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कांस्य पदक विजेता भारतीय टीम में राज्य शूटिंग (शॉटगन) अकादमी की कु. मानसी

भोपाल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी शूटिंग चौम्पियनशिप 9 से 13 नवंबर 2024 का आयोजन दिल्ली में किया गया। इस चौम्पियनशिप के स्कीट इवेन्ट में भारत को कांस्य पदक प्राप्त हुआ। कांस्य पदक प्राप्त करने वाली 3 सदस्यीय भारतीय टीम में म.प्र. राज्य शूटिंग (शॉटगन) अकादमी की खिलाड़ी कु. मानसी रघुवंशी और कु. वंशिका तिवारी शामिल थी। तीसरी खिलाड़ी कु. यशस्वनी राठौर राजस्थान की खिलाड़ी है। प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक इटली की टीम को और रजत पदक स्लोवाकिया की टीम को मिला। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने चैम्पियनशिप में कांस्य पदक प्राप्त करने वाली भारतीय टीम को शुभकामनाएं दी है। म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी के कुल 04 खिलाड़ियों ने विश्व यूनिवर्सिटी गेम्स 2024 में प्रतिभागिता की थी। सभी खिलाड़ियों ने पदक अर्जित किये है। यह विश्व शूटिंग चौम्पियनशिप में म.प्र.राज्य शूटिंग अकादमी के खिलाड़ियों का यह चौथा पदक है। प्रतियोगिता में 4-4 पदक अर्जित करने पर खेल मंत्री सारंग ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि यह परिणाम विभाग द्वारा दिये जा रहे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और उनकी कड़ी मेहनत का प्रतिफल है। उन्होंने उम्मीद जताई हमारे खिलाड़ी इसी तरह विश्व स्तर पर प्रदेश और देश को गौरवान्वित करते रहेंगें। विश्व यूनिवर्सिटी गेम्स में मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा 04 पदक प्राप्त किये गये। ऐश्वर्य प्रताप सिंह ने 50 मी 3 पोजीशन राईफल इवेन्ट की व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक और टीम इवेन्ट स्वर्ण पदक, कु. नीरू ढांडा ने महिला स्कीट व्यक्तिगत इवेन्ट में रजत पदक तथा कु. मानसी एवं वंशिका ने महिला स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य पदक प्राप्त किया। खेल अकादमी के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में 1 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य पदक सहित कुल 4 पदक प्राप्त किये।  

महेश्वर में अहिल्या बाई की 300वीं जन्म जयंती पर 15 नवम्बर से 17 नवम्बर तक निमाड़ उत्सव का आयोजन

भोपाल मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक एवं गौरवशाली प्रसिद्ध पर्यटन स्थल महेश्वर में लोकमाता अहिल्या बाई की 300वीं जन्म जयंती पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर 15 नवम्बर से 17 नवम्बर तक निमाड़ उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन को भव्य बनाने एवं इसमें अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही है। तीन दिवसीय निमाड़ उत्सव के दौरान प्रतिदिन सांय 07 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रतिदिन प्रातः 8:30 बजे से नर्मदा रिसोर्ट सभागार में संगोष्ठी का आयोजन होगा। तीन दिवसीय निमाड़ उत्सव का शुभारंभ 15 नवंबर को उज्जैन के दिनेश शर्मा एवं सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक सुदेश भोसले द्वारा मां नर्मदा की सांगीतिक आरती के साथ होगा। इस दौरान सांयकाल में सुगम संगीत की प्रस्तुति मुम्बई के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक सुदेश भोसले एवं उनकी साथियों द्वारा दी जाएगी। दूसरे दिन 16 नवंबर को सायं 7 बजे निमाड़ गायन अंतर्गत लोककण्ठ की प्रस्तुति मनीषा शास्त्री, राखी बांके, सोनाली ढाकसे, विकास शुक्ला एवं साथी कलाकारों द्वारा दी जाएगी। गणगौर नृत्य की प्रस्तुति खण्डवा की साधना उपाध्याय एवं साथियों द्वारा, बैगा जनजाति के करमा नृत्य की प्रस्तुति डिण्डोरी के दयाराम एवं साथियों द्वारा, छाऊ नृत्य की प्रस्तुति रांची की सृष्टिघर महतो एवं साथी कलाकारों द्वारा, भांगड़ा और मलवाई गिद्दा नृत्य की प्रस्तुति पटियाला के मनेन्द्र सिंह एवं साथी कलाकारों द्वारा और गोटीपुआ नृत्य की प्रस्तुति उड़ीसा की चन्द्रमणि प्रधान व साथी कलाकारों द्वारा दी जाएगी। इसी प्रकार 17 नवंबर को काठी नृत्य की प्रस्तुति हरसूद के रामदास साकल्ले एवं साथियों द्वारा, गुटुमबाजा नृत्य की प्रस्तुति डिण्डोरी के लेखपाल धुर्वे एवं साथियों द्वारा दी जाएगी। इसके बाद मेरठ के हरिओम पंवार, इंदौर के मुकेश भोलवा, दिल्ली के शंभु शिखर, इंदौर के श्याम सुंदर पलोड, खण्डवा के डॉ. श्रीराम परिहार, महेश्वर के विजेय शितांशु, हरिश दुबे, विष्णु फागना, गोगावां के जगदीश जोशिला, पंधाना के विरेन्द्र चौरे, सनावद के दीपक पगारे, खरगोन के नरेन्द्र जोशी, खलघाट के विजय शर्मा द्वारा काव्यपाठ किया जाएगा। निमाड़ उत्सव के दौरान होगी विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं तीन दिनी निमाड़ उत्सव के दौरान विभिन्न प्रकार की खेल गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा इसमें 15 नवंबर को प्रातः 8 बजे से उत्कृष्ट विद्यालय महेश्वर से अहिल्या घाट तक रैली का निकलेगी। इसके साथ ही प्रातः 9 बजे उत्कृष्ट विद्यालय महेश्वर में बालक वर्ग के लिए कबड्डी प्रतियोगिता, दोपहर 3 बजे से देवी अहिल्या घाट पर नौका सज्जा प्रतियोगिता, सांय 6 बजे से महिलाओं के लिए आत्मरक्षा का प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं 16 नवंबर को प्रातः 10 बजे से उत्कृष्ट विद्यालय महेश्वर में बालक एवं बालिका वर्ग के लिए कुश्ती प्रतियोगिता एवं दोपहर 12 बजे से देवी अहिल्या घाट पर मेहंदी प्रतियोगिता होगी। तीसरे दिन 17 नवंबर को प्रातः 9 बजे से उत्कृष्ट विद्यालय महेश्वर में बालिका वर्ग के लिए कबड्डी एवं दोपहर 2 बजे से रांगोली प्रतियोगिता का आयोजन होगा।  

