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शिमला में भारी वर्षा हुई और लगा कि बादल फट गया, मची तबाही, घरों में घुसा बारिश का पानी, एक व्यक्ति की मौत

शिमला प्रदेश के जिला चंबा के भटियात में बादल फटने से एक व्यक्ति की मौत हुई है। इसके कारण भूस्खलन हुआ है। जबकि शिमला और ऊपरी शिमला में भारी ओलावृष्टि के कारण बहुत अधिक नुकसान हुआ है। शिमला में दोपहर बाद पौने घंटे तक बहुत भारी वर्षा हुई और लगा कि बादल फट गया। इसके कारण राजधानी के साथ सटे भराड़ी के साथ भौंट सड़क में खड़ की तरह पानी आया गया। नाले उफान पर आ गए और कई घरों में पानी के घुसने की सूचना है। शिमला जिला के कुमारसैन, कोटगढ और अन्य क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि के कारण सेब और सब्जियों के बहुत अधिक नुकसान हुआ है। आंधी और बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार 5 मई को प्रदेश में कुछ एक स्थानों पर आंधी के चलने और एक दो स्थानों पर वर्षा का अनुमान है। जबकि 6 व 7 मई को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी व शिमला में 50 किलोमीटर की रफ्तार से आंधी चलने और वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में बीते तीन दिनों से भारी ओलावृष्टि और वर्षा का क्रम जारी है। इसके कारण प्रदेश में शिमला, सोलन, सिमौर, मंडी चंबा में बहुत अधिक नुकसान हुआ है। बीते 24 घंटे में इतनी हुई बारिश प्रदेश में बीते चौबीस घंटों के दौरान नेरी में 44.5, जोत में 37, नगरोटा सूरयां में 36 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। वर्षा व ओलावृष्टि के कारण प्रदेश में दो से आठ डिग्री तक तापमान में अंतर आया है। अधिकतम तापमान में सबसे अधिक गिरावट सोलन में 8.5 डिग्री की गिरावट आई है। बाकी स्थनां पर एक से दो डिग्री की गिरावट। जबकि डलहौजी में 7.5, मनाली में 6.2 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई है।

अमेरिका का नया शहर बना, एलन मस्क की रॉकेट कंपनी ‘स्पेसएक्स’ स्थित है और इसे ‘स्टारबेस’ नाम दिया गया है

वाशिंगटन अमेरिका के टेक्सास में उस जगह को एक शहर घोषित किया गया है जहां उद्योगपति एलन मस्क की रॉकेट कंपनी ‘स्पेसएक्स’ स्थित है और इसे ‘स्टारबेस’ नाम दिया गया है। ‘स्टारबेस’ को औपचारिक रूप से शहर घोषित करने के लिए वहां रहने वाले लोगों के एक छोटे समूह के बीच मतदान कराया गया जिसमें इस प्रस्ताव को एकतरफा मंजूरी मिल गई। यहां रहने वालों में ज्यादातर लोग मस्क की कंपनी के कर्मचारी हैं। कैमरून काउंटी निर्वाचन विभाग द्वारा ऑनलाइन जारी परिणामों के अनुसार, इस प्रस्ताव के पक्ष में 212 वोट पड़े जबकि इसके खिलाफ छह वोट पड़े। मस्क ने अपने सोशल मंच ‘एक्स’ पर खुशी जाहिर करते हुए एक पोस्ट में कहा कि यह ‘‘अब वास्तव में एक शहर बन गया है।” स्टारबेस ‘स्पेसएक्स’ रॉकेट कार्यक्रम का प्रक्षेपण स्थल है। इस कार्यक्रम के लिए अमेरिकी रक्षा विभाग और ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (नासा) ने स्पेसएक्स के साथ करार किया है। इस कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर तथा बाद में मंगल ग्रह पर भेजने का लक्ष्य है। मस्क ने सबसे पहले 2021 में ‘स्टारबेस’ का विचार रखा था और नए शहर को मंजूरी मिलना लगभग माना जा रहा था। माना जाता है कि इलाके के 283 पात्र मतदाताओं में से ज्यादातर ‘स्टारबेस’ के कर्मचारी हैं। मेक्सिको सीमा के पास टेक्सास के दक्षिण में स्थित यह शहर केवल 3.9 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

