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गृह मंत्री अमित शाह एलबीएस एकेडमी पहुंचेंगे 28 नवंबर को , मुख्य सचिव ने तैयारियों को लेकर की बैठक

देहरादून. मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने केंद्रीय गृह मंत्री के 28 नवंबर को लाल बहादुर शास्त्री प्रशासन अकादमी मसूरी के भ्रमण कार्यक्रम को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारियों की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने आयुक्त गढ़वाल मंडल, पुलिस उप महानिरीक्षक गढ़वाल रेंज, जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून समेत सभी संबंधित अधिकारीयों को समस्त व्यवस्थाएं पुख्ता करने के निर्देश दिए। इस मौके पर डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु,  एडीजी एपी अंशुमान समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

चिन्मय दास की गिरफ्तारी पर MEA चिंतित, हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे बांग्लादेश, भारत की दो टूक

नई दिल्ली भारत ने मंगलवार को बांग्लादेश में हिंदू पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि दास की गिरफ्तारी और उन्हें जमानत न दिए जाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह घटना ऐसे समय हो रही है जब बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर हिंसक हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इनमें उनके घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को जलाने और लूटने, मूर्तियों और मंदिरों को अपवित्र करने के मामले सामने आए हैं। बांग्लादेश पुलिस ने हिंदू समूह सम्मिलित सनातनी जोत के नेता दास को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र से सोमवार को गिरफ्तार किया था। बांग्लादेश की एक अदालत ने मंगलवार को दास की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसने चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और उन्हें जमानत नहीं मिलने का गहरी चिंता के साथ संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने कहा, “यह घटना बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों द्वारा हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर कई हमले किए जाने के बाद हुई है।” विदेश मंत्रालय ने कहा कि अल्पसंख्यकों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ चोरी, तोड़फोड़ और देवी-देवताओं और मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले हुए हैं जो दस्तावेजों में दर्ज हैं। बयान में कहा गया, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन घटनाओं के अपराधी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन शांतिपूर्ण सभाओं के माध्यम से वैध मांगें उठाने वाले एक धार्मिक नेता के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं।” विदेश मंत्रालय ने दास की गिरफ्तारी के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर भी चिंता जतायी। मंत्रालय ने कहा, “हम बांग्लादेश के प्राधिकारियों से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं। हम शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उनके अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील करते हैं।”

अगर पार्टियां पंथ को देश से ऊपर रखती हैं तो हमारी स्वतंत्रता दूसरी बार खतरे में पड़ जाएगी: जगदीप धनखड़

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को याद करते हुए कहा कि अगर पार्टियां पंथ को देश से ऊपर रखती हैं तो हमारी स्वतंत्रता दूसरी बार खतरे में पड़ जाएगी। संविधान को अंगीकार किए जाने की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर साल भर चलने वाले समारोहों की शुरुआत के लिए पुराने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने आगाह किया कि रणनीति के तहत व्यवधान पैदा करना लोकतंत्र के लिए खतरा है। धनखड़ ने कहा, ‘‘यह समय रचनात्मक संवाद, बहस और सार्थक चर्चा के माध्यम से हमारे लोकतांत्रिक मंदिरों की पवित्रता को बहाल करने का समय है ताकि हमारे लोगों की प्रभावी ढंग से सेवा की जा सके।’’ इस बात का उल्लेख करते हुए कि संविधान ने निपुणता से लोकतंत्र के तीन स्तंभों (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) को स्थापित किया है और प्रत्येक की एक परिभाषित भूमिका है, धनखड़ ने कहा, ‘‘लोकतंत्र का सबसे अच्छा पोषण तब होता है जब उसके संवैधानिक संस्थान अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों का पालन करते हुए समन्वय, तालमेल और एकजुटता से काम करें।’’ उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य के इन अंगों के कामकाज में, क्षेत्र विशिष्टता भारत को समृद्धि और समानता की अभूतपूर्व ऊंचाइयों की ओर ले जाने में इष्टतम योगदान देने का सबसे अच्छा साधन है। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा में सदन के नेता जे पी नड्डा, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (राज्यसभा) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू मंच पर मौजूद थे। इस अवसर पर भारत के संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ को समर्पित एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया गया। साथ ही ‘भारत के संविधान का निर्माण: एक झलक’ और ‘भारत के संविधान का निर्माण और इसकी गौरवशाली यात्रा’ शीर्षक वाली पुस्तकों का विमोचन किया गया। राष्ट्रपति ने संविधान के संस्कृत और मैथिली अनुवादों का अनावरण किया। यह समारोह ‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान’ अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य संविधान में निहित मूल मूल्यों को दोहराते हुए संविधान के निर्माताओं के योगदान का सम्मान करना है।  

जांच के लिए SIT हुई गठित, पायलट बाबा आश्रम की संपत्ति पर कई संतों के खुर्द बुर्द करने का आरोप