पंच महाआरती, दीप दान के साथ भजन और सांस्कृतिक संध्या का हुआ आयोजन संत-महात्माओं ने की सहभागिता

भोपाल देव उठनी एकादशी के पावन पर्व पर मां नर्मदा की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक में संत मण्डल द्वारा 11 हजार दीपदान, पंच महाआरती, भजन संध्या सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अमरकंटक के इतिहास में संत मंडल के नेतृत्व एवं जन-सहभागिता से आध्यात्मिक, धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भव्य एवं मंत्रमुग्ध करने वाला था। कलेक्टर हर्षल पंचोली सपत्नीक आयोजन में मुख्य यजमान के रुप में शामिल हुए। कार्यक्रम में अमरकंटक, पेण्ड्रा, राजेन्द्रग्राम, अनूपपुर,कोतमा, बिजुरी, डिण्डोरी, बुढार, शहडोल के लोगों ने भी बढ चढ कर हिस्सा लिया। देवउठनी एकादशी- तुलसी विवाह अवसर पर अमरकंटक संत मण्डल द्वारा नर्मदा उद्गम के रामघाट के दक्षिण तट पर 11 हजार दीप प्रज्ज्वलित किए गए। श्रद्धालुओं द्वारा रामघाट को रंगोली,पुष्पमाला,रंगीन बिजली की लाईट से सजावट कर कार्यक्रम को अत्यंत मनोहारी बनाया गया था। शायं 5 बजे से शुरु हुआ कार्यक्रम रात्रि 9 बजे तक चला। दीपदान और पंच आरती से पूर्व भजन कीर्तन , वैदिक मंत्रोच्चारण कर नर्मदाष्टक से नर्मदा मैया की विधिवत पूजा-अर्चना की गयी। मृत्युंजय आश्रम के वेदपाठी शिष्यों द्वारा सस्वर पाठ किया गया। इसके पश्चात नर्मदा तट के रामघाट पर 11 हजार दीप प्रज्ज्वलन के साथ दीपदान करते हुए काशी के आचार्यों द्वारा पंच महाआरती की गयी। सांस्कृतिक आयोजन से मंत्र मुग्ध हुए लोग अमरकंटक संत मंडल के द्वारा आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में मां कल्याणिका पब्लिक स्कूल पेंड्रा रोड, कल्याणिका केन्द्रीय शिक्षा निकेतन विद्यालय अमरकंटक, सरस्वती शिशु उच्च माध्यमिक विद्यालय अमरकंटक एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अमरकंटक के छात्र-छात्राओं ने कला का प्रदर्शन कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आकर्षक प्रस्तुति देने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया। दस सदस्यीय प्रशिक्षु आईएएस दल ने किया अवलोकन जिले में दस सदस्यीय प्रशिक्षु आईएएस दल भ्रमण पर है। नर्मदा तट पर आयोजित दीपदान-पंच आरती कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस दल भी शामिल हुए। प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों ने श्रद्धाभाव से कार्यक्रम में सहभागिता निभाई। कलेक्टर पंचोली ने कहा कि सभी के सहयोग से ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ है। इसे प्रतिवर्ष सभी के सहयोग से मनाया जायेगा। नर्मदा स्वच्छता का दिया संदेश दीपदान महोत्सव के पूर्व संत मंडल के पूज्य संतों ने नर्मदा जी में स्वच्छता अभियान चलाया। संतों द्वारा नर्मदा जी में उतर कर लगभग तीन घंटे श्रमदान कर नदी और घाट की सफाई की और स्वच्छता का संदेश दिया गया।  

इस्कॉन ने “मूल्य आधारित शिक्षा प्रतियोगिता” की आयोजित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गीता महोत्सव हमारे महान सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का उत्सव है। यह एक अद्भुत अवसर है कि हम श्रीमद्भागवत गीता के अमूल्य ज्ञान और प्रेरणा को अपने जीवन में आत्मसात करें। देश में पहली बार गीता पर आधारित विशेष प्रतियोगिता का आयोजन मध्यप्रदेश में होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस्कॉन के सहयोग से आयोजित “मूल्य आधारित शिक्षा प्रतियोगिता” की जा रही है। यह विद्यार्थियों को गीता की अमूल्य शिक्षाओं और जीवन मूल्यों को गहराई से समझने और उन्हें अपने जीवन में उतारने का अद्भुत अद्भुत अवसर प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की महान कला सिखाने वाला मार्गदर्शन है। इसमें निहित ज्ञान से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रतियोगिता न केवल विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में सहायक होगी, बल्कि धैर्य, आत्म-नियंत्रण और सही निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करेगी। यह प्रतियोगिता गीता के गहन संदेशों को आत्मसात करने और जीवन को नई दिशा देने में स्कूली बच्चों को मदद करेगा। विद्यार्थियों की भागीदारी इस आयोजन को सफल बनाकर एक नई सोच और दृष्टिकोण से परिचित कराएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा की है कि विद्यार्थी अपने माता-पिता और शिक्षकों के प्रोत्साहन से इस प्रतियोगिता में शामिल होकर इसे अविस्मरणीय बनायेंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दी है।  

विभिन्न देशों के तकनीकी विशेषज्ञों ने जानी ग्लोबल स्किल्स पार्क की विशेषता

भोपाल विभिन्न देशों के तकनीकी विशेषज्ञों ने संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क भोपाल मे देखा हुनर को तराशना। ग्लोबल स्किल्स पार्क केवल देश मे ही नहीं विदेशों मे भी स्किल्स के क्षेत्र मे आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर का यह संस्थान देश के युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप अत्याधुनिक मशीनों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। फिलीपिंस, थाईलैंड,पापुआ न्यू गिनी, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार,मंगोलिया, मालदीव, भूटान के राजनयिकों ने ग्लोबल स्किल्स पार्क का भ्रमण कर यहाँ पर संचालित हो रहे 9 एडवांस्ड कोर्सेज की लैब्स को देखा और इसको सराहा। यहां से प्रशिक्षित हर छात्र रोजगारोन्मुख हो रहा है। उन्होंने यहाँ कि पेड़गोजी एवं ट्रेनिंग को समझा और उनके देश के युवाओं को ग्लोबल स्किल्स पार्क की तर्ज पर किस प्रकार प्रशिक्षण दे सकते हैं, उस पर चर्चा की। वरिष्ठ संचालक श्री शमीमउद्दीन ने ग्लोबल स्किल्स पार्क में आने के लिए आभार व्यक्त किया।  

