाज सेवा, नशामुक्ति एवं युवा उत्थान के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पंथ श्री का दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कबीर आश्रम के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर हमेशा चिंतित रहते है और शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते हैं। कार्यक्रम को खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, भाटापारा विधायक इंद्र साव ने भी सम्बोधित किया। समारोह में पंथश्री प्रकाश मुनि नाम साहब ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कबीरपंथी समाज की ओर से आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष माघ मेला के प्रथम दिन बसंत पंचमी के अवसर पर कबीर पंथ के नये संवाहक 16 वें वंशाचार्य पंथी श्री उदित मुनि नाम साहेब का चादर तिलक संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि इस वर्ष देश के विभिन्न प्रांतों के साथ ही विदेशों से भी कबीरपंथी संत समागम मेला में आये हैं। समारोह को शासन प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। इस अवसर पर पंथश्री उदित मुनि नाम साहब, गुरूगोसांई भानुप्रताप साहब, विधायक भावना बोहरा, ईश्वर साहू, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा सहित सदगुरू कबीर धर्मदास साहेब वंशावली प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में कबीरपंथ के अनुयायी उपस्थित थे।

भोरमदेव अभ्यारण्य में बाघों की धमाकेदार एंट्री, तस्वीरों ने दी जंगल सफारी की उम्मीद

कवर्धा वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक शानदार खबर सामने आई है. कबीरधाम जिले के भोरमदेव की सुरम्य पहाड़ियों और सघन जंगलों में एक बार फिर बाघों की दहाड़ गूंजने लगी है. वन विभाग द्वारा लगाए गए ट्रैप कैमरों में बाघ-बाघिन और उनके शावकों की बेखौफ विचरण करती तस्वीरें कैद हुई हैं. यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि भोरमदेव अभ्यारण्य अब बाघों के लिए एक सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाना बन चुका है. कान्हा नेशनल पार्क में बढ़ती संख्या का असर वन मंडल अधिकारी (DFO) निखिल अग्रवाल के मुताबिक, वर्तमान में जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में चार से अधिक बाघ और बाघिन सक्रिय हैं. इनकी हलचल प्रभूझोल, चिल्फी, बेंदा, झलमला और भोरमदेव अभ्यारण्य के आंतरिक हिस्सों में दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण, बाघ अब शांत आवास की तलाश में भोरमदेव का रुख कर रहे हैं. खास बात यह है कि इस बार बाघिनें शावकों के साथ यहाँ लंबे समय से डेरा डाले हुए हैं, जो यहाँ के बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है. सुरक्षा के कड़े इंतजाम बाघों की मौजूदगी ने वन विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है. प्रभूझोल से लेकर जामुनपानी मार्ग तक बाघों के पगमार्क (पैरों के निशान) मिले हैं. सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विभाग ने उनकी सटीक लोकेशन को गोपनीय रखा है, हालांकि निगरानी के लिए गश्त बढ़ा दी गई है. जंगल में बाघों का शावकों के साथ शिकार करना यह संकेत देता है कि यहां वन्यजीवों के लिए भोजन और प्राकृतिक चक्र पूरी तरह संतुलित है. पर्यटकों के लिए खुशखबरी: अप्रैल-मई से शुरू होगी सफारी बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वन विभाग अब भोरमदेव में जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी में है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, अप्रैल या मई के महीने से इसे आम पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है. सफारी के संचालन का जिम्मा गुजरात की एक अनुभवी कंपनी को सौंपा गया है. पर्यटकों के लिए टिकटों की बुकिंग ऑनलाइन उपलब्ध होगी. इस पहल से न केवल इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे. भोरमदेव में बाघों की स्थायी वापसी छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है. यह साबित करता है कि यदि संरक्षण के प्रयास ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति अपनी खोई हुई रौनक दोबारा हासिल कर लेती है.