हरिद्वार. हरिद्वार में पायलट बाबा आश्रम के साधु संतों पर उनके इलाज में लापरवाही बरतने और करोड़ों की धोखाधड़ी करने समेत कई आरोप लगे हैं। इस मामले में अब एसएसपी के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी साधु संतों के विरुद्ध लगे गंभीर आरोपों की जांच करेगी। बता दें कि शिष्य ब्रहमानन्द गिरी ने जगजीतपुर में पायलट बाबा आश्रम के अन्य साधू संतों के खिलाफ आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज की थी। जिसके बाद अब पुलिस जांच में जुटी है। एसआईटी में जूही मनराल क्षेत्राधिकारी नगर, मनोज नौटियाल थानाध्यक्ष कनखल, अमित नौटियाल थाना कनखल, पवन डिमरी सीआईयू हरिद्वार, जसवीर थाना कनखल और वसीम सीआईयू हरिद्वार को शामिल किया गया है।

कोई एक पार्टी यह नहीं तय कर सकती कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए: डीवाई चंद्रचूड़

नई दिल्ली देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शिवसेना (यूबीटी) की ओर से लगाए गए आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि कोई एक पार्टी यह नहीं तय कर सकती कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए। दरअसल, शिवसेना नेता संजय राउत ने बीते दिनों चंद्रचूड़ की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने महाराष्ट्र में दल-बदल करने वाले नेताओं के मन से कानून का डर खत्म कर दिया था। राउत ने दावा किया कि अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय नहीं करके चंद्रचूड़ ने दलबदल के लिए दरवाजे और खिड़कियां खुली रखीं। एएनआई को दिए इंटरव्यू में पूर्व सीजेआई ने शिवसेना के आरोपों पर कहा, ‘मेरा जवाब बहुत सरल है। पूरे साल हमने कई मौलिक संवैधानिक मामलों पर सुनवाई की। हम 9 न्यायाधीशों की पीठ के निर्णयों, 7 न्यायाधीशों की पीठ के निर्णयों और 5 जजों की पीठ के फैसलों से निपटते रहे। ऐसे में क्या किसी एक पक्ष या व्यक्ति को यह तय करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए? माफ कीजिए, यह अधिकार मुख्य न्यायाधीश के पास होता है।’ हमारे पास सीमित जनशक्ति, बोले चंद्रचूड़ डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 20 वर्षों से कई मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर आप कहते हैं कि हमें जो समय दिया गया उसमें हमने एक मिनट भी काम नहीं किया तो ऐसी आलोचना जायज है। आप देखिए कि कई अहम संवैधानिक मामले 20 बरसों से सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं। एससी इन 20 साल पुराने मामलों को क्यों नहीं ले रहा है और कुछ हालिया मुद्दों पर सुनवाई क्यों कर रहा है? इस बीच, अगर आप पुराने मामलों को लेते हैं तो आपको बताया जाएगा कि आपने इस विशेष केस को नहीं लिया। हमारे पास सीमित जनशक्ति है और न्यायाधीशों की निश्चित संख्या है। ऐसे में आपको संतुलन बनाना होता है।’ ‘हमने चुनावी बांड पर लिया फैसला’ शिवसेना मामले में फैसला देर से लेने के आरोपों पर भी पूर्व सीजेआई ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘देखिए, यही समस्या है। असली दिक्कत यह है कि राजनीति का एक निश्चित वर्ग सोचता है कि अगर उनके एजेंडे का पालन करते हैं तो हम स्वतंत्र हैं। हमने चुनावी बांड पर फैसला लिया। क्या यह कोई कम महत्वपूर्ण मामला था? हमने हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय मामले में फैसला सुनाया, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के तहत मदरसों को बंद करने का मुद्दा शामिल रहा। हमने व्यक्तियों के विकलांगता अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर सुनवाई की। क्या ये कम जरूरी मामले थे?’ शिवसेना यूबीटी का क्या है आरोप वर्ष 2022 में अविभाजित शिवसेना में विभाजन के बाद, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले पार्टी के गुट ने एकनाथ शिंदे के साथ दलबदल करने वाले पार्टी विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। शीर्ष अदालत ने अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने का दायित्व विधानसभा अध्यक्ष पर छोड़ था। विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को असली राजनीतिक दल घोषित किया था। राउत ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के नतीजे पहले से तय थे। उन्होंने कहा कि अगर तत्कालीन पूर्व न्यायाधीश ने अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर फैसला किया होता, तो नतीजे अलग होते।

संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया: संजय कुमार झा

नई दिल्ली जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस मनाने की शुरुआत पीएम मोदी ने की थी। विपक्ष ने लोकसभा चुनाव में जनता के बीच संविधान को लेकर झूठ फैलाने की कोशिश की। लेकिन चुनावी राज्यों में हार के बाद विपक्ष का चेहरा बेनकाब हो गया है। जनता विपक्ष के झूठ और फरेब की राजनीति में आने वाली नहीं है। पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने गरीबों के उत्थान के लिए तमाम काम किए है। जनता का भरोसा पीएम मोदी पर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। संजय झा ने आगे कहा कि पहले चुनाव नहीं होते थे, गरीबों को सत्ता से वंचित कर दिया जाता था। पहले मतपत्रों और मतपेटियों को लूट लिया जाता था। गरीबों को ताकत तब मिली जब ईवीएम आया। हम इसके समर्थक हैं। जब विपक्ष चुनाव जीते तो ईवीएम ठीक जब हारे तो इसे दोषी ठहराना जायज नहीं है। जनता ऐसे लोगों का हिसाब ले रही है। सर्वसमाज को लेकर चलना और वंचित समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभ्य समाज में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। संविधान सदन में संविधान दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और पीएम मोदी ने संविधान की ऐतिहासिक यात्रा और गौरवशाली विरासत का सम्मान करने के लिए एक विशेष डाक टिकट जारी किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने “भारत के संविधान का निर्माण: एक झलक” और “भारत के संविधान का निर्माण और इसकी गौरवशाली यात्रा” नामक पुस्तकों का विमोचन भी किया। संविधान दिवस भारत के संविधान को अपनाने के उपलक्ष्य में 26 नवंबर को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इस दिन 1949 में भारत की संविधान सभा ने संविधान को अपनाया था, जो 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ।  