पाकिस्तान की कायराना हरकत है और देश कभी नहीं भूलेगा, देश तपस्या करना भी जानता है और तलवार चलाना भी: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली भारत मंडपम में आयोजित संस्कृति जागरण महोत्सव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पाकिस्तान की कायराना हरकत है और देश इस हमले को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने कहा, “जैसा देश चाहता है, वैसा ही जवाब दिया जाएगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में जोखिम उठाने की क्षमता है और वे जानते हैं कि कब और कैसे निर्णय लेना है।” गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के वीर जवानों पर हमले का बदला लेने की बात कही थी। अब रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी इस बात की पुष्टि करती है कि भारत जल्द ही बड़ा कदम उठाने जा रहा है। संत देश की संस्कृति को बचाने के लिए कर रहे महान काम: राजनाथ कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने देश की सांस्कृतिक विरासत और सनातन धर्म की महत्ता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि संत सुधांशु जी महाराज जैसे तपस्वी संत इस देश की संस्कृति को संरक्षित करने का महान कार्य कर रहे हैं। उन्होंने समाज को जीने की सही प्रेरणा दी है, जो आज के तनावपूर्ण युग में अत्यंत आवश्यक है। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीकी युग में भी सत्संग और पूजा-पाठ की ओर आकर्षित हो रही है, जो अत्यंत सकारात्मक संकेत है। उन्होंने साधु-संतों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “जिस प्रकार सैनिक राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार साधु-संत संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करते हैं।” देश तपस्या करना भी जानता है और तलवार चलाना भी: राजनाथ उन्होंने भारत को वीरों की भूमि बताते हुए कहा, “यह देश तपस्या करना भी जानता है और आवश्यकता पड़ने पर तलवार चलाना भी। हमारे साधु-संतों ने समय-समय पर योद्धाओं की तरह देश और धर्म की रक्षा की है।”

पाक पीएम शहबाज और उनके मंत्री दुनियाभर के देशों से बात करके भारत के साथ तनाव कम करने की गुहार लगा रहे

इस्लामाबाद पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। भारत ने पाकिस्तानी आतंकवादियों पर हमले का आरोप लगाया है और इसके जिम्मेदारों को सजा देने की कसम खाई है। भारत की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान में घबराहट का माहौल है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज और उनके मंत्री दुनियाभर के देशों से बात करके भारत के साथ तनाव कम करने की गुहार लगा रहे हैं। आशंका है कि दोनों देशों के बीच ताजा संकट सैन्य संघर्ष में बदल सकता है। युद्ध की आशंका के बीच पाकिस्तानी नेतृत्व की अपने ही देश में आलोचना होने लगी है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट डॉ बकर हसनैन ने एक लेख में पाकिस्तानी सरकार को कट्टरता में अंधा होने का आरोप लगाया है, जो देश को युद्ध की तरफ धकेल रही है। उन्होंने पाकिस्तान को इतिहास की याद दिलाई और कहा कि उसे इतिहास से सबक लेना चाहिए। पाकिस्तान पहले भी कश्मीर को लेकर कोशिश कर चुका है और हर बार विफल रहा है। हसनैन ने कहा कि ‘हम ऑपरेशन जिब्राल्टर (1965) को कैसे भूल सकते हैं, जो जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी मुसलमानों के विद्रोह को भड़काने में विफल रहा?’     पूर्वी पाकिस्तान की दिलाई याद हसनैन ने पाकिस्तान को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बंगालियों पर अत्याचार को भी याद दिलाया। उन्होंने कहा, ‘हम ऑपरेशन सर्चलाइट (1971) को कैसे भूल सकते हैं जिसका उद्देश्य बंगाली विरोध को रोकना और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के सभी प्रमुख शहरों पर नियंत्रण करना था? हम ऑपरेशन साइक्लोन (1979) को कैसे भूल सकते हैं जब अमेरिका (और अन्य) ने पाकिस्तान के माध्यम से अफगान मुजाहिदीन को हथियार और वित्त प्रदान किया था?’   हसनैन ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के लिए प्रॉक्सी की तरह काम करने लगा और हेरोइन स्मग्लिंग, एके-47, धार्मिक उग्रवाद और आतंकवादी संगठनों के लिए प्रजनन स्थल बन गया। भारत की मोदी सरकार को हिंदुत्व को लेकर आलोचना पर पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने शहबाज को आइना दिखाया और कहा कि पाकिस्तान में भी अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने का हमारा रिकॉर्ड निराशाजनक रहा है।   भारत-पाकिस्तान युद्ध में कौन जीतेगा? हसैन ने आगे सवाल किया आज भारत और पाकिस्तान युद्ध के कगार पर खड़े हैं, लेकिन इसे कौन जीतेगा? पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी दी है। उन्होंने रटगर्स यूनिवर्सिटी के 2019 के एक अध्ययन का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि ‘अगर दोनों देश परमाणु संघर्ष में शामिल होते हैं तो 10 करोड़ लोग तुरंत मर सकते हैं। इससे भी अधिक लोग भुखमरी से मर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध विजेता हमेशा केवर हथियार उद्योग से जुड़े लोग होते हैं, जो युद्ध सामग्री, ड्रोन, मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, विमान वाहक और अन्य प्रणालियों की बिक्री से लाभ कमाते हैं।  

भारतीय सेना ने अपनी ताकत में बड़ा इजाफा किया, मिला आधुनिक हथियार ‘Igla-S’ एयर डिफेंस सिस्टम