राज्य स्तरीय मोगली उत्सव

राज्य स्तरीय मोगली उत्सव जंगल सफारी भ्रमण और वन्य जीवों को देखकर बच्चे हुए खुश भोपाल पेंच नेशनल पार्क सिवनी में राज्य स्तरीय मोगली उत्सव के दूसरे दिन स्कूल के बच्चों ने जंगल सफारी के दौरान वन का भ्रमण किया और वन्य जीवों को देखा। उनके साथ वन विभाग के गाइड और शिक्षक भी साथ थे। स्कूल शिक्षा विभाग प्रतिवर्ष वन विभाग के साथ मिलकर मोगली उत्सव का आयोजन करता है। बच्चों के सर्वांगीण विकास, वन, पर्यावरण, वन्य-जीव संरक्षण की जानकारी बच्चों को देना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है। मोगली उत्सव में बच्चों की चित्रकला, प्रश्न-मंच और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियाँ भी करायी जाती हैं। शुभारंभ समारोह मोगली उत्सव का शुभारंभ सोमवार को हुआ। सिवनी विधायक दिनेश राय ने प्रात: 5 बजे हरी झण्डी दिखाकर प्रदेश के सभी जिलों से आये मोगली मित्र बच्चों को सफारी के लिये रवाना किया। समारोह में 242 बच्चे, 58 शिक्षक और 12 स्वयंसेवी कार्यकर्ता सहभागिता कर रहे हैं। बच्चों को इस दौरान जैव-विविधता की भी जानकारी दी गयी। पुरस्कृत होंगे बच्चे विभिन्न प्रतियोगिता में शामिल होने वाले बच्चे श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये पुरस्कृत किये जायेंगे। प्रदेश में मोगली उत्सव की शुरूआत शाला स्तर, विकासखण्ड स्तर और जिला स्तर पर होती है। कार्यक्रम में 55 जिलों से आये विद्यार्थी एवं शिक्षक अपनी सक्रिय सहभागिता कर रहे हैं। मोगली उत्सव में राज्य जैव-विविधता बोर्ड, पर्यावरण नियोजन समन्वय एवं संगठन (एप्को), स्काउट गाइड और मध्यप्रदेश पाठ्य-पुस्तक निगम आयोजन में मदद करते हैं। पर्यावरण क्विज प्रतियोगिता एवं मिशन लाइफ आधारित लघु प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कनिष्ठ वर्ग एवं वरिष्ठ वर्ग के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रथम 5 जिलों के 2-2 प्रतिभागियों का चयन किया गया। चयनित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिये मल्टी-मीडिया क्विज का आयोजन भी किया गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, ओजोन संरक्षण, प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर रोचक प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी सहभागिता दी। सभी विजयी विद्यार्थियों को एप्को भोपाल द्वारा ऊर्जा दक्ष सोलर उत्पाद, जिसमें सोलर लालटेन, लैम्प एवं टेबल लैम्प, सोलर पैनल चार्जिंग दिये गये। जनजाति समुदाय द्वारा निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिये पुरस्कार और प्रमाण-पत्र दिये गये।  

शहर में हथेलियों की लकीरें गायब, आधार से मोबाइल नहीं अपडेट हो तो बुजुर्ग कैसे बनें ‘आयुष्मान’