आंध्र प्रदेश अडानी समूह से जुड़े पावर सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट को कैंसिल कर सकता है, लगेगा झटका

आंध्र प्रदेश अमेरिका में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट के लिए रिश्वत और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के आरोप के बाद गौतम अडानी और अडानी समूह की मुश्किलें लगातार बढ़ रही है। अब खबर है आंध्र प्रदेश अडानी समूह से जुड़े पावर सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट को कैंसिल कर सकता है। इसके लिए आंध्र सरकार फाइलों की समीक्षा कर रही है। यह जानकारी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दी गई है। क्या है डिटेल राज्य के वित्त मंत्री पय्यावुला केशव ने सोमवार को रॉयटर्स को बताया कि आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार पिछले प्रशासन की सभी इंटरनल फाइलों की जांच कर रही है, जिसके तहत कथित आरोप लगाए गए हैं। केशव ने कहा, ‘हम यह भी देखेंगे कि आगे क्या किया जा सकता है, जैसे कि क्या कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल करने की संभावना है… राज्य सरकार इस मुद्दे पर बारीकी से विचार कर रही है।’ क्या है मामला अमेरिकी अधिकारियों ने गौतम अडानी और सात अन्य पर 2021 और 2022 के बीच ओडिशा, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के संघीय क्षेत्र में सोलर एनर्जी सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट पाने करने के लिए कुछ भारतीय सरकारी अधिकारियों को 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने के लिए सहमत होने का आरोप लगाया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने देश के दूसरे सबसे अमीर शख्स अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी सहित सात अन्य पर बाजार रेट से महंगी सोलर एनर्जी खरीदने के लिए आंध्र प्रदेश और ओडिशा के अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इसमें अधिकारियों के नाम का खुलासा नहीं किया गया। आरोप है कि आंध्र प्रदेश राज्य सरकार के एक अधिकारी को 25 लाख रुपये प्रति मेगावाट का भुगतान किया गया था। उसके बाद राज्य सेकी से 7,000 मेगावाट (7 गीगावाट) सोलर एनर्जी खरीदने के लिए सहमत हुआ। हालांकि, अडानी समूह ने सभी आरोपों से इनकार किया और उन्हें निराधार बताया है। वहीं, आंध्र प्रदेश की पिछली सत्तारूढ़ पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने पिछले हफ्ते किसी भी गलत काम से इनकार किया था। इधर, फ्रांसीसी तेल प्रमुख टोटलएनर्जीज ने सोमवार को अडानी समूह में और निवेश रोक दिया। बता दें कि टलएनर्जीज की अडानी ग्रीन में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है। चंद्रबाबू नायडू भी जता चुके हैं नाराजगी बता दें कि बीते शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य सरकार के पास पूर्ववर्ती वाईएसआरसीपी सरकार और अडानी समूह से जुड़े कथित रिश्वत घोटाले से संबंधित अमेरिका में दायर ‘आरोपपत्र रिपोर्ट’ है। उन्होंने अनियमितताओं पर कार्रवाई करने का ‘वादा’ किया। नायडू ने कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार और अडानी समूह से जुड़े आरोपों से दक्षिणी राज्य की प्रतिष्ठा और ब्रांड के तौर पर उसकी छवि को ठेस पहुंची है और उन्होंने इसे ‘बहुत दुखद घटनाक्रम’ बताया।

