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जंगल सफारी और नाइट स्टे के लिए जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में हो जाएं तैयार

देहरादून. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन जोन ढिकाला 15 नवंबर को पर्यटकों के लिए सुबह 6 बजे खोल दिया जाएगा। जिसके साथ ही पर्यटकों के लिए रात्रि विश्राम की सुविधा भी शुरू हो जाएगी। ढिकाला पर्यटन जोन 25 दिसंबर तक नाइट स्टे के लिए फुल हो चुका है। पर्यटकों का यह पसंदीदा जोन है। इस जोन में वन्य जीवों को देखने के साथ ही टाइगर को देखने की संभावनाएं होती हैं। कॉर्बेट के ढ़ेर सारे पर्यटन जोन में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, इनमें से ढिकाला पर्यटन जोन को इस पार्क का सबसे पसंदीदा जोन माना जाता है। इसके बाद बिजरानी जोन लोगों को खास पसंद है। बारिश की वजह से 15 जून को कॉर्बेट नेशनल पार्क के कई जोन को बंद कर दिया जाता है। जो 15 नवंबर को खुलता है। कॉर्बेट पार्क के सभी जोन में पर्यटकों ने डे विजिट और नाइट स्टे के लिए बुकिंग करवाई जाती है। ढिकाला जोन का मुख्य ढिकाला, सर्पदुली, गैरल और सुल्तान के साथ ही बिजरानी, झिरना, गर्जिया, सोना नदी, दुर्गा देवी, पाखरो और मुंडिया पानी पर्यटन रात्रि विश्राम के एडवेंचर का लुत्फ उठा सकेंगे। जीप सफारी या घूमने फिरने के लिए यात्रा jimcorbetttravels.com ऑनलाइन बुक करें। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है। कॉर्बेट अपनी बाघ समृद्धि के लिए प्रसिद्ध है। कॉर्बेट को भारत का सबसे पुराना और सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय उद्यान होने का गौरव प्राप्त है। इसमें 6 पर्यटक जोन हैं। कॉर्बेट में सबसे बड़ा और सबसे विविध जंगल सफारी क्षेत्र होने के नाते, ढिकाला अपनी प्रचुर प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपने विदेशी जीवों के लिए सर्वोत्तम दृश्य प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। इसका प्रवेश द्वार रामनगर शहर से 18 किमी दूर है। महत्वपूर्ण जानकारी कॉर्बेट पार्क के ढिकाला जोन में 30 रूम की सुविधा है। इसमें 12 डॉरमेट्री है। ढिकाला के ही गैरल में 6 कक्ष और 8 बेड की डॉरमेट्री है। सुल्तान में 2 कक्ष, मलानी में 2 कक्ष, बिजरानी जोन में 7 रूम की सुविधा है। ढेला पर्यटन जोन में 2 रूम की सुविधा है। झिरना जोन में 4 रूम,पाखरो जोन में 2 रूम हैं। सोना नदी में 2 रूम की सुविधा है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के लिए निःशुल्क होगी। जीप सफारी या घूमने फिरने के लिए यात्रा jimcorbetttravels.com ऑनलाइन बुक करें।

केंद्र सरकार का मणिपुर में हिंसा पर बड़ा फैसला, जिरीबाम समेत 6 पुलिस थाना क्षेत्रों में फिर लगा AFSPA

इंफाल केंद्र सरकार ने मणिपुर में हिंसा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. हिंसा प्रभावित जिरीबाम समेत छह पुलिस थाना क्षेत्रों में केंद्र सरकार ने सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) को फिर से लागू कर दिया है. इस अधिनियम के तहत किसी क्षेत्र को अशांत घोषित किया जाता है और सुरक्षा बलों को विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गुरुवार को अधिसूचना जारी की गई है. इस अधिसूचना में कहा गया है कि जातीय हिंसा के कारण वहां लगातार अस्थिर स्थिति है. केंद्र सरकार की ओर से इंफाल पश्चिम जिले में सेकमाई और लामसांग, इंफाल पूर्व जिले में लामलाई, जिरीबाम जिले में जिरीबाम, कांगपोकपी में लेइमाखोंग और बिष्णुपुर में मोइरांग के पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA को फिर से लागू किया गया है. गृह मंत्रालय ने मणिपुर के पांच जिलों (इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, जिरीबाम, कांगपोकपी और बिष्णुपुर) के छह पुलिस स्टेशनों में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 को तत्काल प्रभाव से 31 मार्च, 2025 तक बढ़ा दिया है. नया आदेश मणिपुर सरकार के फैसले के बाद आया है. राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर को पूरे राज्य में AFSPA लागू किया था. उसके अनुसार इन छह सहित 19 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सभी शामिल हैं. एक अक्टूबर को मणिपुर सरकार ने जारी किया था आदेश मणिपुर सरकार के 1 अक्टूबर के AFSPA लगाने के आदेश से बाहर रखे गए पुलिस स्टेशन इम्फाल, नाम्बोल, मोइरंग, काकचिंग, लाम्फाल, सिटी, सिंगजामेई, लामलाई, इरिलबंग, सेकमाई, लामसांग, पटसोई, वांगोई, पोरोमपत, हेइंगंग, लेइमाखोंग, थौबल, बिष्णुपुर और जिरीबाम आदि शामिल हैं. मणिपुर के जिरीबाम जिले में एक पुलिस स्टेशन और एक निकटवर्ती सीआरपीएफ शिविर पर छद्म वर्दी पहने और अत्याधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादियों द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी करने के बाद सोमवार को सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में ग्यारह संदिग्ध उग्रवादी मारे गए थे. एक दिन बाद, उसी जिले से सशस्त्र उग्रवादियों ने महिलाओं और बच्चों सहित छह नागरिकों का अपहरण कर लिया था. इसके बाद सशस्त्र उग्रवादियों ने दो लोगों को जलाकर मार डाला था. मणिपुर हिंसा में 200 से अधिक लोगों की हुई है मौत एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है कि जिन लोगों का अपहरण किया गया है, उनमें 13 मैतेई समुदाय से थे, और जून में अपने घरों से विस्थापित हो गए थे और अपनी सुरक्षा के लिए मुठभेड़ स्थल जकुरधोर और बोरोबेक्रा पुलिस स्टेशन में सीआरपीएफ कैंप के आसपास रह रहे थे. बता दें कि मई में पिछले साल मई से इम्फाल घाटी स्थित मैतेईस और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 200 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं. जातीय रूप से विविधतापूर्ण जिरीबाम, जो इम्फाल घाटी और आसपास की पहाड़ियों में संघर्षों से काफी हद तक अछूता रहा है, इस साल जून में एक खेत में एक किसान का क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद इस इलाके में भी हिंसा भड़क उठी है.