भोपाल शहर में 70 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए कई वार्डों में शिविर लगाए जा रहे हैं, जिसमें बुजुर्गों को आयुष्मान कार्ड बनवाने में परेशानी हो रही है। वजह अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों का मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं होना है, जिसके कारण ओटीपी नहीं आ रहा। अब उन्हें आधार केंद्रों पर जाकर मोबाइल नंबर अपडेट कराना पड़ रहा है। कई वरिष्ठ नागरिकों के फिंगर प्रिंट मशीन स्कैन नहीं कर पा रही है, क्योंकि बढ़ती उम्र के चलते उनके हाथों की लकीरें ही गायब हो गई हैं। कई बुजुर्ग ऐसे भी हैं जो घर से अकेले सेंटर तक नहीं आ सकते हैं। एक लाख से अधिक बुजुर्ग अकेले राजधानी में एक लाख चार हजार बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनकी आयु 70 साल से अधिक है। यह सभी योजना के हकदार हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 2600 को ही जोड़ा जा सका है। ऐसे में इन्हें योजना से जोड़ना बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग ज्यादा से ज्यादा बुजुर्गों के कार्ड बनाने के लिए वार्ड कार्यालयों में शिविर लगा रहा है। वहीं, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी दी गई है, लेकिन जागरूकता और तकनीक की जानकारी नहीं होने से परेशान हो रहे हैं। इसको लेकर विभाग अब नए एक्शन प्लान तैयार करने में जुट गया है। रजिस्ट्रेशन में परेशानी जिन बुजुर्गों को आयुष्मान कार्ड योजना में रजिस्ट्रेशन करने की प्रक्रिया समझ नहीं आ रही है, वे एमपी ऑनलाइन सेंटर जा रहे हैं। चांदबड़ क्षेत्र में 73 वर्षीय दंपती ने बताया कि मोबाइल पर वे रजिस्ट्रेशन नहीं कर पा रहे थे, इसलिए एमपी ऑनलाइन सेंटर पर पहुंचे। यहां हमसे एक कार्ड का 100 रुपये शुल्क लिया गया, जबकि यह प्रक्रिया निश्शुल्क है। क्लेम मिलने में दिक्कत पिपलानी निवासी 72 वर्षीय कांताबाई घुटने के ऑपरेशन के लिए एक निजी अस्पताल गई। यहां उनका ऑपरेशन तो कर दिया गया, परंतु बाद में बताया कि उनका फिंगर प्रिंट स्कैन न होने से क्लेम रिजेक्ट हो गया है। वहीं, 76 साल के रामनारायण शर्मा का भी घुटने के ऑपरेशन के बाद फिंगर प्रिंट मिलान न होने से इनका आयुष्मान क्लेम रिजेक्ट हो गया। आयुष्मान न होने से ऑपरेशन के लिए इम्प्लांट और दवा बाजार से लानी पड़ी। मोबाइल पर नहीं आ रहा ओटीपी वार्ड क्रमांक 58 के कार्यालय में आयुष्मान के लिए बुजुर्ग कतार में लगे थे। 73 वर्षीय सोनेलाल दुबे के आधार से कोई और नंबर जुड़ा हुआ है। ऐसे में कर्मचारी ने उन्हें पहले नंबर अपडेट कराने का सुझाव देकर लौटा दिया। वार्ड 59 में 71 वर्षीय प्रेमलता सिंह को भी निराशा हाथ लगी। उनके मोबाइल पर बार-बार प्रयास के बाद भी ओटीपी नहीं आया। जबकि नंबर भी सही था। ऐसे में कर्मचारी ने उन्हें मोबाइल पर एसएमएस वाला पैक डलवाने का सुझाव दिया, जिसके बाद बुजुर्ग महिला लौट गईं। ऐसे करें आवेदन सीएमएचओ भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने कहा कि हर बुजुर्ग को योजना से जोड़ने का लक्ष्य है। इसके लिए बुजुर्ग को सिर्फ अपने आधार और उससे जुड़े मोबाइल नंबर को अपडेट रखने की जरूरत है। स्वास्थ्य कर्मचारी सबसे पहले बुजुर्ग के आधार की डिटेल पोर्टल पर दर्ज करता है। इसके बाद ओटीपी के जरिए इसका सत्यापन होता है। अंत में बुजुर्ग की फोटो अपलोड की जाती है। इस प्रक्रिया के बाद व्यक्ति की यूनिक आइडी जनरेट हो जाती है। जिसके जरिए वे अस्पताल में पहुंचकर निश्शुल्क इलाज करा सकता है। योजना से यह लाभ योजना के तहत बुजुर्ग पांच लाख तक का सालाना निश्शुल्क इलाज करा सकते हैं। वहीं, परिवार में पहले से आयुष्मान कार्ड है तो बुजुर्गों को इस स्थिति में नई सुविधा का भी अतिरिक्त लाभ मिलेगा। यही नहीं, इस योजना से लाभ लेने के लिए किसी तरह की वेटिंग का सामना नहीं करना पड़ेगा। नहीं मिलेंगी यह सुविधाएं योजना में डेंटल ट्रीटमेंट और वैक्सीनेशन भी कवर नहीं है। योजना के तहत मरीज जनरल वार्ड में ही भर्ती हो सकते हैं। प्राइवेट व सेमी प्राइवेट वार्ड में भर्ती होने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। अस्पताल में भर्ती होने से पहले यह देखना भी जरूरी है कि क्या वो अस्पताल योजना से जुड़ा हुआ है या नहीं। कालोनियों में भी शिविर स्वास्थ्य विभाग वार्ड कार्यालयों के बाद कालोनियों में भी शिविर लगाने जा रहा है। कोई भी व्यक्ति अपनी कालोनी और आसपास के 70 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों की जानकारी सीएमएचओ कार्यालय में जमा कर इन शिविरों को लगवा सकते हैं। घर बैठे बनवाएं कार्ड घर बैठे ही अपना आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं। इसके लिए टोल फ्री नंबर 14555 व 1800 233 2085 संचालित है, जिसके जरिए मदद लेकर बुजुर्ग कार्ड बनवा सकते हैं। इस दौरान आधार और उससे अटैच मोबाइल नंबर साथ रखें। इसके अलावा आयुष्मान एप और आयुष्मान बीआईएस पोर्टल https://beneficiary.nha.gov.in का उपयोग कर कार्ड बनवा सकते हैं। बुजुर्गों के लिए जुड़ेंगी नई सुविधाएं आयुष्मान भारत योजना के सीईओ डॉ. योगेश भरसात ने कहा कि योजना के तहत रोजाना औसतन 6.5 करोड़ रुपए के चार हजार से अधिक मुफ्त उपचार किए जा रहे हैं। हर बुजुर्ग को जरूरी इलाज मिले, इसके लिए उनके आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। आयुष्मान योजना के तहत बुजुर्गों के लिए नई योजनाएं जोड़ी जाएंगी। इसको लेकर प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें हर प्रदेश से सुझाव मांगे गए हैं।

समाज सेवा के साथ बनाएं बेहतरीन करियर

अगर आप 9 से 5 का जॉब नही करके कुछ अलग करना चाहते है तो आपके लिए एनजीओ की फील्ड एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। आज एनजीओ की फील्ड समाज सेवा के साथ ही एक बेहतरीन करियर की ग्यारंटी भी देता है। अगर आपको लगता है कि समाज सेवा कोई फुल टाइम जॉब नही है तो आपको बता दें कि समय के साथ समाज सेवा एक उभरता हुआ करियर विकल्प बन गया है। आज सोशल वर्क का मतलब सिर्फ गरीबों और जरूरमंदों की मदद करना ही नही रह गया है बल्कि यह एक बेहतरीन करियर ऑप्शन के रूप में उभर कर हमारे सामने आया है। अगर आप एनजीओ की फील्ड में करियर बनाना चाहते है तो आज हम आपके लिए एनजीओ और समाज सेवा में करियर कैसे बनाएं से संबंधित जानकारी लेकर आए है। तो आइये जानते है कैसे बनाएं एनजीओ की फील्ड में करियर। ऐसे बनाएं एनजीओ की फील्ड में करियर… भारत में एनजीओ की संख्या : एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पूरे भारत में 33 लाख के आसपास एनजीओ विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे है। इस फील्ड में पैसों की कमी भी नही है कई फंडिंग एजेंसियों के जरिए हर साल एनजीओ सेक्टर में अरबों रूपये आते है। इसके अलावा दुनिया के सबसे बड़े दान दाताओं ने भी भारत में समाज सेवा के लिए हजारों करोड़ रूपये का डोनेशन दिया है। देश के सबसे बड़े आईटी कारोबारी अजीम प्रेमजी ने 9000 करोड़ रूपये समाज सेवा के लिए देने की बात कही है जो अब तक का दुनिया का सबसे बड़ा डोनेशन बताया गया है। अगर आपको लगता है कि इस सेक्टर में पैसों की कमी है तो ये आंकड़े आपको हैरान कर सकते है। सोशल वर्क से जुड़े कोर्स : आज एनजीओ के क्षेत्र में कई अवसरों के चलते सोशल वर्क के कई कोर्स करवाए जा रहे है। देश में ऐसे कई संस्थान और विश्वविद्यालय है जो एनजीओ प्रबंधन और सोशल वर्क से जुड़े डिग्री और डिप्लोमा कोर्स करवाते है। सोशल वर्क में बैचलर डिग्री, मास्टर्स डिग्री और डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध है। यहां मिलेगी नौकरी : एनजीओ की फील्ड में नौकरियों की कमी नही है। अगर आपने कहीं से एनजीओ या समाज से में प्रोफेशन कोर्स किया है तो आपको जॉब देने के लिए कई एनजीओ उपलब्ध है। एनजीओ की फील्ड में आपको एनजीओ मैनेजर, कम्युनिटी सर्विस प्रोवाइडर, एनजीओ प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, एनजीओ ह्यूमन रिसोर्स और फाइनेंस मैनेजर के रूप में काम मिल सकता है। कुछ सरकारी संस्थान भी समाज सेवा में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट को जॉब देते है जैसे- मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर, फिक्की, एसओएस विलेज, एफएआरएम, अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट और प्रयास आदि में आपको शुरूआती पैकेज पर आसानी से जॉब मिल सकता है। इसके अलावा मौजूदा समय में एड्स अवेयरनेस प्रोजेक्ट, ग्रामिण स्वास्थय कार्यक्रम, चाइल्ड एब्यूज प्रिवेंशन कमेटी स्ट्रीट चिल्ड्रन एजुकेशन, ड्रग रिहेबिलिटेशन सेंटर, सेक्स वर्कर फोरम जैसी फील्ड में जॉब के कई अवसर उपलब्ध है। इतनी मिलेगी सैलरी : एनजीओ और सोशल वर्क के क्षेत्र में सैलरी के अच्छे मौके है। एक अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ आपको बढ़िया सैलरी दे सकता है। इसके अलावा शुरूआती तौर पर आप 10 से 15 हजार रूपये महीना कमा सकते है। कुछ सालों का अनुभव होने के बाद आप एक लाख रूपये से ज्यादा की सैलरी पा सकते है। इसके अलावा एक सोशल वर्कर को रिसर्च, राइटिंग, फील्ड वर्क आदि से भी पैसे कमाने के मौके मिलते है।  