राजिम झड़प मामले में सीएम साय का कड़ा रुख, दोषियों पर सख्त कार्रवाई के संकेत, महादेव सट्टा एप पर भी बोले

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कोरबा और अंबिकापुर दौरे के लिए रवाना हुए। दौरे को लेकर सीएम साय ने बताया कि कोरबा और अंबिकापुर में भारतीय जनता पार्टी के नए कार्यालयों का आज भूमिपूजन किया जाएगा। राजिम में दो संप्रदायों के बीच हुए विवाद को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। पुलिस आवश्यक कार्रवाई कर रही है। घटना में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। महादेव सट्टा एप मामले पर मुख्यमंत्री साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि इस मामले में कोई शासकीय कर्मचारी भी संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जाएगी। भाजपा अन्य दलों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करती : किरण देव वहीं कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के बाद अब ट्रेनिंग को लेकर चल रही चर्चाओं पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस के संगठन का विषय है और इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष की है। भाजपा अन्य दलों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करती। एक सप्ताह के भीतर पूरा होगा संगठन का काम भाजपा संगठन को लेकर जानकारी देते हुए किरण देव सिंह ने कहा कि पार्टी की संरचना पूरी तरह सुव्यवस्थित है। प्रदेश स्तर की टीम बन चुकी है और जिला स्तर पर भी गठन पूरा हो चुका है। सभी संगठनात्मक कार्य भाजपा की रीति-नीति के अनुसार तेजी से प्रारंभ हुए हैं और एक सप्ताह के भीतर संगठन का कार्य पूर्ण हो जाएगा।

बोर्ड परीक्षा की तैयारी में सहारा बनेगी नई हेल्पलाइन, छात्रों को मिलेगी हर मदद

रायपुर  बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु आयोजन और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व ही हेल्पलाइन सेवा शुरू कर दी गई है। यह हेल्पलाइन हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी एवं हायर सेकेंडरी व्यावसायिक परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए संचालित की जा रही है। हेल्पलाइन सेंटर से विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक सभी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए संपर्क कर सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी टोल फ्री नंबर 1800-233-4363 पर सुबह 10:30 बजे से शाम 5 बजे तक फोन कर सहायता ली जा सकती है। हेल्पलाइन में प्रतिदिन मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक अभिप्रेरक तथा मण्डल के अधिकारी उपस्थित रहेंगे, जो परीक्षा से जुड़े तनाव, मार्गदर्शन और अन्य शैक्षणिक समस्याओं का समाधान करेंगे। खास बात यह है कि यह सेवा रविवार के दिनों में भी कार्यालयीन समय में उपलब्ध रहेगी। माशिमं ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि परीक्षा से संबंधित किसी भी समस्या या तनाव की स्थिति में हेल्पलाइन का लाभ उठाएं, ताकि परीक्षाएं तनावमुक्त माहौल में संपन्न हो सकें।

‘क्यों चुप है केंद्र सरकार?’ Epstien Files को लेकर दीपक बैज ने PM मोदी पर साधा निशाना