यूके ने कश्मीर में हिंसा और अशांति के इतिहास पर जोर दिया है और कहा है कि बहस से मौजूदा तनाव और बढ़ सकता है

नई दिल्ली ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की डिबेटिंग सोसाइटी ऑक्सफोर्ड यूनियन ने कश्मीर की आजादी पर एक कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। यह डिबेट कश्मीर के मौजूदा परिदृश्यों पर आधारित होगी। सोसायटी के मुताबिक पैनलिस्टों में जस्टिस फाउंडेशन और कश्मीर फ्रीडम मूवमेंट का नेतृत्व करने वाले डॉ. मुजम्मिल अय्यूब ठाकुर, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के डिप्लोमैटिक ब्यूरो के अध्यक्ष प्रोफेसर जफर खान और पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके प्रेम शंकर झा भी शामिल होंगे। इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में ऑक्सफोर्ड यूनियन ने बताया, “गुरुवार 14 नवंबर को हम ‘यह सदन आजाद कश्मीर में विश्वास करता है’ प्रस्ताव पर बहस की मेजबानी करेंगे। कश्मीर का मुद्दा ब्रिटिश शासन की देन है। 1947 से यहां के लोग भुगत रहे हैं। कश्मीर की आजादी के लिए लगातार संघर्ष जारी है। इससे कश्मीरियों के बीच अशांति फैली हुई है। परमाणु हथियारों से लैस भारत और पाकिस्तान इस पर नियंत्रण और भू-राजनीतिक प्रभाव के लिए होड़ करते हैं लेकिन कश्मीरियों को आजादी चाहिए। क्या एक स्वतंत्र कश्मीर इस स्थायी संकट का जवाब हो सकता है?” ऑक्सफोर्ड यूनियन ने लिखा, “प्रस्ताव के लिए सबसे पहले डॉ. मुज़म्मिल अय्यूब ठाकुर बोलेंगे। डॉ. ठाकुर कश्मीरी स्वतंत्रता कार्यकर्ता हैं जो कश्मीर पर भारतीय के तथाकथित नियंत्रण का विरोध करते हैं और जस्टिस फाउंडेशन और कश्मीर की आजादी के आंदोलन का नेतृत्व करते हैं।” वहीं प्रस्ताव के लिए दूसरे वक्ता प्रोफेसर जफर खान होंगे। जफर खान जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के डिप्लोमैटिक ब्यूरो के अध्यक्ष हैं जो जम्मू और कश्मीर के लोगों के अधिकारों की वकालत करने पर केंद्रित एक संगठन है।” पोस्ट में कहा गया है कि “विपक्ष की ओर से प्रेम शंकर झा बोलेंगे जो भारत के प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार रह चुके हैं। खबर सामने आने के बाद ब्रिटिश हिंदू का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह इनसाइट यूके ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर समूह ने लिखा, “हमने ऑक्सफोर्ड यूनियन को एक औपचारिक पत्र भेजा है जिसमें हमने बहस की मेजबानी करने के उनके निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त की है।” समूह ने आगे कहा, “आतंकवाद से कथित संबंध रखने वाले वक्ताओं को आमंत्रित करना चिंताजनक है और इस बहस की मंशा पर गंभीर सवाल उठाता है।” इनसाइट यूके ने कश्मीर में हिंसा और अशांति के इतिहास पर जोर दिया है और कहा है कि बहस से मौजूदा तनाव और बढ़ सकता है।

डिप्टी सीएम की पत्नी इंस्टाग्राम पर रील बनाएंगी और हम धर्म बचाएंगे, ऐसा नहीं होगा: कन्हैया कुमार