प्रदेश में सड़कों के व्यापक विस्तार और विकास को नया आयाम मिल रहा

भोपाल मध्यप्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास की अभूतपूर्व गति से राज्य एक नई दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की डबल इंजन सरकार से प्रदेश में सड़कों के व्यापक विस्तार और विकास को नया आयाम मिल रहा है। वृहद स्तर पर चल रही सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सड़कों और राजमार्गों का निर्माण ही नहीं, बल्कि राज्य के हर नागरिक के जीवन को सरल और समृद्ध बनाना है। केन्द्र द्वारा लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में स्थायी आधारभूत संरचना विकसित होगी। मध्यप्रदेश को इस वर्ष जनवरी माह में 10 हजार 405 करोड़ रुपये लागत की 24 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की ऐतिहासिक सौगात मिली। भोपाल और जबलपुर में आयोजित कार्यक्रमों में इन परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया गया। भोपाल में 8,038 करोड़ रुपये की लागत से 498 किलोमीटर लंबी 15 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास और जबलपुर में 2,367 करोड़ रुपये की लागत से 226 किलोमीटर लंबी 9 परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है। इन परियोजनाओं में एनएच-46 का छह-लेन विस्तार, एनएच-146बी का चार-लेन विस्तार और कई दो-लेन सड़क निर्माण कार्य शामिल हैं, जो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। नवीन स्वीकृत राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से न केवल प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र के कृषि व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कटनी के कोयला उद्योग, बुधनी के टेक्सटाइल और वुड क्राफ्ट उद्योगों को भी लाभ होगा। इसके साथ ही खजुराहो, ओरछा जैसे पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी आसान होगी और पेंच टाइगर कॉरिडोर तक पहुँचने में सहूलियत मिलेगी। मध्यप्रदेश के इन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ व्यावसायिक और नागरिक यातायात में भी सुगमता आएगी, जिससे प्रदेश के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में भी योगदान मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने 6-लेन आगरा-ग्वालियर राष्ट्रीय हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी। इसमें 4,613 करोड़ रुपये की लागत से 88 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड कॉरिडोर को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मोड पर विकसित किया जाएगा, जो आगरा और ग्वालियर के बीच यात्रा के समय को लगभग 50% तक कम कर देगा। यह परियोजना न केवल मौजूदा 4-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग की यातायात क्षमता को दोगुना करेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बीच कनेक्टिविटी को भी बढ़ाएगी, जिससे पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजना का लाभ मध्य प्रदेश को व्यापक स्तर पर मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मंजूर की गई इस परियोजना से प्रदेश में लॉजिस्टिक्स की दक्षता में सुधार, भीड़भाड़ में कमी और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। यह 6-लेन ग्रीनफील्ड हाई-वे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश को जोड़ते हुए, आगरा जिले के गांव देवरी से शुरू होकर ग्वालियर जिले के गांव सुसरा तक जाएगा। इस परियोजना में NH – 44 के मौजूदा आगरा-ग्वालियर खंड पर ओवरले और अन्य सड़क सुधार कार्य भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 50,655 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत से 936 किलोमीटर की लंबाई में फैली 8 राष्ट्रीय हाई-स्पीड रोड कॉरिडोर परियोजनाओं में यह कॉरिडोर भी शामिल है, जो देश के परिवहन ढांचे को सुदृढ़ और सक्षम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है। मध्यप्रदेश को सड़क विकास की दिशा में एक और बड़ी सौगात मिली है, जिसमें भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को 4-लेन में अपग्रेड करने के लिए 3589.4 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना में भोपाल से विदिशा, विदिशा से ग्यारसपुर, सताईघाट से चौका और चौका से कैमाहा तक के मार्ग को चौड़ा और सुदृढ़ किया जाएगा। इस परियोजना से यातायात सुगमता में सुधार होगा, यात्रा के समय में कमी आएगी, सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा। इससे अपग्रेडेशन से प्रदेश के आर्थिक विकास को गति और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मंडला से नैनपुर के बीच 46 किलोमीटर लंबे मार्ग को भी 592 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड करने की स्वीकृति भी दी गई है। इस परियोजना के पूरा होने से मंडला और नैनपुर के बीच यातायात अधिक सुरक्षित और कुशल बनेगा, जिससे स्थानीय जनता को सीधा लाभ पहुंचेगा। प्रदेश में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में यह परियोजनाएं एक महत्वपूर्ण कदम हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने अपने संकल्प पत्र के तहत बुंदेलखंड विकास पथ की घोषणा की थी, जो राज्य की राजधानी भोपाल को बुंदेलखंड के सागर और छतरपुर जिलों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण 4-लेन सड़क परियोजना है। इस परियोजना को केंद्र सरकार की भी स्वीकृति मिल गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा पहले से इस मार्ग को 4-लेन में विस्तारित करने का काम चल रहा था। अब भोपाल से सागर होते हुए छतरपुर और उत्तर प्रदेश बॉर्डर तक इसे 4-लेन में अपग्रेड किया जाएगा। इस परियोजना से बुंदेलखंड के क्षेत्रों में व्यापार और कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और मध्यप्रदेश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।  