रायपुर जेफ्री एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी 2017 की इजरायल यात्रा के दावों पर पीसीसी चीफ दीपक बैज का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल्स मामले में केंद्र सरकार चुप क्यों हैं? सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए. हालांकि इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि इजरायल दौरे के अलावा कही गई बातें एक दोषी की बकवास और निरधार कल्पनाएं है. इसे पूरी तरह तिरस्कार के साथ खारिज किया जाना चाहिए. गरियाबंद हिंसा मामले में पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधा है. गरियाबंद के फिंगेश्वर में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कहा कि सरकार कहां है, कौन इसका जिम्मेदार है. लॉ एंड ऑर्डर कहां है, सरकार ने आग में झोंक दिया है. समय पर रोक कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी घटना नहीं घटती. बैज ने लॉ एंड ऑर्डर खराब होने के चलते घटना घटी की बात कहते हुए न्यायिक जांच की मांग की है. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि सरकार की तीन नाकामियों को लेकर पीसी कर रहे हैं. धान खरीदी को लेकर किसान परेशान हैं. उन्होंने बताया कि सरकार का घोषित लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन था. पिछले साल से 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन धान कम खरीदा गया. कई किसानों का पंजीयन हुआ, लेकिन टोकन नहीं दिया गया है. सरकार का रवैया किसानों के प्रति सही नहीं है. बैज ने आरोप लगाया कि किसानों के खिलाफ सरकार लगातार षड्यंत्र कर रही है. 29 जिलों में धान की खरीदी कम हुई है. दीपक बैज ने कहा कि कम धान खरीदी पर सरकार ने जश्न भी मनाया. सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों से माफी मांगे. धान खरीदी की तारीख की मांग को दोहराते हुए कहा कि किसानों के लिए कांग्रेस ने सड़को पर उतरकर प्रदर्शन किया, बचे हुए किसानों का टोकन काटने की मांग की. लेकिन गूंगी बहरी सरकार आंख बंद कर चुप रही. किसान परेशान और चिंतित है. बैज ने कहा कि यह हटधर्मिता और किसान विरोधी सरकार है. सरकार का इतना जिद्द ठीक नहीं है. सरकार को एक सर्कुलेशन जारी कर बचे हुए किसानों का धान खरीदना चाहिए. धान खरीदी में सरकार फेल है. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ को इस बार के बजट में भी ठगा गया. माइनिंग का विशेष कॉरिडोर बनाने का निर्णय हुआ. चहेते उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाला बजट है. बजट में छत्तीसगढ़ की उपेक्षा की गई है.

छत्तीसगढ़ में मतांतरण विरोधी विधेयक पर कानूनी संकट, बजट सत्र में पास होने की संभावना कमजोर

रायपुर  विष्णु देव साय सरकार के कड़े मतांतरण विरोधी कानून लाने के संकल्प पर फिलहाल कानूनी अड़चनों के बादल मंडरा रहे हैं। शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने की घोषणा के बाद अब 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में भी इसके पेश होने की उम्मीद कम नजर आ रही है। मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसने विधेयक की राह कठिन कर दी है। दरअसल, देश के विभिन्न राज्यों में लागू मतांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सहित उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, झारखंड और राजस्थान को नोटिस जारी करके जवाब दाखिल करने कहा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी तक टाल दी है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार चूंकि मूल कानून की वैधता पर ही सवालिया निशान है, इसलिए राज्य सरकार नए संशोधन विधेयक को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। प्रस्तावित कानून: 10 साल की सजा का प्रविधान सूत्रों के अनुसार साय सरकार जिस नए विधेयक पर काम कर रही है, वह ”छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968” का स्थान लेगा। इसमें सजा के कड़े प्रावधान शामिल हैं। प्रलोभन या जबरन मतांतरण पर 10 साल तक की कैद, मतांतरण से 60 दिन पहले जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होना, वर्तमान में मात्र 5,000 रुपये जुर्माने का प्रविधान है, जिसे कई गुना बढ़ाने की तैयारी है। राज्य सरकार का कहाना है कि जबरन मतांतरण और प्रलोभन की परिभाषा को और अधिक व्यापक बनाया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा में बढ़े मामले एक अनुमान के मुताबिक राज्य में पिछले दो वर्षों में मतांतरण से जुड़ी 100 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। हिंदू संगठनों का आरोप है कि विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों (बस्तर और सरगुजा) में भोले-भाले ग्रामीणों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का कहना है कि मंत्रिमंडलीय उप-समिति इस पर काम कर रही है, लेकिन उन्होंने विधेयक पेश करने की निश्चित तिथि पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालिया घटनाएं: राज्य में तनाव की स्थिति     केस 01: राजनांदगांव में प्रार्थना सभा पर हंगामा एक फरवरी 2026 को राजनांदगांव के मोतीपुर में एक घर के भीतर चल रही ईसाई प्रार्थना सभा को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप था कि वहां मतांतरण कराया जा रहा है। पुलिस के दखल के बाद मामला शांत हुआ।     केस 02: सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर गिरफ्तार 29 जनवरी 2026 को सरगुजा पुलिस ने चंगाई सभा की आड़ में मतांतरण कराने के आरोप में रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो को गिरफ्तार किया। उनके निवास पर 50-60 लोग मौजूद थे, जहां कथित तौर पर मतांतरण की प्रक्रिया चल रही थी।     केस 03: कांकेर में प्रलोभन का आरोप पांच जनवरी 2026 को कांकेर में एक प्रार्थना सभा को लेकर ग्रामीणों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का दावा था कि आर्थिक प्रलोभन देकर लोगों का मतांतरण कराया जा रहा है, जिससे इलाके में तनाव व्याप्त हो गया था।  