नागपुर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कन्हैया कुमार ने डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की पत्नी पर विवादित टिप्पणी की है। कन्हैया कुमार ने कहा कि डिप्टी सीएम की पत्नी इंस्टाग्राम पर रील बनाएंगी और हम धर्म बचाएंगे, ऐसा नहीं होगा। कन्हैया कुमार के इस बयान पर तीखा विवाद शुरू हो गया है और भाजपा ने हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि आखिर ऐसी सोच से आजादी कब मिलेगी। ऐसे छिछोरे लोगों से कांग्रेस आजादी कब पाएगी। उन्होंने कहा कि एक ऐसे शख्स ने महाराष्ट्र की बेटी के लिए घोर अपमानजनक टिप्पणी की है, जो आतंकियों और नक्सलियों का समर्थन करता है। कन्हैया कुमार ने नागपुर में कांग्रेस कैंडिडेट का प्रचार करते हुए कहा था, ‘अगर ये धर्मयुद्ध है और धर्म को बचाने का सवाल है। जो भी नेता आपके सामने धर्म बचाने का भाषण देता है, उससे आप एक सवाल पूछिए कि इस लड़ाई में आपके बेटा और बेटी भी हमारे साथ चलेंगे ना। ऐसा तो नहीं होगा कि धर्म बचाने की जिम्मेदारी हमारी और ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज में पढ़ने की जिम्मेदारी आपके बच्चों की। अगर धर्म बचाना है तो सब मिलकर बचाएंगे। ऐसा तो नहीं होगा कि हम लोग धर्म बचाएंगे और डिप्टी सीएम साहब की पत्नी इंस्टाग्राम पर रील बनाएंगी।’ दरअसल बीते सप्ताह देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव प्रचार करते हुए कहा था कि विपक्ष वोट जिहाद कर रहा है और उससे मुकाबले के लिए हमें धर्म युद्ध करना होगा। माना जा रहा है कि कन्हैया ने उसका जवाब देते हुए टिप्पणी की, लेकिन विवादित बोल गए। अब उन पर हमला बोलते हुए पूनावाला ने कहा कि नक्सली और अफजल गुरु समर्थक ने मराठी महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि अमृता फडणवीस का अपमान महाराष्ट्र की हर महिला के साथ बदसलूकी है। उन्होंने कहा कि रिजेक्टेड माल और इंपोर्टेड माल जैसी बातें करने वाले लोगों को जनता सबक सिखाएगी। बता दें कि महाराष्ट्र में 20 नवंबर को एक ही राउंड में मतदान होना है। उससे पहले राज्य में चुनाव प्रचार जोरों पर है। सूबे के चुनाव परिणाम 23 नवंबर को आने वाले हैं। बता दें कि भाजपा इस बार सबसे ज्यादा 148 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एकनाथ शिंदे सेना दूसरे नंबर पर है। कांग्रेस 104 सीटों पर चुनाव में उतरी है। 2019 के असेंबली इलेक्शन में भाजपा 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता संभाल रही अंतरिम सरकार लगातार कट्टरपंथ की ओर झुकाव

ढाका शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता संभाल रही अंतरिम सरकार लगातार कट्टरपंथ की ओर झुकाव दिखा रही है। देश की स्थापना करने वाले शेख मुजीबुर रहमान के अपमान से लेकर बंगाली राष्ट्रवाद तक से अब किनारा किया जा रहा है और पाकिस्तान की विचारधारा की तरफ झुकाव बढ़ा है। इस बीच बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि देश में सेकुलरिज्म की ही कोई जरूरत नहीं है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने ऐसा कहा है। बांग्लादेशी अखबार Prothom Alo के अनुसार हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान असदुज्जमां ने यह बात कही। उन्होंने हाई कोर्ट में देश के संविधान में 15वें संशोधन के खिलाफ दायर अर्जी पर सुनवाई के दौरान ऐसा कहा। यह संविधान संशोधन शेख हसीना सरकार के दौर में 3 जुलाई, 2011 को हुआ था। इसी संशोधन के तहत देश को सेकुलर घोषित किया गया था और शेख मुजीबुर रहमान को राष्ट्रपिता माना गया था। महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने को भी इसके तहत मंजूरी मिली थी। एक तरह से उस संविधान संशोधन को बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जाता है। अब उसे ही हटाने की तैयारी है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने अदालत में कहा कि यहां तो 90 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। फिर सेकुलरिज्म जैसी चीज की यहां क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति संविधान के अनुच्छेद VIII में सेकुलरिज्म को रखना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले तो अल्लाह पर भरोसा रखने की बात कही जाती थी। अटॉर्नी जनरल ने मोहम्मद यूनुस सरकार से अपील की है कि इस संविधान संशोधन को खत्म किया जाए और पहले वाले नियम ही लागू किए जाएं। केस की सुनवाई के दौरान बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हमारे देश का आधिकारिक धर्म तो इस्लाम ही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि देश में हिंदू समेत तमाम अल्पसंख्यक रहते हैं तो उन्हें भी अधिकार है कि वे अपने तरीके से धर्म का पालन कर सकें और पूजा-पाठ करें। हालात यह हैं कि नई सरकार अब संविधान में बंगाली राष्ट्रवाद को भी हटाने की बात कर रही है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने इसे लेकर कहा कि संविधान के आर्टिकल 9 में बंगाली राष्ट्रवाद की बात कही गई है, लेकिन यह गलत है। ऐसा करना तो उन दूसरी भाषाओं के लोगों का अपमान है, जिन्होंने स्वतंत्रता के संघर्ष में हिस्सा लिया था। इसलिए इसे हटा देना चाहिए। माना जा रहा है कि बंगाली राष्ट्रवाद की बजाय इस्लाम के आधार पर राष्ट्र की अवधारणा की ओर जाने का विचार बांग्लादेश की नई सरकार का है।

कमांडर प्रेरणा देवस्थली संभाल रहीं आईएनएस ट्रिंकट की कमान और भाई ईशान आईएनएस विभूति की कमान