स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने सरकार 50 ऐतिहासिक स्थलों को चिह्नित करेगा जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण साबित हो

भोपाल  देशी-विदेशी पर्यटकों को देश के हृदय मध्य प्रदेश में कुछ अनदेखा दिखाने की तैयारी हो रही है। मध्य प्रदेश पर्यटन मंडल ने 50 ऐसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थलों को चिह्नित किया है जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण साबित हो सकते हैं। इन स्थलों को अब विकसित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो अपारंपरिक पर्यटन स्थल विकसित किए जाने हैं, उनमें से अधिकतर प्रमुख पर्यटन स्थलों के आसपास ही हैं। हालांकि सुविधाओं की कमी और जानकारी नहीं होने के कारण पर्यटक उस ओर नहीं जाते। जिन नए स्थलों को चिह्नित किया गया है, उनमें खजुराहो के पास रनेह वाटरफाल, भोजपुर के पास आशापुरी मंदिर समूह, पचमढ़ी के पास तामिया और देवगढ़, गांधी सागर के पास चतुर्भुज नाला प्रमुख हैं। घरेलू पर्यटकों के बढ़ने की उम्मीद पर्यटकों को कुछ नया अनुभव देने के लिए प्रदेश के बड़े शहरों के आसपास भी ऐसे स्थलों का चयन किया गया है। भोपाल में खारीगांव, केकड़िया, जगदीशपुर, जबलपुर में मदन महल और नर्मदा के किनारे के स्थलों, ग्वालियर में मितावली- पड़ावली के मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर और दमोह में सिंग्रामपुर (रानी दुर्गावती व गोंड राजाओं का शासन केंद्र) में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जानी हैं। बता दें, मध्य प्रदेश में हर वर्ष ढाई से तीन करोड़ पर्यटक आते हैं। नया आकर्षण जुड़ जाने से घरेलू पर्यटकों के बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। ये स्थल भी किए जा रहे विकसित लांझी का किला- बालाघाट, सिंधिया की छतरियां- शिवपुरी, काला ताजमहल, असीरगढ़ का किला और बुरहानपुर का किला- बुरहानपुर, मितावली, पड़ावली, तेली का मंदिर, सहस्त्रबाहु मंदिर- ग्वालियर, ककनमठ मंदिर- मुरैना, पशुपतिनाथ व धर्मराजेश्वर मंदिर- मंदसौर, पातालकोट और तामिया (प्राकृतिक स्थल)- छिंदवाड़ा, सोनागिरी जैन मंदिर और दतिया का किला- दतिया, मोतीमहल- मंडला, मदन महल- जबलपुर, बहुति झरना, क्योटी जलप्रपात, भीमकुंड- रीवा, जटाशंकर, नजारा व्यू प्लाइंट, निदान कुंड और सद्भावना शिखर- दमोह। होम स्टे बनाए जा रहे हैं     50 अपारंपरिक पर्यटन स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड अपनी गतिविधियां चला रहा है। महिला पर्यटकों की सुरक्षा के लिए स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ग्रामीण होम स्टे बनाए जा रहे हैं। हेरिटेज वाक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। जल्द ही ये स्थल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की श्रेणी में आ जाएंगे। – बिदिशा मुखर्जी, अतिरिक्त प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड  

प्रदेश में अगली आरआईसी आगामी 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम में हो रही : मुख्यमंत्री यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के संतुलित विकास के लिये निरंतर सभी अंचलों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन कर रहे हैं। अगली आरआईसी आगामी 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम में हो रही है। नर्मदापुरम् क्षेत्र में मुख्य रूप से कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्र-संस्करण इकाइयां और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग बहुतायत में हैं। नर्मदापुरम्, हरदा, और होशंगाबाद में पहले से स्थापित उद्योगों के साथ-साथ कृषि प्र-संस्करण, सोयाबीन तेल, मसाला उत्पादन और दुग्ध प्र-संस्करण जैसे उद्योग यहाँ की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य आधार हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र की खनिज संपदा का उपयोग कर निर्माण और अन्य उद्योगों से भी स्थानीय विकास को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। छठवीं आईआईसी का आयोजन 7 दिसंबर 2024 को नर्मदापुरम् के डिवीजनल आईटीआई में किया जाएगा। पिछली पांच रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के अनुभवों से प्रेरित होकर, इस कॉन्क्लेव का नर्मदापुरम् क्षेत्र में आयोजन उद्योगों की वृद्धि, निवेश की संभावनाओं और रोजगार सृजन के अवसरों को बढ़ाने के लिये किया जा रहा है। नर्मदापुरम आरआईसी में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, खनिज, MSME और पर्यटन क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से प्रदेश में एक उद्योग-हितैषी वातावरण बना है, जिससे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रगति हो रही है। नर्मदापुरम् और इसके आसपास के क्षेत्र जैसे होशंगाबाद, हरदा में एमएसएमई, कृषि आधारित उद्योग, और पर्यटन के क्षेत्र में कई संभावनाएं हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य सभी क्षेत्रों का संतुलित और समन्वित आर्थिक विकास करना है। इस कॉन्क्लेव से नर्मदापुरम् और इसके आस-पास के क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे जिससे रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह आरआईसी नर्मदापुरम् और आसपास के क्षेत्रों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक धरोहर को उद्योगों के साथ जोड़ा जाएगा। पचमढ़ी, जो न केवल एक प्रमुख पर्यटन स्थल है बल्कि यहाँ की अनूठी जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन, अब निवेशकों के लिये नया आकर्षण बनेंगा। साथ ही नर्मदा नदी तट पर औद्योगिक और पर्यटन दोनों क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएँ हैं। इस कॉन्क्लेव में कृषि, MSME, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और खनिज जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। नर्मदापुरम् और पचमढ़ी, जो पहले से ही प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध हैं, अब औद्योगिक दृष्टिकोण से भी नई ऊँचाइयों को छुएंगे। इस कॉन्क्लेव से औद्योगिक, पर्यटन और सामाजिक विकास के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संतुलन स्थापित होगा।  