ट्रंप के शपथ लेते ही साथ ही चीन, मेक्सिको और कनाडा जैसे देशों पर गिर सकती गाज

वाशिंगटन अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी 2025 को नए कार्यकाल के लिए पदभार संभालेंगे। ट्रंप के शपथ लेते ही साथ ही चीन, मेक्सिको और कनाडा जैसे देशों पर गाज गिर सकती है। डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को अवैध प्रवासियों और ड्रग्स पर नकेल कसने की कोशिशों के तहत शपथ लेते ही मेक्सिको, कनाडा और चीन जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि वह कनाडा और मेक्सिको से अमेरिका आने वाले सभी उत्पादों पर 25% टैक्स लगाएंगे और चीन से आने वाले सामानों पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाएंगे। अगर यह टैरिफ नियम लागू किए जाते हैं तो अमेरिकियों के लिए गैस और ऑटोमोबाइल जैसी चीजों की कीमतें असाधारण तरीके से बढ़ सकती हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका दुनिया में वस्तुओं का सबसे ज्यादा आयात करने वाला देश है और मेक्सिको, चीन और कनाडा अमेरिका के लिए तीन सबसे बड़े सप्लायर्स हैं। ट्रम्प ने अपनी ट्रुथ सोशल साइट पर एक पोस्ट में लिखा, “20 जनवरी को पहले एग्जीक्यूटिव ऑडर में से एक के रूप में मैं मेक्सिको और कनाडा से अमेरिका में आने वाले सभी उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाऊंगा।” उन्होंने लिखा, “हजारों लोग मेक्सिको और कनाडा से होकर आ रहे हैं जिससे अपराध और ड्रग्स भयानक स्तर पर पहुंच गए हैं। नए टैरिफ तब तक लागू रहेंगे जब तक ड्रग्स और सभी अवैध प्रवासी हमारे देश पर इस आक्रमण को रोक नहीं देते!” चीन को सुनाया ट्रम्प ने चीन पर भी अपना गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार चीन के साथ अमेरिका में भारी मात्रा में भेजे जा रहे ड्रग्स, खास कर फेंटेनाइल के बारे में बातचीत की है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने लिखा, “जब तक वे ऐसा करना बंद नहीं करते, हम चीन से अमेरिका आने वाले उनके सभी उत्पादों पर किसी भी टैरिफ से ऊपर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाएंगे।” क्या है वजह? ट्रम्प ने यह चेतावनी ऐसे समय में दी है जब मैक्सिको से अवैध रूप से सीमा पार करने के लिए गिरफ्तारियों की संख्या कम हो रही हैं। हालांकि इस दौरान पिछले दो सालों में कनाडा से अवैध रूप से सीमा पार करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही हैं। अक्टूबर 2023 और सितंबर 2024 के बीच बॉर्डर पुलिस ने 23,721 लोगों को पकड़ा था। कनाडाई सीमा पर गिरफ्तार किए गए लोगों में से 14,000 से अधिक भारतीय थे। यह दो साल पहले की संख्या से 10 गुना अधिक है। ऐसे में इन मामलों पर सख्ती से निपटने की तैयारी चल रही है। क्या होगा असर? अगर ट्रंप नए नियमों को लागू करते हैं तो नए टैक्स कनाडा और मैक्सिको की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करेंगे। कनाडा दुनिया के सबसे ज्यादा व्यापार-निर्भर देशों में से एक है और कनाडा का 75% निर्यात अमेरिका को जाता है। वहीं पिछले हफ्ते एक वरिष्ठ चीनी वाणिज्य अधिकारी ने कहा कि चीनी निर्यात पर उच्च टैरिफ अमेरिका के लोगों के लिए कीमतें बढ़ाकर उल्टा असर डालेगा। अधिकारी ने कहा कि चीन ऐसे बाहरी झटकों से खुद को संभाल सकता है।

ट्रंप की वापसी से कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की चिंताएं और बढ़ गई, ट्रंप ने कहा था पागल वामपंथी

वाशिंगटन अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शपथ लेने से पहले ही अपने फैसलों और बयानों को लेकर चर्चा में हैं। अमेरिका को एक बार फिर ग्रेट यानी महान बनाने का नारा दे चुके ट्रंप अपने कड़े और अप्रत्याशित फैसलों के लिए प्रसिद्ध हैं। अब ट्रंप के एक बार फिर सत्ता में लौटने से दुनिया भर में हलचल है। इस बीच ट्रंप की वापसी से कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की चिंताएं और बढ़ गई हैं। आर्थिक उथल-पुथल से जूझते कनाडा की ट्रूडो सरकार को पहले से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच ट्रंप ने सोमवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि पदभार संभालते ही पहले दिन वह कनाडा और मेक्सिको से अमेरिका आने वाले सभी उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएंगे। जाहिर तौर पर यह ट्रूडो के लिए अच्छी खबर नहीं है। कनाडा दुनिया के सबसे ज्यादा व्यापार निर्भर देशों में से एक है और कनाडा का 75% निर्यात अमेरिका को जाता है। यह व्यापार निर्भरता कनाडा को अमेरिकी आर्थिक और विदेश नीतियों में बदलाव के प्रति संवेदनशील बनाती है। ट्रंप के चुनाव जीतने पर को बधाई देते हुए जस्टिन ट्रूडो ने कूटनीतिक लहजे में कहा था कि दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती है और सहयोग के लिए आशा व्यक्त किया। हालांकि पर्दे के पीछे ट्रूडो की सरकार एक अशांत दौर के लिए तैयार है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी में ट्रूडो ने कहा था कि ट्रंप का दूसरी बार राष्ट्रपति बनना पहले की तुलना में बहुत अधिक चुनौतीपूर्ण होगा। विश्लेषकों का कहना है कि इसमें सच्चाई भी है। ट्रंप ने कहा था पागल वामपंथी कनाडा की वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने ट्रंप की जीत के बाद आश्वासन देते हुए कहा था कि कनाडा तैयार है और ट्रंप के आने पर बिल्कुल ठीक रहेगा। हालांकि यह आसान नहीं होगा। ट्रंप ट्रूडो को उनकी कोविड-19 सीमा नीतियों के लिए पागल वामपंथी कह चुके हैं और कनाडा में 2018 के जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान उनपर बहुत बेईमान होने का आरोप लगाते हुए वहां से चले गए थे। इस बार कनाडा सतर्क है और वह यह जानते हैं कि छोटी-छोटी बातें भी संबंधों को जटिल बना सकती हैं। ट्रूडो पर बनेगा दबाव राजनीतिक रूप से यह ट्रूडो के लिए कठिन दौर है। अगले साल कनाडा में होने वाले चुनावों से पहले कई सर्वे यह अनुमान लगा रहे हैं कि जस्टिन ट्रूडो की वापसी मुश्किल है। इस बीच देश में बढ़ते महंगाई और आर्थिक चुनौतियों पर ट्रंप की नीतियों से दबाव और बढ़ेगा। ट्रंप अपनी विदेश नीति के तहत कनाडा पर रक्षा बजट बनाने का भी दबाव डालेंगे। यह न केवल राष्ट्रीय बजट को प्रभावित करेगा बल्कि स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचे जैसे घरेलू मुद्दों से प्राथमिकताओं को दूर कर सकता है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह सीमा प्रबंधन को लेकर भी बदलाव कर सकते हैं। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों के हटाने की नीतियां कनाडा में शरण लेने वाले प्रवासियों की संख्या में वृद्धि का कारण बन सकती हैं। कंजर्वेटिव सरकार में पूर्व आव्रजन मंत्री जेसन केनी ने एक वास्तविक संकट की चेतावनी दी है।