नई दिल्ली इंडियन नेवी में पहली बार ऐसा हुआ है कि भाई-बहन की जोड़ी एक साथ अलग-अलग युद्धपोतों की कमान संभाल रही हैं। ये जोड़ी है कमांडर प्रेरणा देवस्थली और कमांडर ईशान देवस्थली की। कमांडर प्रेरणा देवस्थली पिछले साल भारतीय नौसेना में युद्धपोत की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनी थीं। वह अभी फास्ट अटैक क्राफ्ट आईएनएस ट्रिंकट की कमान संभाल रही हैं। उनके भाई, कमांडर ईशान देवस्थली को अब आईएनएस विभूति की कमान सौंपी गई है जो भारतीय नौसेना का वीर-श्रेणी का मिसाइल पोत है। यह एक ऐतिहासिक घटना है क्योंकि इससे पहले कभी भी भारतीय नौसेना में भाई-बहन ने एक साथ युद्धपोतों की कमान नहीं संभाली है। ये संयोग नौसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उनके योगदान को भी दिखाता है। कमांडर प्रेरणा देवस्थली को पिछले साल आईएनएस ट्रिंकट की कमान सौंपी गई थी। यह पोत भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े का हिस्सा है और बंगाल की खाड़ी में तैनात है। कमांडर ईशान देवस्थली को हाल ही में आईएनएस विभूति की कमान सौंपी गई है। यह पोत भारतीय नौसेना के पश्चिमी बेड़े का हिस्सा है और अरब सागर में तैनात है। भाई-बहन दोनों ही पश्चिमी कमान के अधीन अपने-अपने युद्धपोतों की कमान संभाल रहे हैं। दोनों ही अपने परिवार के लिए प्रेरणा हैं और देश की सेवा के लिए समर्पित हैं। आईएनएस विभूति हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अरब सागर में गोवा के तट पर दी गई स्टीम पास्ट का हिस्सा था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 7 नवंबर को नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी के साथ INS विक्रांत का दौरा किया था और भारतीय नौसेना द्वारा संचालित नौसैनिक अभियानों का प्रदर्शन देखा। अपने संबोधन में, राष्ट्रपति मुर्मू ने भारतीय नौसेना की क्षमताओं और रणनीतिक पहुंच की तारीफ की थी। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा था, ‘भारतीय नौसेना की इकाइयां अपनी क्षमताओं और रणनीतिक प्रभाव का प्रदर्शन करते हुए, विस्तृत क्षेत्रों में लंबी अवधि के लिए तैनात हैं। आपके सकारात्मक, सक्रिय और त्वरित कार्रवाइयों ने समुद्र में अनगिनत लोगों की जान बचाई है। यह मेरे लिए एक विशेष क्षण था जब इस साल की शुरुआत में बुल्गारिया के राष्ट्रपति ने एक हाईजैक किए गए जहाज से बल्गेरियाई चालक दल को बचाने के लिए कृतज्ञता जाहिर करने के लिए फोन किया था।’

गिलगित-बाल्टिस्तान में बड़ा हादसा, दूल्हा-दुल्हन समेत 26 लोगों की मौत

   गिलगित-बाल्टिस्तान दुनियाभर में अक्सर ही रोड एक्सीडेंट्स के मामले देखने को मिलते हैं। वैसे तो हर देश में रोड सेफ्टी बेहद ही अहम है, पर अक्सर ही लोगों की लापरवाही या दूसरे कारणों से रोड सेफ्टी में चूक हो जाती है और इसी वजह से रोड एक्सीडेंट्स के मामले सामने आते हैं। ऐसा ही एक हादसा मंगलवार को पाकिस्तान (Pakistan) में हुआ। पाकिस्तान में मंगलवार को एक बस भीषण हादसे का शिकार हो गई। यह बस एक्सीडेंट गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit Baltistan) के डायमेर (Diamer) जिले में यात्रियों से भरी एक बस के साथ हुआ, जब बस सिंधु नदी (Indus River) में गिर गई। बस में सवार लोग गिलगित-बाल्टिस्तान प्रांत के अस्तोर (Astore) जिले से पंजाब (Punjab) के चकवाल (Chakwal) जिले में होने वाली एक शादी में शामिल होने के लिए जा रहे थे। 26 लोगों की हुई मौत पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान में डायमेर जिले में मंगलवार को शादी में शामिल होने के लिए जा रहे यात्रियों से भरी बस के सिंधु नदी में गिरने से पहले 16 लोगों की मौत हो गई। बस में सवार अन्य यात्रियों को बचाने की कोशिश की गई, लेकिन अब मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 26 हो गया है। मरने वालों में दूल्हा और दुल्हन भी शामिल हैं। मरने वालों में 12 लोगों की तलाश अभी भी जारी है, लेकिन उन्हें मृत मान लिया गया है। किस वजह से हुआ हादसा? जानकारी के अनुसार ओवरस्पीडिंग की वजह से यह बस एक्सीडेंट हुआ। बस काफी तेज़ रफ्तार से जा रही थी और इस वजह से उसका कंट्रोल छूट गया और वो नदी में गिर गई। ड्राइवर ने बस को संभालने की काफी कोशिश की, लेकिन वह हादसे को टाल नहीं सका। बस तेज रफ्तार से चलाने के चलते हुआ हादसा अधिकारियों के अनुसार हादसा बस को तेज रफ्तार से चलाने के चलते हुआ। ड्राइवर ने बस पर से नियंत्रण खो दिया था। बस पाकिस्तान के चकवाल जिले की ओर जा रही एक शादी जुलूस का हिस्सा थी। वह डायमर जिले की सीमा पर तेलची पुल से नदी में गिर गई। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने जताया शोक हादसे पर पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने बचावकर्मियों से लापता यात्रियों को ढूंढने के प्रयास तेज करने के लिए कहा। बता दें कि खराब बुनियादी ढांचे और यातायात कानूनों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण पाकिस्तान में सड़क दुर्घटनाएं आम बात हैं। यहां अगस्त में दो अलग-अलग बस हादसों में 36 लोग मारे गए थे और दर्जनों अन्य घायल हो गए थे।