नई दिल्ली हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर से चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में भारतीय सेना ने अपनी ताकत में बड़ा इजाफा किया है। अब सेना के पास एक ऐसा आधुनिक हथियार आ गया है जो दुश्मन के ड्रोन और फाइटर जेट को उड़ान भरते ही हवा में मार गिराने की क्षमता रखता है। इसका नाम है Igla-S एयर डिफेंस सिस्टम। भारतीय सेना को रूस से उन्नत इग्ला-एस (Igla-S) मिसाइल मिल गई है। यह मिसाइल एक पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम है जिसे सैनिक अपने कंधे पर रखकर चला सकते हैं। यानी यह एक मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) है। इग्ला-एस को खासतौर पर कम ऊंचाई पर उड़ रहे लक्ष्यों जैसे ड्रोन, फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और क्रूज मिसाइल को गिराने के लिए तैयार किया गया है। क्यों खास है इग्ला-एस? जानिए इसकी ताकत     रेंज: नई इग्ला-एस की मारक क्षमता करीब 6 किलोमीटर है, जबकि पहले वाली इग्ला सिर्फ 3-4 किलोमीटर तक ही असरदार थी।     सटीकता: यह सिस्टम ‘लॉक-ऑन’ तकनीक पर आधारित है, यानी लक्ष्य को ट्रैक कर सीधे उस पर वार करता है।     आखिरी रक्षा पंक्ति: अगर यह मिसाइल भी निशाना चूक जाए तो दुश्मन का हमला तय है। इसलिए इसे ‘लास्ट लाइन ऑफ डिफेंस’ माना जाता है।     फुर्तीला और हल्का: सैनिक इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं, जिससे सीमावर्ती इलाकों में तुरंत तैनाती संभव हो जाती है। ड्रोन और हवाई खतरे से निपटने में मिलेगा फायदा आज के युद्ध में सबसे बड़ा खतरा है — ड्रोन हमला और सीमावर्ती हवाई निगरानी। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश अक्सर भारतीय सीमाओं के पास निगरानी ड्रोन भेजते रहे हैं। इग्ला-एस की तैनाती से अब ऐसे खतरों का जवाब कुछ ही सेकंड में दिया जा सकता है। यह सिस्टम दुश्मन के छोटे से छोटे ड्रोन को भी ट्रैक करके तबाह कर सकता है। चीन-पाकिस्तान को झटका, बढ़ा भारत का रणनीतिक दबाव पश्चिमी (पाकिस्तान) और उत्तरी (चीन) सीमाओं पर भारत को लगातार खतरे का सामना करना पड़ता है। ऐसे में Igla-S सिस्टम की तैनाती से इन दोनों मोर्चों पर भारतीय सेना की शक्ति बढ़ गई है।     पाकिस्तान की ओर से अगर कोई ड्रोन या फाइटर जेट सीमा पार करता है, तो Igla-S उसे तुरंत गिरा सकता है। चीन की तरफ से की जाने वाली निगरानी गतिविधियों का भी अब तगड़ा जवाब मिलेगा। भारत में ही बनेगा इग्ला-एस, मेक इन इंडिया को बढ़ावा रूस की Rosoboronexport कंपनी अब भारत की एक निजी रक्षा कंपनी के साथ मिलकर Igla-S का निर्माण भारत में ही करेगी। इससे देश को दो बड़े फायदे मिलेंगे: विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा डिफेंस इन डेप्थ रणनीति को मिलेगा बल इग्ला-एस की तैनाती से भारत अब ‘डिफेंस इन डेप्थ’ यानी परतदार सुरक्षा रणनीति को और बेहतर तरीके से लागू कर सकेगा। इसका मतलब है कि हमले की स्थिति में एक के बाद एक कई परतों में सुरक्षा मौजूद होगी, जिससे दुश्मन का वार बेअसर हो जाएगा।  

बॉर्डर पर तनाव के बीच ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में छुट्टियां रद्द, चंद्रपुर और जबलपुर की फैक्ट्रियों में सबसे पहले लागू हुआ आदेश