Chhattisgarh Board Exam 2026: 20 फरवरी से परीक्षा का आगाज, शिक्षकों पर ‘एस्मा’ के तहत कार्रवाई

 रायपुर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होंगी। परीक्षाओं के सुचारु संचालन को लेकर राज्य सरकार ने शिक्षकों और परीक्षा कार्य से जुड़े कर्मचारियों पर एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस एक्ट (एस्मा) लागू कर दिया है। एस्मा के तहत 15 फरवरी से 30 अप्रैल तक शिक्षक और कर्मचारी किसी भी प्रकार का अवकाश नहीं ले सकेंगे। इस दौरान हड़ताल, धरना या किसी भी तरह के आंदोलन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सभी शिक्षकों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। उपस्थिति दर्ज होने के बाद ही उनकी ई-पुस्तिका अपडेट की जाएगी। 2,514 परीक्षा केंद्र, कंट्रोल रूम से निगरानी प्रदेशभर में बोर्ड परीक्षाओं के लिए कुल 2,514 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा संचालन की निगरानी के लिए मंडल स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इस वर्ष लगभग सात लाख विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होंगे। ड्यूटी से इन्कार पर होगी कार्रवाई गृह विभाग के निर्देशानुसार परीक्षा अवधि में न तो छुट्टियां स्वीकृत होंगी और न ही सामूहिक अवकाश लिया जा सकेगा। यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी परीक्षा ड्यूटी से इन्कार करता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने परीक्षा संचालन, उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन और परिणाम से जुड़े कार्यों को अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में रखा है। क्या है एस्मा? निवारण अधिनियम, 1979 के तहत एस्मा लागू होने पर अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी कार्य से इन्कार नहीं कर सकते। अधिनियम की धारा 4 (1) के अनुसार कोई भी कर्मचारी पूर्ण या आंशिक हड़ताल, कार्य बहिष्कार या किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। नियमों का उल्लंघन दंडनीय अपराध है, जिसमें कानूनी कार्रवाई का प्रविधान है।  

सफाई कर्मचारी की बेटी से भिलाई में गैंगरेप, 7 साल तक कई बार मिटाई हवस, दो गिरफ्तार, 4 की तलाश जारी

भिलाई  छतीसगढ़ से भिलाई से सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक सफाई कर्मचारी के बेटी के साथ गैंगरेप जैसे जघन्य घटना को अंजाम दिया दिया गया। करीब 7 साल तक आरोपियों ने युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया और रेप करते रहे। पुलिस ने इस संगीन मामले में विभाग के दो कर्मचारी, होटल मैनेजर, ठेकेदार और सांसद कार्यालय में अटैच रहे कर्मचारी के साथ ही  6  आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है नियमित करने का झांसा देकर करके रहे दुष्कर्म दरअसल सरकारी कार्यालय में सफाई का काम करने वाली लड़की के साथ ये खेल खेला गया। लड़की को नियमित नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके साथ सालों तक हद पार की गई। सामूहिक दुष्कर्म के इस मामले से हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विभाग के ही दो कर्मचारियों, के साथ  होटल मैनेजर, ठेकेदार और सांसद कार्यालय में अटैच रहे कर्मचारी के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है। आपको बता दें कि यह मामला अप्रैल 2018 से अक्टूबर 2025 के बीच का है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता के साथ जब ये शुरु हुआ तो वो नाबालिग थी और फिर कई साल तक ये चलता रहा । आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 65(1), 70(2) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 12 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है, जबकि बाकी चारों की तलाश अभी भी जारी है। लड़की का वीडियो बनाने का भी है आरोप पीड़िता ने शिकायत में कहा है कि आरोपियों ने उसके अश्लील फोटो और वीडियो भी बनाए थे। इनको वायरल करने की धमकी दी जाती थी जिससे वो चुप रही। जानकारी के मुताबिक लड़की को आश्वासन दिया जाता रहा कि उसकी स्थायी नौकरी लगवाई जाएगी लेकिन इस दौरान शोषण होता रहा । जब स्थाई  नौकरी नहीं लगी तो उसने पूरी घटना अपनी मां को बताई। लिहाजा छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दो को गिरफ्तार कर लिया गया है, और बाकियों की तलाश जारी है।