सीमा पर बनी हुई सुरक्षा चुनौतियों के बीच रक्षा मंत्रालय निगरानी हेलिकॉप्टर की खरीदी करेगा

नई दिल्ली देश की उत्तरी और पश्चिमी सीमा पर बनी हुई सुरक्षा चुनौतियों के बीच रक्षा मंत्रालय द्वारा सेना के लिए निगरानी हेलिकॉप्टर और सभी परिस्थितियों में कारगार वाहन (एटीवी) की खरीद की जाएगी। इस बाबत सूचना के लिए अनुरोध (आरएफआई) जारी किया गया है। जिसके मुताबिक उक्त रक्षा सामग्री की खरीद मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रमों के जरिए की जाएगी। साथ ही इसमें वर्ष 2020 में बनाई गई रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीएपी) के दूसरे अध्याय की श्रेणियों की भी अहम भूमिका होगी। आरएफआई निकालने के पीछे उत्पाद सेवा से जुड़ी गुणवत्ता जरूरतों को अंतिम रूप देना है।  जिसके जरिए खरीद की श्रेणी और चिन्हित भारतीय खरीदार के बारे में अंतिम निर्णय किया जाएगा। जो कि समझौते के दो वर्ष के अंदर इन सैन्य उत्पादों को अन्य जरूरी चीजों के साथ बल को सौंप देंगे। आरएफआई में इस निगरानी हेलिकॉप्टर के प्रयोग से जुड़े हुए भौगोलिक माहौल का भी जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि इसे देश की पश्चिमी सीमा पर मैदान और मरुस्थली इलाके में प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा करीब 4 हजार 500 मीटर के पहाड़ी क्षेत्र में भी यह कारगर साबित होगा। वहीं, एटीवी सेना के पैदल दस्ते को जरूरत पड़ने पर सीमा पार रणनीतिक गतिविधियों में बेहद सहायक सिद्ध होगा। इसकी मदद से सैन्य अभियानों के दौरान निगरानी, हथियारों की तैनाती के लिए मोबाइल प्लेटफार्म और लॉजिस्टिक पुन:सप्लाई में मदद मिलेगी। इसके अलावा सेना को आकाशतीर परियोजना के जरिए 107 नियंत्रण, रिपोर्टिंग सिस्टम की आपूर्ति की गई है। जबकि बाकी 105 को मार्च 2025 तक सौंपा जाएगा। इसके बाद 2027 के मध्य तक सभी सिस्टम सेना के युद्धक बेड़े में शामिल हो जाएंगे।  

अमेरिका-भारत संबंध 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण संबंध हैं, यह साझेदारी निर्धारित करेगी कि प्रकाश की सदी है या अंधकार की सदी

वाशिंटन अमेरिका के अगले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार माइक वाल्ट्ज ने इस बात पर बल दिया है कि अमेरिका-भारत संबंध 21वीं सदी के “सबसे महत्वपूर्ण” संबंध हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह साझेदारी निर्धारित करेगी कि यह प्रकाश की सदी है या अंधकार की सदी। वाल्ट्ज को निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नामित किया गया है। वाल्ट्ज ने ये टिप्पणियां सितंबर में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम’ (यूएसआईएसपीएफ) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में की थीं। उन्होंने कहा, “मेरे विचार से यह (अमेरिका-भारत) 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण संबंध है। इससे यह तय होगा कि यह प्रकाश की सदी है या अंधकार की सदी।” वह चुनाव संबंधी व्यस्तताओं के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके थे और उन्होंने सम्मेलन को वीडियो संदेश भेजा था। वाल्ट्ज, जो एक युद्ध अनुभवी और सांसद हैं, साथ ही भारत कॉकस के सह-अध्यक्ष भी हैं चीन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं, ने अमेरिका और भारत के बीच एक औपचारिक गठबंधन का प्रस्ताव भी रखा है। नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी टीम में फ्लोरिडा के सीनेटर मार्को रुबियो को विदेश मंत्री और साउथ डकोटा की गवर्नर क्रिस्टी नोएम को गृह सुरक्षा मंत्री बनाने का निर्णय लिया है। इससे स्पष्ट है कि ट्रम्प अपनी नीतियों को लागू करने के लिए अपने वफादारों पर भरोसा करेंगे, बजाय तथाकथित “डीप स्टेट” पर जो MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों के बीच अलोकप्रिय है।हालांकि ट्रम्प ने औपचारिक रूप से कोई घोषणा नहीं की है, उन्होंने यह संकेत दिया है कि एलिस स्टेफानिक को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत के रूप में नामित करेंगे। राष्ट्रपति-चुनाव की टीम से लीक हुई इन खबरों के बाद “MAGA” समर्थकों में इस फैसले को लेकर काफी उत्साह है, क्योंकि इसमें हार्डलाइनर नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, बजाय उन मुख्यधारा के रिपब्लिकन नेताओं के जिन्होंने वॉशिंगटन डीसी में लंबे समय तक नीति निर्धारण पर दबदबा बनाए रखा था। कौन हैं  माइक वाल्ट्ज  ? माइक वाल्ट्ज, 50 वर्ष के, एक पूर्व ग्रीन बेरेट अधिकारी हैं जिन्होंने अफगानिस्तान में कई युद्ध अभियानों में सेवा दी है। वाल्ट्ज, जो एक युद्ध अनुभवी और सांसद हैं, साथ ही भारत कॉकस के सह-अध्यक्ष भी हैं। वह चीन और ईरान के खिलाफ कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं और आतंकवाद विरोधी नीति पर भी उनकी मजबूत राय है। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति डिक चेनी के लिए आतंकवाद निरोधक विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया था। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी पर ट्रम्प की इच्छा के बावजूद, वाल्ट्ज ने बिना कठोर शर्तों के सैनिकों की वापसी का विरोध किया था, जिसमें एक शर्त यह थी कि राष्ट्रीय खुफिया निदेशक द्वारा यह प्रमाणित किया जाए कि तालिबान अल कायदा के साथ संबंध नहीं रखेगा। वाल्ट्ज अमेरिकी अंतरिक्ष बल कॉकस के सह-अध्यक्ष भी हैं, और उनके इस नेतृत्व से भारत-अमेरिका के अंतरिक्ष सहयोग में भी नए आयाम देखने को मिल सकते हैं। भारत के प्रति दृष्टिकोण भारत के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बात यह है कि वाल्ट्ज अमेरिका-भारत के औपचारिक गठबंधन के प्रबल समर्थक हैं, जबकि भारत इस पर थोड़ी सावधानी बरतता रहा है। उन्होंने 2021 में निक्की हेली के साथ एक लेख में लिखा कि “दुनिया में अमेरिका की स्थिति मजबूत करने के लिए हमें भारत से शुरुआत करनी चाहिए।” वाल्ट्ज और हेली ने इसे एक “समय की जरूरत” बताया। उन्होंने कहा, “भारत एक परमाणु शक्ति है, जिसके पास 10 लाख से अधिक सैनिक, एक मजबूत नौसेना, एक शीर्ष-स्तरीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, और अमेरिका के साथ आर्थिक और सैन्य सहयोग का इतिहास है। ऐसे में, भारत एक मजबूत सहयोगी बन सकता है।” जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत-अमेरिका के इस गठबंधन से आतंकवाद के खतरे को रोका जा सकेगा और चीन के खिलाफ मजबूती से खड़ा हुआ जा सकेगा।