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव के चलते देश की ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में अलर्ट का माहौल है। हालात को देखते हुए सरकार ने देश की प्रमुख ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में सभी कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। सभी कर्मचारियों को बिना देरी ड्यूटी पर लौटने का आदेश दिया गया है। आदेश के मुताबिक, कोई भी कर्मचारी छुट्टी पर नहीं रहेगा और सिर्फ आपात स्थिति में ही अवकाश की अनुमति दी जाएगी। चंद्रपुर और जबलपुर की फैक्ट्रियों में सबसे पहले लागू हुआ आदेश यह आदेश महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री चंदा और मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया (OFK) में सबसे पहले लागू किया गया है। दोनों फैक्ट्रियां म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL) के अंतर्गत आती हैं और रक्षा उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं। इन फैक्ट्रियों में गोला-बारूद, तोप के गोले, बम और रक्षा से जुड़ी कई सामग्रियों का उत्पादन होता है। MIL के चेयरमैन के निर्देश पर जारी हुआ सर्कुलर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री चंदा द्वारा जारी किए गए सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय MIL के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के निर्देशों पर लिया गया है। इसमें सभी प्रकार की छुट्टियों को रद्द करते हुए, हर कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी पर लौटने का सख्त निर्देश दिया गया है। आदेश में यह भी जोड़ा गया है कि ड्यूटी से अनुपस्थिति को अनुशासनहीनता माना जाएगा। जबलपुर OFK में भी शुक्रवार को रद्द हुईं छुट्टियां मध्यप्रदेश की खमरिया फैक्ट्री (OFK) में शुक्रवार को कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियां रद्द की गईं। इस संबंध में OFK के जनसंपर्क अधिकारी अविनाश शंकर ने जानकारी देते हुए बताया कि “इस वित्तीय वर्ष में हमारा उत्पादन लक्ष्य काफी बड़ा है, लेकिन अप्रैल महीने में हम उस स्तर तक नहीं पहुंच पाए। इसलिए मुख्यालय से निर्देश मिले हैं कि सभी छुट्टियां रद्द कर दी जाएं ताकि लक्ष्य की पूर्ति के लिए कार्यबल उपलब्ध रहे।” 4,000 से ज्यादा कर्मचारी कर रहे काम खमरिया स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड की सबसे बड़ी इकाइयों में से एक है जहां लगभग 4,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां रक्षा बलों के लिए गोला-बारूद, मिसाइल और तोप के गोले बनाए जाते हैं। तनाव के इस दौर में उत्पादन की गति बनाए रखना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है ताकि यदि जरूरत पड़ी तो देश को किसी प्रकार की आपूर्ति की समस्या न हो। राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारी में जुटा देश विशेषज्ञ मानते हैं कि सीमा पर हालात भले नियंत्रण में हों लेकिन किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारी पहले से जरूरी होती है। रक्षा उत्पादों की समय पर आपूर्ति और स्टॉक बनाए रखने के लिए कर्मचारियों की लगातार मौजूदगी जरूरी मानी जा रही है। छुट्टी अब सिर्फ आपातकाल में मिलेगी जारी आदेश में यह साफ कर दिया गया है कि छुट्टियों की अनुमति सिर्फ उन्हीं मामलों में दी जाएगी जो अत्यंत आवश्यक और आपातकालीन हों। सभी कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए निष्ठा से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले का उद्देश्य न सिर्फ रक्षा तैयारियों को बढ़ावा देना है बल्कि उत्पादन लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना भी है।  

आज जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामबन जिले में सैन्य वाहन गहरी खाई में गिरा, 3 सैन्यकर्मियों की मौत

जम्मू जम्मू एवं कश्मीर के रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार को एक सड़क दुर्घटना में तीन जवानों की मौत हो गई। सैन्य वाहन गहरी खाई में गिर गया। एक अधिकारी ने बताया, “आज जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामबन जिले में बैटरी चश्मा के पास चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया और वाहन खाई में गिर गया। तीन सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई। बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिया गया।” पुलिस ने घटना की प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पिछले पखवाड़े से जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग रामसू-रामबन खंड में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के कारण बंद रहा है। कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण सड़क बह गई है। राजमार्ग की मरम्मत कर यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी 40 किलोमीटर से अधिक लंबा रामबन-रामशू खंड लगभग 300 किलोमीटर लंबे महत्वपूर्ण राजमार्ग की कमजोर कड़ी बना हुआ है। भूमि से घिरी घाटी के लिए सेना और सभी नागरिक आपूर्ति इसी राजमार्ग से होकर गुजरती है। इस रणनीतिक राजमार्ग के अस्थायी रूप से बंद होने से घाटी में पेट्रोलियम उत्पादों, खाद्य पदार्थों आदि सहित आवश्यक वस्तुओं की कमी हो जाती है। इस दुखद घटना ने दिसंबर 2024 के पुंछ हादसे की याद दिला दी है। जम्मू कश्मीर के पुंछ में दिसंबर 2024 में मेंढर सब डिविजन के बलनोई क्षेत्र में भारतीय सेना का वाहन गहरी खाई में गिर गया था। तब 5 जवानों की मौत हो गई थी और 5 गंभीर रूप से घायल हुए थे। सेना का वाहन तब 300 फीट की गहरी खाई में गिर गया था।

दिल्ली से तेल अवीव जा रही थी एयर इंडिया की फ्लाइट, तेल अवीव एयरपोर्ट के पास हुआ मिसाइल अटैक, किया डायवर्ट