अमित शाह की अध्यक्षता में राज्यों में आपदा न्यूनीकरण परियोजनाओं के लिए 1115 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की

नई दिल्ली केन्द्र सरकार ने विभिन्न राज्यों के लिए आपदा न्यूनीकरण और क्षमता निर्माण परियोजनाओं के लिए 1115.67 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति की बैठक में इस राशि को मंजूरी दी गयी। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को यहां बताया कि वित्त मंत्री, कृषि मंत्री और नीति आयोग के उपाध्यक्ष की सदस्यता वाली समिति ने राष्ट्रीय आपदा शमन निधि से 15 राज्यों में भूस्खलन के जोखिम को कम करने के प्रस्ताव के वित्त पोषण और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि के फंडिंग विंडो से तैयारी और क्षमता निर्माण के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के प्रस्ताव पर विचार किया। उच्चस्तरीय समिति ने 15 राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 1000 करोड़ रुपये की कुल लागत से राष्ट्रीय भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण परियोजना को मंजूरी दी है। समिति ने उत्तराखंड के लिए 139 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश के लिए 139 करोड़ रुपये, पूर्वोत्तर के 8 राज्यों के लिए 378 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र के लिए 100 करोड़ रुपये, कर्नाटक के लिए 72 करोड़ रुपये, केरल के लिए 72 करोड़ रुपए, तमिलनाडु के लिए 50 करोड़ और पश्चिम बंगाल के लिए 50 करोड़ रुपए को मंज़ूरी दी। उच्चस्तरीय समिति ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सिविल डिफेंस के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए 115.67 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली एक अन्य परियोजना को भी मंजूरी दी है। इससे पहले, समिति ने राष्ट्रीय आपदा शमन निधि से सात शहरों में 3075.65 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली शहरी बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण परियोजनाओं और 4 राज्यों में 150 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। गृह मंत्रालय ने देश में आपदाओं का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए कई पहल की हैं। भारत में आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रणाली को मजबूत करके आपदाओं के दौरान जान-माल को होने वाले किसी भी बड़े नुकसान को रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इस वर्ष राज्यों को 21,476 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। इसमें राज्य आपदा मोचन निधि से 26 राज्यों को 14,878.40 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से 15 राज्यों को 4,637.66 करोड़ रुपये, राज्य आपदा शमन निधि से 11 राज्यों को 1,385.45 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आपदा शमन निधि से 6 राज्यों को 574.93 करोड़ रुपये शामिल हैं।  

हैदराबाद: स्कूल में बच्चे ने एक साथ खा लीं तीन पूरियां, दम घुटने से हो गई मौत

हैदराबाद हैदराबाद से एक हैरान करने वाला और दर्दनाक मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि यहां 11 साल के एक बच्चे की तीन पूरियां एक साथ खाने की वजह से मौत हो गई। स्कूल में दोपहर के भोजन के दौरान छात्र ने एक साथ तीन पूरियां खा लीं और इसके बाद उसका दम घुटने लगा। पुलिस के मुताबिक मृतक छात्र कक्षा 6 में पढ़ता था। छात्र के पिता ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उन्हें स्कूल से फोन आया जिसमें बताया गया कि उनके बेटे ने एक साथ ‘तीन से अधिक पूड़ियां’ खा लीं जिससे उसकी सांस फूलने लगी। छठी कक्षा के छात्र को स्कूल के कर्मचारी पास के एक निजी अस्पताल में ले गए जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए एक निजी सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां चिकित्सकों ने उसके स्वास्थ्य की जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। हैदराबाद में ही कुछ दिन पहले मोमोज खाने से 33 साल की एक महिला की मौत हो गई थी। ठेले पर जिन लोगों ने मोमोज खाया था, वे सभी बीमार हो गए थे। जांच में पाया गया था कि दुकानदार बिना फूड सेफ्टी लाइसेंस के ही काम कर रहा था और बेहद गंदगी में खाना तैयार किया जाता था। मोमोज में इस्तेमाल होने वाला आटा बिना पैकिंग के ही रेफ्रिजरेटर में रखा गयाथा। इसके अलावा रेफ्रिजरेटर का दरवाजा भी टूटा हुआ था। स्टॉल लगाने वाले दो लोगों को हिरासत में ले लिया गया था। दोनों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया था।