2000 के करीब 2% नोट अभी भी रिजर्व बैंक को वापस नहीं आए, 7000 करोड़ रुपये की वैल्यू

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में ₹500 और ₹1000 के नोट बंद कर दिए थे। उनकी जगह ₹2000 का नोट लाया गया था। 19 मई 2023 को RBI ने पहली बार ₹2000 के नोट वापस लेने की घोषणा की। उस समय चलन में ₹3.56 लाख करोड़ मूल्य के ₹2000 के नोट थे। RBI ने इन्हें बैंकों और डाकघरों में बदलने की सलाह दी। RBI की घोषणा के बाद लोग अपने ₹2000 के नोट बदलने लगे। अब तक लगभग 98.04% ₹2000 के नोट वापस आ चुके हैं। ₹2000 के नोट वापस लेने पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है। बताया जा रहा है कि अभी भी लगभग ₹6,970 करोड़ मूल्य के नोट चलन में हैं। इन्हें भी वापस लेने के लिए RBI ने एक और मौका दिया है। जिन लोगों के पास अभी भी ₹2000 के नोट हैं, वे उन्हें RBI कार्यालयों में बदल सकते हैं। इसके अलावा, इन्हें डाकघर के माध्यम से RBI के क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजकर भी बदला जा सकता है।  साल 2016 में नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट जारी किए थे। लेकिन पिछले साल रिजर्व बैंक ने इस नोट को चलन से बाहर कर दिया था। बैंक ने कहा था कि जिनके भी पास ये नोट हैं, उन्हें बदल लें। रिजर्व बैंक ने  इन नोटों को लेकर डेटा जारी किया। इस डेटा के मुताबिक 19 मई 2023 तक प्रचलन में रहे 2000 रुपये के नोटों में से करीब 98 फीसदी नोट अब वापस आ चुके हैं। वहीं करीब 2 फीसदी नोट अब भी प्रचलन में हैं। 19 मई 2023 को कारोबार बंद होने पर जब 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने की घोषणा की गई थी, तब प्रचलन में इन नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था। करीब जो दो फीसदी नोट अभी भी प्रचलन में हैं, उनकी वैल्यू करीब 7 हजार करोड़ रुपये है। यानी से नोट अभी भी लोगों के पास हो सकते हैं।बैंकों के मर्जर की तैयारी, 43 से घटकर रह जाएंगे 28, जानिए क्या है सरकार का प्लान क्या बेकार हो गए हैं 2000 के नोट? रिजर्व बैंक अब 2000 के नोटों को प्रचलन से बाहर कर चुका है। रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को घोषणा की थी कि 2000 रुपये के नोट अब प्रचलन में नहीं रहेंगे। लेकिन जिनके पास भी ये नोट हैं, वे 7 अक्टूबर 2023 तक किसी भी बैंक में जाकर अपने अकाउंट में जमा कर सकते हैं। ऐसे में लोगों के दिमाग में सवाल है कि जिनके पास अभी भी ये नोट हैं, क्या वे अब बेकार हो गए हैं। दरअसल, ये नोट अब बाजार में चलन में नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों के पास अभी भी ये नोट बचे हैं, वे रिजर्व बैंक जाकर अपने बैंक अकाउंट में जमा करवा सकते हैं। नोटबंदी के समय हुई थी शुरुआत 2000 के नोट रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के समय शुरू किए थे। दरअसल, नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 के नोट को बंद कर दिया गया था। ऐसे में लोगों की पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक ने 2000 के नोट जारी किए थे। हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद रिजर्व बैंक ने साल 2018-19 में इन नोटों की छपाई बंद कर दी थी। बाद में इनकाे प्रचलन से बाहर कर दिया। कैसे बदलें 2000 के नोट? अगर अभी भी आपके पास 2000 के नोट हैं तो उन्हें दिल्ली स्थित रिजर्व बैंक में जाकर बदला जा सकता है। इस दौरान ओरिजिनल आधार कार्ड और इसकी फोटो कॉपी ले जाना न भूलें। वहीं अगर कुल रकम 50 हजार रुपये से ज्यादा है तो ओरिजिनल पैन कार्ड और इसकी फोटो कॉपी भी जरूर लेकर जाएं।