नई दिल्ली इजरायल के तेल अवीव एयरपोर्ट के पास हुए मिसाइल हमले के बाद एयर इंडिया के विमान को अबू धाबी के लिए डायवर्ट कर दिया गया। यह फ्लाइट राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से तेल अवीव जा रही थी। एयरपोर्ट के नजदीक रविवार को मिसाइल से घातक हमला किया गया। सूत्रों की मानें तो यह हमला एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या एआई139 के तेल अवीव में उतरने से एक घंटे से भी कम समय पहले हुआ। सूत्रों ने बताया कि फ्लाइट को वापस दिल्ली लाया जाएगा। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24.com पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फ्लाइट जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में थी, जब उसे अबू धाबी की ओर डायवर्ट करने का फैसला लिया गया। एयर इंडिया की तेल अवीव से दिल्ली की उड़ान रविवार को रद्द कर दी गई है। हालांकि, अभी तक इस मामले में एयर इंडिया का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। रविवार को यमन में ईरान समर्थित विद्रोहियों द्वारा दागी गई मिसाइल ने कुछ समय के लिए इजरायल के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानें और यात्री यातायात रोक दिया। हमले से धुएं का गुबार उठा और यात्रियों में दहशत फैल गई। हाउथी विद्रोही गाजा में युद्ध के दौरान फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता में इजरायल पर हमला कर रहे हैं। बेन-गुरियन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हमला शीर्ष इजरायली कैबिनेट मंत्रियों द्वारा गाजा पट्टी में देश के सैन्य अभियानों को तेज करने के बारे में मतदान करने से कुछ घंटे पहले हुआ। अधिकारियों ने कहा कि इस बीच सेना ने गाजा में व्यापक अभियान के लिए हजारों रिजर्व को बुलाना शुरू कर दिया। मिसाइल हमले के बाद इजरायल के कई हिस्सों में हवाई हमले के सायरन बजाए गए। इजरायली मीडिया द्वारा साझा किए गए फुटेज के अनुसार, हवाई अड्डे पर धुएं का गुबार दिखाई दिया। यात्रियों को चिल्लाते और छिपने के लिए भागते हुए सुना गया। हमले की वजह से जमीन में एक गहरा गड्ढा बन गया और पास की सड़क पर गंदगी फैल गई।

पाकिस्तान के खिलाफ एक और ऐक्शन, सरकार ने चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध के माध्यम से चिनाब नदी का पानी रोक दिया

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत सरकार ने सिंधु जल संधि रद्द करने का ऐलान कर दिया था। अब इस फैसले को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया गया है। पीटीआई के हवाले से खबर मिली है कि सरकार ने चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध के माध्यम से चिनाब नदी का पानी रोक दिया है। अब झेलम नदी के ऊपर बने किशन गंगा बांध के माध्यम से ऐसा ही एक और उपाय करने की योजना बनाई जा रही है। जम्मू के रामबन में स्थित बगलिहार बांध और उत्तरी कश्मीर में स्थित किशन गंगा बांध इन नदियों पर भारत को पाकिस्तान से बेहतर स्थिति में रखते हैं। भारत सरकार इन बांधों के जरिए विद्युत उत्पादन करती है और इसके साथ ही यही बांध भारत को इन नदियों में पानी रोकने और छोड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। आपको बता दें कि बगलीहार बांध भारत और पाकिस्तान के बीच में लंबे समय तक विवाद का कारण रहा है। पाकिस्तान ने इस बांध के निर्माण के समय विश्व बैंक से मध्यस्थता की मांग की थी। इसके अलावा पाकिस्तान को किशनगंगा बांध को लेकर भी खासकर झेलम की सहायक नदी नीलम पर इसके प्रभाव के कारण आपत्ति है। भारत से पाकिस्तान की तरफ बहनें वाली यह नदियां दोनों देशों की जीवन रेखाएँ मानी जाती हैं क्योंकि इनके मैदानों में रहने वाले लोग खेती के लिए पूरी तरह से इन नदियों पर ही निर्भर हैं। भारत भी शुरुआत से ही इस बात को समझकर पाकिस्तान को ज्यादा मात्रा में ही पानी उपलब्ध करवाता रहा है। सिंधु जल संधि में भी नदियों पर ज्यादा नियंत्रण होने के बाद भी भारत ने पाकिस्तान को पानी देने की बात मानी। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार के सब्र का बांध टूट गया और सरकार ने सिंधु जल संधि को निरस्त कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से कई नेताओं ने उल्टी-सीधी बयानबाजी करना शुरू कर दिया है। हालांकि भारत की तरफ से किसी नेता ने ऐसा बयान नहीं दिया। पहलगाम हमले के बाद भारत की तरफ से तीखी और कूटनीतिक स्ट्राइक ने पाकिस्तान को परेशान कर दिया। पूरा पाकिस्तान इस खौफ में है कि भारत कभी भी हमला कर सकता है। पीएम मोदी ने पिछले महीने ही घोषणा कर दी थी कि पहलगाम में निर्दोष लोगों का नरसंहार करने वाले आतंकवादियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।

भारतीय नौसेना में अरब सागर में युद्धाभ्यास भी शुरू कर दिया, तनाव के बीच पीएम मोदी से मिले वायुसेना प्रमुख