मुंबई को हिलाकर रख देने वाले हमले को आज हुए 16 साल, एक हमलावर अजमल कसाब को पड़ा गया था जिंदा

मुंबई  आज से ठीक 16 साल पहले, साल 2008 को मुंबई में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। यह दिन भारत में आतंकवाद के सबसे बड़े हमलों में से एक के रूप में याद किया जाता है, इसे 26/11 के नाम से जानते हैं। इन हमलों ने मुंबई को 59 घंटे तक आतंकित किया और इन 59 घंटे में हुई घटनाओं ने पूरे देश को दहला दिया था। दरअसल, 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान के 10 आतंकवादी समुद्र मार्ग से मुंबई में प्रवेश किये। इन आतंकवादियों ने समुद्र के रास्ते मुंबई के प्रमुख स्थलों पर हमला करने की योजना बनाई थी। उन्होंने भीड़-भाड़ वाले इलाकों को अपने निशाने पर रखा था। रात के अंधेरे में यह आतंकवादी नौका के जरिए मुंबई के कोलाबा क्षेत्र के पास ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल, सीएसटी रेलवे स्टेशन और नरीमन हाउस में घुस गए थे। आतंकवादियों ने मुंबई में पहले ताज होटल और ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल पर कब्जा किया, जहां उन्होंने होटल के कर्मचारियों और मेहमानों को बंधक बना लिया। इसके बाद, उन्होंने कोलाबा इलाके के सीएसटी रेलवे स्टेशन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें कई निर्दोष मारे गए। इसी दौरान, नरीमन हाउस में भी आतंकवादियों ने घुसकर कई लोगों को बंधक बना लिया। आतंकवादियों के इन हमलों का उद्देश्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर आतंक फैलाना था, आतंकवादी पूरी तरह से प्रशिक्षित थे। वह आम नागरिकों को निशाना बनाने के साथ-साथ विदेशी नागरिकों को भी अपना शिकार बना रहे थे। इसी बीच, मुंबई पुलिस, एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड), एनसीटीसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने एक साथ आकर आतंकवादियों से लोहा लेना शुरू किया। हेमंत करकरे, विजय सालस्कर और अशोक कामटे जैसे मुंबई पुलिस के बहादुर जवान इस हमले में शहीद हो गए। एनएसजी की विशेष कमांडो टीम ने होटल्स और अन्य ठिकानों पर हमलावरों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किया। इस ऑपरेशन में कुल 9 आतंकवादी मारे गए और एक आतंकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया। कसाब को मुंबई पुलिस ने पकड़ने के बाद अदालत में पेश किया और 2012 में उसे फांसी दी गई। आंकड़ों के अनुसार इस हमले में 164 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हो गए थे। मारे गए लोगों में भारतीय नागरिकों के अलावा कई विदेशी नागरिक भी थे। इस हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को और कड़ा किया। मुंबई हमलों ने देश को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की आवश्यकता का एहसास दिलाया। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश की और कई आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तब से हर साल 26 नवंबर को मुंबई हमलों के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। इस दिन को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की याद में मनाया जाता है और उन बहादुर लोगों की शहादत को सलाम किया जाता है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस हमले को रोकने की कोशिश की।  भारत ने मुंबई आतंकी हमले के बाद पाकिस्‍तान पर क्‍यों नहीं किया था अटैक  मुंबई में साल 2008 में 26 नवंबर को पाकिस्तान के आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा के लोगों ने हमला किया था। ये लोग समुद्र के रास्ते से आए थे और ताज होटल और छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनल जैसे स्थानों पर हमला किया था। आतंकियों ने मुंबई को दहलाते हुए 175 लोगों को मार डाला था और कम से कम 300 को घायल किया था। सुरक्षाबलों ने अजमल आमिर कसाब को जिंदा पकड़ा था और बाकी आतंकियों को मार गिराया था। कसाब को 2012 में फांसी दे दी गई थी। कसाब की गवाही और खुफिया जानकारी से साफ हो गया था कि हमलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ था। कसाब के अलावा जकीउर्रहमान लखवी और हाफिज सईद के इसके पीछे होने की बात सामने आई थी। उस समय काफी बहस के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान पर जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया था। इस फैसले पर विवाद रहा है और फैसले के विरोधी लोगों ने इसे कमजोरी की तरह देखा है। भारत ने क्यों नहीं किया पाक पर हमला! पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन लश्कर तैयबा या पाकिस्तान पर हमला ना करने के भारत सरकार के उस समय के फैसले के तीन प्रमुख कारण मानते हैं। इसमें सबसे पहला है- अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति। मेनन का कहना है कि हमलों के बाद भारत को वैश्विक सहानुभूति मिली। भारत ने लश्कर-ए-तैयबा खिलाफ सैन्य हमले किए होते तो फिर दुनिया इसे भारत-पाक संघर्ष की एक और कड़ी के रूप में देखती। लश्कर-ए-तैयबा के शिविरों पर हमलों में नागरिक भी हताहत होते और भारत की छवि धूमिल होती। मेनन इसकी दूसरी वजह पाकिस्तानी राजनीति को कहते हैं। मेनन के मुताबिक, उस समय पाकिस्तान ने नई नागरिक सरकार चुनी गई थी। आसिफ अली जरदारी के नेतृत्व वाली नई सरकार भारत के साथ बेहतर संबंध चाहती थी। भारत का हमला पाक सेना के पीछे देश को एकजुट करता और नागरिक सरकार कमजोर पड़ जाती। इससे भारत और पाकिस्तान के संबंधों को नुकसान होता। अर्थव्यवस्था पर भी होता असर मेनन का यह भी तर्क है कि लश्कर-ए-तैयबा के शिविरों पर सीमित सैन्य हमले का बहुत कम प्रभाव पड़ता। लश्कर के कैंप कोई विशाल इमारते नहीं बल्कि टिन शेड की झोपड़ियां थीं। वह इन्हें आसानी से दोबारा बना लेते लेकिन पाकिस्तान के साथ युद्ध भारतीय अर्थव्यवस्था को पीछे धकेल देता। यही वजह रही कि भारत ने 26/11 के बाद पाकिस्तान पर हमला नहीं किया। मेनन ने ये भी कहा कि कोई भी भारतीय सरकार दोबारा वही विकल्प नहीं चुन सकेगी मुंबई हमले के लिए उस वक्त की विपक्षी पार्टी भाजपा ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ही नहीं कांग्रेस नेता मंत्री मनीष तिवारी ने भी उस फैसले की आलोचना की। तिवारी ने भारत से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में लश्कर के शिविरों पर हमले को विचार जाहिर किया। उन्होंने इस बात को भी खारिज किया कि इससे भारत को विश्व स्तर पर सहानुभूति नहीं मिलती। पाकिस्तान को संदेश देना जरूरी था मनीष तिवारी का तर्क है कि भारत के हमले से पाकिस्तान और दुनिया दोनों को एक संदेश जाता। वहीं देश में भी हमले से इनकार करके सरकार का आतंक पर नरम रुख … Read more