उपचुनाव के बीच कोलकाता से सटे उत्तर 24 परगना जिले में TMC नेता की हत्या

कोलकाता पश्चिम बंगाल की 6 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है। उपचुनाव के बीच कोलकाता से सटे उत्तर 24 परगना जिले में बड़ी घटना घटी है। जगदल इलाके में टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। अज्ञात बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया है। टीएमसी नेता की हत्या के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस थाने से 100 मीटर दूर हुई हत्या पुलिस ने इस बारे में जानकारी दी है। मृतक की पहचान जगदल के वॉर्ड नंबर 12 से टीएमसी के पूर्व अध्यक्ष अशोक शा के रूप में हुई है। जगदल थाने से कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित एक चाय की दुकान के सामने खड़े अशोक पर बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई। बदमाशों ने टीएमसी नेता पर बम भी फेंके थे। हत्यारों की तलाश में जुटी पुलिस पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अशोक को निकटवर्ती भाटपाड़ा सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि हमले में कुछ अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। हत्या के बाद गुस्साए लोगों का प्रदर्शन बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट के आयुक्त आलोक राजोरिया भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। राजोरिया ने संवाददाताओं को बताया कि हमने जांच शुरू कर दी है। संदिग्धों से पूछताछ शुरू हो चुकी है। हमें इस हत्या में अब तक कोई राजनीतिक संबंध नहीं मिला है। इस हत्या के बाद स्थानीय लोगों ने जगदल थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। तृणमूल ने हत्या के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, भाजपा ने आरोपों को खारिज किया है।

पुणे में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के बैग की जांच की, आज सीएम एकनाथ शिंदे के बैग की भी जांच हुई

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत तीन नेताओं के बैग की आज अधिकारियों ने जांच की। यह घटना उद्धव ठाकरे के बैग की जांच को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच हुई है। उद्धव ठाकरे के बैग की सोमवार को यवतमाल जिले में और मंगलवार को लातूर में दो बार जांच की गई थी। इसके बाद उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इनके बैग की भी हुई जांच बता दें कि महाराष्ट्र के पालघर में सीएम एकनाथ शिंदे के बैग की जांच की गई। जबकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने पुणे में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के बैग की जांच की और चुनाव प्रचार के लिए जाते समय EC के अधिकारियों ने अजीत पवार के बैग की भी जांच की। सीएम शिंदे के बैग की जांच में पानी की बोतल, नींबू पानी, दूध-छाछ और कुछ कपड़े मिले। अजीत पवार के बैग में नमकीन, बिस्कुट, लड्डू और कपड़े मिले, जबकि रामदास अठावले के विमान में कुछ नहीं था।

हाईकोर्ट ने CPS कानून को किया निरस्त, सरकार को झटका, 6 मुख्य संसदीय सचिव हटाए गए

शिमला हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बनाए मुख्य संसदीय सचिव अब नहीं रहेंगे। हाईकोर्ट ने सरकार के इन सभी संसदीय सचिवों को तुरंत प्रभाव से पद से हटाने के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद वर्तमान सरकार में कार्य कर रहे छह मुख्य संसदीय सचिवों को अपना पद व सुविधाएं छोड़नी होंगी। जस्टिस विवेक ठाकुर और बीसी नेगी की हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि इन सीपीएस की सभी सुविधाएं और विशेषाधिकार तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए जाएं। कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ता, शक्तियां, विशेषाधिकार और संशोधन) अधिनियम, 2006 को शून्य घोषित कर दिया। सार्वजनिक संपत्ति पर किया कब्जा जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ये पद सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा करते हैं और सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से वापस ली जानी चाहिए।मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 8 जनवरी, 2023 को कैबिनेट विस्तार से पहले छह सीपीएस-अर्की विधानसभा से संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह, दून से राम कुमार, रोहड़ू से मोहन लाल बराकटा, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल को नियुक्त किया था। ये भर्ती 2006 के अधिनियम के अनुसार की गई: बीजेपी एडवोकेट मुख्य संसदीय सचिवों की भर्ती पर हाईकोर्ट के आदेश पर भाजपा के वकील एडवोकेट वीरबहादुर वर्मा ने कहा कि सतपाल सती के नेतृत्व में 10 भाजपा विधायकों ने सीपीएस की भर्ती को कोर्ट में चुनौती दी थी। यह भर्ती 2006 के अधिनियम के अनुसार की गई थी। कोर्ट ने माना है कि 2006 का अधिनियम असंवैधानिक था। हाईकोर्ट ने सीपीएस सुविधाओं को तुरंत वापस लेने का भी आदेश दिया है। अगर दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला करता है, तो उन्हें वहां भी कोई राहत नहीं मिलेगी, अधिनियम निरस्त कर दिया गया है। जयराम ठाकुर ने दी प्रतिक्रिया सीपीएस के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी पहले दिन से ही सीपीएस बनाने के फैसले के खिलाफ थी क्योंकि यह असंवैधानिक था और यह संविधान के विरुद्ध निर्णय था। उन्होंने कहा कि जब 2017 में हम सरकार में थे तो हमारे समय भी यह प्रश्न आया था। तो हमने इसे पूर्णतया असंवैधानिक बताते हुए सीपीएस की नियुक्ति नहीं की थी। आज हाईकोर्ट द्वारा फिर से सरकार के तानाशाही पूर्ण और असंवैधानिक फैसले को खारिज कर दिया। हम मांग करते हैं कि इस पद का लाभ लेने वाले सभी विधायकों की सदस्यता भी समाप्त हो।