नई दिल्ली पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से तनाव के बीच वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। इससे पहले नौसेना प्रमुख ने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। नेवी चीफ ऐडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने लोककल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर पीएम मोदी से मुलाकात की थी। वहीं कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ मीटिंग की थी। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी शामिल हुए थे। सूत्रों ने बताया कि वायुसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक की। उन्होंने हालांकि इससे अधिक कोई जानकारी नहीं दी। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की भी उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसके बाद सरकार ने सेनाओं को एक्शन लेने की खुली छूट दे दी। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में पहले ही कहा गया था कि 19 अप्रैल के आसपास आतंकी हमला करने का प्लान बना रहे हैं। हालांकि इस रिपोर्ट में लोकेशन श्रीनगर की बताई गई थी। श्रीनगर के आसपास सुरक्षा भी बढ़ाई गई लेकिन आतंकियों ने अपना प्लान बदल दिया और पहलगाम में मासूम पर्यटकों को निशाना बनाया। इसके बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित का ऐलान कर दिया। भारत के सख्त रुख से पाकिस्तान बेहद घबरा गया है। भारतीय नौसेना में अरब सागर में युद्धाभ्यास भी शुरू कर दिया है। 3 मई से नौसेना लाइव फायल ड्रिल कर रही है। इसका मतलब वास्तविक युद्ध जैसा माहौल बनाकर युद्धाभ्यास किया जा रहा है। वहीं गुजरात तट से 85 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान की सेना भी अपने हथियारों का जोर आजमाने में लगी है। हालांकि अगर भारत और पाकिस्तान समंदर में आमने-सामने आ भी जाते हैं तो पाकिस्तान की सेना का चार दिन टिकना भी मुश्किल हो जाएगा। आतंकियों का सरपरस्त रहा पाकिस्तान अब भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है। पाकिस्तान की सेना खुलकर आतंकियों का समर्थन करती दिख रही है। जब से भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का ऐलान किया है तब से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पहले तो वह अपने सदाबहार साथियों से मिन्नतें करने लगा। काम नहीं बना तो गीदड़भभकी का रास्ता अख्तियार कर लिया। अब लगातार 10 दिनों से एलओसी पर पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है जिसका भारतीय सुरक्षाबल मुंहतोड़ जवाब देते हैं।

पाकिस्तान अपनी गीदड़भभकी के चलते भारत को रूस से मिला आसमान का रक्षक, अब दुश्मन का निकलेगा दम

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान अपनी गीदड़भभकी से बाज नहीं आ रहा है। सीमा पर पाकिस्तान ने लगातार 10वें दिन फायरिंग की। बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी हवाई रक्षा ताकत में बड़ा इजाफा किया है। सेना को रूसी मूल की Igla-S मिसाइलों की नई खेप मिल चुकी है, जो अब बॉर्डर पर फॉरवर्ड लोकेशनों में तैनात की जा रही है। इन मिसाइलों की खासियत है कि ये दुश्मन के लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन को बेहद कम दूरी से भी मार गिराने में सक्षम हैं। भारतीय सेना को मिली ये मिसाइलें बहुत कम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा हैं। करीब 260 करोड़ रुपये की लागत से हुई यह खरीद भारत सरकार की आपातकालीन खरीद नीति के तहत की गई है। सेना ने इसी के तहत अब 48 लॉन्चर और 90 और मिसाइलें खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पाकिस्तान अपनी गीदड़भभकी के चलते भारत को रूस से मिला आसमान का रक्षक, अब दुश्मन का निकलेगा दम Igla-S मिसाइलें इंफ्रारेड टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। सेना पहले से ही इस प्रणाली के पुराने वर्जन का इस्तेमाल कर रही थी। अब नए संस्करण से हवाई खतरों से निपटने की क्षमता कई गुना बढ़ेगी। Igla-S इन्फ्रारेड (आईआर) सीकर पर आधारित है, यानी यह दुश्मन के एयरक्राफ्ट के इंजन की गर्मी को ट्रैक करके निशाना बनाती है, जिससे इसे रडार से पकड़ना कठिन होता है। इसकी रेंज करीब 6 किलोमीटर तक है, यानी यह कम ऊंचाई पर 6 किमी दूर तक किसी भी लक्ष्य को गिरा सकती है। यह मिसाइल लगभग 3.5 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर उड़ रहे टारगेट को निशाना बना सकती है। चलाने में आसान और हल्का यह कंधे पर ले जाने योग्य सिस्टम है, जिसे कठिन इलाकों में आसानी से ले जाया जा सकता है और कुछ सेकंड में ऑपरेशन के लिए तैयार किया जा सकता है। Igla-S में प्रॉक्सीमिटी फ्यूज भी होता है, जो टारगेट से सीधे न टकराने पर भी उसे निष्क्रिय करने में सक्षम होता है। यह प्रणाली खासकर ड्रोन व UAVs से निपटने में बेहद असरदार मानी जाती है, जो कि आधुनिक युद्ध की सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इसके रख-रखाव और तैनाती की लागत अपेक्षाकृत कम है और यह कई युद्धों में कारगर साबित हुई है। इसके साथ ही सेना ने स्वदेशी ‘इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडक्शन सिस्टम’ भी तैनात किया है, जो 8 किलोमीटर दूर से ड्रोन को पकड़ सकता है और लेजर से मार गिरा सकता है। DRDO एक और उच्च क्षमता वाली लेजर प्रणाली पर काम कर रहा है जो भविष्य में दुश्मन के बड़े ड्रोन, क्रूज़ मिसाइल और विमानों को भी टारगेट कर सकेगी। बता दें कि हाल ही में जम्मू क्षेत्र में सेना ने एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराने में सफलता पाई है। ये सारी तैयारियां स्पष्ट संकेत हैं कि भारत अब न केवल आतंकी हमलों का जवाब देगा, बल्कि किसी भी संभावित हवाई हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।