एस्सार ग्रुप के को-फाउंडर शशिकांत रुइया का निधन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एस्सार समूह के सह-संस्थापक शशिकांत रुइया (शशि रुइया) के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि श्री रुइया के दूरदर्शी नेतृत्व और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने भारत के व्यापार परिदृश्य को बदल दिया। श्री मोदी ने मंगलवार को सोशल नेटवर्किंग साइट ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कहा, “श्री शशिकांत रुइया जी उद्योग जगत में एक महान हस्ती थे। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने भारत के व्यापार परिदृश्य को बदल दिया। उन्होंने नवाचार और विकास के लिए उच्च मानक भी स्थापित किए। वे हमेशा विचारों से भरे रहते थे, हमेशा इस बात पर चर्चा करते थे कि हम अपने देश को कैसे बेहतर बना सकते हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा, “शशि जी का निधन बेहद दुखद है। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।” एस्सार ग्रुप की स्थापना शशि रुइया ने अपने भाई रवि रुइया के साथ 1969 में एस्सार ग्रुप की स्थापना की थी। उसे मद्रास पोर्ट ट्रस्ट से बंदरगाह में बाहरी ब्रेकवाटर के निर्माण के लिए 2.5 करोड़ रुपये का ऑर्डर प्राप्त हुआ था। शुरुआती वर्षों में एस्सार ग्रुप ने कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग पर फोकस किया। उसने देश में कई पुलों, बांधों और बिजली संयंत्रों सहित कई प्रमुख इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स का निर्माण किया। 1980 के दशक में ग्रुप ने एस्सार ने कई तेल और गैस सेक्टर में विस्तार किया और 1990 के दशक में स्टील और टेलिकॉम में भी कदम रखा। एस्सार ने हचिसन के साथ मिलकर भारत की दूसरा सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बनाई। लेकिन अब यह ग्रुप टेलिकॉम बिजनस से निकल चुका है। साथ ही उसने अपनी तेल रिफाइनरी रूस की रोजनेफ्ट के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को बेच दी। ग्रुप का स्टील प्लांट भी इनसॉल्वेंसी प्रॉसीडिंग में आर्सेलर मित्तल के पास चला गया। रुइया कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निकायों और उद्योग संघों में शामिल थे। वह फिक्की की प्रबंध समिति में थे। साथ ही वह प्रतिष्ठित इंडो-यूएस जॉइंट बिजनस काउंसिल और इंडियन नेशनल शिपऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। रुइया प्रधानमंत्री के इंडो-यूएस सीईओ फोरम और भारत-जापान बिजनेस काउंसिल के सदस्य भी थे। प्रधानमंत्री ने जताया शोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शशि रुइया ने निधन पर शोक जताया है। मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘श्री शशिकांत रुइया जी उद्योग जगत की एक महान हस्ती थे। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने भारत के कारोबारी परिदृश्य को बदल दिया। उन्होंने इनोवेशन और विकास के लिए उच्च मानक भी स्थापित किए। वे हमेशा विचारों से ओतप्रोत रहते थे। हमेशा इस बात पर चर्चा करते थे कि हम अपने देश को कैसे बेहतर बना सकते हैं। शशि जी का निधन बेहद दुखद है। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।’