अमित शाह ने कहा- इंदिरा भी स्वर्ग से लौट आएं तो नहीं ला पाएंगी आर्टिकल 370, औरंगजेब फैन क्लब बना MVA

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करते हुए होम मिनिस्टर अमित शाह ने महाविकास अघाड़ी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महा विकास अघाड़ी गठबंधन ‘औरंगजेब फैन क्लब’ में तब्दील होता जा रहा है, भाजपा का महायुति गठबंधन शिवाजी महाराज और सावरकर के आदर्शों पर चल रहा है। यही नहीं इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आर्टिकल 370 बहाली की मांग को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। अमित शाह ने कहा, ‘इंदिरा गांधी भी स्वर्ग से लौट आएं, तब भी कश्मीर में अनुच्छेद 370 बहाल नहीं किया जाएगा।’ राहुल गांधी पर तंज कसते हुए शाह ने कहा कि आपकी चौथी पीढ़ी आ जाए, तब भी मुसलमानों के लिए कोई आरक्षण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मैंने पूरे महाराष्ट्र का दौरा किया है और विश्वास के साथ कह सकता हूं कि 20 नवंबर को विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति को सफलता मिलेगी। महाराष्ट्र की ‘लाडली बहनें’ भाजपा के साथ हैं। होम मिनिस्टर ने कहा कि महायुति की सरकार बनेगी और विधानसभा में उसे अब तक की सर्वाधिक सीटें मिलेंगी। अमित शाह ने कहा कि सुशील कुमार शिंदे गृह मंत्री रहते समय श्रीनगर स्थित लाल चौक जाने में डरते थे; उन्हें अब अपने नाती-पोतों के साथ वहां जाना चाहिए, वे सुरक्षित रहेंगे। अमित शाह ने कहा, ‘सोनिया-मनमोहन की सरकार के 10 साल के दौरान पाकिस्तान से आतंकवादी आते थे और यहां बम विस्फोट करते थे। इन लोगों ने वोट बैंक की राजनीति के लिए नक्सलवाद और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। होम मिनिस्टर बोले कि राहुल गांधी को यह याद रखना चाहिए कि अगर उनकी ‘चौथी पीढ़ी’ भी आ जाए तो वह भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण काटकर मुसलमानों को नहीं दे सकतीं। कुछ दिन पहले उमेला समूह के लोग महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष से मिले और कहा कि मुसलमानों को आरक्षण देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर मुसलमानों को आरक्षण देना है तो एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण काट कर देना पड़ेगा। अरे राहुल बाबा (राहुल गांधी), आप तो क्या आपकी चार पीढ़ियां भी एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण काटकर मुसलमानों को नहीं दे सकतीं।’ शाह ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 को कभी बहाल नहीं किया जाएगा, चाहे कुछ भी हो जाए। उन्होंने कहा, ‘अगर इंदिरा गांधी स्वर्ग से वापस आ भी जाती हैं तो भी अनुच्छेद 370 को बहाल नहीं किया जाएगा।’

अवैध रूप से रह रहे 13 बांग्लादेशी घुसपैठियों को रत्नागिरी जिले में हुए गिरफ्तार

मुंबई रत्नागिरी जिले के नखरे कालाकोंड तहसील के चिरेखानी इलाके में अवैध रूप से रह रहे 13 बांग्लादेशी घुसपैठियों को स्थानीय पुलिस के सहयोग से एंटी टेररिस्ट स्कॉड (एटीएस) की टीम ने गिरफ्तार किया है। ये सभी पिछले छह महीने से नखरे इलाके में रह रहे थे। पूर्णागढ़ पुलिस स्टेशन की टीम इनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस अधीक्षक धनंजय कुलकर्णी के अनुसार रत्नागिरी एटीएस टीम को कालराकोंडा तहसील के चिरेखानी इलाके में बांग्लादेशियों के छिप कर रहने की गोपनीय जानकारी मिली थी। इसके आधार पर मंगलवार को चिरेखानी में अचानक छापा मारकर इन सभी को गिरफ्तार कर लिया है। छानबीन में पता चला है कि यह सभी जून 2024 से बिना वैध दस्तावेजों के चिरेखानी में रह रहे थे। गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान वाहिद रियाज़ सरदार (35), रिज़ुल हुसैन करिकर (50), शरीफुल हौजिर सरदार (28), फारूक मुहम्मद ज़हीर अली मुल्ला (50), हामिद मुस्तफा मुल्ला (45), राजू अहमद हजरतली शेख (31), बाकिबिल्लाह अमीर हुसैन सरदार (39), सईदुर रहमान मुबारक अली (34), आलमगीर हुसैन हीरा पुत्र अब्दुल कादर दलाल (34), मोहम्मद शाहीन सरदार पुत्र समद सरदार (32), मोहम्मद नुरुज़मान मोरोल पुत्र विलायत अली (38), मोहम्मद नूरहसन सरदार पुत्र मोहम्मद जाहर सरदार (45) और किताब अली (37) के बेटे मोहम्मद लालू मंडल के रूप में की गई है। ये सभी बांग्लादेश के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं। इन सभी के खिलाफ पासपोर्ट की धारा 14, भारत में प्रवेश नियम 1950 सहित नियम 6, विदेशी नागरिक आदेश 1948 पैरा.3(1)(ए), विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में आगे की जांच पूर्णागढ़ पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस निरीक्षक रत्नदीप सलोखे कर रहे हैं।  

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