शंकराचार्य अविमुक्‍तेश्वरानंद ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बहिष्‍कृत करने का किया एलान

नई दिल्ली ज्‍योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्‍तेश्वरानंद ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बहिष्‍कृत करने का एलान किया है। शंकराचार्य ने कहा कि आज से राहुल गांधी को हिंदू धर्म का न माना जाए। दरअसल, राहुल गांधी ने संसद में मनुस्‍मृति को लेकर बयान दिया था। इस पर शंकराचार्य ने राहुल गांधी से स्‍पष्‍टीकरण मांगा था। इस संबंध में उन्‍हें पत्र भी भेजा गया था लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी राहुल गांधी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। अब शंकराचार्य अविमुक्‍तेश्वरानंद ने उन्‍हें हिंदू धर्म से ब‍हिष्‍कृत करने की सार्वजनिक घोषणा की है। उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी ने संसद में हिंदू धर्म का अपमान किया है। उन्‍होंने कहा है कि आपकी मनुस्‍मृति को मैं नहीं मानता। मैं संविधान को मानता हूं। जबकि वास्‍तविकता यह है कि हर हिंदू और सनातन धर्मी मनुस्‍मृति से संबंधित है। शंकराचार्य ने बताया कि उन्‍हें रिमाइंडर भी भेजा गया था। अब तीन महीने बीत गए हैं। बहुत से लोग यह भी कह रहे हैं कि उन्‍हें हिंदू धर्म से क्‍या बहिष्‍कृत करेंगे, वह तो हिंदू हैं ही नहीं। तीन महीने की अवधि में उन्‍होंने अपनी ओर से इस बारे में स्थिति स्‍पष्‍ट करने के लिए कुछ भी नहीं किया। तब हम लोगों ने यह निष्‍कर्ष निकाला कि राहुल गांधी मनुस्‍मृति में अश्रद्धा रखते हैं। वह मनुस्‍मृति के बारे में संसद में खड़े होकर गलतबयानी कर रहे हैं। जबकि मनुस्‍मृति में बलात्‍कारी को संरक्षित करने की बात नहीं लिखी है। यह बात आप मनु स्‍मृति को बदमान करने के लिए कह रहे हैं। हर हिंदू चाहे वाहे सहमत हो या नहीं हो वो मनु स्‍मृति को अपना धर्मग्रंथ तो मानता ही है। आप मनु स्‍मृति को अपना ग्रंथ नहीं कह रह रहे हो इसका मतलब आप हिंदू नहीं हो। शंकराचार्य अविमुक्‍तेश्वरानंद ने कहा कि तय हो गया है कि राहुल गांधी हिंदू धर्म के विरुद्ध काम कर रहे हैं। जनता के सामने यह स्‍पष्‍ट किया जाता है कि संभवत: वह हिंदू नहीं हैं। इसलिए आज से उन्‍हें हिंदू न माना जाए। हिंदू पुरोहित पंडित हिंदू विधि से उनकी पूजा न कराएं। हिंदू मंदिरों में उनके प्रवेश को प्रतिबंध‍ित किया जाए। सभी हिंदू सनातनी धार्मिक कार्यों से उनको वंचित किया जाए। शंकराचार्य ने कहा कि तीन महीने का समय बीतने पर भी राहुल गांधी ने अपने वक्‍तव्‍य के बारे में न तो क्षमा मांगी और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया, इसलिए राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बहिष्कृत करने की सार्वजनिक घोषणा करते हैं और उन्हें हिन्दू न मानने की घोषणा करते हैं, कोई भी उनकी पूजा न कराए। शंकराचार्य ने कहा कि सभी धर्मों में, यहां तक कि कानून में भी जो अपराधी होता है उसको किसी क्षेत्र विशेष से बाहर करने का नियम है। अपने उसी अधिकार का प्रयोग करते हुए धर्म रक्षा की दृष्टि से राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बहिष्‍कृत किया जाता है।

पीएम मोदी के दौरे के आसपास श्रीनगर में हो सकता था हमला, आतंकियों की थी नजर, क्यों बदलना पड़ गया प्लान?