रायपुर में धान घोटाला: समिति प्रभारी पर 7 लाख का घोटाला करने का आरोप, FIR दर्ज

रायपुर जिला रायपुर के उरला थाना क्षेत्र अंतर्गत कुम्हारी स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में धान खरीदी के दौरान बड़ी हेराफेरी का मामला सामने आया है। समिति प्रभारी पर 850 बोरी धान की फर्जी एंट्री कर करीब सात लाख छह हजार 909 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप है। इस मामले में उरला थाने में आरोपित समिति प्रभारी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित कुम्हारी (पंजीयन क्रमांक 1383) में जनवरी 2025 से पदस्थ प्राधिकृत अधिकारी जागेश्वर प्रसाद वर्मा ने उरला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि समिति में ग्राम कुम्हारी, चिखली, पठारीडीह और कन्हेरा के किसानों से धान खरीदी की जाती है। धान खरीदी के दौरान बोरी की गिनती, पावती बनाना और रजिस्टर में एंट्री करने की जिम्मेदारी समिति प्रभारी कृष्णा साहू की थी, जबकि कंप्यूटर आपरेटर आनलाइन एंट्री कर किसानों के खातों में भुगतान करता है। नोडल अधिकारी की सूचना से खुलासा 20 जनवरी 2026 को कंप्यूटर आपरेटर और शासन से नियुक्त नोडल अधिकारी श्रृंखला शर्मा (ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी) ने लिखित सूचना दी कि समिति में 746 बोरी धान की हेराफेरी की गई है। इसके बाद 30 जनवरी 2026 को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक धरसींवा के प्रबंधक एवं विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में समिति के दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के दौरान धान खरीदी पंजी, कैश बुक, हमाली पंजी, टोकन पर्ची और तौल पत्रक का मिलान किया गया, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। 104 की जगह 850 बोरी की एंट्री जांच में पाया गया कि किसान आलोक शर्मा केवल 104 बोरी धान (28 बोरी मोटा धान और 76 बोरी सरना धान) बिक्री के लिए लाया था, लेकिन समिति प्रभारी ने तौल पत्रक और रिकार्ड में 850 बोरी धान की एंट्री कर दी। इस फर्जी एंट्री के आधार पर किसान के खाते में 7,06,909.60 रुपये का भुगतान आनलाइन ट्रांसफर कर दिया गया। इससे समिति को 850 बोरी धान और सात लाख से अधिक की आर्थिक क्षति हुई। किसान और कर्मचारियों के बयान किसान आलोक शर्मा ने लिखित बयान में कहा कि उसने केवल 104 बोरी धान ही बेचा था और यदि खाते में अतिरिक्त राशि आई है तो वह राशि लौटाने को तैयार है। समिति में कार्यरत कर्मचारियों और हमालों के बयान भी हेराफेरी की पुष्टि करते हैं। समिति प्रभारी ने स्वीकार की गलती पूछताछ के दौरान आरोपित समिति प्रभारी कृष्णा साहू ने बयान में स्वीकार किया कि उससे 104 की जगह 850 बोरी की पावती दर्ज हो गई। इन धाराओं में मामला दर्ज उरला थाना पुलिस ने आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318 (4), 337, 338, 339 और 340 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। मामले की जांच उप निरीक्षक रामनाथ चंद्रवंशी को सौंपी गई है। पुलिस के अनुसार, धान खरीदी प्रक्रिया में शामिल अन्य कर्मचारियों और बैंक लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