महिला होने से पुलिस नहीं करती थी संदेह, लेकिन UP और NCR के गैंगस्टरर्स तक पिस्टल पहुंचाती थी पिंकी

बुरहानपुर पाचोरी के सिकलीगरों द्वारा बनाई गई चार देसी पिस्टलों की तस्करी करते गिरफ्तार की गई उत्तर प्रदेश के शाहगंज की पिंकी को लेकर नई जानकारी सामने आई है। पुलिस को जांच में पता चला है कि वह यूपी के आगरा सहित कई शहरों की गुंडा गैंग तक ये पिस्टल पहुंचाती थी। इससे पहले भी वह दो से तीन बार पाचोरी से पिस्टलों की खेप ले जा चुकी है। पुलिस नहीं करती थी संदेह महिला होने के कारण उस पर पुलिस और मुखबिर संदेह नहीं करते थे। अपराधियों तक हथियार पहुंचाने के बदले उसे मोटी रकम मिलती थी। खकनार थाना पुलिस अब भी उसके सोशल मीडिया अकाउंट और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है। फिलहाल पिंकी खंडवा जेल में बंद है, लेकिन जांच में मिल रही नई जानकारियों की पुष्टि के लिए पुलिस जल्द उसे रिमांड पर ले सकती है। खकनार थाना प्रभारी अभिषेक जाधव ने गुंडा गैंग से उसका कनेक्शन होने की बात स्वीकार की है, लेकिन प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मिले तथ्यों को साझा नहीं किया है। चार दिन पूर्व हुई थी गिरफ्तारी खकनार थाना पुलिस ने नौ नवंबर की शाम मुखबिर की सूचना पर 45 वर्षीय तस्कर पिंकी बाई को नायर फाटे के पास से गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार वर्तमान में पिंकी ने आगरा शहर को अपना ठिकाना बना रखा था। बुरहानपुर से हथियार लेकर वह सीधे आगरा जाती थी। वहां से अन्य शहरों में हथियार पहुंचाती थी। इसके अलावा उसका मप्र के ग्वालियर शहर से भी कनेक्शन सामने आया है। पाचोरी की पिस्टलों की मांग अवैध रूप से पिस्टल बनाने और बेचने का गोरखधंधा यूं तो निमाड़ के बड़वानी, खंडवा, खरगोन सहित अन्य कई जिलों में चल रहा है, लेकिन अपराधियों के बीच बुरहानपुर के पाचोरी में बनी पिस्टलों की मांग सबसे ज्यादा है। इसका कारण यहां बनाई जाने वाली पिस्टलों की गुणवत्ता है। गोली चलाने पर इन पिस्टलों की न तो नाल फटती है और न ये गर्म होती हैं। देखने में ये ब्रांडेड जैसी नजर आती हैं।

54 लाख टन से अधिक मसालों के उत्पादन के साथ मध्य प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया

भोपाल मध्यप्रदेश के किसानों ने मसाला फसलों के उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 2023-24 में रिकॉर्ड 54 लाख टन से अधिक मसालों के उत्पादन के साथ प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इस उपलब्धि पर प्रदेश के किसानों को बधाई दी है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय किसानों की मेहनत और लगन को दिया गया है। कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय प्रदेश के किसानों ने पिछले 4 सालों में 2 लाख 16 हजार मिट्रिक टन मसाला फसलों के उत्पादन में वृद्धि की है। मिर्च के उत्पादन में दूसरा स्थान मिला है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि किसानों के लिए यह आवश्यक है कि वे पारंपरिक कृषि फसलों के साथ-साथ कैश क्रॉप्स जैसे धनिया, हल्दी, मिर्च, अदरक, लहसुन और जीरा भी उगाएं। इन मसाला फसलों का उत्पादन अल्प समय में किया जा सकता है और बाजार में अच्छे दाम भी मिलते हैं। यह फसलें किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती हैं। फ्लोरीकल्चर और फलोद्यान अपनाने की सलाह मंत्री ने किसानों को मसाला फसलों के साथ-साथ फलोद्यान और फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) को भी अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भी किसानों को राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनुदान और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। इसके अलावा, शासकीय नर्सरियों से उत्तम गुणवत्ता के बीज और पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। फसलों के संरक्षण के लिए योजनाएं कुशवाह ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी किसानों को मदद देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और भंडारण सुविधाओं के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई गई हैं। इन योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे फसलों के संरक्षण और भंडारण में सक्षम हो सकें।

प्रदेश के 22 जिलों के 200 छात्रावास एवं स्कूलों की मरम्मत एवं रेन वॉटर रूफिंग के लिये प्रस्ताव

भोपाल   जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा है कि देश के सभी जनजातीय बहुल गांवों के समग्र विकास के लिये केन्द्र एवं राज्य सरकार प्रतिबद्ध प्रयास कर रही है। जनजातियों के विकास के लिये केन्द्र सरकार द्वारा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 5 वर्ष की अवधि के लिये है, जो वित्त वर्ष 2024-25 से वित्त वर्ष 2028-29 तक क्रियान्वित होगा। इसमें केन्द्र सरकार के 18 मंत्रालयों/विभागों की 25 प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाओं/सेवाओं/सुविधाओं का चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वयन कर जनजातियों को सहज लाभ दिलाया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान में प्रदेश के 51 जिलों के 267 विकासखंडों में स्थित 11 हजार 377 जनजातीय बहुल गांवों का सर्वांगीण विकास किया जायेगा। इस अभियान से इन 51 जिलों में 43 जनजातीय समुदायों के 18 लाख 58 हजार 795 परिवार निवास करते हैं, जिनकी कुल 93 लाख 23 हजार 125 लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि अभियान में केन्द्र सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में स्थापित शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थाओं जैसे छात्रावास, आश्रम शालाएं एवं आदर्श विद्यालय, जेएसएस आदि के उन्नयन, विस्तार के साथ इन संस्थानों छत पर सोलर सिस्टम और रेन वॉटर रूफिंग आदि की स्थापना के लिये प्रस्ताव मांगे गये हैं। देशभर की कई संस्थाओं में इस प्रकार के विकास कार्य किये जाने हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने इस दिशा में तेजी से कार्यवाही कर केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव को वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 22 जिलों में इस प्रकार के कार्यों के लिये अधिकृत प्रस्ताव भेज दिया है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में राज्य सरकार की ओर से केन्द्र सरकार को बालाघाट, छिंदवाड़ा, सतना, सीधी, हरदा, उज्जैन, धार, रायसेन, नर्मदापुरम, शहडोल, दतिया, इंदौर, सिवनी, रतलाम, उमरिया, बड़वानी, राजगढ़, मंडला, खरगौन, बैतूल, पन्ना एवं गुना जिले में स्थित कुल 200 छात्रावासों एवं स्कूलों की मरम्मत तथा इनमें रेन वॉटर रूफिंग की स्थापना के लिये 388 करोड़ 56 लाख रूपये के विकास कार्य प्रस्ताव भेज दिये गये हैं। प्रस्ताव अनुसार बालाघाट जिले की 12 शिक्षण संस्थाओं, छिंदवाड़ा में 21, सतना में 2, सीधी में 3, हरदा में 4, उज्जैन में 2, धार में 21, रायसेन में 3, नर्मदापुरम में 4, शहडोल में 9, दतिया में 1, इंदौर में 5, सिवनी में 14, रतलाम 12, उमरिया में 8, बड़वानी में 15, राजगढ़ में 1, मंडला में 23, खरगौन में 12, बैतूल में 23 एवं पन्ना और गुना में 1-1 छात्रावास में यह विकास कार्य कराये जायेंगे। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि इसके अलावा छात्रावास अधीक्षको के आवासों में भी सभी सिविल, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिक एवं मल-जल निस्तार व्यवस्था संबंधी जरूरी कार्य कराये जायेंगे।  

पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा से जच्चा-बच्चा का जीवन हुआ संरक्षित

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सरकार हर नागरिक को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। चिकित्सा अधोसंरचना और चिकित्सकीय उन्नत तकनीक की व्यवस्था के साथ मैन पॉवर उपलब्धता के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा’ आपातकाल में नागरिकों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण पहल है। आपात स्थिति में समय से उचित चिकित्सकीय सेवा की उपलब्धता से कई जिंदगियों का बचाव किया जा रहा है। छतरपुर के ग्राम खेरो की निवासी गर्भवती महिला श्रीमती रानी पटेरिया (पत्नी श्री उमेश पटेरिया) को पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सुविधा से आपात स्थिति में उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर जच्चा- बच्चा का जीवन सुरक्षित किया गया। उल्लेखनीय है कि श्रीमती रानी पटेरिया को रविवार 10 नवंबर को जिला अस्पताल छतरपुर में भर्ती किया गया। महिला की स्थिति “फुल टर्म प्रेगनेंसी विद प्रिवियस एल एस सी एस” के कारण हाई रिस्क श्रेणी में थी। डॉ. निधी खरे द्वारा सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, लेकिन ऑपरेशन के पश्चात महिला को पोस्ट पार्टम ब्लीडिंग की समस्या उत्पन्न हो गई। स्त्री रोग विशेषज्ञ ने ब्लीडिंग रोकने के लिए आवश्यक उपचार किया तथा हिसटेक्टोमी की गई। महिला को 4 यूनिट ब्लड का ट्रांसफ्यूजन किया गया और उसे निरंतर ऑब्जर्वेशन में रखा गया। निःशुल्क मिली सुविधा ऑब्जर्वेशन के दौरान महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ ने सीएमएचओ डॉ. आर.पी. गुप्ता से विचार-विमर्श किया। जिला अस्पताल की टीम, सिविल सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और सीएमएचओ द्वारा महिला को हायर सेंटर रेफर करने का निर्णय लिया गया। चूंकि महिला आयुष्मान कार्ड धारक थी, अतः उसे आयुष्मान योजना के अंतर्गत चिरायू हॉस्पिटल, भोपाल में रेफर किया गया। चिरायू हॉस्पिटल में बेड उपलब्धता की पुष्टि के पश्चात, kelsa.io पर एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था हेतु अनुरोध किया गया। सीएमएचओ और सिविल सर्जन की देखरेख में महिला को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से खजुराहो एयरपोर्ट लाया गया और एयर एम्बुलेंस से भोपाल भेजा गया। भोपाल एयरपोर्ट पर महिला को 108 एम्बुलेंस द्वारा चिरायू हॉस्पिटल पहुँचाया गया, जहाँ शाम 7:30 बजे महिला को भर्ती कर लिया गया। वर्तमान में, चिरायू हॉस्पिटल में महिला की स्थिति स्थिर और सामान्य है। पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा से प्रदेश में कहीं भी चिकित्सा आपात स्थिति उत्पन्न होने या चिन्हित विशेष प्रकार की चिकित्सा सुविधा या चिकित्सा विशेषज्ञों की आवश्यकता निर्मित होने पर कठिन भौगोलिक परिस्थिति में प्रदेशए के दूरस्थ अंचलों तक पहुंचकर उन्नत आपातकालीन चिकित्सा द्वारा मरीजों की को स्थिर कर उच्च चिकित्सा केन्द्रों तक एयर लिफ्ट किये जाने की सेवा प्रदाय की जाती है। पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा सड़कों एवं औद्योगिक स्थलों में होने वाले हादसों, प्राकृतिक आपदा में गंभीर पीड़ित घायल व्यक्ति को त्वरित उपचार के लिये हवाई परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। हृदय सम्बंधित अथवा अन्य विभिन्न गंभीर बीमारियों जिसमें रोगी/पीड़ित को तत्काल इलाज की आवश्यकता होने की स्थिति में मरीजों को अच्छे एवं उच्चतम चिकित्सा संस्थानों में त्वरित उपचार के लिये हवाई परिवहन सुविधा प्रदाय की जाती है। सड़क एवं औद्योगिक दुर्घटना अथवा प्राकृतिक आपदा में पीड़ित को राज्य के अंदर एवं बाहर शासकीय अथवा निजी चिकित्सालय में निशुल्क परिवहन किया जाता है। आयुष्मान कार्डधारी के उपचार के लिये राज्य के अंदर एवं राज्य के बाहर सभी शासकीय एवं आयुष्मान सम्बद्ध अस्पतालों में उपचार हेतु निशुल्क परिवहन की व्यवस्था है। अन्य हितग्राही जो कि आयुष्मान कार्डधारी नहीं हैं, उनके उपचार के लिए राज्य के अंदर स्थित शासकीय अस्पतालों में निःशुल्क परिवहन जबकि राज्य के बाहर के किसी भी अस्पताल में अनुबंधित दर पर सशुल्क परिवहन सेवा उपलब्ध है।

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