नई दिल्ली पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। वहीं पाकिस्तान का आतंकी चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया। कश्मीर में चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती और हाई लेवल इंटेलिजेंस के बावजूद आतंकियों ने 26 मासूम पर्यटकों को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटेलिजेंस ब्यूरो और अन्य एजेंसियों ने स्थानीय सुरक्षाअधिकारियों को आतंकी हमले को लेकर पहले ही अलर्ट किया था। मामले के जानकार लोगों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों ने बताया था कि 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के आसपास श्रीनगर में हमला हो सकता है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद श्रीनगर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। आसपास के पर्यटन स्थलों की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। इसमें दाचीगाम नेशनल पार्ट भी शामिल था। इसकी दूरी श्रीनगर से करीब 22 किलोमीटर है। हालांकि बाद में खराब मौसम की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा कैंसल हो गया। इसके बाद ही 22 अप्रैल को श्रीनगर से मात्र 90 किलोमीटर दूर आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया। उन्होंने धार्मिक पहचान पूछने के बाद लोगों की हत्या कर दी। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, खुफिया जानकारियों के बाद लोकेशन का पता लगाना सबसे कठिन काम होता है। आर्मी और सिविलियन सिक्योरिटी अधिकारियों को अलर्ट किया गया था। वहीं यह बात भी बताई गई थी कि आतंकी पर्यटकों को निशआना बना सकते हैं। खुफिया एजेंसियों ने कहा था कि श्रीनगर के आसपास पर्यटन स्थल पर आतंकी हमला कर सकते हैं। खुफिया जानकारी के बाद डीजीपी नलिन प्रभात चार दिनों तक श्रीनगर में ही रुके रहे। वह श्रीनगर के आसपास के इलाकों की पूरी खबर ले रहे थे। 22 अप्रैल को प्रभात जम्मू पहुंचे ही थे कि उधर पहलगाम में आतंकियों ने हमला कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी खुफिया रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया था कि पहलगाम में आतंकी हमला कर सकते हैं। यह बात स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा कैंसल होने के बाद आतंकी दूसरे मौके की तलाश में थे। वे लंबे समय तक इंतजार भी नहीं करना चाहते थे। पहलगाम का बैसरन पर्यटकों के लिए हमेशा ही खुला रहता है। यह केवल अमरनाथ यात्रा के दौरान बंद किया जाता था। हालांकि किसी इनपुट में बैसरन को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई और ना ही आशंका जताई गई। एक अधिकारी ने बताया कि आतंकियों में एक स्थानीय शख्स भी था जो कि पर्यटकों को लेकर एक तरफ गया। इसके बाद विदेशी आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की। इस स्थान की एंट्री एक ही जगह से थी। वहीं टिकट के जरिए एंट्री दी जाती थी। इस बात का पूरा अंदेशा था कि इस इलाके में आतंकी छिपे हुए हैं। इसके बाद भी स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों से चूक हूई। 

जम्मू-कश्मीर के रामबन में भारतीय सेना का वाहन गिरा खाई में, 2 सैनिकों की मौत

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में भारतीय सेना का एक वाहन खाई में गिर गया, जिसमें दो जवान शहीद हो गए। यह घटना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH44) पर बैटरी छस्मा के पास हुई। फिलहाल राहत और बचाव का कार्य जारी है। पुलिस, एसडीआरएफ, स्थानीय लोग और सेना की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। तस्वीरों में 700 फीट गहरी खाई में वाहन के क्षतिग्रस्त अवशेष दिखाई दे रहे हैं। घटनास्थल पर सैनिकों के शव, उनके सामान और कुछ कागजात बिखरे पड़े हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, ट्रक जम्मू से श्रीनगर जा रहे काफिले का हिस्सा था। राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर बैटरी चश्मा के पास 11.30 बजे के करीब यह दुर्घटना हुई। आपको बता दें कि सेना का काफिला उधमपुर से श्रीनगर जा रहा था। रामबन के पास काफिले की जो गाड़ी खाई में जा गिरी, उसमें दो कर्मी सवार थे। एक चालक और एक सैनिक गाड़ी में सवार थे। एक शव बरामद किया गया है और उसकी पहचान सुरजीत कुमार के रूप में हुई है। वहीं, दूसरे का पता लगाने के लिए खोज अभियान जारी है।

129 वर्ष के योग गुरु पद्मश्री शिवानंद बाबा निधन

नई दिल्ली योग साधक और काशी निवासी शिवानंद बाबा का शनिवार रात निधन हो गया। 129 वर्ष के योग गुरु पद्मश्री शिवानंद ने वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में अंतिम सांस ली। डॉ. देवाशीष ने बताया कि योग गुरु ने शनिवार की रात 8.30 बजे इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘योग साधक और काशी निवासी शिवानंद बाबा के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। योग और साधना को समर्पित उनका जीवन देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। योग के जरिए समाज की सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित भी किया गया था। शिवानंद बाबा का शिवलोक प्रयाण हम सब काशीवासियों और उनसे प्रेरणा लेने वाले करोड़ों लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं इस दुःख की घड़ी में उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं।’ अन्न नहीं खाते थे पद्मश्री शिवानंद पद्मश्री शिवा नंद अन्न नहीं खाते थे। योग गुरु और योग साधना में निपुण थे। वह योग साधना को ज्यादा प्राथमिकता देते थे। वह महाकुंभ में भी स्नान के लिए पहुंचे थे। आश्रम से जुड़े लोगों का दावा है कि वह देश के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति थे। उन्हें 2022 में पद्मश्री से नवाजा गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें सम्मानित किया था। योग साधना को ज्यादा प्राथमिकता देते थे योग गुरु शिवानंद योग साधना को ज्यादा प्राथमिकता देते और दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करते थे। अस्पताल के डॉ देवाशीष ने बताया कि स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह तीन दिनों से बीएचयू में भर्ती थे। उनका पार्थिव शरीर शनिवार की देर रात दुर्गाकुंड स्थित आश्रम पर लाया गया। शिष्यों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार रविवार को हरिश्चंद्र घाट पर किया जाएगा।

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