जमीन बनी रहस्य का गड्ढा: घर के बीचोंबीच फूटी पानी की धार, लोग बोले– ऐसा पहली बार देखा

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक खौफनाक वीडियो सामने आया है। यहां एक घर में अचानक जमीन फटी और चारों तरफ पानी ही पानी फैल गया। पानी की धारा इतनी तेज फूटी की वहां खड़ा शख्स डर गया और मौके से भाग गया। यह घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। क्या है वायरल वीडियो में वायरल वीडियो एक घर के अंदर का है घर के हॉल में एक शख्स जा रहा था होता है। इस दौरान अचानक पानी आने लगता है और थोड़ी ही देर में घर की फर्श फाड़कर जमीन की तेज धार निकल आती है। जमीन से निकली तेज धार से शख्स खौफ में आ जाता है और घर के अंदर भाग जाता है। क्या थी वजह बताया जा रहा है कि घर के बगल में ही एक प्लांट में बोरिंग का काम चल रहा था। बोरिंग के चलते तेज प्रेशर बना और इसका असर बगल के घर में भी देखने को मिला। घर में फर्श फट गई और तेज पानी की धार से पूरा घर पानी-पानी हो गया।

UGC के नए नियमों पर सवर्ण समाज का विरोध, न्यायधानी में बंद का नहीं दिखा असर

बिलासपुर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में आज देशभर में सवर्ण समाज ने बंद का आह्वान किया है. हालांकि, छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में बंद बेअसर नजर आया और मुख्य बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले रहे. लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है. सामान्य वर्ग के समाज प्रतिनिधियों, शिक्षकों, छात्रों और विभिन्न संगठनों ने UGC के नए नियमों पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि ये शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के हितों के खिलाफ है. सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की अनदेखी की जा रही है. यूजीसी कानून विरोध आंदोलन के संयोजक डॉ प्रदीप शुक्ला ने कहा कि जब तक इन नियमों को रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. आज शहर में बड़ी रैली निकालने और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी है. फिलहाल, पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे. जानिए क्यों हो रहा UGC के नियमों का विरोध बता दें, UGC ने यह नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी की कथित जातिगत भेदभाव के कारण हुए हत्या मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए थे, ताकि कैंपस में जातिगत और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म किया जा सके. लेकिन नियम लागू होते ही देशभर में सवर्ण समाज ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. विवाद की मुख्य वजहें और विरोधियों के तर्क सामान्य वर्ग (S-4 जैसे संगठन) और कई शिक्षक समूहों द्वारा विरोध के पीछे निम्नलिखित तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं:     OBC को शामिल करना: विरोधियों का तर्क है कि SC-ST के साथ अब OBC को भी इन कड़े सुरक्षा प्रावधानों में शामिल करना नियमों के दुरुपयोग की संभावना को बढ़ाता है.     झूठे आरोपों का डर: सवर्ण संगठनों का मानना है कि ‘इक्विटी स्क्वाड’ और ‘समता दूत’ जैसी व्यवस्थाओं से निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को आपसी रंजिश के चलते झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है.     असमान सुरक्षा: तर्क दिया जा रहा है कि नियम केवल आरक्षित वर्गों की सुरक्षा की बात करते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भेदभाव से सुरक्षा का कोई स्पष्ट ढांचा इसमें नहीं दिखता. सुप्रीम कोर्ट ने नए नियम पर लगाई रोक चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इन नियमों पर रोक लगाते हुए कहा कि ‘भेदभाव’ की परिभाषा वर्तमान रेगुलेशन में बहुत धुंधली है.नियमों को और अधिक समावेशी बनाने की जरूरत है ताकि यह देखा जा सके कि ये ‘समानता के अधिकार’ का उल्लंघन तो नहीं कर रहे. कोर्ट ने कहा कि जब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं आता, 2012 के पुराने यूजीसी नियम ही प्रभावी रहेंगे.

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