राष्ट्रपति ने कहा कि बीते 75 सालों में हमारा देश विश्व बंधु के रूप में उभरा, यह संविधान देश को मेधावी लोगों की देन

नई दिल्ली भारत का संविधान अब आप संस्कृत और मैथिली भाषा में भी पढ़ सकेंगे। संविधान निर्माण के 75 साल पूरे होने के मौके पर मंगलवार को इन भाषाओं में प्रतियों का विमोचन किया गया। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मौजूद थीं तो दोनों सदनों के स्पीकर, पीएम नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल गांधी भी थे। संविधान दिवस पर एक विशेष डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया गया है। इस मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि यह संविधान देश को मेधावी लोगों की देन है। इसने देश की विविधता को अभिव्यक्ति दी है। राष्ट्रपति ने कहा कि बीते 75 सालों में हमारा देश विश्व बंधु के रूप में उभरा है। आज कृतज्ञ राष्ट्र अपने संविधान निर्माताओं को नमन करता है। हमने इस अवधि में काफी प्रगति की है और अब तो महिला सशक्तीकरण की ओर हम बढ़े हैं। इस दौरान राष्ट्रपति ने महिला सांसदों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जरूरी जनसुविधाओं पर फोकस किया है। हमारे संविधान का यही उद्देश्य है कि कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका मिलकर सामान्य लोगों के हितों के लिए काम करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लक्ष्यों को प्राप्त करने में हम सभी लोग एक साथ हैं और विविधता में एकता बनी हुई है। इस कार्यक्रम के दौरान पक्ष और विपक्ष एक दिखे। संविधान की मैथिली और संस्कृति प्रतियों के विमोचन के दौरान मंच पर पीएम नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के साथ थे तो वहीं राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे जैसे विपक्षी नेता भी मौजूद थे। इनके अलावा दोनों सदनों के स्पीकर, डिप्टी स्पीकर भी मंच पर थे। 75वें संविधान दिवस के अवसर पर खास टिकट और सिक्के भी जारी किए गए। बता दें कि संविधान दिवस के मौके पर सदनों की सामान्य कार्यवाही नहीं हो रही है बल्कि दोनों का संयुक्त सत्र बुलाया गया है। इस मौके पर राष्ट्रपति ने सभी सदस्यों से संविधान की प्रस्तावना भी पढ़वाई।

IPS दीपम सेठ उत्तराखंड के नए डीजीपी बने, 1995 बैच के हैं वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी

देहरादून दीपम सेठ उत्तराखंड के 13वें डीजीपी बन गए हैं। गृह विभाग की ओर से आदेश जारी होने के साथ ही उन्होंने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। एडीजी दीपम सेठ ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटकर  मूल कैडर ज्वाइन किया। ज्वाइन करते ही उन्हें पुलिस के 13वें मुखिया की जिम्मेदारी भी दी गई। दीपम सेठ 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। और वर्ष 2019 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। अभी उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी नहीं हुई थी कि शासन ने उन्हें वापस बुलाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। पत्र के एक दिन बाद ही केंद्र ने उन्हें रिलीव भी कर दिया। बता दें कि एडीजी दीपम सेठ उत्तराखंड कैडर के वर्तमान में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। पिछले साल पूर्व डीजीपी अशोक कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद सेठ के वापस आने की चर्चाएं हुई थीं। सरकार ने उनका नाम भी डीजीपी के पैनल में शामिल करते हुए यूपीएससी को भेजा था। लेकिन, वह प्रतिनियुक्ति से वापस नहीं आए थे। ऐसे में सभी जरूरी अर्हताएं पूरी करने वाले अधिकारियों में एडीजी अभिनव कुमार का नंबर आ गया था। उन्होंने पिछले साल 30 नवंबर की शाम को प्रदेश के 12वें डीजीपी (कार्यवाहक) के रूप में पुलिस की कमान संभाली थी। लेकिन, पिछले दिनों फिर से डीजीपी के चयन के लिए एक पैनल यूपीएससी भेजा गया। मगर, इस पैनल में अभिनव कुमार का नाम शामिल नहीं था। यूपी की तर्ज पर डीजीपी का करने की सिफारिश पिछले दिनों कार्यवाहक डीजीपी अभिनव कुमार ने गृह सचिव को पत्र लिखकर यहां डीजीपी का चयन यूपी की तर्ज पर करने की सिफारिश की थी। उन्होंने मौजूदा उत्तराखंड पुलिस एक्ट के नियमों का हवाला भी दिया था। इसमें दो साल के लिए शासन की समिति ही डीजीपी का चयन कर सकती है। लेकिन, अब एकाएक गृह विभाग की ओर से केंद्र सरकार को शुक्रवार को पत्र लिखकर आईपीएस दीपम सेठ को वापस भेजने की मांग की थी। इस मांग को केंद्र सरकार ने भी अगले ही दिन स्वीकृत कर लिया और सेठ को शनिवार को रिलीव कर दिया गया। अब एडीजी दीपम सेठ सोमवार को दून आकर अपना मूल कैडर ज्वाइन करेंगे। सूत्रों के अनुसार ज्वाइन करने के बाद उन्हें पुलिस की कमान सौंपने की तैयारियां भी की जा रही हैं। इस संबंध में शासन स्तर पर सारी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली हैं।

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